হাদীস বিএন


হিলইয়াতুল আওলিয়া





হিলইয়াতুল আওলিয়া (7041)


• حدثنا أبى ثنا إبراهيم ابن محمد بن الحسن ثنا محمد بن يزيد ثنا عبد العزيز بن الوليد بن أبي السائب.

قال سمعت أبي يقول: ما رأيت أحدا قط الخوف - أو قال الخشوع - أبين على وجهه من عمر بن عبد العزيز.




আব্দুল আযীয ইবনুল ওয়ালীদ ইবনে আবিস সায়িব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি আমার পিতাকে বলতে শুনেছি: উমর ইবনে আব্দুল আযীযের চেয়ে অন্য কারো চেহারায় ভয় (খাওফ) — অথবা তিনি বলেছেন বিনয় (খুশূ’) — এত বেশি স্পষ্ট হতে আমি কখনো দেখিনি।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7042)


• حدثنا أبو بكر بن مالك ثنا عبد الله بن أحمد بن حنبل حدثني أبي ثنا يحيى ابن عبد الملك بن أبي غنية عن أبي عثمان الثقفي. قال: كان لعمر بن عبد العزيز غلام يعمل على بغل له يأتيه بدرهم كل يوم، فجاءه يوما بدرهم ونصف، فقال ما بدا لك؟ فقال نفقت السوق، قال لا ولكنك أتعبت البغل، أرحه ثلاثة أيام.




আবূ উসমান আস-সাকাফী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: উমর ইবন আবদুল আযীযের একজন গোলাম ছিল, যে তাঁর একটি খচ্চরের উপর কাজ করত এবং প্রতিদিন এক দিরহাম উপার্জন করে তাঁর কাছে আনত। একদিন সে তাঁর কাছে দেড় দিরহাম নিয়ে এল। তখন তিনি (উমর) বললেন, (আজ বেশি আনার) কারণ কী? সে বলল, বাজারের চাহিদা বৃদ্ধি পেয়েছে। তিনি বললেন, না, বরং তুমি খচ্চরটিকে অতিরিক্ত কষ্ট দিয়েছ। তুমি তাকে তিন দিনের জন্য বিশ্রাম দাও।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7043)


• حدثنا محمد بن علي ثنا أبو العباس بن قتيبة ثنا إبراهيم بن هشام بن يحيى بن يحيى قال حدثني أبي عن جدي. قال: كانت لفاطمة بنت عبد الملك امرأة عمر جارية، فبعثت بها إليه وقالت إني قد كنت أعلم أنها تعجبك وقد وهبتها لك فتناول منها حاجتك. فقال لها عمر اجلسى يا جارية فو الله ما شيء من الدنيا كان أعجب إلي أن أناله منك، فأخبريني بقصتك وما كان من سبيك؟ قالت: كنت جارية من البربر جنى أبي جناية فهرب من موسى بن نصير عامل عبد الملك على إفريقية فأخذني موسى بن نصير فبعث بي إلى عبد الملك
فوهبني عبد الملك لفاطمة، فأرسلت بي إليك. فقال: كدنا والله أن نفتضح فجهزها وأرسل بها إلى أهلها.




ইয়াহইয়া ইবনু ইয়াহইয়া থেকে বর্ণিত, উমার (ইবনু আব্দুল আযীয)-এর স্ত্রী ফাতিমা বিনত আব্দুল মালিকের একজন দাসী ছিল। তিনি দাসীটিকে তাঁর কাছে পাঠিয়ে দিয়ে বললেন, "আমি জানি যে সে আপনাকে মুগ্ধ করবে। আমি তাকে আপনার জন্য দান করলাম। আপনি তার দ্বারা আপনার প্রয়োজন মেটান।" উমার (রহিমাহুল্লাহ) তাকে বললেন, "হে দাসী, তুমি বসো। আল্লাহর শপথ, দুনিয়ার কোনো বস্তুই আমার কাছে এত প্রিয় ছিল না যে আমি তা তোমার থেকে লাভ করি। তবে তুমি আমাকে তোমার ঘটনা এবং কীভাবে তোমাকে বন্দী করা হয়েছে তা জানাও।" সে বলল, "আমি ছিলাম বারবার গোত্রের একজন দাসী। আমার পিতা একটি অপরাধ করলে তিনি ইফরীকিয়ায় আব্দুল মালিকের গভর্নর মূসা ইবনু নুসাইরের কাছ থেকে পালিয়ে যান। অতঃপর মূসা ইবনু নুসাইর আমাকে ধরে ফেলেন এবং আমাকে আব্দুল মালিকের কাছে পাঠিয়ে দেন। আব্দুল মালিক আমাকে ফাতিমার কাছে দান করেন, আর তিনি আমাকে আপনার কাছে পাঠিয়েছেন।" তিনি (উমার) বললেন, "আল্লাহর কসম, আমরা তো প্রায় অপমানিত হয়ে যাচ্ছিলাম।" অতঃপর তিনি তাকে প্রস্তুত করে তার পরিবারের কাছে পাঠিয়ে দিলেন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7044)


• حدثنا محمد بن إبراهيم ثنا الحسن بن محمد الحراني ثنا أبو الحسين الرهاوي ثنا زيد بن الحباب قال أخبرني معاوية بن صالح حدثني سعيد بن سويد: أن عمر بن عبد العزيز صلى بهم الجمعة ثم جلس وعليه قميص مرقوع الجيب من بين يديه ومن خلفه، فقال له رجل يا أمير المؤمنين إن الله قد أعطاك، فلو لبست! فنكس مليا ثم رفع رأسه فقال: أفضل القصد عند الجدة، وأفضل العفو عند المقدرة.




সাঈদ বিন সুওয়াইদ থেকে বর্ণিত, যে উমর ইবন আব্দুল আযীয (রাহিমাহুল্লাহ) তাদের নিয়ে জুমু’আর সালাত আদায় করলেন। এরপর তিনি বসলেন। তাঁর পরিধানে ছিল এমন একটি জামা যার সামনের ও পেছনের দিকটা তালি দেওয়া ছিল। তখন একজন লোক তাঁকে বলল, হে আমীরুল মু'মিনীন, আল্লাহ আপনাকে (সম্পদ) দান করেছেন, যদি আপনি (ভালো পোশাক) পরিধান করতেন! তিনি কিছুক্ষণ মাথা নিচু করে থাকলেন, তারপর মাথা উঠিয়ে বললেন: সচ্ছলতা থাকা সত্ত্বেও মধ্যপন্থা অবলম্বন করা উত্তম। আর ক্ষমতা থাকা সত্ত্বেও ক্ষমা করে দেওয়া উত্তম।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7045)


• حدثنا الحسن بن محمد بن كيسان ثنا إسماعيل بن إسحاق القاضي ثنا محمد ابن أبي بكر قال ثنا سعيد بن عامر عن قربان بن دبيق قال: مرت بي ابنة لعمر بن عبد العزيز يقال له أمينة فدعاها عمر يا أمين يا أمين فلم تجبه، فأمر إنسانا فجاء بها، فقال ما منعك أن تجيبيني قالت إني عارية، فقال يا مزاحم انظر تلك الفرش التي فتقناها فاقطع لها منها قميصا، فقطع منها قميصا فذهب إنسان إلى أم البنين عمتها فقال بنت أخيك عارية وأنت عندك ما عندك، فارسلت إليها بتخت من ثياب وقالت لا تطلبي من عمر شيئا.




কুরবান ইবনু দুবাইক থেকে বর্ণিত, উমার ইবনু আবদুল আযীযের এক কন্যা, যার নাম ছিল আমিনা, আমার পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন। উমার তাকে ডাকলেন, "হে আমীন! হে আমীন!" কিন্তু সে তার ডাকে সাড়া দিল না। তখন তিনি এক ব্যক্তিকে আদেশ দিলেন এবং লোকটি তাকে নিয়ে এলো। তিনি জিজ্ঞাসা করলেন, "কী তোমাকে আমার ডাকে সাড়া দেওয়া থেকে বিরত রাখল?" সে বলল, "আমি বিবস্ত্র (আমার পরিধেয় বস্ত্র নেই)।" তখন তিনি বললেন, "হে মুযাহিম! আমরা যে কাপড়গুলো কেটে ফেলেছি, তা থেকে তার জন্য একটি জামা কেটে দাও।" অতঃপর তিনি তা থেকে একটি জামা কেটে দিলেন। এরপর একজন লোক তার ফুফু উম্মুল বানীন-এর কাছে গিয়ে বললেন, "আপনার ভাইঝি বিবস্ত্র, অথচ আপনার কাছে তো অনেক সম্পদ রয়েছে।" তখন তিনি তার কাছে এক বান্ডিল কাপড় পাঠালেন এবং বললেন, "উমারের কাছে আর কিছু চেয়ো না।"









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7046)


• حدثنا سليمان بن أحمد ثنا محمد بن زكريا الغلابي ثنا مهدي بن سابق النهدي(1) ثنا عبد الله بن عياش عن أبيه: أن عمر بن عبد العزيز شيع جنازة، فلما انصرفوا تأخر عمر وأصحابه ناحية عن الجنازة، فقال له أصحابه يا أمير المؤمنين جنازة أنت وليها تأخرت عنها فتركتها وتركتها؟ فقال نعم! ناداني القبر من خلفي يا عمر بن عبد العزيز ألا تسألني ما صنعت بالأحبة؟ قلت بلى! قال خرقت الأكفان، ومزقت الأبدان، ومصصت الدم وأكلت اللحم، ألا تسألني ما صنعت بالأوصال؟ قلت بلى! قال نزعت الكفين من الذراعين، والذراعين من العضدين، والعضدين من الكتفين، والوركين من الفخذين، والفخذين من الركبتين، والركبتين من الساقين، والساقين من القدمين، ثم بكى عمر فقال: ألا إن الدنيا بقاؤها قليل، وعزيزها ذليل، وغنيها فقير،
وشبابها يهرم، وحيها يموت، فلا يغرنكم إقبالها مع معرفتكم بسرعة إدبارها، والمغرور من اغتر بها، أين سكانها الذين بنوا مدائنها، وشققوا أنهارها، وغرسوا أشجارها، وأقاموا فيها أياما يسيرة غرتهم بصحتهم، وغروا بنشاطهم، فركبوا المعاصي. إنهم كانوا والله في الدنيا مغبوطين بالأموال على كثرة المنع عليه، محسودين على جمعه. ما صنع التراب بأبدانهم، والرمل بأجسادهم، والديدان بعظامهم وأوصالهم، كانوا في الدنيا على أسرة ممهدة، وفرش منضدة، بين خدم يخدمون، وأهل يكرمون، وجيران يعضدون، فإذا مررت فنادهم إن كنت مناديا، وادعهم إن كنت لا بد داعيا، ومر بعسكرهم، وانظر إلى تقارب منازلهم التي كان بها عيشهم، وسل غنيهم ما بقي من غناه، وسل فقيرهم ما بقي من فقره، وسلهم عن الألسن التي كانوا بها يتكلمون، وعن الأعين التي كانت إلى اللذات بها ينظرون، وسلهم عن الجلود الرقيقة، والوجوه الحسنة، والأجساد الناعمة، ما صنع بها الديدان؟ محت الالوان، وأكلت اللحمان، وعفرت الوجوه، ومحت المحاسن، وكسرت الفقار وأبانت الأعضاء، ومزقت الأشلاء، وأين حجالهم وقبابهم، وأين خدمهم وعبيدهم، وجمعهم ومكنوزهم، والله ما زودوهم فراشا، ولا وضعوا هناك متكأ، ولا غرسوا لهم شجرا، ولا أنزلوهم من اللحد قرارا، أليسوا في منازل الخلوات والفلوات؟ أليس الليل والنهار عليهم سواء؟ أليس هم فى مدلهمة ظلماء؟ قد حيل بينهم وبين العمل، وفارقوا الأحبة. فكم من ناعم وناعمة أصبحوا ووجوههم بالية، وأجسادهم من أعناقهم نائية، وأوصالهم ممزقة، قد سالت الحدق على الوجنات، وامتلأت الأفواه دما وصديدا، ودبت دواب الأرض في أجسادهم ففرقت أعضاءهم، ثم لم يلبثوا والله إلا يسيرا حتى عادت العظام رميما، قد فارقوا الحدائق، فصاروا بعد السعة إلى المضايق، قد تزوجت نساؤهم، وترددت في الطرق أبناؤهم، وتوزعت القرابات ديارهم وتراثهم، فمنهم والله الموسع له في قبره، الغض الناضر فيه، المتنعم بلذته.

يا ساكن القبر غدا ما الذي غرك من الدنيا، هل تعلم أنك تبقى أو تبقى لك،
أين دارك الفيحاء، ونهرك المطرد، وأين ثمرك الناضر ينعه وأين رقاق ثيابك وأين طيبك وأين بخورك، وأين كسوتك لصيفك وشتائك، أما رأيته قد نزل به الأمر فما يدفع عن نفسه وجلا، وهو يرشح عرقا، ويتلمظ عطشا، يتقلب من سكرات الموت وغمراته، جاء الأمر من السماء، وجاء غالب القدر والقضاء، جاء من الأمر والأجل ما لا تمتنع منه، هيهات هيهات يا مغمض الوالد والأخ والولد وغاسله، يا مكفن الميت وحامله، يا مخليه في القبر وراجعا عنه، ليت شعري كيف كنت على خشونة الثرى، يا ليت شعري بأي خديك بدأ البلا، يا مجاور الهلكات صرت في محلة الموتى، ليت شعري ما الذي يلقاني به ملك الموت عند خروجي من الدنيا، وما يأتيني به من رسالة ربى!. ثم تمثل

تسر بما يفنى وتشغل بالصبا … كما غر باللذات فى النوم حالم

نهارك يا مغرور سهو وغفلة … وليلك نوم والردى لك لازم

وتعمل فيما سوف تكره غبه(1) … كذلك في الدنيا تعيش البهائم

ثم انصرف فما بقي بعد ذلك إلا جمعة.




উমর ইবনে আবদুল আযীয (রাহিমাহুল্লাহ) থেকে বর্ণিত: তিনি একটি জানাজার অনুসরণ করছিলেন। যখন তারা ফিরতে শুরু করলেন, তখন উমর এবং তার সঙ্গীরা জানাজা থেকে একপাশে সরে গেলেন। তার সঙ্গীরা তাকে বললেন, হে আমীরুল মুমিনীন! আপনি এমন জানাজার অভিভাবক ছিলেন, অথচ তা থেকে আপনি দূরে সরে গেলেন এবং সেটিকে ছেড়ে গেলেন? তিনি বললেন, হ্যাঁ! পেছন থেকে কবর আমাকে ডেকে বলল, হে উমর ইবনে আবদুল আযীয! আপনি কি আমাকে জিজ্ঞাসা করবেন না যে আমি প্রিয়জনদের সাথে কী আচরণ করেছি? আমি বললাম, হ্যাঁ অবশ্যই! কবর বলল, আমি কাফন ছিঁড়ে ফেলেছি, দেহকে ছিন্নভিন্ন করেছি, রক্ত চুষে নিয়েছি এবং গোশত খেয়েছি। আপনি কি আমাকে জিজ্ঞাসা করবেন না আমি জোড়াগুলোর সাথে কী করেছি? আমি বললাম, অবশ্যই! কবর বলল, আমি কবজি দুটিকে কনুই থেকে আলাদা করেছি, কনুইকে বাহু থেকে আলাদা করেছি, বাহুকে কাঁধ থেকে আলাদা করেছি; নিতম্বকে উরু থেকে, উরুকে হাঁটু থেকে, হাঁটুকে গোড়ালি থেকে এবং গোড়ালিকে পা থেকে আলাদা করেছি।

এরপর উমর (রাহিমাহুল্লাহ) কেঁদে ফেললেন এবং বললেন: সাবধান! দুনিয়ার স্থায়িত্ব অতি সামান্য, এর সম্মানিত ব্যক্তিরা অপদস্থ হবে, এর ধনীরা দরিদ্র হবে, এর তরুণরা বৃদ্ধ হবে, আর এর জীবিতরা মৃত্যুবরণ করবে। এর দ্রুত বিলীন হওয়ার জ্ঞান থাকা সত্ত্বেও, দুনিয়ার এই আগমন যেন তোমাদেরকে ধোঁকা না দেয়। যে ব্যক্তি এর দ্বারা ধোঁকাগ্রস্ত হয়, সে-ই ধোঁকাগ্রস্ত। কোথায় তারা, যারা এর শহরগুলি নির্মাণ করেছিল, এর নদী-নালা খনন করেছিল, এর বৃক্ষরাজি রোপণ করেছিল এবং স্বল্প কিছু দিনের জন্য এর মধ্যে বসবাস করেছিল? তাদের স্বাস্থ্য তাদেরকে ধোঁকা দিয়েছে, তাদের কর্মোদ্দীপনা তাদেরকে ভুল পথে চালিত করেছে, ফলে তারা পাপাচারে লিপ্ত হয়েছিল। আল্লাহর কসম! তারা পৃথিবীতে সম্পদের প্রাচুর্যের জন্য ঈর্ষার পাত্র ছিল, যদিও সে সম্পদ থেকে তারা কৃপণতা করত, এবং সম্পদ জমানোর জন্য তারা হিংসার শিকার ছিল।

তাদের দেহ নিয়ে মাটি কী করেছে? তাদের শরীর নিয়ে বালি কী করেছে? তাদের হাড় এবং জোড়া নিয়ে কীটপতঙ্গ কী করেছে? তারা দুনিয়াতে মসৃণ পালঙ্কে এবং সাজানো বিছানায় শুয়ে থাকত; সেবকদের মাঝে, যারা তাদের সেবা করত; পরিবারের মাঝে, যারা তাদের সম্মান করত; এবং প্রতিবেশীদের মাঝে, যারা তাদের সাহায্য করত। অতএব, যখন তুমি (তাদের কবরের পাশ দিয়ে) যাও, যদি তুমি আহ্বানকারী হও, তবে তাদের ডাকো। যদি তোমাকে অবশ্যই আহ্বান করতেই হয়, তবে তাদের আহ্বান করো। তাদের গোরস্থানে যাও এবং তাদের বাসস্থানগুলোর নৈকট্য দেখো, যেখানে ছিল তাদের জীবনযাপন। তাদের ধনীদের জিজ্ঞাসা করো, তাদের ধন-সম্পদের কী অবশিষ্ট আছে? তাদের দরিদ্রদের জিজ্ঞাসা করো, তাদের দারিদ্র্যের কী অবশিষ্ট আছে? তাদের জিজ্ঞাসা করো সেই জিহ্বা সম্পর্কে, যার দ্বারা তারা কথা বলত; আর সেই চোখ সম্পর্কে, যা দিয়ে তারা ভোগ-বিলাসের দিকে তাকাত। তাদের জিজ্ঞাসা করো সেই কোমল ত্বক, সেই সুন্দর চেহারা এবং সেই মসৃণ শরীর সম্পর্কে—কীটপতঙ্গ তাদের সাথে কী করেছে? তারা রঙ মুছে দিয়েছে, মাংস খেয়ে ফেলেছে, চেহারা ধূসর করে দিয়েছে, সৌন্দর্য বিলীন করেছে, মেরুদণ্ড ভেঙে দিয়েছে, অঙ্গ-প্রত্যঙ্গ বিচ্ছিন্ন করেছে, এবং দেহগুলোকে টুকরো টুকরো করেছে।

কোথায় তাদের পর্দাঘেরা কক্ষ ও তাদের তাঁবু? কোথায় তাদের সেবক ও দাস? কোথায় তাদের সঞ্চিত সম্পদ ও গুপ্ত ধন? আল্লাহর কসম! তারা তাদের জন্য কোনো বিছানা দেয়নি, সেখানে কোনো হেলান দেওয়ার স্থান রাখেনি, তাদের জন্য কোনো গাছ লাগায়নি এবং কবরে কোনো স্থায়ী বাসস্থান দেয়নি। তারা কি নির্জনতা ও জনশূন্য প্রান্তরের আবাসে নেই? তাদের জন্য কি দিন-রাত সমান নয়? তারা কি গভীর অন্ধকারে নিমজ্জিত নয়? তাদের ও (নেক) কাজের মাঝে প্রতিবন্ধকতা সৃষ্টি করা হয়েছে, এবং তারা তাদের প্রিয়জনদের ছেড়ে চলে গেছে। কত না সুখভোগকারী পুরুষ ও মহিলা রয়েছে, যাদের চেহারা জরাজীর্ণ হয়ে গেছে, তাদের শরীর তাদের ঘাড় থেকে আলাদা হয়ে গেছে, তাদের জোড়াসমূহ ছিন্নভিন্ন হয়েছে, চোখ কোটর গলে গণ্ডদেশে ঝুলে পড়েছে, মুখ রক্ত ও পূঁজে ভরে গেছে, এবং মাটির প্রাণী তাদের দেহে বিচরণ করে তাদের অঙ্গ-প্রত্যঙ্গকে পৃথক করে দিয়েছে। আল্লাহর কসম! অতি অল্প সময়ের মধ্যেই তাদের হাড়গোড় ধূলিকণায় পরিণত হয়েছে। তারা উদ্যানরাজি ছেড়ে দিয়েছে, প্রশস্ততা থেকে সংকীর্ণতার দিকে ধাবিত হয়েছে। তাদের স্ত্রীরা নতুন করে বিবাহ করেছে, তাদের সন্তানেরা পথে পথে ঘুরছে, আর আত্মীয়-স্বজনরা তাদের ঘরবাড়ি ও উত্তরাধিকার ভাগ করে নিয়েছে। আল্লাহর কসম! তাদের মধ্যে এমন ব্যক্তিও আছে, যার জন্য তার কবরে প্রশস্ততা দেওয়া হয়েছে, সেখানে সে সতেজ ও প্রফুল্ল থাকে, এবং তার ভোগ-বিলাস উপভোগ করে।

হে কবরের আগামীকালের বাসিন্দা! দুনিয়ার কোন জিনিস তোমাকে ধোঁকা দিয়েছে? তুমি কি জানতে যে তুমি থাকবে, নাকি দুনিয়া তোমার জন্য থাকবে? কোথায় তোমার সেই প্রশস্ত বাড়ি, কোথায় তোমার বহমান নদী? কোথায় তোমার সুপক্ব সতেজ ফল, কোথায় তোমার মিহি কাপড়, কোথায় তোমার সুগন্ধি, কোথায় তোমার ধূপ, এবং কোথায় তোমার গ্রীষ্ম ও শীতের পোশাক? তুমি কি দেখোনি যে তার ওপর সেই হুকুম নেমে এসেছে? তখন সে তার নিজের থেকে ভয় দূর করতে পারে না। সে ঘর্মাক্ত হতে থাকে এবং পিপাসায় জিহ্বা বের করে। সে মৃত্যুর যন্ত্রণা ও মূহুর্তগুলোতে কাতরাতে থাকে। আকাশ থেকে আদেশ এসেছে, পরাক্রমশালী তাকদীর ও ফয়সালা এসেছে। এমন হুকুম ও সময় এসেছে যা থেকে নিস্তার পাওয়া সম্ভব নয়। কতই না দূরে! কতই না দূরে! হে পিতা, ভাই ও সন্তানের চোখ বন্ধকারী ও গোসলদাতা! হে মৃতের কাফনদানকারী ও বহনকারী! হে কবরে তাকে একা রেখে ফিরে আসা ব্যক্তি! যদি আমি জানতাম! মাটির রুক্ষতার উপর তোমার কেমন লেগেছে? যদি আমি জানতাম! তোমার দুই গালের কোন দিক দিয়ে পচন শুরু হয়েছিল? হে ধ্বংসের প্রতিবেশী! তুমি তো এখন মৃতদের মহল্লায় এসে পড়েছো। যদি আমি জানতাম! দুনিয়া থেকে বের হওয়ার সময় মৃত্যুর ফেরেশতা আমাকে কী দিয়ে অভ্যর্থনা জানাবেন? আর আমার রবের পক্ষ থেকে তিনি আমার জন্য কী বার্তা নিয়ে আসবেন! অতঃপর তিনি এই কবিতাংশ আবৃত্তি করলেন:

তুমি বিলীনশীল বস্তুতে আনন্দ পাও এবং শৈশবে মগ্ন থাকো,
যেমন ঘুমন্ত ব্যক্তি স্বপ্নে ভোগ-বিলাসে ধোঁকাগ্রস্ত হয়।
হে ধোঁকাগ্রস্ত ব্যক্তি, তোমার দিন কাটে ভুল ও অসতর্কতায়,
আর তোমার রাত কাটে ঘুমে, অথচ মৃত্যু তোমার জন্য অপরিহার্য।
তুমি এমন কাজ করো যার পরিণতি ঘৃণা করবে,
পশুরাও তো পৃথিবীতে এভাবেই জীবন যাপন করে।

এরপর তিনি ফিরে গেলেন। এর পরে (তিনি পৃথিবীতে) আর এক সপ্তাহর বেশি বাঁচেননি।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7047)


• حدثنا عبد الله بن محمد ثنا محمد ابن الحسين الحضرمي [ثنا علي بن مطر ثنا أسد بن زيد](2) قال: كنا مع عمر ابن عبد العزيز في جنازة، فلما أن دفن الميت ركب بغلة له صغيرة ثم جاء إلى قبر فركز عليه المقرعة فقال: السلام عليك يا صاحب القبر، قال عمر فناداني مناد من خلفي وعليك السلام يا عمر بن عبد العزيز عم تسأل؟ فقلت عن ساكنك وجارك، قال أما البدن فعندي، والروح عرج به إلى الله عز وجل ما أدري أي شيء حاله، قلت أسألك عن ساكنك وجارك؟ قال دمغت المقلتين، وأكلت الحدقتين، ومزقت الأكفان، وأكلت الأبدان، ثم ذكر نحوه وذكر الشعر.




আসাদ ইবনে যায়দ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা উমর ইবনে আব্দুল আযীযের সাথে একটি জানাজায় ছিলাম। যখন মৃত ব্যক্তিকে দাফন করা হলো, তিনি তার ছোট খচ্চরটিতে আরোহণ করলেন। এরপর একটি কবরের কাছে এসে তার উপর লাঠি দিয়ে আঘাত করলেন এবং বললেন: "আসসালামু আলাইকা ইয়া সাহিবাল কবর (হে কবরের অধিবাসী, তোমার উপর শান্তি বর্ষিত হোক)।" উমর (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, তখন পিছন থেকে একজন আহ্বানকারী আমাকে ডেকে বলল: "ওয়া আলাইকাস সালাম, ইয়া উমর ইবনে আব্দুল আযীয (তোমার উপরও শান্তি বর্ষিত হোক, হে উমর ইবনে আব্দুল আযীয)। তুমি কী সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করছো?" আমি (উমর) বললাম: "তোমার বাসিন্দা ও প্রতিবেশী সম্পর্কে।" সে (কবর) বলল: "শরীর তো আমার কাছেই আছে। আর আত্মা, তাকে আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্লার কাছে উঠিয়ে নেওয়া হয়েছে। তার অবস্থা কেমন, তা আমি জানি না।" আমি বললাম: "আমি তোমাকে তোমার বাসিন্দা ও প্রতিবেশী সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করছি।" সে বলল: "আমি চোখের গোলা দু'টিকে গলিয়ে দিয়েছি, অক্ষিগোলক দু'টিকে খেয়ে ফেলেছি, কাফনের কাপড় ছিঁড়ে ফেলেছি এবং শরীরগুলো খেয়ে ফেলেছি।" এরপর তিনি অনুরূপ কিছু এবং কবিতা উল্লেখ করলেন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7048)


• حدثنا أبو حامد بن جبلة ثنا محمد بن إسحاق الثقفي ثنا محمد بن يحيى الأزدي ثنا عبيد بن نوح عن أبي بكر البصري عن أبي قرة. قال: خرج عمر بن عبد العزيز على بعض جنائز بني مروان، فلما صلى عليها وفرغ. قال
لأصحابه توقفوا فوقفوا، فضرب بطن فرسه حتى أمعن فى القبور وتوارى عنهم، فاستبطأه الناس حتى ظنوا، فجاء وقد احمرت عيناه، وانتفخت أوداجه، قالوا يا أمير المؤمنين أبطأت علينا؟ قال أتيت قبور الأحبة قبور بني آبائي فسلمت عليهم فلم يردوا السلام، فلما ذهبت أقفى ناداني التراب فقال:

ألا تسألني يا عمر ما لقيت الاجنة؟ قلت: وما لقيت الأحبة؟ قال خرقت الأكفان، وأكلت الأبدان، ونزعت المقلتين، فذكر نحوه. وزاد: فلما ذهبت أقفى ناداني يا عمر عليك بأكفان لا تبلى قلت وما أكفان لا تبلى؟ قال اتقاء الله، والعمل الصالح.




আবূ কুররাহ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: উমার ইবনে আব্দুল আযীয (রাহ.) বানু মারওয়ানের কিছু জানাযায় উপস্থিত হয়েছিলেন। যখন তিনি সালাত আদায় করলেন এবং শেষ করলেন, তখন তিনি তার সাথীদের বললেন: তোমরা থামো। তারা থামলেন। তিনি তার ঘোড়ার পেটে আঘাত করলেন এবং কবরস্থানের গভীরে প্রবেশ করলেন এবং তাদের দৃষ্টি থেকে অদৃশ্য হয়ে গেলেন।

লোকেরা তাকে দীর্ঘক্ষণ ধরে দেখতে না পেয়ে উদ্বিগ্ন হলো, এমনকি তারা আশঙ্কা করতে শুরু করল। এরপর তিনি ফিরে এলেন। তখন তার চোখ লাল হয়ে গিয়েছিল এবং গলার রগগুলো ফুলে উঠেছিল।

তারা বলল: হে আমীরুল মু'মিনীন, আপনি আমাদের কাছে দেরিতে এলেন? তিনি বললেন: আমি আমার প্রিয়জনদের কবরে—আমার পূর্বপুরুষদের সন্তানদের কবরে এসেছিলাম। আমি তাদের সালাম দিলাম, কিন্তু তারা সালামের উত্তর দিল না।

যখন আমি ফিরে যাচ্ছিলাম, তখন মাটি আমাকে ডেকে বলল: হে উমার, তুমি কি আমাকে জিজ্ঞেস করবে না যে আমি প্রিয়জনদের সাথে কী করেছি? আমি বললাম: প্রিয়জনদের সাথে তুমি কী করেছ? মাটি বলল: আমি কাফন ছিন্নভিন্ন করে দিয়েছি, দেহগুলো খেয়ে ফেলেছি এবং চক্ষুদ্বয় উপড়ে ফেলেছি। (বর্ণনাকারী) অনুরূপ কিছু উল্লেখ করলেন।

তিনি আরও বলেন: যখন আমি ফিরে যেতে লাগলাম, তখন মাটি আমাকে ডেকে বলল: হে উমার, তুমি এমন কাফন অবলম্বন করো যা কখনো পুরাতন হবে না। আমি বললাম: সেই কাফন কী যা পুরাতন হবে না? মাটি বলল: আল্লাহকে ভয় করা এবং সৎ কাজ করা।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7049)


• حدثنا أبو حامد بن جبلة ثنا محمد بن إسحاق ثنا عبد الله بن محمد حدثني أبو صالح الشامي. قال: قال عمر بن عبد العزيز:

أنا ميت وعز من لا يموت … قد تيقنت أننى سأموت

ليس ملك يزيله الموت ملكا … إنما الملك ملك من لا يموت.




উমর ইবনে আব্দুল আযীয থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন:

আমি মরণশীল, আর পরাক্রম কেবল তাঁরই, যিনি কখনো মরেন না।
আমি নিশ্চিতভাবে অবগত যে আমি মারা যাব।
মৃত্যু যেই রাজত্ব কেড়ে নেয়, তা আসল রাজত্ব নয়।
বরং রাজত্ব কেবল তাঁরই, যিনি কখনো মরেন না।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7050)


• حدثنا أبو بكر محمد بن أحمد ثنا أحمد بن محمد العبدي ثنا أبو بكر بن عبيد ثنا محمد بن الحسين ثنا خلف بن تميم ثنا مفضل بن يونس. قال: قال عمر بن عبد العزيز: لقد نغص هذا الموت على أهل الدنيا ما هم فيه [من عضارة الدنيا وزهوتها، فبيناهم كذلك وعلى ذلك أتاهم جاد من الموت فاخترمهم مما هم فيه](1) فالويل والحسرة هنالك لمن لم يحذر الموت، ويذكره في الرخاء فيقدم لنفسه خيرا يجده بعد ما فارق الدنيا وأهلها. قال: ثم بكى عمر حتى غلبه البكاء فقام.




উমর ইবনু আব্দুল আযীয থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: এই মৃত্যু দুনিয়াবাসীদের জন্য তাদের উপভোগের বিষয়গুলো তিক্ত করে তুলেছে— [দুনিয়ার জাঁকজমক ও ঔজ্জ্বল্য থেকে। তারা যখন সেভাবেই (ভোগে মগ্ন) ছিল, তখনই অনিবার্য মৃত্যু এসে তাদের সব উপভোগের মাঝখান থেকে ছিনিয়ে নিলো]। সুতরাং, ধ্বংস ও আফসোস সেই ব্যক্তির জন্য, যে মৃত্যুকে ভয় করেনি এবং আরামের সময়েও তাকে স্মরণ করেনি, যাতে সে নিজের জন্য কল্যাণকর কিছু অগ্রিম পাঠাতে পারে, যা সে দুনিয়া ও তার অধিবাসীদের ছেড়ে আসার পরে পাবে। বর্ণনাকারী বলেন: অতঃপর উমর (মৃত্যুর কথা স্মরণ করে) এত বেশি কাঁদলেন যে কান্না তাকে কাবু করে ফেলল। এরপর তিনি উঠে দাঁড়ালেন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7051)


• حدثنا أبو بكر محمد بن أحمد ثنا أبو الحسن أحمد بن محمد العبدي ثنا عبد الله بن محمد بن عبيد حدثني محمد بن الحسن ثنا إسحاق بن منصور بن حيان الأسدي ثنا جابر بن نوح. قال: كتب عمر بن عبد العزيز إلى بعض أهل بيته؛ أما بعد فإنك إن استشعرت ذكر الموت في ليلك أو نهارك بغض إليك كل فان، وحبب إليك كل باق والسلام.




উমর ইবনে আব্দুল আযীয (রাহিমাহুল্লাহ) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁর পরিবারের এক সদস্যকে লিখেছিলেন: অতঃপর, তুমি যদি তোমার রাত কিংবা দিনে মৃত্যুর স্মরণকে নিজের মধ্যে গেঁথে নাও, তাহলে এটি তোমার কাছে সকল নশ্বর বস্তুকে ঘৃণিত করে তুলবে এবং সকল চিরস্থায়ী বস্তুকে তোমার কাছে প্রিয় করে তুলবে। ওয়াসসালাম।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7052)


• حدثنا الحسن بن محمد بن كيسان ثنا إسماعيل بن إسحاق القاضي ثنا
ابن أبي بكر ثنا سعيد بن عامر عن أسماء بن عبيد قال: دخل عنبسة ابن سعيد بن العاص على عمر بن عبد العزيز. فقال: يا أمير المؤمنين إن من كان قبلك من الخلفاء كانوا يعطون عطايا منعتناها، ولي عيال وضيعة، أفتأذن لي أن أخرج إلى ضيعتي وما يصلح عيالي؟ فقال عمر: أحبكم الينا من كفانا مئونته. فخرج من عنده فلما صار عند الباب قال عمر: أبا خالد أبا خالد، فرجع. فقال: أكثر من ذكر الموت فإن كنت في ضيق من العيش وسعه عليك، وإن كنت في سعة من العيش ضيقه عليك.




আসমা ইবনে উবাইদ থেকে বর্ণিত, আনবাসা ইবনে সাঈদ ইবনুল আস উমার ইবনে আব্দুল আজিজ (রাহিমাহুল্লাহ)-এর কাছে প্রবেশ করলেন। তিনি বললেন, হে আমীরুল মুমিনীন! আপনার পূর্ববর্তী খলীফাগণ আমাদের কিছু অনুদান প্রদান করতেন, যা আপনি বন্ধ করে দিয়েছেন। আমার পরিবার-পরিজন ও জমিজমা রয়েছে। আপনি কি আমাকে অনুমতি দেবেন যে আমি আমার জমিজমার (বা এস্টেটের) দিকে চলে যাই এবং আমার পরিবারের জন্য যা প্রয়োজন তা সংগ্রহ করি? তখন উমার বললেন, আমাদের কাছে তোমাদের মধ্যে সেই ব্যক্তিই সবচেয়ে প্রিয়, যে আমাদের ওপর নিজের খরচের বোঝা চাপায় না। অতঃপর তিনি তাঁর কাছ থেকে বেরিয়ে গেলেন। যখন তিনি দরজার কাছে পৌঁছলেন, উমার (তাঁকে লক্ষ্য করে) বললেন, হে আবু খালিদ! হে আবু খালিদ! তখন তিনি ফিরে এলেন। (উমার) বললেন, মৃত্যুর কথা বেশি বেশি স্মরণ করো। কেননা, যদি তুমি অভাবগ্রস্ত জীবনযাপনে থাকো, তবে তা তোমার জন্য জীবনকে প্রশস্ত করে দেবে। আর যদি তুমি প্রাচুর্যময় জীবনযাপনে থাকো, তবে তা তোমার জন্য জীবনকে সংকুচিত করে দেবে।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7053)


• حدثنا أبو محمد بن حيان ثنا محمد بن يحيى المروزي ثنا خالد بن خداش ثنا حماد بن زيد عن محمد بن عمرو ثنا عنبسة بن سعيد. قال: دخلت على عمر بن عبد العزيز فذكر نحوه.




আনবাসা ইবনু সাঈদ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি উমার ইবনু আব্দুল আযীযের নিকট প্রবেশ করলাম এবং তিনি অনুরূপ কিছু উল্লেখ করলেন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7054)


• حدثنا عبد الله بن محمد ثنا ابن أبي عاصم ح. وحدثنا محمد بن علي ثنا الحسين بن محمد قالا: ثنا عمرو بن عثمان ثنا خالد بن يزيد عن جعونة. قال: قال عمر ابن عبد العزيز: يا أيها الناس إنما أنتم أغراض تنتضل فيها المنايا، إنكم لا تؤتون نعمة إلا بفراق أخرى، وأية أكلة ليس معها غصة، وأية جرعة ليس معها شرقة، وإن أمس شاهد مقبول قد فجعكم بنفسه، وخلف في أيديكم حكمته، وإن اليوم حبيب مودع وهو وشيك الظعن، وإن غدا آت بما فيه، وأين يهرب من يتقلب في يدي طالبه! إنه لا أقوى من طالب، ولا أضعف من مطلوب. إنما أنتم سفر تحلون عقد رحالكم في غير هذه الدار، إنما أنتم فروع أصول قد مضت فما بقاء فرع بعد ذهاب أصله.




উমার ইবনে আব্দুল আযীয থেকে বর্ণিত, তিনি বললেন: হে লোক সকল! তোমরা তো কেবল এমন লক্ষ্যবস্তু, যার দিকে মৃত্যু তীর নিক্ষেপ করে। তোমরা কোনো একটি নেয়ামত প্রাপ্ত হও না, অন্য একটিকে বিদায় জানানো ছাড়া। এমন কোন খাবার আছে যার সাথে কাঁটা (গলরোধকারী বস্তু) নেই? এমন কোন পানীয় আছে যার সাথে শ্বাসরোধ (বা বিষম) নেই? আর নিশ্চয়ই গতকাল একজন গ্রহণযোগ্য সাক্ষী, যে তোমাদেরকে তার নিজের দ্বারা শোকাভিভূত করেছে এবং তোমাদের হাতে তার হিকমত (শিক্ষা) রেখে গেছে। আর নিশ্চয়ই আজকের দিন হলো এক প্রিয় বিদায়ী বন্ধু, যে দ্রুত প্রস্থান করবে। আর নিশ্চয়ই আগামী দিন তার যা কিছু নিয়ে আসার, তা নিয়ে আসবে। যে ব্যক্তি তার সন্ধানকারীর হাতেই ঘোরাফেরা করছে, সে কোথায় পালাবে? নিশ্চয়ই সন্ধানকারীর চেয়ে শক্তিশালী কেউ নেই, আর সন্ধানকৃত বস্তুর চেয়ে দুর্বল কেউ নেই। তোমরা তো কেবল মুসাফির, যারা এই দুনিয়ার বাইরে নিজেদের যাত্রার সরঞ্জাম খুলবে (স্থায়ীভাবে বাস করবে)। তোমরা তো কেবল এমন মূলের শাখা যারা ইতোমধ্যে চলে গেছে। তাই মূল চলে যাওয়ার পর শাখার আর কতক্ষণ স্থায়িত্ব থাকতে পারে?









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7055)


• حدثنا أبو بكر بن مالك ثنا عبد الله بن أحمد بن حنبل حدثني عبد الله بن عمر القواريري ثنا زائدة بن أبى الزناد ثنا عبيد الله بن العيزار. قال: خطبنا عمر ابن عبد العزيز بالشام على منبر من طين، فحمد الله وأثنى عليه، ثم تكلم بثلاث كلمات فقال: أيها الناس أصلحوا سرائركم تصلح علانيتكم، واعملوا لآخرتكم تكفوا دنياكم، واعلموا أن رجلا ليس بينه وبين آدم أب حي لمغرق له في الموت.

والسلام عليكم.




উবাইদুল্লাহ ইবনুল আইযার থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: উমার ইবনে আব্দুল আযীয (রাহিমাহুল্লাহ) শামে মাটির তৈরি একটি মিম্বরে দাঁড়িয়ে আমাদের উদ্দেশ্যে খুতবা (ভাষণ) দিলেন। তিনি আল্লাহর প্রশংসা ও স্তুতি জ্ঞাপন করলেন, এরপর তিনি তিনটি কথা বললেন: তিনি বললেন: হে লোকসকল, তোমরা তোমাদের ভেতরের (গোপন) বিষয়গুলো সংশোধন করো, তাহলে তোমাদের বাইরের (প্রকাশ্য) বিষয়গুলোও সংশোধিত হয়ে যাবে। আর তোমরা তোমাদের আখেরাতের জন্য কাজ করো, তাহলে তোমাদের দুনিয়ার প্রয়োজন পূর্ণ হয়ে যাবে। আর জেনে রেখো, এমন কোনো লোক নেই যার এবং আদম (আঃ)-এর মাঝে জীবিত কোনো পূর্বপুরুষ (পিতা) অবশিষ্ট আছে—তাই তাকে মৃত্যু গ্রাস করবেই। ওয়াসসালামু আলাইকুম।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7056)


• حدثنا عبد الله بن محمد ثنا إبراهيم بن شريك ثنا أحمد بن
عبد الله بن يونس ثنا فضيل بن عياض عن السري بن يحيى عن عمر بن عبد العزيز. قال: أصلحوا آخرتكم تصلح لكم دنياكم، وأصلحوا سرائركم تصلح لكم علانيتكم، والله إن عبدا - أو قال رجلا - ليس بينه وبين آدم إلا أب له قد مات لمغرق له في الموت.




উমর ইবনে আবদুল আযীয থেকে বর্ণিত, তিনি বললেন: তোমরা তোমাদের আখিরাতকে সংশোধন করো, তাহলে তোমাদের দুনিয়া সংশোধিত হবে। আর তোমাদের ভেতরের বিষয়গুলোকে সংশোধন করো, তাহলে তোমাদের প্রকাশ্য বিষয়গুলো সংশোধিত হবে। আল্লাহর শপথ! যে বান্দা—অথবা তিনি বললেন, যে ব্যক্তি—তাঁর এবং আদম (আঃ)-এর মাঝে কেবল তাঁর সেই মৃত পিতাই রয়েছে, সে যেন মৃত্যুর গভীরে নিমজ্জিত।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7057)


• حدثنا سليمان بن أحمد ثنا الحسن بن متوكل ثنا أبو الحسن المدائني.

قال: كتب عمر بن عبد العزيز إلى عمر بن عبيد الله بن عبد الله بن عتبة يعزيه على ابنه؛ أما بعد: فإنا قوم من أهل الآخرة أسكنا الدنيا، أموات أبناء أموات، والعجب لميت يكتب إلى ميت يعزيه عن ميت والسلام.




আবু আল-হাসান আল-মাদাইনি থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, উমর ইবনে আবদুল আযীয (রহ.) তাঁর পুত্র হারানোর জন্য উমর ইবনে উবাইদুল্লাহ ইবনে আব্দুল্লাহ ইবনে উতবার কাছে সমবেদনা জানিয়ে পত্র লিখলেন। অতঃপর (আমি বলছি): নিশ্চয়ই আমরা হলাম আখিরাতের অধিবাসী, যাকে দুনিয়ায় বসবাস করানো হয়েছে। আমরা মৃতদের সন্তান, আমরাও মৃত। আর আশ্চর্যের বিষয় হলো, এক মৃত আরেক মৃতকে সমবেদনা জানিয়ে পত্র লিখছে এক মৃত ব্যক্তির জন্য। ওয়াসসালাম।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7058)


• حدثنا أبو محمد بن حيان ثنا علي بن رستم ثنا عبد الرحمن بن عمر ثنا أبو الجراح حدثني محمد الكوفي. قال: شهدت عمر بن عبد العزيز يخطب، فحمد الله وأثنى عليه ثم قال: أيها الناس إن الله تعالى خلق خلقه ثم أرقدهم، ثم يبعثهم من رقدتهم، فإما إلى جنة وإما إلى نار، والله إن كنا مصدقين بهذا إنا لحمقى، وإن كنا مكذبين بهذا إنا لهلكى ثم نزل.




মুহাম্মদ আল-কূফী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি উমার ইবনু আব্দুল আযীযকে খুতবা দিতে দেখেছি। তিনি আল্লাহর প্রশংসা করলেন এবং তাঁর গুণগান করলেন, অতঃপর বললেন: হে লোকসকল! নিশ্চয় আল্লাহ তাআলা তাঁর সৃষ্টিকে সৃষ্টি করেছেন, অতঃপর তাদের ঘুম পাড়িয়েছেন (মৃত্যু দিয়েছেন), এরপর তাদের এই ঘুম থেকে আবার পুনরুত্থিত করবেন। অতঃপর তারা হয় জান্নাতের দিকে, না হয় জাহান্নামের দিকে যাবে। আল্লাহর কসম! যদি আমরা এই বিষয়ে বিশ্বাসী হয়ে থাকি, তবে (আমাদের প্রস্তুতি দেখে) আমরা অবশ্যই নির্বোধ, আর যদি আমরা এই বিষয়ে অবিশ্বাস করে থাকি, তবে আমরা অবশ্যই ধ্বংসপ্রাপ্ত। অতঃপর তিনি (মিম্বার থেকে) নেমে গেলেন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7059)


• حدثنا أبي ثنا أبو الحسن بن أبان ثنا أبو بكر بن عبيد ثنا إسحاق بن إسماعيل ثنا يحيى بن أبي بكر ثنا عبد الله بن المفضل التميمي. قال: آخر خطبة خطبها عمر بن عبد العزيز أن صعد المنبر فحمد الله وأثنى عليه ثم قال: أما بعد؛ فإن ما في أيديكم أسلاب الهالكين، وسيتركها الباقون كما تركها الماضون، ألا ترون أنكم في كل يوم وليلة تشيعون غاديا أو رائحا إلى الله تعالى، وتضعونه فى صدع من الأرض ثم في بطن الصدع، غير ممهد ولا موسد، قد خلع الأسلاب، وفارق الأحباب؛ وأسكن التراب، وواجه الحساب، فقير إلى ما قدم أمامه، غني عما ترك بعده. أما والله إني لأقول لكم هذا وما أعرف من أحد من الناس مثل ما أعرف من نفسي. قال: ثم قال بطرف ثوبه على عينه فبكى ثم نزل، فما خرج حتى أخرج إلى حفرته.




আবদুল্লাহ ইবনুল মুফাদদাল আত-তামিমী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: উমর ইবনু আব্দুল আযীযের শেষ খুতবা ছিল এই যে, তিনি মিম্বরে আরোহণ করলেন, আল্লাহর প্রশংসা করলেন ও গুণগান করলেন, অতঃপর বললেন: "আমা বা'দ (অতএব): নিশ্চয় তোমাদের হাতে যা কিছু আছে, তা ধ্বংসশীলদের সম্পদ। আর যারা অবশিষ্ট থাকবে, তারাও এগুলো ছেড়ে যাবে, যেমনভাবে পূর্ববর্তীরা ছেড়ে গেছে। তোমরা কি দেখো না যে, তোমরা প্রতিদিন ও প্রতি রাতে সকালে কিংবা সন্ধ্যায় কাউকে মহান আল্লাহর উদ্দেশ্যে বিদায় জানাচ্ছো এবং তাকে জমিনের এক ফাটলের মধ্যে রাখছো, অতঃপর সেই ফাটলের গভীরে রাখছো? যেখানে নেই কোনো মসৃণ বিছানা বা বালিশ। সে (মৃত ব্যক্তি) তার পোশাক খুলে ফেলেছে, প্রিয়জনদের ছেড়ে গেছে, মাটিতে বসবাস শুরু করেছে এবং হিসাবের মুখোমুখি হয়েছে। সে তার সামনে যা পাঠিয়েছে তার মুখাপেক্ষী, আর যা পেছনে রেখে এসেছে তা থেকে অমুখাপেক্ষী। আল্লাহর কসম! আমি তোমাদেরকে এই কথা বলছি, আর আমি মানুষের মধ্যে এমন কাউকে চিনি না, যার ব্যাপারে আমি আমার নিজের চেয়ে বেশি জানি।" বর্ণনাকারী বলেন: অতঃপর তিনি তার কাপড়ের কোণা দিয়ে চোখ মুছলেন এবং কাঁদলেন। তারপর (মিম্বর থেকে) নেমে গেলেন। এরপর তাঁকে তাঁর কবরে নিয়ে যাওয়া না পর্যন্ত তিনি (গৃহ থেকে) আর বের হননি।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7060)


• حدثنا عبد الله بن محمد ثنا أبو بكر بن مكرم ثنا منصور بن أبي مزاحم ثنا شعيب بن صفوان عن عيسى: أن عمر بن عبد العزيز كتب إلى رجل؛ أما بعد: فإني أوصيك
بتقوى الله، والانشمار لما استطعت من مالك وما رزقك الله إلى دار قرارك، فكأنك والله ذقت الموت وعاينت ما بعده بتصريف الليل والنهار فإنهما سريعان في طي الأجل ونقص العمر، لم يفتهما شيء إلا أفنياه، ولا زمن مرا به إلا أبلياه، مستعدان لمن بقي بمثل الذي أصاب من قد مضى، فنستغفر الله لسيئ أعمالنا، ونعوذ به من مقته إيانا على ما نعظ به مما نقصر عنه.




উমর ইবন আব্দুল আযীয (রাহিমাহুল্লাহ) থেকে বর্ণিত, তিনি এক ব্যক্তিকে পত্র লিখেছিলেন। (পত্রটি ছিল): "অতঃপর, আমি তোমাকে আল্লাহ্‌র তাকওয়া অবলম্বনের উপদেশ দিচ্ছি, এবং তোমার স্থায়ী নিবাসের উদ্দেশ্যে তোমার সম্পদ ও আল্লাহ্‌ তোমাকে যা রিযিক দিয়েছেন, তা থেকে যতটুকু পারো, দ্রুত আগে পাঠিয়ে দাও। আল্লাহ্‌র শপথ, দিন ও রাতের আবর্তনের মাধ্যমে যেন তুমি মৃত্যু আস্বাদন করেছ এবং এর পরবর্তী বিষয়গুলো স্বচক্ষে দেখেছ। কেননা তারা (দিন ও রাত) দ্রুত আয়ুষ্কাল গুটিয়ে নেয় এবং জীবনকে সংক্ষিপ্ত করে দেয়। কোনো কিছুই তাদের (হাত) থেকে রক্ষা পায় না, বরং তারা তাকে ধ্বংস করে দেয়। আর তারা যে সময়ের ওপর দিয়েই অতিবাহিত হয়, তাকেই তারা পুরনো করে ফেলে। যারা এখনো অবশিষ্ট আছে, তাদের জন্য তারা সেভাবেই প্রস্তুত, যেভাবে তারা পূর্ববর্তীদের আক্রমণ করেছিল। সুতরাং আমরা আমাদের মন্দ কর্মের জন্য আল্লাহ্‌র কাছে ক্ষমা চাই, এবং যেসব বিষয়ে আমরা উপদেশ দেই কিন্তু নিজেরাই তা থেকে পিছিয়ে থাকি, সে কারণে যেন তিনি আমাদের ওপর ক্রুদ্ধ না হন, তা থেকে আমরা তাঁর কাছে আশ্রয় চাই।"