হাদীস বিএন


আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম





আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7639)


7639 - أخبرَناه الحسن بن يعقوب العَدْل، حدثنا يحيى بن أبي طالب، حدثنا زيد بن الحُبَاب، حدثنا سعيد بن سُوَيد السابِرِي، حدثنا خالد بن رَبَاح البصري، عن أبي الصِّدِّيق الناجيّ، عن أبي سعيد قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "خيرُ تمرِكم [1] البَرْنِيُّ، يُخرِجُ الداءَ ولا داءَ فيه" [2].




আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমাদের খেজুরের মধ্যে সর্বোত্তম হলো বারনী, তা রোগ দূর করে এবং তাতে কোনো রোগ নেই।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في (ص): تمرتكم.



[2] إسناده ضعيف، سعيد بن سويد ذكره البخاري في "التاريخ الكبير" 3/ 477 وابن أبي حاتم في "الجرح والتعديل" 4/ 29 - 30، ولم يذكر فيه جرحًا ولا تعديلًا، ولا نسباه، ونُسب عند الطبراني مَعْوليًا، وذكره ابن حبان في "ثقاته" 8/ 262، وهذا الرجل فيه جهالة، وقد اضطرب في تسمية شيخه فمرةً سماه خالد بن رباح كما وقع هنا عند المصنف، ومرةً سماه خالد بن زياد صاحب السابري كما عند الطبراني، وهو الذي اعتمده المزي في "تهذيبه" 8/ 65، ومرةً سماه زيادًا غير منسوب كما ذكر البخاري وابن أبي حاتم وابن حبان في ترجمته المذكورة. والخالدان صدوقان، وأما زياد فلم نعرفه.وأخرجه أبو نعيم في "الطب النبوي" (823) من طريق علي بن محمد، عن زيد بن الحباب، عن سعيد بن سويد بهذا الإسناد. ووقع في سنده خطأ وسقط.وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (7406) من طريق عبد القدوس بن محمد، عن سعيد بن سويد المعولي، عن خالد بن زياد صاحب السابري، عن ابي الصديق الناجي، عن ابي سعيد. وقال: لا يروى هذا الحديث عن أبي سعيد إلَّا بهذا الإسناد، تفرَّد به عبد القدوس!









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7640)


7640 - حدثنا أبو بكر بن إسحاق الفقيه وأبو محمد بن موسى العدل، قالا: أخبرنا علي بن الحُسين بن الجُنَيد، حدثنا المُعافَى بن سليمان، حدثنا فُليح بن سليمان، عن أيوب بن عبد الرحمن بن صَعْصَعة، عن يعقوب بن أبي يعقوب، عن أُمِّ المنذر الأنصارية -وكانت إحدى خالات النبيِّ صلى الله عليه وسلم قالت: دخل عليَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم معه عليٌّ ناقِةٌ من مرضٍ، وفي البيت عِذْقٌ مُعلَّق، فقام النبيُّ [1] صلى الله عليه وسلم فتناول منه، وأقبل عليٌّ يتناولُ منه، فقال: "دَعْه، فإِنَّه لا يُوافقُكَ، إِنَّكَ ناقِهٌ" فقمتُ إلى شعير وسِلْق، فطبختُ فجئتُ به إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "يا عليُّ من هذا، فهو أوفَقُ لك" [2].رواه زيد بن الحُباب عن فُليح بن سليمان وقال: عن أمِّ مُبشِّر الأنصارية:




উম্মুল মুনযির আনসারিয়্যাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত— যিনি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খালাদের একজন ছিলেন। তিনি বলেন: আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার কাছে এলেন। তাঁর সাথে আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-ও ছিলেন, যিনি সবেমাত্র রোগমুক্ত হয়েছেন। ঘরে একটি ঝুলন্ত খেজুরের ছড়া ছিল। নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উঠে তা থেকে কিছু খেলেন। আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-ও তা থেকে খেতে চাইলেন। তিনি (নবী) বললেন: "থামো, কারণ এটা তোমার জন্য উপযোগী হবে না, তুমি সবেমাত্র রোগমুক্ত হয়েছ।" তখন আমি যব (বা গম) এবং সল্ক (এক প্রকার শাক) নিয়ে তা রান্না করলাম এবং তা আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে নিয়ে আসলাম। আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "হে আলী, তুমি এই খাবার খাও, এটি তোমার জন্য অধিক উপযোগী।"

[যায়িদ ইবনুল হুবাব এটি ফালীহ ইবনে সুলাইমান থেকে বর্ণনা করেছেন এবং তিনি উম্মে মুবাশশির আনসারিয়্যাহ থেকে এটি বর্ণনা করেছেন।]




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] من قوله: "ومعه عليّ ناقه" إلى هنا سقط من (ز).



[2] إسناده ضعيف، فليح بن سليمان ضعيف، وقد اختُلف عليه في إسناده كما سيأتي هنا وفي الحديث الذي يليه.وأخرجه أحمد 44 / (27051 - 27053)، وأبو داود (3856)، وابن ماجه (3442)، والترمذي بإثر (2037) من طرق عن فليح بن سليمان، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن غريب. وقال قبلُ: لا نعرفه إلَّا من حديث فليح. وتعقّبه المزي في "التحفة" 13/ 108 بأنه ورد من طريق ابن أبي فديك، عن محمد بن أبي يحيى الأسلمي، عن أبيه، عن يعقوب بن أبي يعقوب، به. وسئل أبو حاتم الرازي عنها -كما في العلل" (2311) - فقال: محمد بن أبي يحيى هو محمد بن فليح، وهذا الحديث معروف من رواية فليح، وكنت أظن أنه محمد بن أبي يحيى الأسلمي أبو إبراهيم بن أبي يحيى … حتى وقفت عليه، هو فليح ويكنى أبا يحيى.وأخرجه الترمذي (2037) من طريق يونس بن محمد، عن فليح عن عثمان بن عبد الرحمن التيمي، عن يعقوب بن أبي يعقوب، به. فجعل عثمان بن عبد الرحمن مكان أيوب بن عبد الرحمن! وسيأتي من هذا الطريق عند المصنف برقم (8448) وفيه هناك: فليح عن أيوب بن عبد الرحمن.الناقةُ: هو القريب العهد بالمرض لم يرجع إليه كمال صحته بعدُ.والسِّلق بكسر السين: نوع من أنواع البَقل. ابن النعمان وغيرهم عن فليح، فقالوا: عن أم المنذر بنت قيس الأنصارية، وهو الصحيح.وأخرجه ابن الأعرابي في "معجمه" (1628) عن أبي الحسن زيد بن إسماعيل، عن زيد بن الحباب، عن فليح، عن أيوب بن عبد الرحمن الأنصاري، عن يعقوب، عن أم المنذر الأنصارية. على الجادّة كما في الحديث السابق.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7641)


7641 - أخبرَناه أبو بكر بن إسحاق، أخبرنا أحمد بن سَلَمة، حدثنا إسحاق، أخبرنا زيد بن الحُبَاب، حدثني فُلَيح بن سليمان المدني، أخبرني أيوب بن عبد الرحمن الأنصاري، أخبرني يعقوب بن أبي يعقوب، عن أمِّ مُبشِّر الأنصارية -وكانت بعضَ خالاتِ النبيِّ صلى الله عليه وسلم قالت: دخلَ عليَّ رسولُ الله صلى الله عليه وسلم ومعه عليٌّ ناقةٌ من مرضٍ، فذكر الحديث بنحوه [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




উম্মু মুবাশশির আনসারিয়্যা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার নিকট প্রবেশ করলেন এবং তাঁর সাথে আলীও ছিলেন, যখন তাঁর উপর রোগের কারণে দুর্বলতা ছিল। অতঃপর তিনি এ ধরনের (পূর্ণাঙ্গ) হাদীস বর্ণনা করেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف كسابقه. وقد وهَّم هذه الطريقَ البيهقيُّ لمخالفتها رواية الجماعة عن فليح كما في الحديث السابق، فقال: في رواية زيد بن الحباب وهمٌ. إسحاق: هو ابن راهويه.وأخرجه البيهقي في "السنن" 9/ 344، وفي "الآداب" (704) من طريق الحسن بن محمد الزعفراني، عن زيد بن الحباب، بهذا الإسناد. وقال عقبه في "السنن": رواية زيد بن الحباب وهم، وقال في "الآداب": هكذا قاله زيد بن الحباب، ورواه أبو عامر العقدي وأبو داود وشريح ابن النعمان وغيرهم عن فليح، فقالوا: عن أم المنذر بنت قيس الأنصارية، وهو الصحيح.وأخرجه ابن الأعرابي في "معجمه" (1628) عن أبي الحسن زيد بن إسماعيل، عن زيد بن الحباب، عن فليح، عن أيوب بن عبد الرحمن الأنصاري، عن يعقوب، عن أم المنذر الأنصارية. على الجادّة كما في الحديث السابق.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7642)


7642 - أخبرنا أبو عبد الله محمد بن يعقوب، حدثنا يحيى بن محمد بن يحيى، حدثنا مُسدَّد، حدثنا إسماعيل ابن عُليّة، حدثنا محمد بن السائب بن بَرَكة المكي، عن أُمِّه، عن عائشة قالت: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا أخذ أهلَه الوَعْكُ، أمرَ بالحَسَاء فصُنِع، ثم أمَرَهم فحَسَوْا منه، ويقول: "إِنَّهُ لَيَرْتُو فؤادَ الحَزين، ويَسرُو عن فؤادِ السَّقيم، كما تَسرُو إحداكُنَّ الوسخَ بالماء عن وجهِها" [1].




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর পরিবারের কেউ যদি দুর্বল বা অসুস্থ হয়ে পড়তেন, তখন তিনি 'হাসা' (বিশেষ স্যুপ) তৈরি করার আদেশ করতেন। সেটি তৈরি করা হলে তিনি তাদের তা পান করতে বলতেন। আর তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলতেন: "নিশ্চয়ই এটি বিষণ্ন ব্যক্তির অন্তরকে শক্তি যোগায় এবং অসুস্থ ব্যক্তির অন্তর থেকে কষ্ট দূর করে, যেমন তোমাদের কেউ তার মুখমণ্ডল থেকে পানি দিয়ে ময়লা পরিষ্কার করে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف، وقد صحَّ بغير هذا اللفظ كما بيناه عند مكرَّره السالف برقم (7300). وأخرجه أحمد 43 / (26050) عن روح بن عبادة، والنسائي (7532) من طريق عثمان بن عبد الرحمن الطرائفي، كلاهما عن أيمن بن نابل به.وأخرجه أحمد (41/ 25066)، وابن ماجه (3446) من طريق وكيع، وأحمد 41/ (24500) و 42 / (25192) عن أبي أحمد الزبيري والنسائي (7530) من طريق عيسى بن يونس، ثلاثتهم عن أيمن بن نابل، عن أم كلثوم، عن عائشة. ليس فيه فاطمة.وأخرج البخاري (5690) من طريق عروة بن الزبير، عن عائشة موقوفًا: أنها كانت تأمر بالتلبينة، وتقول: هو البغيض النافع.والتلبينة: حساء رقيق يُعمَل من دقيق ونحوه، وربما جُعل فيه العسل.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7643)


7643 - وأخبرنا أبو عبد الله، حدثنا يحيى بن محمد [حدثنا مُسدَّد] [1] حدثنا المُعتمِر قال: سمعتُ أيمنَ المكّي يقول: حدثتني فاطمة بنتُ المنذر عن أُمِّ كُلثوم، عن عائشة، أنَّ النبيَّ صلى الله عليه وسلم قال: "عليكم بالبَغيضِ النافع؛ التَّلبينةِ، والذي نفسُ محمدٍ بيده، إنه لَيَغسِلُ بطنَ أحدِكم كما يَغسِلُ الوسخَ عن وجهِه بالماء". قالت: وكان النبيُّ صلى الله عليه وسلم إذا اشتكى أحدٌ من أهلِه، لم تَزَلِ البُرْمةُ على النار حتى يقضيَ على أحدِ طَرَفَيهِ؛ إما موتٌ أو حياةٌ [2]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، فقد احتجَّ مسلم بمحمد بن السائب، واحتجَّ البخاري بأيمن بن نابل المكي، ثم لم يُخرجاه.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা অবশ্যই উপকারী অপ্রিয় বস্তুটি গ্রহণ করবে; আর তা হলো তালবিনা। যার হাতে মুহাম্মাদের জীবন, তার কসম! নিশ্চয়ই এটি তোমাদের কারো পেটকে এমনভাবে ধুয়ে পরিষ্কার করে, যেমন পানি দিয়ে মুখ থেকে ময়লা ধুয়ে ফেলা হয়।" তিনি (আয়িশা) বলেন: নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর পরিবারের কেউ অসুস্থ হলে, (এই তালবিনার) হাঁড়ি চুলায় থাকতোই, যতক্ষণ না রোগীর দুই অবস্থার একটির ফয়সালা হতো—হয় মৃত্যু, নয় জীবন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] سقط من النسخ الخطية، وهذه سلسلة قد خرّج المصنف بها في كتابه هذا بضعة عشر حديثًا، ويحيى بن محمد -وهو الذهلي- لم يدرك معتمر بن سليمان. وأخرجه أحمد 43 / (26050) عن روح بن عبادة، والنسائي (7532) من طريق عثمان بن عبد الرحمن الطرائفي، كلاهما عن أيمن بن نابل به.وأخرجه أحمد (41/ 25066)، وابن ماجه (3446) من طريق وكيع، وأحمد 41/ (24500) و 42 / (25192) عن أبي أحمد الزبيري والنسائي (7530) من طريق عيسى بن يونس، ثلاثتهم عن أيمن بن نابل، عن أم كلثوم، عن عائشة. ليس فيه فاطمة.وأخرج البخاري (5690) من طريق عروة بن الزبير، عن عائشة موقوفًا: أنها كانت تأمر بالتلبينة، وتقول: هو البغيض النافع.والتلبينة: حساء رقيق يُعمَل من دقيق ونحوه، وربما جُعل فيه العسل.



[2] إسناده ضعيف، فقد اختُلف فيه على أيمن بن نابل، فرواه عنه جمع عن فاطمة عن أم كلثوم، ورواه جمع آخر عنه بإسقاط فاطمة، وفاطمة هذه قد اختلف في نسبتها، فقيل: بنت أبي ليث، وقيل: بنت أبي عقرب، وهي مجهولة، وما وقع هنا عند المصنف وفيما سيأتي برقم (8449) من أنها بنت المنذر الزبيرية وهمٌ. وأم كلثوم -وهي بنت عمرو القرشية- مجهولة ايضا.وأخرجه النسائي (7531) عن محمد بن عبد الأعلى، عن المعتمر بن سليمان، عن أيمن بن نابل، بهذا الإسناد. وأخرجه أحمد 43 / (26050) عن روح بن عبادة، والنسائي (7532) من طريق عثمان بن عبد الرحمن الطرائفي، كلاهما عن أيمن بن نابل به.وأخرجه أحمد (41/ 25066)، وابن ماجه (3446) من طريق وكيع، وأحمد 41/ (24500) و 42 / (25192) عن أبي أحمد الزبيري والنسائي (7530) من طريق عيسى بن يونس، ثلاثتهم عن أيمن بن نابل، عن أم كلثوم، عن عائشة. ليس فيه فاطمة.وأخرج البخاري (5690) من طريق عروة بن الزبير، عن عائشة موقوفًا: أنها كانت تأمر بالتلبينة، وتقول: هو البغيض النافع.والتلبينة: حساء رقيق يُعمَل من دقيق ونحوه، وربما جُعل فيه العسل.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7644)


7644 - أخبرنا أبو الحسن علي بن محمد بن عُقْبة الشَّيباني بالكوفة، حدثنا إبراهيم بن إسحاق الزُّهْري، حدثنا محمد ويَعْلى ابنا عُبيد، قالا: حدثنا الأعمش، عن أبي سفيان، عن جابر قال: كان عند أُمِّ المؤمنين عائشةَ صبِيٌّ يَقطُرُ مَنْخِراهُ دمًا، فدخل رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: "ما شأنُ هذا الصبيِّ؟ " قالت: به العُذْرةُ، فقال: "وَيحَكُنَّ يا معشرَ النساءِ، لا تَقتُلنَ أولادَكنَّ، وأيُّ امرأةٍ بصبيِّها عُذرةٌ أو وَجِعَ رأسُه، فلتأخُذُ قُسْطًا هنديًّا"، قال: وأمر عائشةَ، ففعلت ذلك، فبَرَأَ. [1].هذا حديث صحيح على شرط مسلم ولم يُخرجاه.وقد أخرج البخاري أيضًا حديثَ الزُّهْري عن عُبيد الله بن عبد الله عن أُمِّ قيس بنت مِحصَن بنحو هذا مختصرًا [2].




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: উম্মুল মু'মিনীন আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে একটি শিশু ছিল, যার নাকের ছিদ্র থেকে রক্ত ঝরছিল। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেখানে প্রবেশ করে বললেন: "এই শিশুটির কী হয়েছে?" আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: তার 'উযরাহ' (গলার রোগ) হয়েছে। তখন তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "আফসোস তোমাদের জন্য, হে নারী সমাজ! তোমরা তোমাদের সন্তানদেরকে হত্যা করো না। যে নারীর শিশুটির 'উযরাহ' (গলার রোগ) হয়েছে অথবা যার মাথায় ব্যথা, সে যেন ক্বুসত হিন্দী (ভারতীয় আগরবাতি বা ইন্ডিয়ান কস্টাস) গ্রহণ করে।" রাবী বলেন: আর তিনি আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে নির্দেশ দিলেন। অতঃপর তিনি তাই করলেন এবং শিশুটি সুস্থ হয়ে গেল।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث صحيح، وهذا إسناد قوي من أجل أبي سفيان: وهو طلحة بن نافع.وأخرجه أحمد 22/ (14385) عن أبي معاوية محمد بن خازم ويحيى بن أبي غَنيّة، عن الأعمش، بهذا الإسناد.وسيأتي عند المصنف برقم (8445) من طريق الأعمش أيضًا.والعُذرة: وجعٌ في الحلق، وقيل: قرحة تخرج من الخرم الذي بين الأنف والحلق تعرضُ للصبيان. فإنَّ فيه سبعة أشفية: يُستعَط به من العُذرة، ويُلَدّ به من ذات الجَنب".



[2] هو عند الشيخين: البخاري (5692) ومسلم (2214)، ولفظه: "عليكم بهذا العُود الهندي، فإنَّ فيه سبعة أشفية: يُستعَط به من العُذرة، ويُلَدّ به من ذات الجَنب".









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7645)


7645 - أخبرني محمد بن علي بن دُحَيم الشَّيباني، حدثنا أحمد بن حازم بن أبي غَرَزَة، حدثنا أبو نُعيم، حدثنا نُصَير بن أبي الأشعث، قال: سمعتُ أبا الزُّبير يَذكُر عن جابر: أنَّ امرأةً جاءت بصبيٍّ لها إلى النبيِّ صلى الله عليه وسلم، فقالت: أفقَأُ منه العُذْرةَ؟ فقال: " [لا] [1] تُحرِقُوا حُلوقَ أولادِكم، خُذِي قُسْطًا هنديًّا ووَرْسًا فَأَسعِطِيهِ إياه" [2].هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, এক মহিলা তার শিশু পুত্রকে নিয়ে নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এলেন। অতঃপর তিনি বললেন: আমি কি তার টনসিলের (বা গলক্ষতের) চিকিৎসা হিসেবে তা কেটে ফেলব? তিনি বললেন: "তোমরা তোমাদের সন্তানদের গলাকে উত্তপ্ত (বা দগ্ধ) করো না। বরং তোমরা কুস্ত (কাঠ) ও ওয়ার্স (ঔষধি গাছ) নাও এবং তাকে তা নাকে শুঁকাও।”




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] زيادة من الرواية الآتية برقم (8443).



[2] إسناده صحيح. أبو نعيم: هو الفضل بن دكين، وأبو الزبير: هو محمد بن مسلم بن تَدرُس.وأخرجه النسائي (7540) من طريق إسماعيل بن جعفر، عن موسى بن عقبة، عن أبي الزبير، بنحوه.وأخرجه أبو نعيم في "الطب النبوي" (247) من طريق ابن لَهِيعة، عن أبي الزبير، به.وأخرجه النسائي (7541) من طريق عبد العزيز بن محمد بن الدراوردي، عن موسى بن عقبة، عن أبي الزبير، عن جابر، عن عائشة. فجعله من مسند عائشة! وأشار الطبراني في "الأوسط" (6247) إلى تفرد الدراوردي بذلك.وسيأتي من طريق أبي الزبير عن جابر برقم (8443).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7646)


7646 - حدثنا أبو حفص عمر بن حاتم الفقيه ببُخاري، حدثنا صالح بن محمد ابن حبيب الحافظ، حدثنا محمد بن أبان، حدثنا أبو عامر عبد الملك بن عمرو، حدثنا عبد الرحمن بن أبي المَوَالي، حدثني أيوب بن الحسن بن علي بن أبي رافع، عن جدَّته سَلْمَى قالت: ما سمعتُ أحدًا يَشكُو إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم وجعًا في رأسِه إلَّا قال:"احتَجِم"، ولا وجعًا في رجليه إلَّا قال: "اخضِبهما بالحِنَّاء" [1].هذا حديث صحيح الإسناد ولم يُخرجاه، وقد احتجَّ البخاريُّ رحمه الله بعبد الرحمن ابن أبي المَوَالِ.




সালমা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি এমন কাউকে শুনিনি যে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট তার মাথার যন্ত্রণার অভিযোগ করেছে, আর তিনি তাকে বলেননি: "তোমরা হিজামা করো (শিঙ্গা লাগাও)," অথবা পায়ের ব্যথার অভিযোগ করেছে, আর তিনি তাকে বলেননি: "উভয় পায়ে মেহেদি লাগাও।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث محتمل للتحسين وهذا إسناد ضعيف لاضطرابه، فقد اختلف في إسناده على عبد الرحمن بن أبي الموالي كما بيناه عند الرواية السالفة برقم (6999).وأخرجه أحمد 45/ (27617) عن أبي عامر عبد الملك بن عمرو العقدي، بهذا الإسناد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7647)


7647 - حدثنا علي بن حَمْشَاذَ العَدْل، حدثنا الحسن بن علي بن شَبيب المَعْمَري، حدثنا علي بن سهل الرَّملي، حدثنا الوليد بن مسلم، حدثنا هشام بن حسان، حدثني أنس بن سِيرين، حدثني أنس بن مالك قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "شِفَاءُ عِرْقِ النَّسا أَلْيَةُ شاةٍ عربيَّة تُذَاب، ثم تُجزَّأُ ثلاثةَ أجزاء، فتُشرَب في ثلاثة أيامٍ" [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.وقد رواه المعتمر بن سليمان عن هشام بن حسان بزيادة في المتن:




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "শিয়াতিক (نسا) রোগের নিরাময় হলো একটি আরবীয় ভেড়ার চর্বিযুক্ত লেজের অংশ (আলিয়া), যা গলানো হবে, এরপর তাকে তিনটি অংশে ভাগ করা হবে, অতঃপর (প্রতিদিন এক অংশ করে) তিন দিনে পান করা হবে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح. لكن اختلف فيه على أنس بن سيرين كما بيَّنّاه فيما سلف برقم (3191).وأخرجه ابن ماجه (3463) عن هشام بن عمار وراشد بن سعيد الرملي، كلاهما عن الوليد بن مسلم، بهذا الإسناد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7648)


7648 - حدثنا علي بن حَمْشَاذَ العدل، حدثنا أبو المثنَّى العَنْبري، حدثنا مُسدَّد، حدثنا المُعتمِر، قال: سمعتُ هشام بن حسّان يحدِّث عن أنس بن سِيرِين، عن أنس ابن مالك: ذَكَرَ أنَّ النبيَّ صلى الله عليه وسلم [1] وَصَفَ من عِرْق النَّسَا أَلْيَةَ شاةٍ عربيٍّ، ليست بصغيرةٍ ولا بكبيرةٍ، تُجَزُّ ثمَّ تُذابُ ثم تُقسَم إهَالتُها على ثلاثة أجزاء، فيَشربُ كلَّ يوم جزءًا على رِيق النَّفْس. قال أنس: وقد وصفتُ ذلك لثلاثِ مئةٍ كلُّهم يُعافيه الله تعالى [2].وقد رواه حَبيبُ بن الشَّهيد عن أنس بن سِيرِين:




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সায়াটিকা (ইরকুন নিসা) রোগের চিকিৎসার জন্য একটি আরবীয় ভেড়ার নিতম্বের চর্বি ব্যবহারের নির্দেশ দিয়েছেন, যা ছোটও হবে না এবং বড়ও হবে না। সেটাকে টুকরা টুকরা করে কেটে গলানো হবে। অতঃপর তার গলিত চর্বিকে তিন ভাগে ভাগ করা হবে। প্রতিদিন সকালে খালি পেটে এক ভাগ পান করতে হবে। আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: আমি তিন শত লোকের জন্য এই চিকিৎসা বর্ণনা করেছি, আল্লাহ তাআলা তাদের সকলকে রোগমুক্ত করেছেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في (ز) زيادة: أنه.



[2] إسناده صحيح كسابقه. أبو المثنى العنبري: هو معاذ بن المثنى بن معاذ البصري.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7649)


7649 - حدَّثَناه أبو علي الحافظ، أخبرنا محمد بن الحسين بن مُكرَم، حدثنا العباس بن يزيد البَحْراني، حدثنا عبد الخالق بن أبي المُخارِق الأنصاري، حدثنا حبيب بن الشَّهيد، عن أنس بن سِيرين، عن أنس بن مالك قال: ذَكَرَ رسول الله صلى الله عليه وسلم عِرقَ النَّسَا، فقال: "تُؤخذ أَلْيَةُ كبشٍ عربيٍّ وليست بالصغيرةِ ولا بالكبيرةِ، فتُذابُ فتشربُه ثلاثةَ أيام". قال أنس بن [سِيرين] [1]: لقد نعتُّه [2] لأكثرَ من ثلاث مئة كلُّهم يَبْرَءُون منه [3].هذه الأسانيد كلها صحيحة على شرط الشيخين، وقد أعضَلَه حمّاد بن سَلَمة عن أنس بن سِيرِين، فقال: عن أخيه مَعبدَ، عن رجل من الأنصار، عن أبيه [4]، والقولُ عندنا فيه قولُ المعتمِر بن سليمان والوليد بن مسلم.




আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ‘ইরকুন-নিসা’ (সায়েটিকা/গেঁটে বাত) সম্পর্কে আলোচনা করলেন, অতঃপর তিনি বললেন: "একটি আরবী দুম্বার চর্বিযুক্ত লেজ (আলিয়া) নিতে হবে—যা খুব ছোটও হবে না আবার খুব বড়ও হবে না, অতঃপর তা গলিয়ে তিন দিন ধরে পান করতে হবে।" আনাস ইবনু সীরীন বলেন: আমি তিন শতকেরও বেশি লোককে এই চিকিৎসার কথা বর্ণনা করেছি এবং তারা প্রত্যেকেই এর থেকে আরোগ্য লাভ করেছে।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] وقع في الأصول: ابن مالك، وأثبتناه على الجادة من بعض مصادر التخريج، ومن الرواية السالفة برقم (3191). وأخرجه ابن ماجه (3495) عن أبي سلمة يحيى بن خلف، عن أبي عاصم النبيل، بهذا الإسناد.ويشهد له حديث ابن عباس السالف برقم (7565)، وهو حديث قوي.وحديث جابر عند ابن ماجه (3496)، وسنده حسن في الشواهد والمتابعات.



[2] تحرَّف في النسخ الخطية إلى: ألعقه. وأخرجه ابن ماجه (3495) عن أبي سلمة يحيى بن خلف، عن أبي عاصم النبيل، بهذا الإسناد.ويشهد له حديث ابن عباس السالف برقم (7565)، وهو حديث قوي.وحديث جابر عند ابن ماجه (3496)، وسنده حسن في الشواهد والمتابعات.



7649 [3] - حديث صحيح، وهذا إسناد رجاله لا بأس بهم، وعبد الخالق بن أبي المخارق، روى عنه جمع كما قال البزار، وذكره ابن حبان في "الثقات"، لكن قد اختلف فيه على أنس بن سِيرِين كما فصلناه عند الرواية (3191).وأخرجه البزار في "مسنده" (6797)، والطبراني في "الأوسط" (2067)، والدارقطني في "العلل" ضمن السؤال (2340)، والسهمي في "تاريخ جرجان" 1/ 300، وأبو نعيم في "الطب النبوي" (494)، والخطيب في "تاريخ بغداد" 15/ 163، والضياء في "المختارة" 4/ (1556) من طرق عن العباس بن يزيد البحراني، بهذ الإسناد. وقال البزار: لا نعلم رواه عن حبيب بن الشهيد إلَّا عبد الخالق بن أبي المخارق، وعبد الخالق بصري مشهور، روى عنه عمرو بن عاصم الكلابي وعثمان بن طالوت وحفص بن محبوب وغيرهم، ولا روى عن حبيب عن أنس بن سِيرِين عن أنس إلَّا هذا الحديث. وأخرجه ابن ماجه (3495) عن أبي سلمة يحيى بن خلف، عن أبي عاصم النبيل، بهذا الإسناد.ويشهد له حديث ابن عباس السالف برقم (7565)، وهو حديث قوي.وحديث جابر عند ابن ماجه (3496)، وسنده حسن في الشواهد والمتابعات.



7649 [4] - تقدم تخريج هذه الطريق عند الرواية السالفة برقم (3191). وأخرجه ابن ماجه (3495) عن أبي سلمة يحيى بن خلف، عن أبي عاصم النبيل، بهذا الإسناد.ويشهد له حديث ابن عباس السالف برقم (7565)، وهو حديث قوي.وحديث جابر عند ابن ماجه (3496)، وسنده حسن في الشواهد والمتابعات.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7650)


7650 - أخبرنا أبو الحسين محمد بن أحمد بن تَميم الحنظلي ببغداد، حدثنا أبو قِلابة، حدثنا أبو عاصم، حدثنا عثمان بن عبد الملك، عن سالم بن عبد الله، عن عبد الله بن عمر قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "عليكم بالإِثْمِدِ، فإنه يُنبِتُ الشَّعرَ ويَجلُو البَصرَ" [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আবদুল্লাহ ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "তোমরা অবশ্যই ইসমিদ (অঞ্জন/সুরমা) ব্যবহার করবে। কারণ তা চুল উৎপন্ন করে এবং দৃষ্টিশক্তি উজ্জ্বল করে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف لضعف عثمان بن عبد الملك. أبو قلابة: هو عبد الملك ابن محمد الرقاشي، وأبو عاصم هو الضحاك بن مخلد النبيل. وأخرجه ابن ماجه (3495) عن أبي سلمة يحيى بن خلف، عن أبي عاصم النبيل، بهذا الإسناد.ويشهد له حديث ابن عباس السالف برقم (7565)، وهو حديث قوي.وحديث جابر عند ابن ماجه (3496)، وسنده حسن في الشواهد والمتابعات.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7651)


7651 - حدثنا أبو بكر إسماعيل بن محمد بن إسماعيل بالرَّيِّ الفقيه، حدثنا أبو بكر محمد بن الفرج الأزرق ببغداد، حدثنا حجَّاج بن محمد المِصِّيصي، عن ابن جُرَيج، أخبرني عمرو بن يحيى بن عُمَارة بن أبي حسن، حدثتني مريم بنت إياس ابن البُكَير صاحبِ النبي صلى الله عليه وسلم، عن بعض أزواج النبيِّ صلى الله عليه وسلم -وأَظنُّها زينبَ-: أَنَّ النبيَّ صلى الله عليه وسلم دخل عليها، فقال: "عندَكِ ذَرِيرةٌ؟ " فقالت: نعم، فدَعَا بها ووَضَعَها على بَثْرة بين إصبَعينِ من أصابع رِجله، فقال: "اللهمَّ مُطفِئَ الكبير، ومُكبِّرَ الصغير، أَطفِئها عنِّي"، فطَفئَتْ [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




যায়নাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত (আর রাবী মনে করেন তিনি যায়নাব ছিলেন), যে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর নিকট প্রবেশ করলেন এবং জিজ্ঞেস করলেন: "তোমার কাছে কি যারিরাহ (সুগন্ধি গাছের গুঁড়ো) আছে?" তিনি বললেন: "হ্যাঁ।" তিনি সেটি আনালেন এবং তাঁর পায়ের আঙ্গুলগুলোর মধ্যের একটি ফোঁড়ার উপর রাখলেন। অতঃপর তিনি বললেন: "হে আল্লাহ! যিনি বড়কে নিভিয়ে দেন এবং ছোটকে বড় করেন, আপনি এটি আমার থেকে নিভিয়ে দিন।" ফলে সেটি নিভে গেল।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده محتمل للتحسين مريم بنت إياس تفرَّد بالرواية عنها عمرو بن يحيى بن عمارة، ولم يوردها ابن حبان في "ثقاته"، وأوردها الذهبي في "الميزان" في مجهولات النسوة، وأمّا الحافظ ابن حجر فقد صحَّح حديثها هذا في "نتائج الأفكار" 4/ 157 - 158، وقال: قد اختلف في صحبتها وأبوها وأعمامها من كبار الصحابة، ولأخيها محمد رؤية. وقال في "التقريب": مقبولة؛ يعني عند المتابعة.وأخرجه النسائي (10803) عن الحسن بن محمد الزعفراني، عن حجاج المصيصي، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 38/ (23141) عن روح بن عبادة، عن ابن جريج، به.والذَّريرة: فُتات قصب الطِّيب، يُجلَب من الهند.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7652)


7652 - أخبرنا دَعْلَج بن أحمد السِّجْزي، حدثنا عبد العزيز بن معاوية البصري، حدثنا محمد بن جَهْضَم، حدثنا إسماعيل بن جعفر عن عُمارة بن غَزِيَّة، عن عاصم ابن عمر بن قَتَادة، محمود بن لَبيد، عن قَتَادة بن النُّعمان، أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "إذا أحبَّ اللهُ عبدًا حَمَاه الدنيا، كما يَظُلُّ أحدُكم يَحْمِي سَقِيمَه الماءَ" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.وشرحُ [2] هذا الحديث وبيانُه فيما أَمر به عمرُ بن الخطّاب رضي الله عنه:




ক্বাতাদা ইবনু নু’মান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “যখন আল্লাহ কোনো বান্দাকে ভালোবাসেন, তখন তিনি তাকে দুনিয়া (এর ভোগ-বিলাস) থেকে দূরে রাখেন, যেমন তোমাদের কেউ তার অসুস্থ ব্যক্তিকে (ক্ষতিকারক) পানি থেকে বিরত রাখে।”

(এই হাদীসটির সনদ সহীহ, কিন্তু তারা (বুখারী ও মুসলিম) এটি উদ্ধৃত করেননি। এই হাদীসটির ব্যাখ্যা ও বিবরণ সেই আদেশের মধ্যে রয়েছে যা উমার ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) দিয়েছিলেন:)




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث صحيح، وهذا إسناد رجاله ثقات في الجملة، لكن قد اختُلف على عاصم بن عمر ابن قتادة عن محمود بن لبيد في تسمية صحابيه، فقيل: عن قَتَادة بن النعمان، وقيل: عن أبي سعيد الخدري -كما في الرواية الآتية برقم (7654) - وقيل: عن رافع بن خديج، وقيل: عن عقبة بن رافع، وقيل: عن محمود بن لبيد مرسلًا، وهذا لا يضرُّ، فمحمودٌ صحابي صغير، وقد ذكرنا هذه الطرق مفصلة في "مسند أحمد" عند الحديث (23622).وأخرجه ابن حبان (669) من طريق العباس بن عبد العظيم، عن محمد بن جهضم، بهذا الإسناد.وسيأتي الحديث عند المصنف برقم (8054) من طريق محمد بن جهضم أيضًا، وبرقم (8455) من طريق إسحاق بن محمد الفَرْوي، كلاهما عن إسماعيل بن جعفر.وخالفهما عليُّ بن حجر عند الترمذي (2036 م) فرواه عن إسماعيل بن جعفر، عن عمرو، عن عاصم، عن محمود بن لبيد، عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسَلًا، لم يذكر فيه بين محمود والنبي صلى الله عليه وسلم أحدًا. قال الترمذي ومحمود بن لبيد قد أدرك النبيَّ صلى الله عليه وسلم ورآه وهو غلام صغير.وأخرجه من حديث محمود بن لبيد كذلك أحمد 39/ (23622) من طريق سليمان بن بلال عن عمرو بن أبي عمرو، به.ورجّح أبو حاتم كما في "العلل" (1820) أن الصحيح طريق محمود بن بن لبيد عن النبي صلى الله عليه وسلم.



[2] تحرَّف في (ز) إلى: وشيوخ.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7653)


7653 - حدثنا أبو بكر بن إسحاق، أخبرنا محمد بن شاذان الجَوهَري، حدثنا سعيد بن سليمان الواسطي، حدثنا مُسلم بن خالد، حدثنا زيد بن أسلم، عن أبيه قال: مرضتُ في زمان عمر بن الخطّاب مرضًا شديدًا، فدعا لي عمرُ طبيبًا، فحَمَاني حتى كنتُ أمَصُّ النَّواةَ من شدّة الحِمْية [1].وقد فسَّره عمرو بن أبي عمرو مولى المُطَّلِب في روايته عن عاصم بن عمرو بن قَتَادة:




আসলাম থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি উমার ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর যুগে কঠিনভাবে অসুস্থ হয়ে পড়ি। তখন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমার জন্য একজন চিকিৎসক ডাকলেন, আর তিনি (চিকিৎসক) আমাকে (খাবার থেকে) এত কঠোরভাবে বিরত রাখেন যে, খাদ্যের কঠোরতার কারণে আমি খেজুরের আঁটি চুষতে থাকতাম। আর মুত্তালিবের গোলাম আমর ইবনু আবী আমর, আসিম ইবনু আমর ইবনু কাতাদার সূত্রে তাঁর বর্ণনায় এর ব্যাখ্যা দিয়েছেন:




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ليِّن من أجل مسلم بن خالد: وهو الزنجي.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7654)


7654 - حدثنا علي بن عيسى الحيري، حدثنا جعفر بن محمد ابن التُّرك [1] ومحمد بن عمرو بن النَّضر الحَرَشي، قالا: حدثنا يحيى بن يحيى، أخبرنا إسماعيل ابن جعفر، عن عمرو بن أبي عمرو، عن عاصم بن عمر بن قَتَادة، عن محمود بن لَبيد، عن أبي سعيد الخُدْري، أنَّ النبيَّ صلى الله عليه وسلم قال: "إنَّ الله تعالى لَيَحمِي عبدَه المؤمنَ الدُّنيا وهو يُحبُّه، كما تَحمُونَ مريضَكم الطعامَ والشرابَ تخافونَ عليه" [2].كذا قال: عن أبي سعيد، وفي حديث عُمارة بن غَزِيَّة: عن قَتَادة بن النُّمعان، والإسنادان عندي صحيحان، والله أعلم.




আবু সাঈদ আল-খুদরি (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যে, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় আল্লাহ তা‘আলা তাঁর মুমিন বান্দাকে দুনিয়া (এর ফেতনা) থেকে দূরে রাখেন, অথচ তিনি তাকে ভালোবাসেন। যেমন তোমরা তোমাদের রোগীকে খাদ্য ও পানীয় থেকে দূরে রাখো, (কারণ) তোমরা তার ক্ষতির ভয় করো।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] المثبت من (م)، وفي (ز) البزل، وفي (ص): الهرول. فقال: يا غلام ائتني بحجام، فقال له: ما تصنع بالحجام يا أبا عبد الله؟ قال: أريد أن أعلق فيه مِحجمًا، قال: واللهِ إنَّ الذباب ليصيبني، أو يصيبني الثوب فيؤذيني ويشق عليَّ، فلما رأى تبرُّمه من ذلك قال: إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "إن كان في شيء من أدويتكم خير، ففي شرطة مِحجم، أو شربة من عسل، أو لذعة بنار" قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "وما أحبُّ أن أكتوي"، قال: فجاء بحجام فشرطه، فذهب عنه ما يجد. واللفظ لمسلم، واقتصر الإمام أحمد والبخاري في رواياته الثلاث على المرفوع.والمقنَّع، قال الحافظ ابن حجر في "فتح الباري" 17/ 453: بقاف ونون ثقيلة مفتوحة، هو ابن سِنان، تابعيّ، لا أعرفه إلَّا في هذا الحديث.



[2] حديث صحيح، وهذا إسناد رجاله ثقات في الجملة، لكن اختلف في تسمية صحابيه كما ذكرنا قريبًا عند الرواية (7652). جعفر بن محمد ابن الترك هو جعفر بن محمد بن الحسين ابن عبيد الله، ويحيى بن يحيى: هو النيسابوري، وإسماعيل بن جعفر: هو ابن أبي كثير، وعمرو ابن أبي عمرو: هو مولى المطَّلب.ولم نقف عليه من رواية محمود بن لبيد عن أبي سعيد عند غير المصنف. فقال: يا غلام ائتني بحجام، فقال له: ما تصنع بالحجام يا أبا عبد الله؟ قال: أريد أن أعلق فيه مِحجمًا، قال: واللهِ إنَّ الذباب ليصيبني، أو يصيبني الثوب فيؤذيني ويشق عليَّ، فلما رأى تبرُّمه من ذلك قال: إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "إن كان في شيء من أدويتكم خير، ففي شرطة مِحجم، أو شربة من عسل، أو لذعة بنار" قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "وما أحبُّ أن أكتوي"، قال: فجاء بحجام فشرطه، فذهب عنه ما يجد. واللفظ لمسلم، واقتصر الإمام أحمد والبخاري في رواياته الثلاث على المرفوع.والمقنَّع، قال الحافظ ابن حجر في "فتح الباري" 17/ 453: بقاف ونون ثقيلة مفتوحة، هو ابن سِنان، تابعيّ، لا أعرفه إلَّا في هذا الحديث.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7655)


7655 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بحر بن نصر الخَوْلاني، حدثنا عبد الله بن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث، أنَّ بُكير بن عبد الله حدَّثه، أنَّ عاصم ابن عمر بن قَتَادة حدَّثه: أنَّ جابر بن عبد الله عادَ المُقنَّعَ، ثم قال: لا أَبْرَحُ حتى يَحتجِمَ، فإني سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "إِنَّ فيه شِفاءً" [1]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه!




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি আল-মুকান্না'কে দেখতে গেলেন। অতঃপর তিনি বললেন: আমি এখান থেকে যাবো না, যতক্ষণ না সে শিঙা লাগায় (হিজামা করে)। কেননা আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি: "নিশ্চয় এর মধ্যে আরোগ্য রয়েছে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح.وأخرجه أحمد 22 / (14598)، والبخاري (5697)، ومسلم (2205) (70)، والنسائي (7549)، وابن حبان (6076) من طرق عن عبد الله بن وهب، بهذا الإسناد. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وسيأتي من طريق ابن وهب برقم (8457).وأخرجه أحمد 23 / (14701)، والبخاري (5683) و (5702) و (5704)، ومسلم (2205) (71) من طريق عبد الرحمن بن سليمان، عن عاصم بن عمر بن قَتَادة قال: جاءنا جابر بن عبد الله في أهلنا، ورجل يشتكي خُراجًا به أو جراحًا، فقال: ما تشتكي؟ قال: خُراج بي قد شق عليَّ، فقال: يا غلام ائتني بحجام، فقال له: ما تصنع بالحجام يا أبا عبد الله؟ قال: أريد أن أعلق فيه مِحجمًا، قال: واللهِ إنَّ الذباب ليصيبني، أو يصيبني الثوب فيؤذيني ويشق عليَّ، فلما رأى تبرُّمه من ذلك قال: إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "إن كان في شيء من أدويتكم خير، ففي شرطة مِحجم، أو شربة من عسل، أو لذعة بنار" قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "وما أحبُّ أن أكتوي"، قال: فجاء بحجام فشرطه، فذهب عنه ما يجد. واللفظ لمسلم، واقتصر الإمام أحمد والبخاري في رواياته الثلاث على المرفوع.والمقنَّع، قال الحافظ ابن حجر في "فتح الباري" 17/ 453: بقاف ونون ثقيلة مفتوحة، هو ابن سِنان، تابعيّ، لا أعرفه إلَّا في هذا الحديث.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7656)


7656 - أخبرنا أبو العباس محمد بن محمود [1] المحبوبي بمَرْو، حدثنا سعيد بن مسعود، حدثنا عبيد الله بن موسى حدثنا شَيْبان بن عبد الرحمن، عن عبد الملك ابن عُمير، عن حُصين بن أبي الحُرّ، عن سَمُرة قال: دخل أعرابيٌّ من بني فَزارة من بني أُمِّ قِرْفة على رسول الله صلى الله عليه وسلم، فإذا حجَّامٌ يَحجُمُه بمَحاجِمَ [2] له من قُرون، يَشرِطُ بشَفْرةٍ، فقال: ما هذا يا رسولَ الله؟ لِمَ تَدَعُ هذا يقطعُ عليك جِلدَك؟ قال: "هذا الحَجْمُ، وهو خيرُ ما تداويتُم به" [3].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه. وقد رواه شُعبةُ بن الحجَّاج العَتَكيُّ وزهير بن معاوية الجُعْفيُّ عن عبد الملك ابن عُمير.أما حديثُ شُعبة:




সামুরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: উম্মে কির্ফার পুত্র গোত্রের বানু ফাযারার জনৈক বেদুঈন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট আগমন করল। সে দেখল যে একজন শিঙ্গা লাগানেওয়ালা শিংয়ের তৈরি পাত্র ব্যবহার করে তাঁকে শিঙ্গা লাগাচ্ছেন এবং একটি ক্ষুর দ্বারা চামড়ায় আঘাত করছেন। সে বলল: ইয়া রাসূলাল্লাহ! এটা কী? কেন আপনি একে আপনার চামড়া কাটতে দিচ্ছেন? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "এটা হলো শিঙ্গা লাগানো (হিজামা), আর এটা তোমাদের জন্য সর্বোত্তম চিকিৎসা, যা দ্বারা তোমরা চিকিৎসা গ্রহণ করতে পারো।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] كذا في النسخ الخطية، وهو محمد بن أحمد بن محبوب، ليس في اسمه محمود، ولعله محرَّف عن محبوب، فيكون نسبه إلى جده.



[2] في (ص) و (م): بحاجم.



7656 [3] - إسناده صحيح.وأخرجه أحمد 33 / (20173) عن حسن بن موسى الأشيب، عن شيبان بن عبد الرحمن، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد (20212) من طريق جرير بن حازم، عن عبد الملك بن عمير، به.وسيأتي من طرق عن عبد الملك بن عمير في المواضع التالية.وأخرجه أحمد (20205) من طريق عوف بن أبي جميلة، عن شيخ من بكر بن وائل، عن سمرة، به مختصرًا.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7657)


7657 - فحدَّثَناه أبو علي الحافظ، أخبرنا زكريا بن يحيى الساجي، حدثنا عبد الوارث ابن عبد الصمد، حدثني أبي، حدثنا شُعبة، عن عبد الملك بن عُمَير، قال: سمعتُ حُصَين بن أبي الحُرِّ يُحدِّث عن سَمُرة، أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "خيرُ ما تداويتُم به الحَجْمُ" [1].وأما حديثُ زهير:




সামুরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “তোমরা যা দ্বারা চিকিৎসা করো, তার মধ্যে শ্রেষ্ঠ হলো শিঙ্গা লাগানো (বা হিজামাহ)।”




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح.وأخرجه أحمد 33 / (20171) عن محمد بن جعفر عن شعبة، بهذا الإسناد. وأخرجه النسائي (7552) عن حماد بن إسماعيل بن إبراهيم، عن أبيه -وهو ابن علية -بهذا الإسناد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7658)


7658 - فحدَّثَناه محمد بن صالح بن هانئ قال أحمد بن محمد بن نصر: حدثنا أبو نُعيم، حدثنا زُهير، عن عبد الملك بن عُمير، حدثني حُصين بن أبي الحُرّ، عن سَمُرة، عن النبيِّ صلى الله عليه وسلم نحوَه [1].وقد رواه داود بن نُصَير الطائي عن عبد الملك بن عُمير:




সামুরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে অনুরূপ বর্ণনা করেছেন [১]। আর এটিকে দাঊদ ইবনু নুসাইর আত-তায়ী আব্দুল মালিক ইবনু উমাইর থেকে বর্ণনা করেছেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح. أبو نعيم: هو الفضل بن دُكين، وزهير: هو ابن معاوية.وأخرجه أحمد 33 / (20172) عن يحيى بن أبي بكير، عن زهير بن معاوية، بهذا الإسناد. وأخرجه النسائي (7552) عن حماد بن إسماعيل بن إبراهيم، عن أبيه -وهو ابن علية -بهذا الإسناد.