হাদীস বিএন


আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম





আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3781)


3781 - أخبرني أحمد بن محمد العَنَزي، حَدَّثَنَا عثمان بن سعيد الدارمي، حَدَّثَنَا إبراهيم بن أبي الليث، حَدَّثَنَا الأشجعيُّ، عن سفيان، عن خُصَيف، عن عِكْرمة، عن ابن عبَّاس في قوله عز وجل: {وَفِي عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الرِّيحَ الْعَقِيمَ} [الذاريات: 41]، قال: التي لا تُلقِحُ شيئًا [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, মহান আল্লাহর বাণী, "আর আদ জাতির ঘটনা স্মরণ কর, যখন আমি তাদের উপর প্রেরণ করেছিলাম বন্ধ্যা বাতাস (আর-রিহুল আকীম) [সূরা যারিয়াত: ৪১]" প্রসঙ্গে তিনি বলেন: এটি সেই বাতাস যা কোনো কিছুতে ফলন বা গর্ভ সঞ্চার করে না।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده حسن في المتابعات والشواهد، إبراهيم بن أبي الليث وخصيف - وهو ابن عبد الرحمن الجزري - مختلف فيهما، وهما متابعان. الأشجعي: هو عبيد الله بن عبيد الرحمن، وسفيان: هو الثوري.وأخرجه الطبري في "تفسيره" 27/ 4 من طريق مهران بن أبي عمر الرازي، عن سفيان الثوري، بهذا الإسناد.وأخرجه ابن أبي الدنيا في "المطر والرعد والبرق" (175) من طريق إسرائيل، عن خصيف، به.وأخرجه الطبري 4/ 27 بإسناد العوفيّين عن ابن عبَّاس. وفيه ضعف.وأخرجه أبو الشيخ في "العظمة" (853) من طريق جويبر بن سعيد الأزدي، عن الضحاك بن مزاحم، عن ابن عبَّاس. وجويبر ضعيف جدًّا.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3782)


3782 - أخبرَناه عبد الله بن محمد بن إسحاق الخُزاعي بمكة، حَدَّثَنَا أبو يحيى بن أبي مَسَرَّة، حَدَّثَنَا يحيى بن محمد الجارِيّ، حدثني عبد الله بن الحارث بن فُضَيل الخطمي، عن أبيه، عن جابر بن عبد الله قال: كان من دعاء النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم: "اللهم إني أعوذُ بك من شرِّ الرِّيح ومن شرِّ ما تجيءُ به الريحُ، ومن ريح الشَّمالِ [1]، فإنها الريحُ العَقِيم" [2].بسم الله الرحمن الرحيم ‌‌52 - ومن سورة الطُّور




জাবির ইবনে আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর দু‘আর মধ্যে ছিল: "হে আল্লাহ! আমি আপনার নিকট বাতাসের অনিষ্ট থেকে, এবং বাতাস যা নিয়ে আসে তার অনিষ্ট থেকে, এবং উত্তর দিক থেকে আগত বাতাসের অনিষ্ট থেকে আশ্রয় চাই। কারণ এটি হলো বন্ধ্যা বাতাস।"




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] في (ز) ومن شر الشمال. وأخرجه أحمد 19/ (12505) و (12558) عن حسن بن موسى الأشيب، ومسلم (162) (259) عن شيبان بن فرُّوخ، كلاهما عن حماد بن سلمة، به - وهو عند مسلم والموضع الأول عند أحمد ضمن حديث المعراج الطويل. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وأخرجه كذلك ضمن حديث المعراج: أحمد 29/ (17833) و (17836)، والبخاري معلَّقًا (3207)، ومسلم (164) (264)، والنسائي في "المجتبى" (448) من طريق قتادة، عن أنس، عن مالك بن صعصعة.



[2] إسناده ضعيف لانقطاعه، فإنَّ الحارث بن فضيل لم يدرك جابرًا، ويحيى بن محمد الجاريّ ضعيف في التفرّد.ولم نقف عليه مخرَّجًا عند غير المصنّف.وقد روي في باب الاستعاذة من شر الريح غير ما حديثٍ، انظر حديث أبي هريرة في "مسند أحمد" 12/ (7413)، وسيأتي عند المصنّف برقم (7850) ومنها حديث أُبيٍّ المتقدم برقم (3112). وأخرجه أحمد 19/ (12505) و (12558) عن حسن بن موسى الأشيب، ومسلم (162) (259) عن شيبان بن فرُّوخ، كلاهما عن حماد بن سلمة، به - وهو عند مسلم والموضع الأول عند أحمد ضمن حديث المعراج الطويل. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وأخرجه كذلك ضمن حديث المعراج: أحمد 29/ (17833) و (17836)، والبخاري معلَّقًا (3207)، ومسلم (164) (264)، والنسائي في "المجتبى" (448) من طريق قتادة، عن أنس، عن مالك بن صعصعة.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3783)


3783 - حَدَّثَنَا أبو سعيد أحمد بن يعقوب الثَّقَفي، حَدَّثَنَا محمد بن أيوب، أخبرنا سَهْل بن بكَّار، حَدَّثَنَا عبد العزيز بن عبد الصمد العَمِّي، حَدَّثَنَا عطاء بن السائب، عن سعيد بن جُبير، عن ابن عبَّاس في قوله عز وجل: {وَالطُّورِ}، قال: جَبلٌ [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহ তাআলার বাণী: {وَالطُّورِ} (ওয়া আত-তূর - শপথ তূর পর্বতের) সম্পর্কে তিনি বলেন, (তূর হলো) একটি পর্বত।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] رجاله ثقات.وأخرجه ابن أبي حاتم في "تفسيره" 1/ 129 و 4/ 1105 من طريق إبراهيم بن مهدي المصيصي، عن أبي عبد الصمد عبد العزيز العمِّي، بهذا الإسناد. وأخرجه أحمد 19/ (12505) و (12558) عن حسن بن موسى الأشيب، ومسلم (162) (259) عن شيبان بن فرُّوخ، كلاهما عن حماد بن سلمة، به - وهو عند مسلم والموضع الأول عند أحمد ضمن حديث المعراج الطويل. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وأخرجه كذلك ضمن حديث المعراج: أحمد 29/ (17833) و (17836)، والبخاري معلَّقًا (3207)، ومسلم (164) (264)، والنسائي في "المجتبى" (448) من طريق قتادة، عن أنس، عن مالك بن صعصعة.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3784)


3784 - حَدَّثَنَا محمد بن صالح بن هانئ، حَدَّثَنَا الحسين بن الفَضْل البَجَلي، حَدَّثَنَا عفّان وسليمان بن حَرْب، قالا: حَدَّثَنَا حماد بن سَلَمة، عن ثابت البُناني، عن أنس، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال: "البيتُ المعمورُ في السماء السابعة، يَدخلُه كلَّ يومٍ سبعون ألفَ مَلَكٍ، لا يعودون إليه حتَّى تقومَ الساعةُ" [1]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه!




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আল-বাইতুল মা'মুর (আবাদকৃত ঘর) সপ্তম আকাশে অবস্থিত। প্রতিদিন সেখানে সত্তর হাজার ফেরেশতা প্রবেশ করে, যারা কিয়ামত প্রতিষ্ঠিত না হওয়া পর্যন্ত আর সেখানে ফিরে আসে না।"




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده صحيح. عفان: هو ابن مسلم.وأخرجه النسائي (11466) عن إسحاق بن إبراهيم - وهو ابن راهويه - عن عفان وحده، بهذا الإسناد. وأخرجه أحمد 19/ (12505) و (12558) عن حسن بن موسى الأشيب، ومسلم (162) (259) عن شيبان بن فرُّوخ، كلاهما عن حماد بن سلمة، به - وهو عند مسلم والموضع الأول عند أحمد ضمن حديث المعراج الطويل. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وأخرجه كذلك ضمن حديث المعراج: أحمد 29/ (17833) و (17836)، والبخاري معلَّقًا (3207)، ومسلم (164) (264)، والنسائي في "المجتبى" (448) من طريق قتادة، عن أنس، عن مالك بن صعصعة.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3785)


3785 - أخبرني أبو بكر بن أبي نَصْر المروَزي، حَدَّثَنَا أحمد بن محمد بن عيسى القاضي، حَدَّثَنَا أبو نُعيم وأبو حُذيفة قالا: حَدَّثَنَا سفيان، عن سِمَاك بن حَرْب، عن خالد بن عَرعَرة، عن علي بن أبي طالب في قوله: {وَالسَّقْفِ الْمَرْفُوعِ} [الطور: 5]، قال: السَّماءُ [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আলী ইবনে আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর বাণী, {আর সমুন্নত ছাদের} [সূরা আত-তূর: ৫] সম্পর্কে তিনি বলেন: (তা হলো) আসমান।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده حسن من أجل سماك بن حرب وخالد بن عرعرة. أبو نعيم: هو الفضل بن دُكين، وأبو حذيفة: هو موسى بن مسعود النهدي، وسفيان: هو الثوري.وأخرجه الطبري في "تفسيره" 27/ 18، وأبو الشيخ في "العظمة" (548) من طريقين آخرين عن سفيان الثوري، بهذا الإسناد.وأخرجه إسحاق بن راهويه في "مسنده" كما في "المطالب العالية" (3730)، والطبري 27/ 18، والبيهقي في "شعب الإيمان" (3704) من طرق عن سماك، به.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3786)


3786 - أخبرنا محمد بن علي الصَّنعاني بمكة، حَدَّثَنَا إسحاق بن إبراهيم بن عبَّاد، أخبرنا عبد الرزاق، أخبرنا الثَّوْري، عن عمرو بن مُرَّة، عن سعيد بن جُبير، عن ابن عبَّاس في قوله عز وجل: {أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّاتِهِم [1] وَمَا أَلَتْنَاهُم} [الطور: 21]، قال: إِنَّ الله يَرفعُ ذريةَ المؤمن معه في درجتِه في الجنة، وإن كانوا دونَه في العمل، ثم قرأ: {وَالَّذِينَ آمَنُوا وَاتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُمْ بِإِيمَانٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَا أَلَتْنَاهُمْ}، يقول: وما نَقَصْناهم [2].بسم الله الرحمن الرحيم ‌‌53 - ومن سورة (والنَّجم)




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, মহান আল্লাহর বাণী, "আমি তাদের সাথে তাদের সন্তান-সন্ততিকে মিলিত করে দেব এবং তাদের কর্মফল আমি একটুও হ্রাস করব না" [সূরা আত-তূর: ২১] সম্পর্কে তিনি বলেন: আল্লাহ তা‘আলা মু'মিনের সন্তান-সন্ততিকে জান্নাতে তার সাথে তার মর্যাদার স্তরে উন্নীত করবেন, যদিও আমলে তারা তার চেয়ে নিম্নমানের হয়। এরপর তিনি পাঠ করেন: "আর যারা ঈমান এনেছে এবং যাদের সন্তান-সন্ততি ঈমানের সাথে তাদেরকে অনুসরণ করেছে, আমি তাদের সাথে তাদের সন্তান-সন্ততিকে মিলিত করে দেব এবং তাদের কর্মফল আমি একটুও হ্রাস করব না"। তিনি বলেন: অর্থাৎ: তাদের (মর্যাদা) আমি হ্রাস করব না। (বিসমিল্লাহির রাহমানির রাহিম, ৫৩ - সূরা ওয়ান-নাজম থেকে)




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] قرأها بالجمع: (ذرياتهم) من السبعة نافع وابن عامر وأبو عمرو، وكذا قرأها ابن عامر وأبو عمرو قوله: (واتبعتهم ذرياتهم) على الجمع، لكن قرأ أبو عمرو وحده (وأتبعناهم) ونصب (ذرياتهم).انظر "السبعة في القراءات" لابن مجاهد ص 612.



[2] خبر صحيح، وهذا إسناد رجاله ثقات وظاهره الاتصال، إلّا أنه قد روي عن سفيان من غير وجه فأدخل بينه وبين عمرو بن مرة راويًا اسمه سماعة، وسماعة هذا لم يرو عنه غير الثوري وذكره ابن حبان في "ثقاته"، وقال أبو حاتم الرازي كما في "الجرح والتعديل" 4/ 324: أرى حديثه مستقيمًا. وسفيان الثوري معروف بالرواية عن عمرو بن مرة وبسماعه منه أيضًا، وعلى كل حال فإنَّ هذا الخبر قد رواه شعبةُ أيضًا عن عمرو بن مرة عند الطحاوي في "مشكل الآثار" 3/ 105، وانظر تمام تخريجه فيه.وأخرجه البيهقي في "السنن" 10/ 268 و "القضاء والقدر" (636) عن أبي عبد الله الحاكم، بهذا الإسناد. وهو في "تفسير عبد الرزاق" 2/ 247.وأخرجه الطبري 27/ 25، والطحاوي 3/ 106، والبيهقي في "القضاء والقدر" (637) من طريق محمد بن بشر، والطحاوي 3/ 107 من طريق الفريابي، كلاهما عن سفيان، به - وبعض الرواة عن محمد بن بشر رفعه إلى النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم، ولا يصحُّ رفعه.وأخرجه البزار (2260 - كشف الأستار)، والطحاوي 3/ 107، وأبو نعيم في "الحلية" 4/ 302 من طريق قيس بن الربيع، عن عمرو بن مرة، به - وبعض الرواة عن قيس رفعه أيضًا، ولا يصح، وقيس بن الربيع فيه ضعفٌ.وأخرج معناه الطبراني في "الصغير" (640)، و "الكبير" (12248) من طريق سالم الأفطس، عن سعيد بن جبير، عن ابن عبَّاس، وشكَّ في رفعه. وإستادة تالف، فيه محمد بن عبد الرحمن بن غزوان، وهو متَّهم بالوضع. وأخرجه الترمذي (575) عن هارون بن عبد الله البزاز عن عبد الصمد بن عبد الوارث، بهذا الإسناد. وقال: حديث حسن صحيح.وأخرجه البخاري (1071) و (4863)، وابن حبان (2763) من طرق عن عبد الوارث بن سعيد، به. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3787)


3787 - حَدَّثَنَا أبو محمد عبد الله بن إسحاق المقرئ العَدْل، حَدَّثَنَا عبد الملك بن محمد، حَدَّثَنَا عبد الصمد بن عبد الوارث، حدثني أَبي، حَدَّثَنَا أيوب، عن عِكْرمة، عن ابن عبَّاس: أنَّ النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم سَجَدَ فيها - يعني: {وَالنَّجْمِ}. وسَجَدَ فيها المسلمون والمشركون والجنُّ والإنسُ [1]. صحيح على شرط البخاري، ولم يخرجاه بهذه السياقة!




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এতে —অর্থাৎ, সূরাহ আন-নাজম-এ— সিজদা করেছিলেন। আর মুসলিম, মুশরিক, জিন ও মানুষ এতে সিজদা করেছিল।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] حديث صحيح، وهذا إسناد قوي من أجل عبد الملك بن محمد: وهو أبو قِلابة الرَّقَاشي.أيوب: هو ابن أبي تميمة السَّختياني. وأخرجه الترمذي (575) عن هارون بن عبد الله البزاز عن عبد الصمد بن عبد الوارث، بهذا الإسناد. وقال: حديث حسن صحيح.وأخرجه البخاري (1071) و (4863)، وابن حبان (2763) من طرق عن عبد الوارث بن سعيد، به. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3788)


3788 - أخبرنا أبو زكريا العَنبَري، حَدَّثَنَا محمد بن عبد السلام، حَدَّثَنَا إسحاق، أخبرنا يحيى بن آدم، أخبرنا إسرائيل، عن أبي إسحاق، عن عبد الرحمن بن يزيد، عن عبد الله في قوله عز وجل: {مَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَى} [النجم: 11]، قال: رأى رسولُ الله صلى الله عليه وسلم جبريل في حُلَّةِ رَفْرفٍ قد مَلأَ ما بين السماءِ والأرض [1].صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.




আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহ্ তা'আলার বাণী: {মَا كَذَبَ الْفُؤَادُ مَا رَأَى} [সূরা নাজম: ১১] সম্পর্কে তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জিবরীল (আঃ)-কে এমন এক সবুজ রেশমি পোশাকে দেখেছিলেন, যা আসমান ও জমিনের মধ্যবর্তী স্থান পূর্ণ করে রেখেছিল।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده صحيح. إسحاق: هو ابن راهويه، وأبو إسحاق: هو عمرو بن عبد الله السبيعي، وعبد الله: هو ابن مسعود.وأخرجه أحمد 6/ (3740) و 7 / (3971) عن يحيى بن آدم، بهذا الإسناد.وأخرجه الترمذي (3283)، والنسائي (11467)، وابن حبان (59) من طرق عن إسرائيل بن يونس، به - إلّا أنه وقع في رواية ابن حبان: حلة من ياقوت.وأخرجه النسائي (11477) من طريق شريك بن عبد الله النخعي، عن أبي إسحاق، به.وأخرج أحمد 7/ (4289)، والبخاري (3233) و (4858) وغيرهما من حديث الأعمش في قوله تعالى: {لَقَدْ رَأَى مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الكُبْرَى} [النجم: 18] عن إبراهيم النخعي، عن علقمة، عن عبد الله بن مسعود قال: رأى النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم رفرفًا أخضر من الجنة قد سدَّ الأُفق.والرفرف: ما كان من الثياب من الديباج وغيره رقيقًا حسن الصنعة.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3789)


3789 - أخبرنا أبو زكريا العَنبَري، حَدَّثَنَا محمد بن عبد السلام، حَدَّثَنَا إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا معاذ بن هشام، حَدَّثَنَا أَبي، عن قَتَادة، عن عِكْرمة، عن ابن عبَّاس قال: أَتعجَبون أن تكون الخُلَّةُ لإبراهيم، والكلامُ لموسى، والرُّؤيةُ لمحمدٍ؛ صلوات الله عليهم أجمعين [1]. هذا حديث صحيح على شرط البخاري، ولم يُخرجاه.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বললেন: তোমরা কি আশ্চর্য হও যে, ইব্রাহিম (আঃ)-এর জন্য আল্লাহর সাথে বিশেষ বন্ধুত্ব (খুল্লাহ্), মূসা (আঃ)-এর জন্য আল্লাহর সাথে কথোপকথন (কালাম) এবং মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর জন্য আল্লাহর দর্শন (রুইয়াহ্) ছিল? তাঁদের সকলের উপর আল্লাহর রহমত বর্ষিত হোক।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده صحيح. وهو مكرر (3151).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3790)


3790 - حَدَّثَنَا أبو العبَّاس محمد بن يعقوب، حَدَّثَنَا أحمد بن عبد الجبار، حَدَّثَنَا يونس بن بُكَير، عن محمد بن إسحاق، عن يحيى بن عبّاد بن عبد الله بن الزُّبير، عن أبيه، عن جدَّته أسماء بنت أبي بكر قالت: سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول يَصِفُ سِدْرةَ المُنتهى قال: "يسيرُ الراكبُ في الفَنَن منها مئةَ سنة، يَستظلُّ بالفَنَن مئةُ راكبٍ، فيها فَراشٌ من ذهب" [1].هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه.




আসমা বিনত আবী বকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে সিদরাতুল মুনতাহার বর্ণনা দিতে শুনেছি। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "এর (সিদরাতুল মুনতাহার) একটি ডালে (শাখায়) একজন আরোহী একশত বছর ধরে চলতে পারবে, এবং একশত আরোহী এর একটি ডালের নিচে আশ্রয় নিতে পারবে, তাতে সোনার ফরাশ (বিছানা/আচ্ছাদন) রয়েছে।"




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده حسن إن شاء الله، ومحمد بن إسحاق - وإن كان عُرف بالتدليس - قد صرَّح بسماعه من يحيى بن عباد عند هناد في "الزهد" (115) وابن عساكر في "تاريخ دمشق" 51/ 187.وأخرجه الترمذي (2541) عن أبي كريب محمد بن العلاء، عن يونس بن بكير، بهذا الإسناد - وبيَّن فيه أنَّ قوله: "يستظل بظلها مئة راكب" هو شكٌّ من راويه يحيى بن عباد، وزاد في آخره: "كأنَّ ثمرها القِلال". وقال: هذا حديث حسن صحيح غريب.وفي الباب عن أبي هريرة مرفوعًا: "إنَّ في الجنة لشجرة يسير الراكب في ظلها مئة عام لا يقطعها".أخرجه البخاري (4881)، ومسلم (2826).وعن أنس بن مالك عن مالك بن صعصعة في حديث المعراج الطويل: "ورُفعت لي سدرة المنتهى، فإذا نَبِقُها (أي: ثمرها) كأنه قِلال هجر". أخرجه البخاري (3207)، وهو عند مسلم (162) (259) من حديث أنس لم يذكر مالك بن صعصعة والقُلَّة: الجرَّة العظيمة.وأخرج مسلم (173) (279) عن عبد الله بن مسعود أنه تلا قوله تعالى: {إِذْ يَغْشَى السِّدْرَةَ مَا يَغْشَى} [النجم: 16] فقال: فَراشٌ من ذهب. البَطين، عن ابن عبَّاس. ومسلم البطين لم يدرك ابن عبَّاس.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3791)


3791 - أخبرنا أبو بكر محمد بن عبد الله الشافعي، حَدَّثَنَا إسحاق بن الحسن، حَدَّثَنَا أبو حُذَيفة، حَدَّثَنَا سفيان عن منصور، عن مجاهد، عن ابن عبَّاس في قوله: {مَا زَاغَ الْبَصَرُ} قال: ما ذهب يمينًا ولا شمالًا {وَمَا طَغَى} [النجم: 17] قال: ما جاوَزَه [1]. هذا حديث صحيح على شرط البخاري، ولم يُخرجاه.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহ তাআলার বাণী— {দৃষ্টি বিভ্রম হয়নি (মা যা-গাল বাছারু)} প্রসঙ্গে তিনি বলেন: (দৃষ্টি) ডান দিকেও যায়নি, বাম দিকেও যায়নি। এবং {সীমা অতিক্রমও করেনি (ওয়া মা তাগা)} [সূরা নাজম: ১৭] প্রসঙ্গে তিনি বলেন: (নবীজির দৃষ্টি) তা অতিক্রম করে যায়নি।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده حسن إن كان أبو حذيفة - وهو موسى بن مسعود النهدي - حفظه عن سفيان الثوري، فإنه قد وقع في روايته عنه أخطاء، وقد خالفه أبو أحمد الزبيري ومهران الرازي عند الطبري في "التفسير" 27/ 57 فروياه عن سفيان الثوري، عن منصور بن المعتمر، عن مسلم البَطين، عن ابن عبَّاس. ومسلم البطين لم يدرك ابن عبَّاس.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3792)


3792 - أخبرني عبد الله بن الحسين القاضي بمَرْو، حَدَّثَنَا الحارث بن أبي أسامة، حَدَّثَنَا رَوْح بن عُبادة، حَدَّثَنَا زكريا بن إسحاق المكِّي، عن عمرو بن دِينار، عن عطاءٍ [1]، عن ابن عبّاس في قوله عز وجل: {الَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَائِرَ الْإِثْمِ وَالْفَوَاحِشَ إِلَّا اللَّمَمَ} [النجم: 32]، يُلِمُّ بها ثم يتوبُ منها، قال ابن عَبَّاس: كان النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم يقول:"إنْ تَغفِرِ اللهمَّ تَغفِرْ جَمّا … وأيُّ عبدٍ لكَ لا أَلمّا" [2]هذا حديث صحيح على شرط الشيخين ولم يُخرجاه.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহ তা‘আলার বাণী: {যারা ছোটখাটো পাপ ছাড়া গুরুতর পাপ ও অশ্লীলতা বর্জন করে} [সূরা নজম: ৩২] এর ব্যাখ্যায় তিনি বলেন, সে (অর্থাৎ বান্দা) তা (সামান্য পাপ) করে ফেলে, অতঃপর তা থেকে তওবা করে। ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, নবী কারীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলতেন:

"হে আল্লাহ! আপনি যদি ক্ষমা করেন, তবে আপনি সাধারণভাবে (সবই) ক্ষমা করেন,
আর আপনার এমন কোন্ বান্দা আছে যে কখনও ত্রুটি/ভুল করেনি?"




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] زاد في المطبوع: بن يسار، والذي في نسخنا الخطية وكذا في "تلخيص الذهبي": عطاء، مهملًا، وسيأتي مكررًا بهذا الإسناد برقم (7812) مهملًا أيضًا، والظاهر أنه عطاء بن أبي رباح وليس عطاء بن يسار، وإن كان عمرو بن دينار المكي يروي عن كليهما، إلّا أنه في الإطلاق يروي عن ابن أبي رباح، وإذا روى عن عطاء بن يسار قيّده. ورواه عاصم بن بهدلة بنحوه عن أبي الضحى، واختلف عليه في رفعه ووقفه، والموقوف أصح كما قال الدارقطني في "العلل".أخرجه من طريق عاصم بن بهدلة مرفوعًا أحمد في "مسنده" 7/ (3912) من طريق همام بن يحيى، عنه، عن أبي الضحى، به. وانظر تتمة تخريجه فيه.ورواه موقوفًا زكريا بن أبي زائدة، عن عامر الشعبي، عن مسروق، عن ابن مسعود. أخرجه الخرائطي في "اعتلال القلوب" (179)، و"مساوئ الأخلاق" (500). وإسناده صحيح.



[2] صحيح موقوفًا كما سلف بيانه برقم (181)، وهذا إسناد صحيح رجاله ثقات. وسيأتي مكررًا برقم (7812). ورواه عاصم بن بهدلة بنحوه عن أبي الضحى، واختلف عليه في رفعه ووقفه، والموقوف أصح كما قال الدارقطني في "العلل".أخرجه من طريق عاصم بن بهدلة مرفوعًا أحمد في "مسنده" 7/ (3912) من طريق همام بن يحيى، عنه، عن أبي الضحى، به. وانظر تتمة تخريجه فيه.ورواه موقوفًا زكريا بن أبي زائدة، عن عامر الشعبي، عن مسروق، عن ابن مسعود. أخرجه الخرائطي في "اعتلال القلوب" (179)، و"مساوئ الأخلاق" (500). وإسناده صحيح.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3793)


3793 - أخبرنا أبو زكريا العَنبَري، حَدَّثَنَا محمد بن عبد السلام، حَدَّثَنَا إسحاق، أخبرنا عبد الرزاق، أخبرنا مَعمَر، عن الأعمش، عن أبي الضُّحى، عن مسروق، أنَّ ابن مسعود قال في قوله عز وجل: {إِلَّا اللَّمَمَ}، قال: زنى العين النَّظَرُ، وزنى الشَّفَتين التقبيلُ، وزنى اليدين البطشُ، وزنى الرِّجلين المشيُ، ويصدِّقُ ذلك أو يكذِّبُه الفَرْجُ، فإن تقدَّم بفَرْجِه كان زانيًا، وإلَّا فهو اللَّمَمُ [1]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.




আব্দুল্লাহ ইবনে মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহ্ আযযা ওয়া জাল্লার বাণী: {তবে ছোটখাটো অপরাধ ব্যতীত} সম্পর্কে তিনি বলেন: চোখের যিনা হলো দৃষ্টিপাত করা, দুই ঠোঁটের যিনা হলো চুম্বন করা, দুই হাতের যিনা হলো স্পর্শ বা আঘাত করা, আর দুই পায়ের যিনা হলো হেঁটে যাওয়া। আর গুপ্তাঙ্গ (যোনি) একে সত্যায়িত করে অথবা মিথ্যা প্রতিপন্ন করে। যদি সে তার গুপ্তাঙ্গের সাথে অগ্রসর হয়, তবে সে যেনাকারী, আর তা না হলে এটা কেবল ছোটখাটো ত্রুটি (আল-লামাম)।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده صحيح. إسحاق: هو ابن راهويه، وأبو الضُّحى: هو مسلم بن صُبَيح.وأخرجه البيهقي في "شعب الإيمان" (6659) عن أبي عبد الله الحاكم، بهذا الإسناد.وهو في "تفسير عبد الرزاق" 2/ 255.ورواه عن الأعمش أيضًا أبو بكر بن عياش كما ذكر الدارقطني في "العلل" 5/ (856). ورواه عاصم بن بهدلة بنحوه عن أبي الضحى، واختلف عليه في رفعه ووقفه، والموقوف أصح كما قال الدارقطني في "العلل".أخرجه من طريق عاصم بن بهدلة مرفوعًا أحمد في "مسنده" 7/ (3912) من طريق همام بن يحيى، عنه، عن أبي الضحى، به. وانظر تتمة تخريجه فيه.ورواه موقوفًا زكريا بن أبي زائدة، عن عامر الشعبي، عن مسروق، عن ابن مسعود. أخرجه الخرائطي في "اعتلال القلوب" (179)، و"مساوئ الأخلاق" (500). وإسناده صحيح.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3794)


3794 - حَدَّثَنَا الشيخ أبو بكر بن إسحاق، أخبرنا عُبيد بن شَريك البزّار، حَدَّثَنَا يحيى بن عبد الله بن بُكَير، حَدَّثَنَا الليث بن سعد، عن ابن عَجْلان، عن القعقاع بن حَكيم، عن أبي صالح، عن أبي هريرة، عن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "على كلِّ نفس من ابن آدم كُتِبَ حظٌّ من الزنى أَدرَكَ ذلك لا مَحالةَ، فالعينُ زِناها النظرُ، والرِّجلُ زناها المشيُ، والأُذنُ زناها الاستماعُ، واليدُ زناها البطشُ واللِّسانُ زناه الكلامُ، والقلبُ أن يتمنَّى، ويصدِّق ذلك أو يكذِّبُه الفَرْجُ" [1]. هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه!




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: আদম সন্তানের প্রত্যেকের উপর তার ব্যভিচারের অংশ লিপিবদ্ধ করা হয়েছে, যা সে অবশ্যই প্রাপ্ত হবে। সুতরাং, চোখের ব্যভিচার হলো তাকানো, পায়ের ব্যভিচার হলো হেঁটে যাওয়া, কানের ব্যভিচার হলো শ্রবণ করা, হাতের ব্যভিচার হলো স্পর্শ করা (বা আঘাত করা), আর জিহ্বার ব্যভিচার হলো কথা বলা। আর অন্তর কামনা করে, এবং লজ্জাস্থান সেটিকে সত্যায়িত করে অথবা মিথ্যা প্রমাণিত করে।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] حديث صحيح، وهذا إسناد قوي من أجل عبيد بن شريك - وهو عبيد بن عبد الواحد بن شريك - ومن أجل محمد بن عجلان. أبو صالح: هو ذكوان السَّمّان.وأخرجه أحمد 14 / (8932)، وأبو داود (2154) عن قتيبة بن سعيد، وابن حبان (4423) من طريق عيسى بن حماد، كلاهما عن الليث بن سعد، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 14 / (8526) و 16 / (10920)، ومسلم (2657) (21)، وأبو داود (2153) من طريق سهيل بن أبي صالح، عن أبيه، به فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وأخرجه بنحوه أحمد 13/ (7719)، والبخاري (6243) و (6612)، ومسلم (2657) (20)، وأبو داود (2152)، والنسائي (11480)، وابن حبان (4420) من طريق طاووس، عن ابن عبَّاس، عن أبي هريرة.وأخرجه كذلك أحمد 13 / (8215)، وابن حبان (4421) من طريق همام بن منبّه، وأحمد 14/ (8356) من طريق الحسن البصري، و (8539) من طريق أبو رافع، و (8598) من طريق عبد الرحمن الأعرج - وهو عند ابن حبان أيضًا (4422) و (8843) من طريق عبد الرحمن بن يعقوب - وهو عند ابن حبان أيضًا (4419) - و 15/ (9563) من طريق أبي سلمة، جميعهم عن أبي هريرة - وبعضهم يزيد فيه على بعض.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3795)


3795 - أخبرنا محمد بن الحسن الكارِزِيّ [1]، حَدَّثَنَا علي بن عبد العزيز، حَدَّثَنَا معلَّى بن أَسَد، حَدَّثَنَا وُهَيب، عن داود، عن عِكْرمة، عن ابن عبَّاس قال: سِهامُ الإسلام ثلاثون سَهمًا، لم يُتمِّمْها أحدٌ قبل إبراهيم، قال الله عز وجل: {وَإِبْرَاهِيمَ الَّذِى وَفَّى} [النجم: 37] [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: ইসলামের নীতিসমূহ ত্রিশটি। ইব্রাহীম (আঃ)-এর পূর্বে আর কেউ তা পরিপূর্ণভাবে সম্পন্ন করেননি। আল্লাহ্ তা'আলা বলেন: {আর ইব্রাহীম, যে (কর্তব্য) পূর্ণ করেছিল।} [সূরা নাজম: ৩৭]




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] هكذا في (ز) و (ب)، وهو الصواب، نسبة إلى كارِز قرية بنواحي نيسابور كما في "الأنساب" للسمعاني، وذكر في المشهورين بالانتساب إليها شيخ المصنّف هذا وسماه أبا الحسن محمد بن محمد بن الحسن بن الحارث. وفي (ص) و (ع): الكارزني، بزيادة نون، وهو خطأ هنا، والكارْزَني نسبة إلى قرية من قرى سمرقند كما في "الإنساب".



[2] إسناده صحيح. وهيب: هو ابن خالد، وداود: هو ابن أبي هند.وأخرجه الطبري في "تفسيره" 1/ 524 و 27/ 73، وكذا ابن أبي حاتم 1/ 220، وابن عساكر في "تاريخ دمشق" 40/ 134 من طرق عن داود بن أبي هند، بهذا الإسناد.وسيأتي برقم (4071) من طريق عبد الوهاب بن عطاء عن داود بن أبي هند.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3796)


3796 - حدثني علي بن عيسى، حَدَّثَنَا محمد بن النَّضْر الجارُودي، حَدَّثَنَا نَصْر بن علي، حَدَّثَنَا المعتمِر بن سليمان، عن أبيه، عن عطاء بن السائب، عن عِكْرمة، عن ابن عبَّاس قال: لما نزلت {سَبِّحِ اسْمَ رَبِّكَ الْأَعْلَى}، قال: "كلُّها في صُحُف إبراهيم"، فلما نزلت {وَالنَّجْمِ إِذَا هَوَى}، فَبَلَغَ {وَإِبْرَاهِيمَ الَّذِى وَفَّى} قال: "وَفَّى"، {أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَى} إلى قوله: {هَذَا نَذِيرٌ مِنَ النُّذْرِ الأُولَى} [النجم: 37 - 56] [1].هذا حديث صحيح الإسناد ولم يُخرجاه.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, যখন (সূরা) 'সাব্বিহিসমা রাব্বিকাল আ’লা' নাযিল হলো, তখন তিনি বললেন, এর সবটুকুই ইব্রাহিমের সহীফাসমূহে ছিল। অতঃপর যখন (সূরা) 'ওয়ান্নাজমি ইযা হাওয়া' নাযিল হলো এবং (আল্লাহ) যখন {وَإِبْرَاهِيمَ الَّذِى وَفَّى} (এবং ইব্রাহিম, যিনি (আল্লাহ্‌র হুকুম) পূর্ণ করেছেন) এই পর্যন্ত পৌঁছলেন, তখন তিনি (ইবনে আব্বাস) বললেন: "তিনি পূর্ণ করেছেন।" {أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَى} (যে, কেউ অপরের বোঝা বহন করবে না) থেকে শুরু করে তাঁর (আল্লাহ্‌র) বাণী {هَذَا نَذِيرٌ مِنَ النُّذْرِ الأُولَى} (এগুলো পূর্ববর্তী সতর্ককারীগণের সতর্কবাণী) [সূরা নাজম: ৩৭-৫৬] পর্যন্ত।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده صحيح. وهو مكرر (2967).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3797)


3797 - حَدَّثَنَا أبو العباس محمد بن يعقوب، حَدَّثَنَا محمد بن عُبيد الله بن أبي داود المُنادِي، حَدَّثَنَا عبد الملك بن عَمرو العَقَدي، حَدَّثَنَا زهير بن محمد، عن أَسِيد بن أبي أَسِيد، عن موسى بن أبي موسى الأشعري، عن أبيه، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال: "إِنَّ الميت لَيُعذَّبُ ببكاءِ الحيِّ، فإذا قالت: واعَضُداه، وامانعِاه، واناصِراه، واكاسِيَاه، جُبِذَ الميتُ فقيل: أناصرُها أنت؟ أكاسيها أنت؟ أعاضدُها أنت؟ ".قال: فقلت: سبحان الله، قال الله عز وجل: {وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَى} [الأنعام: 164]! فقال: وَيْحَكَ، أحدِّثُك عن أبي موسى عن رسول الله صلى الله عليه وسلم، وتقول هذا؟ فأَيُّنا كَذَبَ؟! فوالله ما كَذَبتُ على أبي موسى، وما كَذَبَ أبو موسى على رسول الله صلى الله عليه وسلم [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه. ‌‌54 - ومن تفسير سورة القمربسم الله الرحمن الرحيم




আবূ মূসা আশআরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় মৃত ব্যক্তিকে জীবিতদের কান্নার কারণে শাস্তি দেওয়া হয়। যখন সে (জীবিত ব্যক্তি) বলে: 'হায়! আমার বাহুর শক্তি! হায়! আমার রক্ষাকারী! হায়! আমার সাহায্যকারী! হায়! আমার বস্ত্রদাতা!' তখন মৃত ব্যক্তিকে টেনে নিয়ে বলা হয়: 'তুমি কি তার সাহায্যকারী ছিলে? তুমি কি তাকে বস্ত্র দান করতে? তুমি কি তার বাহুর শক্তি ছিলে?'" [বর্ণনাকারী] বলেন: আমি তখন বললাম: "সুবহানাল্লাহ! আল্লাহ তাআলা তো বলেছেন: {কেউ অন্যের বোঝা বহন করবে না} [সূরা আল-আন'আম: ১৬৪]!" তখন তিনি বললেন: "ধিক তোমার জন্য! আমি তোমাকে আবূ মূসার সূত্রে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে বর্ণনা করছি, আর তুমি এমন কথা বলছো? আমাদের মধ্যে কে মিথ্যা বলেছে?! আল্লাহর কসম! আমি আবূ মূসার উপর মিথ্যা বলিনি, আর আবূ মূসা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর উপর মিথ্যা বলেননি।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] صحيح لغيره، وهذا إسناد حسن من أجل أَسيد بن أبي أَسيد.وأخرجه أحمد 32/ (19716) عن أبي عامر عبد الملك بن عمرو العقدي، بهذا الإسناد.وأخرجه ابن ماجه (1594) من طريق عبد العزيز الدراوردي، والترمذي (1003) من طريق محمد بن عمار المؤذّن، كلاهما عن أسيد بن أبي أسيد، به ولم يذكر محمد بن عمار استعجاب أسيد في آخره، وحسَّنه الترمذي.وانظر شواهده وتمام الكلام عليه في "مسند أحمد". وأخرجه أحمد 7/ (3924) عن مؤمَّل بن إسماعيل، عن إسرائيل، بهذا الإسناد. وقال فيه: من بين فُرجتَي القمر.وانظر ما بعده.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3798)


3798 - أخبرنا أبو منصور محمد بن عُبيد الله الفارسي، حَدَّثَنَا محمد بن شاذانَ الجَوهَري، حَدَّثَنَا محمد بن سابق [1]، حَدَّثَنَا إسرائيل، حَدَّثَنَا سِمَاك بن حَرْب، عن إبراهيم النَّخَعي، عن الأسود بن يزيد، عن عبد الله، في قوله عز وجل: {وَانشَقَ الْقَمَرُ}، قال: رأيت القمرَ وقد انشقَّ، فأَبصرتُ الجبل من بين فَرْجَيِ القمرِ [2]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه بهذا اللفظ.




আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহ্ তাআ'লার এই বাণী: {আর চাঁদ দ্বিখণ্ডিত হয়েছে} (সূরা কামার: ১) প্রসঙ্গে তিনি বলেন: আমি চাঁদকে দেখেছি, যা দ্বিখণ্ডিত হয়েছিল। তখন আমি চাঁদের দুই খণ্ডের মধ্যবর্তী ফাঁক দিয়ে পর্বত দেখতে পেয়েছিলাম।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] في المطبوع: محمد بن سعيد بن سابق. والمثبت من النسخ الخطية: وهو الصواب، فإنَّ المعروف بالرواية عن إسرائيل هو محمد بن سابق البزار الكوفي ثم البغدادي، وليس محمد بن سعيد بن سابق الرازي ثم القزويني، وإن كان كلاهما من الطبقة نفسها. وأخرجه أحمد 7/ (3924) عن مؤمَّل بن إسماعيل، عن إسرائيل، بهذا الإسناد. وقال فيه: من بين فُرجتَي القمر.وانظر ما بعده.



[2] حديث صحيح، وهذا إسناد حسن من أجل سماك بن حرب. عبد الله: هو ابن مسعود. وأخرجه أحمد 7/ (3924) عن مؤمَّل بن إسماعيل، عن إسرائيل، بهذا الإسناد. وقال فيه: من بين فُرجتَي القمر.وانظر ما بعده.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3799)


3799 - أخبرنا أبو زكريا العَنبَري، حَدَّثَنَا محمد بن عبد السلام، حَدَّثَنَا إسحاق، أخبرنا عبد الرزاق، أخبرنا ابن عُيينة ومحمد بن مُسلِم، عن ابن أبي نَجِيح، عن مجاهد، عن أبي مَعمَر، عن عبد الله بن مسعود قال: رأيت القمرَ منشقًا بشِقَّتين مرتين بمكة قبل مَخرَج النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم، شِقّةٌ على أبي قُبَيس، وشِقّةٌ على السُّوَيداء، فقالوا: سَحَرَ القمر، فنزلت {اقْتَرَبَتِ السَّاعَةُ وَانشَقَّ الْقَمَرُ}، يقول: كما رأيتم القمرَ مُنشقًّا، فإنَّ الذي أخبرتُكم عن اقتراب الساعة حقٌّ [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه بهذه السِّياقة، إنما اتَّفقا على حديث أبي مَعمَر عن عبد الله مختصرًا.وهذا حديث لا نَستَغني فيه عن متابعة الصحابة بعضِهم لبعض لمُغايَظة أهل الإلحاد، فإنه أولُ آياتِ الشريعة، فنظرتُ فإذا في الباب مما لم يُخرجاه عن عبد الله بن عبّاس وعبد الله بن عَمرو وجُبَير بن مُطعِم ولم يُخرجا منها إلا حديثَ أنس [2].فأما حديث ابن عبَّاس:




আব্দুল্লাহ ইবনে মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি মক্কায় নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর (প্রকাশ্য) আবির্ভাবের পূর্বে চাঁদকে দু’বার দু’ভাগে বিভক্ত হতে দেখেছি। একটি ভাগ ছিল আবূ কুবাইসের উপরে, আর অন্য ভাগটি ছিল আস-সুওয়াইদার উপরে। তখন তারা বলল: সে চাঁদকে যাদু করেছে। এরপর নাযিল হলো: {কেয়ামত অত্যাসন্ন এবং চাঁদ বিদীর্ণ হয়েছে}। তিনি (আল্লাহ) বলছেন: তোমরা যেমন চাঁদকে বিভক্ত হতে দেখলে, তেমনি কিয়ামত নিকটবর্তী হওয়ার যে সংবাদ আমি তোমাদের দিয়েছি, তা সত্য।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده صحيح من جهة سفيان بن عيينة، وأما محمد بن مسلم - وهو الطائفي - فإنه ليس بذاك القوي وكان يخطئ ويَهِم، وقد أخطأ هنا بذكر المرتين في الانشقاق، فإنَّ الظاهر أنَّ هذا اللفظ له، بدليل أنَّ كلَّ من روى الحديث عن سفيان بن عيينة لم يذكره فيه وليس هو عنده بهذه السياقة كما سيأتي، وقد خطَّأ غير واحد من أهل العلم لفظ المرَّتين في حادثة انشقاق القمر، انظر "فتح الباري" 11/ 345 - 346.إسحاق: هو ابن راهويه، وابن أبي نجيح: هو عبد الله، وأبو معمر: هو عبد الله بن سخبرة.والحديث أخرجه البيهقي في "دلائل النبوة" 2/ 265 عن أبي عبد الله الحاكم، بهذا الإسناد. وهو في "تفسير عبد الرزاق" 2/ 257.وأخرجه أحمد 6/ (3583) عن سفيان بن عيينة وحده، عن ابن أبي نجيح، به بلفظ: انشق القمر على عهد رسول الله صلى الله عليه وسلم شِقّتين حتَّى نظروا إليه، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "اشهدوا".وأخرجه كذلك البخاري (3636) و (4865)، ومسلم (2800) (43)، والترمذي (3287)، والنسائي (11489) من طرق عن سفيان بن عيينة به.وأخرجه بنحوه أحمد 7/ (4270) و (4360)، والبخاري (3869) و (3871) و (4864)، ومسلم (2800) (44) و (45)، والترمذي (3285)، والنسائي (11488)، وابن حبان (6495) من طريق إبراهيم بن يزيد النخعي، عن أبي معمر، به.



[2] بل أخرج كلاهما حديث ابن عبَّاس أيضًا كما سيأتي. وأخرجه كذلك الترمذي (2182) و (3288) عن محمود بن غيلان، عن أبي داود الطيالسي، بهذا الإسناد.وأخرجه مسلم (2801)، وابن حبان (6496) من طرق عن شعبة، به.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (3800)


3800 - فحدَّثَناه أبو العبَّاس محمد بن يعقوب، حَدَّثَنَا محمد بن عبد الله بن عبد الحَكَم، حَدَّثَنَا أبي، حَدَّثَنَا بكر بن مُضَر، حدثني جعفر بن رَبِيعة، عن عِرَاك بن مالك، عن عُبيد الله بن عبد الله، عن ابن عبَّاس قال: انشقّ القمرُ على عهدِ رسول الله صلى الله عليه وسلم [1].وأما حديث عبد الله بن عَمْرو:




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে চাঁদ বিভক্ত হয়েছিল।




تحقيق الشيخ عادل مرشد:
[1] إسناده صحيح. عبيد الله بن عبد الله: هو ابن عتبة بن مسعود.وأخرجه البخاري (3638) و (3870) و (4866)، ومسلم (2803) من طرق عن بكر بن مضر، بهذا الإسناد. وأخرجه كذلك الترمذي (2182) و (3288) عن محمود بن غيلان، عن أبي داود الطيالسي، بهذا الإسناد.وأخرجه مسلم (2801)، وابن حبان (6496) من طرق عن شعبة، به.