সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ
موارد) ، وهذا مما يؤكد تساهله أكثر من شيخه في التصحيح والتوثيق، فإن هذا قد غمز في صحته - كما رأيت دون ابن حبان - ؛ فإنه ساقه في ` صحيحه ` (2475/الإحسان) محتجاً به! وذكر (محمد بن موسى بن الحارث) - وهو التيمي - وأباه في كتابه `الثقات` (5/405 و 7/ 397) ، ولم يذكر في ترجمتيهما شيئاً يدل على حالهما أكثر مما جاء في هذا الإسناد! على وهم وقع له في ترجمة (الأب) :
(موسى بن الحارث! ؛ فإنه قرن مع ابنه (محمد بن موسى) راوياً آخر هو (عاصم ابن سويد الأنصاري) ! وهذا إنما روى عن الابن وليس عن الأب كما سبق.
وعلى كل حال؛ فهما مجهولان لا يعرفان، إلا بهذا الإسناد. ومن تراجم الذهبي في `الميزان`:
` محمد بن موسى الرواسي، عن أبيه، ومحمد بن أبي موسى، عن القاسم ابن مخيمرة - مجهولان `.
فقال الحافظ في ` اللسان ` (5/ 399) :
`وفي `ثقات ابن حبان `: (محمد بن موسى بن الحارث) عن أبيه، وعنه (عاصم بن سويد الأنصاري) . فيحتمل أن يكون الأول `.
والحديت أخرجه البيهقي في `شعب الإيمان ` (3/ 265 - 266/3500) من طريق الحجبي - وهو: عبد الله بن عبد الوهاب - : نا عاصم بن سويد بن زيد
ابن جارية الأنصاري به بتمامه؛ إلا أنه وقع في إسناده تحريف كثير، وكذا في متنه، ولا فائدة تذكر من بيانه.
إذا عرفت ما تقدم من البيان والتحقيق؛ فمن الجناية على هذا العلم الشريف، والتعالي على العارفين به، والتشبع بما لم يعط ما صنعه الأخ حسين الداراني في طبعته لكتاب ` موارد الظمآن `؛ فإنه قلب اسم الابن والأب في إسناد الحديث فجعله هكذا: (موسى بن محمد بن الحارث) ، ثم قال (2/ 306) :
` لقد انقلب هذا الاسم في النسختين (يعني: من الموارد) ، وفي ` صحيح ابن خزيمة ` وفي ` المستدرك ` فجاء: ` محمد بن موسى`. والصواب ما أثبتناه وهو: موسى ابن محمد بن إبراهيم بن الحارث التيمي. (كذا) . وجاز هذا القلب على الحافظ ابن خزيمة - وعلى تلميذه اين حبان أيضاً - فقال: ` فإني لا أقف على سماع موسى بن الحارث في جابر بن عبد الله `. وعلى الحافظ الذهبي إذ قال:
` عاصم - إمام مسجد قباء - : خرج له النسائي؛ ولكن من شيخه؟! `.
ولم يتنبه لذلك أيضاً الأستاذ الشيخ محمد ناصر الدين الألباني؛ فقد نقل عنه الدكتور مصطفى الأعظمي قوله: ` عاصم بن سويد فيه جهالة، ومحمد بن موسى بن الحارث التيمي [وأبوه] (1) : لم أعرفهما `. وانظر التعليق التالي`.
قلت: لم يذكر فيه ما يناسب المقام سوى ضعف (موسى بن محمد) وباقي رجاله ثقات.
(1) هذه الزيادة من نسختي من `صحيح ابن خزيمة ` الظاهر أنها سقطت من الطابع وقوله:
` نقل عنه الدكتور … ` غير دقيق، وتعمية للمصدر أخشى أن يكون مقصوداً، وهو على كل حال من أخطائه أو عجمته؛ لأنه من تعليقي على ` الصحيح `، بطلب من الدكتور، والداراني يعلم ذلك من المقدمة (ص 6) فمن شاء؛ راجع؛ ليتبين ما تفعل المعاصرة، نسأل الله السلامة.
وجواباً عليه أقول:
كنت أتمنى - والله - أن يكون الأخ الداراني قد تنبه لشيء غفل عنه أولئك الحفاظ الذين سماهم وغيرهم ممن لم يذكر كالحافظ البيهقي والعسقلاني لتعقبه عليه انطلاقاً من الحكمة القائلة (كم ترك الأول للاخر) ، ولكن هيهات لمثله أن يمكنه ذلك، وهو في هذا العلم لا يزال قزماً كما تدل على ذلك كثرة أخطائه وأوهامه التي تيسر لي بيان الكثير منها، وما لنا نذهب بعيداً، وهذا هو المثال بين أيدينا! لقد غَفَّل كل أولئك الحفاظ، واستصوب تغيير إسناد ما رووا، بمجرد الدعوى التي لا يعجز عنها أجهل الناس؛ بل إنه خالف أدباً من آداب رواية الحديث التي نصوا عليها في (النوع السادس والعشرون في صفة رواية الحديث) من `علم المصطلح `، وهو: أن الواجب المحافظة على الأصل مع بيان التصحيح بحاشية الكتاب، إلا إذا كان الخطأ واضحاً ليس هناك شبهة في أنه خطأ ` (1) .
قلت: وكيف يمكن أن يتصور العقلاء وضوح خطأ ما ادعاه هذا الرجل على أولئك الحفاظ وهو لم يدل على ذلك بشبه دليل، الأمر الذي يقول الشاعر:
والدعاوى ما لم تقيموا عليها بينات أبناؤها أدعياء
نعم، إني لأظن أن الذي حمله على ذلك هو إعجابه برأيه، وغروره بنفسه، وتخيله ما رآه في ترجمة (عاصم بن سويد) أنه روى عن (موسى بن محمد) ، وهذا من ضيق عطنه، وقلة معرفته بهذا الفن، فقد يروي الراوي عن جمع من
شيوخه متفقين في الاسم واسم الأب، وفي ذلك ألف الخطيب كتابه ` المتفق
(1) انظر `الباعث الحثيث شرح اختصار الحديث` للشيخ أحمد شاكر رحمه الله تعالى (ص 164/ صبيح وأولاده) .
والمفترق `، وفيه أقسام، وزاد عليه الحافظ ابن الصلاح في `النوع الرابع والخمسون ` من ` مقدمته، أنواعاً أخرى، وضرب لها بعض الأمثلة منها القسم الثاني، وفيه اثنان كلاهما في عصر واحد، وكلاهما يروي عنه الحاكم! وأغرب منه ما ذكره عن شعبة أنه روى عن سبعة كلهم أبو حمزة، فراجعه؛ إن شئت مع شرح الحافظ
العراقي عليه (ص 358، 364 - حلب) .
وختاماً أقول:
لقد جهل الرجل هذه الحقيقة العلمية، واغتر بما عنده من نتف من العلم، فظن جهله علماً، فوقع في الغفلة التي رمى بها غيره، ولوأنه كان على سلامة من الغرور وحب الظهور؛ لتحفظ في حكمه على الأقل، ولم يتعرض لغيره بذكر،
ولقال: أرى كذا، أو يحتمل عندي كذا وكذا، ولم يحرف الإسناد. ولكن صدق من قال:
ومهما تكن عند امرئ من خليقة وإن خالها تخفى على الناس تعلم
والله المستعان، ولا حول ولا قوة إلا بالله.
৫৮১। যখন বাদশা ক্রোধে জ্বলে উঠে তখন শয়তান তার উপর প্রাধান্য বিস্তার করে।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি ইমাম আহমাদ (৪/২২৬) উরওয়াহ ইবনু মুহাম্মাদ হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি তার দাদা হতে মারফু' হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটির সনদটি দুর্বল। উরওয়াহ ও তার পিতা আমার নিকট মাজহুলুল হাল। ইবনু হিব্বান ছাড়া অন্য কেউ তাদের দু’জনকে নির্ভরযোগ্য বলেননি। ইবনু হিব্বান কর্তৃক নির্ভরযোগ্য বলা গ্রহণযোগ্য নয়। এ সম্পর্কে পূর্বে বহুবার আলোচনা করা হয়েছে। হায়ছামীর (৭/৭১) কথায় (ইমাম আহমাদ এবং তাবারানী বর্ণনা করেছেন আর বর্ণনাকারীগণ নির্ভরশীল) ধোকায় পড়ার কোন সুযোগ নেই। কারণ তিনি বুঝাচ্ছেন তারা নির্ভরযোগ্য ইবনু হিব্বানের নিকট।
مختصره) .
ولم يتنبه للفرق بين رواية جنادة - هذه الضعيفة - ورواية الشيخين وغيرها - المخالفة لها - : صاحبنا الشيخ حمدي السلفي، فلم يعلق عليها بشيء يبين ضعفها، بل إنه أوهم صحتها بإحالته بها على رواية الشيخين المتقدمة! ولذلك؛ رأينا بيان ذلك.
৫৮২। অবশ্যই রাগ সৃষ্টি হয় শয়তানের নিকট হতে। আর শয়তানকে সৃষ্টি করা হয়েছে আগুন হতে। এই আগুনকে নিভানো হয়ে থাকে পানি দ্বারা, অতএব তোমাদের কেউ যদি রাগাম্বিত হয় তাহলে সে যেন উযু করে।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি ইমাম আহমাদ পূর্বের হাদীছটির সনদে বর্ণনা করেছেন। অনুরূপভাবে ইমাম বুখারী `আত-তারীখ` (৪/১/৮) গ্রন্থে, আবু দাউদ (২/২৮৭) এবং ইবনু আসাকির (৫/৩৩৭/২) বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সনদটি দুর্বল। তাতে দু'জন মাজহুল বর্ণনাকারী রয়েছেন। যেমনটি বর্ণনা করেছি পূর্বের হাদীছটিতে।
হাফিয ইরাকী `তাখরাজুল ইহইয়া` (৩/১৪৫,১৫১) গ্রন্থে এবং ইবনু হাজার `ফাতহুল বারী` (১০/৩৮৪) গ্রন্থে কোন হুকুম না লাগিয়ে চুপ থেকেছেন।
হাদীছটি মুয়াবিয়া হতে ভিন্ন ভাষায় বর্ণনা করা হয়েছে। যাতে গোছল করার কথা বলা হয়েছে। এটি আবু নোয়াইম `আল-হিলইয়াহ` (২/১৩০) গ্রন্থে এবং ইবনু আসাকির (১৬/৩৬৫/১) যুবায়ের ইবনু বাক্কার হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটিও দুর্বল। সনদের বর্ণনাকারী ইয়াসীন ইবনু আবদিল্লাহ ইবনু উরওয়াহর জীবনী পাচ্ছি না। সনদের আরেক বর্ণনাকারী আব্দুল মাজীদ ইবনু আব্দিল আযীযের মধ্যে দুর্বলতা রয়েছে। হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি সত্যবাদী, ভুল করতেন এবং মুরজিয়া মতাদর্শে বিশ্বাসী ছিলেন। ইবনু হিব্বান একটু সামনে বেড়ে বলেছেনঃ তিনি মাতরূক।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু হিব্বান (২/১৫২) বলেনঃ হাদীছটি নিতান্তই মুনকার। তিনি আখবারগুলোকে উলট পালট করে ফেলতেন এবং প্রসিদ্ধদের উদ্ধৃতিতে মুনকার হাদীছ বর্ণনা করতেন। অতএব তাকে পরিত্যাগ করাই শ্রেয়।
` أترعون عن ذكر الفاجر؟! اذكروه بما فيه يحذره الناس `.
موضوع.
أخرجه العقيلي في ` الضعفاء ` (72) وكذا ابن حبان (1 / 215) وأبو الحسن الحربي في ` الأمالي ` (245 / 1) وابن عدي (260 / 2) والمحاملي في ` الأمالي ` (ج 5 رقم 15) والبيهقي في ` سننه ` (10 / 215) والخطيب في ` تاريخه ` (1 / 382، 3 / 188 و7 / 262) وفي ` الكفاية ` (ص 42) وابن عساكر (12 / 7 / 2) وأبو بكر الكلاباذي في ` مفتاح المعاني ` (21 / 1) والهروي في ` ذم الكلام ` (4 / 81 / 1) والسهمي في ` تاريخه ` (75) من طريق الجارود بن يزيد عن بهز بن حكيم عن أبيه عن جده مرفوعا.
وقال العقيلي: ` ليس له من حديث بهز أصل، ولا من حديث غيره، ولا يتابع عليه من طريق يثبت `.
وقال البيهقي: ` هذا يعرف بالجارود بن يزيد النيسابوري وأنكره عليه أهل العلم بالحديث، سمعت أبا عبد الله الحافظ (يعني الحاكم) يقول: سمعت أبا عبد الله محمد بن يعقوب الحافظ غير مرة يقول: كان أبو بكر الجارودي إذا مر بقبر جده يقول: يا أبة لولم تحدث بحديث بهز بن حكيم لزرتك `! قال ابن عدي والبيهقي: ` وقد سرقه عنه جماعة من الضعفاء فرووه عن بهز بن حكيم، ولم يصح فيه شيء `. وقال ابن حبان: ` والخبر في أصله باطل، وهذه الطرق كلها بواطيل لا أصل لها `. وخفي هذا على الهروي فقال: ` حديث حسن من حديث بهز وقد توبع جارود بن يزيد عليه `! وتبعه يوسف بن عبد الهادي في ` جمع الجيوش والدساكر على ابن عساكر `! (2 / 2) .
وروى الخطيب عن أحمد أنه قيل له. رواه غيره؟ فقال: ما علمت. ثم ذكر الخطيب أنه روي عن جماعة ثم قال: ` ولا يثبت عن واحد منهم ذلك، والمحفوظ أن الجارود تفرد به `. ثم روى عن البخاري أنه قال فيه: ` منكر الحديث، كان أبو أسامة يرميه بالكذب `. وعن أبي داود: ` غير ثقة ` وقال الذهبي في ` الميزان `: ` وقال أبو حاتم: كذاب `. وفي ` اللسان `:
` قال العقيلي: متروك الحديث، لأنه يكذب ويضع الحديث `. وذكر المناوي: أن الدارقطني قال في ` علله `: ` هو من وضع الجارود، ثم سرقه منه جمع `. وفي ` الميزان ` أنه ` موضوع `، ونقله عنه في ` الكبير ` وأقره، لكن نقل الزركشي عن الهروي في ` كتاب ذم الكلام ` أنه حسن باعتبار شواهده `!
قلت: وهذا الاستدراك لا طائل تحته، لأنه ذهو ل عن الشرط الذي يجب تحققه في الشواهد حتى يتقوى الحديث بها وهو السلامة من الضعف الشديد الناتج من تهمة في الرواة، وهذا مفقود ههنا لما سبق في كلام الأئمة النقاد أن الحديث من وضع الجارود سرقه منه آخرون! ولهذا لما حكى السخاوي في ` المقاصد ` كلام الهروي السابق تعقبه بالرد فقال: ` وليس كذلك، فقد قال الحاكم فيما نقله البيهقي في ` الشعب `: إنه غير صحيح ولا معتمد `. ولهذا أورد الحديث ابن طاهر في ` الموضوعات ` (ص 3) وأعله بالجارود. قلت: وممن سرقه عنه سليمان بن عيسى السجزي فرواه عن سفيان، أخرجه ابن عدي (161 / 1) وقال: ` وهذا عن الثوري عن بهز باطل والسجزي يضع الحديث `. وقد روي الحديث بلفظ آخر وهو:
৫৮৩। তোমরা কি পাপাচারীকে স্মরণ করে বোকার ন্যায় মন্দের দিকে দ্রুত চলতে চাচ্ছ?! তোমরা তাকে এমনভাবে স্মরণ কর যাতে করে লোকেরা তাকে ভয় করে চলে।
হাদীছটি জাল।
এটি উকায়লী `আয-যোয়াফা` (৭২) গ্রন্থে, ইবনু হিব্বান (১/২৫১), আবুল হাসান আল-হারবী `আল-আমলী` (১/২৪৫) গ্রন্থে, ইবনু আদী (২/২৬০) ও আরো অনেকে জারূদ ইবনু ইয়াযীদ সূত্রে বাহয ইবনু হাকীম হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি তার দাদা হতে মারফু হিসাবে বর্ণনা করেছেন। উকায়লী বলেনঃ বাহযের হাদীছ হতে এটির কোন ভিত্তি নেই। অন্য কারো হাদীছ হতেও নেই। সাব্যস্ত করা যায় এমন কোন সূত্রেও এটির মুতাবায়াত করা হয়নি। বাইহাকী বলেনঃ আমি হাকিম হতে শুনেছি তিনি বলেনঃ আমি আবূ আবদিল্লাহ মুহাম্মাদ ইবনু ইয়াকুব আল-হাফিযকে একাধিকবার বলতে শুনেছিঃ আবু বাকর আল-জারূদী যখন তার দাদার কবরের নিকট দিয়ে অতিক্রম করতেন, তখন বলতেনঃ হে আমার দাদা! আপনি যদি বাহয ইবনু হাকীমের হাদীছটি বর্ণনা না করতেন তাহলে আপনাকে যিয়ারাত করতাম! ইবনু আদী ও বাইহাকী বলেনঃ একদল দুর্বল বর্ণনাকারী তার থেকে চুরি করে বাহয ইবনু হাকীম হতে বর্ণনা করেছেন। এ বিষয়ে কিছুই সহীহরূপে সাব্যস্ত হয়নি। ইবনু হিব্বান বলেনঃ আসলেই হাদীছটি বাতিল। এসব সূত্রগুলো সবই বাতিল, এগুলোর কোন ভিত্তি নেই।
` ليس لفاسق غيبة `.
باطل.
رواه الطبراني في ` المعجم الكبير ` وأبو الشيخ في ` التاريخ ` (ص 236) وابن عدي (ق 61 / 2) وأبو بكر ابن سلمان الفقيه في ` مجلس من الأمالي ` (15 / 2) وأبو بكر الدقاق في ` حديثه ` (2 / 42 / 2) والهروي في ` ذم الكلام ` (4 / 81 / 1) والقضاعي في ` مسند الشهاب ` (97 / 2) والواحدي في ` التفسير ` (4 / 82 / 1) وكذا الخطيب في ` الكفاية ` (ص 42) كل هؤلاء من طريق جعدبة بن يحيى الليثي: حدثنا العلاء بن بشر عن سفيان عن بهز بن حكيم عن أبيه عن جده مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف جدا، جعدبة قال الدارقطني: ` متروك `. والعلاء بن بشر ضعفه الأزدي. وذكره الحاكم فقال: ` هذا الحديث غير صحيح `، وقال ابن حبان في ` الثقات ` في ترجمة العلاء: ` روى عنه جعدبة بن يحيى مناكير `. وقال ابن عدي: ` والعلاء بن بشر هذا لا يعرف، وهذا اللفظ غير معروف `. ونقل المناوي عنه عن أحمد أنه قال: ` حديث منكر `.
قلت: وقد وجدت له طريقا أخرى، رواه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (2 / 239 - 240) عن محمد بن يعقوب: حدثنا إبراهيم بن سلام المكي: حدثنا ابن أبي فديك عن جعفر بن محمد عن أبيه عن جده مرفوعا به. قلت: وهذا سند ضعيف محمد بن يعقوب هذا هو ابن أبي يعقوب أبو بكر ترجمه أبو نعيم ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، وإبراهيم بن سلام المكي لم أعرفه. والحديث ذكره ابن القيم في الموضوعات في كتابة ` المنار ` وقال (ص 61) : ` قال الدارقطني والخطيب: قد روي من طرق وهو باطل `.
৫৮৪। পাপাচারীর গীবাত করলে গীবাত হয় না।
হাদীছটি বাতিল।
এটি তাবারানী `আল-মুজামুল কাবীর` গ্রন্থে, আবুশ শাইখ “আত-তারীখ” (পৃঃ ২৩৬) গ্রন্থে, ইবনু আদী (কাফ ২/৬১) ও আরো অনেকে জা'য়াদাবাহ ইবনু বাহয ইবনু হাকীম হতে ... মারফু' হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি নিতান্তই দুর্বল। জায়াদাবাহ সম্পর্কে দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মাতরূক। আল-আলা ইবনু বিশরকে আল-আযদী দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। হাদীছটি হাকিম উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়। ইবনু হিব্বান `আছ-ছিকাত` গ্রন্থে আল-আলার জীবনীতে বলেছেনঃ তার থেকে জায়াদাবাহ ইবনু ইয়াহইয়া মুনকার হাদীছ বর্ণনা করেছেন। ইবনু আদী বলেনঃ আল-আলা ইবনু বিশরকে চেনা যায় না, আর এ ভাষা অপরিচিত।
মানবী ইবনু আদীর সূত্রে ইমাম আহমাদ হতে নকল করেছেন, তিনি বলেনঃ হাদীছটি মুনকার।
আমি (আলবানী) বলছিঃ আরেকটি সূত্র পেয়েছি। যেটি আবু নোয়াইম “আখবারু আসফাহান” (২/২৩৯-২৪০) গ্রন্থে মুহাম্মাদ ইবনু ইয়াকুব হতে তিনি ইবরাহীম ইবনু সালাম আল-মাক্কী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
এ সনদটি দুর্বল। আবু নোয়াইম এই মুহাম্মাদ ইবনু ইয়াকুবের জীবনী বর্ণনা করেছেন, কিন্তু ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি। এ ছাড়া ইবরাহীম ইবনু সালামকে আমি চিনি না। ইবনুল কাইয়্যিম হাদীছটি `আল-মানার` (পৃ. ১১) গ্রন্থে মাওযূ হাদীছের অন্তর্ভুক্ত করেছেন।
দারাকুতনী এবং আল-খতীব বলেনঃ এটি বিভিন্ন সূত্রে বর্ণিত হয়েছে অথচ হাদিসটি বাতিল।
` من ألقى جلباب الحياء فلا غيبة له `.
ضعيف جدا.
أخرجه عيسى بن علي الوزير في ` ستة مجالس ` (193 / 2) وأبو القاسم المهرواني في ` الفوائد المنتخبة ` (41 / 1) والبيهقي في ` سننه ` (10 / 210) والخطيب (8 / 438) وأبو محمد بن شيبان العدل في ` الفوائد ` (1
/ 220 / 1) والقضاعي (36 / 1) من طريق رواد بن الجراح أبي عصام العسقلاني:
حدثنا أبو سعد الساعدي عن أنس مرفوعا. وقال البيهقي: ` ليس بالقوي `، وقال المهرواني: ` غريب، ولم نكتبه إلا من حديث رواد بن الجراح `. قلت: وله علتان: الأولى: رواد هذا، قال الحافظ في ` التقريب `: ` صدوق اختلط بآخره فترك، وفي حديثه عن الثوري ضعف شديد `. الثانية: أبو سعد هذا قال الذهبي في ` الميزان `: ` ليس بعمدة ` ثم ساق له هذا الحديث، ثم قال: ` وقد ذكره علي بن أحمد السليماني في من يضع الحديث `. وقال الدارقطني في ` سؤالات البرقاني عنه ` (رقم
৫৮৫। যে ব্যক্তি লজ্জার পর্দাকে নিক্ষেপ করেছে তার গীবত করলে গীবত হিসাবে গণ্য হবে না।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি ঈসা ইবনু আলী আল-ওয়ায়ীর `সিত্তাতু মাজালিস` (২/১৯৩) গ্রন্থে আবুল কাসেম আল-মিহরাওয়ানী `আল-ফাওয়ায়েদুল মুন্তাখাবাহ` (১/৪১) গ্রন্থে, বাইহাকী তার “সুনান” (১০/২১০) গ্রন্থে, আল-খাতীব (৮/৪৩৮), আবু মুহাম্মাদ ইবনু শায়বান আল-আদল `আল-ফাওয়ায়েদ` (১/২২০/১) গ্রন্থে এবং কাযাঈ (১/৩৬) রাওয়াদ ইবনুল জাররাহ আবু ঈসাম আল-আসকালানী সূত্রে আবু সা’আদ আস-সায়েদী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
বাইহাকী বলেনঃ রাওয়াদ শক্তিশালী নন। আল-মিহরাওয়ানী বলেনঃ হাদীছটি গারীব। এটিকে আমরা একমাত্র রাওয়াদের হাদীছ হতেই লিখেছি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীছটির সমস্যা দুটিঃ
১। এই রাওয়াদ সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাযার “আত-তাকরীব` গ্রন্থে বলেছেনঃ তিনি সত্যবাদী কিন্তু তার শেষ বয়সে মস্তিষ্ক বিকৃতি ঘটেছিল, ফলে তাকে পরিত্যাগ করা হয়। তিনি ছাওরী হতে যে হাদীছ বর্ণনা করেছেন তা খুবই দুর্বল।
২। এই আবূ সা’আদ সম্পর্কে ইমাম যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে বলেনঃ তিনি ভাল নন। অতঃপর তিনি তার এ হাদীছটি উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটিকে আলী ইবনু আহমাদ আস-সুলায়মানী ঐ ব্যক্তির হাদীছ হিসাবে উল্লেখ করেছেন যিনি জাল করতেন।
দারাকুতনী `সুওয়ালাতুল বারকানী আনহু` (নং ৫৭৪) গ্রন্থে বলেছেনঃ তিনি মাজহুল, তার হাদীছ গ্রহণযোগ্য নয়। আল-খাতীবের নিকট (৪/১৭১) হাদীছটির আরেকটি সূত্র রয়েছে। কিন্তু এটি পূর্বেরটির চেয়ে আরো বেশী দুর্বল। কারণ এটির বর্ণনাকারী আর-রাবী' ইবনু বাদর মাতরূক। আর তার শাইখ আবান ইবনু আবী আইয়াশ জাল করার দোষে দোষী।
` ليس مني ذوحسد ولا نميمة ولا كهانة، ولا أنا منه، ثم تلا هذه الآية (والذين يؤذون المؤمنين المؤمنات بغير ما اكتسبوا فقد احتملوا بهتانا وإثما مبينا) `.
موضوع.
ذكره الهيثمي (8 / 91) من حديث عبد الله بن بسر ثم قال: ` رواه الطبراني وفيه سليمان بن سلمة الخبائري وهو متروك `. قلت: وذلك لأنه متهم قال ابن الجنيد: ` كان يكذب `. وساق له الذهبي حديثا وقال: ` هذا
موضوع `.
৫৮৬। হিংসুক, চোগলখোর এবং ভবিষ্যৎ বর্ণনাকারী আমার অন্তর্ভুক্ত নয় আর আমি তার অন্তর্ভুক্ত নই। অতঃপর তিনি এ আয়াতটি পাঠ করলেনঃ যারা বিনা অপরাধে মুমিন পুরুষ ও মুমিন নারীদেরকে কষ্ট দেয়, তারা মিথ্যা অপবাদ ও প্রকাশ্য পাপের বোঝা বহন করে” [সূরা আহ্যাবঃ ৫৮]
হাদীছটি জাল।
এটি হায়ছামী (৮/৯১) আব্দুল্লাহ ইবনু বুসর-এর হাদীছ হতে উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটিকে তাবারানী বর্ণনা করেছেন। যার সনদে সুলায়মান ইবনু সালামা আল-খাবায়েরী রয়েছেন, তিনি মাতরূক।
আমি (আলবানী) বলছিঃ কারণ তিনি মিথ্যার দোষে দোষী। ইবনুল জুনায়েদ বলেনঃ তিনি মিথ্যা বলতেন।
হাফিয যাহাবী তার একটি হাদীছ উল্লেখ করে বলেছেনঃ এ হাদীছটি জাল
` ثلاثة من كن فيه آواه الله في كنفه، وستر عليه برحمته، وأدخله في محبته، من إذا أعطى شكر، وإذا قدر غفر، وإذا غضب فتر `.
موضوع.
رواه ابن حبان في ` الضعفاء ` (2 / 93) والحاكم (1 / 125) والخطيب في ` التلخيص ` (76 - 2) عن عمر بن راشد مولى عبد الرحمن بن أبان بن عثمان التيمي: حدثنا محمد بن عبد الرحمن بن أبي ذئب القرشي عن هشام بن عروة عن محمد بن علي عن ابن عباس مرفوعا. قال الحاكم: ` صحيح الإسناد `! ورد الذهبي بقوله: ` بل واه، فإن عمر قال فيه أبو حاتم: وجدت حديثه كذبا `.
قلت: وكنيته أبو حفص الجاري وقال ابن حبان: ` يضع الحديث على الثقات، لا يحل ذكره في الكتب إلا على سبيل القدح فيه فكيف الرواية عنه؟! `. وقد أخرجه البيهقي في ` الشعب ` وقال عقبه: ` عمر بن راشد هذا شيخ مجهول من أهل مصر يروي ما لا يتابع عليه `. ولهذا قال المناوي متعقبا على السيوطي الذي أورد الحديث في ` الجامع الصغير `: ` لم يصب في إيراده `. قلت: وله طريق أخرى عن ابن أبي ذئب به. أخرجه ابن عدي (331 / 1 - 2) : حدثنا أحمد بن داود بن أبي صالح حدثنا أبو مصعب المديني - يلقب مطرف - : حدثني محمد بن عبد الرحمن بن أبي ذئب به. وأحمد هذا قال ابن حبان (1 / 134) وابن طاهر: ` يضع الحديث `.
৫৮৭। তিনটি বস্তু যার মধ্যে থাকবে আল্লাহ তাকে তার ছায়াতলে আশ্রয় দান করবেন, তার রহমতের দ্বারা আচ্ছাদিত করবেন এবং তাকে তার ভালবাসার অন্তর্ভুক্ত করবেন। যখন সে ব্যক্তিকে কিছু দেয়া হবে তখন সে শুকরিয়া আদায় করবে, সে বদলা নিতে সক্ষম হওয়া সত্ত্বেও ক্ষমা করে দিবে এবং সে যখন রাগাম্বিত হয় তখন বিনম্র হয়ে যায়।
হাদীছটি জাল।
এটি ইবনু হিব্বান `আয-যোয়াফা` (২/৯৩) গ্রন্থে, হাকিম (১/১২৫) এবং আল-খাতীব “আত-তালখীস` (২/৭৬) গ্রন্থে উমার ইবনু রাশেদ হতে তিনি মুহাম্মাদ ইবনু আব্দির রহমান ইবনে আবী যিঈব আল-কুরাশী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
হাকিম বলেনঃ সনদটি সহীহ! হাফিয যাহাবী তার প্রতিবাদ করে বলেছেনঃ বরং একেবারে দুর্বল। কারণ এই উমার সম্পর্কে আবু হাতিম বলেনঃ তার হাদীছকে আমি মিথ্যা হিসাবে পেয়েছি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তার কুনিয়াত হচ্ছে আবু হাফস আল-জারী। ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে হাদীছ জলকারী। তাকে দোষারোপ করার উদ্দেশ্য ছাড়া কোন গ্রন্থেই উল্লেখ করা হালাল নয়। কিভাবে তার থেকে বর্ণনা করা যায়?
মানবী সুয়ুতী কর্তৃক `আল-জামেউস সাগীর` গ্রন্থে উল্লেখ করার কারণে তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ তিনি তার গ্রন্থে উল্লেখ করে ঠিক করেননি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীছটির অন্য একটি সূত্র রয়েছে। সেটিকে ইবনু আদী (৩৩১/১-২) আহমাদ ইবনু দাউদ ইবনে আবী সালেহ হতে ... বর্ণনা করেছেন। এই আহমাদ সম্পর্কে ইবনু হিব্বান এবং ইবনু তাহের বলেনঃ তিনি হাদীছ জালকারী।
` من دفع غضبه دفع الله عنه عذابه، ومن حفظ لسانه ستر الله عورته، ومن اعتذر إلى الله قبل عذره `.
موضوع.
رواه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (2 / 111) معلقا عن عبد السلام بن هاشم: حدثنا خالد بن برد عن أبيه عن أنس بن مالك مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد مكذوب، المتهم به عبد السلام بن هاشم هذا، قال فيه عمرو بن علي الفلاس: ` لا أقطع على أحد بالكذب إلا عليه `. وقد تساهل الهيثمي في تضعيفه فقط فقال في ` المجمع ` (8 / 68) بعد أن ساق الحديث دون الجملة الأخيرة منه: ` رواه الطبراني في ` الأوسط ` وفيه عبد السلام بن هاشم وهو ضعيف `.
ومن رواية الطبراني أورده السيوطي في ` الجامع ` وتعقبه المناوي بكلام الهيثمي الذي نقلته آنفا، إلا أنه وقع في نقله ` ابن هلال ` بدل ` ابن هشام ` وهو موافق لما ذكره الهيثمي في مكان آخر (8 / 70) وكأنه وهم منه، أو تحريف من بعض النساخ، إذ ليس في الرواة من يدعى عبد السلام بن هلال. والله أعلم. والحديث أشار المنذري (3 / 279) لضعفه أو وضعه.
৫৮৮। যে ব্যক্তি তার রাগকে প্রতিহত করবে আল্লাহ তা'আলা তার থেকে তার শাস্তিকে প্রতিহত করবেন। যে ব্যক্তি তার যবানকে হেফাযাত করবে আল্লাহ তা'আলা তার লজ্জাস্থানকে হেফাযাত করবেন। আর যে ব্যক্তি আল্লাহর নিকট ওযর পেশ করবে আল্লাহ তা'আলা তার ওযরকে কবুল করবেন।
হাদীছটি জাল।
এটি আবু নোয়াইম “আখবারু আসবাহান” (২/১১১) গ্রন্থে আব্দুস সালাম ইবনু হাশিম হতে মুয়াল্লাক হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি মিথ্যা। এই আব্দুস সালাম মিথ্যার দোষে দোষী। তার সম্পর্কে আমর ইবনু আলী আল-ফাল্লাস বলেনঃ আমি তার ব্যাপারে দৃঢ়তার সাথে বলছি যে, তিনিই মিথ্যার সাথে জড়িত। হায়ছামী `আল-মাজমা` (৮/৬৮) গ্রন্থে শুধুমাত্র দুর্বল বলে শিথিলতা প্রদর্শন করেছেন। তিনি শেষ ব্যক্যটি বাদ দিয়ে বলেছেনঃ এটিকে তাবারানী “আল-আওসাত” গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। যার সনদে আব্দুস সালাম ইবনু হাশিম রয়েছেন। তিনি দুর্বল। হাদীছটি সুয়ূতী `আল-জামে` গ্রন্থে তাবারানীর বর্ণনা হতে উল্লেখ করেছেন। এ কারণে মানবী হায়ছামীর উক্ত বক্তব্য উল্লেখ করে তার সমালোচনা করেছেন।
হাদীছটিকে মুনযেরী (৩/২৭৯) দুর্বল অথবা জাল হওয়ার দিকেই ইঙ্গিত করেছেন
` لا يحل لثلاثة نفر يكونون بأرض فلاة إلا أمروا عليهم أحدهم `.
ضعيف.
رواه أحمد (رقم 6647) من طريق ابن لهيعة قال: حدثنا عبد الله بن هبيرة عن أبي سالم الجيشاني عن عبد الله بن عمرو مرفوعا في حديث. قلت: وهذا سند ضعيف من أجل ابن لهيعة فإنه ضعيف لسوء حفظه. والذي صح في هذه الباب ما أخرجه أبو داود (1 / 407) وغيره من حديث أبي هريرة مرفوعا بلفظ: ` إذا كان ثلاثة في سفر فليؤمروا أحدهم `. وسنده حسن، وله شواهد انظرها إن شئت في ` المجمع ` (5 / 255) ، وكلها بلفظ الأمر ليس في شيء منها ` لا يحل `. فهذا مما تفرد به ابن لهيعة فهو ضعيف منكر. أقول هذا تحقيقا للرواية وبيانا للفرق
بين ما صح من الحديث وما لم يصح. فإنه يترتب على ذلك نتائج هامة أحيانا وذلك لأن لفظ: ` لا يحل ` نص في حرمة ترك التأمير، وأما لفظ الأمر فليس نصا في ذلك بل هو ظاهر، ولذلك اختلف العلماء في حكم التأمير فمن قائل بالندب، ومن قائل بالوجوب، ولوصح لفظ ابن لهيعة لكان قاطعا للنزاع. أقول هذا مع أنني أرى الأرجح الوجوب، لأنه الأصل في الأمر كما هو مقرر في علم الأصول، وممن قال بوجوب التأمير الغزالي في ` الإحياء ` (2 / 223) فيراجع كلامه فإنه مفيد.
৫৮৯। তিন ব্যক্তি কোন খোলা ময়দানে একত্রিত হলে তাদের মধ্য হতে একজনকে আমীর না বানিয়ে অবস্থান করা তাদের জন্য হালাল নয়।
হাদীছটি দুর্বল।
হাদীছটি ইমাম আহমাদ (নং ৬৬৪৭) ইবনু লাহীয়াহ সূত্রে আব্দুল্লাহ ইবনু হুবাইরাহ হতে ... মারফূ হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু লাহীয়ার কারণে এ সনদটি দুর্বল। কারণ হেফযে ক্রটি থাকার কারণে তিনি দুর্বল। এ অধ্যায়ে যে হাদীছটি সহীহ সনদে বর্ণিত হয়েছে, সেটি আবু দাউদ (১/৪০৭) ও অন্য বিদ্বানগণ আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এর হাদীছ হতে মারফু' হিসাবে নিম্নের বাক্যে বর্ণনা করেছেনঃإذا كان ثلاثة في سفر فليؤمروا أحدهم 'যখন তিন ব্যক্তি কোন সফরে একত্রিত হবে, তখন তারা অবশ্যই তাদের একজনকে আমীর নিবাচন করবে।' এটির সনদ হাসান। এর শাহেদও রয়েছে। যদি চান তাহলে `আল-মাজমা` (৫/২৫৫) গ্রন্থ দেখুন।
সবগুলোই الأمر নির্দেশ সূচক ক্রিয়া দিয়ে বর্ণিত হয়েছে। সেগুলোর কোনটিতেই لا يحل হালাল নয় এ শব্দ আসেনি। এ শব্দটি একমাত্র ইবনু লাহীয়াহ বর্ণনা করেছেন। এ কারণে এটি দুর্বল এবং মুনকার।
` من أمر بمعروف فليكن أمره بمعروف `.
ضعيف جدا.
رواه أبو العباس الأصم في ` جزء من حديثه ` (193 / 1) ورقم (129
نسختي) وعلي بن الحسن بن إسماعيل العبدي في ` حديثه ` (156 / 1 - 2) والضياء في ` المنتقى من مسموعاته بمرو` (42 / 1) عن سلم بن ميمون الخواص حدثنا زفر بن سليمان عن المثنى بن الصباح عن عمرو بن شعيب عن أبيه عن جده مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف جدا لما يأتي، واقتصر السيوطي في عزوه على البيهقي في ` الشعب `. وقال المناوي: ` وفيه سلم بن ميمون الخواص أورده الذهبي في ` الضعفاء ` وقال: قال ابن حبان: بطل الاحتجاج به.
وقال أبو حاتم: لا يكتب حديثه، عن (زافر) قال ابن عدي: لا يتابع على حديثه، ووثقه ابن معين. عن (المثنى بن الصباح) ضعفه ابن معين، وقال النسائي: متروك `.
قلت: ومع هذا كله سكت الحافظ العراقي على الحديث في ` تخريج الإحياء ` (2 / 292) !
৫৯০। যে ব্যক্তি ভাল কাজের নির্দেশ দিবে তার কর্ম যেন ভাল হয়।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
হাদীছটি আবুল আব্বাস আল-আসাম `জুযউ মিন হাদীছিহি` (১/১৯৩ নং ১২৯) গ্রন্থে, আলী ইবনুল হাসান ইবনে ইসমাঈল আল-আবাদী তার `হাদীছ` (১৫৬/১-২) এবং যিয়া `আল-মুন্তাকা মিন মাসমূয়াতিহি বেমারু` (১/৪২) গ্রন্থে সালাম ইবনু মায়মূন আল-খাওয়াস হতে তিনি যাফের ইবনু সুলায়মান হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি নিতান্তই দুর্বল। কারণ এই সালামকে ইমাম যাহাবী `আয-যোয়াফা` গ্রন্থে উল্লেখ করার পর বলেছেন, ইবনু হিব্বান বলেনঃ তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করা বাতিল। আবু হাতিম বলেনঃ যাফের ইবনু সুলায়মান হতে তার হাদীছ লিখা যায় না। ইবনু আদী বলেনঃ তার হাদীছের অনুসরণ করা যায় না। ইবনু মাঈন তাকে নির্ভরযোগ্য আখ্যা দিয়েছেন। আর মুসান্না ইবনুস সাবাহ হতে তাকে ইবনু মাঈন দুর্বল বলেছেন। নাসাঈ বলেনঃ তিনি মাতরূক।
এতো কিছু সত্ত্বেও হাফিয ইরাকী `তাখরাজুল ইহইয়া` (২/২৯২) গ্রন্থে কোন প্রকার হুকুম না লাগিয়ে চুপ থেকেছেন।
` من صلى ركعة لم يقرأ فيها بأم القرآن فلم يصل، إلا وراء الإمام `.
ضعيف.
رواه القاضي أبو الحسن الخلعي في ` الفوائد ` (47 / 1) عن يحيى بن سلام: حدثنا مالك بن أنس عن وهب بن كيسان عن جابر مرفوعا.
قلت: ويحيى بن سلام ضعفه الدارقطني كما في ` الميزان `، ونقل الزيلعي (1 / 10) عنه أعني الدارقطني أنه قال في ` غرائب مالك `: ` هذا باطل لا يصح عن مالك `.
قلت: والصواب أنه موقوف كذلك أخرجه الخلعي أيضا عن القعنبي، والبيهقي (2 / 160) عن ابن بكير، كلاهما عن مالك عن وهب عن جابر من قوله غير مرفوع، وقال البيهقي: ` رفعه يحيى بن سلام وغيره من الضعفاء عن مالك، وذلك مما لا يحل روايته على طريقة الاحتجاج به `. قلت: والحديث صحيح بدون قوله: ` إلا وراء الإمام ` يشهد له قوله صلى الله عليه وسلم: ` لا صلاة لمن لم يقرأ بفاتحة الكتاب ` رواه الشيخان عن عبادة بن الصامت، وقوله صلى الله عليه وسلم لـ ` المسيء صلاته ` بعد أن أمره بقراءة الفاتحة في الركعة الأولى: ` ثم اصنع ذلك في صلاتك كلها ` رواه البخاري وغيره. لكن في معنى هذه الزيادة: ` إلا وراء الإمام ` قوله صلى الله عليه وسلم: ` من كان له إمام فقراءة الإمام له قراءة `.
وهو حديث صحيح عندنا له طرق كثيرة جدا وقد ساقها الزيلعي (2 / 6 - 11) ثم خرجتها في ` الإرواء ` رقم (493) ، وهي وإن كانت لا تخلومن ضعف، ولكنه ضعف منجبر، وقد صح إسناده عن عبد الله بن شداد مرسلا، والمرسل إذا جاء متصلا فهو حجة عند الإمام الشافعي وغيره فاللائق بأتباعه أن يأخذوا بهذا الحديث إذا أرادوا أن لا يخالفوه في أصوله! وهو من المخصصات لحديث عبادة بن الصامت، ولكنه يخصصه بالجهرية فقط، لا في السرية، لأن قراءة الإمام فيها لا تكون قراءة لمن خلفه، إذ أنهم لا يسمعونها فلا ينتفعون بقراءته، فلابد لهم من
القراءة السرية، وبذلك نكون عاملين بالحديثين ولا نرد أحدهما بالآخر. وهو مذهب مالك وأحمد وغيرهما أن القراءة فيها مشروعة دون الجهرية. وهو أعدل الأقوال كما قال شيخ الإسلام ابن تيمية في ` الفتاوى ` ومن أراد التفصيل فليرجع إليها، وسبق شيء من هذا في الحديث (569) .
৫৯১। যে ব্যক্তি ইমামের পিছনে ছাড়া সূরা ফাতিহা ব্যতীত এক রাকাআত সালাত আদায় করল সে যেন সালাতই আদায় করল না।
হাদীছটি দুর্বল।
হাদীছটি কাযী আবুল হাসান আল-খাল'ঈ “আল-ফাওয়ায়েদ” (১/৪৭) গ্রন্থে ইয়াহইয়া ইবনু সালাম হতে তিনি মালেক ইবনু আনাস হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইয়াহইয়া ইবনু সালামকে দারাকুতনী দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন, যেমনটি “আল-মীযান” গ্রন্থে এসেছে। যায়লাঈ (১/১০) দারাকুতনী হতে নকল করেছেন, তিনি `গারায়েবে মালেক` গ্রন্থে বলেছেনঃ এটি বাতিল, মালেক হতে সহীহ নয়। সঠিক হচ্ছে এই যে, এটি মওকুফ। খালঈ কায়ানবী হতে আর বাইহাকী (২/১৬০) ইবনু বুকায়ের হতে ... অনুরূপই বর্ণনা করেছেন।
বাইহাকী বলেনঃ মালেক হতে ইয়াহইয়া ইবনু সালাম ও অন্যরা মারফূ' করে ফেলেছেন। তার দ্বারা দলীল হিসাবে বর্ণনা করাই হালাল নয়।
আমি (আলবানী) বলছি ঃ হাদীছটি إلا وراء الإمام এ অংশটুকু বাদ দিয়ে সহীহ। তার সাক্ষ্য দিচ্ছে রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিম্নোক্ত বাণীঃ لا صلاة لمن لم يقرأ بفاتحة الكتاب যে ব্যক্তি সূরা ফাতিহা পাঠ করবে না তার সালাতই হবে না। এটি বুখারী ও মুসলিম ওবাদাহ ইবনুস সামেত হতে বর্ণনা করেছেন। এ ছাড়া রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম সালাতে ক্ৰটিকারী ব্যক্তিকে প্রথম রাকাআতে সূরা ফাতিহা পাঠ করার নির্দেশ দেন। অতঃপর তিনি তাকে তার সব সালাতে তা পাঠ করার নির্দেশ দেন। কিন্তু ইমামের পিছনে ছাড়া এ বর্ধিত অংশটুকুর সমর্থনে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর অন্য বাণী হতে প্রমাণ মিলেঃمن كان له إمام فقراءة الإمام له قراءة `যে ব্যক্তির ইমাম থাকবে ইমামের কিরাআত তার কিরাআত হিসাবে গণ্য হবে।` এটি আমাদের নিকটে সহীহ সূত্রের সংখ্যা অনেক হওয়ার কারণে। সেগুলো যায়লাঈ (২/৬-১১) উল্লেখ করেছেন। আমিও `আল-ইরওয়া` (নং ৪৯৩) গ্রন্থে উল্লেখ করেছি। হাদীছটির সকল সূত্রেই দুর্বলতা রয়েছে। কিন্তু সূত্রগুলো সংখ্যায় অনেক হওয়ায় তা মোচনযোগ্য। মুরসাল হিসাবে সহীহ সূত্রে আব্দুল্লাহ ইবনু শাদ্দাদ হতে বর্ণিত হয়েছে।
তবে শুধুমাত্র যেহরী রাকাআত গুলোতে ইমামের পিছনে পাঠ করবে না। সিররীগুলোতে পাঠ করতেই হবে। কারণ সিররীগুলোতে ইমামের কিরা'আত তার পিছনের ব্যক্তির কিরা'আত হিসাবে গণ্য হবে না, তা শুনতে না পারা এবং তার দ্বারা কোন উপকারিতা না পাওয়ার কারণে। এটিই ইমাম মালেক ও আহমাদ সহ অন্য বিদ্বানদের মত। সম্ভবত এটিই বেশী ইনসাফ ভিত্তিক কথা। যেমনটি ইবনু তাইমিয়্যাহ “আল-ফাতাওয়া” গ্রন্থে বলেছেন।
` أسست السموات السبع والأرضون السبع على (قل هو الله أحد) `.
موضوع.
رواه أبو الحسن الخلعي في ` الفوائد ` (53 / 2) والدينوري في ` المجالسة ` (36 / 3 / 1) عن موسى بن محمد بن عطاء قال: حدثنا شهاب بن خراش الحوشبي قال: سمعت قتادة يقول: حدثني أنس بن مالك به مرفوعا. قلت: وهذا إسناد موضوع، موسى بن محمد بهذا هو الدمياطي المقدسي قال ابن أبي حاتم في ` الجرح والتعديل ` (4 / 1 / 161) : ` قال أبي كان يكذب ويأتي بالأباطيل، وقال موسى بن سهل الرملي: أشهد عليه أنه كان يكذب، وقال أبو زرعة: كان يكذب `. وقال ابن حبان (2 / 241 - 242) : ` كان يضع الحديث على الثقات، ويروي ما لا أصل له عن الأثبات `. وقال العقيلي (ص 410) : ` يحدث عن الثقات بالبواطيل والموضوعات `. وبالجملة فهو ممن اتفقت كلمات الأئمة على تكذيبه واطراح حديثه، ولذلك قال الذهبي: إنه أحد التلفاء. ثم نقل تكذيب أبي زرعة وأبي حاتم له وقول ابن حبان فيه. ثم ذكر له أحاديث موضوعة هذا منها، ومع ذلك كله ووضوح حال الرجل لم يستحي السيوطي فأورد له هذا الحديث في ` الجامع الصغير ` الذي صانه بزعمه عما تفرد به كذاب أو وضاع! وقد أورده من رواية تمام عن أنس. وتعقبه المناوي بأنه فيه الدمياطي هذا ونقل التكذيب المذكور عن أبي زرعة وأبي حاتم. ومما يدل على كذبه أن الحديث رواه ابن الضريس في ` فضائل القرآن ` (3 / 110 / 1) من
طريق آخر عن كعب الأحبار من قوله، فرفعه هذا الكذاب بإسناد من عنده ألصقه به! ومن موضوعات هذا الكذاب: ` الجنة تحت أقدام الأمهات، من شئن أدخلن، ومن شئن أخرجن `.
৫৯২। সাত আসমান এবং সাত যমীনকে কুল হুওয়াল্লাহু আহাদ-এর উপর প্রতিষ্ঠা করা হয়েছে।
হাদীছটি জাল।
আবুল হাসান আল-খালঈ `আল-ফাওয়ায়েদ` (২/৫৩) গ্রন্থে এবং আদ-দায়নূরী `আল-মুজালাসা` (৩৬/৩/১) গ্রন্থে মূসা ইবনু মুহাম্মাদ হতে তিনি শিহাব ইবনু খিরাশ আল-হাওশাবী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি বানোয়াট। মূসা ইবনু মুহাম্মাদ সম্পর্কে ইবনু আবী হাতিম “আল-জারহু ওয়াত-তা'দীল” (৪/১/১৬১) গ্রন্থে বলেনঃ আমার পিতা বলেছেনঃ তিনি মিথ্যা বলতেন এবং বাতিলগুলো বর্ণনা করতেন। মূসা ইবনু সাহাল আর-রামালী বলেনঃ আমি সাক্ষ্য দিচ্ছি যে, তিনি মিথ্যা বলতেন। আবু যুর'আহও বলেনঃ তিনি মিথ্যা বলতেন।
ইবনু হিব্বান (২/২৪১-২৪২) বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উপর হাদীছ জাল করতেন। যার কোন ভিত্তি নেই তিনি তা নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে বর্ণনা করতেন। উকায়লী (পূঃ ৪১০) বলেনঃ তিনি নির্ভরশীলদের থেকে বাতিল এবং বানোয়াট হাদীছ বর্ণনা করেন। মোটকথা তার হাদীছ বানোয়াট।
` الجنة تحت أقدام الأمهات، من شئن أدخلن، ومن شئن أخرجن `.
موضوع.
رواه ابن عدي (325 / 1) والعقيلي في ` الضعفاء ` عن موسى بن محمد بن عطاء: حدثنا أبو المليح حدثنا ميمون عن ابن عباس مرفوعا. وقال العقيلي: ` هذا منكر `. نقله الحافظ في ترجمة ` موسى بن عطاء ` وهو كذاب كما سبق بيانه في الذي قبله. والشطر الأول من الحديث له طريق آخر، رواه أبو بكر الشافعي في ` الرباعيات ` (2 / 25 / 1) وأبو الشيخ في ` الفوائد ` وفي ` التاريخ ` (ص 253) والثعلبي في ` تفسيره ` (3 / 53 / 1) والقضاعي (2 / 2 / 1) والدولابي (2 / 138) عن منصور بن المهاجر عن أبي النضر الأبار عن أنس مرفوعا به. ومن هذا الوجه رواه الخطيب في ` الجامع ` كما في ` فيض القدير ` للمناوي وقال: ` قال ابن طاهر: ومنصور وأبو النضر لا يعرفان، والحديث منكر، انتهى. فقول العامري في شرحه: ` حسن ` غير حسن `. ويغني عن هذا حديث معاوية بن جاهمة أنه جاء النبي صلى الله عليه وسلم فقال: يا رسول الله أردت أن
أغزووقد جئت أستشيرك؟ فقال: هل لك أم؟ قال: نعم. قال: فالزمها فإن الجنة تحت رجليها. رواه النسائي (2 / 54) ، وغيره كالطبراني (1 / 225 / 2) . وسنده حسن إن شاء الله، وصححه الحاكم (4 / 151) ، ووافقه الذهبي، وأقره المنذري (3 / 214) .
৫৯৩। মায়েদের পায়ের নিচে জান্নাত। যাকে ইচ্ছা প্রবেশ করাবে আর যাকে ইচ্ছা বের করে দিবে।
হাদীছটি জাল।
হাদীছটি ইবনু আদী (১/৩২৫) এবং উকায়লী `আয-যোয়াফা` গ্রন্থে মূসা ইবনু মুহাম্মাদ হতে তিনি মায়মূন হতে ... বর্ণনা করেছেন।
উকায়লী বলেনঃ এটি মুনকার। এই মূসা সম্পর্কে পূর্বের হাদীছে আলোচনা করা হয়েছে। তিনি মিথ্যুক ।
এরূপ বানোয়াট হাদীছ হতে আমাদেরকে নিরাপদে রাখতে পারে মুয়াবিয়া ইবনু জাহেমার হাদীছ। তিনি রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট আসলেন অতঃপর বললেনঃ হে আল্লাহর রাসূল! আমি যুদ্ধ করার ইচ্ছা পোষণ করছি, এ জন্যই আপনার নিকট পরামর্শ করতে এসেছি? তিনি বললেনঃ তোমার মা আছে কি? সে বলল হ্যাঁ। তিনি বললেনঃ তুমি তার খেদমাতে ব্যস্ত থাক, কারণ তার দুই পায়ের নিচে জগন্নাত।
হাদীছটি নাসাঈ (২/৫৪) ও অন্য বিদ্বানগণ যেমন তাবারানী (১/২২৫/২) বর্ণনা করেছেন। এর সনদটি হাসান। এটিকে হাকিম (৪/১৫১) সহীহ বলেছেন। যাহাবী তার সাথে ঐকমত্য পোষণ করেছেন। মুনযেরাও (৩/২১৪) তাকে সমর্থন করেছেন।
` هدية الله إلى المؤمن السائل على بابه `.
موضوع.
رواه تمام في ` الفوائد ` (9 / 167 / 2) والضياء في ` المنتقى من مسموعاته بمرو` (62 / 2) عن أبي أيوب سليمان بن سلمة الخبائري: حدثنا سعيد بن موسى (وقال الضياء: ابن زيد الأزدي) : حدثنا مالك عن نافع عن ابن عمر مرفوعا. وعزاه السيوطي في ` الجامع ` للخطيب فقط في ` رواة مالك ` عن ابن عمر، وتعقبه المناوي بأن الخطيب قال: ` وسعيد مجهول، والخبائري مشهور بالضعف `. قال المناوي: ` قال في ` الميزان ` قلت: هذا موضوع، وسعيد هالك. اهـ. وأعاده في محل آخر وقال: هذا كذب. اهـ. وقال ابن الجوزي: حديث لا يصح، وسعيد بن موسى اتهمه ابن حبان بالوضع `.
قلت: ولم يتفرد به سعيد بن زيد بل تابعه عند تمام سعيد بن أبي مريم، لكن الراوي عنه عبد السلام بن محمد الأموي قال الدارقطني: ` ضعيف جدا ` وقال: ` منكر الحديث `. وقال الخطيب: ` صاحب مناكير `. قلت: ولعله أراد أن يقول: ` سعيد بن زيد ` فقال: ` سعيد بن أبي مريم ` خطأ، وابن أبي مريم ثقة بخلاف الأول. قلت: ويحتمل أن ذلك من وهم أو وضع الخبائري، فقد رأيت ابن حبان أورد الحديث في ` الضعفاء ` (1 / 324) من طريقه قال: حدثنا سعيد بن موسى عن مالك به، وساق له حديثا آخر وقال: ` لست أدري وضعه سعيد بن موسى أوسليمان بن سلمة، لأن الخبر في نفسه موضوع `. وتابعه أيضا موسى بن محمد الدمياطي وهو كذاب كما سبق قبل حديثين، رواه ابن عدي كما في ` الميزان ` وقال: ` هذا كذب ` وأقره الحافظ في ` اللسان `. ومن طريقه رواه القضاعي في ` مسند الشهاب ` (5 / 2 / 3) وأبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (2 / 135) .
৫৯৪। মুমিনের দরযার নিকট সাহায্য প্রার্থী হচ্ছে আল্লাহর হাদীয়া।
হাদীছটি জাল।
হাদীছটি তাম্মাম “আল-ফাওয়ায়েদ” (৯/১৬৭/২) গ্রন্থে এবং যিয়া `আল-মুন্তাকা মিন মাসমূয়াতিহি বেমারু` (২/৬২) গ্রন্থে আবু আইউব সুলায়মান ইবনু সালামা আল-খাবায়ের হতে তিনি সাঈদ ইবনু মূসা হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আল-খাতীব বলেনঃ সাঈদ মাজহুল। আর আল-খাবায়ের প্রসিদ্ধ দুর্বল। মানবী বলেন, যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে বলেছেনঃ এটি বানোয়াট আর সাঈদ হালেক (ধ্বংস প্রাপ্ত)। তিনি অন্য স্থানে বলেছেনঃ এটি মিথ্যা। ইবনুল জাওয়ী বলেছেনঃ হাদীছটি সহীহ নয়। সাঈদ ইবনু মূসাকে ইবনু হিব্বান জাল করার দোষে দোষী করেছেন ।
হাদীছটির অন্য সূত্র হতে মুতাবায়াত (সমর্থক হাদীছ) পাওয়া যায়। কিন্তু কোনটিই বানোয়াটের সীমা হতে হাদীছটিকে বের করে আনতে পারেনি
` إذا مدح الفاسق غضب الرب واهتز لذلك العرش `.
منكر.
رواه أبو الشيخ في ` العوالي ` (32 / 1) والخطيب في ` تاريخه ` (7 / 298 و8 / 428) من طريق أبي خلف خادم أنس عن أنس بن مالك مرفوعا. ومن هذا الوجه رواه ابن أبي الدنيا في ` ذم الغيبة ` كما ذكره المناوي وقال: ` أبو خلف قال الذهبي: قال يحيى: كذاب، وقال أبو حاتم: منكر الحديث. وقال ابن حجر في ` الفتح `: سنده ضعيف. (قال المناوي) : ورواه ابن عدي عن بريدة، قال العراقي: وسنده ضعيف. وفي ` الميزان `: خبر منكر `.
৫৯৫। যখন কোন ফাসেক ব্যক্তির প্রশংসা করা হয় তখন প্রতিপালক (আল্লাহ) রাগাম্বিত হন। আর এ কারণে আরশ কেঁপে উঠে।
হাদীছটি মুনকার।
এটি আবুশ শাইখ “আল-আওয়ালী” (১/৩২) গ্রন্থে এবং আল-খাতীব তার `তারীখ` (৭/২৯৮ ও ৮/৪২৮) গ্রন্থে আনাসের খাদেম আবু খালাফ সূত্রে আনাস ইবনু মালেক হতে মারফু হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
এ সূত্রেই ইবনু আবিদ দুনিয়া `যামুল গীবাহ` গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। যেমনটি মানবী উল্লেখ করে বলেছেনঃ হাফিয যাহাবী আবু খালাফ সম্পর্কে বলেন, ইয়াহইয়া বলেছেনঃ তিনি মিথ্যুক। আবু হাতিম বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। ইবনু হাজার `ফাতহুল বারী` গ্রন্থে বলেনঃ সনদটি দুর্বল। ইবনু আদী বুরায়দা হতে বর্ণনা করেছেন। হাফিয ইরাকী বলেনঃ তার সনদটি দুর্বল। `আল-মীযান` গ্রন্থে এসেছে হাদীছটি মুনকার।
` الناس كأسنان المشط، وإنما يتفاضلون بالعافية، والمرء كثير بأخيه يرفده ويحمله، ولا خير في صحبة من لا يرى لك مثل ما ترى له `.
ضعيف جدا.
رواه ابن عدي (153 / 2) عن المسيب بن واضح: حدثنا سليمان بن عمرو: حدثنا إسحاق بن عبد الله بن أبي طلحة عن أنس بن مالك مرفوعا وقال: ` وهذا الحديث وضعه سليمان على إسحاق `.
ومن طريقه رواه القضاعي (2 / 9 / 1) وابن الجوزي في ` الموضوعات ` (3 / 80) من طريق ابن عدي، وتعقبه السيوطي في ` اللآلي ` (2 / 290) بأن له طريقا أخرى. قلت: أخرجه الدولابي (1 / 168) وابن حبان في ` المجروحين ` (1 / 188 - 189) والخطابي في ` غريب الحديث ` (119 / 2) وابن عساكر (2 / 119 / و3 / 205 / 2) وأبو نعيم ببعضه (10 / 25) من طرق عن بكار بن شعيب أبي خزيمة العبدي قال: حدثنا عبد العزيز ابن أبي حازم عن أبيه عن سهل بن سعد مرفوعا به.
وهذا سند ضعيف جدا بكار بن شعيب قال ابن حبان: ` يروي عن الثقات ما ليس من حديثهم، لا يجوز الاحتجاج به `. ثم ساق له هذا الحديث منكرا له عليه كما قال الحافظ في ` اللسان ` وقال الجوزجاني: ` وهو منكر جدا `.
لكن قال السيوطي: ` وقد توبع بكار فقال ابن لال: حدثنا محمد بن أحمد بن يعقوب: حدثنا إبراهيم بن فهد: حدثنا محمد بن موسى حدثنا غياث بن عبد المجيد عن عمر بن سليم عن أبي حازم به.
قلت: وسكت عليه السيوطي، وهذه متابعة قوية لولا أن الطريق إليها مظلمة، فإن غياث بن عبد الحميد مجهول كما قال العقيلي: ومحمد بن موسى لم أعرفه، وفي طبقته بهذا الاسم جماعة. وإبراهيم بن فهد قال ابن عدي: ` سائر أحاديثه مناكير، وهو مظلم الأمر `. وقال أبو الشيخ: ` قال البردعي: ما رأيت أكذب منه `.
قال أبو الشيخ: ` وكان مشايخنا مضعفونه `. قلت: فمثل هذا الطريق لا يستشهد به لشدة ضعفه. وقد وجدت له طريقا آخر عن سهل بن سعد، أخرجه أبو الشيخ في ` أحاديث أبي الزبير عن غير جابر ` (11 / 2) عن سهل بن عامر البجلي حدثنا ميمون بن عمرو البصري عن أبي الزبير عن سهل بن سعد مرفوعا. ولكنه واه جدا، سهل بن عامر هذا قال ابن أبي حاتم في ` الجرح والتعديل ` (2 / 1 / 202) : ` قال أبي: وهو ضعيف، روى أحاديث بواطيل وكان يفتعل الأحاديث `. وفي معناه قول البخاري: ` منكر الحديث `.
وأما ابن حبان فيبدو أنه لم يتبين له حقيقة أمره فلذلك أورده في ` الثقات `! ووجدت له شاهدين آخرين متصل ومرسل.
أما المتصل فأخرجه ابن عساكر (3 / 205 / 2) عن بشر بن عون: حدثنا بكار بن تميم عن مكحول عن أبي أمامة مرفوعا. قلت: وهذا موضوع بكار بن تميم مجهول، والآفة بشر بن عون قال ابن حبان (1 / 181) : ` له نسخة عن بكار بن تميم عن مكحول نحو مائة حديث كلها موضوعة `.
وأما المرسل فأخرجه الخطيب (7 / 57) من طريق بشر بن غياث عن البراء بن عبد الله الغنوي عن الحسن قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم. وهذا سند ضعيف جدا، بشر بن غياث، قال الذهبي: ` مبتدع ضال لا ينبغي أن يروى عنه ولا كرامة `. ` وفي الميزان `: ` قال الأزدي: زائغ صاحب رأي، لا يقبل له قول، ولا يخرج حديثه ولا كرامة إذا كان عندنا على غير طريقة الإسلام `. ونقل عنه أنه كان ينكر عذاب القبر وسؤال الملكين والصراط والميزان. والبراء بن عبد الله الغنوي ضعفه أحمد وابن معين وغيرهما.
والحسن هو البصري فهو مرسل، وعلى إرساله فالإسناد إليه غير صحيح. وبالجملة فالحديث ضعيف جدا، وليس في كل هذه الطرق ما يأخذ بعضده. والله أعلم.
ثم وجدت له طريقا ثانيا عن أنس، رواه ابن شاذان الأزجي في ` حديثه ` (2 / 105 / 2) عن رواد بن الجراح عن أبي سعد الساعدي عن أنس بن مالك مرفوعا. وهذا سند تالف! أبو سعد هذا قال الذهبي: ` مجهول حدث عنه رواد بن الجراح وليس بعمدة، وقد ذكره علي بن أحمد السلماني في من يضع الحديث `.
৫৯৬। মানুষ হচ্ছে চিরুণীর দাতের ন্যায়। ক্ষমা করার দ্বারা পরস্পরের মাঝে প্রাধান্য বিস্তার করে। বহু মানুষ আছে যে তার ভাইকে কিছু দান করে এবং তার জন্য কষ্ট করে। কিন্তু সেই ব্যক্তির সাথে সম্পর্ক গড়ার মাঝে কোন কল্যাণ নিহিত নেই যে ব্যক্তির জন্য তুমি যা পছন্দ কর সে তোমার জন্য সেরূপ করে না।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি ইবনু আদী (২/১৫৩) মুসাইয়্যাব ইবনু ওয়াযেহ হতে তিনি সুলায়মান ইবনু আমর হতে তিনি ইসহাক ইবনু আবদিল্লাহ হতে ... বর্ণনা করে বলেছেনঃ এ হাদীছটি সুলায়মান ইসহাকের উপর জাল করেছেন। তার সূত্রেই কাযাঈ (২/৯/১) এবং ইবনুল জাওয়ী `আল-মাওযু'আত` (৩/৮০) গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। সুয়ূতী “আল-লাআলী” (২/২৯০) গ্রন্থে তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ তার অন্য সূত্রও রয়েছে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সেটি দুলাবী (১/১৬৮), ইবনু হিব্বান `আল-মাজরূহীন` (১/১৮৮-১৮৯) গ্রন্থে, আল-খাত্তাবী `গারীবুল হাদীছ` (২/১১৯) গ্রন্থে, ইবনু আসাকির (২/১১৯, ৩/২০৫/২) এবং আবু নোয়াইম (২/১০) বিভিন্ন সূত্রে বাক্কার ইবনু শুয়াইব হতে ... বর্ণনা করেছেন।
এ সনদটি নিতান্তই দুর্বল। কারণ এই বাক্কার ইবনু শুয়াইব সম্পর্কে ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে যা তাদের হাদীছ নয় তা বর্ণনা করেছেন। তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করা জাযেয় নয়।
অতঃপর তিনি তার এ মুনকার হাদীছটি উল্লেখ করেছেন, যেমনটি হাফিয ইবনু হাজার “আল-লিসান” গ্রন্থে বলেছেন। জুযজানী বলেনঃ হাদীছটি খুবই মুনকার।
এ ছাড়াও হাদীছটি আরো বহু সূত্রে বর্ণিত হয়েছে। কিন্তু প্রতিটির সনদে বেশী দুর্বলতা থাকার কারণে নিতান্তই দুর্বল-এর পর্যায় হতে বের করে আনা সম্ভব হয়নি।
` نعم، خصال أربع: الدعاء لهما، والاستغفار لهما، وإنفاذ وعدهما، وصلة الرحم التي لا رحم لك إلا من قبلهما. قاله لمن سأله: هل بقي من بر أبو ي شيء بعد موتهما أبرهما به؟ `.
ضعيف.
رواه أبو بكر ابن أبي شيبة في ` الأدب ` (1 / 151 / 1 - 2) : حدثنا الفضيل بن دكين: حدثنا ابن الغسيل: حدثني أسيد بن علي مولى أبي أسيد عن أبيه أنه سمع أبا أسيد قال: بينما أنا جالس عند النبي صلى الله عليه وسلم
أتاه رجل من بني سلمة فقال: يا رسول الله هل بقي.... الحديث. ورواه الروياني في ` مسنده ` (251 / 1) والخطيب في ` الموضح ` (1 / 41 - 42) والواحدي (153 / 2) وأبو عبد الرحمن السلمي في ` آداب الصحبة ` (ص 41) من طرق أخرى عن عبد الرحمن بن الغسيل به.
وقد تابعه موسى بن يعقوب عن أسيد به إلا أنه قال: ` أسيد ` بالضم. أخرجه الخطيب وأشار إلى أنه خطأ وأن الصواب ` أسيد ` كما رواه ابن الغسيل. قلت: وهذا إسناد ضعيف، رجاله ثقات كلهم، غير علي مولى أبي أسيد لم يوثقه غير ابن حبان، ولم يرو عنه غير ابنه أسيد، ولهذا قال الذهبي:
` لا يعرف `، وأشار إلى ذلك الحافظ بقوله: ` مقبول `. وعنه رواه أبو داود (5142) وابن ماجة (3664) وأحمد (3 / 497 - 498) وابن حبان (2030) .
৫৯৭। হ্যাঁ; চারটি খাসলত রয়েছে। উভয়ের জন্য দোআ করা। উভয়ের জন্য ক্ষমা প্রার্থনা করা। উভয়ের অঙ্গীকার বাস্তবায়ন করা। উভয়ের পক্ষ হতে তোমার একমাত্র আত্মীয়তার বন্ধনকে রক্ষা করা। তিনি উক্ত বাক্যগুলো সেই ব্যক্তিকে বলেছিলেন, যে তাকে প্রশ্ন করেছিলঃ আমার পিতা-মাতার মৃত্যুর পর তাদের দু'জনের জন্য সদ্ব্যবহার মূলক কিছু করার আছে কী যা দ্বারা তাদের দু'জনের জন্য কল্যাণকর কিছু করতে পারি?
হাদীছটি দুর্বল।
এটি আবু বাকর ইবনু আবী শায়বাহ `আল-আদাব` (১/১৫১/১-২) গ্রন্থে ফুযায়েল ইবনু দুকায়েন হতে তিনি ইবনুল গাসীল হতে তিনি আসীদ ইবনু আলী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
এ ছাড়া রুওয়ানী তার `মুসনাদ` (১/২৫১) গ্রন্থে, আল-খাতীব “আল-মুওয়াযিযহ` (১/৪১-৪২) গ্রন্থে, আল-ওয়াহেদী (২/১৫৩) এবং আবু আবদির রহমান সুলামী `আদাবুস সুহবাহ` (পৃঃ ৪১) গ্রন্থে অন্য সূত্রে আব্দুর রহমান ইবনুল গাসীল হতে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। আলীকে ইবনু হিব্বান ছাড়া অন্য কেউ নির্ভরযোগ্য বলেননি। আর আলীর ছেলে আসীদ ছাড়া তার থেকে অন্য কেউ হাদীছটি বর্ণনা করেননি। এ কারণেই ইমাম যাহাবী বলেনঃ তাকে চেনা যায় না। হাফিয ইবনু হাজার মাকবুল বলে সে দিকেই ইঙ্গিত করেছেন। তার থেকেই হাদীছটি আবু দাউদ (৫১৪২), ইবনু মাজাহ (৩৬৬৪), আহমাদ (৩/৪৯৭-৪৯৮) ও ইবনু হিব্বান (২০৩০) বর্ণনা করেছেন।
` لما قدم المدينة جعل النساء والصبيان والولائد يقلن:
طلع البدر علينا من ثنيات الوداع
وجب الشكر علينا ما دعا لله داع `.
ضعيف.
رواه أبو الحسن الخلعي في ` الفوائد ` (59 / 2) وكذا البيهقي في ` دلائل النبوة ` (2 / 233 - ط) عن الفضل بن الحباب قال: سمعت عبد الله بن محمد بن عائشة يقول فذكره. وهذا إسناد ضعيف رجاله ثقات، لكنه معضل سقط من إسناده ثلاثة رواة أو أكثر، فإن ابن عائشة هذا من شيوخ أحمد وقد أرسله.
وبذلك أعله الحافظ العراقي في ` تخريج الإحياء ` (2 / 244) . ثم قال البيهقي كما في تاريخ ابن كثير (5 / 23) : ` وهذا يذكره علماؤنا عند مقدمه المدينة من مكة لا أنه لما قدم المدينة من ثنيات الوداع عند مقدمه من تبوك `. وهذا الذي حكاه البيهقي عن العلماء جزم به ابن الجوزي في ` تلبيس إبليس ` (ص 251 تحقيق صاحبي الأستاذ خير الدين وانلي) ، لكن رده المحقق ابن القيم فقال في ` الزاد ` (3 / 13) : وهو وهم ظاهر لأن ` ثنيات الوداع ` إنما هي ناحية الشام لا يراها القادم من مكة إلى المدينة ولا يمر بها إلا إذا توجه إلى الشام `.
ومع هذا فلا يزال الناس يرو ن خلاف هذا التحقيق، على أن القصة برمتها غير ثابتة كما رأيت!
(تنبيه) : أورد الغزالي هذه القصة بزيادة: ` بالدف والألحان ` ولا أصل لها كما أشار لذلك الحافظ العراقي بقوله: ` وليس فيه ذكر للدف والألحان `. وقد اغتر بهذه الزيادة بعضهم فأورد القصة بها، مستدلا على جواز الأناشيد النبوية المعروفة اليوم! فيقال له: ` أثبت العرش ثم انقش `! على أنه لوصحت القصة لما كان فيها حجة على ما ذهبوا إليه كما سبقت الإشارة لهذا عند الحديث (579) فأغنى عن الإعادة.
৫৯৮। তিনি [নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম] যখন মদীনায় আগমন করলেন তখন মহিলা এবং শিশু সন্তানেরা বলতে লাগলোঃ আমাদের উপর সানাইয়াতুল ওয়াদার দিক হতে চন্দ্র উদিত হয়েছে। আল্লাহর সম্ভষ্টির জন্য দাওয়াত দানকারী যে দাওয়াত দিচ্ছে তার জন্য আমাদের শুকরিয়া আদায় করা উচিত।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি আবুল হাসান আল-খাল’ঈ `আল-ফাওয়ায়েদ` (২/৫৯) গ্রন্থে, অনুরূপভাবে বাইহাকী `দালায়েলুল নুবওয়াহ` (২/২৩৩-ত্ব) গ্রন্থে ফাযল ইবনুল হুবাব হতে তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু মুহাম্মাদ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
এ সনদটি দুর্বল। বর্ণনাকারীগণ নির্ভরযোগ্য। কিন্তু সনদটি মু'যাল। এর সনদ হতে তিন বা ততোধিক বর্ণনাকারীকে ফেলে দেয়া হয়েছে। (এরূপ সনদকেই মুযাল বলা হয়)। বাইহাকী বলেন যেমনটি “তারীখু ইবনু কাসীর” (৫/২৩) গ্রন্থে এসেছেঃ এটি আমাদের আলেমগণ নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যখন মক্কা হতে মদীনায় আগমন করেন তখনকার ঘটনা হিসাবে উল্লেখ করেছেন। তাবূক হতে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ফিরে আসার সময় সানিয়াতুল ওয়াদা হতে মদীনায় প্রবেশের সময়কার ঘটনা হিসাবে নয়।
আলেমদের উদ্ধৃতিতে বাইহাকী এরূপই বর্ণনা করেছেন। ইবনুল জাওয়ী `তালবীসু ইবলীস` (পৃঃ ২৫১) গ্রন্থে দৃঢ়তার সাথে তা উল্লেখ করেছেন।
কিন্তু ইবনুল কাইয়্যিম তার প্রতিবাদ করে (৩/১৩) বলেছেনঃ সেটি ধারণা মাত্র। কারণ সানিয়াতুল ওয়াদা শাম দেশের দিকে। মক্কা হতে মদীনা আগমনকারী ব্যক্তি সে স্থানকে দেখতে পায় না। শাম দেশ ভ্রমণকারী ছাড়া তাকে অন্য কেউ অতিক্রম করে না। তা সত্ত্বেও লোকেরা উক্ত ব্যাখ্যার বিপরীত বলে থাকে। ঘটনাটি আসলে সাব্যস্তই হয়নি!
নির্দেশনাঃ গাযালী এ ঘটনাটি একটু বাড়িয়ে বলেছেনঃ তিনি বলেছেন যে, দফ বাজিয়ে এবং সূর করে তারা উক্ত কবিতা পাঠ করেছিল। অথচ এর কোন ভিত্তি নেই। যেমনটি হাফিয ইরাকী ইঙ্গিত দিয়েছেন
` إذا مات الرجل منكم فدفنتموه فليقم أحدكم عند رأسه، فليقل: يا فلان ابن فلانة! فإنه سيسمع، فليقل: يا فلان ابن فلانة! فإنه سيستوي قاعدا، فليقل: يا فلان ابن فلانة، فإنه سيقول: أرشدني أرشدني رحمك الله، فليقل: اذكر ما خرجت عليه من دار الدنيا: شهادة أن لا إله إلا الله وحده لا شريك له، وأن محمدا عبده ورسوله، وأن الساعة آتية لا ريب فيها، وأن الله يبعث من في القبور، فإن منكرا ونكيرا يأخذ كل واحد منهما بيد صاحبه ويقول له: ما تصنع عند رجل قد لقن حجته؟ فيكون الله حجيجهما دونه `.
منكر.
أخرجه القاضي الخلعي في ` الفوائد ` (55 / 2) عن أبي الدرداء هاشم بن محمد الأنصاري: حدثنا عتبة بن السكن عن أبي زكريا عن جابر بن سعيد الأزدي قال: ` دخلت على أبي أمامة الباهلي وهو في النزع، فقال لي: يا أبا سعيد إذا أنا مت فاصنعوا بي كما أمر رسول الله صلى الله عليه وسلم أن نصنع بموتانا فإنه قال: فذكره. قلت: وهذا إسناد ضعيف جدا، لم أعرف أحد منهم غير عتبة بن السكن، قال الدارقطني: ` متروك الحديث ` وقال البيهقي: ` واه منسوب إلى الوضع `. والحديث أورده الهيثمي (3 / 45) عن سعيد بن عبد الله الأزدي قال:
شهدت أبا أمامة … الحديث.
وقال: ` رواه الطبراني في ` الكبير ` وفي إسناده جماعة لم أعرفهم `.
قلت: فاختلف في اسم الراوي عن أبي أمامة ففي رواية الخلعي أنه جابر بن سعيد الأزدي وفي رواية الطبراني أنه سعيد بن عبد الله الأزدي، وهذا أورده ابن أبي حاتم (2 / 1 / 76) فقال: ` سعيد الأزدي ` لم ينسبه لأبيه، ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا، فهو في عداد المجهولين، فالعجب من قول الحافظ في ` التلخيص ` (5 / 243) بعد أن عزاه للطبراني: ` وإسناده صالح، وقد قواه الضياء في ` أحكامه ` وأخرجه عبد العزيز في ` الشافي `. والراوي عن أبي أمامة سعيد الأزدي بيض له ابن أبي حاتم `!
فأنى لهذا الإسناد الصلاح والقوة وفيه هذا الرجل المجهول؟! بل فيه جماعة آخرون مثله في الجهالة كما يشير لذلك كلام الهيثمي السابق، وهذا كله إذا لم يكن في إسناد الطبراني عتبة بن السكن المتهم، وإلا فقد سقط الإسناد بسببه من أصله! وقد قال النووي في ` المجموع ` (5 / 304) بعد أن عزاه للطبراني: وإسناده ضعيف.
وقال ابن الصلاح: ليس إسناده بالقائم `. وكذلك ضعفه الحافظ العراقي في ` تخريج الإحياء ` (4 / 420) وقال ابن القيم في ` الزاد ` (1 / 206) : ` لا يصح رفعه `.
واعلم أنه ليس للحديث ما يشهد له، وكل ما ذكره البعض إنما هو أثر موقوف على بعض التابعين الشاميين لا يصلح شاهدا للمرفوع بل هو يعله، وينزل به من الرفع إلى الوقف، وفي كلمة ابن القيم السابقة ما يشير إلى ما ذكرته عند التأمل.
على أنه شاهد قاصر إذ غاية ما فيه: ` أنهم كانوا يستحبون أن يقال للميت عند قبره: يا فلان قل لا إله إلا الله، قل أشهد أن لا إله إلا الله (ثلاث مرات) ، قل: ربي الله، وديني الإسلام، ونبي محمد `. فأين فيه الشهادة على بقية الجمل المذكورة في الحديث مثل ` ابن فلانة ` و` أرشدني … ` وقول الملكين: ` ما نصنع عند رجل ` … `.
وجملة القول أن الحديث منكر عندي إن لم يكن موضوعا. وقد قال الصنعاني في ` سبل السلام ` (2 / 161) : ` ويتحصل من كلام أئمة التحقيق أنه حديث ضعيف، والعمل به بدعة ولا يغتر بكثرة من يفعله `. ولا يرد هنا ما اشتهر من القول بالعمل بالحديث الضعيف في فضائل الأعمال، فإن هذا محله فيما ثبت مشروعيته بالكتاب أو السنة الصحيحة، أما ما ليس كذلك فلا يجوز العمل فيه بالحديث الضعيف، لأنه تشريع ولا يجوز ذلك بالحديث الضعيف، لأنه لا يفيد إلا الظن المرجوح اتفاقا فكيف يجوز العمل بمثله؟! فليتنبه لهذا من أراد السلامة في دينه، فإن الكثيرين عنه غافلون. نسأل الله تعالى الهداية والتوفيق.
৫৯৯। তোমাদের কোন ব্যক্তি মারা গেলে, যখন তাকে দাফন করে ফেল তখন তোমাদের একজন তার মাথার নিকট দাড়িয়ে বলবেঃ হে উমুকের ছেলে উমুক কারণ অচিরেই শ্রবণ করবে। সে যেন বলেঃ হে উমুকের ছেলে উমুক! কারণ সে অচিরেই উঠে বসবে। সে যেন বলেঃ হে উমুকের ছেলে উমুক। কারণ সে অচিরেই বলবেঃ তুমি আমাকে সঠিক পথ দেখাও তুমি আমাকে সঠিক পথ দেখাও আল্লাহ তোমাকে দয়া করুন। সে যেন বলেঃ তুমি দুনিয়ার ঘর হতে যা নিয়ে বেরিয়ে এসেছ তুমি তা স্মরণ কর। সত্যিকার অর্থে আল্লাহ ছাড়া কোন মা’বুদ নেই। তিনি এক তাঁর কোন শরীক নেই এবং মুহাম্মাদ তার বান্দা ও তার রাসূল। কিয়ামত আগত তাতে কোন সন্দেহ নেই। আল্লাহ কবরবাসীকে উঠিয়ে আনবেন। কারণ মুনকার এবং নাকীর পরস্পরের হাত ধরে তাকে বলবেঃ কি করব সেই ব্যক্তির নিকট যাকে তার প্রমাণাদির তালকীন (শিক্ষা) দেয়া হয়েছে? ফলে তার নিকট আল্লাহ তা'আলা তাদের দু'জনের বাদানুবাদের কারণ হয়ে যাবেন।
হাদীছটি মুনকার।
এটি কাযী আল-খাল'ঈ `আল-ফাওয়ায়েদ` (২/৫৫) গ্রন্থে আবুদ দারদা হাশিম ইবনু মুহাম্মাদ আল-আনসারী হতে তিনি উতবাহ ইবনুস সাকান হতে তিনি আবু যাকারিয়া হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি নিতান্তই দুর্বল। এটির সনদের উতবা ইবনুস সাকান ব্যতীত অন্য কাউকে চিনি না। দারাকুতনী বলেনঃ মাতরূকুল হাদীছ। বাইহাকী বলেনঃ তিনি অত্যন্ত দুর্বল, তাকে জাল করার দোষে দোষী করা হয়।
হাদীছটি হায়ছামী (৩/৪৫) সাঈদ ইবনু আবদিল্লাহ আল-আযদী হতে বর্ণনা করে বলেছেনঃ এটিকে তাবারানী `আল-মুজামুল কাবীর` গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। যার সনদে একদল বর্ণনাকারী আছেন যাদেরকে আমি চিনি না।
ইমাম নাবাবী “আল-মাজমূ” (৫/৩০৪) গ্রন্থে বলেনঃ এটির সনদ দুর্বল। ইবনু সালাহ বলেনঃ সনদটি প্রতিষ্ঠিত নয়। অনুরূপভাবে হাফিয ইরাকীও “তাখরাজুল ইহইয়া” (৪/৪২০) গ্রন্থে দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। ইবনুল কাইয়্যিম “যাদুল মা'আদ` (১/২০৬) গ্রন্থে বলেনঃ মারফূ’ হিসাবে সহীহ নয়। হাদীছটির সাক্ষীমূলক কিছুই মিলে না।
মোটকথা হাদীছটি আমার নিকট জাল না হলেও মুনকার। সান'আনী “সুবুলুস সালাম” (২/১৬১) গ্রন্থে বলেনঃ ইমামদের ভাষ্য যা প্রমাণ করে তাতে এটি দুর্বল। এর উপর আমল করা বিদ'আত।
এ ছাড়া ফাযায়েলের ক্ষেত্রেও যে দুর্বল হাদীছের উপর আমল করা যাবে না এটিই সঠিক। (এ বিষয়ে প্রথম খণ্ডের ভূমিকাতে বিস্তারিত আলোচনা করা হয়েছে)।
` جبلت القلوب على حب من أحسن إليها، وبغض من أساء إليها `.
موضوع.
رواه ابن الأعرابي في ` المعجم ` (2 / 21 - 22) وابن عدي (82 / 1) وأبو موسى المدني في جزء ` من أدركه الخلال من أصحاب ابن منده ` (150 - 151) وأبو نعيم (4 / 121) والخطيب (7 / 346) والقضاعي (49 / 2) عن إسماعيل بن أبان عن الأعمش عن خيثمة عن عبد الله بن مسعود مرفوعا.
وقال أبو نعيم: ` غريب لم نكتبه إلا من هذا الوجه ` وذكر نحوه ابن عدي وزاد: ` وهو معروف عن الأعمش موقوفا `.
قلت: وإسماعيل هذا قال فيه أحمد: ` روى أحاديث موضوعة عن فطر وغيره، فتركناه `. وقال ابن حبان (1 / 116) : ` كان يضع الحديث على الثقات `. وقال أبو داود: ` كان كذابا `. ونقل المناوي عن ` لسان الميزان ` قال الأزدي: ` هو كوفي زائغ وهو الذي روى حديث جبلت القلوب، قال الأزدي: ` هذا الحديث باطل `.
قال المناوي: ورأيت بخط ابن عبد الهادي في تذكرته: قال مهنأ: سألت أحمد ويحيى عنه؟ فقالا: ليس له أصل، وهو موضوع `.
قلت: نقله أيضا ابن قدامة موفق الدين في ` المنتخب ` (10 / 195 / 2) عن مهنأ به. ومع هذا كله أورده السيوطي في ` الجامع `! وقال: ` صحح البيهقي وقفه `! قلت: الموقوف موضوع أيضا فإنه من هذه الطريق، كذلك رواه ابن حبان في ` روضة العقلاء ` (ص 255) وغيره، ولذلك قال السخاوي: ` هو باطل مرفوعا وموقوفا `.
৬০০। অন্তরগুলো সৃষ্টি করা হয়েছে যে ব্যক্তি তার সাথে ভাল আচরণ করবে তাকে ভালবাসার জন্য আর যে তার সাথে খারাপ আচরণ করবে তাকে ঘৃণা করার জন্য ।
হাদীছটি জাল।
এটিকে ইবনুল আ'রাবী `আল-মুজাম` (২/২১-২২) গ্রন্থে, ইবনু আদী (১/৮২), আবু মূসা আল-মাদীনী `মান আদরাকাহুল খালালু মিন আসহাবে ইবনে মান্দাহ` (১৫০-১৫২) গ্রন্থে, আবু নোয়াইম (৪/১২১), আল-খাতীব (৭/৩৪৬) এবং কাযাঈ ইসমাঈল ইবনু আবান হতে তিনি আমাশ হতে তিনি খায়সামা হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আবু নোয়াইম বলেনঃ এটি গারীব, আমরা একমাত্র এ সূত্রেই এটিকে লিখেছি। ইবনু আদীও অনুরূপ বলেছেন তবে একটু বেশী বলেছেনঃ এটি আমাশ হতে মওকুফ হিসাবে বর্ণিত হয়েছে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এই ইসমাঈল সম্পর্কে ইমাম আহমাদ বলেনঃ তিনি জাল হাদীছ বর্ণনা করেছেন ...। এ কারণে আমরা তাকে ছেড়ে দিয়েছি (গ্রহণ করিনি)। ইবনু হিব্বান (১/১৬১) বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উপর হাদীছ জাল করতেন। আবু দাউদ বলেনঃ তিনি মিথ্যুক ছিলেন।
মানবী “আল-লিসান” গ্রন্থ হতে নকল করেছেন, আযদী বলেনঃ এ হাদীছটি বাতিল। মানবী বলেনঃ আমি ইবনু আব্দিল হাদীর “তাযকিরা” গ্রন্থে তার হাতের লিখায় দেখেছি। মাহনা বলেনঃ আমি ইমাম আহমাদ এবং ইয়াহইয়াকে তার (ইসমাঈল) সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম, তারা উভয়েই বলেনঃ এটির কোন ভিত্তি নেই। এটি বানোয়াট।
তা সত্ত্বেও সুয়ূতী “আল-জামে” গ্রন্থে হাদীছটি উল্লেখ করে বলেছেন যে, হাদীছটিকে বাইহাকী মওকুফ হিসাবে সহীহ বলেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি মওকুফ হিসাবেও বানোয়াট। কারণ মওকুফ হিসাবেও এসব সূত্রেই এসেছে। এ কারণেই সাখাৰী বলেছেনঃ এটি মারফু’ এবং মওকুফ হিসাবেও বাতিল।