আল-জামি` আল-কামিল
1041 - عن معاوية بن أبي سفيان يقول: سمعتُ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"إنّما الأعمال بخواتيمها، كالدعاء إذا طاب أعلاه طاب أسفله، وإذا خبُث أعلاه خبُث أسفلُه".
حسن: رواه ابن حبان في"صحيحه" (339) عن الحسين بن عبد اللَّه بن يزيد القطّان، قال: أخبرنا هشام بن عمار، قال: حدّثنا الوليد بن مسلم، قال: حدّثنا ابن جابر، قال: سمعت أبا عبد ربّ يقول: سمعت معاوية، يقول: فذكر الحديث.
وابن جابر هو عبد الرحمن بن يزيد بن جابر الأزديّ أبو عتبة الشّاميّ الدَّارانيّ ثقة من رجال الجماعة.
والوليد بن مسلم مدلّس إِلَّا أنّه صرّح بالتّحديث، ومن طريقه رواه ابن ماجه (4199) إِلَّا أنه لم يذكر صدر الحديث:"إنّما الأعمال بخواتيمها".
ثم تابعه عبد اللَّه بن المبارك، فأخرج في الزهد (596) وعنه الإمام أحمد (16853)، والطَّبرانيّ في الكير (19/ 866).
وإسناده حسن من أجل عبد ربّ وهو الدِّمشقيّ الزّاهد، روى عنه جمعٌ، وذكره ابن حبان في"الثقات" (5/ 81) فقال:"أبو عبد رب الزّاهد، اسمه عبد الرحمن، مولى لابن غيلان الثقفيّ، وكان روميًّا اسمه قسطنطين، فلما أسلم سمي بعبد الرحمن، يروي عن معاوية، عداده في أهل الشّام، روي عنه أهلها، وكان من أيسر أهل دمشق مالًا، فتصدَّق بماله كلّه، وكان يقول: لو أنّ بردًا سال ذهبًا وفضّة ما أتيته لآخذ منه شيئًا، ولو قيل: من مسّ هذا العمود مات لقمت إليه حتّى أمسّه".
وقد عرفه غير واحد من أهل العلم وأثنوا على زهده ولم يذكروا فيه جرجا، فمثله يحسن حديثه.
মুয়াবিয়া ইবনে আবি সুফিয়ান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "নিশ্চয়ই আমল (কাজ) তার সমাপ্তির ওপর নির্ভর করে। এটি দো'আর মতো, যখন তার উচ্চ অংশ (বা শুরু) ভালো হয়, তখন তার নিম্ন অংশও (সমাপ্তি) ভালো হয়। আর যখন তার উচ্চ অংশ খারাপ হয়, তখন তার নিম্ন অংশও খারাপ হয়।"
1042 - عن أبي سعيد، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إنّ بني آدم خلقوا على طبقات شتي: فمنهم من يولد مؤمنًا، ويحيا مؤمنًا، ويموت مؤمنًا، ومنهم من يولد كافرًا، ويحيا كافرًا، ويموت كافرًا. ومنهم من يولد مؤمنًا، ويحيى مؤمنًا، ويموت كافرًا. ومنهم من يولد كافرًا، ويحيا كافرًا، ويموت مؤمنًا".
صحيح: رواه البيهقيّ في القضاء والقدر (1/ 297 - 298) من طريق داود بن أبي هند، عن أبي نضرة، عن أبي سعيد، فذكره.
قال البيهقيّ:"إسناده صحيح".
وقال: ورواه أيضًا علي بن زيد، عن أبي نضرة، عن أبي سعيد في الخطبة".
قلت: وهو يشير إلى ما رواه الترمذيّ (2191)، والإمام أحمد (11143)، وأبو يعلى (1101) وغيرهم من طرق عن حمّاد بن زيد، قال: أخبرنا علي بن زيد، عن أبي نضرة، عن أبي سعيد الخدري قال: صلى بنا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يوما صلاة العصر بنهار، ثم قام خطيبًا، فلم يدع شيئًا يكون إلى قيام الساعة إِلَّا أخبرنا به، حَفِظَهُ مَنْ حَفِظَهُ، وَنَسِيَهُ مَنْ نَسِيَهُ، وكان فيما قال:"إنّ الدّنيا خَضِرة حُلوةٌ، وإنَّ اللَّه مستخلفكم فيها فناظر كيف تعملون، ألا فاتقوا الدّنيا واتقوا النِّساء". وكان فيما
قال:"ألا لا يمنعن رجلًا هيبة النّاس أن يقول بحق إذا علمه". قال: فبكى أبو سعيد فقال: قد واللَّه رأينا أشياء فهبنا، فكان فيما قال:"ألا إنه ينصب لكل غادر لواءً يوم القيامة بقدر غدرته ولا غدرة أعظم من غدرة إمام عامة بركز لواؤه عند استه". وكان فيما حفظنا يومئذ:"ألا إن بني آدم خُلقوا على طبقات شتّى، فمنهم من يولد مؤمنًا ويحيا مؤمنًا ويموت مؤمنًا، ومنهم من يولد كافرًا ويحيا كافرًا ويموت كافرًا، ومنهم من يولد مؤمنًا ويحيا مؤمنًا ويموت كافرًا، ومنهم من يولد كافرًا ويحيا كافرًا ويموت مؤمنًا، ألا وإن منهم البطيء الغضب سريع الفيئ، ومنهم سريع الغضب سريع الفيء، فتلك بتلك، ألا وإن منهم سريع الغضب بطيء الفيئ، ألا وخيرهم بطيء الغضب سريع الفيئ، وشرّهم سريع الغضب بطيء الفيئ، ألا وإن منهم حسن القضاء حسن الطّلب، ومنهم سيئ القضاء حسن الطلب، ومنهم حسن القضاء سيئ الطلب، فتلك بتلك، ألا وإن منهم السيئ القضاء السيء الطلب، ألا وخيرهم الحسن القضاء الحسن الطلب، ألا وشرهم سيئ القضاء سيئ الطلب، ألا وإن الغضب جمرة في قلب ابن آدم، أما رأيتم إلى حمُرة عينيه وانتفاخ أوداجه؟ فمن أحسَّ بشيء من ذلك فليلصق بالأرض" قال: وجعلنا نلتفت إلى الشّمس هل بقي منها شيء؟ فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ألا إنه لم يبق من الدنيا فيما مضى منها، إِلَّا كما بقي من يومكم هذا فيما مضى منه".
قال الترمذيّ:"حديث حسن".
وقال الحاكم (4/ 506):"هذا حديث تفرّد بهذه السّياقة علي بن زيد بن جدعان القرشيّ، عن أبي نضرة. والشيخان لم يحتجّا بعلي بن زيد".
وقال الذّهبيّ:"ابن جدعان صالح الحديث".
قلت: حمّاد بن زيد من قدماء أصحاب ابن جدعان، وحديثه عنه حسن.
আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় আদম সন্তানকে বিভিন্ন শ্রেণিতে সৃষ্টি করা হয়েছে: তাদের মধ্যে কেউ এমন যে, সে মুমিন রূপে জন্মগ্রহণ করে, মুমিন রূপে জীবন যাপন করে এবং মুমিন রূপে মৃত্যুবরণ করে। আর তাদের মধ্যে কেউ এমন যে, সে কাফির রূপে জন্মগ্রহণ করে, কাফির রূপে জীবন যাপন করে এবং কাফির রূপে মৃত্যুবরণ করে। আর তাদের মধ্যে কেউ এমন যে, সে মুমিন রূপে জন্মগ্রহণ করে, মুমিন রূপে জীবন যাপন করে কিন্তু কাফির রূপে মৃত্যুবরণ করে। আর তাদের মধ্যে কেউ এমন যে, সে কাফির রূপে জন্মগ্রহণ করে, কাফির রূপে জীবন যাপন করে কিন্তু মুমিন রূপে মৃত্যুবরণ করে।"
1043 - عن وعن أنس، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إذا أراد اللَّه بعبد خيرًا استعمله". فقيل: كيف يستعمله يا رسول اللَّه؟ قال:"يوفّقه لعمل صالح قبل الموت".
صحيح: رواه الترمذيّ (2142) عن علي بن حُجْر، حدّثنا إسماعيل بن جعفر، عن حميد، عن أنس، فذكر مثله. وإسناده صحيح.
وصحّحه ابنُ حبان (341)، والحاكم (1/ 340) كلاهما من طريق إسماعيل بن جعفر، بإسناده، مثله.
قال الترمذيّ:"حديث صحيح".
وقال الحاكم:"صحيح على شرط الشيخين".
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আল্লাহ যখন তাঁর কোনো বান্দার জন্য কল্যাণ চান, তখন তিনি তাকে কাজে লাগিয়ে নেন।" জিজ্ঞেস করা হলো: হে আল্লাহর রাসূল! তিনি তাকে কিভাবে কাজে লাগান? তিনি বললেন: "মৃত্যুর পূর্বে তিনি তাকে নেক আমল করার তাওফীক দেন।"
1044 - عن عمرو بن الحمق الخزاعيّ، أنّه سمع النبيّ صلى الله عليه وسلم يقول:"إذا أراد اللَّه بعبد
خيرًا استعمله". قيل: وما استعمله؟ قال:"يُفتح له عمل صالح بين يدي موته، حتّى يرْضى عنه مَنْ حوله".
حسن: رواه الإمام أحمد (21949)، والبزَّار -كشف الأستار (2155) - والطبرانيّ في الأوسط -مجمع البحرين (3263) -، والبيهقيّ في القضاء والقدر (1/ 379) كلّهم من حديث معاوية بن صالح، حدّثني عبد الرحمن بن جبير بن نفير، عن أبيه، عن عمرو بن الحمق الخزاعيّ، فذكر مثله، واللّفظ لأحمد.
وصحّحه ابن حبان (342، 343)، والحاكم (1/ 340) كلاهما من طريق زيد بن الحباب بإسناده، مثله إِلَّا أنَّهم جعلوا"عسله" بدل"استعمله".
قال الحاكم:"صحيح".
قلت: إسناده حسن من أجل معاوية بن صالح وهو ابن حدير، فإنه حسن الحديث، وهو من رجال مسلم.
وقوله:"عسله". العَسْل: طيب الثّناء، مأخوذ من العَسَل، يقال: عسَل الطَّعَام يَعسِله: إذا جعل فيه العسل. انظر:"النهاية" (3/ 237).
كأنّه شبَّه ما رزقه اللَّه تعالى من العمل الصالح الذي طاب به ذكره بين قومه بالعسل الذي يجعل في الطّعام، فيحلو به ويطيب. انظر:"الفائق" (2/ 429).
আমর ইবনুল হামিক আল-খুযাঈ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছেন: "যখন আল্লাহ কোনো বান্দার কল্যাণ চান, তখন তিনি তাকে কাজে লাগান।" জিজ্ঞাসা করা হলো: "কাজে লাগান" বলতে কী বোঝানো হয়েছে? তিনি বললেন: "তার মৃত্যুর পূর্বে তার জন্য নেক কাজের সুযোগ খুলে দেওয়া হয়, যার ফলে তার আশেপাশের সবাই তার প্রতি সন্তুষ্ট হয়ে যায়।"
1045 - عن عائشة، قالت: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إذا أراد اللَّه بعبد خيرًا عسَّله". قلت: يا رسول اللَّه، وكيف يُعسله؟ قال:"يوفّقه لعمل صالح قبل موته فيقبضه عليه".
حسن: رواه الطّبرانيّ في الأوسط -مجمع البحرين (3238) - عن عبد الرحمن بن عمرو أبي زرعة، ثنا يحيى بن صالح الوُحاظيّ، ثنا يونس بن عثمان المقرئ، عن راشد بن سعد، عن عائشة، فذكرته.
قال الهيثميّ في"المجمع" (7/ 215):"ورجاله رجال الصّحيح غير يونس بن عثمان وهو ثقة".
قلت: إسناده حسن من أجل يونس بن عثمان المقرئ قال فيه ابن حبان في"الثقات" (7/ 649 - 650):"يعتبر حديثه من غير رواية يحيى بن سعيد العطّار عنه". وهذا ليس من رواية يحيى بن سعيد العطّار عنه.
وفي الباب ما رُوي عن أبي عِنبة، قال: قال رسولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إذا أراد اللَّه بعبد خيرًا عسله".
قيل: وما عسله؟ قال:"يفتح اللَّه له عملًا صالحًا قبل موته، ثم يقبضه عليه".
رواه الإمام أحمد (17784) عن سريج بن النعمان، قال: حدّثنا بقية، عن محمد بن زياد الألهانيّ، قال: حدّثني أبو عِنبة -قال سريج: وله صحبة- قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم (فذكر الحديث).
وأبو عنبة مختلف في صحبته، فعدَّه خليفة بن خياط، وابن سعد، والبغويّ وغيرهم من الصّحابة، وأنكر أبو حاتم الرَّازي -وهو إمام في معرفة الرّجال- أن يكون له صحبة، وعدّه من الطّبقة الأوّلى من تابعي أهل الشّام. كما أنكر أهل الشّام بأن تكون له صحبة.
وفي الإسناد أيضًا بقية وهو ابن الوليد كثير التّدليس والتّسوية، ولكن رواه ابن أبي عاصم في"السنة" (400)، والقضاعيّ في"مسند الشّهاب" (1389) من طريقه، وفيه التّصريح بالتحديث.
وفي الباب عن أبي أمامة، رواه القضاعيّ في"مسند الشّهاب" (1388) وغيره مثله، وفي طريقه علي بن زيد الألهانيّ وهو ضعيف.
আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "আল্লাহ যখন কোনো বান্দার কল্যাণ চান, তখন তাকে 'আসল' (মধুর স্বাদ) দান করেন।" আমি জিজ্ঞেস করলাম, "ইয়া রাসূলাল্লাহ! কীভাবে তাকে 'আসল' (মধুর স্বাদ) দান করা হয়?" তিনি বললেন, "মৃত্যুর আগে তিনি তাকে নেক আমল করার তাওফীক দেন, অতঃপর সেই অবস্থার ওপরই তাকে কবজ করেন (মৃত্যু দেন)।"
1046 - عن كُرْز بن علقمة الخزاعيّ، قال: قال رجل: يا رسول اللَّه، هل للإسلام من منتهى؟ قال:"أيُّما أهل بيت". وقال في موضع آخر قال:"نعم، أيّما أهل بيت من العرب، أو العجم، أراد اللَّه بهم خيرًا، أدخل عليهم الإسلام". قال: ثم مَهْ؟ قال:"ثم تقع الفتن كأنّها الظُّلَل". قال: كلا واللَّهِ إن شاء اللَّه. قال:"بلى، والذي نفسي بيده، ثم تعودون فيها أساوِدَ صُبًّا يضربُ بعضكم رقاب بعض".
صحيح: رواه أحمد (15917)، والبزّار - كشف الأستار (3353)، والطَّبرانيّ (19/ 198)، والبيهقيّ في القضاء والقدر (1/ 377) كلّهم من طرق عن سفيان، عن الزّهريّ، عن عروة، عن كُرْز ابن علقمة الخزاعيّ، فذكره. وإسناده صحيح.
وصحّحه الحاكم (1/ 34) وقال:"ليس له علّة ولم يخرجاه". ثم ذكر قول الدّارقطني في إلزام الشيخين في إخراج هذا الحديث في صحيحيهما.
وأورده الهيثميّ في"المجمع" (7/ 305) وقال:"رواه أحمد والبزّار والطَّبرانيّ بأسانيد، واحدها رجاله رجال الصّحيح".
وقوله:"كلا" لم يقله إنكارًا لذلك؛ وإنّما قاله إظهارًا لمحبّته للإسلام.
وقوله:"أساود" حيّات، جمع أسود.
وقوله:"صُبًّا" بضم وتشديد - أي كأنَّهم حيَّات مصبوبة على النَّاس من السّماء.
কুর্য ইবনু আলক্বামাহ আল-খুযাঈ থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, এক ব্যক্তি বলল: হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), ইসলামের কি কোনো সমাপ্তি ঘটবে? তিনি বললেন: "যে কোনো পরিবারের লোক..." এবং অন্য এক স্থানে তিনি বললেন: "হ্যাঁ, আরব বা অনারব যে কোনো পরিবারের লোকের সাথে আল্লাহ কল্যাণ করার ইচ্ছা করেন, তাদের মধ্যে তিনি ইসলাম প্রবেশ করিয়ে দেন।" লোকটি বলল: এরপর কী হবে? তিনি বললেন: "এরপর এমন ফিতনা (বিপর্যয়) শুরু হবে, যা যেন মেঘের ঘন ছায়ার মতো।" লোকটি বলল: আল্লাহর কসম, কখনোই না, যদি আল্লাহ চান (তবে এমন হবে না)। তিনি বললেন: "বরং হ্যাঁ (এমনটি হবে)। যার হাতে আমার জীবন, তাঁর কসম! এরপর তোমরা তার মধ্যে (সেই ফিতনার মধ্যে) এমনভাবে ফিরে যাবে যে, তোমরা হবে বিষধর কালো সাপের মতো, যা ঝাঁকে ঝাঁকে ঝরে পড়ে; তোমরা একে অপরের ঘাড়ে আঘাত করবে (একে অপরকে হত্যা করবে)।"
1047 - عن عبد اللَّه بن مسعود، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إنّ اللَّه قسم بينكم أخلاقكم، كما قسم بينكم أرزاقكم، وإنَّ اللَّه يُعطي الدُّنيا مَنْ يحبُّ ومن لا يحبّ، ولا يعطي الإيمان إِلَّا من يحبّ".
صحيح: رواه الحاكم (1/ 33 - 34) من طرق عن أحمد بن جناب المصّيصيّ، نا عيسى بن يونس، عن سفيان الثّوريّ، عن زبيد، عن مرّة، عن عبد اللَّه بن مسعود، فذكره.
ومن طريقه رواه البيهقيّ في القضاء والقدر (2/ 625) وقال:"زاد جنيد بن حكيم في روايته:"فمن ضَنَّ بالمال أن ينفقه، وخاف العدوَّ أن يجاهده، وهاب اللّيل أن يكابده، فليكثرْ من قول: سبحان اللَّه، والحمد للَّه، ولا إله إلّا اللَّه، واللَّه أكبر".
قال الحاكم:"هذا حديث صحيح، تفرّد به أحمد بن جناب المصيصيّ، وهو شرط من شرطنا في هذا الكتاب أنّا نخرجُ أفراد الثّقات إذا لم نجد لها علّة، وقد وجدنا لعيسى بن يونس فيه متابعين: أحدهما من شرط الكتاب، وهو سفيان بن عقبة أخو قبيصة".
ثم رواه من طريق سفيان بن عقبة أخي قبيصة، عن حمزة الزّيات. وسفيان الثوريّ، عن زبيد، عن مرّة، عن عبد اللَّه بن مسعود، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم، فذكر الحديث.
وقال:"وأمّا المتابع الذي ليس من شرط هذا الكتاب فعبد العزيز بن أبان، والحديث معروف به، فقد صحّ بمتابعين لعيسى بن بونس، ثم بمتابع الثوريّ عن زبيد وهو حمزة الزيّات". انتهى كلامه.
ونقل البيهقيّ بعض كلام الحاكم ثم قال: وقد رُوي من وجه آخر عن عبد الرحمن بن زيد (ابن الخطّاب)، عن أبيه، مرفوعًا. ورُوي من وجه آخر عن مرة، عن عبد اللَّه، مرفوعًا. وراه المسعوديّ، عن أبيه موقوفًا". انتهى كلام البيهقيّ.
ورواه أيضًا الإمام أحمد (3672) من وجه آخر عن الصّباح بن محمد، عن مرة الهمدانيّ، عن عبد اللَّه بن مسعود، مرفوعًا، إِلَّا أنّ الصَّبَّاح بن محمد الهمدانيّ ضعيف.
ورواه عبد الرحمن بن مهديّ، ومحمد بن كثير، عن الثوريّ، عن زبيد فوقفوه.
وكذلك رواه محمد بن طلحة، وزهير بن معاوية.
فصحّح الدَّارقطنيّ في"علله" (5/ 270 - 271) الموقوف. وهو محتمل، ولكن لا يمنع من صحة رفعه لكثرتهم، ولكونه مثل هذا لا يقال بالرَّأي، فإنّ حبَّ اللَّه وكرهه أمر شرعي لا اجتهاد فيه، فلعلّ ابن مسعود كان يرفع مرة، ويوقف أخرى لأمر ما كما هو معروف عنه في كثير من الأحاديث.
আব্দুল্লাহ ইবনে মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় আল্লাহ তোমাদের মধ্যে তোমাদের চরিত্রসমূহ বণ্টন করে দিয়েছেন, যেভাবে তিনি তোমাদের মধ্যে তোমাদের রিযক (জীবিকা) বণ্টন করে দিয়েছেন। আর নিশ্চয় আল্লাহ দুনিয়া তাকেও দান করেন যাকে তিনি ভালোবাসেন এবং তাকেও দান করেন যাকে তিনি ভালোবাসেন না। কিন্তু তিনি ঈমান (বিশ্বাস) দান করেন না, শুধু তাকেই ছাড়া, যাকে তিনি ভালোবাসেন।"
1048 - عن أبي هريرة، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"احتجّ آدم وموسى، فقال له موسى: يا آدمُ أنت أبونا خيّبْتنا وأخرجْتنا من الجنّة! . قال له آدم: يا موسى، اصطفاك اللَّه بكلامه، وخطّ لك بيده، أتلومني على أمر قدَّره اللَّه عليّ قبل أن يخلقني بأربعين سنة، فحجَّ آدم موسى، فحجَّ آدمُ موسى". ثلاثًا.
متفق عليه: رواه البخاريّ في"القدر" (6614)، ومسلم في"القدر" (2652) كلاهما من حديث سفيان، عن عمرو بن دينار، عن طاوس. قال: سمعتُ أبا هريرة، فذكره.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আদম (আঃ) এবং মূসা (আঃ) বিতর্কে লিপ্ত হলেন। তখন মূসা (আঃ) তাঁকে বললেন, হে আদম! আপনি আমাদের পিতা, আপনিই আমাদের হতাশ করলেন এবং জান্নাত থেকে বের করে দিলেন! জবাবে আদম (আঃ) তাঁকে বললেন, হে মূসা! আল্লাহ আপনাকে তাঁর কালামের মাধ্যমে মনোনীত করেছেন এবং তিনি স্বহস্তে আপনার জন্য (তাওরাত) লিপিবদ্ধ করেছেন, আপনি কি আমাকে এমন এক কাজের জন্য তিরস্কার করছেন যা আল্লাহ আমাকে সৃষ্টি করার চল্লিশ বছর আগেই আমার উপর নির্ধারণ করে রেখেছিলেন? অতঃপর আদম (আঃ) মূসা (আঃ)-এর উপর যুক্তি দিয়ে জয়ী হলেন, অতঃপর আদম (আঃ) মূসা (আঃ)-এর উপর যুক্তি দিয়ে জয়ী হলেন।" (এই কথাটি তিনবার বলা হয়েছে)।
1049 - عن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"احتجّ آدمُ وموسى. فقال له
موسى: أنت آدم الذي أخرجتْكَ خطيئتُك من الجنّة؟ فقال له آدم: أنت موسى الذي اصطفاك اللَّه برسالته وبكلامه، ثم تلومني على أمر قدِّر عليَّ قبل أن أُخلق؟ !". فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"فحجَّ آدمُ موسى" مرّتين.
متفق عليه: رواه البخاريّ في أحاديث الأنبياء (9034)، ومسلم في القدر (2652: 15) كلاهما من حديث إبراهيم بن سعد، عن ابن شهاب، عن حميد بن عبد الرحمن، عن أبي هريرة، فذكره.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আদম (আঃ) ও মূসা (আঃ) যুক্তি-তর্ক করলেন। মূসা (আঃ) তাঁকে বললেন: আপনিই সেই আদম, যার ত্রুটির কারণে আপনাকে জান্নাত থেকে বের করে দেওয়া হয়েছিল? তখন আদম (আঃ) তাঁকে বললেন: আপনিই সেই মূসা, যাঁকে আল্লাহ তাঁর রিসালাত (নবুয়ত) ও কালাম দ্বারা মনোনীত করেছেন, এরপরও কি আপনি আমাকে এমন একটি কাজের জন্য তিরস্কার করছেন, যা আমার সৃষ্টির আগেই আমার জন্য নির্ধারিত (তাকদীরভুক্ত) ছিল?!" এরপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "এভাবে আদম (আঃ) মূসা (আঃ)-এর উপর যুক্তি দ্বারা বিজয়ী হলেন।" (এই বাক্যটি তিনি) দুইবার বললেন।
1050 - عن أبي هريرة، أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"تحاجَّ آدمُ وموسى، فحجَّ آدمُ موسى. قال له موسى: أنت آدم الذي أغويتَ النَّاسَ وأخرجتهم من الجنّة؟ ! فقال له آدمُ: أنت موسى الذي أعطاك اللَّه علمَ كلِّ شيء، واصطفاك على النّاس برسالته؟ قال: نعم. قال: أفتلومني على أمر قد قدِّر عليَّ قبل أن أُخلق".
صحيح: رواه مالك في القدر (1) عن أبي الزّناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة، فذكره.
ورواه مسلمٌ في القدر (2652: 14) عن قتيبة بن سعيد، عن مالك بن أنس، بإسناده، مثله.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আদম ও মূসা (আঃ) পরস্পর বাদানুবাদ করেছিলেন, ফলে আদম (আঃ) মূসাকে যুক্তি দ্বারা পরাজিত করলেন। মূসা (আঃ) তাঁকে বললেন: আপনিই সেই আদম, যিনি মানুষকে বিভ্রান্ত করেছিলেন এবং তাদেরকে জান্নাত থেকে বের করে দিয়েছিলেন?! তখন আদম (আঃ) তাঁকে বললেন: আপনিই সেই মূসা, যাঁকে আল্লাহ সব কিছুর জ্ঞান দান করেছেন এবং তাঁর রিসালাতের মাধ্যমে মানুষের ওপর শ্রেষ্ঠত্ব দান করেছেন? তিনি বললেন: হ্যাঁ। তিনি বললেন: তাহলে কি আপনি এমন বিষয়ে আমাকে তিরস্কার করছেন, যা সৃষ্টি করার পূর্বেই আমার উপর নির্ধারিত হয়ে গিয়েছিল?
1051 - عن أبي هريرة، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"التقى آدمُ وموسى، فقال موسى لآدم: أنت الذي أشْقيتَ النَّاسَ، وأخرجْتهم من الجنّة؟ قال له آدم: أنت الذي اصطفاك اللَّه برسالته، واصطفاك لنفسه، وأنزل عليك التوراة؟ قال: نعم. فوجدتها كُتب عليَّ قبل أن يخلقني؟ قال: نعم. فحجّ آدمُ موسى".
متفق عليه: رواه البخاريّ في التفسير (4736) عن الصّلت بن محمد، حدّثنا مهدي بن ميمون، حدّثنا محمد بن سيرين، عن أبي هريرة، فذكر الحديث، واللّفظ له.
ورواه مسلم في القدر (2652: 15) من وجه آخر عن محمد بن سيرين، عن أبي هريرة، إِلَّا أنّه لم يسق لفظه، وإنّما أحاله على ما سبق. ولعلّه يقصد به حديث يزيد بن هرمز وعبد الرحمن الأعرج كلاهما عن أبي هريرة، كما سيأتي.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আদম (আঃ) এবং মূসা (আঃ)-এর মধ্যে বিতর্ক হয়েছিল। মূসা (আঃ) আদম (আঃ)-কে বললেন: আপনিই সেই ব্যক্তি, যিনি মানবজাতিকে দুর্ভোগে ফেলেছেন এবং তাদেরকে জান্নাত থেকে বের করে দিয়েছেন? তখন আদম (আঃ) তাঁকে বললেন: আপনি কি সেই ব্যক্তি নন, যাঁকে আল্লাহ তাঁর রিসালাতের জন্য মনোনীত করেছেন, নিজের জন্য মনোনীত করেছেন, আর আপনার ওপর তাওরাত অবতীর্ণ করেছেন? তিনি বললেন: হ্যাঁ। (আদম জিজ্ঞেস করলেন) আপনি কি দেখেছেন, আল্লাহ কি আমাকে সৃষ্টি করার আগেই (আমার কপালে) সেটা লিখে রেখেছিলেন? তিনি বললেন: হ্যাঁ। সুতরাং আদম (আঃ) মূসা (আঃ)-এর ওপর বিজয়ী হলেন।
1052 - عن أبي هريرة، قال قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"احتجّ آدمُ وموسى عليهما السلام عند ربِّهما. فحجَّ آدمُ موسى. قال موسى: أنت آدمُ الذي خلقك اللَّه بيده، ونفخ فيك من رُوحه، وأسْجدَ لك ملائكته، وأَسْكتَك في جنّته، ثم أَهْبطْتَ النّاس بخطيئتكَ إلى الأرض؟ فقال آدمُ: أنت موسى الذي اصطفاك اللَّهُ برسالته وبكلامه، وأعطاكَ الألواحَ فيها تبيان كلِّ شيء، وقرَّبك نَجيًّا، فبِكَمْ وجدْتَ اللَّهَ كتب التوراة قبل أن أُخلق؟ قال موسى: بأربعين عامًا. قال آدمُ: فهلْ وجدْتَ فيها: وعصى آدمُ ربَّه فغوى؟ قال: نعم. قال: أفتلُومني على أن عملْتُ عملًا كتبه اللَّه عليَّ أن أعمله
قبل أن يخلُقَني بأربعين سنة؟". قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"فحجَّ آدمُ مُوسى".
صحيح: رواه مسلم في القدر (2652: 15) عن إسحاق بن موسى بن عبد اللَّه بن موسى بن عبد اللَّه بن يزيد الأنصاريّ، حدّثنا أنس بن عياض، حدّثني الحارث بن أبي ذُباب، عن يزيد (وهو ابن هرمز) وعبد الرحمن الأعرج قالا: سمعنا أبا هريرة، قال (فذكر الحديث).
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আদম ও মূসা (আলাইহিমাস সালাম) তাদের রবের নিকট বিতর্ক করলেন। অতঃপর আদম মূসাকে পরাজিত করলেন। মূসা বললেন: 'আপনিই কি সেই আদম, যাকে আল্লাহ তাঁর নিজ হাতে সৃষ্টি করেছেন, আপনার মধ্যে তাঁর রূহ থেকে ফুঁকে দিয়েছেন, আপনার জন্য তাঁর ফিরিশতাদেরকে সিজদা করিয়েছেন এবং আপনাকে তাঁর জান্নাতে স্থান দিয়েছেন, অতঃপর আপনার ভুলের কারণে আপনি মানবজাতিকে পৃথিবীতে নামিয়ে আনলেন?' তখন আদম বললেন: 'আপনিই কি সেই মূসা, যাকে আল্লাহ তাঁর রিসালাত (বার্তাবাহকতা) এবং তাঁর কালামের (বাণীর) মাধ্যমে মনোনীত করেছেন, আপনাকে ফলকসমূহ (তওরাত) দিয়েছেন, যাতে সবকিছুর সুস্পষ্ট ব্যাখ্যা রয়েছে এবং আপনাকে নিবিড় আলাপের জন্য কাছে টেনেছেন। আপনি আল্লাহকে কত আগে তওরাত লিপিবদ্ধ করতে দেখেছেন, আমার সৃষ্টির কত আগে?' মূসা বললেন: 'চল্লিশ বছর আগে।' আদম বললেন: 'আপনি কি সেখানে (তওরাতে) এ কথা পাননি যে: 'আর আদম তার রবের নাফরমানী করল এবং পথভ্রষ্ট হলো'?' মূসা বললেন: 'হ্যাঁ।' তিনি (আদম) বললেন: 'তাহলে আপনি কি আমাকে এমন একটি কাজের জন্য তিরস্কার করছেন, যা আল্লাহ আমাকে সৃষ্টি করার চল্লিশ বছর পূর্বে আমার উপর লিখে রেখেছিলেন যে আমাকে তা করতে হবে?'" রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "এভাবেই আদম মূসাকে পরাজিত করলেন।"
1053 - عن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"احتجّ آدمُ وموسى، فقال موسى لآدم: يا آدم، أنت الذي أدخلتَ ذريَّتَك النّار؟ فقال آدمُ: يا موسى، اصطفاك اللَّه برسالته، وبكلامه، وأنزل عليك التّوراة، فهل وجدت أنِّي أُهْبط؟ قال: نعم. قال:"فحجّه آدم".
صحيح: رواه عبد الرزّاق (20067) عن معمر، عن الزّهريّ، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، فذكره.
ورواه الإمام أحمد (7635) عن عبد الرزّاق، به. وإسناده صحيح.
رواه البيهقيّ في"القضاء والقدر" من عشرة وجوه عن أبي هريرة.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আদম (আঃ) ও মূসা (আঃ) বিতর্ক করলেন। মূসা (আঃ) আদমকে (আঃ) বললেন, হে আদম, আপনিই কি সেই ব্যক্তি যিনি আপনার বংশধরদের জাহান্নামে প্রবেশ করালেন? তখন আদম (আঃ) বললেন, হে মূসা, আল্লাহ আপনাকে তাঁর রিসালাত এবং তাঁর কালাম দ্বারা মনোনীত করেছেন এবং আপনার উপর তাওরাত নাযিল করেছেন। আপনি কি তাতে (তাওরাতে) পেয়েছিলেন যে, আমাকে (পৃথিবীতে) নামিয়ে দেওয়া হবে? তিনি (মূসা) বললেন, হ্যাঁ। তিনি (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, সুতরাং আদম (আঃ) যুক্তিতে তাঁকে পরাভূত করলেন।
1054 - عن أبي هريرة أو أبي سعيد، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"احتجّ آدم وموسى صلى اللَّه عليهما، فقال موسى لآدم: أنت آدم الذي خلقك اللَّه بيده، ونفخ فيك من روحه -أحسبه قال: وأمر الملائكة فسجدوا لك- أخرجت ذريَّتَك من الجنّة؟ قال: فتجده عليَّ مكتوبًا؟ قال: نعم، فحجّ آدمُ موسى".
صحيح: رواه البزّار -كشف الأستار (2148) - عن عمرو بن علي، ثنا أبو معاوية، ثنا الأعمش، عن أبي صالح، عن أبي هريرة أو أبي سعيد، فذكر الحديث.
هكذا شكّ فيه أبو معاوية، ورواه غيره عن الأعمش، عن أبي صالح بدون شكّ بأنه من مسند أبي هريرة.
كما رواه الفضل بن موسى، عن الأعمش بدون شك بأنه من مسند أبي سعيد، كما سيأتي.
আবু হুরায়রা অথবা আবু সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নাবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আদম (আঃ) ও মূসা (আঃ) উভয়ে তর্ক করলেন। মূসা (আঃ) আদমকে (আঃ) বললেন: আপনিই সেই আদম, যাকে আল্লাহ্ নিজ হাতে সৃষ্টি করেছেন এবং আপনার মধ্যে তাঁর রূহ ফুঁকে দিয়েছেন – (আমার মনে হয় তিনি এও বলেছেন: এবং ফেরেশতাদের নির্দেশ দিয়েছেন যেন তারা আপনাকে সিজদা করে) – অথচ আপনি আপনার সন্তানদের জান্নাত থেকে বের করে দিলেন? তিনি (আদম) বললেন: তুমি কি এটিকে আমার উপর (তাকদীরে) লিখিত দেখতে পাও না? তিনি (মূসা) বললেন: হ্যাঁ। অতঃপর আদম (আঃ) মূসাকে (আঃ) তর্কে পরাজিত করলেন।"
1055 - عن أبي سعيد الخديّ، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم قال (فذكره بنحو حديث أبي معاوية).
صحيح: رواه البزّار -كشف الأستار (2147) - عن محمد بن المثنى، ثنا معاذ بن أسد، ثنا الفضل بن موسى، ثنا الأعمش، عن أبي صالح، عن أبي سعيد، فذكر الحديث غير أنّه لم يسق لفظه، وإنّما قال: بنحو حديث أبي معاوية.
قال الهيثميّ في"المجمع" (7/ 191):"رواه أبو يعلى والبزّار ورجالهما رجال الصّحيح".
ولكن رواه وكيع عن الأعمش، عن أبي صالح، عن أبي سعيد موقوفًا عليه. رواه ابن أبي عاصم في"السنة" (142) عن أبي موسى ومحمد بن عبد اللَّه بن نمير قالا: حدّثنا وكيع، بإسناده، مثله.
وهذا إسناد صحيح أيضًا، ولكن حكمه الرّفع، والذي يظهر أنّ أبا صالح كان يروي هذا
الحديث من وجهين، مرة عن أبي هريرة، وأخرى عن أبي سعيد الخدريّ، وكلاهما صحيح، فإنّ أحدهما لا يُعِلُّ الثاني.
ولحديث أبي سعيد أسانيد أخرى لا تصح، منها ما رواه الدَّارميّ في"الرّد على الجهميَّة" (293) عن أبي سلمة، ثنا حمّاد بن سلمة، ثنا أبو هارون، عن أبي سعيد، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم، مثله، وزاد:"يا موسى، أرأيتَ ما علم اللَّهُ أنه سيكون بدٌّ من أن يكون؟ !".
وأبو هارون هو عمارة بن جوين العبديّ"متروك" كما في"التقريب".
আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে বর্ণনা করেছেন, তিনি বললেন, (অতএব তিনি তা আবূ মু'আবিয়ার হাদীসের অনুরূপ উল্লেখ করেছেন)।
1056 - عن عمر بن الخطّاب، أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"التقى آدمُ وموسى، فقال موسى: أنتَ الذي خلق اللَّه بيده، وأسجد لك ملائكته، ونفخ فيك من روحه، وأمرك بأمر فعصيته، فأخرجتنا من الجنّة؟ فقال له آدم: قد أتاك اللَّهُ التّوراة، فهل وجدتَ فيها: كتب عليَّ الذّنب قبل أن أعمله؟ قال: نعم. قال: فحجَّ آدمُ موسى، فحجّ آدم موسى عليهما السلام".
حسن: رواه ابن خزيمة في كتاب التوحيد (62) عن أحمد بن عبدة الضّبيّ، قال: أخبرنا حمّاد ابن زيد، عن مطر الورّاق، عن عبد اللَّه بن بريدة، عن يحيى بن يعمر، قال:"لما تكلّم معبد الجهني في القدر" فذكر الحديث بطوله.
قال ابن خزيمة: قد أمليته في"كتاب الإيمان" وفي الخبر قال عبد اللَّه بن عمر، حدّثني عمر بن الخطّاب، فذكره.
وإسناده حسن من أجل الكلام في مطر الورَّاق غير أنه حسن الحديث.
وهذا الإسناد ساقه مسلم في كتاب الإيمان (8: 2) ولم يذكر لفظه، وإنّما أحال على حديث كهمس، عن عبد اللَّه بن بريدة، عن يحيى بن يعمر، عن عبد اللَّه بن عمر، عن عمر بن الخطّاب، قال:"بينا نحن عند رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم ذات يوم، إذ طلع علينا رجلُ شديد بياض الثّياب. . ." فذكر حديث جبريل.
قال مسلم: وفيه بعض زيادة ونقصان أحرف. فلعلَّه يقصد هذه الزّيادة التي ذكرها ابن خزيمة.
উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আদম (আঃ) ও মূসা (আঃ) পরস্পর মিলিত হলেন। তখন মূসা (আঃ) বললেন: আপনি সেই ব্যক্তি, যাঁকে আল্লাহ তাঁর নিজ হাতে সৃষ্টি করেছেন, আপনার জন্য তাঁর ফেরেশতাদের দ্বারা সিজদা করিয়েছেন, আপনার মধ্যে তাঁর রূহ ফুঁকে দিয়েছেন। আর তিনি আপনাকে একটি আদেশ দিয়েছিলেন, কিন্তু আপনি তা অমান্য করলেন এবং আমাদেরকে জান্নাত থেকে বের করে দিলেন? তখন আদম (আঃ) তাঁকে বললেন: আল্লাহ আপনাকে তাওরাত কিতাব দান করেছেন। আপনি কি তাতে এমনটি পাননি যে, আমি সেই পাপ কাজটি করার আগেই তা আমার ওপর লিপিবদ্ধ ছিল? তিনি [মূসা] বললেন: হ্যাঁ। তিনি [নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)] বললেন: তখন আদম (আঃ) মূসা (আঃ)-এর উপর যুক্তিতে জয়ী হলেন, আদম (আঃ) মূসা (আঃ)-এর উপর যুক্তিতে জয়ী হলেন— তাঁদের দুজনের ওপরই শান্তি বর্ষিত হোক।"
1057 - عن عمر بن الخطّاب قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إنَّ موسى قال: يا ربّ أَرِنَا آدمَ الذي أخرجنا ونفسَه من الجنّة، فأراه اللَّه آدم، فقال: أنت أبونا آدم؟ فقال له آدم: نعم. قال: أنت الذي نفخ اللَّه فيك من روحه وعلَّمك الأسماءَ كلَّها، وأمر الملائكةَ فسجدُوا لك؟ قال: نعم. قال فما حملك على أن أخرجتنا ونفسَك من الجنّة؟ فقال له آدم: ومن أنت؟ قال: أنا موسى. قال: أنت نبيُّ بني إسرائيل الذي كلمك اللَّه من وراء الحجاب لم يجعل بينك وبينه رسولًا من خلقه؟ قال: نعم. قال
أفما وجدتَ أنّ ذلك كان في كتاب اللَّه قبل أن أُخلق؟ قال: نعم. قال: فبِمَ تلومني في شيء سبق من اللَّه تعالى فيه القضاء قبلي؟". قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عند ذلك:"فحَجَّ آدمُ موسى، فحَجَّ آدمُ موسى".
حسن: رواه أبو داود (4702) عن أحمد بن صالح، حدّثنا ابن وهب، أخبرني هشام بن سعد، عن زيد بن أسلم، عن أبيه، أن عمر بن الخطّاب، قال (فذكره).
والحديث أخرجه ابن وهب في القدر (3)، ومن طريقه الفريابيّ في القدر (117)، وابن أبي عاصم في السنة (137)، وابن خزيمة في التوحيد (278)، والدَّارميّ في الرد على الجهمية (294).
وإسناده حسن من أجل هشام بن سعد فإنه مختلف فيه، فضعّفه ابن معين والنسائيّ، ومشّاه الآخرون، وهو"صدوق له أوهام" كما قال الحافظ في"التقريب".
وفي الباب عن جندب بن عبد اللَّه، أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"احتجّ آدمُ وموسى، فقال موسى: أنت آدمُ الذي خلقك اللَّه بيده، وأسجد لك ملائكته، وأسكنك جنّته، فأخرجتَ النَّاسَ من الجنّة؟ فقال آدم: أنت موسى الذي كلّمك اللَّه نجيًّا، وآتاك التوراة تلومني على أمر قد كتب عليَّ قبل أن يخلقني؟ ! قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"فحجّ آدم موسى".
وفي رواية: قال يعني آدم:"فأنا أقدم أم الذّكر".
رواه الإمام أحمد (9990)، وأبو يعلى (1528)، والطَّبرانيّ (1663) كما رواه أيضًا الفريابي في"القدر" (119)، وابن أبي عاصم في"السنة" (143)، واللالكائيّ في"الاعتقاد" (1036) كلّهم من طرق عن حمّاد بن سلمة، عن حُميد، عن الحسن، عن جندب بن عبد اللَّه، فذكر الحديث.
والحسن مدلّس وقد عنعن، ولم أقف على التصريح بالتحديث.
وأمّا قول الهيمثيّ في المجمع (7/ 191):"رواه أبو يعلى وأحمد بنحوه، والطَّبرانيّ، ورجالهم رجال الصّحيح". فليس فيه دليل على اتصال الإسناد.
وبعض الرّواة أدخلوا بين الحسن والجندب:"أنس بن مالك" كما هو عند الخطيب في تاريخ بغداد (4/ 349)، وهذا وهم منهم.
والخلاصة أنّ حديث حجاج آدم وموسى عليهما السلام ثابت بالاتفاق، رواه أبو هريرة وعنه جماعة من التابعين، تتبعه الحافظ ابن حجر فقال:"وقع لنا من طريق عشرة عن أبي هريرة".
وعن أبي سعيد الخدريّ وعمر بن الخطّاب وغيرهم.
والحافظ ابن حجر عزا حديث جندب بن عبد اللَّه إلى النسائيّ، وحديث أبي سعيد إلى البزّار، ولم يحكم عليهما، ولكنه نقل عن ابن عبد البر أنه قال:"وروي عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم من وجوه أخرى من رواية الأئمة الثّقات الأثبات". انظر"الفتح" (11/ 506).
উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "নিশ্চয় মূসা (আঃ) বললেন: হে আমার রব, আপনি আমাদেরকে আদমকে দেখান, যিনি আমাদেরকে এবং নিজেকে জান্নাত থেকে বের করে দিয়েছেন। অতঃপর আল্লাহ তাআলা তাঁকে আদমকে দেখালেন। তিনি (মূসা) বললেন: আপনি কি আমাদের পিতা আদম? আদম তাঁকে বললেন: হ্যাঁ। তিনি (মূসা) বললেন: আপনিই কি সেই ব্যক্তি, যার মধ্যে আল্লাহ তাঁর রূহ ফুঁকে দিয়েছেন, আপনাকে সব নাম শিক্ষা দিয়েছেন এবং ফেরেশতাদেরকে নির্দেশ দিয়েছেন, ফলে তারা আপনাকে সিজদা করেছে? তিনি বললেন: হ্যাঁ। তিনি বললেন: কী কারণে আপনি আমাদেরকে এবং নিজেকে জান্নাত থেকে বের করে দিলেন? তখন আদম তাঁকে বললেন: আপনি কে? তিনি বললেন: আমি মূসা। তিনি বললেন: আপনি কি বনী ইসরাঈলের সেই নবী, যার সাথে আল্লাহ আড়ালের ওপার থেকে কথা বলেছেন এবং তাঁর ও আপনার মাঝে তাঁর সৃষ্টির কাউকে দূত হিসেবে রাখেননি? তিনি বললেন: হ্যাঁ। তিনি বললেন: তবে কি আপনি আল্লাহর কিতাবে এমনটি দেখতে পাননি যে, আমি সৃষ্টি হওয়ার আগেই (এ ঘটনা) লেখা ছিল? তিনি বললেন: হ্যাঁ। তিনি (আদম) বললেন: তাহলে আপনি কেন আমাকে এমন বিষয়ে তিরস্কার করছেন, যার ফায়সালা আল্লাহ তাআলার পক্ষ থেকে আমার পূর্বেই স্থির হয়ে আছে?" এ সময় রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: "সুতরাং আদম মূসাকে যুক্তির মাধ্যমে পরাভূত করলেন, আদম মূসাকে যুক্তির মাধ্যমে পরাভূত করলেন।"
1058 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لما خلق اللَّه آدم مسح ظهره فسقط من ظهره كلُّ نسمة هو خالقها من ذريّته إلى يوم القيامة، وجعل بين عيني كلِّ إنسان منهم وبيصًا من نور، ثم عرضهم على آدم فقال: أيْ ربّ، مَنْ هؤلاء؟ قال: هؤلاء ذريِّتُك. فرأى رجلًا منهم فأعجبه وبيص ما بين عينيه. فقال: أيْ ربِّ، مَنْ هذا؟ فقال هذا رجُلٌ من آخر الأمم من ذريّتِك يقال له: داود. فقال: ربّ كم جعلت عمره؟ قال: ستين سنة. قال: أيْ ربِّ، زِدْه من عمري أربعين سنة. فلما قضي عمر آدم جاءه ملك الموت، فقال: أو لم يبق من عمري أربعون سنة؟ قال: أو لم تعطها ابنك داود؟ قال: فجحد آدم فجحدتْ ذريَّتُه، ونَسِي آدمُ فنسيتْ ذرِّيَّتُه، وخَطئَ آدمُ فخطئت ذريَّتُه".
حسن: رواه الترمذيّ (3076) عن عبد بن حميد، حدّثنا أبو نعيم، حدّثنا هشام بن سعد، عن زيد بن أسلم، عن أبي صالح، عن أبي هريرة، فذكره.
وصحّحه الحاكم (2/ 325)، ورواه من طريق أبي نعيم، به، مثله.
وقال:"صحيح على شرط مسلم".
ومن هذا الطّريق رواه الفريابي في"القدر" (19).
وقال الترمذيّ:"حسن صحيح، وقد روي من غير وجه عن أبي هريرة".
قلت: فيه هشام بن سعد مختلف فيه، فضعَّفه ابن معين وأحمد والنسائيّ، وغيرهم ومشّاه بعضهم، وهو"صدوق له أوهام" كما في التقريب.
وأمّا الوجه الآخر الذي أشار إليه الترمذيّ فهو ما رواه ابن وهب في كتاب"القدر" (8)، وعنه الفريابي (20)، وأبو يعلى (6377) من طريق ابن وهب، أخبرني هشام بن سعد، عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار، عن أبي هريرة، فذكر مثله.
وقد سئل أبو زرعة عن هذين الطّريقين فقال:"حديث أبي نعيم أصح، وَهِمَ ابنُ وهب في هذا الحديث"."العلل" لابن أبي حاتم (2/ 88).
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যখন আল্লাহ আদমকে সৃষ্টি করলেন, তখন তিনি তাঁর পিঠে হাত বুলিয়ে দিলেন। ফলে তাঁর পিঠ থেকে কিয়ামত পর্যন্ত তাঁর বংশধরদের মধ্য থেকে আল্লাহ যাদের সৃষ্টি করবেন, সেই সমস্ত আত্মা নিচে পড়ে গেল। আর তাদের প্রত্যেকের দুই চোখের মাঝখানে তিনি আলোর চমক সৃষ্টি করে দিলেন। এরপর তিনি তাদেরকে আদমের সামনে পেশ করলেন। আদম বললেন: হে আমার প্রতিপালক, এরা কারা? তিনি বললেন: এরা তোমার বংশধর। তিনি তাদের মধ্যে একজন লোককে দেখতে পেলেন, যার দুই চোখের মধ্যের উজ্জ্বলতা তাকে মুগ্ধ করল। তিনি বললেন: হে আমার প্রতিপালক, ইনি কে? তিনি বললেন: এ হলো তোমার বংশধরদের মধ্যে শেষ উম্মতের একজন লোক, যাকে দাউদ বলা হয়। আদম বললেন: হে রব, আপনি তার জীবনকাল কত নির্ধারণ করেছেন? তিনি বললেন: ষাট বছর। আদম বললেন: হে আমার প্রতিপালক, আমার জীবন থেকে তাকে আরও চল্লিশ বছর বাড়িয়ে দিন। অতঃপর যখন আদমের জীবনকাল শেষ হয়ে গেল, তখন তাঁর কাছে মালাকুল মউত (মৃত্যুর ফেরেশতা) আগমন করলেন। আদম বললেন: আমার জীবনকালের কি আরও চল্লিশ বছর বাকি নেই? ফেরেশতা বললেন: আপনি কি তা আপনার পুত্র দাউদকে দিয়ে দেননি? রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: আদম অস্বীকার করলেন, তাই তার বংশধররাও অস্বীকার করল। আদম ভুলে গেলেন, তাই তার বংশধররাও ভুলে গেল। আর আদম ভুল করলেন, তাই তার বংশধররাও ভুল করল।
1059 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لما خلق اللَّه آدم ونفخ فيه الرُّوح عَطَسَ، فقال: الحمد للَّه، فحَمِدَ اللَّه بإذنه، فقال له ربُّه: يرحمُك اللَّهُ يا آدم، اذهبْ إلى أولئك الملائكةِ -إلى ملإ منهم جلوس- فَقُل السّلام عليكم، قالوا: وعليك السَّلامُ ورحمة اللَّه، ثم رجع إلى ربِّه فقال: إنّ هذه تحيَّتُك وتحيَّةُ بنيك
بينهم، فقال اللَّه له -ويداه مقبوضتان- اخْتَرْ أَيَّهُما شِئْتَ؛ قال: اخْترتُ يمين ربّي -وكلتا يدي ربي يمين مباركة- ثم بسطها فإذا فيها آدم وذريّتُه، فقال: أيْ ربّ ما هؤلاء؟ فقال: هؤلاء ذُريّتُك، فإذا كلُّ إنسان مكتوب عمره بين عينيه، فإذا فيهم رَجلٌ أضوؤهم أو من أضوئهم. قال: يا ربّ من هذا؟ قال: هذا ابنُك داودُ، قد كتب له عُمْرَ أربعين سنةً. قال: يا ربّ زدْه في عمره، قال: ذاك الذي كتبُ له. قال: أيْ ربِّ فإنّي قد جعلتُ له من عُمْري ستين سنةً. قال: أنت وذاك. قال: ثُم أُسْكن الجنّةَ ما شاء اللَّه ثم أُهْبِط منها، فكان آدمُ يَعُدُّ لنفسه. قال: فأتاه ملك الموت، فقال له آدم: قد عَجَّلْتَ، قد كُتِب لي ألْفُ سنةٍ. قال: بلى ولكنّك جعلتَ لابنِك داود ستين سنة. فجَحَدَ فجَحَدَتْ ذُرِّيَّتُه، ونَسِي فَنَسِيَتْ ذُرِيَّتُه. قال: فَمِنْ يومئذٍ أُمِرَ بالكتاب والشّهود".
حسن: رواه الترمذيّ (3368) عن محمد بن بشّار، حدّثنا صفوان بن عيسى، حدّثنا الحارث ابن عبد الرحمن بن أبي ذباب، عن سعيد بن أبي سعيد المقبريّ، عن أبي هريرة، فذكره.
وصحّحه ابن خزيمة، وأخرجه في كتاب التوحيد (107) من هذا الوجه - وعنه ابن حبان في صحيحه (6167).
وأخرجه الحاكم (1/ 64) من وجه آخر عن صفوان بن عيسى. وقال:
"صحيح على شرط مسلم، فقد احتجّ بالحارث بن عبد الرحمن بن أبي ذباب، وقد رواه عنه غير صفوان، وإنّما خرّجته من حديث صفوان لأنّي علوتُ فيه".
وقال الترمذيّ:"حسن غريب من هذا الوجه".
قلت: إسناده حسن من أجل كلام يسير في الحارث بن عبد الرحمن بن عبد اللَّه بن سعد بن أبي ذباب، غير أنّه حسن الحديث، وقد توبع.
فقد رواه ابنُ أبي عاصم في السنة (204) من هذا الوجه، ومن وجه آخر (205) ولم يسق لفظه كاملًا، ولكن فيه مبارك بن فضالة"صدوق يدلِّس ويسوِّي". كما في التقريب، وقد ضعّفه النسائيّ وغيره، إلا أنه لا بأس به في المتابعات، وساق له الحاكم إسنادًا آخر قائلًا:"وله شاهد صحيح، قال: حدّثنا أبو بكر محمد بن علي الفقيه الشّاشيّ في آخرين، قالوا: ثنا أبو بكر عروية، ثنا مخلد ابن مالك، ثنا أبو خالد الأحمر، عن داود بن أبي هند، عن الشّعبيّ، عن أبي هريرة، عن النبيّ صلى الله عليه وسلم، نحوه". انتهى.
وذكر هذا الحديث الدارقطني في العلل (1467) من طرق عن أبي هريرة وجعله محفوظًا عنه، إلا أن النسائي رجح رواية محمد بن عجلان عن سعيد، عن أبيه، عن عبد اللَّه بن سلام موقوفًا
عليه. (السنن الكبرى (9976)).
وقد رُوي عن ابن عباس، أنه قال: لما نزلت آيةُ الدَّيْن. قال رسولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم: إنّ أوّل مَنْ جَحَدَ آدمُ عليه السلام -أو: أوّل مَنْ جَحَد آدمُ- إنّ اللَّه عز وجل لما خلق آدمَ، مسح ظهرَه، فأخرجَ منه ما هو ذارئٌ إلى يوم القيامة، فجعل يَعْرِضُ ذُرِّيَته عليه، فرأى فيهم رجلًا يَزْهر، فقال: أيْ ربِّ، مَنْ هذا؟ قال: هذا ابنُك داودُ. قال: أيْ ربِّ، كم عُمرُه؟ قال: ستّون عامًا، قال: ربِّ زدْ في عمره. قال: لا، إلا أن أزيده من عمرك. وكان عمر آدم ألفَ عامٍ، فزاده أربعين عامًا، فكتب اللَّه عز وجل عليه بذلك كتابًا، وأشهد عليه الملائكة، فلما احتُضِر آدمُ، وأتته الملائكةُ لِتقبضه، قال: إنّه قد بقي من عمري أربعون عاما. فقيل: إنّك قد وهبتَها لابنك داود. قال: ما فعلتُ. وأبرز اللَّه عز وجل عليه الكتاب، وشهدتْ عليه الملائكةُ".
رواه الإمام أحمد (2270، 2713)، وأبو يعلى (2710)، والطّبرانيّ في الكبير (12928) كلّهم من طريق حمّاد بن سلمة، عن علي بن زيد، عن يوسف، عن ابن عباس، فذكره.
ومن هذا الوجه أخرجه أيضًا ابن أبي عاصم في"السنة" (204) مختصرًا جدًّا، وإسناده ضعيف من أجل علي بن زيد وهو ابن عبد اللَّه بن زهير بن عبد اللَّه بن جدعان التيمي البصريّ، وأهل العلم مطبقون على تضعيفه إلّا الترمذيّ فإنّه قال:"صدوق".
ورواية إعطاء آدم عليه السلام أربعين سنة من عمره لداود عليه السلام أرجح على رواية إعطائه إياه ستين سنة، فإن رواية الأربعين جاءت من طريق هشام بن سعد، عن زيد بن أسلم، عن أبي صالح السمان، عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعا، وقد قال الإمام أبوداود:"هشام بن سعد أثبت النّاس في زيد بن أسلم"، والإمام الترمذيّ لما أخرج رواية إعطاء آدم عليه السلام أربعين سنة من عمره لداود عليه السلام قال:"هذا حديث حسن صحيح" ولما أخرج رواية إعطائه ستين سنة قال عقبه:"هذا حديث حسن غريب من هذا الوجه" انظر: تحفة الأحوذي (8/ 365).
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যখন আল্লাহ আদমকে সৃষ্টি করলেন এবং তাঁর মধ্যে রূহ ফুঁকে দিলেন, তখন তিনি হাঁচি দিলেন। অতঃপর তিনি বললেন: "আলহামদুলিল্লাহ" (সমস্ত প্রশংসা আল্লাহর জন্য)। আল্লাহর অনুমতিক্রমে তিনি আল্লাহর প্রশংসা করলেন। তখন তাঁর রব তাঁকে বললেন: "আল্লাহ তোমার প্রতি রহম করুন, হে আদম! তুমি ঐ ফেরেশতাদের দিকে যাও— যারা সেখানে উপবিষ্ট রয়েছে— এবং তাঁদেরকে গিয়ে বলো: 'আসসালামু আলাইকুম' (তোমাদের উপর শান্তি বর্ষিত হোক)।" ফেরেশতারা উত্তরে বললেন: "ওয়া আলাইকুমুস সালাম ওয়া রাহমাতুল্লাহ" (আপনার উপরও শান্তি এবং আল্লাহর রহমত বর্ষিত হোক)। এরপর তিনি তাঁর রবের কাছে ফিরে এলেন এবং বললেন: "নিশ্চয়ই এটি আপনার এবং আপনার সন্তানদের পরস্পরের অভিবাদন।" তখন আল্লাহ তাঁকে— এই অবস্থায় যে তাঁর উভয় হাত মুষ্টিবদ্ধ ছিল— বললেন: "তুমি দুটির মধ্যে যেটি চাও, সেটি বেছে নাও।" আদম (আঃ) বললেন: "আমি আমার রবের ডান হাতটি বেছে নিলাম।" —আর তাঁর রবের উভয় হাতই বরকতময় ডান হাত—। অতঃপর আল্লাহ তা খুলে দিলেন। তখন তার মধ্যে আদম ও তাঁর বংশধরদের দেখা গেল। আদম (আঃ) বললেন: "হে আমার রব! এরা কারা?" আল্লাহ বললেন: "এরা তোমার বংশধর।" দেখা গেল, প্রত্যেক মানুষের বয়স তার দুই চোখের মাঝখানে লেখা আছে। আর তাদের মধ্যে একজন লোক ছিল, যে তাদের সবার চেয়ে উজ্জ্বল। তিনি বললেন: "হে আমার রব! ইনি কে?" আল্লাহ বললেন: "সে তোমার ছেলে দাউদ। তার জন্য চল্লিশ বছরের আয়ু লেখা হয়েছে।" তিনি বললেন: "হে আমার রব! তার আয়ু বাড়িয়ে দিন।" আল্লাহ বললেন: "সেটাই লেখা হয়েছে যা তার জন্য নির্ধারিত।" আদম (আঃ) বললেন: "হে আমার রব! আমি আমার জীবনের ষাট বছর তাকে দিয়ে দিলাম।" আল্লাহ বললেন: "তুমি এবং সে— ঠিক আছে।" (রাবী) বলেন: এরপর আদম (আঃ)-কে আল্লাহর ইচ্ছানুযায়ী জান্নাতে রাখা হলো, অতঃপর সেখান থেকে তাঁকে পৃথিবীতে নামিয়ে আনা হলো। আদম (আঃ) নিজের আয়ু গণনা করতে লাগলেন। তিনি বলেন: অতঃপর মালাকুল মউত (মৃত্যুর ফেরেশতা) তাঁর কাছে এলেন। আদম (আঃ) তাঁকে বললেন: "আপনি তাড়াতাড়ি করে এসেছেন। আমার জন্য তো এক হাজার বছর লেখা হয়েছিল।" ফেরেশতা বললেন: "হ্যাঁ, তবে আপনি আপনার পুত্র দাউদকে ষাট বছর দিয়ে দিয়েছেন।" অতঃপর আদম (আঃ) অস্বীকার করলেন, ফলে তাঁর বংশধররাও অস্বীকার করল। তিনি ভুলে গেলেন, ফলে তাঁর বংশধররাও ভুলে গেল। বর্ণনাকারী বলেন: সেই দিন থেকেই লিখিত দলিল ও সাক্ষ্যগ্রহণের নির্দেশ দেওয়া হলো।
1060 - عن عبد اللَّه بن عمرو بن العاص قال: إنه سمع رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"إنّ قلوب بني آدم كلَّها بين أصبعين من أصابع الرّحمن كقلب واحد، يصرِّفه حيث يشاء". ثم قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"اللهمّ مصرِّف القلوب صرِّف قلوبنا على طاعتك".
صحيح: رواه مسلم في القدر (2654) من طرق عن عبد اللَّه بن يزيد المقرئ، حدّثنا حيوة، أخبرني أبو هاني، أنه سمع أبا عبد الرحمن الحبليّ، أنه سمع عبد اللَّه بن عمرو بن العاص، فذكره.
وبقية الأحاديث بهذا المعنى انظرها في كتاب الأذكار والأدعية.
আবদুল্লাহ ইবনে আমর ইবনুল আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছেন: "নিশ্চয়ই আদম সন্তানদের সমস্ত অন্তর রহমানের (আল্লাহর) আঙ্গুলসমূহের মধ্যস্থ দু'টি আঙ্গুলের মাঝে একটি অন্তরের মতো রয়েছে। তিনি যেভাবে ইচ্ছা সেটিকে পরিবর্তন করেন।" অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "ইয়া আল্লাহ, হে অন্তরসমূহের পরিবর্তনকারী! আমাদের অন্তরসমূহকে আপনার আনুগত্যের দিকে ফিরিয়ে দিন।"