হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2321)


2321 - ` من اغتسل يوم الجمعة كان في طهارة إلى الجمعة الأخرى `.
رواه ابن خزيمة (176) وابن حبان (561) والحاكم (1 / 282) والطبراني في
` الأوسط ` (50 / 2 من ترتيبه) عن هارون بن مسلم العجلي البصري حدثنا أبان بن
يزيد عن يحيى بن أبي كثير عن عبد الله بن أبي قتادة قال: دخل علي أبي
وأنا أغتسل يوم الجمعة، فقال: غسلك هذا من الجنابة أو للجمعة؟ قلت: من جنابة
. قال: أعد غسلا آخر، إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.
قال الطبراني: ` لم يروه عن يحيى إلا أبان، ولا عنه إلا هارون `. قلت:
وهو صدوق كما قال الحافظ في ` التقريب `. ومن فوقه ثقات من رجال الشيخين.
وقال الحاكم: ` صحيح على شرط الشيخين، وهارون بن مسلم العجلي، يقال له:
الحنائي،
ثقة `. قلت: وهو ليس من رجال الشيخين بل ولا بقية الستة، خلافا
لما يوهمه كلام الحاكم، وإن وافقه الذهبي. وأما ابن خزيمة، فقد أعله بعنعة
يحيى، فقال: `.. إن كان يحيى بن أبي كثير سمع الخبر من عبد الله بن أبي
قتادة `. قلت: قد احتج به الشيخان وغيرهما، فالظاهر أن عنعنته إنما تضر
فيما رواه عن أنس ونحوه. والله أعلم. وأما قول المناوي في ` الفيض ` عقب
قول الحاكم المتقدم: ` وتعقبه الذهبي في ` المهذب `، فقال: هذا حديث منكر
، وهارون لا يدرى من هو؟ `. قلت: وهذا من أوهام الذهبي، فإنه ظن أن هارون
بن مسلم هذا هو الذي روى عن قتادة وعنه سلم بن قتيبة وغيره، قال أبو حاتم
فيه: ` مجهول `. وكذا في ` الميزان `. ثم ذكر فيه عقبه هارون بن مسلم صاحب
الحناء، ونقل فيه قول أبي حاتم المتقدم: ` فيه لين `. وقول الحاكم: ` ثقة
`. فاختلط عليه هذا بالذي قبله في ` المهذب `، فنشأ الوهم.




আবু কাতাদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর পুত্র আব্দুল্লাহ ইবনু আবী কাতাদা বলেন: আমি জুমু’আর দিন গোসল করছিলাম। তখন আমার পিতা আমার কাছে এসে জিজ্ঞেস করলেন: তোমার এই গোসল কি জানাবাতের (নাপাকি দূর করার) জন্য, নাকি জুমু’আর জন্য? আমি বললাম: জানাবাতের জন্য। তিনি বললেন: তুমি অন্য আরেকটি গোসল করো। কারণ আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে বলতে শুনেছি, তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:

"যে ব্যক্তি জুমু’আর দিন (জুমু’আর উদ্দেশ্যে) গোসল করে, সে পরবর্তী জুমু’আ পর্যন্ত পবিত্রতার মধ্যে থাকে।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2322)


2322 - ` من أكل لحما فليتوضأ `.
أخرجه أحمد (4 / 180، 5 / 289) عن معاوية بن صالح عن سليمان بن أبي الربيع -
قال أحمد: هو سليمان بن عبد الرحمن الذي روى عنه شعبة وليث بن سعد - عن
القاسم مولى معاوية قال: ` دخلت مسجد دمشق، فرأيت أناسا مجتمعين، وشيخا
يحدثهم، قلت: من هذا؟ قالوا: سهل بن الحنظلية، فسمعته يقول سمعت رسول
الله صلى الله عليه وسلم يقول: ` فذكره. قلت: وهذا سند حسن، بعد أن كشف
لنا الإمام أحمد عن هوية سليمان بن أبي الربيع هذا، فقد قال الهيثمي (1 / 248
) بعدما عزاه لأحمد: ` لم أر من ترجمه `. وهذه حقيقة، فالرجل لم يتعرض له
أحد بذكر بهذا الاسم الذي وقع في هذا السند، حتى ولا الحافظ في ` التعجيل `،
فرحم الله الإمام أحمد، ما أكثر علمه وفوائده! وسليمان الذي روى عنه الليث
وشعبة هو ابن عبد الرحمن بن عيسى، ويقال: سليمان بن يسار، ويقال: سليمان
بن أنس بن عبد الرحمن الدمشقي كما في ` التهذيب `. قلت: وينبغي أن يزاد: `
ويقال: سليمان بن أبي الربيع `. قلت: وهو ثقة. والقاسم هو ابن أبي عبد
الرحمن صاحب أبي أمامة، وهو حسن الحديث.
(فائدة) : الأمر في الحديث للاستحباب إلا في لحم الإبل، فهو للوجوب لثبوت
التفريق بينه وبين غيره من اللحوم، فإنهم سألوه صلى الله عليه وسلم عن الوضوء
من لحوم الإبل؟
فقال: ` توضؤوا `، وعن لحوم الغنم؟ فقال: ` إن شئتم `.
رواه مسلم وغيره. وهو مخرج في ` الإرواء ` (1 / 152 / 118) .




সাহল ইবনুল হানযালিয়াহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:

(আল-কাসিম বলেন) আমি দামেস্কের মসজিদে প্রবেশ করে দেখলাম, কিছু লোক সমবেত হয়ে আছে এবং একজন শায়খ (বৃদ্ধ) তাদেরকে হাদিস শুনাচ্ছেন। আমি জিজ্ঞাসা করলাম, ইনি কে? তারা বললো, সাহল ইবনুল হানযালিয়াহ। আমি তাকে বলতে শুনলাম যে, তিনি রাসুলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-কে বলতে শুনেছেন:

**"যে ব্যক্তি গোশত খেয়েছে, সে যেন (সালাতের জন্য) ওযু করে নেয়।"**









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2323)


2323 - ` من أكل مع قوم تمرا، فأراد أن يقرن فليستأذنهم `.
أخرجه ابن بشران في ` الفوائد المنتخبة ` (63 / 2) والخطيب في ` التاريخ ` (
7 / 180) من طريق عامر بن أبي الحسين، حدثني رحمة بن مصعب عن الشيباني عن
جبلة بن سحيم عن ابن عمر مرفوعا. قلت: وهذا إسناد حسن، لولا أن عامرا
هذا أورده العقيلي في ` الضعفاء ` وقال: ` لا يتابع على حديثه `. لكنه قد
توبع، فرواه ابن فضيل عن أبي إسحاق - وهو الشيباني - بلفظ: ` نهى رسول الله
صلى الله عليه وسلم عن الإقران، إلا أن تستأذن أصحابك `. أخرجه أبو داود (2
/ 148) . قلت: وإسناده صحيح على شرط مسلم. وتابعه سفيان: حدثنا جبلة بن
سحيم به، مثل لفظ ابن فضيل. أخرجه البخاري (5 /




ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি কোনো সম্প্রদায়ের সাথে খেজুর খায়, আর সে যদি (একসাথে দুটি করে) যুগল করে খেতে চায়, তবে সে যেন তাদের নিকট অনুমতি চেয়ে নেয়।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2324)


2324 - ` من أمركم من الولاة بمعصية فلا تطيعوه `.
أخرجه ابن ماجة (2 /




আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, "তোমাদের শাসক বা কর্তৃপক্ষদের মধ্যে যে কেউ তোমাদেরকে আল্লাহ্‌র অবাধ্যতার (পাপ কাজের) নির্দেশ দেয়, তোমরা তার আনুগত্য করো না।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2325)


2325 - ` من أم قوما وهم له كارهون، فإن صلاته لا تجاوز ترقوته `.
رواه ابن عساكر (4 / 15 / 2) عن أبي بكر الهذلي عن شهر بن حوشب عن أبي عبد
الله الصنابحي:
أن جنادة بن أبي أمية أم قوما، فلما قام من الصلاة التفت
عن يمينه فقال: أترضون؟ قالوا: نعم. ثم فعل ذلك عن يساره، ثم قال: إني
سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره. قلت: وهذا إسناد ضعيف جدا
، آفته أبو بكر الهذلي، متروك الحديث. وشهر بن حوشب سيء الحفظ. من طريقه
أخرجه الطبراني كما في ` فيض القدير `. لكن الحديث قد صح بمجموع رواية جمع من
الصحابة بألفاظ متقاربة، فراجع ` الترغيب ` (1 / 171) مع تخرجنا عليه.




আবু আব্দুল্লাহ আস-সুনাবিহী (রাহিমাহুল্লাহ) থেকে বর্ণিত:
একদা জুনাদা ইবনু আবি উমাইয়া (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) একদল লোকের ইমামতি করেন। সালাত শেষ করে তিনি ডান দিকে ফিরে জিজ্ঞেস করলেন: আপনারা কি (আমার ইমামতিতে) সন্তুষ্ট? তারা বললেন: হ্যাঁ। এরপর তিনি বাঁ দিকে ফিরেও একই কথা জিজ্ঞেস করলেন, তখনও তারা বললেন: হ্যাঁ। অতঃপর তিনি বললেন: আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি:
"যে ব্যক্তি এমন একদল লোকের ইমামতি করে, যারা তাকে অপছন্দ করে (অর্থাৎ তার ইমামতিতে অসন্তুষ্ট), তাহলে তার সালাত তার কলার হাড় (তারকূওয়াহ) অতিক্রম করে না।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2326)


2326 - ` من باع بيعتين في بيعة، فله أوكسهما أو الربا `.
رواه ابن أبي شيبة في ` المصنف ` (6 / 120 / 502) وعنه (3461) وابن حبان
في ` صحيحه ` (1110) وكذا الحاكم (2 / 45) والبيهقي (5 / 343) : أخبرنا
ابن أبي زائدة عن محمد بن عمرو عن أبي سلمة عن أبي هريرة مرفوعا.
قلت: وهذا سند حسن وقد صححه الحاكم، ووافقه الذهبي، ثم ابن حزم في `
المحلى ` (9 / 16) . ورواه النسائي (7 /




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "যে ব্যক্তি এক চুক্তির মধ্যে দুটি বেচা-কেনা সম্পন্ন করে, সে দুটির মধ্যে সবচেয়ে কম মূল্যটি গ্রহণ করবে, অন্যথায় তা সুদ হবে।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2327)


2327 - ` من باع دارا ولم يجعل ثمنها في مثلها، لم يبارك له فيها `.
أخرجه البخاري في ` التاريخ ` (4 / 2 / 328) وابن ماجة (2 / 97)
والطيالسي (1 / 263) وابن عدي (358 / 1) عن يوسف بن ميمون عن أبي عبيدة بن
حذيفة عن أبيه حذيفة بن اليمان قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:
فذكره. قلت: وهذا إسناد ضعيف، يوسف بن ميمون - هو المخزومي مولاهم الكوفي
الصباغ - ضعيف، ومع ذلك قال ابن عدي: ` هذا الحديث لا أرى به بأسا `.
قلت: لعل ذلك لأنه تابعه يزيد بن أبي خالد الدالاني عن أبي عبيدة به. أخرجه
البخاري أيضا وكذا الطيالسي والبيهقي (6 / 33) . ويزيد هذا - هو أبو خالد
الدالاني - من رجال ` التهذيب `، قال الحافظ: ` صدوق يخطىء كثيرا، وكان
يدلس `. ولم يعرفه البوصيري في ` زوائده `، فقال (155 / 1) : ` لم أعلم
يزيد بن أبي خالد بعدالة ولا جرح `. قلت: والسبب في ذلك أنه عزاه البيهقي
فقط، ووقع فيه: ` يزيد بن أبي خالد `
¬_________
(¬1) الطلاق: الآية: 2. اهـ.
ليس فيه زيادة: ` الدالاني `، وهي
ثابتة عند البخاري، ثم هو مشهور بكنيته، واسم أبيه عبد الرحمن، فهو يزيد بن
عبد الرحمن، وهكذا ذكروا اسمه لما ترجموا الابن في كنيته المذكورة، فخفي
أمره على البوصيري. أقول: ومن ضعفه أنه اضطرب في إسناده، فرواه وهب بن جرير
: أخبرنا شعبة عنه به مرفوعا. أخرجه من هذا الوجه البخاري والبيهقي وأبو
جعفر الرزاز في ` حديثه ` (4 / 75 / 1) . وتابعه سلم بن قتيبة سمع شعبة رفعه
. أخرجه البخاري. وخالفهم ابن مهدي وغندر وآدم، ثلاثتهم عن شعبة به موقوفا
على حذيفة. أخرجه البخاري عنهم. وتابعهم الطيالسي، فقال: حدثنا شعبة به
موقوفا. وقد ذكر ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 290) هذا الاختلاف على
شعبة، وساق رواية وهب المرفوعة، ورواية الطيالسي الموقوفة، ثم قال عن أبيه
: ` موقوف عندي أقوى، ويزيد أبو خالد ليس بالدالاني `. كذا قال! وبعد
تصريح البخاري في بعض روايات الحديث بأنه الدالاني، فلا وجه للنفي لأن من حفظ
حجة على من لم يحفظ. وللحديث شاهد من حديث سعيد بن حريث مرفوعا به. أخرجه
ابن ماجة والبيهقي وأحمد (3 / 467، 4 / 307) وابن عدي (9 / 1) والضياء
في ` المنتقى من مسموعاته ` (79 / 2) من طريق إسماعيل بن إبراهيم بن مهاجر
حدثني عبد الملك بن عمير عن عمرو بن حريث عن أخيه سعيد بن حريث به.
قلت:
وإسماعيل هذا ضعيف كما في ` التقريب `. لكن تابعه أبو حمزة عن عبد الملك بن
عمير به. أخرجه البيهقي من طريق الحاكم بسنده عن محمد بن موسى بن حاتم حدثنا
علي بن الحسن بن شقيق حدثنا أبو حمزة. قلت: وأبو حمزة - هو محمد بن ميمون
السكري - ثقة من رجال الشيخين، وكذلك من فوقه، إلا أن محمد بن موسى بن حاتم
متكلم فيه. قال القاسم السياري: ` أنا بريء من عهدته `. وقال ابن أبي سعد:
` إن كان محمد بن علي الحافظ سيء الرأي فيه `. وتابعه قيس بن الربيع أيضا عن
عبد الملك بن عمير به. ذكره البوصيري دون أن يعزوه لمخرج، وأظنه يعني ما
أخرجه أحمد (1 / 190) عن قيس بن الربيع حدثنا عبد الملك بن عمير عن عمرو بن
حريث قال: ` قدمت المدينة، فقاسمت أخي، فقال سعيد بن زيد: إن رسول الله صلى
الله عليه وسلم قال: ` لا يبارك في ثمن أرض ولا دار لا يجعل في أرض ولا دار
`. قلت: فأنت ترى أن قيس بن الربيع جعله من حديث سعيد بن زيد لا من حديث سعيد
بن حريث. ولعل ذلك من سوء حفظه الذي ضعف بسببه. وقد روي من طريق أخرى عن
عمرو بن حريث مرفوعا، ولكن إسناده واه، فقال ابن أبي حاتم (2 / 324) : `
سألت أبي عن حديث رواه عقبة بن خالد عن الصباح بن يحيى عن خالد بن أبي أمية عن
عمرو بن حريث: (فذكره) ، قال أبي: يروونه عن عمرو بن حريث عن أخيه سعيد بن
حريث `.
قلت: يشير إلى أنه منكر من مسند عمرو بن حريث، وآفته الصباح هذا،
فقد أورده الهيثمي في ` المجمع ` (4 / 111) عن حذيفة وعمرو بن حريث معا
مرفوعا، وقال: ` رواه الطبراني في ` الكبير ` وفيه الصباح بن يحيى وهو
متروك `. ثم إن للحديث شاهدا آخر من حديث أبي أمامة غير أن سنده واه جدا،
فإنه من رواية إبراهيم بن حبان بن حكيم بن علقمة بن سعد بن معاذ عن حماد بن
سلمة عن برد بن سنان عن مكحول عنه مرفوعا. أخرجه ابن عدي في ترجمة إبراهيم هذا
(ق 4 / 1) ، وقال: ` ضعيف الحديث `. ثم ساق له حديثين هذا أحدهما، ثم قال
: ` وهذان الحديثان مع أحاديث أخرى عامتها موضوعة مناكير، وهكذا سائر
أحاديثه `. وجملة القول أن الحديث بمتابعته وشاهده الأول لا ينزل عن رتبة
الحسن. والله سبحانه وتعالى أعلم. ثم رأيت في بعض أصولي وأوراقي القديمة
بخطي أن الحافظ السخاوي حسنه أيضا في ` الفتاوي الحديثية ` (ق 30 / 2) . ثم
وجدت له شاهدا ثالثا يرويه عبد القدوس بن محمد العطار، حدثنا يزيد بن تميم بن
زيد حدثني أبو مرحوم السندي: حدثني المنتصر بن عمارة عن أبيه عن أبي ذر مرفوعا
نحوه. أخرجه الطبراني في ` الأوسط ` (1 / 143 / 2) ، وقال: ` لا يروى عن
أبي ذر إلا بهذا الإسناد، تفرد به عبد القدوس `. قلت: هو صدوق من شيوخ
البخاري، لكن من بينه وبين أبي ذر لم أعرفهم، وقد
نقل الحافظ في ` اللسان `
عن ` تلخيص ` الذهبي أنه قال في المنتصر بن عمارة وأبيه: ` مجهولان `.
(تنبيه) : بعد كتابة ما تقدم رجعت إلى بعض أصولي القديمة التي عندي، فوجدت
فيه أن أبا يعلى الموصلي أخرج الحديث في ` حديث محمد بن بشار ` (127 / 1) من
طريق شعبة بسنده المتقدم عن حذيفة مرفوعا وموقوفا، والوقف أكثر. وجاء في
بعض طرقه ما يأتي: ` قال بندار - هو محمد بن بشار - : فقلت لعبد الرحمن بن
مهدي: تحفظ هذا الحديث عن شعبة؟ قال: نعم. قلت: حدثني به. فقال: حدثني
شعبة عن يزيد أبي خالد. قلت له: الدالاني؟ قال: ليس بالدالاني. فقلت له:
فإن ههنا من يرويه عن شعبة عن يزيد أبي خالد الدالاني، فألح علي؟ قلت: حرمي
بن عمارة، قال: ويحه! ما أقل علمه بالحديث! يزيد الدالاني أصغر من أن يسمع
من أبي عبيدة بن حذيفة `. قلت: ولا أجد ما يحملنا على نفي سماعه منه، فأبو
عبيدة تابعي من الطبقة الثاني عند الحافظ، وقد ذكروا له - أعني أبا خالد -
رواية عن قتادة، وهو رأس الطبقة الرابعة عنده، وعن أبي إسحاق السبيعي،
وهو من الطبقة الثالثة، ويحيى بن إسحاق بن عبد الله بن طلحة الأنصاري،
وإبراهيم بن عبد الرحمن السكسكي، وهما من الخامسة، وكل هؤلاء رووا عن
الصحابة، كأبي عبيدة، فما الذي يمنع أن يكون أبو خالد سمع منه كما سمع من
هؤلاء التابعين الذين ذكرنا وغيرهم ممن لم نذكر؟ بل هذا هو الذي يشير إليه
صنيع الحافظ في ترجمة أبي خالد، فإنه قال: ` إنه من السابعة `. وقد ذكر في
المقدمة أن الطبقة السادسة هم الذين عاصروا الخامسة، لكن لم يثبت لهم لقاء أحد
من الصحابة كابن جريج، وأن السابعة كبار أتباع التابعين كمالك والثوري
فإذن
أبو خالد الدالاني في اطلاع الحافظ العسقلاني - وكفى به حجة في هذا العلم -
وهو من كبار أتباع التابعين، فليس هناك ما يمنع من إمكان سماعه من الطبقة
الثانية، وهي تعني كبار التابعين. والله أعلم. ومما يسترعي الانتباه أن
هذا النفي الذي رواه أبو يعلى عن محمد بن بشار عن ابن مهدي قد روى البخاري عنه
ما ينافيه، وعليه اعتمدت في إثبات أنه الدالاني، فقد قال في ترجمة يزيد أبي
خالد الواسطي عن إبراهيم السكسكي: قال لي محمد بن بشار: أخبرنا ابن مهدي
وغندر عن شعبة عن يزيد بن أبي خالد الدالاني عن أبي عبيدة ... فعلق عليه المحقق
اليماني بقوله: ` هكذا في الأصلين، وكأنه من أوهام ابن بشار، زاد كلمة: `
ابن `، وزاد: ` الدالاني `. والله أعلم `. وكان عمدته في هذا التوهيم
قول ابن أبي حاتم المتقدم: ` وليس بالدالاني `. وقد نقله اليماني عنه قبيل
تعليقه المذكور. وبالجملة، فهذه مسألة مشكلة، تحتاج إلى مزيد من البحث
والتحقيق، فإن تخطئة الإمام البخاري أو أحد رواته الثقات ليس بالأمر الهين،
فعسى الله أن ييسر لي أو لغيري ممن له عناية بهذا العلم الشريف ما يكشف عن
الحقيقة، ويزيل المشكلة، ولكن ذلك لا يمنع من تحسين الحديث. والله سبحانه
وتعالى أعلم.




হুযাইফা ইবনুল ইয়ামান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি কোনো ঘর বিক্রি করে এবং তার মূল্য অনুরূপ (অন্য ঘর বা সম্পদে) ব্যবহার করে না, তার জন্য তাতে বরকত দেওয়া হয় না।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2328)


2328 - ` من تواضع لله رفعه الله `.
أخرجه أبو نعيم في ` الحلية ` (8 / 46) عن علي بن الحسن بن أبي الربيع الزاهد
حدثنا إبراهيم بن أدهم قال: سمعت محمد بن عجلان يذكر عن أبيه عن أبي هريرة
مرفوعا، وقال:
` غريب من حديث إبراهيم، لا أعرف له طريقا غيره `.
قلت: وهو صدوق مع زهده، فالحديث حسن لأن من فوقه ثقات معروفون لولا أن
الراوي عن إبراهيم لم أعرفه، لكن صنيع أبي نعيم يشعر بأنه لم يتفرد به. ومن
الغريب قوله: ` لا أعرف له طريقا غيره `. مع أن مسلما أخرجه في ` صحيحه ` (8
/ 21) من طريق العلاء عن أبيه عن أبي هريرة مرفوعا به في حديث، وأخرجه غيره
أيضا، وقد خرجته في ` إرواء الغليل ` (2262) . وله شاهد من حديث عمر
مرفوعا، وزاد: ` وقال: انتعش رفعك الله، فهو في نفسه صغير وفي أعين
الناس عظيم ومن تكبر خفضه الله، وقال: اخسأ خفضك الله، فهو في أعين الناس
صغير وفي نفسه كبير، حتى يكون أهون عليهم من كلب `. أخرجه أبو نعيم (7 /
129) والخطيب (2 / 110) وقالا: ` غريب من حديث الثوري، تفرد به سعيد بن
سلام `. قلت: وهو كذاب، كما قال أحمد وغيره ولذا خرجته في ` الضعيفة ` (
1295) . وللحديث شاهد آخر من رواية دراج، وهو ضعيف، عن أبي الهيثم عن أبي
سعيد الخدري مرفوعا بلفظ: ` من تواضع لله درجة يرفعه الله درجة، حتى يجعله في
أعلى عليين، ومن تكبر على الله درجة يضعه الله درجة، حتى يجعله في أسفل
السافلين `. أخرجه ابن ماجة (2 / 544) وابن حبان (1942) . ثم وجدت لحديث
عمر طريقا أخرى من رواية عاصم بن محمد عن أبيه عن ابن
عمر عنه - قال: لا أعلمه
إلا - رفعه، قال: ` يقول الله تبارك وتعالى: من تواضع لي هكذا، رفعته هكذا
. وجعل يزيد (ابن هارون) باطن كفه إلى الأرض وأدناها إلى الأرض، ` رفعته
هكذا ` وجعل باطن كفه إلى السماء، ورفعها نحو السماء `. أخرجه أحمد (1 /
44) بسند صحيح، ومن طريقه وطريق غيره أخرجه الضياء المقدسي في ` المختارة `
(رقم




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
যে ব্যক্তি আল্লাহর (সন্তুষ্টির) জন্য বিনয়ী হয়, আল্লাহ তাকে উচ্চ মর্যাদা দান করেন।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2329)


2329 - ` من تولى غير مواليه، فقد خلع ربقة الإيمان من عنقه `.
أخرجه أحمد (3 / 332) والبخاري في ` التاريخ ` (2 / 1 / 143) عن يعقوب بن
محمد بن طحلاء حدثنا خالد بن أبي حيان عن جابر مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد جيد، رجاله ثقات رجال مسلم غير خالد بن أبي حيان قال ابن
أبي حاتم (1 / 2 / 324) : ` سئل أبو زرعة عنه؟ فقال: مديني ثقة `. وذكره
ابن حبان في ` الثقات ` (1 /




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি তার প্রকৃত মাওলা (অভিভাবক বা পৃষ্ঠপোষক) ব্যতীত অন্য কাউকে অভিভাবক হিসেবে গ্রহণ করে, সে যেন তার গর্দান থেকে ঈমানের বন্ধন ছিন্ন করল।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2330)


2330 - ` من جامع المشرك وسكن معه، فإنه مثله `..
أخرجه أبو داود (2787) عن سليمان بن موسى أبي داود حدثنا جعفر بن سعد بن سمرة
بن جندب حدثني خبيب بن سليمان عن أبيه سليمان بن سمرة عن سمرة بن جندب
مرفوعا. وهذا إسناد ضعيف، سليمان بن سمرة قال الحافظ:
` مقبول `. وابنه
خبيب مجهول. وجعفر بن سعد بن سمرة ليس بالقوي. وسليمان بن موسى أبو داود
الكوفي الخراساني فيه لين. ومن هنا تعلم خطأ المناوي في قوله في ` التيسير `
: ` وإسناده حسن `. مع أنه في ` الفيض ` تعقب رمز السيوطي لحسنه بضعف سليمان
هذا! قلت: لكن له طريق أخرى يتقوى بها، أخرجه الحاكم (2 /




সামুরা ইবনে জুনদুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, (তিনি বলেন,) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি কোনো মুশরিকের সাথে মেলামেশা করে এবং তার সাথে বসবাস করে, সে তার মতোই (গণ্য হবে)।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2331)


2331 - ` من جلب على الخيل يوم الرهان، فليس منا `.
أخرجه الطبراني في ` الكبير ` (3 / 126 / 2) : حدثنا محمد بن عبد الله
الحضرمي أخبرنا ضرار بن صرد أبو نعيم أخبرنا عبد العزيز بن محمد عن ثور بن زيد
عن عكرمة عن ابن عباس مرفوعا.
¬_________
(¬1) ترجم له من ` الميزان ` و ` اللسان `، و ` التهذيب ` أيضا على خلاف قاعدته
أن لا يترجم في ` اللسان ` لمن ترجم له في ` التهذيب `، ورمز له فيه بـ ` م `
، وأظنه وهما، ولم يترجم له في ` التقريب `. اهـ.
قلت: وهذا إسناد ضعيف جدا، رجاله كلهم ثقات غير ضرار هذا، فهو متروك الحديث
كما قال البخاري والنسائي، وضعفه غيرهما، إلا أن أبا حاتم قال فيه: ` صدوق
، صاحب قرآن وفرائض، يكتب حديثه ولا يحتج به، روى حديثا عن معتمر عن أبيه
عن الحسن عن أنس عن النبي صلى الله عليه وسلم في فضيلة بعض الصحابة ينكرها أهل
المعرفة بالحديث `.
قلت: ولخص ذلك الحافظ بقوله: ` صدوق، له أوهام `. ولا يخفى ما فيه من
التساهل، ولعل المناوي اغتر به حين قال في ` التيسير `: ` وإسناده لا بأس
به `. لكنه لم يتفرد به، فقد قال الحافظ في ` التلخيص ` (4 / 165) : `
رواه ابن أبي عاصم (يعني في ` الجهاد `) ، والطبراني من حديث ابن عباس،
وإسناد ابن أبي عاصم لا بأس به `.
قلت: ولعل رواية ابن أبي عاصم هذه من الطريق التي رواها أبو يعلى في ` مسنده
` (4 / 303 / 2413) ، وعنه الضياء في ` المختارة ` (64 / 24 / 2) بسنده
الصحيح عن ثور بن زيد عن إسحاق بن جابر عن عكرمة عن ابن عباس به. وقال الضياء
: ` إسحاق بن جابر العدني، لم يذكره ابن أبي حاتم في (كتابه) `.
قلت: بلى قد ذكره، لكنه قال: ` إسحاق بن عبد الله العدني، هو الذي يقال له
إسحاق بن جابر `. فكأن جابرا جده. وهكذا ذكره البخاري (1 / 1 / 397)
منسوبا لأبيه عبد الله. وأما ابن حبان فذكره في ` الثقات ` (8 / 107)
منسوبا لجده برواية عبد الله بن نافع الصائغ عنه. فقد روى عنه ثقتان: هذا،
وثور بن زيد، فلعله لذلك قال الحافظ:
` لا بأس بإسناده `.
(الجلب) في السباق: أن يتبع الرجل فرسه إنسانا، فيزجره، ويصيح حثا على
السوق.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি বাজির দৌড়ের দিনে ঘোড়ার উপর (চিৎকার করে বা তাড়া দিয়ে) হস্তক্ষেপ করে, সে আমাদের দলভুক্ত নয়।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2332)


2332 - ` من حلف على يمين مصبورة كاذبا (متعمدا) فليتبوأ بوجهه مقعده من النار `.
أخرجه أبو داود (2 / 74) والزيادة له، والطبري في ` تفسيره ` (6 / 533 /
7287) والحاكم (4 / 294) وأحمد (4 / 436 / 441) وأبو نعيم في ` الحلية
` (6 / 277) من طرق عن هشام بن حسان عن محمد بن سيرين عن عمران بن حصين
مرفوعا، وقال الحاكم: ` صحيح على شرط الشيخين `، ووافقه الذهبي.
قلت: وهو كما قالا، على الخلاف في سماع ابن سيرين من عمران بين الإمام أحمد
والدارقطني، فالأول أثبت والآخر نفي والمثبت مقدم على النافي، ولاسيما
وله في مسلم ثلاثة أحاديث (1 / 137 و 5 / 97 و 105) الأول منها صرح فيه
بالتحديث عن عمران.




ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি স্বেচ্ছায় মিথ্যা জেনেও ’ইয়ামিন মাসবূরাহ্’র ওপর কসম করে, সে যেন (জাহান্নামে) তার মুখমণ্ডল দ্বারা নিজের আসন বানিয়ে নেয়।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2333)


2333 - ` من توضأ ثم قال: سبحانك اللهم وبحمدك لا إله إلا أنت أستغفرك وأتوب إليك،
كتب في رق، ثم طبع بطابع، فلم يكسر إلى يوم القيامة `.
أخرجه النسائي في ` اليوم والليلة ` (¬1) (رقم 81) والحاكم (1 / 564)
والضياء في ` المنتقى من مسموعاته بمرو ` (68 / 1) عن أبي غسان يحيى بن كثير:
حدثنا شعبة عن
¬_________
(¬1) ` تحفة الأشراف ` (3 / 447) . اهـ.
أبي هاشم (عن أبي مجلز) عن قيس بن عباد عن أبي سعيد الخدري
قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم (فذكره) . وقال الحاكم: ` صحيح على
شرط مسلم `، ووافقه الذهبي. وأقول بل هو على شرط الشيخين، فإن رجاله كلهم
ثقات من رجالهما. وأبو هاشم الرماني اسمه يحيى، واسم أبيه دينار، وقيل
غير ذلك. وتابعه روح بن القاسم عن أبي هاشم به مرفوعا. أخرجه أبو إسحاق
المزكي في ` الفوائد المنتخبة ` (1 / 150 / 1) عن عيسى بن شعيب: أخبرنا روح
بن القاسم. وهذا إسناد حسن، روح بن القاسم ثقة حافظ من رجال الشيخين أيضا.
وعيسى بن شعيب - وهو النحوي البصري الضرير - صدوق له أوهام. وتابعه الوليد
بن مروان عن أبي هاشم به نحوه. أخرجه أبو بكر الشافعي في ` الفوائد ` (3 / 1
/ 257 / 1) . والوليد هذا مجهول. وتابعه قيس بن الربيع عن أبي هاشم به
مرفوعا. ذكره أبو نعيم في ` اليوم والليلة ` له. وقيس سيء الحفظ. وتابعه
سفيان الثوري عن أبي هاشم به. أخرجه ابن السني (28) ، والمعمري (¬1) عن يوسف
بن أسباط عنه. لكن يوسف هذا فيه ضعف، وقد خالفه عبد الرحمن بن مهدي، فقال:
حدثنا سفيان
¬_________
(¬1) ` النكت الظراف ` للحافظ (3 / 447) . اهـ.
به، إلا أنه أوقفه على أبي سعيد. أخرجه الحاكم. وتابعه عبد
الله بن المبارك عن سفيان به موقوفا. أخرجه النسائي. ثم أخرجه من طريق غندر
عن شعبة بإسناده موقوفا. ولا شك أن الوقف أصح إسنادا، لكن قال الحافظ (¬1) :
` مثله لا يقال من قبل الرأي، فله حكم المرفوع `. ثم وجدت للحديث شاهدا،
فقال ابن بشران في ` الأمالي ` (147 / 1) : أخبرنا أبو محمد عبد الله بن محمد
بن طاهر العلوي - بالمدينة - : حدثنا محمد بن الحسن بن نصر البغدادي المعروف بـ
(المقدسي) : حدثنا محمد بن حسان الأزرق حدثنا وكيع بن الجراح عن هشام بن عروة
عن أبيه عن عائشة مرفوعا به. قلت: الأزرق ثقة مترجم في ` التهذيب `، ومن
فوقه من رجال الشيخين. والمقدسي لم أعرفه، ولم أره في ` تاريخ بغداد `،
وهو من شرطه. والعلوي لم أعرفه أيضا. والخلاصة: أن الحديث صحيح بمجموع طرقه
المرفوعة، والموقوف لا يخالفه لأنه لا يقال بمجرد الرأي كما تقدم عن الحافظ.
ولعله من أجل ذلك ساقه ابن القيم في ` زاد المعاد ` (1 / 69) مساق المسلمات
، ولكنه عزاه لـ ` سنن النسائي ` وهو وهم لم يتنبه له المعلق عليه، ثم قصر
في تخريجه تقصيرا فاحشا، فلم يعزه إلا لابن السني وضعف إسناده - وهو كذلك
كما تقدم دون الأسانيد التي قبله - فأوهم أن الحديث ضعيف. والله المستعان.
¬_________
(¬1) ` النكت الظراف ` للحافظ (3 / 447) . اهـ.




আবু সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি ওযু করলো এবং তারপর বলল: ‘সুবহানাকা আল্লাহুম্মা ওয়া বিহামদিকা, লা ইলাহা ইল্লা আনতা, আসতাগফিরুকা ওয়া আতুবু ইলাইক’ (অর্থাৎ: হে আল্লাহ! আমি আপনার পবিত্রতা ঘোষণা করছি এবং আপনার প্রশংসার সাথে। আপনি ছাড়া কোনো ইলাহ নেই। আমি আপনার কাছে ক্ষমা প্রার্থনা করছি এবং আপনার দিকেই তওবা করছি), তার এই দু’আ একটি চামড়ার পাণ্ডুলিপিতে লিপিবদ্ধ করা হয়, অতঃপর তাতে একটি সীলমোহর এঁটে দেওয়া হয়, যা কিয়ামত দিবস পর্যন্ত ভাঙ্গা হবে না (অর্থাৎ তা অক্ষত ও সংরক্ষিত থাকবে)।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2334)


2334 - ` من حلف في قطيعة رحم، أو فيما لا يصلح، فبره أن لا يتم على ذلك `.
أخرجه ابن ماجة (1 / 648) عن حارثة بن أبي الرجال عن عمرة عن عائشة
مرفوعا. قلت: وهذا إسناد ضعيف، ورجاله ثقات غير حارثة، فإنه ضعيف كما قال
الحافظ، وتبعه البوصيري (130 / 2) . لكني وجدت للحديث شاهدا قويا من رواية
أبي معبد عن ابن عباس رفعه قال: ` من حلف بيمين على قطيعة رحم أو معصية فحنث
فذلك كفارة له `. أخرجه الطحاوي في ` مشكل الآثار ` (1 / 287) : حدثنا بكار
حدثنا أبو أحمد محمد بن عبد الله بن الزبير الأسدي الكوفي حدثنا محمد بن شريك
عن سليمان الأحول عنه. قلت: وهذا إسناد صحيح، رجاله كلهم ثقات من رجال `
التهذيب `، غير بكار - وهو ابن قتيبة الثقفي البكراوي، أبو بكرة الفقيه
الحنفي البصري - قال السيوطي في ` حسن المحاضرة ` (1 / 263) : ` روى عنه أبو
عوانة في ` صحيحه ` وابن خزيمة، وولاه المتوكل القضاء بمصر سنة ست وأربعين
ومائتين، وله أخبار في العدل والعفة والنزاهة والورع، مات سنة سبعين
ومائتين `. قلت: وقد ذكره الذهبي في شيوخ الطحاوي في ترجمة هذا، بل ساق له
حديثا آخر من روايته عن بكار بن قتيبة حدثنا أبو أحمد حدثنا سفيان.. أقول:
هذا لاحتمال أن يكون بكار في هذا الحديث إنما هو ابن سهل الدمياطي مولى بني
هاشم، فقد ذكر الذهبي في الرواة عنه الطحاوي، والدمياطي ضعيف كما قال
النسائي ولكني أستبعد أن يكون هو المراد في الحديث، لأمرين: الأول: أنه لو
كان هو لنسبه الإمام الطحاوي تفريقا بينه وبين بكار بن قتيبة الثقة. والآخر
: أنني لم أر له رواية عن أبي أحمد الزبيري، بخلاف ابن قتيبة. والله أعلم.




আবদুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:

“যে ব্যক্তি আত্মীয়তার সম্পর্ক ছিন্ন করার বিষয়ে অথবা যা অসঙ্গত (অর্থাৎ পাপের কাজ), এমন কোনো বিষয়ে কসম করল, তার জন্য পুণ্যের কাজ হলো সেই কসম পূর্ণ না করা।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2335)


2335 - ` من خاف أدلج ومن أدلج بلغ المنزل ألا إن سلعة الله غالية ألا إن سلعة الله
الجنة `.
رواه البخاري في ` التاريخ ` (1 / 2 / 111 / 1873) والترمذي (2452)
والحاكم (4 /




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
“যে ব্যক্তি (পথের কষ্ট বা বিপদকে) ভয় করে, সে রাতের প্রথম ভাগে (দ্রুত) যাত্রা শুরু করে। আর যে রাতের প্রথম ভাগে যাত্রা শুরু করে, সে গন্তব্যে পৌঁছে যায়। জেনে রেখো, আল্লাহর পণ্য অতি মূল্যবান। জেনে রেখো, আল্লাহর পণ্য হলো জান্নাত।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2336)


2336 - ` من كان الله عز وجل خلقه لواحدة من المنزلتين يهيئه لعملها، وتصديق ذلك في
كتاب الله عز وجل: * (ونفس وما سواها. فألهمها فجورها وتقواها) * (¬1) `.
أخرجه أحمد (4 / 438) : حدثنا صفوان بن عيسى أنبأنا عزرة بن ثابت عن يحيى بن
عقيل عن ابن يعمر عن أبي الأسود الديلي قال:
¬_________
(¬1) الشمس: الآية: 7، 8. اهـ.
` غدوت على عمران بن حصين
يوما من الأيام، فقال: يا أبا الأسود - فذكر الحديث - أن رجلا من جهينة أو من
مزينة أتى النبي صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسول الله! أرأيت ما يعمل الناس
اليوم ويكدحون فيه، شيء قضي عليهم، أو مضى عليهم في قدر قد سبق، أو فيما
يستقبلون مما أتاهم به نبيهم صلى الله عليه وسلم واتخذت عليهم به الحجة؟ قال
: بل شيء قضي عليهم ومضى عليهم. قال: فلم يعملون إذا يا رسول الله؟ قال: `
فذكره. وأخرجه ابن جرير في ` تفسيره ` (30 / 135) من طريق صفوان بن عيسى
وأبي عاصم النبيل قالا: حدثنا عزرة بن ثابت به. قلت: وهذا إسناد صحيح،
رجاله كلهم ثقات رجال مسلم. وابن يعمر اسمه يحيى أيضا. والحديث أخرجه مسلم
(8 /




ইমরান ইবনু হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, জুহাইনা অথবা মুযাইনা গোত্রের এক ব্যক্তি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে বললেন: ইয়া রাসূলাল্লাহ! লোকেরা আজ যে আমল করে ও চেষ্টা-সাধনা করে, আপনি কি মনে করেন তা এমন বিষয় যা তাদের জন্য পূর্বেই নির্ধারণ করে দেওয়া হয়েছে এবং যা অতীত হয়ে গেছে, নাকি এমন বিষয় যা তারা ভবিষ্যতে করবে এবং তাদের নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যা তাদের কাছে নিয়ে এসেছেন ও যার মাধ্যমে তাদের ওপর হুজ্জাত (প্রমাণ) কায়েম করা হয়েছে?

তিনি (নবী সাঃ) বললেন: বরং তা এমন বিষয় যা তাদের জন্য পূর্বেই নির্ধারণ করা হয়েছে এবং অতীত হয়ে গেছে।

লোকটি বললেন: তাহলে হে আল্লাহর রাসূল! তারা কেন আমল করবে?

তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্ল যাকে দুই স্তরের (জান্নাত বা জাহান্নামের) কোনো একটির জন্য সৃষ্টি করেছেন, তিনি তাকে তার উপযোগী আমলের জন্য প্রস্তুত করে দেন। আর এর সত্যায়ন আল্লাহর কিতাবে রয়েছে— ‘শপথ নফসের (প্রাণের) এবং তাঁর (আল্লাহর) যিনি একে সুবিন্যস্ত করেছেন। অতঃপর তিনি তাকে তার অসৎকর্ম ও সৎকর্মের জ্ঞান দান করেছেন।’ (সূরা আশ-শামস: ৭-৮)।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2337)


2337 - ` من ذكرت عنده، فنسي الصلاة علي، خطئ به طريق الجنة `.
رواه عيسى بن علي الوزير في ` ستة مجالس ` (190 / 2) قال: قرىء على أبي
الحسن محمد بن الحسن الجنديسابوري - وأنا أسمع - قيل له: حدثكم جعفر بن عامر
وسهل بن بحر قالا: حدثنا عمر بن حفص بن غياث حدثنا أبي عن محمد بن عمرو عن
أبي سلمة عن أبي هريرة مرفوعا. قلت: وهذا إسناد حسن إن ثبتت عدالة
الجنديسابوري هذا، فإني لم أعرفه. ومثله جعفر بن عامر، ولكنه مقرون مع سهل
بن بحر، وهذا قد قال عنه ابن أبي حاتم (2 / 1 / 194) : ` كتبت عنه بالري مع
أبي، وكان صدوقا `. لكن الحديث صحيح، فقد روي عن ابن عباس عند ابن ماجة،
وحسين بن علي عند الطبراني، وابنه محمد بن الحسين أبي جعفر الباقر مرسلا عند
إسماعيل القاضي في ` فضل الصلاة على النبي صلى الله عليه وسلم ` (رقم




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, (নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন): যার নিকট আমার আলোচনা করা হলো, অতঃপর সে আমার ওপর সালাত (দরূদ) পাঠ করতে ভুলে গেল, সে জান্নাতের পথ ভুল করল (অর্থাৎ, জান্নাতের রাস্তা থেকে বিচ্যুত হলো)।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2338)


2338 - ` من راح روحة في سبيل الله كان له بمثل ما أصابه من الغبار مسكا يوم القيامة `.
أخرجه ابن ماجة (2 / 177) : حدثنا محمد بن سعيد بن يزيد بن إبراهيم التستري
حدثنا أبو عاصم عن شبيب عن أنس بن مالك قال: قال رسول الله صلى الله عليه
وسلم: فذكره. قلت: وهذا إسناد حسن، شبيب - وهو ابن بشر - مختلف فيه،
وقال الحافظ:
` صدوق يخطىء `. والتستري من شيوخ البزار وغيره من الحفاظ،
وقد ذكره ابن حبان في ` الثقات ` (9 / 140) برواية الحافظ أحمد بن يحيى بن
زهير التستري عنه.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:
"যে ব্যক্তি আল্লাহর পথে একবার গমন করে, কিয়ামতের দিন তার গায়ে লাগা ধূলিকণার পরিমাণের পরিবর্তে তার জন্য মিশক (সুগন্ধি) থাকবে।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2339)


2339 - ` من رمانا بالليل فليس منا `.
له طريقان: الأول: عن أبي هريرة أخرجه أحمد (2 / 321) والبخاري في `
الأدب المفرد ` (1279) وابن حبان (1857) ، عن يحيى بن أبي سليمان عن سعيد
المقبري عنه مرفوعا. وقال البخاري: ` في إسناده نظر `. قلت: وذلك لضعف
يحيى هذا، لكن يقويه ما يأتي. الآخر: عن ابن عباس أخرجه الطبراني (3 /
126 / 2) عن عبد العزيز بن محمد عن ثور بن زيد عن عكرمة عن ابن عباس مرفوعا.
قلت: وهذا سند صحيح، رجاله كلهم ثقات.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:

"যে ব্যক্তি রাতের বেলায় আমাদের দিকে (কিছু) নিক্ষেপ করে, সে আমাদের দলভুক্ত নয়।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (2340)


2340 - ` من سب أصحابي، فعليه لعنة الله والملائكة والناس أجمعين `.
رواه الطبراني (3 / 174 / 1) عن الحسن بن قزعة عن عبد الله بن خراش عن العوام
بن حوشب عن عبد الله بن أبي الهذيل عن ابن عباس مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد ضعيف، عبد الله بن خراش قال الحافظ: ` ضعيف، وأطلق عليه
ابن عمار الكذب `.
وله طريق آخر، رواه أبو القاسم المهراني في ` الفوائد
المنتخبة ` (2 / 10 / 1) والسهمي (234) والخطيب في ` التاريخ ` (14 /
241) : عن علي بن يزيد الصدائي قال: أخبرنا أبو شيبة الجوهري عن أنس مرفوعا
به، وزاد: ` لا يقبل الله منه صرفا ولا عدلا `، قال: والعدل الفرائض،
والصرف التطوع. وقال المهراني: ` هذا حديث غريب من حديث أنس، تفرد بروايته
أبو شيبة الجوهري عنه، ولا نعلم رواه عن أبي شيبة غير علي بن يزيد الصدائي `
. قلت: وفيه لين كما في ` التقريب `. وأبو شيبة الجوهري اسمه يوسف بن
إبراهيم التميمي، وهو ضعيف. وله شاهد مرسل، يرويه البغوي في ` حديث علي بن
الجعد ` (9 / 92 / 2) عن فضيل بن مرزوق عن محمد بن أبي مرزوق عن عطاء بن أبي
رباح مرفوعا مرسلا به، دون قوله: ` والملائكة `. قلت: ورجاله ثقات غير
محمد بن أبي مرزوق فلم أجد له ترجمة، وقد ذكر المزي في شيوخ فضيل بن مرزوق
محمد بن سعيد صاحب عكرمة، فلعله هو، ولكني لم أعرفه أيضا، ولا ذكره المزي
في الرواة عن عكرمة. فالله أعلم، ولا أستبعد أن يكون محمد بن خالد الآتي.
وتابعه ابن خالد عن عطاء به. أخرجه أبو نعيم في ` الحلية ` (7 / 103) من طريق
أبي يحيى الحماني عن سفيان عنه. وقال: ` كذا رواه الحماني عن سفيان،
وأرسله، وتفرد به عنه. ومحمد بن خالد يعرف بأبي حمنة الكوفي الضبي `.
قلت: كذا وقع: ` أبو حمنة `، وفي ` الجرح ` (3 / 2 / 241) : ` أبو خبية `
، وقال عن أبيه: ` ليس به بأس `. وقال الحافظ في ` التقريب `: ` مختلف في
كنيته، ولقبه سؤر الأسد، صدوق `. والحماني فيه ضعف مع كونه من رجال
الشيخين، قال الحافظ: ` صدوق يخطىء `.
قلت: وبالجملة، فالحديث بمجموع طرقه حسن عندي على أقل الدرجات. والله أعلم
. ثم رأيت الحديث في ` كتاب السنة ` لابن أبي عاصم (1001) : حدثنا أبو بكر بن
أبي شيبة حدثنا أبو معاوية عن محمد بن خالد عن عطاء به. وهذا إسناد مرسل صحيح
، رجاله كلهم ثقات، وهي متابعة قوية من أبي معاوية لأبي يحيى الحماني، ترد
قول أبي نعيم أن الحماني تفرد به!




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি আমার সাহাবীগণকে গালি দেয়, তার উপর আল্লাহ্‌র লা’নত (অভিশাপ), ফেরেশতাদের লা’নত এবং সমস্ত মানুষের লা’নত (অভিশাপ) পতিত হয়।"