সিলসিলাতুল আহাদীসিদ দ্বাঈফাহ ওয়াল মাওদ্বুআহ
` من كانت له حمولة تأو ي إلى شبع (وري) ، فليصم رمضان حيث أدركه `.
ضعيف.
أخرجه أبو داود (1 / 378) وأحمد (3 / 476 و5 / 7) والعقيلي في ` الضعفاء (ص 259) من طرق عن عبد الصمد بن حبيب بن عبد الله الأزدي: حدثني حبيب بن عبد الله قال: سمعت سنان بن سلمة بن المحبق الهذلي يحدث عن أبيه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره، وقال العقيلي - والزيادة له - : ` لا يتابع عليه، ولا يعرف إلا به `. يعني عبد الصمد هذا، وقد أورده البخاري في ` الضعفاء ` أيضا وقال (ص 24) : ` لين الحديث، ضعفه أحمد `.
وقال المنذري في ` مختصر السنن ` (3 / 290) : ` قال ابن معين: ليس به بأس، وقال أبو حاتم الرازي: يكتب حديثه، وليس بالمتروك، وقال: يحول من: ` كتاب الضعفاء ` - ثم ذكر ما نقلناه عن البخاري ثم قال - وقال البخاري أيضا: منكر الحديث، ذاهب الحديث، ولم يعد البخاري هذا الحديث شيئا `.
قلت: وفيه علة أخرى، وهي جهالة ابنه حبيب بن عبد الله، قال الذهبي في ` الميزان ` والعسقلاني في ` التقريب `: ` مجهول `. والحديث أورده الحافظ شمس الدين ابن عبد الهادي في رسالته ` الأحاديث الضعيفة والموضوعة ` (ق 217 / 2) في جملة أحاديث من ` ما يذكره بعض الفقهاء والأصوليين أو المحدثين محتجا به أو غير محتج به مما ليس له إسناد، أوله إسناد ولا يحتج بمثله النقاد من أهل العلم `. ثم ساق أحاديث كثيرة هذا أحدها.
৯৮১। যে ব্যক্তির নিকট বাহন বোঝাই মাল থাকবে যা তাকে তৃপ্ত অবস্থার দিকে পৌঁছে দিবে, সে রামাযান মাসকে যেখানেই পাবে সেখানেই যেন সওম পালন করে।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি আবু দাউদ (১/৩৭৮), ইমাম আহমাদ (৩/৪৭৬, ৫/৭) ও উকায়লী `আয- যোয়াফা` (পৃঃ ২৫৯) গ্রন্থে বিভিন্ন সূত্রে আব্দুস সামাদ ইবনু হাবীব হতে তিনি হাবীব ইবনু আবদিল্লাহ হতে তিনি সিনান ইবনু সালামা ইবনে আল-মুহাব্বিক আল-হুযালী হতে তিনি তার পিতা হতে ... বর্ণনা করেছেন।
উকায়লী বলেনঃ তার (আব্দুস সামাদের) অনুসরণ করা যায় না। হাদীছটি একমাত্র তার মাধ্যমেই চেনা যায়।
তাকে ইমাম বুখারী `আয-যোয়াফা` (পৃঃ ২৪) গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেনঃ তিনি হাদীছের ক্ষেত্রে দুর্বল। ইমাম আহমাদ তাকে দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন।
মুনযেরী `মুখতাসারুস সুনান` (৩/২৯০) গ্রন্থে বলেনঃ ইবনু মাঈন বলেনঃ তার ব্যাপারে কোন সমস্যা নেই। আবু হাতিম আর-রাযী বলেনঃ তার হাদীছ লিখা যাবে। তিনি মাতরুক নন। অতঃপর তিনি ইমাম বুখারীর উল্লিখিত কথাগুলো উল্লেখ করে বলেনঃ তিনি আরো বলেছেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ, যাহেবুল হাদীছ। এ হাদহীটিকে ইমাম বুখারী গণ্যই করেননি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এটিতে আরেকটি সমস্যা রয়েছে। তা হচ্ছে হাবীব ইবনু আবদিল্লাহ মাজহুল। যাহাবী `আল-মীযান` গ্রন্থে এবং ইবনু হাজার “আততাকরীব` গ্রন্থে বলেনঃ তিনি মাজহুল।
শামসুদ্দীন ইবনু আব্দিল হাদী তার “আল-আহাদীছিয য’ঈফ ওয়াল মাওযুআহ” (কাফ ২/২১৭) গ্রন্থে হাদীছটি উল্লেখ করেছেন।
` لا تكون لأحد بعدك مهرا. قاله للذي زوجه المرأة على سورة من القرآن `.
منكر.
أخرجه سعيد بن منصور من مرسل أبي النعمان الأزدي قال: ` زوج رسول الله صلى الله عليه وسلم امرأة على سورة من القرآن، وقال: فذكره، قال الحافظ في ` الفتح ` (9 / 174) : ` وهذا مع إرساله فيه من لا يعرف `.
قلت: هو أبو النعمان هذا، والظاهر أنه الذي في ` الجرح والتعديل ` (4 / 2 / 449) ` أبو النعمان روى عن أبي وقاص عن زيد بن أرقم، وروى عن سلمان، وروى عنه على ابن عبد الأعلى، قال أبي مجهول `. والحديث في الصحيحين وغيرهما من حديث سهل بن سعد الساعدي قال: ` إني لفي القوم عند رسول الله صلى الله عليه وسلم إذ قامت امرأة فقالت: يا رسول الله إنها قد وهبت نفسها لك، فر فيها رأيك، فلم يجبها شيئا، ثم قامت الثالثة، فقالت إنها وهبت نفسها لك فر فيها رأيك فقام رجل فقال: يا رسول الله أنكحنيها، قال: هل عندك من شيء؟ قال: لا، قال: اذهب فاطلب ولوخاتم من حديد، فذهب يطلب، ثم جاء فقال: ما وجدت شيئا ولا خاتما من حديد، قال: هل معك من القرآن شيء؟ قال: نعم، سورة كذا وسورة كذا، قال: اذهب فقد أنكحتكها بما معك من القرآن `. وكذلك رواه مالك والنسائي والترمذي والبيهقي (7 / 242) دون قوله: ` لا تكون لأحد بعدك `، ولقد وهم صاحب ` الروض المربع ` من كتب الحنابلة وهما فاحشا، فعزا الحديث بلفظ سعيد بن منصور المرسل إلى البخاري! فقد تبين أن البخاري ليس عنده هذه الزيادة ولا عند غيره ممن ذكرنا، فدل ذلك على أنها زيادة منكرة لتفرد هذا الطريق الواهي بها دون سائر طرق الحديث وشواهده وهي كثيرة قد أخرجها الحافظ رحمه الله في ` الفتح ` (9 / 168) فليراجعها من شاء، وقد روي الحديث عن ابن مسعود بزيادة
أخرى منكرة أيضا وهو:
৯৮২। তোমার পরে আর কারো জন্য তা মহর হিসাবে গণ্য হবে না। কথাটি [রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম] সেই ব্যক্তিকে লক্ষ্য করে বলেন যাকে এক মহিলার সাথে কুরআনের একটি সূরার বিনিময়ে বিয়ে দিয়ে দেন।
হাদীছটি মুনকার।
এটি সাঈদ ইবনু মানসূর আবুন নুমান আল-আযদীর মুরসাল হতে বর্ণনা করেছেন।
হাফিয ইবনু হাজার “ফাতহুল বারী” (৯/১৭৪) গ্রন্থে বলেনঃ এটি মুরসাল হওয়া সত্ত্বেও তাতে এমন ব্যক্তি রয়েছে যাকে চেনা যায় না। এই আবু নুমান- তিনি সেই ব্যক্তি যার কথা “আল-জারহু ওয়াত-তা'দীল” (৪/২/৪৪৯) গ্রন্থে এসেছে। আবু হাতিম বলেনঃ তিনি মাজহুল। বুখারী ও মুসলিম সহ অন্যান্য হাদীছ গ্রন্থে সাহাল ইবনু সা’আদ আস-সায়েদী হতে হাদীছটি বর্ণিত হয়েছে। তাতে “لا تكون لأحد بعدك” “তোমার পরে আর কারো জন্য তা হবে না` এ বাক্যটি নেই। অতএব এ বর্ধিত অংশটুকু একমাত্র দুর্বল সূত্রে বর্ণিত হওয়ার কারণে মুনকার।
` قد أنكحتكها على أن تقرئها وتعلمها، وإذا رزقك الله عوضتها `.
منكر.
رواه الدارقطني في ` سننه ` (394) ومن طريقه البيهقي (7 / 243) عن عتبة بن السكن: أخبرنا الأوزاعي: أخبرني محمد بن عبد الله بن أبي طلحة: حدثني زياد بن زياد: حدثني عبد الله بن سخبرة عن ابن مسعود: ` أن امرأة أتت النبي صلى الله عليه وسلم فقالت: يا رسول الله
رأ في رأيك.... ` الحديث نحو حديث سهيل الصحيح المذكور قبله، وفيه: ` قال: فهل تقرأ من القرآن شيئا
؟ قال: نعم سورة البقرة وسورة المفصل، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم:.... ` فذكره وقال الدارقطني: ` تفرد به عن عتبة وهو متروك الحديث `. وقال البيهقي: ` عتبة بن السكن منسوب إلى الوضع، وهذا باطل لا أصل له `. قلت: ومن أحاديث هذا المتهم:
৯৮৩। তোমার সাথে এ শর্তে তার বিয়ে দিলাম যে, তাকে পড়াবে ও শিক্ষা দিবে। আল্লাহ তোমাকে যখন সম্পদ দান করবে তখন তুমি তাকে বদলা দিয়ে দিবে।
হাদীছটি মুনকার।
এটি দারাকুতনী তার `সুনান` (৩৯৪) গ্রন্থে ও তার সূত্রে বাইহাকী (৭/২৪৩) উতবাহ ইবনুস সাকান হতে তিনি আওযাঈ হতে তিনি মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল্লাহ হতে তিনি যিয়াদ ইবনু যিয়াদ হতে তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু সাখবারাহ হতে তিনি ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন।
দারাকুতনী বলেনঃ উতবাহ এককভাবে বর্ণনা করেছেন। তিনি মাতরূকুল হাদীছ। বাইহাকী বলেনঃ উতবাহ ইবনুস সাকানকে জাল করার সাথে সম্পৃক্ত করা হয়েছে। এটি বাতিল, এর কোন ভিত্তি নেই।
জাল করার দোষে দোষী এই ব্যক্তির হাদীছগুলোর একটি হচ্ছে নিম্নোক্ত হাদীছটিঃ (দেখুন পরেরটি)
` كان يستحب أن يصلي بعد نصف النهار حين ترتفع الشمس أربع ركعات، فقالت عائشة: يا رسول الله أراك تستحب الصلاة في هذه الساعة؟ قال: يفتح فيه أبواب السماء، وينظر الله تبارك وتعالى إلى خلقه، وهي صلاة كان يحافظ عليها آدم ونوح وإبراهيم وموسى وعيسى عليهم السلام `.
ضعيف جدا.
رواه الخطيب في ` التلخيص ` (88 / 1 - 2) عن عتبة بن السكن الحمصي: حدثنا الأوزاعي: حدثنا صالح بن جبير: حدثني أبو أسماء الرحبي: حدثني ثوبان مرفوعا وقال: ` تفرد به عتبة بن السكن عن الأوزاعي `. قلت:
وقد عرفت من الحديث السابق أن ابن السكن هذا متهم بالوضع. والحديث قال الهيثمي في ` المجمع ` (2 / 219) : ` رواه البزار، وفيه عتبة بن السكن، قال الدارقطني: متروك، وقد ذكره ابن حبان في ` الثقات ` وقال: يخطىء ويخالف `. قلت: ولذلك أشار المنذري في ` الترغيب ` (1 / 203) إلى ضعفه.
قلت: وليس عند البزار قوله ` حين ترتفع الشمس `، وهو يدفع دلالة الحديث على ما ترجم له المنذري وهو: ` الترغيب في الصلاة قبل الظهر وبعدها ` فتأمل.
৯৮৪। তিনি অর্ধ দিবসের পরে সূর্য উপরে উঠে যাওয়ার সময় চার রাকাআত সালাত আদায় করা মুস্তাহাব মনে করতেন। আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেনঃ হে আল্লাহর রাসূল, আমি আপনাকে দেখছি এ সময়ে আপনি সালাত আদায় করাকে ভালবাসেন। তিনি বললেনঃ সে সময়ে আসমানের দরযাগুলো খুলে দেয়া হয় আর আল্লাহ তা'আলা তাঁর সৃষ্টির দিকে দৃষ্টি দেন। সেটি এমন একটি সালাত যা আদম, নুহ, ইবরাহীম, মূসা ও ঈসা (আঃ) সর্বদা আদায় করতেন।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি আল-খাতীব `আত-তালখীস` (৮৮/১-২) গ্রন্থে উতবাহ ইবনুস সাকান হিমসী হতে তিনি আওযাঈ হতে তিনি সালেহ ইবনু জুবায়ের হতে তিনি আবু আসমা আর-রাহাবী হতে তিনি ছওবান হতে মারফু' হিসাবে বর্ণনা করেছেন। অতঃপর তিনি বলেছেনঃ উতবাহ আওযাঈ হতে এককভাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ পূর্বের হাদীছ হতে জেনেছেন যে, ইবনুস সাকান জাল করার দোষে দোষী। হায়ছামী `আল-মাজমা` (২/২১৯) গ্রন্থে বলেনঃ হাদীছটি বাযযার বর্ণনা করেছেন। তাতে উতবাহ ইবনুস সাকান রয়েছেন। তার সম্পর্কে দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মাতরূক। ইবনু হিব্বান তাকে `আছ-ছিকাত` গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ তিনি ভুল করতেন এবং বিরোধিতা করে বর্ণনা করতেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ কারণেই মুনযেরী `আত-তারগীব` (১/২০৩) গ্রন্থে দুর্বল হওয়ার দিকেই ইঙ্গিত করেছেন। আমি (আলবানী) বলছিঃ বাযযারের নিকট حين ترتفع الشمس অংশটুকু নেই।
` من لم تنهه صلاته عن الفحشاء والمنكر فلا صلاة له `.
منكر.
رواه ابن أبي حاتم في ` تفسيره `: حدثنا محمد بن هارون المخرمي الفلاس: حدثنا عبد الرحمن بن نافع أبو زياد: حدثنا عمر بن أبي عثمان: حدثنا الحسن عن عمران بن حصين قال: ` سئل النبي صلى الله عليه وسلم عن قول الله
تعالى: ` إن الصلاة تنهى عن الفحشاء والمنكر `؟ قال: ` فذكره. ذكره ابن كثير (2 / 414) وابن عروة في ` الكواكب الدراري ` (83 / 1 - 2 / 1) . قلت: وهذا سند ضعيف، وفيه علتان:
الأولى: الانقطاع بين الحسن وهو البصري وعمران بن الحصين، فإنهم اختلفوا في سماعه منه فإن ثبت، فعلته عنعنة الحسن فإنه مدلس معروف بذلك. والأخرى جهالة عمر بن أبي عثمان، أورده ابن أبي حاتم في ` الجرح والتعديل ` (3 / 1 / 123) وقال ` سمع طاووسا قوله، روى عنه يحيى بن سعيد `.
৯৮৫। যে ব্যক্তির সালাত তাকে তার নির্লজ্জ ও অশোভনীয় কাজ হতে বিরত করে না, তার সালাতই হয় না।
হাদীছট মুনকার।
এটি ইবনু আবী হাতিম তার `তাফসীর` গ্রন্থে মুহাম্মাদ ইবনু হারূণ আল-মাখরামী হতে তিনি আব্দুর রহমান ইবনু নাফে' আবূ যিয়াদ হতে তিনি উমার ইবনু আবী উছমান হতে তিনি আল-হাসান হতে তিনি ইমরান ইবনু হুসায়েন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন।
হাদীছটি ইবনু কাছীর (২/৪১৪) এবং ইবনু উরওয়াহ `আল-কাওয়াকিবুদ দুরারী` (৮৩/১-২/১) গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। তাতে দুটি সমস্যা রয়েছেঃ
১। হাসান বাসরী ও ইমরান ইবনু হুসায়েনের মধ্যে বিচ্ছিন্নতা। কারণ মুহাদ্দিছগণ তার থেকে তার শ্রবণের ব্যাপারে মতভেদ করেছেন। যদি তার শ্রবণ সাব্যস্তও হয় তবুও সমস্যা রয়ে যাচ্ছে হাসান হতে আন আন করে বর্ণনাকৃত হওয়ায়। কারণ তিনি মুদাল্লিস হিসাবে পরিচিত।
২। উমার ইবনু আবী উছমান মাজহুল।
` إذا خلع أحدكم نعليه في الصلاة، فلا يجعلهما بين يديه فيأتم بهما، ولا من خلفه، فيأتم بهما أخوه المسلم ولكن ليجعلهما بين رجليه `.
ضعيف جدا.
أخرجه الطبراني في ` المعجم الصغير ` (ص 195) من طريق أبي سعيد الشقري عن زياد الجصاص عن عبد الرحمن بن أبي بكرة عن أبيه عن النبي صلى الله عليه وسلم وقال: ` لا يروى عن أبي بكرة إلا بهذا الإسناد `.
قلت: وهو ضعيف جدا، فإن زيادا هذا وهو ابن أبي زياد الجصاص قال الذهبي في ` الميزان `: ` قال ابن معين وابن المديني: ليس بشيء، وقال أبو زرعة: واه، وقال النسائي والدارقطني: متروك، وأما ابن حبان فقال في ` الثقات `: ربما يهم، قلت بل هو مجمع على ضعفه `.
قلت: والراوي عنه أبو سعيد الشقري واسمه المسيب بن شريك مثله في الضعف أو أشد، فقد قال فيه أحمد: ` ترك الناس حديثه `. وضعفه البخاري جدا فقال: ` سكتوا عنه `. وقال مسلم وجماعة: ` متروك `.
وقال الفلاس: ` متروك الحديث، قد أجمع أهل العلم على ترك حديثه `. وقال الساجي: ` متروك الحديث، يحدث بمناكير `. والحديث أورده الهيثمي في ` المجمع ` (2 / 55) بلفظ: ` إذا صلى أحدكم فخلع نعليه، فلا يخلعهما عن يمينه فيأثم، ولا من خلفه فيأتم بهما صاحبه، ولكن ليخلعهما بين ركبتيه `. وقال: ` رواه الطبراني في الكبير، وفيه زياد الجصاص ضعفه ابن معين وابن المديني وغيرهما، وذكره ابن حبان في ` الثقات ` `. كذا قال، وقد عرفت مما سبق أن ابن حبان قد خالف في هذا التوثيق إجماع الأئمة الذين ضعفوه، فلا يعتد بتوثيقه!
والحديث قد روي من طريق أخرى وهو: ` إذا صليت فصل في نعليك، فإن لم تفعل فضعهما تحت قدميك، ولا تضعهما عن يمينك، ولا عن يسارك فتؤذي الملائكة والناس، وإذا وضعتهما بين يديك كأنما بين يديك قبلة `.
৯৮৬। সালাতের মধ্যে তোমাদের কেউ যখন তার জুতা দুটি খুলে নিবে, তখন সে দুটিকে তার সামনে রাখবে না। কারণ তাতে সে নিজে সে দুটির অনুসরণ করে বসবে। তার পিছনেও রাখবে না। কারণ তাতে তার মুসলিম ভাই সে দুটির অনুসরণ করবে। বরং জুতা দুটি তার দু' পায়ের মাঝে রাখবে।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি তাবরানী “আল-মুজামুস সাগীর” (পৃঃ ১৯৫) গ্রন্থে আবু সাঈদ আশ-শাকরী সূত্রে যিয়াদ আল-জাসসাস হতে তিনি আব্দুর রহমান ইবনু আবী বাকরা হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন। তাবারানী বলেনঃ হাদীছটি আবু বাকরা হতে একমাত্র এ সনদেই বর্ণিত হয়েছে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ সনদটি খুবই দুর্বল। কারণ যিয়াদ হচ্ছেন ইবনু আবী যিয়াদ আল-জাসসাস। যাহাবী `আল-মীযান` গ্রন্থে তার সম্পর্কে বলেনঃ ইবনু মাঈন ও ইবনুল মাদীনী বলেনঃ তিনি কিছুই না। আবু যুর'আহ বলেনঃ তিনি দুর্বল। নাসাঈ ও দারাকুতনী বলেনঃ তিনি মাতরূক। ইবনু হিব্বান তাকে “আছ-ছিকাত” গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেছেনঃ কখনও কখনও তিনি সন্দেহ করতেন। আমি (যাহাবী) বলছিঃ বরং তার দুর্বল হওয়ার বিষয়ে সকলে একমত।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তার থেকে বর্ণনাকারী আবু সাঈদ আশ-শাকারী হচ্ছেন আল-মুসাইয়্যাব ইবনু শুরায়িক। তিনিও তার ন্যায় কিংবা আরো বেশী দুর্বল। ইমাম আহমাদ তার সম্পর্কে বলেছেনঃ লোকেরা তার হাদীছকে পরিত্যাগ করেছেন। বুখারী তাকে খুবই দুর্বল আখ্যা দিয়ে বলেছেনঃ মুহাদ্দিছগণ তার ব্যাপারে চুপ থেকেছেন। মুসলিম ও একদল বলেনঃ তিনি মাতরূক।
আল-ফাল্লাস বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীছ। জ্ঞানীজনরা তার হাদীছ পরিত্যাগ করার ব্যাপারে ইজমা করেছেন।
আস-সাজী বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীছ। মুনকার হাদীছ বর্ণনাকারী।
হায়ছামী হাদীছটি `আল-মাজমা` (২/৫৫) গ্রন্থে অন্য ভাষায় বর্ণনা করেছেন। কিন্তু তাতেও যিয়াদ আল-জাসসাস রয়েছেন।
` إذا صليت فصل في نعليك، فإن لم تفعل فضعهما تحت قدميك، ولا تضعهما عن يمينك، ولا عن يسارك فتؤذي الملائكة والناس، وإذا وضعتهما بين يديك كأنما بين يديك قبلة `.
منكر.
رواه الخطيب في ` تاريخ بغداد ` (9 / 448 - 449) عن أبي خالد إبراهيم بن سالم حدثنا عبد الله بن عمران البصري عن أبي عمران الجوني عن أبي برزة الأسلمي عن ابن عباس مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف علته إبراهيم هذا، قال الذهبي في ` الميزان `: ` قال ابن عدي: له مناكير `. ثم ساق له الذهبي حديثين منكرين، ثم قال: ` وسئل أبو حاتم عن عبد الله بن عمران؟ فقال: شيخ `. وروي الحديث من طريق ثالث وهو:
৯৮৭। তুমি যখন সালাত আদায় করবে তখন তোমার জুতা দুটি পরিধান করেই সালাত আদায় কর। যদি তা না কর, তাহলে সে দুটিকে তোমার পায়ের নীচে রেখে দাও। তোমার ডান ও বাম দিকে রেখো না। কারণ তাতে ফেরেশতা ও লোকদেরকে তুমি কষ্ট দিবে। যদি তোমার সম্মুখে রাখো তাহলে তুমি যেন তোমার সামনে কিবলা রাখলে।
হাদীছটি মুনকার।
এটি আল-খাতীব `তারীখু বাগদাদ` (৯/৪৪৮-৪৪৯) গ্রন্থে আবু খালেদ ইবরাহীম ইবনু সালেম হতে তিনি আবদুল্লাহ ইবনু ইমরান বাসরী হতে তিনি আবূ ইমরান আল-জুনী হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। তার সমস্যা এই ইব্রাহীম। যাহাবী “আল-মীযান” গ্রন্থে বলেন, ইবনু আদী বলেছেনঃ তার কতিপয় মুনকার হাদীছ রয়েছে। অতঃপর হাফিয যাহাবী তার দু'টি মুনকার হাদীছ উল্লেখ করেছেন।
991) .
৯৮৮। তুমি তোমার দু' পায়ে জুতা দু'টি পরিধান করে থাক। যদি তুমি সে দু'টি খুল, তাহলে জুতা দু'টিকে তোমার দু' পায়ের মঝে রাখ। তুমি সে দু'টিকে তোমার ও তোমার সাথীর ডানে রাখবে না। তোমার পিছনেও রাখবে না। কারণ তুমি তা দ্বারা তোমার পিছনের ব্যক্তিকে কষ্ট দিবে।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি ইবনু মাজাহ (১/৪৩৭-৪৩৮) আব্দুল্লাহ ইবনু সাঈদ ইবনে আবী সাঈদ হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফূ’ হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। কারণ এই আব্দুল্লাহ মাতরূক যেমনটি `আত-তাকরীব` গ্রন্থে ও যাহাবীর `আয-যোয়াফা` গ্রন্থে এসেছে। তার ভাষা হচ্ছেঃ তারা তাকে পরিত্যাগ করেছেন। বুসয়র “আয-যাওয়ায়েদ” (কাফ ১/৮৯) গ্রন্থে বলেনঃ এ সনদটি দুর্বল। আব্দুল্লাহ ইবনু সাঈদের দুর্বল হওয়ার বিষয়ে সকলে একমত।
এটির দুর্বল হওয়াকে আরো শক্তিশালী করছে দুই নির্ভরযোগ্য বর্ণনাকারীর তার পিতা সাঈদ ইবনু আবী সাঈদ হতে তার (আব্দুল্লাহর) বিরোধিতা করে নিম্নের বাক্যের বর্ণনাঃ
যখন তোমাদের কেউ সালাত আদায় করার সময় তার জুতা দুটি খুলে নিবে, তখন সে যেন তা দ্বারা কোন ব্যক্তিকে কষ্ট না দেয়। সে যেন তার দু' পায়ের মাঝে সে দুটিকে রেখে দেয় কিংবা জুতা পরিধান করা অবস্থাতেই সালাত আদায় করে।
এর সনদটি সহীহ। আমি `সহীহ আবী দাউদ` (নং ৬৬২) গ্রন্থে এটির তাখরীজ করেছি।
` يوم من إمام عادل أفضل من عبادة ستين سنة، وحد يقام في الأرض أزكى فيها من مطر أربعين يوما `.
ضعيف.
رواه سمويه في ` الفوائد ` (37 / 2) : حدثنا أحمد بن يونس: أخبرني سعد أبو غيلان الشيباني قال: سمعت عفان بن جبير الطائي عن أبي حريز الأزدي أو حريز عن عكرمة
عن ابن عباس مرفوعا ورواه الطبراني (3 / 140 / 1) من طريق أخرى عن أحمد بن يونس به إلا أنه لم يقل في سنده ` أو حريز `. قلت: وهذا سند ضعيف مسلسل بجماعة لا يعرفون من سعد إلى أبي حريز غير أن سعدا لم
يتفرد به، فقد رواه الطبراني في ` الأوسط ` (1 / 182 / 1، 144 / 1) من طريق زريق بن السحت: أخبرنا جعفر بن عون: أخبرنا عفان بن جبير الطائي عن عكرمة به وقال: ` لا يروى عن ابن عباس إلا بهذا الإسناد `. قلت: ومداره على عفان بن جبير هذا، وقد أورده ابن أبي حاتم (3 / 2 / 30) ولم يذكر فيه جرحا وتعديلا، ولعل ابن حبان أورده في ` الثقات `!
والظاهر أنه قد اختلف عليه فرواه زريق هذا عن جعفر بن عون عنه عن عكرمة به. وخالفه سعد أبو غيلان فرواه عنه عن أبي حريز أو حريز عن عكرمة به، فزاد في السند أبا حريز أو حريز، ويبدو أن حريزا مجهول، فإن ابن أبي حاتم لم يذكر في ترجمته أكثر من قوله: ` كوفي، كان أبوه أبا حريز عبد الله بن الحسين قاضي سجستان `.
وله ترجمة طويلة في ` اللسان ` وأفاد أنه كان من شيوخ الشيعة وأنه كوفي أزدي. وأما أبوه عبد الله بن الحسين فصدوق يخطىء كما في ` التقريب `.
وأما سعد أبو غيلان فأورده ابن أبي حاتم أيضا (2 / 1 / 99) ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا. وأما زريق الذي في الوجه الثاني فلم أجد له ترجمة. وأما جعفر بن عون فثقة من رجال الشيخين.
وجملة القول أن إسناد الحديث ضعيف لتفرد عفان بن جبير به، كما أشار إلى ذلك الطبراني وهو مجهول، وللاختلاف عليه في إسناده كما عرفت، فقول المنذري في ` الترغيب ` (3 / 135) ثم العراقي في ` تخريج الإحياء (1 / 155) : ` رواه الطبراني في الكبير والأوسط، وإسناد الكبير حسن `. ففيه نظر كبير، لما عرفت من تسلسل إسناد الكبير بالمجهولين. نعم الشطر الثاني من الحديث حسن لأن له شاهدا من حديث أبي هريرة، ولذلك أوردته في ` الأحاديث الصحيحة ` (رقم 231) .
৯৮৯। ন্যায় পরায়ণ ইমামের (নেতার) একদিন ষাট বছরের ইবাদাতের চেয়ে উত্তম। যমীনে একটি হাদ (শান্তি) কায়েম করা তাতে চল্লিশ দিন বৃষ্টি হওয়ার চেয়েও বেশী পবিত্র।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি সামওয়াহে “আল-কাওরায়েদ” (২/৩৭) গ্রন্থে আহমাদ ইবনু ইউনুস হতে তিনি সা'আদ আবূ গায়লান আশ-শায়বানী হতে তিনি আফফান ইবনু জুবায়ের আত-তাঈ হতে তিনি আবু হুরায়েয আযদী বা হুরায়েয হতে ... বর্ণনা করেছেন।
হাদীছটি তাবারানী (৩/১৪০/১) ভিন্ন সূত্রে আহমাদ ইবনু ইউনুস হতে বর্ণনা করেছেন। তবে তিনি তার সনদে বা হুরায়েয কথাটি বলেননি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি সা’আদ হতে আবু হুরায়েয পর্যন্ত পর্যায়ক্রমে একদল অপরিচিত বর্ণনাকারীর কারণে দুর্বল। তবে সা’আদ এককভাবে বর্ণনা করেননি। হাদীছটি তাবারানী `আল-আওসাত` (১/১৮২, ১/১৪৪) গ্রন্থে যুরায়েক ইবনুস সাহাত সূত্রে জা'ফার ইবনু আউন হতে তিনি আফফান ইবনু জুবায়ের হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীছটির কেন্দ্রবিন্দু হচ্ছে আফফান ইবনু জুবায়ের। ইবনু আবী হাতিম তাকে (৩/২/৩০) উল্লেখ করে তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি। সম্ভবত ইবনু হিব্বান তাকে `আছ-ছিকাত` গ্রন্থে উল্লেখ করেছেন।
যুরায়েক আবু হুরায়েয আযদী বা হুরায়েযকে মাঝখানে উল্লেখ না করে বলেছেনঃ আফফান ইকরিমা হতে বর্ণনা করেছেন।
এই আবু হুরায়েয হচ্ছেন সিজিস্তানের কাযী আব্দুল্লাহ ইবনু হুসাইন। হাফিয ইবনু হাজার “আল-লিসান” গ্রন্থে তার দীর্ঘ জীবনীতে উল্লেখ করেছেন তিনি শীয়াদের শাইখ, কূফী, আযদী।
তিনি সত্যবাদী তবে ভুল করতেন। `আত-তাকরীব` গ্রন্থে এরূপই এসেছে।
সা’আদ আবু গায়লানকে ইবনু আবী হাতিম (২/১/৯৯) উল্লেখ করে তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি।
দ্বিতীয় সূত্রের বর্ণনাকারী যুরায়েকের জীবনী পাচ্ছি না। মোটকথা হাদীছটির সনদ দুর্বল। আফফান ইবনু জুবায়ের এককভাবে বর্ণনা করার কারণে। যেমনটি তাবারানী সেদিকে ইঙ্গিত করেছেন। তিনি মাজহুল।
` من لم يذر المخابرة فليؤذن بحرب من الله ورسوله `.
ضعيف.
أخرجه أبو داود (2 / 235 - طبع الحلبي) ومن طريقه البيهقي في ` سننه ` (6 / 128) وأبو نعيم في ` الحلية ` (9 / 236) من طريق عبد الله بن رجاء: أخبرني عبد الله بن عثمان بن خثيم عن أبي الزبير عن جابر قال سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم فذكره وقال أبو نعيم: ` غريب من حديث أبي الزبير، تفرد به ابن خثيم بهذا اللفظ، وعبد الله بن رجاء هو المكي، ليس بالعراقي البصري `.
قلت وهو ثقة من رجال مسلم وأصله من البصرة قال ابن سعد: ` كان ثقة كثير الحديث، وكان من أهل البصرة، فانتقل إلى مكة فنزلها إلى أن مات بها `.
وأما العراقي البصري فهو الغداني وليس مكيا وهو مع كونه ممن احتج بهم البخاري في ` صحيحه ` ففيه كلام كثير، وقد ظن المناوي في ` فيض القدير ` أنه هو راوي هذا الحديث فأعله به فقال: ` وفيه عبد الله بن رجاء، أورده الذهبي في ` ذيل الضعفاء ` وقال: صدوق، قال الفلاس: كثير الغلط والتصحيف `.
وهذا هو الغداني كما صرح به الذهبي نفسه في ترجمته، وليس هو صاحب هذا الحديث كما صرح بذلك أبو نعيم فيما نقلته عنه آنفا، وكذلك أبو داود حيث قال في روايته: ` حدثنا ابن رجاء يعني المكي `. والغداني ليس مكيا كما ذكرنا، فلا أدري كيف خفي هذا على المناوي.
وإنما علة الحديث أبو الزبير واسمه محمد بن مسلم بن تدرس، فإنه وإن كان ثقة ومن رجال مسلم، فهو مدلس وقد عنعنه وقد قال الذهبي في ترجمته من ` الميزان `: ` وفي صحيح مسلم عدة أحاديث مما لم يوضح فيها ابن الزبير السماع عن جابر ولا من طريق الليث عنه، ففي القلب منها شيء `. قلت: فلا يطمئن القلب لصحة هذا الحديث مع هذه العنعنة، لاسيما وهو ليس في ` صحيح مسلم `.
(تنبيه) عزاه السيوطي في ` الجامع الصغير ` لأبي داود والحاكم، ولم أجده في ` مستدركه ` في المواضع التي يظن وجوده فيها، فالله أعلم. ثم وجدته فيه بواسطة الفهرس الذي أنا في صدد وضعه له، يسر الله لي إتمامه، أخرجه في ` التفسير ` (2 / 285 - 286) من طريق ابن رجاء المكي به. (فائدة) : المخابرة هي المزارعة، وفي القاموس: ` المزارعة المعاملة على الأرض ببعض ما يخرج منها، ويكون البذر من مالكها، وقال: والمخابرة أن يزرع على النصف ونحوه `. وقد صح النهي عن المخابرة من طرق أخرى عن جابر رضي الله عنه عند مسلم (5 / 18 و19) وغيره، ولكنه محمول على الوجه المؤدي إلى الغرر والجهالة، لا على كرائها مطلقا حتى بالذهب والفضة لثبوت جواز ما لا غرر فيه في أحاديث كثيرة وتفصيل ذلك في المطولات مثل ` نيل الأوطار ` و` فتح الباري ` وغيرهما.
৯৯০। যে ব্যক্তি মুখাবারাহ পরিত্যাগ করবে না, সে যেন আল্লাহ ও তাঁর রাসূলের বিরুদ্ধে যুদ্ধ ঘোষণা করে।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি আবু দাউদ (২/২৩৫) ও তার সূত্রে বাইহাকী তার `সুনান` (৬/১২৮) গ্রন্থে এবং আবু নোয়াইম `আল-হিলইয়্যাহ` (৯/২৩৬) গ্রন্থে আব্দুল্লাহ ইবনু রাজা সূত্রে তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু উছমান ইবনে খাছ’আম হতে তিনি আবূয যুবায়ের হতে তিনি জাবের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আবু নোয়াইম বলেনঃ আবুয যুবায়েরের হাদীছ হতে এটি গারীব। আব্দুল্লাহ ইবনু খাছ’আম এ বাক্যে এককভাবে বর্ণনা করেছেন। আব্দুল্লাহ ইবনু রাজা হচ্ছেন মাক্কী, তিনি ইরাকী বাসরী নন।
তিনি নির্ভরযোগ্য ইমাম মুসলিমের বর্ণনাকারী। ইবনু সা’আদ তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি বহু হাদীছের অধিকারী নির্ভরযোগ্য ছিলেন।
হাদীছটির সমস্যা হচ্ছে আবুয যুবায়ের। তার নাম মুহাম্মাদ ইবনু মুসলিম। তার সম্পর্কে (৯৭২ নং) হাদীছে বিস্তারিত আলোচনা করা হয়েছে।
ফায়েদাহঃ মুখাবারাহ হচ্ছে যমীনকে অন্য ব্যক্তির কাছে এ শর্তে প্রদান করা যে, যা কিছু উৎপাদিত হবে তার অংশ বিশেষ যমীনের মালিকের। যমীনের মালিক বীজ প্রদান করবে। তা অর্ধাঅর্ধি ভাগে বা অনুরূপ হতে পারে।
এই মুখাবারাহ নিষেধ হওয়ার বিষয়ে জাবের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে ভিন্ন সূত্রে ইমাম মুসলিম ও অন্যদের নিকট সহীহ হাদীছ বর্ণিত হয়েছে। এটি আমভাবে নিষেধ নয়। এরূপ যদি হয় যে তা ধোঁকা ও অজ্ঞতার দিকে নিয়ে যাচ্ছে তাহলে নিষেধ। যদি ধোঁকা হতে নিরাপদ হয় সে ক্ষেত্রে জায়েয। এ বিষয়ে বিস্তারিত জানার জন্য `নায়লুল আওতার` ও `ফাতহুল বারী` সহ অন্যান্য গ্রন্থ দেখুন।
` من صلى صلاة مكتوبة مع الإمام فليقرأ بفاتحة الكتاب في سكتاته، ومن انتهى إلى أم القرآن فقد أجزأه `.
ضعيف جدا.
رواه الدارقطني في ` سننه ` (ص 120) والحاكم (1 / 238) والبيهقي في ` جزء القراءة ` (ص 54) عن فيض بن إسحاق الرقي: أخبرنا محمد بن عبد الله بن عبيد بن
عمير الليثي عن عطاء عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره. قلت: وهذا سند ضعيف جدا، ابن عمير هذا متروك كما قال الدارقطني والنسائي، وقال البخاري: ` منكر الحديث `. وقال
البيهقي عقب الحديث: ` لا يحتج به ` وقال الدارقطني: ` ضعيف `.
قلت: وهذا الحديث يخالف المعروف من مذهب أبي هريرة رضي الله عنه، وذلك أن مفهومه أن القراءة في غير سكتات الإمام - أعني حالة جهره - لا تشرع، والثابت عن أبي هريرة مشروعية القراءة إطلاقا، وهو ما أخرجه مسلم (2 / 9) وغيره عن أبي هريرة مرفوعا: ` من صلى صلاة لم يقرأ فيها بأم القرآن فهي خداج (ثلاثا) غير
تمام `. فقيل لأبي هريرة: إنا نكون وراء الإمام؟ فقال: اقرأ بها في نفسك، فهذا كالنص عنه في أنه أمر المؤتم بالقرأة وراء الإمام ولوكان يجهر، لكن قد يقال: أن لا مخالفة، وذلك بحمل المطلق على القراءة في سكتات الإمام، فإنه ثبت عن أبي هريرة أمره بها كما تقدم تحت الحديث (546) وذلك من الأدلة على خطأ رفع حديث الترجمة. ثم إن ما ذهب إليه أبوهريرة من القراءة في الجهرية وراء الإمام، له في الصحابة موافقون ومخالفون، فمن الأول ما أخرجه البيهقي (2 / 167) وغيره عن يزيد بن شريك أنه سأل عمر عن القراءة خلف الإمام؟ فقال: اقرأ بفاتحة الكتاب. قلت: وإن كنت أنت؟ قال: وإن كنت أنا، قلت: وإن جهرت به؟ قال وإن جهرت، وسنده صحيح. ثم ذكر البيهقي في الموافقين جماعة من الصحابة وفي ذلك نظر من جهة السند والمعنى لا ضرورة بنا إلى استقصاء القول في ذلك بعد أن ذكرنا ثبوته عن أبي هريرة وعمر. وأما المخالفون فيأتي ذكر بعضهم في الحديث الآتي.
৯৯১। যে ব্যক্তি ইমামের সাথে ফরয সালাত আদায় করবে সে সূরা 'ফাতিহা' তার চুপ থাকার সময়গুলোতে পড়ে নিবে। যে ব্যক্তি উন্মুল কুরআন (ফাতিহা) শেষ করবে তাই তার জন্য যথেষ্ট হবে।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি দারাকুতনী তার `সুনান` (পৃঃ ১২০) গ্রন্থে, হাকিম (১/২৩৮) ও বাইহাকী `জুযউল কিরাআহ` (পৃঃ ৫৪) গ্রন্থে ফায়েয ইবনু ইসহাক আর-রাকী হতে তিনি মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল্লাহ ইবনে ওবায়েদ ইবনে উমায়ের আল-লাইছী হতে তিনি আতা হতে তিনি আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ ...।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। এই মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল্লাহ ইবনে উমায়ের মাতরূক যেমনটি দারাকুতনী ও নাসাঈ বলেছেন।
ইমাম বুখারী তার সম্পর্কে বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। বাইহাকী হাদীছটির পরে বলেনঃ তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করা যাবে না। দারাকুতনী বলেনঃ তিনি দুর্বল।
আমি (আলবানী) বলছিঃ আলোচ্য হাদীছটি আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর মাযহাব বিরোধী। কারণ এটি প্রমাণ করছে যে, ইমাম চুপ না থাকার সময়গুলোতে (প্রকাশ করে পড়ার সময়গুলোতে) পাঠ করা শারীয়াত সম্মত নয়। অথচ আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে সাব্যস্ত হয়েছে সর্বাবস্থায় সূরা ফাতিহা পাঠ করা শারীয়াত সম্মত। যেমনটি ইমাম মুসলিম ও অন্য বিদ্বানগণ তার থেকে মারফূ’ হিসাবে বর্ণনা করেছেনঃ
من صلى صلاة لم يقرأ فيها بأم القرآن فهي خداج (ثلاثا) غير تمام فقيل لأبي هريرة: إنا نكون وراء الإمام؟ فقال: اقرأ بها في نفسك
যে ব্যক্তি সালাত আদায় করল অথচ তাতে সূরা ফাতিহা পাঠ করলো না তার সালাত অসম্পূর্ণ, অসম্পূর্ণ, অসম্পূর্ণ, পূর্ণ নয়। আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে বলা হলো আমরা যখন ইমামের পিছনে থাকি? তিনি বললেনঃ তুমি তখন তোমার মনে মনে পাঠ করবে।
এটি আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে ইমামের পিছনে উচ্চস্বরে পাঠকৃত সালাতগুলোতেও মুক্তাদী কর্তৃক সূরা ফাতিহা পাঠ করার সুস্পষ্ট দলীল। আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে ইমামের চুপ থাকার সময়গুলোতে সূরা ফাতিহা পাঠ করার নির্দেশ প্রদানও সাব্যস্ত হয়েছে। যেমনটি ৫৪৬ নং হাদীছে তা আলোচনা করা হয়েছে।
আবু হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) যেহরী সালাতেও ইমামের পিছনে সূরা ফাতিহা পাঠ করার মত গ্রহণ করেছেন। সাহাবাদের মধ্য হতে তার সাথে ঐকমত্য পোষণকারী ও দ্বিমত পোষণকারীও রয়েছেন।
বাইহাকী (২/১৬৭) ও অন্য বিদ্বানগণ ইয়াযীদ ইবনু শুরায়িক হতে বর্ণনা করেছেন তিনি উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে ইমামের পিছনে কিরাআত পাঠ করা বিষয়ে জিজ্ঞাসা করেন। তিনি উত্তরে বলেনঃ সূরা ফাতিহা পাঠ করো। আমি বললামঃ যদি আপনিও হন তবুও? তিনি বললেনঃ যদি আমি হই তবুও। আমি বললামঃ যদি আপনি উচ্চস্বরে পাঠ করেন তবুও? তিনি বললেনঃ যদি আমি উচ্চস্বরে পাঠ করি তবুও। এর সনদটি সহীহ। বাইহাকী উক্ত মতের সাথে ঐকমত্য পোষণকারী একদল সাহাবার নাম উল্লেখ করেন। সেগুলোতে সনদ ও অর্থের দিক দিয়ে বিরূপ মন্তব্য রয়েছে। আবু হুরাইরাহ ও উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে সাব্যস্ত হওয়াটা উল্লেখ করার পর সেগুলো বর্ণনা করার প্রয়োজন বোধ করছি না।
` إذا كنت مع الإمام فاقرأ بأم القرآن قبله إذا سكت `.
ضعيف.
رواه البيهقي في ` جزء القراءة ` (ص 54) من طريق المثنى بن الصباح عن عمرو بن شعيب عن أبيه عن عبد الله بن عمرو عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: فذكره.
ثم رواه من طريق ابن لهيعة أخبرنا عمرو بن شعيب به نحوه. ثم رواه الدارقطني (121) من طريق محمد بن عبد الوهاب: أخبرنا محمد بن عبد الله بن عبيد بن عمير عن عمرو بن شعيب به. وخالفه فيض بن إسحاق الرقي فرواه عن ابن عبيد هذا بإسناد آخر نحوه فانظر الحديث المتقدم. ثم قال البيهقي: ` ومحمد بن عبد الله بن عبيد بن عمير، وإن كان غير محتج به، وكذا من تقدم ممن رواه عن عمرو بن شعيب، فلقراءة المأموم فاتحة الكتاب في سكتة الإمام شواهد صحيحة عن عمرو بن شعيب عن أبيه عن جده خبرا عن فعلهم، وعن أبي هريرة وغيره من فتواهم، ونحن نذكرها إن شاء الله تعالى في ذكر أقاويل الصحابة `.
قلت: ابن عمير هذا متروك شديد الضعف كما مضى قريبا، فلا يستشهد به ونحوه المثنى بن الصباح، فقد ضعفه الجمهور من الأئمة، وقال النسائي وابن الجنيد: ` متروك الحديث ` وقال النسائي في موضع آخر: ` ليس بثقة `. وقال الساجي: ` ضعيف الحديث جدا، حدث بمناكير يطول ذكرها، وكان عابدا يهم `.
قلت: وأيضا فإنه كان ممن اختلط في آخر عمره كما قال ابن حبان. وأما ابن لهيعة، فهو معروف بالضعف،، لأنه خلط بعد احتراق كتبه، فيحتمل أن يكون هذا من تخاليطه، ومع الاحتمال يسقط الاستدلال. وأما الشواهد التي أشار إليها البيهقي فعلى فرض التسليم بصحتها، فهي موقوفة، فلا يصح الاستشهاد بها على صحة المرفوع، لاسيما والآثار في هذا الباب عن الصحابة مختلفة، فقد روى البيهقي في ` سننه ` (2 / 163) بسند صحيح عن أبي الدرداء أنه قال: ` لا أرى الإمام إذا أم القوم إلا قد كفاهم `. وروى هو (2 / 160) وغيره بسند صحيح أيضا عن جابر قال: ` من صلى ركعة لم يقرأ فيها بأم القرآن فلم يصل إلا وراء الإمام `. وعن ابن عمر أنه كان يقول: ` من
صلى وراء الإمام كفاه قراءة الإمام `. وسنده صحيح أيضا، وعن ابن مسعود أنه سئل عن القراءة خلف الإمام؟ قال: أنصت، فإن في الصلاة شغلا ويكفيك الإمام. رواه الطحاوي (1 / 129) والبيهقي (2 / 160) وغيرهما بسند صحيح.
قلت: فهذه آثار كثيرة قوية تعارض الآثار المخالفة لها مما أشار إليه البيهقي وذكرنا بعضها آنفا، فإذا استشهد بها لصحة هذا الحديث، فلمخافة أن يستشهد بهذه الآثار على ضعفه، والحق أنه لا يجوز تقوية الحديث ولا تضعيفه بآثار متعارضة فتأمل. والذي نراه أقرب إلى الصواب في هذه المسألة مشروعية القراءة وراء الإمام في السرية دون الجهرية، إلا إن وجد سكتات الإمام، وليس هناك حديث صريح لم يدخله التخصيص يوجب القراءة في الجهرية، وليس هذا موضع تفصيل القول في ذلك فاكتفينا بالإشارة.
৯৯২। তুমি যদি ইমামের সাথে থাক তাহলে যখন সে চুপ থাকবে তখন তার পূর্বেই উম্মুল কুরআন (ফাতিহা) পাঠ কর।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি বাইহাকী `জুযউল কিরাআহ` (পৃঃ ৫৪) গ্রন্থে মুসান্না ইবনুস সাবাহ সূত্রে আম্বর ইবনু শুয়ায়েব হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি আব্দুল্লাহ ইবনু আমর হতে তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেছেন। অতঃপর তিনি ইবনু লাহী'আহ সূত্রেও বর্ণনা করেছেন।
তিনি ও দারাকুতনী (১২১) মুহাম্মাদ ইবনু আব্দিল ওয়াহাব সূত্রে মুহাম্মাদ ইবনু আবদিল্লাহ ইবনে ওবায়েদ ইবনে উমায়ের হতে তিনি আমর ইবনু শুয়ায়েব হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ মুহাম্মাদ ইবনু উমায়ের মাতরূক, খুবই দুর্বল। যেমনটি পূর্বে গেছে। তার দ্বারা শাহেদ গ্রহণ করা যায় না। মুসান্নাও তার ন্যায়। তাকে জামহুর দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন।
নাসাঈ ও ইবনুল জুনায়েদ বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীছ। নাসাঈ অন্যত্র বলেনঃ তিনি নির্ভরযোগ্য নন। সাজী বলেনঃ হাদীছের ক্ষেত্রে তিনি খুবই দুর্বল। তিনি মুনকার হাদীছ বর্ণনা করেছেন। তিনি একজন আবেদ ছিলেন সন্দেহ করতেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ তার শেষ বয়সে মস্তিষ্ক বিকৃতিও ঘটেছিল যেমনটি ইবনু হিব্বান বলেছেন।
আর ইবনু লাহী'আহ-তিনি দুর্বলতার দিক দিয়ে পরিচিত। তার কিতাবগুলো পুড়ে যাবার পর তার সব কিছু উলট-পালট হয়ে যায়। বাইহাকী যে সব শাহেদগুলোর কথা উল্লেখ করেছেন, সেগুলো যদি সহীহ হিসাবে ধরেওনি তবুও সেগুলো মওকুফ। মারফু হিসাবে সহীহ মনে করে সেগুলোকে শাহেদ হিসাবে নেয়া সঠিক হবে না। এ অধ্যায়ে সাহাবাদের মধ্যে বিপরীত মতও এসেছে। বাইহাকী আবুদ দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে সহীহ সনদে তার `সুনান` (২/১৬২) গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন, তিনি বলেনঃ ইমাম যখন কোন সম্প্রদায়ের ইমামত করেন তখন তিনিই তাদের জন্য যথেষ্ট হয়ে যান।
এ ছাড়া জাবের, ইবনু উমার ও ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতেও সহীহ সনদে ইমামের কিরাআত মুক্তাদীর জন্য যথেষ্ট হওয়ার বিষয়ে আছার বর্ণিত হয়েছে।
এগুলো বাইহাকী, তাহাবী ও অন্য বিদ্ধানগণ বর্ণনা করেছেন।
আমি যেটি সঠিকের নিকটবর্তী মনে করি সেটি হচ্ছে এই যে, ইমামের পিছনে সিররী রাকাআতগুলোতে সূরা ফাতিহা পাঠ করা শারীয়াত সম্মত, যেহরী রাকাআতগুলোতে নয়। তবে যদি ইমামের পক্ষ হতে সাকতাহ পাওয়া যায় (নিচুপ থাকেন) তাহলে সে সময় পড়া যেতে পারে।
` من قرأ خلف الإمام فلا صلاة له `.
باطل.
رواه ابن حبان في ` المجروحين ` (1 / 151 - 152) وعنه ابن الجوزي في ` العلل المتناهية `: حدثني إبراهيم بن سعيد القشيري عن أحمد بن علي بن سلمان المروزي عن (سعيد بن) عبد الرحمن المخزومي عن سفيان بن عيينة عن ابن طاووس عن أبيه عن زيد بن ثابت عن النبي صلى الله عليه وسلم ثم قال ابن حبان في ترجمة المروزي هذا: ` هذا الحديث لا أصل له، وأحمد بن علي بن سلمان لا ينبغي أن يشتغل بحديثه `. ونقله الزيلعي في ` نصب الراية ` (2 / 19) والحافظ في ` اللسان ` ولم يعلق عليه بشيء وابن سلمان هذا ترجمه الخطيب أيضا (4 / 303) وقال:
` قرأت بخط الدارقطني - وحدثنيه أحمد بن محمد العتيقي عنه - قال: أحمد بن علي بن سلمان المروزي متروك يضع الحديث `.
قلت: وقد روي موقوفا على زيد بإسناد خير من هذا، أخرجه البيهقي في ` سننه ` (2 / 163) من طريق الحسين بن حفص عن سفيان عن عمر بن محمد عن موسى بن سعد عن ابن زيد بن ثابت عن أبيه زيد بن ثابت قال: فذكره موقوفا. قلت: وهذا سند رجاله ثقات غير ابن زيد بن ثابت، فلم أعرفه، والظاهر أنه سعد والد موسى المذكور في هذا الإسناد فإنه موسى بن سعد بن زيد بن ثابت، فإن كان هو، فهو مجهول لا يعرف في شيء من
كتب الرجال، ولا ذكر في الرواة عن أبيه، وقد روى عن أبيه أخواه خارجة وسلمان كما في ` التهذيب ` ولم يذكر معهما سعدا هذا. والله أعلم.
وقد أشار البيهقي إلى تضعيف هذا السند فقال: ` وهذا إن صح بهذا اللفظ - وفيه نظر - فمحمول على الجهر بالقراءة، والله تعالى أعلم. وقد خالفه عبد الله بن الوليد العدني فرواه عن سفيان عن عمر بن محمد عن موسى بن سعد عن زيد لم يذكر أباه في إسناده. قال البخاري: لا يعرف بهذا الإسناد سماع بعضهم من بعض ولا يصح مثله `.
قلت: والعدني هذا قال الحافظ: صدوق ربما أخطأ، ولم يحتج به مسلم، بخلاف الحسين بن حفص فإنه صدوق احتج به مسلم، فروايته أرجح، وفيها المجهول كما عرفت فلا يصح الحديث لا مرفوعا ولا موقوفا والموقوف أشبه. نعم أخرج البيهقي بسند صحيح عن عطاء بن يسار أنه سأل زيد بن ثابت عن القراءة مع الإمام فقال: لا أقرأ مع الإمام في شيء، وقال: ` أخرجه مسلم، وهو محمول على الجهر بالقراءة مع الإمام، والله أعلم `.
قلت: هذا حمل بعيد جدا، وإنما يحمل على مثله التوفيق بين الأثر والمذهب! وإلا فكيف يؤول بمثل هذا التأويل الباطل الذي إنما يقول البعض مثله إذا كان هناك من يرى مشروعية جهر المؤتم بالقراءة وراء الإمام، فهل من قائل بذلك حتى يضطر زيد رضي الله عنه إلى إبطاله؟ ! اللهم لا، ولكنه التعصب للمذهب عفانا الله منه، وإن مما يؤكد
بطلانه أن الإمام الطحاوي رواه (1 / 129) من الطريق المذكور عن زيد بلفظ: ` لا تقرأ خلف الإمام في شيء من الصلوات `! وأما عزوه لمسلم ففيه نظر، فإني لم أجد عنده، والله أعلم.
৯৯৩। যে ব্যক্তি ইমামের পিছনে পাঠ করবে তার সালাতই হবে না।
এটি বাতিল।
এটি ইবনু হিব্বান `আল-মাজরুহীন` (১/১৫১-১৫২) গ্রন্থে এবং তার থেকে ইবনুল জাওযী `আল-ইলালুল মুতানাহিয়াহ` গ্রন্থে ইবরাহীম ইবনু সাঈদ আল-কুশায়রী হতে তিনি আহমাদ ইবনু আলী ইবনে সুলায়মান আল-মারওয়ায়ী হতে তিনি সাঈদ ইবনু আবদির রহমান আল-মাখযুমী হতে তিনি সুফিয়ান ইবনু ওয়াইনাহ হতে তিনি ইবনু তাউস হতে তিনি তার পিতা হতে ... বর্ণনা করেছেন। ইবনু হিব্বান মারওয়াযীর জীবনীতে বলেনঃ এ হাদীছটির কোন ভিত্তি নেই। আহমাদ ইবনু আলী ইবনে সুলায়মানের হাদীছের সাথে ব্যস্ত হওয়া উচিত না।
হাদীছটিকে যায়লাঈ `নাসবুর রায়াহ` (২/১৯) গ্রন্থে এবং হাফিয ইবনু হাজার “আল-লিসান” গ্রন্থে উল্লেখ করে তার উপর কোন টীকা লাগাননি।
ইবনু সুলায়মানের জীবনী আল-খাতীবও (৪/৩০৩) বর্ণনা করে বলেছেনঃ আমি দারাকুতনীর লিখায় পড়েছি - তার থেকে আহমাদ ইবনু মুহাম্মাদ আল-উতায়কী আমাকে হাদীছটি বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেনঃ আহমাদ ইবনু আলী ইবনে সুলায়মান আল-মারওয়ায়ী মাতরূক, হাদীছ জালকারী।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হুসাইন ইবনু হাফস সূত্রে ... যায়েদের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) উপর মওকুফ হিসাবে এর চেয়ে ভাল সনদে হাদীছটি বর্ণিত হয়েছে। এটি বাইহাকী `সুনান` (২/১৬৩) গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। তাতে ইবনু যায়েদ ইবনে ছাবেত ব্যতীত সকলে নির্ভরযোগ্য বর্ণনাকারী। এই যায়েদকে আমি চিনি না। বাহ্যিকভাবে যা বুঝা যায় তা হচ্ছে এই যে, তিনি মূসার পিতা সা’আদ। তিনি যদি সেই হন তাহলে তিনি মাজহুল। বাইহাকী এ সনদটি দুর্বল হওয়ার দিকেই ইঙ্গিত করেছেন। তিনি বলেছেনঃ এ বাক্যে যদি সহীহ হয় (তাতে বিরূপ মন্তব্য রয়েছে) তাহলে এর দ্বারা বুঝতে হবে শুধুমাত্র যেহরী সালাতের ক্ষেত্রে। এই মওকুফ সনদটিতে আব্দুল্লাহ ইবনুল ওয়ালীদ আল-আদানী তার (হুসাইন ইবনু হাফসের) বিরোধিতা করেছেন। সাআদের পিতা হতে কথাটি উল্লেখ করেননি।
ইমাম বুখারী বলেনঃ এ সনদের বর্ণনাকারীগণ একে অন্যের নিকট হতে শ্রবণ করেছেন বলে জানা যায় না। এরূপ সনদ সহীহ হতে পারে না।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এই আদানী সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি সত্যবাদী কখনও কখনও ভুল করতেন। তার দ্বারা ইমাম মুসলিম দলীল গ্রহণ করেননি। অপর পক্ষে হুসাইন ইবনু হাফস সত্যবাদী তার দ্বারা ইমাম মুসলিম দলীল গ্রহণ করেছেন। তার বর্ণনায় অগ্রাধিকার প্রাপ্ত। অথচ আপনারা জেনেছেন তাতে মাজহুল বর্ণনাকারী রয়েছেন। অতএব হাদীছটি মারফু ও মওকুফ কোনভাবেই সহীহ নয়। তবে মওকুফের সাথে সাদৃশ্যপূর্ণ।
বাইহাকী আতা হতে সহীহ সনদে বর্ণনা করেছেন। তিনি যায়েদ ইবনু ছাবেত (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে ইমামের সাথে পাঠ করার বিষয়ে প্রশ্ন করেছিলেন। তিনি বলেনঃ আমি ইমামের সাথে কিছুই পাঠ করি না। অতঃপর তিনি বলেছেনঃ এটি ইমাম মুসলিম বর্ণনা করেছেন। তিনি (বাইহাকী) এটিকে ইমামের সাথে যেহরী সালাতের ক্ষেত্রে প্রযোজ্য হিসাবে ব্যাখ্যা করেছেন। ইমাম মুসলিম বর্ণনা করেছেন, এ কথায় বিরূপ মন্তব্য রয়েছে। কারণ আমি এটিকে তার নিকট পাচ্ছি না।
` من تقول علي ما لم أقل فليتبوأ بين عيني جهنم مقعدا. قيل: يا رسول الله وهل لها من عينين؟ قال: ألم تسمع إلى قول الله عز وجل: ` إذا رأتهم من مكان بعيد سمعوا لها تغيظا وزفيرا `، فأمسك القوم أن يسألوه، فأنكر ذلك من شأنهم، وقال:
ما لكم لا تسألوني؟ قالوا: يا رسول الله سمعناك تقول من تقول علي ما لم أقل … ونحن لا نحفظ الحديث كما سمعناه، نقدم حرفا ونؤخر حرفا، ونزيد حرفا وننقص حرفا، قال: ليس ذلك أردت، إنما قلت: من تقول علي مالم أقل يريد عيبي وشين الإسلام، أو شيني وعيب الإسلام `.
موضوع.
أخرجه الخطيب في ` الكفاية ` (ص 200) بسند صحيح عن علي بن مسلم الطوسي قال: حدثنا محمد بن يزيد الواسطي عن أصبغ بن زيد عن خالد بن كثير عن خالد بن دريك عن رجل من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: فذكره.
قلت: وهذا إسناد ضعيف وإن كان رجاله كلهم ثقات، فإنه منقطع بين ابن دريك والرجل، فإنه لم يدرك أحدا من الصحابة، ولذلك أورده ابن حبان في أتباع التابعين.
ثم رأيت الحافظ ابن كثير قد ساق إسناده في ` تفسيره ` (3 / 310) من رواية ابن أبي حاتم وابن جرير من طريقين آخرين عن محمد بن يزيد الواسطي بسنده المذكور عن خالد بن دريك (قال:) بإسناد عن رجل من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم. فهذا صريح في الانقطاع بين ابن دريك والرجل لقوله ` بإسناده ` وهذا يقتضي أن يكون بينه وبين الرجل راو واحد على الأقل، وهو مجهول لم يسم، فهو علة الحديث. ثم إن في آخره ما يشعر بأن التقول عليه لا بأس به إذا لم يكن في شين الإسلام وعيب النبي صلى الله عليه وسلم، فكأنه من وضع الكرامية الذين كانوا يرو ن جواز الكذب على النبي صلى الله عليه وسلم في الترغيب والترهيب وفضائل الأعمال، فإذا أنكر ذلك عليهم بقوله صلى الله عليه وسلم ` من كذب علي متعمدا فليتبوأ مقعده من النار ` قالوا: نحن ما كذبنا عليه إنما نكذب له! . وقد روي الحديث من طريق أخرى لا يصح أيضا، رواه أبو نعيم في ` المستخرج على صحيح مسلم ` (1 / 9 / 1) عن محمد بن الفضل بن عطية عن الأحوص بن حكيم عن مكحول عن أبي أمامة مرفوعا به مع تقديم وتأخير وقال: ` هذا حديث لا أصل له فيما أعلم، والحمل فيه على محمد بن الفضل بن عطية لاتفاق أكثر الناس على إسقاط حديثه `. وقال الهيثمي في ` المجمع ` (1 / 148) بعد أن عزاه للطبراني في ` الكبير `: ` وفيه الأحوص بن حكيم ضعفه النسائي وغيره، ووثقه العجلي ويحيى بن سعيد القطان في رواية، ورواه عن الأحوص محمد بن الفضل بن عطية ضعيف `. قلت: بل هو شر من ذلك كما أشار إليه أبو نعيم في كلمته السابقة، وقال الحافظ في ` التقريب `:
` كذبوه `. وقال الذهبي في ` الضعفاء `: ` متروك باتفاق `. والحديث أخرجه ابن منده أيضا في ` معرفة
الصحابة ` (2 / 282 / 2) .
৯৯৪। যে ব্যক্তি আমি যা বলিনি তা বানিয়ে বলবে সে যেন জাহান্নামের দু' চোখের সামনে স্থান বানিয়ে নিল। প্রশ্ন করা হল, হে আল্লাহর রাসূল জাহান্নামের কী দু’ চোখ আছে? তিনি বললেনঃ তুমি কি আল্লাহ তা'আলার এ বাণী শুনোনিঃ “জাহান্নাম তাদেরকে যখন দূর হতে দেখবে, তখন তারা তার তর্জন ও গর্জন শুনতে পাবে”। অতঃপর লোকেরা তাঁকে প্রশ্ন করা বন্ধ করে দিল। তাদের এ অবস্থাকে তিনি অপছন্দ করে বললেনঃ তোমাদের কী হয়েছে আমাকে প্রশ্ন করছ না? তারা বললঃ হে আল্লাহর রাসূল! আমরা আপনাকে বলতে শুনেছিঃ যে ব্যক্তি আমি যা বলিনি তা বানিয়ে বলবে...। অথচ আমরা যেভাবে আপনার নিকট হতে শুনি সেভাবে হাদীছ হেফয করতে পারি না। একটি অক্ষর আগে আরেকটি পিছে করে ফেলি। একটি অক্ষর বেশী আরেকটি কম করে ফেলি। তিনি বললেনঃ আমি তো তা বুঝায়নি। আমি বলেছিঃ যে ব্যক্তি আমি যা বলিনি তা বানিয়ে বলবে, অর্থাৎ আমার দোষ ও ইসলামের অপমানমূলক কিছু বলবে কিংবা আমার অপমান মূলক কিছু ও ইসলামের দোষ বর্ণনা করবে।
হাদীছটি জাল।
এটি আল-খাতীব `আল-কিফায়াহ` (পৃঃ ২০০) গ্রন্থে সহীহ সনদে আলী ইবনু মুসলিম আত-তুসী হতে তিনি মুহাম্মাদ ইবনু ইয়াযীদ আল-ওয়াসেতী হতে তিনি আসবাগ ইবনু যায়েদ হতে তিনি খালেদ ইবনু কাছীর হতে তিনি খালেদ ইবনু দুরায়েদ হতে তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর এক সাথীদের কোন এক ব্যক্তি হতে ... বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। যদিও বর্ণনাকারী সকলেই নির্ভরযোগ্য। কারণ ইবনু দুরায়েদ ও এক ব্যক্তির মধ্যে সনদে বিচ্ছিন্নতা রয়েছে। ইবনু দুরায়েদ কোন সাহাবাকেই পাননি। এ জন্যই ইবনু হিব্বান তাকে তাবে তাবেঈনদের দলে উল্লেখ করেছেন।
হাফিয ইবনু কাছীর তার “তাফসীর” (৩/৩১০) গ্রন্থে ইবনু আবী হাতিম ও ইবনু জারীরের বর্ণনায় দুটি সূত্রে বর্ণনা করেছেন। তাতে বলা হয়েছেঃ ইবনু দুরায়েদ তার নিজ সনদে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সাথীদের কোন এক ব্যক্তি হতে বর্ণনা করেছেন।
এখানে স্পষ্ট করা হয়েছে যে, ইবনু দুরায়েদ ও সেই ব্যক্তির মধ্যে কমপক্ষে একজন বর্ণনাকারী রয়েছেন। তার নাম নেয়া হয়নি, তিনি মাজহুল। এটিই হচ্ছে হাদীছটির সমস্যা।
তার পরেও হাদীছটির শেষ অংশ দ্বারা বুঝা যায় যে, যদি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর দোষ ও ইসলামের অপমানমূলক কিছু না বলা হয়, তাহলে তার উপর বানিয়ে কথা বলাতে কোন সমস্যা নেই। সম্ভবত এটি কাররামিয়াদের বানানো হাদীছ। যারা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর উপর তারগীব, তারহীব এবং ফাযীলতের ক্ষেত্রে মিথ্যা বলাকে জায়েয মনে করে থাকে। যখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিম্নের বাণীঃ
من كذب علي متعمدا فليتبوأ مقعده من النار
`যে ব্যক্তি আমার উপর ইচ্ছাকৃতভাবে মিথ্যারোপ করল সে যেন তার বাসস্থান জাহান্নামে বানিয়ে নিল` দ্বারা তাদের উক্ত বক্তব্যকে অস্বীকার করা হয় তখন তারা বলে যে, আমরা তো তাঁর উপর মিথ্যা বলছি না তার জন্য মিথ্যা বলছি!
আবু নোয়াইম মুহাম্মাদ ইবনুল ফাযল ইবনে আতিয়াহ সূত্রে আহওয়াস ইবনু হাকীম হতে ... হাদীছটি বর্ণনা করে বলেছেনঃ আমার জানা মতে এ হাদীছটির কোন ভিত্তি নেই। তার সমস্যা হচ্ছে এই মুহাম্মাদ ইবনুল ফাযল। কারণ অধিকাংশরাই তার হাদীছ গ্রহণ যোগ্য না হওয়ার বিষয়ে একমত।
হায়ছামী `আল-মাজমা` (১/১৪৮) গ্রন্থে বলেনঃ বর্ণনাকারী আহওয়াসকে নাসাঈ ও অন্য বিদ্বানগণ দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন। যদিও আজালী ও ইবনু সাঈদ আল-কাত্তান এক বর্ণনায় তাকে নির্ভরযোগ্য বলেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ বরং তিনি (মুহাম্মাদ ইবনুল ফাযল) তার চেয়েও নিকৃষ্ট। হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ মুহাদ্দিছগণ তাকে মিথ্যুক আখ্যা দিয়েছেন। যাহাবী `আয-যোয়াফা` গ্রন্থে বলেনঃ সকলের ঐকমত্যে তিনি মাতরূক।
হাদীছটি ইবনু মান্দাহ `মারিফাতুস সাহাবাহ` (২/২৮২/২) গ্রন্থেও উল্লেখ করেছেন।
` خذوا للرأس ماء جديدا `.
ضعيف جدا.
رواه الطبراني (1 / 214 / 2) عن دهثم بن قران عن نمران بن جارية عن أبيه مرفوعا. قلت: وهذا سند ضعيف جدا دهثم قال الحافظ ابن حجر: ` متروك `. وقال الهيثمي في ` المجمع ` (1 / 234) : ` رواه الطبراني في ` الكبير ` وفيه دهثم بن قران ضعفه جماعة، وذكره ابن حبان في الثقات `.
قلت: وذكره ابن حبان في ` الضعفاء ` أيضا وقال (1 / 290) : ` كان ممن يتفرد بالمناكير عن المشاهير، ويروي عن الثقات أشياء لا أصول لها، قال ابن معين: لا يكتب حديث `. قلت: وهذا معناه أنه متروك كما قال الحافظ، وهو قول ابن الجنيد، ومثله قول أحمد: ` متروك الحديث `. وقال النسائي: ` ليس بثقة `.
ونمران بن جارية مجهول لا يعرف كما قال الذهبي والعسقلاني. ونحو هذا الحديث في المعنى ما أخرجه البيهقي (1 / 65) من طريق الهيثم بن خارجة: حدثنا عبد الله بن وهب قال: أخبرني عمرو بن الحارث عن حبان بن واسع الأنصاري أن أباه حدثه أنه سمع عبد الله بن زيد أنه رأى رسول الله صلى الله عليه وسلم يتوضأ، فأخذ لأذنيه ماء خلاف الماء الذي أخذ لرأسه، وقال: ` وهذا إسناد صحيح، وكذلك روي عن عبد العزيز بن عمران بن مقلاص وحرملة بن يحيى عن ابن وهب، ورواه مسلم بن الحجاج في ` الصحيح ` عن هارون بن معروف وهارون بن سعيد الأيلي وأبي الطاهر عن ابن وهب بإسناد صحيح أنه رأى رسول الله صلى الله عليه وسلم يتوضأ - فذكر وضوءه، قال - ومسح برأسه بماء غير فضل يديه، ولم يذكر الأذنين، وهذا أصح من الذي قبله `.
وتعقبه ابن التركماني فقال: ` قلت: ذكر صاحب الإمام أنه رأى في رواية ابن المقرىء عن حرملة عن ابن وهب بهذا الإسناد وفيه: ومسح بماء غير فضل يديه لم يذكر الأذنين `.
قلت: فقد اختلف في هذا الحديث على ابن وهب، فالهيثم بن خارجة وابن مقلاص وحرملة بن يحيى - والعهدة في ذلك على البيهقي - رووه عنه باللفظ الأول الذي فيه أخذ الماء الجديد لأذنيه. وخالفهم ابن معروف وابن سعيد الأيلي وأبو الطاهر، فرووه عنه باللفظ الآخر الذي فيه أخذ
الماء لرأسه لم يذكر الأذنين، وقد صرح البيهقي بأنه أصح كما سبق، ومعنى ذلك أن اللفظ الأول شاذ، وقد صرح بشذوذه الحافظ بن حجر في ` بلوغ المرام `، ولا شك في ذلك عندي لأن أبا الطاهر وسائر الثلاثة قد تابعهم ثلاثة آخرون، وهم حجاج بن إبراهيم الأزرق، وابن أخي بن وهب - واسمه أحمد بن عبد الرحمن بن وهب، أخرجه عنهما أبو عوانة في ` صحيحه ` (1 / 249) ، وسريج بن النعمان عند أحمد (4 / 41) ولا ريب أن اتفاق الستة على الرواية أولى بالترجيح من رواية الثلاثة عند المخالفة، ويؤيد ذلك أن عبد الله بن لهيعة قد رواه عن حبان بن واسع مثل رواية الستة، أخرجه الدارمي (1 / 180) وأحمد (4 / 39 - 42) ، وابن لهيعة وإن كان ضعيفا، فإن رواية العبادلة الثلاثة عنه صحيحة، كما نص على ذلك غير واحد من الأئمة، وهذا مما رواه عنه عبد الله بن المبارك عند الإمام أحمد في رواية، وهو أحد العبادلة الثلاثة، فهو شاهد قوي لرواية الجماعة يؤكد شذوذ رواية الثلاثة وعليه فلا يصلح شاهدا لهذا الحديث الشديد الضعف، ولا نعلم في الباب غيره، على أنها لوكانت محفوظة لم تصلح شاهدا له لأنه أمر، وهو بظاهره يفيد الوجوب بخلاف الفعل كما هو ظاهر.
إذا عرفت هذا، فقد اختلف العلماء في مسح الأذنين هل يؤخذ لهما ماء جديد أم يمسحان ببقية ما مسح به الرأس؟ فذهب إلى الأول أحمد والشافعي، قال الصنعاني (1 / 70) : ` وحديث البيهقي هذا هو دليل ظاهر `، وقال في مكان آخر (1 / 65) : ` والأحاديث قد وردت بهذا وهذا `.
قلت: وفيما قاله نظر، فإنه ليس في الباب ما يمكن الاعتماد عليه إلا حديث البيهقي وقد أشار هو إلى شذوذه، وصرح بذلك الحافظ كما سبق، فلا يحتج به، ويؤيد ذلك أن الأحاديث التي ورد فيها مسح الرأس والأذنين لم
يذكر أحد أنه صلى الله عليه وسلم أخذ ماء جديدا، ولوأنه فعل ذلك لنقل ويقويه ظاهر قوله صلى الله عليه وسلم: ` الأذنان من الرأس `. قال الصنعاني (1 / 71) ` وهو وإن كان في أسانيده مقال، إلا أن كثرة طرقه يشد بعضها بعضا `. قلت: بل له طريق صحيح وقد سقته وغيره في ` الأحاديث الصحيحة ` (رقم 36) . وخلاصة القول: أنه لا يوجد في السنة ما يوجب أخذ ماء جديد للأذنين فيمسحهما بماء الرأس، كما يجوز أن يمسح الرأس بماء يديه الباقي عليهما بعد غسلهما، لحديث الربيع بنت معوذ: ` أن النبي صلى الله عليه وسلم مسح برأسه من
فضل ماء كان في يده `. أخرجه أبو داود وغيره بسند حسن كما بينته في ` صحيح أبي داود ` (121) وهو مم يؤكد ضعف حديث الترجمة، وبالله تعالى التوفيق.
৯৯৫। তোমরা মাথার (মাসার) জন্য নতুন পানি গ্রহণ কর।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি তাবারানী (১/২১৪/২) দাহছাম ইবনু কুররান হতে তিনি নেমরান ইবনু জারিয়াহ হতে তিনি তার পিতা হতে মারফু হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। এই দাহছাম সম্পর্কে হাফিয ইবনু হাজার বলেনঃ তিনি মাতরূক। হায়ছামী `আল-মাজমা` (১/২৩৪) গ্রন্থে বলেনঃ তাতে দাহছাম রয়েছেন, তাকে একদল দুর্বল আখ্যা দিয়েছেন আর ইবনু হিব্বান তাকে নির্ভরযোগ্যদের মধ্যে উল্লেখ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু হিব্বান তাকে `আয-যোয়াফা` গ্রন্থেও উল্লেখ করে (১/২৯০) বলেছেনঃ তিনি প্রসিদ্ধদের উদ্ধৃতিতে এককভাবে মুনকার হাদীছ বর্ণনাকারীদের অন্তর্ভুক্ত। তিনি নির্ভরযোগ্যদের উদ্ধৃতিতে এমন কিছু বর্ণনা করেছেন যেগুলোর কোন ভিত্তি নেই। ইবনু মাঈন বলেনঃ তার হাদীছ লিখা যাবে না।
আমি (আলবানী) বলছিঃ ইবনু হাজার যে বলেছেনঃ মাতরূক, এগুলো তারই অর্থ। একই কথা ইবনুল জুনায়েদও বলেছেন। ইমাম আহমাদ বলেনঃ তিনি মাতরূকুল হাদীছ। নাসাঈ বলেছেনঃ তিনি শক্তিশালী নন। আর নেমরান ইবনু জারিয়াহ মাজহুল, তাকে চেনা যায় না যেমনটি যাহাবী আসকালানী বলেছেন।
এ হাদীছের অর্থবোধক একটি হাদীছ বাইহাকী (১/৬৫) হায়ছাম ইবনু খারেজাহ সূত্রে ইবনু ওয়াহাব হতে ... বর্ণনা করেছেন। তাতে বলা হয়েছেঃ
আব্দুল্লাহ ইবনু যায়েদ রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে উযু করতে দেখেছেন। তিনি তার মাথা ও তাঁর দু' কান মাসাহ করার জন্য পৃথক পৃথক পানি গ্রহণ করেন। অতঃপর তিনি বলেছেনঃ এ সনদটি সহীহ।
হাদীছটি ইমাম মুসলিম ইবনুল হাজ্জাজ তার “সাহীহ” গ্রন্থে হারুণ ইবনু মা’রূফ, হারূণ ইবনু সাঈদ আল-আয়লী ও আবু তাহের ইবনু ওয়াহাব হতে সহীহ সনদে বর্ণনা করেছেন। তিনি রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে উযু করতে দেখেছেন-তিনি তাঁর উযূর নিয়ম উল্লেখ করে বলেনঃ তিনি তার মাথা মাসাহ করেন তার দু' হাতের বেঁচে যাওয়া পানি ছাড়া অন্য পানি দিয়ে।' তিনি দু' কানের কথা উল্লেখ করেননি। এটিই বেশী বিশুদ্ধ পূর্বের বর্ণনাটির চেয়ে। (এ পর্যন্ত হচ্ছে বাইহাকীর ভাষ্য)।
ইবনুত তুরকুমানী তার সমালোচনা করে বলেছেনঃ ইমাম মুসলিম ইবনুল মুকরীর বর্ণনায় হারমালাহ হতে, তিনি ইবনু ওয়াহাব হতে এ সনদে উল্লেখ করেছেন। তিনি তাতে বলেছেনঃ তিনি তার মাথা মাসাহ করেন তার দু' হাতের বেঁচে যাওয়া পানি ছাড়া অন্য পানি দিয়ে।' তিনি দু' কানের কথা উল্লেখ করেননি।
বাইহাকীর বর্ণনায় ইবনু ওয়াহাব হতে দু' ধরণের বর্ণনা পাওয়া যাচ্ছে। একটিতে কান মাসাহ করার জন্য নতুন পানি নেয়ার কথা বলা হয়েছে। এটি ইবনু ওয়াহাব হতে হায়ছাম ইবনু খারেজাহ, ইবনু মিকলাস ও হারমালাহ ইবনু ইয়াহইয়া বর্ণনা করেছেন।
আরেকটিতে পাওয়া যাচ্ছে যে, তিনি মাথা মাসাহ করার জন্য নতুন পানি নিয়েছেন তাতে দু' কান মাসাহ করার কথা উল্লেখ করা হয়নি। এটি ইবনু ওয়াহাব হতে ইবনু মা’রূফ, ইবনু সাঈদ আল-আয়লী ও আবু তাহের বর্ণনা করেছেন। প্রথমটি বাইহাকী বর্ণনা করেছেন। আর দ্বিতীয়টি ইমাম মুসলিম বর্ণনা করেছেন। প্রথম বর্ণনাটি সম্পর্কে বাইহাকী বলেনঃ সনদটি সহীহ। আর দ্বিতীয়টি সম্পর্কে বলেনঃ পূর্বেরটির চেয়ে এটি বেশী সহীহ।
তার এ কথা প্রমাণ করছে যে, প্রথমটি শায। ইবনু হাজার `বুলুগুল মারাম` গ্রন্থে স্পষ্ট করেই বলেছেনঃ সেটি শায। তাতে আমার নিকট কোন সন্দেহ নেই। কারণ আবু তাহের সহ এ তিনজনের আরো তিনজন মুতাবায়াত করেছেন। (তার নাম আহমাদ ইবনু আবদির রহমান ইবনে ওয়াহাব)। তাদের দু'জন হতে আবু আওয়ানাহ তার `সাহীহ` (১/২৪৯) গ্রন্থে বর্ণনা করেছেন। আর তৃতীয়জন হচ্ছেন সুরায়েজ ইবনুন নুমান। তার থেকে ইমাম আহমাদ (৪/৪১) বর্ণনা করেছেন। কোন সন্দেহ নেই তিনজনের বর্ণনার বিপরীতে ছয়জনের বর্ণনা অগ্রাধিকার পাবে। এ ছাড়া এই ছয়জনের বর্ণনাকে আব্দুল্লাহ ইবনু লাহীআহর বর্ণনা শক্তি যোগাচ্ছে। তিনি হিব্বান ইবনু ওয়াসে’ হতে ছয়জনের বর্ণনার ন্যায় বর্ণনা করেছেন। এটি দারেমী (১/১৮০) ও ইমাম আহমাদ (৪/৩৯-৪২) বর্ণনা করেছেন।
ইবনু লাহী'আহ যদিও দুর্বল, তার থেকে তিন আব্দুল্লাহর বর্ণনা সহীহ। যেমনটি একাধিক ইমাম বলেছেন। তার (ইবনু লাহী'আহ) থেকে এটি আব্দুল্লাহ ইবনুল মুবারাক বর্ণনা করেছেন। তিনি হচ্ছেন তিন আব্দুল্লাহর একজন। এ বর্ণনাটি ছয়জনের বর্ণনাকে শক্তিশালী করছে এবং তিন জনের বর্ণনাকে শায হিসাবে সাব্যস্ত করছে।
আমি (আলবানী) বলছিঃ যে সব হাদীছে মাথা ও দু' কান মাসাহ করার বিবরণ এসেছে সেগুলোতে কোন একজনও উল্লেখ করেননি যে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম নতুন করে পানি নিয়েছেন। যদি তা করতেন তাহলে অবশ্যই সেগুলোতে তার বিবরণ আসত। নতুন করে পানি না নেয়াটাই সুন্নাত হওয়াকে আরো শক্তিশালী করছে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর এ বাণীঃ দু' কান মাথারই অংশ বিশেষ।
এটি সহীহ সনদে বর্ণিত হয়েছে। আমি `আল-আহাদীছুস সাহীহাহ` গ্রন্থে ৩৬ নং হাদীছে আলোচনা করেছি।
মোটকথা, সুন্নতের মধ্যে এমন কিছু পাওয়া যায় না যা দু' কান মাসাহ করার জন্য নতুন করে পানি নেয়াকে ওয়াজিব করে। বরং মাথা মাসাহ করার পর অবশিষ্ট পানি দ্বারা কানদু'টি মাসাহ করবে। এমনকি দু' হাত ধুয়ে নেয়ার পরে দু' হাতের অবশিষ্ট পানি দ্বারা মাথা মাসাহ করাও জায়েয। রুবাইয়ে বিনতু মুয়াওয়ায-এর হাদীছঃ নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার হাতের বেঁচে যাওয়া অবশিষ্ট পশি দ্বারা মাথা মাসাহ করেছেন। এটি আবু দাউদ ও অন্য বিদ্বানগণ হাসান সনদে বর্ণনা করেছেন। যেমনটি আমি `সাহীহ আবী দাউদ` গ্রন্থে’ (১২১) বিবরণ দিয়েছি। এ হাদিছটিও আলোচ্য হাদীছটিকে দুর্বল সাব্যস্ত করে।
` كان يحب أن يفطر على ثلاث تمرات، أو شيء لم تصبه النار `.
ضعيف جدا.
رواه العقيلي في ` الضعفاء ` (ص 251) وأبو يعلى في ` مسنده ` (163 / 1) واللفظ له وعنه الضياء في ` المختارة ` (49 / 1) كلاهما عن أبي ثابت عبد الواحد بن ثابت عن أنس مرفوعا.
قلت: وهذا سند ضعيف جدا عبد الواحد قال البخاري: ` منكر الحديث `. وقال العقيلي: ` لا يتابع على هذا
الحديث `. وذكره الهيثمي في ` المجمع ` (3 / 155) وقال: ` رواه أبو يعلى وفيه عبد الواحد بن ثابت وهو ضعيف `. قلت: وقد أخرجه أبو داود والترمذي وغيرهما من طريق أخرى عن ثابت عن أنس به أتم منه دون قوله: ` أو شيء لم تصبه النار `. فهي زيادة منكرة لتفرد هذا الضعيف بها مخالفا للثقة، وهو ثابت هذاوهو البناني ولفظ حديثه: ` كان يفطر على رطبات قبل أن يصلي، فإن لم تكن رطبات فعلى تمرات، فإن لم تكن حسا حسوات من ماء `. وقال الترمذي: ` حديث حسن غريب `. وقد خرجت هذا في ` الإرواء ` بتفصيل فراجعه برقم (904) .
৯৯৬। তিনি তিনটি খেজুর দ্বারা ইফতার করাকে ভালবাসতেন কিংবা এমন কিছু দ্বারা যাকে আগুন স্পর্শ করেনি।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি উকায়লী `আয-যোয়াফা` (পৃঃ ২৫১) গ্রন্থে, আবু ইয়ালা তার `মুসনাদ` (১/১৬৩) গ্রন্থে (ভাষাটি তারই) এবং তার থেকে যিয়া `আল-মুখতারাহ` (১/৪৯) গ্রন্থে তারা দু'জন আবু ছাবেত আব্দুল ওয়াহেদ ইবনু ছাবেত হতে তিনি আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে মারফু হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি খুবই দুর্বল। আব্দুল ওয়াহেদ সম্পর্কে ইমাম বুখারী বলেনঃ তিনি মুনকারুল হাদীছ। উকায়লী বলেনঃ এ হাদীছটিতে তার অনুসরণ করা যায় না।
হায়ছামী হাদীছটি `আল-মাজমা` (৩/১৫৫) গ্রন্থে উল্লেখ করে বলেনঃ তাতে আব্দুল ওয়াহেদ রয়েছেন তিনি দুর্বল।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীছটি আবু দাউদ, তিরমিযী ও অন্য বিদ্বানগণ ভিন্ন সূত্রে ছাবেত হতে তিনি আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতেأو شيء لم تصبه النار ‘এমন কিছু দ্বারা যাকে আগুন স্পর্শ করেনি' এ অংশ ব্যতীত বর্ণনা করেছেন। এই বর্ধিত অংশটি মুনকার, দুর্বল বর্ণনাকারী নির্ভরযোগ্য বর্ণনাকারীর বিরোধিতা করে বর্ণনা করার কারণে। নির্ভরযোগ্য বর্ণনাকারী হচ্ছেন ছাবেত আল-বুনানী। তার ভাষা হচ্ছেঃ
'তিনি সালতের পূর্বে কয়েকটি কাঁচা খেজুর দিয়ে ইফতার করতেন। যদি কাঁচা খেজুর না থাকত তাহলে কয়েকটি পাকা খেজুর দিয়ে। যদি তা না থাকত তাহলে কয়েক চুমুক পানি দিয়ে।'
তিরমিযী বলেনঃ হাদীছটি হাসান গারীব।
এটি সম্পর্কে `ইরওয়া` গ্রন্থে (৯০৪) বিস্তারিত আলোচনা করেছি।
` ولدت في زمن الملك العادل `.
باطل لا أصل له.
قال البيهقي في ` شعب الإيمان (2 / 97 / 1) بعد أن ذكر كلاما جيدا للحليمي في ` شعبه `: ` وتكلم في بطلان ما يرويه بعض الجهال عن نبينا صلى الله عليه وسلم: ` ولدت في زمن الملك العادل `. يعني أنوشروان. وكان شيخنا أبو عبد الله الحافظ (يعني الحاكم صاحب ` المستدرك `) قد تكلم أيضا في بطلان هذا الحديث، ثم رأى بعض الصالحين رسول الله صلى الله عليه وسلم في المنام، فحكى له ما قال أبو عبد الله، فصدقه في تكذيب هذا الحديث وإبطاله، وقال: ما قلته قط `.
قلت: والمنامات وإن كان لا يحتج بها، فذلك لا يمنع من الاستئناس بها فيما وافق نقد العلماء وتحقيقهم كما لا يخفى على أهل العلم والنهى.
৯৯৭। আমি ন্যায়পরায়ণ বাদশার যুগে জন্ম লাভ করেছি।
হাদীছটি বাতিল, তার কোণ ভিত্তি নেই।
বাইহাকী `শু'আবুল ঈমান` (২/৯৭/১) গ্রন্থে বলেনঃ আমাদের শাইখ আবু আবদিল্লাহ হাকিম “আল-মুসতাদরাক” গ্রন্থে হাদীছটি বাতিল হওয়ার বিষয়ে কথা বলেছেন।
আদেল বাদশা বলতে বুঝানো হয়েছে আনূ শাওয়ানকে।
` بكى شعيب النبي صلى الله عليه وسلم من حب الله عز وجل حتى عمي، فرد الله إليه بصره، وأو حى إليه: يا شعيب ما هذا البكاء؟ ! أشوقا إلى الجنة أم خوفا من النار؟ قال: إلهي وسيدي أنت تعلم ما أبكي شوقا إلى جنتك ولا خوفا من النار، ولكني اعتقدت حبك بقلبي، فإذا أنا نظرت إليك فما أبالي ما الذي صنع بي، فأو حى الله عز وجل إليه: يا شعيب إن يك ذلك حقا فهنيئا لك لقائي يا شعيب! ولذلك أخدمتك موسى بن عمران كليمي `.
ضعيف جدا.
رواه الخطيب في ` تاريخه ` (6 / 315) : أخبرنا أبو سعد - من حفظه - : حدثنا أبي حدثنا أبو عبد الله محمد بن إسحاق الرملي: حدثنا أبو الوليد هشام بن عمار حدثنا
إسماعيل بن عياش عن بحير بن سعيد عن خالد بن معدان عن شداد بن أوس مرفوعا. أورده في ترجمة أبي سعد هذا وسماه إسماعيل بن علي بن الحسن بن البندار الواعظ الأستراباذي وقال: ` قدم علينا بغداد حاجا وسمعت منه بها حديث واحدا مسندا منكرا، ولم يكن موثوقا به في الرواية `. ثم ساق هذا الحديث. ورواه ابن عساكر (2 / 432 / 2) من طريق الخطيب، ثم قال: ` رواه الواحدي عن أبي الفتح محمد بن علي الكوفي عن علي بن الحسن بن بندار كما رواه ابنه إسماعيل عنه فقد برئ من عهدته، والخطيب إنما ذكره لأنه حمل فيه على إسماعيل `. ثم ساقه (8 / 35 / 1) بسنده عن الواحدي به. قلت: فانحصرتالتهمة في علي بن الحسن والد إسماعيل هذا قال الذهبي: ` اتهمه محمد بن طاهر `. وقال ابن النجار: ` ضعيف `. وقال أبو محمد عبد العزيز بن محمد النخشبي: ` روى عن الجارود الذي كان يروي عن يونس بن عبد الأعلى وطبقته، فروى علي هذا عنه عن هشام بن عمار، فكذب عليه ما لم يكن هو يجترئ أن يقوله، لا تحل الرواية عنه إلا على وجه التعجب `.
ومحمد بن إسحاق الرملي لا يعرف إلا في هذا السند، وقد ساق له ابن عساكر في ترجمته (15 / 35 / 1) حديثا آخر عن هذا الشيخ ابن عمار، ولم يذكر فيه جرحا ولا تعديلا. ومما ينكر في هذا الحديث قوله: ` ما أبكي شوقا إلى جنتك، ولا خوفا من النار `! فإنها فلسفة صوفية، اشتهرت بها رابعة العدوية، إن صح ذلك عنها، فقد ذكروا أنها كانت تقول في مناجاتها: ` رب! ما عبدتك طمعا في جنتك ولا خوفا من نارك `. وهذا كلام لا يصدر إلا ممن لم يعرف الله تبارك وتعالى حق معرفته، ولا شعر بعظمته وجلاله، ولا بجوده وكرمه، وإلا لتعبده طمعا فيما عنده من نعيم مقيم، ومن ذلك رؤيته تبارك وتعالى وخوفا مما أعده للعصاة والكفار من الجحيم والعذاب الأليم، ومن ذلك حرمانهم النظر إليه كما قال: ` كلا إنهم عن ربهم يومئذ لمحجوبون `، ولذلك كان الأنبياء عليهم الصلاة والسلام - وهم العارفون بالله حقا - لا يناجونه بمثل هذه الكلمة الخيالية، بل يعبدونه طمعا في جنته - وكيف لا وفيها أعلى ما تسموإليه النفس المؤمنة، وهو النظر إليه سبحانه، ورهبة من ناره، ولم لا وذلك يستلزم حرمانهم من ذلك، ولهذا قال تعالى بعد ذكر نخبة من الأنبياء: ` إنهم كانوا يسارعون في الخيرات ويدعوننا رغبا ورهبا وكانوا لنا خاشعين `، ولذلك كان نبينا محمد صلى الله عليه وسلم أخشى الناس لله، كما ثبت في غير ما حديث صحيح عنه. هذه كلمة سريعة حول تلك الجملة العدوية، التي افتتن بها كثير من الخاصة فضلا
عن العامة، وهي في الواقع ` كسراب بقيعة يحسبه الظمآن ماء `، وكنت قرأت حولها بحثا فياضا ممتعا في ` تفسير العلامة ابن باديس ` فليراجعه من شاء زيادة بيان.
৯৮৮। নবী শুয়ায়েব (আঃ) আল্লাহর ভালবাসায় কাঁদতে কাঁদতে অন্ধ হয়ে গেলেন। আল্লাহ তা'আলা তার নিকট তার চোখ ফিরিয়ে দিয়ে ওহী করে বললেনঃ হে শুয়ায়েব! এই কান্না কেন? জান্নাত প্রাপ্তির বাসনায় না জাহান্নামের ভয়ে? তিনি বললেনঃ হে প্ৰভু, হে আমার সর্দার তুমি জান। আমি জান্নাত প্রাপ্তির কামনায় কাঁদছিনা আবার জাহান্নামের ভয়েও কাঁদছি না। আমি তোমার ভালবাসাকে আমার অন্তরে ধারণ করেছি। আমি যখন তোমার দিকে দৃষ্টি দেয় তখন আমার সাথে কী করা হবে সে বিষয়ে আমি কোন পারওয়া করি না। আল্লাহ তা'আলা তার নিকট ওহী করলেনঃ হে শুয়ায়েব। যদি তা সত্যই হয় তাহলে তোমার জন্য আমার সাক্ষাৎ প্রাপ্তির সুসংবাদ। হে শুয়ায়েব সে জন্যই আমার সাথে আলাপকারী মূসা ইবনু ইমরানকে তোমার খাদেম বানিয়ে দিয়েছিলাম।
হাদীছটি নিতান্তই দুর্বল।
এটি আল-খাতীব `আত-তারীখ` (৬/৩১৫) গ্রন্থে আবু সা’আদ হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি আবূ আব্দিল্লাহ মুহাম্মাদ ইবনু ইসহাক আর-রামালী হতে তিনি আবুল ওয়ালীদ হিশাম ইবনু আম্মার হতে তিনি ইসমাঈল ইবনু আইয়াশ হতে তিনি বুহায়ের ইবনু সাঈদ হতে তিনি খালেদ ইবনু মি’দান হতে ... বর্ণনা করেছেন।
তিনি এই আবু সাআদের জীবনীতে হাদীছটি উল্লেখ করে বলেছেনঃ তার নাম ইসমাঈল ইবনু আলী ইবনিল হাসান ইবনে বুন্দার আল-ওয়ায়েয আল-আস্তারবাযী। তিনি আরো বলেনঃ তার (ইসমাঈল) থেকে একটি মুনকার মুসনাদ হাদীছ শুনেছি। তিনি নির্ভরযোগ্য ছিলেন না। অতঃপর তিনি তার এ হাদীছটি উল্লেখ করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ হাদীছটির ব্যাপারে দোষী হচ্ছেন ইসমাঈলের পিতা আলী ইবনুল হাসান। হাফিয যাহাবী বলেনঃ মুহাম্মাদ ইবনু তাহের তাকে মিথ্যার দোষে দোষী করেছেন। ইবনুন নাজ্জার বলেনঃ তিনি দুর্বল। আবু মুহাম্মাদ আব্দুল আযীয ইবনে মুহাম্মাদ আন-নাখশাবী বলেনঃ তিনি আল-জারূদ হতে বর্ণনা করেছেন যিনি ইউনুস ইবনু আব্দিল আলা ও তার সমসাময়িকদের থেকে বর্ণনা করেতেন। এ হাদীছটি আলী তার মাধ্যমে হিশাম ইবনু আম্মার হতে বর্ণনা করেছেন। তিনি তার উপর মিথ্যা বলেছেন ...। তার থেকে আশ্চর্য হবার উদ্দেশ্য ছাড়া বর্ণনা করাই হালাল নয়।
মুহাম্মাদ ইবনু ইসহাককে একমাত্র এ সনদেই চেনা যায়। ইবনু আসাকির তার জীবনীতে (১৫/৩৫/১) এ হাদীছটি উল্লেখ করে তার সম্পর্কে ভাল-মন্দ কিছুই বলেননি।
` إن القبلة لا تنقض الوضوء، ولا تفطر الصائم `.
ضعيف.
أخرجه إسحاق بن راهويه في ` مسنده ` (4 / 77 / 2 مصورة الجامعة الإسلامية) قال: أخبرنا بقية بن الوليد: حدثني عبد الملك بن محمد عن هشام بن عروة عن أبيه عن عائشة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قبلها وهو صائم وقال: فذكر الحديث وقال: ` يا حميراء إن في ديننا لسعة ` قال إسحاق: ` أخشى أن يكون غلطا `. قلت: وهذا إسناد ضعيف، ورجاله ثقات غير عبد الملك بن محمد، أورده الذهبي في ` الميزان ` لهذا الحديث مختصرا بلفظ الدارقطني الآتي، وقال: ` وعنه بقية بـ (عن) ، قال الدارقطني: ضعيف `. وكذا في ` اللسان ` لكن لم يقع فيه: بـ (عن) `. والمقصود بهذا الحرف أن بقية روى عنه معنعنا، ويشير بذلك إلى رواية الدارقطني للحديث في ` سننه ` (ص 50) قال: وذكر ابن أبي داود قال: أخبرنا ابن المصفى: حدثنا بقية عن عبد الملك بن محمد به مختصرا بلفظ: ` ليس في القبلة وضوء `.
وقد خفيت على الذهبي رواية إسحاق هذه التي صرح فيها بقية بالتحديث، ولعله لذلك لم يذكر الحافظ في ` اللسان ` قوله: ` بـ (عن) `. والله أعلم.
والحديث أورده الزيلعي في ` نصب الراية ` (1 / 73) من رواية ابن راهويه كما ذكرته، دون قول إسحاق: ` أخشى أن يكون غلطا ` وسكت عليه ولم يكشف عن علته وتبعه على ذلك الحافظ في ` الدراية ` (ص 20) وكان ذلك من دواعي تخريج الحديث هنا وبيان علته وإن كان معنى الحديث صحيحا كما يأتي في الذي بعده، ففي هذا الحديث - ومثله كثير - لأكبر دليل على جهل من يزعم أنه ما من حديث إلا وتكلم عليه المحدثون تصحيحا وتضعيفا! ثم إن قول إسحاق: ` أخشى أن يكون غلطا `.
فالذي يظهر لي - والله أعلم - أنه يعني أن الحديث بطرفيه محفوظ من حديث عائشة رضي الله عنهما عنه صلى الله عليه وسلم فعلا منه، لا قولا، فكان يقبل بعض نسائه ثم يصلي ولا يتوضأ، كما يأتي في الحديث الذي بعده، كما كان يقبلها وهو صائم. (1) فأخطأ الراوي، فجعل ذلك كله من قوله صلى الله عليه وسلم. وهو منكر غير معروف. والله أعلم.
(1) أخرجه الشيخان وغيرهما، وهو مخرج في ` الصحيحة (219 - 221) و` الإرواء ` (916) . اهـ.
৯৯৯। চুমু দেয়া উযু ভঙ্গ করে না আর সওমও ভাঙ্গে না।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি ইসহাক ইবনু রাহওয়াহে তার `মুসনাদ` (৪/৭৭/২) গ্রন্থে বাকিয়াহ ইবনুল ওয়ালীদ হতে তিনি আব্দুল মালেক ইবনু মুহাম্মাদ হতে তিনি হিশাম ইবনু উরওয়াহ হতে তিনি তার পিতা হতে তিনি আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন। রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাকে সওম অবস্থায় চুমু দিয়ে উক্ত কথা বলেনঃ ...।
ইসহাক বলেছেনঃ আমি হাদীছটি ভুল হওয়ার আশংকা করছি।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এ সনদটি দুর্বল। আব্দুল মালেক ইবনু মুহাম্মাদ ছাড়া সকল বর্ণনাকারী নির্ভরযোগ্য । হাফিয যাহাবী `আল-মীযান` গ্রন্থে হাদীছটি দারাকুতনীর নিম্নের সংক্ষিপ্ত বাক্যেليس في القبلة وضوء উল্লেখ করে বলেছেনঃ এটি বাকিয়াহ কর্তৃক আন্ আন্ করে বর্ণনাকৃত। দারাকুতনী বলেনঃ তিনি দুর্বল। অনুরূপ কথা `আল-লিসান` গ্রন্থেও এসেছে। তবে তাতে আন্ আন্ করে আসেনি। বাকিয়াহ স্পষ্ট করে বলেছেন যে, তার কাছে হাদীছটি বর্ণনা করা হয়েছে। ইসহাকের এ বর্ণনাটি যাহাবীর নিকট লুক্কায়িতই রয়ে গেছে। সম্ভবত এজন্যই হাফিয ইবনু হাজার “আল-লিসান` গ্রন্থে আন্ আন্ করে বর্ণনা করেননি।
যায়লাঈ `নাসবুর রায়া” (১/৭৩) গ্রন্থে ইসহাকের বর্ণনায় হাদীছটি উল্লেখ করে চুপ থেকেছেন। তিনি তার কোন সমস্যা বর্ণনা করেননি। হাফিয ইবনু হাজারও `আদ-দেরায়াহ` (পৃঃ ২০) গ্রন্থে তার অনুসরণ করেছেন। এ কারণেই আমি এখানে হাদীছটির তাখরীজ করেছি এবং তার সমস্যা বর্ণনা করেছি। যদিও হাদীছটির অর্থ সহীহ। যেমনটি পরবর্তীতে আসবে।
ইসহাক যে বলেছেনঃ আমি হাদীছটি ভুল হওয়ার আশংকা করছি।
আমার নিকট প্রকাশ পাচ্ছে যে, তিনি তার এ কথা দ্বারা বুঝাতে চেয়েছেন হাদীছটির দু দিক আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে ফে'লী হাদীছ হিসাবে নিরাপদ, কাওলী হাদীছ হিসাবে নয়। কারণ তিনি তার কোন কোন স্ত্রীকে চুমু দিতেন অতঃপর উযূ না করেই সালাত আদায় করতেন। যেমনটি পরবর্তী হাদীছে আসবে। তিনি তাঁর কোন কোন স্ত্রীকে সওম অবস্থাতেও চুমু দিতেন। (এটি বুখারী, মুসলিম ও অন্য বিদ্বানগণ বর্ণনা করেছেন)। বর্ণনাকারী ভুল করে উভয় অংশকে কাওলী হাদীছ হিসাবে উল্লেখ করে দিয়েছেন। আর এটিই মুনকার, পরিচিত নয়।
بتحقيقي) ، والطبراني في `المعجم الكبير` (17/ 140/ 349) ، والحاكم (3/ 632) ، وأبو نعيم في `الحلية` (2/ 11) من طريق محمد بن طلحة التيمي قال: أخبرني عبد الرحمن بن سالم بن عتبة بن عويم بن ساعدة عن أبيه، عن جده، عن عويم بن ساعدة مرفوعاً. وقال:
`صحيح الإسناد`! ووافقه الذهبي!
قلت: وهو من أوهامهما؛ فإنه إسناد ضعيف مجهول؛ عتبة بن عويم أورده الذهبي نفسه في `الضعفاء` وقال:
`لم يصح حديثه. قاله البخاري`. وقال في `الميزان`:
`والظاهر أن لعتبة ولأبيه صحبة،، والحديث مضطرب`.
وسالم بن عتبة قال الحافظ في `التقريب`:
`مقبول`.
والأولى أن يقال فيه: مجهول. فإنه لا يعرف إلا في هذا الإسناد، ولم يوثقه أحد. ومثله ابنه عبد الرحمن، وقد قال فيه الخافظ: `مجهول`.
ومحمد بن طلحة وهو المعروف بابن الطويل قال الحافظ:
`صدوق يخطىء`.
قلت: فأنى لمثل هذا الإسناد المظلم الصحة؟! وقد قال الهيثمي في `مجمع الزوائد` (10/ 17) :
`رواه الطبراني، وفيه من لم أعرفه`!
১০০০। তুমি ভালভাবে উযু কর, অতঃপর দাঁড়াও ও সালাত আদায় কর। তিনি তা সেই ব্যক্তিকে বললেন যে তার স্ত্রীকে চুমু দিয়েছিল।
হাদীছটি দুর্বল।
এটি ইমাম তিরমিযী (৪/১২৮), দারাকুতনী তার `সুনান` (৪৯) গ্রন্থে, হাকিম (১/১৩৫), বাইহাকী (১/১২৫) ও আহমাদ (৫/২৪৪) আব্দুল মালেক ইবনু উমায়ের হতে তিনি আদুর রহমান ইবনু আবী লাইল হতে তিনি মুয়া ইবনু জাবাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন। তিরমিযী বলেনঃ এ হাদীছটির সনদ মুত্তাসিল নয়। আব্দুর রহমান ইবনু আবী লাইলা মুয়ায ইবনু জাবাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে শুনেননি। মুয়ায মারা গেছেন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর খেলাফাত কালে। উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে যখন হত্যা করা হয় তখন আব্দুর রহমান ইবনু আবী লাইলার বয়স ছিল মাত্র ছয় বছর। তিনি মুরসাল হিসাবে বর্ণনা করেছেন।
আমি (আলবানী) বলছিঃ এর দ্বারা বাইহাকীও সমস্যা বর্ণনা করেছেন। তিনি হাদীছটির পরেই বলেনঃ তাতে এরসাল হয়েছে। আব্দুর রহমান ইবনু আবী লাইলা মুয়াযকে পাননি।
দারাকুতনী হাদীছটির পরে বলেনঃ এটি সহীহ। হাকিমও তার সাথে ঐকমত্য পোষণ করেছেন। হাফিয যাহাবী কিছু না বলে চুপ থেকেছেন। সঠিক হচ্ছে এই যে, হাদীছটির সনদে বিচ্ছিন্নতা রয়েছে। যেমনটি দৃঢ়তার সাথে তিরমিযী ও বাইহাকী বলেছেন। তার সনদটি দুর্বল।
হাদীছে বর্ণিত ব্যক্তির ঘটনাটি একদল সাহাবাহ হতে `সহীহায়নে`। `সুনান`, “আল-মুসনাদ` ও অন্যান্য গ্রন্থে বিভিন্ন সূত্রে ও একাধিক সনদে এসেছে। সেগুলোর কোনটিতেই উযু ও সালাত আদায় করার নির্দেশের কথা আসেনি। তাই প্রমাণ করছে যে, আলোচ্য হাদীছটি বর্ধিত অংশের দ্বারা মুনকার।
এ হাদীছ দিয়ে মহিলাদেরকে স্পর্শ করার দ্বারা উযু নষ্টের দলীল গ্রহণ করা ঠিক হবে না। (যেমনটি ইবনুল জাওযী `আত-তাহকীক` (১/১১৩) গ্রন্থে করেছেন।) নিম্নোক্ত কারণেঃ
১ । হাদীছটি দুর্বল।
২। যদি হাদীছটির সনদ সহীহ হত, তাহলে তাতে এমন দলীল পাওয়া যাচ্ছে না যে, নারীকে স্পর্শ করার কারণে উযু করার নির্দেশ ছিল। বরং তাতে এমনও বলা হয়নি যে নির্দেশের পূর্বে সে উযু অবস্থায় ছিল যা স্পর্শ করার কারণে ভেঙ্গে গেছে! বরং উযূ করার নির্দেশটি ছিল গুনাহের কারণে যেমনটি অন্য সহীহ হাদীছে এসেছেঃ
ما من مسلم يذنب ذنبا فيتوضأ ويصلي ركعتين إلا غفر له
মুসলিম ব্যক্তি যখনই কোন গুনাহ করে বসে অতঃপর উয়ু করে দু' রাকাআত সালাত আদায় করে তখনই তাকে ক্ষমা করে দেয়া হয়।
এটি সুনান ও অন্যান্য হাদীছ গ্রন্থ রচনাকারীগণ বর্ণনা করেছেন। একদল হাদীছটিকে সহীহ আখ্যা দিয়েছেন। যেমনটি আমি `তাখরীজুল মুখতারাহ` (নং ৭) গ্রন্থে বর্ণনা করেছি।
৩। উযু করার নির্দেশ স্পর্শ করার কারণেই ছিল। হতে পারে বিশেষ ধরনের স্পর্শের কারণে ছিল। তা হচ্ছে মাযী বেরিয়ে যাওয়া, যা উযূ নষ্ট করে দেয়। অতএব যখন এরূপ সম্ভাবনা রয়েছে, তখন তার দ্বারা দলীল গ্রহণ করা ঠিক হবে না।
সঠিক হচ্ছে এই যে, নারীকে স্পর্শ করলে, তাকে চুমু দিলে উযু ভাঙ্গে না। তা উত্তেজনার সাথে হোক বা উত্তেজনার সাথে না হোক কোন পার্থক্য নেই। এর সমর্থনে কোন সহীহ দলীল সাব্যস্ত না হওয়ার কারণে। বরং সাব্যস্ত হয়েছে যে, রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁর কোন স্ত্রীকে চুমু দিতেন অতঃপর সালাত আদায় করতেন। উযু করতেন না।
এটি আবু দাউদ ও অন্য বিদ্বানগণ বর্ণনা করেছেন। তার দশটি সূত্র রয়েছে। যার কোন কোনটি সহীহ যেমনটি আমি `সহীহ আবু দাউদ` (নং ১৭০-১৭৩) গ্রন্থে বর্ণনা করেছি। নারীকে চুমু দেয়া সাধারণত উত্তেজনার সাথেই হয়ে থাকে।