হাদীস বিএন


আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম





আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7239)


7239 - أخبرنا أبو بكر محمد بن عبد الله بن أحمد بن عَتّاب العَبْدي ببغداد، حدثنا عبد الملك بن محمد الرَّقَاشي، حدثنا عبد الصمد بن عبد الوارث، حدثنا عبد الرحمن بن عبد الله بن دينار، عن زيد بن أسلم، عن عبد الرحمن بن البَيْلماني [1]، قال: رأيتُ شيخًا بالإسكندرية يقال له: سُرَّقٌ، فأتيتُه وسألتُه، فقال: لي: سمَّاني رسولُ الله صلى الله عليه وسلم، ولم أكن لأدعَ ذلك أبدًا، فقلتُ: لم سمَّاك؟ قال: قَدِمَ رجلٌ من أهل البادية ببعيريَنِ فابتعتُهما منه، ثم دخلتُ بيتي وخرجتُ من خلفٍ، فبعتُهما فقَضيتُ بهما حاجتي، وغبتُ حتى ظننتُ أنَّ الأعرابي [2] قد خرج، فإذا الأعرابي مقيمٌ، فأخذَني فذهبَ بي إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم وأخبَره الخَبَر، فقال: "ما حَمَلَك على ما صنعتَ؟ " قلتُ: قضيتُ بهما حاجتي يا رسولَ الله، قال: "اقضِهِ"، قلت: ليس عندي، قال: "أنتَ سُرَّقٌ، اذهب يا أعرابيُّ فبِعْه [3] حتى تستوفيَ حَقَّك"، قال: فجعل الناسُ يَسُومونَه فيَّ ويلتفتُ إليهم فيقول: ماذا تريدون؟ فيقولون: نريد أن نَفْدِيَه منك، فقال: والله إنِّي منكم أحقُّ وأحوجُ إلى الله عز وجل، اذهب فقد أعتقتُك [4].هذا حديث صحيح على شرط البخاري، ولم يُخرجاه.




আবদুর রহমান ইবনুল বাইলামানী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি আলেকজান্দ্রিয়ায় (ইসকান্দারিয়া) সুরুক্ব (Surraq) নামে একজন বৃদ্ধকে দেখলাম। আমি তার কাছে গেলাম এবং তাকে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি আমাকে বললেন: "রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার নাম রেখেছিলেন। আমি কখনো সেটা বাদ দিতে পারি না।"

আমি জিজ্ঞেস করলাম: "তিনি কেন আপনার নাম রেখেছিলেন?" তিনি বললেন: "একবার গ্রাম্য (বেদুইন) একজন লোক দুটি উট নিয়ে আসল। আমি তার কাছ থেকে সেগুলো কিনে নিলাম, এরপর আমি ঘরে প্রবেশ করলাম এবং পেছনের দিক দিয়ে বেরিয়ে গেলাম। তারপর আমি উটগুলো বিক্রি করে দিলাম এবং তা দিয়ে আমার প্রয়োজন মিটালাম। আমি লুকিয়ে থাকলাম যতক্ষণ না আমি মনে করলাম যে বেদুঈন লোকটি চলে গেছে। কিন্তু (বেরিয়ে দেখি) বেদুঈন লোকটি সেখানেই অবস্থান করছে। সে আমাকে ধরে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে নিয়ে গেল এবং পুরো ঘটনা তাঁকে জানাল।

তিনি (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তুমি এমন কেন করলে?" আমি বললাম: "ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমি তা দিয়ে আমার প্রয়োজন মিটিয়েছি।" তিনি বললেন: "তাকে (টাকা) পরিশোধ করো।" আমি বললাম: "আমার কাছে নেই।" তিনি বললেন: "তুমি 'সুরুক্ব' (চোর)। হে বেদুঈন! যাও, তাকে বিক্রি করে দাও, যতক্ষণ না তুমি তোমার প্রাপ্য উসুল করতে পারো।" বর্ণনাকারী বলেন, তখন লোকেরা তাকে আমার ব্যাপারে দাম জিজ্ঞেস করতে লাগল। লোকটি তাদের দিকে ফিরে জিজ্ঞেস করল: "তোমরা কী চাও?" তারা বলল: "আমরা তাকে আপনার কাছ থেকে মুক্ত করে দিতে চাই।" তখন লোকটি বলল: "আল্লাহর কসম, তোমাদের সবার চেয়ে আমিই আল্লাহ আযযা ওয়াজাল্লার কাছে এর বেশি হকদার এবং বেশি মুখাপেক্ষী। যাও, আমি তোমাকে মুক্ত করে দিলাম।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] وقع في نسخنا الخطية: عبد الرحمن بن أبي البيلماني، وهو خطأ.



[2] تحرّفت في نسخنا الخطية إلى: العراقي، وكذا في الموضعين التاليين لها.



7239 [3] - تحرَّفت "فبعه" في نسخنا الخطية إلى: معه، والتصويب من مصادر التخريج.



7239 [4] - إسناده ضعيف وقد سلف الكلام عليه عند الحديث (2361).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7240)


7240 - أخبرنا أبو إسحاق إبراهيم بن محمد بن حاتم الزاهد وأبو عبد الله محمد ابن علي الصنعاني بمكة، قالا: حدثنا إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا عبد الرزاق، أخبرنا مَعمَر، عن بَهْز بن حَكيم، عن أبيه، عن جدِّه: أنَّ النبيَّ صلى الله عليه وسلم حَبَسَ رجلًا في تُهْمة [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




তাঁর দাদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সন্দেহের বশে একজন লোককে আটক করেছিলেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده حسن. وقد سلف مطولًا برقم (437). وأثنى عليه خيرًا، وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقال ابن المديني: مجهول لم يرو عنه غير وَبْر. أبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد.وأخرجه أحمد 32 / (19463) عن أبي عاصم الضحاك بن مخلد، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 29 / (17946)، وابن ماجه (2427)، والنسائي (6243)، وابن حبان (5089) من طريق وكيع، وأبو داود (3628)، والنسائي (6242) من طريق عبد الله بن المبارك، كلاهما عن وبر بن أبي دليلة، به.وفسَّره وكيع عند أحمد فقال: عِرضُه: شكايتُه، وعقوبتُه: حَبْسُه. وبنحوه فسَّره ابن المبارك.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7241)


7241 - حدثنا أبو بكر بن إسحاق، أخبرنا محمد بن أيوب، أخبرنا عمار بن هارون.وأخبرني عبد الله بن محمد بن زياد العَدْل، حدثنا محمد بن إسحاق، حدثنا إبراهيم بن خُثَيم، حدثني أبي، عن جدِّي عِرَاك بن مالك [1]، عن أبي هريرة: أنَّ النبي صلى الله عليه وسلم حَبَسَ رجلًا في تُهمةٍ يومًا وليلةً، استظهارًا واحتياطًا [2].




আবূ হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিশ্চিত হওয়া ও সতর্কতার উদ্দেশ্যে কোনো সন্দেহের অভিযোগে এক ব্যক্তিকে একদিন ও একরাত আটক করে রেখেছিলেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] أقحم في نسخنا الخطية بين عراك بن مالك وأبي هريرة عن أبيه. وأثنى عليه خيرًا، وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقال ابن المديني: مجهول لم يرو عنه غير وَبْر. أبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد.وأخرجه أحمد 32 / (19463) عن أبي عاصم الضحاك بن مخلد، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 29 / (17946)، وابن ماجه (2427)، والنسائي (6243)، وابن حبان (5089) من طريق وكيع، وأبو داود (3628)، والنسائي (6242) من طريق عبد الله بن المبارك، كلاهما عن وبر بن أبي دليلة، به.وفسَّره وكيع عند أحمد فقال: عِرضُه: شكايتُه، وعقوبتُه: حَبْسُه. وبنحوه فسَّره ابن المبارك.



[2] إسناده ضعيف جدًّا، إبراهيم بن خثيم متروك كما قال الذهبي في "تلخيصه"، وقال العقيلي: لا يُتابع إبراهيم عليه. وقد روي عن عراك مرسلًا، وهو الصواب.وأخرجه البزار (8144) و (8145)، و أبو يعلى كما في "المطالب العالية" (1881)، والعقيلي في "الضعفاء الكبير" (52)، وابن عدي في "الكامل" 1/ 243، وأبو نعيم في "الحلية" 10/ 114، والبيهقي 6/ 77 من طرق عن إبراهيم بن خثيم، بهذا الإسناد. وفي لفظ عند البزار والعقيلي: أنَّ النبي صلى الله عليه وسلم كفل في تهمة، وعند ابن عدي ومن طريقه البيهقي: أخذ من متهم كفيلًا تثبيتًا واحتياطًا، وعند أبي نعيم: حبس حبسًا يسيرًا حتى استبرأ.وأخرجه عبد الرزاق (18892) عن ابن جريج، والعقيلي (57) من طريق أبي بكر بن عياش، كلاهما عن عراك بن مالك، فذكره مطولًا مرسلًا، وسنده صحيح إلى عراك. وأعل العقيلي حديثَ إبراهيم بن خثيم الموصول بهذه الرواية المرسلة. وأثنى عليه خيرًا، وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقال ابن المديني: مجهول لم يرو عنه غير وَبْر. أبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد.وأخرجه أحمد 32 / (19463) عن أبي عاصم الضحاك بن مخلد، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 29 / (17946)، وابن ماجه (2427)، والنسائي (6243)، وابن حبان (5089) من طريق وكيع، وأبو داود (3628)، والنسائي (6242) من طريق عبد الله بن المبارك، كلاهما عن وبر بن أبي دليلة، به.وفسَّره وكيع عند أحمد فقال: عِرضُه: شكايتُه، وعقوبتُه: حَبْسُه. وبنحوه فسَّره ابن المبارك.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7242)


7242 - أخبرني محمد بن أحمد بن تميم القَنْطري ببردان، حدثنا أبو قِلابة، حدثنا أبو عاصم، عن وَبْر بن أبي دُليلة، عن محمد بن عبد الله بن ميمون [1]، عن عمرو بن الشَّريد، عن أبيه، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "لَيُّ الواجدِ يُحِلُّ عِرْضَه وعقوبتَه" [2]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




শরীদ ইবনু সুয়াইদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: সামর্থ্যবান ব্যক্তির (ঋণ পরিশোধে) টালবাহানা তার সম্মানহানি এবং শাস্তিকে বৈধ করে দেয়।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرَّف في نسخنا الخطية إلى ميمونة، هو خطأ. وأثنى عليه خيرًا، وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقال ابن المديني: مجهول لم يرو عنه غير وَبْر. أبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد.وأخرجه أحمد 32 / (19463) عن أبي عاصم الضحاك بن مخلد، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 29 / (17946)، وابن ماجه (2427)، والنسائي (6243)، وابن حبان (5089) من طريق وكيع، وأبو داود (3628)، والنسائي (6242) من طريق عبد الله بن المبارك، كلاهما عن وبر بن أبي دليلة، به.وفسَّره وكيع عند أحمد فقال: عِرضُه: شكايتُه، وعقوبتُه: حَبْسُه. وبنحوه فسَّره ابن المبارك.



[2] رجاله ثقات غير محمد بن عبد الله بن ميمون، فقد تفرَّد بالرواية عنه وبر بن أبي دليلة، وأثنى عليه خيرًا، وذكره ابن حبان في "الثقات"، وقال ابن المديني: مجهول لم يرو عنه غير وَبْر. أبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد.وأخرجه أحمد 32 / (19463) عن أبي عاصم الضحاك بن مخلد، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 29 / (17946)، وابن ماجه (2427)، والنسائي (6243)، وابن حبان (5089) من طريق وكيع، وأبو داود (3628)، والنسائي (6242) من طريق عبد الله بن المبارك، كلاهما عن وبر بن أبي دليلة، به.وفسَّره وكيع عند أحمد فقال: عِرضُه: شكايتُه، وعقوبتُه: حَبْسُه. وبنحوه فسَّره ابن المبارك.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7243)


7243 - أخبرنا أبو العباس محمد بن أحمد المحبوبي، حدثنا أحمد بن سيَّار، حدثنا القَعْنبي وأحمد بن يونس، قالا حدثنا ابن أبي ذئب، عن الحارث بن عبد الرحمن، عن أبي سَلَمة، عن عبد الله بن عمرو، قال: لَعَنَ رسول الله صلى الله عليه وسلم الراشيَ والمرتشيَ [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.وشاهدُه الحديثُ المشهور عن أبي هريرة، وحديثُ ثوبان.أمّا حديثُ أبي هريرة:




আব্দুল্লাহ ইবনু আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ঘুষদাতা ও ঘুষগ্রহীতাকে অভিশাপ দিয়েছেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح لغيره، وهذا إسناد جيد من أجل الحارث بن عبد الرحمن: وهو القرشي العامري، خال ابن أبي ذئب. واسم ابن أبي ذئب: محمد بن عبد الرحمن بن المغيرة. والقعنبي: هو عبد الله بن مسلمة، وأحمد بن يونس: هو ابن عبد الله بن يونس، ينسب إلى جدِّه كثيرًا.وأخرجه أبو داود (3580) عن أحمد بن يونس، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 11 / (6532) و (6778) و (6779) و (6984)، وابن ماجه (2313)، والترمدي (1117)، وابن حبان (5077) من طرق عن ابن أبي دئب، به - وقال الترمذي: حسن صحيح.وانظر الحديثين بعده.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7244)


7244 - فأخبرَناه أبو عبد الله محمد بن يعقوب، حدثنا يحيى بن محمد، حدثنا مسدَّد، حدثنا أبو عَوَانة، عن عمر بن أبي سَلَمة، عن أبيه، عن أبي هريرة قال: لَعَنَ رسولُ الله صلى الله عليه وسلم الراشيَ والمرتشيَ في الحُكم [1].وأمّا حديثُ ثَوْبان:




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বিচারকার্যে ঘুষদাতা ও ঘুষগ্রহীতাকে অভিশাপ দিয়েছেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح لغيره، وهذا الإسناد تفرَّد به عمر بن أبي سلمة في جعله من حديث أبي هريرة، وهو ضعيف لا يحتمل تفرده، فكيف إذا خالف، فقد خالفه من هو أوثق منه، وهو الحارث بن عبد الرحمن - كما في الحديث السابق - فجعله عن أبي سلمة عن عبد الله بن عمرو، ونقل الترمذيُّ عن الإمام الدارمي: أنَّ حديث أبي سلمة عن عبد الله بن عمرو عن النبي صلى الله عليه وسلم أحسن شيء في هذا الباب وأصحُّ.يحيى بن محمد: هو ابن يحيى الذهلي، وأبو عوانة: هو الوضاح بن عبد الله اليشكري.وأخرجه أحمد 15 / (9023)، والترمذي (1336)، وابن حبان (50761) من طرق عن أبي عوانة، بهذا الإسناد.وانظر ما قبله وما بعده.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7245)


7245 - فحدَّثَناه أبو عَون محمد بن أحمد بن ماهان الجزار بمكة حرسها الله تعالى، حدثنا علي بن عبد العزيز، حدثنا محمد بن سعيد الأصبهاني، حدثنا يحيى ابن [1] زكريا بن أبي زائدة، عن ليث، عن أبي زُرعة، عن ثَوْبان [2]، عن النبي صلى الله عليه وسلم، قال: "لُعِنَ الراشي والمُرتَشي والرائشُ الذي يمشي بينهما" [3].إنما ذكرتُ عمرَ بنَ أبي سَلَمة وليث بنَ أبي سُليم في الشواهد لا في الأصول.




থাওবান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "ঘুষদাতা, ঘুষ গ্রহণকারী এবং তাদের মাঝে মধ্যস্থতাকারী—যে তাদের মধ্যে চলাফেরা করে—তাদের অভিশাপ দেওয়া হয়েছে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] أقحم في نسخة (ز) لفظة "أبي" قبل زكريا، وجاء على الصواب في باقي النسخ.



[2] وقع في نسخنا الخطية بدل "عن ثوبان": عن أبي هريرة، وهو خطأ.



7245 [3] - صحيح لغيره، دون قوله: "والرائش"، وهذا إسناد ضعيف ليث - وهو ابن أبي سليم - ضعيف، كما أنه قد اضطرب في رواية هذا الحديث، وسقط شيخه في رواية الحاكم هنا، وهو أبو خطاب غير منسوب، ولم يرو عنه غير ليث وهو مجهول، وأبو زرعة - وهو يحيى بن أبي عمرو السيباني فيما يغلب على ظننا - روايته عن ثوبان مرسلة، بينهما أبو إدريس الخولاني كما فصلناه في "مسند أحمد".فقد أخرجه أحمد 37 / (22399) من طريق أبي بكر بن عياش، عن ليث، عن أبي خطاب، عن أبي زرعة، بهذا الإسناد.وانظر الحديثين قبله.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7246)


7246 - أخبرنا أبو بكر بن أبي دارم الحافظ بالكوفة، حدثنا أحمد بن موسى بن إسحاق التميمي، حدثنا الحسن بن بشر بن سَلْم، حدثنا سَعْدان بن الوليد، عن عطاء، عن ابن عباس، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "مَن وُلِّيَ على عشرةٍ يَحكُم بينهم بما أحبُّوا أو كَرِهوا، جيءَ به يومَ القيامة مغلولةً يدُه إلى عنقه، فإن حَكَمَ بما أنزل الله ولم يرتشِ في حُكمه، ولم يَحِفْ، فَكَّ الله عنه يومَ القيامة يومَ لا غُلَّ إِلّا غُلُّه، وإن حَكَمَ بغير ما أنزل الله وارتشَى في حُكمه وحابَى، شُدَّتْ يسارُه إلى يمينه، ثم رُميَ به في جهنم فلم يَبلُغْ قَعْرَها خمسَ مئة عام" [1].سَعْدان بن الوليد البَجَلي كوفيٌّ قليل الحديث، ولم يُخرجا عنه.




আবদুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: যে ব্যক্তি দশজনের ওপর নেতৃত্ব লাভ করে এবং তাদের মাঝে বিচার ফায়সালা করে, চাই তারা তা পছন্দ করুক বা অপছন্দ করুক, কিয়ামতের দিন তাকে এমন অবস্থায় আনা হবে যে তার হাত তার গর্দানের সাথে বাঁধা থাকবে। যদি সে আল্লাহর নাযিলকৃত বিধান অনুযায়ী বিচার করে এবং তার বিচারে ঘুষ না নেয় ও অবিচার না করে, তবে আল্লাহ কিয়ামতের দিন তাকে মুক্ত করে দেবেন, যেদিন তার বাঁধন ছাড়া অন্য কোনো বাঁধন থাকবে না। আর যদি সে আল্লাহর নাযিলকৃত বিধান ছাড়া অন্য কিছু দ্বারা বিচার করে, তার বিচারে ঘুষ নেয় এবং পক্ষপাতিত্ব করে, তবে তার বাম হাত ডান হাতের সাথে বেঁধে দেওয়া হবে, অতঃপর তাকে জাহান্নামে নিক্ষেপ করা হবে। সে পাঁচশত বছর পর্যন্ত তার (জাহান্নামের) তলদেশ স্পর্শ করতে পারবে না।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف، أبو بكر بن أبي دارم - وإن كان متكلمًا فيه - متابع، وسعدان بن الوليد قال الحاكم: قليل الحديث، ولم يوثقه، ولم نقف له على ترجمة. عطاء: هو ابن أبي رباح.وأخرجه بنحوه الطبراني في "الأوسط" (6933) عن محمد بن الحسين بن البستنبان، عن الحسن بن بشر بهذا الإسناد.وأخرج قصة ولاية العشرة الطبراني في "الكبير" (12689) و "الأوسط" (286) و (9367) من طريق يحيى بن سليمان الجعفي، عن عبد الرحمن بن محمد المحاربي، عن الأعمش، عن طريف بن ميمون، عن ابن عباس، بنحوه. وقال: لم يروه عن الأعمش إلّا المحاربي، تفرَّد به يحيى الجعفي.قلنا: طريف بن ميمون لم نعرفه، وليس له في معاجم الطبراني غير هذا الحديث.ولقصة ولايه العشرة شواهد انظرها في "مسند أحمد" تحت حديث أبي هريرة برقم (9571).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7247)


7247 - أخبرنا أحمد بن كامل القاضي، حدثنا أبو قِلابة، حدثنا محمد بن عبد الله الأنصاري، حدثنا مرحوم بن عبد العزيز العطّار، حدثنا سهل بن عطية، قال: كنتُ عند بلال بن أبي بُردة بالطَّفّ، فجاء الدعل [1] فشكا إليه أنَّ أهلَ الطَّف لا يُؤَدُّون الزكاة، فبعث بلالٌ رجلًا يسأل عما يقولون، فوجد الرجلَ يُطعَن في نسبه، فرجع إلى بلال فأخبره، فكبَّر بلالٌ، وقال: حدثني أبي، عن أبي موسى قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "مَن سَعَى بالناس فهو لغير رِشْدة، أو فيه شَيْءٌ منه" [2].هذا حديثٌ عن بلال بن أبي بُردة له أسانيد، هذا أمثلُها.




আবূ মূসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, [রাবী] সাহল ইবনু আতিয়্যাহ বলেন: আমি তাফ (আল-তাফ) নামক স্থানে বিলাল ইবনু আবূ বুরদার কাছে ছিলাম। তখন আদ-দা'ল এসে তার কাছে অভিযোগ করল যে, তাফ-এর অধিবাসীরা যাকাত দেয় না। বিলাল এই অভিযোগ সম্পর্কে জিজ্ঞেস করার জন্য একজন লোক পাঠালেন। লোকটি খোঁজ নিয়ে জানতে পারল যে, (অভিযোগকারী) লোকটির বংশপরিচয় নিয়ে বদনাম করা হচ্ছে। সে বিলালের কাছে ফিরে এসে তাকে (এই ঘটনা) জানাল। তখন বিলাল তাকবীর (আল্লাহু আকবার) বললেন এবং বললেন: আমার পিতা আবূ মূসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে আমার কাছে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেছেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "যে ব্যক্তি মানুষের মধ্যে চোগলখুরী করে (বা মানুষের মানহানি করার চেষ্টা করে), তার জন্ম শুদ্ধ নয়, অথবা তার মধ্যে সেই (অবৈধতার) কিছু অংশ রয়েছে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] كذا في نسخنا الخطية بالدال وعند الخرائطي وابن عساكر بالراء أو الزاي، وهو صاحب شرطة بلال بن أبي بردة كما وقع عند الخرائطي.



[2] إسناده ضعيف، سهل بن عطية الأعرابي قال ابن حبان في "المجروحين" عنه: شيخ منأهل البصرة قليل الحديث منكر الرواية، وليس بالمحل الذي يقبل ما انفرد به لغلبة المناكير على روايته، وساق له هذا الحديث، وتناقض فذكره في "الثقات" 8/ 289 ساكتًا عليه.كما سقط من رواية محمد الأنصاري كما سيأتي في التخريج: أبو الوليد مولى قريش، بين سهل وبلال، وهو مجهول.وأخرجه الخرائطي في "اعتلال القلوب" (514)، و"مساوئ الأخلاق" (225)، ومن طريقه ابن عساكر في "تاريخ دمشق" 10/ 508 عن محمد بن يونس الكديمي، عن محمد بن عبد الله الأنصاري، بهذا الإسناد.وأخرجه البخاري في "التاريخ الكبير" 4/ 102، ومن طريقه البيهقي في "الشعب" (6248) عن محمد بن المثنى، والحربي في "غريب الحديث" 2/ 603 عن نصر بن علي، كلاهما عن مرحوم بن عبد العزيز، عن سهل بن عطية الأعرابي، عن أبي الوليد مولى لقريش، عن بلال بن أبي بردة به. بلفظ: "لا يبغي على الناس إلّا ولد بغيّ، أو فيه عرق منه". فزاد بين سهل بن عطية وبلال أبا الوليد مولى قريش.وأخرجه ابن عساكر 10/ 508 من طريق سعد بن عبد الحميد، عن الحسن بن خالد البصري، عن محمد بن ثابت، قال: جاء رجل إلى بلال بن أبي بردة، فذكره. والحسن بن خالد لم نعرفه، وشيخه محمد بن ثابت يغلب على ظننا أنه ابن أسلم البُناني، وهو ضعيف متفق على ضعفه.وأخرجه أبو الشيخ في "التوبيخ والتنبيه" (219) من طريق إبراهيم بن يوسف المقدسي، عن عمرو بن بكر، عن عكرمة بن إبراهيم الأزدي، عن بلال، به. بلفظ: "لا يبغي على الناس إلّا من يركب مع البغايا، ومن لم يبالِ ما قال وقيل فيه، فهو لبغيّةٍ أو يشترك فيه شيطان"، وإبراهيم بن يوسف: هو ابن محمد بن يوسف منسوب لجده، قال الساجي: يحدث بالمناكير والكذب، وقال الأزدي: ساقط. بينما قال أبو حاتم: صدوق وعمرو بن بكر متروك، وشيخه عكرمة متفق على ضعفه.قوله: "لغير رشدة" بفتح الراء وكسرها: لغير نكاح صحيح.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7248)


7248 - حدثنا أبو بكر بن إسحاق، أخبرنا محمد بن أيوب، أخبرنا غسّان بن مالك، حدثنا عَنْبسة بن عبد الرحمن، عن علَّاق بن أبي مسلم، قال: سمعتُ جابر بن عبد الله يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "مَن أرضَى سلطانًا بسَخَطِ ربِّه عز وجل، خرجَ من دين الله تبارك وتعالى" [1].تفرَّد به علَّاق بن أبي مسلم، والرُّواة إليه كلُّهم ثقات.آخر كتاب الأحكام بسم الله الرحمن الرحيم ‌‌كتاب الأطعمة




জাবির ইবনে আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “যে ব্যক্তি তার রবের (আল্লাহর) ক্রোধের মাধ্যমে কোনো শাসককে সন্তুষ্ট করে, সে আল্লাহ তাআলার দ্বীন থেকে বেরিয়ে যায়।”




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف جدًّا، غسان بن مالك قال أبو حاتم: ليس بقوي بيِّنٌ في حديثه الإنكار، وعنبسة بن عبد الرحمن متهم، وشيخه علاق تفرد بالرواية عنه عنبسة، وقال الأزدي: ذاهب الحديث، وقال الذهبي في "الكاشف": واهٍ، وقال ابن حجر: مجهول.ويقال: إنه عبد الملك بن علاق، كما أشار إلى ذلك الحافظ المزِّي في "التهذيب"، وجهله الترمذي، وقال الأزدي: متروك الحديث.وأخرجه أبو نعيم في "تاريخ أصبهان" 2/ 348 من طريق إبراهيم بن الوليد، عن غسان بن مالك، بهذا الإسناد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7249)


7249 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا أبو زُرعة الدمشقي، حدثنا أحمد بن خالد الوَهْبي، حدثنا محمد بن إسحاق، عن الزُّهرْي، عن عبيد الله بن عبد الله بن أَبي ثور، عن ابن عباس، عن عمر بن الخطاب قال: استأذنتُ على رسول الله صلى الله عليه وسلم، فدخلتُ عليه في مَشْرُبة وإنه لمضطجع على خَصَفَة، وإنَّ بعضَه لَعَلى التراب، وتحت رأسه وسادةٌ محشوَّةٌ ليفًا، وإنَّ فوق رأسه لإهابَ عَطِين، وفي ناحية المَشْرُبة قَرَظٌ، فسلَّمتُ عليه ثم جلستُ، فقلت: يا رسولَ الله، أنت نبيُّ الله وصفوتُه، وخِيرتُه من خلقه، وكسرى وقيصر على سُرُرِ الذَّهب وفُرُشِ الحرير والدِّيباج؟! فقال: "يا عمرُ، إنَّ أولئك قد عُجِّلَت لهم طيّباتُهم، وهي وَشِيكةُ الانقطاعِ، وإِنَّا قومٌ قد أُخِّرَت لنا طيّباتُنا في آخرتنا" [1]. هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه.




উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে প্রবেশের অনুমতি চাইলাম। অতঃপর আমি তাঁর সাথে একটি মাশরুবার (ছোট উঁচু কক্ষ) মধ্যে প্রবেশ করলাম। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একটি খেজুর পাতার চাটাইয়ের (খাসফা) উপর শুয়ে ছিলেন এবং তাঁর দেহের কিছু অংশ মাটির উপরও ছিল। তাঁর মাথার নিচে ছিল খেজুর গাছের আঁশ দ্বারা পূর্ণ একটি বালিশ। আর তাঁর মাথার উপরে ছিল একটি চামড়ার মশক (বা পাত্র), যা রং করা হয়েছিল (অথবা চামড়া পাকানোর উপকরণ), এবং মাশরুবার এক কোণে কিছু করয (বাবলা গাছের পাতা, যা চামড়া পাকানোর কাজে লাগে) রাখা ছিল। আমি তাঁকে সালাম দিলাম, তারপর বসলাম।

অতঃপর আমি বললাম: ইয়া রাসূলাল্লাহ! আপনি আল্লাহর নবী, তাঁর মনোনীত ও তাঁর সৃষ্টির সেরা; অথচ কিসরা (পারস্য সম্রাট) ও কায়সার (রোম সম্রাট) স্বর্ণের পালঙ্ক, রেশম ও জাঁকজমকপূর্ণ কাপড়ের বিছানায় থাকে?!

তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "হে উমর! তাদের জন্য তাদের দুনিয়ার ভোগ-বিলাস দ্রুত দিয়ে দেওয়া হয়েছে, কিন্তু তা খুব দ্রুতই শেষ হয়ে যাবে। আর আমরা এমন জাতি, যাদের জন্য আমাদের ভোগ-বিলাস আমাদের আখিরাতের জন্য বিলম্বিত করা হয়েছে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث صحيح، وهذا إسناد حسن لولا عنعنة محمد بن إسحاق عن الزهري، وقد توبع.وأخرجه مطولًا أحمد 1 / (222)، ومسلم (1479) (34)، والترمذي (3318)، والنسائي (9112)، وابن حبان (4268) من طريق معمر، والبخاري (2468) من طريق عقيل، والبخاري (5191)، والنسائي (2453) من طريق شعيب بن أبي حمزة، والنسائي (2453) من طريق صالح بن كيسان، وابن حبان (4187) من طريق يونس بن يزيد، خمستهم عن الزهري، بهذا الإسناد.وأخرجه مطولًا كذلك البخاري (4913)، ومسلم (1479) (31 - 33) من طريق عبيد بن حنين، عن ابن عباس، به.وأخرجه مطولًا ومختصرًا مسلم (1479) (30)، وابن ماجه (4153)، وابن حبان (4188) من طريق سماك الحنفي أبي زميل، عن ابن عباس، به.قوله: "خصفة" بالتحريك: حصير منسوج من الخوص."إهاب عطين" جِلد متغير الريح.القَرَظ، بالتحريك: ورق السَّلَم يستعمل في الدباغة.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7250)


7250 - أخبرنا أبو العباس محمد بن أحمد المحبوبي، حدثنا سعيد بن مسعود، حدثنا عبيد الله [1] بن موسى أخبرنا إسرائيل، عن هِلال الوزّان، عن أبي بِشر، عن أبي وائل، عن أبي سعيد الخُدْري قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "من أكلَ طيّبًا، وعمل في سُنَّة، وأَمِنَ الناسُ بَوائِقَه، دخل الجنَّةَ" قالوا يا رسولَ الله، إنَّ هذا في أُمتك اليومَ كثير، قال: "وسيكونُ في قرونٍ بعدي" [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি হালাল (পবিত্র) খাদ্য ভক্ষণ করে, সুন্নাহ অনুযায়ী আমল করে এবং মানুষ তার অনিষ্ট (ক্ষতি) থেকে নিরাপদ থাকে, সে জান্নাতে প্রবেশ করবে।" সাহাবীগণ বললেন, "হে আল্লাহর রাসূল! আপনার উম্মতের মধ্যে বর্তমানে এই গুণাবলী সম্পন্ন লোক অনেক আছে।" তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "এবং আমার পরেও বহু যুগ ধরে এমন লোক থাকবে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرَّف في نسخنا الخطية إلى: عبد الله، مكبرًا. وأخرجه بنحوه أحمد 43 / (25852)، والبخاري (4912) و (5267) و (6691)، ومسلم (1474) (20)، وأبو داود (3714)، والنسائي (4718) و (5584) و (8856) و (11544)، وابن حبان (4183) من طريق عطاء بن أبي رباح، عن عبيد بن عمير، عن عائشة.وأخرجه مطولًا ومختصرًا أحمد 40/ (24316)، والبخاري (5268) و (6972)، ومسلم (1474) (21)، وأبو داود (3715) من طريق هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة.قوله: "عُكّة" بضم العين: وعاء من جلد.



[2] إسناده ضعيف، أبو بشر غير منسوب، لا يعرف، تفرد بالرواية عنه هلال الوزان، وقال الترمذي في "العلل الكبير": سألت محمدًا (يعني البخاري) عن هذا الحديث فقال: لا أعرف أبا بشر هذا، وضعف الحديث.ونقل ابن الجوزي في "العلل المتناهية" (1052) عن أحمد قال: ما سمعت بأنكر من هذا الحديث، لا أعرف هلال بن مقلاص ولا أبا بشر.عبيد الله بن موسى: هو ابن أبي المختار، وإسرائيل: هو ابن يونس السبيعي، وهلال الوزان: هو ابن أبي حميد مقلاص، وأبو وائل: هو شقيق بن سلمة.وأخرجه الترمذي في "جامعه" (2690) من طريق قبيصة بن عقبة، وفيه (2691)، وفي "العلل الكبير" (619) من طريق يحيى بن أبي بكير، كلاهما عن إسرائيل، بهذا الإسناد. وأخرجه بنحوه أحمد 43 / (25852)، والبخاري (4912) و (5267) و (6691)، ومسلم (1474) (20)، وأبو داود (3714)، والنسائي (4718) و (5584) و (8856) و (11544)، وابن حبان (4183) من طريق عطاء بن أبي رباح، عن عبيد بن عمير، عن عائشة.وأخرجه مطولًا ومختصرًا أحمد 40/ (24316)، والبخاري (5268) و (6972)، ومسلم (1474) (21)، وأبو داود (3715) من طريق هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة.قوله: "عُكّة" بضم العين: وعاء من جلد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7251)


7251 - حدثني محمد بن صالح بن هانئ، حدثنا السَّري بن خُزَيمة، حدثنا عمر بن حفص بن غِياث، حدثنا أبي، حدثنا الأعمش، حدثني ثابت بن عُبيد، حدثني القاسم بن محمد، قال: قالت عائشةُ: كان رسولُ الله صلى الله عليه وسلم يدخلُ على بعضِ أزواجِه وعندها عُكَّةٌ من عسل، فيَلعَق منها لعقًا، فيجلس عندها، فأرابَهم ذلك، فقالت عائشةُ لحفصةَ ولبعض أزواج النبيِّ صلى الله عليه وسلم، فقُلْنَ له: إنما نجدُ منك رِيحَ المَغافير، فقال: "إنها عَسَلٌ ألعَقُها عند فلانةَ، ولستُ بعائدٍ فيه" [1]




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর কোনো এক স্ত্রীর নিকট প্রবেশ করতেন আর তার নিকট মধুর একটি পাত্র থাকত, অতঃপর তিনি তা থেকে এক চোষক চেটে খেতেন এবং তিনি তার নিকট কিছুক্ষণ বসতেন। বিষয়টি তাদেরকে (অন্য স্ত্রীদেরকে) সন্দেহে ফেলে দিল। অতঃপর আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হাফসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এবং নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর আরো কতিপয় স্ত্রীকে এ বিষয়ে বললেন। তখন তারা তাঁকে বলল, আমরা আপনার কাছ থেকে মাগাফিরের (এক প্রকার দুর্গন্ধযুক্ত আঠার) গন্ধ পাচ্ছি। তিনি বললেন: "আমি তো অমুকের নিকট থেকে যে মধু চেটে খেতাম, সেটা এটা। আর আমি আর তা খাব না।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح. وأخرجه بنحوه أحمد 43 / (25852)، والبخاري (4912) و (5267) و (6691)، ومسلم (1474) (20)، وأبو داود (3714)، والنسائي (4718) و (5584) و (8856) و (11544)، وابن حبان (4183) من طريق عطاء بن أبي رباح، عن عبيد بن عمير، عن عائشة.وأخرجه مطولًا ومختصرًا أحمد 40/ (24316)، والبخاري (5268) و (6972)، ومسلم (1474) (21)، وأبو داود (3715) من طريق هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة.قوله: "عُكّة" بضم العين: وعاء من جلد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7252)


7252 - أخبرنا أبو عبد الله محمد بن أحمد بن المُحرِم ببغداد، حدثنا أحمد بن إسحاق بن صالح الوزَّان، حدثنا أبو النعمان محمد بن الفضل، حدثنا حماد بن سَلَمة، أخبرنا ثابت وحُميد [1]، عن أنس بن مالك قال: كان لأمِّ سُلَيم قَدَحٌ، فلم أدعْ شيئًا من الشراب إلَّا قد سقيتُ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم فيه: العسلَ واللبنَ والنَّبيذَ والماءَ [2].هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه!




আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, উম্মু সুলাইমের একটি পেয়ালা ছিল। আমি এমন কোনো পানীয় রাখিনি যা দ্বারা রাসূলুল্লাহ সালাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে ঐ পেয়ালায় পান করাইনি। (সেগুলো হলো:) মধু, দুধ, নাবীয এবং পানি।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في نسخنا الخطية ثابت عن حميد، وهو خطأ، وجاء على الصواب في "شمائل" الترمذي وغيره.



[2] إسناده صحيح.وأخرجه الترمذي في "الشمائل" (197) من طريق عمرو بن عاصم، عن حماد بن سلمة، عن حميد وثابت، عن أنس.وأخرجه أحمد 21 / (13581)، ومسلم (2008) من طريق عفّان بن مسلم، وابن حبان (5394) من طريق هدبة بن خالد، كلاهما عن حماد بن سلمة عن ثابت وحده، به. واستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7253)


7253 - أخبرني عبد الله بن الحسين القاضي بمَرْو، حدثنا الحارث بن أبي أسامة، حدثنا رَوْح بن عُبَادة، حدثنا بِسطامُ بن مسلم، قال: سمعتُ معاوية بن قرّة يقول: قال أبي: لقد غَبَرْنا [1] مع رسول الله صلى الله عليه وسلم وما لنا طعامٌ إلَّا الأسودانِ، قال: وهل تدري ما الأسودانِ؟ قال: لا، قال: التمرُ والماءُ [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




কুররা ইবনে ইয়াস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে অবস্থান করতাম, আর ‘আল-আসওয়াদান’ (দুটি কালো বস্তু) ছাড়া আমাদের কোনো খাবার ছিল না। (বর্ণনাকারী) জিজ্ঞেস করলেন: তুমি কি জানো ‘আল-আসওয়াদান’ কী? (অন্য বর্ণনাকারী) বললেন: না। তিনি বললেন: খেজুর ও পানি।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] المثبت من نسخنا الخطية، وفي زوائد "مسند الحارث" الذي روى المصنف الحديث من طريقين: عُمِّرنا، وكذلك في مصادر التخريج الأخرى. ومعنى "غبرنا": بَقِينا.



[2] إسناده صحيح. وهو في "مسند الحارث بن أبي أسامة" كما في "بغية الباحث عن زوائد مسند الحارث" للهيثمي (1114)وأخرجه أحمد 26 / (16244) عن روح بن عبادة، بهذا الإسناد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7254)


7254 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بكّار بن قُتيبة القاضي، حدثنا صفوان بن عيسى، حدثنا محمد بن عَجْلان، عن القعقاع بن حَكيم، عن القاسم بن محمد، عن عائشة قالت: إن كان ليأتي على آل محمد صلى الله عليه وسلم الشهرُ ونصفُ الشهر، وما يُوقَد في بيوتهم نارٌ لمصباحٍ ولا لغيرِه، قلت لها: ما كان يُعيشُكم؟ قالت: التمرُ والماءُ [1].هذا حديث على شرط مسلم، ولم يُخرجاه.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নিশ্চয়ই মুহাম্মদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর পরিবারের ওপর দিয়ে এক মাস বা দেড় মাস এমন সময় অতিবাহিত হতো যে, তাদের ঘরগুলোতে আলো জ্বালানোর জন্য কিংবা অন্য কোনো উদ্দেশ্যেও আগুন জ্বালানো হতো না। আমি তাঁকে (আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে) জিজ্ঞেস করলাম: তখন তোমরা কীসে জীবন ধারণ করতে? তিনি বললেন: খেজুর আর পানি।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث صحيح، وهذ إسناد جيد من أجل صفوان بن عيسى وشيخه ابن عجلان.وأخرجه إسحاق بن راهويه في "مسنده" (970)، وأبو عوانة في الرقاق من "صحيحه" كما في "إتحاف المهرة" (22661) من طريق صفوان بن عيسى بهذا الإسناد.وأخرجه ابن أبي شيبة 13/ 249، عن أبي خالد الأحمر، وهناد في "الزهد" (729) عن حاتم بن إسماعيل، كلاهما عن محمد بن عجلان، به.وخالفهم بكر بن صدقة فيما رواه عنه الحسن بن داود المنكدري عند الطبراني في "الأوسط" (6496)، وأبي الشيخ في "أخلاق النبي" (861)، فرواه عن محمد بن عجلان، عن القعقاع، عن أبي صالح، عن أبي هريرة، عن عائشة. لكن ذكر الطبراني عقبه أنه تفرَّد به المنكدري ورواه غيره عن بكر بن صدقة عن ابن عجلان عن القعقاع عن القاسم عن عائشة. والمنكدري فيه لين.ووهَم الدارقطنيُّ في "العدل" (3581) رواية من رواه عن أبي صالح عن أبي هريرة، وصوّب روايته من طريق القاسم عن عائشة.وسيأتي برقم (7257) من طريق عروة عن عائشة.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7255)


7255 - أخبرنا أحمد بن أحْيَد الفقيه ببخارى، حدثنا صالح بن محمد بن حبيب الحافظ، حدثنا أحمد بن مَنيع، حدثنا إسحاق بن يوسف الأزرق، حدثنا مِسْعَر، عن هِلال الوزّان، عن عُرْوة، عن عائشة قالت: ما أكلَ محمدٌ صلى الله عليه وسلم في يوم أكلتينِ إلَّا إحداهما تمرٌ [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه!




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দিনের বেলা দু’বার আহার গ্রহণ করেননি, তবে যখনই করেছেন, সে দু’বারের মধ্যে একটি অবশ্যই ছিল খেজুর।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح. مسعر: هو ابن كدام، وهلال الوزان: هو ابن أبي حميد.وأخرجه البخاري (6455) عن إسحاق بن إبراهيم، عن إسحاق الأزرق، بهذا الإسناد.وأخرجه مسلم (2970) (25) من طريق وكيع، عن مسعر، به بلفظ: ما شبع آل محمد صلى الله عليه وسلم يومين من خبز برٍّ إلَّا وأحدهما تمر.واستدراك الحاكم له ذهول. بنحوه. لكن جعل التمرات خمسًا.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7256)


7256 - أخبرنا أبو عبد الله محمد بن يعقوب، حدثنا يحيى بن محمد بن يحيى، حدثنا مسدَّد، حدثنا عبد الأعلى، أخبرنا سعيد الجُرَيري، عن عبد الله بن شَقيق، قال: جاورتُ أبا هريرة سنتين فقال: يا ابنَ شَقيق، أترى هذه الحُجَر - لحُجَرِ النبي صلى الله عليه وسلم فوالله لقد رأيتُنا عندها وما لأحدٍ منا طعامٌ يملأ بطنَه، حتى إنَّ أحدَنا ليأخذُ الحَجَرَ فيشدُّه على أخْمَصِه بالحبل أو بالعُقْلة من العُقَل، فوالذي نفسي بيده، لقد رأيتُني وقَسَمَ النبيُّ صلى الله عليه وسلم بيننا تمرًا، فأصاب كلَّ واحد منا سبعُ تَمَرات، وكان في سَبْعِي حَشَفَةٌ، فما يَسُرُّني تمرةٌ جيدة بها، قال: قلتُ: لِمَ يا أبا هريرة؟ قال: لأنها شَدَّتَ لي من مَضَاغي فجعلتُ أعلُكُها [1]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। আবদুল্লাহ ইবনু শাকীক বলেন, আমি দু’বছর আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর প্রতিবেশী ছিলাম। তিনি বললেন, হে ইবনু শাকীক, তুমি কি এই কক্ষগুলি—নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কক্ষগুলি দেখছো? আল্লাহর শপথ! আমি আমাদের ওইগুলির কাছে এমন অবস্থায় দেখেছি যখন আমাদের কারো কাছেই পেট ভরে খাওয়ার মতো খাবার ছিল না। এমনকি আমাদের কেউ কেউ ক্ষুধা সহ্য করতে না পেরে একটি পাথর নিয়ে তা রশি বা অন্য কোনো দড়ি দিয়ে তার উদরের নিম্নভাগে শক্ত করে বেঁধে রাখতো। যাঁর হাতে আমার জীবন, তাঁর কসম! আমি নিজেকে এমন অবস্থায় দেখেছি যখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের মাঝে খেজুর বণ্টন করলেন। ফলে আমরা প্রত্যেকে সাতটি করে খেজুর পেলাম। আমার পাওয়া সাতটির মধ্যে একটি ছিল নিম্নমানের (শুষ্ক খেজুর)। তা সত্ত্বেও আমি চাইতাম না যে এর বদলে একটি ভালো খেজুর আমার ভাগে আসুক। আমি বললাম, হে আবূ হুরায়রা! কেন? তিনি বললেন, কারণ এটি চিবানোর সময় আমার মুখ ভরে রাখতো (দীর্ঘ সময় ধরে চিবানো যেত), তাই আমি সেটা চিবোতে লাগলাম।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح، وسماع عبد الأعلى - وهو ابن عبد الأعلى - من سعيد الجريري قبل اختلاطه.وأخرجه أحمد 14/ (8301) من طريق عبد الوارث بن سعيد، عن سعيد الجريري بهذا الإسناد مطولًا.وأخرجه أحمد (8633)، والبخاري (5411) و (5441) من طريق حماد بن زيد، عن عباس الجريري، عن أبي عثمان النهدي، عن أبي هريرة بنحوه.وهذه الطريق رواها شعبة عن عباس الجريري فخالف في متنه، انظرها مع تخريجها في "مسند أحمد" 13/ (7965).وأخرجه البخاري (5441 م)، وابن حبان (4498) من طريق عاصم الأحول، عن أبي عثمان، بنحوه. لكن جعل التمرات خمسًا.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7257)


7257 - أخبرنا علي بن عيسى، حدثنا الحسين بن محمد القبَّاني، حدثنا أبو كُريب، حدثنا ابن أبي عَدي، حدثنا محمد بن أبي حُميد، عن محمد بن المُنكدِر، عن عُرْوة، عن عائشة قالت: كانت تأتي علينا أربعونَ ليلةً، وما يُوقَد في بيت رسولِ الله صلى الله عليه وسلم مِصباحٌ ولا غيره. قال: قلنا: أيْ أُمَّاه، فبِمَ كنتم تَعيشون؟ قالت: بالأسودَين التمرِ والماءِ [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমাদের উপর দিয়ে চল্লিশটি রাত অতিবাহিত হতো, অথচ রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর ঘরে বাতি কিংবা অন্য কিছু জ্বালানো হতো না। বর্ণনাকারী বলেন, আমরা জিজ্ঞাসা করলাম, হে আমাদের মাতা, তখন আপনারা কী খেয়ে জীবনধারণ করতেন? তিনি বললেন, কালো দু’টি বস্তু—খেজুর এবং পানি দ্বারা।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث صحيح، وهذا إسناد ضعيف لضعف محمد بن أبي حميد - وهو الزرقي المدني - وقد توبع. أبو كريب: هو محمد بن العلاء، وابن أبي عدي: هو محمد بن إبراهيم.وأخرجه الحسين المروزي في زوائده على "الزهد" لابن المبارك (969) عن محمد بن أبي عدي، بهذا الإسناد.وأخرجه الطيالسي (1472)، وابن سعد في "الطبقات" 1/ 350، وإسحاق بن راهويه في "مسنده" (891) من طرق عن محمد بن أبي حميد.وأخرجه حماد بن إسحاق في كتاب "تركة النبي" 1/ 61 عن يحيى بن عبد الحميد، عن المنكدر بن محمد، عن أبيه، به.وأخرجه بنحوه مطولًا ومختصرًا أحمد 40/ (24232) و 41/ (24768) و 43 / (26077)، والبخاري (6458)، ومسلم (2972) (26)، وابن ماجه (4144)، والترمذي (2471)، وابن حبان (729) و (6361) من طريق هشام بن عروة، عن أبيه عروة، عن عائشة.وأخرجه بنحوه البخاري (2567) و (6459)، ومسلم (2972) (28) من طريق يزيد بن رومان، عن عروه، به.وأخرجه بنحوه أحمد 42/ (25491)، وابن ماجه (4145) من طريق أبي سلمة، عن عائشة.وانظر ما سلف برقم (7254).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7258)


7258 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا الرَّبيع بن سليمان، حدثنا الخَصِيب بن ناصح، حدثنا طلحة بن زيد، عن هشام بن عُرْوة، عن أبيه، عن عائشة قالت: كان النبيُّ صلى الله عليه وسلم يُسمِّي التمرَ واللبن الأطيَبان [1] [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খেজুর এবং দুধকে ‘আল-আত্বইবান’ (দুটি উত্তম জিনিস) বলে আখ্যায়িত করতেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] هكذا جاء مرفوعًا في هذه الرواية، ومثلها رواية ابن عدي، وجاء منصوبًا على الجادة في رواية أبي نعيم.



[2] إسناده ضعيف جدًّا، طلحة بن زيد - وهو القرشي الرقي - متروك، واتهمه البعض، واختُلف على الخصيب بن ناصح فيه.وأخرجه ابن عدي في "الكامل" 4/ 111، وأبو نعيم في "الطب النبوي" (761) و (841) من طريق محمد بن حجاج الحضرمي، عن الخصيب بن ناصح، بهذا الإسناد. وقال ابن عدي عقبه: لا أعرفه رواه عن هشام بن عروة غير طلحة بن زيد.وأخرجه الرامهرمزي في "الأمثال" (131)، وابن عدي 7/ 274، وابن جميع الصيداوي في "معجم الشيوخ" ص 309 - 310 من طريق سليمان بن شعيب، عن الخصيب بن ناصح، عن يزيد بن عطاء، عن إسماعيل بن أبي خالد، عن أبيه، عن أبي هريرة، به. وقال ابن عدي: ليس بمحفوظ ولا أعلم يرويه عن ابن أبي خالد غير يزيد بن عطاء. قلنا: وقع في مطبوع "معجم الشيوخ" يزيد بن يزيد، بدل يزيد بن عطاء، وهو خطأ، ويزيد بن عطاء هذا فيه لين، ولعلَّ ابن عدي قصد بكلامه هذا أنه لم يروه من هذا الطريق بذكر أبي هريرة غير يزيد بن عطاء، وإلّا فقد رواه جمعٌ عن إسماعيل بن أبي خالد.فقد أخرجه مسدد في "مسنده" كما في "إتحاف الخيرة" (3619/ 2)، وابن أبي شيبة 8/ 322، وأحمد 25/ (15893)، وأبو نعيم في "الطب" (760) من طرق عن إسماعيل بن أبي خالد، عن أبيه، قال: دخلت على رجلٍ وهو يتمجع لبنًا بتمر، فقال: ادنُ، فإنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم سمَّاهما الأطيبين.ووقع في رواية أبي نعيم وحده تصريحُ الرجل بسماعه من النبي صلى الله عليه وسلم، وهذا الإسناد أمثل أسانيدهمع أنَّ أبا خالد والد إسماعيل تفرد بالرواية عنه ولده إسماعيل، واختلف في اسمه على عدة أقوال، ولم يوثقه غير ابن حبان.