সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ
` كان يرى في الظلمة كما يرى في الضوء `.
موضوع.
رواه تمام في ` الفوائد ` (207 / 1 - 2 / رقم 2210 - من نسختي) وابن عدي (221 / 2) وعنه البيهقي في ` الدلائل ` (6 / 75) والخطيب في ` التاريخ ` (4 / 272) ومكي المؤذن في ` حديثه ` (236 / 1) والضياء المقدسي في ` المنتقى من حديث أبي علي الأو قي ` (1 / 2) عن عبد الله بن المغيرة عن المعلى بن هلال عن هشام بن عروة عن أبيه عن عائشة مرفوعا، وقال البيهقي: وهذا إسناد فيه ضعيف.
قلت: بل هو ضعيف جدا، وآفته ابن المغيرة هذا، ويقال فيه: عبد الله بن محمد بن المغيرة، قال العقيلي: يحدث بما لا أصل له، وقال ابن يونس:
منكر الحديث، وساق له الذهبي أحاديث هذا أحدها، ثم قال: وهذه موضوعات، ومع ذلك أورده السيوطي في ` الجامع الصغير `.
ثم استدركت فقلت: الحمل فيه على شيخ ابن المغيرة - وهو المعلى بن هلال - أولى ذلك لأنه اتفق النقاد على تكذيبه كما قال الحافظ في ` التقريب `.
وتابعه محمد بن المغيرة المزني عن هاشم بن عروة عن أبيه مرسلا به.
أخرجه ابن عساكر (17 / 128 / 2) من طريق مخلص بن موحد بن عثمان التنوخي، أخبرنا أبي، أخبرنا محمد بن المغيرة به، ولم يذكر في موحد هذا جرحا ولا تعديلا.
ومحمد بن المغيرة هذا لم أعرفه، ولعله سقط من النسخة اسم ابنه عبد الله كما في الطريق، ثم قال البيهقي: وروي ذلك من وجه آخر ليس بالقوي، أخبرناه أبو عبد الله الحافظ قال: حدثني أبو عبد الله محمد بن الخليل النيسابوري، حدثنا صالح بن عبد الله النيسابوري، حدثنا عبد الرحمن بن عمار الشهيد، حدثنا المغيرة بن مسلم عن عطاء عن ابن عباس مرفوعا نحوه.
قلت: وهذا إسناد مظلم، فإن من دون المغيرة هذا لم أجد لهم ترجمة.
৩৪১। তিনি অন্ধকারেও দেখতেন যেরূপ আলোতে দেখতেন।
হাদীসটি জাল।
এটি তাম্মাম “আল-ফাওয়াইদ” গ্রন্থে (২০৭/১-২/নং ২২১০), ইবনু আদী (২/২২১) এবং তার থেকে বাইহাকী “আদ-দালায়েল” গ্রন্থে (৬/৭৫), আল-খাতীব তার “আত-তারীখ” গ্রন্থে (৪/২৭২), মাক্কী আল-মুয়াযিযন তার “হাদীস” গ্রন্থে (১/২৩৬) এবং যিয়া আল-মাকদেসী “আল-মুনতাকা ...” গ্রন্থে (১/২) আব্দুল্লাহ ইবনু মুগীরা হতে, তিনি মুয়াল্লা ইবনু হিলাল হতে ... বর্ণনা করেছেন।
বাইহাকী বলেনঃ এ সনদটিতে দুর্বলতা রয়েছে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ বরং এটির সনদ নিতান্তই দুর্বল। এটির সমস্যা হচ্ছে এ ইবনুল মুগীরা। তাকে বলা হয় আব্দুল্লাহ ইবনু মুহাম্মাদ ইবনিল মুগীরা; উকায়লী বলেনঃ তিনি এমন হাদীস বর্ণনা করতেন যার কোন ভিত্তি নেই। ইবনু ইউনুস বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীস। যাহাবী তার কতিপয় হাদীস উল্লেখ করেছেন। এটি সেগুলোর একটি। অতঃপর বলেছেনঃ এগুলো বানোয়াট। তা সত্ত্বেও সুয়ূতী হাদীসটি তার “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। মুয়াল্লা ইবনু হিলাল যে মিথ্যুক এ মর্মে সমালোচকগণ একমত পোষণ করেছেন, যেমনটি ইবনু হাজার-এর “আত-তাকরীব` গ্রন্থে এসেছে।
ইবনু আসাকির অন্য একটি সূত্রে বর্ণনা করেছেন, যেটিতে মুহাম্মাদ ইবনু মুগীরা রয়েছেন। তিনি অপরিচিত। সম্ভবত তার ছেলে আব্দুল্লাহর নাম কপি হতে উঠিয়ে দেয়া হয়েছে। অতঃপর বাইহাকী বলেনঃ অন্য একটি মাধ্যমে হাদীসটি বর্ণিত হয়েছে। কিন্তু সেটি শক্তিশালী নয়।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটির সনদটি অন্ধকারাচ্ছন্ন। কারণ মুগীরা ইবনু মুসলিমের নিচের বর্ণনাকারীদের জীবনী পাচ্ছি না।
` لما حملت حواء طاف بها إبليس، وكان لا يعيش لها ولد، فقال: سميه عبد الحارث، فسمته: عبد الحارث، فعاش، وكان ذلك من وحي الشيطان وأمره `.
ضعيف.
أخرجه الترمذي (2 / 181 - بولاق) والحاكم (2 / 545) وابن بشران في ` الأمالي ` (158 / 2) وأحمد (5 / 11) وغيرهم من طريق عمر بن
إبراهيم عن قتادة عن الحسن عن سمرة بن جندب مرفوعا، وقال الترمذي: حديث حسن غريب لا نعرفه إلا من حديث عمر بن إبراهيم عن قتادة، وقال الحاكم: صحيح الإسناد ووافقه الذهبي.
قلت: وليس كما قالوا، فإن الحسن في سماعه من سمرة خلاف مشهور، ثم هو مدلس ولم يصرح بسماعه من سمرة وقال الذهبي في ترجمته من ` الميزان `: كان الحسن كثير التدليس، فإذا قال في حديث: عن فلان، ضعف احتجاجه.
قلت: وأعله ابن عدي في ` الكامل ` (3 / 1701) بتفرد عمر بن إبراهيم وقال: وحديثه عن قتادة مضطرب، وهو مع ضعفه يكتب حديثه.
ومما يبين ضعف هذا الحديث الذي فسر به قوله تعالى {فلما آتاهما صالحا جعلا له شركاء فيما آتاهما … } الآية، أن الحسن نفسه فسر الآية بغير ما في حديثه هذا، فلوكان عنده صحيحا مرفوعا لما عدل عنه، فقال في تفسيرها: كان هذا في بعض أهل الملل ولم يكن بآدم، ذكر ذلك ابن كثير (2 / 274 - 275) من طرق عنه ثم قال: وهذه أسانيد صحيحة عن الحسن أنه فسر الآية بذلك، وهو من أحسن التفاسير وأولى ما حملت عليه الآية، وانظر تمام كلامه فإنه نفيس، ونحوه في ` التبيان في أقسام القرآن ` (ص 264) لابن القيم.
৩৪২। মা হাওয়া যখন গর্ভবতী হলেন, তখন ইবলীস তাঁকে নিয়ে তাওয়াফ করল। তার (হাওয়ার) সন্তান জীবন ধারণ করত না। অতঃপর (ইবলিস) বললঃ তার নাম রাখুন আব্দুল হারেস। তিনি তার নাম রাখলেন আব্দুল হারেস। ফলে সে জীবন ধারণ করল। এটি ছিল শয়তানের ওহী হতে এবং তার নির্দেশে।
হাদীসটি দুর্বল।
এটি তিরমিযী (২/১৮১), হাকিম (২/৫৪৫), ইবনু বিশরান `আল-আমলী` গ্রন্থে (২/১৫৮) এবং আহমাদ (৫/১১) উমর ইবনু ইবরাহীম সূত্রে কাতাদা হতে বর্ণনা করেছেন। তিরমিযী বলেনঃ হাদীসটি হাসান গারীব। এটিকে কাতাদা থেকে উমার ইবনু ইবরাহীমের হাদীস ছাড়া অন্য কোন সূত্রে চিনি না। হাকিম বলেনঃ হাদীসটির সনদ সহীহ। যাহাবীও তার কথাকে সমর্থন করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তারা যেরূপ বলেছেন তেমন নয়। কারণ (এটির সনদে) বর্ণনাকারী হাসান, সামুরা হতে শুনেছেন কিনা তাতে মতভেদ রয়েছে। তার পরেও তিনি মুদাল্লিস। যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে হাসানের জীবনীতে বলেনঃ হাসান বেশী বেশী তাদলীস করতেন। যখন তিনি কোন হাদীসে আন ফুলান অমুক হতে বলেন তখন তা দলীল হিসাবে গ্রহণ করা দুর্বল হয়ে যায়। ইবনু আদী “আল-কামিল” গ্রন্থে বলেনঃ উমার ইবনু ইবরাহীম এককভাবে হাদীসটি বর্ণনা করে বলেছেনঃ কাতাদা হতে তার হাদীস মুযতারিব। তিনি দুর্বল হওয়া সত্ত্বেও তার হাদীস লিখা যায়।
` ما مات رسول الله صلى الله عليه وسلم حتى قرأ وكتب `.
موضوع.
رواه أبو العباس الأصم في ` حديثه ` (ج 3 رقم 153 من نسختي) والطبراني من طريق أبي عقيل الثقفي عن مجاهد، حدثني عون بن عبد الله بن عتبة عن أبيه قال: فذكره، قال الطبراني: هذا حديث منكر، وأبو عقيل ضعيف الحديث، وهذا معارض لكتاب الله عز وجل، نقله السيوطي في ` ذيل الموضوعات ` (ص 5) .
وأما ما جاء في ` صحيح البخاري ` (7 / 403 - 409) من حديث البراء رضي الله عنه في قصة صلح الحديبية: فلما كتب الكتاب، كتبوا: ` هذا ما قاضى عليه محمد رسول الله `، قالوا: لا نقر لك بهذا، لونعلم أنك رسول الله ما منعناك شيئا ولكن أنت محمد بن عبد الله، فقال: ` أنا رسول الله، وأنا محمد بن عبد الله `، ثم قال لعلي: ` امح رسول الله `، قال علي: والله لا أمحوك أبدا فأخذ رسول الله صلى الله عليه وسلم الكتاب وليس يحسن يكتب، فكتب: هذا ما قاضى محمد بن عبد الله.. فليس على ظاهره بل هو من باب بنى الأمير المدينة، أي
أمر.
والدليل على هذا رواية البخاري أيضا (9 / 351 - 381) في هذه القصة من حديث المسور بن مخرمة بلفظ: ` والله إني لرسول الله وإن كذبتموني، اكتب: محمد بن عبد الله `، ومثله في ` صحيح مسلم ` (5 / 175) من حديث أنس، ولهذا قال السهيلي: والحق أن معنى: قوله ` فكتب ` أي: أمر عليا أن يكتب، نقله الحافظ
في ` الفتح ` (7 / 406) وأقره وذكر أنه مذهب الجمهور من
العلماء، وأن النكتة في قوله: فأخذ الكتاب … ، لبيان أن قوله: ` أرني إياها ` أنه ما احتاج إلى أن يريه موضع الكلمة التي امتنع علي من محوها إلا لكونه لا يحسن الكتابة.
৩৪৩। রাসুল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম পড়া ও লিখার পূর্বে মৃত্যুবরণ করেননি।
হাদীসটি জাল।
এটি আবুল আব্বাস আল-আসাম তার “হাদীস” গ্রন্থে (৩/নং ১৫৩) এবং তাবারানী আবূ আকীল আস-সাকাফী সূত্রে মুজাহিদ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
তাবারানী বলেনঃ এ হাদীসটি মুনকার, আবু আকীল হাদীসের ক্ষেত্রে দুর্বল এবং এ কথাটি কিতাবুল্লাহ বিরোধী।
সুয়ূতী হাদিসটি `যায়লুল আহাদীসিল মাও'যূয়াহ` গ্রন্থে (পৃঃ ৫) উল্লেখ করেছেন।
বুখারীতে সুলহে হুদাইবিয়ার ঘটনায় তার নিজে লিখার সম্পর্কে যে কথা বলা হয়েছে, সেটি এরূপ যে, “আমীর শহরটি তৈরি করেছেন” (কর্মচারীরা তৈরি করা সত্ত্বেও)। কারণ বুখারীর অন্য বর্ণনায় এবং মুসলিমের বর্ণনায় এসেছে তিনি আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে লিখার নির্দেশ দেন। এ জন্যই সুহাইলী বলেছেনঃ হক হচ্ছে এটিই যে, “فكتب” অর্থাৎ তিনি আলীকে লিখার নির্দেশ দেন।' হাফিয ইবনু হাজার “ফাতহুল বারী” গ্রন্থে (৪/৪০৬) এ ব্যাখ্যাকে সমর্থন করে বলেছেনঃ এটিই জামহুরে ওলামার মত।
` ما من عبد يحب أن يرتفع في الدنيا درجة فارتفع إلا وضعه الله في الآخرة درجة أكبر منها وأطول، ثم قال: {وللآخرة أكبر درجات وأكبر تفضيلا} `.
موضوع.
أخرجه الطبراني (6 / 234) وأبو نعيم (4 / 203 - 204) من طريق عبد الغفور ابن سعد الأنصاري عن أبي هاشم الرماني عن زاذان عن سلمان الفارسي مرفوعا.
وهذا سند موضوع، قال ابن حبان في ` الضعفاء (2 / 148) : عبد الغفور كان ممن يضع الحديث، وقال ابن معين: ليس حديثه بشيء، وقال البخاري: تركوه، وبه أعله في ` المجمع ` (7 / 49) ، ومع ذلك ذكره في ` الجامع `.
৩৪৪। কোন বান্দা দুনিয়াতে তার মর্যাদা উচ্চ হওয়াকে ভালবাসলে, সে মর্যাদাবান হয় এবং আল্লাহ আখেরাতে তার জন্য আরও বৃহৎ ও দীর্ঘ মর্যাদা তৈরি করে দেন। অতঃপর পড়লেনঃ (আখেরাত বড় বড় মর্যাদা আর বড় বড় সম্মান রয়েছে) [সূরা ইসরাঃ ২১]
হাদীসটি জাল।
এটি তাবারানী (৬/২৩৪) এবং আবু নু’য়াইম (৪/২০৩-২০৪) আব্দুল গফুর ইবনু সা’দ আনসারী সূত্রে আবু হাশেম আর-রুম্মানী হতে ... বর্ণনা করেছেন। এটির সনদ জাল (বানোয়াট), ইবনু হিব্বান `আয-যুয়াফা` গ্রন্থে (২/১৪৮) বলেনঃ আব্দুল গফুর হাদীস জাল করতেন। ইবনু মাঈন বলেনঃ তার হাদীস কিছুই না।
ইমাম বুখারী বলেনঃ তাকে মুহাদ্দিসগণ মাতরূক হিসাবে চিহ্নিত করেছেন। (মিথ্যার দোষে দোষী হওয়ার কারণে পরিত্যাগ করেছেন)।
হায়সামী `আল-মাজমা` গ্রন্থে (৭/৪৯) এ একই সমস্যা উল্লেখ করে কারণ দশিয়েছেন। তথাপিও হাদীসটি “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে উল্লেখ করা হয়েছে।
` يقوم الرجل للرجل، إلا بني هاشم فإنهم لا يقومون لأحد `.
موضوع.
رواه الطبراني في ` المعجم الكبير ` (8 / 289 / 7946) وأبو جعفر الرزاز في ` ستة مجالس من الأمالي ` (ق 232 / 2) عن جعفر بن الزبير عن
القاسم عن أبي أمامة مرفوعا.
قال الهيثمي في ` المجمع ` (8 / 40) بعدما عزاه للطبراني: وفيه جعفر بن الزبير، وهو متروك.
قلت: بل هو كذاب وضاع، وقد سبقت له عدة أحاديث هو المتهم بها، ولذلك كذبه شعبة وقال: وضع على رسول الله صلى الله عليه وسلم أربع مئة حديث.
ومما يدل على وضع هذا الحديث أنه يقرر عادة تخالف ما كان عليه الصحابة مع النبي صلى الله عليه وسلم وهو سيد بني هاشم فإنهم كانوا لا يقومون له صلى الله عليه وسلم لما يعلمون من كراهيته لذلك، كما سيأتي في الحديث الذي بعده، وخير الهدي هدي محمد صلى الله عليه وسلم، على أنه قد جاء ما يخالف هذا الحديث نصا، ولكن إسناده ضعيف عندنا فلا يحتج به وهو الآتي بعده.
ثم وجدت للحديث طريقا آخر، فقال ابن قتيبة في ` كتاب العرب أو الرد على الشعوبية ` (292 - من رسائل البلغاء) : وحدثني يزيد بن عمرو عن محمد بن يوسف عن أبيه عن إبراهيم عن مكحول مرفوعا نحوه.
قلت: وهذا سند ضعيف لا تقوم به حجة، وفيه علتان:
الأولى: الإرسال، فإن مكحولا تابعي.
والأخرى: يزيد بن عمرو شيخ ابن قتيبة، فلم أعرفه.
ثم وجدت له طريقا ثالثا بلفظ: ` لا يقومن أحد … ` وسيأتي، ويعارضه الحديث الآتي:
৩৪৫। বানু হাশেমরা ছাড়া এক ব্যক্তি অন্য ব্যক্তির জন্য দাড়াবে। তারা কারো জন্য দাঁড়াবে না।
হাদিসটি জাল।
এটি তাবারানী `মুজামুল কাবীর` গ্রন্থে (৮/২৮৯/৭৯৪৬) এবং আবু জাফার রাযায `সিত্তাতু মাজালিস মীনাল আমলী` গ্রন্থে (কাফ ২/২৩২) জাফার ইবনু যুবায়ের হতে ... বর্ণনা করেছেন।
হায়সামী “আল-মাজামা” গ্রন্থে (৮/৪০) বলেনঃ এটির সনদে জাফার ইবনু যুবায়ের রয়েছেন, তিনি মাতরূক।
আমি (আলবানী) বলছিঃ বরং তিনি মিথ্যুক, জালকারী। তার কতিপয় হাদীস পূর্বেও গেছে, সেগুলো তিনিই তৈরি করেছেন। এ জন্য শুবা তাকে মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন। তিনি আরো বলেছেনঃ তিনি রসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর উপর চার শত হাদীস জাল করেছেন।
এ হাদীসটির আরো একটি সূত্র পেয়েছি, যেটি ইবনু কুতাইবা “কিতাবুল আরাব...” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। এটির বর্ণনাকারী ইয়াযীদ ইবনু আমর ... মাকহুল হতে মারফু হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটির সনদ দুর্বল। দুটি কারণে তার দ্বারা দলীল সাব্যস্ত হয় নাঃ
১। এটি মুরসাল; কারণ মাকহুল তাবেঈ।
২। ইবনু কুতাইবার শাইখ ইয়াযীদ ইবনু আমরকে চিনি না।
এটি অন্য একটি সূত্রেও বর্ণিত হয়েছে। সেটি সম্পর্কে আলোচনা সামনে আসবে।
` لا تقوموا كما تقوم الأعاجم يعظم بعضها بعضا `.
ضعيف.
وفي إسناده اضطراب وضعف وجهالة، أخرجه أبو داود (2 / 346) وأحمد (5 / 253) من طريق عبد الله بن نمير، والرامهرمزي في ` الفاصل ` (ص 64) وتمام في ` الفوائد ` (41 / 2) عن يحيى بن هاشم كلاهما عن مسعر عن أبي العنبس عن أبي العدبس عن أبي مرزوق عن أبي غالب عن أبي أمامة قال: خرج علينا رسول الله صلى الله عليه وسلم متوكئا على عصا، فقمنا إليه فقال … فذكره.
ثم أخرجه أحمد عن سفيان عن مسعر عن أبي عن أبي عن أبي منهم أبو غالب عن أبي أمامة به، ورواه عبد الغني المقدسي في ` الترغيب في الدعاء ` (93 / 2) عن سفيان بن عيينة عن مسعر بن كدام عن أبي مرزوق عن أبي العنبس عن أبي العدبس عن أبي أمامة، ثم أخرجه أحمد (5 / 256) والروياني في ` مسنده ` (30 / 225 /2) من طريق يحيى بن سعيد عن مسعر، حدثنا أبو العدبس عن أبي خلف، حدثنا أبو مرزوق قال: قال أبو أمامة.
وقال الروياني: اليهود بدل الأعاجم، وأخرجه ابن ماجه (2 / 431) من طريق وكيع عن مسعر عن أبي مرزوق عن أبي وائل عن أبي أمامة.
وهذا اضطراب شديد يكفي وحده في تضعيف الحديث، فكيف وأبو مرزوق لين، كما قال الحافظ في ` التقريب ` وقال الذهبي في ` الميزان `: قال ابن حبان: لا يجوز الاحتجاج بما انفرد به، ثم ساق له هذا الحديث من الطريق الأول، ثم ساقه من طريق ابن ماجه، إلا
أنه قال: أبي العدبس بدل أبي وائل ثم قال: وهذا غلط وتخبيط، وفي بعض النسخ: عن أبي وائل بدل عن أبي العدبس، وأبو العدبس مجهول كما في ` الميزان ` للذهبي و` التقريب ` لابن حجر، وبه أعل الحديث الحافظ العراقي في ` تخريج الإحياء ` (2 / 181) .
وقد ذهل المنذري عن علة الحديث الحقيقية وهي الجهالة والضعف والاضطراب الذي فصلته، فذهب يعله في ` مختصر السنن ` (8 / 93) بأبي غالب، فذكر أقوال العلماء فيه وهي مختلفة، والراجح عندي أنه حسن الحديث، ولم يرجح المنذري ها هنا شيئا، وأما في ` الترغيب والترهيب ` (3 / 269 - 270) فقال بعد أن عزاه لأبي داود وابن ماجه: وإسناده حسن، فيه أبو غالب، فيه كلام طويل ذكرته في ` مختصر السنن ` وغيره والغالب عليه التوثيق، وقد صحح له الترمذي وغيره.
قلت: والحق أن الحديث ضعيف وعلته ممن دون أبي غالب كما سبق.
نعم معنى الحديث صحيح من حيث دلالته على كراهة القيام للرجل إذا دخل، وقد جاء في ذلك حديث صحيح صريح، فقال أنس بن مالك رضي الله عنه: ما كان شخص في الدنيا أحب إليهم رؤية من رسول الله صلى الله عليه وسلم، وكانوا لا يقومون له لما يعلمون من كراهيته لذلك.
أخرجه البخاري في ` الأدب المفرد ` (ص 136) والترمذي (4 / 7) وصححه والضياء المقدسي في ` الأحاديث المختارة ` وأحمد أيضا في ` المسند ` (3 / 132) وسنده صحيح على شرط مسلم، ورواه آخرون كما تراه في ` الصحيحة ` (358) .
فإذا كان النبي صلى الله عليه وسلم يكره هذا القيام لنفسه وهي المعصومة من نزغات
الشيطان، فبالأحرى أن يكرهه لغيره ممن يخشى عليه الفتنة، فما بال كثير من المشايخ وغيرهم قد استساغوا هذا القيام وألفوه كأنه أمر مشروع، كلا بل إن بعضهم ليستحبه مستدلا بقوله صلى الله عليه وسلم: ` قوموا إلى سيدكم ` ذاهلين عن الفرق بين القيام للرجل احتراما وهو المكروه، وبين القيام إليه لحاجة مثل الاستقبال والإعانة عن النزول، وهو المراد بهذا الحديث الصحيح، ويدل عليه رواية أحمد له بلفظ: ` قوموا إلى سيدكم فأنزلوه ` وسنده حسن وقواه الحافظ في ` الفتح `، وقد خرجته في ` سلسلة الأحاديث الصحيحة ` رقم (67) ، وللشيخ
القاضي عز الدين عبد الرحيم بن محمد القاهري الحنفي (ت: 851 هـ) رسالة في هذا الموضوع أسماها ` تذكرة الأنام في النهي عن القيام ` لم أقف عليها، وإنما ذكرها كاتب حلبي في ` كشف الظنون `.
৩৪৬। যেভাবে আজমীরা (অনারবরা) দাঁড়ায় সেভাবে তোমরা দাঁড়াবে না, তাদের একজন (দাঁড়িয়ে) অন্যজনকে সম্মান দেখায়।
হাদীসটি দুর্বল।
এটির সনদটিতে ইযতিরাব, দুর্বলতা এবং জাহালাত (অজ্ঞতা) রয়েছে।
হাদীসটি আবু দাউদ (২/৩৪৬) এবং আহমাদ (৫/২৫৩) আব্দুল্লাহ ইবনু নুমায়ের হতে বর্ণনা করেছেন। এছাড়া রামহুরমুখী “আল-ফাসেল” গ্রন্থে (পৃ. ৬৪) এবং তাম্মাম “আল-ফাওয়াইদ” গ্রন্থে (২/৪১) ইয়াহইয়া ইবনু হাশেম হতে বর্ণনা করেছেন। তারা উভয়ে মিস'য়ার হতে, তিনি আবুল আম্বাস হতে, তিনি আবুল আদাব্বাস হতে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর ইমাম আহমাদ সুফিয়ান সূত্রে মিসয়ার হতে, তিনি আমার পিতা হতে, আমার পিতা হতে, আমার পিতা হতে এভাবে বর্ণনা করেছেন।
আব্দুল গনী মাকদেসী “তারগীব ফিদ দু'আ` গ্রন্থে (২/৯৩) সুফিয়ান ইবনু ওয়াইনা হতে বর্ণনা করেছেন, তিনি মিসায়ার ইবনু কিদাম হতে, তিনি আবী মারযুক হতে, তিনি আবুল আম্বাস হতে, তিনি আবুল আদাব্বাস ... হতে বর্ণনা করেছেন। অতঃপর হাদীসটি ইমাম আহমাদ (৫/২৫৬) এবং রুবিয়ানী তার “মুসনাদ” গ্রন্থে (৩০/২২৫/২) ইয়াহইয়া ইবনু সাঈদ হতে, তিনি মিসয়ার হতে, তিনি আবুল আম্বাস হতে, তিনি তার পিতা খালাফ হতে, তিনি আবু মারযুক হতে ..... বর্ণনা করেছেন।
ইবনু মাজাহ (২/৪৩১) ওয়াকী সূত্রে মিসায়ার হতে, তিনি আবুল মারযুক হতে, তিনি আবু ওয়ায়েল হতে ... বর্ণনা করেছেন।
সনদের মধ্যে উল্লেখিত চরম পর্যায়ের ইযতিরাবই হাদীসটি দুর্বল হওয়ার জন্য যথেষ্ট। মুযতারিব ও ইযতিরাব সম্পর্কে দেখুন (৫৭-৫৮) পৃষ্ঠায়। এ আবু মারযুক সম্পর্কে যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে বলেনঃ ইবনু হিব্বান বলেছেন, তিনি এককভাবে কিছু বর্ণনা করলে তা দলীল হিসাবে গ্রহণ করা জায়েয হবে না। অতঃপর প্রথমটি এবং ইবনু মাজার সূত্র দুটি উল্লেখ করে বলেছেনঃ আবুল আদাব্বাসের স্থলে (ইবনু মাজাহ) আবু ওয়ায়েল উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি ভুল। আবুল আদাব্বাস মাজহুল যেমনভাবে যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে এবং ইবনু হাজার “আত-তাকরীব” গ্রন্থে বলেছেন।
হাফিয ইরাকী “তাখরীজুল ইহইয়া” গ্রন্থে (২/১৮১) হাদীসটির এ সমস্যাই উল্লেখ করেছেন। হাদীসটিকে মুনযের হাসান বলেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ কিন্তু উপরে উল্লেখিত বিবরণের কারণেই তা সঠিক নয়। তবে হ্যাঁ হাদীসটির অর্থ সহীহ। কারণ রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কোন ব্যক্তি প্রবেশ করলে তার জন্য দাঁড়ানোকে অপছন্দ করতেন। এ মর্মে সহীহ হাদীস এসেছে। যা “সিলসিলাতুস সহীহার` (৩৫৮ নং) মধ্যে আলোচনা করা হয়েছে।
যখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার নিজের জন্য দাঁড়ানোকে অপছন্দ করতেন, তখন অন্যের জন্য দাঁড়ানো অপছন্দ করা আরো বেশী উপযোগী।
উল্লেখ্য এখানে যে দাঁড়ানোকে অপছন্দ করা হয়েছে সেটি হচ্ছে অন্যের সম্মানার্থে দাঁড়ানো। প্রয়োজনের তাগিদে দাড়ালে তাতে অপছন্দের কিছু নেই।
` لا تزال الأمة على شريعة ما لم تظهر فيهم ثلاث: ما لم يقبض منهم العلم، ويكثر فيهم ولد الخبث، ويظهر السقارون، قالوا: وما السقارون يا رسول الله؟ قال: بشر يكونون فى آخر الزمان تكون تحيتهم بينهم إذا تلاقوا اللعن `.
منكر.
أخرجه الحاكم (4 / 444) وأحمد (3 / 439) عن زبان بن فائد عن سهل بن معاذ بن أنس عن أبيه مرفوعا، وقال الحاكم: صحيح على شرط الشيخين ورده الذهبي بقوله: قلت: منكر، وزبان لم يخرجا له.
قلت: وزبان قال الحافظ في ` التقريب `: ضعيف الحديث مع صلاحه وعبادته.
৩৪৭। এ উম্মাত শরীয়তের উপর প্রতিষ্ঠিত থাকবে যতক্ষণ পর্যন্ত তাদের মধ্যে তিনটি বস্তু প্রকাশ না পাবেঃ যতদিন তাদের মধ্য হতে জ্ঞানকে উঠিয়ে না নেয়া হবে, তাদের মধ্যে কুসন্তানের আধিক্য না হবে এবং যতদিন সাক্কারুনরা প্রকাশিত না হবে। তারা বললঃ সাক্কারুন কারা হে আল্লাহর রসূল? তিনি বললেনঃ শেষ যামানার মানুষ, যখন তারা একে অপরে মিলিত হবে তখন তাদের অভিনন্দনের ভাষা হবে অভিশাপ।
হাদীসটি মুনকার।
এটি হাকিম (৪/৪৪৪) এবং ইমাম আহমাদ (৩/৪৩৯) যাবান ইবনু ফায়েদ হতে বর্ণনা করেছেন এবং তিনি সাহাল হতে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর হাকিম বলেছেনঃ শাইখায়নের শর্তানুযায়ী এটি সহীহ। যাহাবী তার প্রতিবাদ করে বলেছেনঃ হাদীসটি মুনকার, শাইখাইন যাবান হতে বর্ণনা করেননি।
ইবনু হাজার “আত-তাকরীব” গ্রন্থে বলেনঃ তিনি নেককার এবং আবেদ হওয়া সত্ত্বেও হাদীসের ক্ষেত্রে দুর্বল ছিলেন।
` هو الوزغ بن الوزغ الملعون بن الملعون: يعني مروان بن الحكم `.
موضوع.
أخرجه الحاكم (4 / 479) من طريق ميناء مولى عبد الرحمن بن عوف عن عبد الرحمن بن عوف قال: كان لا يولد لأحد مولود إلا أتى به النبي صلى الله عليه وسلم فدعا له، فأدخل عليه مروان بن الحكم فقال … فذكره، قال الحاكم: صحيح الإسناد ورده الذهبي بقوله: قلت: لا والله، وميناء كذبه أبو حاتم.
قلت: وقال ابن معين في كتاب ` التاريخ والعلل ` (13 / 2) : ليس بثقة ولا مأمون، وربما قال: من ميناء أبعده الله؟ ! ، وقال يعقوب بن سفيان: غير ثقة ولا مأمون، يجب أن لا يكتب حديثه.
৩৪৮। সে টিকটিকির বাচ্চা টিকটিকি (কাপুরুষের বাচ্চা কাপুরুষ), অভিশপ্তের বাচ্চা অভিশপ্ত; অর্থাৎ মারওয়ান ইবনুল হাকাম।
হাদীসটি জাল।
এটিকে হাকিম (৪/৪৭৯) আব্দুর রহমান ইবনু আউফের দাস মীনা সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর (হাকিম) বলেছেনঃ সনদটি সহীহ। যাহাবী তার প্রতিবাদ করে বলেছেনঃ আল্লাহর কসম তা নয়! মীনাকে আবু হাতিম মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন।
আমি (আলবানী) বলছি ঃ ইবনু মাঈন “আত-তারীখু ওয়াল ইলাল” গ্রন্থে (২/১৩) বলেছেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন এবং নিরাপদও নন। কখনও কখনও বলেছেনঃ কে এ মীনা আল্লাহ তাকে দূর করুন।
ইয়াকুব ইবনু সুফিয়ান বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন এবং নিরাপদও নন। তার হাদীস না লিখা ওয়াজিব।
` رحم الله حميرا، أفواههم سلام، وأيديهم طعام، وهم أهل أمن وإيمان `.
موضوع.
أخرجه الترمذي (4 / 378) وأحمد (2 / 278) ومن طريقه العراقي في ` المحجة ` (46 / 2) عن ميناء مولى عبد الرحمن بن عوف قال: سمعت أبا هريرة يقول: كنا عند رسول الله صلى الله عليه وسلم فجاءه رجل أحسبه
من قيس، فقال: يا رسول الله ألعن حميرا؟ فأعرض عنه، ثم جاءه من الشق الآخر فأعرض عنه، فقال النبي
صلى الله عليه وسلم: … فذكره، وقال: هذا حديث غريب لا نعرفه إلا من هذا الوجه، ويروي عن ميناء أحاديث مناكير.
قلت: وقد كذبه أبو حاتم كما تقدم في الحديث الذي قبله.
والحديث ذكره السيوطي في ` الجامع ` من رواية أحمد والترمذي، ولم يتكلم عليه شارحه المناوي بشيء! لا في ` الفيض `، ولا في ` التيسير `.
৩৪৯। হিমইয়ারীদের আল্লাহ রহম করুন। তাদের মুখমণ্ডলগুলো শান্তি স্বরূপ এবং হাতগুলো খাদ্য স্বরূপ। তারা নিরাপত্তা এবং ঈমানের অধিকারী।
হাদীসটি জাল।
এটি তিরমিয়ী (৪/৩৭৮), আহমাদ (২/২৭৮) এবং তার সূত্র হতে ইরাকী তার `আল-মুজাম` গ্রন্থে (২/৪৬) আব্দুর রহমান ইবনু আউফের দাস মীনা হতে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর ইরাকী বলেছেনঃ এ হাদীসটি গারীব। এ সূত্র ছাড়া অন্য কোন সূত্র হতে এটিকে চিনি না। মীনা হতে মুনকার হাদীস বর্ণনা করা হয়ে থাকে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তাকে আবু হাতিম মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন, যেমনভাবে পূর্বের হাদীসে বলা হয়েছে। হাদীসটি সুয়ূতী তার “জামেউস সাগীর” গ্রন্থে আহমাদ এবং তিরমিযীর বর্ণনা হতে উল্লেখ করেছেন। আর তার ভাষ্যকার মানবী কোন কিছুই বলেননি।
` من مات ولم يعرف إمام زمانه مات ميتة جاهلية `.
لا أصل له بهذا اللفظ.
وقد قال الشيخ ابن تيمية: والله ما قاله رسول الله صلى الله عليه وسلم هكذا، وإنما المعروف ما روى مسلم أن ابن عمر قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: ` من خلع يدا من طاعة لقي الله يوم القيامة ولا حجة له، ومن مات وليس في عنقه بيعة مات ميتة جاهلية `، وأقره الذهبي في ` مختصر منهاج السنة ` (ص 28) وكفى بهما حجة، وهذا الحديث رأيته في بعض كتب الشيعة، ثم في بعض كتب القاديانية يستدلون به على وجوب الإيمان بدجالهم ميرزا غلام أحمد المتنبي، ولوصح هذا الحديث لما كان فيه أدنى إشارة إلى ما زعموا، وغاية ما فيه وجوب اتخاذ المسلمين إماما يبايعونه، وهذا حق كما دل عليه حديث مسلم وغيره.
ثم رأيت الحديث في كتاب ` الأصول من الكافي ` للكليني من علماء الشيعة رواه (1 / 377) عن محمد بن عبد الجبار عن صفوان عن الفضيل عن الحارث بن المغيرة عن أبي عبد الله مرفوعا، وأبو عبد الله هو الحسين بن علي رضي الله عنهما.
لكن الفضيل هذا وهو الأعور أورده الطوسي الشيعي في ` الفهرست ` (ص
126) ثم أبو جعفر السروي في ` معالم العلماء ` (ص 81) ، ولم يذكرا في ترجمته غير أن له كتابا! وأما محمد بن عبد الجبار فلم يورداه مطلقا، وكذلك ليس له ذكر في شيء من كتبنا، فهذا حال هذا الإسناد الوارد في كتابهم ` الكافي ` الذي هو أحسن كتبهم كما جاء في المقدمة (ص 33) ، ومن أكاذيب الشيعة التي لا يمكن حصرها قول الخميني في ` كشف الأسرار ` (ص 197) : وهناك حديث معروف لدى الشيعة وأهل السنة منقول عن النبي: … ثم ذكره دون أن يقرنه بالصلاة عليه صلى الله عليه وسلم، وهذه عادته في هذا الكتاب! فقوله: وأهل السنة كذب ظاهر عليه لأنه غير معروف لديهم كما تقدم بل هو بظاهره باطل إن لم يفسر بحديث مسلم كما هو محقق في ` المنهاج ` و` مختصره ` وحينئذ فالحديث حجة عليهم فراجعهما.
৩৫০। যে মৃত্যুবরণ করল এমতাবস্থায় যে, সে তার যুগের ইমামকে চিনল না, সে জাহেলিয়াতের মৃত্যুবরণ করল।
এ বাক্যে হাদীসটির কোন ভিত্তি নেই।
শাইখুল হাদীস ইবনু তাইমিয়া বলেনঃ আল্লাহর কসম রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এরূপ বলেননি। প্রসিদ্ধ হচ্ছে সেটিই যেটি ইমাম মুসলিম বর্ণনা করেছেন। ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেনঃ আমি রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কে বলতে শুনেছিঃ
من خلع يدا من طاعة لقي الله يوم القيامة ولا حجة له، ومن مات وليس في عنقه بيعة مات ميتة جاهلية
`যে ব্যক্তি তার হাতকে আনুগত্য করা হতে মুক্ত করে নিল, সে কিয়ামতের দিন আল্লাহর সাথে মিলিত হবে এমতাবস্থায় যে, তার কোন প্রমাণ থাকবে না। আর যে ব্যক্তি মৃত্যুবরণ করবে এমতাবস্থায় যে, তার কাধে বাইয়াত থাকবে না; সে জাহেলিয়াতের মৃত্যুবরণ করল।`
যাহাবী ইবনু তাইমিয়্যার বক্তব্যকে `মুখতাসারু মিনহাজিস সুন্নাহ` গ্রন্থে (পৃ. ২৮) সমর্থন করেছেন এবং তাদের দু'জনের কথাই দলীল হিসাবে যথেষ্ট।
এ হাদীসটি শিয়া ও কাদিয়ানীদের কোন কোন গ্রন্থে বর্ণিত হয়েছে। তারা এর দ্বারা তাদের ইমামের উপর ঈমান আনা ওয়াজিব হওয়ার দলীল দিয়ে থাকে।
` يا علي أنت أخي في الدنيا والآخرة `.
موضوع.
أخرجه الترمذي (4 / 328) وابن عدي (59 / 1، 69 / 1) والحاكم (3 / 14) من طريق حكيم بن جبير عن جميع بن عمير عن ابن عمر قال: لما ورد رسول الله صلى الله عليه وسلم المدينة آخى بين أصحابه، فجاء علي رضي الله عنه تدمع عيناه فقال: يا رسول الله آخيت بين أصحابك، ولم تواخ بيني وبين أحد، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: … الحديث، وقال الترمذي: هذا حديث حسن غريب، وتعقبه الشارح المباركفوري فقال: حكيم بن جبير ضعيف، ورمي بالتشيع.
قلت: تعصيب الجناية برأس حكيم هذا وحده ليس من الإنصاف في شيء
وذلك لأمرين:
الأول: أن شيخه جميع بن عمير متهم، قال الذهبي: قال ابن حبان: رافضي يضع الحديث، وقال ابن نمير: كان من أكذب الناس، ثم ساق له هذا الحديث.
الآخر: أن ابن جبير لم يتفرد به عن جميع، فقد تابعه سالم بن أبي حفصة وهو ثقة، لكن في الطريق إليه إسحاق بن بشر الكاهلي وقد كذبه ابن أبي شيبة، وموسى بن هارون، وقال الدارقطني: هو في عداد من يضع الحديث، أخرجه من طريقه الحاكم أيضا، فتعقبه الذهبي بقوله: قلت: جميع اتهم، والكاهلي هالك، وتابعه أيضا كثير النواء، رواه ابن عدي، فآفة الحديث جميع هذا، وقد قال ابن عدي: وعامة ما يرويه لا يتابعه غيره عليه، ولهذا قال شيخ الإسلام ابن تيمية: وحديث مواخاة النبي صلى الله عليه وسلم لعلي من الأكاذيب، وأقره الحافظ الذهبي في ` مختصر منهاج السنة ` (ص 317) .
৩৫১। হে আলী! তুমি দুনিয়া এবং আখেরাতে আমার ভাই।
হাদীসটি জাল।
এটি তিরমিয়ী (৪/৩২৮), ইবনু আদী (১/৫৯, ১/৬৯) এবং হাকিম (৩/১৪) হাকীম ইবনু যুবায়র সূত্রে জামী' ইবন উমায়র হতে ... বর্ণনা করেছেন। তিরমিযী বলেনঃ হাদীসটি হাসান গারীব। মুবারাকপুরী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ হাকীম ইবনু যুবায়ের দুর্বল, তাকে শীয়া মতাবলম্বী দোষে দোষী করা হয়েছে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ দুটি কারণে শুধুমাত্র হাকীমকে দোষ দেয়াটা ইনসাফের কাজ হবে নাঃ
১। তার শাইখ জামী ইবনু উমায়ের মিথ্যার দোষে দোষী; যাহাবী তার সম্পর্কে বলেনঃ ইবনু হিব্বান বলেছেনঃ তিনি রাফেয়ী, হাদীস জালকারী। ইবনু নুমায়ের বলেছেনঃ তিনি লোকদের মধ্যে সর্বাপেক্ষা বড় মিথ্যুক ছিলেন। অতঃপর তিনি তার এ হাদীসটি উল্লেখ করেছেন।
২। হাকীম ইবনু যুবায়ের এককভাবে বর্ণনা করেননি, সালেম ইবনু আবী হাফসা তার মুতাবা’আত করেছেন, তিনি নির্ভরযোগ্য। কিন্তু তার এ সনদে আরেক বর্ণনাকারী ইসহাক ইবনু বিশ্বর আল-কাহেলী রয়েছেন; তাকে ইবনু আবী শায়বা এবং মূসা ইবনু হারূণ মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন।
দারাকুতনী তার সম্পর্কে বলেনঃ যারা হাদীস জাল করেছেন, তিনি তাদের একজন। তার এ সূত্রে হাকিমও বর্ণনা করেছেন। যাহাবী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ জামী মিথ্যার দোষে দোষী এবং কাহেলী হালেক।
ইবনু আদী বলেনঃ এ হাদীসটির সমস্যা হচ্ছে এ জামী'; তিনি যা কিছু বর্ণনা করেছেন অন্যরা তার মুতাবা’আত করেননি। এজন্য ইবনু তাইমিয়া বলেনঃ নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কর্তৃক আলীর সাথে ভাইয়ের সম্বন্ধ সম্পর্কিত হাদীস মিথ্যার অন্তর্ভুক্ত। তাঁর এ বক্তব্য যাহাবী `মুখতাসারু মিনহাজিস সুন্নাহ` গ্রন্থে সমর্থন করেছেন (পৃ. ৩১৭)।
` يا علي أنت أخي وصاحبي ورفيقي في الجنة `.
موضوع.
أخرجه الخطيب (12 / 268) من طريق عثمان بن عبد الرحمن، حدثنا محمد بن علي بن الحسين عن أبيه عن علي مرفوعا.
قلت: وهذا سند موضوع، عثمان بن عبد الرحمن هو القرشي وهو كذاب كما تقدم مرارا، وقد قال شيخ الإسلام ابن تيمية: وأحاديث المواخاة كلها كذب، وأقره الذهبي في ` مختصر المنهاج ` (ص 460) .
৩৫২। হে আলী! জান্নাতের মধ্যে তুমি আমার ভাই, আমার সঙ্গী এবং আমার বন্ধু।
হাদীসটি জাল।
এটি আল-খাতীব (১২/২৬৮) উসমান ইবনু আদির রহমান সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি বানোয়াট। উসমান ইবনু আদির রহমান হচ্ছেন কুরাশী। তিনি একজন মিথ্যুক, যেমনভাবে বার বার তার সম্পর্কে আলোচনা করা হয়েছে। শাইখুল ইসলাম ইবনু তাইমিয়া বলেনঃ ভাইয়ের সম্বন্ধ স্থাপন সম্পর্কিত সকল হাদীস মিথ্যা। তার এ বক্তব্য যাহাবী `মুখতাসারু মিনহাজিস সুন্নাহ` গ্রন্থে সমর্থন করেছেন
` إن الله تعالى أوحى إلي فى علي ثلاثة أشياء ليلة أسري بي: أنه سيد المؤمنين وإمام المتقين، وقائد الغر المحجلين `.
موضوع.
أخرجه الطبراني في ` المعجم الصغير ` (ص 210) عن مجاشع بن عمرو حدثنا عيسى بن سوادة النخعي حدثنا هلال بن أبي حميد الوزان عن عبد الله بن عكيم الجهني مرفوعا، وقال: تفرد به مجاشع.
قلت: وهو كذاب، وكذا شيخه عيسى بن سوادة، وبه وحده أعله الهيثمي في ` المجمع ` (9 / 121) فقصر، وقال شيخ الإسلام ابن تيمية: هذا حديث موضوع عند من له أدنى معرفة بالحديث، ولا تحل نسبته إلى الرسول المعصوم، ولا نعلم أحدا هو سيد المسلمين وإمام المتقين وقائد الغر المحجلين غير نبينا صلى الله عليه وسلم، واللفظ مطلق، ما قال فيه من بعدي، وأقره الذهبي في ` مختصر المنهاج ` (ص 473) .
৩৫৩। আল্লাহ তা'আলা আলীর সম্পর্কে মে'রাজের রাতে তিনটি বিষয়ে আমার নিকট অহী করেছেন; সে মুমিনদের সর্দার, ইমামুল মুত্তাকীন এবং উজ্জল চেহারার অধিকারীদের নেতা।
হাদীসটি জাল।
এটি তাবারানী “মুজামুস সাগীর” গ্রন্থে (পৃ. ২১০) মুশাজে ইবনু আমর হতে, তিনি ঈসা ইবনু সুওয়াদা আন-নাখ'ঈ হতে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর বলেছেনঃ মুশাজে এককভাবে এটিকে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি মিথ্যুক এবং তার শাইখ ঈসা ইবনু সুওয়াদাও মিথ্যুক। হায়সামী “আল-মাজমা` গ্রন্থে (৯/১২১) শুধুমাত্র ঈসার দ্বারা হাদীসটির সমস্যা বর্ণনা করেছেন, তিনি তাতে যথার্থ কাজটি করেননি।
শাইখুল ইসলাম ইবনু তাইমিয়্যা বলেনঃ যে ব্যক্তির হাদীস সম্পর্কে সামান্যতম ধারণা রয়েছে তার নিকটেও হাদীসটি বানোয়াট। এটিকে রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর উদ্ধৃতিতে বলাই হালাল নয়। আমাদের নবী ছাড়া অন্য কারো ক্ষেত্রে এসব গুণাবলী প্রযোজ্য নয়। তার এ বক্তব্য যাহাবী `মুখতাসারু মিনহাজিস সুন্নাহ` গ্রন্থে সমর্থন করেছেন (প: ৪৭৩)।
` خلق الله تعالى آدم من طين الجابية، وعجنه بماء الجنة `.
منكر.
أخرجه ابن عدي في ` الكامل ` (8 / 1) وعنه الحافظ ابن عساكر في ` تاريخ دمشق ` (2 / 119) وكذا الضياء في ` المجموع ` (60 / 2) عن هشام بن
عمار: أخبرنا الوليد بن مسلم عن إسماعيل بن رافع عن المقبري عن أبي هريرة مرفوعا.
وهذا سند ضعيف جدا، إسماعيل بن رافع قال الدارقطني وغيره: متروك الحديث وقال ابن عدي: أحاديثه كلها مما فيه نظر، ثم ساق له هذا الحديث، ومن طريقه أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 190) ، وقال: لا يصح، إسماعيل ضعفه يحيى وأحمد، والوليد يدلس.
وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` بقوله: قلت: إسماعيل روى له الترمذي، ونقل عن البخاري أنه قال: هو ثقة مقارب الحديث.
قلت: وهذا تعقب لا طائل تحته، لأن الرجل قد يكون في نفسه ثقة، ولكنه سيء الحفظ، وقد يسوء حفظه جدا حتى يكثر الخطأ في حديثه فيسقط الاحتجاج به، وإسماعيل من هذا القبيل فقد قال فيه ابن حبان: كان رجلا صالحا إلا أنه كان يقلب الأخبار حتى صار الغالب على حديثه المناكير التي يسبق إلى القلب أنه كان المتعمد لها.
ولهذا تركه جماعة وضعفه آخرون، والبخاري كأنه خفي عليه أمره، والجرح المفسر مقدم على التعديل، كما هو معلوم، ولهذا قال ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 297) عن أبيه: هذا حديث منكر.
৩৫৪। আল্লাহ তা'আলা আদমকে জাবীয়া নামক স্থানের মাটি দিয়ে সৃষ্টি করেছেন এবং তাকে জান্নাতের পানি দিয়ে মুদিত করেছেন।
হাদীসটি মুনকার।
এটি ইবনু আদী “আল-কামিল” গ্রন্থে (৮/১) এবং তার থেকে হাফিয ইবনু আসাকির “তারীখু দেমাস্ক” গ্রন্থে (২/১১৯) ও যিয়া `আল-মাজমূ` গ্রন্থে (২/৬০) হিশাম ইবনু আম্মার হতে, তিনি ওয়ালীদ ইবনু মুসলিম হতে, তিনি ইসমাইল ইবনু রাফে' হতে ... বর্ণনা করেছেন। এটির সনদ নিতান্তই দুর্বল।
এ ইসমাঈল ইবনু রাফে সম্পর্কে দারাকুতনী ও অন্যরা বলেছেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীস। ইবনু আদী বলেছেনঃ তার সকল হাদীসে বিরূপ মন্তব্য রয়েছে। অতঃপর তার এ হাদীসটি উল্লেখ করেছেন। তার সূত্র হতে ইবনুল জাওয়ী “আল-মাওযু`আত” গ্রন্থে (১/১৯০) উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়। ইসমাঈলকে ইয়াহইয়া ও আহমাদ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন আর ওয়ালীদ তাদলীস করতেন।
সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ এ ইসমাঈলের হাদীস ইমাম তিরমিয়ী বর্ণনা করেছেন এবং তিনি বুখারীর উদ্ধৃতিতে বলেছেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য, মুকারেবুল হাদীস।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সমালোচনা সঠিক নয়। কারণ কোন ব্যক্তি নিজে নির্ভরযোগ্য হয়েও তার মুখস্থ বিদ্যায় তিনি খারাপ হতে পারেন। কখনও কখনও তার হেফয শক্তি নিতান্তই খারাপ হতে পারে। যার কারণে তার হাদীসে বেশী ভুলও সংঘটিত হয়। ফলে তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করা যায় না, এ ইসমাঈল এ পর্যায় ভূক্তই। তার সম্পর্কে ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি ব্যক্তি হিসাবে সৎ ছিলেন। কিন্তু তিনি হাদীসগুলোকে উলট পালট করে ফেলতেন। ফলে তার অধিকাংশ হাদীস মুনকারের অন্তর্ভুক্ত হয়ে যায়, এজন্য ভাবা হত তিনি এটা ইচ্ছাকৃতই করতেন। এজন্যই তাকে একদল কিছু না বলে ছেড়ে দিয়েছেন আর অন্যরা তাকে দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। হতে পারে বুখারীর নিকট তার বিষয়টি অস্পষ্ট ছিল। নির্দোষীতার আগে ব্যাখ্যাকৃত দোষারোপ অগ্রাধিকার পাবে, এর ভিত্তিতে তিনি গ্রহণযোগ্য ব্যক্তি নন। এ কারণেই ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” গ্রন্থে (২/২৯৭) তার পিতার উদ্ধৃতিতে বলেছেনঃ এ হাদীসটি মুনকার।
` الصديقون ثلاثة: حبيب النجار مؤمن آل يس الذي قال: {يا قوم اتبعوا المرسلين} ، وحزقيل مؤمن آل فرعون الذي قال: {أتقتلون رجلا أن يقول ربي الله} ، وعلي بن أبي طالب وهو أفضلهم `.
موضوع.
ذكره السيوطي في ` الجامع الصغير ` من رواية أبي نعيم في ` المعرفة ` وابن عساكر عن ابن أبي ليلى، ولم يتكلم عليه شارحه المناوي بشيء، غير أنه قال: رواه ابن مردويه والديلمي، لكن قال شيخ الإسلام ابن تيمية: هذا حديث كذب، وأقره الذهبي في ` مختصر المنهاج ` (ص 309) وكفى بهما حجة، وإن من أكاذيب الشيعة التي يقلد فيها بعضهم بعضا أن ابن المطهر الشيعي عزاه في كتابه لرواية أحمد، فأنكره عليه شيخ الإسلام ابن تيمية رحمه الله في رده عليه فقال: لم يروه أحمد لا في ` المسند ` ولا في ` الفضائل ` ولا رواه أبدا، وإنما زاده القطيعي عن الكديمي، حدثنا الحسن بن محمد الأنصاري، حدثنا عمرو بن جميع، حدثنا ابن أبي ليلى عن أخيه عن عبد الرحمن بن أبي ليلى عن أبيه مرفوعا.
فعمرو هذا قال فيه ابن عدي الحافظ: يتهم بالوضع، والكديمي معروف بالكذب، فسقط الحديث، ثم قد ثبت في الصحيح تسمية غير علي صديقا، ففي ` الصحيحين ` أن النبي صلى الله عليه وسلم صعد أحدا ومعه أبو بكر وعمر وعثمان، فرجف بهم، فقال النبي صلى الله عليه وسلم: ` اثبت أحد فما عليك إلا نبي وصديق وشهيدان … ` ضعفه ونكارته، فمن قواه من المعاصرين، فقد جانبه الصواب، ولربما الإنصاف أيضا، وأقره الذهبي في ` مختصره ` (ص
৩৫৫। তিন ব্যক্তি হচ্ছেন সত্যবাদী। হাবীবুন নাজ্জার; ইয়াসিনের পরিবারের মুমিন ব্যক্তি যিনি বলেছিলেনঃ `হে আমার জাতি তোমরা রসূলগণের অনুসরণ কর`, হিযকীল; ফিরআউনের পরিবারের মুমিন ব্যক্তি যিনি বলেছিলেনঃ `তোমরা এমন এক ব্যক্তিকে হত্যা করছ যিনি বলেন যে, আমার প্রতিপালক আল্লাহ` এবং আলী ইবনু আবী তালিব, সে হচ্ছে তাদের মধ্যে সর্বোত্তম।
হাদীসটি জাল।
এটি সুয়ূতী “জমে'উস সাগীর” গ্রন্থে আবু নুয়াইম কর্তৃক `আল-মা'রিফাত` গ্রন্থের বর্ণনা হতে উল্লেখ করেছেন এবং ইবনু আসাকির ইবনু আবী লায়লা হতে বর্ণনা করেছেন। তার (জামের) ভাষ্যকার মানবী এটিকে ইবনু মারদুবিয়া এবং দাইলামী বর্ণনা করেছেন, এ কথা বলা ছাড়া আর কিছুই বলেননি।
শাইখুল ইসলাম ইবনু তাইমিয়্যা বলেছেনঃ এ হাদীসটি মিথ্যা।
তাঁর এ বক্তব্যকে যাহাবী `মুখতাসারু মিনহাজিস সুন্নাহ` গ্রন্থে (পৃ. ৩০৯) সমর্থন করেছেন। তাদের দু'জনের কথাই দলীল হিসাবে যথেষ্ট।
ইবনু তাহের শি'য়ী তার গ্রন্থে বলেছেন যে, এটি আহমাদের বর্ণনায় এসেছে। ইবনু তাইমিয়া তার বিরোধিতা করে বলেছেনঃ ইমাম আহমাদ হাদীসটিকে তার “আল-মুসনাদ” ও “আল-ফাযায়েল” গ্রন্থেও বর্ণনা করেননি। অন্য কোথাও বর্ণনা করেননি।
কুতাই'ঈ ইমাম আহমাদের “ফাযায়েলুস সাহাবা” গ্রন্থে (নং ১০৭২, পৃ. ৪৩১-৪৩২) কুদায়মী সূত্রে আমর ইবনু জামী'র বর্ণনা হতে বৃদ্ধি করেছেন। হাফিয ইবনু আদী বলেনঃ এ আমর জাল করার দোষে দোষী এবং কুদায়মী মিথ্যুক হিসাবে প্রসিদ্ধ।
` النظر فى المصحف عبادة، ونظر الولد إلى الوالدين عبادة، والنظر إلى علي بن أبي طالب عبادة `.
موضوع.
أخرجه ابن الفراتي من طريق محمد بن زكريا بن دينار حدثنا العباس بن بكار حدثنا عباد بن كثير عن أبي الزبير عن جابر مرفوعا.
ذكره السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 346) شاهدا وسكت عليه! وهو موضوع فإن محمد بن زكريا هو الغلابي وهو معروف بالوضع.
والجملة الأخيرة منه أوردها ابن الجوزي في ` الموضوعات ` من رواية جماعة من الصحابة وأعلها كلها، وتعقبه السيوطي في ` اللآليء ` (1 / 342 - 346) بمتابعات وشواهد كثيرة ذكرها، ولذلك أورده في ` الجامع الصغير ` وقد صحح الذهبي في ` تلخيص المستدرك ` (3 / 141) أحد شواهده، وفيه نظر بينته فيما سيأتي
إن شاء الله برقم (4702) .
৩৫৬। মুসহাফে (কুরআনে) দৃষ্টি দেয়া ইবাদাত, সন্তান কর্তৃক পিতা মাতার দিকে দৃষ্টি দেয়া ইবাদত এবং আলী ইবনু আবী তালেবের দিকে দৃষ্টি দেয়া ইবাদাত।
হাদীসটি জাল।
এটি ইবনুল ফুরাতী মুহাম্মাদ ইবনু যাকারিয়া ইবনে দীনার সূত্রে ... বর্ণনা করেছেন। সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/৩৪৬) শাহেদ হিসাবে উল্লেখ করে চুপ থেকেছেন! অথচ এটি বানোয়াট, কারণ মুহাম্মাদ ইবনু যাকারিয়া জালকারী হিসাবে প্রসিদ্ধ। শেষ বাক্যটি ইবনুল জাওয়ী “আল-মাওযুআত” গ্রন্থে একদল সাহাবী হতে উল্লেখ করেছেন এবং সবগুলোকে “আল-মাওযু`আত” গ্রন্থে উল্লেখ করার কারণ ব্যাখ্যা করেছেন।
সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে (১/৩৪২-৩৪৬) বহু মুতাবায়াত এবং শাহেদ উল্লেখ করে তার সমালোচনা করেছেন। এ জন্যই সেটিকে `জামেউস সাগীর` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। যাহাবী “তালখীসুল মুসতাদরাক” গ্রন্থে (৩/১৪১) একটি শাহেদকে সহীহ্ বলেছেন। তার এ সহীহ বলার মধ্যে বিরূপ মন্তব্য রয়েছে। পরবর্তীতে এ সম্পর্কে ব্যাখ্যা আসবে ৪৭০২ নং হাদীসের আলোচনায়।
` علي إمام البررة، وقاتل الفجرة، منصور من نصره، مخذول من خذله `.
موضوع.
أخرجه الحاكم (3 / 129) والخطيب (4 / 219) من طريق أحمد بن عبد الله بن يزيد الحراني، حدثنا عبد الرزاق، حدثنا سفيان الثوري عن عبد الله بن عثمان بن خثيم عن عبد الرحمن بن عثمان قال: سمعت جابر بن عبد الله يقول: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: … فذكره، وقال: صحيح الإسناد، وتعقبه الذهبي بقوله: قلت: بل والله موضوع، وأحمد كذاب، فما أجهلك على سعة معرفتك!
قلت: وفي ` الميزان `: قال ابن عدي: يضع الحديث، ثم ساق له هذا الحديث، وقال الخطيب: هو أنكر ما روى.
৩৫৭। আলী হচ্ছে নেককারদের ইমাম, পাপাচারদের হত্যাকারী, যে তাকে সাহায্য করবে সে সাহায্যপ্রাপ্ত আর যে তাকে অপমান করবে সে অপমানিত।
হাদীসটি জাল।
এটি হাকিম (৩/১২৯) এবং আল-খাতীব (৪/২১৯) আহমাদ ইবনু আবদিল্লাহ ইবনে ইয়াযীদ হাররানী সূত্রে ... বর্ণনা করে বলেছেনঃ সনদটি সহীহ। যাহাবী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ আল্লাহর কসম! এটি জাল (বানোয়াট)। এ আহমাদ ইবনু আবদিল্লাহ মিথ্যুক।
আমি (আলবানী) বলছিঃ “আল-মীযান” গ্রন্থে এসেছে, ইবনু আদী তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি হাদীস জাল করতেন। অতঃপর তার এ হাদীসটি উল্লেখ করেছেন।
খাতীব বাগদাদী বলেনঃ তিনি যা কিছু বর্ণনা করেছেন এটি তার মধ্যে সর্বাপেক্ষা বেশী মুনকার।
` السبق ثلاثة: فالسابق إلى موسى يوشع بن نون، والسابق إلى عيسى صاحب ياسين والسابق إلى محمد صلى الله عليه وسلم علي بن أبى طالب `.
ضعيف جدا.
رواه الطبراني (3 / 111 / 2) عن الحسين بن أبي السري العسقلاني، أنبأنا حسين الأشقر، أنبأنا سفيان بن عيينة عن ابن أبي نجيح عن مجاهد عن
ابن عباس مرفوعا.
قلت: وهذا سند ضعيف جدا إن لم يكن موضوعا، فإن حسين الأشقر وهو ابن الحسن الكوفي شيعي غال، ضعفه البخاري جدا فقال في ` التاريخ الصغير ` (230) : عنده مناكير، وروى العقيلي في ` الضعفاء ` (90) عن البخاري أنه قال فيه: فيه نظر، وفي ` الكامل ` لابن عدي (97 / 1) : قال السعدي: كان غاليا، من الشتامين للخيرة، ووثقه بعضهم ثم قال ابن عدي: وليس كل ما يروي عنه من الحديث الإنكار فيه من قبله، فربما كان من قبل من يروي عنه، لأن جماعة من ضعفاء الكوفيين يحيلون بالروايات على حسين الأشقر، على أن حسينا في حديثه بعض ما فيه.
قلت: وكأن ابن عدي يشير بهذا الكلام إلى مثل هذا الحديث فإنه من رواية الحسين ابن أبي السري عنه، فإنه مثله بل أشد ضعفا، قال الذهبي: ضعفه أبو داود، وقال أخوه محمد: لا تكتبوا عن أخي فإنه كذاب، وقال أبو عروبة الحراني: هو خال أبي وهو كذاب، ثم ساق له هذا الحديث من طريق الطبراني.
وقال الحافظ ابن كثير في ` التفسير ` (3 / 570) :
هذا حديث منكر، لا يعرف إلا من طريق حسين الأشقر، وهو شيعي متروك، ونقل نحوه المناوي عن العقيلي، ونقل عنه الحافظ في ` تهذيب التهذيب ` أنه
قال:
لا أصل له عن ابن عيينة، وليس هذا في نسختنا من ` الضعفاء ` للعقيلى. والله أعلم.
ثم إن المناوي وهم وهما فاحشا في كتابه الآخر: ` التيسير ` وقال فيه: إسناده حسن أو صحيح.
৩৫৮। অগ্রগামী হচ্ছেন তিনজন মূসা (আঃ)-এর দিকে অগ্রগামী হচ্ছেন ইউশা ইবনু নুন, ঈসা (আঃ)-এর দিকে অগ্রগামী হচ্ছে ইয়াসিনের সাখী এবং মুহাম্মাদ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর দিকে অগ্রগামী হচ্ছে আলী ইবনু আবী তালিব।
হাদীসটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি তাবরানী (৩/১১/২) হুসাইন ইবনু আবিস সারী হতে, তিনি হুসাইন আশকার হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবনী) বলছিঃ যদিও জাল নয় এটির সনদ নিতান্তই দুর্বল, কারণ এ হুসাইন আশকার হচ্ছেন ইবনুল হাসান কুকী, তিনি চরমপন্থী শীয়া। তার সম্পর্কে বুখারী বলেনঃ তিনি খুবই দুর্বল। তিনি “তারীখুস সাগীর” গ্রন্থে (২৩০) আরো বলেছেনঃ তার নিকট মুনকার রয়েছে।
উকায়লী `আয-যুয়াফা` গ্রন্থে (৯০) বুখারী হতে নকল করেছেন। তিনি বলেনঃ তার ব্যাপারে বিরূপ মন্তব্য রয়েছে।
ইবনু আদী “আল-কামিল” গ্রন্থে (১/৯৭) বলেছেনঃ কেউ কেউ তাকে নির্ভরযোগ্য আখ্যা দিয়েছেন। অতঃপর ইবনু আদী বলেনঃ এমনটি নয় যে, তিনি যে সব হাদীস বর্ণনা করেছেন সেগুলোর সবই তার কারণে মুনকার। কখনও কখনও তার থেকে বর্ণনাকারীর পক্ষ হতেও মুনকার হয়ে থাকতে পারে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু আদী যেন তার এ কথা দ্বারা ইঙ্গিত দিচ্ছেন যে, এ হাদীসটির বর্ণনাকারী হুসাইন ইবনু আবিস সারী তিনি তার মতই। বরং তার চেয়েও বেশী দুর্বল। যাহাবী বলেনঃ তাকে আবু দাউদ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন এবং হুসাইনের ভাই মুহাম্মাদ বলেছেনঃ আমার ভাই হতে আপনারা লিখবেন না, কারণ তিনি হচ্ছেন মিথ্যুক। তিনি আরো বলেছেনঃ আবু আরূবা আল-হারানী আমার পিতার মামা, তিনিও মিথ্যুক। অতঃপর তিনি এ হাদীসটি তাবারানীর সূত্রে উল্লেখ করেছেন।
হাফিয ইবনু কাসীর তার “আত-তাফসীর” গ্রন্থে (৩/৫৭০) বলেছেনঃ এ হাদীসটি মুনকার। হুসাইন আল-আশকারের সূত্র ছাড়া অন্য কোন সূত্র হতে এটি জানা যায় না। তিনি একজন শী’য়া মাতরূক।
অনুরূপ কথা মানবী উকায়লীর উদ্ধৃতিতে এবং ইবনু হাজারও “তাহযবুত তাহষীব” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। তিনি বলেছেনঃ ইবনু উয়াইনা হতে এটির কোন ভিত্তি নেই।
` كل أحد أحق بماله من والده وولده والناس أجمعين `.
ضعيف.
أخرجه الدارقطني في ` سننه ` (4 / 235 / 112) ومن طريقه البيهقي في ` سننه ` (10 / 319) من طريق هشيم عن عبد الرحمن بن يحيى عن حبان بن أبي جبلة مرفوعا، وأعله البيهقي بقوله: هذا مرسل، حبان بن أبي جبلة القرشي من التابعين.
قلت: وهو ثقة، لكن الراوي عنه لم أعرفه.
ثم عرفته من ` تاريخ البخاري ` وغيره وذكر أن بعضهم قلب اسمه فقال: يحيى بن عبد الرحمن وهكذا أورده ابن حبان في ` ثقاته ` (7 / 609) وهو عندي صدوق كما حققته في ` التيسير ` وظن العلامة أبو الطيب في تعليقه على الدارقطني أنه عبد الرحمن بن يحيى الصدفي أخومعاوية بن يحيى لينه أحمد، وهو وهم فإن هذا دمشقي كما في ` تاريخ ابن عساكر ` (10 / 242) ويروي عن هشيم، وذاك مصري عنه هشيم كما ترى فالعلة الإرسال.
والحديث عزاه السيوطي في ` الجامع ` للبيهقي في ` سننه ` ورمز له بالصحة!
وقد تعقبه المناوي في شرحه فقال: أشار المصنف لصحته، وهو ذهول أو قصور، فقد استدرك عليه الذهبي في ` المهذب ` فقال: قلت: لم يصح مع انقطاعه.
قلت: وأخرجه البيهقي أيضا (6 / 178) من طريق سعيد بن أبي أيوب عن بشير بن أبي سعيد عن عمر بن المنكدر مرفوعا مرسلا دون قوله: ` من والده … ` وبشير وعمر لم أعرفهما، ولكن في ` الجرح والتعديل ` لابن أبي حاتم (1 / 1 /374) ما نصه: بشير بن سعيد المدني، روى عن محمد بن المنكدر، روى عنه سعيد ابن أبي أيوب، سمعت أبي يقول ذلك.
والظاهر أنه هو هذا، ولكن وقع تحريف في اسمه واسم شيخه من نسخة ` الجرح ` أو ` السنن ` والله أعلم.
ثم ترجح أن التحريف في ` السنن ` فقد جاء في ` التاريخ `، و` ثقات ابن حبان ` (6 / 101) مثل ما في ` الجرح ` إلا أنهما قالا: … ابن سعد مكان: … ابن أبي سعيد، والباقي مثله فهو من مرسل محمد بن المنكدر، والله أعلم.
ومن الغرائب أن بعضهم استدل بهذا الحديث على عدم وجوب التسوية بين الأولاد في العطية، خلافا للحديث الصحيح أن النبي صلى الله عليه وسلم قال لبشر والد النعمان - وكان أعطى أحد أولاده غلاما - : ` أعطيت سائر ولدك مثل هذا؟ قال: لا، قال: ` فاتقوا الله واعدلوا بين أولادكم ` أخرجه البخاري ومسلم في ` صحيحيهما ` من حديث النعمان بن بشير، وفي رواية لمسلم وغيره: ` فليس يصلح هذا، وإني لا أشهد إلا على حق ` وفي رواية: ` فإني لا أشهد على جور `. وانظر الحديث المتقدم (340) .
ومع أن هذا الحديث ضعيف لا يجوز الاحتجاج به، فإنه لا يخالف حديث النعمان بن بشير، والتوفيق بينهما ممكن، وذلك أن يقال: هذا عام، وحديث النعمان خاص وهو مقدم عليه، فيكون معنى الحديث لوصح: كل أحد أحق بماله إذا صح أنه ماله شرعا، وابن بشير لم يتملك الغلام شرعا كما أفاده حديث النعمان، فلا تعارض، وراجع لهذا البحث ` الروضة الندية في شرح الدرر البهية ` (2 / 164 - 166) .
৩৫৯। প্রত্যেকে তার সম্পদের ব্যাপারে তার পিতা, তার সন্তান ও সব মানুষের চেয়ে বেশী হকদার।
হাদীসটি দুর্বল।
এটি দারাকুতনী তার “সুনান” গ্রন্থে (৪/২৩৫/১১২) এবং তার সূত্র হতে বাইহাকী তার “সুনান” গ্রন্থে (১০/৩১৯) হুশাইম সূত্রে আব্দুর রহমান ইবনু ইয়াহইয়া হতে, তিনি হিব্বান ইবনু আবী জিবিল্লাহ হতে বর্ণনা করেছেন।
বাইহাকী এটির সমস্যা বর্ণনা করেছেন এ বলে যে, এটি মুরসাল, হিব্বান তাবেঈনদের অন্তর্ভুক্ত।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি নির্ভরযোগ্য, কিন্তু তার থেকে বর্ণনাকারীকে চিনি না। অতঃপর তাকে চিনেছি `তারীখুল বুখারী` ও অন্যান্য গ্রন্থে। এ হাদীসটি অন্য যে সব সূত্রে বর্ণিত হয়েছে সেগুলোর কোনটিই সহীহ্ নয় বরং সেগুলো হয় মুনকাতি না হয় মুরসাল।
এ হাদীস দ্বারা কেউ কেউ সন্তানদের মাঝে সমভাবে কিছু দান করা ওয়াজিব না হওয়ার দলীল গ্রহণ করেছেন। অথচ সহীহ হাদীসে সমভাবে দেয়ার কথা বলা হয়েছে। যা বুখারী এবং মুসলিম নুমান ইবনু বাশীরের হাদীস হতে বর্ণনা করেছেন।
` لا تجوز الهبة إلا مقبوضة `.
لا أصل له مرفوعا.
وإنما رواه عبد الرزاق من قول النخعي، كما ذكره الزيلعي في ` نصب الراية ` (4 / 121) ، ولا دليل في السنة على اشتراط القبض في ` الهبة ` ومن أبواب البخاري في ` صحيحه `: باب من رأى الهبة الغائبة جائزة، فانظر (5 / 160) من ` فتح البارى `.
৩৬০। হস্তগত করা ব্যতীত হিবা বৈধ হবে না।
মারফু হিসাবে হাদীসটির কোন ভিত্তি নেই।
এটি আব্দুর রাযযাক নাখ'ঈর কথা হতে বর্ণনা করেছেন; যেরূপভাবে যায়লাঈ `নাসবুর রায়া` গ্রন্থে (৪/১২১) উল্লেখ করেছেন।
হিবা হস্তগত করা শর্ত, হাদীসে এরূপ কোন দলীল নেই।
ইমাম বুখারী তার সহীহার মধ্যে অধ্যায় রচনা করেছেন, ‘অনুপস্থিত হিবা জায়েষ হওয়ার বিষয়ে যিনি মতামত দিয়েছে তার অধ্যায় । দেখুন `ফাতহুল বারী` (৫/১৬০)।