হাদীস বিএন


আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম





আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7659)


7659 - أخبرَناه محمد بن يعقوب الأخرَم، حدثنا يحيى بن محمد بن يحيى، حدثنا مُسدَّد، حدثنا إسماعيل ابن عُلَيّة، حدثنا داود بن نُصَير، عن عبد الملك بن عُمير، عن حُصين بن أبي الحُرّ، عن سَمُرة قال: دخلَ أعرابيٌّ من بني فَزَارة من بني أُمَّ قِرْفة على رسول الله صلى الله عليه وسلم، فإذا حجَّامُ يَحجُمُه بمَحاجمَ له من قُرون فشَرَطه [1] بشَفْرةٍ، فقال: ما هذا يا رسولَ الله، لِمَ تَدَعُ هذا يقطَعُ عليك جِلدَك؟ قال: "هذا الحَجْمُ" قال: وما الحجمُ؟ قال: "خيرُ ما تَداوَى به النَّاسُ" [2].




সমুরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: বনু ফাযারাহ গোত্রের বনু উম্মে ক্বিরফাহ শাখার একজন বেদুঈন (আরব) আল্লাহর রাসূলের (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিকট প্রবেশ করলো। তখন একজন রক্তমোক্ষণকারী (হাজ্জাম) শিং দ্বারা তৈরি কাপ ব্যবহার করে তাঁর (নবীর) রক্তমোক্ষণ (হিজামা) করছিলেন এবং সে একটি ক্ষুর বা ব্লেড দিয়ে তাঁর ত্বক কেটেছিল। লোকটি জিজ্ঞেস করল: ইয়া রাসূলাল্লাহ! এটা কী? কেন আপনি একে আপনার চামড়া কাটতে দিচ্ছেন? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: এটা হলো হিজামা (রক্তমোক্ষণ)। সে বলল: হিজামা কী? তিনি বললেন: এটি হলো সর্বোত্তম চিকিৎসা, যা দ্বারা মানুষ আরোগ্য লাভ করে।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في النسخ الخطية أشرطه والمثبت من رواية النسائي، وفي الطبعة الهندية: يشرط. وأخرجه النسائي (7552) عن حماد بن إسماعيل بن إبراهيم، عن أبيه -وهو ابن علية -بهذا الإسناد.



[2] إسناده صحيح. وأخرجه النسائي (7552) عن حماد بن إسماعيل بن إبراهيم، عن أبيه -وهو ابن علية -بهذا الإسناد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7660)


7660 - أخبرنا نَصْر بن محمد [1] بن الحطَّاب [2] ببغداد، حدثنا محمد بن غالب ابن حرب، حدثنا زكريا بن عَدِي، حدثنا عُبيد الله بن عمرو الرَّقي، عن زيد بن أبي أُنيسة، عن محمد بن قيس، حدثنا أبو الحَكَم البَجَلي -وهو عبد الرحمن بن أبي نُعْم [3] - قال: دخلتُ على أبي هريرة وهو يَحتجِمُ، فقال لي: يا أبا الحَكَم، احتجِمْ، قال: فقلت: ما احتجَمتُ قطُّ، قال: أخبرني أبو القاسم صلى الله عليه وسلم: أنَّ جبريل عليه السلام أخبره: "أَنَّ الحَجْمَ أفضلُ ما تَداوَى به الناسُ" [4].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবূ আল-হাকাম আল-বাজালী—যিনি আবদুর রহমান ইবনু আবী নু'ম—বলেন: আমি আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট প্রবেশ করলাম, যখন তিনি শিঙ্গা লাগাচ্ছিলেন (হিজামা করাচ্ছিলেন)। তখন তিনি আমাকে বললেন: হে আবূ আল-হাকাম, তুমিও শিঙ্গা লাগাও। আমি বললাম: আমি তো কখনোই শিঙ্গা লাগাইনি। তিনি বললেন: আবূল কাসিম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে জানিয়েছেন যে জিবরীল (আঃ) তাঁকে জানিয়েছেন: "শিঙ্গা লাগানো হলো সর্বোত্তম চিকিৎসা, যা দ্বারা মানুষ নিজেদের চিকিৎসা করে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] كذا وقع في نسخنا الخطية، ولم نقف على ترجمة له بهذا الاسم، والذي وقفنا عليه هو نصر بن أحمد الحطاب -بالحاء المهملة- له ترجمة في "تاريخ بغداد" 5/ 409، وذكره السمعاني في رسم (الحطاب) من "الأنساب"، وذكر هو والخطيب البغدادي أنَّ الحاكم سمع منه ببغداد.



[2] المثبت من (ص) و (م)، وفي (ز): خطاب.



7660 [3] - تحرَّف في (ز) و (ص) إلى نعيم.



7660 [4] - إسناده فيه لِين من أجل محمد بن قيس -وهو النخعي- فقد قال ابن حبان: يخطئ ويخالف. وأخرجه إسحاق بن راهويه في "مسنده" (251) عن زكريا بن عدي بهذا الإسناد.وأخرجه البخاري في "التاريخ الكبير" 1/ 213، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 507 و 508 من طرق عن عبيد الله بن عمرو، به.وأخرجه الطبري 1/ 507 من طريق أبي عبد الرحيم خالد بن أبي يزيد الحراني، عن زيد بن أبي أنيسة به.وأخرج أحمد 14/ (8513) و 15 / (9452)، وأبو داود (2102) و (3857)، وابن ماجه، (3476)، وابن حبان (6078) من طريق أبي سلمة، عن أبي هريرة مرفوعًا بلفظ: "إن كان في شيء مما تَداوَون به خير، ففي الحجامة". وسنده حسن.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7661)


7661 - أخبرنا أبو عبد الله الصَّفّار، أخبرنا أبو إسماعيل محمد بن إسماعيل، حدثنا أَسِيد بن زيد الجمَّال، حدثنا زهير بن معاوية، عن عبيد الله، عن نافع عن ابن عمر قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "إنْ كان في شيء مما تَدَاوَوْنَ بِه شِفاءٌ، فَشَرْطَةُ مِحْجَمٍ، أو شَرْبة عسَل، أو كَيَّةٌ تُصِيبُ، وما أُحبُّه إذا اكتَوى" [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমরা যে সকল জিনিস দ্বারা চিকিৎসা করো, সেগুলোর কোনোটির মধ্যে যদি আরোগ্য থাকে, তবে তা হলো শিঙা লাগানোর (কাপিংয়ের) মাধ্যমে হালকা আঁচড়, অথবা মধু পান করা, অথবা এমন কোনো সেঁক (পুড়িয়ে চিকিৎসা) যা যথাযথভাবে প্রয়োগ করা হয়। তবে আমি আগুনে সেঁক (দগ্ধ করে চিকিৎসা) নেওয়াকে পছন্দ করি না।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف جدًا، أَسيد بن زيد الجمّال متفق على ضعفه، وقد تابعه محمد بن أسعد التغلبي عن زهير بن معاوية عند البزار في "مسنده" (5758)، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 503 و 504، والطحاوي في "معاني الآثار" 4/ 320، والعقيلي في "الضعفاء" (1515)، ومحمد بن أسعد ضعيف، ونخشى أن يكون أَسيد بن زيد قد سرقه من محمد بن أسعد فهذا الحديث به أشهر، وقد رَمَى أَسيدًا بسرقة الحديث ابنُ حبان في "المجروحين"، والله تعالى أعلم.وأما طريق أَسيد بن زيد فقد أخرجه أبو بكر الشافعي في "الغيلانيات" (410) عن عيسى بن عبد الله الطيالسي، عنه.وأخرجه الطبري 1/ 502 من طريق ليث بن أبي سليم، عن مجاهد، عن ابن عمر مرفوعًا بلفظ: "إن كان في شيء من أدويتكم شفاء، ففي مصَّة حجَّام". وليث سيئ الحفظ.وأما متنه فقد صحَّ عن غير ابن عمر كما في الأحاديث السابقة، وأقربها لفظًا حديث جابر الذي خرجناه من "الصحيحين" عند حديثه السالف برقم (7655)وآخر من حديث ابن عباس عند البخاري (5681) وغيره.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7662)


7662 - أخبرنا محمد بن القاسم العَتَكي، حدثنا محمد بن أحمد بن أنس القُرَشي، حدثنا أبو عاصم، حدثنا عبَّاد بن منصور، عن عِكْرمة، عن ابن عباس قال: قال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم: "خيرُ ما تداويتُم به: السَّعُوط، واللَّدُود، والحِجَامة، والمَشِيُّ" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা যেসব জিনিসের মাধ্যমে চিকিৎসা করো, সেগুলোর মধ্যে সর্বোত্তম হলো: সায়ূত (নাকে ঔষধ দেওয়া), লাদূদ (মুখের পাশে ঔষধ দেওয়া), হিজামা (শিঙ্গা লাগানো) এবং বিরেচক ঔষধ।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف من أجل عباد بن منصور -وهو الناجي البصري. ومع ضعفه كان يدلس عن الضعفاء، وانظر الكلام على بعض حديثه فيما ذكرناه في الحديث التالي.وأخرجه الترمذي (2047) و (2048) و (2053) مجموعًا مع غيره من طرق عن عباد بن منصور، بهذا الإسناد. وقال: حسن غريب لا نعرفه إلَّا من حديث عباد بن منصور.اللدود: دواء يجعل في أحد شقي الفم.والمشيّ: دواء مُسهل، لأنه يحمل شاربه على المشي والتردد إلى الخلاء. قاله ابن الأثير.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7663)


7663 - أخبرنا مُكرَم بن أحمد القاضي، حدثنا الحسن بن مُكرَم، حدثنا يزيد بن هارون، أخبرنا عباد بن منصور [عن عِكْرمة] [1] عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "ما مَرَرتُ بملأ من الملائكة ليلةَ أُسرِيَ بي، إلَّا قالوا: عليك بالحِجَامَةِ يا مُحمَّدُ" [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: মি’রাজের রাতে আমি যখনই ফেরেশতাদের কোনো দলের কাছ দিয়ে অতিক্রম করেছি, তারা কেবল এই কথাই বলেছে যে, হে মুহাম্মাদ! আপনি অবশ্যই হিজামা (রক্তমোক্ষণ) করাবেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] ما بين المعقوفين لم يرد في النسخ الخطية، وأثبتناه من "إتحاف المهرة" (8603) ومن مصادر التخريج. المهرة" ومن مصادر التخريج.



[2] إسناده ضعيف جدًا، عباد بن منصور ضعيف، مدلس، وقد دلَّس إسناد هذا الخبر، فقد اعترف بأنه لم يسمعه من عكرمة، إنما سمعه من إبراهيم بن أبي يحيى الأسلمي عن داود بن حصين عن عكرمة، أسند ذلك العقيلي في "الضعفاء" 2/ 636، وقال أبو حاتم الرازي -كما في "العلل" لابنه (2274) - عن هذا الحديث: منكر، يقال: إنَّ عباد بن منصور أخذ جزءًا من إبراهيم بن أبي يحيى عن داود بن حصين عن عكرمة عن ابن عباس، فما كان من المناكير فهو من ذلك. وأطلق البزار عدم سماع عباد من عكرمة في "مسنده" (4917). قلنا: وإبراهيم بن أبي يحيى الأسلمي متروك الحديث، وداود بن حصين ضعيف عن عكرمة خاصة.وأخرجه أحمد بإثر الحديث (3316)، وابن ماجه (3477)، والترمذي ضمن أحاديث برقم (2053) من طرق عن عباد بن منصور، عن عكرمة بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن غريب، لا نعرفه إلّا من حديث عباد بن منصور.وسيأتي الحديث عند المصنف برقم (8458) من طريق عباد بن منصور.وأخرجه الطبراني في "الكبير" (11367) من طريق نافع أبي هرمز، عن عطاء، عن ابن عباس.ونافع أبو هرمز متروك، وقال ابن حبان روى عن عطاء نسخة موضوعة.وقد جاء معنى هذا الحديث عن غير ما صحابي وفي أسانيدها ضعف، أوردناها وتكلمنا عليها في "مسند أحمد" 5/ (3316). المهرة" ومن مصادر التخريج.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7664)


7664 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا الربيع بن سليمان، حدثنا شعيب بن الليث [عن أبيه] [1] عن أبي الزُّبير، عن جابر: [أنَّ أُمَّ سلمة] [2] استأذنَتْ رسول الله صلى الله عليه وسلم في الحِجامة، فأمر النبيُّ صلى الله عليه وسلم أبا طَيْبةَ أن يَحجُمَها، قال: حسبتُ أنه قال: وكان أخوها من الرَّضَاعة، أو غلامًا له لم يَحتلِمْ [3].هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه!




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে শিঙ্গা লাগানোর (হিজামা) অনুমতি চাইলেন। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আবূ তাইবাকে তাঁকে শিঙ্গা লাগাতে আদেশ করলেন। (রাবী) বলেন: আমি ধারণা করি যে, তিনি (বর্ণনাকারী) বলেছেন: তিনি (আবূ তাইবা) ছিলেন উম্মু সালামাহর দুধভাই অথবা এমন গোলাম যিনি বালেগ হননি।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] ما بين المعقوفين لم يرد في النسخ الخطية، وأثبتناه من "إتحاف المهرة" (3589) ومن مصادر التخريج. المهرة" ومن مصادر التخريج.



[2] في (ز): أنَّ رسول الله، وفي (ص) و (م) مكانها بياض، وأثبتناه على الصواب من "إتحاف المهرة" ومن مصادر التخريج.



7664 [3] - إسناده صحيح.وأخرجه أحمد 23/ (14775)، ومسلم (2206)، وأبو داود (4105)، وابن ماجه (3480)، وابن حبان (5602) من طرق عن الليث بن سعد، بهذا الإسناد. واستدراك الحاكم له ذهول منه. وأخرجه أحمد 5/ (3316)، والترمذي ضمن الحديث (2053) من طريقين عن عباد بن منصور، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن غريب لا نعرفه إلّا من حديث عباد بن منصور.وسيأتي من طريق عباد بن منصور برقم (8459).وأخرج البزار في "مسنده" (4916) و (4917)، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 516، والطبراني في "الكبير" (11076) من طريق ليث بن أبي سليم، عن مجاهد، عن ابن عباس رفعه: "احتجِموا لخمس عشرة، أو لسبع عشر، أو تسع عشرة، أو إحدى وعشرين، لا يتبيَّغ بكم الدمُ فيقتلكم". وليث سيئ الحفظ.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7665)


7665 - أخبرنا الحسين بن الحسن بن أيوب، حدثنا أبو حاتم الرازي، حدثنا أبو تَوْبة الربيع بن نافع، حدثنا سعيد بن عبد الرحمن الجُمَحي، عن سُهيل بن أبي صالح، عن أبيه، عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "من احتَجَم لسبعَ عشرةَ من الشهر، كان له شِفاءً من كل داءٍ" [1].هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি মাসের সতেরো তারিখে শিঙ্গা লাগাবে, তা তার জন্য সকল রোগের আরোগ্য হবে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف من أجل سعيد بن عبد الرحمن الجمحي، وضعفه الحافظ ابن حجر في "فتح الباري" 17/ 449 مع جملة أحاديث في التوقيت. لكن قد صحَّ من فعله صلى الله عليه وسلم كما سيأتي قريبًا من حديث أنس.وقال العقيلي في "الضعفاء" 1/ 338: وليس في الاختيار في الحجامة والكراهية شيء يثبت.وأخرجه أبو داود (3861) عن أبي توبة الربيع بن نافع بهذا الإسناد. وزاد فيه وتسع عشرة وإحدى وعشرين. وأخرجه أحمد 5/ (3316)، والترمذي ضمن الحديث (2053) من طريقين عن عباد بن منصور، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن غريب لا نعرفه إلّا من حديث عباد بن منصور.وسيأتي من طريق عباد بن منصور برقم (8459).وأخرج البزار في "مسنده" (4916) و (4917)، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 516، والطبراني في "الكبير" (11076) من طريق ليث بن أبي سليم، عن مجاهد، عن ابن عباس رفعه: "احتجِموا لخمس عشرة، أو لسبع عشر، أو تسع عشرة، أو إحدى وعشرين، لا يتبيَّغ بكم الدمُ فيقتلكم". وليث سيئ الحفظ.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7666)


7666 - أخبرنا مُكرَم بن أحمد القاضي، حدثنا الحسن بن مُكرَم، حدثنا يزيد بن هارون، أخبرنا عبَّاد بن منصور، عن عِكْرمة عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "خيرُ ما تَحتجِمُون فيه يومَ سبعةَ عشرَ، ويومَ تسعةَ عشرَ [1]، ويومَ أَحدٍ وعشرين" [2]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা যে দিনগুলোতে শিঙ্গা লাগাও (হিজামা করাও), তার মধ্যে উত্তম হলো সতেরো তারিখ, উনিশ তারিখ এবং একুশ তারিখ।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في (ص) و (م): يوم سبع عشرة ويوم تسع عشرة. وأخرجه أحمد 5/ (3316)، والترمذي ضمن الحديث (2053) من طريقين عن عباد بن منصور، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن غريب لا نعرفه إلّا من حديث عباد بن منصور.وسيأتي من طريق عباد بن منصور برقم (8459).وأخرج البزار في "مسنده" (4916) و (4917)، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 516، والطبراني في "الكبير" (11076) من طريق ليث بن أبي سليم، عن مجاهد، عن ابن عباس رفعه: "احتجِموا لخمس عشرة، أو لسبع عشر، أو تسع عشرة، أو إحدى وعشرين، لا يتبيَّغ بكم الدمُ فيقتلكم". وليث سيئ الحفظ.



[2] إسناده ضعيف من أجل عباد بن منصور، فهو ضعيف ومدلِّس، ونفى سماعَه من عكرمة البزارُ في "مسنده" (4917). وأخرجه أحمد 5/ (3316)، والترمذي ضمن الحديث (2053) من طريقين عن عباد بن منصور، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن غريب لا نعرفه إلّا من حديث عباد بن منصور.وسيأتي من طريق عباد بن منصور برقم (8459).وأخرج البزار في "مسنده" (4916) و (4917)، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 516، والطبراني في "الكبير" (11076) من طريق ليث بن أبي سليم، عن مجاهد، عن ابن عباس رفعه: "احتجِموا لخمس عشرة، أو لسبع عشر، أو تسع عشرة، أو إحدى وعشرين، لا يتبيَّغ بكم الدمُ فيقتلكم". وليث سيئ الحفظ.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7667)


7667 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا محمد بن إسحاق الصَّغَاني، حدثنا عمرو بن عاصم الكلَابي [1]، حدثنا همّام بن يحيى وجَرير بن حازم، قالا: حدثنا قَتَادة، عن أنس بن مالك قال: كان رسولُ الله صلى الله عليه وسلم يَحتجِمُ على الأَحْدَعَين، وكان يَحتجِمُ لسبعَ عشرةَ وتسعَ عشرةَ وإحدى وعشرين [2].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আহদা'আইন (ঘাড়ের দু’পাশের শিরা) এর উপর রক্তমোক্ষণ (হিজামা) করাতেন। আর তিনি মাসের সতেরো, উনিশ এবং একুশ তারিখে রক্তমোক্ষণ করাতেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرَّف في (ص) و (م) إلى: الكلالي، وفي (ز) إلى: الكلال.



[2] إسناده حسن من أجل عمرو بن عاصم الكلابي.وأخرجه الترمذي (2051) عن عبد القدوس بن محمد، عن عمرو بن عاصم، بهذا الإسناد.وقال: حسن غريب.وأخرجه أحمد 19/ (12191) و 20/ (13001)، وأبو داود (3860)، وابن ماجه (3483)، وابن حبان (6077) من طرق عن جرير بن حازم، بذكر شطره الأول وزادوا: وعلى الكاهل.وأخرج ابن حبان (3486) من طريق النهاس بن قهم، عن أنس رفعه: "من أراد الحجامة، فليتحرَّ سبعة عشر، أو تسعة عشر، أو إحدى وعشرين، ولا يتبيَّغ بأحدكم الدم فيقتله"، وسنده مسلسل بالضعفاء.وانظر ما سلف برقم (1682) و (1683).الأخدعان: عِرقان في جانبي العنق.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7668)


7668 - أخبرنا أبو عبد الله الصَّفَّار، حدثنا أبو إسماعيل السُّلَمي.وأخبرني الشيخ أبو بكر بن إسحاق فيما قرأتُ عليه من أصل كتابه، أخبرنا الحسن ابن علي بن زياد، قالا: حدثنا عبد العزيز بن عبد الله الأُوَيسي، حدثني أبو موسى عيسى بن عبد الله الخيَّاط، عن محمد بن كعب القُرَظي، عن أبي سعيد الخُدْري، أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "المَحْجَمةُ التي في وَسَط الرأس من الجنون والجُذَامِ والنُّعاس والأضراس"، وكان يُسمِّيها مُنقِذةً [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "মাথার মাঝখানে শিঙ্গা লাগানো (হিজামা) উন্মাদনা, কুষ্ঠ, তন্দ্রা এবং দাঁতের রোগ থেকে (নিরাময়কারী)।" আর তিনি এটিকে ‘মুংকিযাহ’ (রক্ষাকারী) নামে অভিহিত করতেন।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف جدًا، أبو موسى عيسى بن عبد الله كذا جاء اسم والده في هذه الرواية، والمعروف في اسم والده ميسرة، فإما أن تكون هذه الرواية وهمًا، أو أنَّ اسم والده مختلف فيه، ولا سيما أنَّ هذا الراوي مشهور بعيسى بن أبي عيسى، وعسى هذا متروك، ويعرف بالخيَّاط والحنَّاط والخبَّاط لمعالجته هذه الأعمال الثلاثة.وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (4623) من طريق إسماعيل بن أبي أويس، عن يزيد بن عبد الملك النوفلي، عن أبي موسى الحناط بهذا الإسناد. وقال: لا يروى عن أبي سعيد الخدري إلَّا بهذا الإسناد، تفرد به ابن أبي أويس! كذا قال مع أنَّ المتفرد به أبو موسى الحناط.وفي الباب عن ابن عمر عند الطبراني في "الكبير" (13150)، و "الأوسط" (4547)، وأبي نعيم في "الطب النبوي" (507)، وفي سنده عبد الله بن محمد العبادي مجهول، وشيخه مسلم -ويقال: مسلمة- بن سالم الجهني قال أبو داود: ليس بثقة. وقال ابن عبد الهادي في "الصارم المنكي" ص 49 عن هذا الحديث: موضوع.وعن ابن عباس، وله عنه طريقان:الأول: يرويه إسماعيل بن شبيب -ويقال: شيبة- الطائفي، عن ابن جريج، عن عطاء، عن ابن عباس. أخرجه الطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 489 و 490، والعقيلي في "الضعفاء" (101)، والطبراني في "الكبير" (11446)، وابن عدي في "الكامل" 6/ 51، وأبو نعيم في "الطب" (321) و (506). وإسماعيل هذا منكر الحديث، قال العقيلي: روى عن ابن جريج أحاديث مناكير لا تحفظ من وجه يثبت، وبنحوه قال ابن عدي.الثاني: يرويه عمر بن رياح العبدي، عن عبد الله بن طاووس، عن أبيه، عن ابن عباس. أخرجه الطبري 1/ 528، وابن حبان في "المجروحين" 2/ 86، والطبراني في "الكبير" (10938)، وابن عدي 5/ 51، وأبو نعيم في "الطب" (296)، وعمر هذا متروك، واتهمه بعضهم.وعن أم سلمة عند الطبري 1/ 529، والطبراني (23/ (667) من طريق الحارث بن عبيد، عن المغيرة ابن حبيب، عن مولى لأم سلمة، عن أم سلمة بنحوه، والحارث بن عبيد ليس بذاك القوي، ومولى أم سلمة مبهم لا يُعرف. فلا يُفرح بهذه الشواهد. لكن صحَّ الاحتجام وسطَ الرأس من فعله صلى الله عليه وسلم من حديث عبد الله ابن بُحينة عند البخاري (1836) و (5698)، ومسلم (1203)، ومن حديث ابن عباس عند البخاري (5700) بنحوه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7669)


7669 - حدثنا أبو بكر محمد بن سليمان الزاهد، حدثنا علي بن الحسين بن الجُنَيد الرازي وجعفر بن محمد الفِريابي [1] وزكريا بن يحيى الساجِي، قالوا: حدثنا أبو الخطّاب زياد بن يحيى الحَسّاني، حدثنا غَزال بن محمد، عن محمد بن جُحَادة، عن نافع، عن ابن عمر؛ قال نافع قال لي ابنُ عمر: يا نافعُ، أبغني حجَّامًا لا يكون غلامًا صغيرًا، ولا شيخًا كبيرًا، فإنَّ الدَّمَ قد تَبيَّغَ بي، وإني سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "الحِجامةُ تزيد في العَقْل، وتزيد في الحِفْظ، فعَلَى اسمِ الله يومَ الخميس، لا تَحتجِمُوا يومَ الجُمعة ولا يومَ السبت ولا يومَ الأحد، واحتجِمُوا يومَ الاثنينِ والثُّلاثاء، وما نزلَ جُذامٌ ولا بَرَصٌ إِلَّا في ليلة الأربعاء" [2]. رُواة هذا الحديث كلهم ثِقات إلَّا غزال بن محمد، فإنه مجهول لا أعرفه بعدالة ولا جَرْح.وقد صحَّ الحديثُ عن ابن عمر رضي الله عنهما من قولِه من [3] غير مسنَد ولا متصل:




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নাফি' বলেন, ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাকে বললেন: হে নাফি', তুমি আমার জন্য এমন একজন রক্তমোক্ষণকারী (হাজ্জাম) খুঁজে দাও যে একেবারে ছোট বালকও নয়, আর অতিশয় বৃদ্ধও নয়। কেননা রক্ত আমার শরীরে উচ্ছ্বসিত হয়ে উঠেছে। আর আমি রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "হিজামা (রক্তমোক্ষণ) বুদ্ধি বৃদ্ধি করে এবং স্মৃতিশক্তি বৃদ্ধি করে। অতএব, আল্লাহর নামে বৃহস্পতিবার হিজামা করাও। তোমরা জুমু'আর দিন, শনিবার ও রবিবার হিজামা করো না। আর তোমরা সোমবার ও মঙ্গলবার হিজামা করাও। আর কুষ্ঠরোগ (জুযাম) ও শ্বেতরোগ (বারাস) কেবল বুধবার রাতে ব্যতীত আর কখনও অবতীর্ণ হয়নি।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرّف في النسخ الخطية إلى العرياني. جعفر، عن محمد بن جحادة. كذا سمّى عثمان بن مطر: عثمان بن جعفر، وأسقط الواسطة بينه وبين ابن جحادة، ورواه ابن عدي في "الكامل" 5/ 193 من طريق عبد الملك بن عبد ربه فقال: حدثنا أبو علي المكفوف واسمه عثمان عن الحسن بن أبي جعفر عن محمد بن جحادة، فذكره. وأبو علي المكفوف عثمان: هو ابن مطر، وهو متفق على ضعفه متروك، وأما عثمان بن جعفر فلا يعرف إلَّا في إسناد هذا الخبر عند الحاكم، ويغلب على ظننا أن الراوي عنده أخطأ في تسميته، والصواب: عثمان بن مطر.وأخرجه ابن ماجه (3488) من طريق عبد الله بن عصمة عن سعيد بن ميمون، عن نافع به. وهذا إسناد ضعيف جدًا، عبد الله وسعيد مجهولان، وفيه أيضًا راوٍ ضعيف.وسيأتي عند المصنف برقم (7671) من طريق أبي صالح عبد الله بن صالح، عن عطّاف بن خالد، عن نافع، به. وأعلّه أبو حاتم بقوله: هو مما أُدخل على أبي صالح.وأخرجه بنحوه أبو حاتم الرازي -كما في "العلل" لابنه (2330) و (2346) - من طريق محمد ابن إسماعيل المرادي، عن أبيه، عن نافع، عن ابن عمر موقوفًا. وقال: حديث باطل، ومحمد وأبوه مجهولان.وأخرجه بنحوه أبو حاتم -كما في "العلل" لابنه (2477) تعليقًا- والدينوري في "المجالسة" (631)، وابن حبان في "المجروحين" 3/ 20 - 21 من طريق إسماعيل بن إبراهيم، عن المثنى ابن عمرو، عن أبي سنان، عن أبي قلابة، عن ابن عمر مرفوعًا. قال أبو حاتم الرازي: ليس هذا الحديث بشيء، ليس هو حديث أهل الصدق، وإسماعيل والمثنى مجهولان. وقال ابن حبان: المثنى بن عمرو يروي عن أبي سنان ما ليس من حديث الثقات، لا يجوز الاحتجاج به. وانظر ما بعده.قوله: "تبيّغ"، ويقال أيضًا: تَبوَّغ: إذا تردَّد الدم وتحيّر في مجراه.



[2] إسناده واهٍ، غزال بن محمد، ويقال: عذَّال، بمهملة ثم ذال معجمة مشددة، هكذا ذكره ابن ناصر الدين الدمشقي في "توضيح المشتبه"، وابن حجر في "تبصير المنتبه"، والذهبي في "الميزان" وقال: لا يُدرى من هو ذكره أحمد بن علي السليماني فيمن يضع الحديث، وذكر له هذا الحديث. ثم أعاده فيه باسم غزال بن محمد كما وقع هنا عند المصنف، وقال: لا يُعرف، وخبره منكر في الحجامة. وقال البزار: لم يرو عنه غير هذا الحديث.وأخرجه البزار في "مسنده" (5968)، وأبو نعيم في "الطب النبوي" (297)، وابن الجوزي في "العلل المتناهية" (1463) من طريق زياد بن يحيى الحساني، بهذا الإسناد. ورواية البزار مختصرة. ووقع في المطبوع من "الطب النبوي" و "العلل المتناهية" سقط واضطراب.وأخرجه ابن ماجه (3487)، وابن حبان في "المجروحين" 2/ 100، وابن عدي في "الكامل" 2/ 308 و 5/ 163، والخطيب مختصرًا في الفقيه والمتفقه" (873) من طريق عثمان بن مطر، عن الحسن بن أبي جعفر، عن محمد بن جحادة به. وهذا إسناد واهٍ أيضًا، عثمان والحسن متفق على ضعفهما صاحبا مناكير.وسيأتي عند المصنف برقم (8460) من طريق عبد الملك بن عبد ربه، عن أبي علي عثمان بن جعفر، عن محمد بن جحادة. كذا سمّى عثمان بن مطر: عثمان بن جعفر، وأسقط الواسطة بينه وبين ابن جحادة، ورواه ابن عدي في "الكامل" 5/ 193 من طريق عبد الملك بن عبد ربه فقال: حدثنا أبو علي المكفوف واسمه عثمان عن الحسن بن أبي جعفر عن محمد بن جحادة، فذكره. وأبو علي المكفوف عثمان: هو ابن مطر، وهو متفق على ضعفه متروك، وأما عثمان بن جعفر فلا يعرف إلَّا في إسناد هذا الخبر عند الحاكم، ويغلب على ظننا أن الراوي عنده أخطأ في تسميته، والصواب: عثمان بن مطر.وأخرجه ابن ماجه (3488) من طريق عبد الله بن عصمة عن سعيد بن ميمون، عن نافع به. وهذا إسناد ضعيف جدًا، عبد الله وسعيد مجهولان، وفيه أيضًا راوٍ ضعيف.وسيأتي عند المصنف برقم (7671) من طريق أبي صالح عبد الله بن صالح، عن عطّاف بن خالد، عن نافع، به. وأعلّه أبو حاتم بقوله: هو مما أُدخل على أبي صالح.وأخرجه بنحوه أبو حاتم الرازي -كما في "العلل" لابنه (2330) و (2346) - من طريق محمد ابن إسماعيل المرادي، عن أبيه، عن نافع، عن ابن عمر موقوفًا. وقال: حديث باطل، ومحمد وأبوه مجهولان.وأخرجه بنحوه أبو حاتم -كما في "العلل" لابنه (2477) تعليقًا- والدينوري في "المجالسة" (631)، وابن حبان في "المجروحين" 3/ 20 - 21 من طريق إسماعيل بن إبراهيم، عن المثنى ابن عمرو، عن أبي سنان، عن أبي قلابة، عن ابن عمر مرفوعًا. قال أبو حاتم الرازي: ليس هذا الحديث بشيء، ليس هو حديث أهل الصدق، وإسماعيل والمثنى مجهولان. وقال ابن حبان: المثنى بن عمرو يروي عن أبي سنان ما ليس من حديث الثقات، لا يجوز الاحتجاج به. وانظر ما بعده.قوله: "تبيّغ"، ويقال أيضًا: تَبوَّغ: إذا تردَّد الدم وتحيّر في مجراه.



7669 [3] - كذا في النسخ، والجادة أن تحذف "من".









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7670)


7670 - حدَّثَناه أبو علي الحافظ، أخبرنا عَبْدانُ الأهوازي، حدثنا محمد بن عمر ابن علي المُقدَّمي، حدثنا عبد الله بن هشام الدَّستُوائي، حدثني أبي، عن أيوب، عن نافع قال: قال لي ابنُ: عمر يا نافعُ، اذهَبْ فأتِني بحجَّام، ولا تأتِني بشيخٍ كبير، ولا غلام صغير، وقال: احتَجِمُوا يومَ الخميس على بركةِ الله، واحتَجِموا يومَ الجمعة [1]، ولا تَحتجِموا يومَ السبت، واحتجموا يوم الأحد والاثنين والثلاثاء، ولا تَحتجِموا يومَ الأربعاء، فإنَّه لم يَبْدُ جُذامٌ ولا بَرَضٌ إلَّا في ليلة الأربعاءِ ويومِ الأربعاء [2].وقد أسند هذا الحديث عطَّافُ بن خالد المخزومي عن نافع:




আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (নাফি') বলেন: ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাকে বললেন, হে নাফি'! যাও, আমার জন্য একজন শিঙ্গা লাগানোর (হাজ্জাম) লোক নিয়ে আসো। তুমি কোনো বৃদ্ধ বা ছোট ছেলেকে নিয়ে আসবে না। তিনি (ইবনে উমর) আরো বললেন: তোমরা আল্লাহর বরকতের সাথে বৃহস্পতিবার শিঙ্গা লাগাও এবং শুক্রবার শিঙ্গা লাগাও। আর শনিবার শিঙ্গা লাগাবে না। তোমরা রবিবার, সোমবার ও মঙ্গলবার শিঙ্গা লাগাও। আর বুধবার শিঙ্গা লাগাবে না, কারণ কুষ্ঠরোগ (জুযাম) ও শ্বেতরোগ (বারায) বুধবারের রাত বা বুধবারের দিন ব্যতীত অন্য কোনো দিন প্রকাশ পায় না।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] قوله: "واحتجموا يوم الجمعة" لم يرد في (ص) و (م). الحفظ، وبرَّأهما أبو حاتم الرازي من عُهدة هذا الحديث، فقال كما في "العلل" لابنه (2346): هو مما أُدخل على أبي صالح. قلنا: ذكر ابن حبان أنه كان له جار يكتب بخط يشبه خط أبي صالح، ويرميه في داره بين كتبه، فيظن أنه خطه فيحدِّث به.وأخرجه البزار في "مسنده" (5969)، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 511، والإسماعيلي في "معجمه" (302)، والخطيب البغدادي في "تاريخ بغداد" 11/ 223 من طرق عن عبد الله بن صالح بهذا الإسناد. وروايتهم مختصرة إلَّا البزار.



[2] إسناده ضعيف جدًا، عبد الله بن هشام الدستوائي قال أبو حاتم: متروك الحديث، وقال الساجي: فيه ضعف لم يكن صاحب حديث، وبه أعلّه الذهبي في "تلخيصه"، وتساهل ابن حبان فذكره في "ثقاته"!وأخرجه الدارقطني في "الأفراد" كما في "اللآلئ المصنوعة" 2/ 342، ومن طريقه ابن الجوزي في "العلل المتناهية" (1465) من طريق عمر بن شبة، عن عبد الله بن هشام الدستوائي، بهذا الإسناد.وقال: تفرد به عبد الله بن هشام عن أبيه عن أيوب. الحفظ، وبرَّأهما أبو حاتم الرازي من عُهدة هذا الحديث، فقال كما في "العلل" لابنه (2346): هو مما أُدخل على أبي صالح. قلنا: ذكر ابن حبان أنه كان له جار يكتب بخط يشبه خط أبي صالح، ويرميه في داره بين كتبه، فيظن أنه خطه فيحدِّث به.وأخرجه البزار في "مسنده" (5969)، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 511، والإسماعيلي في "معجمه" (302)، والخطيب البغدادي في "تاريخ بغداد" 11/ 223 من طرق عن عبد الله بن صالح بهذا الإسناد. وروايتهم مختصرة إلَّا البزار.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7671)


7671 - حدَّثَناه أبو النَّضر الفقيه وأبو الحسن العَنَزي، قالا: حدثنا عثمان بن سعيد الدارمي، حدثنا عبد الله بن صالح المصري، حدثنا عَطَّاف بن خالد عن نافع: أنَّ عبد الله بن عمر قال له يا نافعُ تَبيَّغ بي الدَّمُ، فأتني بحجام [ولا تجعله صبيًّا] [1] ولا شيخًا كبيرًا، فإنِّي سمعتُ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم يقول: "الحِجامةُ على الرِّيق أمثلُ، وفيها شِفاءٌ وبَرَكة، وهي تزيد في العَقْل، وتزيد في الحِفْظ، وتزيد الحافظَ حفظًا، فمن كان مُحتجمًا على اسم الله، فليَحتجِمْ يومَ الخميس، واجتَنِبوا الحِجامة يومَ الجمعة، ويومَ السبت، ويومَ الأحد، واحتجِمُوا يومَ الاثنين، ويومَ الثلاثاء، فإنه اليومُ الذي صَرَفَ الله عن أيوبَ فيه البَلَاء، واجتَنِبوا الحِجامةَ يومَ الأربعاء، فإنَّه اليومَ الذي ابتلى الله أيوبَ فيه بالبلاء، وما يَبدُو جُذامٌ ولا بَرَصٌ إِلَّا في يوم الأربعاء -أو في ليلة الأربعاء-" [2].




আব্দুল্লাহ ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি নাফি’কে বললেন: হে নাফি', আমার রক্ত (উত্তেজিত হয়ে) বেড়ে গেছে, তাই তুমি আমার জন্য একজন রক্তমোক্ষণকারী (হাজ্জাম) নিয়ে এসো। আর তাকে শিশু কিংবা অতি বৃদ্ধ বানিও না। কারণ আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "খালি পেটে শিঙা লাগানো উত্তম, এতে আরোগ্য ও বরকত রয়েছে। এটি জ্ঞান বৃদ্ধি করে, স্মৃতিশক্তি বৃদ্ধি করে এবং স্মরণকারীকে (হাফিয) তার মুখস্থকৃত বিষয় স্মরণ রাখতে সাহায্য করে। সুতরাং যে ব্যক্তি আল্লাহর নামে শিঙা লাগাতে চায়, সে যেন বৃহস্পতিবার তা লাগায়। আর তোমরা জুমু'আর দিন, শনিবার ও রবিবার শিঙা লাগানো থেকে বিরত থাকো। তোমরা সোমবার ও মঙ্গলবার শিঙা লাগাও, কেননা এই দিনে আল্লাহ তাআলা আইয়ুবের (আঃ) উপর থেকে বিপদ দূর করেছিলেন। আর বুধবার শিঙা লাগানো থেকে বিরত থাকো, কেননা এই দিনেই আল্লাহ তাআলা আইয়ুবকে (আঃ) বিপদে ফেলেছিলেন। কুষ্ঠ বা ধবল রোগ বুধবার দিন—অথবা বুধবার রাতে—ছাড়া প্রকাশ পায় না।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] ما بين المعقوفين زدناه من مصادر التخريج وبه يتم المعنى. الحفظ، وبرَّأهما أبو حاتم الرازي من عُهدة هذا الحديث، فقال كما في "العلل" لابنه (2346): هو مما أُدخل على أبي صالح. قلنا: ذكر ابن حبان أنه كان له جار يكتب بخط يشبه خط أبي صالح، ويرميه في داره بين كتبه، فيظن أنه خطه فيحدِّث به.وأخرجه البزار في "مسنده" (5969)، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 511، والإسماعيلي في "معجمه" (302)، والخطيب البغدادي في "تاريخ بغداد" 11/ 223 من طرق عن عبد الله بن صالح بهذا الإسناد. وروايتهم مختصرة إلَّا البزار.



[2] ضعيف جدًا، عبد الله بن صالح -وهو أبو صالح كاتب الليث- المصري وعطاف بن خالد سيِّئا الحفظ، وبرَّأهما أبو حاتم الرازي من عُهدة هذا الحديث، فقال كما في "العلل" لابنه (2346): هو مما أُدخل على أبي صالح. قلنا: ذكر ابن حبان أنه كان له جار يكتب بخط يشبه خط أبي صالح، ويرميه في داره بين كتبه، فيظن أنه خطه فيحدِّث به.وأخرجه البزار في "مسنده" (5969)، والطبري في مسند ابن عباس من "تهذيب الآثار" 1/ 511، والإسماعيلي في "معجمه" (302)، والخطيب البغدادي في "تاريخ بغداد" 11/ 223 من طرق عن عبد الله بن صالح بهذا الإسناد. وروايتهم مختصرة إلَّا البزار.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7672)


7672 - حدثنا أبو عبد الله محمد بن يعقوب الشَّيباني، حدثنا إبراهيم بن عبد الله السَّعْدي، حدثنا محمد بن القاسم الأسَدي، حدثنا الرَّبيع بن صَبيح، عن الحسن، عن أنس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "إذا اشتدَّ الحرُّ فاستَعِينوا بالحجامة، لا يَتبيَّغُ الدمُ بأحدِكم فيقتلَه" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যখন গরম তীব্র হয়, তখন তোমরা হিজামা (রক্তমোক্ষণ) দ্বারা সাহায্য নাও, যেন তোমাদের কারো রক্ত হঠাৎ বৃদ্ধি পেয়ে তাকে মেরে না ফেলে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده تالف، محمد بن القاسم الأسدي متهم بالكذب.وأخرجه ابن حبان في "المجروحين" 2/ 287 من طريق وهب بن حفص الحراني، عن محمد ابن القاسم الأسدي، بهذا الإسناد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7673)


7673 - حدثنا أبو بكر محمد بن عبد الله الحَفيد، حدثنا الحسين بن الفضل، حدثنا أبو النَّضر هاشم بن القاسم، حدثنا المُرجَّي بن رجاء اليَشكُري، حدثني عبَّاد ابن منصور، عن عِكْرمة، عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "نِعمَ العبدُ الحَجَّامُ، يُخِفِّ الظَّهرَ، ويَجلو البصرَ" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "রক্তমোক্ষণকারী (হাজ্জাম) কতই না উত্তম বান্দা। সে পিঠের ভার হালকা করে এবং দৃষ্টিশক্তি উজ্জ্বল করে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف من أجل عباد بن منصور، وسلف الكلام عليه عند الرواية (7666).وأخرجه الترمذي (2053) عن عبد بن حميد، عن النَّضر بن شميل بهذا الإسناد. وقال: حسن غريب لا نعرفه إلَّا من حديث عباد بن منصور.وأخرجه ابن ماجه (3478) من طريق عبد الأعلى السامي، عن عباد بن منصور، به.وسيأتي عند المصنف برقم (8463) من طريق يزيد بن زريع عن عباد.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7674)


7674 - حدثنا أبو زكريا العَنْبري وأبو بكر بن جعفر المزكِّي وعبد الله بن سعد الحافظ وعلي بن عيسى الحيري، قالوا: حدثنا أبو عبد الله محمد بن إبراهيم العَبْدي، حدثنا سليمان بن عبد الرحمن الدمشقي، حدثنا الوليد بن مسلم، حدثنا ابن جُريج، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جدِّه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "مَن تَطَبَّبَ ولم يُعرَفْ منه طِبٌّ، فهو ضامِنٌ" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আব্দুল্লাহ ইবনে আমর ইবনুল আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি চিকিৎসা করলো অথচ তার মধ্যে (বিশেষ) চিকিৎসার জ্ঞান বা পরিচিতি নেই, সে ক্ষতিপূরণের জন্য দায়ী হবে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حسن لغيره، وهذا إسناد ضعيف ابن جريج مدلس وقد عنعن، وزعم البخاري -فيما نقله عنه الترمذي في "علله" (186) - أنه لم يسمع من عمرو بن شعيب، كذا قال، وقد ثبت في كثير من الأسانيد بعد التقصّي سماعُه منه. ثم إنه قد اختلف على ابن جريج في إسناده، فقال الدارقطني في "السنن" عقب الحديث (3439): لم يسنده عن ابن جريج غير الوليد بن مسلم، وغيره يرويه عن ابن جريج عن عمرو بن شعيب مرسلًا عن النبي صلى الله عليه وسلم.وأخرجه أبو داود (4586)، وابن ماجه (3466)، والنسائي (7005) و (7039) من طرق عن الوليد بن مسلم بهذا الإسناد.وأخرجه النسائي (7006) من طريق محمود بن خالد، عن الوليد، عن ابن جريج، عن عمرو ابن شعيب، عن جده. ليس فيه شعيب والد عمرو.وفي الباب عن عبد العزيز بن عمر بن عبد العزيز عن بعض الوفد الذين قدموا على أبيه، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم، فذكر نحوه. أخرجه أبو داود (4587)، ورجاله ثقات لكنه مرسل.قوله: "من تطبَّب" أي من تكلف الطب، وهو لا يتقنه."فهو ضامن" أي: عليه التعويض لما تَلَفَ بفعله. وهب، بهذا الإسناد. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7675)


7675 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، أخبرنا محمد بن عبد الله بن عبد الحَكَم، أخبرنا ابن وهب، أخبرني معاوية بن صالح، عن عبد الرحمن بن جُبير بن نُفير، عن أبيه، عن عوف بن مالك الأشجعي قال: كُنَّا نَرْقي في الجاهلية، فقلنا: يا رسولَ الله، كيف ترى في ذلك؟ فقال: "اعرِضُوا عليَّ رُقَاكم، لا بأسَ بالرُّقَى ما لم يكن شِركٌ" [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.




আওফ ইবনে মালিক আল-আশজাঈ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা জাহেলিয়াতের (অন্ধকার যুগ) সময় ঝাড়ফুঁক করতাম। অতঃপর আমরা বললাম, "হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), আপনি এ ব্যাপারে কী মনে করেন?" তিনি বললেন, "তোমরা তোমাদের ঝাড়ফুঁকের মন্ত্রগুলো আমার সামনে পেশ করো। ঝাড়ফুঁকে কোনো সমস্যা নেই, যদি তাতে শিরক না থাকে।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح. ابن وهب: هو عبد الله.وأخرجه مسلم (2200)، وأبو داود (3886)، وابن حبان (6094) من طرق عن عبد الله بن وهب، بهذا الإسناد. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7676)


7676 - أخبرني عبيد الله بن محمد البَلْخي، حدثنا أبو إسماعيل محمد بن إسماعيل، حدثنا محمد بن وهب بن عطيّة السُّلَمي، حدثنا محمد بن حرب، حدثنا محمد بن الوليد الزُّبيدي، حدثنا الزُّهْري عن عُرْوة بن الزُّبير، عن زينب بنت أبي سَلَمة، عن أُمَّ سَلَمة: أنَّ النبيَّ صلى الله عليه وسلم رأى في بيتها جاريةً في وجهها سَفْعةٌ، فقال: "استَرْقُوا لها، فإنَّ بها النَّظْرةَ" [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.




উম্মে সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর ঘরে একটি দাসীকে দেখলেন, যার মুখে এক ধরনের চিহ্ন বা দাগ ছিল। অতঃপর তিনি বললেন: "তোমরা এর জন্য ঝাড়ফুঁকের ব্যবস্থা করো, কারণ তাকে কুদৃষ্টি লেগেছে (নজর লেগেছে)।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح.وأخرجه البخاري (5739) عن محمد بن خالد، عن محمد بن وهب، بهذا الإسناد.وأخرجه مسلم (2197) عن أبي الربيع محمد بن سليمان، عن محمد بن حرب، به. وزاد في رواية مسلم عقبه: يعني بوجهها صُفْرة. فاستدراك الحاكم له على الشيخين ذهولٌ منه.ورواه عُقيل بن خالد عن ابن شهاب الزهري، واختلف عليه فيه كما سيأتي بيانه عند روايته الآتية برقم (8481).قوله: "سفعة" بفتح السين وضمها، قيل: سواد، وقيل: حُمرة يعلوها سواد، وقيل: صفرة. وقوله: "النظرة" بسكون الظاء المعجمة، والمعنى: أنَّ عينًا أصابتها. انظر "فتح الباري" 17/ 554 - 555.









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7677)


7677 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بحر بن نصر، حدثنا عبد الله ابن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث، عن عبد ربِّه بن سعيد، حدثني المِنْهال بن عمرو، أخبرني سعيد بن جُبير، عن عبد الله بن الحارث، عن ابن عباس قال: كان النبيُّ صلى الله عليه وسلم إذا عاد المريضَ جلسَ عند رأسِه، ثم قال سبعَ مرَّات: "أَسأَلُ اللهَ العظيم، ربَّ العرشِ العظيم، أن يَشفِيَكَ"، فإن كان في أجله تأخيرٌ، عُوفِيَ من وَجَعِه ذلك [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه، ولم يُتابِع عمرَو بن الحارث على ذِكر عبد الله بن الحارث [2] بين سعيد وابن عباس أحدٌ، إنما رواه الحجّاج بن أَرْطاة عن المنهال عن عبد الله بن الحارث، ولم يذكر بينهما سعيدَ بن جبير.




আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন কোনো রোগীকে দেখতে যেতেন, তখন তিনি তার মাথার কাছে বসতেন। এরপর তিনি সাতবার বলতেন: "আমি মহান আল্লাহর নিকট প্রার্থনা করি, যিনি মহান আরশের মালিক, যেন তিনি আপনাকে আরোগ্য দান করেন।" যদি তার আয়ু বাকি থাকে, তবে এই কষ্টের কারণে সে সুস্থ হয়ে যাবে।




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث جيد، وسبق الكلام على إسناده عند الرواية السالفة برقم (1285).



[2] قوله: "على ذكر عبد الله بن الحارث" سقط من (ز).









আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম (7678)


7678 - أخبرنا الحسن بن يعقوب العدل، حدثنا يحيى بن أبي طالب، حدثنا يزيد ابن هارون، أخبرنا الحَجّاج بن أَرْطاة، عن المِنْهال بن عمرو، عن عبد الله بن الحارث، عن ابن عباس، عن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "من عاد مريضًا فقال: أَسألُ الله العظيم، ربَّ العرش العظيم أن يَشفِيَك؛ سبعًا، عُوفِيَ إن لم يكن حَضَرَ أَجَلُه" [1].وقد رواه أبو خالد الدَّالَاني ومَيْسرةُ بن حَبيب النَّهدي عن المِنهال بن عمرو عن سعيد بن جُبير عن ابن عباس.أما حديث [أبي] [2] خالد:




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি কোনো অসুস্থ রোগীকে দেখতে যায় এবং সাতবার বলে: 'আস্আলুল্লা-হাল আযীম, রাব্বাল আরশিল আযীম, আঁই ইয়াশফিয়াক' (আমি মহান আল্লাহর কাছে প্রার্থনা করি, যিনি মহান আরশের প্রভু, যেন তিনি আপনাকে আরোগ্য দান করেন)—যদি তার মৃত্যুর সময় উপস্থিত না হয়ে থাকে, তবে তাকে আরোগ্য দান করা হয়।"




تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث جيد كسابقه والحجاج بن أرطاة ليس بذاك القوي خاصة عند المخالفة، وقد خولف كما سلف بيانه عند الحديث (1285).وسلف برقم (1286) من طريق يزيد بن هارون.



[2] سقطت من النسخ الخطية.