হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (507)


507 - ` ما ضرب صلى الله عليه وسلم بيده خادما قط ولا امرأة، ولا ضرب رسول الله
صلى الله عليه وسلم بيده شيئا قط إلا أن يجاهد في سبيل الله، ولا خير بين
أمرين قط إلا كان أحبهما إليه أيسرهما حتى يكون إثما فإذا كان إثما كان أبعد
الناس من الإثم، ولا انتقم لنفسه من شيء يؤتى إليه حتى تنتهك حرمات الله عز
وجل فيكون هو ينتقم لله عز وجل `.
أخرجه أحمد (6 / 232) : حدثنا عبد الرزاق حدثنا معمر عن الزهري عن عروة عن
عائشة قالت: ذكره.
قلت: وهذا إسناد صحيح على شرط الشيخين وتابعه هشام بن عروة فقال أحمد
(6 / 229) : حدثنا أبو معاوية حدثنا هشام بن عروة عن أبيه به نحوه.
وهو عند مسلم (7 / 80) من هذا الوجه دون التخيير وعند البخاري (2 / 394)
من الوجه الأول دون الضرب.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,

তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) কখনও নিজ হাতে কোনো সেবককে আঘাত করেননি, কোনো নারীকেও না। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম) আল্লাহর রাস্তায় জিহাদ করা ব্যতীত নিজ হাতে কোনো কিছুকেই কখনও আঘাত করেননি। তাঁকে কখনও দু’টি বিষয়ের মধ্যে এখতিয়ার দেওয়া হলে, তিনি সহজটিই পছন্দ করতেন, যতক্ষণ না তাতে কোনো পাপের বিষয় থাকত। আর যদি তা পাপযুক্ত হতো, তবে তিনি সেই পাপ থেকে মানুষের মধ্যে সবচেয়ে বেশি দূরে থাকতেন। তাঁর প্রতি যে অবিচার করা হতো, তিনি তার জন্য নিজের পক্ষ থেকে কখনও প্রতিশোধ নিতেন না, যতক্ষণ না আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্লার পবিত্র সীমারেখা লঙ্ঘন করা হতো। আর যখন আল্লাহর সীমারেখা লঙ্ঘিত হতো, তখন তিনি আল্লাহর জন্যই প্রতিশোধ নিতেন।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (508)


508 - ` يا نعايا العرب! يا نعايا العرب! ثلاثا، إن أخوف ما أخاف عليكم الرياء
والشهوة الخفية `.
أخرجه الطبراني في ` المعجم الكبير ` وابن عدي في ` الكامل ` (ق 220 / 2)
وأبو نعيم في ` الحلية ` (7 / 122) و ` أخبار أصبهان ` (2 / 66) والبيهقي
في ` الزهد ` (2 / 37 / 2) من طريق عبد الله بن بديل بن ورقاء الخزاعي عن
الزهري عن عباد بن تميم عن عمه مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد حسن رجاله ثقات رجال مسلم غير عبد الله ابن بديل هذا فقال
ابن عدي ` له أشياء تنكر عليه من الزيادة في متن أو في إسناد ولم أر للمتقدمين
فيه كلاما فأذكره `.
قلت: روى ابن أبي حاتم (2 / 2 / 15) عن ابن معين أنه قال فيه ` صالح `.
وذكره ابن حبان في ` الثقات `. وقال الحافظ في ` التقريب `: ` صدوق يخطىء `
. والحديث قال الهيثمي في ` المجمع ` (6 / 655) :
` رواه الطبراني بإسنادين
رجال أحدهما رجال الصحيح غير عبد الله بن بديل بن ورقاء وهو ثقة `.
وقال المنذري في ` الترغيب ` (3 / 190) : ` رواه الطبراني بإسنادين أحدهما
صحيح `.
تنبيه: (الرياء) بالراء. ووقع في ` الترغيب ` و ` المجمع `.
(الزنا) بالزاي. وقال المنذري: ` وقد قيده بعض الحفاظ (الرياء) بالراء
والياء `.
قلت وكذلك هو في كل المصادر المخطوطة وغيرها التي عزونا الحديث إليها وكذلك
أورده ابن الأثير في ` النهاية ` وقال: ` وفي رواية: ` يا نعيان العرب `.
يقال: نعى الميت ينعاه نعيا: إذا أذاع موته وأخبر به وإذا ندبه.
قال الزمخشري: في (نعايا) ثلاثة أوجه: أحدها أن يكون جمع (نعي) وهو
المصدر كصفي وصفايا والثاني أن يكون اسم جمع كما جاء في أخية أخايا.
والثالث: أن يكون جمع نعاء التي هي اسم الفعل. والمعنى: يا نعايا العرب
جئن فهذا وقتكن وزمانكن يريد أن العرب قد هلكت. والنعيان مصدر بمعنى النعي
وقيل إنه جمع ناع، كراع ورعيان. والمشهور في العربية أن العرب كانوا إذا
مات منهم شريف أو قتل بعثوا راكبا إلى القبائل ينعاه إليهم، يقول: نعاء فلانا
أو يا نعاء العرب أي: هلك فلان، أو هلكت العرب بموت فلان. فنعاء من نعيت مثل
نظار ودراك. فقوله: نعاء فلانا معناه: انع فلانا كما تقول: دراك فلانا أي
: أدركه، فأما قوله ` يا نعاء العرب ` مع حرف النداء، فالمنادى محذوف تقديره
يا هذا انع العرب، أو يا هؤلاء انعوا العرب بموت فلان، كقوله
تعالى:
* (ألا يا اسجدوا) * أي يا هؤلاء اسجدوا، فيمن قرأ بتخفيف ألا.




আব্বাদ ইবনে তামীমের চাচা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:

"হে আরবের ধ্বংসের বার্তাবাহক! হে আরবের ধ্বংসের বার্তাবাহক!"—(তিনি এ কথা তিনবার বললেন)। "নিশ্চয় আমি তোমাদের ব্যাপারে যে জিনিসটির ভয় করি, তা হলো রিয়া (লোকদেখানো ইবাদত) এবং গোপন প্রবৃত্তি (শাহওয়াতুল খাফিয়্যাহ)।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (509)


509 - ` إذا زنى العبد خرج منه الإيمان وكان كالظلة، فإذا انقلع منها رجع إليه
الإيمان `.
أخرجه أبو داود (4690) والحاكم (1 / 22) من طريق سعيد ابن أبي مريم أنبأنا
نافع بن يزيد حدثنا ابن الهاد أن سعيد بن أبي سعيد حدثنا أنه سمع أبا هريرة
يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره.
وقال الحاكم: ` صحيح على شرط الشيخين ` ووافقه الذهبي وهو كما قالا إلا في
نافع فإنما أخرج له البخاري تعليقا، فهو على شرط مسلم وحده.
ثم أخرجه الحاكم من طريق أخرى عن أبي هريرة بلفظ: ` من زنى أو شرب الخمر نزع
الله منه الإيمان كما يخلع الإنسان القميص من رأسه `. لكن إسناده ضعيف وبيانه
في ` السلسلة الضعيفة (1274) . والحديث عزاه المنذري في ` الترغيب ` (3 /
191) للترمذي أيضا. وذلك من تساهله، فإنه عند الترمذي (2 / 104) معلق
بدون سند.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: যখন কোনো বান্দা যিনা করে, তখন ঈমান তার থেকে বের হয়ে যায় এবং তা ছায়ার (আবরণের) মতো হয়ে থাকে। অতঃপর যখন সে তা থেকে (সেই পাপ থেকে) ফিরে আসে বা বিরত হয়, তখন ঈমান তার কাছে ফিরে আসে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (510)


510 - ` من وقاه الله شر ما بين لحييه وشر ما بين رجليه دخل الجنة `.
أخرجه الترمذي (2 / 66) من طريق ابن عجلان عن أبي حازم عن أبي هريرة
قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره.
وقال: ` هذا حديث حسن غريب وأبو حازم اسمه سلمان مولى عزة الأشجعية `.
قلت: وهو ثقة محتج به في ` الصحيحين ` وكذلك سائر الرواة إلا ابن عجلان
واسمه محمد فأخرج له مسلم في ` الشواهد ` وهو حسن الحديث. وللحديث شاهد
يرويه تميم بن يزيد مولى بني زمعة عن رجل من أصحاب رسول الله صلى الله عليه
وسلم قال: خطبنا رسول الله صلى الله عليه وسلم ذات يوم ثم قال: فذكر نحوه.
أخرجه أحمد (5 / 362) عن عثمان يعني ابن حكيم عنه ورجاله ثقات رجال مسلم غير
تميم هذا وقد ذكره ابن أبي حاتم في كتابه (1 / 1 / 442) بهذه الطريق ولم
يذكر فيه جرحا ولا تعديلا وذكره كذلك ابن حبان في ` الثقات ` (1 / 5) لكنه
ذكر أنس بن مالك بدل رجل له صحبة.
ثم رأيت الحديث قد أخرجه الحاكم (4 / 357) من الطريق الأولى عن أبي هريرة
ومن طريق أبي واقد عن إسحاق مولى زائدة عن محمد ابن عبد الرحمن بن ثوبان عن
أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: ` من حفظ ما بين لحييه ورجليه
دخل الجنة `. وقال: ` صحيح الإسناد وأبو واقد هو صالح بن محمد `. ووافقه
الذهبي.
قلت: صالح هذا قال الذهبي في ` الميزان `: مقارب الحال، ثم ذكر أقوال الأئمة
فيه وكلها متفقة على تضعيفه إلا قول أحمد الآتي وقد أورده في ` الضعفاء `
وقال: ` قال أحمد: ما أرى به بأسا، وقال الدارقطني وجماعة ضعيف `.
وقال الحافظ في ` التقريب `: ` ضعيف `.
قلت: فمثله يستشهد به إن شاء الله تعالى.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “আল্লাহ যাকে তার দুই চোয়ালের মধ্যবর্তী বস্তুর (জিহ্বা/মুখ) অনিষ্ট থেকে এবং তার দুই পায়ের মধ্যবর্তী বস্তুর (লজ্জাস্থান) অনিষ্ট থেকে রক্ষা করেছেন, সে জান্নাতে প্রবেশ করবে।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (511)


511 - ` كل ذنب عسى الله أن يغفره إلا من مات مشركا أو مؤمن قتل مؤمنا متعمدا `.
أخرجه أبو داود (4270) وابن حبان (51) والحاكم (4 / 351) وابن عساكر
في ` تاريخ دمشق ` (5 / 209 / 2) من طريق خالد بن دهقان قال:
كنا في غزوة القسطنطينية بـ (ذلقية) فأقبل رجل من أهل فلسطين من أشرافهم
وخيارهم يعرفون ذلك له يقال له هانئ بن كلثوم بن شريك الكناني فسلم على عبد
الله بن أبي زكريا وكان يعرف له حقه قال لنا خالد: فحدثنا عبد الله ابن أبي
زكريا قال: سمعت أم الدرداء تقول: سمعت أبا الدرداء يقول: سمعت رسول
الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.
والسياق لأبي داود وقال الحاكم: ` صحيح الإسناد ` ووافقه الذهبي وهو كما
قالا، فإن رجاله كلهم ثقات وقول الحافظ في خالد هذا: ` مقبول ` قصور منه
فإنه ثقة وثقه ابن معين وغيره كما ذكر هو نفسه في ` التهذيب `.
وللحديث شاهد من حديث معاوية بن أبي سفيان مرفوعا به.
أخرجه النسائي (2 / 163) والحاكم وأحمد (4 / 99) من طريق ثور عن أبي عون
عن أبي إدريس قال: سمعت معاوية يخطب فذكره.
وقال الحاكم: ` صحيح الإسناد `. ووافقه الذهبي.
قلت: أبو عون هذا لم يوثقه غير ابن حبان وقد ترجمه ابن أبي حاتم (4 /




আবু দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: আল্লাহ তাআলা হয়তো সকল গুনাহই ক্ষমা করে দেবেন, কিন্তু সেই ব্যক্তি ব্যতীত যে শিরক করা অবস্থায় মারা যায়; অথবা সেই মুমিন ব্যতীত যে ইচ্ছাকৃতভাবে কোনো মুমিনকে হত্যা করে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (512)


512 - ` يخرج عنق من النار يوم القيامة لها عينان تبصران وأذنان تسمعان ولسان
ينطق يقول: إني وكلت بثلاثة: بكل جبار عنيد وبكل من دعا مع الله إلها آخر
وبالمصورين `.
أخرجه الترمذي (2 / 95) وأحمد (2 / 336) من طريق عبد العزيز ابن مسلم عن
الأعمش عن أبي صالح عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم.
وقال الترمذي: ` حديث حسن غريب صحيح `. قلت: وإسناده صحيح على شرط الشيخين
. ثم قال الترمذي: ` وقد رواه بعضهم عن الأعمش عن عطية عن أبي سعيد عن النبي
صلى الله عليه وسلم نحو هذا. وروى أشعث بن سوار عن عطية عن أبي سعيد الخدري
عن النبي صلى الله عليه وسلم نحوه `.
قلت: قد رواه فراس أيضا عن عطية عن أبي سعيد مثله إلا أنه قال: ` وبمن قتل
نفسه بغير نفس ` مكان ` ` وبالمصورين ` وزاد: ` فينطوي عليهم فيقذفهم في
غمرات جهنم `. أخرجه أحمد (3 / 40) والبزار نحوه وقال: ` فتنطلق بهم قبل
سائر الناس بخمسمائة عام ` مكان زيادة أحمد كما في ` الترغيب ` (3 / 204)
وقال: ` وفي إسناديهما عطية العوفي ورواه الطبراني بإسنادين رواة أحدهما
رواة الصحيح وقد روي عن أبي سعيد من قوله موقوفا عليه `.
قلت: وله شاهد من حديث عائشة رضي الله عنها يرويه ابن لهيعة عن خالد بن أبي
عمران عن القاسم بن محمد عنها مرفوعا نحوه إلا أنه قال: ` ووكلت بمن لا يؤمن
بيوم الحساب `. وزاد: ` قال: فينطوي عليهم ويرمي بهم في غمرات جهنم `.
أخرجه أحمد (6 / 110) . وابن لهيعة ضعيف.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: কিয়ামতের দিন জাহান্নামের মধ্য থেকে একটি ঘাড় বের হবে। সেটির দুটি চোখ থাকবে যা দেখতে পাবে, দুটি কান থাকবে যা শুনতে পাবে এবং একটি জিহ্বা থাকবে যা কথা বলবে।

সেটি বলবে: আমাকে তিন প্রকার লোকের ব্যাপারে দায়িত্ব দেওয়া হয়েছে: প্রত্যেক উদ্ধত ও চরম অহংকারী (স্বেচ্ছাচারী), প্রত্যেক ঐ ব্যক্তির ব্যাপারে, যে আল্লাহ্‌র সাথে অন্য কোনো উপাস্যকে ডাকে এবং চিত্রশিল্পীদের (বা ছবি/মূর্তি নির্মাতাদের) ব্যাপারে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (513)


513 - ` يا عائشة إياك ومحقرات الأعمال (وفي لفظ: الذنوب) فإن لها من الله
طالبا `.
أخرجه الدارمي (2 / 303) وابن ماجه (4243) وابن حبان (2497) وأحمد (6
/ 70، 151) وابن عساكر في ` تاريخ دمشق ` (7 / 176 / 1) من طريق سعيد بن
مسلم بن بانك قال: سمعت عامر بن عبد الله بن الزبير قال: حدثني عوف بن
الحارث بن الطفيل عن عائشة قالت: قال لي رسول الله صلى الله عليه وسلم
فذكره.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله ثقات رجال البخاري غير ابن بانك بموحدة ونون
مفتوحة وهو ثقة كما في ` التقريب `.
والحديث عزاه المنذري (3 / 212) للنسائي والظاهر أنه يعني السنن الكبرى له
وإلا فلم أره في ` المجتبى ` له وهي الصغرى.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে বললেন: হে আয়িশা! তুমি তুচ্ছ আমলসমূহ (অন্য বর্ণনায়: তুচ্ছ গুনাহসমূহ) থেকে নিজেকে রক্ষা করো/সাবধান থেকো। কেননা, আল্লাহর পক্ষ থেকে সেগুলোর (হিসাবের) জন্য একজন তলবকারী (অনুসন্ধানকারী) রয়েছে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (514)


514 - ` لو غفر لكم ما تأتون إلى البهائم لغفر لكم كثيرا `.
أخرجه أحمد (6 / 441) : حدثنا هيثم بن خارجة قال: أنبأنا أبو الربيع سليمان
بن عتبة السلمي عن يونس بن ميسرة بن حلبس عن أبي إدريس عن أبي الدرداء عن
النبي صلى الله عليه وسلم فذكره.
قلت: وهذا إسناد حسن رجاله ثقات معرفون غير سليمان بن عتبة وهو الدمشقي
الداراني مختلف فيه، فقال أحمد: لا أعرفه وقال ابن معين: لا شيء، وقال
دحيم: ثقة، ووثقه أيضا أبو مسهر والهيثم ابن خارجة وهشام بن عمار وابن
حبان ومع أن الموثقين أكثر، فإنهم دمشقيون مثل المترجم فهم أعرف به من غيرهم
من الغرباء، والله أعلم.
وقال الحافظ في ` التقريب `: ` صدوق له غرائب `. وقال عبد الله بن أحمد في
زوائده على ` المسند ` (6 / 442) حدثني الهيثم بن خارجة عن أبي الربيع بهذه
الأحاديث كلها إلا أنه أوقف منها حديث ` لو غفر لكم ما تأتون ... ` وقد حدثناه
أبي عنه مرفوعا `.
قلت: الأب أجل من الولد وأحفظ والكل حجة ولا بعد أن ينشط تارة فيرفع الحديث
ولا ينشط أخرى فيوقفه. فالظاهر أن الهيثم حدث به أحمد مرفوعا
وحدث ابنه
موقوفا، فحفظ كل ما سمع. فالحديث ثابت مرفوعا وموقوفا والرفع زيادة فهو
المعتمد وهذا في رأيي خير من قول المنذري في ` الترغيب ` (3 / 212) :
` رواه أحمد والبيهقي مرفوعا هكذا ورواه عبد الله في زياداته موقوفا على أبي
الدرداء وإسناده أصح وهو أشبه `. كذا قال وهو من الغرائب، فإن إسناد
الموقوف هو عين إسناد المرفوع وإنما الخلاف بين أحمد وابنه، فإذا كان لابد
من الترجيح بين روايتيهما، فإن مما لا شك فيه أن رواية أحمد أرجح لأنه أحفظ
كما سبق ولكني أرى أن لا مبرر لذلك مع إمكان الجمع الذي ذكرته. ومن العجيب
أن المناوي نقل عن الهيثمي مثلما قال المنذري من الترجيح فكأنه قلده في ذلك.
والله أعلم. ثم وجدت متابعا لأحمد أخرجه البيهقي في ` الشعب ` (2 / 95 / 2)
من طريق عباس بن محمد الدوري حدثنا الهيثم بن خارجة به مرفوعا.




আবু দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:
"যদি চতুষ্পদ জন্তুদের প্রতি তোমাদের কৃত অপরাধসমূহ ক্ষমা করে দেওয়া হতো, তাহলে তোমাদের অনেক কিছুই ক্ষমা করে দেওয়া হতো।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (515)


515 - ` من أدرك والديه أو أحدهما ثم دخل النار من بعد ذلك فأبعده الله وأسحقه `.
أخرجه الإمام أحمد (4 / 344، 5 / 29) عن شعبة عن قتادة قال: سمعت زرارة
ابن أوفى يحدث عن أبي بن مالك عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه قال: فذكره
وأخرجه الطيالسي (1321) : حدثنا شعبة به دون قوله: ` وأسحقه `.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله ثقات رجال الشيخين غير أبي بن مالك وهو صحابي
عداده في أهل البصرة وقد اختلف في اسمه على أقوال رجح الحافظ هذا الذي في
رواية قتادة هذه وقد خالفه ابن جدعان، فقال الطيالسي أيضا (1322) :
حدثنا شعبة عن علي بن زيد أن زرارة يحدث عن رجل من قومه يقال له: مالك أو أبو
مالك أو ابن مالك عن النبي صلى الله عليه وسلم فذكره بزيادة فيه دون الزيادة
المتقدمة.
وكذلك رواه حماد ابن سلمة أنبأنا علي بن زيد عن زرارة إلا أنه قال
: عن مالك بن عمرو القشيري. جزم بذلك ولم يشك. وابن جدعان ضعيف، فلا يحتج
به لاسيما مع مخالفته لمثل قتادة وهو ثقة محتج به في ` الصحيحين `.




উবাই ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি তার পিতামাতা উভয়কে অথবা তাদের একজনকে জীবিত অবস্থায় পেল, অতঃপর (তাদের খেদমত না করার কারণে) সে এর পরে জাহান্নামে প্রবেশ করল, আল্লাহ তাকে (তাঁর রহমত থেকে) দূর করে দিন এবং তাকে ধ্বংস করুন।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (516)


516 - ` رضى الرب في رضى الوالد وسخط الرب في سخط الوالد `.
أخرجه الترمذي (1 / 346) وابن حبان (2026) والحسن بن سفيان في ` الأربعين
` (ق 69 / 2) من طريق خالد بن الحارث حدثنا شعبة عن يعلى بن عطاء عن أبيه عن
عبد الله بن عمرو عن النبي صلى الله عليه وسلم به. ثم أخرجه الترمذي من
طريق محمد بن جعفر والبخاري في ` الأدب المفرد ` رقم (2) عن شعبة به موقوفا
على ابن عمرو ولم يرفعه. وقال الترمذي: ` وهذا أصح وهكذا روى أصحاب شعبة
عن شعبة عن يعلى بن عطاء عن أبيه عن عبد الله بن عمرو موقوفا ولا نعلم أحدا
رفعه غير خالد بن الحارث عن شعبة وخالد بن الحارث ثقة مأمون `.
قلت: وقد احتج به الشيخان وقال الحافظ في ` التقريب `: ` ثقة ثبت ` وقد
وجدت له متابعين على رفعه: الأول: عبد الرحمن حدثنا شعبة به مرفوعا، أخرجه
الحاكم (4 /




আব্দুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: রবের (আল্লাহর) সন্তুষ্টি পিতার (বা পিতামাতার) সন্তুষ্টিতে এবং রবের (আল্লাহর) অসন্তুষ্টি পিতার (বা পিতামাতার) অসন্তুষ্টিতে নিহিত।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (517)


517 - ` سبحان الله! وهل أنزل الله من داء في الأرض إلا جعل له شفاء `.
أخرجه الإمام أحمد (5 / 371) : حدثنا إسحاق بن يوسف حدثنا سفيان عن منصور عن
هلال بن يساف عن ذكوان عن رجل من الأنصار قال: ` عاد رسول الله صلى الله
عليه وسلم رجلا به جرح، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: ادعوا له طبيب
بني فلان قال: فدعوه فجاء فقال: يا رسول الله ويغني الدواء شيئا؟ فقال ...
`. فذكره.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله كلهم ثقات معروفون من رجال مسلم غير الرجل
الأنصاري وهو صحابي كما هو الظاهر وجهالة الصحابي لا تضر، لاسيما وأصل
الحديث مشهور عن النبي صلى الله عليه وسلم رواه عنه جماعة من الصحابة منهم أنس
ابن مالك وأبو سعيد الخدري وأبو هريرة وجابر وأسامة بن شريك وعبد الله بن
مسعود وصفوان ابن عسال وقد خرجت أحاديثهم وتكلمت على أسانيدها وجلها صحيح
في ` تخريج أحاديث الحلال والحرام ` رقم (290) . وإنما أوردت هذا هنا لهذه
الفائدة التي تفرد بها من بيان سبب ورود الحديث. والحمد لله على توفيقه.




একজন আনসারী সাহাবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:

রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এক ব্যক্তিকে দেখতে গেলেন, যার দেহে ক্ষত (বা আঘাত) ছিল। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: ’অমুক গোত্রের ডাক্তারকে তার জন্য ডেকে আনো।’

বর্ণনাকারী বলেন: তারা তাকে (ডাক্তারকে) ডাকলেন এবং সে এলো। এসে সে জিজ্ঞেস করল: ’ইয়া রাসূলাল্লাহ! ওষুধ কি কোনো কিছুতে উপকারে আসে?’

উত্তরে তিনি (রাসূলুল্লাহ সাঃ) বললেন: ’সুবহানাল্লাহ! আল্লাহ পৃথিবীতে এমন কোনো রোগ নাজিল করেননি, যার জন্য তিনি নিরাময় সৃষ্টি করেননি।’









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (518)


518 - ` إن الله عز وجل لم ينزل داء إلا أنزل له شفاء إلا الهرم، فعليكم بألبان
البقر، فإنها ترم من كل الشجر `.
أخرجه الطيالسي (368) : حدثنا المسعودي عن قيس بن مسلم عن طارق بن شهاب عن
عبد الله عن النبي صلى الله عليه وسلم. ومن هذا الوجه أخرجه الحاكم (1 /
197) . ورجاله ثقات غير أن المسعودي كان اختلط قبل موته واسمه عبد الرحمن بن
عبد الله بن عتبة بن مسعود الكوفي لكنه قد توبع، فأخرجه الطبراني في ` المعجم
الكبير ` (3 / 49 / 1) من طريق زفر بن الهذيل عن أبي حنيفة عن قيس بن مسلم به
. وهذه متابعة لا بأس بها وخالفهما يزيد بن أبي خالد فقال: عن قيس بن مسلم
عن طارق بن شهاب أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: فذكره. لم يذكر فيه عبد
الله وهو ابن مسعود.
أخرجه أحمد (4 / 315) حدثنا عبد الرحمن بن مهدي حدثنا سفيان عن يزيد بن أبي
خالد به. ويزيد هذا هو ابن عبد الرحمن أبو خالد الدالاني قال الحافظ: ` صدوق
يخطىء كثيرا وكان يدلس `. قلت فمثله لا يعارض روايتي المسعودي وأبي حنيفة
فروايتهما أرجح ويؤيده ما أخرجه الحاكم (4 / 196) من طريق أبي قلابة عبد
الملك بن محمد الرقاشي حدثنا أبو زيد سعيد بن الربيع حدثنا شعبة عن الركين بن
الربيع عن قيس بن مسلم عن طارق بن شهاب عن عبد الله مرفوعا بلفظ: ` ما أنزل
الله من داء إلا وقد أنزل له شفاء وفي ألبان البقر شفاء من كل داء `.
وقال: ` صحيح على شرط مسلم `. ووافقه الذهبي.
وفيما قالاه نظر، فإن رجاله على شرط مسلم غير الرقاشي. ثم هو ضعيف الحفظ قال
الحافظ: ` صدوق يخطىء تغير حفظه `.
قلت: فمثله يحتج به فيما وافق غيره أما فيما خالف أو تفرد فلا وقد تفرد هنا
بقوله: ` شفاء من كل داء. وقد رواه الربيع بن الركين عن إبراهيم بن مهاجر عن
قيس بن مسلم به ولفظه: ` تداووا بألبان البقر فإني أرجو أن يجعل الله فيها
شفاء فإنها تأكل من الشجر `. أخرجه الطبراني (3 / 49 / 1) .
والربيع بن الركين هو الربيع بن سهل بن الركين بن الربيع ابن عميلة الفزاري
وهو ضعيف اتفاقا وهو حفيد الركين بن الربيع الذي في سند الحاكم وهو على
ضعفه
فلفظ روايته أقرب إلى معنى لفظ المسعودي من تابعه الدالاني في رواية الرقاشي.
وجملة القول: أن الصواب في إسناد الحديث أنه من مسند ابن مسعود لاتفاق الجميع
عليه خلافا لأبي خالد الدالاني وفي متنه لفظ المسعودي لمتابعة من ذكرنا له
خلافا للرقاشي. والله أعلم.
ثم وجدت للمسعودي متابعا آخر فقال البغوي في حديث علي ابن الجعد (ق 97 / 1) :
حدثنا أبو الربيع الزهراني حدثنا أبو وكيع الجراح ابن مليح عن قيس بن مسلم به
سندا ومتنا. وهذا سند جيد رجاله ثقات رجال مسلم وفي أبي وكيع ضعف يسير في
حفظه، وقال الحافظ فيه: ` صدوق يهم `.
وأخرجه من طريق قيس عن قيس بن مسلم به مرسلا لم يذكر ابن مسعود وذكر فيه تلك
الزيادة بلفظ: ` هو دواء من كل داء `.
وقيس هو ابن الربيع الأسدي وهو ضعيف أيضا لسوء حفظه.
ثم أخرجه من طريق حجاج بن نصير حدثنا شعبة عن الربيع بن الركين ابن الربيع عن
قيس بن مسلم مثل رواية الرقاشي سندا ومتنا وحجاج ابن نصير ضعيف.




আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "নিশ্চয়ই আল্লাহ আযযা ওয়া জাল এমন কোনো রোগ নাযিল করেননি, যার জন্য তিনি আরোগ্য (শিফা) নাযিল করেননি, বার্ধক্য (জরা)-ব্যতীত। সুতরাং তোমরা গরুর দুধ ব্যবহার করো (বা পান করো), কারণ এটি সকল প্রকার গাছপালা থেকে (খাদ্য) গ্রহণ করে।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (519)


519 - ` إنه من أعطي حظه من الرفق، فقد أعطي حظه من خير الدنيا والآخرة وصلة الرحم
وحسن الخلق وحسن الجوار يعمران الديار ويزيدان في الأعمار `.
أخرجه أحمد (6 / 159) : حدثنا عبد الصمد بن عبد الوارث حدثنا محمد بن مهزم عن
عبد الرحمن بن القاسم حدثنا القاسم عن عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم
قال لها ... فذكره.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله ثقات رجال الشيخين غير محمد بن مهزم وقد وثقه
ابن معين وقال أبو حاتم: ليس به بأس وذكره ابن حبان في ` الثقات `.
وقال المنذري في ` الترغيب ` (3 / 224) وتبعه الهيثمي في ` المجمع `
(8 / 153) : ` رواه أحمد ورواته ثقات إلا أن عبد الرحمن بن القاسم لم يسمع
من عائشة `! كذا قال وكأنه سقط من نسختهما من ` المسند ` قوله: ` حدثنا
القاسم ` وهو ثابت في النسخة المطبوعة وهو صحيح فقد تابعه عبد الرحمن بن
أبي بكر عن القاسم بن محمد به أخرجه البغوي في ` شرح السنة ` (3 /




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেন:

নিশ্চয়ই যে ব্যক্তিকে নম্রতা (কোমলতা) থেকে তার অংশ প্রদান করা হয়েছে, তাকে দুনিয়া ও আখিরাতের কল্যাণ থেকে তার অংশ প্রদান করা হয়েছে। আর আত্মীয়তার সম্পর্ক বজায় রাখা, উত্তম চরিত্র এবং উত্তম প্রতিবেশীর সাথে সদ্ব্যবহার ঘর-বাড়িকে আবাদ রাখে (সমৃদ্ধ করে) এবং হায়াত বাড়িয়ে দেয়।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (520)


520 - ` قال الله: أنا الله وأنا الرحمن خلقت الرحم وشققت لها من اسمي، فمن وصلها
وصلته ومن قطعها بتته `.
أخرجه أبو داود (1694) والترمذي (1 / 348) من طريق سفيان ابن عيينة عن
الزهري عن أبي سلمة قال:
` اشتكى أبو الرداد الليثي، فعاده عبد الرحمن بن
عوف فقال: خيرهم وأوصلهم وما علمت أبا محمد؟ فقال عبد الرحمن: سمعت رسول
الله صلى الله عليه وسلم يقول ` فذكره. ثم أخرجاه من طريق معمر عن الزهري
حدثني أبو سلمة أن الرداد الليثي أخبره عن عبد الرحمن بن عوف أنه سمع رسول الله
صلى الله عليه وسلم بمعناه. وأخرجه أحمد (1 / 194) من هذه الطريق بلفظ
سفيان وابن حبان (2033) بنحوه. وقال الترمذي: ` حديث سفيان عن الزهري
حديث صحيح ومعمر كذا يقول قال محمد: وحديث معمر خطأ `. وتعقبه المنذري
بقوله (3 / 225) : ` وفي تصحيح الترمذي له نظر، فإن أبا سلمة بن عبد الرحمن
لم يسمع من أبيه شيئا، قاله يحيى بن معين وغيره `.
قلت: الذي يبدو لي أن الترمذي لا يعني أن الحديث صحيح بالنظر إلى نسبته إلى
النبي صلى الله عليه وسلم وإنما بالنسبة للزهري فقط يعني أن ما نسبه سفيان
إليه من الحديث بالسند المذكور صحيح النسبة إليه بخلاف ما نسبه إليه معمر فهو
خطأ، هذا الذي يتبادر إلى الذهن من النظر إلى جملة كلامه وذلك لا يعطي أن
الحديث عنده صحيح عن النبي صلى الله عليه وسلم. والله أعلم.
هذا أقوله تخريجا وتوجيها لكلام الترمذي. وإلا فالحديث صحيح عندي ولم يخطىء
فيه معمر، بل إن سفيان هو الذي قصر في إسناده فصيره منقطعا. والدليل على ذلك
أن معمرا قد توبع عليه، فقال الإمام أحمد عقب روايته السابقة وكأنه أشار إلى
تقويتها: حدثنا بشر بن شعيب بن أبي حمزة حدثني أبي عن الزهري حدثني أبو سلمة
ابن عبد الرحمن أن أبا الرداد الليثي أخبره عن عبد الرحمن بن عوف أنه سمع رسول
الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره. فهذه متابعة قوية لمعمر من شعيب بن أبي
حمزة فإنه ثقة واحتج به
الشيخان بل هو من أثبت الناس في الزهري كما قال الحافظ
في ` التقريب `. ولذلك جزم في ` التهذيب ` بأن حديث معمر هو الصواب. ويؤيده
أنه قد تابعه أيضا محمد بن أبي عتيق عن ابن شهاب به.
أخرجه البخاري في ` الأدب المفرد ` (53) . ومحمد هذا هو ابن عبد الله بن أبي
عتيق: محمد بن عبد الرحمن بن أبي بكر الصديق وهو حسن الحديث عن الزهري كما
قال الذهلي.
قلت: فهذان متابعان قويان لمعمر تشهدان لحديثه بالصحة، فكيف يصح الحكم عليه
بالخطأ ولو من إمام المحدثين؟ ورحم الله مالكا إذ قال: ` ما منا من أحد إلا
رد ورد عليه إلا صاحب هذا القبر `. يعني النبي صلى الله عليه وسلم.
والخلاصة أن الصحيح في إسناد هذا الحديث أنه من رواية أبي سلمة أن الرداد
أخبره عن عبد الرحمن بن عوف. فهو إسناد متصل غير منقطع.
ولكن ذلك لا يجعله صحيحا لأن أبا الرداد هذا لا يعرف إلا بهذا الإسناد ولم
يوثقه غير ابن حبان ولهذا قال الحافظ: ` مقبول `. يعني عند المتابعة وإلا
فلين الحديث. ولكنه قد توبع، فقال الإمام أحمد (1 / 191) : ` حدثنا يزيد
ابن هارون: أخبرنا هشام الدستوائي عن يحيى بن أبي كثير عن إبراهيم بن عبد الله
ابن قارظ أن أباه حدثه أنه دخل على عبد الرحمن بن عوف وهو مريض، فقال له عبد
الرحمن: وصلتك رحم إن النبي صلى الله عليه وسلم قال ` فذكره.
وهذا إسناد رجاله ثقات رجال مسلم غير عبد الله بن قارظ والد إبراهيم، فلم أجد
من ترجمه ولا ذكروه في شيوخ ابنه إبراهيم فكأنه غير مشهور وفي كلام ابن حجر
ما يشعر بذلك، فإنه قال بعد أن صوب رواية معمر المتقدمة: ` وللمتن متابع
رواه أبو يعلى بسند صحيح من طريق عبد الله ابن قارظ عن عبد الرحمن بن عوف من
غير ذكر أبي الرداد فيه `. وفاته أن هذه الطريق في مسند أحمد أيضا.
وقد وجدت للحديث شاهدا قويا فقال الإمام أحمد (2 / 498) : حدثنا يزيد قال:
وأنبأنا محمد عن أبي سلمة عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه
وسلم: فذكره.
قلت: وهذا إسناد جيد رجاله ثقات رجال الشيخين إلا أنهما إنما أخرجا لمحمد
وهو ابن عمرو بن علقمة الليثي المدني - متابعة وهو حسن الحديث كما قال
الذهبي. وبذلك صح الحديث والحمد لله. وهو يدل على أن أبا سلمة كان له فيه
إسنادان: الأول عن أبي الرداد عن عبد الرحمن كما تقدم والآخر هذا كما أن يزيد
بن هارون له فيه إسنادان: أحدهما إسناده المتقدم عن الدستوائي عن ... عن ابن
قارظ والآخر هذا. وهو من الأحاديث التي فاتت الحافظ الهيثمي فلم يورده في
كتابه ` مجمع الزوائد ` مع أنه على شرطه لتفرد أحمد به عن الستة بهذا اللفظ من
حديث أبي هريرة.
وأما ما أخرجه الطبراني في ` الكبير ` (1 / 118 / 2) من طريق محمد بن يزيد
البكري الجوزجاني أنبأنا أبو مطيع البلخي الحكم بن عبد الله أنبأنا شعبة عن
سليمان الأعمش عن أبي ظبيان عن جرير مرفوعا بلفظ: ` إن الله كتب في أم الكتاب
قبل أن يخلق السماوات والأرض: أنا الرحمن الرحيم خلقت الرحم وشققت لها اسما
من اسمي، فمن وصلها وصلته ومن قطعها قطعته `.
قلت: فهذا ضعيف جدا من أجل البلخي، فقد ضعفوه واتهمه بعضهم بالكذب والوضع.
والبكري هذا لم أعرفه.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
আল্লাহ তাআলা বলেছেন: "আমিই আল্লাহ এবং আমিই রহমান (পরম দয়ালু)। আমিই রেহেম (রক্তের সম্পর্ক বা আত্মীয়তা) সৃষ্টি করেছি এবং আমার নাম থেকে এর জন্য একটি নাম বের করেছি। সুতরাং, যে এই সম্পর্ক জুড়ে রাখবে, আমি তাকে আমার সঙ্গে জুড়ে রাখব (তার প্রতি সদয় হব)। আর যে এই সম্পর্ক ছিন্ন করবে, আমি তাকে বিচ্ছিন্ন করে দেব।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (521)


521 - ` انطلقوا بنا إلى البصير الذي في بني واقف نعوده. قال: وكان رجلا أعمى `.
أخرجه أبو سعيد بن الأعرابي في ` معجمه ` (ق 133 / 1) أنبأنا ابن عفان أنبأنا
حسين الجعفي عن سفيان بن عيينة عن عمرو بن دينار عن جابر مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله كلهم ثقات رجال الشيخين غير ابن عفان هذا وهو
الحسن بن علي بن عفان العامري كما في موضع آخر من ` المعجم ` (135 / 2) وهو
صدوق كما قال الحافظ في ` التقريب ` وقد توبع فأخرجه السلفي في ` الطيوريات `
(ق 174 / 1) من طريقين آخرين عن حسين بن علي الجعفي به. وقال:
` قال ابن
صاعد: وقوله: عن جابر بن عبد الله وهم والصحيح عن محمد بن جبير بن مطعم `.
ثم رواه السلفي من طريق ابن صاعد عن سعيد ابن عبد الرحمن وعبد الجبار بن
العلاء: أنبأنا سفيان عن عمرو عن محمد بن جبير مرسلا به.
قلت: وقال ابن وهب في ` الجامع ` (38) : وسمعت سفيان بن عيينة يحدث عن
عمرو به.
ثم رواه السلفي من طريق إبراهيم بن بشار أنبأنا سفيان بن عيينة أنبأنا عمرو بن
دينار عن محمد بن جبير بن مطعم عن أبيه مرفوعا. فزاد في السند: ` عن أبيه `
فصيره مسندا عن جبير بن مطعم. وإبراهيم بن بشار هو الرمادي وهو ثقة حافظ
وله أوهام كما في ` التقريب ` وقد تابعه محمد بن يونس الجمال كما في تاريخ
بغداد (7 / 431) للخطيب وقال: ` والمحفوظ عن محمد بن جبير فقط `.
قلت: الأرجح عندي أنه عن جابر كما رواه الجعفي وهو ثقة محتج به في
` الصحيحين `. ولم يتفرد به حتى يحكم عليه بالوهم، فقد أخرجه الخطيب من طريق
الدارقطني: حدثنا محمد بن مخلد - ولم نسمعه إلا منه - حدثنا ابن علويه الصوفي
الحسن بن منصور حدثنا سفيان بن عيينة به وقال الدارقطني: تفرد به ابن مخلد عن
ابن علويه عن ابن عيينة وهو معروف برواية حسين الجعفي عن ابن عيينة `.
قلت: وهذا إسناد صحيح كسابقه، الحسن بن منصور من شيوخ البخاري في ` صحيحه `
وابن مخلد وهو العطاء الدوري ثقة حافظ. فهي متابعة قوية لرواية الجعفي من
الحسن بن منصور وإذا كان قد خالفهما سعيد بن عبد الرحمن وهو ابن حسان وعبد
الجبار بن العلاء كما تقدم، فإن معهما من المرجحات ما ليس مع
مخالفيهما من ذلك
أنهما من رجال ` الصحيح ` والآخران ليسا كذلك ومنه أن معهما زيادة وهي الوصل
والزيادة من الثقة مقبولة فكيف من ثقتين؟
فإن قيل: فهلا رجحت بهذه الطريقة نفسها رواية إبراهيم بن بشار التي أسندها عن
جبير بن مطعم؟ أقول: كنت أفعل ذلك لو أن الذي تابعه وهو محمد بن يونس الجمال
كان ثقة أما وهو ضعيف كما في التقريب فتبقى روايته مرجوحة لتجردها عن المتابع
القوي. ومع ذلك فإنه يمكن اعتبار روايته مرجحا آخر لرواية الجعفي والحسن بن
منصور على ما خالفهما بجامع الاشتراك في إسناد الحديث ومخالفة من أرسله غاية
ما في الأمر أنه وقع في روايته أن صحابي الحديث جبير بن مطعم وفي روايتهما:
جابر بن عبد الله ` فترجح روايتهما على روايته بالكثرة والثقة. والله أعلم.
والحديث أورده المنذري في ` الترغيب ` (3 / 240) من رواية جبير ابن مطعم
وقال: ` رواه البزار بإسناد جيد `!
وقد عرفت أن الأرجح من حديث جابر بن عبد الله.




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন:

"তোমরা আমাদের সাথে বানু ওয়াকিফ গোত্রে অবস্থিত ’আল-বাসীর’ (অর্থাৎ দৃষ্টিশক্তিহীন) ব্যক্তির কাছে চলো, আমরা তাকে দেখতে যাব।" [বর্ণনাকারী] বলেন: "এবং তিনি ছিলেন একজন অন্ধ পুরুষ।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (522)


522 - ` إن المسلم المسدد ليدرك درجة الصوام القوام بآيات الله عز وجل لكرم ضريبته
وحسن خلقه `.
أخرجه الإمام أحمد (2 / 220) : حدثنا علي بن إسحاق حدثنا عبد الله أنبأنا بن
لهيعة أخبرني الحارث بن يزيد عن ابن حجيرة الأكبر عن عبد الله ابن عمرو
قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.
ثم أخرجه (2 / 177) من طريقين آخرين صحيحين عن ابن لهيعة به.
قلت: وهذا إسناد صحيح رجاله كلهم ثقات وابن لهيعة واسمه عبد الله وإن كان
قد ساء حفظه إلا أن عبد الله هذا وهو ابن المبارك صحيح الحديث عنه لأنه
سمع
منه قديما كما نبه على ذلك الحافظ عبد الغني ابن سعيد وغيره.
ولم يتنبه لهذا المنذري في ` الترغيب ` (3 / 257) ثم الهيثمي في ` المجمع `
(8 / 22) فأعلاه بابن لهيعة!
وعزاه الثاني منهما للطبراني أيضا في ` الكبير ` و ` الأوسط ` وقال:
` وبقية رجاله رجال الصحيح `.
والحديث أخرجه أيضا الخرائطي في ` مكارم الأخلاق ` (ص 9 / 60) عن ابن لهيعة
. وله شاهد من حديث أبي هريرة مرفوعا بلفظ: ` إن الله ليبلغ العبد بحسن خلقه
درجة الصوم والصلاة `. أخرجه الحاكم (1 / 60) وقال: ` صحيح على شرط مسلم
`. ووافقه الذهبي وهو كما قالا. وأخرجه هو وغيره من حديث عائشة مرفوعا
نحوه بلفظ: ` درجات قائم الليل صائم النهار `. وقال أيضا: ` صحيح على شرط
مسلم ` ووافقه الذهبي وصححه ابن حبان (1927) .




আব্দুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: নিশ্চয়ই সেই সুশৃঙ্খল (সঠিক পথের অনুসারী) মুসলিম ব্যক্তি তার মহৎ স্বভাব ও সুন্দর চরিত্রের কারণে আল্লাহ্ তা‘আলার নৈকট্য অর্জনকারী সদা রোজা পালনকারী এবং (রাতের বেলা) নামাযে দণ্ডায়মানদের মর্যাদা লাভ করে।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (523)


523 - ` يا عائشة ارفقي، فإن الله إذا أراد بأهل بيت خيرا دلهم على باب الرفق `.
أخرجه أحمد (6 / 104) حدثنا أبو سعيد قال: حدثنا سليمان يعني ابن بلال عن
شريك يعني ابن أبي نمر عن عطاء بن يسار عن عائشة أن رسول الله صلى الله
عليه وسلم قال لها:
قلت: وهذا إسناد على شرط البخاري وفي شريك وهو ابن عبد الله ابن أبي نمر
كلام من قبل حفظه لكنه لم يتفرد بالحديث، فقال أحمد أيضا (6 / 71) :
حدثنا هيثم بن خارجة قال: حدثنا حفص بن ميسرة عن هشام بن عروة عن أبيه عن
عائشة أنها قالت قال رسول الله صلى الله عليه وسلم فذكره إلا أنه قال: ` أدخل
عليهم الرفق `. وبهذا اللفظ أورده المنذري (3 / 262) من حديث عائشة وقال:
` رواه أحمد والبزار من حديث جابر ورواتهما رواة الصحيح `.
ونحوه في ` مجمع الزوائد ` (8 / 19) للهيثمي وإسناد أحمد الثاني صحيح على
شرط البخاري.
وسبب الحديث ما روى المقدام بن شريح عن أبيه قال: سألت عائشة رضي الله عنها
عن البداوة فقالت: ` كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يبدو إلى هذه التلاع
وإنه أراد البداوة مرة، فأرسل إلى ناقة مرحمة من إبل الصدقة فقال لي: يا
عائشة ارفقي، فإن الرفق لم يكن في شيء قط إلا زانه ولا نزع من شيء قط إلا
شانه `.




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে বললেন:

"হে আয়েশা! তুমি নম্র হও। কেননা, নম্রতা যখন কোনো কিছুতে থাকে, তা তাকে কেবলই শোভিত করে। আর যখন তা কোনো কিছু থেকে ছিনিয়ে নেওয়া হয়, তখন তা তাকে কেবলই ত্রুটিপূর্ণ করে তোলে। নিশ্চয় আল্লাহ যখন কোনো পরিবারের কল্যাণ চান, তখন তিনি তাদের নম্রতার পথে পরিচালিত করেন।"









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (524)


524 - ` كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يبدو إلى هذه التلاع وإنه أراد البداوة
مرة، فأرسل إلى ناقة محرمة من إبل الصدقة فقال لي: يا عائشة ارفقي، فإن
الرفق لم يكن في شيء قط إلا زانه ولا نزع من شيء قط إلا شانه `.
أخرجه أبو داود (2478) والسياق له وأحمد (6 / 58 / 222) من طريق شريك عن
المقدام. وشريك سيء الحفظ لكن تابعه شعبة عند مسلم (8 /




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম এই ঢালু ভূমিগুলিতে (উপত্যকার দিকে) মাঝে মাঝে গমন করতেন। একবার তিনি খোলা প্রান্তরে যাওয়ার ইচ্ছা করলেন। তখন তিনি সাদকার উটগুলির মধ্য থেকে একটি অনারোহণযোগ্য (সওয়ার হওয়া নিষেধ এমন) উট আনতে পাঠালেন। অতঃপর তিনি আমাকে বললেন: “হে আয়িশা! নম্রতা অবলম্বন করো। কেননা নম্রতা কোনো বস্তুতে থাকলে, তা অবশ্যই তাকে সৌন্দর্যমণ্ডিত করে তোলে এবং তা কোনো কিছু থেকে ছিনিয়ে নেওয়া হলে, তা অবশ্যই তাকে কলঙ্কিত করে দেয়।”









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (525)


525 - ` ما من مسلمين يلتقيان فيتصافحان إلا غفر لهما قبل أن يتفرقا `.
أخرجه أبو داود (5212) والترمذي (2 / 121) وابن ماجه (3703) وأحمد
(4 / 289 / 303) وابن عدي (31 / 1) من طريق الأجلح عن أبي إسحاق عن
البراء بن عازب قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم فذكره وقال
الترمذي:
` حديث حسن غريب من حديث أبي إسحاق عن البراء وقد روي عن البراء من
غير وجه والأجلح هو ابن عبد الله بن حجية بن عدي الكندي `.
قلت: وهو مختلف فيه وهو حسن الحديث إن شاء الله لكن شيخه أبا إسحاق وهو
عمرو بن عبد الله السبيعي كان اختلط ولا أدري سمع منه قبل الاختلاط أم بعده
ثم هو إلى ذلك مدلس وقد عنعنه.
ومن طرقه التي أشار إليها الترمذي ما أخرجه أحمد (4 / 289) من طريق مالك عن
أبي داود قال: ` لقيت البراء بن عازب فسلم علي وأخذ بيدي وضحك في وجهي قال:
تدري لم فعلت هذا بك؟ قال: قلت: لا أدري ولكن لا أراك فعلته إلا لخير قال:
إنه لقيني رسول الله صلى الله عليه وسلم ففعل بي مثل الذي فعلت بك فسألني؟
فقلت مثل الذي قلت لي، فقال: ما من مسلمين يلتقيان فيسلم أحدهما على صاحبه
ويأخذ بيده لا يأخذه إلا لله عز وجل لا يتفرقان حتى يغفر لهما `.
ولكنه إسناد واه جدا أبو داود وهو الأعمى يسمى نفيع متروك كما قال الحافظ في
` التقريب ` وبه أعله المنذري في ` الترغيب ` (3 / 270) ثم الهيثمي في
` المجمع ` (8 / 37) وعزواه للطبراني فقط في ` الأوسط `!
ومنها ما عند أحمد (4 / 293) من طريق زهير عن أبي بلج يحيى ابن أبي سليم
قال: حدثنا أبو الحكم على البصري عن أبي بحر عن البراء أن رسول الله صلى الله
عليه وسلم قال: ` أيما مسلمين التقيا، فأخذ أحدهما بيد صاحبه، ثم حمد الله
تفرقا ليس بينهما خطيئة `.
قال ابن أبي حاتم عن أبيه (2 / 274) :
` قد جود زهير هذا الحديث ولا أعلم
أحدا جوده كتجويد هذا. قلت لأبي: هو محفوظ؟ قال: زهير ثقة `.
قلت: وزهير هو ابن معاوية وقد خولف في إسناده، فرواه هشيم عن أبي بلج عن
زيد أبي الحكم العنزي عن البراء به نحوه. أخرجه أبو داود (5311) .
ورجح الحافظ في ` التعجيل ` (ص




বারাআ ইবনু আযিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: এমন দুজন মুসলিম নেই যারা পরস্পরের সাথে সাক্ষাৎ করে মুসাফাহা (হ্যান্ডশেক) করে, কিন্তু তারা বিচ্ছিন্ন হওয়ার পূর্বেই তাদের ক্ষমা করে দেওয়া হয়।









সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ (526)


526 - ` إن المؤمن إذا لقي المؤمن فسلم عليه وأخذ بيده فصافحه تناثرت خطاياهما كما
يتناثر ورق الشجر `.
ذكره المنذري في ` الترغيب ` (3 / 270) ثم الهيثمي في ` المجمع ` (8 / 36)
من رواية الطبراني في ` الأوسط ` عن حذيفة، فقال الأول منهما: ` ورواته
لا أعلم فيهم مجروحا `. وقال الآخر: ` ويعقوب بن محمد بن الطحلاء روى عنه
غير واحد ولم يضعفه أحد وبقية رجاله ثقات `.
قلت: وفي هذا الكلام غرابة، فإنه إنما يقال في الراوي: ` روى عنه غير واحد
ولم يضعفه أحد `، إذا كان مستورا غير معروف بتوثيق. وليس كذلك ابن طحلاء
فقد وثقه أحمد وابن معين وأبو حاتم وغيرهم واحتج به مسلم ولذلك فإني أخشى
أن يكون يعقوب بن محمد هذا هو غير ابن الطحلاء. والله اعلم.
وقد وجدت للحديث طريقا أخرى يتقوى بها، فقال عبد الله بن وهب في ` الجامع `
(




হুযাইফা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় যখন কোনো মুমিন অন্য মুমিনের সাথে সাক্ষাৎ করে, অতঃপর তাকে সালাম দেয় এবং তার হাত ধরে মুসাফাহা করে, তখন তাদের উভয়ের গুনাহসমূহ এমনভাবে ঝরে পড়ে, যেভাবে গাছের পাতা ঝরে পড়ে।