আল মুসনাদুল জামি`
7703 - عَنْ يُونُسَ بْنِ جُبَيْرٍ قَالَ قُلْتُ لاِبْنِ عُمَرَ رَجُلٌ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهْىَ حَائِضٌ فَقَالَ أَتَعْرِفُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ؟
فَإِنَّهُ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهْىَ حَائِضٌ فَأَتَى عُمَرُ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم فَسَأَلَهُ فَأَمَرَهُ أَنْ يَرْجِعَهَا ثُمَّ تَسْتَقْبِلَ عِدَّتَهَا.
قَالَ فَقُلْتُ لَهُ إِذَا طَلَّقَ الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ وَهْىَ حَائِضٌ أَتَعْتَدُّ بِتِلْكَ التَّطْلِيقَةِ فَقَالَ فَمَهْ أَوَإِنْ عَجَزَ وَاسْتَحْمَقَ.
أخرجه أحمد 2/ 43 (5025) قال: حدثنا مُحَمَّد بن جعفر، وعَبد الله بن بكر. قالا: حدثنا سعيد، عن قتادة. وفي 2/ 51 (5121) قال: حدَّثنا إسماعيل، عن يونس، عن مُحَمَّد بن سيرين. وفي 2/ 74 (5433) قال: حدثنا بَهْز، حدثنا شُعبة، حدثنا قتادة. وفي 2/ 79 (5504) قال: حدثنا مُحَمَّد بن جعفر، حدثنا شعبة، عن قتادة. و`البُخَارِي` 7/ 52 (5252) قال: حدثنا سليمان بن حرب، حدثنا شعبة، عن قتادة. وفي 7/ 53 (5258) قال: حدثنا حجاج بن مِنْهال، حدثنا هَمّام بن يحيى، عن قتادة. وفي 7/ 67 (5333) قال: حدَّثنا حجاج، حدثنا يزيد بن إبراهيم، حدثنا مُحَمَّد بن سيرين. و`مسلم` 4/ 181 (3652) قال: وحدثني علي بن حجر السعدي، حدثنا إسماعيل بن إبراهيم، عن أيوب، عن ابن سيرين. وفي (3653) قال: وحدثنا أبو الربيع، وقتيبة. قالا: حدثنا حماد، عن أيوب، بهذا الإسناد. وفي (3654) قال: وحدثنا عبد الوارث بن عبد الصمد، حدثني أبي، عن جدي، عن أيوب، بهذا الإسناد. وفي 4/ 182 (3655) قال: وحدثني يعقوب بن إبراهيم الدورقي، عن ابن علية، عن يونس، عن مُحَمَّد بن سيرين. وفي (3656) قال: حدثنا مُحَمَّد بن الُمثنى، وابن بشار. قال ابن المثنى: حدثنا مُحَمَّد بن جعفر، حدثنا شعبة، عن قتادة. و`أبو داود` 2184 قال: حدَّثنا القعنبي، حدثنا يزيد، يعني ابن إبراهيم، عن مُحَمَّد بن سيرين. و`ابن ماجة` 2022 قال: حدَّثنا نصر بن علي الجهضمي، حدثنا عبد الأعلى، حدثنا هشام، عن مُحَمَّد. والتِّرْمِذِيّ` 1175 قال: حدَّثنا قتيبة، حدثنا حماد بن زيد، عن أيوب، عن مُحَمَّد بن سيرين. و`النَّسائي` 6/ 141، وفي `الكبرى` 5562 قال: أخبرنا قتيبة. قال: حدَّثنا حماد، عن أيوب، عن مُحَمَّد. وفي 6/ 141، وفي `الكبرى` 5563 قال: أخبرنا يعقوب بن إبراهيم. قال: حدَّثنا ابن علية، عن يونس، عن مُحَمَّد بن سيرين. وفي 6/ 212، وفي `الكبرى` 5718 قال:
أخبرنا مُحَمَّد بن المثنى. حدثنا مُحَمَّد. قال: حدثنا شعبة، عن قتادة
كلاهما (قتادة، وابن سيرين) عن أبي غلاب يونس بن جبير، فذكره.
- أخرجه أبو داود (2183) قال: حدثنا الحسن بن علي، حدثنا عبد الرزاق، عن مَعْمر، عن أيوب، عن ابن سيربن. قال: مكثت عشرين سنة أسمع ان ابن عمر طلق امرأته التي طلق، على عهد رسول الله صلى الله عليه وسلم، وهي حائض ثلاثا، حتى أخبرني يونس بن
جبير أنه سأله. فقال: كم كنت طلقت امرأتك على عهد النبي صلى الله عليه وسلم؟ فقال: واحدة.
আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, ইউনুস ইবনে জুবাইর বলেন: আমি ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞেস করলাম যে, কোনো ব্যক্তি যদি তার স্ত্রীকে ঋতু অবস্থায় তালাক দেয় (তবে তার বিধান কী)?
তিনি (ইবনে উমর) বললেন: তুমি কি আবদুল্লাহ ইবনে উমরকে চেন? সে তার স্ত্রীকে ঋতু অবস্থায় তালাক দিয়েছিল। অতঃপর উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে তাঁকে জিজ্ঞাসা করলেন। তখন তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ইবনে উমরকে নির্দেশ দিলেন যেন সে তাকে ফিরিয়ে নেয় এবং (ঋতু শেষ হওয়ার পর পবিত্র হওয়ার পর) সে যেন নতুন করে তার ইদ্দত (তালাকের অপেক্ষাকাল) শুরু করে।
ইউনুস ইবনে জুবাইর বলেন, আমি তাঁকে (ইবনে উমরকে) পুনরায় জিজ্ঞেস করলাম: যখন কোনো ব্যক্তি তার স্ত্রীকে ঋতু অবস্থায় তালাক দেয়, তখন কি সেই তালাক (ইদ্দতের ক্ষেত্রে) গণ্য হবে?
তিনি (ইবনে উমর) জবাব দিলেন: তাতে কী আসে যায়? যদি সে অক্ষমতা দেখায় এবং বোকামি করে (তবেও কি তালাক কার্যকর হবে না)?
7704 - عن أَبِي الزُّبَيْرِ أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ أَيْمَنَ مَوْلَى عُرْوَةَ يَسْأَلُ ابْنَ عُمَرَ وَأَبُو الزُّبَيْرِ يَسْمَعُ قَالَ كَيْفَ تَرَى فِى رَجُلٍ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ حَائِضًا قَالَ:
طَلَّقَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ امْرَأَتَهُ وَهِىَ حَائِضٌ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَسَأَلَ عُمَرُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ إِنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهِىَ حَائِضٌ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ فَرَدَّهَا عَلَىَّ وَلَمْ يَرَهَا شَيْئًا وَقَالَ إِذَا طَهُرَتْ فَلْيُطَلِّقْ أَوْ لِيُمْسِكْ.
قَالَ ابْنُ عُمَرَ وَقَرَأَ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم (يَا أَيُّهَا النَّبِىُّ إِذَا طَلَّقْتُمُ النِّسَاءَ فَطَلِّقُوهُنَّ) فِى قُبُلِ عِدَّتِهِنَّ).
- رواية أحمد (5269 و 6246) مختصرة على آخر الحديث ، في القراءة.
أخرجه أحمد 2/ 61 (5269) و 2/ 80 (5524) قال: حدثنا روح بن عُبادة. وفي 2/ 139 (6246) قال: حدثنا حجاج، وعبد الرزاق. و`مسلم` 4/ 183 (3661) قال: حدثني هارون بن عبد الله، حدثنا حجاج بن مُحَمَّد. وفي (3662) قال: وحدثني هارون بن عبد الله، حدثنا أبو عاصم. وفي (3663) قال: وحدثنيه مُحَمَّد بن رافع، حدثنا عبد الرزاق. و`أبو داود` 2185 قال: حدثنا أحمد بن صالح، حدثنا عبد الرزاق. و`النَّسائي` 6/ 139، وفي `الكبرى` 5555 قال: أخبرني مُحَمَّد بن إسماعيل بن إِبراهيم، وعبد الله بن مُحَمَّد بن تميم، عن حجاج.
أربعتهم (عبد الرزاق، روح بن عُبادة، وحجاج، وأبو عاصم) عن ابن جُريج، أخبرني أبو الزبير، أنه سمع عبد الرحمن بن أيمن، مولى عروة، فذكره.
- قال مُسْلِم: أخطأ حيث قال (عروة) إنما هو (مولى عزة.
- قَالَ أَبُو دَاوُدَ: رَوَى هَذَا الْحَدِيثَ عَنِ ابْنِ عُمَرَ يُونُسُ بْنُ جُبَيْرٍ وَأَنَسُ بْنُ سِيرِينَ وَسَعِيدُ بْنُ جُبَيْرٍ وَزَيْدُ بْنُ أَسْلَمَ وَأَبُو الزُّبَيْرِ وَمَنْصُورٌ عَنْ أَبِى وَائِلٍ مَعْنَاهُمْ كُلُّهُمْ أَنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَهُ أَنْ يُرَاجِعَهَا حَتَّى تَطْهُرَ ثُمَّ إِنْ شَاءَ طَلَّقَ وَإِنْ شَاءَ أَمْسَكَ.
وَكَذَلِكَ رَوَاهُ مُحَمَّد بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ سَالِمٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ.
وَأَمَّا رِوَايَةُ الزُّهْرِىِّ عَنْ سَالِمٍ وَنَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ أَنَّ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَهُ أَنْ يُرَاجِعَهَا حَتَّى تَطْهُرَ ثُمَّ تَحِيضَ ثُمَّ تَطْهُرَ ثُمَّ إِنْ شَاءَ طَلَّقَ وَإِنْ شَاءَ أَمْسَكَ.
وَرُوِىَ عَنْ عَطَاءٍ الْخُرَاسَانِىِّ عَنِ الْحَسَنِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ نَحْوُ رِوَايَةِ نَافِعٍ وَالزُّهْرِىِّ وَالأَحَادِيثُ كُلُّهَا عَلَى خِلَافِ مَا قَالَ أَبُو الزُّبَيْرِ.
আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবু যুবাইর (রাহিমাহুল্লাহ) বর্ণনা করেন যে, তিনি উরওয়ার আযাদকৃত গোলাম আবদুর রহমান ইবনে আইমানকে ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞাসা করতে শুনেছেন— আবু যুবাইরও শুনছিলেন— (আবদুর রহমান) বললেন: কোনো ব্যক্তি যদি তার স্ত্রীকে হায়িয অবস্থায় তালাক দেয়, সে সম্পর্কে আপনি কী মনে করেন?
ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: আমি আবদুল্লাহ ইবনে উমর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে তাঁর স্ত্রীকে হায়িয অবস্থায় তালাক দিয়েছিলাম। তখন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে জিজ্ঞাসা করলেন এবং বললেন যে, আবদুল্লাহ ইবনে উমর তার স্ত্রীকে হায়িয অবস্থায় তালাক দিয়েছে। আবদুল্লাহ (ইবনে উমর) বললেন: তখন তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) স্ত্রীকে আমার কাছে ফিরিয়ে দিলেন এবং সেটিকে (তালাকটিকে) কোনো কিছু (ধর্তব্য) মনে করলেন না। তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: যখন সে পবিত্র হবে, তখন হয় সে তালাক দেবে অথবা তাকে রেখে দেবে (তালাক না দিয়ে রাখবে)।
ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, আর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এই আয়াতটি পাঠ করলেন: "হে নবী! যখন তোমরা স্ত্রীদের তালাক দেবে, তখন তোমরা তাদের ইদ্দতের সূচনায় তালাক দেবে।" (সূরা তালাক: ১-এর অংশবিশেষ)
7705 - عن طَاوُوسٍ أَنَّهُ سَمِعَ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ يُسْأَلُ عَنْ رَجُلٍ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ حَائِضًا فَقَالَ أَتَعْرِفُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ قَالَ نَعَمْ. قَالَ:
فَإِنَّهُ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ حَائِضًا فَأَتَى عُمَرُ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم فَأَخْبَرَهُ الْخَبَرَ فَأَمَرَهُ أَنْ يُرَاجِعَهَا حَتَّى تَطْهُرَ.
وَلَمْ أَسْمَعْهُ يَزِيدُ عَلَى هَذَا.
أخرجه أحمد 2/ 145 (6329) قال: حدثنا عبد الرزاق، وروح. و`مسلم` 4/ 183 (3660) قال: حدثنا إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا عبد الرزاق. و`النَّسائي` 6/ 213، وفي `الكبرى` 5722 قال: أخبرنا عَمرو بن علي. قال: حدثنا أبو عاصم.
ثلاثتهم (عبد الرزاق، وروح، وأبو عاصم) عن ابن جُريج، أخبرني ابن طاووس، عن أبيه، فذكره.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাউস (রাহিমাহুল্লাহ) তাকে এমন এক ব্যক্তি সম্পর্কে প্রশ্ন করতে শুনেন, যে তার স্ত্রীকে ঋতুস্রাব চলাকালীন তালাক দিয়েছিল। তিনি [আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)] বললেন: "তুমি কি আব্দুল্লাহ ইবনে উমরকে চেন?" সে বলল: "হ্যাঁ।" তিনি বললেন: "নিশ্চয়ই সে [অর্থাৎ আমি] তার স্ত্রীকে ঋতুস্রাব চলাকালীন তালাক দিয়েছিল। তখন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এলেন এবং তাঁকে বিষয়টি অবহিত করলেন। অতঃপর তিনি [নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)] তাকে [আব্দুল্লাহ ইবনে উমরকে] আদেশ করলেন যেন সে তাকে [স্ত্রীকে] ফিরিয়ে নেয়, যতক্ষণ না সে পবিত্র হয়। তাউস বলেন, আমি তাকে [আব্দুল্লাহ ইবনে উমরকে] এর বেশি কিছু বলতে শুনিনি।
7706 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ؛
أَنَّهُ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهِىَ حَائِضٌ فَرَدَّهَا عَلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حَتَّى طَلَّقَهَا وَهِىَ طَاهِرٌ.
أخرجه النسائي 6/ 141، وفي `الكبرى` 5561 قال: أخبرني زياد بن أيوب ، قال: حدثنا هُشيم. قال: أخبرنا أبو بشر، عن سعيد بن جبير، فذكره.
- وأخرجه البخاري 7/ 53 (5253) قال: قال أبو معمر: حدثنا عبد الوارث، حدثنا أيوب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عمر. قال: حسبت علي بتطليقة.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর স্ত্রীকে হায়িয অবস্থায় তালাক দিয়েছিলেন। তখন রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে (স্ত্রীকে) ফিরিয়ে নিতে বললেন, যতক্ষণ না তিনি তাকে পবিত্র অবস্থায় তালাক দেন।
7707 - عن عَبْدُ اللَّهِ بْنُ دِينَارٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ؛
أَنَّهُ طَلَّقَ امْرَأَتَهُ وَهْىَ حَائِضٌ فَسَأَلَ عُمَرُ عَنْ ذَلِكَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ مُرْهُ فَلْيُرَاجِعْهَا حَتَّى تَطْهُرَ ثُمَّ تَحِيضَ حَيْضَةً أُخْرَى ثُمَّ تَطْهُرَ ثُمَّ يُطَلِّقَ بَعْدُ أَوْ يُمْسِكَ.
أخرجه مُسْلِم 4/ 181 (3651) قال: حدثني أحمد بن عثمان بن حكيم الأودي، حدثنا خالد بن مَخْلد، حدثني سليمان، وهو ابن بلال، حدثني عبد الله بن دينار، فذكره.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর স্ত্রীকে হায়িয (মাসিক) অবস্থায় তালাক দিয়েছিলেন। অতঃপর উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এ বিষয়ে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জিজ্ঞাসা করলেন। তখন তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: তাকে আদেশ করো, সে যেন তাকে ফিরিয়ে নেয় (রাজ’আত করে) যতক্ষণ না সে পবিত্র হয়, তারপর সে যেন আরেকবার হায়িযগ্রস্ত হয় এবং আবার পবিত্র হয়। এরপর সে তালাক দিতে পারে অথবা তাকে রেখেও দিতে পারে।
7708 - عَنْ مُحَارِبِ بْنِ دِثَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
أَبْغَضُ الْحَلَالِ إِلَى اللَّهِ الطَّلَاقُ.
أخرجه أبو داود (2178) قال: حدثنا كثير بن عُبيد، حدثنا مُحَمَّد بن خالد، عن مُعَرِّف بن واصل. و (اابن ماجة) 2018 قال: حدثنا كثيربن عُبيد الحميد، حدثنا مُحَمَّد بن خالد، عن عُبيد اللهّ بن الوليد الوَصَّافي.
كلاهما (مُعَرِّف بن واصل، وعُبيد الله بن الوليد) عن محارب بن دثار، فذكره.
- أخرجه أبو داود 2177 قال: حدثنا أحمد بن يونس ، قال: حدثنا مُعَرِّف، عن محارب بن دثار. قَالَ: قَالَ رَسُولُ الله صلى الله عليه وسلم:
ليس شيء ممَا أحَلَّ الله أبْغَضَ إِلَيْهِ مِنَ الطَلَاقِ.
- لفظ أحمد بن يونس: ما أحل الله شيئا أبغض إليه من الطلاق. مرسل.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আল্লাহর নিকট হালাল বস্তুর মধ্যে সবচেয়ে বেশি ঘৃণিত হলো তালাক।
7709 - عَنْ عَطِيَّةَ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
طَلَاقُ الأَمَةِ اثْنَتَانِ وَعِدَّتُهَا حَيْضَتَانِ.
أخرجه ابن ماجة (2079) قال: حدثنا مُحَمَّد بن طَريف، وإبراهيم بن سعيد الجوهري، قالا: حدثنا عُمر بن شَبيب الُمسْلي، عن عبد الله بن عيسى، عن عطية، فذكره.
- أخرجه مالك `الموطأ` 1675 عن نافع، أن عبد الله بن عمر كان يقول: إذا طلق العبد امرأته تليقطين، فقد حرمت عليه، حتى تنكح زوجا غيره، حرة كانت أو أمة، وعدة الحرة ثلاث حيض، وعدة الأمة حيضتان. (موقوف.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: দাসীর তালাক হলো দু'টি এবং তার ইদ্দত হলো দু'টি ঋতুস্রাব।
7710 - عَنْ حَمْزَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ:
كَانَتْ تَحْتِى امْرَأَةٌ وَكُنْتُ أُحِبُّهَا وَكَانَ عُمَرُ يَكْرَهُهَا فَقَالَ لِى طَلِّقْهَا فَأَبَيْتُ فَأَتَى عُمَرُ النَّبِىَّ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ ذَلِكَ لَهُ فَقَالَ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم طَلِّقْهَا.
أخرجه أحمد 2/ 20 (4711) قال: حدثنا يحيى. وفي 2/ 42 (5011) قال: حدثنا يزيد. وفي 2/ 53 (5144) قال: حدثنا عبد الملك بن عَمرو. وفي 2/ 157 (6470) قال عبد الله بن أحمد: قرأت على أبي: حدثنا حَمَّاد، يعني الخياط. و`عَبد بن حُميد` 835 قال: حدثنا عبد الملك بن عَمرو. و`أبو داود` 5138 قال: حدثنا مُسَدد، حدثنا يحيى. و (اابن ماجة) 2088 قال: حدثنا مُحَمَّد بن بشار، حدثنا يحيى بن سعيد القطان، وعثمان بن عُمر. والتِّرْمِذِيّ` 1189 قال: حدثنا أحمد بن مُحَمَّد،
أنبأنا ابن الُمبارك. و`النَّسائي` عن إسماعيل بن مسعود، عن خالد بن الحارث.
سبعتهم (يحيى بن سعيد القطان، ويزيد بن هارون، وعبد الملك بن عَمرو، وحماد، وعثمان بن عُمر، وابن المبارك، وخالد بن الحارث) عن ابن أبي ذئب، عن خاله الحارث بن عبد الرحمن، عن حمزة بن عبد الله بن عمر، فذكره.
আব্দুল্লাহ ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমার বিবাহে একজন স্ত্রী ছিল এবং আমি তাকে ভালোবাসতাম। কিন্তু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাকে অপছন্দ করতেন। তিনি আমাকে বললেন, তুমি তাকে তালাক দাও। কিন্তু আমি তা অস্বীকার করলাম। অতঃপর উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এলেন এবং তাঁর কাছে বিষয়টি উল্লেখ করলেন। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, তুমি তাকে তালাক দাও।
7711 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ ،
عَنِ النَّبِىِّ صلى الله عليه وسلم فِى الرَّجُلِ تَكُونُ لَهُ الْمَرْأَةُ يُطَلِّقُهَا ثُمَّ يَتَزَوَّجُهَا رَجُلٌ آخَرُ فَيُطَلِّقُهَا قَبْلَ أَنْ يَدْخُلَ بِهَا فَتَرْجِعَ إِلَى زَوْجِهَا الأَوَّلِ قَالَ لَا حَتَّى تَذُوقَ الْعُسَيْلَةَ.
أخرجه أحمد 2/ 85 (5571)، وابن ماجة (1933) قال: حدثنا مُحَمَّد بن بشار. و`النَّسائي` 6/ 148، وفي `الكبرى` 5577 قال: أخبرنا عَمرو بن علي.
ثلاثتهم (أحمد بن حنبل، وابن بشار، وعَمرو بن علي) قالوا: حدثنا مُحَمَّد بن جعفر، حدثنا شُعبة، عن علقمة بن مرثد، سَمِعْتُ سالم بن رزين، يحدث عن سالم بن عبد الله، يعني ابن عمر، عن سعيد بن المسيب، فذكره.
- أخرجه أحمد 2/ 25 (4776) و 2/ 62 (5278) قال: حدَّثناه أبو أحمد، يعني الزبيري ، عن سُفْيان الثوري، عن علقمة بن مرثد، عن سليمان بن رزين، عن ابن عمر. قال:
سئل رسول الله صلى الله عليه وسلم، وهو على المنبر، عن رجل طلق امرأته، ثم نكحت رجلا، فأرخى الستر، وكشف الخمار، وأغلق الباب، هل تحل للأول؟ قال: لا حتى تذوق العسيلة.
- وأخرجه أحمد 2/ 25 (4776) قال: حدَّثنا وكيع. وفي 2/ 62 (5277) قال: حدثنا عبد الرحمن. و`النَّسائي` 6/ 149، وفي `الكبرى` 5578 قال: أخبرنا محمود بن غَيْلان، قال: حدثنا وكيع.
كلاهما (وكيع، وعبد الرحمن) عن سُفْيان الثوري، عن علقمة بن مَرْثَد، عن رَزين بن سليمان الأحمري، عن ابن عمر؛
أن النبي صلى الله عليه وسلم سئل عن رجل طلق امرأته ثلاثا، ثم تزوجها رجل، فأغلق البابل، وأرخى الستر، ونزع الخمار، ثم طلقها قبل أن يدخل بها، تحل لزوجها الأول؟ فقال: لا، حتى يذوق عسيلتها.
- وفي رواية محمود بن غيلان: لا تحل للأول حتى يجامعها الآخر.
- قال النسائي: هذا أولى بالصواب.
- في رواية عبد الرحمن بن مهدي: زر بن الأحمري.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেই ব্যক্তি সম্পর্কে (ফয়সালা দিতে গিয়ে) বলেন, যার একজন স্ত্রী ছিল এবং সে তাকে তালাক দিল। অতঃপর সে অন্য এক পুরুষকে বিবাহ করল। কিন্তু সেই (দ্বিতীয়) স্বামী তার সাথে সহবাস করার পূর্বেই তাকে তালাক দিল। এখন সে কি তার প্রথম স্বামীর কাছে ফিরে যেতে পারবে? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "না, যতক্ষণ না সে 'উসাইলাহ' (মধুস্বাদ) আস্বাদন করবে।"
7712 - عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ؛
أَنَّ رَجُلاً لَاعَنَ امْرَأَتَهُ فِى زَمَانِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَانْتَفَى مِنْ وَلَدِهَا فَفَرَّقَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَيْنَهُمَا وَأَلْحَقَ الْوَلَدَ بِالْمَرْأَةِ.
أخرجه مالك `الموطأ` 1643، و`أحمد` 2/ 7 (4527) و 2/ 64 (5321) قال: حدثنا عبد الرحمن. وفي 2/ 12 (4604) قال: حدَّثنا عبدة، حدثنا عبيد الله. وفي 2/ 38 (4953) قال: حدثنا يحيى بن زكريا، حدثني مالك بن أنس. وفي 2/ 57 (5202) قال: حدَّثنا يحيى، عن عبيد الله. وفي 2/ 71 (5400) قال: حدَّثنا أبو سلمة الخزاعي، أخبرنا مالك. وفي 2/ 126 (6098) قال: حدَّثنا سريج، حدثنا فليح. و`الدارمي` 2232 قال: أخبرنا مُحَمَّد بن عبد الله الرقاشي، حدثني مالك. و`البُخَاريّ` 6/ 126 (4748) قال: حدَّثنا مقدم بن مُحَمَّد
بن يحيى، حدثنا عمي القاسم بن يحيى، عن عبيد الله، وقد سمع منه. وفي 7/ 69 (5306) قال: حدَّثنا موسى بن إسماعيل، حدثنا جويرية. وفي 7/ 72 (5313) قال: حدَّثني إبراهيم بن المنذر، حدثنا أنس بن عياض، عن عبيد الله. وفي (5314) قال: حدَّثنا مسدد، حدثنا يحيى، عن عبيد الله. وفي (5315) قال: حدَّثنا يحيى بن بكير، حدثنا مالك. وفي 8/ 191 (6748) قال: حدَّثني يحيى بن قزعة، حدثنا مالك. و`مسلم` 4/ 208 (3745) قال: حدَّثنا سعيد بن منصور، وقتيبة بن سعيد. قالا: حدثنا مالك (ح) وحدثنا يحيى بن يحيى. قال: قلت لمالك. وفي (3746) قال: وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا أبو أسامة (ح) وحدثنا ابن نُمَيْر، حدثنا أبي. قالا: حدثنا عبيد الله. وفي (3747) قال: وحدثناه مُحَمَّد بن المثنى، وعبيد الله بن سعيد. قالا: حدثنا يحيى، وهو القطان، عن عبيد الله. و`أبو داود` قال: حدَّثنا القعنبي، عن مالك. و`ابن ماجة` 2069 قال: حدَّثنا أحمد بن سنان، حدثنا عبد الرحمن بن مهدي، عن مالك
بن أنس. والتِّرْمِذِيّ` 1203 قال: أنبأنا قتيبة، أنبأنا مالك بن أنس. و`النَّسَائي` 6/ 178، وفي `الكبرى` 5641 قال: أخبرنا قتيبة. قال: حدَّثنا مالك.
أربعتهم (مالك، وعُبيد الله، وفُليح، وجُوَيرية) عن نافع، فذكره.
- قَالَ أَبُو دَاوُدَ: الَّذِى تَفَرَّدَ بِهِ مَالِكٌ ، قَوْلُهُ: وَأَلْحَقَ الْوَلَدَ بِالْمَرْأَةِ) ، وَقَالَ يُونُسُ عَنِ الزُّهْرِىِّ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ فِى حَدِيثِ اللِّعَانِ وَأَنْكَرَ حَمْلَهَا فَكَانَ ابْنُهَا يُدْعَى إِلَيْهَا.
ইবন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে এক ব্যক্তি তার স্ত্রীর সাথে লি’আন (পারস্পরিক শপথ ও অভিশাপ) করল এবং সে তার সন্তানের পিতৃত্ব অস্বীকার করল। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদের উভয়ের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটিয়ে দিলেন এবং সন্তানটিকে মায়ের সাথে যুক্ত করলেন।
7713 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ قَالَ لَمْ يُفَرِّقِ الْمُصْعَبُ بَيْنَ الْمُتَلَاعِنَيْنِ. قَالَ سَعِيدٌ فَذُكِرَ ذَلِكَ لِعَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ. فَقَالَ:
فَرَّقَ نَبِىُّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَيْنَ أَخَوَىْ بَنِى الْعَجْلَانِ.
أخرجه مُسْلِم 4/ 208 (3744) قال: حدثنا أبو غسانَ المسمعي، ومُحَمَّد بن المثنى، وابن بشار. و`النَّسائي` 6/ 176، وفي `الكبرى` قال: أخبرنا عَمرو بن علي، ومُحَمَّد بن المثنى.
أربعتهم (أبو غَسَّان، وابن المثنى، وابن بشار، وعَمرو بن علي) قالوا: حدثنا مُعَاذ بن هشام. قال: حدثني أبي، عن قتادة، عن عَزْرَة، عن سعيد بن جبير، فذكره.
- في رواية مُسْلِم: قال سعيد: فذكر ذلك لعبد الله بن عمرو.
আব্দুল্লাহ ইবন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। সাঈদ ইবন জুবাইর বলেন, মুস'আব লি'আনকারী স্বামী-স্ত্রীর মাঝে বিচ্ছেদ ঘটাননি। সাঈদ বলেন, এই বিষয়টি আব্দুল্লাহ ইবন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট উল্লেখ করা হলো। তখন তিনি বললেন: আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বনু আজলানের দুই ভাইয়ের মাঝে বিচ্ছেদ ঘটিয়েছিলেন।
7714 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ:
قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لِلْمُتَلَاعِنَيْنِ حِسَابُكُمَا عَلَى اللَّهِ أَحَدُكُمَا كَاذِبٌ لَا سَبِيلَ لَكَ عَلَيْهَا قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَالِى قَالَ لَا مَالَ لَكَ إِنْ كُنْتَ صَدَقْتَ عَلَيْهَا فَهْوَ بِمَا اسْتَحْلَلْتَ مِنْ فَرْجِهَا وَإِنْ كُنْتَ كَذَبْتَ عَلَيْهَا فَذَاكَ أَبْعَدُ لَكَ مِنْهَا.
أخرجه الحميدي (671)، وأحمد 2/ 11 (4587)، والبُخاري 7/ 71 (5312) قال: حدثنا علي بن عبد الله. وفِى 7/ 80 (5350) قال: حدثنا قتيبة بن سعيد. و`مسلم` 4/ 207 (3741) قال: حدثنا يحيى بن يحيى، وأبو بكر بن أبي شَيْبة، وزُهير بن حرب. و`أبو داود` 2257 قال: حدثنا أحمد بن حَنْبل. و`النَّسائي` 6/ 177، وفي `الكبرى` 5640 قال. أخبرنا مُحَمَّد بن منصور.
تسعتهم (الحميدي، وأحمد، وعلي، وقُتيبة، ويحيى، وأبو بكر بن أبي شيبة ، وزُهير بن حرب، أبو خيثمة، ومُحَمَّد بن منصور) عن سُفْيان بن عُيَيْنَة. قال: حدثنا عَمرو بن دينار، قال: سَمِعْتُ سعيد بن جبير، فذكره.
- في رواية علي بن عبد الله ابن المديني ، عن سُفْيان ، قال: حفظته من عمرو.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) 'লি'আন'কারী (পরস্পর অভিশাপ প্রদানকারী) স্বামী-স্ত্রীকে বললেন: "তোমাদের উভয়ের হিসাব আল্লাহর কাছে। তোমাদের একজন অবশ্যই মিথ্যাবাদী। (হে স্বামী,) তোমার জন্য তার উপর (ফিরিয়ে নেওয়ার) কোনো অধিকার নেই।" লোকটি বলল, "হে আল্লাহর রাসূল! আমার মোহরানার কী হবে?" তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "তোমার কোনো মোহরানা প্রাপ্য নেই। যদি তুমি তার ব্যাপারে সত্য বলে থাকো, তবে তা (মোহরানা) এই জন্য যে তুমি তার লজ্জাস্থানকে হালাল করেছিলে (তার সাথে সহবাস করে)। আর যদি তুমি তার ব্যাপারে মিথ্যা বলে থাকো, তবে এই সম্পদ তোমার কাছ থেকে আরও বেশি দূরে (অর্থাৎ তুমি তা ফেরত পাওয়ার কোনো অধিকারই রাখো না)।"
7715 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ قَالَ قُلْتُ لاِبْنِ عُمَرَ رَجُلٌ قَذَفَ امْرَأَتَهُ. فَقَالَ:
فَرَّقَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بَيْنَ أَخَوَىْ بَنِى الْعَجْلَانِ وَقَالَ اللَّهُ يَعْلَمُ أَنَّ أَحَدَكُمَا كَاذِبٌ فَهَلْ مِنْكُمَا تَائِبٌ يُرَدِّدُهَا ثَلَاثَ مَرَّاتٍ فَأَبَيَا فَفَرَّقَ بَيْنَهُمَا.
- وفي رواية: عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ. قَالَ: قُلْتُ لاِبْنِ عُمَرَ: رَجُلٌ قَذَفَ امْرَأَتَهُ؟ فَقَالَ: فَرَّقَ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم بَيْنَ أَخَوَىْ بَنِى الْعَجْلَانِ ، وَقَالَ: اللَّهُ يَعْلَمُ أَنَّ أَحَدَكُمَا كَاذِبٌ، فَهَلْ مِنْكُمَا تَائِبٌ؟ فَأَبَيَا. وَقَالَ: اللَّهُ يَعْلَمُ أَنَّ أَحَدَكُمَا كَاذِبٌ، فَهَلْ مِنْكُمَا تَائِبٌ؟ فَأَبَيَا. فقال: اللَّهُ يَعْلَمُ أَنَّ أَحَدَكُمَا كَاذِبٌ، فَهَلْ مِنْكُمَا تَائِبٌ؟ فَأَبَيَا ، فَفَرَّقَ بَيْنَهُمَا.
قَالَ أَيُّوبُ: فَقَالَ لِى عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ: إن فِى الْحَدِيثِ شَىْءٌ لَا أَرَاكَ تُحَدِّثُهُ. قَالَ: قَالَ الرَّجُلُ: مَالِى. قَالَ: قيل لَا مَالَ لَكَ، إِنْ كُنْتَ صَادِقًا ، فَقَدْ دَخَلْتَ بِهَا، وَإِنْ كُنْتَ كَاذِبًا ، فَهْوَ أَبْعَدُ مِنْكَ.
أخرجه الحميدي 672 قال: حدثنا سُفْيان. و`أحمد` 1/ 57 (398)
و 2/ 37 (4945) قال: حدثنا سُفْيان. وفي 2/ 4 (4477) قال: حدثنا إسماعيل. و`البُخَارِي` 7/ 71 (5311) و 7/ 79 (5349) قال: حدثني عَمرو بن زُرارة، أخبرنا إسماعيل. وفي 7/ 71 (5312) قال: حدثنا علي بن عبد الله، حدثنا سُفْيان. و`مسلم` 4/ 207 (3742) قال: حدثني أبو الربيع الزهراني، حدثنا حَمَّاد. وفي 4/ 208 (3743) قال: وحدثناه ابن أبي عُمر، حدثنا سُفْيان. و`أبو داود` 2258 قال: حدثنا أحمد بن مُحَمَّد بن حنبْل، حدثنا إسماعيل. و`النَّسائي` 6/ 177، وفي `الكبرى` 5639 قال: أخبرنا زياد بن أيوب، قال: حدثنا ابن عُلَية.
أربعتهم (معمر، وسُفْيان، وإسماعيل بن إبراهيم بن عُلَيَّة، وحمًاد) عن أيوب السخْتِيَاني، أنه سمع سعيد بن جبير، فذكره.
- في رواية علي ابن المديني ، عند البخاري ، قال سُفْيان: حفظته من عمرو وأيوب ، كما أخبرتك.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। (সাঈদ ইবনু জুবাইর বলেন, আমি তাঁকে জিজ্ঞেস করলাম: এক ব্যক্তি তার স্ত্রীকে অপবাদ দিলে তার কী বিধান?) তিনি বললেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বানূ আজলানের দুই ভাইয়ের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটিয়েছিলেন (যখন তারা লি‘আন করেছিল)। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছিলেন: "আল্লাহ জানেন, তোমাদের দুজনের মধ্যে একজন মিথ্যাবাদী। তোমাদের মধ্যে কি কেউ আছে যে তাওবা করবে?" তিনি এটি তিনবার পুনরাবৃত্তি করলেন, কিন্তু তারা দুজনই অস্বীকার করল। অতঃপর তিনি তাদের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটিয়ে দিলেন।
অন্য এক বর্ণনায় সাঈদ ইবনু জুবাইর (রহ.) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞেস করলাম: এক ব্যক্তি তার স্ত্রীকে অপবাদ দিলে তার কী বিধান? তিনি বললেন: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বানূ আজলানের দুই ভাইয়ের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটিয়েছিলেন এবং বলেছিলেন: "আল্লাহ জানেন, তোমাদের দুজনের মধ্যে একজন মিথ্যাবাদী। তোমাদের মধ্যে কি কেউ আছে যে তাওবা করবে?" কিন্তু তারা দুজনই অস্বীকার করল। তিনি আবার বললেন: "আল্লাহ জানেন, তোমাদের দুজনের মধ্যে একজন মিথ্যাবাদী। তোমাদের মধ্যে কি কেউ আছে যে তাওবা করবে?" কিন্তু তারা দুজনই অস্বীকার করল। তিনি (তৃতীয়বার) বললেন: "আল্লাহ জানেন, তোমাদের দুজনের মধ্যে একজন মিথ্যাবাদী। তোমাদের মধ্যে কি কেউ আছে যে তাওবা করবে?" কিন্তু তারা দুজনই অস্বীকার করল। অতঃপর তিনি তাদের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটিয়ে দিলেন।
আইয়ূব (রহ.) বলেন, আমাকে আমর ইবনু দীনার (রহ.) বললেন: "এই হাদীসে এমন কিছু অংশ আছে যা আমি তোমাকে বর্ণনা করতে দেখছি না।" (সাঈদ ইবনু জুবাইর বলেন): লোকটি (স্বামী) জিজ্ঞেস করল: আমার সম্পদ (মোহর) কোথায় গেল? তখন বলা হয়েছিল: তোমার কোনো সম্পদ (মোহরের অধিকার) নেই। যদি তুমি সত্যবাদী হও, তবে তুমি তো তার সাথে দাম্পত্য সম্পর্ক স্থাপন করেছ (তাই মোহর তার প্রাপ্য)। আর যদি তুমি মিথ্যাবাদী হও, তবে (সম্পদ ফিরে পাওয়ার ব্যাপারে) তুমি তো তার থেকেও বেশি দূরে।
7716 - عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ قَالَ سُئِلْتُ عَنِ الْمُتَلَاعِنَيْنِ فِى إِمْرَةِ مُصْعَبٍ أَيُفَرَّقُ بَيْنَهُمَا قَالَ فَمَا دَرَيْتُ مَا أَقُولُ فَمَضَيْتُ إِلَى مَنْزِلِ ابْنِ عُمَرَ بِمَكَّةَ فَقُلْتُ لِلْغُلَامِ اسْتَأْذِنْ لِى. قَالَ إِنَّهُ قَائِلٌ فَسَمِعَ صَوْتِى. قَالَ ابْنُ جُبَيْرٍ قُلْتُ نَعَمْ. قَالَ ادْخُلْ فَوَاللَّهِ مَا جَاءَ بِكَ هَذِهِ السَّاعَةَ إِلَاّ حَاجَةٌ فَدَخَلْتُ فَإِذَا هُوَ مُفْتَرِشٌ بَرْذَعَةً مُتَوَسِّدٌ وِسَادَةً حَشْوُهَا لِيفٌ قُلْتُ أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْمُتَلَاعِنَانِ أَيُفَرَّقُ بَيْنَهُمَا قَالَ سُبْحَانَ اللَّهِ نَعَمْ؛
إِنَّ أَوَّلَ مَنْ سَأَلَ عَنْ ذَلِكَ فُلَانُ بْنُ فُلَانٍ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ
أَرَأَيْتَ أَنْ لَوْ وَجَدَ أَحَدُنَا امْرَأَتَهُ عَلَى فَاحِشَةٍ كَيْفَ يَصْنَعُ إِنْ تَكَلَّمَ تَكَلَّمَ بِأَمْرٍ عَظِيمٍ. وَإِنْ سَكَتَ سَكَتَ عَلَى مِثْلِ ذَلِكَ قَالَ فَسَكَتَ النَّبِىُّ صلى الله عليه وسلم فَلَمْ يُجِبْهُ فَلَمَّا كَانَ بَعْدَ ذَلِكَ أَتَاهُ فَقَالَ إِنَّ الَّذِى سَأَلْتُكَ عَنْهُ قَدِ ابْتُلِيتُ بِهِ. فَأَنْزَلَ اللَّهُ عز وجل هَؤُلَاءِ الآيَاتِ فِى سُورَةِ النُّورِ (وَالَّذِينَ يَرْمُونَ أَزْوَاجَهُمْ) فَتَلَاهُنَّ عَلَيْهِ وَوَعَظَهُ وَذَكَّرَهُ وَأَخْبَرَهُ أَنَّ عَذَابَ الدُّنْيَا أَهْوَنُ مِنْ عَذَابِ الآخِرَةِ قَالَ لَا وَالَّذِى بَعَثَكَ بِالْحَقِّ مَا كَذَبْتُ عَلَيْهَا. ثُمَّ دَعَاهَا فَوَعَظَهَا وَذَكَّرَهَا وَأَخْبَرَهَا أَنَّ عَذَابَ الدُّنْيَا أَهْوَنُ مِنْ عَذَابِ الآخِرَةِ. قَالَتْ لَا وَالَّذِى بَعَثَكَ بِالْحَقِّ إِنَّهُ لَكَاذِبٌ فَبَدَأَ بِالرَّجُلِ فَشَهِدَ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ إِنَّهُ لَمِنَ الصَّادِقِينَ وَالْخَامِسَةُ أَنَّ لَعْنَةَ اللَّهِ عَلَيْهِ إِنْ كَانَ مِنَ الْكَاذِبِينَ ثُمَّ ثَنَّى بِالْمَرْأَةِ فَشَهِدَتْ أَرْبَعَ شَهَادَاتٍ بِاللَّهِ إِنَّهُ لَمِنَ الْكَاذِبِينَ وَالْخَامِسَةُ أَنَّ غَضَبَ اللَّهِ عَلَيْهَا إِنْ كَانَ مِنَ الصَّادِقِينَ ثُمَّ فَرَّقَ بَيْنَهُمَا.
أخرجه أحمد 2/ 12 (4603) قال: حدثنا عَبْدة. وفي 2/ 19 (4693) قال: حدثنا يحيى بن سعيد. وفي 2/ 42 (5009) قال: حدثنا يزيد. و`الدارِمِي` 2231 قال: أخبرنا يزيد بن هارون. و`مسلم` 4/ 206 (3739) قال: حدثنا مُحَمَّد بن عبد الله بن نُمَيْر، حدثنا أبي (ح) وحدثنا أبو بكر بن أبي شَيْبة، حدثنا عبد الله بن نُمَيْر. وفي 4/ 207 (3740) قال: وحدثنيه علي بن حُجْر السَّعْدي، حدثنا عيسى بن يونس. والتِّرْمِذِيّ` 1202 و 3178 قال: حدثنا هَنَّاد، حدثنا عَبدة بن سليمان. و`النَّسَائي` 6/ 175، وفي `الكبرى` 5637 قال: أخبرنا عَمرو بن علي، ومُحَمَّد بن المثنى. قالا: حدثنا يحيى بن سعيد. وفي `الكبرى` 11293 قال: أخبرنا سَوار بن عبد الله، حدثنا خالد بن الحارث. وفي (11294) قال: أخبرنا إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا جَرير.
سبعتهم (عَبدة بن سليمان، ويحيى بن سعيد، ويزيد بن هارون، وعيسى بن يونس، وعبد الله بن نُمَيْر، وخالد بن الحارث، وجرير) عن عبد الملك بن أبي سليمان. قال: سَمِعْتُ سعيد بن جبير، فذكره.
সাঈদ ইবনে জুবাইর থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: মুস’আবের শাসনামলে আমাকে লি‘আনকারী স্বামী-স্ত্রী সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হলো যে, তাদের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটানো হবে কি না? তিনি বলেন, কী বলবো তা আমি জানতাম না। তাই আমি মাক্কায় অবস্থিত ইবনে উমারের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বাড়িতে গেলাম এবং খাদেমকে বললাম, আমার জন্য প্রবেশের অনুমতি চাও।
সে বললো, তিনি বিশ্রাম করছেন। কিন্তু তিনি আমার আওয়াজ শুনতে পেলেন। ইবনে জুবাইর বলেন, আমি বললাম, হ্যাঁ (আমি সাঈদ ইবনে জুবাইর)। তিনি বললেন, ভেতরে এসো। আল্লাহর কসম! এই সময় কোনো প্রয়োজন ছাড়া তুমি আসোনি।
আমি প্রবেশ করে দেখলাম, তিনি একটি পশমী চাদর (বা গদির বস্তা) বিছিয়ে শুয়ে আছেন এবং তার বালিশটি খেজুর গাছের আঁশ দিয়ে ভরা। আমি বললাম, হে আবূ আবদুর রহমান! লি‘আনকারী স্বামী-স্ত্রীর মধ্যে কি বিচ্ছেদ ঘটানো হবে? তিনি বললেন, সুবহানাল্লাহ! হ্যাঁ।
নিশ্চয়ই সর্বপ্রথম এ ব্যাপারে প্রশ্ন করেছিলেন অমুক ইবনে অমুক। তিনি বললেন, হে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আপনি বলুন, আমাদের কেউ যদি তার স্ত্রীকে অশ্লীল কাজ করতে দেখে, তবে সে কী করবে? যদি সে কথা বলে, তবে সে এক গুরুতর বিষয় নিয়ে কথা বললো; আর যদি সে চুপ থাকে, তবে সে অনুরূপ গুরুতর বিষয় চাপা দিলো।
তিনি বলেন, তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নীরব রইলেন এবং তাকে কোনো উত্তর দিলেন না। এরপরে লোকটি তাঁর নিকট এসে বললো, যে বিষয়ে আপনাকে প্রশ্ন করেছিলাম, এখন আমি নিজেই সে পরীক্ষায় পতিত হয়েছি। তখন আল্লাহ তা‘আলা সূরা নূরের এই আয়াতগুলো নাযিল করলেন: "আর যারা নিজেদের স্ত্রীদের প্রতি অপবাদ আরোপ করে..." (২৪:৬)। নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আয়াতগুলো তাকে পড়ে শোনালেন এবং তাকে উপদেশ দিলেন, স্মরণ করিয়ে দিলেন এবং তাকে জানিয়ে দিলেন যে, দুনিয়ার শাস্তি আখিরাতের শাস্তির তুলনায় হালকা। লোকটি বললো, যিনি আপনাকে সত্য দিয়ে পাঠিয়েছেন, তাঁর কসম! আমি তার উপর মিথ্যারোপ করিনি।
অতঃপর তিনি স্ত্রীকে ডাকলেন এবং তাকে উপদেশ দিলেন, স্মরণ করিয়ে দিলেন এবং তাকে জানিয়ে দিলেন যে, দুনিয়ার শাস্তি আখিরাতের শাস্তির তুলনায় হালকা। স্ত্রী বললো, যিনি আপনাকে সত্য দিয়ে পাঠিয়েছেন, তাঁর কসম! সে (স্বামী) অবশ্যই মিথ্যাবাদী।
অতঃপর প্রথমে তিনি পুরুষকে দিয়ে শুরু করলেন। সে আল্লাহর নামে চারবার সাক্ষ্য দিলো যে, সে অবশ্যই সত্যবাদী। আর পঞ্চমবার সাক্ষ্য দিলো যে, যদি সে মিথ্যাবাদী হয় তবে তার উপর আল্লাহর লা‘নত (অভিসম্পাত) বর্ষিত হোক।
এরপর তিনি স্ত্রীকে দিয়ে শুরু করলেন। সে আল্লাহর নামে চারবার সাক্ষ্য দিলো যে, সে (স্বামী) অবশ্যই মিথ্যাবাদী। আর পঞ্চমবার সাক্ষ্য দিলো যে, যদি সে (স্বামী) সত্যবাদী হয়, তবে তার উপর আল্লাহর গযব (ক্রোধ) বর্ষিত হোক। অতঃপর তিনি তাদের মধ্যে বিচ্ছেদ ঘটিয়ে দিলেন।
7717 - عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ رضى الله عنهما أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
مَنْ أَعْتَقَ شِرْكًا لَهُ فِى عَبْدٍ، فَكَانَ لَهُ مَالٌ يَبْلُغُ ثَمَنَ الْعَبْدِ قُوِّمَ الْعَبْدُ قِيمَةَ عَدْلٍ، فَأَعْطَى شُرَكَاءَهُ حِصَصَهُمْ وَعَتَقَ عَلَيْهِ، وَإِلَاّ فَقَدْ عَتَقَ مِنْهُ مَا عَتَقَ.
أخرجه مالك `الموطأ` 2240. و`أحمد` 1/ 56 (397) و 2/ 112 (5920) قال: حدَّثنا إسحاق بن عيسى، أنبأنا مالك. وفي 2/ 2 (4451) قال: حدَّثنا هشيم، أخبرنا يحيى بن سعيد. وفي 2/ 15 (4635) قال: حدَّثنا إسماعيل، حدثنا أيوب. وفي 2/ 53 (5150) قال: حدَّثنا يحيى، عن عبيد الله. وفي 2/ 77 (5474) قال: أخبرنا يزيد. قال: أخبرنا يحيى. وفي 2/ 105 (5821) قال: حدَّثنا عفان، حدثنا جرير بن حازم. وفي 2/ 122 (6038) قال: حدَّثنا هاشم، حدثنا ليث. وفي 2/ 142 (6279) قال: حدَّثنا ابن نُمَيْر، ومُحَمَّد بن عبيد. قالا: حدثنا عبيد الله. وفي 2/ 156 (6453) قال: حدَّثنا حماد، عن مالك. و`البُخَاريّ` 3/ 182 (2491) قال: حدَّثنا عمران بن ميسرة، حدثنا عبد الوارث، حدثنا أيوب. وفي 3/ 184 (2503) قال: حدَّثنا مسدد، حدثنا جويرية بن أسماء. وفي 3/ 189 (2522) قال: حدَّثنا عبد الله بن يوسف،
أخبرنا مالك. وفي (2523) قال: حدَّثنا عبيد بن إسماعيل، عن أبي أسامة، عن عبيد الله (ح) وحدثنا مسدد، حدثنا بشر، عن عبيد الله. وفي (2524) قال: حدَّثنا أبو النعمان، حدثنا حماد، عن أيوب. وفي (2525) قال: حدَّثنا أحمد بن مقدام، حدثنا الفضيل بن سليمان، حدثنا موسى بن عقبة. وقال البخاري عقبه: ورواه الليث، وابن أبي ذئب، وابن إسحاق، وجويرية، ويحيى بن سعيد، وإساعيل بن أمية. وفي 3/ 196 (2553) قال: حدَّثنا أبو النعمان، حدثنا جرير بن حازم. و`مسلم` 4/ 212 (3763) و 5/ 95 (4338) قال: حدَّثنا يحيى بن يحيى. قال: قلت
لمالك. وفي 4/ 212 (3764) و 5/ 95 (4339) قال: وحدثنا ابن نُمَيْر، حدثنا أبي، حدثنا عبيد الله. وفي 4/ 212 (3764) و 5/ 95 (4340) قال: وحدثنا شيبان بن فروخ، حدثنا جرير بن حازم. وفي 4/ 212 (3764) و 5/ 95 (4341) قال: وحدثناه قتيبة بن سعيد، ومُحَمَّد بن رمح، جميعا عن الليث بن سعد. وفي 4/ 212 (3764) و 5/ 95 (4341) وحدثنا أبو الربيع، وأبو كامل. قالا: حدثنا حماد، حدثنا أيوب. وفي 4/ 212 (3764) و 5/ 95 (4341) قال: وحدثنا مُحَمَّد بن المثنى، حدثنا عبد الوهاب. قال: سَمِعْتُ يحيى بن سعيد. وفي 4/ 212 (3764) و 5/ 95 (4341) قال: وحدَّثني إسحاق بن منصور، أخبرنا عبد الرزاق، عن ابن جريج، أخبرني إسماعيل بن أمية. وفي 4/ 212 (3764) و 5/ 95 (4341) قال: وحدثنا هارون بن سعيد الأيلي، حدثنا ابن وهب، أخبرني أسامة. وفي 4/ 212 (3764) و 5/ 95 (4341) قال: وحدثنا مُحَمَّد بن رافع، حدثنا ابن أبي فديك، عن ابن أبي ذئب. وفي 5/ 95 (4341) قال: وحدثني زهير بن حرب، حدثنا إسماعيل، يعني ابن علية، عن أيوب. و`أبو داود` 3940 قال: حدَّثنا القعنبي، عن مالك. وفي (3941) قال: حدَّثنا مؤمل، حدثنا إسماعيل، عن أيوب. وفي (3942) قال: حدَّثنا سليمان بن داود، حدثنا حماد، عن أيوب. وفي (3942) قال: حدَّثنا سليمان بن داود، حدثنا حماد، عن أيوب. وفي (3943) قال: حدَّثنا إبراهيم بن موسى الرازي، أخبرنا عيسى بن يونس، حدثنا عبيد الله. وفي (3944) قال: حدَّثنا خالد بن مخلد، حدثنا يزيد بن هارون، أخبرنا يحيى بن سعيد. وفي (3945) قال: حدَّثنا عبد الله بن مُحَمَّد بن أسماء، حدثنا جويرية 0 و`ابن ماجة` 2528 قال: حدَّثنا يحيى بن حكيم، حدثنا عثمان بن عمر، حدثنا مالك بن أنس.
والتِّرْمِذِيّ` 1346 قال: حدَّثنا أحمد بن منيع، حدثنا إسماعيل بن إبراهيم، عن أيوب. و`النَّسَائي` 7/ 319، وفي `الكبرى` 4934 و 6252 قال: أخبرنا عمرو بن علي. قال: حدَّثنا
يزيد، وهو ابن زريع. قال: حدَّثنا أيوب. وفي `الكبرى` 4925 قال: أخبرنا عبدة بن عبد الله الصفار البصري. قال: أخبرنا سويد. قال: حدَّثنا زهير. قال: حدَّثنا عبيد الله. وفي (4926) قال: أخبرني علي بن مُحَمَّد بن علي. قال: حدَّثنا خلف بن تميم. قال: حدَّثنا زائدة. قال: حدَّثنا عبيد الله. وفي (4927) قال: أخبرنا إسماعيل بن مسعود. ح خالد بن الحارث. قال: حدَّثنا عبيد الله. وفي (4928) قال: أخبرنا عبيد الله بن سعيد. قال: حدَّثنا يحيى، عن عبيد الله. وفي (49299 قال: أخبرنا عمرو بن علي. قال: أخبرنا يحيى، عن عبيد الله. وفي (4930) قال: أخبرنا عمرو بن علي. قال: حدَّثنا بشر، عن عبيد الله. وفي (4931) قال: أخبرني مُحَمَّد بن وهب. قال: أخبرنا مُحَمَّد بن سلمة. قال: حدَّثني أبو عبد الرحيم. قال: حدَّثني زيد، عن عمر بن نافع، وعبيد الله بن عمر، ومُحَمَّد بن عجلان. وفي (4932) قال: أخبرنا قتيبة بن سعيد. قال: حدَّثنا الليث. وفي (4933) قال: أخبرنا مُحَمَّد بن يحيى، عن عبد الأعلى، ثم ذكر كلمة معناها، حدثنا سعيد، عن أيوب. وفي (4935) قال: أخبرنا إسحاق بن إبراهيم. قال: أخبرنا عبد الوهاب الثقفي. قال: حدَّثنا أيوب. وفي (4936) قال: أخبرنا عمرو بن زرارة. قال: أخبرنا إسماعيل، عن أيوب. وفي (4937) قال: الحارث بن مسكين، قراءة عليه وأنا أسمع، عن ابن القاسم. قال: حدَّثني مالك. وفي (4938) قال: أخبرنا أحمد بن سليمان. قال: حدَّثنا يزيد بن هارون. قال: أخبرنا يحيى بن سعيد. وفي (4939) قال: أخبرنا حسين بن منصور. قال: حدَّثنا عبد الله بن نُمَيْر. قال: حدَّثنا يحيى بن سعيد. وفي (4940) قال: أخبرنا عمرو بن علي. قال: حدَّثنا عبد الوهاب. قال: سَمِعْتُ يحيى بن سعيد. وفي (4941) عن أبي بكر بن نافع، عن معتمر بن سليمان، عن يونس بن عبيد.
جميعهم (مالك، ويحيى بن سعيد الأنصاري، وأيوب، وعبيد الله، وجرير بن حازم،
والليث بن سعد، وجويرية بن أسماء، وموسى بن عقبة، وإسماعيل بن أمية، وأسامة بن زيد، ومُحَمَّد بن عبد الرحمن بن أبي ذئب، وعمر بن نافع، ومُحَمَّد بن عجلان، وسليمان بن موسى ، ويونس بن عبيد) عن نافع، فذكره.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যে ব্যক্তি কোনো দাসের মধ্যে নিজের অংশ আযাদ করে দেয়, আর তার নিকট যদি দাসের পুরো মূল্য পরিশোধ করার মতো সম্পদ থাকে, তবে দাসটির ন্যায্য মূল্য নির্ধারণ করা হবে, অতঃপর সে তার অংশীদারদের তাদের প্রাপ্য অংশ দেবে এবং দাসটি তার জন্য (সম্পূর্ণ) আযাদ হয়ে যাবে। আর যদি সে তা না করে, তবে যতটুকু আযাদ হয়েছে ততটুকুই আযাদ থাকবে।
7718 - عن حبيب بن أبي ثابت عن بن عمر قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:
من أعتق شقصا له في عبد ضمن لأصحابه أنصباءهم.
أخرجه النسائي في `الكبرى` 4917 قال: أخبرنا هناد بن السري، عن أبي الأحوص، عن عبد العزيز، عن حبيب بن أبي ثابت، فذكره.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যে ব্যক্তি কোনো ক্রীতদাসের মধ্যে তার নিজস্ব অংশটুকুকে মুক্ত (আযাদ) করে দেয়, সে তার অংশীদারদের (বাকি) অংশগুলির দায়ভার গ্রহণ করবে।
7719 - عن عمرو بن دينار وابن أبي مليكة عن بن عمر قلت عن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال نعم قال:
من أعتق عتاقة فيها شرك فتمام عتقه على الذي أعتقه.
أخرجه النسائي في `الكبرى` 4918 قال: أخبرنا هلال بن العلاء. قال: حدثنا حسين بن عياش. قال: حدثنا زهير. قال: حدثنا عبد العزيز بن رفيع، عن عمرو بن دينار، وابن أبي مليكة، فذكراه.
- أخرجه النسائي في `الكبرى` عن عبد الله بن مُحَمَّد بن إسحاق الأذرمي، عن جرير، عن عبد العزيز بن رفيع، عن أشياخ من أهل مكة، عن ابن عمر، فذكره.
ইবন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “যে ব্যক্তি এমন কোনো দাসকে আযাদ করল, যার আযাদিতে অংশীদারিত্ব (শরীকানা) রয়েছে, তবে তার সম্পূর্ণ আযাদ করার দায়িত্ব সেই অংশীদারের উপর বর্তাবে, যে তাকে আযাদ করেছে।”
7720 - عَنْ نَافِعٍ، عَنِ عبد الله بْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ:
مَنْ بَاعَ عَبْدًا وَلَهُ مَالٌ، فَلَهُ مَالُهُ، وَعَلَيْهِ دَيْنُهُ، إِلَاّ أَنْ يَشْتَرِطَ الْمُبْتَاعُ.
أخرجه أحمد 3/ 309 (14376) قال عَبْد اللهِ بن أحمد: وجدتُ في كتاب أَبي: أخبرنا الحَكَم بن مُوسَى (قال عَبْد اللهِ: وحدَّثناه الحَكَم بن مُوسَى)، حدَّثنا يَحيى بن حَمْزَة، عن أَبي وَهْب. و`النَّسائي`، في الكبرى `تحفة الأشراف` 7674 عن عَمْرو بن عُثْمَان، عن الوَلِيد بن مسلم ، عن أبي مُعَيد، حَفْص بن غَيْلَان الهَمْدَانِي.
كلاهما (أبو وَهْب، وأبو معيد) عن سُلَيْمان بن مُوسَى، أن نافعا حدثه ، فذكره.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যে ব্যক্তি কোনো দাস বিক্রি করলো, আর তার (দাসের নিজস্ব) সম্পদ ছিল, তবে সেই সম্পদ তার (বিক্রেতার) জন্য। আর তার (দাসের) ঋণ তার (বিক্রেতার) উপর বর্তাবে, যদি না ক্রেতা (অন্যরকম) কোনো শর্তারোপ করে।
7721 - عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
مَنْ أَعْتَقَ عَبْدًا وَلَهُ مَالٌ فَمَالُ الْعَبْدِ لَهُ إِلَاّ أَنْ يَشْتَرِطَ السَّيِّدُ مَالَهُ فَيَكُونَ لَهُ.
أخرجه أبو داود (3962) قال: حدثنا أحمد بن صالح، حدثنا ابن وهب، أخبرني ابن لَهيعة، والليث بن سعد. و (اابن ماجة) 2529 قال: حدثنا حرملة بن يحيى، حدثنا عبد الله بن وهب، أخبرني ابن لَهيعة (ح) وحدثنا مُحَمَّد بن يحيى، حدثنا سعيد بن أبي مَرْيم، أنبأنا اللَّيث بن سعد. و`النَّسائي` في `الكبرى` 4962 قال: أخبرنا مُحَمَّد بن يعقوب بن عبد الوهَّاب بن يحيى بن عباد بن عبد الله بن الزبير بن العوام، قال: حدَّثني ابن وهب، عن الليْث، وذكر آخر.
كلاهما (عبد الله بن لهيعة، والليث بن سعد) عن عبيد الله بن أبي جعفر، عن بكير بن الأشج، عن نافع، فذكره.
- أخرجه النسائي في `الكبرى` 4961 قال: أخبرنا مُحَمَّد بن عبد الله بن الحكم، عن أشهب. قال: أخبرنيه الليث، عن عبيد الله بن أبي جعفر، عن ناقع، عن ابن عمر، فذكره. ليس فيه: (بكير بن الأشج.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যে ব্যক্তি এমন কোনো দাসকে মুক্ত করে যার সম্পদ রয়েছে, তবে দাসের সেই সম্পদ তার (মুক্তকারীর) হয়ে যাবে, যদি না মনিব দাসের সম্পদ (দাসকে) রাখার শর্ত করে নেয়, তবে সেই সম্পদ দাসেরই থাকবে।
7722 - عَنْ سَالِمٍ ، عَنْ أَبِيهِ ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم:
مَنِ اشْتَرَى عَبْدًا وَلَمْ يَشْتَرِطْ مَالَهُ ، فَلَا شَىْءَ لَهُ.
أخرجه الدارمي (2564) قال: أخبرنا عبد الله بن مسلمة ، قال: حدثنا ابن أبي ذئب ، عن ابن شهاب ، عن سالم ، فذكره.
আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: যে ব্যক্তি কোনো দাস ক্রয় করে এবং তার (দাসের) সম্পদ ক্রয়ের শর্ত না করে, তবে (সেই সম্পদের) কিছুই তার জন্য নয়।
