সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ
2347 - ` من صلى اثنتي عشرة ركعة بنى الله له بيتا في الجنة `.
أخرجه الطبراني في ` الأوسط ` (1 / 58 /
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
"যে ব্যক্তি বারো রাকাত (নফল) সালাত আদায় করবে, আল্লাহ তার জন্য জান্নাতে একটি ঘর নির্মাণ করবেন।"
2348 - ` إن الله تعالى حرم الخمر، فمن أدركته هذه الآية وعنده منها شيء، فلا يشرب
ولا يبع `.
أخرجه مسلم (5 / 39) وأبو يعلى في ` مسنده ` (2 / 320 / 1056) قالا -
والسياق لمسلم - : حدثنا عبيد الله بن عمر القواريري حدثنا عبد الأعلى بن عبد
الأعلى أبو همام حدثنا سعيد الجريري عن أبي نضرة عن أبي سعيد الخدري قال:
سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يخطب بالمدينة قال: ` يا أيها الناس إن
الله تعالى يعرض بالخمر، ولعل الله سينزل فيها أمرا، فمن كان عنده منها شيء
، فليبعه ولينتفع به `.
فما لبثنا إلا يسيرا حتى قال النبي صلى الله عليه
وسلم: فذكره. قال: فاستقبل الناس بما كان عندهم منها في طرق المدينة فسفكوها
. (سفكوها) : أي: أراقوها. ومن هذا الوجه أخرجه البيهقي في ` السنن ` (6
/ 11) . والظاهر أن الآية التي أشار إليها النبي صلى الله عليه وسلم هي قوله
تعالى في سورة المائدة (91) : * (إنما يريد الشيطان أن يوقع بينكم العداوة
والبغضاء في الخمر والميسر ويصدكم عن ذكر الله وعن الصلاة فهل أنتم منتهون) *
. وهو آخر آية أنزلت في تحريم الخمر كما يبدو من حديث عمر المروي في الترمذي
وغيره، وقد صححه ابن المديني كما في ` تفسير ابن كثير ` (2 / 92) ولعله من
شواهده المذكورة في ` الدر المنثور ` (2 /
আবু সাঈদ আল-খুদরি (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-কে মদিনায় খুতবা দিতে শুনেছি। তিনি বললেন, “হে লোকসকল! নিশ্চয় আল্লাহ তাআলা মদ সম্পর্কে ইঙ্গিত দিচ্ছেন, সম্ভবত আল্লাহ এ ব্যাপারে (খুব শীঘ্রই) কোনো নির্দেশ নাযিল করবেন। সুতরাং যার কাছে এর কোনো অংশ আছে, সে যেন তা বিক্রি করে দেয় এবং তা দ্বারা উপকৃত হয়।”
এরপর আমরা অল্প কিছু সময় অতিবাহিত করতে না করতেই নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বললেন, “নিশ্চয় আল্লাহ তাআলা মদকে হারাম করে দিয়েছেন। সুতরাং যার কাছেই এই নিষেধাজ্ঞা পৌঁছেছে এবং তার কাছে মদের কোনো অংশ অবশিষ্ট আছে, সে যেন তা পান না করে এবং বিক্রিও না করে।”
বর্ণনাকারী বলেন: (এই নির্দেশ আসার পর) লোকেরা তাদের কাছে থাকা মদ মদিনার পথে পথে নিয়ে এলো এবং তা ঢেলে নষ্ট করে দিল।
2349 - ` من صلى الضحى أربعا وقبل الأولى أربعا، بني له بيت في الجنة `.
رواه الطبراني في ` الأوسط ` (59 / 1 من ترتيبه) عن سهل بن عثمان حدثنا
إبراهيم بن محمد الهمداني عن عبد الله بن عياش عن أبي بردة عن أبي موسى
مرفوعا. وقال: ` لم يروه عن أبي بردة إلا ابن عياش، ولا عنه إلا إبراهيم
، تفرد به سهل `. قلت: وهو ثقة من رجال مسلم. وإبراهيم بن محمد هو - فيما
أرى - ابن مالك بن زبيد الهمداني الخيواني، عم هارون بن إسحاق، ترجمه ابن أبي
حاتم (1 / 1 / 129) وقال: ` سألت أبي عنه؟ فقال: لا بأس به `. وعبد
الله بن عياش متوسط الحال، أخرج له مسلم في الشواهد وهو صدوق يغلط كما في `
التقريب `. فالإسناد حسن. والله أعلم. والمراد بـ (الأولى) صلاة الظهر
فيما يبدو لي. والله أعلم.
আবু মূসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
"যে ব্যক্তি চার রাকাত সালাতুদ-দুহা (চাশতের সালাত) এবং যোহরের (ফরযের) পূর্বে চার রাকাত (সুন্নাত) সালাত আদায় করবে, তার জন্য জান্নাতে একটি ঘর নির্মাণ করা হবে।"
2350 - ` من صلى صلاة لم يتمها، زيد عليها من سبحاته حتى تتم `.
رواه ابن منده في ` المعرفة ` (2 / 109 / 1) والضياء في ` المختارة ` (60 /
বর্ণিত হয়েছে যে,
যে ব্যক্তি কোনো সালাত আদায় করলো, কিন্তু তা পূর্ণাঙ্গ করলো না (ত্রুটিযুক্ত রইল), সেই সালাত সম্পূর্ণ হওয়ার জন্য তার নফল বা অতিরিক্ত (সুন্নাহ) সালাত থেকে এর ঘাটতি পূরণ করা হবে।
2351 - ` من صلى على جنازة في المسجد، فليس له شيء `.
أخرجه أبو داود (2 / 66) وابن ماجة (1 / 462) واللفظ له والطحاوي في `
شرح المعاني ` (1 / 284) وابن عدي (198 / 2) والبيهقي (4 / 52) وعبد
الرزاق في ` المصنف ` (6579) وابن أبي شيبة (3 /
যে ব্যক্তি মসজিদের অভ্যন্তরে কোনো জানাজার সালাত আদায় করলো, তার জন্য (নির্দিষ্ট কোনো) প্রতিদান নেই।
2352 - ` من ضرب مملوكه ظالما أقيد منه يوم القيامة `.
أخرجه أبو نعيم في ` الحلية ` (4 / 378) : حدثنا سليمان بن أحمد قال: حدثنا
محمد بن عثمان بن أبي شيبة قال: حدثنا فرات بن محبوب قال: حدثنا الأشجعي عن
سفيان عن حبيب بن أبي ثابت عن ميمون بن أبي شبيب عن عمار بن ياسر مرفوعا
وقال: ` غريب من حديث الثوري وحبيب، لم يروه عنه مجودا إلا الأشجعي `.
قلت: واسمه عبيد الله بن عبد الرحمن الكوفي، وهو أثبت الناس كتابا في
الثوري، ومن فوقه ثقات رجال الشيخين، غير ميمون بن أبي شبيب، وهو ثقة،
لكن ابن أبي ثابت مدلس، وقد عنعنه، فهذه علة. وفرات بن محبوب لم أجد من
وثقه سوى ابن حبان (9 / 13) ، لكن قال ابن أبي حاتم (3 / 2 / 80) : ` روى
عنه أبو زرعة `. قلت: وهو لا يروي إلا عن ثقة، لكنه خولف كما يأتي. ومحمد
بن عثمان بن أبي شيبة فيه ضعف. وأما المنذري فقال (3 / 161) : ` رواه
الطبراني، ورواته ثقات `. ثم رأيت الحديث في ` الأدب المفرد ` للبخاري (181) ، قال: حدثنا محمد بن
يوسف وقبيصة: حدثنا سفيان به، إلا أنه أوقفه. ثم
وجدت للحديث شاهدا قويا، فقال البخاري في ` الأدب المفرد ` (185) : حدثنا
محمد بن بلال قال: حدثنا عمران عن قتادة عن زرارة بن أوفى عن أبي هريرة مرفوعا
بلفظ: ` من ضرب ضربا اقتص منه يوم القيامة `. وأخرجه الطبراني في ` الأوسط `
(رقم
আম্মার ইবনে ইয়াসির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি তার ক্রীতদাসকে অন্যায়ভাবে প্রহার করবে, কিয়ামতের দিন তার কাছ থেকে এর প্রতিশোধ (বা বদলা) নেওয়া হবে।”
2353 - ` من غسل ميتا فستره، ستره الله من الذنوب، ومن كفن مسلما، كساه الله من
السندس `.
رواه ابن بشران في ` الأمالي الفوائد ` (2 / 137 / 1) : أخبرنا أبو الحسين
عبد الباقي بن قانع قال: حدثنا أحمد بن شهاب بن أيوب الأهوازي قال: حدثنا عبد
الملك بن
مروان الحذاء الأهوازي قال: حدثنا سليم بن أخضر عن سعير بن الخمس عن
أبي غالب عن أبي أمامة مرفوعا. قلت: وهذا إسناد حسن، رجاله ثقات، لولا
أني لم أجد لأحمد بن شهاب ترجمة. لكن يبدو أنه لم يتفرد به، فقد قال الهيثمي
(3 / 21) : ` رواه الطبراني في ` الكبير `، وفيه أبو عبد الله الشامي، روى
عن أبي خالد ولم أجد له ترجمة `. ثم طبع المعجم الكبير ` للطبراني، فوجدت
فيه الحديث من طريقين عن أبي غالب: الأولى: من طريق سعير المتقدمة، وقد
كشفت لي عن خطأ في اسم والد أحمد الأهوازي: (شهاب) ، صوابه: (سهل) ، فقال
الطبراني (8 / 337 / 8077) : حدثنا أحمد بن سهل بن أيوب الأهوازي به. وأحمد
بن سهل هذا له ترجمة في ` اللسان `، ولم يحك عن أحد فيه كلاما، لكنه ذكر له
حديثا قال فيه: ` وهذا خبر منكر، وإسناد مركب ... `. ثم ذكر أن له حديثين
غريبين جدا، أحدهما في ` المعجم الصغير ` للطبراني. قلت: وهو في ` الأوسط `
أيضا (1 / 110 / 2 / 2220) وله فيه حديثان آخران (
আবু উমামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত: "যে ব্যক্তি কোনো মৃত ব্যক্তিকে গোসল করালো এবং (তার ত্রুটি) গোপন রাখলো, আল্লাহ তাআলা তাকে পাপসমূহ থেকে আবৃত রাখবেন। আর যে ব্যক্তি কোনো মুসলিমকে কাফন পরালো, আল্লাহ তাআলা তাকে (জান্নাতের) ’সুন্দুস’ (পাতলা রেশমি বস্ত্র) পরিধান করাবেন।"
2354 - ` من غل منها (يعني الصدقة) بعيرا أو شاة أتي به يوم القيامة يحمله `.
أخرجه ابن ماجة (1810) عن عمرو بن الحارث أن موسى بن جبير حدثه: أن عبد الله
بن عبد الرحمن بن الحباب الأنصاري حدثه: أن عبد الله بن أنيس حدثه: أنه
تذاكر
هو وعمر بن الخطاب يوما الصدقة، فقال عمر: ألم تسمع رسول الله صلى الله
عليه وسلم حين يذكر غلول الصدقة أنه من غل منها ... ؟ قال: فقال عبد الله بن
أنيس: بلى. قلت: وهذا إسناد ضعيف، ابن الحباب هذا لا يعرف إلا بهذه
الرواية، ولم يوثقه غير ابن حبان. لكن الحديث صحيح، فإن له شاهدا مفصلا من
حديث أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعا. أخرجه الشيخان وغيرهما، تراه في `
الترغيب ` (2 / 187) .
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "যে ব্যক্তি সাদকা (বা যাকাতের সম্পদ) থেকে একটি উট অথবা একটি ছাগলও আত্মসাৎ করবে, কিয়ামতের দিন তাকে তা বহন করা অবস্থায় নিয়ে আসা হবে।"
2355 - ` من قال: لا إله إلا الله (مخلصا) دخل الجنة `.
أخرجه ابن حبان (7) عن محرر بن قعنب الباهلي حدثنا رباح بن عبيدة عن ذكوان
السمان عن جابر بن عبد الله مرفوعا به دون الزيادة، وفيه قصة.
قلت: وسنده صحيح، ومحرر براءين مهملتين، ووقع في الأصل: (محرز) بمهملة
ثم معجمة وهو تصحيف، وثقه أبو زرعة، وقال أحمد: ` لا بأس به `. ثم أخرجه
ابن حبان (4) وأحمد (5 / 236) وأبو نعيم (7 / 312) من طريق سفيان بن
عيينة عن عمرو بن دينار عن جابر: ` أن معاذا لما حضرته الوفاة، قال اكشفوا
عني سجف القبة، سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: من شهد أن لا إله
إلا الله مخلصا من قلبه دخل الجنة `. وإسناد أحمد ثلاثي، وهو صحيح على شرط
الشيخين. ورواه صدقة بن يسار عن أنس أن النبي صلى الله عليه وسلم قال لمعاذ
بن جبل: فذكره مثل لفظ
ذكوان. أخرجه أبو نعيم (7 / 174) بسند صحيح. ثم
أخرجه (9 / 254) من طريق الهيثم بن جماز عن أبي داود عن زيد بن أرقم مرفوعا
بلفظ الترجمة مع الزيادة. وهذا إسناد واه. وأخرجه البزار (ص
জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি একনিষ্ঠভাবে (ইখলাসের সাথে) ‘লা ইলাহা ইল্লাল্লাহ’ বলবে, সে জান্নাতে প্রবেশ করবে।”
2356 - ` من قتل نفسا معاهدة بغير حقها لم يرح رائحة الجنة وإن ريح الجنة توجد من
مسيرة مائة عام `.
رواه الضياء في ` صفة الجنة ` (3 / 86 / 2) من طريقين عن عيسى بن يونس عن عوف
الأعرابي عن محمد بن سيرين عن أبي هريرة مرفوعا، وقال: ` وإسناده عندي
على شرط الصحيح `. قلت: وهو كما قال. وقد جاء الحديث من حديث أبي بكرة
وقد خرجته في ` التعليق الرغيب ` (3 /
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: যে ব্যক্তি কোনো চুক্তিবদ্ধ ব্যক্তিকে (যাকে নিরাপত্তা প্রদান করা হয়েছে) অন্যায়ভাবে হত্যা করবে, সে জান্নাতের সুঘ্রাণও পাবে না। অথচ জান্নাতের সুঘ্রাণ একশত বছরের পথের দূরত্ব থেকেও পাওয়া যায়।
2357 - ` من كان بينه وبين قوم عهد، فلا يحلن عقدة ولا يشدها حتى يمضي أمدها، أو
ينبذ إليهم على سواء `.
أخرجه الطيالسي (1 / 240 / 2075) : حدثنا شعبة عن أبي الفيض الشامي قال:
سمعت سليم بن عامر يقول: ` كان بين معاوية وبين الروم عهد، فكان يسير
في بلادهم، حتى إذا انقضى العهد أغار عليهم، وإذا رجل على دابة، أو على
فرس، وهو يقول: الله أكبر، وفاء لا غدر، (مرتين) ، فإذا هو عمرو بن
عبسة السلمي، فقال له معاوية: ما تقول؟ قال عمرو: سمعت رسول الله صلى
الله عليه وسلم يقول: (فذكره) ، فرجع معاوية بالناس `. وهكذا أخرجه أبو
داود (1 / 434) والترمذي (1580) وأحمد (4 /
আমর ইবনে আবাসা আস-সুলামী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:
সালীম ইবনে আমের (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, মুয়াবিয়া (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সাথে রোমীয়দের একটি সন্ধিচুক্তি ছিল। চুক্তি শেষ হওয়ার পরই যেন আক্রমণ করতে পারেন, সেজন্য তিনি তাদের ভূখণ্ডের দিকে অগ্রসর হচ্ছিলেন। এমতাবস্থায় তিনি দেখলেন, একজন লোক তার সাওয়ারী বা ঘোড়ার উপর আরোহণ করে উচ্চস্বরে বলছেন: আল্লাহু আকবার! চুক্তি পূর্ণ করো, বিশ্বাসঘাতকতা নয় (কথাটি তিনি দুইবার বললেন)।
তিনি ছিলেন আমর ইবনে আবাসা আস-সুলামী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)। মুয়াবিয়া (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাকে জিজ্ঞেস করলেন: আপনি কী বলছেন? আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি, "যে ব্যক্তি ও কোনো জাতির মধ্যে চুক্তি বিদ্যমান থাকে, সে যেন চুক্তির মেয়াদ শেষ না হওয়া পর্যন্ত সেই চুক্তির কোনো গাঁট শিথিল না করে, অথবা নতুন করে শক্ত না করে, কিংবা তাদের নিকট সমানভাবে (চুক্তি ভঙ্গের ঘোষণা) নিক্ষেপ না করে।"
এই কথা শুনে মুয়াবিয়া (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তার লোকজনকে নিয়ে ফিরে আসলেন।
2358 - ` من كان له أرض فأراد بيعها، فليعرضها على جاره `.
أخرجه ابن ماجة (2493) والضياء في ` المختارة ` (65 / 55 / 1) عن شريك عن
سماك عن عكرمة عن ابن عباس عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: فذكره.
وهذا إسناد ضعيف، سماك - وهو ابن حرب - صدوق، كما قال الحافظ، لكن روايته عن
عكرمة خاصة مضطربة، وقد تغير بآخره فكان ربما يلقن.
وشريك - وهو ابن عبد
الله القاضي - ضعيف لسوء حفظه. لكن الحديث صحيح، فإن له شواهد من حديث أبي
رافع والشريد بن سويد وسمرة، وهي مخرجة في ` الإرواء ` (1538 و 1539) .
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন:
"যার কোনো জমি আছে এবং সে তা বিক্রি করতে চায়, সে যেন তা তার প্রতিবেশীর নিকট পেশ করে (অর্থাৎ, বিক্রির প্রস্তাব দেয়)।"
2359 - ` من كذب في حلمه، كلف يوم القيامة عقد شعيرة `.
أخرجه الترمذي (2282) والدارمي (2 / 125) والحاكم (4 / 392) وأحمد (1
/ 76 و 90 و 91) وعبد الله بن أحمد (131) من طرق عن عبد الأعلى بن عامر عن
أبي عبد الرحمن السلمي عن علي بن أبي طالب مرفوعا. وقال الترمذي: ` حديث
حسن `. وقال الحاكم: ` صحيح الإسناد `! ورده الذهبي بقوله: ` قلت: عبد
الأعلى ضعفه أبو زرعة `. وقال الحافظ: ` صدوق يهم `. وقال في ` الفتح ` (
12 / 359) : ` إسناده حسن، وقد صححه الحاكم، ولكنه من رواية عبد الأعلى بن
عامر، ضعفه أبو زرعة `. قلت: ومما يدل على ضعفه وسوء حفظه اضطرابه في متن
هذا الحديث، وذلك على وجوه: الأول: هذا.
الثاني: بلفظ: ` ... كلف أن
يعقد بين شعيرتين `. أخرجه الحاكم. الثالث: بلفظ: ` من كذب في الرؤيا
متعمدا فليتبوأ مقعده من النار `. أخرجه أحمد (1 / 131) . الرابع: مثله،
إلا أنه قال: ` من كذب علي متعمدا ... `. أخرجه أحمد (1 / 130) .
قلت: وهذا اللفظ الأخير هو الأشبه، فقد جاء عن علي من طريق أخرى عن حبيب عن
ثعلبة عن علي مرفوعا به. أخرجه أحمد (1 / 78) . ورجاله ثقات رجال الشيخين -
على عنعنة حبيب، وهو ابن أبي ثابت - غير ثعلبة - وهو ابن يزيد الحماني -
وثقه النسائي وابن حبان. واللفظ الثاني محفوظ من حديث ابن عباس مرفوعا به،
إلا أنه قال: ` من تحلم بحلم لم يره، كلف أن يعقد بين شعيرتين ولن يفعل `.
أخرجه البخاري (12 /
আলী ইবনে আবি তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি তার স্বপ্নে (স্বপ্ন দেখার দাবি করে) মিথ্যা বলল, কিয়ামতের দিন তাকে একটি যব শস্যদানা দিয়ে গিঁট বাঁধতে বাধ্য করা হবে।"
2360 - ` من كف غضبه كف الله عنه عذابه ومن خزن لسانه ستر الله عورته ومن اعتذر إلى
الله قبل الله عذره `.
أخرجه أبو يعلى في ` مسنده ` (3 / 1071) ومن طريقه الضياء في ` المختارة ` (
249 / 2) والدولابي في ` الكنى ` (1 / 194 و 195 و 2 / 44) وأبو عثمان
النجيرمي في ` الفوائد ` (44 / 2) عن الربيع بن سليمان قال: حدثني أبو عمرو
مولى أنس بن مالك أنه سمع أنس بن مالك يقول: ` فذكره مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد ضعيف، أبو عمرو مولى أنس، لا يعرف، لم يزد ابن أبي حاتم
في ترجمته على قوله (4 / 2 / 410) : ` روى عنه الربيع بن سليم `. قال المعلق
عليه: ` مثله في ` الكنى ` للبخاري رقم (474) ووقع في (ك) : سليمان `.
قلت: وهكذا وقع في أبي يعلى وفي موضع من ` كنى الدولابي `، وكناه بأبي
سليمان، وفي الموضعين الآخرين منه: ` الربيع بن مسلم `، وكذلك وقع في `
الفوائد `. وأورده في ` الميزان ` و ` اللسان ` كما جاء في ابن أبي حاتم
والبخاري: ` ربيع بن سليم الكوفي عن أبي عمر (كذا) مولى أنس مرفوعا (فذكر
الحديث) ، رواه عنه يزيد بن الحباب، وهذا في ` مسند ابن أبي شيبة `، قال
الأزدي: منكر الحديث. وقال ابن معين: ليس بشيء. وقال أبو حاتم: شيخ `.
قلت: وهو عند أبي يعلى من طريق ابن أبي شيبة الربيع بن سليمان كما سبق.
وأورده ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 141) من طريق زيد بن الحباب، لكنه
قال
عن سليمان أبي الربيع (وفي ` الميزان ` و ` اللسان `: ابن الربيع) (عن)
مولى أنس به. وهذا مقلوب، والصواب: الربيع بن سليمان أو سليم. وإن
الاختلاف في ضبط اسمه لدليل واضح على أن الرجل غير مشهور ولا معروف. وقد
ترجم ابن أبي حاتم في ` الجرح والتعديل ` (1 / 2 / 443) لربيع بن سليم
الأزدي أبي سليمان الخلقاني البصري. وفيه ذكر قول ابن معين وأبي حاتم
المتقدمين. لكن الحافظ في ` اللسان ` فرق بين الربيع بن سليم الكوفي راوي هذا
الحديث، وبين الربيع بن سليم البصري الخلقاني. ومن العجب أنه أعاد فيه قول
ابن معين وأبي حاتم المشار إليهما آنفا دون أن يشير إلى ذلك أدنى إشارة.
والذي يظهر لي أن الكوفي هو غير البصري، وأن الأول هو صاحب هذا الحديث،
وهو غير معروف، وأن الآخر هو الذي ضعفه ابن معين، ولا علاقة له بهذا الحديث
. والله أعلم. وقد قال ابن أبي حاتم عقبه: ` قال أبي: هذا حديث منكر `.
ولعل هذا هو عمدة الأزدي في قول راويه: ` منكر الحديث `، كما تقدم. وللحديث
طريق أخرى، فقال ابن بشران في ` الأمالي ` (108 / 1) ، وعنه الضياء في `
المختارة ` (109 / 2) : أخبرنا أبو علي محمد بن أحمد الصواف: أنبأ بشر بن
موسى: حدثنا أبو حفص - يعني: عمرو بن علي الفلاس - حدثنا الفضل بن العلاء
الكوفي
حدثنا سفيان عن حميد عن أنس به، وقال الضياء: ` الفضل ذكره ابن أبي
حاتم، ولم يذكر فيه جرحا `. قلت: ترجمه برواية جمع من الثقات عنه، وقال (
3 / 2 / 65) : ` سألت أبي عنه؟ فقال: هو شيخ، يكتب حديثه `. وذكره ابن
حبان في ` الثقات ` (7 / 318 و 9 / 5) . قلت: وسائر رجال الإسناد ثقات من
رجال الشيخين غير بشر بن موسى - وهو ابن صالح أبو علي الأسدي - وهو ثقة أمين
، عاقل ركين، كما قال الخطيب في ترجمته (7 / 86) . وأبو علي محمد بن أحمد
الصواف ترجمه الخطيب أيضا (1 / 289) وروى عن محمد بن أبي الفوارس أنه قال:
` كان ثقة مأمونا من أهل التحرز، ما رأيت مثله في التحرز `. قلت: فالإسناد
عندي حسن، ولاسيما إذا ضم إليه الطريق الأولى. والله أعلم. وله طريق ثالث
، ولكنه مما لا يفرح به! أخرجه ابن بشران أيضا (139 / 2) عن بشر بن الحسين
: حدثنا الزبير بن عدي عن أنس به. قلت: بشر هذا متروك. وله شاهد عن عمر بن
الخطاب. أخرجه الدينوري في ` المنتقى من المجالسة ` (296 / 2) عن المغيرة بن
مسلم عن هشام عن عبد الله عنه. قال أبو جعفر: ` لا أدري من هشام هذا؟ `.
আনাস ইবনে মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:
যে ব্যক্তি তার ক্রোধ দমন করে, আল্লাহ তার থেকে তাঁর শাস্তি (আযাব) দূর করে দেন। আর যে তার জিহ্বাকে নিয়ন্ত্রণে রাখে, আল্লাহ তার গোপন ত্রুটিসমূহ ঢেকে দেন। আর যে আল্লাহর নিকট ওযর পেশ করে (বা ক্ষমা প্রার্থনা করে), আল্লাহ তার ওযর কবুল করে নেন।
2361 - ` من لم يصل ركعتي الفجر، فليصلهما بعدما تطلع الشمس `.
أخرجه الترمذي (423) وابن خزيمة (1117) وابن حبان (613) والحاكم (1 /
274 و 307) والبيهقي (2 / 484) عن عمرو بن عاصم حدثنا همام عن قتادة عن
النضر بن أنس عن بشير بن نهيك عن أبي هريرة مرفوعا. وقال الحاكم: ` صحيح
على شرط الشيخين `، ووافقه الذهبي، وهو كما قالا، وأشار الترمذي إلى
إعلاله بتفرد عمرو بن عاصم فقال: ` هذا حديث لا نعرفه إلا من هذا الوجه، ولا
نعلم أحدا روى هذا الحديث عن همام بهذا الإسناد نحو هذا إلا عمرو بن عاصم
الكلابي `. وأشار البيهقي إلى رد مثل هذا الإعلال بقوله عقب الحديث: ` تفرد
به عمرو بن عاصم، والله تعالى أعلم، وعمرو بن عاصم ثقة `. قلت: واحتج به
الشيخان، فلا يرد حديثه بمجرد التفرد.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন): "যে ব্যক্তি ফজরের দুই রাকাত (সুন্নাত) সালাত আদায় করতে পারেনি, সে যেন সূর্যোদয়ের পরে তা আদায় করে নেয়।"
2362 - ` من يكن في حاجة أخيه يكن الله في حاجته `.
أخرجه ابن أبي الدنيا في ` قضاء الحوائج ` (ص 82 رقم 47) عن محمد بن الحسن
ابن زبالة: ذكر المنكدر بن محمد بن المنكدر عن أبيه عن جابر بن عبد الله
مرفوعا. قلت: وهذا إسناد واه بمرة، ابن زبالة هذا قال الحافظ: ` كذبوه `.
وشيخه المنكدر لين الحديث.
قلت: لكن الحديث صحيح، فإن له شاهدا من حديث ابن
عمر، سبق تخريجه برقم (504) وهو متفق عليه. وشاهد آخر من حديث مسلمة بن
مخلد مرفوعا به. أخرجه أحمد (4 / 104) من طريق ابن جريج عن ابن المنكدر عن
أبي أيوب عن مسلمة بن مخلد مرفوعا. فهذا هو المحفوظ عن محمد بن المنكدر.
ورجاله ثقات رجال الشيخين.
জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত: যে ব্যক্তি তার ভাইয়ের প্রয়োজন পূরণে রত থাকবে, আল্লাহ তার প্রয়োজন পূরণে রত থাকবেন।
2363 - ` منبري هذا على ترعة من ترع الجنة `.
أخرجه أحمد (2 / 360 و 450) وابن سعد (1 / 253) من طرق عن أبي سلمة عن
أبي هريرة مرفوعا به، وزاد ابن سعد: ` قال: والترعة الباب `. وإسناده
حسن. وأحد إسنادي أحمد صحيح على شرط الشيخين. ثم أخرجه (2 / 412 و 534) من
طريق حماد بن سلمة عن سهيل بن أبي صالح عن أبيه عن أبي هريرة به. قلت: وهذا
إسناد صحيح على شرط مسلم. وللحديث شاهد من حديث سهل بن سعد الساعدي مرفوعا به
، وزاد: ` قال سهل: أتدرون ما الترعة؟ قالوا: نعم، هو الباب `. أخرجه
أحمد (5 / 335 و 339) وابن سعد من طرق عن أبي حازم عنه. وسنده صحيح على
شرط الشيخين. ثم أخرجه أحمد (3 / 389) من حديث جابر بن عبد الله، و (4 /
41) من حديث عبد الله بن زيد الأنصاري.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ইরশাদ করেছেন:
“আমার এই মিম্বরটি জান্নাতের দরজাসমূহের মধ্য থেকে একটি দরজার (বা চৌকাঠের) উপর অবস্থিত।”
2364 - ` موسى بن عمران صفي الله `.
أخرجه الحاكم (2 / 576) من طريق أبي ظفر عبد السلام بن مطهر حدثنا جعفر بن
سليمان عن ثابت البناني عن أنس بن مالك أن النبي صلى الله عليه وسلم قال:
فذكره، وقال: ` صحيح على على شرط مسلم `. قلت: لم يتكلم الذهبي عليه مطلقا
وأبو ظفر لم يخرج له مسلم وإنما هو من رجال البخاري. وقد تابعه سيار حدثنا
جعفر بن سليمان به، وزاد: ` وأنا حبيب الله `. أخرجه الديلمي (4 / 75)
. قلت: وسيار هو ابن حاتم العنزي، أورده الذهبي في ` الضعفاء `، وقال: `
قال القواريري: كان معي في الدكان، لم يكن له عقل، قيل: أتتهمه؟ قال: لا
. وقال غيره: صدوق سليم الباطن `. وقال الحافظ: ` صدوق له أوهام `.
قلت: فمثله يستشهد به، ولا تقبل زيادته على الأوثق منه. والله أعلم.
আনাস ইবনে মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "মূসা ইবনে ইমরান হলেন সাফিউল্লাহ (আল্লাহর মনোনীত বন্ধু)। আর আমি হলাম হাবীবুল্লাহ (আল্লাহর প্রিয় বন্ধু)।"
2365 - ` كان إذا تهجد يسلم بين كل ركعتين `.
رواه ابن نصر في ` قيام الليل ` (ص 50) عن أبي أيوب الأنصاري لكن من
المؤسف أن مختصره حذف إسناده، فلم يبق منه إلا صحابيه، ثم أتبعه بشاهد من
حديث عائشة بمعناه.
وهذا قد وصله مسلم (2 / 165) والبيهقي (2 /
আবু আইয়ুব আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন তাহাজ্জুদ সালাত আদায় করতেন, তখন তিনি প্রতি দুই রাকাতের পর সালাম ফেরাতেন (সালাত সম্পন্ন করতেন)।
2366 - ` موضع الإزار إلى أنصاف الساقين والعضلة، فإذا أبيت فمن وراء الساقين، ولا
حق للكعبين في الإزار `.
أخرجه الترمذي (1784) والنسائي (2 / 99) وابن ماجة (2 / 371) وابن
حبان (1447) وأحمد (5 / 382 و 396 و 398 و 400) من طرق عن أبي إسحاق عن
مسلم بن نذير عن حذيفة مرفوعا. وقال الترمذي: ` حديث حسن صحيح، رواه
الثوري وشعبة عن أبي إسحاق `. قلت: وهو كما قال، وهما قد رويا عنه قبل
اختلاطه، وشعبة لا يروي عنه إلا ما صرح فيه بالتحديث كما هو مذكور في ترجمته
، فبروايته عنه أمنا شبهة تدليسه، والحمد لله على توفيقه. وله شاهد مختصر،
من رواية سلام بن أبي مطيع عن قتادة عن الحسن عن سمرة مرفوعا بلفظ: ` موضع
الإزار نصف الساق، ولا حق للإزار في الكعبين `. أخرجه أبو نعيم في ` الحلية
` (6 / 191) ، وقال: ` غريب من حديث قتادة وسلام `. قلت: وسلام ثقة،
لكنه في روايته عن قتادة خاصة ضعيف، كما قال الحافظ في ` التقريب `. وله
شواهد كثيرة سبقت الإشارة إليها في المجلد الرابع، وأخرجنا منها هناك حديث
أنس رضي الله عنه برقم (1765) ، وخرجت ثمة حديث الترجمة باختصار، وذكرت
متابعا لمسلم بن نذير.
হুযাইফা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: লুঙ্গি (ইযার) পরিধানের স্থান হলো পায়ের গোছার মধ্যভাগ পর্যন্ত। আর যদি তুমি তা না মানো (বা এর চেয়ে নিচে নামাও), তবে গোছার শেষ সীমা পর্যন্ত (রাখা যেতে পারে)। তবে গোড়ালির উপর লুঙ্গির কোনো অধিকার নেই (অর্থাৎ তা গোড়ালি ঢাকবে না)।