হাদীস বিএন


হিলইয়াতুল আওলিয়া





হিলইয়াতুল আওলিয়া (7501)


• حدثنا سليمان بن أحمد ثنا أحمد بن يحيى بن خالد بن حيان الرقي ثنا أحمد بن عبد الله بن محمد بن المغيرة ثنا مجاشع بن عمرو عن ثور بن يزيد عن خالد ابن معدان عن كعب. قال: إن لله ملكا يقال له صنديائيل، البحار كلها في نقرة إبهامه.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন: নিশ্চয় আল্লাহর একজন ফেরেশতা আছেন, যাঁকে সানদিয়াইল বলা হয়। সকল সমুদ্র তাঁর বৃদ্ধাঙ্গুলির গর্তে (বা খাজটিতে) রয়েছে।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7502)


• حدثنا عبد الله بن محمد بن جعفر ثنا محمد بن عبد الله بن رسته ثنا قطن ابن نسير ثنا جعفر بن سليمان ثنا أبو عمران الجوني عن عبد الله بن رباح الأنصاري. قال: قال كعب: اجتمع ثلاثة نفر من عباد بني إسرائيل فاجتمعوا في أرض فلاة مع كل رجل منهم اسم من أسماء الله تعالى. فقال أحدهم: سلوني فأدع الله لكم بما شئتم قالوا نسألك أن تدعو الله تعالى أن يظهر لنا عينا سائحة بهذا المكان ورياضا خضرا وعبقريا قال فدعا الله فإذا عين سائحة ورياض خضر وعبقرى.
ثم قال أحدهم: سلوني فأدع الله لكم بما شئتم فقالوا نسألك أن تدعو الله أن يطعمنا من ثمار الجنة فدعا الله فنزلت عليهم بسرة فأكلوا منها لا تغلب إلا أكلوا منها لونا ثم رفعت. ثم قال أحدهم: سلوني فأدع الله لكم بما شئتم قالوا نسألك أن تدعو الله أن ينزل علينا المائدة التى أنزلها على عيسى بن مريم قال فدعا فأنزلت فقضوا منها حاجتهم ثم رفعت: قالوا قد استجيب دعاؤنا وأعطينا سؤلنا فتعالوا يذكر كل رجل منا أعظم ذنب عمله قط، فقال أحدهم:

كنا معشر بني إسرائيل لا يصيب رجلا منا بول إلا قطعه فأصابني مرة بول فلم أبالغ في قطعه ولم أدعه. فهذا أعظم ذنب عملته قط، وقال الآخر: كنت أمشي أنا وصاحب لي في طريق ففرقت بيننا شجرة فخرجت عليه ففزع مني فقال الله بيني وبينك فهذا أعظم ذنب عملته قط. وقال الآخر: أما أنا فكانت لي والله والدة فجاءت مرة تدعوني فدعتني من قبل سفالة الريح فلم أسمع فغضبت فجعلت ترميني بالحجارة فجئت بالعصا لأجلس بين يديها فتضربني حتى ترضى فلما رأت العصا معي فزعت فهربت منى فتلقتها شجرة فشجتها في وجهها، فهذا أعظم ذنب عملته قط.




আব্দুল্লাহ ইবনু রাবাহ আল-আনসারী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: কা'ব (রহ.) বলেছেন: বনী ইসরাঈলের ইবাদতকারী তিনজন লোক একসাথে একটি জনশূন্য প্রান্তরে সমবেত হলেন। তাদের প্রত্যেকের কাছে আল্লাহ তাআলার আসমাউল হুসনার একটি করে নাম ছিল। তাদের একজন বলল: তোমরা আমার কাছে চাও, আমি তোমাদের জন্য আল্লাহ্‌র কাছে যা ইচ্ছা তা প্রার্থনা করব। তারা বলল: আমরা আপনাকে অনুরোধ করছি, আপনি আল্লাহ্‌ তাআলার কাছে দুআ করুন যেন তিনি এই স্থানে আমাদের জন্য একটি প্রবাহমান ঝর্ণা, সবুজ বাগান এবং চমৎকার আসন (বা কার্পেট) প্রকাশ করে দেন। সে তখন আল্লাহ্‌র কাছে দুআ করল। সাথে সাথে সেখানে একটি প্রবাহমান ঝর্ণা, সবুজ বাগান ও চমৎকার আসন প্রকাশ পেল।

অতঃপর তাদের আরেকজন বলল: তোমরা আমার কাছে চাও, আমি তোমাদের জন্য আল্লাহ্‌র কাছে যা ইচ্ছা তা প্রার্থনা করব। তারা বলল: আমরা আপনাকে অনুরোধ করছি, আপনি আল্লাহ্‌র কাছে দুআ করুন যেন তিনি আমাদেরকে জান্নাতের ফল খাওয়ান। সে আল্লাহ্‌র কাছে দুআ করল। তখন তাদের উপর একটি (জান্নাতী) ফল অবতীর্ণ হলো। তারা তা থেকে খেলো এবং তার স্বাদ এমন ছিল যে, তারা যখনই ইচ্ছা করতো, সেটিকে বিভিন্ন স্বাদের পেত। এরপর তা উঠিয়ে নেওয়া হলো।

এরপর তাদের আরেকজন বলল: তোমরা আমার কাছে চাও, আমি তোমাদের জন্য আল্লাহ্‌র কাছে যা ইচ্ছা তা প্রার্থনা করব। তারা বলল: আমরা আপনাকে অনুরোধ করছি, আপনি আল্লাহ্‌র কাছে দুআ করুন যেন তিনি আমাদের উপর সেই দস্তরখান (খাদ্য ভর্তি পাত্র) নাযিল করেন যা তিনি ঈসা ইবনু মারইয়াম (আঃ)-এর উপর নাযিল করেছিলেন। সে দুআ করল, ফলে দস্তরখান নাযিল হলো। তারা তা থেকে তাদের প্রয়োজন মিটিয়ে নিল। এরপর সেটি উঠিয়ে নেওয়া হলো।

তারা বলল: আমাদের দুআ কবুল করা হয়েছে এবং আমাদের চাওয়া পূর্ণ করা হয়েছে। এসো, এখন আমাদের প্রত্যেকে তার জীবনের সবচেয়ে বড় যে গুনাহ করেছে, তা বর্ণনা করি। অতঃপর তাদের একজন বলল:

আমরা বনী ইসরাঈল গোষ্ঠীর মানুষ, আমাদের কারো গায়ে প্রস্রাব লাগলে আমরা তা কেটে ফেলতাম (কাপড় বা চামড়া)। একবার আমার গায়ে প্রস্রাব লাগলো, কিন্তু আমি তা কাটার ক্ষেত্রে বাড়াবাড়ি করিনি এবং তা বাদও দেইনি। এটাই আমার জীবনের সবচেয়ে বড় গুনাহ।

অন্যজন বলল: আমি এবং আমার এক সঙ্গী পথ চলছিলাম। একটি গাছ আমাদের মাঝে এসে বিচ্ছেদ ঘটাল। আমি হঠাৎ তার সামনে বের হলাম। সে আমাকে দেখে ভয় পেল এবং বলল, 'আমার এবং তোমার মাঝে আল্লাহ আছেন!' এটাই আমার জীবনের সবচেয়ে বড় গুনাহ।

আর অন্যজন বলল: আল্লাহর কসম, আমার একজন মা ছিলেন। একবার তিনি আমাকে ডাকতে এলেন। বাতাস নিম্নগামী থাকার কারণে আমি শুনতে পাইনি। তিনি রাগান্বিত হলেন এবং আমাকে পাথর মারতে লাগলেন। আমি লাঠি নিয়ে এলাম যেন আমি তার সামনে বসে যাই আর তিনি আমাকে মারতে থাকেন, যতক্ষণ না তিনি সন্তুষ্ট হন। যখন তিনি আমার হাতে লাঠি দেখলেন, তিনি ভয় পেয়ে গেলেন এবং আমার কাছ থেকে পালিয়ে গেলেন। পালানোর সময় একটি গাছের সাথে ধাক্কা লেগে তার মুখমণ্ডল জখম হলো। এটাই আমার জীবনের সবচেয়ে বড় গুনাহ।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7503)


• حدثنا عبد الله بن محمد ثنا أحمد بن عبد الله ثنا سلمة بن شبيب ثنا أبو المغيرة ثنا أبو بكر بن أبي مريم ثنا العلاء بن سفيان عن كعب. قال: إن الله تعالى يقول تقض الأبناء دين الآباء إني لآخذ بالرجل من أهل معصيتي القرن بعد القرن لثلاثة قرون، وإنى لا حفظ الرجل من أهل طاعتي القرن بعد القرن لعشرة قرون.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নিশ্চয় আল্লাহ তাআলা বলেন: সন্তানেরা পিতার ঋণ পরিশোধ করে। আমি আমার অবাধ্যদের মধ্য থেকে কোনো ব্যক্তিকে প্রজন্ম ধরে প্রজন্ম তিন প্রজন্ম পর্যন্ত পাকড়াও করি। আর আমি আমার অনুগতদের মধ্য থেকে কোনো ব্যক্তিকে প্রজন্ম ধরে প্রজন্ম দশ প্রজন্ম পর্যন্ত সংরক্ষণ করি।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7504)


• حدثنا أبو محمد بن حيان ثنا أحمد بن روح ثنا زكريا بن يحيى المدائني ثنا علي بن عاصم عن الجريري عن أبي عطاء عن كعب. قال: مر عيسى بجمجمة بيضاء فقال يا رب هذه الجمجمة أحيها، فأوحى الله تعالى: أن أشح بوجهك قال ففعل ثم حول وجهه فإذا شيخ متكئ على كارة من بقل فقال يا عبد الله شل علي حتى ألحق بالسوق. قال: وما شأنك؟ قال قلعت هذا البقل من هذه المبقلة وغسلته في هذا النهر وغلبتني عيني. قال: وخيل إليه ما كان فيه قال فسأله عيسى
عليه السلام عن القوم الذي هو منهم فإذا بين المسيح وأولئك خمسمائة عام.




কা'ব থেকে বর্ণিত, ঈসা (আঃ) একটি সাদা খুলির পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন। তিনি বললেন, ‘হে আমার রব, এই খুলিটিকে জীবিত করুন।’ তখন আল্লাহ তাআলা ওহী করলেন, ‘তুমি তোমার চেহারা অন্য দিকে ফিরিয়ে নাও।’ বর্ণনাকারী বলেন, তিনি তাই করলেন। অতঃপর যখন তিনি মুখ ফিরালেন, তখন তিনি একজন বৃদ্ধ লোককে সবজির বোঝার উপর হেলান দিয়ে বসে থাকতে দেখলেন। সে বলল, ‘হে আল্লাহর বান্দা, আমাকে উঠিয়ে ধরুন যেন আমি বাজারে পৌঁছাতে পারি।’ ঈসা (আঃ) বললেন, ‘আপনার অবস্থা কী?’ সে বলল, ‘আমি এই সবজির বাগান থেকে এই সবজি তুলেছি এবং এই নদীতে তা ধুয়েছি, আর আমার চোখ আমাকে কাবু করে ফেলেছে (আমি ঘুমিয়ে পড়েছিলাম)।’ বর্ণনাকারী বলেন, তার (ঈসার) কাছে তার অবস্থা প্রকাশ করা হলো। তখন ঈসা (আঃ) তাকে তার সম্প্রদায় সম্পর্কে জিজ্ঞেস করলেন। তখন দেখা গেল যে, মাসীহ (আঃ) এবং সেই লোকের সম্প্রদায়ের মধ্যে পাঁচশত বছরের ব্যবধান ছিল।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7505)


• حدثنا أحمد بن السندي ثنا الحسن بن علوية القطان ثنا إسماعيل بن عيسى العطار ثنا إسحاق بن بشر أبو حذيفة ثنا محمد بن عبد الله البصري وعامر بن عبد الله شيخ من أهل نهر تيري يرفعانه إلى كعب. قالا قال كعب الأحبار: إن عيسى عليه السلام مر ذات يوم بوادي القيامة - يعني الصخرة - وهو عشية يوم الجمعة عند العصر فإذا هو بجمجمة بيضاء نخرة قد مات صاحبها منذ أربع وتسعين سنة، فوقف عليها متعجبا منها وقال يا رب ائذن لهذه الجمجمة أن تكلمني بلسان حي وتخبرني ماذا لقيت من العذاب وكم أتى عليها منذ ماتت وماذا عاينت وبأي ميتة ماتت وماذا كانت تعبد؟ قال: فأتاه نداء من السماء فقال يا روح الله وكلمته سلها فإنها ستخبرك فصلى عيسى ركعتين ثم دنا منها فوضع يده عليها فقال عيسى بسم الله وبالله! فقالت الجمجمة خير الأسماء دعوت وبالذكر استعنت. فقال عيسى: أيتها الجمجمة النخرة قالت لبيك وسعديك سلني عما بدا لك. قال: كم أتى عليك منذ مت؟ قالت لا نفس تعد الحياة ولا روح تحصي السنين فأتاه نداء أنها قد ماتت منذ أربع وتسعين سنة، فسألها. قال:

فبماذا مت؟ قالت: كنت جالسا ذات يوم إذ أتاني مثل السهم من السماء فدخل جوفي مثل الحريق وكان مثلى كمثل رجل دخل الحمام فأصابه حره فهو يلتمس الخروج مخافة على نفسه أن تهلك، قال فأتاني ملك الموت ومعه أعوانه ووجوههم مثل وجوه الكلاب بادية أنيابهم، زرق أعينهم كلهبان النار، بأيدهم المقامع يضربون وجهي ودبري، فانتزعوا روحي فكشطوها عني ثم وضعه ملك الموت على جمرة من جمر جهنم ثم لفه في قطعة مسح من مسوح جهنم فرفعوا روحي إلى السماء فمنعتهم الملائكة أن يدخلوا وأغلقت الأبواب دونه فأتاني نداء أن ردوا هذه النفس الخاطئة إلى مثواها ومأواها. فقال لها عيسى عليه السلام فأي شيء كان أشد عليك ظلمة القبر وضيقه أم عذاب جهنم؟ فقالت:

يا روح الله إذا انتزع الروح من الجسد فليس في العين نور يعرف الظلمة والضوء وليس للقلب عقل فيعرف الضيق والسعة، ولكن أخبرك أنه لما رد روحي
فاحتملت إلى القبر دخل علي ملكان عظيمان لا يوصفان، بيد كل واحد منهما مقمعة من حديد، فأقعداني فضرباني ضربة ظننت: أن السموات السبع وقعن على الأرض، ودفعا إلي لوحا وقالا لي: اكتب كل عمل عملته. قال: فكتبته فلما كتبت الكتاب فتحوا لي بابا إلى جهنم فجاءت نار فامتلأ قبري وأقبلت حيات كأمثال الذئاب أعناقهن كأعناق البخت فنهشوا لحمي، ورضوا عظمي، فدخل علي ملك بيده مقمعة في رأس المقمعة ثعبان لا يوصف وفي أصله عقارب سود كأمثال البغال الدهم، على تلك المفمعة ثلاثمائة وستون غصنا على كل غصن ثلاثمائة وستون لونا من نار، فضربوني بها فاشتعل النيران في جسدي وأقبل إلي الثعبان والعقارب إذ أتاني نداء فقال: علي بهذه النفس الخاطئة فتعلق بي ملائكة لا توصف صفة ألوانهم غير أن أنيابهم كالصياصي وأعينهم كالبرق وأصابعهم كالقرون فانتهوا بي إلى ملك قاعد على كرسي له فقال اذهبوا بهذه النفس الظالمة إلى جهنم مثواها، فانطلق بي حتى انتهوا بي إلى أول باب من أبواب جهنم فإذا أنا بولجة ضيقة وريح شديدة وإذا أنا بأصوات الرعد القاصف وقواصف شديدة ونار ليست كناركم هذه وهي نار سوداء مظلمة يضعف حرها على حر ناركم هذه ستين جزءا، ثم انطلق بي إلى الباب الثاني فإذا نار تأكل النار الأولى وهى أشد منها حرا ستين ضعفا، ثم أدخلت الباب الثالث فإذا أنا بنار هي أشد حرا من النار الأولى والثانية ستين جزءا وهي تأكل النار الثانية والحجارة، ثم أدخلت الباب الرابع فإذا أنا بنار تأكل النار الثالثة وهي أشد حرا من النار الثالثة ستين ضعفا. فإذا أنا بشجرة يتساقط منها حجارة سود حروفها نار وإذا قوم كلفوا أكل تلك الحجارة. فقلت: من هؤلاء؟ قال الذين يأكلون أموال اليتامى ظلما وعدوانا، ثم انطلق بي إلى الباب الخامس فإذا أنا بنار وظلمة وإذا تلك النار أشد حرا من الأبواب كلها ستين جزءا وإذا أنا فيها بشجرة عليها أمثال رءوس الشياطين فيها ديدان طوال طول الدودة منها مائة ذراع سود وإذا رجال كلفوا أكلها. قلت: ما هذه؟ قالوا شجرة الزقوم قلت فمن هؤلاء؟ قالوا أكلة الربا، ثم انطلق بي إلى الباب السادس فإذا أنا بنار
تضعف على ما رأيت ستين ضعفا وظلمة وإذا بها بئر لا يعرف قعرها وإذا فيها قوم يسيل من وجوههم الصديد لو وقعت منها قطرة على الأرض لملأت أهل الأرض نتنا وإذا فيها رياح يغلب بردها حر النار. قلت: ما هذا؟ قالوا الزمهرير. قلت من هؤلاء؟ قالوا الزناة، ثم انطلق بي إلى رجل قاعد على كرسي له في النار وحوله ملائكة قيام بأيديهم مقامع من نار. فقال: ما كانت تعبد هذه؟ قالوا كانت تعبد ثورا من دون الله، قال انطلقوا به إلى أصحابه. قال عيسى عليه السلام: فكيف كنتم تعبدون الثور؟ قالت كنا نعبد ثورا نسجد له ونطعمه الحمص ونسقيه العسل المصفى. قال عيسى عليه السلام: فمن كان نبيكم قالت إلياس قالت فانطلقوا بي حتى أدخلت الباب السابع فإذا فيه ثلاثمائة سرادق من نار فى كل سرادق ثلاثمائة قصر من نار في كل قصر ثلاثمائة دار من نار في كل دار ثلاثمائة بيت من نار في كل بيت ثلاثمائة لون من العذاب. فيها الحيات والعقارب والافاعى فألقيت فيها مغلولا مع أصحابي تحرقنا النار وتأكل بطوننا الأفاعي وتنهشنا الحيات وتضربنا الملائكة بالمقامع. فإنا منذ أربع وتسعين سنة في العذاب لا يخفف عني طرفة عين إلا أن الله تعالى يخفف عنا يوم الجمعة ويوم الخميس فنعلم الجمعة والخميس بالتخفيف عنا فبينا أنا كذلك إذ أتاني نداء أن أخرجوا هذه النفس الخبيثة إلى جمجمتها الملقاة بوادي القيامة فإن روح الله قد شفع لها، فأخرجت فأسألك يا روح الله وكلمته أن تسأل ربك أن يعفو عني وأن يشفعك في قال فصلى ركعتين فدعا ربه تعالى فقال يا إلهي وخالقي ابعث لي هذه النفس الخاطئة قال فبعثها الله عز وجل فلم تزل مع عيسى عليه السلام حتى رفع عيسى عليه السلام ثم قبضه الله بعد ذلك.




কা'ব আল-আহবার থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন:

নিশ্চয় ঈসা (আঃ) একদিন কিয়ামত উপত্যকার (অর্থাৎ সাখরা বা প্রস্তরখণ্ডের) পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন। সেটি ছিল জুম্মার দিনের বিকেল, আসরের সময়। তিনি সেখানে একটি সাদা, জীর্ণ খুলি দেখতে পেলেন, যার মালিক চুয়াল্লিশ বছর আগে মারা গেছে। তিনি এর কাছে দাঁড়িয়ে অবাক হয়ে বললেন, "হে আমার রব! এই খুলিটিকে অনুমতি দিন যেন এটি একটি জীবন্ত জিহ্বা দ্বারা আমার সাথে কথা বলতে পারে এবং আমাকে জানাতে পারে যে সে কী কী আযাব ভোগ করেছে, কত বছর আগে মারা গেছে, কী কী প্রত্যক্ষ করেছে, কীভাবে মারা গেছে এবং কিসের ইবাদত করত?"

তিনি বলেন: তখন আসমান থেকে একটি আহ্বান এলো, "হে আল্লাহর রূহ ও তাঁর বাণী! আপনি তাকে জিজ্ঞাসা করুন, সে আপনাকে জানাবে।" অতঃপর ঈসা (আঃ) দু'রাকাত সালাত আদায় করলেন, এরপর খুলিটির কাছে গিয়ে এর উপর হাত রাখলেন। ঈসা (আঃ) বললেন, "বিসমিল্লাহি ওয়া বিল্লাহ!" (আল্লাহর নামে এবং আল্লাহর সাহায্যে!) খুলিটি বলল, "আপনি উত্তম নাম ধরে ডেকেছেন এবং যিকিরের মাধ্যমে সাহায্য চেয়েছেন।" ঈসা (আঃ) বললেন, "হে জীর্ণ খুলি!" খুলিটি বলল, "আমি আপনার সেবায় হাজির, আপনার যা ইচ্ছা জিজ্ঞাসা করুন।"

তিনি জিজ্ঞেস করলেন, "তুমি মারা যাওয়ার পর কত বছর পার হয়েছে?" সেটি বলল, "কোনো আত্মা জীবন গণনা করতে পারে না এবং কোনো রূহ বছর হিসাব করতে পারে না।" তখন একটি আহ্বান এলো যে এটি চুয়াল্লিশ বছর আগে মারা গেছে। তিনি তাকে জিজ্ঞাসা করলেন, "কীভাবে তুমি মারা গেলে?"

সেটি বলল: আমি একদিন বসে ছিলাম, তখন আসমান থেকে তীরের মতো কিছু আমার দিকে এলো এবং আগুনের মতো হয়ে আমার পেটে প্রবেশ করল। আমার অবস্থা ছিল এমন, যেন একজন লোক হাম্মামে (গরম পানির স্থানে) প্রবেশ করেছে এবং তার তাপ তাকে কাবু করেছে, আর সে নিজেকে ধ্বংসের হাত থেকে বাঁচাতে বের হওয়ার পথ খুঁজছে। তিনি বলেন: তখন আমার কাছে মালাকুল মউত (মৃত্যুর ফেরেশতা) এলেন এবং তার সাথে তার সাহায্যকারীরাও ছিল। তাদের মুখগুলো ছিল কুকুরের মুখের মতো, তাদের দাঁত বেরিয়ে ছিল, তাদের চোখগুলো ছিল আগুনের শিখার মতো নীল। তাদের হাতে ছিল লোহালণ্ঠন, যা দিয়ে তারা আমার মুখমণ্ডল ও পিঠে আঘাত করছিল। তারা আমার রূহ বের করে নিয়ে আমার কাছ থেকে তা টেনে হিঁচড়ে নিল। এরপর মালাকুল মউত আমার রূহকে জাহান্নামের আগুনের একটি জ্বলন্ত অঙ্গারের উপর রাখলেন, তারপর তাকে জাহান্নামের মোটা চটের কাপড়ে মুড়িয়ে দিলেন। তারা আমার রূহকে আসমানের দিকে উঠিয়ে নিল, কিন্তু ফেরেশতারা তাদের প্রবেশ করতে বাধা দিল এবং দরজাগুলো তার জন্য বন্ধ করে দেওয়া হলো। তখন আমার কাছে আহ্বান এলো, "এই পাপিষ্ঠ আত্মাকে তার আশ্রয় ও ঠিকানায় ফিরিয়ে দাও।"

ঈসা (আঃ) তাকে জিজ্ঞেস করলেন, "তোমার জন্য সবচেয়ে কঠিন ছিল কোনটি—কবরের অন্ধকার ও সংকীর্ণতা, নাকি জাহান্নামের শাস্তি?"

সেটি বলল: হে আল্লাহর রূহ! যখন রূহ শরীর থেকে বের করে নেওয়া হয়, তখন চোখে এমন কোনো আলো থাকে না যা অন্ধকার ও আলো চেনে, আর হৃদয়ে এমন কোনো বুদ্ধি থাকে না যা সংকীর্ণতা ও প্রশস্ততা জানে। তবে আমি আপনাকে জানাচ্ছি যে, যখন আমার রূহ ফিরিয়ে দেওয়া হলো এবং আমাকে কবরে বহন করে নিয়ে যাওয়া হলো, তখন দুজন বিশাল ফেরেশতা আমার কাছে প্রবেশ করলেন যাদের বর্ণনা দেওয়া অসম্ভব। তাদের প্রত্যেকের হাতে ছিল লোহার একটি লণ্ঠন। তারা আমাকে বসালেন এবং এমন একটি আঘাত করলেন যে আমি মনে করলাম সাত আসমান বুঝি যমীনের উপর ভেঙে পড়েছে। তারা আমার হাতে একটি ফলক দিলেন এবং বললেন, "তুমি যা যা কাজ করেছ, সব লেখো।" তিনি বলেন: আমি তা লিখলাম। যখন আমি লেখা শেষ করলাম, তারা আমার জন্য জাহান্নামের একটি দরজা খুলে দিলেন। তখন আগুন এলো এবং আমার কবর পূর্ণ করে ফেলল। এরপর নেকড়ের মতো সাপ এলো, যাদের ঘাড় উটের ঘাড়ের মতো মোটা, তারা আমার গোশত ছিঁড়ে খেতে লাগল এবং আমার হাড় ভেঙে গুঁড়ো করে দিল।

এরপর একজন ফেরেশতা আমার কাছে এলেন, তার হাতে একটি লণ্ঠন। লণ্ঠনের মাথায় একটি অবর্ণনীয় সাপ এবং এর গোড়ায় কালো খচ্চরের মতো বিচ্ছু। সেই লণ্ঠনে তিনশো ষাটটি শাখা ছিল, আর প্রতিটি শাখায় ছিল আগুনের তিনশো ষাট ধরনের রঙ। তারা আমাকে তা দিয়ে আঘাত করল, ফলে আমার শরীরে আগুন জ্বলে উঠল। এরপর সাপ ও বিচ্ছুগুলো আমার দিকে এগিয়ে এলো, যখন হঠাৎ একটি আহ্বান এলো, "এই পাপিষ্ঠ আত্মাকে নিয়ে আসো!" তখন অবর্ণনীয় চেহারার কিছু ফেরেশতা আমাকে ধরে ফেলল, যদিও তাদের রং কেমন ছিল তা বলা অসম্ভব, তবে তাদের দাঁতগুলো ছিল শস্য পেষার পাথরের মতো, তাদের চোখগুলো বিদ্যুতের মতো এবং তাদের আঙ্গুলগুলো ছিল শিং-এর মতো। তারা আমাকে নিয়ে গেল একজন ফেরেশতার কাছে, যিনি একটি চেয়ারে বসেছিলেন। তিনি বললেন, "এই যালিম আত্মাকে এর ঠিকানা জাহান্নামের দিকে নিয়ে যাও।"

অতঃপর তারা আমাকে নিয়ে গেল জাহান্নামের প্রথম দরজার দিকে। আমি দেখলাম একটি সংকীর্ণ পথ এবং তীব্র বাতাস। সেখানে মেঘের প্রচণ্ড গর্জনের মতো শব্দ এবং তীব্র বজ্রপাত। সেখানে এমন আগুন, যা তোমাদের আগুনের মতো নয়; এটি কালো ও অন্ধকার আগুন, যার উত্তাপ তোমাদের আগুনের উত্তাপের ষাট গুণ বেশি। এরপর তারা আমাকে দ্বিতীয় দরজায় নিয়ে গেল। আমি দেখলাম এমন আগুন যা প্রথম আগুনকে গ্রাস করছে এবং এটি তার চেয়ে ষাট গুণ বেশি উত্তপ্ত। এরপর আমাকে তৃতীয় দরজায় প্রবেশ করানো হলো। আমি দেখলাম এমন আগুন যা প্রথম ও দ্বিতীয় আগুনের চেয়ে ষাট গুণ বেশি উত্তপ্ত এবং এটি দ্বিতীয় আগুন ও পাথর গ্রাস করছে। এরপর আমাকে চতুর্থ দরজায় প্রবেশ করানো হলো। আমি দেখলাম এমন আগুন যা তৃতীয় আগুনকে গ্রাস করছে এবং এটি তৃতীয় আগুনের চেয়ে ষাট গুণ বেশি উত্তপ্ত। আমি সেখানে একটি গাছ দেখতে পেলাম, যা থেকে কালো পাথর পড়ছিল, যার ধারগুলো ছিল আগুনের। আর কিছু লোক নিয়োজিত ছিল সেই পাথরগুলো খাওয়ার জন্য। আমি জিজ্ঞেস করলাম, "এরা কারা?" বলা হলো, "যারা অন্যায় ও বাড়াবাড়ির মাধ্যমে ইয়াতীমদের সম্পদ ভক্ষণ করত।"

এরপর তারা আমাকে পঞ্চম দরজায় নিয়ে গেল। আমি দেখলাম আগুন ও অন্ধকার। আর সেই আগুন অন্য দরজাগুলোর চেয়ে ষাট গুণ বেশি উত্তপ্ত। আমি সেখানে একটি গাছ দেখলাম, যার উপর শয়তানের মাথার মতো ফল ঝুলে আছে। তাতে ছিল লম্বা লম্বা পোকা, প্রতিটি পোকার দৈর্ঘ্য একশো হাত এবং সেগুলো ছিল কালো। কিছু পুরুষ নিয়োজিত ছিল সেগুলো খাওয়ার জন্য। আমি জিজ্ঞেস করলাম, "এটা কী?" তারা বলল, "এটা যাক্কুম গাছ।" আমি জিজ্ঞেস করলাম, "এরা কারা?" তারা বলল, "এরা সুদখোররা।"

এরপর তারা আমাকে ষষ্ঠ দরজায় নিয়ে গেল। আমি দেখলাম সেখানে যা দেখেছি তার চেয়ে ষাট গুণ বেশি তীব্র আগুন ও অন্ধকার। সেখানে একটি কূপ ছিল যার গভীরতা জানা যায় না। সেখানে কিছু লোক ছিল যাদের মুখ থেকে পুঁজ গলে পড়ছিল। যদি এর এক ফোঁটা পৃথিবীতে পড়ত, তবে পৃথিবীর সব লোককে দুর্গন্ধে পূর্ণ করে দিত। সেখানে এমন বাতাস ছিল যার শীতলতা আগুনের তাপকেও দমন করে। আমি জিজ্ঞেস করলাম, "এটা কী?" তারা বলল, "এটা যামহারীর (তীব্র ঠান্ডা)।" আমি জিজ্ঞেস করলাম, "এরা কারা?" তারা বলল, "এরা ব্যভিচারীরা।"

এরপর তারা আমাকে নিয়ে গেল একজন পুরুষের কাছে, যিনি আগুনে একটি চেয়ারে বসেছিলেন এবং তার চারপাশে ফেরেশতারা আগুনের লণ্ঠন হাতে দাঁড়িয়ে ছিল। তিনি বললেন, "এ কিসের ইবাদত করত?" তারা বলল, "এ আল্লাহকে ছাড়া একটি ষাঁড়ের ইবাদত করত।" তিনি বললেন, "একে এর সঙ্গীদের কাছে নিয়ে যাও।" ঈসা (আঃ) বললেন, "তোমরা কীভাবে ষাঁড়ের পূজা করতে?" সে বলল, "আমরা একটি ষাঁড়ের পূজা করতাম, তাকে সিজদা করতাম, তাকে বুট খাওয়াতাম এবং তাকে পরিশোধিত মধু পান করাতাম।" ঈসা (আঃ) জিজ্ঞেস করলেন, "তোমাদের নবী কে ছিলেন?" সে বলল, "ইলিয়াস (আঃ)।"

সে বলল: তারা আমাকে নিয়ে গেল, অবশেষে আমাকে সপ্তম দরজায় প্রবেশ করানো হলো। সেখানে আগুনের তিনশোটি শামিয়ানা ছিল। প্রতিটি শামিয়ানায় আগুনের তিনশোটি প্রাসাদ, প্রতিটি প্রাসাদে আগুনের তিনশোটি ঘর, প্রতিটি ঘরে আগুনের তিনশোটি কক্ষ, আর প্রতিটি কক্ষে তিনশো ধরনের আযাব। সেখানে ছিল সাপ, বিচ্ছু ও বিষধর সর্প। আমাকে আমার সঙ্গীদের সাথে শেকল পরিয়ে সেখানে নিক্ষেপ করা হলো। আগুন আমাদের দগ্ধ করে, বিষধর সর্পগুলো আমাদের পেট খেয়ে ফেলে, সাপগুলো আমাদের দংশন করে এবং ফেরেশতারা আমাদের লণ্ঠন দিয়ে আঘাত করে। আমরা চুয়াল্লিশ বছর ধরে এই আযাবে আছি। এক পলকের জন্যও আমাদের আযাব কমানো হয় না। তবে আল্লাহ তা'আলা শুধু জুম্মার দিন ও বৃহস্পতিবার আমাদের শাস্তি হালকা করে দেন। আমরা সেই হালকা হওয়ার মাধ্যমে জুম্মা ও বৃহস্পতিবার চিনতে পারি।

আমি যখন এই অবস্থায় ছিলাম, তখন একটি আহ্বান এলো, "এই অপবিত্র আত্মাকে কিয়ামত উপত্যকায় ফেলে রাখা তার খুলির কাছে বের করে দাও, কারণ আল্লাহর রূহ তার জন্য সুপারিশ করেছেন।" এরপর আমাকে বের করা হলো। হে আল্লাহর রূহ ও তাঁর বাণী! আমি আপনার কাছে প্রার্থনা করি যে, আপনি যেন আপনার রবের কাছে দোয়া করেন, তিনি যেন আমাকে ক্ষমা করে দেন এবং আপনার সুপারিশ যেন আমার জন্য কবুল করেন।

তিনি (ঈসা আঃ) তখন দু'রাকাত সালাত আদায় করলেন এবং তাঁর মহান রবের কাছে দোয়া করলেন। তিনি বললেন, "হে আমার ইলাহ ও আমার সৃষ্টিকর্তা! আমার জন্য এই পাপিষ্ঠ আত্মাকে পুনরুত্থিত করুন।" আল্লাহ তা'আলা তখন তাকে পুনরুত্থিত করলেন। সেই আত্মা ঈসা (আঃ)-এর সাথেই ছিল, যতক্ষণ না ঈসা (আঃ)-কে আসমানে উঠিয়ে নেওয়া হলো। এরপর আল্লাহ তাকে (সেই আত্মাকে) মৃত্যু দিলেন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7506)


• حدثنا أبو محمد بن حيان ثنا محمد بن أحمد بن تميم ثنا محمد بن حميد ثنا زافر بن سليمان ثنا سفيان عن الأوزاعي. قال: قال كعب: يأتي على الناس زمان تنزع فيه الرحمة وتنزع فيه الأمانة ويوشك أن تكثر فيه المسألة حتى لا يبارك لأحد فيما أعطي.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: মানুষের উপর এমন এক সময় আসবে যখন তাদের থেকে দয়া তুলে নেওয়া হবে এবং আমানতদারীও তুলে নেওয়া হবে। আর শীঘ্রই তাতে চাওয়া (ভিক্ষা) অনেক বেড়ে যাবে, এমনকি যা কিছু তাদের দেওয়া হবে, তাতে কারো জন্য কোনো বরকত থাকবে না।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7507)


• حدثنا أبو محمد ثنا أحمد بن جعفر بن فارس(1) ثنا محمد بن النعمان بن عبد السلام ثنا كثير بن هشام عن عيسى بن إبراهيم الهاشمي عن معاوية بن عبد الله الجعفري عن كعب. قال: أول من ضرب الدينار والدرهم آدم عليه السلام وقال لا تصلح المعيشة إلا بهما.




কাব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, সর্বপ্রথম যিনি দিনার (স্বর্ণমুদ্রা) ও দিরহাম (রৌপ্যমুদ্রা) তৈরি করেন, তিনি হলেন আদম (আঃ)। তিনি আরও বলেন, এ দুটি ছাড়া জীবনধারণ (জীবিকা) ঠিক হয় না।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7508)


• حدثنا محمد بن أحمد بن الحسن ثنا محمد بن عثمان بن أبي شيبة ثنا أحمد ابن كثير ثنا بقية عن صفوان بن عمرو عن شريح بن عبيد عن كعب. قال:

إذا كان أول يوم من نيسان يطلع الله تعالى إلى الأرض فينظر إلى الزرع فيقول ليلحق أولك بآخرك.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন নিসান মাসের প্রথম দিন হয়, আল্লাহ তাআলা জমিনের দিকে দৃষ্টিপাত করেন। অতঃপর তিনি ফসলের দিকে তাকান এবং বলেন, "তোমার প্রথম যেন তোমার শেষের সাথে মিলিত হয় (অর্থাৎ, ফলন যেন পরিপূর্ণ হয়)।"









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7509)


• حدثنا محمد بن أحمد ثنا محمد بن عثمان ثنا أبي ثنا شاذان ثنا حماد بن سلمة عن علي بن زيد عن أبي عثمان النهدي عن كعب. قال: أول ماء يرده الدجال من مياه العرب الى جنبه جبل مشرف على البصرة يقال له سنام.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আরবদের জলাশয়গুলোর মধ্যে দাজ্জাল প্রথম যে জলাশয়ে আসবে, তা হলো বসরা শহরকে দেখা যায় এমন একটি পাহাড়ের পাশে, যার নাম সিনাম।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7510)


• حدثنا محمد ثنا محمد ثنا نصر بن عبد الرحمن ثنا أحمد بن بشير عن سعيد عن قتادة عن كعب. قال: قبر إسماعيل بين المقام والركن وزمزم.




ক্বাব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, ইসমাঈল (আঃ)-এর কবর মাকাম (ইবরাহীম), রুকন এবং যমযমের মাঝে অবস্থিত।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7511)


• حدثنا محمد ثنا محمد ثنا منجاب ثنا أبو عامر الأسدي عن سفيان عن الأعمش عن أبي صالح عن كعب. قال: الدنيا ستة آلاف سنة.




কা'ব থেকে বর্ণিত, দুনিয়া (বা পৃথিবীর আয়ুষ্কাল) ছয় হাজার বছর।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7512)


• حدثنا محمد ثنا محمد ثنا أبي ثنا شاذان ثنا جرير بن حازم عن زبيد بن الحارث عن عكرمة عن كعب. قال: أول ما أنزل من التوراة(2) عشر آيات وهي العشر التي نزلت في آخر الأنعام.




কআব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, তাওরাত কিতাব থেকে সর্বপ্রথম দশটি আয়াত নাযিল হয়েছিল। আর এই দশটি আয়াতই হলো সেই দশটি, যা সূরা আন'আমের শেষে নাযিল হয়েছে।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7513)


• حدثنا محمد بن علي بن حبيش ثنا أحمد بن يحيى الحلواني ثنا أحمد بن يونس ثنا مندل عن الأعمش عن أبي صالح. قال: قال كعب لعمر: إنا نجدك شهيدا إنا نجدك إماما عادلا ونجدك لا تخاف في الله لومة لائم. قال: هذا لا أخاف في الله {لومة لائم} فأنى لي بالشهادة.




আবু সালিহ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, কা'ব (আল-আহবার) উমরকে (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, 'আমরা আপনাকে শহীদ হিসেবে পাই। আমরা আপনাকে ন্যায়পরায়ণ ইমাম (নেতা) হিসেবে পাই। আর আমরা আপনাকে এমন হিসেবে পাই যে, আপনি আল্লাহর ব্যাপারে কোনো নিন্দুকের নিন্দাকে ভয় করেন না।' তিনি (উমর) বললেন, 'আল্লাহর ব্যাপারে নিন্দুকের নিন্দাকে আমি ভয় করি না - এটা তো ঠিক, কিন্তু আমি শাহাদাত (শহীদ হওয়া) কীভাবে পাব?'









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7514)


• حدثنا سليمان بن أحمد ثنا عمرو بن أبي الطاهر بن السراج ثنا أبي ثنا عبد الله بن وهب عن عبد الله بن عياش ثنا ابن عياش القتبانى عن يزيد بن
قودر عن كعب. قال: من أراد أن يبلغ شرف الآخرة فليكثر التفكر يكن عالما.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, "যে ব্যক্তি আখিরাতের মর্যাদা লাভ করতে চায়, সে যেন বেশি বেশি চিন্তা-ভাবনা (গভীরভাবে ফিকির) করে; তবেই সে জ্ঞানী হতে পারবে।"









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7515)


• حدثنا أبو محمد بن حيان ثنا محمد بن العباس ثنا أبو هاشم ثنا ابن يمان ثنا خارجة بن زيد بن أسلم عن عطاء بن يسار عن كعب. قال: ما خرج رجل في طلب العلم إلا ضمن الله السموات والأرض رزقه.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, যে ব্যক্তি ইলম (জ্ঞান) অর্জনের উদ্দেশ্যে বের হয়, আল্লাহ আসমান ও যমীন থেকে তার রিযিকের দায়িত্ব গ্রহণ করেন।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7516)


• حدثنا أحمد بن جعفر بن حمدان ثنا عبد الله بن أحمد بن حنبل حدثني أبي ثنا سيار ثنا جعفر ثنا عبد الجليل عن أبي عبد السلام عن كعب. قال: أوحى الله تعالى إلى موسى عليه السلام: أن علم الخير وتعلمه، فإني منور لمعلم الخير ومتعلمه في قبورهم حتى لا يستوحشوا بمكانهم.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আল্লাহ তাআলা মূসা (আলাইহিস সালাম)-এর প্রতি ওহী নাযিল করলেন: তুমি কল্যাণকর জ্ঞান শিক্ষা দাও এবং নিজেও তা শিক্ষা গ্রহণ করো। কেননা আমি কল্যাণকর জ্ঞানের শিক্ষক ও শিক্ষার্থীর জন্য তাদের কবরে নূর (আলো) দানকারী, যাতে তারা তাদের স্থানে (কবরে) একাকীত্ব অনুভব না করে।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7517)


• حدثنا أبي ثنا محمد بن الحسن المقرى ثنا عبد الله بن عبد الوهاب ثنا محمد بن عمر بن نعامة الحمصي ثنا بقية بن الوليد عن يحيى يقال له العطار - عن بشر بن منصور عن أبي عبد السلام عن كعب. قال: إذا ذكرت نوعا من العذاب أعطاك الله به عشر حسنات ومحى عنك به عشر سيئات ورفع لك عشر درجات، وإذا ذكرت نوعا من أنواع الجنة أعطاك الله مثل ذلك. قال: ومن خشي أن يتخم من طعام أو شراب فليقرأ {(شهد الله أنه لا إله إلا هو)} الآية فإنه لم يتخم إن شاء الله.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন তুমি কোনো প্রকার আযাব (শাস্তি) স্মরণ করো, তখন আল্লাহ তোমাকে এর বিনিময়ে দশটি নেকি দান করেন, তোমার থেকে দশটি মন্দ কাজ মুছে দেন এবং তোমার দশটি মর্যাদা বৃদ্ধি করেন। আর যখন তুমি জান্নাতের কোনো প্রকার স্মরণ করো, তখন আল্লাহ তোমাকে অনুরূপ দান করেন। তিনি আরো বলেন: আর যে ব্যক্তি খাদ্য বা পানীয়র কারণে পেট ভরে যাওয়া (বদহজম বা অতিভোজন) নিয়ে ভয় পায়, সে যেন এই আয়াতটি পাঠ করে: {شهد الله أنه لا إله إلا هو} (শাহিদা আল্লাহু আন্নাহু লা ইলাহা ইল্লা হুওয়া) পুরো আয়াতটি। কেননা, ইনশাআল্লাহ (আল্লাহ চাইলে), সে অতিভোজনে কষ্ট পাবে না।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7518)


• حدثنا أبي ثنا إبراهيم بن محمد بن الحسن ثنا أبو الربيع الرشديني ثنا ابن وهب ثنا ابن أبي ذئب عن سعيد بن أبي سعيد المقبري: أنه سمع السلوى يحدث نوفل بن مسابق أنه سأل كعب الأحبار ما تجدون في كتاب الله من عقوق الوالد؟ قال كعب: أنا أخبرك إذا أقسم عليه والده فلم يبره وإذا سأله فلم يعطه وائتمنه فلم يرد عليه واشتكى إلى الله ما يلقاه منه فذلك العقوق كله.




সাঈদ ইবনে আবী সাঈদ আল-মাক্ববুরী থেকে বর্ণিত, তিনি আস-সালওয়াকে নাওফাল ইবনে মুসাবিককে বলতে শুনেছেন যে, তিনি কা‘ব আল-আহবারকে জিজ্ঞাসা করেছিলেন: "পিতামাতার অবাধ্যতা (উক্বুকুল ওয়ালিদ) সম্পর্কে আপনারা আল্লাহর কিতাবে কী দেখতে পান?" কা‘ব বললেন: "আমি তোমাকে বলছি। যখন তার পিতা তার নামে কসম করে (কোনো কিছু করার জন্য কঠোরভাবে দাবি করে), আর সে তা পূরণ না করে; এবং যখন তার পিতা তার কাছে কিছু চায়, কিন্তু সে তা প্রদান না করে; আর যখন তার পিতা বিশ্বস্ততার সাথে তার কাছে কিছু (আমানত) রাখে, কিন্তু সে তা তাকে ফেরত না দেয়; এবং যখন পিতা তার সন্তানের কাছ থেকে পাওয়া কষ্ট নিয়ে আল্লাহর কাছে অভিযোগ করে—এটাই হলো পূর্ণাঙ্গ অবাধ্যতা (উক্বুক)।"









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7519)


• حدثنا أبي ثنا إبراهيم ثنا أبو الربيع ثنا ابن وهب أخبرني ابن لهيعة وعمرو بن الحارث عن يزيد بن أبي حبيب عن أبي حماد العراقي عن قتادة: أن كعبا قال لأبي موسى الأشعري: أتدري كم عدد أهل الجنة؟ قال أبو موسى لا قال أفتدري كم هم من صف؟ قال أبو موسى لا؟ قال أفتدري ما بين كل صفين قال لا! قال كعب هم اثنا عشر صفا أمة محمد صلى الله عليه وسلم ثمانية صفوف ما بين كل صفين كما بين المشرق والمغرب.




আবূ মূসা আল-আশআরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, কা‘ব তাঁকে বললেন: আপনি কি জানেন জান্নাতবাসীদের সংখ্যা কত? আবূ মূসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, না। কা‘ব বললেন, তারা কতগুলো সারিতে (কাতার) অবস্থান করবে, তা কি আপনি জানেন? আবূ মূসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, না। কা‘ব বললেন, আপনি কি জানেন যে, প্রত্যেক দুই সারির মধ্যে ব্যবধান কতটুকু? আবূ মূসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, না! কা‘ব বললেন, তারা হবে বারোটি কাতার। এর মধ্যে মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর উম্মত হবে আটটি কাতার। আর প্রত্যেক দুই কাতারের মধ্যে ব্যবধান হবে প্রাচ্য ও পাশ্চাত্যের দূরত্বের সমান।









হিলইয়াতুল আওলিয়া (7520)


• حدثنا محمد بن أحمد بن الحسن ثنا محمد بن عثمان بن أبي شيبة ثنا عبادة ابن زياد ثنا قيس بن الربيع ح. وحدثنا عبد الله بن محمد بن إبراهيم ثنا جدي عيسى بن إبراهيم ثنا آدم بن أبي إياس ثنا شيبان قالا عن عاصم بن بهدلة عن أبي صالح عن كعب. قال: إن الله تعالى اختار من الشهور شهر رمضان واختار من البلاد مكة واختار من الأيام يوم الجمعة، واختار من الليالي ليلة القدر، واختار الساعات فخير الساعات للصلوات. فالمؤمن بين حسنتين فحسنة قضاها وأخرى ينتظرها.




কা'ব থেকে বর্ণিত, তিনি বললেন: নিশ্চয় আল্লাহ তাআলা মাসসমূহের মধ্য থেকে রমযান মাসকে নির্বাচন করেছেন, আর শহরসমূহের মধ্য থেকে মক্কাকে নির্বাচন করেছেন, আর দিনসমূহের মধ্য থেকে জুমু'আর দিনকে নির্বাচন করেছেন, আর রাত্রিসমূহের মধ্য থেকে লাইলাতুল কদরকে নির্বাচন করেছেন। আর তিনি (বিশেষ) সময়সমূহ নির্বাচন করেছেন, অতএব উত্তম সময় হলো সালাতের (নামাযের) সময়সমূহ। সুতরাং মু'মিন ব্যক্তি দু'টি পুণ্যের মাঝে অবস্থান করে: একটি পুণ্য যা সে সম্পন্ন করেছে এবং অপরটি যার জন্য সে অপেক্ষা করছে।