সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ
` كان الناس يعودون داود، يظنون أن به مرضا وما به إلا شدة الخوف من الله تعالى `.
موضوع.
أخرجه تمام في ` الفوائد ` (49 / 2) وعنه ابن عساكر (14 / 338 / 2) وأبو نعيم (7 / 137) وكذا ابن عساكر في ترجمة داود عليه السلام والضياء في ` الأحاديث والحكايات ` (150 / 2) عن محمد بن عبد الرحمن بن غزوان الضبي: حدثنا الأشجعي عن سفيان الثوري عن عبيد الله بن عمر عن نافع عن ابن عمر مرفوعا. وقال ابن عساكر: ` غريب جدا، وابن غزوان ضعيف `. وقد أورده السيوطي في ` الجامع ` عن ابن عساكر وحده فتعقبه المناوي بأن أبا نعيم رواه أيضا ثم قال:
` وفيه عندهما محمد بن عبد الرحمن بن غزوان، قال الذهبي: قال ابن حبان: يضع (1) ، وقال ابن عدي: متهم بالوضع `.
وقال في ` الميزان `: ` حدث بوقاحة عن مالك وشريك وضمام بن إسماعيل ببلايا، قال الدارقطني وغيره: كان يضع الحديث. وقال ابن عدي: له عن ثقات الناس بواطيل `. زاد في ` اللسان `:
(1) قلت: ولفظ ابن حبان في ` المجروحين ` (2 / 298) : ` يروي عن أبيه وغيره العجائب التي لا يشك من هذا الشأن صناعته أنها معمولة أو مقلوبة `. وقال عن شيخه ابن خزيمة: ` أنا خائف أنه كذاب `. اهـ.
` وقال ابن عدي: وهو ممن يضع الحديث. وقال الحاكم: روى عن مالك وإبراهيم بن سعد أحاديث موضوعة `. قلت: والحديث رواه عبد الله بن الإمام أحمد في ` زوائد الزهد ` (ص 88) عن سعيد بن هلال أن داود النبي كان الحديث نحوه. فهذا كما تراه موقوف ومعضل، فالظاهر أنه من الإسرائيليات. والله أعلم.
৬৪১। লোকেরা দাউদ (আঃ)-কে দেখতে যেত। তারা ধারণা করত যে প্রচণ্ড আল্লাহ ভীতিই ছিল তার অসুখ।
হাদীছটি জাল।
এটি তাম্মাম `আল-ফাওয়ায়েদ` (২/৪৯) গ্রন্থে, তার থেকে ইবনু আসাকির (১৪/৩৩৮/২) এবং আবু নোয়াইম বর্ণনা করেছেন। অনুরূপভাবে দাউদ (আঃ)-এর জীবনীতে ইবনু আসাকির এবং যিয়া `আল-আহাদীছু ওয়াল হিকায়াত` (২/১৫০) গ্রন্থে মুহাম্মাদ ইবনু আবদির রহমান ইবনে গাযওয়ান আয-যাব্বী হতে তিনি আল-আশজাঈ হতে তিনি সুফিয়ান হতে ... বর্ণনা করেছেন।
ইবনু আসাকির বলেনঃ হাদীছটি নিতান্তই গারীব এবং ইবনু গাযওয়ান দুর্বল। হাদিসটি সুয়ূতী `আল-জামে` গ্রন্থে একমাত্র ইবনু আসাকিরের বর্ণনা হতে উল্লেখ করেছেন। এ কারণে মানবী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ নোয়াইমও হাদীছটি বর্ণনা করেছেন। অতঃপর মানবী বলেনঃ তাতে মুহাম্মাদ ইবনু আবদির রহমান রয়েছেন। হাফিয যাহাবী বলেছেন, ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি হাদীছ জলিকারী। ইবনু আদী বলেনঃ তিনি জাল করার দোষে দোষী।
যাহাবী `আল-মীযান` গ্রন্থে বলেছেন, দারাকুতনী ও অন্য বিদ্বানগণ বলেনঃ তিনি হাদীছ জাল করতেন। ইবনু আদী বলেনঃ নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে তার বাতিল হাদীছ রয়েছে।
হাফিয ইবনু হাজার `আল-লিসান` গ্রন্থে বলেছেনঃ ইবনু আদী বলেনঃ তিনি হাদীছ জালকারীদের অন্তর্ভুক্ত। হাকিম বলেনঃ তিনি ইমাম মালেক এবং ইব্রাহীম ইবনু সা’আদ হতে কতিপয় জাল হাদীছ বর্ণনা করেছেন। বাহ্যিকতা প্রমাণ করছে যে, এটি ইসরাইলী বর্ণনা।
` السواك يزيد الرجل فصاحة `.
موضوع.
ابن عدي في ` الكامل ` (388 / 2) والخطيب في ` تلخيص المتشابه ` (147 / 2) من طريق أبي يعلى: أخبرنا محمد بن بحر: أخبرنا المعلى بن ميمون أخبرنا عمرو بن داود عن سنان بن سنان عن أبي هريرة مرفوعا. ورواه العقيلي في ` الضعفاء ` (277) وأبو بكر الختلي في ` جزء من حديثه ` (44 / 2) وأبو سعيد بن الأعرابي في ` المعجم ` (122 / 1) وعنه القضاعي (13 / 1) والديلمي (2 / 222) من طريق أخرى عن المعلى به. وقال العقيلي: ` روى عن سنان بن أبي سنان، كلاهما مجهول، والحديث معلول `.
وأورده ابن عدي في ترجمة المعلى، وساق له حديثين آخرين يأتيان بعده، ثم قال: ` وله غير ما ذكرت وكلها غير محفوظة، مناكير `. وفي ` الكشف `: ` قال الصغاني: وضعه ظاهر، وقال ابن الجوزي: لا أصل له `.
৬৪২ মিসওয়াক ব্যক্তির বাকপটুতা বৃদ্ধি করে।
হাদীছটি জাল।
এটি ইবনু আদী `আল-কামিল` (২/৩৮৮) গ্রন্থে, আল-খাতীব `তালখীসুল মুতাশাবেহ` (২/১৪৭) গ্রন্থে আবু ইয়ালা সূত্রে মুহাম্মাদ ইবনু বাহর হতে তিনি মুয়াল্লা ইবনু মায়মূন হতে তিনি আমর ইবনু দাউদ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
উকায়লী `আয-যোয়াফা` (২৭৭) গ্রন্থে, আবু বাকর আল-খাতালী `জুযউম মিন হাদীছ` (২/৪৪) গ্রন্থে, আবু সাঈদ ইবনুল আ'রাবী `আল-মুজাম` (১/১২২) গ্রন্থে, তার থেকে কাযাঈ (১/১৩) এবং দাইলামী (২/২২২) অন্য সূত্রে মুয়াল্লা হতে বর্ণনা করেছেন। উকায়লী বলেনঃ তিনি (মুয়াল্লা) সিনান ইবনু আবী সিনান হতে বর্ণনা করেছেন, তারা উভয়েই মাজহুল। হাদীছটি ক্রটিযুক্ত।
ইবনু আদী মুয়াল্লার জীবনী আলোচনা করতে গিয়ে হাদীছটি উল্লেখ করেছেন। তিনি তার আরো দু'টি হাদীছ উল্লেখ করার পর বলেছেনঃ উল্লেখিত হাদীছ ছাড়াও তার থেকে বর্ণিত আরো হাদীছ রয়েছে, সেগুলো নিরাপদ নয়। বরং সেগুলো মুনকার। “আল-কাশফ” গ্রন্থে এসেছে, সাগানী বলেনঃ হাদীছটির জাল হওয়াটা সুস্পষ্ট। ইবনুল জাওয়ী বলেনঃ এটির কোন ভিত্তি নেই।
644 - موارد) : أَخْبَرَنَا أَبُو
خَلِيفَةَ: حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمَدِينِيِّ: حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ حَبِيبٍ اللَّيْثِيُّ أَبُو سَعِيدٍ: حَدَّثَنَا
ثَابِتٌ الْبُنَانِيُّ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ مرفوعاً.
قلت: وهذ إسناد رجاله ثقات معروفون؛ غيركثير بن حبيب هذا لم يوثقه
كثير أحد، غير ابن حبان فذكره في `الثقات` (7/354) ، وقال ابن أبي حاتم
(3/2/150) عن أبيه:
`لا بأس به`.
وهذا يعني عنده - كما نص في (باب درجات رواة الآثار) (1/37) - أنه ممن
يكتب حديثه وينظر فيه، وهي المنزلة الثانية.
قلت: فمثله حديثه مرشح ليكون حسناً أو ضعيفاً، حسبما يحيط به من أمور
مقويات، أو موهنات. وأرى أن الوهن في متنه ظاهر، والفضل في ذلك يعود إلى
الحافظ الذهبي النَّقّاد، فإنه ساق الحديث في ترجمته من `الميزان`، وقال عقبه:
`هذا حديث غريب جداً، في `الرؤية` لأبي نعيم `.
ثم قال عقبه:
`كثير بن حبيب عن ثابت، وعنه الصلت بن مسعود بخبر موضوع، وهو الأول `.
والخبر المشار إليه لم أعرفه. الصلت بن مسعود: ثقة من شيوخ مسلم؛ فالعلة
من كثير بن حبيب، فكأنه لذلك أشار في `الكاشف` إلى تليين توثيقه بقوله:
`وُثِّق`.
هذا وقد تأملت فِي حَدِيثِ الترجمة، فوجدت فيه غرائب تفرد بها المذكور
دون كل الثقات الذين رووا حديث الشفاعة بطوله، ومن طرق عن أنس وغيره من
الصحابة في `الصحيحين` وغيرهما، وقد أخرج الكثير الطيب منها ابن خزيمة في
(التوحيد) من `صحيحه`.
من ذلك: إخباره عن الأنبياء أن كلاً منهم نبي أمي! وهذا خلاف الصفة
التي اختص بها نبينا صلى الله عليه وسلم.
وقوله في خزنة الجنة أنهم قالوا: `أوقد أرسل إليه؟ `.؛ فإنه من المستبعد
جداً أن لا يكونوا قد علموا برسالته صلى الله عليه وسلم، وقد انتهت وظيفة الرسل، وحان وقت
دخول الجنة. وغالب الظن أنه دخل عليه حديث فِي حَدِيثِ؛ فإن هذه الجملة
ثبتت في فصة المعراج، ففيها قال صلى الله عليه وسلم:
`فَانْطَلَقَ بِي جِبْرِيلُ حَتَّى أَتَى السَّمَاءَ الدُّنْيَا، فَاسْتَفْتَحَ فَقِيلَ: مَنْ هَذَا؟ قَالَ:
جِبْرِيلُ. قِيلَ: وَمَنْ مَعَكَ؟ قَالَ مُحَمَّدٌ. قِيلَ: وَقَدْ أُرْسِلَ إِلَيْهِ؟ قَالَ: نَعَمْ … `.
الحديث بطوله.
أخرجه مسلم (1/99 - 100) ، وأبو عوانة (1/126 - 128) من طريق حماج
ابن سلمة: حدثنا ثابت البناني عن أنس بن مالك … به.
وأخرجه مسلم وأبو عوانة والبخاري أيضاً (3887) ، وابن حبان (1/128/131)
من طريق قتادة عن أنس عن مالك بن صعصعة … به.
قلت فالظاهر أن ابن حبيب هذا خلط بين هذا وبين حديث الشفاعة؛
فأدخل هذه الجملة فيه. والله أعلم.
وإذا كان العلماء قد تأولوها في هذا الحديث الصحيح بأن المراد أرسل إليه؛
ليعرج به إلى السماء؛ كما قال ابن حبان (1/133) ، وتبعه الحافظ في `الفتح`
(7/209) ، وقال:
`ليس المراد أصل البعث؛ لأن ذلك كان قد اشتهر في الملكوت الأعلى `.
قلت: ومثل هذا التأويل إذا كان في هذا الحديث الصحيح؛ فليس مقبولاً
نحوه في هذا الحديث المنكر، كأن يقال مثلاً: أي أرسل إليه؛ ليدخل الجنة.
والله أعلم.
وقد يكون هنالك أمور اخرى مستنكرة، قد تظهر؛ إذا ما أمعن النظر، وفيما
ذكرت كفاية. والله ولي التوفيق.
وإن من تفاهة التحقيق أن المعلق على `الإحسان` (14/401 - طبعة المؤسسة) مع
تحسينه لإسناد الحديث، ونقله استغراب الذهبي الشديد للحديث؛ عقّب عليه بقوله:
أخرجه البخاري (7510) ، ومسلم (193 و 326) ، وابن خزيمة في `التوحيد
(ص 299) من طرق عن حماد بن زيد، عن معبد بن هلال العنزي عن أنس بن
مالك `.
وهو يشير إلى حديث الشفاعة الطويل، وليس فيه شيء مما في هذا الحديث
المنكر المذكور هنا إلا كلمات قليلة، فيال لها من غفلة، ما تَصْدُر إلا من مبتدئ في
هذا العلم؛ كالمعلقين الثلاثة على طبعتهم المزوقة لكتاب `الترغيب` للمنذري!
ولذلك حسّنوه تقليداً منهم للمعقب المشار إليه. والله المستعان.
৬৪৩। শীতকাল চলে গেলে অবশ্যই ফেরেশতারা আনন্দিত হয়। কারণ শীত দরিদ্র মুমিনদের কষ্ট বয়ে আনে।
হাদীছটি মুনকার।
এটি ইবনু আদী পূর্বের হাদীছটির সনদে বর্ণনা করেছেন। আর উকায়লী (৪২২), অনুরূপভাবে তাবারানী (৩/১১২/১) অন্য সূত্রে মা'য়াল্লা ইবনু মায়মূন হতে তিনি মুজাহিদ হতে ... বর্ণনা করেছেন। উকায়লী বলেনঃ মায়াল্লা ইবনু মায়মূন মুনকারুল হাদীছ। তার হাদিসের মুতাবায়াত করা যায় না। এ হাদীছটি একমাত্র তার মাধ্যমেই জানা যায়। তার অনুরূপ আরো মুনকার হাদীছ রয়েছে সেগুলোরও মুতাবা'য়াত করা যায় না।
‘তার হাদীছের মুতাবা'য়াত করা যায় না এ কথাটি আশ্চর্যজনক। কারণ তিনি নিজেই (পৃঃ ১৫০) নোয়াইম ইবনু হাম্মাদের সূত্রে ... হাদীছটি বর্ণনা করেছেন। উকায়লী বলেনঃ তার হাদীছ নিরাপদ নয়। কারণ মুজাহিদ হতে বর্ণনাকারী আব্দুল্লাহ ইবনু নুমায়ের বর্ণনা করার দিক দিয়ে প্রসিদ্ধ নন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ নোয়াইম দুর্বল
` حامل كتاب الله له في بيت مال المسلمين في كل سنة مائتا دينار، فإن مات وعليه دين قضى الله ذلك الدين `.
موضوع.
رواه الديلمي عن العباس بن الضحاك: حدثنا محمد بن أحمد بن عبد الله الهروي عن مقاتل بن سليمان عن خولة الطائي عن سليك الغطفاني مرفوعا.
أورده السيوطي في ` اللآلي ` شاهدا للحديث الآتي عقبه وقال: ` العباس بن الضحاك، دجال، ومقاتل بن سليمان قال وكيع وغيره: كذاب `. قلت: فما فائدة إيراده إذن؟ وكيف استجاز ذكره إياه في ` الجامع الصغير ` أيضا؟! ومن عجائبه أنه لم يورده فيه بتمامه بل بشطره الأول فقط! ولعله إنما ذكره فيه من أجل أن له شاهدا، أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` لكن لا يخفى أن الموضوع لا يقوى بطرقه مهما كثرت، وهذا شيء نبه عليه السيوطي نفسه في ` تدريب الراوي ` وغيره. والشاهد المذكور هو: ` من قرأ القرآن فله مائتا دينار، فإن لم يعطها في الدنيا أعطيها في الآخرة `.
৬৪৪। আল্লাহর কিতাবকে বহনকারীর জন্য মুসলিমদের বাইতুল মাল হতে প্রতি বছর দু'শত দীনার করে বরাদ্দ রয়েছে। তার উপর ঋণ থাকা অবস্থায় যদি সে মৃত্যু বরণ করে তাহলে আল্লাহই তার ঋণ পরিশোধ করবেন।
হাদীছটি জাল।
এটি দাইলামী আব্বাস ইবনুয যাহহাক হতে তিনি মুহাম্মাদ ইবনু আহমাদ ইবনে আব্দিল্লাহ আল-হারাবী হতে তিনি মুকাতিল ইবনু সুলায়মান হতে ... বর্ণনা করেছেন।
হাদিসটি সুয়ূতী `আল-লা'আলী` গ্রন্থে আগত হাদিসটির শাহেদ হিসাবে বর্ণনা করে বলেছেনঃ আব্বাস দাজ্জাল। মুকতিল ইবনু সুলায়মান সম্পর্কে ওয়াকী ও অন্য বিদ্বানগণ বলেছেনঃ তিনি মিথ্যুক।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তাহলে উল্লেখ করার উপকারিতা কী? আর কেনই বা তিনি `আল-জামেউস সাগীর` গ্রন্থে উল্লেখ করলেন? আশ্চর্যের ব্যাপার এই যে, তিনি শুধু হাদীছটির প্রথম অংশটি উল্লেখ করেছেন।
ইবনুল জাওয়ী হাদীছটি `আল-মাওযুআত` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
` من قرأ القرآن فله مائتا دينار، فإن لم يعطها في الدنيا أعطيها في الآخرة `.
موضوع. أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (1 / 255) من رواية ابن عدي عن عمرو بن جميع عن جويبر عن الضحاك عن النزال بن سبرة عن علي مرفوعا. وقال: ` جويبر تالف، وعمرو كذاب `. وتعقبه السيوطي (1 / 246) بما لا يجدي كغالب عادته ثم قال: ` وله طريق آخر عن علي موقوفا `. قلت: ثم ساقه من رواية البيهقي بإسناده عن عبد الملك بن هارون بن عنترة عن أبيه عن جده عن علي قال: فذكره نحوه. وقال السيوطي: ` عبد الملك كذاب وله طريق أخرى `.
ثم ساق الحديث الذي قبله، وفيه دجال، وآخر كذاب كما سبق من كلام السيوطي نفسه، فلا أدري ما فائدة تسويد الصحيفة بإيراده أحاديث هؤلاء الكذابين؟!
৬৪৫। যে ব্যক্তি কুরআন পাঠ করবে তার জন্য একশত দীনার বরাদ্দ রয়েছে। যদি তাকে তা দুনিয়াতে দেয়া না হয়, তাহলে তাকে কি তা আখেরাতে দেয়া হবে।
হাদীছটি জাল।
হাদীছটি ইবনুল জাওযী “আল-মাওযু'আত” (১/২৫৫) গ্রন্থে ইবনু আদীর বর্ণনা হতে উল্লেখ করেছেন। তিনি আমর ইবনু জামী হতে তিনি জুওয়ায়বির হতে তিনি যাহহাক হতে ... বর্ণনা করেছেন। অতঃপর ইবনুল জাওযী বলেনঃ জুওয়ায়বির ধ্বংসপ্রাপ্ত আর আমর মিথ্যুক। সুয়ূতী (১/২৪৬) অভ্যাসগত ভাবে তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ হাদীছটির আরেকটি মওকুফ সূত্র রয়েছে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ অতঃপর তিনি বাইহাকীর বর্ণনা হতে হাদীছটি আব্দুল মালেক ইবনু হারূণ হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি তার দাদা হতে তিনি আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন। সুয়ূতী বলেনঃ আব্দুল মালেক মিথ্যুক। তার আরেকটি সূত্র রয়েছে। অতঃপর তিনি পূর্বোল্লিখিত হাদীছটি উল্লেখ করেছেন। যার মধ্যে দাজ্জাল বর্ণনাকারী রয়েছেন। এ ছাড়াও আরেকজন মিথ্যুক বর্ণনাকারী রয়েছেন। যেমনটি সুয়ূতী নিজেই বলেছেন।
` شاب سفيه سخي أحب إلي من شيخ بخيل عابد، إن السخي قريب من الله، قريب من الجنة، بعيد من النار، وإن البخيل بعيد من الجنة، قريب من النار `.
موضوع.
رواه تمام الرازي (3 / 38 - 39 من مجموع الظاهرية رقم 95) من طريق محمد بن زكريا الغلابي: حدثنا العباس بن بكار: حدثنا محمد بن زياد عن ميمون بن مهران عن ابن عباس مرفوعا.
قلت: والغلابي وضاع، وقد سبق ذكره مرارا. والشطر الأول من الحديث أورده السيوطي في ` الجامع الصغير ` من رواية الحاكم في ` تاريخه ` والديلمي في ` مسند الفردوس ` عن ابن عباس، وسكت عنه شارحه المناوي! وأورده في اللآلي ` (2 / 93) بتمامه من طريق تمام، لكن سقط من إسناده بعض رجاله، منهم الغلابي هذا الذي هو آفة الحديث، فخفيت على الناظر علة الحديث. والشطر الثاني من الحديث، أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` من طريق أخرى عن أبي هريرة وقال: ` قال العقيلي: ليس لهذا الحديث أصل `. وقد سبق الكلام عليه برقم (152) .
৬৪৬। বোকা দানশীল যুবক আমার নিকট কৃপণ আবেদ শাইখ হতে অতি উত্তম। নিশ্চয় দানশীল ব্যক্তি আল্লাহর নিকটবর্তী, জল্লাতের নিকটবর্তী ও জাহান্নাম হতে দূরে। আর কৃপণ ব্যক্তি জান্নতি হতে দূরে, জাহান্নামের নিকটবর্তী।
হাদীছটি জাল।
এটি তাম্মাম আর-রাযী (৩/৩৮-৩৯) মুহাম্মাদ ইবনু যাকারিয়া আল-গাল্লাবী সূত্রে আল-আব্বাস ইবনু বাক্কার হতে তিনি মুহাম্মাদ ইবনু যিয়াদ হতে তিনি মায়মূন ইবনু মিহরান হতে তিনি ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ আল-গাল্লাবী জলিকারী। তার সম্পর্কে বহুবার আলোচনা করা হয়েছে।
সুয়ূতী হাদীছটির প্রথম অংশটি “আল-জামেউস সাগীর” গ্রন্থে হাকিম কর্তৃক তার `তারীখ` গ্রন্থে এবং দাইলামী কর্তৃক “মুসনাদুল ফিরদাউস” গ্রন্থের উদ্ধৃতিতে ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন। তার ভাষ্যকার মানবী কোন প্রকার হুকুম না লাগিয়ে চুপ থেকেছেন তিনি তার “আল-লাআলী” (২/৯৩) গ্রন্থে পূর্ণ হাদীছটি তাম্মামের সূত্র হতে উল্লেখ করেছেন। কিন্তু সনদ হতে কতিপয় বর্ণনাকারীকে ছেড়ে দিয়েছেন (উল্লেখ করেননি)। তাদের মধ্যে এই আল-গাল্লাবীও রয়েছেন। তিনিই হাদীছটির সমস্যা।
হাদীছটির দ্বিতীয় অংশকে ইবনুল জাওয়ী “আল-মাওযু'আত” গ্রন্থে অন্য সূত্রে উল্লেখ করেছেন। উকায়লী বলেনঃ এ হাদীছটির কোন ভিত্তি নেই।
649) .
৬৪৭। কোন সৃষ্টি ঈমানের দিক দিয়ে তোমাদের নিকট সর্বাপেক্ষা আশ্চর্যজনক মনে হয়? তারা বললঃ ফেরেশতারা। তিনি বললেনঃ তারা তাদের প্রভুর নিকটে থাকা সত্ত্বেও কেন ঈমান আনবে না? তারা বললঃ তাহলে নবীগণ। তিনি বললেনঃ তাদের উপর ওয়াহী নাযিল হওয়া সত্ত্বেও কেন তারা ঈমান আনবে না? তারা বললঃ তাহলে আমরা। তিনি বললেনঃ আমি তোমাদের মাঝে বিদ্যমান থাকা সত্ত্বেও কেন তোমরা ঈমান আনবে না? অতঃপর বর্ণনাকারী বলেনঃ রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেনঃ জেনে রাখ! আমার নিকট ঈমানের দিক দিয়ে সর্বাপেক্ষা আশ্চর্য ধরনের সৃষ্টি হচ্ছে সেই জাতি যারা তোমাদের পরে আসবে এবং এমন ধরনের গ্রন্থগুলো প্রাপ্ত হবে যার মধ্যে একটি গ্রন্থ থাকবে তাতে যা আছে তারা তার উপর ঈমান আনবে।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি হাসান ইবনু আরাফা ইসমাঈল ইবনু আইয়াশ আল-হিমসী হতে তিনি মুগীরা ইবনু কায়েস হতে তিনি আমর ইবনু শু'য়ায়িব হতে ... বর্ণনা করেছেন। (২/৯০) গ্রন্থে, অনুরূপভাবে বাইহাকী “আদ-দালায়েল” (খণ্ড ২) গ্রন্থে এবং আল-খাতীব `শারাফু আসহাবিল হাদীছ` (২/২৬) গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। ইসমাঈল ইবনু আইয়াশ শামীদের ছাড়া অন্যদের থেকে বর্ণনা করার ক্ষেত্রে দুর্বল আর এটি অন্যদের থেকে বর্ণনারই অন্তর্ভুক্ত। মুগীরাও দুর্বল। ইবনু আবী হাতিম (৪/১/২২৭) বলেনঃ তিনি বাসরী, তিনি আমর ইবনু শুয়ায়িব হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি মুনকারুল হাদীছ।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু হিব্বান তাকে `আছ-ছিকাত` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন, যেমনটি “আল-লিসান” গ্রন্থে এসেছে। হাদীছটি বাইহাকী অন্য সূত্রে মুরসাল হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সেটি মুরসাল হওয়া সত্ত্বেও দুর্বল। আবু নোয়াইম “আখবারু আসবাহান” (১/৩০৮-৩০৯) গ্রন্থে এবং সাহমী (৩৬৩) খালেদ ইবনু ইয়াযীদ আল-উমারী সূত্রে সাওরী হতে ... মওসূল হিসাবে বর্ণনা করেছেন। কিন্তু এই উমারী মিথ্যুক জালকারী। হাদীছটি অন্য বাক্যেও বর্ণনা করা হয়েছে, সেটি হচ্ছেঃ (দেখুন পরেরটি)
` أتدرون أي أهل الإيمان أفضل إيمانا؟ قالوا: يا رسول الله الملائكة؟ قال: هم كذلك، ويحق ذلك لهم، وما يمنعهم وقد أنزلهم الله المنزلة التي أنزلهم بها؟ بل غيرهم. قالوا: يا رسول الله فالأنبياء الذين أكرمهم الله تعالى
بالنبوة والرسالة؟ قال: هم كذلك ويحق لهم ذلك، وما يمنعهم وقد أنزلهم الله المنزلة التي أنزلهم بها؟ بل غيرهم. قال: قلنا: فمن هم يا رسول الله؟ قال: أقوام يأتون من بعدي في أصلاب الرجال فيؤمنون بي ولم يروني، ويجدون الورق المعلق فيعملون بما فيه، فهؤلاء أفضل أهل الإيمان إيمانا `.
ضعيف جدا.
رواه البغوي في ` حديث مصعب الزبيري ` (152 / 2) وعنه ابن عساكر (16 / 274 / 1) والخطيب في ` شرف أصحاب الحديث ` (36 - 37) من طريق أبي يعلى وهذا في ` مسنده ` (13 / 2) والحاكم (4 / 85 - 86) وعنه الهروي في ` ذم الكلام ` (148 / 1) عن محمد بن أبي حميد عن زيد بن أسلم عن أبيه عن
عمر مرفوعا. وقال: ` صحيح الإسناد `. ورده الذهبي بقوله: ` قلت: بل محمد ضعفوه `.
قلت: قد اتهمه البخاري بقوله فيه: ` منكر الحديث ` وقال النسائي: ` ليس بثقة `.
فمثله في مرتبة من لا يستشهد بحديثه ولا يعتبر به كما بينه السيوطي في ` تدريب الراوي ` (ص 127) . فعلى هذا لا يصلح الحديث شاهدا للذي قبله، فلا أدري لم جزم الحافظ ابن كثير في ` اختصار علوم الحديث ` (ص 143) بنسبته إلى النبي صلى الله عليه وسلم بقوله: ` وقد ورد في الحديث عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه قال ` فذكره واستدل به على جواز العمل بالوجادة، فلعله ظن أن ابن أبي حميد هذا ممن يستشهد به، أو أنه وقف له على طريق أو طرق أخرى يتقوى الحديث بها.
وحينئذ ينبغي النظر فيها، فإن صلح شيء منها للاستشهاد فبها، وإلا فنحن على ما تبين لنا الآن. والحديث عزاه في ` الجامع الكبير ` (3 / 170 / 2) لأبي يعلى والعقيلي والمرهبي في ` العلم `
والحاكم، وتعقبه الحافظ ابن حجر في أطرافه بأن فيه محمد بن أبي حميد متروك الحديث، وقال في ` المطالب العالية `: محمد ضعيف الحديث سيء الحفظ. وقال البزار: الصواب أنه عن زيد بن أسلم مرسل. وقد وجدت لابن أبي حميد متابعا، أخرجه العقيلي في ` الضعفاء ` (427) عن المنهال بن بحر قال: حدثنا هشام بن أبي عبد الله عن يحيى بن أبي كثير عن زيد بن أسلم به.
وقال العقيلي: ` المنهال في حديثه نظر، وهذا الحديث إنما يعرف لمحمد بن أبي حميد عن زيد بن أسلم وليس بمحفوظ من حديث يحيى بن أبي كثير، ولا يتابع منهالا عليه أحد `.
قلت: والمنهال هذا ذكره ابن عدي في ` الكامل `، وأشار إلى تليينه، ووثقه أبو حاتم وابن حبان، فإن كان حفظه بهذا الإسناد، فعلته عنعنة يحيى بن أبي كثير، فإنه كان مدلسا، ولهذا أورده العقيلي في ` الضعفاء ` (466) فقال: ` ذكر بالتدليس `.
وتبعه على ذلك الذهبي في ` الميزان ` وابن حجر في ` التقريب `، ولا أستبعد أن يكون سمعه من ابن أبي حميد هذا فدلسه. والله أعلم.
وجملة القول أن هذا الإسناد ضعيف جدا لا يصلح للاستشهاد به، وقد وجدت للحديث طريقين آخرين، أحدهما تقدم قبل هذا، وهو خير من هذا، والآخر أشدهما ضعفا وهو:
৬৪৮। ঈমানদারদের মধ্যে সর্বোৎকৃষ্ট ঈমানদার কে তোমরা জান কি? তারা বললঃ হে আল্লাহর রাসূল তারা ফেরেশতারা? তিনি বললেনঃ তারাতো সেরূপই এবং তা তাদের কর্তব্যও বটে। তাদেরকে কোন বস্তুটি (ঈমান আনা হতে) বাধা সৃষ্টি করবে এমতাবস্থায় যে আল্লাহ তা'আলা তাদেরকে এমন এক মর্যাদা দান করেছেন যার দ্বারা শুধু তারাই অলংকৃত? বরং তারা ছাড়া অন্যরা। তারা বললঃ হে আল্লাহর রাসূল। তাহলে নবীগণ যাদেরকে আল্লাহ তা'আলা নুবুওয়াত এবং রিসালাত দ্বারা সম্মানিত করেছেন? তিনি বললেনঃ তারাতো সেরূপই এবং তা তাদের কর্তব্যও বটে। তাদেরকে কোন বস্তু (ঈমান আনা হতে) বাধা সৃষ্টি করবে এমতাবস্থায় যে আল্লাহ তা'আলা তাদেরকে এমন এক মর্যাদা দান করেছেন যার দ্বারা শুধু তারাই অলংকৃত? বরং তারা ছাড়া অন্যরা। বর্ণনাকারী বলেন, আমরা বললামঃ তাহলে তারা কারা হে আল্লাহর রাসূল? তিনি বললেনঃ তারা এমন কতিপয় জাতি যারা আমার পরে আসবে, তারা এখন তাদের পুরুষদের পিঠেই রয়েছে। অতঃপর তারা আমার উপর ঈমান আনবে অথচ আমাকে তারা দেখেনি। তারা ঝুলন্ত পাতা পাবে অতঃপর তারা তাতে যা আছে তার উপর আমল করবে। তারাই হচ্ছে ঈমানদারদের মধ্যে সর্বোৎকৃষ্ট ঈমানদার।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি বাগাবী “হাদীছু মুস'য়াব আয-যুবায়দী” (২/১৫২) গ্রন্থে, তার থেকে ইবনু আসাকির (১৬/২৭৪/১), আল-খাতীব `শারাফু আসহাবিল হাদীছ` (৩৬, ৩৭) গ্রন্থে আবু ইয়ালা সূত্রে এটি তার `মুসনাদ` (২/১৩) গ্রন্থে এবং হাকিম (৪/৮৫-৮৬) বর্ণনা করেছেন। আর তার থেকে আল-হারাবী “যাম্মুল কালাম` (১/১৪৮) গ্রন্থে মুহাম্মাদ ইবনু আবী হামীদ হতে তিনি যায়েদ ইবনু আসলাম হতে তিনি তার পিতা হতে ...বর্ণনা করেছেন। অতঃপর বলেছেনঃ সনদটি সহীহ। ইমাম যাহাবী তার প্রতিবাদ করে বলেছেনঃ মুহাম্মদকে মুহাদ্দিছগণ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তাকে ইমাম বুখারী মিথ্যার দোষে দোষী করেছেন। বলেছেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। নাসাঈ বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন। তিনি এমন এক স্তরের ব্যক্তি যার হাদীছ দ্বারা সাক্ষ্য (শাহেদ) গ্রহণ করা যায় না। যেমনটি সুয়ুতী `তাদরীবুর রাবী` (পৃঃ ১২৭) গ্রন্থে বলেছেন। এ কারণেই এ হাদীছটি পূর্বোল্লিখিত হাদীছের শাহেদ হবার যোগ্য নয়।
জানি না ইবনু কাসীর কেন `ইখতিসারু উলুমিল হাদীছ` (পৃঃ ১৪৩) গ্রন্থে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণিত হয়েছে বললেন। সম্ভবত তিনি ধারণা করেছেন যে, মুহাম্মাদ ইবনু আবী হামীদ শাহেদযোগ্য। অথবা তিনি অন্য কোন সূত্র পেয়েছেন। যার দ্বারা হাদীছটি শক্তিশালী হয়েছে। কিন্তু আমরা তা পাইনি। যেহেতু অন্য সূত্র আমরা পাইনি। অতএব আমরা যা বলেছি, তাই আমাদেরকে বলতে হবে।
হাদীছটির অন্য সূত্রও পাওয়া গেছে কিন্তু দুর্বলতা হতে মুক্ত নয় বিধায় দুর্বলতা হতে তার বের হয়ে আসা সম্ভব হয়নি। সেটিকে উকায়লী “আয-যোয়াফা (৪২৭) গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন।
إن أشد أمتي حبا لي قوم يأتون من بعدي، يؤمنون بي ولم يروني، يعملون بما في الورق المعلق `.
موضوع بهذا اللفظ.
رواه ابن عساكر ` في تاريخه ` (ج 11 / 137 / 2) عن أحمد بن القاسم بن الريان اللكي المصري: أحمد بن إسحاق بن إبراهيم بن نبيط الأشجعي: حدثني أبي: حدثنا أبي قال: لما نسخ عثمان المصاحف قال له أبوهريرة: أصبت ووفقت، أشهد لسمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول. فذكره.
قال أحمد بن القاسم بن الريان: أخبرنا الواقدي أخبرنا ابن أبي سبرة عن سهيل بن أبي صالح عن أبيه عن أبي هريرة به. كذا قال وقد سقط منه محمد بن سعد كاتب الواقدي. قلت: وهكذا وقع الحديث من الطريقين عن أبي هريرة في ` نسخة نبيط بن شريط ` (رقم 57 و58) ، وفيها بلايا، كما في ترجمة أحمد بن إسحاق بن إبراهيم هذا من ` الميزان ` وقال: ` لا يحل الاحتجاج به فإنه كذاب `. وأقره الحافظ في ` اللسان `. والراوي عنه أحمد بن القاسم بن الريان اللكي بضم اللام وتشديد الكاف نسبة إلى (اللك) بليدة من أعمال برقة الغرب.
وقال الذهبي: ` لينه ابن ماكولا، وضعفه الدارقطني `.
ثم وقفت على طريق رابع للحديث ليس فيه الورق المعلق وسوف يأتي بلفظ: ` يا أيها الناس من أعجب الخلق … `. وإنما يصح من هذا الحديث والذي قبله بعضه، وهو في حديث أبي جمعة رضي الله عنه قال: تغدينا مع رسول الله صلى الله عليه وسلم ومعنا أبو عبيدة بن الجراح فقال: يا رسول الله أحد منا خير منا؟ أسلمنا وجاهدنا معك، قال: نعم قوم يكونون من بعدكم يؤمنون بي ولم يروني. رواه الدارمي (2 / 308) وأحمد (4 / 106)
والحاكم (4 / 85) وصححه ووافقه الذهبي. وأقول: إسناد الدارمي وأحد إسنادي أحمد صحيح إن شاء الله تعالى. وقد عزاه لهؤلاء الثلاثة السيوطي في ` تدريب الراوي ` (ص 150) بلفظ آخر، وهو سهو منه رحمه الله.
৬৪৯। আমার উম্মাতের সেই সম্প্রদায় আমাকে সর্বাপেক্ষা বেশী ভালবাসে যারা আমার পরে আসবে। আমার উপর বিশ্বাস স্থাপন করৰে অথচ তারা আমাকে দেখেনি। তারা ঝুলন্ত পাতার মধ্যে যা কিছু পাবে তার উপর আমল করবে।
হাদীছটি এ বাক্যে ৰানোয়াট।
হাদীছটি ইবনু আসকির তার `আত-তারীখ` (১১/১৩৭/২) গ্রন্থে আহমাদ ইবনুল কাসেম হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীছটি আবু হুরাইরাহ-(রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে দুটি সূত্রে “নুবায়েত ইবনু শারীতের কপিতে` (নং ৫৭, ৫৮) এসেছে। যার মধ্যে কতিপয় সমস্যা রয়েছে। যেমনটি ইমাম যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে আহমাদ ইবনু ইসহাকের জীবনী আলোচনা করতে গিয়ে বলেছেনঃ তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করাই হালাল নয়, কারণ তিনি মিথ্যুক। হাফিয ইবনু হাজার তার বক্তব্যকে “আল-লিসান” গ্রন্থে সমর্থন করেছেন।
তার থেকে বর্ণনাকারী আহমাদ ইবনুল কাসেম সম্পর্কে ইমাম যাহাবী বলেনঃ তাকে ইবনু মাকূলা কিছুটা দুর্বল আর দারাকুতনী দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন।
এ বিষয়ে নিম্নে বর্ণিত হাদীছটি সহীহ ইনশাআল্লাহ।
আবু জামা'য়াহ হতে বর্ণিত তিনি বলেনঃ
تغدينا مع رسول الله صلى الله عليه وسلم ومعنا أبو عبيدة بن الجراح فقال: يا رسول الله أحد منا خير منا؟ أسلمنا وجاهدنا معك، قال: نعم قوم يكونون من بعدكم يؤمنون بي ولم يروني
আমরা একদা রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সাথে দুপুরের খাবার খেলাম, আমাদের সাথে আবু উবাইদাহ ইবনুল জাররাহ ছিলেন। তিনি বললেনঃ হে আল্লাহর রাসূল! আমাদের চেয়ে কি কেউ উত্তম আছে? আমরা ইসলাম গ্রহণ করেছি এবং আমরা আপনার সাথে জিহাদ করেছি। তিনি বললেনঃ হ্যাঁ, তারা এক সম্প্রদায় যারা তোমাদের পরে আসবে, অতঃপর আমাকে না দেখা সত্ত্বেও তারা আমার উপর ঈমান আনবে।
এটি দারেমী (২/৩০৮), আহমাদ (৪/১০৬) ও হাকিম (৪/৮৪) বর্ণনা করেছেন। হাকিম হাদীছটিকে সহীহ আখ্যা দিয়েছেন আর যাহাবী তার সাথে ঐকমত্য পোষণ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ দারেমী এবং ইমাম আহমাদের একটি সনদ সহীহ ইনশাআল্লাহ্। সুয়ূতী `তাদরীবুর রাবী` (পৃঃ ১৫০) গ্রন্থে অন্য ভাষায় তাদের উদ্ধৃতিতে উল্লেখ করেছেন। সেটি তার থেকে ভুল।
طبع المغرب) : أخبرنا زكريا بن يحيى قال: حدثنا إسحق بن إبراهيم قال:
أخبرنا جرير عن مسعر عن عبد العزيز بن عمر بن عبد العزيز عن عمر بن عبد العزيز قال:
جمع رسول الله صلى الله عليه وسلم أهل بيته فقال. . . فذكروه.
قلت: وهذا اسناد رجاله كلهم ثقات زكريا بن يحيى - وهو السجزى - ثقة حافظ.
واسحاق بن ابراهيم هو ابن راهويه الامام الحافظ (انظر ` تهذيب المزى ` 2 / 373) .
وجرير - وهو ابن عبد الحميد الضبى - من رجال الشيخين، لكن قال الحافظ:
` ثقه صحيح الكتاب، قيل: كان فى اخر عمره يهم من حفظه `.
قلت: وطول الذهبى ترجمته فى ` الميزان `، وهى تدل على أن الرجل ثقه، وأن حفظه لا يخلو من شىء، وبيض له فى ` الكاشف `!
ومسعر - وهو ابن كدام الهلالى - ثقة ثبت احتج به الشيخان.
وعبد العزيز بن عمر بن عبد العزيز، احتج به الشيخان أيضا، لكن قال الحافظ: ` صدوق يخطىء `.
وأما أبوه عمر بن عبد العزيز، فهو الامام العادل والخليفة الراشد، التابعى الجليل، ثقة مأمون، احتج به الشيخان.
قلت: فالحديث مرسل.
لكن قد وصله جماعة من الثقات، منهم: أبونعيم - عند البخارى فى ` التاريخ ` والنسائى فى ` اليوم والليله ` والطبرانى وأبى نعيم فى ` الحلية ` - ووكيع - عند ابن ماجه وابن أبى شيبه - وغيرهم من الثقات، كلهم قالوا: عن عبد العزيز بن عمر عن هلال مولى عمر بن عبد العزيز عن عمر بن عبد العزيز عن عبد الله بن جعفر عن أمه أسماء بنت عميس مرفوعا مختصرا بلفظ:
` الله الله ربى، لا أشرك به شيئا `.
قلت: فدلت روايه هؤلاء الثقات على أن حديث الترجمه فيه ثلاث علل:
الأولى: الارسال، كما تقدم.
والثانيه: الانقطاع بين عمر بن عبد العزيز وابنه عبد العزيز.
والثالثه: زيادة ` سبع مرات ` فهى منكره.
ويؤكد ذلك: أن الحديث قد جاء من طريق أخرى عن أسماء، ومن حديث عائشه وغيرها دون الزيادة، وقد خرجت ذلك كله فى ` سلسلة الاحاديث الصحيحة ` برقم (2755) فأغنى ذلك عن الاعادة.
৬৫০। তোমরা কুরাইশদেরকে ভালবাস। কারণ যে ব্যক্তি তাদেরকে ভালবাসবে আল্লাহ তা'আলা তাকে ভালবাসবেন।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি আল-হাসান ইবনু আরাফা তার `জুযউ` (১/১০৭) গ্রন্থে ঈসা ইবনু মারহুম হতে তিনি আব্দুল মুহায়মেন ইবনু আব্বাস হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি নিতান্তই দুর্বল। কারণ এই আব্দুল মুহায়মেন সম্পর্কে ইমাম বুখারী এবং আবু হাতিম বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। নাসাঈ বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন। অন্যত্র বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীছ। ইবনু হিব্বান (২/১৪১) বলেনঃ তিনি তার পিতা হতে বহু মুনকার হাদীছ এককভাবে বর্ণনা করেছেন। বেশী সন্দেহপ্রবণ হওয়ার কারণে তার মুতাবায়াত করা যায় না। যখন তার বর্ণনাই তার সন্দেহ প্রবণতা প্রচণ্ড আকার ধারণ করেছে তখন তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করাই বাতিল ।
` من أدهن ولم يسم أدهن معه سبعون شيطانا `.
كذب.
أخرجه ابن السني (رقم 170) عن بقية بن الوليد: حدثني مسلمة بن نافع: (1) حدثني أخي دويد بن نافع القرشي قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره. قلت: وهذا إسناد ضعيف جدا، على إعضاله، فإن دويد بن نافع من أتباع التابعين روى عن عروة بن الزبير ونحوه. قال الحافظ في ` التقريب `: ` مقبول `. يعني عند المتابعة، وإلا فهو لين الحديث كما نص عليه في المقدمة. وأخوه مسلمة لم أجد له ترجمة، ولم يترجمه ابن أبي حاتم في ` الجرح والتعديل `. وبقية مدلس وقد عنعنه، ومن عادته أن يروي عن الضعفاء والمتهمين ثم يدلسهم ويسقطهم من الإسناد، فلعل هذا الحديث أخذه عن بعض الوضاعين ثم أسقطه، ووهم بعض الرواة في هذا الإسناد فقال عنه: حدثني مسلمة … فإن صح أنه سمعه منه فهو من شيوخه المجهولين.
(1) الأصل: ` سلمة بن رافع، والتصحيح من ` الجرح والتعديل ` و` تهذيب التهذيب ` وغيرهما. اهـ.
والله أعلم.
وقال ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 305) : ` سألت أبي عن حديث رواه الحارث بن النعمان عن شعبة عن مسلمة بن نافع عن أخيه دويد بن نافع قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: ` من ادهن فلم يذكر اسم الله ادهن معه سبعون شيطانا `؟ قال: الحارث بن النعمان هذا كان يفتعل الحديث، وهذا حديث كذب، إنما روى هذا الحديث بقية عن مسلمة بن نافع `.
وهاتان فائدتان هامتان من هذا الإمام:
الأولى: أن الحارث بن النعمان كان يفتعل الحديث. وهذا مما لا تراه في شيء من كتب الرجال، بل خفي هذا النص على الحافظ الذهبي فقال في ترجمة الحارث هذا من ` الميزان ` وهو: ` الحارث بن النعمان بن سالم الأكفاني ` قال: ` صدوق `! وأقره الحافظ في ` التهذيب ` وجزم به في ` التقريب `. والله أعلم.
الثانية: الشهادة على هذا الحديث بأنه كذب، وهو حري بذلك.
৬৫১। যে ব্যক্তি বিসমিল্লাহ না বলে তেল মালিশ করবে, সত্তরজন শয়তান তার সাথে তেল মালিশ করবে।
হাদীছটি মিথ্যা।
এটি ইবনুস সুন্নী (নং ১৭০) বাকিয়াহ ইবনুল ওয়ালিদ হতে তিনি মাসলামা ইবনু নাফে' হতে তিনি তার ভাই দুওয়ায়িদ ইবনু নাফে কুরাশী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। কারণ দুওয়ায়িদ ইবনু নাফে একজন তাবে তাবেঈ। তিনি উরওয়াহ ইবনুয যুবায়ের হতে বর্ণনা করেছেন। হাফিয ইবনু হাজার `আত-তাকরীব` গ্রন্থে বলেনঃ তিনি মাকবুল। অর্থাৎ মুতাবা'য়াতের সময়। তাছাড়া তিনি দুর্বল।
তার ভাই মাসলামার জীবনী কে রচনা করেছেন পাচ্ছি না। ইবনু আবী হাতিম “আল-জারহু ওয়াত-তা’দীল” গ্রন্থে তার জীবনী আলোচনা করেননি।
এ ছাড়া বাকিয়াহ মুদাল্লিস, দুর্বল এবং মিথ্যার দোষে দোষী বর্ণনাকারীদের থেকে বর্ণনা করা হচ্ছে তার অভ্যাস। অতঃপর তিনি তার হাদীছের সনদ হতে তাদেরকে তাদলীস করে ফেলে দিয়েছেন। সম্ভবত তিনি এ হাদীছটি কোন এক জলিকারী হতে বর্ণনা করেছেন। অতঃপর তাকে সনদ হতে ফেলে দিয়েছেন। এ সনদের কোন বর্ণনাকারী সন্দেহ বশত বলেছেন যে, আমাকে মাসলামা হাদীছটি বর্ণনা করেছেন। যদি এটি সঠিক হয় যে, তিনি তার থেকে শুনেছেন তাহলে তিনি তার মাজহুল শাইখদের একজন।
ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” (২/৩০৫) গ্রন্থে বলেনঃ আমি আমার পিতাকে যে হাদীছটি হারিস ইবনু নুমান শুবা হতে তিনি মাসলামা ইবনু নাফে' ... হতে বর্ণনা করেছেন সেটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম। তিনি বলেনঃ এই হারিস ইবনু নুমান হাদীছ বানাতেন। এ হাদীছটি মিথ্যা। বাকিয়াহ হাদীছটি মাসলামা ইবনু নাফে` হতে বর্ণনা করেছেন। অথচ তা হাফিয যাহাবী এবং হাফিয ইবনু হাজারের নিকট লুক্কায়িতই রয়ে গেছে।
` ما من عبدين متحابين في الله يستقبل أحدهما صاحبه فيصافحه ويصليان على النبي صلى الله عليه وسلم إلا لم يتفرقا حتى يغفر الله لهما ذنوبهما ما تقدم منها وما تأخر `.
منكر جدا بهذا اللفظ.
رواه ابن السني (برقم 190) وابن حبان في ` الضعفاء ` (1 / 289) والباطرقاني في ` جزء من حديثه ` (165 / 1) عن درست بن حمزة: حدثنا مطر الوراق عن قتادة عن أنس مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف درست بن حمزة، ويقال: ابن زياد العنبري قال ابن حبان: ` كان منكر الحديث جدا، يروي عن مطر وغيره أشياء تتخايل إلى من يسمعها أنها موضوعة `.
وضعفه الدارقطني. وقتادة فيه تدليس وقد عنعنه. وقد جاءت أحاديث كثيرة عن جمع من الصحابة بمعنى هذا الحديث لكن ليس في شيء منها ذكر الصلاة عليه صلى الله عليه وسلم، ولا مغفرة ما تأخر أيضا من الذنوب، فدل ذلك على أن هذه الزيادة منكرة. والله أعلم.
والأحاديث المشار إليها أوردها المنذري (3 / 270 - 271) . ثم رأيت النووي قد أورد الحديث في ` الأذكار ` ساكتا عليه!
৬৫২। যে কোন দুই বান্দা আল্লাহর রাহে পরস্পরকে ভালবেসে একে অপরকে অভিনন্দন জানিয়ে মুসাফাহা করলে এবং নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর উপর দুরূদ পাঠ করলে, তারা দু'জন পৃথক হওয়ার পূর্বেই আল্লাহ তা'আলা উভয়ের পূর্ববতী ও পরবর্তী গুনাহগুলো ক্ষমা করে দিবেন।
এ বাক্যে হাদীছটি নিতান্তই মুনকার।
এটি ইবনুস সুন্নী (নং ১৯০), ইবনু হিব্বান “আয-যোয়াফা (১/২৮৯) গ্রন্থে এবং আল-বাতেরকানী `জুযউম মিন হাদীছিহি` (১/১৬৫) গ্রন্থে দারসাত ইবনু হামযাহ হতে তিনি মাতার ওররাক হতে তিনি কাতাদাহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। দারসাত ইবনু হামযাহ সম্পর্কে ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি নিতান্তই মুনকারুল হাদীছ ছিলেন। তিনি মাতার ও অন্যদের থেকে এমন কিছু বর্ণনা করেছেন যে, শ্রবণকারীর নিকট তা জালই মনে হবে। তাকে দারাকুতনী দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন।
কাতাদার মধ্যে তাদলীস ছিল। তিনি আন আন করে বর্ণনা করেছেন।
এ হাদীছটির অর্থবোধক বহু হাদীছ সাহাবাদের থেকে বর্ণিত হয়েছে যার কোনটিতেই নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর উপর দুরূদ পাঠ করার কথা এবং পরবর্তী গুনাহ ক্ষমা হয়ে যাবার কথা উল্লেখ করা হয়নি। এটিই প্রমাণ করছে যে, বর্ধিত অংশগুলোর কারণে হাদীছটি মুনকার।
` الصائم في عبادة وإن كان راقدا على فراشه `.
ضعيف.
رواه تمام (18 / 172 - 173) : أخبرنا أبو بكر يحيى بن عبد الله بن الزجاج قال: حدثنا أبو بكر محمد بن هارون بن محمد بن بكار بن بلال: حدثنا سليمان بن عبد الرحمن: حدثنا هاشم
بن أبي هريرة الحمصي عن هشام بن حسان عن ابن سيرين عن سلمان بن عامر الضبي مرفوعا. وهذا سند ضعيف يحيى الزجاج ومحمد بن هارون لم أجد من ذكرهما. وبقية رجاله ثقات غير هاشم بن أبي هريرة الحمصي ترجمه ابن أبي حاتم (4 / 2 / 105) ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا. قال:
` واسم أبي هريرة عيسى بن بشير `. وأورده في ` الميزان ` وقال: ` لا يعرف، قال العقيلي: منكر الحديث `. والحديث أورده السيوطي في ` الجامع الصغير ` برواية الديلمي في ` مسند الفردوس ` عن أنس. وتعقبه المناوي بقوله: ` وفيه محمد بن أحمد بن سهل، قال الذهبي في ` الضعفاء `: قال ابن عدي: [هو] ممن يضع الحديث `. قلت: هو عند الديلمي (2 / 257) لكن طريق تمام ليس فيها هذا الوضاع كما مر، فهي تنقذ الحديث من إطلاق الوضع عليه. والله أعلم.
وقد رواه عبد الله بن أحمد في ` زوائد الزهد ` (ص 303) من قول أبي العالية موقوفا عليه بزيادة ` ما لم يغتب `. وإسناده صحيح. فلعل هذا أصل الحديث موقوف، أخطأ بعض الضعفاء فرفعه. والله أعلم.
৬৫৩। সওম পালনকারীকে ইবাদাতের মধ্যে গণ্য করা হবে যদিও সে তার বিছানায় শুয়ে থাকে।
হাদীছটি দুর্বল।
এটিকে তাম্মাম (১৮/১৭২-১৭৩) বর্ণনা করেছেন। এটির সনদের বর্ণনাকারী আবু বকর ইয়াহইয়া আল-যুজাজ, মুহাম্মাদ ইবনু হারূণ এবং হাশেম ইবনু আবী হুরাইরাহর কারণে হাদীছটি দুর্বল।
এ সনদটি দুর্বল। কারণ ইয়াহইয়া আল-যুজাজ ও মুহাম্মাদ ইবনু হারূণের জীবনী কে উল্লেখ করেছেন পাচ্ছি না। আর হাশেম ইবনু আবী হুরাইরাহর জীবনী ইবনু আবী হাতিম (৪/২/১০৫) আলোচনা করে তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি। তিনি বলেছেনঃ এই আবু হুরাইরাহর নাম হচ্ছে ঈসা ইবনু বাশীর। ইমাম যাহাবী `আল-মীযান` গ্রন্থে তাকে উল্লেখ করে বলেছেনঃ তাকে চেনা যায় না। উকায়লী বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ।
হাদিসটি সুয়ূতী `আল জামে'উস সাগীর` গ্রন্থে দাইলামী কর্তৃক `মুসনাদুল ফিরদাউস` গ্রন্থের উদ্ধৃতিতে উল্লেখ করেছেন। মানবী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ তার সনদে মুহাম্মাদ ইবনু আহমাদ ইবনে সাহাল রয়েছেন। যাহাবী তার সম্পর্কে `আয-যোয়াফা` গ্রন্থে বলেন, ইবনু আদী বলেছেনঃ তিনি হাদিস জালকারীদের অন্তর্ভুক্ত।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তিনি দাইলামীর সূত্রে আছেন। কিন্তু তাম্মামের সূত্রে এই জলকারী না থাকার কারণে হাদীছটি বানোয়াটের পর্যায়ভুক্ত হয় না। হাদীছটি আব্দুল্লাহ ইবনু আহমাদ “যাওয়ায়েদুয যুহুদ” (পৃঃ ৩০৩) গ্রন্থে আবুল আলিয়াহ হতে মওকুফ হিসাবে বর্ণনা করেছেন। এর সনদটি সহীহ। সম্ভবত মূল হাদীছটি মওকুফ। কোন দুর্বল বর্ণনাকারী ভুল করে মারফু করে ফেলেছেন।
طبع الهند) وعنه ابن ماجة (3679) والبخاري في ` الأدب المفرد ` (137) من طريق يحيى بن أبي سليمان عن زيد بن أبي عتاب عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم به. قلت: وهذا إسناد ضعيف، يحيى هذا لين الحديث، كما في ` التقريب `، ولذا أشار المنذري في ` الترغيب ` (3 / 230) إلى تضعيف الحديث، وقال الحافظ العراقي في ` تخريج الإحياء ` (2 / 184) : ` وفيه ضعف `. وقال البوصيري في ` الزوائد `: ` في إسناده يحيى بن أبي سليمان، قال فيه البخاري: منكر الحديث
. وقال أبو حاتم: مضطرب الحديث. وذكره ابن حبان في ` الثقات `، وأخرج ابن خزيمة حديثه في ` صحيحه `، وقال: في النفس من هذا الحديث شيء، فإني لا أعرف يحيى بعدالة ولا جرح، وإنما خرجت خبره، لأنه يختلف العلماء فيه `. قلت: قد ظهر للبخاري وأبي حاتم ما خفي على ابن خزيمة، فجرحهما مقدم على من عدله `. قلت: وهذا هو الحق، ولاسيما أن ابن حبان - الذي ذكره في ` الثقات ` (3 / 604 و610) - معروف بتساهله في التوثيق، كما نبه عليه الحافظ في مقدمة ` اللسان `.
وذكرت نماذج من المجهولين الذين وثقهم في ` الرد على الشيخ الحبشي `، فليراجعها من شاء.
(تنبيه) : هذا الحديث أورده الحافظ ابن كثير في ` تفسيره - الفجر ` من رواية ابن المبارك بسنده المتقدم، وسكت عنه، فتوهم الحلبيان من سكوته أنه صحيح عنده، ولذلك صححاه! فأورده كل منهما في ` مختصره
`، والأمر بخلاف ذلك، كما سبق التنبيه عليه مرة أوأكثر. والله المستعان.
৬৫৪ । যে ব্যক্তি ঈমানের সাথে তিনটি কাজ করবে, সে যে দরজা দিয়ে চায় জান্নাতে প্রবেশ করবে এবং হুরদের মধ্যে যাকে চায় তার সাথে তার বিবাহ দেয়া হবে। যে ব্যক্তি তার হত্যাকারীকে ক্ষমা করে দিবে, লুক্কায়িত ঋণ পরিশোধ করবে এবং প্রতিটি ফরয সালাতের পর দশবার করে সূরা কুল হওয়াল্লাহ আহাদ পাঠ করবে। বর্ণনাকারী বলেন, আবু বাকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেনঃ যদি সেগুলোর একটি করে হে আল্লাহর রাসূল? তিনি বললেনঃ যদি একটি করে তবুও।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি আবু ইয়ালা তার `মুসনাদ` (কাফ ২/১০৫) গ্রন্থে, তাবরানী “আল মুজামুল আওসাত” (কাফ ২/১৮৬) গ্রন্থে, আবু মুহাম্মাদ আল-জাওহারী `আল-ফাওয়ায়েদুল মুন্তাকাত` (২/৪) গ্রন্থে এবং আবু মুহাম্মাদ আল-খাল্লাল “ফাযায়েলুল ইখলাস” (কাফ ২/২০১) গ্রন্থে উমর ইবনু নাবহান হতে তিনি আবু শাদ্দাদ হতে তিনি জাবের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু' হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
তাবারানী বলেনঃ এ হাদীছটি একমাত্র এ সনদেই বর্ণনা করা হয়েছে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল। উমার ইবনু নাবহান সম্পর্কে ইবনু মাঈন বলেনঃ তিনি কিছুই না। ইবনু হিব্বান “আয-যোয়াফা” (২/৯০) গ্রন্থে বলেনঃ তিনি প্রসিদ্ধদের উদ্ধৃতিতে মুনকার হাদীছ বর্ণনাকারী, তাকে পরিত্যাগ করাই শ্ৰেয়। এ ছাড়া আবু শাদ্দাদকে আমি চিনি না।
হাফিয ইবনু হাজার `নাতায়েজুল আফকার` (১/১৫৪/১) গ্রন্থে বলেনঃ এ হাদীছটি গারীব। আর আবু শাদ্দাদ সম্পর্কে বলেনঃ তার নাম ও অবস্থা কোনটিই জানা যায় না। তার থেকে বর্ণনাকারীকে একদল মুহাদ্দিছ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। হায়ছামী `আল-মাজমা` (১০/১০২) গ্রন্থে বলেনঃ হাদীছটি আবু ইয়ালা বর্ণনা করেছেন। তাতে উমার ইবনু নাবহান রয়েছেন, তিনি মাতরূক। তিনি ইসমাঈল ইবনু ইব্রাহীম আল-আনসারী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
মুনযের হাদীছটি `আত-তারগীব` (৩/২০৮) গ্রন্থে তাবারানীর `আল-আওসাত” গ্রন্থের বর্ণনায় উল্লেখ করে দুর্বল হওয়ার দিকেই ইঙ্গিত করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি আরো বেশী দুর্বল। কারণ আনসারী মাজহুল। খালীল ইবনু মুররা একেবারে দুর্বল আর আমর ইবনু খালেদ মিথ্যুক।
ইবনু আসকির অন্য একটি সূত্রে `তারীখু দেমাস্ক` (১৭/২৭৪/১) গ্রন্থে করেছেন। কিন্তু এই হাম্মাদের মুতাবা'য়াত দ্বারা খুশী হওয়ার কিছু নেই। কারণ আবূ যুর'আহ বলেনঃ তিনি মুনকার হাদীছ বর্ণনাকারী। আবু হাতিম বলেনঃ তিনি মাজহুল শাইখ, মুনকারুল হাদীছ, হাদীছের ক্ষেত্রে দুর্বল।
` إذا انفلتت دابة أحدكم بأرض فلاة فليناد: يا عباد الله احبسوا علي، يا عباد الله احبسوا علي، فإن لله في الأرض حاضرا سيحبسه عليكم `.
ضعيف.
رواه الطبراني (3 / 81 / 1) وأبو يعلى في ` مسنده ` (254 / 1) وعنه ابن السني في ` عمل اليوم والليلة ` (500) كلاهما من طريق معروف بن حسان السمرقندي عن سعيد بن أبي عروبة عن قتادة عن عبد الله بن بريدة (1) عن عبد الله بن مسعود مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف، وفيه علتان:
(1) هكذا هو في ` الطبراني ` ووقع في ابن السني: ` عن ابن بردة عن أبيه ` والظاهر أنه خطأ من بعض النساخ كما يشعر بذلك كلام الحافظ الآتي. والله أعلم. اهـ.
الأولى: معروف هذا، فإنه غير معروف! قال ابن أبي حاتم (4 / 1 / 333) عن أبيه إنه ` مجهول `.
وأما ابن عدي فقال: إنه ` منكر الحديث `، وبهذا أعله الهيثمي (10 / 132) ، فقال بعد أن عزاه لأبي يعلى والطبراني: ` وفيه معروف بن حسان وهو ضعيف `. الثانية: الانقطاع، وبه أعله الحافظ ابن حجر فقال: ` حديث غريب، أخرجه ابن السني والطبراني، وفي السند انقطاع بين ابن بريدة وابن مسعود `. نقله ابن علان في ` شرح الأذكار ` (5 / 150) . وقال الحافظ السخاوي في ` الابتهاج بأذكار المسافر والحاج ` (ص 39) : ` وسنده ضعيف، لكن قال النووي: إنه جربه هو وبعض أكابر شيوخه `. قلت: العبادات لا تؤخذ من التجارب، سيما ما كان منها في أمر غيبي كهذا الحديث، فلا يجوز الميل إلى تصحيحه بالتجربة! كيف وقد تمسك به بعضهم في جواز الاستغاثة بالموتى عند الشدائد وهو شرك خالص. والله المستعان.
وما أحسن ما روى الهروي في ` ذم الكلام ` (4 / 68 / 1) أن عبد الله بن المبارك ضل في بعض أسفاره في طريق، وكان قد بلغه أن من اضطر (كذا الأصل، ولعل الصواب: ضل) في مفازة فنادى: عباد الله أعينوني! أعين، قال فجعلت أطلب الجزء أنظر إسناده. قال الهروي: فلم يستجز. أن يدعو بدعاء لا يرى إسناده `. قلت: فهكذا فليكن الاتباع. ومثله في الحسن ما قال العلامة الشوكاني في ` تحفة الذاكرين ` (ص 140) بمثل هذه المناسبة: ` وأقول: السنة لا تثبت بمجرد التجربة، ولا يخرج الفاعل للشيء معتقدا أنه سنة عن كونه مبتدعا.
وقبول الدعاء لا يدل على أن سبب القبول ثابت عن رسول الله صلى الله عليه وسلم، فقد يجيب الله الدعاء من غير توسل بسنة وهو أرحم الراحمين، وقد تكون الاستجابة استدراجا `.
وللحديث طريق آخر معضل، أخرجه ابن أبي شيبة في ` المصنف ` (12 / 153 / 2) عن محمد بن إسحاق عن أبان بن صالح أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: فذكره نحوه. وهذا مع إعضاله، فيه ابن إسحاق وهو مدلس وقد عنعنه، والأصح عن أبان عن مجاهد عن ابن عباس موقوفا عليه كما يأتي بيانه في آخر الحديث التالي.
৬৫৫। যদি তোমাদের কোন ব্যক্তির পশু মরুভূমিতে হঠাৎ করে ছুটে যায়, তাহলে সে যেন ডাক দেয়ঃ হে আল্লাহর বান্দারা তোমরা আমার জন্য ধর, হে আল্লাহর বান্দারা তোমরা আমার জন্য ধর। কারণ যমীনে আল্লাহর উপস্থিত বান্দা রয়েছে সে দ্রুত তাকে তোমাদের জন্য ধরে আনবে।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি তাবারানী (৩/৮১/১), আবু ইয়ালা তার `মুসনাদ` (১/২৫৪) গ্রন্থে এবং তার থেকে ইবনুস সুন্নী `আমলুল ইয়াওয়াম ওয়াল লাইল` (৫০০) গ্রন্থে মা’রূফ ইবনু হাসসান আস-সামরিকান্দী সূত্রে সাঈদ ইবনু আবী আরূবা হতে তিনি কাতাদাহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুটি কারণে দুর্বলঃ
১। বর্ণনাকারী এই মা’রূফ পরিচিত নন। ইবনু আবী হাতিম (৪/১/৩৩৩) তার পিতার উদ্বৃতিতে বলেনঃ তিনি মাজহুল। ইবনু আদী বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। হায়ছামীও (১০/১৩২) এ কারণই দর্শিয়ে বলেছেনঃ তাতে মা’রূফ রয়েছেন, তিনি দুর্বল।
২। সনদে বিচ্ছিন্নতা। হাফিয ইবনু হাজার এ সমস্যার কথাই উল্লেখ করেছেন। তিনি বলেছেনঃ হাদীছটি গরীব, সনদে আব্দুল্লাহ ইবনু বুরায়দাহ এবং ইবনু মাসউদের মধ্যে বিচ্ছিন্নতা রয়েছে। ইবনু আলান “শারহুল আযকার” (৫/১৫০) গ্রন্থে তা উল্লেখ করেছেন।
হাফিয সাখাবী বলেনঃ সনদটি দুর্বল। কিন্তু ইমাম নাবাবী বলেনঃ তিনি ও আরো কতিপয় বড় শাইখ বিষয়টি পরীক্ষা করে দেখেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ কোন ইবাদাত পরীক্ষা করার মাধ্যমে গ্রহণযোগ্য হতে পারে না। বিশেষ করে যদি সেটি গায়েবী ব্যাপারে হয় যেমন এ হাদীছটি। অভিজ্ঞতা আর পরীক্ষা করার দ্বারা কোন হাদীছকে সহীহ সাব্যস্ত করা জায়েয না। এ হাদীছটিকে কেউ কেউ মৃত ব্যক্তির নিকট বিপদের সময় সাহায্য প্রার্থনা করা যাবে মর্মে দলীল হিসাবে গ্রহণ করেছেন। নিঃসন্দেহে তা নিছক শিরক।
হাদীছটি অন্য একটি সূত্রেও বর্ণিত হয়েছে, কিন্তু সেটি মু'যাল। তা ছাড়াও তাতে ইবনু ইসহাক নামের এক মুদাল্লিস বর্ণনাকারী রয়েছেন।
` إذا أضل أحدكم شيئا، أو أراد أحدكم غوثا، وهو بأرض ليس بها أنيس فليقل: يا عباد الله أغيثوني، يا عباد الله أغيثوني، فإن لله عبادا لا نراهم `.
ضعيف. رواه الطبراني في ` الكبير ` (مجموع 6 / 55 / 1) : حدثنا الحسين بن إسحاق: حدثنا أحمد بن يحيى الصوفي: حدثنا عبد الرحمن بن شريك قال: حدثني أبي عن عبد الله بن عيسى عن ابن علي عن عتبة بن غزوان عن نبي الله صلى الله عليه وسلم قال: فذكره. وزاد في آخره: ` وقد جرب ذلك `. قلت: وهذا سند ضعيف. وفيه علل:
1 و2 - عبد الرحمن بن شريك وهو ابن عبد الله القاضي وأبوه كلاهما ضعيف، قال الحافظ في الأول منهما: ` صدوق يخطيء `.
وقال في أبيه: ` صدوق يخطيء كثيرا، تغير حفظه منذ ولي القضاء بالكوفة `. وقد أشار إلى هذا الهيثمي بقوله في ` المجمع ` (10 / 132) : ` رواه الطبراني ورجاله وثقوا على ضعف في بعضهم، إلا أن يزيد (كذا) بن علي لم يدرك عتبة `.
3 - الانقطاع بين عتبة وابن علي، هكذا وقع في أصلنا الذي نقلنا منه الحديث (ابن علي) غير مسمى، وقد سماه الهيثمي كما سبق (يزيد) ، وأنا أظنه وهما من الناسخ أو الطابع، فإنه ليس في الرواة من يسمى (يزيد بن علي) والصواب (زيد بن علي) وهو زيد بن علي بن الحسين بن علي بن أبي طالب، ولد سنة ثمانين، ومات عتبة سنة عشرين على أوسع الأقوال فبين وفاته وولادة زيد بن علي دهر طويل!
وقال الحافظ ابن حجر في ` تخريج الأذكار `: ` أخرجه الطبراني بسند منقطع عن عتبة بن غزوان مرفوعا وزاد في آخره ` وقد جرب ذلك `. ثم قال الحافظ: ` كذا في الأصل، أي الأصل المنقول منه هذا الحديث من كتاب الطبراني، ولم أعرف تعيين قائله، ولعله مصنف المعجم، والله أعلم `.
فقد اقتصر الحافظ على إعلاله بالانقطاع، وهو قصور واضح لما عرفت من العلتين الأوليين.
وأما دعوى الطبراني رحمه الله بأن الحديث قد جرب، فلا يجوز الاعتماد عليها، لأن العبادات لا تثبت بالتجربة، كما سبق بيانه في الحديث الذي قبله. ومع أن هذا الحديث ضعيف كالذي قبله، فليس فيه دليل على جواز الاستغاثة بالموتى من الأولياء والصالحين، لأنهما صريحان بأن المقصود بـ ` عباد الله ` فيهما خلق من غير البشر، بدليل قوله في الحديث الأول: ` فإن لله في الأرض حاضرا سيحبسه عليهم `. وقوله في هذا الحديث: ` فإن لله عبادا لا نراهم `.
وهذا الوصف إنما ينطبق على الملائكة أو الجن، لأنهم الذين لا نراهم عادة، وقد جاء في حديث آخر تعيين أنهم طائفة من الملائكة. أخرجه البزار عن ابن عباس بلفظ:
` إن لله تعالى ملائكة في الأرض سوى الحفظة يكتبون ما يسقط من ورق الشجر، فإذا أصابت أحدكم عرجة بأرض فلاة فليناد: يا عباد الله أعينوني `.
قال الحافظ كما في ` شرح ابن علان ` (5 / 151) : ` هذا حديث حسن الإسناد غريب جدا، أخرجه البزار وقال: لا نعلم يروى عن النبي صلى الله عليه وسلم بهذا اللفظ إلا من هذا الوجه بهذا الإسناد `.
وحسنه السخاوي أيضا في ` الابتهاج ` وقال الهيثمي: ` رجاله ثقات `. قلت: ورواه البيهقي في ` الشعب ` موقوفا كما يأتي.
فهذا الحديث - إذا صح - يعين أن المراد بقوله في الحديث الأول ` يا عباد الله ` إنما هم الملائكة، فلا يجوز أن يلحق بهم المسلمون من الجن أو الإنس ممن يسمونهم برجال الغيب من الأولياء والصالحين، سواء كانوا أحياء أو أمواتا، فإن الاستغاثة بهم وطلب العون منهم شرك بين لأنهم لا يسمعون الدعاء، ولوسمعوا لما استطاعوا الاستجابة وتحقيق الرغبة، وهذا صريح في آيات كثيرة، منها قوله تبارك وتعالى:
(والذين تدعون من دونه ما يملكون من قطمير، إن تدعوهم لا يسمعوا دعائكم، ولوسمعوا ما استجابوا لكم، ويوم القيامة يكفرون بشرككم، ولا ينبئك مثل خبير) (فاطر 13 - 14) .
هذا، ويبدو أن حديث ابن عباس الذي حسنه الحافظ كان الإمام أحمد يقويه، لأنه قد عمل به، فقال ابنه عبد الله في ` المسائل ` (217) : ` سمعت أبي يقول: حججت خمس حجج منها ثنتين [راكبا] وثلاثة ماشيا، أو ثنتين ماشيا وثلاثة راكبا، فضللت الطريق في حجة وكنت ماشيا، فجعلت أقول: (يا عباد الله دلونا على الطريق!) فلم أزل أقول ذلك حتى وقعت على الطريق.
أو كما قال أبي، ورواه البيهقي في ` الشعب ` (2 / 455 / 2) وابن عساكر (3 / 72 / 1) من طريق عبد الله بسند صحيح. وبعد كتابة ما سبق وقفت على إسناد البزاز في ` زوائده ` (ص 303) : حدثنا موسى بن إسحاق: حدثنا منجاب بن الحارث: حدثنا حاتم بن إسماعيل عن أسامة بن زيد [عن أبان] ابن صالح عن مجاهد عن ابن عباس أن النبي صلى الله عليه وسلم قال: فذكره.
قلت: وهذا إسناد حسن كما قالوا، فإن رجاله كلهم ثقات غير أسامة بن زيد وهو الليثي وهو من رجال مسلم، على ضعف في حفظه، قال الحافظ في ` التقريب `: ` صدوق يهم `.
وموسى بن إسحاق هو أبو بكر الأنصاري ثقة، ترجمه الخطيب البغدادي في ` تاريخه ` (13 / 52 - 54) ترجمة جيدة.
نعم خالفه جعفر بن عون فقال: حدثنا أسامة بن زيد.... فذكره موقوفا على ابن عباس. أخرجه البيهقي في ` شعب الإيمان ` (2 / 455 / 1) . وجعفر بن عون أو ثق من حاتم بن إسماعيل، فإنهما وإن كانا من رجال
الشيخين، فالأول منهما لم يجرح بشيء، بخلاف الآخر، فقد قال فيه النسائي: ليس بالقوي. وقال غيره: كانت فيه غفلة. ولذلك قال فيه الحافظ: ` صحيح الكتاب، صدوق يهم `. وقال في جعفر: ` صدوق `. ولذلك فالحديث عندي معلول بالمخالفة، والأرجح أنه موقوف، وليس هو من الأحاديث التي يمكن القطع بأنها في حكم المرفوع، لاحتمال أن يكون ابن عباس تلقاها من مسلمة أهل الكتاب. والله أعلم.
ولعل الحافظ ابن حجر رحمه الله لواطلع على هذه الطريق الموقوفة، لانكشفت له العلة، وأعله بالوقف كما فعلت، ولأغناه ذلك عن استغرابه جدا، والله أعلم.
৬৫৬। তোমাদের কোন ব্যক্তি যদি কিছু হারিয়ে ফেলে বা তোমাদের কেউ যদি সাহায্য পাওয়ার ইচ্ছা করে এমন এক ভূমিতে যেখানে কোন মানুষ নেই, তাহলে সে যেন বলেঃ হে আল্লাহর বান্দারা তোমরা আমাকে সাহায্য কর, হে আল্লাহর বান্দারা তোমরা আমাকে সাহায্য কর, কারণ আল্লাহর এমন বান্দা রয়েছে যাদেরকে আমরা দেখি না।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি তাবারানী “মুজামুল কাবীর” (৬/৫৫/১) গ্রন্থে আল-হুসাইন ইবনু ইসহাক হতে তিনি আহমাদ ইবনু ইয়াহইয়া আস-সূফী হতে তিনি আব্দুর রহমান ইবনু শুরায়িক হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু ঈসা হতে তিনি ইবনু আলী হতে তিনি উতবাহ ইবনু গাযওয়ান হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সনদটি নিম্নে বর্ণিত সমস্যার কারণে দুর্বলঃ
১ ও ২। আব্দুর রহমান ইবনু শুরায়িক ও তার পিতা দুর্বল। হাফিয ইবনু হাজার আব্দুর রহমান সম্পর্কে বলেনঃ তিনি সত্যবাদী, ভুল করতেন। আর তার পিতা সম্পর্কে বলেনঃ তিনি সত্যবাদী, বহু ভুল করতেন। তাকে যখন কুফার কাযী নিয়োগ করা হয় তখন হতে তার হেফযে পরিবর্তন ঘটে।
৩। সনদে উতবাহ ও ইয়াযীদ ইবনু আলীর (সঠিক হচ্ছে যায়েদ ইবনু আলী) মধ্যে বিচ্ছিন্নতা। যায়েদ আশি হিজরীতে জন্ম গ্রহণ করেন আর উতবাহ বিশ হিজরীতে মারা যান।
তবে মওকুফ হিসাবে বর্ণিত হয়েছে। `কারণ আল্লাহর এমন বান্দা রয়েছে যাদেরকে আমরা দেখি না।` এ গুণাবলী ফেরেশতা বা জিনদের ক্ষেত্রে প্রযোজ্য। কারণ সাধারণত আমরা তাদেরকেই দেখি না। কিন্তু ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণিত হয়েছে, যাতে তিনি ফেরেশতাদের কথা বলে নির্দিষ্ট করেছেন। যদি মওকুফ হিসাবে সহীহও হয়, তাহলেও আল্লাহর বান্দা দ্বারা ফেরেশতাদেরকে বুঝানো হয়েছে। তাদের সাথে মুসলিম জিন বা মানবকে সম্পৃক্ত করা ঠিক হবে না। চাই তারা মৃত হোক বা জীবিত হোক। কারণ তাদের থেকে সাহায্য প্রার্থনা করা সুস্পষ্ট শিরক। তারা কোন আহবান শুনে না। যদি শুনে তবুও তাদের উত্তর দেয়ার ক্ষমতা নেই।
আল্লাহ তা'আলা বলেনঃ “তার পরিবর্তে তোমরা যাদেরকে ডাক, তারা তুচ্ছ খেজুর অটিরও অধিকারী নয়। তোমরা তাদেরকে ডাকলে তারা তোমাদের সে ডাক শুনে না। শুনলেও তোমাদের ডাকে সাড়া দেয় না। কিয়ামতের দিন তারা তোমাদের শিৱক অস্বীকার করবে। বস্তুত আল্লাহর ন্যায় তোমাকে কেউ অবহিত করতে পারবে না` সূরা ফাতিরঃ ১৩-১৪।
(অনুবাদক কর্তৃক নির্দেশিকাঃ এ ছাড়া আল্লাহর রাসূল বলেছেনঃ তোমরা কিছু চাইলে আল্লাহর কাছেই চাও আর কোন সহযোগিতা প্রার্থনা করলে আল্লাহর মাধ্যমেই সাহায্য প্রার্থনা কর তিরমিয়ী (হাঃ নং ২৪৪০) ও ইমাম আহমাদ বর্ণনা করেছেন।) অতএব হাদীছটি মুনকার ।
` من ترك أربع جمعات من غير عذر، فقد نبذ الإسلام وراء ظهره `.
ضعيف.
أخرجه ابن الحمامي الصوفي في ` منتخب من مسموعاته ` (ق 34 / 1) من طريق شريك عن عوف الأعرابي عن سعيد بن أبي الحسن عن ابن عباس مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد ضعيف، لأن شريكا هذا وهو ابن عبد الله القاضي ضعفوه لسوء حفظه.
لاسيما وقد خولف في لفظه ورفعه، فقال أبو يعلى في ` مسنده ` (2 / 719) : حدثنا حميد بن مسعدة: أخبرنا سفيان بن حبيب عن عوف به موقفا على ابن عباس بلفظ:
` من ترك الجمعة ثلاث جمع متواليات، فقد نبذ.... ` إلخ.
قلت: وهو إسناد صحيح كما قال المنذري (1 / 261) ، ورجاله ثقات رجال مسلم غير سفيان بن حبيب، وهو ثقة أخرج له البخاري في ` الأدب المفرد ` ومنه تعلم خطأ الهيثمي في إطلاقه قوله (2 / 193) :
` ورجاله رجال الصحيح `. والحديث أورده الغزالي في ` الإحياء ` (1 / 160) مرفوعا بلفظ: ` ثلاث `، فقال مخرجه الحافظ العراقي: ` رواه البيهقي في ` الشعب ` من حديث ابن عباس `.
قلت: فهذا يدل بظاهره أنه مرفوع عند البيهقي فليراجع من استطاع إسناده في ` شعب الإيمان `، فإنه لا يزال غالبه غير مطبوع حتى الآن. وقد أخرجه الشافعي في ` مسنده ` (رقم 381 - ترتيب السندي) : أخبرنا إبراهيم بن محمد: حدثني صفوان بن سليم عن إبراهيم بن عبد الله بن سعيد عن أبيه عن عكرمة عن ابن عباس مرفوعا بلفظ: ` من ترك الجمعة من غير ضرورة كتب منافقا في كتاب لا يمحى ولا يبدل `. وفي بعض
الحديث: (ثلاثا) . قلت: وهذا إسناد ضعيف جدا إبراهيم بن محمد وهو ابن أبي يحيى المدني متروك. وأما إبراهيم بن عبد الله بن سعيد عن أبيه، فلم أعرفهما، ولم يترجمهما الحافظ في ` التعجيل `. والله أعلم.
৬৫৭। যে ব্যক্তি বিনা কারণে চার জুম'আহ (সালাতুল জুম'আহ) ছেড়ে দিবে, সে ইসলামকে তার পিঠের পিছনে নিক্ষেপ করল।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি ইবনুল হুমায়ী আস-সূফী “মুনতাখাবু মিন মাসমূআতিহি” (কাফ ১/৩৪) গ্রন্থে শুরায়িক সূত্রে আউফ আল-আরাবী হতে তিনি সাঈদ ইবনু আবিল হাসান হতে তিনি ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। কারণ এ শুরায়িক হচ্ছেন ইবনু আবদিল্লাহ আল-কাযী, তাকে মুহাদ্দিছগণ হেফযে ক্রটি থাকার কারণে দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন।
এ ছাড়া সহীহ সনদে তার ভাষার বিরোধিতাও করা হয়েছে। আবু ইয়ালা তার `মুসনাদ` (২/৭১৯) গ্রন্থে ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেনঃ যে ব্যক্তি পর পর তিনটি জুম'আহ ছেড়ে দিবে...`।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটির সনদটি সহীহ যেমনটি মুনযের (১/১৬০) বলেছেন।
` عج حجر إلى الله تعالى فقال: إلهي وسيدي عبدتك منذ كذا وكذا سنة (وفي رواية: ألف سنة) ، ثم جعلتني في أس كنيف؟ فقال: أو ما ترضى أن عدلت بك عن مجالس القضاة؟ `.
موضوع.
أخرجه تمام الرازي في ` الفوائد ` (5 / 58 / 2 من مجموع الظاهرية رقم 92) ومن طريقه ابن عساكر في ` تاريخه ` (15 / 324 / 1 - 2) من طريق أبي معاوية عبيد الله بن محمد القري المؤدب قال مرة: حدثنا محمود بن خالد: حدثنا عمر عن الأوزاعي، ومرة قال: عبد الرحمن بن إبراهيم: حدثنا الوليد بن مسلم عن الأوزاعي عن يحيى بن أبي كثير عن أبي سلمة عن أبي هريرة مرفوعا.
وقال الرازي: ` هذا حديث منكر، وأبو معاوية القري هذا ضعيف وكان يحدث بهذا الحديث بالإسنادين جميعا `. وأقره الشيخ أحمد بن عز الدين بن عبد السلام في ` النصيحة بما أبدته القريحة ` (ق 41 / 1) .
والحديث ذكره السيوطي في ` الجامع ` من رواية تمام وابن عساكر عن أبي هريرة. وتعقبه شارحه المناوي بكلام الرازي هذا، ونقل الحافظ في ` اللسان ` عن ابن عساكر أنه قال فيه: ` كان ضعيفا `.
ثم رأيت السيوطي قد أورد الحديث في ` ذيل الأحاديث الموضوعة ` (رقم 632) من رواية تمام وإنكاره للحديث. ووافقه ابن عراق فأورده في ` تنزيه الشريعة ` (315 / 2) وقال: ` قال الذهبي في ` تلخيص الواهيات `، وابن حجر في ` لسان الميزان `: هذا موضوع `.
৬৫৮। একটি পাথর আল্লাহর নিকট চিৎকার করে বললঃ হে আমার প্রভু, হে আমার সর্দার! আমি এতো এতো (অন্য বর্ণনায় এসেছেঃ এক হাজার বছর যাবত) বছর যাবত তোমার ইবাদাত করে আসছি। অতঃপর তুমি আমাকে টয়লেটের দেয়ালে স্থান দিলে। তিনি (আল্লাহ) বললেনঃ কাযীদের মজলিসগুলো হতে তোমাকে পত্রিরাণ দিয়েছি তুমি কি তাতে সন্তুষ্ট নও?
হাদীছ জাল।
এটি তাম্মাম আর-রায়ী `আল-ফাওয়ায়েদ` (৫/৫৮/২) গ্রন্থে এবং তার সূত্রে ইবনু আসাকির তার `আত-তারীখ` (১৫/৩২৪/১-২) গ্রন্থে আবু মুয়াবিয়াহ ওবায়দুল্লাহ ইবনু মুহাম্মাদ সূত্রে তিনি একবার বলেনঃ মাহমূদ ইবনু খালেদ হতে তিনি উমার হতে তিনি আওযাঈ হতে, আরেকবার বলেনঃ আব্দুর রহমান ইবনু ইবরাহীম হতে তিনি আল-ওয়ালীদ ইবনু মুসলিম হতে তিনি আওযাঈ হতে তিনি ইয়াহইয়া ইবনু আবী কাছীর হতে তিনি আবু সালামাহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আর-রাযী বলেনঃ এ হাদীছটি মুনকার। আবু মুয়াবিয়াহ দুর্বল। তিনি একই সাথে হাদীছটি দুই সনদে বর্ণনা করতেন।
হাদীছটি সুয়ূতী “আল-জামে` গ্রন্থে উল্লেখ করায় তার ভাষ্যকার মানবী আল-রাযীর বক্তব্য উল্লেখ করে তার সমালোচনা করেছেন। হাফিয ইবনু হাজার ইবনু আসাকির হতে নকল করেছেন, তিনি বলেনঃ তিনি (আবু মুয়াবিয়াহ) দুর্বল ছিলেন।
অতঃপর সুয়ূতী হাদীছটি “যায়লুল আহাদীছিল মাওযুআহ” (নং ৬৩২) গ্রন্থে তাম্মামের বর্ণনায় উল্লেখ করেছেন। হাদীছটিকে তার অস্বীকার করার কথাও উল্লেখ করেছেন। ইবনু ইরাক `তানযীহুশ শারীয়াহ` (২/৩১৫) গ্রন্থে তার কথার সাথে ঐকমত্য পোষণ করে বলেছেনঃ যাহাবী “তালখীসুল ওয়াহিয়াত” গ্রন্থে এবং ইবনু হাজার `লিসানুল মীযান` গ্রন্থে বলেনঃ এ হাদীছটি বানোয়াট।
` أيما شاب تزوج في حداثة سنه، عج شيطانه: يا ويله عصم مني دينه `.
موضوع.
رواه أبو يعلى في ` مسنده ` (ق 115 / 1) ومن طريقه ابن حبان في ` الضعفاء ` (1 / 275) والطبراني في ` الأوسط ` (1 / 162 / 2 من الجمع بين زوائده وزوائد ` الصغير `) وابن زيدان في ` مسنده ` (20 / 1) والخطيب (8 / 33) وابن عساكر (8 / 506 / 1) عن خالد بن إسماعيل المخزومي: حدثنا عبيد الله بن عمر عن صالح بن أبي صالح مولى التوأمة عن جابر مرفوعا به.
قلت: وهذا موضوع، وله آفتان: الأولى: صالح هذا، فإنه ضعيف، ولكن الحمل فيه على غيره. الثانية: خالد هذا وكنيته أبو الوليد، قال ابن حبان: ` روى عن عبيد الله بن عمر العجائب، لا يجوز الاحتجاج به بحال، ولا الرواية عنه `. وقال الذهبي: ` قال ابن عدي: كان يضع الحديث، وقال الدارقطني: متروك `.
ولهذا وصفه الذهبي في ` الكنى ` من ` ميزانه ` بأنه ` الكذاب `. وقال الحافظ محمد بن عبد الهادي تلميذ ابن تيمية في بعض أبحاثه في التفسير والحديث (1) :
` هذا حديث موضوع، وخالد بن إسماعيل المخزومي متروك ` وقال الهيثمي في ` المجمع ` (4 / 253) : ` رواه أبو يعلى والطبراني في ` الأوسط ` وفيه خالد بن إسماعيل المخزومي وهو متروك `. قلت: وقد تابعه عصمة بن محمد بن عبيد الله بن عمر به. أخرجه ابن عساكر (18 / 76 / 1) ، ولكنها متابعة لا تسمن ولا تغني من جوع
، فإن عصمة هذا حاله كحال المخزومي، فقال الدارقطني وغيره: ` متروك `. وقال يحيى: ` كذاب يضع الحديث `.
৬৫৯। যে কোন যুবক অল্প বয়সে বিয়ে করলে তার শয়তান চিল্লিয়ে বলেঃ হায় অপমান। সে তার দ্বীনকে আমার থেকে বাচিয়ে নিল।
হাদীছটি জাল।
এটি আবু ইয়ালা তার `মুসনাদ` (কাফ ১/১১৫) গ্রন্থে, তার সূত্রে ইবনু হিব্বান `আয-যোয়াফা` (১/২৭৫) গ্রন্থে, তাবারানী `আল-মুজামুল আওসাত` (১/১৬২/২) গ্রন্থে, ইবনু যায়দান তার “মুসনাদ’ (১/২০) গ্রন্থে, আল-খাতীব “আত-তারীখ” (৮/৩৩) গ্রন্থে এবং ইবনু আসাকির (৮/৫০৬/১) খালেদ ইবনু ইসমাঈল আল-মাখযুমী হতে তিনি ওবায়দুল্লাহ ইবনু উমার হতে তিনি সালেহ ইবনু আবী সালেহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটি বানোয়াট। তার দুটি সমস্যাঃ
১। এই সালেহ দুর্বল।
২। এই খালেদের কুনিয়াত হচ্ছে আবুল ওয়ালীদ, তার সম্পর্কে ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি ওবায়দুল্লাহ ইবনু উমার হতে আশ্চর্যজনক কিছু বর্ণনা করেছেন। কোন অবস্থাতেই তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করা ও তার থেকে বর্ণনা করা জায়েয নয়। হাফিয যাহাবী বলেনঃ ইবনু আদী বলেছেনঃ তিনি হাদীছ জাল করতেন। দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মাতরূক। এ কারণেই যাহাবী `আল-কুনা` গ্রন্থে বলেছেনঃ তিনি মিথ্যুক।
ইবনু তাইমিয়্যার ছাত্র হাফিয মুহাম্মাদ ইবনু আব্দিল হাদী বলেনঃ এ হাদীছটি বানোয়াট। খালেদ ইবনু ইসমাঈল আল-মাখযুমী মাতরূক।
ইসমা ইবনু মুহাম্মাদ খালেদের মুতাবায়াত করেছেন। কিন্তু তার অবস্থাও খালেদের মতই। তার সম্পর্কে দারাকুতনী ও অন্য বিদ্বানগণ বলেনঃ তিনি মাতরূক। ইয়াহইয়া বলেনঃ তিনি মিথ্যুক, হাদীছ জালকারী।
موارد) ، والدارمي (2/ 274) .
وقد تابع سفيان - وهو الثوري - إبراهيم بن طهمان عن منصور والحكم عن طلحة بن مصرف به.
أخرجه الحاكم (1/ 575) .
وعنده (1/ 571 - 572) طرق أخرى عن منصور وحده.
الثالث: أن منصوراً قد تابعه الأعمش والحكم كما رأيت.
وتابعهم شعبة عن طلحة به.
أخرجه الطيالسي (738) ، وأحمد (4/ 304) ، والحاكم (1/ 573) .
ولهم عنده متابعون آخرون كثيرون، وفيما ذكرنا كفاية.
الرابع: أن طلحة - وهو ابن مصرف - قد تابعه جماعة:
منهم زبيد بن الحارث عن عبد الرحمن بن عوسجة به.
أخرجه الحاكم (1/ 575) ، والخطيب (4/ 261) .
الخامس: أن عبد الرحمن بن عوسجة قد تابعه عن البراء: زاذان أبو عمر، وعدي بن ثابت، وأوس بن ضمعج.
أخرج أحاديثهم الحاكم باللفظ المحفوظ؛ إلا أن زاذان زاد فقال:
`.. فإن الصوت الحسن يزيد القرآن حسناً`.
وأخرجه الدارمي (2/ 274) أيضاً، وتمام في `الفوائد`.
وسنده جيد؛ كما بينته في `صحيح أبي داود` (1320) وفي الكتاب الآخر (771) .
السادس: أن البراء تابعه جمع من الصحابة باللفظ المحفوظ، منهم: عائشة وأبو هريرة، وعبد الله بن مسعود، وقد خرجت أحاديثهم في `الصحيح` تحت الرقم المذكور آنفاً.
أقول: ففي هذه الطرق والمتابعات والشواهد دلالة قاطعة على أن حديث الترجمة منكر مقلوب؛ لمخالفة راويه هذه الروايات، والنكارة تثبت بأقل من ذلك؛ كما لا يخفى على المشتغلين بهذا العلم الشريف.
فإن قيل: لم يتفرد الدبري بالحديث؛ فقد قال الحاكم (1/ 572) : حدثنا عبد الله بن سعد: حدثنا إبراهيم بن إسحاق الأنماطي: حدثنا عبد الرحمن بن بشر: حدثنا عبد الرزاق: أنبأ معمر والثوري عن الأعمش بإسناده المتقدم بلفظ:
`زينوا أصواتكم بالقرآن`.
فأقول: رجال إسناده ثقات معروفون؛ غير عبد الله بن سعد؛ فإني لم أجد له ترجمة فيما لدي من المصادر الآن، فإن كان ثقة كالذين فوقه؛ فيكون الوهم من عبد الرزاق نفسه؛ لاختلاطه كما تقدم، ولأننا لا ندري أسمع من عبد الرزاق قبل الاختلاط أم بعده؟ والثاني هو الأقرب؛ لأن عبد الرزاق مات سنة (211) ،
وابن بشر سنة (260) أو (262) ، فبين وفاتيهما قرابة خمسين سنة، ومعنى هذا أنه سمع منه في آخر حياته! والله أعلم.
وجملة القول: أن حديث الترجمة هو المقلوب يقيناً، وهو إما منكر أو شاذ في اصطلاحهم.
هذا من حيث الرواية.
وأما المعنى: فقال الخطابي - في الحديث المحفوظ: `زينوا القرآن بأصواتكم` - :
`معناه: زينوا أصواتكم بالقرآن! من باب المقلوب كما قالوا: عرضت الناقة على الحوض؛ أي: عرضت الحوض على الناقة. وكقولهم: إذا طلعت الشعرى واستوى العود على الحرباء؛ أي: استوى الحرباء على العود`.
ثم روى بإسناده الصحيح عن شعبة قال: نهاني أيوب أن أحدث: `زينوا القرآن بأصواتكم`. ثم قال:
`قلت: ورواه معمر عن منصور عن طلحة، فقدم الأصوات على القرآن، وهو الصحيح`، ثم ساق إسناده إلى الدبري بسنده المتقدم. ثم قال:
`والمعنى: اشغلوا أصواتكم بالقرآن، والهجوا بقراءته، واتخذوه شعاراً وزينة`.
والجواب من وجوه:
أولاً: أن القلب المدعى خلاف الأصل؛ فالواجب التمسك بالأصل ما دام ممكناً، وهو كذلك هنا عند الجمهور؛ كما سيأتي.
ثانياً: ما رواه عن شعبة أن أيوب نهاه أن يحدث بحديث: `زينوا
القرآن … `؛ ليس لأنه حديث مقلوب كما يدعي الخطابي، وإنما خشية أن يتأوله المبتدعة بما يخالفون به السنة؛ فقد رواه أبو عبيد القاسم بن سلام أيضاً بإسناده الصحيح عن شعبة به، وقال عقبه:
`وإنما كره أيوب - فيما نرى - أن يتأول الناس بهذا الحديث الرخصة من رسول الله صلى الله عليه وسلم في الألحان المبتدعة، فلهذا نهاه أن يحدث به`.
ذكره ابن كثير في `فضائل القرآن` (ص 56) ، ثم قال عقبه:
`قلت: ثم إن شعبة (1) رحمه الله روى الحديث متوكلاً على الله كما روي له، ولو ترك كل حديث يتأوله مبطل؛ لترك من السنة شيء كثير، بل قد تطرقوا إلى تأويل آيات كثيرة من القرآن، وحملوها على غير محاملها الشرعية المرادة، وبالله المستعان، وعليه التكلان، ولا حول ولا قوة إلا بالله`.
ثالثاً: ما عزاه لغير واحد من أئمة الحديث من أن المعنى: `زينوا أصواتكم بالقرآن`! فهو - مع أنه لم يسنده إليهم، ولا سمى واحداً منهم - ؛ فهو مردود بما في `غريب ابن الأثير`؛ فإنه ذكر هذا المعنى المقلوب (!) ولم يعزه لأحد، ثم أتبعه بقوله:
`وقيل: أراد بـ (القرآن) : القراءة، فهو مصدر (قرأ يقرأ قراءة وقرآناً) ؛ أي: زينوا قراءتكم القرآن بأصواتكم، ويشهد لصحة هذا - وأن القلب لا وجه له - : حديث أبي موسى: أن النبي صلى الله عليه وسلم استمع إلى قراءته فقال: `لقد أوتيت مزماراً من مزامير آل داود`، فقال: لو علمت أنك تستمع؛ لحبرته لك تحبيراً (2) ؛ أي: حسنت قراءته وزينتها، ويؤيد ذلك - تأييداً لا شبهة فيه - حديث ابن عباس: أن
(1) انظر تخريج روايته فيما تقدم (ص 520) . (الناشر)
(2) انظر ` صفة الصلاة ` (ص 130) . (الناشر)
رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: `لكل شيء حلية، وحلية القرآن حسن الصوت`. والله أعلم`.
قلت: حديث ابن عباس هذا ضعيف الإسناد لا تقوم به حجة، كما تقدم بيانه برقم (4322) ، فالأولى الاستدلال بالزيادة المتقدمة في بعض طرق حديث البراء المحفوظ بلفظ:
`فإن الصوت الحسن يزيد القرآن حسناً`.
ويشهد أيضاً لصحة ما تقدم حديث: `ليس منا من لم يتغن بالقرآن`؛ فإن المراد به وبأمثاله تحسين الصوت، وبذلك فسره جماعة من السلف؛ منهم ابن أبي مليكة، والراوي عنه بهذا الحديث - وهو عبد الجبار بن الورد - ؛ فإنه قال عقب الحديث:
فقلت لابن أبي مليكة: يا أبا محمد! أرأيت إذا لم يكن حسن الصوت؟ قال: يحسنه ما استطاع.
أخرجه أبو داود، وهو في `صحيحه` برقم (1322،1323) . قال ابن كثير عقبه:
`فقد فهم من هذا أن السلف رضي الله عنهم إنما فهموا من التغني بالقرآن إنما هو تحسين الصوت به وتحزينه؛ كما قال الأئمة رحمهم الله`.
ويشهد له أيضاً حديث أبي هريرة مرفوعاً:
`ما أذن الله بشيء ما أذن (وفي لفظ: كأذنه) لنبي [حسن الصوت (وفي لفظ: حسن الترنم) ] ، يتغنى بالقرآن [يجهر به] `.
قال الحافظ في `الفتح` بعد أن ذكر الخلاف في تفسير التغني لغة (9/ 63) :
`ظواهر الأخبار ترجح أن المراد: تحسين الصوت، ويؤيده قوله: `يجهر به`؛ فإنها إن كات مرفوعة قامت الحجة به، وإن كانت غير مرفوعة؛ فالراوي أعرف بمعنى الخبر من غيره؛ لا سيما إذا كان فقيهاً. ولا شك أن النفوس تميل إلى سماع القراءة بالترنم أكثر من ميلها لمن لا يترنم؛ لأن للتطريب تأثيراً في رقة القلب، وإجراء الدمع، وكان بين السلف اختلاف في جواز القرآن بالألحان، أما تحسين لصوت، وتقديم حسن الصوت على غيره؛ فلا نزاع في ذلك … ومحل هذا الاختلاف إذا لم يختل شيء من الحروف عن مخرجه، فلو تغير؛ قال النووي في `التبيان`: أجمعوا على تحريمه. ولفظه: أجمع العلماء على استحباب تحسين الصوت بالقرآن؛ ما لم يخرج عن حد القراءة بالتمطيط، فإن خرج حتى زاد حرفاً أو أخفاه؛ حرم`.
ثم ذكر (9/ 80) أن ابن أبي داود أخرج من طريق ابن أبي مشجعة قال: كان عمر يقدم الشاب الحسن الصوت؛ لحسن صوته بين يدي القوم.
ومن طريق أبي عثمان النهدي قال: دخلت دار أبي موسى الأشعري، فما سمعت صوت صنج ولا بربط ولا ناي أحسن من صوته. وقال الحافظ:
`سنده صحيح؛ وهو في `الحلية` لأبي نعيم [1/ 258] .
و (الصنج) - بفتح المهملة وسكون النون بعدها جيم - : هو آلة تتخذ من نحاس، كالطبقين، يضرب أحدهما بالآخر.
و (البربط) - بالموحدتين بينهما راء ساكنة ثم طاء مهملة، بوزن جعفر - : هو آلة تشبه العود، فارسي معرب.
و (الناي) - بنون بغير همز - : هو المزمار`.
وجملة القول: أن الخطابي أخطأ خطأ فاحشاً في تصحيحه لحديث الترجمة، وترجيحه إياه على اللفظ الصحيح المخالف له، مع كثرة طرقه وشواهده، وتفرد أحد الرواة برواية معارضه، كما أخطأ في ادعائه أن معنى الحديث على القلب، والكمال لله تعالى وحده.
فإن قيل: فإن لحديث الترجمة شاهداً من حديث ابن عباس مرفوعاً بلفظ:
`زينوا أصواتكم بالقرآن … `؛ مثل حديث الترجمة. وفي رواية:
`أحسنوا الأصوات بالقرآن`.
أوردهما الهيثمي في `مجمع الزوائد` (7/ 170) ، وقال:
`رواه الطبراني بإسنادين، وفي إحدهما عبد الله بن خراش، وثقه ابن حبان وقال: `ربما أخطأ`، ووثقه البخاري وغيره، وبقية رجاله رجال (الصحيح) `!
فأقول: كلا الإسنادين ضعيف جداً؛ فلا يفرح بهما ولا يستشهد بهما مطلقاً؛ لشدة ضعف رواتهما؛ فكيف مع المخالفة لأحاديث الثقات، كما هو الشأن هنا؟! وإليك البيان:
أما الأول: فأخرجه الطبراني في `الكبير` (3/ 110/ 1) من طريق عبد الله بن خراش عن العوام بن حوشب عن مجاهد عن ابن عباس … باللفظ الأول.
وهذا إسناد ضعيف؛ آفته ابن خراش هذا؛ فإنه مجمع على تضعيفه. ولا ينافي ذلك أن ابن حبان أورده في `الثقات`، وذلك لأمرين:
الأول: ما عرف عند المحققين في هذا الفن أن ابن حبان متساهل في التوثيق، ولا سيما وقد قال فيه هو نفسه:
`ربما أخطأ`.
والآخر: أنه معارض لكل من تكلم فيه، وكلهم جرحوه، والجرح مقدم على التعديل، لا سيما إذا كان من الأئمة المشهورين بالنقد والمعرفة بهذا العلم، كالإمام البخاري وغيره كما يأتي؛ بخاصة إذا كان المعدل متساهلاً كابن حبان، وإليك ما قالوا فيه:
1 - الإمام البخاري: `منكر الحديث`. قاله في `التاريخ الصغير` (ص 194) و `الكبير` (5/ 80) ، ونقله عنه جمع كما يأتي.
2 - أبو حاتم الرازي: `منكر الحديث، ذاهب الحديث، ضعيف الحديث`.
3 - أبو زرعة: `ليس بشيء، ضعيف الحديث`. رواه والذي قبله: ابن أبي حاتم (2/ 2/ 46) .
4 - النسائي: `ليس بثقة`؛ قاله في كتابه `الضعفاء والمتروكون` (ص 18) .
5 - قال الساجي: `ضعيف الحديث جداً، ليس بشيء، كان يضع الحديث`.
6 - وقال محمد بن عمار الموصلي: `كذاب`. كما في `التهذيب` وغيره.
7 - وأورده العقيلي في `الضعفاء` (201 - 202) ، وساق له أحاديث منكرة، وقال عقبها:
`كلها غير محفوظة، ولا يتابعه إلا من هو دونه أو مثله`.
8 - وقال الحافظ العسقلاني في `التقريب`:
`ضعيف، وأطلق عليه ابن عمار الكذب`.
قلت: فهذا يبين لك إجماع الأئمة الموثوق بنقدهم على تضعيفه، ولم ينقل الحافظ أو غيره توثيقه عن أحد من الحفاظ سوى ابن حبان، وقد عرفت الجواب عنه.
ولذلك؛ فإني أعتقد أن قول الهيثمي المتقدم فيه:
`ووثقه البخاري وغيره` وهم فاحش؛ لاسيما بالنسبة للبخاري؛ فإنه قد جرحه جرحاً شديداً كما يشعر بذلك قوله السابق: `منكر الحديث`، وقد ذكره في كتابيه المتقدمين، ورواه عنه العقيلي، وذكره الحافظ وغيره.
وأما الإسناد الآخر؛ فقال الطبراني (3/ 170/ 2) : حدثنا أبو يزيد القراطيسي: أخبرنا نعيم بن حماد: أخبرنا عبدة بن سليمان عن سعيد أبي سعد البقال عن الضحاك بن مزاحم عن ابن عباس … باللفظ الآخر.
قلت: وهذا إسناد ضعيف جداً؛ مسلسل بالضعفاء والعلل:
الأولى: الانقطاع بين الضحاك وابن عباس؛ فإنه لم يثبت له سماع من أحد من الصحابة؛ كما في `التهذيب`، بل إنه لم يلق ابن عباس.
الثانية والثالثة: ضعف وتدليس سعيد - وهو ابن المرزبان البقال - ؛ قال الحافظ:
`ضعيف مدلس`.
الرابعة: نعيم بن حماد؛ تكلموا فيه، وقال الحافظ:
`صدوق يخطىء كثيراً`.
لكن هذا لم يتفرد به؛ فقد تابعه أبو سعيد الأشج: حدثنا عبدة بن سليمان به، وتابع هذا: مرجى بن رجاء عن سعيد البقال به.
أخرجهما ابن عدي (ق 156/ 1) في ترجمة البقال، مشيراً إلى أنه هو علة الحديث.
৬৬০ । তিনি যখন সালাত আদায় করতেন তখন তার ডান হাত দ্বারা তার মাথা স্পর্শ করে বলতেনঃ বিসমিল্লাহিল্লায়ী লা ইলাহা গায়রুহু আর-রাহমানির রাহীম, আল্লাহুম্মাযহাব আন্নীল হাম্মা ওয়াল হযনা।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি তাবরানী `আল-মুজামুল আওসাত` (পৃঃ ৪৫১) এবং আল-খাতীব (১২/৪৮০) কাছীর ইবনু সুলায়েম হতে তিনি আবু সালামাহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ বর্ণনাকারী কাছীরের কারণে এ সনদটি নিতান্তই দুর্বল। ইমাম বুখারী ও আবু হাতিম বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। নাসাঈ এবং আল-আযদী বলেনঃ তিনি মাতরূক। অন্য বিদ্বানগণ তাকে দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। হাদীছটি সুয়ুতী `আল-জামে` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। অথচ তার ভাষ্যকার তার সমালোচনা করেননি।
আমি এটির আরেকটি সূত্র পেয়েছি, সেটি ইবনুস সুন্নী (নং ১১০) এবং আবু নোয়াইম `আল-হিলইয়্যাহ` (২/৩০১) গ্রন্থে সালামাহ হতে তিনি যায়েদ ইবনুল আম্মী হতে তিনি মুয়াবিয়াহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।
এটি বানোয়াট। কারণ সালামাহ হচ্ছেন আত-তাবীল, তিনি মিথ্যুক।