হাদীস বিএন


আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম





আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7619)


7619 - حدثنا عبد الرحمن بن حَمْدان الجَلَّاب بهمذان، حدثنا إسحاق بن إبراهيم [1] الخزَّاز، حدثنا إسحاق بن سليمان، حدثنا صالح بن [أبيٍ] [2] الأخضر، عن الزُّهْري، عن عُرْوة، عن حَكيم بن حِزام، قال: قلتُ: يا رسولَ الله، أرأيتَ أدويةً نتداوى بها، ورُقًى نَسترقي بها، أتردُّ من قَدَر الله؟ قال: "إنها من قَدَرِ الله" [3].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.وقد رواه يونس بن يزيد وعمرو بن الحارث بإسناد آخر، وهو المحفوظ:




হাকিম ইবনে হিযাম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি বললাম, ইয়া রাসূলাল্লাহ! আপনি কি মনে করেন যে আমরা যে সকল ওষুধ দ্বারা চিকিৎসা করি এবং যে সকল ঝাড়ফুঁক দ্বারা সাহায্য চাই, তা আল্লাহর তাকদীরকে প্রতিহত করতে পারে? তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "এগুলোও আল্লাহর তাকদীরেরই অন্তর্ভুক্ত।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] انظر التعليق على الحديث السالف برقم (7502). أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن ابن أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن أبي خزامة (يعني يجعله هو صاحب الحديث).وقد روى غير ابن عينية هذا الحديث عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه، وهذا أصح. ولا نعرف لأبي خزامة عن أبيه غير هذا الحديث.وقال المزِّي في "تحفة الأشراف" 9/ 152 مؤيدًا لترجيح الترمذي: رواه مالك ويونس بن يزيد وعمرو بن الحارث والأوزاعي، عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه.



[2] سقطت من النسخ الخطية. أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن ابن أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن أبي خزامة (يعني يجعله هو صاحب الحديث).وقد روى غير ابن عينية هذا الحديث عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه، وهذا أصح. ولا نعرف لأبي خزامة عن أبيه غير هذا الحديث.وقال المزِّي في "تحفة الأشراف" 9/ 152 مؤيدًا لترجيح الترمذي: رواه مالك ويونس بن يزيد وعمرو بن الحارث والأوزاعي، عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه.



7619 [3] - حسن لغيره، وهذا إسناد ضعيف لضعف صالح بن أبي الأخضر. وقد سلف من هذا الطريق برقم (88). أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن ابن أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن أبي خزامة (يعني يجعله هو صاحب الحديث).وقد روى غير ابن عينية هذا الحديث عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه، وهذا أصح. ولا نعرف لأبي خزامة عن أبيه غير هذا الحديث.وقال المزِّي في "تحفة الأشراف" 9/ 152 مؤيدًا لترجيح الترمذي: رواه مالك ويونس بن يزيد وعمرو بن الحارث والأوزاعي، عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7620)


7620 - حدَّثَناه أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بَحْر بن نصر، حدثنا عبد الله ابن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث ويونسُ بن يزيد عن ابن شِهاب، أنَّ أبا خِزَامة ابن يَعْمَر، أَحد بني [1] الحارثِ بن سعد حدثه، أنَّ أباه حدثه: أنَّه قال لرسول الله صلى الله عليه وسلم: يا رسولَ الله، أرأيتَ دواءً نتداوى به، ورُقًى نَسترقيها، وتُقًى نَتَّقِيه، هل يَرُدَّ ذلك من قَدَرِ الله من شيء؟ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "إنَّه من قَدَرِ الله" [2].




আবূ খুযামাহ ইবনে ই'মারের পিতা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি রাসূলুল্লাহ صلى الله عليه وسلم-কে বললেন: ইয়া রাসূলাল্লাহ! আপনি কি মনে করেন যে, যে ঔষধ দ্বারা আমরা চিকিৎসা গ্রহণ করি, যে ঝাড়-ফুঁকের আশ্রয় নেই এবং যে সতর্কতা অবলম্বন করি, তা আল্লাহর ফায়সালার (তাকদীরের) কোনো কিছুকে কি ফিরিয়ে দিতে পারে? রাসূলুল্লাহ صلى الله عليه وسلم বললেন: "এগুলোও আল্লাহর ফায়সালা (তাকদীরের) অন্তর্ভুক্ত।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرَّف في (ز) إلى: حدثني. أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن ابن أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن أبي خزامة (يعني يجعله هو صاحب الحديث).وقد روى غير ابن عينية هذا الحديث عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه، وهذا أصح. ولا نعرف لأبي خزامة عن أبيه غير هذا الحديث.وقال المزِّي في "تحفة الأشراف" 9/ 152 مؤيدًا لترجيح الترمذي: رواه مالك ويونس بن يزيد وعمرو بن الحارث والأوزاعي، عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه.



[2] حسن لغيره، وهذا إسناد قد اختلف فيه على الزهري كما سيأتي، وانظر أيضًا ما سلف برقم (87). وأبو خزامة لا يعرف، فقد تفرد بالرواية عنه الزهري، ولم يؤثر توثيقه عن أحد.وهو في "جامع ابن وهب" (699 - أبو الخير)، وهو عند أحمد 24/ (15474) عن هارون بن معروف، عن عبد الله بن وهب عن عمرو بن الحارث وحده.وأخرجه أحمد (15472)، وابن ماجه (3437)، والترمذي (2148) من طرق عن سفيان بن عيينة، عن الزهري، عن ابن أبي خزامة به.وأخرجه أحمد (15475)، والترمذي (2065) من طرق عن سفيان بن عيينة، عن الزهري، عن ابن أبي خزامة، عن أبيه، به.وقال الترمذي عقبه: حديث حسن، وقد روي عن ابن عيينة كلتا الروايتين، وقال بعضهم: عن أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن ابن أبي خزامة عن أبيه، وقال بعضهم: عن أبي خزامة (يعني يجعله هو صاحب الحديث).وقد روى غير ابن عينية هذا الحديث عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه، وهذا أصح. ولا نعرف لأبي خزامة عن أبيه غير هذا الحديث.وقال المزِّي في "تحفة الأشراف" 9/ 152 مؤيدًا لترجيح الترمذي: رواه مالك ويونس بن يزيد وعمرو بن الحارث والأوزاعي، عن الزهري عن أبي خزامة عن أبيه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7621)


7621 - أخبرني أبو عبد الرحمن محمد بن عبد الله التاجر، حدثنا أبو حاتم الرازي، حدثنا محمد بن عبد الله الأنصاري، حدثنا محمد بن عمرو، عن أبي سَلَمة، عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "إِنَّ الذي أَنزَلَ الداءَ أَنزَلَ الشِّفاءَ" [1].هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় যিনি রোগ (বা ব্যাধি) নাযিল করেছেন, তিনিই আরোগ্যও নাযিল করেছেন।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث صحيح، وهذا إسناد حسن من أجل محمد بن عمرو: وهو ابن علقمة الليثي.وأخرجه ابن منده في "التوحيد" (395) عن محمد بن عيسى الرازي وعبدوس بن الحسين، عن أبي حاتم الرازي، بهذا الإسناد. وقال عقبه: هذا إسناد متصل مشهور.وأخرجه أبو نعيم في "الطب النبوي" (22) من طريق عبيد الله بن جرير، عن محمد بن عبد الله الأنصاري، به.وأخرجه أبو نعيم أيضًا (21) من طريق حماد بن مسعدة، عن محمد بن عمرو، به.وأخرجه البخاري (5678)، وابن ماجه (3439) من طريق عطاء بن أبي رباح، عن أبي هريرة مرفوعًا: "ما أنزل الله داءً إلّا أنزل له شفاء".وأخرجه ابن الأعرابي في "المعجم" (1688)، والقضاعي في "مسند الشهاب" (710) من طريق سعبه، عن الأعمش، عن أبي صالح عن ابي هريرة، بلفظ: "تداووا، فإن الذي أنزل الداء أنزل الدواء".وأخرجه أبو نعيم (23) من طريق ابن سيرِين، عن أبي هريرة، بنحوه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7622)


7622 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بحر بن نصر، حدثنا عبد الله بن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث، عن عبد ربِّه بن سعيد، عن أبي الزُّبير، عن جابر بن عبد الله، عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قال: "لكلِّ داءٍ دواءٌ، فإذا أُصيبَ دواءُ الداء [1] بَرِئَ بإذن الله عز وجل" [2].هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه.




জাবির ইবনু আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে বর্ণনা করেন যে, তিনি বলেছেন: “প্রত্যেক রোগেরই ঔষধ রয়েছে, আর যখন সেই রোগের ঔষধ সঠিকভাবে প্রয়োগ করা হয়, তখন মহান আল্লাহ তা‘আলার ইচ্ছায় সে আরোগ্য লাভ করে।”




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في (ز): داء الدواء، وفي (ص) و (م): الداء الدواء، والمثبت من الرواية الآتية برقم (8423) ومن مصادر التخريج. والقرآن شفاء لما في الصدور.وأخرجه الطبري في "تفسيره" 14/ 141 من طريق وكيع، به.وأخرجه ابن أبي حاتم في "تفسيره" 6/ 1957، والبيهقي 9/ 345 من طريق إسرائيل، والطبراني في "الكبير" (8901) من طريق شعبة، كلاهما عن أبي إسحاق به موقوفًا. وشعبة وإسرائيل من أثبت الناس في أبي إسحاق.



[2] إسناده صحيح.وأخرجه أحمد 22 / (14597)، ومسلم (2204)، والنسائي (7514)، وابن حبان (6063) من طرق عن عبد الله بن وهب، بهذا الإسناد. والقرآن شفاء لما في الصدور.وأخرجه الطبري في "تفسيره" 14/ 141 من طريق وكيع، به.وأخرجه ابن أبي حاتم في "تفسيره" 6/ 1957، والبيهقي 9/ 345 من طريق إسرائيل، والطبراني في "الكبير" (8901) من طريق شعبة، كلاهما عن أبي إسحاق به موقوفًا. وشعبة وإسرائيل من أثبت الناس في أبي إسحاق.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7623)


7623 - حدثنا أبو علي الحسين وأبو محمد عبد الله سعد الحافظ، قالا: بن حدثنا أبو بكر محمد بن إسحاق بن خُزَيمة، حدثنا علي بن سلمة حفظًا، حدثنا زيد ابن الحُبَاب، حدثنا سفيان، عن أبي إسحاق، عن أبي الأحوَص، عن عبد الله قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "عليكم بالشِّفائينِ: العسلِ والقرآنِ" [1].هذا إسناد صحيح على شرط الشيخين ولم يُخرجاه.وقد أوقفه وَكيعُ بن الجرَّاح عن سفيان:




আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা দুটি আরোগ্যদায়ক বস্তুকে আবশ্যক করে নাও: মধু এবং কুরআন।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح موقوفًا، زيد بن الحباب صدوق لا بأس به، لكن له أوهام عن الثّوري، قال ابن معين: كان يقلب حديث الثوري، وقال ابن عدي: ينفرد برفع أحاديث عن الثوري. وقد خالفه من هو أوثق منه فوقفه، كما في الرواية التالية عند المصنف، وهو الصواب كما قال البيهقي في "سننه" 9/ 345. سفيان: هو الثَّوري، وأبو إسحاق: هو عمرو بن عبد الله السَّبيعي، وأبو الأحوص: هو عوف بن مالك الأشجعي.وأخرجه ابن ماجه (3452) عن علي بن سلمة، عن زيد بن الحباب، بهذا الإسناد.وسيأتي من طريق ابن أبي شيبة عن زيد بن الحباب برقم (8429). والقرآن شفاء لما في الصدور.وأخرجه الطبري في "تفسيره" 14/ 141 من طريق وكيع، به.وأخرجه ابن أبي حاتم في "تفسيره" 6/ 1957، والبيهقي 9/ 345 من طريق إسرائيل، والطبراني في "الكبير" (8901) من طريق شعبة، كلاهما عن أبي إسحاق به موقوفًا. وشعبة وإسرائيل من أثبت الناس في أبي إسحاق.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7624)


7624 - حدَّثَناه عبد الله بن محمد بن موسي العَدْل، حدثنا إسماعيل بن قُتيبة، حدثنا أبو بكر بن أبي شَيْبة، حدثنا وَكيع عن سفيان، عن أبي إسحاق، عن أبي الأحوص، قال: قال عبدُ الله: الشَّفاء شفاءان: قراءةُ القرآن، وشُرْبُ العَسَل [1].




আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আরোগ্য হলো দুই প্রকার: কুরআন তিলাওয়াত এবং মধু পান করা।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح.وهو في "مصنف ابن أبي شيبة" (30643 - عوامة)، ولفظه عنده العسل شفاء من كل داء، والقرآن شفاء لما في الصدور.وأخرجه الطبري في "تفسيره" 14/ 141 من طريق وكيع، به.وأخرجه ابن أبي حاتم في "تفسيره" 6/ 1957، والبيهقي 9/ 345 من طريق إسرائيل، والطبراني في "الكبير" (8901) من طريق شعبة، كلاهما عن أبي إسحاق به موقوفًا. وشعبة وإسرائيل من أثبت الناس في أبي إسحاق.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7625)


7625 - وحدَّثَناه أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا الحسن بن علي بن عفّان، حدثنا محمد بن عُبيد، حدثنا الأعمش، عن خَيثَمة والأسود، قالا: قال عبدُ الله: عليكم بالشِّفائَين: القرآنِ والعَسَل [1].




আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তোমরা দুটি শেফা (নিরাময়কারী বস্তু) গ্রহণ করবে: কুরআন এবং মধু।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] خبر صحيح، وما وقع هنا في إسناد الحاكم من قوله: خيثمة والأسود، خطأ، صوابه خيثمة -وهو ابن عبد الرحمن بن أبي سبرة الجعفي عن الأسود وهو ابن يزيد النخعي- كما في مصدري التخريج، ونصَّ على ذلك الإمام أحمد فقال: خيثمة لم يسمع من ابن مسعود رد شيئًا، روى عن الأسود عن عبد الله، ووافقه أبو حاتم الرازي، انظر "تحفة المراسيل" ص 98.وأخرجه أبو مسعود بن الفرات في "جزئه" (14) عن محمد بن عبيد عن الأعمش، عن خيثمة، عن الأسود، عن عبد الله.وأخرجه ابن أبي شيبة 7/ 445 و 10/ 485 عن أبي معاوية عبد الله بن نمير، عن الأعمش، عن خيثمة، عن الأسود، به. وسيأتي من طريق ابن عائشة مرة أخرى برقم (8430).وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (5174) من طريق محمد بن الحسين الأنماطي، عن عبيد الله ابن عائشة، عن حماد بن سلمة، عن ثابت، عن أنس. كذا جعله من حديث ثابت -وهو البُناني- بدل حميد الطويل. وقال: لم يروه عن حماد عن ثابت عن أنس إلّا ابن عائشة، ورواه أصحاب حماد عن حميد عن الحسن.قوله: "فليشنَّ عليه الماءَ" قال ابن الأثير: فليرشَّه عليه رشًّا متفرّقًا، الشَّنُّ: الصبُّ المتقطِّع، والسِّنُّ الصبُّ المتصل.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7626)


7626 - حدثني محمد بن صالح بن هانئ، حدثنا الفضل بن محمد الشَّعْراني، حدثنا عبيد الله بن محمد ابنُ عائشة، حدثنا حمّاد بن سَلَمة، عن حميد، عن أنس بن مالك، أنَّ النبي صلى الله عليه وسلم قال: "إذا حُمَّ أحدُكم، فليَشُنَّ الماءَ الباردَ ثلاثَ ليالٍ من السَّحَر" [1]. هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه، وإنما اتَّفقا [2] على الأسانيد في أنَّ "الحُمَّى من فَيْح جهنَّم، فأَطفِئوها بالماء".




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “তোমাদের কেউ যখন জ্বরে আক্রান্ত হয়, সে যেন সাহরীর (ভোর) সময় তিন রাত ঠাণ্ডা পানি ব্যবহার করে।” এই হাদীসটি মুসলিমের শর্তানুসারে সহীহ, যদিও তারা উভয়ে এটি তাদের গ্রন্থে সংকলন করেননি। তবে তারা উভয়েই এই সনদগুলির ওপর একমত যে: “জ্বর হলো জাহান্নামের তাপের অংশ, সুতরাং তোমরা তা পানি দ্বারা শীতল করো।”




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] رجاله ثقات، ظاهر إسناده الصحة، غير أنَّ أبا حاتم أعلَّه -كما في "العلل" (2535) - فقال: رواه موسى بن إسماعيل وغيره عن حمّاد بن سلمة عن حميد عن الحسن عن النبي صلى الله عليه وسلم، وهو الأشبه، وقال أبو زرعة: هذا خطأ؛ وصحَّح ما قاله أبو حاتم. ولم نقف على طريق الحسن المرسلة هذه عند غيره، وأما الحافظ ابن حجر فقد قوّى إسناده في "الفتح".وأخرجه النسائي (7566) عن أحمد بن محمد بن هانئ، عن عبيد الله بن محمد ابن عائشة بهذا الإسناد. وقد تابع ابنَ عائشة، روحُ بن عبادة عند أبي يعلى (3794) وغيره. وسيأتي من طريق ابن عائشة مرة أخرى برقم (8430).وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (5174) من طريق محمد بن الحسين الأنماطي، عن عبيد الله ابن عائشة، عن حماد بن سلمة، عن ثابت، عن أنس. كذا جعله من حديث ثابت -وهو البُناني- بدل حميد الطويل. وقال: لم يروه عن حماد عن ثابت عن أنس إلّا ابن عائشة، ورواه أصحاب حماد عن حميد عن الحسن.قوله: "فليشنَّ عليه الماءَ" قال ابن الأثير: فليرشَّه عليه رشًّا متفرّقًا، الشَّنُّ: الصبُّ المتقطِّع، والسِّنُّ الصبُّ المتصل.



[2] أخرجه البخاري (5723)، ومسلم (2209) (79) من حديث ابن عمر، وفي لفظ عندهما: "فابرُدوها" مكان "فأطفئوها".وأخرجه بنحوه البخاري (3263)، ومسلم (2210) من حديث عائشة.وأخرجه البخاري (3262)، ومسلم (2212) من حديث رافع بن خديج.وأخرجه البخاري (5724)، ومسلم (2211) من حديث أسماء بنت أبي بكر.وانظر حديث ابن عباس التالي.وانظر في شرحه "فتح الباري" 17/ 500. وأخرجه البخاري (3261) من طريق أبي عامر العقدي عن همام بن يحيى، بهذا الإسناد. وفيه: "الحمى من فيح جهنم فابردوها بالماء" أو قال: "بماء زمزم"؛ شك همام. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وسيأتي من طريق عفّان عن همام برقم (8432).وانظر في شرحه "فتح الباري" 17/ 502.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7627)


7627 - حدثنا علي بن حَمْشاذَ العدل، حدثنا إبراهيم بن الحُسين [1] الهَمَذاني وهشام بن علي السِّيرافي، قالا: حدثنا عبد الله بن رَجَاء، حدثنا همَّام بن يحيى، عن أبي جَمْرة الضُّبعي، قال: كنتُ أجلِسُ إلى ابن عباس بمكةَ، ففَقَدني أيامًا، فلمَّا جئتُ قال: ما حَبَسَك؟ قال: قلت: حُمِمتُ، فقال: ابرُدْها عنك بماء زمزم [فإنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "الحُمَّى مِن فَيْح جهنَّمَ، فَابْرُدُوها بماءِ زمزمَ] [2] " [3]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين ولم يُخرجاه بهذه السِّياقة!




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবু জামরা আদ-দুবায়ী (রহ.) বলেন, আমি মক্কায় ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট বসতাম। তিনি আমাকে কয়েক দিন দেখতে না পেয়ে, যখন আমি আসলাম, তখন তিনি আমাকে জিজ্ঞেস করলেন: কী তোমাকে আটকে রেখেছিল (তুমি আসোনি কেন)? আমি বললাম: আমার জ্বর হয়েছিল। তখন তিনি বললেন: তুমি যমযমের পানি দিয়ে এটিকে শীতল করো। কেননা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "জ্বর হলো জাহান্নামের উত্তাপ (ফায়হ) থেকে, তাই তোমরা তা যমযমের পানি দিয়ে শীতল করো।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرَّف في النسخ الخطية إلى: الحسن. وأخرجه البخاري (3261) من طريق أبي عامر العقدي عن همام بن يحيى، بهذا الإسناد. وفيه: "الحمى من فيح جهنم فابردوها بالماء" أو قال: "بماء زمزم"؛ شك همام. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وسيأتي من طريق عفّان عن همام برقم (8432).وانظر في شرحه "فتح الباري" 17/ 502.



[2] ما بين المعقوفين زيادة من تلخيص الذهبي، ومن الرواية الآتية عند المصنف برقم (8432). وأخرجه البخاري (3261) من طريق أبي عامر العقدي عن همام بن يحيى، بهذا الإسناد. وفيه: "الحمى من فيح جهنم فابردوها بالماء" أو قال: "بماء زمزم"؛ شك همام. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وسيأتي من طريق عفّان عن همام برقم (8432).وانظر في شرحه "فتح الباري" 17/ 502.



7627 [3] - حديث صحيح، وهذا إسناد قوي من أجل عبد الله بن رجاء -وهو ابن عمر الغُدَاني- وقد توبع أبو جمرة الضُّبعي: هو نصر بن عِمران. وأخرجه البخاري (3261) من طريق أبي عامر العقدي عن همام بن يحيى، بهذا الإسناد. وفيه: "الحمى من فيح جهنم فابردوها بالماء" أو قال: "بماء زمزم"؛ شك همام. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وسيأتي من طريق عفّان عن همام برقم (8432).وانظر في شرحه "فتح الباري" 17/ 502.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7628)


7628 - أخبرنا أبو جعفر محمد بن محمد البغدادي، حدثنا يحيى بن عثمان ابن صالح بمصر، حدثنا سعيد بن أبي مريم أخبرنا عبد الله بن فَرُّوخَ، حدثني ابنُ جُريج، عن سعيد بن عُقبة الزُّرقي، عن زُرْعة بن عبد الله بن زياد، أنَّ عمر بن الخطاب حدثه عن أسماءَ بنت عُميس: أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم دخل عليها ذاتَ يومٍ وعندها شُبْرُمٌ تدقُّه، فقال: "ما تَصنَعينَ به؟ " فقالت: نَسقِيه فلانًا، فقال: "إنَّه داءٌ". قال: ودخَلَ عليه وعندها سَنَا، فقال: "ما تَصنَعين بهذا؟ " فقالت: يشربُه فلانٌ، فقال: "لو أنَّ شيئًا يدفعُ الموت -أو ينفع من الموت- نَفَع السَّنَا" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه. وله شاهدٌ من حديث البصريين عن أسماء بنت عُميس رضي الله عنها:




আসমা বিনত উমাইস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, একদিন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর কাছে প্রবেশ করলেন। তখন তাঁর কাছে 'শুবরুম' (এক প্রকার বিষাক্ত উদ্ভিদ) ছিল, যা তিনি পিষছিলেন। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জিজ্ঞেস করলেন: "তুমি এটা দিয়ে কী করছো?" তিনি বললেন: "আমরা অমুক ব্যক্তিকে এটি পান করাবো।" তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "নিশ্চয় এটা ক্ষতিকর (বা রোগ)।" রাবী বলেন: অতঃপর তিনি তাঁর কাছে আসলেন, তখন তাঁর কাছে 'সানা' (সন পাতা) ছিল। তিনি জিজ্ঞেস করলেন: "তুমি এটা দিয়ে কী করছো?" তিনি বললেন: "অমুক ব্যক্তি এটা পান করবে।" তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "যদি কোনো কিছু মৃত্যুকে প্রতিহত করতে পারত—অথবা মৃত্যু থেকে উপকার দিত—তবে তা 'সানা'ই দিত।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف، سعيد بن عقبة الزرقي لم نعرفه، وزرعة بن عبد الله اختلف الرواة في اسمه، فسماه سعيد بن عقبة كما هنا: زرعة بن عبد الله بن زياد وسماه عبد الحميد بن جعفر الأنصاري في رواية حماد بن سلمة عنه: زرعة بن عبد الرحمن وسمي في روايتي محمد بن بكر البرساني وأبي بكر الحنفي عنه: عتبة بن عبد الله، وهو مجهول، وروايته عن عمر بن الخطاب مرسلة.وأخرجه أبو نعيم في "الطب النبوي" (610) عن سليمان بن أحمد الطبراني، عن يحيى بن عثمان، بهذا الإسناد.وفي الباب عن عائشة عند أبي نعيم. أبي نعيم (611)، وسنده ضعيف.السُّبرم. حبٌّ يسبه الحمص، يصبح ويشرب ماؤه للتداوي، وقيل: إنه نوع من الشِّيح. قاله ابن الأثير.السَّنا: نبات مُسهل، مشهور بالسنا المكيّ.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7629)


7629 - حدَّثَناه أبو محمد الحسن بن محمد الإسفرايني، حدثنا أبو بكر محمد ابن محمد بن رَجَاء بن السِّندي، حدثنا العباس بن عبد العظيم العنبري، حدثنا أبو بكر الحَنَفي، حدثنا عبد الحميد بن جعفر، حدثني عُتبة بن عبد الله التَّيْمي، عن أسماء بنت عُميس: أنَّ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم سألها: "بماذا تَستمشِينَ؟ " قالت: كنتُ أَستمشي بالشُّبْرُم، قال: "حارٌّ جارٌّ"، قالت: ثم استمشيتُ بالسَّنَا، فقال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم: "لو أنَّ شيئًا كان فيه الشِّفاءُ من الموت، لكان السَّنَا" [1].




আসমা বিনত উমাইস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে জিজ্ঞাসা করলেন: "তুমি কী দিয়ে কোষ্ঠ পরিষ্কার করো (বা জোলাপ নাও)?" তিনি বললেন: আমি শুব্রুম (এক প্রকার জোলাপ) দ্বারা কোষ্ঠ পরিষ্কার করতাম। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তা তো গরম এবং দ্রুত কার্যকরী (পীড়াদায়ক)।" তিনি বললেন: এরপর আমি সানা (সোনামুখী পাতা) দ্বারা কোষ্ঠ পরিষ্কার করতাম। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "যদি মৃত্যু ছাড়া অন্য কোনো কিছুর মধ্যে আরোগ্য থাকত, তবে তা সানার (সোনামুখী পাতার) মধ্যেই থাকত।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف عتبة بن عبد الله التيمي مجهول كما بينّاه في الحديث السابق، وبينه وبين أسماء مولى لمعمر التيمي كما جاء في بعض الروايات، وهو أيضًا مجهول. أبو بكر الحنفي: هو عبد الكبير بن عبد المجيد.وأخرجه الطبراني في "الكبير" 24 / (398)، والبيهقي 9/ 346 من طريقين عن أبي بكر الحنفي، بهذا الإسناد.وسيأتي عند المصنف برقم (8437) من طريق يحيى بن جعفر عن أبي بكر الحنفي.وأخرجه الترمذي (2081) من طريق محمد بن بكر البُرساني، عن عبد الحميد بن جعفر، عن عتبة بن عبد الله، عن أسماء. وقال: غريب.وأخرجه أحمد 45 / (27080)، وابن ماجه (3461) من طريق أبي أسامة حماد بن أسامة، عن عبد الحميد بن جعفر، عن زرعة بن عبد الرحمن، عن مولى لمعمر التيمي، عن أسماء.قوله: "حارّ جارّ" جارٌّ إتباع لحارٍّ. إبراهيم بن أبي عبلة، فقد تابعه عليه شدَّاد بن أوس الأنصاري كما سيأتي، والإسناد من جهته حسن.وأخرجه ابن ماجه (3457) عن إبراهيم بن محمد الفريابي، عن عمرو بن بكر السكسكي، بهذا الإسناد.وأخرجه ابن قانع في "معجم الصحابة" 2/ 107، وأبو نعيم في "معرفة الصحابة" (4008) و (6690)، والبيهقي في "السنن" 9/ 346، والمزي في "تهذيب الكمال" 21/ 551 - 552 من طرق عن شداد بن عبد الرحمن الأنصاري من ولد شداد بن أوس، عن إبراهيم بن أبي عبلة، به.وقُرن مع شدادٍ في رواية أبي نعيم الثانية ورواية المزي: عمرو السكسكي.وهذا إسناد حسن، فشداد روى عنه جمع، وقال عنه ابن حبان في "ثقاته" 6/ 441: مستقيم الحديث.وفي الباب عن أنس بن مالك عند النسائي (7533)، وسنده حسن.وعن أم سلمة عند الطبراني في "الكبير" 23/ (952)، وأبي نعيم في "الطب النبوي" (176)، وفي سنده ركيح بن أبي عبيدة لم يرو عنه غير واحد، فهو مجهول، وذكره ابن حبان في "ثقاته".









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7630)


7630 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بكر بن سهل الدِّمياطي، حدثنا عمرو بن بكر السَّكسَّكي، حدثنا إبراهيم بن أبي عَبْلة، قال: سمعتُ أبا أُبيِّ ابنَ أَمْ حَرَام -وكان قد صلَّى مع رسول الله صلى الله عليه وسلم الصلاتين- يقول: سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "عليكم بالسَّنَا والسَّنُّوت، فإنَّ فيهما شِفاءً من كلَّ داءٍ إِلَّا السامَ [1] " قيل: يا رسولَ الله، وما السامُ؟ قال: "الموتُ" [2]. قال إبراهيم بن أبي عَبْلة: والسَّنُّوت: الشِّبِتُّ. قال عمرو بن بكر: وغيرُه يقول: السَّنُّوت: هو العسل الذي يكون في الزِّق، وهو قول الشاعر:همُ السَّمْنُ بالسَّنُّوتِ لا أَلْسَ فيهمُ … وهم يمنعون الجارَ أنْ يُتَقرَّدا [3]هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আবু উবাই ইবনে উম্মে হারাম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) – যিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে দুই ওয়াক্ত সালাত আদায় করেছিলেন – তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "তোমরা অবশ্যই সানা (পাতা) ও সান্নূত ব্যবহার করবে। কারণ এই দুটিতে মৃত্যু (সাম) ব্যতীত সকল রোগের নিরাময় রয়েছে।" জিজ্ঞাসা করা হলো: হে আল্লাহর রাসূল! 'সাম' কী? তিনি বললেন: "মৃত্যু।" ইবরাহীম ইবনে আবী আবলা বলেন: আস-সান্নূত হলো শিব্বীত (সয়াবীন)। আমর ইবনে বকর বলেন: অন্যেরা বলে, সান্নূত হলো মশকের মধ্যে রাখা মধু, যেমন একজন কবি বলেছেন: 'তারাই হলো ঘি এবং সান্নূতের মতো, যাদের মধ্যে কোনো দুর্বলতা নেই, আর তারাই প্রতিবেশীকে লাঞ্ছিত হওয়া থেকে রক্ষা করে।'




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في النسخ الخطية: سام، والمثبت من "تلخيص الذهبي". إبراهيم بن أبي عبلة، فقد تابعه عليه شدَّاد بن أوس الأنصاري كما سيأتي، والإسناد من جهته حسن.وأخرجه ابن ماجه (3457) عن إبراهيم بن محمد الفريابي، عن عمرو بن بكر السكسكي، بهذا الإسناد.وأخرجه ابن قانع في "معجم الصحابة" 2/ 107، وأبو نعيم في "معرفة الصحابة" (4008) و (6690)، والبيهقي في "السنن" 9/ 346، والمزي في "تهذيب الكمال" 21/ 551 - 552 من طرق عن شداد بن عبد الرحمن الأنصاري من ولد شداد بن أوس، عن إبراهيم بن أبي عبلة، به.وقُرن مع شدادٍ في رواية أبي نعيم الثانية ورواية المزي: عمرو السكسكي.وهذا إسناد حسن، فشداد روى عنه جمع، وقال عنه ابن حبان في "ثقاته" 6/ 441: مستقيم الحديث.وفي الباب عن أنس بن مالك عند النسائي (7533)، وسنده حسن.وعن أم سلمة عند الطبراني في "الكبير" 23/ (952)، وأبي نعيم في "الطب النبوي" (176)، وفي سنده ركيح بن أبي عبيدة لم يرو عنه غير واحد، فهو مجهول، وذكره ابن حبان في "ثقاته".



[2] حسن لغيره، وعمرو بن بكر السكسكي -وإن كان متروكًا- لم ينفرد بهذا الخبر عن إبراهيم بن أبي عبلة، فقد تابعه عليه شدَّاد بن أوس الأنصاري كما سيأتي، والإسناد من جهته حسن.وأخرجه ابن ماجه (3457) عن إبراهيم بن محمد الفريابي، عن عمرو بن بكر السكسكي، بهذا الإسناد.وأخرجه ابن قانع في "معجم الصحابة" 2/ 107، وأبو نعيم في "معرفة الصحابة" (4008) و (6690)، والبيهقي في "السنن" 9/ 346، والمزي في "تهذيب الكمال" 21/ 551 - 552 من طرق عن شداد بن عبد الرحمن الأنصاري من ولد شداد بن أوس، عن إبراهيم بن أبي عبلة، به.وقُرن مع شدادٍ في رواية أبي نعيم الثانية ورواية المزي: عمرو السكسكي.وهذا إسناد حسن، فشداد روى عنه جمع، وقال عنه ابن حبان في "ثقاته" 6/ 441: مستقيم الحديث.وفي الباب عن أنس بن مالك عند النسائي (7533)، وسنده حسن.وعن أم سلمة عند الطبراني في "الكبير" 23/ (952)، وأبي نعيم في "الطب النبوي" (176)، وفي سنده ركيح بن أبي عبيدة لم يرو عنه غير واحد، فهو مجهول، وذكره ابن حبان في "ثقاته".



7630 [3] - قوله: ألس، تحرَّف في النسخ الخطية إلى: خير تحرَّف قوله: يتقردا، إلى: يتجردا، وأثبتناه على الصواب من مصادر التخريج، ونقل البيهقي في "سننه الكبرى" تفسيره عن عمرو السكسكي نفسه فقال: قوله: "لا ألس فيهم" قال: لا غِشَّ فيهم، وقوله: "أن يتقرَّدا" أي: لا يُستدَل جارهم.والشَّبِت: هو نبات تستعمل أوراقه وبذوره في تنكيه الأطعمة.وفي تفسير السنا والسنّوت، انظر "زاد المعاد" لابن القيم 4/ 69.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7631)


7631 - أخبرنا أحمد بن كامل القاضي، حدثنا محمد بن سعد العَوْفي، حدثنا عمرو ابن محمد بن أبي رَزين، حدثنا شُعْبة [1]، عن خالد الحذَّاء، عن ميمون أبي عبد الله، عن زيد بن أرقم قال: أمَرَنا رسولُ الله صلى الله عليه وسلم أن نَتداوَى من ذات الجَنْب بالقُسْط البحريِّ والزَّيت [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.وقد رواه قَتَادة عن ميمون أبي عبد الله:




যায়েদ ইবনে আরকাম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমাদেরকে নির্দেশ দিয়েছেন যে আমরা যেন যাতুল জাম্ব (বুকের পাশের ব্যথা বা প্লুরিসি) রোগের চিকিৎসা করি ক্বুস্তুল বাহরি (সামুদ্রিক ক্বুস্ত) এবং তেল দ্বারা।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرَّف في (ص) و (م) إلى: سعيد.



[2] صحيح لغيره دون ذكر الزيت، وهذا إسناد ضعيف من أجل ميمون أبي عبد الله -وهو البصري الكندي- وقد اضطرب في لفظه فمرةً يذكر القُسْطَ مع الزيت، ومرةً يذكر الزيت والورس، ومرةَ يذكر الثلاثة معًا.وأخرجه الترمذي (2079) عن رجاء بن محمد العُذري، عن عمرو بن محمد بن أبي رزين، بهذا الإسناد. وقال: حسن صحيح لا نعرفه إلَّا من حديث ميمون عن زيد بن أرقم، وقد روى عن ميمون غيرُ واحد هذا الحديث. وفسَّر ذات الجنب بالسِّلِّ.وأخرجه أحمد 32 / (19289)، والنسائي (7545) من طريق أبي داود الطيالسي، عن شعبة، به. وسيأتي من طريق آخر عن شعبة برقم (8438).وسيأتي من طريق قتادة برقمي (7632) و (8444)، ومن طريق عبد الرحمن بن ميمون برقم (7633)، كلاهما عن ميمون أبي عبد الله.وفي الباب عن أم قيس بنت مِحصن عند البخاري (5718)، ومسلم (2214)، ولفظه: "عليكم بهذا العُود الهندي، فإنَّ فيه سبعةَ أشفية، منها ذات الجَنْب".وذات الجَنْب: التهاب في الغشاء المحيط بالرئة.والقُسط البحري: هو العود الهندي، قال أبو بكر بن العربي: القسط نوعان: هندي وهو أسود، وبحري وهو أبيض، والهندي أشدهما حرارة. وقول قتادة: "تلدُّه" اللدود من الأدوية: ما يُسقاه المريض في أحد شِقَّي فمه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7632)


7632 - حدثنا أبو عبد الله محمد بن يعقوب، حدثنا يحيى بن محمد بن يحيى، حدثنا مُسدَّد، حدثنا معاذ بن هشام، حدثني أبي، عن قَتَادة، عن أبي عبد الله، عن زيد بن أرقَم قال: سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يَنعَتُ الزَّيتَ والوَرْسَ من ذات الجَنْب [1]. قال قَتَادة: تَلُدُّه من الجانب الذي يَشتَكي.وقد رواه عبد الرحمن بن ميمون عن أبيه:




যায়েদ ইবনে আরকাম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-কে ذات الجنب (যাতুল জানব বা পার্শ্ববেদনা/প্লুরিসি) রোগের চিকিৎসার জন্য যায়তুন তেল এবং ওয়ার্স (এক প্রকার ঔষধি গাছ) ব্যবহারের কথা বর্ণনা করতে শুনেছি। কাতাদাহ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: যে পাশে ব্যথা হয়, সেদিকে তা মালিশ/প্রয়োগ করা হতো। এই হাদীসটি আব্দুর রহমান ইবনে মাইমুন তার পিতা হতেও বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف من أجل ميمون أبي عبد الله. وانظر الحديث السابق.وأخرجه أحمد 32 / (19327)، والترمذي (2078)، والنسائي (7544) من طرق عن معاذ بن هشام، بهذا الإسناد وسيأتي من هذه الطريق برقم (8444).الورس: نبات أصفر يُصبغ به. وقول قتادة: "تلدُّه" اللدود من الأدوية: ما يُسقاه المريض في أحد شِقَّي فمه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7633)


7633 - أخبرَناه عبد الله بن إسحاق الخُراساني، حدثنا عبد الملك بن محمد الرَّقَاشي، حدثنا يعقوب بن إسحاق الحَضرَمي، حدثني عبد الرحمن بن ميمون، حدثني أبي، عن زيد بن أرقَم قال: نَعَتَ لنا رسول الله صلى الله عليه وسلم من ذاتِ الجَنْب وَرْسًا وزيتًا وقُسْطًا [1].




যায়দ ইবনে আরকাম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের জন্য ‘যাতুল জানব’ (প্লুরিসি বা ফুসফুসের আবরণীর প্রদাহ) রোগের চিকিৎসায় ওয়ারস, যায়তুন তেল এবং কুস্ত (উপহার/ধূপ) ব্যবহারের নিদান দিয়েছেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف كسابق من أجل والد عبد الرحمن: وهو ميمون أبو عبد الله.وأخرجه ابن ماجه (3467) عن عبد الرحمن بن عبد الوهاب عن يعقوب بن إسحاق، بهذا الإسناد. الرازيان في "العلل" (2520)، إلّا أنَّ يعقوب بن سفيان الفسوي ذكر معمرًا أيضًا فيمن رواه مرسلًا من رواية عبد الله بن المبارك عنه، ولم يشر إليها الرازيان، فنخشى أن يكون ابن المبارك -أو غيره- حمل رواية معمر على رواية يونس فذكرها مرسلة، والله أعلم.وأخرجه أحمد 45 / (27469)، وابن حبان (6587) من طريق عبد الرزاق، بهذا الإسناد.وأخرجه يعقوب بن سفيان في "المعرفة والتاريخ" 1/ 510 عن علي بن الحسن بن شقيق، عن عبد الله بن المبارك، عن معمر عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن: أَنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم اشتكي … فذكره مرسلًا.وأخرجه يعقوب بن سفيان 1/ 510 من طريق شعيب بن أبي حمزة وعبيد الله بن أبي زياد ويونس ابن يزيد الأيلي وعقيل بن خالد أربعتهم عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن مرسلًا.وقرن بيونس معمرًا!وانظر ما بعده.ويشهد للقصة حديث عائشة عند البخاري (4458)، ومسلم (2213).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7634)


7634 - أخبرنا أبو عبد الله محمد بن علي الصنعاني بمكة، حدثنا إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا عبد الرزاق، أخبرنا مَعمَر، عن الزُّهْري، أخبرني أبو بكر بن عبد الرحمن ابن الحارث بن هشام، عن أسماء بنت عُميس قالت: أولُ ما اشتَكى رسولُ الله صلى الله عليه وسلم في بيت ميمونة، فاشتدَّ وجعُه [1] حتى أُغميَ عليه، قال: فتشاور نساءٌ في لَدِّه فلَدُّوه، فلمَّا أفاقَ قال: "ما هذا؟! فِعل نساءٍ جِئْنَ من هاهنا؟ " وأشار إلى أرض الحَبَشة، وكانت فيهنَّ أسماءُ بنت عُميس، فقالوا كنا نَتَّهم بك ذاتَ الجَنْب يا رسولَ الله، قال: "إنَّ ذلك لداءٌ ما كان الله لِيَقذِفَني به، لا يَبقَيَنَّ [2] في البيت أحدٌ إِلَّا التَدَّ إِلَّا عَمَّ رسولِ الله"؛ يعني عباسًا، قال: فلقد الْتدَّتْ ميمونةُ يومئذٍ وأنها لصائمةٌ بعَزيمةِ رسول الله صلى الله عليه وسلم [3]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.




আসমা বিনত উমাইস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সর্বপ্রথম মাইমুনার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) ঘরে অসুস্থ হন। তাঁর ব্যথা এত তীব্র হয় যে তিনি বেহুঁশ হয়ে যান। তিনি বলেন: তখন নারীরা তাঁকে 'লদ্দ' (মুখের একপাশে ওষুধ ঢেলে দেওয়া) করার বিষয়ে আলোচনা করলেন এবং তাঁকে লদ্দ করলেন। যখন তিনি সুস্থ হলেন, তিনি বললেন: "এটা কী? এটা তো ওই নারীদের কাজ, যারা এখান থেকে এসেছে?"—এবং তিনি হাবশার (আবিসিনিয়া) দিকে ইঙ্গিত করলেন। (তাদের মধ্যে আসমা বিনত উমাইস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) ছিলেন)। তারা বললেন: ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমরা আপনার জন্য 'যাতুল জানব' (প্লুরিসি বা পাজরের ব্যথা) রোগ সন্দেহ করেছিলাম। তিনি বললেন: "নিশ্চয়ই এটা এমন এক রোগ যা আল্লাহ আমাকে দ্বারা আক্রান্ত করাবেন না। রাসূলুল্লাহর চাচা (অর্থাৎ আব্বাস) ছাড়া ঘরের মধ্যে যেন আর কেউ বাকি না থাকে, যাকে লদ্দ করা হবে না।" তিনি (আসমা) বলেন: সেই দিন মাইমুনা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রোযা অবস্থায় থাকা সত্ত্বেও রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর দৃঢ় নির্দেশনার কারণে তাঁকে লদ্দ করা হয়েছিল।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في (ص) و (م): مرضه. الرازيان في "العلل" (2520)، إلّا أنَّ يعقوب بن سفيان الفسوي ذكر معمرًا أيضًا فيمن رواه مرسلًا من رواية عبد الله بن المبارك عنه، ولم يشر إليها الرازيان، فنخشى أن يكون ابن المبارك -أو غيره- حمل رواية معمر على رواية يونس فذكرها مرسلة، والله أعلم.وأخرجه أحمد 45 / (27469)، وابن حبان (6587) من طريق عبد الرزاق، بهذا الإسناد.وأخرجه يعقوب بن سفيان في "المعرفة والتاريخ" 1/ 510 عن علي بن الحسن بن شقيق، عن عبد الله بن المبارك، عن معمر عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن: أَنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم اشتكي … فذكره مرسلًا.وأخرجه يعقوب بن سفيان 1/ 510 من طريق شعيب بن أبي حمزة وعبيد الله بن أبي زياد ويونس ابن يزيد الأيلي وعقيل بن خالد أربعتهم عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن مرسلًا.وقرن بيونس معمرًا!وانظر ما بعده.ويشهد للقصة حديث عائشة عند البخاري (4458)، ومسلم (2213).



[2] رسمت في النسخ الخطية: بقين، والمثبت من "تلخيص الذهبي". الرازيان في "العلل" (2520)، إلّا أنَّ يعقوب بن سفيان الفسوي ذكر معمرًا أيضًا فيمن رواه مرسلًا من رواية عبد الله بن المبارك عنه، ولم يشر إليها الرازيان، فنخشى أن يكون ابن المبارك -أو غيره- حمل رواية معمر على رواية يونس فذكرها مرسلة، والله أعلم.وأخرجه أحمد 45 / (27469)، وابن حبان (6587) من طريق عبد الرزاق، بهذا الإسناد.وأخرجه يعقوب بن سفيان في "المعرفة والتاريخ" 1/ 510 عن علي بن الحسن بن شقيق، عن عبد الله بن المبارك، عن معمر عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن: أَنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم اشتكي … فذكره مرسلًا.وأخرجه يعقوب بن سفيان 1/ 510 من طريق شعيب بن أبي حمزة وعبيد الله بن أبي زياد ويونس ابن يزيد الأيلي وعقيل بن خالد أربعتهم عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن مرسلًا.وقرن بيونس معمرًا!وانظر ما بعده.ويشهد للقصة حديث عائشة عند البخاري (4458)، ومسلم (2213).



7634 [3] - صحيح لغيره، وهذا إسناد رجاله ثقات في الجملة، لكن انفرد معمر -وهو ابن راشد- من بين أصحاب الزهري بوصله بذكر أسماء بنت عميس، بينما رواه أصحاب الزهري عنه عن أبي بكر ابن عبد الرحمن بن الحارث عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسلًا، وهو الصواب كما قال أبو حاتم وأبو زرعة الرازيان في "العلل" (2520)، إلّا أنَّ يعقوب بن سفيان الفسوي ذكر معمرًا أيضًا فيمن رواه مرسلًا من رواية عبد الله بن المبارك عنه، ولم يشر إليها الرازيان، فنخشى أن يكون ابن المبارك -أو غيره- حمل رواية معمر على رواية يونس فذكرها مرسلة، والله أعلم.وأخرجه أحمد 45 / (27469)، وابن حبان (6587) من طريق عبد الرزاق، بهذا الإسناد.وأخرجه يعقوب بن سفيان في "المعرفة والتاريخ" 1/ 510 عن علي بن الحسن بن شقيق، عن عبد الله بن المبارك، عن معمر عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن: أَنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم اشتكي … فذكره مرسلًا.وأخرجه يعقوب بن سفيان 1/ 510 من طريق شعيب بن أبي حمزة وعبيد الله بن أبي زياد ويونس ابن يزيد الأيلي وعقيل بن خالد أربعتهم عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن مرسلًا.وقرن بيونس معمرًا!وانظر ما بعده.ويشهد للقصة حديث عائشة عند البخاري (4458)، ومسلم (2213).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7635)


7635 - حدثنا علي بن حَمْشاذَ العَدْل، حدثنا إسماعيل بن إسحاق القاضي وعلي ابن عبد العزيز البَغَوي قالا: حدثنا سليمان بن داود الهاشمي، حدثني عبد الرحمن بن أبي الزِّناد، عن هشام بن عروة، أخبرني أبي، أنَّ عائشة قالت: يا ابنَ أُختي، لقد رأيتُ من تعظيم رسول الله صلى الله عليه وسلم عمَّه أمرًا عجيبًا، وذلك أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم كانت تأخذه الخاصرةُ فتشتدُّ به جدًا، وكنَّا نقول: أخذَ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم عِرْقُ الكُلْية، ولا نَهتدي أن نقول: الخاصرة، عِرقٌ أخذَتْ رسول الله، يومًا، فاشتدَّتْ به حتى أُغميَ عليه وخِفْنا عليه، وفزع الناسُ إليه، فظنّنا أنَّ به ذاتَ الجَنْب فَلَدَدْناه، ثم سُرِّيَ عن رسولِ الله صلى الله عليه وسلم وأَفاق، فعَرَفَ [1] أنَّه قد لُدَّ، ووَجَدَ أثر ذلك اللَّدَد، فقال: "أظننتُم أنَّ الله سلَّطها عليَّ؟ ما كان اللهُ لِيُسلِّطَها عليَّ، والذي نفسي بيده، لا يبقَى في البيت أحدٌ إِلَّا لُدَّ إلَّا عمِّي"، قالت: فرأيتُهم يَلُدُّونهم رجلًا رجلًا، قالت عائشة: ومَن في البيت يومَئِذٍ -فتذكُرُ فضلَهم- فلُدَّ الرجالُ أجمعون، وبلغ اللَّدُودُ أزواجَ النبي صلى الله عليه وسلم، فلُدِدْنَ امرأةً امرأةً حتى بلغ اللَّدودُ امرأةً منا -قال أبو الزِّناد: ولا أعلمُها إِلَّا ميمونة، قال: وقال الناسُ: أمُّ سَلَمة- فقالت: إنِّي واللهِ لَصائمةٌ، فقلنا: بئسَ والله ما ظننتِ أن نتركَكِ وقد أقسَمَ رسولُ الله صلى الله عليه وسلم، فَلَدَدْناها [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: হে আমার ভাগ্নে! আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে তাঁর চাচার প্রতি যে সম্মান প্রদর্শন করতে দেখেছি, তা ছিল খুবই আশ্চর্যজনক। ঘটনাটি হলো, একবার রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের একপাশে তীব্র ব্যথা (খাসিরাহ) শুরু হলো এবং তা খুব বেড়ে গেল। আমরা বলতাম: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে হয়তো কিডনির শিরায় ব্যথা (ইরকুল-কুলিয়াহ) ধরেছে, কিন্তু আমরা সঠিকভাবে ‘খাসিরাহ’ (পাশের ব্যথা) বলতে পারতাম না। একদিন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এই শিরায় ব্যথা ধরল, ফলে ব্যথা এতো তীব্র হলো যে তিনি বেহুঁশ হয়ে গেলেন। আমরা তাঁর জন্য ভীত হয়ে পড়লাম এবং লোকেরা তাঁর কাছে ছুটে এলো। আমরা ভাবলাম যে তাঁর প্লুরিসি (যাতুল-জানব) হয়েছে। তাই আমরা তাঁকে 'লাদূদ' (মুখের এক পাশে ঢেলে দেওয়া তিক্ত ঔষধ) সেবন করালাম।

এরপর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের কষ্ট দূর হলো এবং তিনি জ্ঞান ফিরে পেলেন। তিনি জানতে পারলেন যে তাঁকে 'লাদূদ' দেওয়া হয়েছে এবং তিনি সেটির প্রভাব অনুভব করলেন। তখন তিনি বললেন: "তোমরা কি ভেবেছিলে আল্লাহ্ তা'আলা এই রোগটি আমার ওপর চাপিয়ে দিয়েছেন? আল্লাহ্ আমাকে এই রোগে আক্রান্ত করবেন না। যার হাতে আমার প্রাণ, তাঁর শপথ! ঘরে উপস্থিত এমন কেউ থাকবে না যাকে 'লাদূদ' সেবন করানো হবে না, শুধুমাত্র আমার চাচা ছাড়া।"

(আয়িশা) বলেন: এরপর আমি দেখলাম যে তারা একজন একজন করে সকলকে সেই ওষুধ সেবন করাচ্ছে। আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: সেদিন ঘরে যারা ছিলেন— তিনি তাদের মর্যাদার কথা স্মরণ করেন— পুরুষদের সকলকে 'লাদূদ' সেবন করানো হলো। আর এই 'লাদূদ' নাবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের স্ত্রীদের পর্যন্ত পৌঁছাল। তাদের একজন একজন করে সকলকে সেবন করানো হলো, যতক্ষণ না আমাদের মধ্যেকার এক স্ত্রীর কাছে এই লাদূদ পৌঁছাল— [আবূয যিনাদ (রাবী) বলেন, আমি তাকে মায়মূনা ছাড়া অন্য কেউ বলে মনে করি না। তবে লোকেরা উম্মু সালামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেছেন]— তখন তিনি বললেন: আল্লাহর শপথ! আমি তো রোযাদার। আমরা বললাম: আল্লাহর শপথ! তুমি কী খারাপ ধারণা করেছো! রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যখন কসম করেছেন, তখন আমরা তোমাকে ছাড়তে পারি না। অতঃপর আমরা তাকেও 'লাদূদ' সেবন করালাম।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في النسخ الخطية: فعرَّفناه أنه، والمثبت من "تلخيص الذهبي" و "مسند أحمد".



[2] إسناده حسن من أجل عبد الرحمن بن أبي الزناد.وأخرجه أحمد 41 / (24870) عن سليمان بن داود بهذا الإسناد. وانظر ما قبله.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7636)


7636 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا الرَّبيع بن سليمان، حدثنا يحيى بن حسان، حدثنا وُهَيب بن خالد حدثنا عبد الله بن طاووس، عن أبيه، عن ابن عباس: أنَّ النبيَّ صلى الله عليه وسلم استَعَطَ [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين ولم يُخرجاه!




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যে, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নাকে ঔষধ বা নস্য ব্যবহার করেছেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح. الربيع بن سليمان هو المرادي.وأخرجه أبو داود (3867) من طريق أحمد بن إسحاق الحضرمي، عن وهيب، بهذا الإسناد.وسيأتي عند المصنف من طريق وهيب برقم (8442)، وفيه زيادة ذكر الاحتجام، ويأتي هناك تخريجه واستدراكه على "الصحيحين" وهمٌ، فهو فيهما كما سيرد هناك.قوله: "استعط" أي: أدخل في أنفه دواءً يستجلب به العطاس.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7637)


7637 - حدثنا محمد بن إبراهيم بن الفضل المزكِّي، حدثنا إبراهيم بن أبي طالب، حدثنا عبد الوارث بن عبد الصمد، حدثني أبي، حدثنا المُشمعِلُّ، عن عمرو ابن سُليم، عن رافع بن عمرو [1] قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "العَجُوةُ والصَّخْرَةُ والشَّجرةُ من الجنَّة" [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




রাফি’ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “আজওয়া খেজুর, পাথর এবং গাছ জান্নাতের।”




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] وقع الإسناد في النسخ الخطية هكذا: "المشمعل بن عمرو قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم … "، والتصويب من "إتحاف المهرة" (4568)، و "تلخيص الذهبي".



[2] رجاله ثقات معروفون غير عمرو بن سليم، وقد سلف الكلام عليه برقم (6630).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7638)


7638 - أخبرنا أبو سهل أحمد بن محمد بن عبد الله بن زياد القطّان، حدثنا يحيى ابن جعفر بن الزِّبرِقان، حدثنا عُبيد بن واقِد بن القاسم القَيْسي، حدثنا عثمان بن عبد الرحمن [1] العَبْدي، عن حميد، عن أنس بن مالك: أنَّ وَفْدَ عبد القيس من أهل هَجَر قَدِمُوا على رسول الله صلى الله عليه وسلم، فبينما هم قُعودٌ عندَه إذ أقبلَ عليهم، فقال لهم: "تمرةٌ تَدْعُونَها كذا، وتمرةٌ تَدعونَها كذا" حتى عدَّ ألوان تَمَراتِهم أجمعَ، فقال له رجلٌ من القوم: بأبي أنت وأُمِّي يا رسول الله، لو كنتَ وُلِدت في جوفِ هَجَرَ، ما كنتَ بأعلمَ منك الساعة، أشهدُ أنَّك رسولُ الله، فقال: "إِنَّ أَرضَكم رُفِعَت لي منذ قعدتُم إليَّ، فنَظَرتُ من أذناها إلى أقْصاها، فخيرُ تَمَراتِكم البَرْنِي يُذهِبُ الداءَ ولا داءَ فيه" [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.وله شاهد من حديث أبي سعيد الخُدْري:




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আব্দুল কাইস গোত্রের একটি প্রতিনিধিদল, যারা হাজার এলাকার বাসিন্দা ছিল, তারা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট আগমন করল। যখন তারা তাঁর কাছে উপবিষ্ট ছিল, তখন তিনি তাদের দিকে এগিয়ে আসলেন এবং বললেন: "এই খেজুরকে তোমরা অমুক নামে ডাকো, আর এই খেজুরকে তোমরা অমুক নামে ডাকো।" এভাবে তিনি তাদের সব ধরনের খেজুরের নাম গণনা করলেন। তখন তাদের মধ্য থেকে এক ব্যক্তি তাঁকে বলল: ইয়া রাসূলুল্লাহ! আমার পিতা-মাতা আপনার জন্য উৎসর্গ হোক! আপনি যদি হাজারের অভ্যন্তরেও জন্ম নিতেন, তাহলেও আপনি এই মুহূর্তের চেয়ে বেশি জানতেন না। আমি সাক্ষ্য দিচ্ছি যে আপনি আল্লাহর রাসূল। তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তোমরা আমার কাছে বসার পর থেকেই তোমাদের এলাকা আমার সামনে তুলে ধরা হয়েছিল। ফলে আমি তার নিকটতম অংশ থেকে দূরতম অংশ পর্যন্ত দেখতে পেয়েছি। আর তোমাদের সর্বোত্তম খেজুর হলো বারনী। এটি রোগ দূর করে এবং এতে কোনো রোগ (ক্ষতি) নেই।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] كذا وقع في النسخ الخطية: عبد الرحمن، وصوابه: عبد الله.



[2] إسناده ضعيف، عبيد بن واقد القيسي، وقيل: الليثي، ضعيف، وعثمان بن عبد الله العبدي قال الأزدي: ضعيف، ومع ضعفه فهو مجهول، وقال العقيلي في "ضعفائه": حديثه غير محفوظ، ولا يعرف إلَّا به، وأعله الذهبي في "تلخيصه" بعثمان، وقال: الحديث منكر.وأخرجه العقيلي في "الضعفاء" (1174)، وأبو نعيم في الطب النبوي" (822) من طريق محمد ابن خالد بن خِداش، والطبراني في "الأوسط" (6092) من طريق أبي الخطاب زياد بن يحيى، كلاهما عن عبيد بن واقد القيسي، بهذا الإسناد. وقال الطبراني: لم يرو هذا الحديث عن حميد الطويل إلَّا عثمان بن عبد الله، تفرد به عبيد بن واقد.وسيأتي عند المصنف برقم (8447) من حديث مزيدة، وفي سنده مجهول.وفي باب فضل البرني أيضًا عن بريدة عند البخاري في "التاريخ الكبير" 5/ 112، والروياني في "مسنده (43 م)، وابن عدي في "الكامل" 5/ 279، والبيهقي في "شعب الإيمان" (5487).وسنده ضعيف، وضعفه أبو حاتم الرازي كما في "بيان خطأ البخاري" ص 57.وعن أبي أمامة الباهلي عند ابن سمعون في "الأمالي" (23)، وأبي نعيم في "الطب" (457)،وفي سنده شهر بن حوشب، وفيه لِينٌ. وهناك شواهد أخرى أوردها السيوطي في "الآلئ المصنوعة" أعرضنا عنها لشدة ضعفها.