সিলসিলাতুল আহাদীসিস সহীহাহ
721 - ` الدينار كنز والدرهم كنز والقيراط كنز، قالوا: يا رسول الله أما الدينار
والدرهم فقد عرفناهما، فما القيراط؟ قال: نصف درهم، نصف درهم، نصف درهم `.
أخرجه الطحاوي في ` مشكل الآثار ` (2 / 107) من طريق أبي عبد الرحمن المقرىء
: حدثنا ابن لهيعة عن ابن هبيرة عن أبي تميم الجيشاني عن أبي هريرة قال:
قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره.
قلت: وهذا إسناد جيد، ورجاله ثقات، وابن لهيعة إنما يتقى حديثه إذا كان
من رواية غير العبادلة عنه، فإن حديثهم عنه صحيح، كما نص عليه أهل العلم في
ترجمته، وهذا من رواية أحدهم عنه، وهو أبو عبد الرحمن فإنه عبد الله بن
يزيد المقرىء، وتابعه ثانيهم عبد الله بن وهب، ذكره من طريقه ابن أبي حاتم
في ` العلل ` (1 /
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন:
“দীনার হলো সম্পদ (বা ধন), দিরহাম হলো সম্পদ এবং কিরাত হলো সম্পদ।”
সাহাবীগণ আরজ করলেন: “ইয়া রাসূলুল্লাহ! দীনার ও দিরহাম সম্পর্কে তো আমরা জানি, কিন্তু কিরাত কী?”
তিনি বললেন: “আধা দিরহাম, আধা দিরহাম, আধা দিরহাম।”
722 - ` إذا خفضت فأشمى ولا تنهكي، فإنه أسرى للوجه وأحظى للزوج `.
رواه الدولابي (2 / 122) والخطيب في ` التاريخ ` (5 / 327) عن محمد بن
سلام الجمحي مولى قدامة بن مظعون قال: حدثنا زائدة بن أبي الرقاد أبو معاذ عن
ثابت عن أنس بن مالك قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم لأم عطية:
فذكره.
قلت: وهذا إسناد ضعيف، رجاله ثقات غير زائدة بن أبي الرقاد فإنه منكر الحديث
كما قال الحافظ في ` التقريب `. وأما قول الهيثمي في ` مجمع الزوائد ` (5 /
172) : ` رواه الطبراني في ` الأوسط ` وإسناده حسن `. فإن كان من غير هذا
الوجه فمحتمل وإن كان منه فلا وما أراه إلا منه، فقد رأيت ابن عدي قد أخرجه
في ` الكامل ` (150 / 2) وقال: ` هذا يرويه عن ثابت زائدة بن أبي الرقاد
ولا أعلم يرويه غيره، وزائدة له أحاديث حسان، وفي بعض أحاديثه ما ينكر `.
قلت: وروى الخطيب عن القواريري أنه أنكر هذا الحديث.
قلت: لكن للحديث طريق أخرى عن أنس أخرجه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (1 /
245) عن إسماعيل بن أبي أمية حدثنا أبو هلال الراسبي: سمعت الحسن: حدثنا أنس
قال: ` كانت ختانة بالمدينة يقال لها: أم أيمن، فقال: لها النبي صلى الله
عليه وسلم ... ` فذكره.
قلت: ورجاله موثقون غير إسماعيل هذا والظاهر أنه الذي في ` الميزان `
و` اللسان `:
` إسماعيل بن أمية، ويقال: ابن أبي أمية حدث عن أبي الأشهب
العطاردي تركه الدارقطني `.
وله شاهد من حديث علي قال: ` كانت خفاضة بالمدينة، فأرسل إليها رسول الله
صلى الله عليه وسلم: ... ` فذكره. أخرجه الخطيب (12 / 291) من طريق عوف بن
محمد أبي غسان حدثنا أبو تغلب عبد الله بن أحمد بن عبد الرحمن الأنصاري حدثنا
مسعر عن عروة بن مرة عن أبي البختري عنه. ذكره في ترجمة عوف هذا وقال عن ابن
منده: ` روى عنه عمرو بن علي وبندار `، ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا.
وأبو تغلب هذا لم أجد له ترجمة.
وبقية رجاله معروفون ثقات من رجال ` التهذيب ` لكن أبا البختري لم يسمع من علي
شيئا واسمه سعيد بن فيروز.
وله شاهد آخر، عن الضحاك بن قيس قال: ` كانت أم عطية خافضة في المدينة،
فقال النبي صلى الله عليه وسلم فذكره. أخرجه ابن عساكر في ` تاريخ دمشق ` (8
/ 206 / 1) عن أبي أمية الطرسوسي أنبأنا منصور بن صقير أنبأنا عبيد الله بن
عمرو عن عبد الملك بن عمير عنه. وقال: ` ذكر أبو الطيب أن الضحاك بن قيس هذا
آخر غير الفهيري `.
قلت: وهو الذي جزم به غير واحد وحكاه في ` التهذيب ` عن ابن معين والخطيب.
قال المفضل الغلابي في ` أسئلة ابن معين `: ` وسألته عن حديث حدثنيه عبد الله
بن جعفر - هو الرقي - عن عبيد الله بن عمرو - هو الرقي - قال: حدثني رجل من
أهل الكوفة (عن عبد الملك بن عمير) عن الضحاك بن قيس قال: (قلت: فذكره)
فقال: الضحاك بن قيس ليس بالفهري `.
قلت: ورواية ابن جعفر هذه تدل على أنه سقط من إسناد ابن عساكر الرجل الكوفي
ولعل ذلك من منصور بن صقير، فإنه ضعيف، ومن طريقه أخرجه ابن منده كما في
` التهذيب `. وقد جاءت رواية فيها تسمية الرجل الكوفي، أخرجها أبو داود
(5271) من طريق مروان حدثنا محمد بن حسان الكوفي، عن عبد الملك بن عمير عن
أم عطية الأنصارية: ` أن امرأة كانت تختن في المدينة، فقال النبي صلى الله
عليه وسلم ... ` فذكره بنحوه. وقال: ` روي عن عبيد الله بن عمرو عن عبد
الملك بمعناه وإسناده، قال أبو داود: ليس هو بالقوي وقد روي مرسلا، ومحمد
بن حسان مجهول وهذا الحديث ضعيف `. قلت: وسبب الضعف الجهالة والاضطراب في
إسناده كما ترى، وقد قال الحافظ عقب رواية ابن صقير عند ابن منده: ` وقد
أدخل عبد الله بن جعفر الرقي، وهو أوثق من منصور بين عبيد الله وعبد الملك
الرجل الكوفي الذي لم يسمه، فيظهر من رواية مروان بن معاوية أنه محمد بن حسان
الكوفي فهو الذي تفرد به وهو مجهول. ويحصل من هذا أنه اختلف
على عبد الملك
بن عمير هل رواه عن أم عطية بواسطة أو لا؟ وهل رواه الضحاك عن النبي صلى الله
عليه وسلم وسمعه منه أو أرسله؟ أو أخذه عن أم عطية؟ أو أرسله عنها؟ كل ذلك
محتمل `.
وأقول: لكن مجيء الحديث من طرق متعددة ومخارج متباينة لا يبعد أن يعطي ذلك
للحديث قوة يرتقي بها إلى درجة الحسن، لاسيما وقد حسن الطريق الأولى الهيثمي
كما سبق، والله أعلم.
ثم وجدت للكوفي متابعا، أخرجه الحاكم (3 / 525) من طريق هلال بن العلاء
الرقي حدثنا عبيد الله بن عمرو عن زيد بن أبي أنيسة عن عبد الملك بن عمير عن
الضحاك ابن قيس، قال: ` كانت بالمدينة امرأة تخفض ... ` الحديث.
وسكت عليه الحاكم والذهبي، ورجاله ثقات، غير العلاء بن هلال الرقي والد
هلال، قال الحافظ: فيه لين. وزيد بن أبي أنيسة حراني، فلم يتفرد به محمد
بن حسان الكوفي. والله أعلم. والضحاك بن قيس صحابي ثبت سماعه في غير ما
حديث واحد، وسيأتي أحدها برقم (1189) .
ووجدت له شاهدا آخر يرويه مندل بن علي عن ابن جريج عن إسماعيل بن أمية عن نافع
عن ابن عمر قال: ` دخل على النبي صلى الله عليه وسلم ` نسوة من الأنصار فقال:
يا نساء الأنصار اخضبن غمسا واخفضن ولا تنهكن فإنه أحظى عند أزواجكن وإياكن
وكفر المنعمين `. قال: مندل: يعني الزوج `.
أخرجه البزار (175) وقال:
` مندل ضعيف `. وكذا قال الهيثمي في ` المجمع ` (5 /
আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম (উম্মে আতিয়্যাহকে লক্ষ্য করে) বলেন: “যখন তুমি খাফ্দ (মেয়েদের খতনা) করবে, তখন সামান্য (অংশ) কাটবে এবং বাড়াবাড়ি করবে না (বেশি কেটে ফেলবে না)। কারণ এটি চেহারার জন্য অধিক উজ্জ্বলতা দানকারী এবং স্বামীর নিকট অধিক প্রিয়।”
723 - ` اخرجي فجدي نخلك لعلك أن تصدقي منه أو تفعلي خيرا. قاله للمطلقة ثلاثا وهي
في عدتها `.
أخرجه مسلم (4 / 200) وأبو داود (1 /
ফাতেমা বিনতে কায়স (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:
"তুমি যাও এবং তোমার খেজুর গাছ থেকে ফল সংগ্রহ করো। হয়তো তুমি তা থেকে সাদকা (দান) করতে পারবে অথবা অন্য কোনো ভালো কাজ করতে পারবে।"
তিনি (নবী ﷺ) এ কথা সেই নারীকে বলেছিলেন, যাকে ইদ্দতকালীন সময়ে তিন তালাক দেওয়া হয়েছিল।
724 - ` عليكم بالإثمد عند النوم، فإنه يجلو البصر وينبت الشعر `.
أخرجه ابن ماجه (3496) والقاضي الخلعي في ` الفوائد ` (20 / 50 / 1) من
طريق إسماعيل بن مسلم المكي عن محمد بن المنكدر عن جابر قال: سمعت رسول
الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.
قلت: وإسماعيل هذا ضعيف، لكنه لم يتفرد به، فقد تابعه محمد بن إسحاق عن
محمد بن المنكدر به. أخرجه المخلص في ` الفوائد المنتقاة ` (9 / 4 / 2)
والبغوي في ` شرح السنة ` (3 / 357) . لكن ابن إسحاق مدلس، وقد عنعنه.
إلا أنه لم يتفرد به، فقد أخرجه المخلص وابن عدي في ` الكامل ` (143 / 2)
من طريق زياد بن الربيع قال: حدثنا هشام بن حسان عن محمد ابن المنكدر به.
قلت: وهذا إسناد صحيح على شرط البخاري. وقد أعل بما لا يقدح، فقد ذكره ابن
أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 260) من هذه الطريق، وأنه سأل عنه أباه،
فأجابه بقوله: ` حديث منكر، لم يروه عن محمد إلا الصعقل (!) إسماعيل بن
مسلم ونحوه ولعل هشام بن حسان أخذه من إسماعيل بن مسلم، فإنه كان يدلس `.
قلت: لم أر من رماه بالتدليس مطلقا وإنما تكلموا في روايته عن الحسن وعطاء
خاصة لأنه كان يرسل عنهما كما قال أبو داود، ولذلك قال الحافظ: ` ثقة من
أثبت الناس في ابن سيرين، وفي روايته عن الحسن وعطاء مقال، لأنه قيل: كان
يرسل عنهما `.
وهذا الحديث من روايته عن محمد بن المنكدر، فلا مجال لإعلاله
، لاسيما وللحديث شاهد بنحوه من حديث ابن عباس عند الترمذي وحسنه وقد خرجته
في ` المشكاة ` (4472) وليس لديه ` عند النوم ` لكنها عند أحمد (1 / 274)
وابن حبان (1440) من طريق أخرى عنه نحوه.
قلت: وإسناده صحيح على شرط مسلم. وللزيادة شاهد آخر من حديث أبي النعمان
معبد بن هوذة الأنصاري مرفوعا بلفظ: ` اكتحلوا بالإثمد المروح، فإنه يجلو
البصر وينبت الشعر `. أخرجه أحمد (3 / 476،
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "তোমরা অবশ্যই ঘুমের সময় ইছমিদ সুরমা ব্যবহার করো, কেননা তা দৃষ্টিশক্তিকে স্বচ্ছ ও উজ্জ্বল করে এবং (চোখের) চুল (পাপড়ি) গজাতে সাহায্য করে।"
725 - ` كان أول من ضيف الضيف إبراهيم، وهو أول من اختتن على رأس ثمانين سنة
واختتن بالقدوم `.
رواه ابن عساكر (2 / 167 / 1) : أخبرنا أبو المعالي محمد بن إسماعيل ابن
محمد
بن إسماعيل بن محمد بن الحسين أنبأنا أبو حامد أحمد بن الحسن ابن محمد الأزهري
أنبأنا أبو محمد المخلدي أنبأنا أبو العباس السراج أنبأنا محمد بن عثمان ابن
كرمة العجلي أنبأنا أبو أسامة: حدثني محمد بن عمرو، أنبأنا أبو سلمة بن عبد
الرحمن عن أبي هريرة مرفوعا.
قلت: وهذا سند حسن رجاله كلهم ثقات معرفون، وأبو المعالي هو الفارسي ثم
النيسابوري راوي ` السنن الكبرى ` للبيهقي، وراوي ` البخاري ` عن العيار كما
في ` شذرات الذهب ` (4 /
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: প্রথম ব্যক্তি যিনি মেহমানদের আপ্যায়ন করেন, তিনি হলেন ইবরাহীম (আলাইহিস সালাম)। আর তিনিই প্রথম ব্যক্তি, যিনি আশি বছর বয়সে খতনা (সুন্নতে খাতনা) করেন। তিনি ‘আল-কাদুম’ (নামক যন্ত্র) দ্বারা খতনা করেছিলেন।
726 - ` أخذنا فألك من فيك `.
أخرجه أبو داود (2 /
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত: "আমরা আপনার মুখ থেকে শুভ আলামত (ফাল) গ্রহণ করলাম।"
727 - ` لا تكرهوا مرضاكم على الطعام والشراب، فإن الله يطعمهم ويسقيهم `.
روي من حديث عقبة بن عامر الجهني وعبد الرحمن بن عوف وعبد الله بن عمر
وجابر بن عبد الله.
উকবাহ ইবনু আমির আল-জুহানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
তোমরা তোমাদের রুগ্ন ব্যক্তিদেরকে খাবার ও পানীয় গ্রহণের জন্য বাধ্য করো না। কেননা আল্লাহ্ই তাদেরকে খাওয়ান এবং পান করান।
728 - ` إذا أدى العبد حق الله وحق مواليه كان له أجران `.
أخرجه مسلم (5 /
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যখন কোনো দাস (বা বান্দা) আল্লাহ্র হক এবং তার মনিবদের হক যথাযথভাবে আদায় করে, তখন তার জন্য দ্বিগুণ সাওয়াব (বা প্রতিদান) রয়েছে।
729 - ` إذا أنفق الرجل على أهله نفقة يحتسبها فهي له صدقة `.
أخرجه البخاري (1 / 20) والنسائي (1 / 353) والطيالسي (ص 86 رقم 615)
والسياق له من حديث أبي مسعود البدري مرفوعا.
وفي رواية للبخاري (6 / 189) : ` المسلم ` بدل ` الرجل `.
আবু মাসউদ আল-বদরি (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত:
যখন কোনো ব্যক্তি তার পরিবারের উপর এমনভাবে ব্যয় করে যে, সে এর মাধ্যমে আল্লাহর নিকট সওয়াবের আশা রাখে, তখন তা তার জন্য সদকা (দান) হিসেবে গণ্য হয়।
730 - ` إذا أنفقت المرأة من طعام بيتها غير مفسدة كان لها أجرها بما أنفقت ولزوجها
أجره بما كسب وللخازن مثل ذلك لا ينقص بعضهم أجر بعض شيئا `.
رواه البخاري (2 / 117، 119، 120) ومسلم (3 / 90) وأبو داود (1 / 267
) والنسائي (1 /
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যখন কোনো নারী তার ঘরের খাদ্যদ্রব্য থেকে (সঠিকভাবে) খরচ করে, অপচয় বা ক্ষতিসাধন না করে, তখন সে যা খরচ করল তার জন্য সে সওয়াব পাবে, আর তার স্বামী যা উপার্জন করেছে তার জন্য সেও সওয়াব পাবে, এবং কোষাধ্যক্ষ (বা দায়িত্বে থাকা ব্যক্তি)ও অনুরূপ সওয়াব পাবে। তাদের একজনের সওয়াব থেকে অন্যজনের সওয়াব সামান্যও কমবে না।
731 - ` إذا أنفقت المرأة من كسب زوجها من غير أمره فله نصف أجره `.
أخرجه البخاري (3 / 8 و 6 / 292) واللفظ له ومسلم (3 / 91) وأبو داود
(1 / 267) وأحمد (2 / 316) من حديث أبي هريرة، إلا أن أبا داود قال:
` فلها نصف أجره `.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যখন কোনো নারী তার স্বামীর উপার্জন থেকে তার অনুমতি ছাড়া কিছু ব্যয় করে, তখন সেই ব্যয়ের অর্ধেক সওয়াব তার (স্বামীর) জন্য রয়েছে।
732 - ` إذا سمعتم الحديث عني تعرفه قلوبكم وتلين له أشعاركم وأبشاركم وترون أنه
منكم قريب، فأنا أولاكم به وإذا سمعتم الحديث عني تنكره قلوبكم وتنفر منه
أشعاركم وأبشاركم وترون أنه منكم بعيد فأنا أبعدكم منه `.
رواه ابن سعد (1 /
যখন তোমরা আমার পক্ষ থেকে এমন কোনো হাদীস শোনো, যা তোমাদের অন্তরসমূহ চিনতে পারে, এবং যার কারণে তোমাদের পশম ও চামড়া কোমল হয়ে যায়, আর তোমরা অনুভব করো যে, তা তোমাদের খুব কাছাকাছি; তখন আমিই সেটির জন্য তোমাদের মধ্যে সবচেয়ে বেশি উপযুক্ত (অর্থাৎ তা আমারই কথা)। আর যখন তোমরা আমার পক্ষ থেকে এমন কোনো হাদীস শোনো, যা তোমাদের অন্তরসমূহ অস্বীকার করে, এবং যার থেকে তোমাদের পশম ও চামড়া দূরে সরে যায়, আর তোমরা দেখো যে, তা তোমাদের থেকে অনেক দূরে; তখন আমিই তোমাদের মধ্যে তার থেকে সবচেয়ে বেশি দূরে।
733 - ` أربع إذا كن فيك فلا عليك ما فاتك من الدنيا، حفظ أمانة وصدق حديث وحسن
خليقة وعفة طعمة `.
رواه ابن وهب في ` الجامع ` (84) : أخبرني ابن لهيعة عن الحارث ابن يزيد عن
عبد الله بن عمرو بن العاص مرفوعا. ورواه أحمد (2 / 177) : حدثنا حسن
حدثنا ابن لهيعة به وقال: الحارث ابن يزيد الحضرمي. وأخرجه الخرائطي في
` مكارم الأخلاق ` (ص 6، 27، 52) والحاكم (4 / 314) وعنه البيهقي في
` الشعب ` (2 / 104 / 1) من طرق عن ابن لهيعة به. وسكت الحاكم عليه وكذا
الذهبي.
قلت: وهذا سند حسن، بل صحيح، فإن ابن لهيعة وإن كان ضعيفا، فإنه من رواية
عبد الله بن وهب عنه، وهي صحيحة.
وله طريق أخرى، فقال ابن وهب وابن المبارك في ` الزهد ` (1204) :
أخبرنا موسى بن علي بن رباح قال: سمعت أبي يحدث عن عبد الله بن عمرو بن العاص
، قال: فذكره موقوفا.
قلت: وهذا سند صحيح، فهو ثابت مرفوعا وموقوفا، ولا منافاة بينهما، فإن
الراوي قد لا ينشط أحيانا فيوقفه، كما يعلم ذلك العارفون بهذا العلم الشريف.
আব্দুল্লাহ ইবনু আমর ইবনুল আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: চারটি জিনিস এমন, যা যদি তোমার মধ্যে থাকে, তবে দুনিয়ার যা কিছু তোমার হাতছাড়া হয়ে গেছে, তাতে তোমার কোনো ক্ষতি হবে না। সেগুলো হলো: আমানত রক্ষা করা, কথায় সত্যবাদিতা, উত্তম চরিত্র এবং হালাল জীবিকা/খাদ্যের পবিত্রতা (বা, পবিত্র উপার্জন)।
734 - ` أربع في أمتي من أمر الجاهلية لا يتركونهن: الفخر في الأحساب والطعن في
الأنساب والاستسقاء بالنجوم والنياحة `.
أخرجه مسلم (3 / 45) وأحمد (5 / 342، 343، 344) عن يحيى بن أبي كثير أن
زيدا حدثه أن أبا سلام حدثه أن أبا مالك الأشعري حدثه به مرفوعا.
واستدركه الحاكم (1 / 383) فقال: ` صحيح على شرط الشيخين وقد أخرجه مسلم
مختصرا `. كذا قال، وهو عنده بهذا اللفظ إلا أنه قال في أوله:
` إن في أمتي أربعا من أمر الجاهلية ليسوا بتاركيهن الفخر ... ` الحديث.
وله شاهد بلفظ:
` أربع في أمتي من أمر الجاهلية لن يدعهن الناس: النياحة والطعن في الأحساب
والعدوى: أجرب بعير فأجرب مائة بعير، من أجرب البعير الأول؟ ! والأنواء:
مطرنا بنوء كذا وكذا `.
আবু মালিক আশআরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আমার উম্মতের মধ্যে জাহিলিয়াতের (মূর্খতার যুগের) চারটি বিষয় রয়েছে, যা তারা পরিত্যাগ করবে না:
(১) বংশমর্যাদা নিয়ে অহংকার করা,
(২) (অন্যের) বংশের প্রতি কটাক্ষ করা বা দোষারোপ করা,
(৩) তারকারাজির মাধ্যমে বৃষ্টি প্রার্থনা করা (বা বৃষ্টিকে তারকারাজির প্রভাব মনে করা)
এবং (৪) (মৃত ব্যক্তির জন্য) উচ্চস্বরে বিলাপ করা।
735 - ` أربع في أمتي من أمر الجاهلية لن يدعهن الناس: النياحة والطعن في الأحساب
والعدوى: أجرب بعير فأجرب مائة بعير، من أجرب البعير الأول؟! والأنواء:
مطرنا بنوء كذا وكذا `.
أخرجه الترمذي (1 / 186 طبع بولاق) والطحاوي (2 / 378) والطيالسي (رقم
2395) وأحمد (2 / 291، 414، 415، 455، 526، 531) عن علقمة بن مرثد عن
أبي الربيع المدني عن أبي هريرة به. وقال الترمذي: ` حديث حسن `.
وأبو الربيع هذا كأنه مجهول وقال أبو حاتم: ` صالح الحديث ` وفي التقريب:
إنه مقبول. ورواه البزار بلفظ:
` أربع في أمتي ليس هم بتاركيها: الفخر في
الأحساب والطعن في الأنساب، والنياحة، تبعث يوم القيامة النائحة إذا لم تتب
عليها درع من قطران `.
هكذا أورده الهيثمي في ` المجمع ` (3 / 13) وقال: رواه البزار وإسناده
` حسن `. ولم تذكر فيه الخصلة الرابعة، فلا أدري أسقطت من الراوي أم من
الناسخ، وهذه الزيادة: ` النائحة إذا لم تتب ` الخ صحت من حديث أبي مالك
الأشعري كما سيأتي في ` النائحة ... ` رقم (1952) .
وللحديث شواهد بألفاظ ` اثنتان في الناس `. وهو مخرج في ` شرح الطحاوية `
(ص 298) ` ثلاث من عمل `. ` ثلاثة من الكفر ` وسيأتيان (1801) . ` شعبتان
من الكفر ` وسيأتي (1896) . (ثلاث لا يتركن) .
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আমার উম্মতের মধ্যে চারটি বিষয় রয়েছে যা জাহিলী যুগের কাজ। মানুষ এগুলো সহজে ত্যাগ করবে না:
১. উচ্চস্বরে বিলাপ (আল-নিয়া‘হা)।
২. বংশ বা মর্যাদা নিয়ে কটূক্তি করা।
৩. সংক্রামক ব্যাধির [স্বয়ংক্রিয়] ধারণা (আল-আদওয়া)—[যেমন তারা বলে,] একটি উট খোস-রোগে আক্রান্ত হলে তার দ্বারা একশটি উটও আক্রান্ত হয়—[কিন্তু] প্রথম উটটিকে কে রোগাক্রান্ত করেছিল?!
৪. নক্ষত্র বিশ্বাস (আল-আনওয়া)—[তারা বলে,] অমুক অমুক নক্ষত্রের প্রভাবে আমরা বৃষ্টি পেয়েছি।
736 - ` أرحامكم أرحامكم `.
رواه ابن حبان (2037) والحافظ العراقي في ` المجلس 86 من الأمالي ` عن الحسن
بن سفيان حدثنا محمد بن بشار حدثنا أبو أحمد الزبير حدثنا سفيان عن سليمان
التيمي عن قتادة عن أنس رضي الله عنه أن النبي صلى الله عليه وسلم قال في
مرضه ... فذكره وقال: ` هذا حديث صحيح، أخرجه بن حبان في صحيحه هكذا وقد
رواه الرافعي في ` أماليه ` من رواية سعيد بن أبي عروبة عن قتادة بلفظ:
` صلوا أرحامكم، فإنه أبقى لكم في الدنيا والآخرة `. ولم يقل: ` في مرضه `.
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর অসুস্থতাকালে বললেন):
তোমাদের আত্মীয়তার বন্ধন! তোমাদের আত্মীয়তার বন্ধন! (অর্থাৎ, তাদের সাথে সুসম্পর্ক বজায় রাখো)।
737 - ` استعيذوا بالله تعالى من العين فإن العين حق `.
أخرجه ابن ماجه (2 / 356) والخرائطي في ` مكارم الأخلاق ` (
তোমরা আল্লাহ তাআলার কাছে বদ নজর (কুনজর) থেকে আশ্রয় প্রার্থনা করো, কেননা বদ নজর অবশ্যই সত্য।
738 - ` أسرع قبائل العرب فناء قريش، ويوشك أن تمر المرأة بالنعل، فتقول: إن هذا
نعل قرشي `.
أخرجه أحمد (2 / 336) حدثنا عمر بن سعد: حدثنا يحيى - يعني - ابن زكريا بن
أبي زائدة عن سعد بن طارق عن أبي حازم عن أبي هريرة مرفوعا.
وهذا إسناد صحيح على شرط مسلم. وفي ` المجمع ` (10 / 28) :
` رواه أحمد وأبو يعلى والبزار ببعضه والطبراني في ` الأوسط ` وقال:
` هذه ` بدل ` هذا ` ورجال أحمد وأبي يعلى رجال الصحيح `.
وللحديث شاهد من رواية عائشة بلفظ: ` يا عائشة قومك أسرع أمتي بي لحاقا `.
ويأتي إن شاء الله تعالى برقم (1953) .
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আরবের গোত্রগুলোর মধ্যে কুরাইশই হবে সবচেয়ে দ্রুত বিলুপ্ত হওয়া গোত্র। এমন সময় আসতে দেরি নেই যখন কোনো নারী একটি জুতোর পাশ দিয়ে যাবে, অতঃপর সে বলবে: ‘নিশ্চয়ই এটি একটি কুরাইশী জুতো।’
739 - ` من لائمكم من خدمكم فأطعموهم مما تأكلون وألبسوهم مما تلبسون ومن لا
يلائمكم من خدمكم فبيعوا ولا تعذبوا خلق الله عز وجل `.
أخرجه أحمد (5 / 168، 173) وكذا أبو داود (2 / 337) عن منصور عن مجاهد عن
مورق عن أبي ذر مرفوعا. وهذا سند صحيح على شرط الشيخين وله شاهد بلفظ:
` أرقاءكم، أرقاءكم، أطعموهم مما تأكلون واكسوهم مما تلبسون، فإن جاؤوا
بذنب لا تريدون أن تغفروه فبيعوا عباد الله ولا تعذبوهم `.
আবু যর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন:
"তোমাদের খাদেমদের (সেবক বা কর্মচারীদের) মধ্যে যে তোমাদের অনুকূলে থাকে (বা তোমাদের সাথে মিলেমিশে চলে), তোমরা যা আহার করো, তা থেকে তাদের আহার করাও এবং তোমরা যা পরিধান করো, তা থেকে তাদের পরিধান করাও। আর তোমাদের খাদেমদের মধ্যে যে তোমাদের অনুকূলে থাকে না, তাকে বিক্রি করে দাও। কিন্তু তোমরা আল্লাহ আযযা ওয়া জাল-এর সৃষ্টিকে কষ্ট দিও না।"
(অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: তোমাদের দাসদের প্রতি খেয়াল রাখো, তোমাদের দাসদের প্রতি খেয়াল রাখো! তোমরা যা আহার করো, তা থেকে তাদের আহার করাও এবং তোমরা যা পরিধান করো, তা থেকে তাদের পরিধান করাও। যদি তারা এমন কোনো অপরাধ করে, যা তোমরা ক্ষমা করতে চাও না, তাহলে আল্লাহ্র এই বান্দাদের বিক্রি করে দাও এবং তাদের উপর শাস্তি আরোপ করো না।)
740 - ` أرقاءكم، أرقاءكم، أطعموهم مما تأكلون واكسوهم مما تلبسون، فإن جاءوا
بذنب لا تريدون أن تغفروه فبيعوا عباد الله ولا تعذبوهم `.
قال في ` المجمع ` (4 / 236) : ` رواه أحمد والطبراني عن يزيد بن جارية،
وفيه عاصم بن عبيد الله وهو ضعيف `.
قلت: هو في المسند (4 /
তোমাদের অধীনস্থ ব্যক্তিগণ, তোমাদের অধীনস্থ ব্যক্তিগণ! তোমরা যা আহার করো, তাদেরকে তা থেকে আহার করাও এবং তোমরা যা পরিধান করো, তাদেরকে তা থেকে পরিধান করাও। আর যদি তারা এমন কোনো অপরাধ করে, যা তোমরা ক্ষমা করতে চাও না, তবে আল্লাহর সেই বান্দাদেরকে বিক্রি করে দাও, কিন্তু তাদের শাস্তি দিও না।