আল-মুস্তাদরাক আলাস-সহীহাইন লিল হাকিম
7979 - حدثنا علي بن حَمْشاذ العَدْل، حدثنا إسماعيل بن إسحاق وعلي بن عبد العزيز قالا: حدثنا مسلم بن إبراهيم، حدثنا حمَّاد بن سَلَمة، عن أبي الزُّبير، عن جابر قال: نَهَى رسولُ الله صلى الله عليه وسلم أن يُتعاطَى السيفُ مسلولًا [1]. هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يُخرجاه.
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খোলা (কোষমুক্ত) তরবারি হাতে হাতে আদান-প্রদান করতে নিষেধ করেছেন।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح.وأخرجه أحمد 22 (14201) و 23/ (14885)، وأبو داود (2588)، والترمذي (2163)، وابن حبان (5946) من طرق عن حماد بن سلمة، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حديث حسن غريب من حديث حماد بن سلمة. وأخرجه أحمد 23/ (14981)، وابن حبان (5943) من طريق ابن جريج، عن أبي الزبير، قال: سمعت جابرًا يقول: إنَّ النبي صلى الله عليه وسلم مرَّ بقوم يتعاطَون سيفًا بينهم مسلولًا، فقال: "ألم أزجُرْكم عن هذا؟ ليُغمِدْه، ثم يُناوِلْه أخاه".وأخرجه أحمد (14980) من طريق سليمان بن موسى عن جابر بنحو لفظ سابقه. وإسناده منقطع، فسليمان بن موسى - وهو الأشدق لم يسمع من جابر.وأخرجه أحمد (14742) من طريق ابن لهيعة، عن أبي الزبير عن جابر، عن بنَّة - وقيل: نبيه - الجهني مرفوعًا. فجعله من مسند بنّة، فإن كان ابن لهيعة حفظه - وفي حفظه سوء - فيكون من رواية صحابي عن صحابي، وتكون الرواية الأولى من مرسل الصحابي، وانظر تتمة تخريجه من هذا الطريق في "المسند".قوله "مسلولًا" أي: منزوعًا من غِمده.
7980 - حدَّثَناه أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا الربيع بن سليمان، حدثنا الخَصِيب بن ناصح، حدثنا المُبارك بن فَضَالة، عن الحسن، عن أبي بَكْرة قال: مرَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم على قوم يتعاطون سيفًا مسلولًا، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "لَعَنَ اللهُ من فعلَ هذا، أوَليسَ قد نَهيتُ عن هذا؟ إذا سلَّ أحدكم سيفًا ينظرُ إليه فأراد أن يناولَه أخاه فليُغمِدْه، ثم يُناوِلْه إياه" [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.
আবু বকরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একদল লোকের পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন, যারা একটি কোষমুক্ত তলোয়ার হাতে হাতে নিচ্ছিল। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, “যে এটা করে, আল্লাহ তাকে লা’নত করুন। আমি কি তোমাদেরকে এটা থেকে নিষেধ করিনি? যখন তোমাদের কেউ তলোয়ার কোষমুক্ত করে দেখে, অতঃপর সে যদি তার ভাইকে তা দিতে চায়, তবে সে যেন তা কোষবদ্ধ করে, তারপর তাকে তা দেয়।“
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح لغيره دون جملة اللعن، وهذا إسناد رجاله لا بأس بهم، لكن المباركَ بن فضالة في حفظه لِين، وقد خالفه جمعٌ من الثقات فرووه عن الحسن مرسلًا، وهو الأصحُّ. وقد صرَّح كلٌّ من فضالة والحسن - وهو البصري - بالتحديث عند أحمد، فزالت شبهة التدليس.وأخرجه ابن أبي شيبة 8/ 582 و 583 من طريق عاصم الأحول ومحمد بن المنكدر وعلي بن زيد بن جُدعان، وأحمد (23 / (14885) من طريق حميد الطويل، أربعتهم عن الحسن، مرسلًا. وليس عندهم ذكر اللعن إلَّا عند ابن جُدعان، وهو ضعيف. وكذلك في حديث جابر السابق الصحيح ليس فيه ذكرُ اللعن.ولعلّ ذكر اللعن أنسب في مثل ما رواه البزار في "مسنده" (3641) من طريق سويد بن إبراهيم، عن قتادة، عن الحسن، عن أبي بكرة، أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "إذا شَهَرَ المسلمُ على أخيه سلاحًا فلا تزال ملائكة الله تلعنه حتى يَشِيمه عنه"، وهذا وإن كان فيه سويد بن إبراهيم - وهو ضعيف - لكن له شاهد صحيح من حديث أبي هريرة عند مسلم (2616).
7981 - أخبرنا أبو عبد الله محمد بن علي بن أحمد بن عَلَم الصَّفَّار [1] ببغداد، حدثنا محمد بن إسحاق الصَّغَاني [2]، حدثنا وهب بن جَرير، حدثنا أبي قال: سمعتُ منصور بن زاذان يُحدِّث عن ميمون بن أبي شَبيب، عن قيس بن سعد بن عُبادة: أنَّ أباه دَفَعَه إلى النبيِّ صلى الله عليه وسلم يَخدُمُه، قال: فأتى عليَّ النبيُّ صلى الله عليه وسلم وقد صلَّيتُ ركعتينِ، فضربني برِجْله، فقال: "ألا أدلُّكَ على بابٍ من أبواب الجنَّة؟ " قلت: بلى يا رسولَ الله، قال: "لا حول ولا قوةَ إلَّا بالله" [3].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه. وكان القصدُ في ذكره في هذا الموضع أنَّ الوالدَ مباحٌ له أن يُخدِمَ ولدَه، ثم للموهوب له الخدمةُ أن يَستخدِمَ، ثم يُعرف من فضل قيس بن سعد رضي الله عنه أنَّه خدم النبي صلى الله عليه وسلم حتى صار منه بمنزلة صاحب الشُّرَط، ثم لم يُفارِقُ أميرَ المؤمنين علي بن أبي طالب صلى الله عليه وسلم في السَّرّاء والضَّرّاء إلى أن استُشِهدَ بين يديه يوم صِفِّين.
কায়েস ইবনে সা'দ ইবনে উবাদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর পিতা তাঁকে নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খেদমতের জন্য তাঁর হাতে সোপর্দ করলেন। তিনি বলেন: অতঃপর নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার কাছে এলেন, যখন আমি দু'রাকাত সালাত আদায় করেছি। তিনি তাঁর পা দিয়ে আমাকে আঘাত করে বললেন: "আমি কি তোমাকে জান্নাতের দরজাগুলোর মধ্য থেকে একটি দরজার সন্ধান দেব না?" আমি বললাম: হ্যাঁ, ইয়া রাসূলাল্লাহ! তিনি বললেন: "লা হাওলা ওয়ালা কুওয়াতা ইল্লা বিল্লাহ" (আল্লাহ্র সাহায্য ব্যতীত কোনো ক্ষমতা নেই, কোনো শক্তিও নেই)।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] كذا وقع اسمه في النسخ الخطية، ولم نقف على راو بهذا الاسم، ويظهر لنا أنه محمد بن عبد الله بن عَمرَويه، فهو المعروف بابن عَلَم الصَّفَّار، وهو ممَّن يروي عن محمد بن إسحاق الصّغاني، وقد روى عنه المصنف في عدة مواضع.
[2] تحرّف في النسخ الخطية إلى الصنعاني.
7981 [3] - إسناده ضعيف ميمون بن أبي شبيب لم يذكروا له سماعًا من قيس بن سعد، وهو كثير الإرسال، وقال عمرو بن علي الفلاس: ليس يقول في شيء من حديثه: سمعت، ولم أُخبَر أَنَّ أحدًا يزعم أنه سمع من الصحابة. وقد ضعَّفه ابن معين، وقال أبو حاتم: صالح الحديث، وذكره ابن حبان في "الثقات".وأخرجه أحمد 24 (15480)، والترمذي (3581)، والنسائي (10115) من طريق وهب بن جرير، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حديث صحيح غريب من هذا الوجه.وفي الباب عن معاذ بن جبل عند أحمد 35/ (21996)، والنسائي (10117)، وسنده ضعيف أيضًا، وقد اختلف في لفظه، فرواه البعض كلفظ حديث عبادة، ورواه البعض الآخر بلفظ: "كنز من كنوز الجنة". وبهذا اللفظ الأخير، جاء في الأحاديث الصحيحة المعتبرة، كحديث أبي موسى الأشعري عند البخاري (4205) ومسلم (2704).وعن أبي ذرٍّ عند أحمد 35 / (21298)، وابن ماجه (3825)، والنسائي (9758)، وابن حبان (820).وعن أبي هريرة عند أحمد 14 / (7966)، والنسائي (10118).
7982 - أخبرنا أبو جعفر محمد بن علي الشَّيباني بالكوفة، حدثنا أحمد بن حازم الغِفَاري، حدثنا أبو نُعيم وأبو غسَّان قالا: حدثنا شَرِيك، عن عبد الله بن عيسى، عن عبد الله بن جَبْر، عن أنس بن مالك قال: كان غلامٌ يهوديٌّ يَحْدُمُ النبيَّ صلى الله عليه وسلم، فمرِضَ الغلام، فأتاه النبي يعوده فقال: يا غلامُ، أسلِمْ، قُلْ: لا إله إلَّا اللهُ، فجعل الغلامُ ينظُرُ إلى أبيه، فقال له أبوه: قُلْ ما يقولُ لك محمدٌ صلى الله عليه وسلم فقال: لا إله إلَّا اللهُ، وأسلمَ فمات، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم لأصحابه: "صَلُّوا عليه". وصلَّى عليه النبيُّ صلى الله عليه وسلم [1].
আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, একজন ইয়াহুদী বালক রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খেদমত করত। এরপর বালকটি অসুস্থ হয়ে পড়লে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে দেখতে আসলেন। তিনি বললেন: হে বালক, ইসলাম গ্রহণ করো, তুমি বলো: ‘লা ইলাহা ইল্লাল্লাহ’ (আল্লাহ ছাড়া কোনো ইলাহ নেই)। তখন বালকটি তার পিতার দিকে তাকাতে লাগল। তার পিতা তাকে বলল: মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তোমাকে যা বলছেন, তা বলো। তখন সে ‘লা ইলাহা ইল্লাল্লাহ’ বলল এবং ইসলাম গ্রহণ করল, অতঃপর সে মারা গেল। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর সাহাবীগণকে বললেন: "তোমরা এর জানাযা পড়।" এবং নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার জানাযার সালাত আদায় করলেন।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح دون قصة الصلاة على الغلام، كما سلف بيانه برقم (1358). وأخرج البزار في "مسنده" (3685) من طريق أبي المنهال البكراوي، عن عبد العزيز بن أبي بكرة، عن أبيه قال: لما مات كِسرى قال: "مَن وَلَّوا بعدَه؟ " قال: ابنته بوران، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "لن يُفلح قوم أسندوا أمرهم إلى امرأة". قلنا أبو المنهال البكراوي: هو عبد الرحمن بن معاوية سماه الحاكم فيما سلف برقم (7933)، ولم نقف له على ترجمة وهذه الرواية من روايته عن أهل بيته، وهو مما يُحتمل.
7983 - أخبرنا عبد الله بن الحسين القاضي بمَرْو، حدثنا الحارث بن أبي أسامة، حدثنا محمد بن عيسى بن الطَّبّاع، حدثنا بكَّار بن عبد العزيز بن أبي بَكْرة، قال: سمعتُ أبي يُحدِّث عن أبي بَكْرة: أنَّ النبيَّ صلى الله عليه وسلم أتاه بَشيرٌ يُبشِّره بظَفَرِ خيلٍ له ورأسُه في حِجْر عائشةَ، فقام فخَرَّ لله تعالى ساجدًا، فلما انصرف أنشأَ يسألُ الرسولَ فحدَّثه، فكان [1] فيما حدَّثه [من] أمر العدوّ وكانت تَلِيهِم امرأةٌ، فقال النبيُّ صلى الله عليه وسلم: "هَلَكَتِ الرجالُ حين أطاعتِ النِّساءَ" [2]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.وشاهده صحيح على شرط الشيخين:
আবু বাকরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট একজন সুসংবাদদাতা এসে তাঁকে তাঁর ঘোড়সওয়ার বাহিনীর বিজয়ের সুসংবাদ দিচ্ছিল। তখন তাঁর মাথা ছিল আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কোলে। তিনি (সংবাদ শুনে) উঠে দাঁড়ালেন এবং আল্লাহ তাআলার উদ্দেশ্যে সিজদায় লুটিয়ে পড়লেন। যখন তিনি (সিজদা থেকে) ফিরলেন, তখন তিনি সংবাদদাতাকে জিজ্ঞাসাবাদ শুরু করলেন এবং সে তাঁকে ঘটনা জানালো। সে যা জানিয়েছিল তার মধ্যে শত্রুদের বিষয়েও ছিল, আর তাদের (শত্রুদের) শাসক ছিলেন একজন নারী। তখন নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "পুরুষরা ধ্বংস হয়েছে, যখন তারা নারীদের আনুগত্য করেছে।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرّف في النسخ الخطية إلى: بكار، وجاء على الصواب في التلخيص للذهبي. وأخرج البزار في "مسنده" (3685) من طريق أبي المنهال البكراوي، عن عبد العزيز بن أبي بكرة، عن أبيه قال: لما مات كِسرى قال: "مَن وَلَّوا بعدَه؟ " قال: ابنته بوران، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "لن يُفلح قوم أسندوا أمرهم إلى امرأة". قلنا أبو المنهال البكراوي: هو عبد الرحمن بن معاوية سماه الحاكم فيما سلف برقم (7933)، ولم نقف له على ترجمة وهذه الرواية من روايته عن أهل بيته، وهو مما يُحتمل.
[2] إسناده ضعيف بكار بن عبد العزيز لين الحديث، وأصل الحديث صحيح بالسياق الآتي في الرواية التالية، وقد تفرَّد بكار بهذا اللفظ، وسلف الحديث مختصرًا بقصة سجود الشكر برقم (1038).وأخرجه أحمد 24/ (20455) عن أحمد بن عبد الملك الحراني، عن بكار بن عبد العزيز، بهذا الإسناد. وأخرج البزار في "مسنده" (3685) من طريق أبي المنهال البكراوي، عن عبد العزيز بن أبي بكرة، عن أبيه قال: لما مات كِسرى قال: "مَن وَلَّوا بعدَه؟ " قال: ابنته بوران، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "لن يُفلح قوم أسندوا أمرهم إلى امرأة". قلنا أبو المنهال البكراوي: هو عبد الرحمن بن معاوية سماه الحاكم فيما سلف برقم (7933)، ولم نقف له على ترجمة وهذه الرواية من روايته عن أهل بيته، وهو مما يُحتمل.
7984 - أخبرنا أبو عبد الله محمد بن يعقوب، حدثنا يحيى بن محمد بن يحيى، حدثنا مُسدَّد، حدثنا خالد بن الحارث، عن حُميد، عن الحسن، عن أبي بَكْرة قال: عَصَمَني الله بشيء سمعتُه من النبيِّ صلى الله عليه وسلم لمّا بَلَغَه أنَّ مَلِكَ ذِي يَزَنَ تُوفِّي، فولَّوا أمرَهم امرأةً، فقال النبيُّ صلى الله عليه وسلم: "لن يُفلِحَ قومٌ تَملِكُهم [1] امرأةٌ [2].هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.
আবু বাকরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আল্লাহ আমাকে এমন একটি বিষয়ের মাধ্যমে রক্ষা করেছেন যা আমি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট থেকে শুনেছিলাম। যখন তাঁর নিকট এই সংবাদ পৌঁছাল যে, যী-ইয়াযানের বাদশাহ ইন্তিকাল করেছেন এবং তারা তাদের নেতৃত্ব একজন নারীর হাতে অর্পণ করেছে, তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “যে জাতি একজন নারীকে তাদের শাসক বানায়, তারা কখনো সফল হতে পারে না।”
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في (ز): تملكتهم.
[2] إسناده صحيح، لكن قوله: ملك ذي يزن وهمٌ، فالذي تُوفِّي هو كسرى ملك فارس كما في الرواية السالفة برقم (4658) من طريق محمد بن خالد المثنى عن بن خالد بن الحارث، وسيأتي كذلك على الصواب برقم (8812) من طريق عوف بن أبي جميلة عن الحسن البصري، ومن هذه الطريق أخرجه البخاري كما يأتي. واستدراك الحاكم له ذهول منه.
7985 - أخبرنا الحسن بن يعقوب العَدْل، حدثنا السَّري بن خُزيمة، حدثنا عمر [1] بن حفص بن غِيَاث، حدثني أبي، حدثنا مَعبَد [2] بن خالد الأنصاري، عن أبيه، عن جابر بن عبد الله قال: دخل جَريرُ بن عبد الله على رسولِ الله صلى الله عليه وسلم وعندَه أصحابُه، فضَنَّ كلُّ رجل بمَجلِسِه، فأخذَ رسولُ الله صلى الله عليه وسلم رداءَه فألقاهُ إليه، فتلقَّاه بنَحْرِه ووجهِه فقبَّله ووَضَعَه على عينه، وقال: أكرمَكَ الله كما أكرمتَني، ثم وَضَعَه على ظَهرِ رسولِ الله صلى الله عليه وسلم، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "مَن كان يُؤْمِنُ بالله واليوم الآخر، فإذا أتاه كريمُ قومٍ [فليُكرِمه] [3] " [4].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه بهذه السِّياقة.
জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, জারীর ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট প্রবেশ করলেন, যখন তাঁর কাছে তাঁর সাহাবীগণও উপস্থিত ছিলেন। (উপস্থিত) প্রত্যেকেই তখন তার বসার স্থানটি আঁকড়ে ধরলেন (অর্থাৎ জারীরকে বসার জন্য জায়গা ছেড়ে দিলেন না)। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর চাদরটি নিলেন এবং জারীরের দিকে ছুঁড়ে দিলেন। জারীর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তা তাঁর গলা ও মুখমণ্ডল দিয়ে গ্রহণ করলেন, তারপর তাতে চুম্বন করলেন এবং নিজের চোখের উপর রাখলেন। তিনি বললেন: আল্লাহ আপনাকে সম্মানিত করুন, যেমন আপনি আমাকে সম্মানিত করেছেন। অতঃপর তিনি তা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর পিঠের উপর রাখলেন। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “যে ব্যক্তি আল্লাহ ও আখেরাতের প্রতি বিশ্বাস রাখে, তার কাছে যখন কোনো গোত্রের সম্মানিত ব্যক্তি আসে, তখন তার উচিত তাকে সম্মান করা।”
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرّف في النسخ الخطية إلى: عمرو.
[2] تحرّف في النسخ الخطية إلى: سعيد، وجاء على الصواب في "التلخيص" للذهبي.
7985 [3] - مكانه في (ز) و (ب) بياض، ومكانه في (م) و"التلخيص": فأكرموه، وسقط منهما لفظ "قوم"، والمثبت من مصادر التخريج. "الصحيحين". أبو المثنى: هو معاذ بن المُثنَّى بن معاذ العنبري، وخالد: هو ابن مهران الحذاء.وأخرجه أبو داود (4982) من طريق خالد بن عبد الله الواسطي، والنسائي (4982) من طريق عبد الله بن المبارك، كلاهما عن خالد الحذاء، عن أبي تَميمة، عن أبي المَليح، عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم.وخالفهما عبد الوهاب الثقفي عند النسائي (10314)، فرواه عن خالد الحذاء عن أبي تميمة عن أبي المليح قال: كان رجل رديف النبي صلى الله عليه وسلم، فذكره مرسلًا.وأخرجه أحمد 34 (20591) من طريق معمر، و (20592) و (20690) من طريق شعبة و 38/ 230921) من طريق سفيان الثوري، ثلاثتهم عن عاصم الأحول، عن أبي تميمة، عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم. قال شعبة: أو قال عاصم: عن أبي تميمة عن رجل عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم. وقال الثوري: أو عن رجل عن رِدف النبي صلى الله عليه وسلم.وخالفهم محمد بن حمران، وهو ليِّن الحديث - كما في الرواية التالية عند المصنف فسلك فيه طريق الجادّة، فجعله عن أبي تميمة عن أبي المليح عن أبيه أسامة، فجعل صحابيَّه والد أبي المليح، وهو كثير الرواية عن أبيه، قال النسائي: هذا عندي خطأ. وصوَّب رواية ابن المبارك التي تقدم تخريجها، وتابعه عليها خالد الواسطي.
7985 [4] - إسناده ضعيف، معبد بن خالد - وهو ابن أنس بن مالك الأنصاري - وأبوه مجهولان، وقد انفرد الحاكم في جعله من حديث جابر، والمعروف أنه من حديث أنس بن مالك جدّ معبد.فقد أخرجه أبو العباس السراج كما في "سير النبلاء" 2/ 532 - 533 من طريق يزيد بن نصر البصري، والخرائطي في "مكارم الأخلاق" (726 - دار الآفاق)، وأبو الشيخ في "الأمثال" (149)، والبيهقي في "شعب الإيمان" (10488)، وقوام السنة في "الترغيب" (192)، وقاضي المارستان في "مشيخته" (652) من طريق نصر بن قديد بن نصر البصري، كلاهما عن حفص بن غياث، عن معبد بن خالد، عن أبيه، عن جده أنس بن مالك به. وهو عند السراج وأبي الشيخ مختصر.وفي الباب عن جمع من الصحابة، ذكرناهم عند حديث ابن عمر في "سننا بن ماجه" (3712)، وكلها ضعيفة. وأصح شيء فيه ما روي عن الشعبي مرسلًا عند أبي داود في "المراسيل" (511)، ورجاله ثقات.ومع ذلك فقد قال الحافظ السخاوي في "المقاصد الحسنة" ص 34 بعد أن ذكر طرقه وأعلها: وبهذه الطرق يقوى الحديث، وإن كانت مفرداتها كما أشرنا إليه ضعيفة. "الصحيحين". أبو المثنى: هو معاذ بن المُثنَّى بن معاذ العنبري، وخالد: هو ابن مهران الحذاء.وأخرجه أبو داود (4982) من طريق خالد بن عبد الله الواسطي، والنسائي (4982) من طريق عبد الله بن المبارك، كلاهما عن خالد الحذاء، عن أبي تَميمة، عن أبي المَليح، عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم.وخالفهما عبد الوهاب الثقفي عند النسائي (10314)، فرواه عن خالد الحذاء عن أبي تميمة عن أبي المليح قال: كان رجل رديف النبي صلى الله عليه وسلم، فذكره مرسلًا.وأخرجه أحمد 34 (20591) من طريق معمر، و (20592) و (20690) من طريق شعبة و 38/ 230921) من طريق سفيان الثوري، ثلاثتهم عن عاصم الأحول، عن أبي تميمة، عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم. قال شعبة: أو قال عاصم: عن أبي تميمة عن رجل عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم. وقال الثوري: أو عن رجل عن رِدف النبي صلى الله عليه وسلم.وخالفهم محمد بن حمران، وهو ليِّن الحديث - كما في الرواية التالية عند المصنف فسلك فيه طريق الجادّة، فجعله عن أبي تميمة عن أبي المليح عن أبيه أسامة، فجعل صحابيَّه والد أبي المليح، وهو كثير الرواية عن أبيه، قال النسائي: هذا عندي خطأ. وصوَّب رواية ابن المبارك التي تقدم تخريجها، وتابعه عليها خالد الواسطي.
7986 - حدثنا علي بن حَمْشاذ العَدْل، حدثنا أبو المثنّى، حدثنا مُسدَّد، حدثنا يزيد بن زُرَيع، حدثنا، خالد، عن أبي تَمِيمة [1]، عن رَدِيفِ رسولِ الله صلى الله عليه وسلم: أنه عَثَرَت به دابَّتُه فقال: تَعِسَ الشيطانُ! فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "لا تقُلْ: تَعِسَ الشيطانُ، فإنك إذا قلتَ: تَعِسَ الشيطانُ، تعاظَمَ، وقال: بقوّتي صَرَعتُه، وإذا قيل: باسم الله، خَنَسَ حتى يصيرَ مثلَ الذُّباب [2]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.ورديفُ رسول الله صلى الله عليه وسلم الذي لم يُسمِّه يزيدُ بن زُرَيع عن خالد، سمَّاه غيرُه أسامةَ بن مالك والدَ أبي المَلِيح بن أسامة.
উসামা ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, একবার তাঁর বাহনটি হোঁচট খেল। তখন তিনি বললেন: শয়তান ধ্বংস হোক! তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: তুমি 'শয়তান ধ্বংস হোক' একথা বলো না। কারণ যখন তুমি 'শয়তান ধ্বংস হোক' বলো, তখন সে নিজেকে অনেক বড় মনে করে এবং বলে: আমি আমার শক্তি দিয়েই একে ভূপাতিত করেছি। কিন্তু যখন 'বিসমিল্লাহ' বলা হয়, তখন সে ছোট হতে হতে মাছির মতো হয়ে যায়।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرّف في النسخ الخطية إلى: خالد بن أبي تميمة. "الصحيحين". أبو المثنى: هو معاذ بن المُثنَّى بن معاذ العنبري، وخالد: هو ابن مهران الحذاء.وأخرجه أبو داود (4982) من طريق خالد بن عبد الله الواسطي، والنسائي (4982) من طريق عبد الله بن المبارك، كلاهما عن خالد الحذاء، عن أبي تَميمة، عن أبي المَليح، عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم.وخالفهما عبد الوهاب الثقفي عند النسائي (10314)، فرواه عن خالد الحذاء عن أبي تميمة عن أبي المليح قال: كان رجل رديف النبي صلى الله عليه وسلم، فذكره مرسلًا.وأخرجه أحمد 34 (20591) من طريق معمر، و (20592) و (20690) من طريق شعبة و 38/ 230921) من طريق سفيان الثوري، ثلاثتهم عن عاصم الأحول، عن أبي تميمة، عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم. قال شعبة: أو قال عاصم: عن أبي تميمة عن رجل عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم. وقال الثوري: أو عن رجل عن رِدف النبي صلى الله عليه وسلم.وخالفهم محمد بن حمران، وهو ليِّن الحديث - كما في الرواية التالية عند المصنف فسلك فيه طريق الجادّة، فجعله عن أبي تميمة عن أبي المليح عن أبيه أسامة، فجعل صحابيَّه والد أبي المليح، وهو كثير الرواية عن أبيه، قال النسائي: هذا عندي خطأ. وصوَّب رواية ابن المبارك التي تقدم تخريجها، وتابعه عليها خالد الواسطي.
[2] حديث صحيح، وهذا إسناد رجاله ثقات، لكن اختلف فيه على أبي تميمة - وهو طريف بن مجالد الهجيمي - فمرةً يرويه عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم مباشرة، ومرة يرويه عن رجل عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم، وسُمِّي في بعض الروايات أبا المليح، وهو ابن أسامة الهذلي، ثقة من رجال "الصحيحين". أبو المثنى: هو معاذ بن المُثنَّى بن معاذ العنبري، وخالد: هو ابن مهران الحذاء.وأخرجه أبو داود (4982) من طريق خالد بن عبد الله الواسطي، والنسائي (4982) من طريق عبد الله بن المبارك، كلاهما عن خالد الحذاء، عن أبي تَميمة، عن أبي المَليح، عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم.وخالفهما عبد الوهاب الثقفي عند النسائي (10314)، فرواه عن خالد الحذاء عن أبي تميمة عن أبي المليح قال: كان رجل رديف النبي صلى الله عليه وسلم، فذكره مرسلًا.وأخرجه أحمد 34 (20591) من طريق معمر، و (20592) و (20690) من طريق شعبة و 38/ 230921) من طريق سفيان الثوري، ثلاثتهم عن عاصم الأحول، عن أبي تميمة، عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم. قال شعبة: أو قال عاصم: عن أبي تميمة عن رجل عن رديف النبي صلى الله عليه وسلم. وقال الثوري: أو عن رجل عن رِدف النبي صلى الله عليه وسلم.وخالفهم محمد بن حمران، وهو ليِّن الحديث - كما في الرواية التالية عند المصنف فسلك فيه طريق الجادّة، فجعله عن أبي تميمة عن أبي المليح عن أبيه أسامة، فجعل صحابيَّه والد أبي المليح، وهو كثير الرواية عن أبيه، قال النسائي: هذا عندي خطأ. وصوَّب رواية ابن المبارك التي تقدم تخريجها، وتابعه عليها خالد الواسطي.
7987 - حدَّثَناه علي بن عيسى، حدثنا أحمد بن نَجْدة القُرشي، حدثنا سعيد بن منصور، حدثنا محمد بن حُمْران، حدثنا خالد الحذَّاء، عن أبي تَمِيمة، عن أبي المَلِيح بن أسامة، عن أبيه قال: كنتُ رَدِيفَ رسولِ الله صلى الله عليه وسلم فَعَثَرَ بعيرُنا، فقلتُ: تَعِسَ الشَّيطانُ، فقال لي النبيُّ صلى الله عليه وسلم: "لا تقُلْ: تَعِسَ الشيطانُ، فإنه يَستعظِمُ حتى يكونَ مثلَ البيتِ ويَقْوَى، ولكن قُلْ: باسم الله، فإذا قلتَ: باسم الله، تصاغَرَ حتى يصيرَ مثلَ الذُّباب" [1].
উসামা ইবনু উমায়র (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের পিছনে আরোহী ছিলাম। তখন আমাদের উট হোঁচট খেল। আমি বললাম: শয়তান ধ্বংস হোক! তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে বললেন: "তুমি বলো না, 'শয়তান ধ্বংস হোক', কারণ এতে সে নিজেকে খুব বড় মনে করে, এমনকি সে ঘরের মতো হয়ে যায় এবং শক্তিশালী হয়। বরং তুমি বলো: 'বিসমিল্লাহ' (আল্লাহর নামে)। যখন তুমি 'বিসমিল্লাহ' বলো, তখন সে ছোট হয়ে যায়, এমনকি মাছির মতো হয়ে যায়।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث صحيح، وهذا إسناد ضعيف، محمد بن حمران ليِّن الحديث، وقد سلك فيه طريق الجادة، فجعل صحابيه أسامة. وأخرجه النسائي (10313) من طريق أحمد بن عبدة، عن محمد بن حمران، بهذا الإسناد. وقال: هذا عندي خطأ.
7988 - أخبرنا الأستاذ أبو الوليد وأبو عمرو الحِيري وأبو بكر بن قُريش، قالوا: حدثنا الحسن بن سفيان حدثنا عمر [1] بن حفص الشَّيباني، حدثنا عبد الله بن وهب، أخبرني عبد الجبار بن عمر الأَيْلي، عن محمد بن المُنكدِر، عن جابر قال: كان رسولُ الله صلى الله عليه وسلم، إِذا مَشَى لم يَلتفِت [2].قال الحاكم: لا أعلم أحدًا رواه عن محمد بن المنكدِر غير عبد الجبار.
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন হাঁটতেন, তখন তিনি পেছনে ফিরে তাকাতেন না।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرف في النسخ الخطية إلى: عمرو.
[2] إسناده ضعيف جدًّا من أجل عبد الجبار بن عمر الأيلي، قال أبو حاتم: حديث منكر، وضعّف عبدَ الجبار، وجعله ابن حبان من منكراته في كتابه "المجروحين"، وقال: كان رديء الحفظ ممن يأتي بالمعضلات عن الثقات، لا يجوز الاحتجاج به إلَّا فيما وافق الثقات، وبه أعلَّه الذهبي في "التلخيص" فقال: عبد الجبار تالف.وأخرجه ابن سعد في الطبقات 1/ 326، والحكيم الترمذي في "نوادر الأصول" (89)، وابن أبي حاتم في "العلل" (2235)، وابن حبان في "المجروحين" 2/ 159، والطبراني في "الأوسط" (3216) و (9014) من طرق عن عبد الجبار بن عمر بهذا الإسناد. وزادوا فيه وكان ربما تعلَّق رداؤه في الشجرة أو الشيء فلا يلتفتُ حتى يرفعوه عليه، وكانوا يضحكون ويمزحون، وكانوا قد أمِنوا التفاتَه.وفي الباب عن أبي هريرة عند البخاري (155)، وفيه: اتبعت النبي صلى الله عليه وسلم وخرج لحاجته فكان لا يلتفت فدنوت منه. وعن ابن عباس عند البزار (2391 - كشف الأستار) بلفظ: أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا مشى لم يلتفت، يعرف في مشيته أنه غير كَسِل ولا وَهِن وسنده ضعيف، فقد خالف أحد رواته وهو محمدُ بن راشد من هو أحفظ منه وأكثر عددًا، خالفهم في السند والمتن، والصواب فيه: عن رجل عن ابن عباس، كما أنَّ الصواب في متنه: وإذا مشى مشى مجتمعًا.هذا وليس عدم التفاته صلى الله عليه وسلم على إطلاقه، بل كان يلتفت صلى الله عليه وسلم أحيانًا، لكن كان إذا التفت التفت جميعًا، كما في حديث علي بن أبي طالب عند أحمد 2/ (684) وغيره، ورواه جمع من الصحابة لا يخلو إسناد منها من ضعف.
7989 - حدثنا أحمد بن سهل البخاري، حدثنا صالح بن محمد الحافظ، حدثنا محمود بن غَيْلان، حدثنا أبو داود، حدثنا الحَكَم بن عطيَّة، عن ثابت البُناني، عن أنس بن مالك، أنَّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: "تُسَمُّون أولادكم محمدًا ثم تَلْعَنُونهم؟! [1].تفرَّد الحكمُ بن عطيّة عن ثابت.
আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমরা তোমাদের সন্তানদের নাম মুহাম্মাদ রাখো, তারপর কি তোমরা তাদের অভিশাপ দাও?!
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف من أجل الحكم بن عطية، وأنكره أحمد كما في "المنتخب من العلل" لابن قدامة ص 179، وقد ضعَّف الحكمَ هذا المصنف نفسه فيما سلف برقم (423)، فقال: تفرَّد به هذا الشيخ الحكم بن عطية، وليس من شرط هذا الكتاب.وأخرجه البزار في "مسنده" (6895)، وأبو يعلى (3386)، والطبري في مسند عبد الرحمن بن عوف من "تهذيب الآثار" (743)، وأبو عروبة الحرَّاني في "جزء من أحاديثه" برواية أبي أحمد الحاكم (47)، وابن عدي في الكامل 2/ 205، وأبو طاهر المخلص في "المخلصيات" (48)، وقوام السنة في الترغيب والترهيب (598)، وقاضي المارستان في "مشيخته" (212) من طريق أبي داود الطيالسي بهذا الإسناد. وقال البزار: وهذا الحديث لا نعلم رواه عن ثابت إلَّا الحكم بن عطية، وهو رجل من أهل البصرة لا بأس به، حدَّث عن ثابت بأحاديث، وتفرَّد بهذين الحديثين.وأخرجه عبد بن حميد (1264)، والطبري (742)، والعقيلي في "الضعفاء" (344)، وأبو نعيم في "تاريخ أصبهان" 2/ 286 من طرق عن الحكم بن عطية، به. ورواه ابن جريج، واختلف عليه فيه:فرواه عنه نصر بن طريف الباهلي عند أبي القاسم البغوي في "الجعديات" (3297)، وابن عدي 7/ 34، وأبي الشيخ في "أخلاق" النبي (755)، وعلي بن عاصم الواسطي عند أبي الشيخ (759)، كلاهما عن سعيد المَقْبري، عن أبي هريرة. ونصر بن طريف متروك، وعلي بن عاصم حسن في المتابعات والشواهد، وطريقه أمثل الطرق عن ابن جريج.ورواه إسماعيل بن عمرو عن مندل، عن ابن جريج عن نافع، عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم.أخرجه الطبراني في "الأوسط" (7452). وقال: لم يرو هذا الحديث عن ابن جريج إلا مندلٌ، تفرد به إسماعيل بن عمرو. قلنا: إسماعيل بن عمرو: وهو البجلي، ومندل: وهو ابن علي، ضعيفان، والحديث لا يعرف من حديث ابن عمر.وأخرجه ابن الأعرابي في "معجمه" (442) و (772)، وأبو الشيخ (760)، وتمام في "فوائده" (886)، وأبو نعيم في "الحلية" 3/ 346، وفي "تاريخ أصبهان" 2/ 148 من طريق عكرمة عن أبي هريرة. وفي سنده محمد بن يونس الكديمي متهم، فلا يفرح به.قال الحافظ في "فتح الباري" 18/ 665 - 666: ومن آداب العاطس أن يَخفِض بالعطسة صوتَه ويرفعَه بالحمد، وأن يغطِّي وجهه لئلَّا يبدوَ من فيه أو أَنفه ما يؤذي جليسَه، ولا يَلْوِي عُنقَه يمينًا ولا شمالًا لئلَّا يتضرَّر بذلك.قال ابن العربي: الحكمة في خَفْض الصَّوت بالعُطاس أنَّ في رفعه إزعاجًا للأعضاء، وفي تغطية الوجه أنَّه لو بَدَرَ منه شيء آذى جليسه، ولو لَوَى عنقه صيانةً لجليسه لم يأمَنْ من الالتواء، وقد شاهَدْنا من وَقَعَ له ذلك.
7990 - أخبرنا أبو عبد الله محمد بن يعقوب، حدثنا يحيى بن محمد بن يحيى، حدثنا مُسدَّد، حدثنا يحيى بن سعيد، عن ابن عَجْلان عن سُمَيّ، عن أبي صالح، عن أبي هريرة: أن النبي صلى الله عليه وسلم كان إذا عَطَسَ غطَّى وجهَه بيده أو بثوبه، وغَضَّ بها صوتَه [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) যখন হাঁচি দিতেন, তখন তিনি তাঁর মুখমণ্ডল হাত বা কাপড় দ্বারা ঢেকে নিতেন এবং এর মাধ্যমে তাঁর আওয়াজ নিচু করতেন।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده جيد كما قال الحافظ ابن حجر في "الفتح" 18/ 666 من أجل محمد بن عجلان.سُمي: هو أبو عبد الله المدني مولى أبي بكر بن عبد الرحمن، وأبو صالح: هو ذكوان السمان.وأخرجه أبو داود (5029) عن مسدد بن مسرهد، بهذا الإسناد.وأخرجه أحمد 15 (9662)، والترمذي (2745) من طريق يحيى القطان، به. وقال الترمذي: حديث حسن صحيح.وخالف ابنَ عجلان سفيانُ الثوري فيما ذكر البخاري في الكنى من "التاريخ الكبير" 9/ 9، فقال: قال ابن المبارك عن سفيان، عن سمي، عن أبي بكر بن عبد الرحمن: كان النبي صلى الله عليه وسلم … فذكره مرسلًا، قال وهو الأشبه. ورواه ابن جريج، واختلف عليه فيه:فرواه عنه نصر بن طريف الباهلي عند أبي القاسم البغوي في "الجعديات" (3297)، وابن عدي 7/ 34، وأبي الشيخ في "أخلاق" النبي (755)، وعلي بن عاصم الواسطي عند أبي الشيخ (759)، كلاهما عن سعيد المَقْبري، عن أبي هريرة. ونصر بن طريف متروك، وعلي بن عاصم حسن في المتابعات والشواهد، وطريقه أمثل الطرق عن ابن جريج.ورواه إسماعيل بن عمرو عن مندل، عن ابن جريج عن نافع، عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم.أخرجه الطبراني في "الأوسط" (7452). وقال: لم يرو هذا الحديث عن ابن جريج إلا مندلٌ، تفرد به إسماعيل بن عمرو. قلنا: إسماعيل بن عمرو: وهو البجلي، ومندل: وهو ابن علي، ضعيفان، والحديث لا يعرف من حديث ابن عمر.وأخرجه ابن الأعرابي في "معجمه" (442) و (772)، وأبو الشيخ (760)، وتمام في "فوائده" (886)، وأبو نعيم في "الحلية" 3/ 346، وفي "تاريخ أصبهان" 2/ 148 من طريق عكرمة عن أبي هريرة. وفي سنده محمد بن يونس الكديمي متهم، فلا يفرح به.قال الحافظ في "فتح الباري" 18/ 665 - 666: ومن آداب العاطس أن يَخفِض بالعطسة صوتَه ويرفعَه بالحمد، وأن يغطِّي وجهه لئلَّا يبدوَ من فيه أو أَنفه ما يؤذي جليسَه، ولا يَلْوِي عُنقَه يمينًا ولا شمالًا لئلَّا يتضرَّر بذلك.قال ابن العربي: الحكمة في خَفْض الصَّوت بالعُطاس أنَّ في رفعه إزعاجًا للأعضاء، وفي تغطية الوجه أنَّه لو بَدَرَ منه شيء آذى جليسه، ولو لَوَى عنقه صيانةً لجليسه لم يأمَنْ من الالتواء، وقد شاهَدْنا من وَقَعَ له ذلك.
7991 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب، حدثنا محمد بن سِنان القزَّاز، حدثنا يزيد بن هارون، أخبرنا مِسعَر، عن ثابت بن عُبيد، عن عبد الرحمن بن أبي ليلى، عن خَوَّات بن جُبير قال: نومٌ أولَ النهار، خُرْق، وأوسطَه خُلْق، وآخرَه حُمْق [1].
খাওয়াত ইবনু জুবাইর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: দিনের প্রথম অংশে ঘুম হলো মূর্খতা, আর মধ্যভাগে ঘুম হলো স্বভাব (প্রয়োজনীয়), এবং দিনের শেষভাগে ঘুম হলো নির্বুদ্ধিতা।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] خبر صحيح، وهذا إسناد حسن في المتابعات والشواهد من أجل محمد بن سنان القزاز وقد توبع مسعر: هو ابن كدام.وأخرجه ابن أبي شيبة 9/ 114، والبخاري في "الأدب المفرد" (1242)، والطحاوي في "مشكل الآثار" 3/ 102، والدِّينَوري في "المجالسة" (2046)، وأبو نعيم في "الطب النبوي" (155)، والبيهقي في "شعب الإيمان" (4407) و (4408) من طرق عن مسعر بن كدام، بهذا الإسناد. وليس في طريق البيهقي الأولى ذكر ابن أبي ليلى.الخُرق بالضم: الجهل والحُمق، والخُلق، بضم اللام وسكونها: الدين والطَّبع والسَّجيّة، والحمق، بسكون الميم وضمها: قلّة العقل، وحقيقة الحمق وضع الشيء في غير موضعه مع العلم بقبحه.ويُوضِّحه ما رواه الطحاوي 3/ 101، والبيهقي في "الشعب" (4409)، عن عبد الله بن عمرو رضي الله عنه قال: النوم ثلاثة: فنومٌ خُرْق، ونومٌ خُلْق، ونومٌ حُمْق، فأما نومةً خُرق: فنومةُ الضُّحى يقضي الناس حوائجهم وهو نائم، وأما نومةً خُلق: فنومةُ القائلة نصف النهار، وأما نومةُ حُمق: فنومةٌ حين تَحضُر الصلوات.
7992 - أخبرني محمد بن موسى الفقيه، حدثنا إبراهيم بن أبي طالب، حدثنا محمد بن المثنَّى ومحمد بن بشار قالا حدثنا عبد الرحمن، حدثنا سفيان، عن حُميد الأعرج، عن محمد بن إبراهيم، عن أبي سَلَمة، عن عبد الله بن رَوَاحة: أنه كان في سفر فقَدِمَ، فتعجَّل إلى أهله ليلًا، فإذا شيءٌ نائم مع امرأته، فأخذ السَّيف، فقالت امرأته: هذه فلانةُ مَشَطَتْني، فأتى النبيَّ صلى الله عليه وسلم فذكر له ذلك، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "لا تَطْرُقوا النِّساء ليلًا" [1]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه.
আব্দুল্লাহ ইবনে রাওয়াহা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি এক সফরে ছিলেন। (সফর শেষে) তিনি ফিরে এসে রাতে দ্রুত তার স্ত্রীর কাছে গেলেন। হঠাৎ তিনি দেখতে পেলেন, তার স্ত্রীর সাথে কেউ একজন শুয়ে আছে। তখন তিনি তলোয়ার হাতে নিলেন। তার স্ত্রী বললেন: এ তো অমুক মহিলা, সে আমার চুল আঁচড়ে দিচ্ছিল। অতঃপর তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে আসলেন এবং তাঁকে বিষয়টি জানালেন। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তোমরা রাতে স্ত্রীদের কাছে হঠাৎ প্রবেশ করবে না।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح لغيره، وهذا إسناد رجاله ثقات لكن أبا سلمة - وهو ابن عبد الرحمن بن عوف - لم يسمع من عبد الله بن رواحة وقد صحَّ الحديث من وجه آخر كما سيأتي.وأخرجه أحمد 25 (15736) والنسائي في "إغراب شعبة وسفيان" (64)، والروياني في "مسنده" (1499) من طريق عبد الرحمن بن مهدي، بهذا الإسناد.وأخرجه بنحوه ابن أبي شيبة في "مصنفه" 12/ 523 - 524، وفي "مسنده" (583)، والطبراني في "الكبير" 13/ 438، وابن عساكر في "تاريخ دمشق" 28/ 80 و 80 - 81 من طريق معاوية ابن هشام، عن سفيان، به.ويشهد له ما أخرجه أبو عوانة في "صحيحه" (7534)، والخرائطي في "مساوئ الأخلاق" (801) عن علي بن حرب، حدثنا القاسم بن يزيد الجرمي، عن سفيان الثوري، عن محارب بن دثار، عن جابر قال: أتى ابن رواحة امرأته وامرأة تمشطها، فأشار بالسيف، فذكر ذلك لرسول الله صلى الله عليه وسلم، فنهى أن يطرق الرجل أهلَه ليلًا. وإسناده صحيح.وأصل حديث جابر هذا في البخاري (1801) و (5243)، ومسلم (715) (184) و (185) من طريق محارب عنه، لكنه مختصر.
7993 - حدثنا أبو النضر الفقيه وأبو الحسن العَنَزي، قالا: حدثنا عثمان بن سعيد الدَّارِمي، حدثنا يزيد بن خالد الرَّمْلي، حدثنا عبد الله بن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث، عن درَّاج أبي السَّمْح، عن أبي الهيثم، عن أبي سعيد الخُدْري قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "لا حليمَ إلَّا ذو عَثْرةٍ، ولا حكيمَ إِلَّا ذو تَجْرِبة" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه.آخر كتاب الأدب كتاب الأيمان والنذور
আবু সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: ভুলকারী ছাড়া কেউ ধৈর্যশীল নয়, আর অভিজ্ঞতা ছাড়া কেউ জ্ঞানী নয়।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده ضعيف لضعف رواية دراج أبي السمح عن أبي الهيثم: وهو سليمان بن عمرو العُتواري.وأخرجه أحمد 17 / (11056) و 18/ (11661)، والترمذي، (2033)، وابن حبان (193) من طرق عن عبد الله بن وهب، بهذا الإسناد. وقال الترمذي: حسن غريب لا نعرفه إلَّا من هذا الوجه.وأخرجه البخاري في "الأدب المفرد" (565) عن سعيد بن عفير، عن يحيى بن أيوب الغافقي، عن عبيد الله بن زَحْر، عن أبي الهيثم، عن أبي سعيد موقوفًا. وعبيد الله بن زحر مختلف فيه، والموقوف أشبه بالصواب.
7994 - حدثنا أبو العباس محمد بن يعقوب حدثنا محمد بن سنان القزَّاز، حدثنا عبد الله بن حُمْران، حدثنا عبد الحميد بن جعفر، حدثنا عبد الله بن ثَعلبة: أنه أتى عبد الرحمن بن كعب بن مالك وهو في إزارٍ جَرْدٍ وطاقٍ خَلَقٍ قد الْتبَبَ به وهو أعمى يُقاد، قال: فسلَّمتُ عليه فقال: مَن هذا؟ قلت: عبد الله بن ثَعلَبة، قال: أخو بني حارثة؟ قلت: نعم، قال: وخَتَنُ جُهَينة؟ قلت: نعم، قال: هل سمعتَ أباك يُحدِّث بحديث سمعتَه يُحدِّث به عن النبيِّ صلى الله عليه وسلم؟ قال: لا أدري، قال: سمعتَ أباك يقول: سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: "مَن اقتَطَعَ مالَ امرئٍ مُسلم بيمينٍ كاذبةٍ، كانت نكتةٌ سوداءُ في قلبه لا يُغيِّرُها شيءٌ إلى يوم القيامة"؟ قلت: لا [1]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه بهذه السِّياقة، إنما اتَّفقا على حديث الأعمش ومنصور عن أبي وائل عن عبد الله بلَفْظي [2].
আবদুল্লাহ ইবনে ছা'লাবা থেকে বর্ণিত, তিনি আবদুর রহমান ইবনে কা'ব ইবনে মালিকের কাছে এলেন। তিনি (আবদুর রহমান) তখন একটি সাধারণ লুঙ্গি এবং একটি জীর্ণ পুরাতন চাদর পরিহিত ছিলেন, যা দ্বারা তিনি নিজেকে আবৃত করে রেখেছিলেন। তিনি ছিলেন অন্ধ এবং তাঁকে ধরে নিয়ে আসা হয়েছিল। তিনি বলেন, আমি তাঁকে সালাম দিলাম। তখন তিনি জিজ্ঞেস করলেন, 'কে এটি?' আমি বললাম, 'আবদুল্লাহ ইবনে ছা'লাবা।' তিনি বললেন, 'বনু হারিসা গোত্রের ভাই?' আমি বললাম, 'হ্যাঁ।' তিনি বললেন, 'জুহায়না গোত্রের জামাতা?' আমি বললাম, 'হ্যাঁ।' তিনি জিজ্ঞেস করলেন, 'আপনি কি আপনার পিতাকে এমন কোনো হাদিস বর্ণনা করতে শুনেছেন, যা তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে বর্ণনা করেছেন?' আমি বললাম, 'আমি জানি না।' তিনি বললেন, 'আমি আপনার পিতাকে বলতে শুনেছি, তিনি বলেছেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "যে ব্যক্তি মিথ্যা কসমের মাধ্যমে কোনো মুসলিম ব্যক্তির সম্পদ ছিনিয়ে নেয়, তার হৃদয়ে একটি কালো দাগ পড়ে যায়, যা কিয়ামত দিবস পর্যন্ত কোনো কিছু পরিবর্তন করতে পারে না।" ' আমি বললাম, 'না (আমি শুনিনি)।'
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] حديث حسن من أجل عبد الله بن ثعلبة: وهو عبد الله بن أبي أمامة بن ثعلبة، نُسب إلى جدّه، ومحمد بن سنان القزاز - وإن كان فيه لِين - متابَع. وأبو أمامة صحابيُّ الحديث، قال الحافظ ابن حجر في "الإصابة": اسمه عند الأكثر إياس، وقيل: اسمه عبد الله، وبه جزم أحمد بن حنبل، وقيل: ثعلبة بن سهيل وقيل: ابن عبد الرحمن قال أبو عمر - يعني ابن عبد البر -: ولا يصح غير إياس، وهو أنصاري حليف لبني حارثة.وأخرجه الطبراني في "الكبير" (801)، وأبو نعيم في "معرفة الصحابة" (1388) من طريق أحمد بن عاصم العباداني وأبو أحمد الحاكم في "الأسامي والكنى" 2/ 12 من طريق محمد بن بشار، كلاهما عن عبد الله بن حمران، بهذا الإسناد. وبيّنوا فيه أن عبد الرحمن بن كعب سمعه من أبي أمامة والد عبد الله بن ثعلبة.وأخرجه الحارث بن أبي أسامة (457 - بغية الباحث) عن محمد بن عمر الواقدي، وابن قانع في "معجم الصحابة" 1/ 121، والطبراني (1383)، وأبو نعيم (1387) من طريق خالد بن الحارث، كلاهما عن عبد الحميد بن جعفر به.وانظر ما سيأتي برقم (8002).
[2] كذا في النسخ الخطية، ولفظ "الصحيحين" كلفظ الحديث التالي، وليس كلفظ هذا الحديث.
7995 - حدثنا أحمد بن كامل القاضي، حدثنا محمد بن سعد العَوْفي، حدثنا رَوْح بن عُبَادة، حدثنا شُعبة، قال: سمعتُ عِيَاضًا أبا خالد يقول: رأيتُ رجلينِ [1] يختصمانِ عند مَعقِل بن يسار، فقال مَعقِلٌ: سمعتُ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم يقول: "مَن حَلَفَ على يمينٍ ليَقطَعَ بها مالَ رجلٍ، لقي الله تعالى وهو عليه غضبانُ [2].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه بهذا الإسناد.
মাকিল ইবন ইয়াসার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "যে ব্যক্তি কোনো কসম করে এর মাধ্যমে কোনো মানুষের সম্পদ অন্যায়ভাবে আত্মসাৎ করতে চায়, সে আল্লাহ্ তাআলার সাথে এমন অবস্থায় সাক্ষাৎ করবে যে তিনি তার উপর রাগান্বিত।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] في النسخ الخطية: رجلان وهو خطأ.
[2] حديث صحيح، وهذا إسناد محتمل للتحسين، عياض أبو خالد - وهو البجلي - تابعي، وقد تفرّد بالرواية عنه شعبة، لذلك قال ابن المديني: مجهول، بينما ذكره ابن حبان في "ثقاته" لأنه لم يجد فيه جرحًا، وقد توبع كما سيأتي.وأخرجه أحمد 33/ (20292) و (20295)، والنسائي (5976) من طرق عن شعبة، بهذا الإسناد. وذكر أحمد فيه قصة.وأخرجه أبو داود الطيالسي (975) من طريق معاوية بن قرة، عن معقل بن يسار. وسنده جيّد.
7996 - حدثنا أحمد بن كامل، حدثنا أحمد بن عُبيد الله بن إدريس، حدثنا يزيد بن هارون، أخبرنا هشام بن حسّان، عن محمد بن سِيرِين، عن عِمران بن حُصَين قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: "مَن حَلَفَ على يمينٍ مصبورةٍ كاذبةٍ، فليتبوَّأ بوجهِه مَقعَدَه من النار" [1]. هذا حديث صحيح على شرط الشيخين، ولم يُخرجاه بهذا اللفظ.
ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি মিথ্যা মজবুত (বা কঠোর) কসম খায়, সে যেন তার চেহারা দিয়ে জাহান্নামে নিজের স্থান বানিয়ে নেয়।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] إسناده صحيح.وأخرجه أحمد 33/ (19912) و (19967)، وأبو داود (3242) من طريق يزيد بن هارون، بهذا الإسناد.قوله: "مصبورة"، أي: أُلزِمَ بها وحُبسَ عليها، وكانت لازمةً لصاحبها من جهة الحُكم، وقيل لها: مصبورة - وإن كان صاحبها في الحقيقة هو المصبور - لأنه إنما صُبر من أجلها، أي: حُبس، فوُصفت بالصبر، وأضيفت إليه مجازًا. قاله ابن الأثير في "النهاية".
7997 - حدثني محمد بن صالح بن هانئ، حدثنا أبو سعيد الحسن بن عبد الصمد القُهُنْدُزِي، حدثنا يحيى بن يحيى وعمرو بن زُرَارة، قالا: حدثنا سعيد بن مَسْلَمة [1] حدثنا إسماعيل بن أُميَّة، عن عمر بن عطاء بن أبي الخُوَار، عن عُبيد بن جُريج، عن الحارث بن البَرْصاءِ قال: سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم في الحجِّ بين الجَمْرتين وهو يقول: "مَنِ اقتَطَعَ مالَ أخيه المسلمِ بيمينٍ فاجرةٍ، فليَتبوَّأ مَقْعَدَه من النار، ليُبلِّغْ شاهدُكم غائبَكم"، مرتين أو ثلاثًا [2]. هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه بهذه السِّياقة.
হারিস ইবনুল বারসা' (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে হজ্জের সময় দুই জামরার মধ্যবর্তী স্থানে বলতে শুনেছি: "যে ব্যক্তি মিথ্যা কসমের মাধ্যমে তার মুসলিম ভাইয়ের সম্পদ আত্মসাৎ করে, সে যেন জাহান্নামে তার ঠিকানা তৈরি করে নেয়। তোমাদের মধ্যে যারা উপস্থিত আছো, তারা যেন অনুপস্থিতদের কাছে এ কথা পৌঁছে দেয়।" (তিনি এ কথা) দু’বার অথবা তিনবার বললেন।
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] تحرّف في النسخ الخطية إلى: سلمة. سماع عمر بن عطاء من الحارث، وإلا كان منقطعًا، ولا يضرُّ فقد عُرفت الواسطة بينهما.
[2] حديث صحيح، وهذا إسناد ضعيف من أجل سعيد بن مسلمة، وقد توبع. والحارث بن البرصاء سبق تعريف الحاكم له برقم (6777).وأخرجه ابن أبي عاصم في "الآحاد والمثاني" (908)، وابن أبي خيثمة في السفر الثاني من التاريخ 1/ 162، وأبو نعيم في معرفة الصحابة (2076) من طرق عن سعيد بن مسلمة، بهذا الإسناد.وأخرجه البخاري في "التاريخ الكبير" 2/ 258، والطحاوي في "مشكل الآثار" (446) و (5932)، وابن حبان (5165)، والطبراني في "الكبير" (3330)، وأبو نعيم (2077)، وتمام في "الفوائد" (1339) من طريق روح بن القاسم، عن إسماعيل بن أمية، به. وقال ابن حبان: تفرَّد به عمر بن عبد الوهاب!وأخرجه الفاكهي في "أخبار مكة" (2637)، وابن قانع في "معجم الصحابة" 1/ 168 من طريق روح بن القاسم، عن إسماعيل بن أمية به. لكن ليس فيه عبيد بن جريج.وخالف سفيانُ بن عيينة في إسناده، فرواه عن إسماعيل بن أمية عن ابن أبي الخوار عن الحارث، لم يذكر فيه عبيد بن جريج، أخرجه من طريقه الحميدي في "مسنده" (583)، وأبو القاسم البغوي في "معجم الصحابة" (456)، والطحاوي (447) و (5933)، وابن قانع 1/ 168، والطبراني (3331). وأضاف محقق مسند الحميدي الشيخ حبيب الرحمن الأعظمي - وتبعه الأستاذ حسين سليم - في الإسناد عبيد بن جريج من عنده! ووقع في الموضع الأول من "المشكل" ذكر عبيد بن جريج في الإسناد، وهو خطأ، فقد نصَّ الطحاوي على عدم ذكره في الموضع الثاني.وتابع سليمانُ بن سليم سفيانَ على عدم ذكر عبيد بن جريج عند الطبراني (3332). فإن صحَّ سماع عمر بن عطاء من الحارث، وإلا كان منقطعًا، ولا يضرُّ فقد عُرفت الواسطة بينهما.
7998 - حدثنا أبو إسحاق إبراهيم بن إسماعيل القارئ، حدثنا عثمان بن سعيد الدَّارمي، حدثنا سعيد بن أبي مريم، أخبرنا نافع بن يزيد، حدثني أبو سفيان بن جابر بن عَتِيك، عن أبيه، أنه سمع رسولَ الله صلى الله عليه وسلم يقول: "مَنِ اقْتَطَعَ مالَ امرئٍ مسلم بيمينِه، حرَّم الله عليه الجنَّة، وأدخَلَه النار" قالوا: يا رسولَ الله، وإن كان شيئًا يسيرًا؟ قال: "وإن كان سِواكًا، وإن كان سِواكًا" [1].هذا حديث صحيح الإسناد، ولم يُخرجاه بهذه السِّياقة.
জাবির ইবনে আতীক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছেন: "যে ব্যক্তি কসম করে কোনো মুসলিম ব্যক্তির সম্পদ অন্যায়ভাবে আত্মসাৎ করবে, আল্লাহ তার জন্য জান্নাত হারাম করে দেবেন এবং তাকে জাহান্নামে প্রবেশ করাবেন।" তারা বলল, ইয়া রাসূলাল্লাহ! যদিও তা সামান্য কিছু হয়? তিনি বললেন, "যদিও তা একটি মিসওয়াক হয়, যদিও তা একটি মিসওয়াক হয়।"
تحقيق الشيخ د. سعيد اللحام:
[1] صحيح لغيره، وهذا إسناد محتمل للتحسين من أجل أبي سفيان بن جابر، فهو تابعي روى عنه اثنان ولم يؤثر فيه جرح أو تعديل.وأخرجه البخاري في التاريخ الكبير 2/ 208، وابن المنذر في "الأوسط" (8921)، والطبراني في "الكبير" (1782)، وأبو نعيم في "معرفة الصحابة" (1515) من طرق عن سعيد بن أبي مريم، بهذا الإسناد.وأخرجه ابن قانع في "معجم الصحابة" 1/ 141، والطبراني (1783)، وأبو نعيم (1514) من طريق سعيد بن أبي أيوب، وأخرجه الطبراني (1784)، وأبو نعيم (1516) من طريق عبد الله بن وهب، كلاهما عن نافع بن يزيد، به.ويشهد لمعناه أحاديث الباب التي ذكرها المصنِّف قبلًا وبعدًا.