হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (347)


347 - ` إذا دعا أحدكم أخاه لطعام فليجب فإن شاء طعم وإن شاء ترك `.
أخرجه الطحاوي في ` مشكل الآثار ` (4 / 148) : حدثنا يزيد قال: حدثنا
أبو عاصم قال: حدثنا ابن جريج قال: أخبرني أبو الزبير سمع جابرا يقول:
سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.
قلت: وهذا إسناد صحيح مسلسل بالتحديث، ولذلك خرجته، وإلا فقد أخرجه مسلم
(4 / 153) : وحدثنا ابن نمير: حدثنا أبو عاصم عن ابن جريج عن أبي
الزبير
بهذا الإسناد مثله.
قلت: يعني إسناد سفيان عن أبي الزبير عن جابر ساقه قبله لم يقع عنده فيه تصريح
أبي الزبير بالتحديث، وتصريحه به مهم لأنه مدلس، فإذا عنعن كما وقع في
` مسلم ` لم تنشرح النفس لحديثه، وكذلك أخرجه أبو داود (3740) وأحمد (3 /
392) من طريق سفيان به وابن ماجه (1751) من طريق أحمد ابن يوسف السلمي
حدثنا أبو عاصم به، لم يصرح أبو الزبير بالتحديث.
ويزيد هو ابن سنان البصري نزيل مصر. قال ابن أبي حاتم (4 / 2 / 267) :
` كتبت عنه، وهو صدوق ثقة `.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যখন তোমাদের কেউ তার ভাইকে খাবারের জন্য দাওয়াত দেয়, তখন সে যেন তাতে সাড়া দেয় (আমন্ত্রণ গ্রহণ করে)। এরপর যদি সে চায়, তবে খেতে পারে, আর যদি চায়, তবে (না খেয়ে) চলে যেতে পারে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (348)


348 - ` إن الشيطان يمشي في النعل الواحدة `.
أخرجه الطحاوي في ` مشكل الآثار ` (2 / 142) : حدثنا الربيع بن سليمان
المرادي حدثنا ابن وهب عن الليث بن سعد عن جعفر بن ربيعة عن عبد الرحمن الأعرج
عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: فذكره.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله كلهم ثقات رجال الشيخين غير الربيع بن سليمان
المرادي وهو ثقة.
والحديث في ` الصحيحين ` وغيرهما من طريق أبي الزناد عن الأعرج به بلفظ
` لا يمش أحدكم في نعل واحدة، لينعلهما جميعا، أو ليخلعهما جميعا `.
وله شاهد من حديث جابر مرفوعا بلفظ:
` لا تمش في نعل واحدة `.
أخرجه مسلم (6 / 154) وأحمد (3 / 322) وغيرهما.
قلت: فالحديث في النهي عن المشي في نعل واحدة صحيح مشهور، وإنما
خرجت حديث
الطحاوي هذا لتضمنه علة النهي، فهو يرجح قولا واحدا من الأقوال التي قيلت في
تحديدها، فجاء في ` الفتح ` (10 / 261) :
` قال الخطابي: الحكمة في النهي أن النعل شرعت لوقاية الرجل عما يكون في الأرض
من شوك أو نحوه، فإذا انفردت إحدى الرجلين احتاج الماشي أن يتوقى لإحدى رجليه
ما لا يتوقى للأخرى فيخرج بذلك عن سجية مشيه، ولا يأمن مع ذلك من العثار.
وقيل: لأنه لم يعدل بين جوارحه، وربما نسب فاعل ذلك إلى اختلال الرأي
أو ضعفه. وقال ابن العربي: قيل: العلة فيها أنها مشية الشيطان، وقيل:
لأنها خارجة عن الاعتدال. وقال البيهقي: الكراهة فيه للشهرة فتمتد الأبصار
لمن ترى ذلك منه، وقد ورد النهي عن الشهرة في اللباس، فكل شيء صير صاحبه
شهرة فحقه أن يجتنب `.
فأقول: الصحيح من هذه الأقوال، هو الذي حكاه ابن العربي أنها مشية الشيطان.
وتصديره إياه بقوله: ` قيل ` مما يشعر بتضعيفه، وذلك معناه أنه لم يقف على
هذا الحديث الصحيح المؤيد لهذا ` القيل `، ولو وقف عليه لما وسعه إلا الجزم
به. وكذلك سكوت الحافظ عليه يشعرنا أنه لم يقف عليه أيضا، وإلا لذكره على
طريقته في جمع الأحاديث وذكر أطرافها المناسبة للباب، لاسيما وليس في تعيين
العلة وتحديدها سواه.
فخذها فائدة نفيسة عزيزة ربما لا تراها في غير هذا المكان، يعود الفضل فيها
إلى الإمام أبي جعفر الطحاوي، فهو الذي حفظها لنا بإسناد صحيح في كتابه دون
عشرات الكتب الأخرى لغيره.
(تنبيه) أما الحديث الذي رواه ليث عن عبد الرحمن بن القاسم عن أبيه عن عائشة
قالت:
` ربما مشى النبي صلى الله عليه وسلم في نعل واحدة `.
فهو ضعيف لا يحتج به.
أخرجه الترمذي (1 / 329) من طريق هريم بن سفيان البجلي الكوفي والطحاوي من
طريق مندل كلاهما عن ليث به.
وضعفه الطحاوي بقوله:
` مندل ليس من أهل التثبت. وليث وإن كان من أهل الفضل فإن روايته ليست عند
أهل العلم بالقوية `.
قلت: مندل قد تابعه هريم وهو ثقة من رجال الشيخين، فبرئت عهدته منه،
وانحصرت في الليث فهو علة الحديث، وهو ضعيف.
قال الحافظ في ` التقريب `:
` صدوق اختلط أخيرا ولم يتميز حديثه فترك `.
وإذا عرف هذا فلا يجوز معارضة حديث الباب بهذا الحديث الواهي كما فعل بعض أهل
الجهل بالآثار فيما ذكره الإمام الطحاوي رحمه الله تعالى.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “নিশ্চয় শয়তান এক জুতা পরিধান করে চলাফেরা করে।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (349)


349 - ` ما من رجل يلي أمر عشرة فما فوق ذلك إلا أتى الله عز وجل مغلولا يوم القيامة
يده إلى عنقه فكه بره أو أوبقه إثمه، أولها ملامة وأوسطها ندامة وآخرها خزى
يوم القيامة `.
أخرجه أحمد (5 / 267) حدثنا أبو اليمان حدثنا إسماعيل بن عياش عن يزيد بن
(أبي) مالك عن لقمان بن عامر عن أبي أمامة عن النبي صلى الله عليه وسلم
أنه قال: فذكره.
قلت: وهذا إسناد شامي جيد، رجاله كلهم ثقات، وفي يزيد وهو ابن عبد الرحمن
بن أبي مالك الدمشقي القاضي كلام لا ينزل حديثه عن رتبة الحسن. وقال فيه
الحافظ في ` التقريب `: ` صدوق ربما وهم `.
والحديث قال الهيثمي (5 / 205) :
` رواه أحمد والطبراني وفيه يزيد بن أبي مالك وثقه ابن حبان وغيره وبقية
رجاله ثقات `.
وقال المنذري (3 /




আবু উমামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:

এমন কোনো ব্যক্তি নেই, যে দশজন বা তারও বেশি সংখ্যক মানুষের কোনো দায়িত্বের ভার গ্রহণ করবে, কিন্তু কিয়ামতের দিন আল্লাহ তাআলার সামনে তাকে শৃঙ্খলিত অবস্থায় হাজির করা হবে—তার হাত তার গর্দানের সাথে বাঁধা থাকবে। হয় তার সৎকর্মশীলতা তাকে মুক্ত করবে, অথবা তার পাপ তাকে ধ্বংস করে দেবে। (এই নেতৃত্বের) প্রথম অংশ হলো তিরস্কার (বা ভর্ৎসনা), মধ্যবর্তী অংশ হলো অনুশোচনা (বা অনুতাপ), আর শেষ অংশ হলো কিয়ামতের দিনের লাঞ্ছনা (বা অপমান)।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (350)


350 - ` إن عشت إن شاء الله إلى قابل صمت التاسع مخافة أن يفوتني يوم عاشوراء `.
أخرجه الطبراني في ` المعجم الكبير ` (3 / 99 / 2) من طريقين عن أحمد بن يونس
أنبأنا ابن أبي ذئب عن القاسم بن عباس عن عبد الله بن عمير عن ابن عباس
مرفوعا.
قلت: وهذا سند صحيح رجاله كلهم ثقات.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:

"যদি আমি ইনশাআল্লাহ আগামী বছর পর্যন্ত জীবিত থাকি, তবে আমি নবম দিনটিও রোযা রাখব, এই আশঙ্কায় যে, আশুরার দিনটি আমার হাতছাড়া না হয়ে যায়।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (351)


351 - ` اللهم من ظلم أهل المدينة وأخافهم فأخفه، وعليه لعنة الله والملائكة
والناس أجمعين، لا يقبل منه صرف ولا عدل `.
رواه الطبراني في ` الأوسط ` (1 / 125 / 2) : حدثنا روح بن الفرج أبو الزنباع
حدثنا يحيى بن بكير حدثنا الليث به سعد عن هشام بن عروة عن موسى بن عقبة عن
عطاء بن يسار عن عبادة بن الصامت مرفوعا وقال:
` لم يروه عن موسى إلا هشام تفرد به الليث `.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله ثقات رجال الشيخين غير روح بن الفرج وهو ثقة
كما في ` التقريب `
وقول الهيثمي في ` المجمع ` (3 / 306) :
` رواه الطبراني في ` الأوسط ` ` والكبير ` ورجاله رجال الصحيح ` ليس صحيحا
على إطلاقه، وتلك عادة له أنه يطلق مثل هذا القول: ` ورجاله رجال الصحيح `
ويعني من فوق شيخ الطبراني، فاعلم هذا فإنه مفيد في مواطن النزاع والتحقيق.
ثم رأيت الحديث في ` تاريخ ابن عساكر ` (16 / 241 / 2) من طريق عيسى ابن حماد
أنبأنا الليث به.




উবাদা ইবনুস সামিত (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:

"হে আল্লাহ! যে ব্যক্তি মদিনাবাসীর ওপর জুলুম করে এবং তাদের ভয় দেখায়, তুমি তাকে ভীতসন্ত্রস্ত করে দাও। তার ওপর আল্লাহ, ফেরেশতাকুল এবং সকল মানুষের সম্মিলিত লানত (অভিশাপ) বর্ষিত হোক। তার পক্ষ থেকে কোনো (ক্ষমা বা তওবার) বিনিময় অথবা কোনো সুপারিশ গ্রহণ করা হবে না।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (352)


352 - ` البس جديدا وعش حميدا ومت شهيدا `.
أخرجه ابن ماجه (3558) وابن السني في ` عمل اليوم والليلة ` (262)
وأحمد وإسحاق في ` مسنديهما ` والنسائي في ` الكبرى ` والطبراني كلهم عن
عبد الرزاق عن معمر عن الزهري عن سالم بن عبد الله بن عمر عن أبيه قال:
` رأى النبي صلى الله عليه وسلم على عمر رضي الله عنه ثوبا أبيض فقال: أجديد
ثوبك هذا أم غسيل؟ فقال: بل غسيل، و (في رواية: جديدا) فقال: فذكره.
زاد الدبري ويرزقك الله قرة عين في الدنيا والآخرة، قال: وإياك يا رسول
الله `.
قال الحافظ في ` نتائج الأفكار ` (1 / 27 / 2) :
` هذا حديث حسن غريب، ورجال الإسناد رجال الصحيح، لكن أعله النسائي فقال:
هذا حديث منكر أنكره يحيى القطان على عبد الرزاق، قال النسائي: وقد روي أيضا
عنه متصلا يعني الزهري، وروي عنه مرسلا. قال:
وليس هذا من حديث الزهري.
قلت: وجدت له شاهدا مرسلا أخرجه بن أبي شيبة في المصنف عن عبد الله بن إدريس
عن أبي الأشهب عن رجل، فذكر المتن بنحو رواية أحمد، وأبو الأشهب اسمه جعفر
ابن حيان العطاردي وهو من رجال الصحيح، وسمع من كبار التابعين، وهذا يدل
على أن للحديث أصلا، وأقل درجاته أن يوصف بالحسن `.
(تنبيه)
اقتصر النووي في ` الأذكار ` في عزوه على بن ماجة وابن السني وهو قصور ظاهر
تعجب منه الحافظ.




আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর গায়ে একটি সাদা পোশাক দেখতে পেয়ে জিজ্ঞাসা করলেন: "তোমার এই কাপড়টি কি নতুন নাকি ধোয়া?"

তিনি উত্তর দিলেন: "না, ধোয়া।" (অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: "নতুন।")

অতঃপর তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন (অর্থাৎ দু’আ করলেন): **"তুমি নতুন কাপড় পরিধান করো, প্রশংসিত জীবন যাপন করো এবং শহীদ হিসেবে মৃত্যুবরণ করো।"**

(অন্য এক বর্ণনাকারী অতিরিক্ত বর্ণনা করেছেন:) "আল্লাহ তোমাকে দুনিয়া ও আখিরাতে চক্ষু শীতলকারী (শান্তি ও আনন্দ) দান করুন।"

উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: "হে আল্লাহর রাসূল, আপনার জন্যও একই (দোআ)।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (353)


353 - ` إياي والتنعم، فإن عباد الله ليسوا بالمتنعمين `.
أخرجه أحمد (5 / 243، 244) وأبو نعيم في ` الحلية ` (5 / 155) من طرق عن
بقية بن الوليد عن السري بن ينعم عن مريح بن مسروق عن معاذ بن جبل.
` أن رسول الله صلى الله عليه وسلم لما بعث به إلى اليمن قال: ` فذكره.
قلت: وهذا إسناد رجاله ثقات كما قال المنذري (3 / 125) والهيثمي
(10 / 250) ، وسكتا عن عنعنة بقية مع كونه مشهورا بالتدليس! ولكنه قد صرح
بالتحديث عند أبي نعيم، فزالت شبهة تدليسه وثبت الحديث بذلك. والحمد لله.




মুআয ইবনে জাবাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম যখন তাঁকে ইয়ামেনে প্রেরণ করেন, তখন তিনি (রাসূল) বললেন: “তোমরা (অতিরিক্ত) আরাম-আয়েশ ও ভোগ-বিলাসিতা থেকে দূরে থাকো। কারণ আল্লাহর বান্দাগণ ভোগ-বিলাসী হয় না।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (354)


354 - ` إياك وكل ما يعتذر منه `.
رواه الضياء في ` المختارة ` (131 / 1) عن عمرو بن الضحاك حدثنا أبي الضحاك
ابن مخلد أنبأ شبيب بن بشر عن أنس بن مالك مرفوعا.
قلت: وهذا سند حسن رجاله ثقات وفي شبيب كلام لا يضر.
وقال الحافظ في ` التقريب `: ` صدوق يخطىء `.
وقال المناوي: ` ورواه عن أنس أيضا الديلمي في ` مسند الفردوس ` وسنده حسن
وأخرجه الحاكم في ` المستدرك ` من حديث سعد، والطبراني في ` الأوسط ` من
حديث ابن عمر وجابر `.
قلت: في حديث جابر محمد بن أبي حميد، وهو مجمع على ضعفه كما في ` المجمع `
(10 / 248) .




আনাস ইবনে মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “তুমি এমন প্রত্যেক কাজ থেকে বিরত থাকো, যার জন্য তোমাকে (পরে) কৈফিয়ত দিতে হয়।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (355)


355 - ` مثل المؤمن مثل النحلة، لا تأكل إلا طيبا، ولا تضع إلا طيبا `.
أخرجه ابن حبان (رقم 30) وابن عساكر (2 / 43 / 1) من طريق مؤمل ابن
إسماعيل حدثنا شعبة عن يعلى بن عطاء عن وكيع بن عدس عن عمه أبي رزين قال:
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم.
ثم روى ابن عساكر بسنده عن هارون الحمال قال:
` وذكر هذا الحديث - حديث مؤمل - لأبي عبد الله (يعني الإمام أحمد) فقال
أبو عبد الله: إنما حدثنا غندر عن شعبة عن يعلى بن عطاء عن عبد الله بن عمرو
عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: مثل المؤمن مثل النحلة `.
قلت: كذا وقع في نسخة ابن عساكر: ` عن يعلى بن عطاء عن عبد الله ابن عمرو `.
وأخشى أن يكون سقط منها شيء فقد أخرجه ابن أبي شيبة في ` كتاب الإيمان `
(رقم




আবু রযীন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম ইরশাদ করেছেন: “মুমিনের উদাহরণ মৌমাছির মতো। সে পবিত্র ও উত্তম জিনিস ছাড়া খায় না, আর পবিত্র ও উত্তম জিনিস ছাড়া প্রদানও (বা উৎপন্নও) করে না।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (356)


356 - ` أتاني جبريل عليه السلام فقال: إني كنت أتيتك الليلة فلم يمنعني أن أدخل
عليك البيت الذي أنت فيه إلا أنه كان في البيت تمثال رجل وكان في البيت قرام
ستر فيه تماثيل فمر برأس التمثال يقطع فيصير كهيئة الشجرة ومر بالستر يقطع
وفي رواية: إن في البيت سترا في الحائط فيه تماثيل، فاقطعوا رءوسها فاجعلوها
بساطا أو وسائد فأوطئوه، فإنا لا ندخل بيتا فيه تماثيل. فيجعل منه وسادتان
توطآن ومر بالكلب فيخرج. ففعل رسول الله صلى الله عليه وسلم وإذا الكلب جرو
كان للحسن والحسين عليهما السلام تحت نضد لهما. قال: ومازال يوصيني بالجار
حتى ظننت أو رأيت أنه سيورثه `.
أخرجه أحمد (2 / 305، 478) والسياق له وأبو داود (4158) والترمذي
(2 / 132) وابن حبان في ` صحيحه ` (1487) من طريق يونس بن أبي إسحاق عن
مجاهد عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره.
قلت: وهذا إسناد صحيح على شرط مسلم، وصححه الترمذي وغيره، وقد صرح يونس
بالتحديث في رواية ابن حبان، وفي حفظه ضعف يسير لا يضر في حديثه،
وقال الحافظ في ` التقريب `: ` صدوق يهم قليلا `.
قلت: وقد تابعه أبو إسحاق، فقال أحمد (2 / 308) حدثنا عبد الرزاق أنبأنا
معمر عن أبي إسحاق عن مجاهد به مختصرا بالرواية الثانية.
وهذا إسناد صحيح على شرط الشيخين لولا أن أبا إسحاق وهو السبيعي والد يونس،
كان تغير في آخره، وقد اختلف عليه في لفظه، فرواه عنه معمر هكذا، ورواه
أبو بكر عنه به نحوه بلفظ:
` فإما أن تقطع رؤوسها، أو تجعل بساطا يوطأ `.
أخرجه النسائي (2 / 302) .
والأول أصح، لأن معمرا حفظه عن أبي بكر وهو ابن عياش الكوفي قال الحافظ:
` ثقة عابد، إلا أنه لما كبر ساء حفظه، وكتابه صحيح `.
فقه الحديث:
الأول: تحريم الصور، لأنها سبب لمنع دخول الملائكة، والأحاديث في تحريمها
أشهر من أن تذكر.
الثاني: أن التحريم يشمل الصور التي ليست مجسمة ولا ظل لها لعموم قول جبريل
عليه السلام: ` فإنا لا ندخل بيتا فيه تماثيل `، وهي الصور، ويؤيده أن
التماثيل التي كانت على القرام لا ظل لها، ولا فرق في ذلك بين ما كان منها
تطريزا على الثوب أو كتابة على الورق، أو رسما بالآلة الفوتوغرافية إذ كل ذلك
صور وتصوير، والتفريق
بين التصوير اليدوي والتصوير الفوتوغرافي، فيحرم
الأول دون الثاني، ظاهرية عصرية، وجمود لا يحمد كما حققته في ` آداب الزفاف
في السنة المطهرة ` (ص




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:

আমার নিকট জিবরীল (আলাইহিস সালাম) এলেন এবং বললেন: আমি গত রাতে আপনার নিকট এসেছিলাম, কিন্তু আমি আপনার ঘরে প্রবেশ করতে পারিনি। আমাকে প্রবেশ করতে বাধা দিয়েছে কেবল এই বিষয়টি যে, ঘরের মধ্যে একজন মানুষের প্রতিকৃতি (মূর্তি) ছিল এবং ঘরে চিত্রাঙ্কিত নকশা করা একটি ভারী পর্দা (ক্বিরাম) ছিল।

সুতরাং, আপনি মূর্তির মাথা কেটে ফেলার নির্দেশ দিন, যাতে তা দেখতে গাছের মতো হয়ে যায়। আর পর্দার অংশটিও কেটে ফেলার নির্দেশ দিন।

অন্য এক বর্ণনায় আছে: ঘরের মধ্যে দেয়ালের উপর চিত্র অঙ্কিত একটি পর্দা ছিল। তোমরা এর মাথাগুলো কেটে ফেলো এবং একে মাদুর বা বালিশ বানিয়ে ফেলো, যার উপর পা রাখা হবে (বা ব্যবহার করা হবে)। কারণ, আমরা (ফেরেশতারা) এমন ঘরে প্রবেশ করি না যেখানে প্রতিকৃতি বা মূর্তি থাকে। অতঃপর তা থেকে দুটি বালিশ তৈরি করা হলো, যা ব্যবহার করা হতো।

তিনি কুকুরটিকে বের করে দেওয়ার নির্দেশ দিলেন। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তা করলেন। দেখা গেল, কুকুরটি ছিল একটি ছোট শাবক (কুকুরছানা), যা হাসান ও হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর একটি তাক বা শয্যার নিচে ছিল।

তিনি আরও বলেন: তিনি (জিবরীল) আমাকে প্রতিবেশীর অধিকার সম্পর্কে এত বেশি উপদেশ দিতে থাকলেন যে, আমি ধারণা করলাম বা দেখলাম যে, তিনি তাকে (সম্পদের) উত্তরাধিকারী বানিয়ে দেবেন।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (357)


357 - ` من أحب أن يتمثل له الناس قياما، فليتبوأ مقعده من النار `.
أخرجه البخاري في ` الأدب ` (977) وأبو داود (5229) والترمذي (2 / 125)
والطحاوي في ` مشكل الآثار ` (2 / 40) واللفظ له وأحمد (4 / 93، 100)
والدولابي في ` الكنى ` (1 / 95) والمخلص في ` الفوائد المنتقاة ` (ق 196
/ 2) وعبد بن حميد في ` المنتخب من المسند ` (ق 51 / 2) والبغوي في ` حديث
علي بن الجعد ` (7 / 69 / 2) وأبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (1 / 219) من
طرق عن حبيب بن الشهيد عن أبي مجلز قال:
` دخل معاوية بيتا فيه عبد الله بن الزبير، وعبد الله بن عامر، فقام ابن
عامر، وثبت ابن الزبير، وكان أدر بهما فقال معاوية: اجلس يا ابن عامر
فإني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.
وقال الترمذي: ` حديث حسن `.
قلت: بل هو حديث صحيح، رجال إسناده ثقات رجال الشيخين، وأبو مجلز اسمه لاحق
بن حميد، وهو ثقة، وحبيب بن الشهيد ثقة ثبت كما في ` التقريب `، فلا وجه
للاقتصار على تحسينه، وإن سكت عليه الحافظ في ` الفتح ` (11 / 42) ،
لاسيما وله طريق أخرى، فقال المخلص في ` الفوائد `: حدثنا عبد الله أنبأنا
داود: أنبأنا مروان أنبأنا مغيرة بن مسلم السراج عن عبد الله بن بريدة قال:
` خرج معاوية فرآهم قياما لخروجه، فقال لهم: اجلسوا فإن رسول الله صلى الله
عليه وسلم قال: من سره أن يقوم له بنو آدم، وجبت له النار `.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله كلهم ثقات رجال مسلم غير شيخ المخلص عبد الله،
وهو الحافظ أبو القاسم البغوي، ومغيرة بن مسلم السراج وهما ثقتان بلا خلاف
وداود هو ابن رشيد، ومروان هو ابن معاوية الفزاري الكوفي الحافظ. وقد
تابعه شبابة بن سوار حدثني المغيرة بن مسلم به إلا أنه قال:
` من أحب أن يستجم له الرجال ... ` والباقي مثله.
أخرجه الطحاوي (2 /




মু’আবিয়া (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:

আবু মিজলায (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, মু’আবিয়া (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এমন একটি ঘরে প্রবেশ করলেন যেখানে আব্দুল্লাহ ইবনে যুবাইর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এবং আব্দুল্লাহ ইবনে আমের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) উপস্থিত ছিলেন। ইবনে আমের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) দাঁড়ালেন, কিন্তু ইবনে যুবাইর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বসে রইলেন। মু’আবিয়া (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, "হে ইবনে আমের! আপনি বসে পড়ুন। কারণ আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-কে বলতে শুনেছি:

’যে ব্যক্তি ভালোবাসে যে লোকজন তার সামনে দাঁড়িয়ে থাকবে, সে যেন জাহান্নামে তার ঠিকানা বানিয়ে নেয়’।"

অন্য এক বর্ণনায় রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন:

"যে ব্যক্তি আনন্দিত হয় যে আদম-সন্তানরা তার সম্মানে দাঁড়াবে, তার জন্য জাহান্নাম ওয়াজিব হয়ে যায়।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (358)


358 - ` ما كان في الدنيا شخص أحب إليهم رؤية من رسول الله صلى الله عليه وسلم
وكانوا إذا رأوه لم يقوموا له، لما كانوا يعلمون من كراهيته لذلك `.
أخرجه البخاري في ` الأدب المفرد ` (946) والترمذي (2 / 125) والطحاوي
في ` مشكل الآثار ` (2 / 39) وأحمد (3 / 132) وأبو يعلى في ` مسنده `
(ق 183 / 2) واللفظ له من طرق عن حماد بن سلمة عن حميد عن أنس به.
وقال الترمذي: ` حديث حسن صحيح غريب من هذا الوجه `.
قلت: وإسناده صحيح على شرط مسلم.
وهذا الحديث مما يقوي ما دل عليه الحديث السابق من المنع من القيام للإكرام
لأن القيام لو كان إكراما شرعا، لم يجز له صلى الله عليه وسلم أن يكرهه من
أصحابه له، وهو أحق الناس بالإكرام، وهم أعرف الناس بحقه عليه الصلاة
والسلام.
وأيضا فقد كره الرسول صلى الله عليه وسلم هذا القيام له من أصحابه، فعلى
المسلم - خاصة إذا كان من أهل العلم وذوي القدوة - أن يكره ذلك لنفسه اقتداء
به صلى الله عليه وسلم، وأن يكره لغيره من المسلمين لقوله صلى الله عليه وسلم
: ` لا يؤمن أحدكم حتى يحب لأخيه ما يحب لنفسه من الخير `، فلا يقوم له أحد،
ولا هو يقوم لأحد، بل كراهتهم لهذا القيام أولى بهم
من النبي عليه الصلاة
والسلام، ذلك لأنهم إن لم يكرهوه اعتادوا القيام بعضهم لبعض، وذلك يؤدي بهم
إلى حبهم له، وهو سبب يستحقون عليه النار كما في الحديث السابق، وليس كذلك
رسول الله صلى الله عليه وسلم، فإنه معصوم من أن يحب مثل هذه المعصية، فإذا
كان مع ذلك قد كره القيام له، كان واضحا أن المسلم أولى بكراهته له.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:

দুনিয়াতে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-এর চেয়ে প্রিয় দর্শন (বা সাক্ষাৎ) আর কোনো ব্যক্তি তাদের (সাহাবীদের) নিকট ছিল না। আর যখন তারা তাঁকে দেখতেন, তখন তাঁর জন্য দাঁড়াতেন না, কারণ তারা জানতেন যে তিনি এটা অপছন্দ করেন।

[এই হাদীসটি পূর্ববর্তী হাদীসে বর্ণিত সম্মানার্থে দাঁড়ানোর নিষেধের বিষয়টিকে শক্তিশালী করে। কারণ, যদি দাঁড়ানো শরীয়তের দৃষ্টিতে সম্মান প্রদর্শন হতো, তবে তাঁর (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জন্য তাঁর সাহাবীগণ দাঁড়ালে তিনি তা অপছন্দ করতেন না। অথচ তিনিই ছিলেন মানুষের মধ্যে সর্বাধিক সম্মানের হকদার, আর সাহাবীগণই ছিলেন তাঁর (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর প্রাপ্য হক সম্পর্কে সবচেয়ে বেশি অবগত।

তদুপরি, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম যখন তাঁর সাহাবীদের পক্ষ থেকে তাঁর জন্য এই দাঁড়ানো অপছন্দ করেছেন, তাই মুসলিমের উচিত—বিশেষ করে যদি সে আলিম বা আদর্শস্থানীয় ব্যক্তি হন—তবে রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর অনুসরণ করে নিজের জন্য এটা অপছন্দ করা। এবং অন্যান্য মুসলিমের জন্যও এটি অপছন্দ করা উচিত। কেননা রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: ‘তোমাদের মধ্যে কেউ ততক্ষণ পর্যন্ত মুমিন হতে পারবে না, যতক্ষণ না সে তার ভাইয়ের জন্য সেই কল্যাণ পছন্দ করে, যা সে নিজের জন্য পছন্দ করে।’ অতএব, কেউ তার জন্য দাঁড়াবে না, আর সেও কারও জন্য দাঁড়াবে না। বরং নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর তুলনায় তাদের জন্য এই দাঁড়ানো অপছন্দ করা আরও বেশি বাঞ্ছনীয়। কারণ, যদি তারা এটা অপছন্দ না করে, তবে তারা একে অপরের জন্য দাঁড়ানোতে অভ্যস্ত হয়ে পড়বে, যা তাদের মধ্যে এর প্রতি ভালোবাসা জন্ম দেবে, আর এটি এমন একটি কারণ যার ফলে তারা জাহান্নামের হকদার হতে পারে, যেমনটি পূর্ববর্তী হাদীসে এসেছে।

কিন্তু রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-এর ক্ষেত্রে এমনটি নয়, কারণ তিনি এ ধরনের পাপের প্রতি ভালোবাসা রাখা থেকে নিষ্পাপ (মাসূম)। এমতাবস্থায়ও যদি তিনি তাঁর জন্য দাঁড়ানো অপছন্দ করেন, তবে এটা স্পষ্ট যে মুসলিমের জন্য এই দাঁড়ানো অপছন্দ করা অধিক বাঞ্ছনীয়।]









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (359)


359 - ` نهى النبي صلى الله عليه وسلم يوم خيبر عن لحوم الحمر الأهلية، وأذن في
لحوم الخيل `.
هو من حديث جابر بن عبد الله رضي الله عنه. وله عنه طرق:
الأولى: عن محمد بن علي عنه.
أخرجه البخاري (4 / 16) ومسلم (6 / 66) وأبو داود (3788) والنسائي
(2 / 199) والترمذي (1 / 331) والدارمي (2 / 87) والطحاوي (2 / 318)
والبيهقي (9 / 325) وأحمد (3 / 361، 385) من طرق عن حماد بن زيد عن عمرو
بن دينار عن محمد بن علي به.
وتابعه سفيان بن عيينة عن عمرو بن دينار عن جابر، فأسقط من الإسناد محمد ابن
علي، ولفظه:
` أطعمنا رسول الله صلى الله عليه وسلم لحوم الخيل، ونهانا عن لحوم الحمر `.
أخرجه النسائي والطحاوي والترمذي (1 / 331) وقال:
` هذا حديث حسن صحيح، وهكذا روى غير واحد عن عمرو بن دينار عن جابر ورواه
حماد بن زيد عن عمرو بن دينار عن محمد بن علي عن جابر ورواية ابن عيينة أصح.
وسمعت محمدا يقول: سفيان بن عيينة أحفظ من حماد ابن زيد `.
قال الحافظ في ` الفتح ` (9 / 559) :
` قلت: لكن اقتصر البخاري ومسلم على تخريج طريق حماد بن زيد، وقد وافقه
ابن جريج عن عمرو وعلى إدخال الواسطة بين عمرو وجابر ولكنه لم يسمه، أخرجه
أبو داود `.
الثانية: عن أبي الزبير أنه سمع جابر بن عبد الله يقول:
` أكلنا زمن خيبر الخيل وحمر الوحش، ونهانا النبي صلى الله عليه وسلم عن
الحمار الأهلي `.
أخرجه مسلم وأبو داود (3789) والنسائي وابن ماجه (3191) والطحاوي
والبيهقي وأحمد (3 / 356، 362) من طرق عن أبي الزبير به. ولفظ النسائي
مثل لفظ ابن عيينة المتقدم بزيادة: ` يوم خيبر `.
ولفظ أبي داود وأحمد:
` ذبحنا يوم خيبر الخيل والبغال والحمير، فنهانا رسول الله صلى الله عليه
وسلم عن البغال والحمير، ولم ينهنا عن الخيل `.
الثالثة: عن عطاء عنه قال:
` كنا نأكل لحوم الخيل على عهد رسول الله صلى الله عليه وسلم ` زاد في رواية:
` قلت: فالبغال؟ قال: لا `.
أخرجه النسائي واللفظ له وابن ماجه (3197) والزيادة له والطحاوي (2 /
318، 322) والبيهقي.
قلت: وإسناده صحيح.
وللحديث شاهد من رواية أسماء بنت أبي بكر رضي الله عنهما قالت:
` نحرنا فرسا على عهد رسول الله صلى الله عليه وسلم فأكلناه (بالمدينة) `.
أخرجه البخاري ومسلم والدارمي والبيهقي وأحمد (6 / 345، 346، 353)
والزيادة للدارمي ورواية للبخاري.
وفي الحديث جواز أكل لحوم الخيل، وهو مذهب الأئمة الأربعة سوى أبي حنيفة
فذهب إلى التحريم خلافا لصاحبيه فإنهما وافقا الجمهور، وهو الحق لهذا الحديث
الصحيح، ولذلك اختاره الإمام أبو جعفر الطحاوي، وذكر أن حجة أبي حنيفة حديث
خالد بن الوليد مرفوعا:
` لا يحل أكل لحوم الخيل والبغال والحمير `.
ولكنه حديث منكر ضعيف الإسناد لا يحتج به إذا لم يخالف ما هو أصح منه، فكيف
وقد خالف حديثين صحيحين كما ترى.
وقد بينت ضعفه وعلله في ` السلسلة الضعيفة ` رقم (1149) .




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম খায়বারের দিন গৃহপালিত গাধার মাংস খেতে নিষেধ করেছিলেন এবং ঘোড়ার মাংস (খাওয়ার) অনুমতি প্রদান করেছিলেন।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (360)


360 - ` ليأتين عليكم أمراء يقربون شرار الناس، ويؤخرون الصلاة عن مواقيتها، فمن
أدرك ذلك منهم فلا يكونن عريفا ولا شرطيا ولا جابيا ولا خازنا `.
أخرجه ابن حبان في ` صحيحه ` فقال (




হুযাইফা ইবনুল ইয়ামান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:

তোমাদের উপর এমন শাসকেরা আসবেই, যারা নিকৃষ্ট লোকদেরকে কাছে টেনে নেবে এবং সালাতকে তার নির্ধারিত সময় থেকে বিলম্বিত করবে। সুতরাং তোমাদের মধ্যে যে ব্যক্তি তাদের সেই সময়কাল পাবে, সে যেন (তাদের পক্ষে) কোনো সর্দার, অথবা পুলিশ, অথবা কর আদায়কারী, অথবা কোষাধক্ষ্য না হয়।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (361)


361 - ` ليوشك رجل أن يتمنى أنه خر من الثريا، ولم يل من أمر الناس شيئا `.
أخرجه الحاكم (4 / 91) من طريق عاصم بن بهدلة عن يزيد بن شريك أن الضحاك
بن قيس بعث معه بكسوة إلى مروان بن الحكم فقال مروان للبواب:
أنظر من بالباب؟ قال: أبو هريرة، فأذن له فقال: يا أبا هريرة حدثنا
حديثا سمعته من رسول الله صلى الله عليه وسلم، قال: سمعت رسول الله صلى الله
عليه وسلم يقول: فذكره. وقال: ` صحيح الإسناد `، ووافقه الذهبي.
قلت: وإنما هو حسن فقط للخلاف المعروف في حفظ عاصم هذا، والذهبي نفسه لما
ترجمه في ` الميزان `، وحكى أقوال الأئمة فيه قال:
` قلت: هو حسن الحديث `.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন, “খুব শীঘ্রই এমন সময় আসবে যখন কোনো ব্যক্তি এই কামনা করবে যে সে যদি সুরাইয়া (নক্ষত্র) থেকে নিচে পড়ে যেত, আর মানুষের কোনো প্রকার কর্তৃত্ব বা নেতৃত্ব সে গ্রহণ না করত।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (362)


362 - ` لا يحل للخليفة إلا قصعتان قصعة يأكلها هو وأهله، وقصعة يطعمها `.
رواه ابن أبي الدنيا في ` الورع ` (168 / 2) : حدثنا إبراهيم بن المنذر
الحزامي قال: أنبأنا عبد الله بن وهب عن ابن لهيعة عن عبد الله بن هبيرة عن
عبد الله بن زرير الغافقي قال:
دخلنا على علي بن أبي طالب يوم أضحى فقدم إلينا خزيرة، فقلنا يا أمير
المؤمنين لو قدمت إلينا من هذا البط والوز، والخير كثير، قال: يا ابن زرير
إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم، فذكره.
ورواه أحمد (رقم 1 / 78) وعنه ابن عساكر (12 / 188 / 1) من طريقين آخرين
عن ابن لهيعة به.
ورواه ابن عساكر من طريق حرملة عن ابن وهب به موقوفا على علي.
قلت: وهذا سند صحيح رجاله كلهم ثقات، وابن لهيعة إنما يخشى من سوء حفظه إذا
لم يكن الحديث من رواية أحد العبادلة عنه كما صرح بذلك بعض الأئمة المتقدمين،
وهذه كما ترى من رواية عبد الله بن وهب عنه.
والحديث قال الهيثمي في ` مجمع الزوائد ` (5 / 231) :
` رواه أحمد، وفيه ابن لهيعة، وحديثه حسن، وفيه ضعف `.
وأقول: الصواب فيه أنه ضعيف الحديث في غير رواية العبادلة عنه. صحيح الحديث
من رواية أحدهم عنه كما سبق. وقال الحافظ في ` التقريب `:
` صدوق، خلط بعد احتراق كتبه، ورواية ابن المبارك وابن وهب عنه أعدل من
غيرهما، وله في ` مسلم ` بعض شيء مقرون `.




আব্দুল্লাহ ইবনে যরীর আল-গাফিকী (রাহিমাহুল্লাহ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা ঈদুল আযহার দিন আলী ইবনে আবি তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট গেলাম। তিনি আমাদের সামনে ‘খাজীরা’ (এক প্রকার খাদ্য) পেশ করলেন। আমরা বললাম, হে আমীরুল মু’মিনীন! আপনি যদি এই হাঁস ও রাজহাঁস (ইত্যাদি উত্তম খাদ্য) থেকে কিছু খাবার আমাদের জন্য পেশ করতেন! (এখন তো) অনেক উত্তম খাদ্যদ্রব্য আছে। তিনি বললেন, হে ইবনে যরীর! আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি:

"খলীফা (রাষ্ট্রপ্রধান) বা শাসকের জন্য মাত্র দুটি পাত্রের খাবার গ্রহণ করা ছাড়া আর কিছু হালাল (বৈধ) নয়: একটি পাত্রের খাবার যা তিনি ও তাঁর পরিবার খাবেন এবং অন্য একটি পাত্রের খাবার যা তিনি (সাধারণ মুসলিমদের বা অভাবীদের) খাওয়াবেন।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (363)


363 - ` أربعة يبغضهم الله عز وجل: البياع الحلاف والفقير المختال والشيخ الزاني
والإمام الجائر `.
أخرجه النسائي (1 / 359) وابن حبان (1098) من طريق حماد بن سلمة عن
عبيد الله بن عمر عن سعيد المقبري عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه
وسلم قال: فذكره.
قلت: وهذا إسناد صحيح على شرط مسلم.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:

চার প্রকার লোক রয়েছে, যাদেরকে আল্লাহ আযযা ওয়া জাল (সম্মানিত ও প্রতাপশালী) অত্যন্ত ঘৃণা করেন: অধিক কসমকারী বিক্রেতা, অহংকারী দরিদ্র, ব্যভিচারী বৃদ্ধ এবং অত্যাচারী শাসক।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (364)


364 - ` باع آخرته بدنياه. قاله لرجل باع بثمن حلف أن لا يبيع به `.
أخرجه ابن حبان (1099) : أخبرنا عبد الله بن صالح البخاري - ببغداد - حدثنا
يعقوب بن حميد بن كاسب حدثنا ابن فديك عن ربيعة بن عبد الله بن الهدير عن
أبي سعيد قال:
` مر أعرابي بشاة، فقلت: تبيعها بثلاثة دراهم؟ فقال: لا والله، ثم باعها
فذكرت ذلك لرسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال `. فذكره.
قلت: وهذا إسناد حسن رجاله كلهم ثقات من رجال ` التهذيب ` غير عبد الله
بن صالح البخاري وهو ثقة مترجم له في ` تاريخ بغداد ` (9 / 481) .




আবু সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন:

এক বেদুঈন একটি ছাগল নিয়ে যাচ্ছিল। আমি (তাকে) বললাম: আপনি কি এটি তিন দিরহামে বিক্রি করবেন? সে বলল: আল্লাহর কসম, না! এরপর সে সেটি বিক্রি করে দিল।

আমি বিষয়টি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-এর নিকট উল্লেখ করলাম। তখন তিনি বললেন:

"সে তার আখিরাতকে তার দুনিয়ার বিনিময়ে বিক্রি করে দিয়েছে।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (365)


365 - ` احضروا الذكر وادنوا من الإمام، فإن الرجل لا يزال يتباعد حتى يؤخر في
الجنة وإن دخلها `.
أخرجه أبو داود (1198) والحاكم (1 / 289) وعنهما البيهقي (3 / 238)
وأحمد (5 / 11) من طريق معاذ بن هشام قال: وجدت في كتاب أبي بخط يده -
ولم أسمعه منه: قال قتادة: عن يحيى بن مالك عن سمرة بن جندب أن نبي الله
صلى الله عليه وسلم قال: فذكره.
وقال الحاكم: ` صحيح على شرط مسلم `. ووافقه الذهبي.
كذا قالا، ويحيى بن مالك هذا، قد أغفله كل من صنف في رجال الستة فيما علمنا
فليس هو في ` التهذيب ` ` ولا في ` التقريب ` ولا في ` التذهيب `.
نعم ترجمه ابن أبي حاتم فقال (4 / 2 / 190) :
` يحيى بن مالك، أبو أيوب الأزدي العتكي البصري المراغي، قبيلة من العرب.
روى عن عبد الله بن عمرو، وأبي هريرة، وابن عباس، وسمرة بن جندب،
وجويرية. مات في ولاية الحجاج.
روى عنه قتادة، وأبو عمران الجوني، وأبو الواصل عبد الحميد بن واصل `.
ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا.
وأورده ابن حبان في ` الثقات ` (1 / 256) وقال:
` من أهل البصرة، يروي عن عبد الله بن عمر، روى عنه قتادة، مات أبو أيوب في
ولاية الحجاج `.
قلت: فمثله حسن الحديث إن شاء الله تعالى لتابعيته، ورواية جماعة من الثقات
عنه، مع تصحيح الحاكم والذهبي لحديثه. والله أعلم.
وخالفه الحكم بن عبد الملك فقال: عن قتادة عن الحسن عن سمرة به.
أخرجه أحمد (5 / 10) وكذا الطبراني في ` المعجم الصغير ` (ص 70) وقال:
` لم يروه عن قتادة إلا الحكم `.
قلت: وهو ضعيف كما قال الهيثمي (2 / 177) ، وأشار المنذري في ` الترغيب `
(1 / 255) إلى تضعيف الحديث وعزاه للطبراني والأصبهاني. وفاته هو
والهيثمي أنه في ` المسند `، بل وفي ` السنن ` و ` المستدرك ` مصداقا للقول
المشهور: ` كم ترك الأول للآخر `.
(تنبيه) لفظ الحكم:
` ... فإن الرجل ليكون من أهل الجنة، فيتأخر عن الجمعة، فيؤخر عن الجنة،
وإنه لمن أهلها `.
وهذا مخالف للفظ هشام كما هو ظاهر، فهو منكر من أجل المخالفة. والله أعلم.




সমুরাহ ইবনে জুনদুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন:

"তোমরা (দ্বীনি মজলিস বা খুতবায়) উপস্থিত হও এবং ইমামের নিকটবর্তী হও। কেননা, কোনো ব্যক্তি (ইমাম থেকে) ক্রমাগত দূরে সরতে থাকে, এমনকি যদিও সে জান্নাতে প্রবেশ করবে, তবুও তাকে জান্নাতে প্রবেশেও বিলম্বিত করা হবে।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (366)


366 - ` إن التجار هم الفجار. قيل يا رسول الله: أو ليس قد أحل الله البيع؟ قال:
بلى، ولكنهم يحدثون فيكذبون، ويحلفون فيأثمون `.
رواه أحمد (3 / 428) والطحاوي في ` المشكل ` (3 / 12) والحاكم (2 /




নিশ্চয়ই ব্যবসায়ীরা (বাণিজ্যকারীগণ) হচ্ছে পাপাচারী। জিজ্ঞেস করা হলো, ‘হে আল্লাহর রাসূল! আল্লাহ কি বেচা-কেনা (বাণিজ্য) হালাল করেননি?’ তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, ‘অবশ্যই (হালাল করেছেন), কিন্তু তারা (কথাবার্তা বলার সময়) কথা বলে মিথ্যা বলে ফেলে এবং তারা শপথ করে গুনাহগার হয় (পাপ অর্জন করে)।’