আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম
7679 - فأخبرَناه عبد الرحمن بن الحسن [1] القاضي، حدثنا إبراهيم بن الحسين، حدثنا آدم بن أبي إياس، حدثنا شُعبة.وحدثنا أبو بكر محمد بن أحمد بن بالَوَيهِ، حدثنا عبد الله أحمد بن بن حنبل، حدثني أبي، حدثنا محمد بن جعفر عن شُعبة، عن يزيد [2] أبي خالد الدَّالَاني قال: سمعتُ المِنهال بن عمرو يحدِّث عن سعيد بن جُبير، عن ابن عباس، عن النبيِّ صلى الله عليه وسلم قال: "ما من عبدٍ مُسلمٍ يعودُ مريضًا لم يَحضُرُ أجلُه، فيقولُ سبعَ مرات: أسألُ الله العظيمَ، ربَّ العرش العظيم، أن يَشفِيَك، إلَّا عُوفي" [3].وأما حديث مَيسَرة بن حَبيب:
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: এমন কোনো মুসলিম বান্দা নেই যে কোনো রোগীকে দেখতে যায়, যার মৃত্যুর সময় এখনো উপস্থিত হয়নি, আর সে সাতবার বলে: 'আমি মহান আল্লাহর কাছে প্রার্থনা করি, যিনি মহান আরশের প্রভু, তিনি যেন তোমাকে আরোগ্য দান করেন,' কিন্তু সে আরোগ্য লাভ করে।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرف في النسخ الخطية إلى: الحسين.
[2] أُقحم هنا في النسخ لفظ "بن"، وهو خطأ.
7679 [3] - إسناده جيد من أجل المنهال بن عمرو ويزيد الدالاني، وسلف برقم (1284) من طريق آدم ابن أبي إياس عن شعبة. وهو في "مسند أحمد" 4 / (2137).وأخرجه الترمذي (2083)، والنسائي (10820) من طريق محمد بن جعفر وحده، بهذا الإسناد.وقال الترمذي: حسن غريب. وأخرجه أحمد 33 / (19831)، والترمذي (2049)، وابن حبان (6081) من طرق عن شعبة، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن صحيح.وأخرجه الترمذي (2049 م) من طرق همام بن يحيى، عن قتادة، به.وأخرجه أحمد (19864)، وابن ماجه (3490)، والنسائي (7558) من طريق هشيم، عن يونس ابن عبيد ومنصور بن المعتمر، كلاهما عن الحسن، به. في رواية أحمد عن يونس وحده.
7680 - فحدَّثنا أبو بكر بن أبي دارِمٍ الحافظ بالكوفة، حدثنا أحمد بن موسى، حدثنا الأشجعي، عن شُعْبة، عن مَيسَرة النَّهدي، عن المِنْهال بن عمرو، عن سعيد بن جُبير، عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "مَن دَخَلَ على مريض لم يَحضُرْ أجلُه، فقال: أسأل الله العظيمَ، ربَّ العرشِ العظيمِ، أنْ يَشفِيَك؛ سبعًا، إلَّا عُوفي" [1].
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি এমন কোনো অসুস্থ ব্যক্তির কাছে গেল যার মৃত্যুর সময় উপস্থিত হয়নি, অতঃপর সে সাতবার বলল: ‘আসআলুল্লাহাল আযীমা, রাব্বাল আরশিল আযীম, আঁই ইয়াশফিয়াক’ (আমি মহান আরশের অধিকারী মহান আল্লাহর কাছে প্রার্থনা করি, যেন তিনি আপনাকে আরোগ্য দান করেন); তবে সে (রোগী) অবশ্যই আরোগ্য লাভ করবে।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث جيد، وأبو بكر بن أبي دارم -وإن كان متكلمًا فيه- متابع. ميسرة النهدي: هو ابن حبيب أبو حازم الكوفي.وأخرجه النسائي (10819) من طريق أحمد بن حميد، عن عبيد الله بن عبد الرحمن الأشجعي، بهذا الإسناد.وأخرجه النسائي (10817) عن أحمد بن إبراهيم العامري، عن أبي النَّضر إسحاق بن إبراهيم الفراديسي، عن محمد بن شعيب بن شابور، عن شعبة به.وأخرجه أيضًا (10818) عن عبد الصمد بن عبد الوهاب عن إسحاق بن إبراهيم، عن محمد ابن شعيب عن رجل، عن شعبة به. فزاد رجلًا بين محمد وشعبة. وأخرجه أحمد 33 / (19831)، والترمذي (2049)، وابن حبان (6081) من طرق عن شعبة، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن صحيح.وأخرجه الترمذي (2049 م) من طرق همام بن يحيى، عن قتادة، به.وأخرجه أحمد (19864)، وابن ماجه (3490)، والنسائي (7558) من طريق هشيم، عن يونس ابن عبيد ومنصور بن المعتمر، كلاهما عن الحسن، به. في رواية أحمد عن يونس وحده.
7681 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا محمد بن إسحاق الصَّغَاني، حدثنا أبو النَّضر وأبو زيد سعيد بن الربيع، قالا: حدثنا شُعبة، عن قَتَادة، عن الحسن، عن عمران بن حُصين قال: نَهَى رسولُ الله صلى الله عليه وسلم عن الكيِّ، فاكتوَينا، فما أفلَحْنا ولا أنجَحْنا [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.
ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আগুনের সেঁক (দিয়ে চিকিৎসা করতে) নিষেধ করেছিলেন। এরপরও আমরা সেঁক নিয়েছিলাম। কিন্তু আমরা তাতে সফল হইনি এবং কোনো কল্যাণ লাভ করিনি।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث صحيح رجاله ثقات، والحسن -وهو البصري- وإن لم يسمع من عمران، تابعه مطرِّف بن عبد الله بن الشِّخّير -أحد أئمة التابعين الكبار- فيما سيأتي برقم (8489). أبو النَّضر: هو هاشم بن القاسم. وأخرجه أحمد 33 / (19831)، والترمذي (2049)، وابن حبان (6081) من طرق عن شعبة، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن صحيح.وأخرجه الترمذي (2049 م) من طرق همام بن يحيى، عن قتادة، به.وأخرجه أحمد (19864)، وابن ماجه (3490)، والنسائي (7558) من طريق هشيم، عن يونس ابن عبيد ومنصور بن المعتمر، كلاهما عن الحسن، به. في رواية أحمد عن يونس وحده.
7682 - أخبرنا أبو عمرو عثمان بن أحمد الدَّقَّاق، حدثنا الحسن بن سلَّام السَّوَّاق، حدثنا أبو عاصم، عن سفيان عن أبي إسحاق، عن أبي الأحوَص، عن عبد الله، قال: أصاب رجلًا من الأنصار مرضٌ شديدٌ، فوُصِفَ له الكَيُّ، فأتوا النبيَّ صلى الله عليه وسلم فأعرضَ عنهم، ثم أتَوْه فأعرضَ عنهم، ثم قال في الثالثة أو في الرابعة: "إن شئتُم فارضِفُوه رَضْفًا" [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.
আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আনসারী গোত্রের এক ব্যক্তি কঠিন রোগে আক্রান্ত হন এবং তার জন্য দাগ দেওয়া (কেয়) চিকিৎসার বিধান দেওয়া হলো। তারা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের কাছে এলো, তখন তিনি তাদের দিক থেকে মুখ ফিরিয়ে নিলেন। এরপর তারা আবার তাঁর কাছে এলো, তখনও তিনি তাদের থেকে মুখ ফিরিয়ে নিলেন। অতঃপর তিনি তৃতীয় বা চতুর্থবার বললেন: “যদি তোমরা চাও, তবে তোমরা গরম পাথর দিয়ে দাগ দাও।”
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح. أبو عاصم: هو الضحاك بن مخلد، وسفيان: هو الثّوري، وأبو إسحاق: هو عمرو بن عبد الله السَّبيعي، وأبو الأحوص: هو عوف بن مالك بن نَضْلة.وأخرجه أحمد 6 / (3852) عن أبي أحمد محمد بن عبد الله الزبيري، عن سفيان الثوري، بهذا الإسناد. بلفظ: "اكووه أو ارضفوه".وأخرجه أحمد 7 / (4021) من طريق معمر، و (4054) من طريق زهير بن معاوية، والنسائي (7557)، وابن حبان (6082) من طريق شعبة، ثلاثتهم عن أبي إسحاق السبيعي، به. ولفظه في رواية معمر: "إن شئتم فاكووه، وإن شئتم فارضفوه"، ولفظه في رواية زهير: "ارضفوه إن شئتم" كأنه غضبان، وفي رواية شعبة عند النسائي: "ارضفوه أحرقوه" وكَره ذلك، وعند ابن حبان: فسكت وكره ذلك.وسيأتي عند المصنف من طريق إسرائيل عن جده أبي إسحاق السبيعي برقم (8488).قوله: "ارضفوه" أي: اكووه بالرَّضْف، وهي الحجارة المُحمَاة على النار.
7683 - حدثنا أبو زكريا العَنْبري، حدثنا إبراهيم بن أبي طالب، حدثني عبد القُدُّوس ابن محمد الحَبْحابي، حدثني عمرو بن عاصم، حدثنا همّام، حدثنا قَتَادة، عن مُطرِّف ابن عبد الله، عن عمران بن حُصين أنه قال: لم تُسلَّم عليَّ الملائكةُ حتى ذهب منّي أثرُ النار [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين ولم يُخرجاه!
ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, ফেরেশতারা আমাকে সালাম দেওয়া বন্ধ করে দিয়েছিল, যতক্ষণ না আমার থেকে দাহনের (আগুনের) প্রভাব চলে গিয়েছিল।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] خبر صحيح، وهذا إسناد حسن من أجل عمرو بن عاصم وهو ابن عبيد الله بن الوازع.وأخرجه أحمد 33/ (19833)، ومسلم (1226) (167)، وابن حبان (3938) من طريق حميد ابن هلال، عن مطرف بن عبد الله، به. واستدراك الحاكم له على الصحيح ذهول منه.وأخرجه بنحوه دون ذكر الكيِّ بالنار: أحمد 33 / (19841) من طريق سعيد بن أبي عروبة، و (19842) من طريق معمر، ومسلم (1226) (168) من طريق شعبة، ثلاثتهم عن قتادة، به.ومعنى الحديث: أنَّ عمران بن حصين رضي الله عنه كانت به بواسير، فاكتوى لأجلها، فانقطع عنه تسليمُ الملائكة، فلما ترك الاكتواء عادت الملائكة تسلِّم عليه. وروي نحوه من حديث أبي الزبير عن جابر لكن جعله في سعد بن معاذ لا أُبي بن كعب، أخرجه أحمد 22 / (1343)، ومسلم (2208) وغيرهما.
7684 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا أحمد بن عبد الجبار، حدثنا أبو معاوية، حدثنا الأعمش.وحدثنا أبو عبد الله الحافظ، حدثنا محمد بن عبد الوهاب، أخبرنا يعلى بن عُبيد، حدثنا الأعمش، عن أبي سفيان [1]، عن جابر قال: مرضَ أُبيُّ بن كعب، فبعث النبيُّ صلى الله عليه وسلم إليه طبيبًا، فقَطَعَ منه عِرقًا ثم كَوَاه عليه [2]. هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه!
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: উবাই ইবনে কা'ব অসুস্থ হয়ে পড়লেন। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর কাছে একজন চিকিৎসক পাঠালেন। সেই চিকিৎসক তাঁর একটি শিরা কেটে দিলেন এবং অতঃপর সেই স্থানে লোহা গরম করে ছেঁকা দিলেন।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرَّف في (ز) و (ب) إلى: أبي إسحاق. وروي نحوه من حديث أبي الزبير عن جابر لكن جعله في سعد بن معاذ لا أُبي بن كعب، أخرجه أحمد 22 / (1343)، ومسلم (2208) وغيرهما.
[2] إسناده قوي من أجل أبي سفيان -وهو طلحة بن نافع- غير أنَّ قوله فيه: "فقطع منه عرقًا" انفرد به أبو معاوية -وهو محمد بن خازم الضرير- من بين أصحاب الأعمش عنه، وهذا الحرف ليس في رواية يعلى بن عبيد عن الأعمش كما يُوهِم صنيع المصنف، فقد أخرجه من طريقه البيهقي 9/ 432 ولم يذكره فيه، وأوضَحَت بعض الروايات أنَّ أُبيًّا رُمِيَ بسهم، لا أنَّ الطبيب قطعه. أبو عبد الله الحافظ: هو محمد بن يعقوب بن يوسف الأخرم.وأخرجه أحمد 22 / (14379)، ومسلم (2207) (73)، وأبو داود (3864) من طرق عن أبي معاوية، بهذا الإسناد. فاستدراك الحاكم له ذهولٌ منه.وأخرجه أحمد 22/ (14252) و 23/ (14989)، ومسلم (2207) (73) و (74)، وابن ماجه (3493) من طرق عن الأعمش، به.وسيأتي من طريق أبي إسحاق الفزاري عن الأعمش برقم (8490). وروي نحوه من حديث أبي الزبير عن جابر لكن جعله في سعد بن معاذ لا أُبي بن كعب، أخرجه أحمد 22 / (1343)، ومسلم (2208) وغيرهما.
7685 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بحر بن نصر، حدثنا عبد الله ابن وهب، أخبرني يونس، عن ابن شهاب، عن أبي أُمامة بن سهل بن حُنَيف: أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم عاد أسعدَ [1] بن زُرَارة وبه الشَّوْكة، فلما دخل عليه قال: "بِئسَ الميتَ هذا، اليهودُ يقولون: لولا دَفَعَ عنه، ولا أَملِكُ له ولا لنفسي شيئًا، ولا يَلُومُنَّ في أبي أُمامة"، فأَمر به فكُوِيَ فمات [2].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين إذا كان أبو أُمامة عندهما من الصحابة، ولم يُخرجاه.
আবু উমামাহ ইবন সাহল ইবন হুনাইফ থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আস'আদ ইবন যুরারাহকে দেখতে গেলেন, যখন তিনি ‘শাওকাহ’ (তীব্র রোগ/পীড়ায়) ভুগছিলেন। যখন তিনি তার কাছে প্রবেশ করলেন, তখন বললেন: "কতই না মন্দ মৃত্যু (বা রোগাক্রান্ত অবস্থা) এটি! ইহুদিরা বলে: 'কেন তিনি (নবী) তাকে রক্ষা করলেন না?' অথচ আমি তার জন্য বা আমার নিজের জন্য কোনো কিছুরই মালিক নই। আর তারা যেন আবু উমামার বিষয়ে আমাকে তিরস্কার না করে।" এরপর তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে গরম লোহা দ্বারা ছেঁকা দিতে (চিকিৎসা করতে) নির্দেশ দিলেন। অতঃপর তিনি (আস'আদ) ইন্তিকাল করলেন।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في: (ز): سعد، والمثبت من (ص) و (م) و "تلخيص الذهبي" ومصادر التخريج، وهو الصواب.
[2] صحيح لغيره، ورجاله ثقات غير أنَّ أبا أمامة بن سهل بن حنيف له رؤية وليس له صحبة، فروايته هذه مرسلة، وقد جاء من غير ما طريقٍ يصحُّ بها الحديث، كما سيأتي في التخريج وفي الطريق التالية عند المصنف.وأخرجه أحمد 28 / (17238) من طريق زمعة بن صالح، عن ابن شهاب الزهري، به. وانظر تتمة تخريجه هناك.وأخرجه بنحوه أحمد أيضًا 27 / (16618) من طريق عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن بعض أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم. وسنده حسن في المتابعات والشواهد، وانظر ما بعده.الشوكة: هي الذُّبحة كما في الحديث الآتي. والذّبحة -كما في "القاموس المحيط"- كهُمَزَة وعِنبَة وكِسْرة وصُبْرة: وجعٌ في الحلق، أو دم يخنق فيقتل.
7686 - أخبرنا أبو سهل بن زياد حدثنا يحيى بن جعفر بن الزِّبْرقان، حدثنا أبو داود، حدثنا شُعبة، عن محمد بن عبد الرحمن بن زُرَارة قال: سمعتُ عمِّي -وما رأيت أحدًا مِنَّا به شبيهٌ- يحدِّثُ: أنَّ أسعدَ [1] بن زُرَارة أخذه وَجَعٌ، وتُسمِّيه أهلُ المدينة الذِّبح [2]، فكَوَاه رسولُ الله صلى الله عليه وسلم فمات، فقال رسولُ الله صلى الله عليه وسلم: "ميتُ سُوءٍ ليهودَ [3]، ليقولون: لولا دَفَعَ عن صاحبِه، ولا أملِكُ له ولا لنفسي شيئًا" [4].وهذا حديث صحيح على شرط الشيخين ولم يُخرجاه.
আস'আদ ইবনু যুরারাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁকে একটি রোগ আক্রমণ করে, মদীনাবাসীরা যাকে ‘আয-যিবহ’ (গলগণ্ড বা এক প্রকার গলা ব্যথা) বলত। অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে লোহা পুড়িয়ে সেঁক দেন (চিকিৎসা করেন), কিন্তু তিনি মারা গেলেন। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “ইহুদীদের জন্য এটি একটি খারাপ মরণ (মৃত্যু)। তারা নিশ্চয়ই বলবে: ‘কেন সে তার সঙ্গীর কাছ থেকে (মৃত্যুকে) প্রতিহত করল না?’ অথচ আমি তার জন্য অথবা আমার নিজের জন্য কোনো কিছুর মালিক নই।”
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في النسخ الخطية: سعد، والمثبت من "تلخيص الذهبي"، وهو كذلك في "العلل" لأحمد (491)، و "سنن ابن ماجه" (3492) بتحقيقنا، وهو الصواب
[2] تحرَّف في النسخ الخطية إلى الريح، وجاء على الصواب في "تلخيص الذهبي" ومصادر التخريج. إنما هو من حديث أبي هريرة، فقد أخرجه البخاري (5740) ومسلم (2187).
7686 [3] - تحرّف في النسخ الخطية إلى: كيهود. إنما هو من حديث أبي هريرة، فقد أخرجه البخاري (5740) ومسلم (2187).
7686 [4] - صحيح لغيره، رجاله ثقات لكن عمّ محمد بن عبد الرحمن - واسمه يحيى بن أسعد بن زرارة- مختلف في صحبته. ويشهد له ما قبله.وأخرجه ابن ماجه (3492) من طريق محمد بن جعفر والنَّضر بن شميل -فرّقهما- عن شعبة، بهذا الإسناد. وانظر تتمة تخريجه من طريق شعبة هناك.وخالف منصورُ بن المعتمر شعبةَ، فرواه عن محمد بن عبد الرحمن قال: أخذت أسعدَ بن زرارة الذبحةُ، فذكره مرسلًا ليس فيه عمّ يحيى بن أسعد عمّ محمد بن عبد الرحمن. أخرجه ابن سعد في "الطبقات" 3/ 563. ولفظ المرفوع فيه: "اكتوِ، فإني لا ألوم نفسي عليك". إنما هو من حديث أبي هريرة، فقد أخرجه البخاري (5740) ومسلم (2187).
7687 - أخبرنا إسماعيل بن محمد بن إسماعيل الفقيه بالرَّيِّ، حدثنا أبو حاتم، أخبرنا أحمد بن إسحاق الحضرمي، حدثنا وُهَيب، حدثنا أبو واقد اللَّيثي قال: سمعتُ أبا سَلَمة بن عبد الرحمن يُحدِّث عن عائشةَ قالت: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "استعيذُوا بالله من العَيْنِ، فإنَّ العينَ حقٌّ" [1].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين ولم يُخرجاه بهذه السِّياقة، إنما اتَّفقا على حديث ابن عباس: "العينُ حقٌّ" [2].
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা আল্লাহর কাছে বদ নজর (আল-আইন) থেকে আশ্রয় প্রার্থনা করো, কারণ বদ নজর অবশ্যই সত্য।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف لضعف أبي واقد -وهو صالح بن محمد بن زائدة- الليثي. وُهيب: هو ابن خالد الباهلي.وأخرجه ابن ماجه (3508) من طريق أبي هشام المغيرة بن سلمة المخزومي، عن وهيب بن خالد، بهذا الإسناد.ويشهد له حديث ابن عباس الذي أشار إليه المصنف، ويأتي تخريجه في الذي يليه. إنما هو من حديث أبي هريرة، فقد أخرجه البخاري (5740) ومسلم (2187).
[2] حديث ابن عباس أخرجه مسلم (2188) دون البخاري، والحديث الذي اتفقا على إخراجه إنما هو من حديث أبي هريرة، فقد أخرجه البخاري (5740) ومسلم (2187).
7688 - أخبرنا أحمد بن محمد العَنَزي [1]، حدثنا عثمان بن سعيد الدارمي، حدثنا علي بن المَدِيني، حدثنا عبد الرحمن بن مَهدي، حدثنا سفيان، عن دُوَيد [2]، عن إسماعيل بن ثَوْبان، عن جابر بن زيد، عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "العَيْنُ حَقٌّ تَستَنزِلُ الحالِقَ [3] " [4].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه بهذه الزيادة.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নজর (বদ-নজর) সত্য, যা চূড়া থেকে নামিয়ে আনে।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرّف في (ص) إلى: العنبري. وأخرجه ابن ماجه (3506)، والنسائي (7469) و (9968) و (10805) من طريق معاوية ابن هشام، عن عمار بن رزيق بهذا الإسناد. ورواية ابن ماجه، مختصرة، وروايتا النسائي مطولتان بنحو رواية المصنِّف التالية.وانظر ما سلف برقم (5847).
[2] تحرف في النسخ الخطية إلى: دريد. وأخرجه ابن ماجه (3506)، والنسائي (7469) و (9968) و (10805) من طريق معاوية ابن هشام، عن عمار بن رزيق بهذا الإسناد. ورواية ابن ماجه، مختصرة، وروايتا النسائي مطولتان بنحو رواية المصنِّف التالية.وانظر ما سلف برقم (5847).
7688 [3] - لفظ "الحالق" مكانه في (ز) بياض. وأخرجه ابن ماجه (3506)، والنسائي (7469) و (9968) و (10805) من طريق معاوية ابن هشام، عن عمار بن رزيق بهذا الإسناد. ورواية ابن ماجه، مختصرة، وروايتا النسائي مطولتان بنحو رواية المصنِّف التالية.وانظر ما سلف برقم (5847).
7688 [4] - حسن لغيره، وهذا إسناد ضعيف، دُويد -وهو البصري- ليّنه أبو حاتم، وإسماعيل بن ثوبان روى عنه جمع وذكره ابن حبان في "الثقات".وأخرجه أحمد 4 / (2478) و (2681) عن عبد الله بن الوليد العدني، عن سفيان الثَّوري، بهذا الإسناد.وأخرجه أيضًا 4 / (2477) عن أبي أحمد الزبيري، عن سفيان، عن رجل، عن جابر بن زيد، به. ليس فيه إسماعيل بن ثوبان، وأبهم دويدًا.وأخرج مسلم (2188) من طريق طاووس، عن ابن عباس مرفوعًا: "العين حق، ولو كان شيءٌ سابقَ القَدَر سبقته العين".وفي الباب عن أبي ذر مرفوعًا: "إنَّ العين لتُولَعُ الرجلَ بإذن الله، حتى يصعدَ حالقًا ثم يتردّى".أخرجه أحمد 35 / (21302)، وفي سنده مِحجن غير منسوب راويه عن أبي ذر، لم يوثقه سوى ابن حبان.والحالق: هو الجبل. وأخرجه ابن ماجه (3506)، والنسائي (7469) و (9968) و (10805) من طريق معاوية ابن هشام، عن عمار بن رزيق بهذا الإسناد. ورواية ابن ماجه، مختصرة، وروايتا النسائي مطولتان بنحو رواية المصنِّف التالية.وانظر ما سلف برقم (5847).
7689 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا محمد بن إسحاق الصَّغَاني، حدثنا أبو الجَوَّاب، حدثنا عمار بن رُزَيق، عن عبد الله بن عيسى، عن أُميّة بن هِنْد، عن عبد الله بن عامر بن رَبيعة، عن أبيه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "إذا رأى أحدُكم من نفسِه وأخيه ما يُعجِبُه، فَلْيَدْعُ بالبَرَكة، فإنَّ العينَ حقٌّ" [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه بذكر البَرَكة.
আমির ইবনু রাবি'আহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যখন তোমাদের কেউ নিজের মধ্যে অথবা তার ভাইয়ের মধ্যে এমন কিছু দেখে যা তাকে মুগ্ধ করে (বা ভালো লাগে), তখন তার উচিত বরকতের জন্য দোয়া করা, কারণ চোখ লাগা (বদ নজর) সত্য।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف، أمية بن هند مجهول الحال. وأخرجه ابن ماجه (3506)، والنسائي (7469) و (9968) و (10805) من طريق معاوية ابن هشام، عن عمار بن رزيق بهذا الإسناد. ورواية ابن ماجه، مختصرة، وروايتا النسائي مطولتان بنحو رواية المصنِّف التالية.وانظر ما سلف برقم (5847).
7690 - أخبرنا علي بن عيسى الحيري، حدثنا محمد بن عمرو بن النَّضر الحَرَشي، حدثنا يحيى بن يحيى، أخبرنا وكيع بن الجرَّاح بن مَلِيح، حدثنا أَبي [1]، عن عبد الله بن عيسى، عن أميّة بن هند بن سعد بن سهل بن حُنَيف، عن عبد الله بن عامر ابن رَبيعة قال: خرج سهلُ بن حُنَيف ومعه عامرُ بن ربيعة يريدان الغُسلَ، فانتَهَيا إلى غَدِير، فخرج سهل يريد الخَمَرَ -قال وكيع: يعني به السِّتْر- حتى إذا رأى أنه قد نَزَعَ جُبَّةً عليه من صُوف فوضعها ثم دخل الماء، قال: فنظرتُ إليه فأصبتُه بعَيْني، فسمعتُ له قَرقَفةً في الماء، فأتيته فناديته ثلاثًا، فلم يُجِبْني، فأتيتُ النبيَّ صلى الله عليه وسلم فأخبرتُه، فجاء يمشي، فخاضَ الماءَ حتى كأنِّي أنظُرُ إلى بياضِ ساقَيه، فضربَ صدَره، ثم قال: "اللهمَّ أذهِبْ عنه حَرَّها وبَرْدَها ووَصَبَها"، فقام، فقال النبيُّ صلى الله عليه وسلم: "إذا رأى أحدُكم من نفسه أو ماله أو أخيه، ما يُحِبُّ، فليُبرك، فإنَّ العينَ حقٌّ" [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.
সাহল ইবনু হুনাইফ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি এবং তাঁর সাথে আমির ইবনু রবী’আহ গোসল করার উদ্দেশ্যে বের হলেন। তারা একটি জলাশয়ের কাছে পৌঁছালেন। সাহল (পর্দার উদ্দেশ্যে) বের হলেন—ওয়াকী’ (রাহ.) বলেন: এর অর্থ হলো সিতর (আড়াল/আবরণ)। তিনি যখন দেখলেন যে তিনি তার পরিহিত পশমের জুব্বাটি খুলে রাখলেন এবং পানিতে নামলেন। (আমির ইবনু রবী’আহর ছেলে আবদুল্লাহ ইবনু আমির ইবনু রবী’আহ) বললেন: আমি তাঁর (সাহল ইবনু হুনাইফের) দিকে তাকালাম এবং আমার দৃষ্টি তাঁকে আঘাত করল। আমি পানিতে তাঁর গলার কাতরানি শুনতে পেলাম। আমি তাঁর কাছে এসে তিনবার ডাকলাম, কিন্তু তিনি আমার ডাকে সাড়া দিলেন না। তখন আমি নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের কাছে এসে তাঁকে জানালাম। তিনি হেঁটে এলেন এবং পানিতে প্রবেশ করলেন, এমনকি যেন আমি তাঁর পায়ের গোছার শুভ্রতা দেখতে পাচ্ছিলাম। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর বুকে আঘাত করলেন এবং বললেন: “হে আল্লাহ! তার থেকে এর উত্তাপ, ঠাণ্ডা ও রোগ দূর করে দাও।” ফলে সে উঠে দাঁড়াল। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “তোমাদের কেউ যখন নিজের বা তার সম্পদ বা তার ভাইয়ের মধ্যে এমন কিছু দেখে যা তার ভালো লাগে, তবে সে যেন বরকতের জন্য দোয়া করে (তাবারুক বলে)। কারণ, নিশ্চয়ই চোখ লাগা (বদ নজর) সত্য।”
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في (ص) و (م) مكان لفظ "أبي" بياض.
[2] صحيح لغيره، وهذا إسناد ضعيف كسابقه، كما أنه مرسل لم يذكر فيه صحابيه عبد الله ابن عامر.وأخرجه أحمد 24 / (15700) عن وكيع بن الجراح بهذا الإسناد. ووقع عنده قلبٌ بين عامر ابن ربيعة وسهل بن حنيف.وانظر ما قبله.والخَمَر بالتحريك: ما يستر ويُواري من شجر وغيره.والقَرقَفة: الرِّعدة.
7691 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بَحر بن نَصر، حدثنا عبد الله ابن وهب، أخبرني حَيْوة، عن خالد بن عُبيد المَعَافري، عن مِشرَح بن هاعان، أنه سمع عُقبة بن عامر يقول: سمعتُ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم يقول: "مَن عَلَّقَ تَمِيمةً، فلا أتمَّ اللهُ له، ومن عَلَّقَ وَدَعةً، فلا وَدَعَ اللهُ له" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.
উকবাহ ইবনে আমির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে বলতে শুনেছি: “যে ব্যক্তি তামীমা (তাবিজ) ঝুলায়, আল্লাহ যেন তার কাজ সম্পূর্ণ না করেন। আর যে ব্যক্তি শঙ্খ বা কড়ি ঝুলায়, আল্লাহ যেন তাকে শান্তি না দেন (বা তাকে রক্ষা না করেন)।”
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف لجهالة خالد بن عبيد المعافري فلم يرو عنه غير حيوة -وهو ابن شريح- ولم يوثقه غير ابن حبان، وقد تابعه عبد الله بن لَهِيعة -وهو حسن الحديث في المتابعات والشواهد- إن سمعه من مشرح بن ماعان فقد وصفه ابن حبان بالتدليس.وأخرجه ابن حبان (6086) من طريق حرملة بن يحيى، عن عبد الله بن وهب، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 28 / (17404) عن أبي عبد الرحمن عبد الله أبي عبد الرحمن عبد الله بن يزيد المقرئ، عن حيوة بن شريح، به.وأخرجه ابن عبد الحَكَم في "فتوح مصر" ص 486 عن أبي الأسود النَّضر بن عبد الجبار، عن ابن لهيعة، عن مشرح، به.وسيأتي عند المصنف برقم (8494) من طريق أبي عاصم النبيل عن حيوة.والمحفوظ ما سيأتي عند المصنف برقم (7703) من حديث دُخين عن عقبة بن عامر بلفظ: "من علَّق -يعني تَميمة- فقد أشرك".والتَّميمة: خَرَزة كانت العرب تعلّقها على أولادهم يتّقون بها العين في زعمهم، فأبطلها الإسلام.والوَدَعة، بالتحريك: شيء أبيض يُجلَب من البحر يعلَّق على الصبيان مخافةَ العين.وقوله: "لا وَدَعَ الله له" أي: لا جعله في دَعَةٍ وسكون، وقيل: لا خفَّف الله عنه ما يخافه. وقال ابن عبد البر في "التمهيد" 17/ 163: أي: لا تَرَك اللهُ له ما هو فيه من العافية. النقاد. كما أنَّ الحفاظ من أصحاب الحسن رووه عنه عن عمران موقوفًا، ورواية من رفعه عنه لا ترقى لتعارض روايةَ أصحابه الذين وقفوه.وأخرجه ابن حبان (6088) من طريق موسى بن محمد بن حيان، عن عثمان بن عمر، بهذا الإسناد. وزاد فيه: "أيسرُّك أن تُوكَل إليها؟! انبِذها عنك".وأخرجه أحمد 33 / (20000)، وابن ماجه (3531)، وابن حبان (6085) من طرق عن مبارك بن فضالة، عن الحسن البصري به بلفظ: "أمَا إنها لا تزيدك إلَّا وهنًا، انبذها عنك، فإنك لو مت وهي عليك ما أفلحتَ أبدًا". وفيه مبارك بن فضالة وهو مدلّس وقد عنعن، إلّا في رواية "المسند" فقد صرَّح بالسماع وبيَّنا هناك خطأها.وأخرجه معمر في "جامعه" (20344)، وابن أبي شيبة 8/ 14 من طريق يونس بن عبيد ومنصور ابن زاذان، والطبراني في "الكبير" 18/ (355) من طريق إسحاق بن الربيع، أربعتهم (معمر ويونس ومنصور وإسحاق) عن الحسن، عن عمران فذكره موقوفًا، وزاد الطبراني فيه حديثًا مرفوعًا آخر. وهذه الأسانيد أصح عن الحسن البصري.وفي الباب عن ثوبان مرفوعًا عند الطبراني في" الكبير" (1439)، وسنده ضعيف.وعن أبي أمامة عنده أيضًا (7700)، وسنده ضعيف أيضًا.والصُّفْر: هو النحاس.
7692 - أخبرنا أحمد بن سَلْمان [1] الفقيه، حدثنا الحسن بن مُكرَم، حدثنا عثمان ابن عمر، أخبرنا أبو عامر صالح بن رُسْتُم، عن الحسن، عن عمران بن حُصَين قال: دخلتُ على النبيِّ صلى الله عليه وسلم وفي عَضُدِي حَلْقَةُ صُفْرٍ، فقال: "ما هذه؟ " فقلت: من الواهِنَةِ، فقال: "انبِذْها" [2]. هذ ا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.
ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট প্রবেশ করলাম, আর আমার বাহুতে একটি পিতলের আংটি ছিল। তিনি জিজ্ঞাসা করলেন, "এটা কী?" আমি বললাম, (এটি) 'আল-ওয়াহিনাহ'-এর (দুর্বলতার রোগের) কারণে। তিনি বললেন, "এটা খুলে ফেলে দাও।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرّف في النسخ الخطية إلى: سليمان. النقاد. كما أنَّ الحفاظ من أصحاب الحسن رووه عنه عن عمران موقوفًا، ورواية من رفعه عنه لا ترقى لتعارض روايةَ أصحابه الذين وقفوه.وأخرجه ابن حبان (6088) من طريق موسى بن محمد بن حيان، عن عثمان بن عمر، بهذا الإسناد. وزاد فيه: "أيسرُّك أن تُوكَل إليها؟! انبِذها عنك".وأخرجه أحمد 33 / (20000)، وابن ماجه (3531)، وابن حبان (6085) من طرق عن مبارك بن فضالة، عن الحسن البصري به بلفظ: "أمَا إنها لا تزيدك إلَّا وهنًا، انبذها عنك، فإنك لو مت وهي عليك ما أفلحتَ أبدًا". وفيه مبارك بن فضالة وهو مدلّس وقد عنعن، إلّا في رواية "المسند" فقد صرَّح بالسماع وبيَّنا هناك خطأها.وأخرجه معمر في "جامعه" (20344)، وابن أبي شيبة 8/ 14 من طريق يونس بن عبيد ومنصور ابن زاذان، والطبراني في "الكبير" 18/ (355) من طريق إسحاق بن الربيع، أربعتهم (معمر ويونس ومنصور وإسحاق) عن الحسن، عن عمران فذكره موقوفًا، وزاد الطبراني فيه حديثًا مرفوعًا آخر. وهذه الأسانيد أصح عن الحسن البصري.وفي الباب عن ثوبان مرفوعًا عند الطبراني في" الكبير" (1439)، وسنده ضعيف.وعن أبي أمامة عنده أيضًا (7700)، وسنده ضعيف أيضًا.والصُّفْر: هو النحاس.
[2] إسناده ضعيف، فالحسن -وهو البصري- لم يسمع من عمران بن حصين في قول جمهور النقاد. كما أنَّ الحفاظ من أصحاب الحسن رووه عنه عن عمران موقوفًا، ورواية من رفعه عنه لا ترقى لتعارض روايةَ أصحابه الذين وقفوه.وأخرجه ابن حبان (6088) من طريق موسى بن محمد بن حيان، عن عثمان بن عمر، بهذا الإسناد. وزاد فيه: "أيسرُّك أن تُوكَل إليها؟! انبِذها عنك".وأخرجه أحمد 33 / (20000)، وابن ماجه (3531)، وابن حبان (6085) من طرق عن مبارك بن فضالة، عن الحسن البصري به بلفظ: "أمَا إنها لا تزيدك إلَّا وهنًا، انبذها عنك، فإنك لو مت وهي عليك ما أفلحتَ أبدًا". وفيه مبارك بن فضالة وهو مدلّس وقد عنعن، إلّا في رواية "المسند" فقد صرَّح بالسماع وبيَّنا هناك خطأها.وأخرجه معمر في "جامعه" (20344)، وابن أبي شيبة 8/ 14 من طريق يونس بن عبيد ومنصور ابن زاذان، والطبراني في "الكبير" 18/ (355) من طريق إسحاق بن الربيع، أربعتهم (معمر ويونس ومنصور وإسحاق) عن الحسن، عن عمران فذكره موقوفًا، وزاد الطبراني فيه حديثًا مرفوعًا آخر. وهذه الأسانيد أصح عن الحسن البصري.وفي الباب عن ثوبان مرفوعًا عند الطبراني في" الكبير" (1439)، وسنده ضعيف.وعن أبي أمامة عنده أيضًا (7700)، وسنده ضعيف أيضًا.والصُّفْر: هو النحاس.
7693 - أخبرنا أبو العباس محمد بن أحمد المحبوبي، حدثنا سعيد بن مسعود، حدثنا عبيد الله بن موسى، أخبرنا ابنُ أبي ليلى، عن أخيه عيسى، قال: دخلتُ على أبي مَعبَد الجُهَني -وهو عبد الله بن عُكَيم- وبه حُمْرٌ، فقلت: ألا تُعلِّق شيئًا؟ فقال: الموتُ أقربُ من ذلك، قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "من تَعلَّقَ شيئًا وُكِلَ إليه" [1].
আব্দুল্লাহ ইবন উকাইম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর ভাই ঈসা (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, আমি আবূ মা'বাদ আল-জুহানী—যিনি আব্দুল্লাহ ইবন উকাইম—তাঁর কাছে প্রবেশ করলাম। তখন তাঁর শরীরে এক প্রকার রোগ ছিল। আমি তাঁকে বললাম, আপনি কি কোনো (তাবীজ বা কবচ) ঝুলিয়ে রাখবেন না? তিনি বললেন, এর চেয়ে তো মৃত্যু অনেক কাছে। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি কোনো কিছু (তাবীজ বা কবচ হিসাবে) ধারণ করে, তাকে ঐ বস্তুর হাতেই সোপর্দ করা হয়।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف، ابن أبي ليلى - واسمه محمد بن عبد الرحمن - ضعيف سيئ الحفظ، وعبد الله بن عكيم لم يسمع من النبي صلى الله عليه وسلم، فروايته مرسلة.وأخرجه الترمذي (2072) من طريق عبيد الله بن موسى عن محمد بن أبي ليلى، بهذا الإسناد.وقال: حديث عبد الله بن عكيم إنما نعرفه من حديث محمد بن عبد الرحمن بن أبي ليلى، وعبد الله ابن عكيم لم يسمع من النبي صلى الله عليه وسلم، وكان في زمن النبي صلى الله عليه وسلم يقول: كتب إلينا رسول الله صلى الله عليه وسلم.وأخرجه أحمد 31 / (18781) عن وكيع، و (18786) من طريق شعبة، والترمذي (2072 م) من طريق يحيى بن سعيد، ثلاثتهم عن محمد بن أبي ليلى، به.وفي الباب عن أبي هريرة، أخرجه النسائي (3528) من طريق عباد بن ميسرة المنقري- وهو ليِّن- عن الحسن البصري، عن أبي هريرة والحسن لم يسمع من أبي هريرة.وخالف عبادًا جريرُ بن حازم - وهو ثقة فرواه عن الحسن عن النبي صلى الله عليه وسلم يا مرسلًا. أخرجه ابن وهب في "جامعه" (674 - أبو الخير).ويغني عنه حديث عقبة بن عامر الآتي عند المصنف برقم (7703)، بلفظ: "من علَّق ـ يعني تميمة - فقد أشرك".
7694 - حدثنا بكر بن محمد الصَّيرَفي بمَرُو، حدثنا عبد الصمد بن الفضل، حدثنا مكيُّ بن براهيم، حدثنا السَّرِيُّ بن إسماعيل، عن أبي الضُّحى، عن أم ناجيَة قالت: دخلتُ على زينبَ امرأةِ عبد الله أُعوِّذُها من حُمْرة ظَهَرَتْ بوجهها، وهي معلَّقة بحِرْز، فإني لجالسةٌ دخل عبدُ الله، فلما نظر إلى الحِرْز أتى جِذعًا مُعارِضًا في البيت، فوضع عليه رِداءَه، ثم حَسَرَ عن ذِراعَيه، فأتاها فأخذ بالحِرْز فجَذَبها حتى كاد وجهُها أن يقعَ بالأرض فانقطع، ثم خرج من البيت، فقال: لقد أصبحَ آلُ عبدِ الله أغنياءَ عن الشَّرك، ثم خرج فرَمَى بها خلف الجِدار [1]، ثم قال: يا زينبُ، أعندي تُعلَّقين؟! إِنِّي سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم نَهَى عن الرُّقَى والتَّمائم والتِّوَلَة، فقالت أمُّ ناجية: يا أبا عبد الرحمن، أما الرُّقى والتمائم، فقد عرفنا، فما التِّوَلَة؟ قال: التِّوَلَة ما يُهيِّجُ النساء [2].
যায়নাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, উম্মু নাজিয়া বলেন, আমি আব্দুল্লাহর স্ত্রী যায়নাবের নিকট গেলাম। তার চেহারায় এক ধরনের লালচে রোগ দেখা দিয়েছিল, আর আমি তাকে আরোগ্যের জন্য ঝাড়ফুঁক করছিলাম। তার শরীরে একটি কবচ বা তাবিজ ঝুলানো ছিল। আমি যখন বসে ছিলাম, তখন আব্দুল্লাহ (ইবন মাসউদ) প্রবেশ করলেন। তিনি যখনই তাবিজটির দিকে তাকালেন, তখন ঘরের মাঝখানে আড়াআড়িভাবে রাখা একটি কাঠের গুড়ির কাছে গেলেন, তার উপর নিজের চাদর রাখলেন, এরপর তাঁর বাহুদ্বয় গুটিয়ে নিলেন।
এরপর তিনি যায়নাবের কাছে এসে তাবিজটি ধরলেন এবং এমন জোরে টান দিলেন যে তার মুখমণ্ডল প্রায় মাটিতে পড়ে যাওয়ার উপক্রম হয়েছিল, অতঃপর তা ছিঁড়ে গেল। এরপর তিনি ঘর থেকে বের হয়ে বললেন: আব্দুল্লাহর পরিবার শিরক থেকে মুক্ত ও মুখাপেক্ষীহীন হয়ে গেল। এরপর তিনি বের হয়ে তাবিজটি দেয়ালের পেছনে ছুঁড়ে ফেলে দিলেন।
এরপর তিনি বললেন: হে যায়নাব! তুমি আমার কাছে থাকতেও এগুলো (তাবিজ) ঝোলাও?! আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি যে, তিনি রুক্বাহ (মন্ত্র), তামায়িম (তাবিজ) এবং তিওয়ালাহ (বশীকরণ) থেকে নিষেধ করেছেন। তখন উম্মু নাজিয়া বললেন: হে আবূ আব্দুর রহমান! রুক্বাহ (মন্ত্র) এবং তামায়িম (তাবিজ) সম্পর্কে তো আমরা জানি, কিন্তু তিওয়ালাহ কী? তিনি বললেন: তিওয়ালাহ হলো যা মহিলাদের মধ্যে উত্তেজনা সৃষ্টি করে (অর্থাৎ প্রেম-মুগ্ধতা বা বশীকরণের জন্য ব্যবহৃত মন্ত্র)।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في (ز): الحِرار، وهي جمع حَرَّة.
[2] إسناده ضعيف جدًا، السري بن إسماعيل ضعيف جدًا، وأم ناجية لم نعرفها. ولم نقف على أحد أخرجه من هذا الطريق غير المصنف.وانظر ما بعده، وما سيأتي برقم (8495).قولها: "من حُمرة" هي ورم من جنس الطواعين، قاله صاحب "القاموس".
7695 - حدَّثَناه أبو عبد الله محمد بن عبد الله الزاهد الأصبهاني، حدثنا أحمد ابن مِهرْان، حدثنا عُبيد الله [1] بن موسي، حدثنا إسرائيل، عن ميَسَرة بن حبيب، عن المِنْهال بن عمرو، عن قيس بن السَّكن الأسَدي، قال: دخل عبدُ الله بن مسعود على امرأتِه فرأى عليها حِرْزًا من الحُمْرة، فقطعه قطعًا عنيفًا، ثم قال: إِنَّ آلَ عبد الله عن الشِّرك أغنياء، وقال: كان مما حَفِظْنا عن النبي صلى الله عليه وسلم: أنَّ الرُّقَى والتمائمَ والتِّوَلَةَ من الشِّرك [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.
আব্দুল্লাহ ইবনে মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর স্ত্রীর কাছে প্রবেশ করলেন এবং তার শরীরে 'হুমরা' (এক প্রকার চর্মরোগ) রোগমুক্তির একটি তাবিজ দেখতে পেলেন। তখন তিনি সেটি প্রচণ্ড জোরে ছিঁড়ে ফেললেন। এরপর তিনি বললেন: নিশ্চয়ই আব্দুল্লাহর পরিবার শিরক থেকে মুক্ত (অর্থাৎ আমরা শিরক থেকে মুক্ত থাকতে চাই)। তিনি আরও বললেন: যা কিছু আমরা নাবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে মুখস্থ করেছিলাম, তার মধ্যে ছিল: ঝাড়-ফুঁক (রুকয়া), তাবিজ (তামা'ইম) এবং তিউয়ালা (প্রেমের জাদু বা তাগা)—এগুলো হলো শিরকের অন্তর্ভুক্ত।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرّف في النسخ الخطية إلى: عبد الله.
[2] صحيح موقوفًا على ابن مسعود، وهذا إسناد رجاله لا بأس بهم، لكن اختلف على المنهال ابن عمرو فيه كما سيأتي.وأخرجه الطبراني في "الأوسط" (1442) من طريق عثمان بن عمر، عن إسرائيل بن يونس، بهذا الإسناد.وخالف إسرائيلَ بنَ يونس أبو إسرائيل إسماعيلُ بن خليفة المُلَائي عند الطبراني في "الكبير" (8862)، فرواه عن ميسرة عن المنهال عن أبي عبيدة بن عبد الله: أنَّ ابن مسعود .. فذكره موقوفًا، لم يذكر فيه النبي صلى الله عليه وسلم. وأبو عبيدة في سماعه من أبيه خلاف، والراجح أنه لم يسمع منه.وكذلك رواه عنده (8863) عبد الرحمن بن عبد الله المسعودي عن المنهال، عن أبي عبيدة، به موقوفًا. والمسعودي كان قد اختلط.وأخرجه أبو عبيد في "غريب الحديث" 4/ 50 من طريق الحكم بن عُتيبة، عن إبراهيم النخعي، عن ابن مسعود موقوفًا. ورجاله ثقات لكنه منقطع بين إبراهيم وابن مسعود، والواسطة بينهما أبو عبيدة كما وقع في رواية الأعمش عن إبراهيم عند الخلال في "السنة" (1481)، وابن بطة في "الإبانة "2/ 742 - 743.وأخرجه معمر في "جامعه" (20343) -ومن طريقه الطبراني (8861) - عن عبد الكريم الجزري، عن زياد بن أبي مريم -أو عن أبي عبيدة؛ شكَّ معمر- به موقوفًا. المروزي، وعبد الله: هو ابن المبارك.وأخرجه البيهقي 9/ 350 عن أبي عبد الله الحاكم عن الحسن بن حليم، عن أبي الموجه، بهذا الإسناد. وسيأتي برقم (8496).وأخرجه هناد في "الزهد" (447)، وأخرجه الطحاوي في "شرح معاني الآثار" 4/ 325 من طريق أبي الوليد هشام بن عبد الملك، والبيهقي 9/ 350 من طريق عبد الرحمن بن مهدي، ثلاثتهم (هناد وأبو الوليد وابن مهدي) عن عبد الله بن المبارك، به. وانقلب متنه في رواية البيهقي هذه، وصوَّب رواية عبدان السابقة.وانظر ما بعده.
7696 - أخبرنا أبو العباس السَّيّاري، حدثنا أبو المُوجِّه، أخبرنا عَبْدان، أخبرنا عبد الله، أخبرني طلحة بن أبي سعيد، عن بُكَير بن عبد الله بن الأشَجّ، عن القاسم ابن محمد، عن عائشة قالت: ليست التميمةُ ما تُعلّق به بعد البَلَاء، إنما التميمةُ ما تُعلِّقَ به قبل البلاء [1]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: বিপদ আসার পর যা ঝোলানো হয়, তা তামিমা (তাবিজ) নয়। বরং তামিমা হলো, যা বিপদ আসার আগে ঝোলানো হয়।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح. أبو الموجه: هو محمد بن عمرو الفزاري، وعبدان لقبٌ لعبد الله بن عثمان المروزي، وعبد الله: هو ابن المبارك.وأخرجه البيهقي 9/ 350 عن أبي عبد الله الحاكم عن الحسن بن حليم، عن أبي الموجه، بهذا الإسناد. وسيأتي برقم (8496).وأخرجه هناد في "الزهد" (447)، وأخرجه الطحاوي في "شرح معاني الآثار" 4/ 325 من طريق أبي الوليد هشام بن عبد الملك، والبيهقي 9/ 350 من طريق عبد الرحمن بن مهدي، ثلاثتهم (هناد وأبو الوليد وابن مهدي) عن عبد الله بن المبارك، به. وانقلب متنه في رواية البيهقي هذه، وصوَّب رواية عبدان السابقة.وانظر ما بعده.
7697 - وحدثَناه أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بحر بن نصر، حدثنا عبد الله ابن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث، عن بُكَير بن عبد الله، عن القاسم بن محمد، عن عائشة أنها قالت: ليست بتَميمةٍ ما عُلِّقَ بعد أن يقعَ البَلاءُ [1].صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.ولعلَّ متوهِّمًا يتوهَّم أنهما من الموقوفات على عائشة رضي الله عنها، وليس كذلك، فإنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قد ذكر التمائم في أخبارٍ كثيرة، فإذا فسَّرَت عائشةُ رضي الله عنها التميمةَ، فإنه حديثٌ مُسنَد.
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, বিপদ আপতিত হওয়ার পর যা ঝুলানো হয়, তা তামীমাহ (কবচ) নয়।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح.وأخرجه البيهقي 9/ 350 من طريقين عن أبي العباس محمد بن يعقوب الأصم، بهذا الإسناد.وهو في "جامع ابن وهب" (675 - أبو الخير)، ومن طريقه أخرجه الطحاوي في "شرح المعاني" 4/ 325. وقرن ابن وهب بعمرو بن الحارث عبدَ الله بن لَهِيعة. زاد بينهما "من" ثم رُمِّجت.
7698 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا بحر بن نصر، حدثنا عبد الله ابن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث، أنَّ بكيرًا حدثه، أَنَّ أُمَّه حدَّثته: أَنَّها أرسلَتْ إلى عائشة بأخيه مَخرَمة، وكانت تُداوي من قَرْحةٍ تكون بالصِّبيان، فلما داوته عائشةُ وفَرَغَت منه، رأَتْ في رِجلَيه خَلْخالَي [1] حديد، فقالت عائشةُ: أظننتُم أنَّ هذين الخَلْخالَينِ يَدفَعانِ عنه شيئًا كتبه الله عليه؟ لو رأيتُهما ما تَداوَى عندي، وما مُسَّ عندي لَعَمْرِي لَخلخالانِ [2] من فِضَّة أطهرُ من هذين [3].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (বুকাাইরের মা) তাঁর ভাই মাখরামাকে তাঁর (আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর) কাছে পাঠালেন। আর আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) শিশুদের ফোঁড়া বা ঘা হলে তার চিকিৎসা করতেন। যখন আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তার চিকিৎসা শেষ করলেন, তখন তিনি তার পায়ে লোহার দু’টি নূপুর দেখতে পেলেন। তখন আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: তোমরা কি মনে করো যে এই দু’টি নূপুর আল্লাহ তার জন্য যা লিখে রেখেছেন, তা থেকে কিছু ঠেকাতে পারবে? আমি যদি এগুলো আগে দেখতাম, তবে আমার কাছে এর চিকিৎসা করা হতো না এবং একে স্পর্শ করাও হতো না। আমার জীবনের কসম, রূপার নূপুরও এই দুটির (লোহার নূপুর) চেয়ে অধিক পবিত্র।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] المثبت من "جامع ابن وهب"، وفي (ز) و (ص): خلخالين حديد، ومثله في (م) لكن زاد بينهما "من" ثم رُمِّجت.
[2] المثبت من "إتحاف المهرة" (23242)، وفي (ص) و (م): للخلخالين، وفي (ز) و (ب): لخلخالين. والصَّفَر، بالتحريك: هو اجتماع الماء في البطن كما يعرض للمستسقي، وهو أيضًا دودٌ يقع في الكبد وشراسيف الأضلاع. انظر "النهاية" لابن الأثير.
7698 [3] - إسناده فيه لين، أم بكير لم نقف لها على ترجمة. وهو في جامع ابن وهب" (668 - أبو الخير). والصَّفَر، بالتحريك: هو اجتماع الماء في البطن كما يعرض للمستسقي، وهو أيضًا دودٌ يقع في الكبد وشراسيف الأضلاع. انظر "النهاية" لابن الأثير.