হাদীস বিএন


সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ





সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (721)


` لا تميتوا القلوب بكثرة الطعام والشراب، فإن القلب كالزرع يموت إذا كثر عليه الماء `.
لا أصل له.
وإن جزم الغزالي بعزوه إلى النبي صلى الله عليه وسلم! فقد قال مخرجه العراقي (3 / 70) ` لم أقف له على أصل `.
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৭২১। অধিক পানাহারের দ্বারা তোমরা হৃদয়গুলোকে মেরে ফেলো না। কারণ হৃদয় হচ্ছে ক্ষেতের ন্যায়, যখন তাতে পানি বেশী হয়ে যায় তখন মৃত্যু বরণ করে।





হাদীছটির কোন ভিত্তি নেই।





যদিও গাযালী দৃঢ়তার সাথে হাদীছ হিসাবে উল্লেখ করেছেন। তার তাখরীজকারী ইরাকী (৩/৭০) বলেনঃ আমি হাদীছটির কোন ভিত্তি সম্পর্কে অবহিত হইনি











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (722)


` الليل والنهار مطيتان، فاركبوهما بلاغا إلى الآخرة، وإياك والتسويف بالتوبة، وإياك والغرة بحلم الله `.
ضعيف جدا.
رواه أبو الطيب محمد بن حميد الحوراني في ` جزئه ` (ورقة 70 وجه 1 - من مجموع ظاهرية دمشق رقم 87) من طريق عمرو بن بكر عن سفيان الثوري عن أبيه عن عكرمة عن ابن عباس مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف جدا من أجل عمرو هذا، قال الذهبي: ` واه، قال ابن عدي: له أحاديث مناكير عن الثقات: ابن جريج وغيره، وقال ابن حبان: يروي عن الثقات الطامات `. ثم قال الذهبي في ترجمته: ` أحاديثه شبه موضوعة `. وقال الحافظ في ` التقريب `: ` متروك `.
والحديث أورده السيوطي في ` الجامع الصغير ` بالشطر الأول فقط وقال: ` رواه ابن عدي وابن عساكر عن ابن عباس `. وتعقبه المناوي بقوله: ` قضية كلام المصنف أن ابن عدي خرجه وأقره، والأمر بخلافه، فإنه أورده في ترجمة عبد الله بن محمد بن المغيرة وقال: عامة ما يرويه لا يتابع عليه. وفي ` الميزان ` قال أبو حاتم: غير قوي، وقال ابن يونس: منكر الحديث، ثم ساق له هذا الخبر `. قلت: ومن طريقه رواه تمام (250 / 2) .
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৭২২। রাত ও দিন দুটি বাহন স্বরূপ। অতএব তোমরা সে দুটির উপর আরোহণ কর আখেরাতে পোঁছার জন্য। দ্রুত তাওবা করার মাধ্যমে বিলম্ব করা হতে নিজেকে রক্ষা কর এবং আল্লাহকে স্বপ্নে দেখার মাধ্যমে ধোঁকা দেয়া হতে নিজেকে রক্ষা কর।





হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।





এটি আবুত তাইয়েব মুহাম্মাদ ইবনু হুমায়েদ আল-হাওরানী তার `জুযউ` (পৃঃ ৭০) গ্রন্থে আমর ইবনু বকর হতে তিনি সুফিয়ান ছাওরী হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এই আম্রের কারণে এ সনদটি খুবই দুর্বল।





হাফিয যাহাবী বলেনঃ তিনি খুবই দুর্বল। ইবনু আদী বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে বহু মুনকার হাদীছ বর্ণনা করেছেন। ইবনু হিব্বান বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে মহাবিপদ বর্ণনা করেছেন। অতঃপর যাহাবী তার জীবনী আলোচনা করতে গিয়ে বলেছেনঃ তার হাদীছগুলো বানোয়াটের সাথে সাদৃশ্যপূর্ণ। হাফিয `আত-তাকরীব` গ্রন্থে বলেনঃ তিনি মাতরূক।





হাফিয সুয়ূতী হাদীছটির প্রথম অংশটুকু `আল-জামেউস সাগীর` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। এ কারণে তার ভাষ্যকার মানবী তার সমালোচনা করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (723)


` ما زنى عبد قط فأدمن على الزنا إلا ابتلي في أهل بيته `.
موضوع.
رواه ابن عدي (15 / 2) وأبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (1 / 278) عن
إسحاق بن نجيح عن ابن جريج عن عطاء عن ابن عباس مرفوعا، وقال ابن عدي: ` وإسحاق بن نجيح بين الأمر في الضعفاء، وهو ممن يضع الحديث `.
وأورده السيوطي في ` ذيل الأحاديث الموضوعة ` (ص 149 رقم 728) وقال: ` إنه من أباطيل إسحاق بن نجيح `. ومما يؤيد بطلان هذا الحديث أنه يؤكد وقوع الزنى في أهل الزاني، وهذا باطل يتنافى مع الأصل المقرر في القرآن (وأن ليس للإنسان إلا ما سعى) . نعم إن كان الرجل يجهر بالزنا ويفعله في بيته فربما سرى ذلك إلى أهله والعياذ بالله تعالى ولكن ليس ذلك بحتم كما أفاده هذا الحديث، فهو باطل. ومثله: ` من زنى زني به ولوبحيطان داره `.
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৭২৩। কোন বান্দা যেন করে যদি তা অব্যাহত রাখে, তাহলে অবশ্যই তাকে তার পরিবারের মধ্যে পরীক্ষায় ফেলা হবে।





হাদীছটি জাল।





এটি ইবনু আদী (১৫/২) এবং আবু নোয়াইম `আখবাবু আসবাহান` (১/২৭৮) গ্রন্থে ইসহাক ইবনু নাজীহ হতে তিনি ইবনু জুরায়েজ হতে তিনি আতা হতে ... বর্ণনা করেছেন।





ইবনু আদী বলেনঃ ইসহাক ইবনু নাজীহ দুর্বলদের অন্তর্ভুক্ত। তিনি ঐ সব ব্যক্তিদের একজন যারা হাদীছ জাল করতেন।





হাদীছটিকে সুয়ূতী `যায়লুল আহাদীছিল মাওযুআহ` (পৃঃ ১৪৯ নং ৭২৮) গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি ইসহাক ইবনু নাজীহর বাতিলগুলোর একটি।





যেনা শুধুমাত্র যেনাকারীদের মাঝেই সংঘটিত হবে এরূপ ভাবার্থ হাদীছটি বাতিল হওয়ার প্রমাণ বহন করছে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (724)


` من زنى زني به ولوبحيطان داره `.
موضوع.
رواه ابن النجار بسنده عن القاسم بن إبراهيم الملطي: أنبأنا المبارك بن عبد الله المختط: حدثنا مالك عن الزهري عن أنس مرفوعا.
قال ابن النجار: ` فيه من لا يوثق به `. قلت: وهو القاسم الملطي كذاب. كذا في ` ذيل الأحاديث الموضوعة ` للسيوطي (ص 134) و` تنزيه الشريعة ` لابن عراق (316 / 1) .
قلت: ومع ذلك فقد أورده السيوطي في ` الجامع الصغير ` من رواية ابن النجار هذا!! وخفي أمره على المناوي فلم يتعقبه بشيء! .
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৭২৪। যদি কোন ব্যক্তি যেনা করে, তাহলে তার সাথে যেনা করা হবে যদিও তার ঘরের দেয়ালের সাথে হয়।





হাদীছটি জাল।





এটিকে ইবনুন নাজ্জার তার সনদে আল-কাসেম ইবনু ইবরাহীম আল-মালতী হতে তিনি আল-মুবারাক ইবনু আবদিল্লাহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।





তাতে এমন ব্যক্তি রয়েছেন যাকে নির্ভরযোগ্য বলা যায় না।





আমি (আলবানী) বলছিঃ আল-কাসেম আল-মালতী মিথ্যুক। সুয়ুতীর “যায়লুল আহাদীছিল মাওযুআহ” (পৃঃ ১৩৪) গ্রন্থে এবং ইবনু ইরাকের `তানযীহুশ শারীয়াহ` (১/৩১৬) গ্রন্থে অনুরূপই এসেছে।





তা সত্ত্বেও সুয়ূতী হাদীছটি “আল-জামেউস সাগীর” গ্রন্থে ইবনুন নাজ্জারের বর্ণনা হতে উল্লেখ করেছেন মানবীর নিকটে হাদীছটির সমস্যা লুক্কায়িতই রয়ে গেছে। যার জন্য তিনি তার কোন সমালোচনা করেননি ।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (725)


` اشتروا الرقيق وشاركوهم في أرزاقهم يعني كسبهم، وإياكم والزنج، فإنهم قصيرة أعمارهم، قليلة أرزاقهم `.
موضوع.
رواه الطبراني (3 / 93 / 1) وفي ` الأوسط ` (1 / 155 / 1) : حدثنا أحمد بن داود المكي: أخبرنا حفص بن عمر المازني: أخبرنا حجاج بن حرب الشقري: أخبرنا سليمان بن علي بن عبد الله بن عباس عن أبيه عن جده مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد واه مظلم لا تعرف عدالة واحد منهم غير علي بن عبد الله فإنه ثقة، وأما ابنه سليمان فهو كما قال ابن القطان: ` هو مع شرفه في قومه لا يعرف حاله في الحديث `. ومن دونه فلم أجد لهم ترجمة، غير حفص بن عمر المازني فقال الحافظ في ` اللسان `: ` لا يعرف `.
وقد روي من غير طريقة، أخرجه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (2 / 58) من طريقين عن عبد العزيز بن عبد الواحد: حدثنا عبد الله بن حرب الليثي: حدثنا جعفر بن سليمان بن علي عن أبيه به.
وهذا سند مظلم أيضا فإن من دون سليمان ثلاثتهم لم أجد من ترجمهم، غير أن جعفر بن سليمان أورده الحافظ في الرواة عن أبيه سليمان من ` التهذيب `.
هذا حال إسناد الحديث، وأما متنه فإني أرى عليه لوائح الوضع ظاهرة، فإن قصر الأعمار وقلة الأرزاق لا علاقة لها بالأمم، بل بالأفراد، فمن أخذ منهم بأسباب طول العمر وكثرة الرزق التي جعلها الله تبارك وتعالى أسبابا طال عمره وكثرة رزقه، والعكس بالعكس، وسواء كانت هذه الأسباب طبيعية أو شرعية، أما الطبيعية فهي معروفة، وأما الشرعية فمثل قوله صلى الله عليه وسلم: ` من أحب أن ينسأ له في أجله، ويوسع له في رزقه، فليصل رحمه `. رواه البخاري. وقوله: ` حسن الخلق وحسن الجوار يعمران الديار ويطيلان الأعمار `.
رواه أحمد وغيره وهو مخرج في ` الصحيحة ` (519) .
والله تبارك وتعالى سهل لكل أمة لأخذ بأسباب الحياة من الرزق وطول العمر وغير ذلك ولم يخصها بقوم دون قوم ولذلك نجد كثيرا من الأمم التي كانت متأخرة في مضمار الرقي أصبحت في مقدمة الأمم رقيا وثروة كاليابان، وغيرها، فليس من المعقول أن يحكم الشارع الحكيم على أمة كالزنج بالفقر ويطبعهم بطابع قصر العمر، مع أنهم بشر مثلنا وهو يقول: (إن أكرمكم عند الله أتقاكم) . وقصر العمر وقلة الرزق ليسا من التقوى في شيء كما يشير إلى ذلك الحديثان المذكوران، بل إنهما ليصرحان أن خلافهما وهما الغني وطول العمر من ثمار التقوى، فإذن أي أمة أخذت بأسباب طول العمر وسعة الرزق لاسيما إذا كانت من النوع الشرعي فلا شك أن الله تبارك وتعالى يبارك لها في عمرها ورزقها، لا فرق في ذلك بين أمة وأمة، للآية السابقة: (يا أيها الناس إنا خلقناكم من ذكر وأنثى وجعلناكم شعوبا وقبائل لتعارفوا إن أكرمكم عند الله أتقاكم) .
وخلاصة القول: إن هذا الحديث موضوع متنا لعدم اتفاقه مع القواعد الشرعية العادلة التي لا تفرق بين أمة وأمة أو قوم وقوم. ولذلك ما كنت أو د للسيوطي أن يورده في ` الجامع الصغير ` وإن كان ليس في إسناده من هو معروف بالكذب أو الوضع، ما دام أن الحديث يحمل في طياته ما يشهد أنه موضوع، وفي كلام ابن القيم الآتي (ص 158 - 160) ما يشهد لذلك والله أعلم.
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৭২৫। তোমরা দাস ক্রয় কর এবং তাদের রিয্‌ক অন্বেষণে নিজেদেরকে শরীক কর। আর তোমরা নিগ্রোদের থেকে তোমাদেরকে রক্ষা কর, কারণ তাদের বয়স কম, রিয্‌কও কম।





হাদীছটি জাল।





এটিকে তাবারানী “আল-কাবীর” (৩/৯৩/১) এবং “আল-আওসাত” (১/১৫৫/১) গ্রন্থে আহমাদ ইবনু দাউদ আল-মাকী হতে তিনি হাফস ইবনু উমার আল-মাযেনী হতে তিনি হাজ্জাজ ইবনু হারব আশ-শুকরী হতে তিনি সুলায়মান ইবনু আলী ইবনে আবদিল্লাহ হতে তিনি তার পিতা হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল, অন্ধকারাচ্ছন্ন। আলী ইবনু আবদিল্লাহ ব্যতীত একজনেরও ন্যায়পরায়ণতার গুণ সম্পর্কে জানা যায় না। তার ছেলে সুলায়মান সম্পর্কে ইবনুল কাত্তান বলেনঃ তিনি তার সম্প্রদায়ের মধ্যে সম্মানিত ব্যক্তি হওয়া সত্ত্বেও হাদীছের ক্ষেত্রে তার অবস্থা সম্পর্কে জানা যায় না। এ ছাড়া তার নীচের বর্ণনাকারীদের জীবনী পাচ্ছি না। হাফস ইবনু উমার আল-মাযেনী সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার `আল-লিসান` গ্রন্থে বলেনঃ তাকে চেনা যায় না।





হাদীছটি অন্য একটি সূত্রে বর্ণিত হয়েছে, যেটি আবু নোয়াইম “আখবারু আসবাহান” (২/৫৮) গ্রন্থে দু'টি সূত্রে আব্দুল আযীয ইবনু আব্দিল ওয়াহেদ হতে তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু হারব আল-লাইছ হতে তিনি জাফার ইবনু সুলায়মান হতে তিনি তার পিতা হতে বর্ণনা করেছেন।





এ সনদটিও অন্ধকারাচ্ছন্ন। কারণ সুলায়মানের নীচের তিন বর্ণনাকারীর জীবনী কে আলোচনা করেছেন পাচ্ছি না।





এ ছাড়া হাদীছটি অর্থের দিক দিয়েও সুস্পষ্ট বানোয়াট। কারণ বয়স কম আর রিযক অল্প হওয়ার সাথে নির্দিষ্ট করে কোন জাতির সম্পর্ক নেই। এরূপ বিশ্বাস সহীহ হাদীছ বিরোধীও বটে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (726)


` إن اللوح المحفوظ الذي ذكر الله: (بل هو قرآن مجيد في لوح محفوظ) في جبهة إسرائيل `.
ضعيف.

أخرجه الطبري في ` التفسير ` (30 / 90) عن قرة بن سليمان قال: حدثنا حرب بن سريج قال: حدثنا عبد العزيز بن صهيب عن أنس بن مالك قال: فذكره موقوفا عليه، وكذلك أورده ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 67) وقال: ` قال أبي: هذا حديث منكر، وقرة مجهول ضعيف الحديث `. وقال في ` الجرح والتعديل ` (3 / 2 / 131) : ` قرة بن سليمان الجهضمي الأزدي جليس حماد بن زيد، روى عن هشام بن حسان
ومعاوية بن صالح، روى عنه أبو الوليد الطيالسي وعمرو بن علي، سألت أبي عنه؟ فقال: ضعيف الحديث `. وحرب بن سريج قال الحافظ: ` صدوق يخطئ `. والحديث أورده ابن كثير في ` تفسيره ` (9 / 170 - منار)
ساكتا عليه وأتبعه برواية ابن أبي حاتم - يعني في ` التفسير ` - بسنده عن أبي صالح: حدثنا معاوية بن صالح أن أبا الأعيس - هو عبد الرحمن بن سلمان - قال: ` ما من شيء قضى الله، القرآن فما قبله وما بعده لا وهو في اللوح المحفوظ،
واللوح المحفوظ بين عيني إسرافيل، لا يؤذن له بالنظر فيه `. قلت: وهذا مع كونه مقطوعا موقوفا على أبي الأعيس، ففي السند إليه أبو صالح وهو عبد الله بن صالح كاتب الليث، وفيه ضعف من قبل حفظه، على أن أبا الأعيس نفسه لم يوثقه غير ابن حبان، أورده في ` ثقات التابعين ` وقال: ` يروي عن رجل من أصحاب
النبي صلى الله عليه وسلم `. قلت: والظاهر من ترجمة ` التهذيب ` له أنه من أتباع التابعين. والله أعلم. وقد ساق له الدولابي في ` الكنى ` (1 / 118) آثار أخرى، ولم يذكر له حديثا مرفوعا.
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৭২৬। লাওহুল মাহফু্য যাকে আল্লাহ তা'আলা উল্লেখ করেছেন (বরং সেটি মহান কুরআন, লাওহুল মাহফুযে লিপিবদ্ধ) সেটি ইসরাঈলের ললাটে রয়েছে।





হাদীছটি দুর্বল।





এটি তাবারী “আত-তাফসীর` (৩০/৯০) গ্রন্থে কুররাহ ইবনু সুলায়মান হতে আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মওকুফ হিসাবে বর্ণনা করেছেন। অনুরূপভাবে ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” (২/৬৭) গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ আমার পিতা বলেনঃ এ হাদীছটি মুনকার। কুররাহ মাজহুল, হাদীছের ক্ষেত্রে দুর্বল।





তিনি `আল-জারহু ওয়াত-তা'দীল` (৩/২/১৩১) গ্রন্থে বলেনঃ আমি আমার পিতাকে কুররাহ ইবনু সুলায়মান সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলাম? তিনি বলেনঃ তিনি হাদীছের ক্ষেত্রে দুর্বল।





হারব ইবনু সুরায়েজ সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি সত্যবাদী, ভুল করতেন।





হাদীছটি অন্য একটি সূত্রে ইবনু কাছীর তার “তাফসীর” গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। তবে সনদটি মাকতু। এ ছাড়াও এ সনদটিতে আবু সালেহ আব্দুল্লাহ ইবনু সালেহ নামে এক বর্ণনাকারী রয়েছেন। হেফযে ক্রটি থাকার কারণে তার মধ্যে দুর্বলতা রয়েছে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (727)


` دعوني من السودان، إنما الأسود لبطنه وفرجه `.
موضوع.

أخرجه الطبراني في ` الكبير ` (3 / 122 / 2) والخطيب (14 / 108) من طريق عبد الله بن رجاء: أخبرني يحيى بن سليمان المديني عن عطاء بن أبي رباح عن ابن عباس قال: ذكر السودان عند رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: فذكره. قلت: وهذا سند ضعيف، عبد الله بن رجاء هو الغداني. قال الحافظ:
` يهم قليلا `، فليس هو علة الحديث وإنما شيخه يحيى هذا، قال الحافظ: ` لين الحديث `. وبه أعل ابن الجوزي الحديث فأورده في ` الموضوعات ` وقال: (2 / 233) : ` لا يصح، ويحيى قال البخاري: منكر الحديث `. وهو قد تبع البخاري في هذا التجريح، ومن المعلوم أن البخاري لا يقول في الراوي ` منكر الحديث ` إلا إذا كان متهما عنده. ولهذا فإن تعقب السيوطي في ` اللآلي ` على ابن الجوزي بأن يحيى هذا روى له أبو داود والترمذي والنسائي، وقال أبو حاتم: يكتب حديثه وليس بالقوي، وذكره ابن حبان في ` الثقات ` - لا يساوي شيئا،
فإن توثيق ابن حبان في مثل هذا المقام مما لا يعتد به العلماء الأعلام، لاسيما مع تضعيف الأئمة الآخرين لهذا الراوي.
وجملة القول أن هذا الإسناد ضعيف لا تقوم به حجة، وأما المتن فلا أشك في وضعه، ولنعم ما صنع ابن الجوزي في إيراده إياه في ` الموضوعات `، وتعقب السيوطي إياه إنما هو جمود منه على السند دون أن ينعم النظر في المتن وما يحمله من معنى تتنزه الشريعة عنه، إذ كيف يعقل أن تذم هذه الشريعة العادلة أمة السودان بحذافيرها وفيهم الأتقياء الصالحون العفيفون كما في سائر الأمم، وليت شعري ما يكون موقف من كان غير مسلم من السودان إذا بلغه هذا الذم العام لبني جنسه من شريعة الإسلام؟! فلا جرم أن ابن القيم قال كما يأتي بعد حديث:
` أحاديث ذم الحبشة والسودان كلها كذب `.
وأقره الشيخ ملا علي القاري في ` موضوعاته ` (ص 119) ، بل إن ابن القيم رحمه الله قال في صدد التنبيه على أمور كلية يعرف بها كون الحديث موضوعا، قال (صفحة 48 - 49) : ` ومنها ركاكة ألفاظ الحديث وسماجتها بحيث يمجها السمع ويسمج معناها الفطن `.
ثم ساق أحاديث عدة هذا آخرها. وللحديث طريق آخر عن ابن عباس وهو:
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৭২৭। তোমরা আমাকে সুদানের ব্যাপারে ছেড়ে দাও (কোন প্রশ্ন করো না)। কেননা সে তার পেট এবং গুপ্তাঙ্গের কারণে কালো।





হাদীছটি জাল।





এটি তাবারানী `আল-কাবীর” (৩/১২২/২) গ্রন্থে এবং আল-খাতীব (১৪/১০৮) আব্দুল্লাহ ইবনু রাজা সূত্রে ইয়াহইয়া ইবনু আবী সুলায়মান আল-মাদীনী হতে তিনি আতা ইবনু আবী রাবাহ হতে তিনি ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। আব্দুল্লাহ ইবনু রাজা সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি কিছুটা সন্দেহ প্রবণ ছিলেন। কিন্তু হাদীছটির সমস্যা তিনি নন বরং সমস্যা হচ্ছে তার শাইখ ইয়াহইয়া। তার সম্পর্কে হাফিয বলেনঃ তিনি হাদীছের ক্ষেত্রে দুর্বল ।





ইবনুল জাওযী হাদীছটি “আল-মাওযু’আত” গ্রন্থে উল্লেখ করে উক্ত সমস্যা বর্ণনা করে (২/২৩৩) বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়। ইয়াহইয়া সম্পর্কে ইমাম বুখারী বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। ইবনুল জাওযীও তার কথার অনুসরণ করেছেন। এটি জানা কথা যে, ইমাম বুখারী একমাত্র মিথ্যার দোষে দোষী ব্যক্তিকেই মুনকারুল হাদীছ আখ্যা দিয়েছেন।





সুয়ূতী “আল-লাআলী” গ্রন্থে ইবনুল জাওযীর সমালোচনা করে বলেছেনঃ ইয়াহইয়া হতে আবু দাউদ, তিরমিযী এবং নাসাঈ হাদীছটি বর্ণনা করেছেন। আবু হাতিম বলেছেনঃ তার হাদীছ লিখা যাবে, তবে তিনি শক্তিশালী নন। তাকে ইবনু হিব্বান `আছ-ছিকাত` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন। ইবনু হিব্বান কর্তৃক নির্ভরযোগ্য বলা গ্রহণযোগ্য নয়। বিশেষ করে যেখানে অন্যান্য ইমামগণ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। এ বিষয়ে পূর্বেও বহুবার ব্যাখ্যা দেয়া হয়েছে।





মোটকথা এ সনদটি দুর্বল। এর দ্বারা দলীল সাব্যস্ত হয় না। আর হাদীছের ভাষা যে বানোয়াট তাতে আমি কোন সন্দেহ পোষণ করছি না। ইবনুল জাওযী হাদীছটি “আল-মাওযু’আত” গ্রন্থে উল্লেখ করে ঠিকই করেছেন।





ইবনুল কাইয়্যিম আল-জাওযিয়্যাহ বলেনঃ 'হাবশাহ এবং সূদান সম্পর্কে কুৎসা রটনা করে যে সব হাদীছ বর্ণিত হয়েছে তার সবগুলোই মিথ্যা। শাইখ মুল্লাহ আলী কারী তার `মাওযু'আত` (পৃঃ ১১৯) গ্রন্থে তার বক্তব্যকে সমর্থন করেছেন। ইবনুল কাইয়্যিম `আল-মানার` (৪৮-৪৯) গ্রন্থে জাল হাদীছ চেনার পন্থা হিসাবে সূত্র (থিওরী) উল্লেখ করে বলেছেনঃ জাল হাদীছের ভাষাগুলো হবে এতই কর্কশ ও কদাকার (বিশ্রী) যে, কান তা প্রত্যাখ্যান করবে এবং জ্ঞানসম্পন্ন ব্যক্তি তার অর্থকে কুৎসিত হিসাবে গণ্য করবে।'





অতঃপর তিনি এরূপ কতিপয় হাদীছ উল্লেখ করেছেন। এটি সেগুলোর শেষেরটি।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (728)


` لا خير في الحبش، إذا جاعوا سرقوا، وإذا شبعوا زنوا، وإن فيهم لخلتين حسنتين: إطعام الطعام، وبأس عند البأس `.
موضوع.
رواه الطبراني (3 / 152 / 1) عن محمد بن عمرو بن العباس الباهلي: أخبرنا سفيان بن عيينة عن عمرو بن دينار عن عوسجة عن ابن عباس قال: قيل: يا رسول الله ما يمنع حبش بن المغيرة أن يأتوك إلا أنهم يخشون أن تردهم قال: فذكره.
قلت: وهذا سند ضعيف رجاله كلهم ثقات غير عوسجة وهو المكي مولى ابن عباس ليس بالمشهور كما في ` التقريب `، ومن طريقه أخرجه ابن عدي (261 / 1) وروى عن البخاري أنه قال: ` لم يصح حديثه `. ثم ساقه.
قلت: وذكره السيوطي شاهدا للحديث الذي بعده فلم يصب، فإنه حديث موضوع المتن كما سبق بيانه في الذي قبله. وقد روي من حديث عائشة وهو:
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৭২৮। হাবশায় কোন কল্যাণ নেই। তারা যখন ক্ষুধার্ত হয় তখন চুরি করে। যখন পরিতৃপ্ত হয় তখন যেনা করে। তাদের মধ্যে দুটি ভাল অভ্যাস রয়েছেঃ পানাহার করানো আর দরিদ্রতার সময় সাহসিকতা।





হাদীছটি জাল।





এটি তাবারানী (৩/১৫২/১) মুহাম্মাদ ইবনু আমর ইবনিল আব্বাস আল-বাহেলী হতে তিনি সুফিয়ান ইবনু উয়াইনাহ হতে তিনি আমর ইবনু দীনার হতে তিনি আওসাজাহ হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ সনদটি দুর্বল। আওসাজাহ আল-মাক্কী হচ্ছেন ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর দাস। `আত-তাকরীব` গ্রন্থে এসেছে তিনি প্রসিদ্ধ নন। তার সূত্রেই ইবনু আদী (১/২৬১) বর্ণনা করেছেন। তিনি ইমাম বুখারী হতে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেনঃ তার হাদীছ সহীহ নয়। অতঃপর তিনি তার হাদীছটি উল্লেখ করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এটিকে সুয়ূতী পরে আগত হাদীছটির শাহেদ হিসাবে উল্লেখ করে ঠিক করেননি। কারণ এ হাদীছটির ভাষা বানোয়াট। পূর্বোল্লিখিত হাদীছে এ সম্পর্কে আলোচনা করা হয়েছে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (729)


` الزنجي إذا شبع زنى، وإذا جاع سرق، وإن فيهم لسماحة ونجدة `.
موضوع.
رواه أبو سعيد الأشج في ` حديثه ` (114 / 2) : حدثنا عقبة بن خالد: حدثني عنبسة البصري عن عمرو بن ميمون عن الزهري عن عروة عن عائشة مرفوعا.
قلت: وهذا سند ضعيف جدا، آفته عنبسة هذا وهو ابن مهران البصري الحداد، قال أبو حاتم: ` منكر الحديث `. وقال أبو داود: ` ليس بشيء `.
وقال ابن حبان (2 / 167) : ` كان يروي عن الزهري ما ليس من حديثه، وفي حديثه المناكير التي لا يشك من الحديث صناعته أنها مقلوبة `. ومن طريقه أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` من رواية ابن عدي عن أبي سعيد الأشج به. ثم قال ابن الجوزي (2 / 233) : ` لا يصح، عنبسة قال النسائي: متروك `.
وتعقبه السيوطي بالحديث الذي قبله وسبق الجواب عنه. وقد وافق ابن الجوزي على وضع الحديث الإمام ابن القيم فقال في ` المنار ` (ص 49) : ` أحاديث ذم الحبشة والسودان كلها كذب `. ` ثم ذكر أحاديث هذا أحدها، وثانيها الحديث الآتي: `
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৭২৯। নিগ্রো ব্যক্তি যখন পরিতৃপ্ত হয় তখন যেনা করে, যখন ক্ষুধার্ত হয় তখন চুরি করে। অবশ্যই তাদের মধ্যে দানশীলতা এবং বীরত্বের গুণাবলী রয়েছে।





হাদীছটি জাল।





এটি আবু সাঈদ আল-আশুজ্জ তার `হাদীছ` (২/১১৪) গ্রন্থে উকবাহ ইবনু খালেদ হতে তিনি আম্বাসাহ বাসর হতে তিনি আমর ইবনু মায়মূন হতে তিনি যুহরী হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি নিতান্তই দুর্বল। তার সমস্যা এই আম্বাসাহ ইবনু মিহরান বাসরী আল-হাদ্দাদ। আবু হাতিম বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। আবু দাউদ বলেনঃ তিনি কিছুই না। ইবনু হিব্বান (২/১৬৭) বলেনঃ তিনি যুহরী হতে সেই সব হাদীছ বর্ণনা করতেন যা তার হাদীছ নয়। তার হাদীছের মধ্যে মুনকার রয়েছে। যে ব্যক্তি হাদীছের গবেষক সে ব্যক্তি তার হাদীছগুলো যে উলট-পালটকৃত তাতে কোন সন্দেহ করবেন না। তার সূত্রেই ইবনুল জাওযী “আল-মাওযু'আত” গ্রন্থে হাদীছটি ইবনু আদীর বর্ণনা হতে উল্লেখ করে (২/২৩৩) বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়। এই আম্বাসাহ সম্পর্কে ইমাম নাসাঈ বলেনঃ তিনি মাতরূক।





সুয়ুতী পূর্বোল্লিখিত হাদীছটি উল্লেখ করে তার সমালোচনা করেছেন। এর উত্তর পূর্বেই দেয়া হয়েছে।





ইবনুল জাওযীর সাথে হাদীছটি জাল হওয়ার ব্যাপারে ইবনুল কাইয়্যিমও `আল-মানার` (পৃঃ ৪৯) গ্রন্থে ঐকমত্য পোষণ করেছেন। তিনি বলেছেনঃ 'হাবশাহ এবং সূদান সম্পর্কে কুৎসা রটনা করে যে সব হাদীছ বর্ণিত হয়েছে তার সবগুলোই মিথ্যা। অতঃপর তিনি কতিপয় হাদীছ উল্লেখ করেছেন, এটি সেগুলোর একটি ।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (730)


` تخيرو النطفكم، وأنكحوا في الأكفاء، وإياكم والزنج فإنه خلق مشوه `.
موضوع.
رواه أبو نعيم في ` أخبار أصبهان ` (1 / 314) عن روح بن جبر: حدثنا الهيثم بن عدي عن هشام مولى عثمان عن هشام بن عروة عن أبيه عن عائشة مرفوعا. قلت: وروح هذا لم أعرفه. وأما الهيثم فكذاب، كذبه ابن معين والبخاري وأبو داود وغيرهم. وأما هشام مولى عثمان فلم أعرفه أيضا.
والحديث أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` من رواية ابن حبان وهذا في ` الضعفاء ` (2 / 281) بسنده عن محمد بن مروان السدي عن هشام بن عروة به وقال (2 / 233) : ` السدي كذاب، وتابعه عامر بن صالح الزبيري عن هشام وليس بشيء، وقال النسائي: ليس بثقة `.
وتعقبه السيوطي في ` اللآلي ` (ص 272) فقال: ` قلت: له طريق آخر `. ثم ساقه من رواية أبي نعيم في ` الحلية ` (3 / 377) : حدثنا أحمد بن إسحاق: حدثنا أحمد بن عمرو بن الضحاك: حدثني عبد العظيم بن إبراهيم السالمي: حدثنا عبد الملك بن يحيى: حدثنا سفيان بن عيينة عن زياد بن سعد عن الزهري عن أنس مرفوعا، وقال:
غريب من حديث زياد والزهري، لم نكتبه إلا من هذا الوجه `. قلت: وسكت عليه السيوطي في ` اللآلي ` وأورده في ` الجامع ` من هذا الوجه، وإسناده مظلم، فإن من دون ابن عيينة لم أجد لهم ترجمة، غير عبد العظيم هذا فأورده الحافظ في ` اللسان ` وقال: ` يغرب، من ثقات ابن حبان `.
قلت: فهو أو شيخه أو من دونه آفة هذا الحديث، فإن شطره الثاني منكر جدا، وقد سبق قول ابن القيم: ` أحاديث ذم الحبشة والسودان كلها كذب `. ثم ذكر أحاديث هذا أحدها.
وأما الجملة الأولى من الحديث، فقد وجدت لها طريقا أخرى، رواه الضياء في ` المختارة ` (223 / 2) من طريق تمام الرازي: حدثنا أبو عبد الرحمن ضحاك بن يزيد السكسكي بـ (بيت لهيا) : حدثنا محمد بن عبد الملك: حدثنا سفيان بن عيينة به مقتصرا على قوله ` تخيرو النطفكم `.
قلت: وهذا سند ضعيف، الضحاك هذا مجهول الحال أورده ابن عساكر في ` تاريخ دمشق ` (8 / 230) وقال: ` روى عن وزيرة بن محمد وأبي زرعة الدمشقي، روى عنه تمام بن محمد وعبد الرحمن بن عمر بن نصر، مات سنة 347 `، ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا.
وشيخه محمد بن عبد الملك لم أعرفه، ويحتمل أن يكون ابن أبي الشوارب الأموي البصري. والله أعلم. ولهذه الجملة شواهد لا تخلوأسانيدها من مقال، ولعلنا نتفرغ لتتبعها وتحقيق القول فيها إن شاء الله، وهي على كل حال لا تبلغ أن تكون موضوعة (1) ، بخلاف الجملة الأخيرة ` وإياكم والزنج … ` فإنها ظاهرة البطلان كسائر الأحاديث التي تقدمت بمعناها، وقد ذكر هذه الجملة ابن معين في ` التاريخ والعلل ` (29 / 1) من حديث عائشة موقوفا عليها، ولعله أشبه فقال: ` مسلمة بن محمد ليس حديثه بشيء يروي عن هشام بن عروة عن أبيه عن عائشة قالت:.... ` فذكره. ونحو هذه الزيادة في الضعف ما يرويه عيسى بن ميمون عن القاسم بن محمد عن عائشة مرفوعا بلفظ: ` تخيرو النطفكم، فإن النساء يلدن أشباه إخوانهن، وأشباه أخواتهن `.
(1) بل هي صحيحة بمجموع طرقها، وقد جمعتها وخرجتها في ` الصحيحة ` (1067) . اهـ.

أخرجه ابن عدي في ترجمة عيسى هذا (ق 294 / 2) وقال: ` وعامة ما يرويه لا يتابعه عليه أحد `.
وروى عن البخاري أنه قال فيه: ` صاحب مناكير وقال في موضع آخر: ` منكر الحديث ` وعن النسائي: ` متروك الحديث `. وقال ابن حبان (2 / 116) : ` منكر الحديث جدا، يروي عن الثقات أشياء كأنها موضوعات `.
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৭৩০। তোমরা তোমাদের বীর্যগুলোকে গুদামজাত কর, বিবাহ কর সমকক্ষদের মধ্যে এবং তোমাদেরকে নিগ্রো থেকে রক্ষা কর। কারণ সে হচ্ছে অসুন্দর (বিশ্রী) এক সৃষ্টি।





হাদীছটি জাল।





এটিকে আবু নোয়াইম “আখবারু আসবাহান” (১/৩১৪) গ্রন্থে রাওহ ইবনু জাবর হতে তিনি হায়ছাম ইবনু আদী হতে তিনি উছমানের দাস হিশাম হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ রাওহকে আমি চিনি না।





আর হায়ছাম হচ্ছেন মিথ্যুক। তাকে ইবনু মা'ঈন, বুখারী, আবু দাউদ ও অন্য বিদ্বানগণ মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন।





উছমানের দাস হিশামকেও আমি চিনি না।





হাদীছটিকে ইবনুল জাওযী `আল-মাওষু'আত` গ্রন্থে ইবনু হিব্বান কর্তৃক `আয-যোয়াফা` (২/২৮১) গ্রন্থে মুহাম্মাদ ইবনু মারওয়ান আস-সুদ্দীর বর্ণনা হতে উল্লেখ করে (২/২৩৩) বলেছেনঃ


সুদ্দী মিথ্যুক। আমের ইবনু সালেহ আয-যুবায়রী হিশাম হতে তার মুতাবায়াত করেছেন। কিন্তু তিনি কিছুই না। নাসাঈ বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন।





এ ছাড়া হাদীছটি অন্য সূত্রেও বর্ণিত হয়েছে। কিন্তু কোনটিই সহীহ নয়।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (731)


` تزوجوا ولا تطلقوا، فإن الطلاق يهتز له العرش `.
موضوع.
رواه أبو نعيم في أخبار أصبهان ` (1 / 157) وعنه الديلمي (2 / 1 / 30) والخطيب في ` تاريخه ` (12 / 191) من طريق عمرو بن جميع عن جويبر عن الضحاك عن النزال بن سبرة عن علي بن أبي طالب مرفوعا. ساقه الخطيب في ترجمة عمرو هذا بعد أن قال فيه: ` كان يروي المناكير عن المشاهير، والموضوعات عن الأثبات `.
وروى عن ابن معين أنه قال فيه: ` كان كذابا خبيثا `. والحديث أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` من طريق الخطيب وقال: ` لا يصح فيه آفات، الضحاك مجروح، وجويبر ليس بشيء، وعمرو قال ابن عدي: كان يتهم
بالوضع `. وأقره السيوطي في ` اللآليء ` (رقم 1916 بترقيمي) ثم ابن عراق في ` تنزيه الشريعة المرفوعة عن الأخبار الشنيعة الموضوعة ` (301 / 1) ، ومع ذلك فقد أورده السيوطي في ` الجامع الصغير `!
قلت: وهذا الحديث يلهج به كثير من الخطباء الذين يكادون يصرحون بتحريم الطلاق الذي أباحه الله تبارك وتعالى، وبعضهم يضع القيود العملية لمنع وقوع الطلاق، ولوكان بمحض اختيار الزوج! فإلى الله المشتكى.
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৭৩১। তোমরা বিবাহ কর তবে তালাক দিও না। কারণ তালাক দিলে তার জন্য আরশ কেঁপে উঠে।





হাদীছটি জাল।





এটি আবু নোয়াইম “আখবাবু আসবাহান” (১/১৫৭) গ্রন্থে, তার থেকে দাইলামী (২/১/৩০) এবং আল-খাতীব তার “আত-তারীখ” (১২/১৯১) গ্রন্থে আমর ইবনু জামী সূত্রে জুওয়াইবির হতে তিনি যহহাক হতে তিনি আন-নাযাল ইবনু সাবরুমা হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আল-খাতীব আমুরের জীবনীতে বলেনঃ তিনি প্রসিদ্ধদের উদ্ধৃতিতে মুনকার হাদীছ এবং নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে বানোয়াট হাদীছ বর্ণনা করেছেন। ইবনু মা'ঈন তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি মিথ্যুক খাবীছ ছিলেন।





ইবনুল জাওযী হাদীছটি “আল-মাওযূ’আত” গ্রন্থে আল-খাতীবের সূত্রে উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি সহীহ নয়, তাতে সমস্যা রয়েছে। যহহাক দূষণীয়। জুওয়াইবির কিছুই না। আর আমর সম্পর্কে ইবনু আদী বলেনঃ তাকে জাল করার দোষে দোষী করা হতো।





সুয়ূতী “আল-লাআলী” (নং ১৯১৬) গ্রন্থে অতঃপর ইবনু ইরাক `তানযীহুশ শারীয়াহ` (১/৩০১) গ্রন্থে তার বক্তব্যকে সমর্থন করেছেন। তা সত্ত্বেও তিনি হাদীছটি “আল-জামেউস সাগীর” গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন!











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (732)


` أول من أشفع له من أمتي أهل بيتي، ثم الأقرب فالأقرب، ثم الأنصار، ثم من آمن بي واتبعني، ثم اليمن، ثم سائر العرب، ثم الأعاجم، ومن أشفع له أولا أفضل `.
موضوع.
رواه الطبراني (3 / 205 / 2) وابن عدي (100 / 2) والمخلص في ` الفوائد المنتقاة ` (6 / 69 / 1) عن حفص بن أبي داود عن ليث عن مجاهد عن ابن عمر مرفوعا. ومن هذا الوجه رواه الخطيب في ` الموضح ` (2 / 27) من طريق الدارقطني بسنده عن حفص وقال الدارقطني: ` غريب من حديث ليث عن مجاهد تفرد به حفص بن أبي داود عنه، وهو حفص بن سليمان بن المغيرة أبو عمر المقريء صاحب عاصم بن أبي النجود `، وقال ابن عدي: ` لا يرويه عن الليث غير حفص، وعامر حديثه غير محفوظ `. ومن طريق الدارقطني أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` وقال (3 / 250) : ` قال الدارقطني: تفرد به حفص عن ليث.
قلت: أما ليث فغاية في الضعف عندهم. إلا أن المتهم به حفص. قال ابن خراش: متروك يضع الحديث `. ووافقه السيوطي (2 / 450) ، ثم ابن عراق (392 / 1 - 2) .
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৭৩২। আমার উম্মাতের মধ্য হতে সর্বপ্রথম আমি আমার পরিবারবর্গের জন্য শাফা’আত করব, অতঃপর তাদের নিকটবর্তী, তারপর তাদের নিকটবর্তীদের জন্য। তারপর আনসারদের জন্য, অতঃপর আমার উপর যে ব্যক্তি ঈমান এনেছে এবং আমার অনুসরণ করেছে তার জন্য। তারপর ইয়ামানীদের জন্য অতঃপর সকল আরবদের জন্য। অতঃপর অনারবদের জন্য। আমি যার জন্য সর্বপ্রথম শাফা'আত করব সেই সর্বোত্তম।





হাদীছটি জাল।





এটি তাবারানী (৩/২০৫/২), ইবনু আদী (২/১০০) এবং আল-মুখলেস “আল-ফাওয়ায়েদুল মুন্তাকাহ” (৬/৬৯/১) গ্রন্থে হাফস ইবনু আবী দাউদ হতে তিনি লাইছ হতে তিনি মুজাহিদ হতে ... বর্ণনা করেছেন। এ সূত্রেই আল-খাতীব `আল-মুওয়াযযেহ` (২/২৭) গ্রন্থে দারাকুতনীর সূত্রে তার সনদে হাফস হতে বর্ণনা করেছেন। দারকুতনী বলেনঃ লাইছের হাদীছ হতে এটি গারীব। হাফস ইবনু আবী দাউদ এককভাবে বর্ণনা করেছেন। তিনি হচ্ছেন হাফস ইবনু সুলায়মান ইবনিল মুগীরাহ। ইবনু আদী বলেনঃ লাইছ হতে একমাত্র হাফসই বর্ণনা করেছেন। তার অধিকংশ হাদীছ নিরাপদ নয়।





ইবনুল জাওযী (৩/২৫০) বলেনঃ লাইছ তাদের নিকট চরম পর্যায়ের দুর্বল। তবে হাফসই এ হাদীছটির ব্যাপারে দূষণীয় ব্যক্তি। ইবনু খাররাশ বলেনঃ তিনি মাতরূক, হাদীছ জালকারী। সুয়ূতী (২/৪৫০) এবং ইবনু ইরাক (৩৯২/১-২) তার সাথে ঐকমত্য পোষণ করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (733)


` أول من أشفع له من أمتي العرب الذين رأو ني وآمنوا بي وصدقوني، ثم أشفع للعرب الذين لم يروني وأحبوني وأحبوا رؤيتي `.
موضوع.
رواه ابن عدي (258 / 1) عن زهير بن العلاء: حدثنا عطاء بن أبي ميمونة عن أنس بن مالك مرفوعا. أورده في ترجمة عطاء، وهو ثقة محتج به في الصحيحين، فكان الأولى إيراده في ترجمة زهير بن العلاء. قال الذهبي: ` روي عن أبي حاتم الرازي أنه قال: أحاديثه موضوعة منها … ` فذكر له حديثا يأتي قريبا بلفظ ` كثرة العرب.... `.
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৭৩৩। আমার উম্মাতের মধ্য হতে সর্বপ্রথম আমি সেই আরবদের জন্য শাফা’আত করব যারা আমাকে দেখেছে, আমার উপর ঈমান এনেছে এবং আমাকে সত্য বলে জেনেছে। অতঃপর আমি শাফা’আত করব সেই আরবদের জন্য যারা আমাকে দেখেনি তবুও আমাকে ভালবাসে এবং আমার সাক্ষাৎ পাওয়াকে ভালবাসে ।





হাদীছটি জাল।





এটি ইবনু আদী (১/২৫৮) যুহায়ের ইবনুল আলী হতে তিনি আতা ইবনু আবী মায়মুনাহ হতে তিনি আনাস ইবনু মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন।





তিনি আতার জীবনীতে হাদীছটি উল্লেখ করেছেন। যুহয়েরের জীবনীতে হাদীছটি উল্লেখ করা উচিত ছিল। বর্ণনাকারী যুহায়ের ইবনুল আলা সম্পর্কে হাফিয যাহাবী বলেনঃ আবু হাতিম হতে বর্ণিত হয়েছে, তিনি বলেনঃ তার হাদীছগুলো বানোয়াট। তিনি তার অন্য হাদীছও উল্লেখ করেছেন। যা একটু পরেই আসবে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (734)


` ألا أنبئكم بالفقيه؟ قالوا: بلى، قال: من لا يقنط الناس من رحمة الله، ولا يؤيسهم من روح الله، ولا يؤمنهم من مكر الله، ولا يدع القرآن رغبة عنه إلى ما سواه، ألا لا خير في عبادة ليس فيها تفقه، ولا في علم ليس فيه تفهم، ولا قراءة ليس فيها تدبر `.
منكر.
رواه ابن وهب في ` المسند ` (8 / 165 / 1) : أخبرني عقبة بن نافع عن إسحاق بن أسيد عن أبي مالك وأبي إسحاق عن علي بن أبي طالب مرفوعا.
وأخرجه ابن عبد البر في ` جامع بيان العلم ` (2 / 44) من طريق ابن وهب، وقال: ` لا يأتي هذا الحديث مرفوعا إلا من هذا الوجه وأكثرهم يوقفونه على علي `.
قلت: وهو الأشبه فإن هذا الإسناد المرفوع فيه علتان: الأولى: إسحق بن أسيد وهو أبو محمد المروزي نزيل مصر، قال الحافظ: ` فيه ضعف `. والأخرى: عقبة بن نافع فإنه مجهول، أورده ابن أبي حاتم (3 / 1 / 317) برواية ابن وهب فقط عنه ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا.
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৭৩৪। আমি কি তোমাদেরকে ফাকীহ সম্পর্কে সংবাদ দিব না? তারা বললঃ জি হ্যাঁ, তিনি বললেনঃ যে ব্যক্তি লোকদেরকে আল্লাহর রহমত হতে নিরাশ করে না (সেই ফাকীহ), আল্লাহর আদেশ হতে তাদেরকে নিরাশ করে না আর আল্লাহর মক্কর হতে তাদেরকে নিরাপদে রাখে না। কুরআনকে ছেড়ে দেয় না তা থেকে অনাসক্ত হয়ে অন্য বস্তুর দিকে থাবিত হওয়ার দ্বারা। সাবধান ফিকাহহীন ইবাদাতে কোন কল্যাণ নেই। অবুঝ শিক্ষায় কোন কল্যাণ নেই এবং গবেষণাহীন পড়ায় কোন কল্যাণ নেই।





হাদীছটি মুনকার।





এটিকে ইবনু ওয়াহাব “আল-মুসনাদ` (৮/১৬৫/১) গ্রন্থে উকবাহ ইবনু নাফে' হতে তিনি ইসহাক ইবনু উসায়েদ হতে তিনি আবু মালেক ও আবূ ইসহাক হতে ... বর্ণনা করেছেন।


হাদীছটি ইবনু আব্দিল বারও `জামেউ বায়ানিল ইলম` (২/৪৪) গ্রন্থে ইবনু ওয়াহাবের সূত্রে বর্ণনা করে বলেছেনঃ এ হাদীছটি এ সূত্র ছাড়া অন্য কোন সূত্রে মারফূ’ হিসাবে বর্ণিত হয়নি। তাদের অধিকাংশরাই এটিকে আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) পর্যন্ত মওকুফ হিসাবে বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ মওকুফ হওয়াটাই উপযোগী, কারণ এ মারফু' সনদটিতে দু'টি সমস্যা রয়েছেঃ





১। ইসহাক ইবনু উসায়েদ আবু মুহাম্মাদ আল-মারওয়ায়ী সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি দুর্বল।





২। উকবাহ ইবনু নাফে মাজহুল। হাদীছটি ইবনু আবী হাতিম (৩/১/৩১৭) ইবনু ওয়াহাবের বর্ণনায় উকবাহ হতে উল্লেখ করার পর তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (735)


` كثرة العرب وإيمانهم قرة عين لي، فمن أقر بعيني أقررت بعينه `.
موضوع.
رواه ابن عدي (258 / 1) عن زهير بن العلاء: حدثنا عطاء بن أبي ميمونة عن أوس بن ضمعج عن ابن عباس مرفوعا. أورده في ترجمة عطاء هذا وكان حقه أن يورده في ترجمة زهير، فإنه المتهم بوضع هذا الحديث كما سبق ذكره قريبا في ` أول من أشفع له من أمتي العرب … ` رقم (733) . وقد ذكر ابن أبي حاتم في ` العلل ` (2 / 367) أن أباه سئل عن حديثه هذا؟ فقال: ` هذا حديث موضوع، وذكر له أحاديث من روايته. فقال: هذه أحاديث موضوعة، وهذا شيخ لا يشتغل به `.
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৭৩৫। আরবদের আধিক্য এবং তাদের ঈমান হচ্ছে আমার চোখের প্রশান্তি। অতএব আমার চোখে যে ব্যক্তি প্রশান্তি এনে দিবে আমি তার চোখের জন্য প্রশান্তি আনবো ।





হাদীছটি জাল।





এটি ইবনু আদী (১/২৫৮) যুহায়ের ইবনুল আলা হতে তিনি আতা ইবনু আবী মায়মূন হতে তিনি আউস ইবনু যাম'য়াজ হতে ... বর্ণনা করেছেন।





তিনি আতার জীবনীতে হাদীছটি উল্লেখ করেছেন। যুহায়েরের জীবনীতে হাদীছটি উল্লেখ করা উচিত ছিল। কারণ বর্ণনাকারী যুহায়ের এ হাদীছটি জাল করার দোষে দোষী ।





ইবনু আবী হাতিম “আল-ইলাল” (২/৩৬৭) গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন, আমার পিতাকে এ হাদীছটি সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল। তিনি বলেনঃ এ হাদীছটি বানোয়াট। তার আরো কয়েকটি হাদীছ উল্লেখ করে বলেছেনঃ এগুলো বানোয়াট।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (736)


` تزوجوا الأبكار فإنهن أعذب أفواها، وأفتح أرحاما، وأثبت مودة `.
موضوع.
رواه الواحدي في ` الوسيط ` (3 / 115 / 2) عن إسحاق بن بشر الكاهلي: حدثني عبد الله بن إدريس المدني عن جعفر بن محمد عن أبيه عن جده مرفوعا. قلت: وهذا إسناد موضوع آفته الكاهلي وهو كذاب كما قال جماعة، وقال الدارقطني: ` هو في عداد من يضع الحديث `. وقد روي الحديث بإسناد خير من هذا بلفظ قريب منه إلا أنه قال: ` وأنتق أرحاما، وأرضى باليسير `. والباقي مثله سواء وهو مخرج في الصحيحة ` برقم (623) .
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৭৩৬। তোমরা কুমারী নারীদের বিয়ে কর, কারণ তারা কথাবার্তার দিক দিয়ে বেশী মিষ্টি, রেহেমকে বেশী প্রশস্তকারী এবং ভালবাসার দিক দিয়ে বেশী স্থায়ী (দৃঢ়)।





হাদীছটি জাল।





এটিকে আল-ওয়াহেদী “আল-ওয়াসীত” (৩/১১৫/২) গ্রন্থে ইসহাক ইবনু জাফার ইবনু মুহাম্মাদ হতে ...বর্ণনা করেছেন। আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি বানোয়াট। এর সমস্যা হচ্ছে এই আলকাহেলী। তিনি মিথ্যুক যেমনটি একদল (মুহাদেছ) বলেছেন। দারাকুতনী বলেনঃ তিনি জালকারীদের অন্তর্ভুক্ত।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (737)


ح) ، والطحاوي في
`شرح المعاني` (2/82) ، وعبد الرزاق في `المصنف` (7/322/13340) ، ومن طريقه
البيهقي في `الشعب` (5/298/6712) ، وأبو يعلى (10/524 - 525) كلهم من
طريق أبي الزبير عن عبد الرحمن بن الهضهاض الدوسي عن أبي هريرة قال:
جاء ماعز بن مالك الأسلمي، فرجمه النبي صلى الله عليه وسلم عند الرابعة،، فمر به رسول
الله صلى الله عليه وسلم ومعه نفر من أصحابه، فقال رجلان منهم: إن هذا الخائن أتى النبي
صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مراراً كل ذلك يرده، ثم قتل كما يقتل الكلب، فسكت عنهم النبي صلى الله عليه وسلم
حتى مر بجيفة حمار شائلة رجله، فقال: `كلا من هذا`! قالا: من جيفة حمار
يا رسول الله؟ ! قال: … فذكره.
والسياق للبخاري، وهو مختصر، ولفظه عند عبد الرزاق وغيره أتم، وهو مخرج
في `الإرواء` (8/24) بمصادر أخرى أكثر من هذه، وإنما أخرجته هنا لأمرين:
الأول: لمصادر جديدة وقفت عليها لم أكن وقفت عليها من قبل.
والآخر: - وهو الأهم - لتأكيد ضَعف الحديث بهذه الزيادة المذكورة آنفاً، فقد
رأيت من صحح إسناده كابن كثير وغيره، فأقول:
علة هذا الإسناد عبد الرحمن بن الهضهاض هذا، ويقال: ابن الصامت،
وكذا وقع فيه عند بعض المخرجين، وقيل غير ذلك - كما تراه مفصلاً في
`التهذيب` - ، وبالنسبتين الأوليين ذكره ابن حبان في `ثقات التابعين` (5/97
و114) ، دون أن ينبه أنهما راوٍ واحد! ولم يذكر له هو أو غيره راوياً غير أبي الزبير،
ولذلك جاء في `التهذيب`:
`قال البخاري: لا يعرف إلا بهذا الحديث.
وقال النباتي (1) في `ذيل الكامل`:من لا يعرف إلا بحديث واحد، ولم يشهر
حاله، فهوفي عداد المجهولين`. ولذلك قال الذهبي في `الكاشف`:
`مجهول`. وهو معنى قول الحافظ في `التقريب`:
(1) هو الإمام الحافظ الثقة أحمد بن محمد بن مفرج الإشبيلي، يعرف بابن الرومية،
له ترجمة في `سير الذهبي` (23/58 - 59) .
`مقبول `.
يعني عند المتابعة. وقد توبع على قصة رجم ماعز دون حديث الترجمة …
فكان منكراً، فقد جاء الحديث في `الصحيحين` وغيرهما من طرق عن أبي
هريرة، وكذلك من حديث جابر وبريدة وغيرهم، وهي مخرجة في `الإرواء`
(7/352 - 358) بقصة ماعز، دون حديث الترجمة. وانظر `المستدرك` (4/361 -
363) إن شئت.
ولذلك فقد أخطأ الحافظ ابن كثير في قوله في `تفسير الحجرات` (4/215)
بعد أن عزاه لرواية أبي يعلى:
`إسناد صحيح`!
مع أن الراوي عن أبي هريرة لم يسم عند أبي يعلى، بل وقع فيه:
`ابن عم لأبي هريرة`!
وإن من جهل ذاك الشيخ الصابوني وقلة أمانته العلمية، أنه توهم أن هذه
العبارة محرَّفة، فجعل الحديث في كتابه `مختصر تفسير ابن كثير` (3/366) من
مسند `ابن عمر`! فكأنه ظن - لبالغ جهله، وضيق عطنه - أن لفظة: (عم) فيها …
محرفة من: (عمر) ! وأن قوله فيها:`لأبي هريرة` … مقحم من الناسخ أوالطابع!
فصار الحديث عنده `عن ابن عمر`! فجاء بما لا أصل له!
وأما بلديه الشيخ الرفاعي فلقدكان أذكى منه! فلقد ستر جهله بهذا العلم بأن
أسقط اسم الصحابي من الحديث! فقال في `مختصره` (4/223) :
`وروى الحافظ أبو يعلى في روايته لقصة رجم ماعز … `!
ثم اتفقا على تقليد ابن كثير - كما هي عادتهما - في تصحيحه لإسناد
الحديث، إلا أن الصابوني جعل التصحيح في التعليق قائلاً:
`أخرجه الحافظ أبو يعلى وإسناده صحيح`! موهماً أن التخريج والتصحيح
من علمه! شِنْشِنَةٌ نعرفها من أخزم!
وكذلك أخطأ المعلق على `مسند أبي يعلى`، فقال - بعد أن عزاه لعبد الرزاق - :
`وهذا إسناد جيد، ترجمه البخاري في `التاريخ`، وابن أبي حاتم في `الجرح`،
ولم يوردا فيه جرحاً ولا تعديلاً، وما رأيت فيه جرحاً. ووثقه ابن حبان. وانظر
تعليقنا على الحديث (6297) `.
قلت ما ذكره هنا لا يستلزم جودة السند، لأن كون الراوي لا يعلم فيه جرح
لا يعني أنه ثقة - كما يعلم من علم المصطلح - فإنه لا بد أن يكون مشهوراً بالرواية،
ولو لم يرو عنه إلا واحد كبعض رواة `الصحيحين`، وقد أشار إلى هذا الحافظ النباتي
المذكور آنفاً.
ومذهب ابن حبان وتساهله في توثيق المجهولين أشهر من أن يناقش، وقد
تعرضت لبيان خطئه أكثر من مرة، وحسب المنصف تصريحه هو في عشرات
المذكورين في `ثقاته` بأنه لا يعرفه! وتارة يقول: `لا أعرفه ولا أعرف أباه`!! أو:
`لا أدري من هو ولا ابن من هو، وهؤلاء عنده بالعشرات!
ورأيته أحياناً يقول في بعضهم: ` ما له حديث يرجع إليه`! وتارة: `لست أعرفه
بعدالة ولا جرح`، وتارة أخرى:` ما له حديث مستقيم `! ومرة قال: `في حديثه
مناكير كثيرة`، وأغرب من ذلك كله أنه صرح في بعضهم فقال فيه: `ضعيف`!!
وسوف أفصل القول في تساهله بعد أن نفرغ إن شاء الله من كتابي `ترتيب الثقات`،
ومادته عندي والحمد لله،وهي تحت التأليف والترتيب، وقد وصل حتى هذه
الساعة إلى نهاية حرف الطاء، نسأل الله تمامه بفضله وكرمه () .
وأما المكان الآخر الذي أحال عليه، فإنه هناك نقل شيئاً من كلام الحافظ في
انتقاده لابن حبان في `ثقاته`، ثم رد عليه بأمرين، فصل القول فيهما، لا يتسع
المجال الآن لتعقبه بتفصيل، فذلك محله في مقدمة كتابي المشار إليه آنفاً، ولكن
حسب القارئ دليلاً على بطلان رده على الحافظ ما نقله عن مقدمة ` صحيح ابن
حبان` أنه قال:
`لم نحتج فيه إلا بحديث اجتمع في كل شيخ من رواته خمسة أشياء:
الأول: العدالة في الدين بالستر الجميل.
والثاني: الصدق في الحديث بالشهرة فيه.
والثالث: العقل بما يحدث من الحديث.
والرابع: العلم يما يحيل من معاني ما يروي.
والخامس: المتعري خبره عن التدليس`.
قلت: وهذه الشروط لو التزمها ابن حبان في كل رجال `ثقاته`، لكان كتابه
هذا - `الثقات` الذي عليه بنى كتابه الآخر `الصحيح` - في مقدمة الكتب المعتمدة
في التوثيق، ولكن ليتأمل القارئ الكريم:
هل هذه الشروط الخمسة يمكن أن تنطبق على ما قال فيه ما تقدم نقله من
`ثقاته`، كمن قال فيه: ` لا أعرفه ولا أعرف أباه `، `لست أعرفه بعدالة ولا
() وقد أتمه الشيخ رحمه الله فيما نعلم - ، ولم يُطبع بعدُ. (الناشر) .
جرح`! إلى غير ذلك من أمثال هؤلاء المتقدمة وغيرها؟!
كيف يمكن أن يظن في أمثال هؤلاء الذين صرح ابن حبان بجهالتهم
وضعفهم بعبارات مختلفة، أنه اجتمع فيهم: العدالة، والصدق، والفهم بما
يحدث، والعلم بما يفسد معنى الحديث، … ؟!
لا شك أن ما ادعاه من الشروط في رواة `صحيحه` غير مطابق لواقعه، ولا
لرواة `ثقاته ` الذين عليهم أقام كتابه `الصحيح`.
ثم ألا يكفي دلالة على جهل هذا المعلق بهذا العلم الشريف وقواعده أنه
خالف ما عليه أئمته في تراجم رواة الحديث؟! ففيهم المئات ممن وثقهم ابن حبان،
ومع ذلك لم يوثقوهم، يعلم ذلك كل من له عناية بعلم الجرح والتعديل، وهذا هو
المثال بين أيدينا فإن الحفاظ: النباتي، والذهبي، والعسقلاني لميوثقوا ابن
الهضهاض هذا، فلا أدري كيف طاوعت هذا المعلق نفسه على مخالفتهم
والتطاول عليهم بتخطئتهم، وهو ابن هذا اليوم، لمَّا يتحصرم بعد؟!
وإن مما يؤكد حداثته بهذا العلم وجهله به أنه بعد أن جوَّد إسناد الحديث - كما
تقدم نقله عنه - أخذ يخرجه من رواية الشيخين وغيرهما من طريق سعيد بن
المسيب وأبي سلمة بن عبد الرحمن عن أبي هريرة. ولم يسق إسناده، فأوهم أن
فيه حديث الترجمة، وهو في الحقيقة مما يوهن الحديث ويؤكد نكارته - كما أكشرت
إلى ذلك في أول هذا التخريج - .
ثم إن الجملة الأخيرة من حديث الترجمة رواها أيوب عن أبي الزبير عن جابر
مختصراً جداً بلفظ:
إن النبي صلى الله عليه وسلم لما رجم ماعز بن مالك، قال:
`لقد رأته يتخضخض في أنهار الجنة`.

أخرجه ابن حبان أيضاً (1515) .
قلت: ورجاله ثقات، لكن أبو الزبير مدلس، وقد عنعنه.
والقصة في `الصحيحن ` وغيرهما من طريق أبي سلمة عن جابر أتمّ منه،
وفيه:
فقال له رسول الله صلى الله عليه وسلم خيراً، ولم يصل عليه.
وهو مخرج في `الإرواء` (7/353) ، فهذا يؤيد أن ما فِي حَدِيثِ أبي الزبير
غير محفوظ. والله أعلم.
وفي حديث بريدة بن الحصيب في آخر هذه القصة: فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم:
`لقد تاب توبة لو قسمت بين أمة، لوسعتهم `.
رواه مسلم وغيره. وهو مخرج في `الإرواء (7/356) ، ففيه غنية عما لم يصح.
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৭৩৭। যে ব্যক্তির একটি (পুত্র) সন্তান ভূমিষ্ট হবে, সে যেন তাকে সুন্দর আচরণ শিক্ষা দেয় এবং তার সুন্দর নাম রাখে। অতঃপর সে যখন প্রাপ্ত বয়স্ক হবে তখন যেন তার বিয়ে দিয়ে দেয়। কারণ যদি প্রাপ্ত বয়স্ক হওয়ার পরেও তার বিয়ে না দেয়ার কারণে সে গুনাহয় লিপ্ত হয় তাহলে সেই গুনাহ তার (পিতার) নিকট ফিরে আসবে।





হাদীছটি দুর্বল।





এটি ইবনু বুকায়ের আস-সায়রাফী `ফাযায়েলু মান ইসমুহু আহমাদ ওয়া মুহাম্মাদ` (২/৬০) গ্রন্থে মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল্লাহ আল-আসকারী হতে তিনি আবূ তিনি শাদ্দাদ ইবনু সাঈদ আর-রাসেবী হতে তিনি সাঈদ আল-জারীরী হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। বর্ণনাকারী মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল্লাহ আল-আসকারীকে আমি চিনি না। আল-খাতীবের নিকট ইবনু বুকায়েরের শাইখ হচ্ছেন মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল্লাহ ইবনু ইলমিস সাফার।





আর আল-আসকারী আর-রাসেবী বিতর্কিত। তাকে উকায়লী `আয-যোয়াফা` (১৮০) গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেন, ইমাম বুখারী বলেনঃ তাকে আব্দুস সামাদ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। কিন্তু তিনি সত্যবাদী, তার হেফযে কিছু ক্রটি ছিল।





তাকে হাফিয যাহাবী `আয-যোয়াফা ওয়াল-মাতরূকীন` গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ ইবনু আদী বলেনঃ আমি তার মুনকার হাদীছ দেখছিনা। উকায়লী বলেনঃ তার কতিপয় হাদীছ আছে সেগুলোর অনুসরণ করা যায় না।





`আত-তাকরীব` গ্রন্থে এসেছেঃ তিনি সত্যবাদী, ভুল করতেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ সম্ভবত তিনিই হাদীছটির সমস্যা।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (738)


` تزوجوا الزرق فإن فيهن يمنا `.
موضوع.
رواه الواحدي في ` الوسيط ` (3 / 115 / 2) عن إسحاق بن بشر الكاهلي: حدثني عبد الله بن إدريس المدني عن جعفر بن محمد عن أبيه عن جده مرفوعا.
قلت: وهذا إسناد موضوع آفته الكاهلي وهو وضاع كما سبق قبل حديث.
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৭৩৮। তোমরা নীল বর্ণ বিশিষ্ট নারীকে বিয়ে কর। কারণ তাদের মধ্যে বরকত রয়েছে।





হাদীছটি জাল।





এটিকে আল-ওয়াহেদী `আল-ওয়াসীত` (৩/১১৫/২) গ্রন্থে ইসহাক ইবনু জাফার ইবনু মুহাম্মাদ হতে ... বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি বানোয়াট। এর সমস্যা হচ্ছে এই আল-কাহেলী। তিনি জালকারী যেমনটি একটি হাদীছ পূর্বে তার সম্পর্কে আলোচনা করা হয়েছে।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (739)


` شر الحمير الأسود القصير `.
موضوع.
رواه العقيلي في ` الضعفاء ` (426) وأبو محمد المخلدي في ` الفوائد ` (245 / 2) عن بقية: حدثنا مبشر بن عبيد عن زيد بن أسلم عن ابن عمر مرفوعا. وقال العقيلي: ` مبشر بن عبيد قال أحمد: ` أحاديثه أحاديث
موضوعة كذب ` وقال مرة: ` ليس بشيء، يضع الحديث `. وقال البخاري: منكر الحديث `. ثم ساق له حديثين هذا أحدهما. والحديث أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` (2 / 221) من رواية العقيلي هذه وأصاب. وتعقبه السيوطي (رقم 1728) فما أجاد، لأنه لم يزد على قوله: ` إن مبشرا هذا روى له ابن ماجة `.
قلت: فكان ماذا؟! قال:
` وقال البخاري: منكر الحديث `. قلت: وهذا لا ينافي قول أحمد: ` يضع الحديث ` لأنه أفاد زيادة علم على ما أفادته عبارة البخاري على أن هذه العبارة منه تفيد أنه متهم عنده كما سبق بيانه مرارا.
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৭৩৯। ছোট কালো বর্ণের গাধা হচ্ছে নিকৃষ্টতম গাধা।





হাদীছটি জাল।





এটি উকায়লী `আয-যোয়াফা` (৪২৬) গ্রন্থে এবং আবু মুহাম্মাদ আল-মাখলাদী `আল-ফাওয়ায়েদ` (২/২৪৫) গ্রন্থে মুবাশশির ইবনু ওবায়েদ হতে তিনি যায়েদ ইবনু আসলাম হতে তিনি ইবনু উমার হতে ... মারফু হিসাবে বর্ণনা করেছেন। উকায়লী বলেনঃ মুবাশশির সম্পর্কে ইমাম আহমাদ বলেনঃ তার হাদীছগুলো বানোয়াট ও মিথ্যা। তিনি আরো বলেনঃ তিনি কিছুই না, তিনি হাদীছ জালকারী। ইমাম বুখারী বলেনঃ তিনি মুনকারূল হাদীছ। অতঃপর তিনি তার দু'টি হাদীছ উল্লেখ করেছেন। এটি সে দুটির একটি।





হাদীছটিকে ইবনুল জাওযী “আল-মাওয়ূ'আত` (২/২২১) গ্রন্থে উকায়লীর বর্ণনা হতে উল্লেখ করেছেন। এ গ্রন্থে উল্লেখ করে ঠিকই করেছেন।











সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ (740)


` شر المال في آخر الزمان المماليك `.
موضوع.
رواه أبو الحسن الحلبي في ` الفوائد المنتقاة ` (1 / 11 / 1) وأبو نعيم في ` الحلية ` (4 / 94) عن أبي فروة يزيد بن سنان بن يزيد الرهاوي:
أخبرنا أبي: أخبرنا محمد بن أيوب عن ميمون بن مهران عن عبد الله بن عمر
مرفوعا. ومن هذا الوجه رواه ابن عدي (311 / 2) وقال: ` لا يرويه بهذا الإسناد، إلا يزيد بن سنان عن محمد بن أيوب، وقد أتي هذا الحديث من الرهاوي لا من ابن أيوب، وفي حديث الرهاوي ما لا يوافقه الثقات عليه `. وقال أبو نعيم: ` تفرد به محمد بن أيوب `.
قلت: وقد ضعفه أبو حاتم لكن الراوي عنه يزيد بن سنان أشد ضعفا فقد قال النسائي فيه: ` ضعيف متروك الحديث `. وقال مرة: ` ليس بثقة `. والحديث أورده السيوطي في ` الجامع ` من راية أبي نعيم وحده، وتعقبه المناوي بقوله: ` أورده ابن الجوزي في ` الموضوعات ` وقال:
يزيد متروك، وتبعه على ذلك المؤلف في مختصره الكبير فأقره ولم يتعقبه بشيء `. قلت: وقد أصاب السيوطي هناك في ` اللآليء ` (2 / 140) ، وأخطأ في إيراده في ` الجامع `، فقد جزم المحقق ابن القيم في ` المنار ` (ص 49) بأنه حديث موضوع، وسبقه ابن الجوزي (2 / 235) .
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৭৪০। শেষ যামানার নিকৃষ্টতম সম্পদ হচ্ছে দাস-দাসীরা।





হাদীছটি জাল।





এটি আবুল হাসান আল-হালাবী `আল-ফাওয়ায়েদুল মুনতাকাত` (১/১১/১) গ্রন্থে এবং আবু নোয়াইম “আল-হিলইয়্যাহ” (৪/৯৪) গ্রন্থে আবু ফরওয়াহ ইয়াযীদ ইবনু সিনান হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি মুহাম্মাদ ইবনু আইউব হতে তিনি মায়মূন ইবনু মিহরান হতে ... বর্ণনা করেছেন। ইবনু আদী (২/৩১১) বলেনঃ হাদীছটি এ সনদে ইয়াযীদ ইবনু সিনান ছাড়া অন্য কেউ মুহাম্মাদ ইবনু ইউসুফ হতে বর্ণনা করেননি। আবু নোয়াইম বলেনঃ মুহাম্মাদ ইবনু আইউব হাদীছটি এককভাবে বর্ণনা করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ তাকে আবু হাতিম দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। কিন্তু তার থেকে বর্ণনাকারী ইয়াযীদ ইবনু সিনান তার চেয়েও বেশী দুর্বল। তার সম্পর্কে নাসাঈ বলেনঃ তিনি দুর্বল, মাতরূকুল হাদীছ। আরেকবার বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন। হাদীছটি সুয়ূতী “আল-জামে” গ্রন্থে আবু নোয়ামের সূত্রে উল্লেখ করেছেন। এ কারণে মানবী তার সমালোচনা করেছেন। তিনি বলেছেনঃ হাদীছটি ইবনুল জাওযী “আল-মাওয়ূ'আত” গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ ইয়াযীদ মাতরূক। লেখক (সুয়ূতী) “আল-লাআলী” (২/১৪০) গ্রন্থে তার (ইবনুল জাওযীর) কথাকে সমর্থন করেছেন।





আমি (আলবানী) বলছিঃ সুয়ূতী হাদীছটি “আল-লাআলী” গ্রন্থে উল্লেখ করে ঠিক করেছেন। তবে তিনি `আল-জামে` গ্রন্থে উল্লেখ করে ভুল করেছেন। ইবনুল কাইয়্যিম আল-জাওযীয়াহ `আল-মানার` (পৃঃ ৪৯) গ্রন্থে দৃঢ়তার সাথে বলেনঃ হাদীছটি বানোয়াট।