হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1981)


1981 - ` عودوا المرضى، واتبعوا الجنائز، تذكركم الآخرة `.
رواه أبو يعلى في ` مسنده ` (84 / 1) والبخاري في ` الأدب المفرد ` (518)
وابن حبان (709) وابن المبارك في ` الزهد ` (248) والبغوي في ` شرح
السنة ` (1 / 166 / 1) عن قتادة عن أبي عيسى الأسواري عن أبي سعيد الخدري
مرفوعا.
قلت: إسناده حسن، رجاله كلهم ثقات رجال الشيخين غير أبي عيسى الأسواري،
فأخرج له مسلم متابعة، ووثقه الطبراني وابن حبان وروى عنه جماعة.




আবু সাঈদ খুদরি (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তোমরা রুগ্ণদের দেখতে যাও এবং জানাযার অনুসরণ করো; কেননা তা তোমাদেরকে আখিরাতের কথা স্মরণ করিয়ে দেবে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1982)


1982 - ` العرافة أولها ملامة وآخرها ندامة والعذاب يوم القيامة `.
رواه الطيالسي في ` مسنده ` (رقم 2526) وأبو العباس الأصم في ` حديثه `
(3 / 148 / 1) (رقم 125) عن هشام عن عباد بن أبي علي عن أبي حازم عن أبي
هريرة رفعه.
قلت: وهذا إسناد حسن رجاله ثقات، رجال الشيخين غير عباد بن أبي علي وهو
البصري، وقد روى عنه مع هشام هذا - وهو الدستوائي - غيره من الثقات وهم
حماد بن زيد وخليد بن حسان، كما في ` الجرح والتعديل ` (3 / 1 / 84) ولم
يذكر فيه جرحا ولا تعديلا وذكره ابن حبان في ` الثقات `، وقال الحافظ:
` مقبول `.
وفي الترهيب عن العرافة أحاديث أخرى عن جمع من الصحابة، لا تخلو
أسانيدها من ضعف تجدها في آخر الجزء الأول من ` الترغيب ` للحافظ المنذري (1 /




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন:

“ভবিষ্যদ্বক্তার কাজ (বা ভাগ্য গণনা) শুরু হয় নিন্দা বা ভর্ৎসনা দিয়ে, আর এর শেষ ফল হলো অনুশোচনা, এবং (এর চূড়ান্ত পরিণতি হলো) কিয়ামতের দিন কঠিন শাস্তি।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1983)


1983 - ` العقل على العصبة، وفي السقط غرة: عبد أو أمة `.
أخرجه الطبراني في ` المعجم الكبير ` (رقم - 3484) من طريق عباد بن منصور
أخبرنا أبو المليح الهذلي عن حمل بن النابغة ` أنه كانت له امرأتان، لحيانية،
ومعاوية - من بني معاوية بن زيد - وأنهما اجتمعتا فتغايرتا، فرفعت المعاوية
حجرا فرمت به اللحيانية، وهي حبلى، وقد بلغت فقتلتها، فألقت غلاما، فقال
حمل بن مالك لعمران بن عويمر: أد إلي عقل امرأتي، فارتفعا إلى رسول الله صلى
الله عليه وسلم فقال: فذكره.
قلت: وهذا إسناد ضعيف لسوء حفظ عباد بن منصور، لكنه لم يتفرد به، فقد تابعه
قتادة عن أبي المليح بن أسامة به نحوه. أخرجه الطبراني أيضا (رقم - 3485) .
وإسناده صحيح. ورواه النسائي (2 / 249) من طريق أخرى عن حمل مختصرا.
وللحديث شواهد منها عن أبي هريرة قال: ` قضى رسول الله صلى الله عليه وسلم في
جنين امرأة من بني لحيان سقط ميتا بغرة عبد أو أمة، ثم إن المرأة التي قضى
عليها بالغرة توفيت، فقضى رسول الله صلى الله عليه وسلم بأن ميراثها لبنيها
وزوجها وأن العقل على عصبتها `. أخرجه البخاري (4 / 286) ومسلم (5 / 110
) والنسائي وأحمد (2 / 539) .
(العقل) : الدية. (العصبة) : هو بنو
الرجل وقرابته لأبيه، وفي (الفرائض) : من ليست له فريضة مسماه في الميراث
وإنما يأخذ ما أبقى ذوو الفروض. (غرة) . قال ابن الأثير: الغرة: العبد
نفسه أو الأمة.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন:

রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বনী লিহইয়ানের এক মহিলার গর্ভের সন্তান সম্পর্কে ফয়সালা দেন, যা মৃত অবস্থায় পড়ে গিয়েছিল। এর জন্য তিনি একটি ’গুররাহ’ (দিয়াত বা রক্তপণ) নির্ধারণ করেন—একটি গোলাম অথবা একটি বাঁদি।

অতঃপর যে মহিলার উপর ’গুররাহ’-এর ফয়সালা দেওয়া হয়েছিল, তিনি মারা যান। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম ফয়সালা দেন যে, তার (মৃত মহিলার) মীরাস তার সন্তানগণ ও স্বামী পাবে এবং দিয়াত (রক্তপণ) তার আসাবাহর (পৈতৃক দিক থেকে নিকটাত্মীয়দের) উপর বর্তাবে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1984)


1984 - ` طوافك بالبيت، وبين الصفا والمروة يكفيك لحجك وعمرتك `.
أخرجه مسلم (4 / 34) وأبو داود (1897) عن عبد الله بن أبي نجيح عن عطاء
- وقال مسلم: عن مجاهد - عن عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم قال لها:
فذكره. لفظ عطاء، ولفظ مجاهد: أنها حاضت بـ (سرف) ، فتطهرت بعرفة، فقال
لها رسول الله صلى الله عليه وسلم: ` يجزيء عنك طوافك بالصفا والمروة عن حجك
وعمرتك `. ثم أخرج مسلم وأحمد (6 / 124) من طريق عبد الله بن طاووس عن
أبيه عن عائشة ` أنها أهلت بعمرة، فقدمت ولم تطف بالبيت حتى حاضت، فنسكت
المناسك كلها وقد أهلت بالحج، فقال لها النبي صلى الله عليه وسلم يوم (النفر
) : ` يسعك طوافك لحجك وعمرتك `. فأبت، فبعث بها مع عبد الرحمن إلى التنعيم
، فاعتمرت بعد الحج `.
قلت: فالعمرة بعد الحج إنما هي للحائض التي لم تتمكن من الإتيان بعمرة الحج
بين يدي الحج لأنها حاضت كما علمت من قصة عائشة هذه، فمثلها من النساء إذا
أهلت بعمرة الحج كما فعلت هي رضي الله عنها، ثم حال بينها وبين إتمامها الحيض
، فهذه يشرع لها العمرة بعد الحج، فما يفعله اليوم جماهير الحجاج من تفاهتهم
على العمرة
بعد الحج، مما لا نراه مشروعا لأن أحدا من الصحابة الذين حجوا معه
صلى الله عليه وسلم لم يفعلها. بل إنني أري أن هذا من تشبه الرجال بالنساء،
بل بالحيض منهن! ولذلك جريت على تسمية هذه العمرة بـ (عمرة الحائض) بيانا
للحقيقة.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত...

(নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে বলেছিলেন): "বায়তুল্লাহর তোমার তাওয়াফ এবং সাফা-মারওয়ার মধ্যবর্তী তোমার সাঈ তোমার হজ এবং উমরার জন্য যথেষ্ট হবে।"

[হাদিসটি মুসলিম (৪/৩৪) ও আবু দাউদ (১৮৯৭) আব্দুল্লাহ ইবনু আবী নাজীহ্ সূত্রে আতা থেকে বর্ণনা করেছেন – এবং মুসলিম মুজাহিদ সূত্রে – আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণনা করেছেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে এই কথা বলেছিলেন।]

আতা-এর বর্ণনা অনুযায়ী উপরোক্ত কথাটি বলা হয়েছে, আর মুজাহিদ-এর বর্ণনা অনুযায়ী (ঘটনাটি হলো): তিনি (আয়িশা) সারফে গিয়ে হায়েযগ্রস্তা হলেন এবং আরাফাতে গিয়ে পবিত্র হলেন। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে বললেন: "সাফা-মারওয়ার তোমার সাঈ তোমার হজ এবং উমরার জন্য যথেষ্ট হবে।"

অতঃপর মুসলিম ও আহমাদ (৬/১২৪) আব্দুল্লাহ ইবনু তাউস তার পিতা সূত্রে আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণনা করেছেন যে, তিনি উমরার ইহরাম বেঁধেছিলেন। (মক্কায়) পৌঁছে তিনি হায়েয হওয়া পর্যন্ত কা’বার তাওয়াফ করেননি। অতঃপর তিনি হজের ইহরাম বেঁধে সকল মানাসিক সম্পন্ন করলেন। এরপর (মিনায়) প্রত্যাবর্তনের দিন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে বললেন: "তোমার জন্য তোমার (একক) তাওয়াফই তোমার হজ ও উমরার জন্য যথেষ্ট হবে।" কিন্তু তিনি (সাফ-মারওয়ার সাঈয়ের পর তাওয়াফ করার অনুমতি থাকা সত্ত্বেও) মানতে অস্বীকার করলেন। তখন তিনি তাকে আব্দুর রহমানের সাথে তানঈম পর্যন্ত পাঠালেন, ফলে তিনি হজের পরে উমরা করলেন।

(আমি বলি/মুহাদ্দিস বলেন:) সুতরাং, হজের পরে উমরাহ কেবল সেই হায়েযগ্রস্ত নারীর জন্যই প্রযোজ্য, যে আয়েশার ঘটনা থেকে জানা যায়—হায়েযের কারণে হজের আগে তার উমরার অনুষ্ঠান সম্পন্ন করতে পারেনি। তাঁর (আয়েশার) মতো যে সকল নারী উমরার ইহরাম বাঁধেন, অতঃপর হায়েয তাদের উমরা সমাপ্তির পথে অন্তরায় সৃষ্টি করে, তাদের জন্য হজের পরে উমরা করা শরীয়তসম্মত। কিন্তু আজকাল হাজীদের বিশাল জনতা হজের পরে যে উমরা করার জন্য উৎসাহী হয়ে থাকে, আমরা সেটিকে শরীয়তসম্মত মনে করি না। কারণ, তাঁর (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) সাথে যারা হজ করেছিলেন, এমন কোনো সাহাবী তা করেননি। বরং আমি মনে করি এটি পুরুষদের নারীদের সাথে, বরং হায়েযগ্রস্ত নারীদের সাথে সাদৃশ্য অবলম্বনের অন্তর্ভুক্ত! এই কারণে আমি এই উমরাকে বাস্তবতা প্রকাশের জন্য ‘উমরাতুল হায়েয’ (হায়েযগ্রস্তার উমরা) নামে অভিহিত করার নিয়ম চালু করেছি।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1985)


1985 - ` طوبى شجرة في الجنة، مسيرة مائة عام، ثياب أهل الجنة تخرج من أكمامها `.
أخرجه أحمد (3 / 71) وابن جرير في ` تفسيره ` (13 / 101) وابن حبان (
2625) من طريق دراج أبي السمح أن أبا الهيثم حدثه عن أبي سعيد الخدري عن
رسول الله صلى الله عليه وسلم به.
قلت: وهذا سند لا بأس به في الشواهد لسوء حفظ دراج. ويشهد له ما رواه فرات
ابن أبي الفرات عن معاوية بن قرة عن أبيه قال: قال رسول الله صلى الله عليه
وسلم: ` * (طوبى لهم وحسن مآب) * شجرة غرسها الله بيده، ونفخ فيها من روحه
بالحلي والحلل، وإن أغصانها لترى من وراء سور الجنة `. أخرجه ابن جرير.
وفرات هذا قال ابن أبي حاتم (3 / 2 / 80) عن أبيه: ` صدوق لا بأس به `.
وضعفه غيره. وما أخرجه البخاري وغيره عن أنس رضي الله عنه قال: قال رسول
الله صلى الله عليه وسلم: ` إن في الجنة شجرة يسير الراكب في ظلها مائة عام لا
يقطعها، إن شئتم فاقرءوا: * (وظل ممدود، وماء مسكوب) *.
وما أخرجه أحمد
(2 / 202 و 224 و 225) عن حنان بن خارجة عن عبد الله بن عمرو قال: جاء رجل
إلى النبي صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسول الله! أخبرنا عن ثياب أهل الجنة
خلقا تخلق أم نسجا تنسج؟ فضحك بعض القوم، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم
: ` مم تضحكون من جاهل يسأل عالما؟ ` ثم أكب رسول الله صلى الله عليه وسلم،
ثم قال: ` أين السائل؟ ` قال: هو ذا أنا يا رسول الله! قال: ` لا بل تشقق
عنها ثمر الجنة (ثلاث مرات) `.




আবু সাঈদ আল-খুদরি (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “তুবা হলো জান্নাতের একটি গাছ, যার দূরত্ব একশত বছরের পথের সমান। জান্নাতিদের পোশাক তার ফুলের ডাল বা ফল থেকে বেরিয়ে আসে।”

রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আরো বলেছেন: “‘তাদের জন্য রয়েছে সুসংবাদ (طوبى) এবং উত্তম প্রত্যাবর্তনস্থল (حسن مآب)’ – এটি এমন একটি গাছ যা আল্লাহ নিজ হাতে রোপণ করেছেন এবং অলংকার ও পোশাক-পরিচ্ছদ দ্বারা এতে তাঁর রূহ থেকে ফুঁক দিয়েছেন। আর এর ডালপালা জান্নাতের দেওয়ালের বাইরে থেকেও দেখা যাবে।”

আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “জান্নাতের মধ্যে এমন একটি গাছ রয়েছে যার ছায়ায় একজন আরোহী একশ বছর ধরে চললেও তা শেষ করতে পারবে না। তোমরা চাইলে এই আয়াতটি পাঠ করতে পারো: ‘এবং সুদীর্ঘ ছায়া, আর প্রবাহিত পানি’ (সূরা ওয়াকিয়া: ৩০-৩১)।”

আবদুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, এক ব্যক্তি নবী কারীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট এসে জিজ্ঞেস করলেন: “হে আল্লাহর রাসূল! জান্নাতিদের পোশাক সম্পর্কে আমাদের অবহিত করুন – তা কি সৃষ্টি করা হবে নাকি বোনা হবে?” (এ কথা শুনে) উপস্থিত কিছু লোক হেসে উঠলো। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: “তোমরা এমন এক অজ্ঞ ব্যক্তির উপর হাসছো যে একজন জ্ঞানীকে জিজ্ঞেস করছে?” এরপর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম মাথা নিচু করলেন, অতঃপর বললেন: “প্রশ্নকারী কোথায়?” সে বলল: “আমিই, হে আল্লাহর রাসূল!” তিনি বললেন: “না, বরং জান্নাতের ফল ফেটে তা (পোশাক) বের হয়ে আসবে।” – তিনি এ কথাটি তিনবার বললেন।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1986)


1986 - ` العمد قود، والخطأ دية `.
أخرجه الطبراني في ` الكبير ` من حديث عمرو بن حزم مرفوعا. وقال الهيثمي
في ` المجمع ` (6 / 286) : ` وفيه عمران بن أبي الفضل وهو ضعيف `. وأقره
المناوي.
وأقول: ولكنه حديث صحيح، أخرجه الدارقطني في ` سننه ` (ص 328) من طرق عن
عمرو بن دينار عن ابن عباس مرفوعا بألفاظ، أقربها إلى لفظ الترجمة بلفظ:
` العمد قود، والخطأ عقل لا قود فيه ... ` الحديث وهو مخرج في ` المشكاة ` (
3478) وفي ` الإرواء ` أيضا فيما أظن. وللشطر الأول منه شاهد آخر من حديث
عثمان بن عفان مرفوعا نحوه. أخرجه النسائي (2 / 169) وأحمد (1 / 63) عن
مطر الوراق عن نافع عن ابن عمر عنه. وسنده حسن في الشواهد.
(قود) القود: القصاص، وقتل القاتل بدل القتيل.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:

ইচ্ছাকৃত অপরাধের শাস্তি হলো কিসাস (প্রাণদণ্ড বা প্রতিশোধ)। আর ভুলক্রমে (সংঘটিত অপরাধের ক্ষেত্রে) দিয়াত (রক্তপণ) আবশ্যক।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1987)


1987 - ` عليهم ما حملوا، وعليكم ما حملتم `.
أخرجه البخاري في ` التاريخ ` (1 / 1 / 42) عن محمد بن أبي إسرائيل سمع عبد
الملك بن أبي بشير عن علقمة بن وائل عن أبيه أنه قال للنبي صلى الله عليه
وسلم: ` إن كان علينا أمراء يعملون بغير طاعة الله؟ فقال: ` فذكره، ثم رواه
من طريق شعبة عن سماك عن علقمة بن وائل عن أبيه قال سلمة بن يزيد الجعفي للنبي
صلى الله عليه وسلم نحوه. ومن طريق إسرائيل قال: حدثنا سماك عن علقمة قال
يزيد للنبي صلى الله عليه وسلم.
قلت: الرواية الأولى معلولة بمحمد بن أبي إسرائيل، وفي ترجمته ساق البخاري
الحديث ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، وكذلك صنع ابن أبي حاتم في كتابه (3
/ 2 / 209) لم يذكر فيه ذلك، فهو في عداد المجهولين. والرواية الثانية
إسنادها صحيح، رجالها كلهم ثقات رجال مسلم، وهي أصح من الرواية الثالثة لأن
شعبة أحفظ من إسرائيل لاسيما في الرواية عن سماك. والحديث عزاه السيوطي
للطبراني في ` الكبير ` عن يزيد بن سلمة الجعفي، وقال المناوي: ` قال
الهيثمي: فيه عبيد بن عبيدة لم أعرفه وبقية رجاله ثقات `. وأقره المناوي.
وأقول: إسناده عند البخاري ليس من طرقه وهذا من فضائل تتبع الطرق والأسانيد
، فالحمد لله على توفيقه. ثم وقفت على إسناده في ` الكبير `، فرأيته أخرجه (
6322) من طريق عبيد بن عبيدة حدثنا المعتمر بن سليمان عن أبيه عن زائدة عن
سماك به مثل رواية شعبة. فازدادت روايته بهذه المتابعة قوة على قوة.




ওয়ায়েল ইবনু হুজর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে জিজ্ঞাসা করলেন: “যদি আমাদের উপর এমন শাসক থাকে যারা আল্লাহর আনুগত্য ব্যতীত অন্যভাবে কাজ করে (অর্থাৎ অবাধ্য কাজ করে)?”

তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন: “তাদের উপর তাদের কাজের ভার বর্তাবে এবং তোমাদের উপর তোমাদের কাজের ভার বর্তাবে।”

***

*(দ্রষ্টব্য: এই হাদীসটি অন্য সূত্রে সালামা ইবনু ইয়াযীদ আল-জু’ফী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকেও অনুরূপভাবে বর্ণিত হয়েছে।)*









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1988)


1988 - ` غشيتكم الفتن كقطع الليل المظلم، أنجى الناس فيه رجل صاحب شاهقة يأكل من رسل
غنمه، أو رجل آخذ بعنان فرسه من وراء الدرب يأكل من سيفه `.
أخرجه الحاكم (4 / 514) عن عبد الله بن عثمان بن خثيم عن نافع بن سرجس عن
أبي هريرة قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم: فذكره، وقال: ` صحيح
الإسناد `. ووافقه الذهبي.
قلت: وهو كما قالا، ورجاله ثقات رجال مسلم غير نافع هذا، قال ابن أبي حاتم
(4 / 1 / 453) عن أبيه: ` لا أعلم إلا خيرا `.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:

"তোমাদেরকে ফিতনা এমনভাবে আচ্ছন্ন করে ফেলবে, যেমন রাতের আঁধার খণ্ডগুলো (বা গভীর অন্ধকার)। তাতে সবচেয়ে নাজাতপ্রাপ্ত (নিরাপদ) ব্যক্তি হবে সে, যে কোনো উঁচু পর্বতের চূড়ার অধিকারী হবে এবং তার ছাগল-ভেড়ার দুধ বা উৎপাদিত বস্তু থেকে আহার করবে। অথবা সে ব্যক্তি যে জনপদের পথ থেকে দূরে তার ঘোড়ার লাগাম ধরে রাখবে এবং তার তরবারি থেকে আহার করবে।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1989)


1989 - ` غير الدجال أخوف على أمتي من الدجال، الأئمة المضلون `.
أخرجه أحمد (5 / 145) عن ابن لهيعة عن ابن هبيرة عن أبي تميم الجيشاني قال:
سمعت أبا ذر يقول: ` كنت مخاصرا للنبي صلى الله عليه وسلم يوما إلى منزله
، فسمعته يقول: ` فذكره.
قلت: ورجاله ثقات غير ابن لهيعة، فإنه سيء الحفظ. وأما قول المناوي:
` رواه مسلم في آخر ` الصحيح ` بلفظ: ` غير الدجال أخوفني عليكم ` ثم ذكر
حديثا طويلا `. فإنما يعني حديث النواس بن سمعان المتقدم برقم (482) وليس
فيه ` الأئمة المضلون `.
لكن هذه الزيادة قد ثبتت من حديث أبي الدرداء كما
تقدم برقم (1582) ، فالحديث بمجموع ذلك صحيح.




আবু যর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:

দাজ্জাল ছাড়াও আমার উম্মতের জন্য দাজ্জালের চেয়েও অধিক ভীতিকর হলো পথভ্রষ্টকারী ইমামগণ।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1990)


1990 - ` الغزو غزوان، فأما من ابتغى وجه الله وأطاع الإمام وأنفق الكريمة واجتنب
الفساد، فإن نومه وتنبهه أجر كله، وأما من غزا فخرا ورياء وسمعة وعصى
الإمام وأفسد في الأرض، فإنه لا يرجع بكفاف `.
رواه أبو داود (رقم (2515) والنسائي في ` السير ` من ` الكبرى ` (2 / 52 /
1) وعبد بن حميد في ` المنتخب ` (15 / 2) وابن عدي (44 / 2) عن بقية عن
بحير عن خالد بن معدان عن أبي بحرية عن معاذ بن جبل مرفوعا. وهكذا رواه
الهيثم بن كليب في ` مسنده ` (171 / 1) وصرح عنده بقية بالتحديث، وكذلك
صرح به في رواية أبي العباس الأصم في ` حديثه ` (ج 3 رقم 97) وابن عساكر (8
/ 512 / 1) ورواه أبو القاسم إسماعيل الحلبي في ` حديثه ` (113 / 2) عن
عثمان بن عطاء عن أبيه عن معاذ بن جبل مرفوعا به.
قلت: والسند الأول حسن رجاله ثقات وقد صرح بقية بالتحديث في رواية الأكثرين
. وأبو بحرية اسمه عبد الله بن قيس الكندي وهو ثقة مخضرم.




মু’আয ইবনে জাবাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: জিহাদ (বা যুদ্ধ) দুই প্রকার।

প্রথমত, যারা আল্লাহর সন্তুষ্টির উদ্দেশ্যে যুদ্ধ করে, ইমামের (নেতার) আনুগত্য করে, উত্তম সম্পদ ব্যয় করে এবং ফাসাদ (বিপর্যয় ও অন্যায়) থেকে দূরে থাকে, তাদের ঘুম এবং জাগ্রত থাকা—সবকিছুতেই রয়েছে সাওয়াব।

আর দ্বিতীয়ত, যে ব্যক্তি অহংকার, লোক দেখানো ও সুখ্যাতির জন্য যুদ্ধ করে, ইমামের (নেতার) অবাধ্য হয় এবং পৃথিবীতে বিপর্যয় সৃষ্টি করে, সে কোনো প্রতিদান ছাড়াই ফিরে আসে (অর্থাৎ তার কোনো সাওয়াব হয় না)।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1991)


1991 - ` الغسل صاع، والوضوء مد `.
رواه الطبراني في ` الأوسط ` (3611) وابن عدي (69 / 2) عن حكيم بن نافع
الرمي عن موسى بن عقبة عن نافع عن ابن عمر مرفوعا، وقال: ` هذا الحديث
بهذا الإسناد غير محفوظ عن موسى بن عقبة `. وقال الطبراني: ` لم يروه عن
موسى إلا حكيم `.
قلت: وهو ضعيف، قال ابن عدي: ` هو ممن يكتب حديثه `. وقال أبو حاتم:
` ضعيف الحديث، منكر الحديث `. وقال الساجي: ` عنده مناكير `. وأما ابن
معين فقال: ` ليس به بأس `. وقال مرة: ` ثقة `.
قلت: فهو على كل حال ليس شديد الضعف، فمثله يتقوى حديثه بالمتابعات والشواهد
وقد وجدت له شواهد كثيرة عن جمع من الصحابة:
الأول: عن أنس بن مالك مرفوعا بلفظ: ` يكفي من الوضوء المد، ويكفي من الغسل
الصاع `. أخرجه أبو عوانة في ` صحيحه ` (1 / 233) عن معاوية بن هشام حدثنا
سفيان عن عبد الله بن جبر قال: سمعت أنسا به. وهذا إسناد جيد وهو على شرط
مسلم.
الثاني: عن جابر مرفوعا. ` يجزي من الوضوء المد، ومن الجنابة صاع `. أخرجه
البيهقي (1 / 195) عن حصين ويزيد بن أبي زياد وأحمد (3 / 370) عن يزيد
وحده - كلاهما عن سالم بن أبي الجعد عنه. وإسناد البيهقي صحيح.
الثالث: عن علي مرفوعا نحوه. أخرجه ابن ماجة (270) عن حبان بن علي عن يزيد
ابن أبي زياد عن عبد الله بن محمد بن عقيل بن أبي طالب عن أبيه عن جده.
وهذا
سند ضعيف.
الرابع: عن ابن عباس مرفوعا نحوه. أخرجه الطبراني في ` الأوسط ` بسند ضعيف.




ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,

গোসলের জন্য এক সা’ এবং ওযুর জন্য এক মুদ্দ (পরিমাণ পানি যথেষ্ট)।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1992)


1992 - ` الغيبة أن تذكر من المرء ما يكره أن يسمع `.
أخرجه مالك في ` الموطأ ` (3 /




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত: গীবত হচ্ছে এই যে, তুমি কোনো ব্যক্তি সম্পর্কে এমন কিছু উল্লেখ করো, যা সে শুনতে অপছন্দ করে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1993)


1993 - ` إن هذا السفر جهد وثقل، فإذا أوتر أحدكم فليركع ركعتين، فإن استيقظ وإلا
كانتا له `.
أخرجه الدارمي (1 / 374) وابن خزيمة في ` صحيحه ` (2 / 159 / 1103) وابن
حبان (683) من طرق عن ابن وهب حدثني معاوية بن صالح عن شريح بن عبيد عن عبد
الرحمن بن جبير بن نفير عن أبيه عن ثوبان قال: ` كنا مع رسول الله صلى
الله عليه وسلم في سفر فقال: ` فذكره، وليس عند الدارمي هذه الجملة المصرحة
بأنه صلى الله عليه وسلم قال الحديث في السفر، ولذلك عقب على الحديث بقوله:
` ويقال: ` هذا السفر ` وأنا أقول: السهر `! وبناء عليه وقع الحديث عنده
بلفظ: ` هذا السهر `. ويرده أمران:
الأول: ما ذكرته من مناسبة ورود الحديث في السفر.
والآخر: أن ابن وهب قد تابعه عبد الله بن صالح حدثنا معاوية بن صالح به
مناسبة ولفظا. أخرجه الدارقطني (ص 177) والطبراني في ` الكبير ` (1410)
. وعبد الله بن صالح من شيوخ البخاري، فهو حجة عند المتابعة. فدل ذلك كله
على أن المحفوظ في الحديث ` السفر ` وليس ` السهر ` كما قال الدارمي.
والحديث استدل به الإمام ابن خزيمة على ` أن الصلاة بعد الوتر مباح لجميع من
يريد الصلاة بعده، وأن الركعتين اللتين كان النبي صلى الله عليه وسلم يصليهما
بعد الوتر لم يكونا خاصة للنبي صلى الله عليه وسلم دون أمته، إذا النبي صلى
الله عليه وسلم قد أمرنا بالركعتبن بعد الوتر أمر ندب وفضيلة، لا أمر إيجاب
وفريضة `. وهذه فائدة هامة، استفدناها من هذا الحديث، وقد كنا من قبل
مترددين في التوفيق بين صلاته صلى الله عليه وسلم الركعتين وبين قوله:
` اجعلوا آخر صلاتكم بالليل وترا `، وقلنا في التعليق على ` صفة الصلاة ` (ص




ছাওবান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমরা রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামের সাথে এক সফরে ছিলাম। তখন তিনি বললেন: "নিঃসন্দেহে এই সফর (ভ্রমণ) কষ্টকর ও ভারী। সুতরাং তোমাদের কেউ যখন বিতর পড়ে ফেলে, তখন সে যেন (উঠে) দুই রাকাত সালাত আদায় করে নেয়। যদি সে (রাতে আবার) জাগ্রত হয়, তবে তো ভালো; নতুবা এই দুই রাকাত তার জন্য (পর্যাপ্ত) হয়ে গেল।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1994)


1994 - ` لا يحافظ على صلاة الضحى إلا أواب، وهي صلاة الأوابين `.
أخرجه ابن خزيمة في ` صحيحه ` (1224) والحاكم (1 / 314) عن إسماعيل بن عبد
الله بن زرارة الرقي حدثنا خالد بن عبد الله حدثني محمد بن عمرو عن أبي سلمة عن
أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره. وقال الحاكم
: ` صحيح على شرط مسلم `! ووافقه الذهبي.
قلت: وذلك من أوهامهما، فإن محمد بن عمرو إنما أخرج له مسلم متابعة. وابن
زرارة لم يخرج له مسلم أصلا! وهو صدوق تكلم فيه الأزدي بغير حجة كما في `
التقريب `، فالسند حسن، وقد أعله ابن خزيمة بقوله عقبه: ` لم يتابع هذا
الشيخ إسماعيل بن عبد الله على إيصال هذا الخبر، رواه الدراوردي عن محمد بن
عمرو عن أبي سلمة مرسلا. ورواه حماد بن سلمة عن محمد بن عمرو عن أبي سلمة
قوله `.
قلت: لم يتفرد ابن زرارة بوصله، فقد تابعه: أولا: محمد بن دينار حدثنا محمد
ابن عمرو به. أخرجه ابن عدي (ق 301 / 1) وقال: ` محمد بن دينار الطاحي حسن
الحديث، وعامة حديثه ينفرد به `. وقال الحافظ في ` التقريب `: ` صدوق سيء
الحفظ `.
ثانيا: عاصم بن بكار الليثي عن محمد بن عمرو به.
أخرجه ابن شاهين في
` الترغيب ` (ق 282 / 1) من طريق الفضل بن الفضل أبي عبيدة حدثنا عاصم به.
لكني لم أعرف عاصما هذا. والفضل لين الحديث.
ثالثا: عمرو بن حمران عن محمد بن عمرو به. أخرجه الطبراني في ` الأوسط ` (
رقم - 4322) : حدثنا علي بن سعيد الرازي حدثنا نوح بن أنس الرازي حدثنا عمرو
ابن حمران، وقال: ` لم يروه عن محمد إلا عمرو `. كذا قال وهو مردود بما
سبق، ومن الطرائف أن يستدرك بكلامه هذا وروايته على ابن خزيمة، وبرواية
هذا على الطبراني! تصديقا للقول السائر: كم ترك الأول للآخر!
قلت: وهذا إسناد حسن، رجاله موثقون، وأما قول الهيثمي فى ` مجمع الزوائد `
(2 / 239) : ` رواه الطبراني في ` الأوسط ` وفيه محمد بن عمرو، وفيه كلام
وفيه من لم أعرفه `. فهو يشير بطرفه الآخر من كلامه إلا عمرو بن حمران
والراوي عنه نوح، أو أحدهما، وقد عرفتهما بالصدق: أما عمرو بن حمران فهو
بصري سكن الري، وروى عنه جمع من الثقات سماهم ابن أبي حاتم في ترجمته (3 / 1
/ 227) ، وقال عن أبيه: ` صالح الحديث `. وأما نوح بن أنس فهو المقريء.
قال ابن أبي حاتم (4 / 1 / 486) :
` روى عنه أبي والفضل بن شاذان. سئل أبي
عنه؟ فقال: صدوق `. وأما علي بن سعيد فهو حافظ معروف مترجم في ` الميزان `
و` اللسان ` وغيرهما وفيه كلام يسير لا ينزل به حديثه عن مرتبة الحسن.
وجملة القول أن حديث ابن زرارة الموصول يتقوى بهاتين المتابعتين، لاسيما
الأخيرة منهما، فيندفع بذلك شبهة أن يكون أخطأ في وصله ولولا أن محمد بن عمرو
في حفظه بعض الضعف لحكمت على الحديث بالصحة، ولعله هو نفسه كان يوصله تارة،
ويرسله أخرى، فكل حدث بما سمع منه، والحكم للزيادة، لاسيما والجملة
الأخيرة منه - وإن كانت لم ترد في هاتين المتابعتين - فإن لها شاهدا من حديث
زيد بن أرقم سبق تخريجه برقم (1164) ولها طريق أخرى عن أبي هريرة خرجتها في
` صحيح أبي داود ` (1286)




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “সালাতুদ-দুহা (চাশতের নামাজ) কেবল সেই ব্যক্তিই নিয়মিত আদায় করে থাকে, যে হলো ‘আওওয়াব’ (আল্লাহর দিকে প্রত্যাবর্তনকারী)। আর এটিই হলো আওওয়াবীনদের সালাত।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1995)


1995 - ` فاطمة بضعة مني، يقبضني ما يقبضها ويبسطني ما يبسطها، وإن الأنساب يوم
القيامة تنقطع غير نسبي وسببي وصهري `.
أخرجه أحمد (4 / 323) ومن طريقه الحاكم (3 / 158) من طريق عبد الله بن
جعفر حدثتنا أم بكر بنت المسور بن مخرمة عن عبيد الله بن أبي رافع عن المسور:
` أنه بعث إليه حسن بن حسين يخطب ابنته، فقال له: قل له: فيلقاني في العتمة
، قال: فلقيه، فحمد الله المسور، وأثنى عليه، ثم قال: أما بعد، أيم
الله، ما من نسب ولا سبب ولا صهر إلي من نسبكم وصهركم، ولكن رسول الله
صلى الله عليه وسلم قال (فذكره) ، وعندك ابنتها ولو زوجتك لقبضها ذلك،
فانطلق عاذرا له `. وقال الحاكم: ` صحيح الإسناد ` ووافقه الذهبي! وهذا
عجب منه، فإن أم بكر هذه لا تعرف، بشهادة الذهبي نفسه، فإنه أوردها في فصل `
النسوة المجهولات `، وقال:
` تفرد عنها ابن أخيها عبد الله بن جعفر `.
لكني وجدت لها متابعا قويا، فقال عبد الله ابن الإمام أحمد (4 / 332) :
حدثنا محمد بن عباد المكي حدثنا أبو سعيد - مولى بني هاشم - حدثنا عبد الله بن
جعفر عن أم بكر وجعفر عن عبيد الله بن أبي رافع به، إلا أنه قال: ` شجنة `
مكان ` بضعة `. والباقي مثله سواء. وهذا إسناد جيد، جعفر هذا هو ابن محمد
بن علي بن الحسين أبو عبد الله الصادق الإمام الفقيه، وهو ثقة من رجال مسلم،
فهو متابع قوي. وبقية رجال الإسناد - باستثناء أم بكر - ثقات رجال مسلم.
ومحمد بن عباد هو ابن الزبرقان المكي. والحديث أخرجه البخاري في ` فضائل
الصحابة ` (11 /




মিসওয়ার ইবনে মাখরামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ইরশাদ করেছেন: ফাতিমা আমার দেহের অংশ (বা আমার কলিজার টুকরা)। যা তাকে কষ্ট দেয়, তা আমাকেও কষ্ট দেয় এবং যা তাকে আনন্দিত করে, তা আমাকেও আনন্দিত করে। আর নিশ্চয়ই কিয়ামতের দিন সকল বংশীয় সম্পর্ক ছিন্ন হয়ে যাবে—তবে আমার বংশীয় সম্পর্ক, আমার (বিবাহের) কারণ এবং আমার বৈবাহিক সম্পর্ক (শ্বশুর-জামাতার সম্পর্ক) ব্যতীত।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1996)


1996 - ` في الإبل فرع، وفي الغنم فرع `.
رواه الطبراني في ` الأوسط ` (رقم 328 / 2) : حدثنا أحمد بن رشدين حدثنا أحمد
ابن صالح حدثنا عبد الله بن وهب أخبرني عمرو بن الحارث عن أيوب بن موسى أن
يزيد ابن عبد المزني حدثه عن أبيه مرفوعا وقال:
` لم يروه عن أيوب إلا
عمرو، تفرد به ابن وهب `.
قلت: وهو ثقة، وكذلك من فوقه إلا يزيد بن عبد المزني، فإنه مجهول العين،
وليس مجهول الحال كما جزم به الحافظ في ` التقريب `، وإن أورده ابن حبان في
` الثقات ` (1 / 261) ، واغتر به الهيثمي فقال في ` مجمع الزوائد ` (4 / 28
) : ` رواه الطبراني في ` الكبير ` و ` الأوسط ` ورجاله ثقات `! وأقره
المناوي في ` فيض القدير `!! ، وراجع ` الإرواء ` (1165) .
(تنبيه) : هكذا متن الحديث في ` الأوسط `، وكذلك أورده الهيثمي في ` مجمع
الزوائد ` و ` مجمع البحرين ` (1 / 128 / 1) . وأما السيوطي فأورده في
الجامع بزيادة: ` ويعق عن الغلام، ولا يمس رأسه بدم `. عازيا لها لرواية
الطبراني في ` الكبير ` وحده، وكذلك ذكره الهيثمي أيضا في مكان آخر (4 / 58
) ، وهي في ` الأوسط ` حديث مستقل لكن بهذا السند نفسه وسيأتي. وقد أخرجه
الديلمي في ` مسند الفردوس ` (2 / 335) عن أبي نعيم معلقا قال: حدثنا محمد
ابن إبراهيم بن علي حدثنا أبو العباس بن قتيبة حدثنا حرملة حدثنا ابن وهب به
كاملا ولفظه: ` في الإبل فرع، ويعق عن الغلام ولا يمس رأسه بدم `. وقد
وجدت له شاهدا قويا من حديث نبيشة الهذلي مرفوعا: ` في كل سائمة فرع، تغذوه
ماشيتك، حتى إذا استحمل ذبحته فتصدقت بلحمه على ابن السبيل، فإن ذلك خير `.
أخرجه أبو داود وغيره بسند صحيح كما بينته في ` الإرواء ` (1181) . والعق
وترك الدميم له شاهد من حديث بريدة، وآخر من حديث عائشة، وقد خرجتهما في
المصدر المذكور تحت الحديث المشار إليه آنفا.
(الفرع) : أول ما تلده الناقة، كانوا يذبحونه لآلهتهم، فأبطله الإسلام،
وجعله لله لمن شاء على التخيير لا الإيجاب، وهو المراد بقوله صلى الله عليه
وسلم: ` لا فرع ... `. كما ترى بيانه في ` الإرواء ` (4 /




ইয়াযিদ ইবনে আব্দুল মুযানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর পিতা থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: "উটের ক্ষেত্রে ফারা’ (Far’) রয়েছে এবং ছাগলের ক্ষেত্রেও ফারা’ (Far’) রয়েছে।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1997)


1997 - ` في الأنف الدية إذا استوعب جدعه مائة من الإبل، وفي اليد خمسون وفي الرجل
خمسون وفي الآمة ثلث النفس وفي الجائفة ثلث النفس وفي المنقلة خمس عشرة وفي
الموضحة خمس وفي السن خمس وفي كل إصبع مما هنالك عشر `.
أخرجه البزار (رقم - 1531) والبيهقي (8 / 86) عن محمد بن عبد الرحمن عن
عكرمة بن خالد عن أبي بكر بن عبيد الله بن عمر عن أبيه عن عمر مرفوعا.
وقال البزار: ` لا نعلمه عن عمر إلا بهذا الإسناد `.
قلت: وهو ضعيف، محمد بن عبد الرحمن هو ابن أبي ليلى كما صرحت به رواية
البزار، وهو ضعيف سيء الحفظ. لكن الحديث له شاهد من حديث عمرو بن حزم في
حديثه الطويل في (الديات) عند النسائي (2 / 252) وغيره وهو مخرج في
` الإرواء ` (2273) . ولبعض فقراته شواهد متفرقة فيه من حديث ابن عباس (
2231) وأبي موسى (2272) وعبد الله بن عمرو (2285) ومكحول مرسلا (2296
) وابن عمرو أيضا (2297) . (استوعبه) أي قطع جميعه.
(الآمة) قال ابن الأثير: وفي حديث آخر: (المأمومة) وهما الشجة التي
بلغت أم الرأس، وهي الجلدة التي تجمع الدماغ.
(الجائفة) : الطعنة التي تنفذ إلى الجوف، والمراد هنا كل ما له قوة محيلة
كالبطن والدماغ.
(المنقلة) : هي التي تخرج منها صغار العظام وتنتقل من أماكنها، وقيل:
التي تنقل العظم، أي تكسره.
(الموضحة) : هي من الشجاج التي تبدي وضح العظم، أي بياضه.




উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম ইরশাদ করেছেন:

যখন কারো নাক সম্পূর্ণভাবে কেটে ফেলা হয়, তখন তার দিয়াত হলো একশত উট। আর হাতের (দিয়াত) পঞ্চাশটি উট এবং পায়ের (দিয়াত) পঞ্চাশটি উট। আর ’আল-আম্মাহ’র (যে আঘাত মস্তিষ্কের আবরণ পর্যন্ত পৌঁছে) ক্ষেত্রে পূর্ণ দিয়াতের এক-তৃতীয়াংশ। আর ’আল-জায়েফাহ’র (যা দেহের অভ্যন্তরীণ গহ্বরে প্রবেশ করে) ক্ষেত্রে পূর্ণ দিয়াতের এক-তৃতীয়াংশ। আর ’আল-মুনাক্কিলাহ’র (যে আঘাতে হাড় স্থানচ্যুত হয়) ক্ষেত্রে পনেরোটি (উট)। আর ’আল-মুওয়াদ্বিহা’র (যে আঘাত হাড়ের শুভ্রতা প্রকাশ করে) ক্ষেত্রে পাঁচটি (উট)। আর দাঁতের ক্ষেত্রে পাঁচটি (উট)। এবং সেখানে বিদ্যমান প্রতিটি আঙ্গুলের ক্ষেত্রে দশটি (উট)।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1998)


1998 - ` في المنافق ثلاث، إذا حدث كذب وإذا وعد أخلف وإذا ائتمن خان `.
أخرجه البخاري في ` التاريخ ` (4 / 2 / 386) والبزار (رقم - 87)
والطبراني في ` الأوسط ` (8080) عن يوسف بن الخطاب المدني عن عبادة بن
الوليد بن عبادة بن الصامت قال: سمعت جابر بن عبد الله قال: فذكره مرفوعا
. وقال البزار: ` لا نعلمه يروى عن جابر إلا من هذا الوجه، ويوسف مجهول `.
ولكن للحديث شاهد من حديث أبي هريرة مرفوعا بلفظ: ` ثلاث في المنافق وإن صلى
وإن صام، وزعم أنه مسلم، إذا حدث ... ` الحديث. أخرجه أحمد (2 / 397)
ومسلم (1 / 56) ولم يسق لفظه بتمامه عن حماد بن سلمة عن داود بن أبي هند عن
سعيد ابن المسيب عنه. وهو في ` الصحيحين ` وغيرهما بلفظ: ` آية النفاق ...
` إلخ.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:

মুনাফিকের মধ্যে তিনটি স্বভাব বিদ্যমান, যদিও সে সালাত আদায় করে, রোযা রাখে এবং নিজেকে মুসলিম বলে দাবি করে: যখন সে কথা বলে, মিথ্যা বলে; যখন সে ওয়াদা করে, তা ভঙ্গ করে; এবং যখন তার কাছে কোনো আমানত রাখা হয়, তখন সে তার খেয়ানত করে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (1999)


1999 - ` في أمتي كذابون ودجالون، سبعة وعشرون، منهم أربعة نسوة، وإني خاتم
النبين، لا نبي بعدي `.
أخرجه الطحاوي في ` مشكل الآثار ` (4 / 104) وأحمد (5 / 396) والطبراني
في
الكبير (3026) والأوسط (5582) عن قتادة عن أبي معشر عن إبراهيم النخعي
عن همام عن حذيفة أن نبي الله صلى الله عليه وسلم قال: فذكره، وقال
الطبراني: ` لا يروى عن حذيفة إلا بهذا الإسناد `.
قلت: وهو صحيح على شرط مسلم، وأبو معشر هو زياد بن كليب الكوفي. وفي
الحديث رد صريح على القاديانية وابن عربي قبلهم القائلين ببقاء النبوة بعد
النبي صلى الله عليه وسلم، وأن نبيهم المزعوم ميرزا غلام أحمد القادياني كذاب
ودجال من أولئك الدجاجلة.




হুযাইফা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "আমার উম্মতের মধ্যে সাতাশ জন মিথ্যাবাদী ও মহাপ্রতারক (দাজ্জাল) হবে। তাদের মধ্যে চার জন হলো নারী। আর নিশ্চয়ই আমি হলাম নবীগণের মোহর (খাতামুন নাবিয়্যিন); আমার পরে আর কোনো নবী নেই।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2000)


2000 - ` في عجوة العالية أول البكرة على ريق النفس شفاء من كل سحر أو سم `.
أخرجه أحمد (6 / 77 و 105 و 152) من طريق سليمان بن بلال عن شريك بن عبد الله
عن ابن أبي عتيق عن عائشة عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: فذكره.
قلت: وهذا إسناد جيد، وهو على شرط الشيخين، لولا أن في شريك بن عبد الله -
وهو ابن أبي نمر - ضعفا من قبل حفظه. وقد أخرجه مسلم (6 / 124) من طريق
إسماعيل بن حجر عن شريك بلفظ: ` إن في عجوة العالية شفاء، أو أنها ترياق أول
البكرة `. لم يذكر فيه الريق. لكني وجدت له شاهدا من حديث سعد بن أبي وقاص
مرفوعا بلفظ: ` من أكل سبع تمرات عجوة ما بين لابتي المدينة على الريق، لم
يضره يومه ذلك شيء حتى يمسي - قال: وأظنه قال: - وإن أكلها حين يمسي، لم
يضره شيء حتى يصبح `.
أخرجه أحمد (1 / 168) من طريق فليح عن عبد الله بن عبد
الرحمن يعني ابن معمر قال: حدث عامر بن سعد عمر بن عبد العزيز - وهو أمير على
المدينة - أن سعدا قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره.
قلت: وهذا سند جيد في الشواهد، وهو على شرط الشيخين أيضا على كلام في فليح
وهو ابن سليمان المدني. قال الحافظ: ` صدوق كثير الخطأ `. وقد تابعه
سليمان بن بلال عن عبد الله بن عبد الرحمن به. إلا أنه لم يذكر: ` على الريق
`، ولا الأكل حين يمسي، وقال: ` سم ` بدل: ` شيء `. أخرجه مسلم (6 /
123) . ثم أخرجه من طريق هاشم بن هاشم قال: سمعت عامر بن سعد به مختصرا وقال
: ` سم ولا سحر `.
الاستدراك
1 ص 104، الحديث 1575.
يضاف إلى المصادر المذكورة قبيل: `وعبد الغني ... `:
والطبراني في `المعجم الكبير` (22/75/185) .
2 ص 112، الحديث 1584:
قلت هناك: رواه الطبراني في `المعجم الكبير` من حديث عمران مرفوعًا، وفيه من لم أعرفهم كما قال الهيثمي (60/95) .
وأقول الآن بعد أن صدر المجلد الثامن عشر من `المعجم الكبير` بتحقيق الأخ الفاضل حمدي عبد المجيد السلفي وقد أهداه إلي مع بقية المجلدات آخرها الخامس والعشرون وبه ينتهي ` المعجم ` جزاهُ الله خيرًا على هديته الثمينة، وعلى ما قدم للمسلمين من جهد عظيم لإِخراج هذا السفر الجليل إلى عالم المطبوعات. أقول:
قال الطبراني في `معجمه` (18/124/254) :
حدثنا محمد بن حمويه الجوهري الأهوازي: ثنا أبو يوسف يعقوب بن إسحاق العلوي: ثنا بكر بن يحيى بن زبَّان: ثنا حسان بن إبراهيم عن محمد بن عبد الله عن عبد الرحمن بن مورق عن ابن الشخير عن عمران بن حصين عن رسول الله - صلى الله عليه وسلم - قال:
`إن أفضل عباد الله ... `.
هكذا وقع إسناده في المطبوعة، وفيه بعض الأخطاء من الناسخ أو الطابع لا بد من بيانها وتصحيحها، أو تصحيح الممكن منها، فأقول:
أولًا: قوله: محمد بن عبد الله، أخشى أن يكون اسم ` عبد الله ` محرفًا من ` سلمة بن كهيل ` فقد ذكروا ابنه محمد بن سلمة في شيوخ حسان بن إبراهيم الراوي هنا عنه، فانظر ` الجرح والتعديل ` (2/3/276) وترجمة حسان هذا من ` تهذيب الكمال ` للحافظ المزي.
ثانيًا: قوله: ` العلوي ` مصحف ` القلوسي ` كما في ترجمته من ` تاريخ بغداد ` (14/285) وترجمة شيخه هنا بكر بن يحيى في ` تهذيب المزي ` (4/232) لكنه تصحف على محققه الدكتور بشار عواد إلى `الفلوسي` بالفاء، وقد قيده السمعاني في ` الأنساب ` بضم القاف واللام.
ثالثًا: قوله: ` بن حمويه ` محرف من ` بن محمويه ` كذلك وقع في ترجمة هذا الشيخ من ` المعجم الأوسط ` للطبراني (2/151/




সা’দ ইবনে আবি ওয়াক্কাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত... রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ইরশাদ করেছেন:

"যে ব্যক্তি মদীনার দুই প্রস্তরক্ষেত্রের মধ্যবর্তী স্থানের (অর্থাৎ দুই ‘লাব্বার’) সাতটি আজওয়া খেজুর সকাল বেলায় খালি পেটে খাবে, ঐ দিন সন্ধ্যা পর্যন্ত কোনো বিষ বা জাদু তাকে ক্ষতি করতে পারবে না। আর যদি সে সন্ধ্যায় তা খায়, তবে সকাল পর্যন্ত কোনো কিছু তার ক্ষতি করবে না।"

[অন্য এক বর্ণনায় এসেছে, যা আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কর্তৃক বর্ণিত: "আলিয়ার আজওয়া খেজুর, যখন ভোরের শুরুতে খালি পেটে (খাওয়া হয়), তখন তা সকল প্রকার জাদু অথবা বিষের জন্য নিরাময় বা আরোগ্য।" ]