হাদীস বিএন


আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম





আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2181)


2181 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا محمد بن سِنان القزّاز، حدثنا وهب بن جَرير، حدثنا أبي، قال: سمعت يحيى بن أيوب يحدِّث عن يزيد بن أبي حبيب، عن عبد الرحمن بن شُمَاسة، عن عُقْبة بن عامر الجُهَني، قال: سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "المسلمُ أخو المسلمِ، ولا يَحِلُّ لمسلمٍ إن باع من أخيه بيعًا فيه عَيبٌ أن لا يُبيِّنَه له" [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.




উকবাহ ইবনে আমের আল-জুহানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "মুসলিম, মুসলিমের ভাই। কোনো মুসলমানের জন্য এটা বৈধ নয় যে, সে তার ভাইয়ের কাছে ত্রুটিযুক্ত কোনো পণ্য বিক্রি করবে, আর সেই ত্রুটি তার কাছে স্পষ্ট করে দেবে না।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده حسن كما قال الحافظ ابن حجر في "الفتح" 7/ 50، يحيى بن أيوب - وهو الغافقي - صدوق حسن الحديث، ومحمد بن سنان القزاز حسن الحديث في المتابعات والشواهد، وقد توبع.جرير: هو ابن حازم.وأخرجه ابن ماجه (2246) عن محمد بن بشار، عن وهب بن جرير، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 28/ (17451) من طريق عبد الله بن لهيعة، عن يزيد بن أبي حبيب، به.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2182)


2182 - حدثنا أبو بكر بن إسحاق الفقيه وعلي بن حَمْشاذَ العَدْل، قالا: أخبرنا بشر بن موسى، حدثنا الحُميدي، حدثنا سفيان، حدثنا العلاء بن عبد الرحمن، عن أبيه، عن أبي هريرة، قال: مَرَّ النبيُّ صلى الله عليه وسلم برجلٍ يبيع طعامًا، فأعجبه، فأدخل يدَه فيه، فإذا هو بطعامٍ مَبْلُولٍ، فقال النبيُّ صلى الله عليه وسلم: "ليس مِنّا مَن غَشَّنا" [1].هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه هكذا [2]، وقد رواه محمد وإسماعيل ابنا جعفر بن أبي كثير عن العلاء. أما حديث محمد بن جعفر:




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একজন বিক্রেতার পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন, যে খাদ্যদ্রব্য বিক্রি করছিল। তিনি তা দেখে (মুগ্ধ হলেন এবং) তাতে তাঁর হাত প্রবেশ করালেন। তখন তিনি দেখতে পেলেন যে, তার ভিতরে ভেজা খাদ্যদ্রব্য রয়েছে। অতঃপর নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "যে আমাদের সাথে প্রতারণা করে, সে আমাদের দলভুক্ত নয়।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده صحيح. الحُميدي: هو عبد الله بن الزُّبَير المكي، وسفيان: هو ابن عيينة، وعبد الرحمن: هو ابن يعقوب مولى الحُرَقة.وأخرجه أحمد 12/ (7292)، وأبو داود (3452)، وابن ماجه (2224) من طريق سفيان بن عيينة، بهذا الإسناد. بلفظ: "ليس منا من غَشَّ".وانظر تالييه.



[2] بل قد أخرجه مسلم (102) من طريق إسماعيل بن جعفر الآتية برقم (2184)!









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2183)


2183 - فأخبرَناه أبو النضر الفقيه وأبو الحسن العَنَزي [1]، قالا: حدثنا عثمان بن سعيد الدارِمي، حدثنا سعيد بن أبي مريم، أخبرنا محمد بن جعفر، أخبرني العلاء، عن أبيه، عن أبي هريرة، قال: جاء النبي صلى الله عليه وسلم إلى السُّوق، فرأى حِنطةً مُصَبَّرة، فأدخل يدَه فيها، فوَجَدَ بَلَلًا، فقال: "ألا مَن غشَّنا فليس مِنّا" [2].وأما حديث إسماعيل بن جعفر بن أبي كثير:




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বাজারে এলেন, অতঃপর স্তূপ করা গম দেখতে পেলেন। তিনি এর মধ্যে হাত ঢুকালেন এবং সিক্ততা (ভেজা ভাব) পেলেন। অতঃপর তিনি বললেন: "সাবধান! যে আমাদের সাথে প্রতারণা করে, সে আমাদের দলভুক্ত নয়।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] تصحف في (ز) و (ب) إلى: العنبري، وإنما هو العَنَزي كما في (ص) و (ع)، وهو أحمد بن محمد بن عَبْدُوس، له ترجمة في "سير أعلام النبلاء" 15/ 519. وصُبْرة الطعام، بضم الصاد المهملة وسكون الباء: ما جُمع من الطعام بلا كيل ولا وزن، بعضه فوق بعض.



[2] إسناده صحيح كسابقه.وقوله: "مُصبَّرة" أي: مُكدَّسَة. وصُبْرة الطعام، بضم الصاد المهملة وسكون الباء: ما جُمع من الطعام بلا كيل ولا وزن، بعضه فوق بعض.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2184)


2184 - فأخبرَناه دَعْلَج بن أحمد السِّجْزي، حدثنا موسى بن هارون، حدثنا يحيى بن أيوب.وحدثنا أبو الفضل بن إبراهيم، حدثنا إبراهيم بن محمد بن يزيد، حدثنا علي بن حُجر؛ قالا: حدثنا إسماعيل بن جعفر، حدثنا العلاء، عن أبيه، عن أبي هريرة: أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم مَرَّ على صُبْرةٍ من طعام، فأدخل يدَه فيه، فنالتْ أصابعُه بَلَلًا، فقال: "ما هذا يا صاحبَ الطعام!؟ " فقال: أصابتْه السماءُ يا رسول الله، قال: "أفلا جعلتَه فوقَ الطعامِ حتى يَراهُ الناسُ"، ثم قال: "مَن غشَّ فليس مِنّي" [1]. وقد أخرج مسلم حديث سُهيل عن أبيه عن أبي هريرة أنَّ النبي صلى الله عليه وسلم قال: "مَن غَشّنا فليس مِنّا" [2]. وأما شرحُ الحالِ في هذه الأحاديث فلم يخرجاه [3]، وكلُّها صحيحة على شرط مسلم.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খাদ্যের একটি স্তূপের পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন। অতঃপর তিনি তাঁর হাত তার ভেতরে প্রবেশ করালেন। তাঁর আঙ্গুলগুলো তাতে ভিজে গেল। তিনি বললেন: "হে খাদ্যের মালিক! এটা কী?" সে বলল: হে আল্লাহর রাসূল! এতে বৃষ্টি পড়েছে। তিনি বললেন: "তাহলে তুমি তা (ভিজা অংশ) খাদ্যের উপরে রাখলে না কেন, যাতে লোকেরা তা দেখতে পেত?" অতঃপর তিনি বললেন: "যে প্রতারণা করে, সে আমার (উম্মতের) অন্তর্ভুক্ত নয়।"

[মুসলিম সুহাইল তার পিতা সূত্রে আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণনা করেছেন যে, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে আমাদের সাথে প্রতারণা করে, সে আমাদের অন্তর্ভুক্ত নয়।"]




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده صحيح. موسى بن هارون: هو ابن عبد الله الحمّال، ويحيى بن أيوب: هو المَقابري، وأبو الفضل بن إبراهيم: هو محمد بن إبراهيم بن الفضل المزكّي النيسابوري، وإبراهيم بن محمد بن يزيد: هو إبراهيم بن محمد بن خالد بن يزيد المروَزي.وأخرجه مسلم (102)، والترمذي (1315) عن علي بن حُجر، ومسلم (102) عن يحيى بن أيوب المقابري، بهذا الإسناد.وأخرجه مسلم (102) عن قتيبة بن سعيد، وابن حبان (1905) من طريق موسى بن إسماعيل، كلاهما عن إسماعيل بن جعفر، به. وصُبْرة الطعام، بضم الصاد المهملة وسكون الباء: ما جُمع من الطعام بلا كيل ولا وزن، بعضه فوق بعض.



[2] أخرجه مسلم (101) من طريقين عن سهيل - وهو ابن أبي صالح السمّان - به. دائمًا، وأنَّ عمار بن رُزيق قلب اسمه، وإذا ثبت ذلك فسعيد بن عمير هذا هو ابن عقبة بن نِيار، وعمه أبو بردة بن نيار، يعني عمَّ أبيه، وقد روى عن سعيد جمعٌ وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقال عنه يعقوب بن سفيان: لا بأس به.وأخرجه ابن أبي خيثمة في السفر الثاني من "تاريخه الكبير" (2551) عن أبيه زهير بن حرب، عن أبي الجوّاب الأحوص بن جوّاب، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 25/ (15833) و 27/ (16489) من طريقين عن شريك النخعي، عن عبد الله بن عيسى، عن جميع - وفي الموضع الثاني قال: أو أبي جميع - عن خاله أبي بردة. وانظر تمام تخريجه في "المسند".ويشهد له حديث أبي هريرة السابق.والغرائر جمع غِرارة: وهي وعاء من صوف أو شعر أو خيش، يوضع فيه الحبوب والتبن.



2184 [3] - بل قد أخرجه مسلم كما قدَّمنا من طريق إسماعيل بن جعفر عن العلاء. دائمًا، وأنَّ عمار بن رُزيق قلب اسمه، وإذا ثبت ذلك فسعيد بن عمير هذا هو ابن عقبة بن نِيار، وعمه أبو بردة بن نيار، يعني عمَّ أبيه، وقد روى عن سعيد جمعٌ وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقال عنه يعقوب بن سفيان: لا بأس به.وأخرجه ابن أبي خيثمة في السفر الثاني من "تاريخه الكبير" (2551) عن أبيه زهير بن حرب، عن أبي الجوّاب الأحوص بن جوّاب، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 25/ (15833) و 27/ (16489) من طريقين عن شريك النخعي، عن عبد الله بن عيسى، عن جميع - وفي الموضع الثاني قال: أو أبي جميع - عن خاله أبي بردة. وانظر تمام تخريجه في "المسند".ويشهد له حديث أبي هريرة السابق.والغرائر جمع غِرارة: وهي وعاء من صوف أو شعر أو خيش، يوضع فيه الحبوب والتبن.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2185)


2185 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا العباس بن محمد الدُّوري، حدثنا أبو الجَوّاب الأحوص بن جَوّاب، حدثنا عمار بن رُزَيق، حدثنا عبد الله بن عيسى، عن عُمير بن سعيد، عن عمِّه، قال: خرج رسول الله صلى الله عليه وسلم إلى البقيع، فرأى طعامًا يباع في غَرائر، فأدخل يده، فأخرج شيئًا كَرِهَه، فقال: "مَن غشّنا فليس مِنّا" [1]. هذا حديث صحيح، وعَمُّ عمير بن سعيد: هو الحارث بن سويد النَّخَعي [2].




হারিছ ইবনু সুওয়াইদ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বাকী'র দিকে বের হলেন। তিনি দেখলেন, বস্তার মধ্যে খাদ্যদ্রব্য বিক্রি করা হচ্ছে। তিনি তাঁর হাত ঢুকিয়ে দিলেন এবং (ভেতর থেকে) এমন কিছু বের করলেন যা তিনি অপছন্দ করলেন। অতঃপর তিনি বললেন: "যে ব্যক্তি আমাদের সাথে প্রতারণা করে, সে আমাদের দলভুক্ত নয়।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] صحيح لغيره، وهذا إسناد جيدٌ إن شاء الله، وقد اختُلف في اسم التابعي المذكور، فسماه عمار بن رُزَيق عن عبد الله بن عيسى - وهو ابن عبد الرحمن بن أبي ليلى -: عمير بن سعيد، وخالف عمارًا شريكُ بن عبد الله النخعي كما سيأتي تخريجه، فرواه عن عبد الله بن عيسي، فسماه: جميع بن عمير، وقال: عن خاله، وخالفهما قيس بن الربيع كما قال الدارقطني في "العلل" 6/ 24 (954)، فرواه عن عبد الله بن عيسى، فسماه سعيد بن عمير. ونظن أنَّ هذا الأخير هو الصحيح في اسمه، وأنه هو نفسه الذي يروي عنه وائل بن داود حديث "أفضل الكسب" الآتي عند المصنف، فقد رواه سفيان الثَّوري عن وائل بن داود برقم (2188)، فسماه سعيد بن عمير، فوافق قيس بن الربيع، وأخطأ شريك النخعي مرة أخرى فرواه عن وائل بن داود برقم (2187) فسماه جميع بن عمير، وقال: عن خاله.ونظن أيضًا أنه نفسه الذي يروي عنه سعيد بن سعيد أبو الصبَّاح التغلبي حديث فضل الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم الذي أخرجه النسائي في "الكبرى" (9809) و (9810)، فقد سماه سعيد بن عمير، وقُيّد في بعض الروايات بسعيد بن عمير بن عقبة بن نِيار. وعليه يدل صنيع البخاري في "تاريخه الكبير" 3/ 502 حيث أورد في ترجمة سعيد بن عمير حديث فضل الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم الذي قُيّد فيه بأنه ابنُ عقبة بن نيار، وحديث أطيب الكسب.فخلصنا بذلك إلى أنَّ الصحيح اسم التابعي سعيد بن عمير، وأنَّ شريكًا كان يخطئ في اسمه دائمًا، وأنَّ عمار بن رُزيق قلب اسمه، وإذا ثبت ذلك فسعيد بن عمير هذا هو ابن عقبة بن نِيار، وعمه أبو بردة بن نيار، يعني عمَّ أبيه، وقد روى عن سعيد جمعٌ وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقال عنه يعقوب بن سفيان: لا بأس به.وأخرجه ابن أبي خيثمة في السفر الثاني من "تاريخه الكبير" (2551) عن أبيه زهير بن حرب، عن أبي الجوّاب الأحوص بن جوّاب، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 25/ (15833) و 27/ (16489) من طريقين عن شريك النخعي، عن عبد الله بن عيسى، عن جميع - وفي الموضع الثاني قال: أو أبي جميع - عن خاله أبي بردة. وانظر تمام تخريجه في "المسند".ويشهد له حديث أبي هريرة السابق.والغرائر جمع غِرارة: وهي وعاء من صوف أو شعر أو خيش، يوضع فيه الحبوب والتبن.



[2] كذا جزم الحاكم بأنَّ صحابي الحديث هو الحارث بن سويد النخعي، وإنما هو أبو بردة بن نيار كما بينّاه، ولم نجد للحاكم في ذلك سلفًا، والله تعالى أعلم. مكحول وسليمان بن موسى، عن واثلة، رفعه بلفظ: "من باع عيبًا لم يُبيّنه لم يَزَل في مقت الله، ولم تزل الملائكة تلعنه". وإسناده ضعيف أيضًا لضعف بقية وشيخه معاوية بن يحيى.ولقوله: "لا يحل لأحد يبيع شيئًا إلّا بيَّن ما فيه" شاهد من حديث عقبة بن عامر الذي تقدم برقم (2181)، وإسناده حسن.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2186)


2186 - حدثنا أبو بكر إسماعيل بن محمد بن إسماعيل الفقيه بالرَّيّ، حدثنا محمد بن الفَرَج الأزرق، حدثنا أبو النضر هاشم بن القاسم، حدثنا أبو جعفر الرازي، عن يزيد بن أبي مالك، حدثنا أبو سِبَاع، قال: اشتريتُ ناقةً من دار واثِلةَ بن الأسْقَع، فلما خرجتُ بها أدركَني واثلةُ وهو يجُرُّ إزاره، فقال: يا عبدَ الله، اشتريتَ؟ قلتُ: نعم، قال: بُيِّنَ لك ما فيها؟ قلت: وما فيها؟ إنها لَسَمينةٌ ظاهرةُ الصِّحّة؟ قال: أردتَ بها سفرًا أو أردتَ بها لحمًا؟ قلت: أردتُ بها الحجَّ، قال: فارتجِعْها، فقال صاحبُها: ما أردتَ إلّا هذا أصلحك الله؟ تُفسِدُ عَليَّ، قال: إني سمعتُ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم يقول: "لا يَحِلُّ لأحدٍ يبيعُ شيئًا إلّا بيَّن ما فيه، ولا يَحِلُّ لمن عَلِمَ ذلك إلّا بَيَّنَه" [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




ওয়াসিলা ইবনুল আসকা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবু সিবাহ (রহ.) বলেন, আমি ওয়াসিলা ইবনুল আসকা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর বাড়ি থেকে একটি উটনি কিনলাম। যখন আমি সেটি নিয়ে বের হলাম, ওয়াসিলা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁর লুঙ্গি টেনে নিতে নিতে আমাকে ধরে ফেললেন। তিনি বললেন, হে আল্লাহর বান্দা, তুমি কি কিনেছ? আমি বললাম, হ্যাঁ। তিনি বললেন, এর মধ্যে কী ত্রুটি আছে তা কি তোমাকে ব্যাখ্যা করা হয়েছে? আমি বললাম, এর মধ্যে আবার কী আছে? এটি তো মোটাসোটা এবং স্পষ্টত স্বাস্থ্যবান!

তিনি বললেন, তুমি কি এটি দ্বারা সফর করতে চাও নাকি গোশত খেতে চাও? আমি বললাম, আমি এটি দ্বারা হজ করতে চাই। তিনি বললেন, তাহলে এটি ফিরিয়ে দাও। তখন এর মালিক বলল, আল্লাহ আপনার মঙ্গল করুন, আপনি কি শুধু এটাই চেয়েছিলেন? আপনি আমার জন্য (বিক্রিটি) নষ্ট করে দিচ্ছেন!

তিনি বললেন, আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি: "কারো জন্য কোনো কিছু বিক্রি করা বৈধ নয়, যতক্ষণ না সে সেটির ত্রুটি ব্যাখ্যা করে। আর যে ব্যক্তি সেই ত্রুটি সম্পর্কে জানে, তার জন্য সেটি প্রকাশ না করে থাকা বৈধ নয়।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده ضعيف لجهالة أبي سباع، ولانقطاعه، فقد قال ابن معين فيما نقله عنه عباس الدُّوري: أبو جعفر الرازي لم يسمع من يزيد بن أبي مالك شيئًا.وأخرجه أحمد 25/ (16013) عن أبي النضر هاشم بن القاسم، بهذا الإسناد.وأخرج المرفوع منه ابن ماجه (2247) من طريق بقية بن الوليد، عن معاوية بن يحيى، عن مكحول وسليمان بن موسى، عن واثلة، رفعه بلفظ: "من باع عيبًا لم يُبيّنه لم يَزَل في مقت الله، ولم تزل الملائكة تلعنه". وإسناده ضعيف أيضًا لضعف بقية وشيخه معاوية بن يحيى.ولقوله: "لا يحل لأحد يبيع شيئًا إلّا بيَّن ما فيه" شاهد من حديث عقبة بن عامر الذي تقدم برقم (2181)، وإسناده حسن.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2187)


2187 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا العباس بن محمد الدُّوري، حدثنا الأسود بن عامر، حدثنا شَريك، عن وائل بن داود، عن جُميع بن عُمير، عن خاله أبي بُردة، قال: سُئل رسول الله صلى الله عليه وسلم: أيُّ الكسب أطيبُ أو أفضلُ؟ قال: "عَمَلُ الرجلِ بيده، وكلُّ بَيعٍ مَبْرُورٍ" [1].




আবূ বুরদাহ থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জিজ্ঞেস করা হলো: কোন উপার্জন সবচেয়ে উত্তম অথবা সর্বোৎকৃষ্ট? তিনি বললেন: "ব্যক্তির নিজ হাতের উপার্জন এবং সকল সৎ (মাকবূল) ব্যবসা।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] حسن لغيره، وهذا إسناد قد أخطأ فيه شريك - وهو ابن عبد الله النخعي - في تسمية التابعي، كما قال محمد بن عبد الله بن نمير فيما نقله عنه البيهقي في "شعب الإيمان" (1173)، وصحَّح أنَّ اسمه سعيد بن عمير، يعني كما قال سفيان الثَّوري وغيره ممن روى هذا الحديث عن وائل بن داود كما سيأتي، وكذلك قال الحافظ ابن حجر في "التلخيص" 3/ 3. وانظر لزامًا تعليقنا على الحديث المتقدم برقم (2185).وقد اضطرب شريكٌ في إسناده أيضًا: فرواه عنه أسود بن عامر كما وقع في إسناد المصنف هنا، وخالفه سويد بن عمرو الكلبي، فرواه عن شريك، لكنه قال في روايته عنه: عن عمه، بدل: عن خاله.وخالفهما محمد بن أبان الواسطي، فرواه عن شريك، فقال: عن عبد الله بن عيسى - وهو ابن عبد الرحمن بن أبي ليلى - عن جميع بن عمير أو عمير بن جميع، عن خاله أبي بردة بن نيار. والظاهر أنه هنا دخل له حديث في حديث، لأنَّ المحفوظ في هذا الحديث أنه من رواية وائل بن داود، كما رواه الثَّوري وغيره عنه، وأما الحديث الذي يرويه عبد الله بن عيسى فهو حديث "من غشّنا فليس منا"، كما رواه عمار بن رُزيق عنه، ورواه شريك نفسه عنه، وقد تقدم برقم (2185)، والله تعالى أعلم.وفيه علة أخرى، وهي أنَّ المحفوظ في هذا الحديث أنه عن سعيد بن عمير مرسلًا، كما نبَّه عليه البخاري وأبو حاتم وغيرهما كما سيأتي بيانه عند الرواية التالية إن شاء الله.وأخرجه أحمد 25/ (15836) عن أسود بن عامر، بهذا الإسناد. وانظر تمام تخريجه من هذه الطريق فيه. وأخرجه البزار في "مسنده" (3798) عن عبدة بن عبد الله، عن سويد بن عمرو الكلبي، عن شريك، عن وائل بن داود، عن جميع، عن عمه.وأخرجه ابن قانع في "معجم الصحابة" 3/ 304، والطبراني في "الكبير" 22/ (519) من طريق محمد بن أبان الواسطي، عن شريك، عن عبد الله بن عيسى عن جميع بن عمير أو عمير بن جميع، عن خاله أبي بردة.وانظر تالييه.وفي الباب عن عبد الله بن عمر عند أبي بكر الخلّال في "الحث على التجارة والصناعة والعمل" (41)، والطبراني في "الأوسط" (2140)، و"الكبير" (13939)، والإسماعيلي في "معجم شيوخه" 2/ 642 - 643، وجوَّد إسناده الدِّمياطي في "المتجر الرابح" ص 632، وقال الحافظ في "التلخيص" 3/ 3: رجاله لا بأس بهم.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2188)


2188 - حدثنا أبو العباس، حدثنا العباس بن محمد، حدثنا الأسود بن عامر، أخبرنا سفيان الثَّوْري، عن وائل بن داود، عن سعيد بن عمير، عن عمه، قال: سُئل رسول الله صلى الله عليه وسلم: أيُّ الكسبِ أفضلُ؟ قال: "كَسْبٌ مَبْرُورٌ" [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه، ووائل بن داود وابنه بكر بن وائل ثقتان، وقد ذكر يحيى بن مَعِين أنَّ عمَّ سعيد بن عمير البراءُ بن عازب، وإذا اختلفَ الثَّوْري وشريكٌ، فالحُكم للثوريّ.




বারা’ ইবনু আযিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল: কোন্ উপার্জন সর্বোত্তম? তিনি বললেন: “পুণ্যময় (হালাল ও গ্রহণযোগ্য) উপার্জন।”




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] حسن لغيره، وهذا إسناد رجاله ثقات، لكن الصحيح عن الثَّوري وغيره إرسالُه، فقد قال البخاري في "تاريخه الكبير" 3/ 502: أسنده بعضهم وهو خطأ، ووافقه البيهقي في "السنن الكبرى" 5/ 433 فصحَّح المرسَل، وكذا رجَّح المرسَل أبو حاتم كما في "العلل" لابنه (2837).وأخرجه البيهقي في "السنن الكبرى" 5/ 263، وفي "شعب الإيمان" (1172) عن أبي عبد الله الحاكم، بهذا الإسناد.وأخرجه يعقوب بن سفيان في "المعرفة والتاريخ" 3/ 179 - 180، ومن طريقه البيهقي في "شعب الإيمان" (1171) عن أبي نعيم الفضل بن دكين وقبيصة بن عقبة، عن سفيان الثَّوري، عن وائل بن داود، عن سعيد بن عمير، مرسلًا.وأخرجه ابن أبي شيبة 7/ 269، وابن أبي الدنيا في "إصلاح المال" (314) من طريق أبي معاوية، والبيهقي في "السنن الكبرى" 5/ 433 من طريق محمد بن عبيد الطنافسي، كلاهما عن وائل بن داود، عن سعيد بن عمير، مرسلًا. وتحرَّف اسم عمير في نسخ ابن أبي شيبة الخطية إلى: المسيب، كما نبَّه عليه الشيخ محمد عوامة في طبعته، فالظاهر أنه خطأ قديم تواردت عليه النسخ. وأخرجه ابن أبي حاتم في "العلل" (2837) من طريق أبي إسماعيل المؤدِّب، عن وائل بن داود، عن سعيد بن عمير ابن أخي البراء، عن البراء، كذا رواه موصولًا بذكر البراء، وهو خطأ خالف فيه أبو إسماعيل المؤدّب أصحابَ وائل بن داود، كما تقدم، وأخطأ أيضًا في قوله: سعيد بن عمير ابن أخي البراء، لأنَّ المعروف أنه ابن ابن أخي أبي بردة بن نيار، فأبو بردة عم أبيه كما بيناه عند الحديث (2185)، وكما يدل عليه صنيع البخاري في "تاريخه" 3/ 502، وجاء في رواية محمد بن عبيد الطنافسي عن وائل بن داود التي قدّمنا ذكرها: عن سعيد بن عمير أبو أمه البراء، فلا تعارض حينئذٍ، يعني فيكون جدّه لأمه البراءَ وعمُّ أبيه أبا بُردة بن نِيار. وعليه فمن جزم بأنَّ البراء هو عم سعيد بن عمير كابن معين ويعقوب بن سفيان وغيرهما فغير مُصيبٍ، والظاهر أنَّ اعتمادهم في ذلك على رواية أبي إسماعيل المؤدّب المذكورة، وقد بيَّنا أنه لم يُقِم الإسناد، فلا تصلحُ للاعتماد عليها، والله تعالى أعلم.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2189)


2189 - وحدثنا أبو بكر بن إسحاق، أخبرنا محمد بن أحمد بن النضر، حدثنا معاوية بن عمرو، أخبرنا المسعودي، عن وائل بن داود، عن عَبَاية بن رافع بن خَدِيج، عن أبيه، قال: قيل: يا رسول الله، أيُّ الكسبِ أطيبُ؟ قال: "كَسْبُ الرجلِ بيدِه، وكلُّ بَيعٍ مَبْرُورٍ" [1]. وهذا خلافٌ ثالث على وائل بن داود، إلّا أنَّ الشيخين لم يُخرجا عن المسعودي، ومحلُّه الصِّدق [2].




রাফি' ইবনে খাদীজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: জিজ্ঞাসা করা হলো, "ইয়া রাসূলাল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! সর্বোত্তম উপার্জন কোনটি?" তিনি বললেন: "মানুষের নিজ হাতের উপার্জন এবং প্রত্যেক সৎ (বা বরকতময়) ব্যবসা।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] حسن لغيره، وهذا إسناد رجاله ثقات، لكن المسعودي - وهو عبد الرحمن بن عبد الله بن عتبة بن مسعود الهُذلي - كان قد اختلط، وقد خالف في روايته هذا الحديث جميع أصحاب وائل ابن داود كما تقدم في الطريقين السابقتين، إذ رووه عن وائل عن سعيد بن عمير، ولهذا خطّأ روايتَه هذه البيهقي في "السنن الكبرى" 5/ 263، وقال الدارقطني في "الغرائب والأفراد" كما في "أطرافه" لابن طاهر المقدسي 3/ 64 (2060): تفرَّد به المسعوديُّ، أسنده عن رافع بن خديج.وقال الحافظ في "التلخيص" 3/ 3: قول الحاكم في هذا الإسناد: عن أبيه، فيه تجوُّز، فإنه عباية بن رفاعة بن رافع بن خديج. قلنا: وكذلك وقع في رواية بعض من خرَّجه غير الحاكم: عن أبيه، تجوُّزًا.وأخرجه أحمد 28/ (17265) عن يزيد بن هارون، عن المسعودي، بهذا الإسناد.



[2] هو وإن كان محلُّه الصدق لكنه اختلط كما قدَّمنا، وخالف غيره، فتأكد أنَّ روايته لهذا الحديث في الاختلاط. الواسطة بينهما قد عُلمت إذ صُرِّح بها في أكثر مصادر التخريج، وهو سعيد بن أبي خيرة.والظاهر أنَّ هذا الاختلاف من داود بن أبي هند، فكان يُسقط أحيانًا ذكر سعيد بن أبي خيرة، كما يدلُّ عليه كلام الدارقطني في "العلل" حيث ذكر أنَّ حفص بن غياث رواه عن داود بن أبي هند أيضًا بإسقاط سعيد بن أبي خيرة. وعلى أيّ حال يبقى في الحديث علة الانقطاع بين الحسن وأبي هريرة.وأخرج أبو داود هذا الحديث (3331) عن وهب بن بقية، به فذكر سعيد بن أبي خيرة فيه.وأخرجه ابن ماجه (2278) من طريق إسماعيل ابن عُليَّة، والنسائي (5999) من طريق محمد بن أبي عدي، كلاهما عن داود بن أبي هند عن سعيد بن أبي خيرة، عن الحسن، عن أبي هريرة.وأخرجه أحمد 16/ (10410)، وأبو داود (3331) من طريق عباد بن راشد، عن سعيد بن أبي خيرة، به.وأخرج البخاري (2083) من حديث سعيد المقبري عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم: "ليأتين على الناس زمان لا يبالي المرء بما أخذ من المال، أمِن الحلال أم من الحرام".









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2190)


2190 - أخبرني الحسن بن يعقوب بن يوسف العَدْل، حدثنا السَّرِيّ بن خُزيمة، حدثنا عبد الله بن مَسلَمة القَعْنبي، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن عمرو بن أبي عمرو، عن عِكْرمة، عن ابن عباس: أنَّ رجلًا لَزِمَ غَريمًا له بعشرة دنانير، فقال: والله لا أُفَارِقُك حتَّى تَقضيَني أو تأتيَني بحَمِيلٍ، قال: فتَحمَّل بها النبيُّ صلى الله عليه وسلم، فأتاه بقَدْر ما وَعَدَه، فقال له النبيُّ صلى الله عليه وسلم: "من أين أصبتَ هذا الذهبَ؟ " قال: من مَعْدِنٍ، قال: "لا حاجةَ لنا فيها، ليس فيها خَيرٌ"، فقَضَاها عنه رسولُ الله صلى الله عليه وسلم [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, এক ব্যক্তি তার এক ঋণগ্রহীতার কাছে দশ দিনারের জন্য পিছু নিলেন (বা তাকে ধরে রাখলেন)। সে বলল, আল্লাহর কসম! তুমি যতক্ষণ না আমাকে পরিশোধ কর অথবা একজন জামিন নিয়ে আসো, আমি তোমাকে ছাড়ব না। বর্ণনাকারী বলেন, অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার (ঋণ পরিশোধের) জামিন হলেন। এরপর সে ওয়াদা অনুযায়ী নির্ধারিত পরিমাণ নিয়ে এলো। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে জিজ্ঞেস করলেন: "এই সোনা তুমি কোথা থেকে সংগ্রহ করেছ?" সে বলল, খনি থেকে। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "এতে আমাদের কোনো প্রয়োজন নেই, এর মধ্যে কোনো কল্যাণ নেই।" অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার পক্ষ থেকে (সেই ঋণ) পরিশোধ করে দিলেন।




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده جيد من أجل عمرو بن أبي عمرو - وهو مولى المطَّلب - فهو صدوق لا بأس به.وأخرجه أبو داود (3328) عن عبد الله بن مسلمة القعنبي، بهذا الإسناد.وأخرجه ابن ماجه (2406) عن محمد بن الصبّاح، عن عبد العزيز بن محمد الدَّراوردي، به. وسيأتي برقم (2259).والحَميل: الكفيلُ والضامنُ.والمعدن: الموضع الذي يُستخرج منه جواهرُ الأرض كالذهب والفضة والنحاس وغير ذلك. الواسطة بينهما قد عُلمت إذ صُرِّح بها في أكثر مصادر التخريج، وهو سعيد بن أبي خيرة.والظاهر أنَّ هذا الاختلاف من داود بن أبي هند، فكان يُسقط أحيانًا ذكر سعيد بن أبي خيرة، كما يدلُّ عليه كلام الدارقطني في "العلل" حيث ذكر أنَّ حفص بن غياث رواه عن داود بن أبي هند أيضًا بإسقاط سعيد بن أبي خيرة. وعلى أيّ حال يبقى في الحديث علة الانقطاع بين الحسن وأبي هريرة.وأخرج أبو داود هذا الحديث (3331) عن وهب بن بقية، به فذكر سعيد بن أبي خيرة فيه.وأخرجه ابن ماجه (2278) من طريق إسماعيل ابن عُليَّة، والنسائي (5999) من طريق محمد بن أبي عدي، كلاهما عن داود بن أبي هند عن سعيد بن أبي خيرة، عن الحسن، عن أبي هريرة.وأخرجه أحمد 16/ (10410)، وأبو داود (3331) من طريق عباد بن راشد، عن سعيد بن أبي خيرة، به.وأخرج البخاري (2083) من حديث سعيد المقبري عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم: "ليأتين على الناس زمان لا يبالي المرء بما أخذ من المال، أمِن الحلال أم من الحرام".









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2191)


2191 - حدثنا أبو الوليد الفقيه، حدثنا الحسن بن سفيان.وحدثنا علي بن عيسى، حدثنا الحسين بن محمد بن زياد؛ قالا: حدثنا وهب بن بقيّة الواسِطي، حدثنا خالد بن عبد الله، عن داود بن أبي هند، عن الحسن، عن أبي هريرة، أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "لَيأتيَنَّ على الناس زمانٌ لا يبقى فيه أحدٌ إِلَّا أَكَلَ الرِّبا، فإن لم يأكُلْه أصابَه مِن غُبارِه" [1]. قد اختلف أئمتُنا في سماعِ الحسنِ عن أبي هريرة، فإن صحَّ سماعُه منه فهذا حديثٌ صحيحٌ.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "মানুষের ওপর এমন এক সময় অবশ্যই আসবে, যখন এমন কেউ অবশিষ্ট থাকবে না যে সুদ খায়নি। যদি সে তা নাও খায়, তবুও তার ধুলো তাকে স্পর্শ করবে।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده ضعيف لانقطاعه، فإنَّ الحسن - وهو البصري - لم يسمع من أبي هريرة، وداود لم يسمع هذا الحديث من الحسن كما نصَّ عليه الدارقطني في "العلل" 10/ 258 (1996)، إلا أنَّ الواسطة بينهما قد عُلمت إذ صُرِّح بها في أكثر مصادر التخريج، وهو سعيد بن أبي خيرة.والظاهر أنَّ هذا الاختلاف من داود بن أبي هند، فكان يُسقط أحيانًا ذكر سعيد بن أبي خيرة، كما يدلُّ عليه كلام الدارقطني في "العلل" حيث ذكر أنَّ حفص بن غياث رواه عن داود بن أبي هند أيضًا بإسقاط سعيد بن أبي خيرة. وعلى أيّ حال يبقى في الحديث علة الانقطاع بين الحسن وأبي هريرة.وأخرج أبو داود هذا الحديث (3331) عن وهب بن بقية، به فذكر سعيد بن أبي خيرة فيه.وأخرجه ابن ماجه (2278) من طريق إسماعيل ابن عُليَّة، والنسائي (5999) من طريق محمد بن أبي عدي، كلاهما عن داود بن أبي هند عن سعيد بن أبي خيرة، عن الحسن، عن أبي هريرة.وأخرجه أحمد 16/ (10410)، وأبو داود (3331) من طريق عباد بن راشد، عن سعيد بن أبي خيرة، به.وأخرج البخاري (2083) من حديث سعيد المقبري عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم: "ليأتين على الناس زمان لا يبالي المرء بما أخذ من المال، أمِن الحلال أم من الحرام".









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2192)


2192 - أخبرنا أبو جعفر محمد بن علي الشَّيباني بالكوفة، حدثنا أحمد بن حازم بن أبي غَرَزَة، حدثنا جعفر بن عَون، عن عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، عن القاسم بن يزيد، عن أبي أمامة، قال: نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يُحتَكَر الطعامُ [1]. قد أخرج مسلم حديث محمد بن إسحاق [2]، عن محمد بن عمرو بن عطاء، عن سعيد بن المسيب، عن مَعمَر بن عبد الله بن نَضْلةَ، أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "لا يَحتَكِرُ إلّا خاطئٌ".وهذا الحديث أحدُ ما يُنقَضُ عليه أن لا يصحَّ حديثُ صحابيٍّ لا يروي عنه تابعيان [3]، فإنَّ معمرًا هذا ليس له راوٍ غير سعيد بن المسيب، وأما حديث القاسم عن أبي أمامة فليس بذلك اللفظ.وقد روي في الزَّجْر عن احتكار الطعام والتقاعُد عن مُواساةِ المسلمين في الضِّيق أخبارٌ [4] لا بدَّ من ذكرها في هذا الموضع، لمَا دُفِع المسلمونَ إليه في الوقت.فمنها:




আবু উমামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম খাদ্য মজুত (احتِكار) করতে নিষেধ করেছেন।

[১] মুসলিম মুহাম্মদ ইবনু ইসহাক [২] থেকে, তিনি মুহাম্মদ ইবনু আমর ইবনু আতা থেকে, তিনি সাঈদ ইবনু মুসাইয়্যাব থেকে, তিনি মা'মার ইবনু আব্দুল্লাহ ইবনু নাদলা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে হাদীস বর্ণনা করেছেন যে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "পাপী বা ভুলকারী ব্যতীত কেউ মজুতদারী করে না।"

এই হাদীসটি সেইসব দাবির একটির খণ্ডন, যেখানে বলা হয় যে, কোনো সাহাবীর হাদীস সহীহ হতে পারে না, যদি না দুজন তাবিঈ তার থেকে বর্ণনা করে [৩]। কারণ এই মা'মারের ক্ষেত্রে সাঈদ ইবনু মুসাইয়্যাব ছাড়া অন্য কোনো রাবী (বর্ণনাকারী) নেই। পক্ষান্তরে, কাসিম কর্তৃক আবু উমামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত হাদীসের শব্দগুলো এমন নয়।

খাদ্য মজুত করার কঠোরতা এবং সংকটের সময় মুসলিমদের প্রতি সহানুভূতি প্রকাশে বিরত থাকা সম্পর্কে [৪] বেশ কিছু বর্ণনা রয়েছে, যা এই স্থানে উল্লেখ করা অপরিহার্য, বিশেষত এই সময়ে মুসলিমরা যে পরিস্থিতির সম্মুখীন হয়েছে। সেগুলোর মধ্যে রয়েছে:




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده صحيح، لكن وقع فيه خطأ في تسمية القاسم، حيث قُيد بابن يزيد، وإنما هو القاسم بن عبد الرحمن الدمشقي أبو عبد الرحمن، وهو المعروف بالرواية عن أبي أمامة، وجاء تقييده على الصواب في رواية محمد بن يحيى بن أبي عمر العَدَني في "مسنده" وكذا في رواية ابن المنذر في "الأوسط".وأخرجه البيهقي في "شعب الإيمان" (10699) عن أبي عبد الله الحاكم، بهذا الإسناد. وفيه: القاسم بن يزيد.وأخرجه ابن أبي شيبة في "المصنف" 6/ 102، وفي "المسند" كما في "إتحاف الخيرة" للبوصيري (2743/ 2)، وابن أبي عمر العَدَني في "مسنده" كما في "إتحاف الخيرة" (2743/ 1)، والرُّوياني في "مسنده" (1199)، وابن المنذر في "الأوسط" (7981)، والطبراني في "الكبير" (7776)، وفي "مسند الشاميين" (595)، وأبو طاهر المخلِّص في "المخلصيات" (2240/ 2) من طريق أبي أسامة حماد بن أسامة، عن عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، به.والاحتكار المنهيّ عنه شرعًا - كما عرَّفه ابن حجر في "فتح الباري" 7/ 121 - : هو إمساك الطعام عن البيع وانتظار الغلاء مع الاستغناء عنه وحاجة الناس إليه. قال: وبهذا فسَّره مالك عن أبي الزِّناد عن سعيد بن المسيب.



[2] كذا قال الحاكم، وهو وهم منه رحمه الله، لأنَّ مسلمًا إنما رواه من حديث محمد بن عجلان عن محمد بن عمرو بن عطاء برقم (1605)، على أنَّ محمد بن إسحاق قد روى هذا الحديث، لكن عن محمد بن إبراهيم التيمي عن سعيد بن المسيب، وروايته عند أحمد 25/ (15758)، وابن ماجه (2154)، والترمذي (1267)، وابن حبان (4936).



2192 [3] - انظر تعليقنا على هذه المسألة عند الحديث (97).



2192 [4] - في النسخ الخطية: لأخبار، والمثبت هو الوجه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2193)


2193 - ما أخبرَناه أبو عبد الله محمد بن عبد الله الصَّفّار، حدثنا أحمد بن مِهْران، حدثنا عُبيد الله [1] بن موسى، حدثنا إسرائيل، عن علي بن سالم بن ثَوبان، حدثني علي ابن زيد، عن سعيد بن المسيّب، عن عمر، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "المحتكِرُ مَلْعُونٌ" [2].ومنها:




উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "মজুতদার অভিশপ্ত।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] تحرَّف في (ز) و (ب) إلى: عبد الله، مكبرًا.



[2] إسناده ضعيف لضعف علي بن زيد - وهو ابنُ جُدعان - وجهالة أو ضعف علي بن سالم بن ثوبان، فقد قال البخاري فيما نقله عنه العقيلي وابن عدي: لا يتابع في حديثه، وقال ابن المديني عن هذا الحديث فيما نقله عنه ابن كثير في "مسند الفاروق" (404): حديث كوفي ضعيف الإسناد منكر.وأخرجه ابن ماجه (2153) من طريق أبي أحمد الزُّبَيري، عن إسرائيل، بهذا الإسناد.وأخرج أحمد (135)، وابن ماجه أيضًا (2155) من طريق أبي يحيى المكي، عن فرُّوخ مولي عثمان بن عفان، عن عمر بن الخطاب، قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "من احتكر على المسلمين طعامهم ضربه الله بالإفلاس أو بجذام". وذكره أحمد ضمن قصة وقعت لفروخ نفسه هو ومولًى لعمر، وأنَّ عمر قال ذلك مخاطبًا لهما، لكن أبا يحيى مجهول كما قال ابن الجوزي في "العلل المتناهية" (998)، والذهبي في "المغني في الضعفاء" (7825)، وفي "الميزان"، وقال الذهبي: الخبر منكر.قلنا: ومع ذلك جوّد إسناده المنذري في "الترغيب والترهيب" 2/ 364، وحسّنه ابن حجر في "الفتح" 7/ 122، وحسَّن ابن كثير في "مسند الفاروق" 1/ 347 الحديثَ بمجموع هاتين الروايتين عن عمر، وبما روي من قوله.قلنا: الذي رُوي من قوله في مطلق النهي عن الاحتكار، دون ذكر عقوبته من اللعن أو الإصابة بالجذام والإفلاس، ومن ذلك قوله: لا يبيع في سوقنا مُحتكِر، أخرجه عبد الرزاق (14901) و (14902) و (14903) من طرق مرسلة عن عمر رجالها ثقات. ونحوه عند ابن المنذر في "الأوسط" (7991)، والبيهقي 6/ 29، وأبي القاسم الأصبهاني في "الترغيب والترهيب" (314) من مرسل إبراهيم بن عبد الرحمن بن أبي ربيعة عن عمر، وبمجموعها يحسُنُ الخبر عن عمر بن الخطاب من قوله موقوفًا عليه دون المرفوع، والله تعالى أعلم.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2194)


2194 - ما أخبرنا أبو بكر بن إسحاق الفقيه، أخبرنا محمد بن أيوب، أخبرنا عمرو بن الحُصين العُقَيلي، حدثنا أصبَغُ بن زيد الجُهَني، عن أبي الزاهِريّة، عن كثير بن مُرّة الحَضْرمي، عن ابن عمر، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "مَن احتكرَ طعامًا أربعين ليلةً، فقد بَرِئَ من الله وبَرِئَ الله منه، وأيُّما أهلُ عَرَصةٍ أصبح فيهم امرؤٌ جائعًا، فقد بَرِئَت منهم ذِمّةُ الله" [1].ومنها:




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি চল্লিশ রাত খাদ্য গুদামজাত করে (মজুদ করে) রাখে, সে আল্লাহ থেকে মুক্ত এবং আল্লাহও তার থেকে মুক্ত। আর কোনো এলাকার অধিবাসীদের মধ্যে যদি এমন হয় যে, তাদের মধ্যে কোনো ব্যক্তি ক্ষুধার্ত অবস্থায় সকাল করে, তবে তাদের থেকে আল্লাহর জিম্মা উঠে যায়।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده ضعيف جدًّا لأجل عمرو بن الحصين العقيلي، فهو متروك الحديث كما قال الذهبي في "تلخيصه"، وقد وهم فيه فأسقط من إسناده أبا بشر بين أصبغ وأبي الزاهرية، وذكره يزيد بن هارون في روايته عن أصبغ المذكور، وأبو بشر هذا ليس هو جعفر بن إياس الثقة، وإنما هو رجل شامي، قال عنه ابن معين: لا شيء، وقال عنه أبو حاتم: لا أعرفه، وأصبغ بن زيد ثقة، ولم يُصب ابنُ عدي في عدّ هذا من منكراته، إذ ذكر له ثلاثة أحاديث أنكرها عليه، منها هذا وحديثان آخران، فأما هذا الحديث فالأولى أن يكون الحمل فيه على أبي بشر المذكور، وأما الحديثان الآخران فأحدهما يرويه أصبغ عن يحيى بن عبيد الله التيمي، وهو متروك الحديث، فالحمل عليه فيه أَولى من الحمل على أصبغ، وأما الحديث الآخر فقد توبع عليه عند أبي داود وغيره، فلا نكير عليه فيه، والله الموفق. فيبقى الشأن في هذا الحديث في أبي بشر الشامي، وقد قال أبو حاتم فيما نقله عنه ابنه في "العلل" (1174): هذا حديث منكر، وأبو بشر لا أعرفه. أبو الزاهرية: هو حُدير بن كُريب الحمصي.وأخرجه أحمد 8/ (4880) عن يزيد بن هارون، عن أصبغ بن زيد، عن أبي بشر، عن أبي الزاهرية، به.ويشهد للقسم الأول من الحديث حديث أبي هريرة الآتي بعده، غير أنه لا يُفرَح به لما سيأتي بيانه.وانظر شواهد القسم الثاني منه عند الحديث الآتي برقم (2196). السِّندي، عن محمد بن عمرو بن علقمة، به - دون قوله: "وقد برئ منه ذمةُ الله". وإسناده ضعيف لضعف أبي معشر، لكن يشهد لهذا القدر من الحديث حديث معمر بن عبد الله عند مسلم، وقد تقدَّمت الإشارة إليه بإثر الحديث (2192).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2195)


2195 - ما أخبرَناهُ محمد بن صالح بن هانئ، حدثنا إبراهيم بن إسحاق الغَسِيلي، حدثنا عبد الأعلى بن حماد النَّرْسِي، حدثنا حماد بن سَلَمة، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "مَن احتكَر يريدُ أن يُغاليَ بها على المسلمين، فهو خاطئٌ، وقد بَرِئ منه ذمةُ الله" [1]. ومنها:




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি মুসলমানদের উপর মূল্য বৃদ্ধি করার উদ্দেশ্যে মজুদদারি করে (احتকার), সে পাপী। আর আল্লাহর জিম্মা তার থেকে মুক্ত।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده ضعيف جدًّا من أجل إبراهيم بن إسحاق الغَسيلي، فقد قال ابن حبان: يسرق الحديث، وكذلك قال الذهبي في "تلخيصه". وقد رُوي الحديثُ من غير طريقه عن محمد بن عمرو - وهو ابن علقمة - لكن دون ذكر البراءة في آخره.فقد أخرجه أحمد 14/ (8617) عن سُريج بن النعمان، عن أبي معشر نجيح بن عبد الرحمن السِّندي، عن محمد بن عمرو بن علقمة، به - دون قوله: "وقد برئ منه ذمةُ الله". وإسناده ضعيف لضعف أبي معشر، لكن يشهد لهذا القدر من الحديث حديث معمر بن عبد الله عند مسلم، وقد تقدَّمت الإشارة إليه بإثر الحديث (2192).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2196)


2196 - ما أخبرَناه عبد العزيز بن عبد الرحمن الدَّبّاس بمكة، حدثنا محمد بن علي بن زيد الصائغ، حدثنا عبد العزيز بن يحيى، حدثنا سليمان بن بلال، عن علقمة بن أبي علقمة، عن أمّه، عن عائشة، أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "ليس بالمؤمنِ الذي يَبيتُ شبعانًا وجارُه جائعٌ إلى جَنْبِه" [1].ومنها:




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি পেট পূর্তি করে তৃপ্ত অবস্থায় রাত কাটায়, অথচ তার পার্শ্ববর্তী প্রতিবেশী ক্ষুধার্ত থাকে, সে মুমিন নয়।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده واهٍ بمرة، عبد العزيز بن يحيى - وهو المدني نزيلُ نيسابور - اتهمه البخاري وغيره بوضع الحديث وسرقته.وفي الباب ما يغني عنه كحديث ابن عباس الآتي عند المصنف برقم (7494)، وهو حديث حسن بمجموع شواهده، انظرها هناك. وقد روي عن عمر بن الخطاب من قوله بسند حسن: أنَّ احتكار الطعام بمكة إلحاد، فقيّده بمكة. أخرجه البخاري في "التاريخ الكبير" 7/ 255 - 256، والأزرقي في "أخبار مكة" 2/ 135، والفاكهي في "أخبار مكة" (1776)، وابن المنذر في "الأوسط" (7987).وعن عمر أيضًا قال: من جاء أرضنا بسلعةٍ فليبعها كما أراد، وهو ضيفي حتى يخرج، وهو أسوتنا، ولا يَبعْ في سوقنا محتكر. أخرجه عبد الرزاق (14901 - 14903)، وانظر تمام تخريجه عند الحديث (2193).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2197)


2197 - ما أخبرني إسماعيل بن محمد بن الفضل بن محمد، حدثنا جدّي، حدثنا إسماعيل بن أبي أُوَيس، حدثني محمد بن طلحة بن [1] عبد الرحمن بن طلحة، عن عبد الرحمن بن أبي بكر بن المغيرة، عن عمه اليَسَع بن المغيرة، قال: مَرَّ رسولُ الله صلى الله عليه وسلم برجلٍ بالسوق، يبيع طعامًا بسعرٍ هو أرخَصُ من سعر السوق، فقال له: "تبيعُ في سوقِنا بسعر هو أرخَصُ من سعرنا؟ " قال: نعم، قال: "صبرًا واحتسابًا؟ " قال: نعم، قال: "أبشِرْ، فإنَّ الجالِبَ إلى سوقِنا كالمجاهد في سبيل الله، والمحتكِرُ في سوقِنا كالمُلحِد في كتاب الله" [2]. ومنها:




আল-ইয়াসা' ইবনুল মুগীরাহ থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বাজারের মধ্যে এক ব্যক্তির পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন, যে ব্যক্তি বাজারের প্রচলিত মূল্যের চেয়ে কম দামে খাদ্যদ্রব্য বিক্রি করছিল। অতঃপর তিনি তাকে জিজ্ঞেস করলেন: "তুমি কি আমাদের বাজারে আমাদের মূল্যের চেয়ে কম মূল্যে বিক্রি করছো?" লোকটি বলল: হ্যাঁ। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "(এটা কি) সবর ও প্রতিদানের আশায়?" লোকটি বলল: হ্যাঁ। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তুমি সুসংবাদ গ্রহণ করো। কারণ, যে ব্যক্তি আমাদের বাজারে (পণ্য) আমদানি করে সে আল্লাহ্‌র পথে মুজাহিদের মতো, আর যে ব্যক্তি আমাদের বাজারে মজুদদারী করে সে আল্লাহ্‌র কিতাবে অবিশ্বাসকারীর (মু্লহিদের) মতো।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] تحرَّف في النسخ الخطية إلى: عن. وإنما هو محمد بن طلحة بن عبد الرحمن بن طلحة التيمي. وقد روي عن عمر بن الخطاب من قوله بسند حسن: أنَّ احتكار الطعام بمكة إلحاد، فقيّده بمكة. أخرجه البخاري في "التاريخ الكبير" 7/ 255 - 256، والأزرقي في "أخبار مكة" 2/ 135، والفاكهي في "أخبار مكة" (1776)، وابن المنذر في "الأوسط" (7987).وعن عمر أيضًا قال: من جاء أرضنا بسلعةٍ فليبعها كما أراد، وهو ضيفي حتى يخرج، وهو أسوتنا، ولا يَبعْ في سوقنا محتكر. أخرجه عبد الرزاق (14901 - 14903)، وانظر تمام تخريجه عند الحديث (2193).



[2] إسناده ضعيف لجهالة عبد الرحمن بن أبي بكر بن المغيرة، ولإرساله، لأنَّ اليسع تابعي صغير معروف، كما بينه الحافظ في "الإصابة" 6/ 722. وقول الذهبي رحمه الله: إسناده مظلم، فيه مجازفة منه. وقد روي عن عمر بن الخطاب من قوله بسند حسن: أنَّ احتكار الطعام بمكة إلحاد، فقيّده بمكة. أخرجه البخاري في "التاريخ الكبير" 7/ 255 - 256، والأزرقي في "أخبار مكة" 2/ 135، والفاكهي في "أخبار مكة" (1776)، وابن المنذر في "الأوسط" (7987).وعن عمر أيضًا قال: من جاء أرضنا بسلعةٍ فليبعها كما أراد، وهو ضيفي حتى يخرج، وهو أسوتنا، ولا يَبعْ في سوقنا محتكر. أخرجه عبد الرزاق (14901 - 14903)، وانظر تمام تخريجه عند الحديث (2193).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2198)


2198 - ما حدَّثَناه أبو بكر بن إسحاق الفقيه، أخبرنا محمد بن يونس، حدثنا عبد الصمد بن عبد الوارث، حدثنا زيدٌ أبو المُعلَّى.وحدثنا أبو بكر قال: وأخبرنا الحسين بن محمد بن زياد، حدثنا عَمرو بن علي، حدثنا المُعتمِر بن سليمان، قال: سمعتُ زيدًا أبا المُعلى يحدِّث عن الحسن، عن مَعقِل بن يَسار، قال: سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "مَن دَخَلَ في شيءٍ من أسعارِ المسلمين ليُغْليَ عليهم، كان حقًّا على الله أن يَقذِفَه في مُعظَمِ جهنَّم، رأسُه أسفلَه" [1].هذه الأحاديث الستة طلبتُها وخَرَّجتها في موضعها من هذا الكتاب احتسابًا لما فيه الناسُ من الضِّيق، والله يَكشِفُها، وإن لم يكن مِن شرط هذا الكتاب.




মা'কিল ইবনে ইয়াসার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "যে ব্যক্তি মুসলমানদের কোনো পণ্যের দামে হস্তক্ষেপ করে যাতে সে তাদের উপর দাম বাড়িয়ে দিতে পারে, আল্লাহর জন্য এটা অপরিহার্য যে তিনি তাকে জাহান্নামের গভীরতম অংশে নিক্ষেপ করবেন, তার মাথা নিচের দিকে থাকবে।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده جيد من جهة الحسين بن محمد بن زياد من أجل زيد أبي المعلَّى - وهو زيد بن مرة، ويقال: يزيد بن أبي ليلى - فهو صدوق لا بأس به، وفي الإسناد الآخر محمد بن يونس - وهو الكديمي - ضعيف جدًّا.وأخرجه أحمد 33/ (20313) عن عبد الصمد بهذا الإسناد. بلفظ: "فإنَّ حقًّا على الله أن يُقعده بعُظْم من النار يوم القيامة".ومُعظَم جهنم وعُظْمها: وسطُها، قال ابن سِيدَهْ: عُظْم الشيء ومُعظَمه: وسطُه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2199)


2199 - أخبرنا أحمد بن كامل، حدثنا عبد الملك بن محمد، حدثنا سعيد بن عامر وعفّان، قالا: حدثنا شعبة.وأخبرنا أبو عبد الله محمد بن يعقوب، حدثنا يحيى بن محمد، حدثنا مُسدَّد، حدثنا يزيد بن زُريع، حدثنا شعبة، عن بُرَيد بن أبي مريم، عن أبي الحَوْراء قال: سألتُ الحسنَ بن عليٍّ: ما يَذكُر من رسول الله صلى الله عليه وسلم؟ قال: سمعتُه يقول: "دَعْ ما يَريبُك إلى ما لا يَريبُك، فإنَّ الخيرَ اطمَأْنينةٌ، وإنَّ الشرَّ رِيبةٌ" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.وقد رُوي بلفظ آخر:




হাসান ইবনে আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (আবূল হাউরাকে) বলেন, আমি তাঁকে (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-কে) বলতে শুনেছি: "যা তোমাকে সন্দেহে ফেলে, তা তুমি ছেড়ে দাও এবং যা তোমাকে সন্দেহে ফেলে না তা গ্রহণ করো। কেননা কল্যাণ হলো মানসিক প্রশান্তি, আর পাপ হলো সন্দেহ।"




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] إسناده صحيح. عفان: هو ابن مسلم الصَّفّار، ويحيى بن محمد: هو ابن يحيى القطان، ومُسدَّد: هو ابن مُسَرْهَد، وأبو الحَوراء: هو ربيعة بن شيبان السَّعْدي، والحسن بن علي: هو ابن أبي طالب سِبْط رسول الله صلى الله عليه وسلم.وأخرجه أحمد 3/ (1723) و (1727)، والترمذي (2518)، والنسائي (5201)، وابن حبان (722) من طرق عن شعبة، بهذا الإسناد.وانظر ما بعده، وما سيأتي برقم (7223).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (2200)


2200 - حدَّثَناه أبو زكريا العَنْبري وأبو بكر بن جعفر وعلي بن عيسى وعبد الله بن سعد، قالوا: حدثنا محمد بن إبراهيم العَبْدي، حدثنا أبو صالح مَحْبوب بن موسى، حدثنا أبو إسحاق الفَزاري، عن الحسن بن عُبيد الله النَّخَعي، عن بُرَيد بن أبي مريم، عن أبي الحَوْراء، قال: قلتُ للحسن بن علي: مِثلُ مَن كنتَ في عهد رسول الله صلى الله عليه وسلم، وماذا عَقَلتَ عنه؟ قال: أتى رجلٌ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم، فسمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "دَع ما يَريبُك إلى ما لا يَريبُك، فإنَّ الشرَّ رِيبةٌ، والخيرَ اطمَأْنينةٌ" [1].شاهدُه حديث أبي أُمامة الباهِلي:




হাসান ইবনে আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবূ আল-হাওরা বলেন: আমি তাঁকে জিজ্ঞেস করলাম, "রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে আপনার বয়স কেমন ছিল এবং তাঁর থেকে আপনি কী কী মুখস্থ রেখেছেন/বুঝেছেন?" তিনি বললেন: এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এলেন, তখন আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনলাম: "যা তোমাকে সন্দেহে ফেলে, তা পরিহার করে যা তোমাকে সন্দেহে ফেলে না, তার দিকে যাও। কারণ মন্দ হলো সন্দেহ, আর ভালো হলো প্রশান্তি (বা নিশ্চয়তা)।” এর সমর্থক হাদীস হলো আবূ উমামাহ আল-বাহিলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর হাদীস।




تحقيق الشيخ د. محمد كامل قرة بلي:
[1] حديث صحيح، وهذا إسناد قوي من أجل محبوب بن موسى. أبو إسحاق الفَزاري: هو إبراهيم بن محمد بن الحارث.وأخرجه البيهقي في "شعب الإيمان" (5363) عن أبي عبد الله الحاكم، عن أبي زكريا العنبري وحده، بهذا الإسناد.وأخرجه الطبراني (2708)، وعنه أبو نعيم في "الحلية" 8/ 264 عن هاشم بن مرثد الطبراني، عن أبي صالح الفراء - وهو محبوب - به.