হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (11308)


11308 - عن * *




১১৩০৮ - থেকে ** **









আল-জামি` আল-কামিল (11309)


11309 - عن أبي رمثة قال: قال أبي للنبي صلى الله عليه وسلم: أرني هذا الذي بظهرك، فإني رجل طبيب قال:"الله عز وجل الطبيب، بل أنت رجل رفيق، طبيبها الذي خلقها".

صحيح: رواه أبو داود (4207)، وعبد الله بن أحمد في زوائد المسند (7110)، وأبو نعيم في الطب النبوي (41 - 42) كلهم من حديث ابن أبجر، عن إياد بن لقيط، عن أبي رمثة فذكره. واللفظ لأبي داود.

ولفظ أحمد: فقال له أبي: إني رجل طبيب، فأرني هذه السلعة التي بظهرك، قال:"وما تصنع بها؟" قال: أقطعها، قال:"لست بطبيب، ولكنك رفيق، طبيبها الذي وضعها" وقال غيره:"خلقها".

وابن أبجر هو: عبد الملك بن سعيد بن حيان المعروف بابن أبجر من رجال الصحيح، والحديث مخرج بطوله في موضعه.




আবু রুমসাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর পিতা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-কে বললেন, আপনার পিঠে যা আছে তা আমাকে দেখান, কারণ আমি একজন চিকিৎসক। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্ল-ই হলেন (প্রকৃত) চিকিৎসক। বরং আপনি একজন দয়ালু (বা সহানুভূতিশীল) ব্যক্তি। এর প্রকৃত চিকিৎসক হলেন তিনিই যিনি এটিকে সৃষ্টি করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11310)


11310 - عن عائشة قالت: مرض رسول الله صلى الله عليه وسلم فوضعت يدي على صدره، فقلت: أذهب البأس رب الناس، أنت الطبيب، وأنت الشافي، وكان رسول الله صلى الله عليه وسلم، يقول:"ألحقني بالرفيق الأعلى، وألحقني بالرفيق الأعلى".

صحيح: رواه أحمد (24774)، والنسائي في عمل اليوم والليلة (1015)، والبيهقي في الأسماء والصفات (151) كلهم من حديث نافع بن عمر الجمحي، عن ابن أبي مليكة، عن عائشة فذكرته. وإسناده صحيح.

قوله:"أنت رفيق" أي أنت ترفق بالمرضى والمصابين لأن الرفق من طبيعة الطبيب، وما سُمِّيَ
الطبيب إلا من أجله.

وقوله:"طبيبها الذي خلقها"، وقولها: أنت الطبيب يعني الطبيب الحقيقي الذي يعلم بحقيقة الداء والدواء، والقادر على الصحة والشفاء، وهذا خاص بالله.

وأما إطلاق الطبيب على الإنسان لكونه يعالج المرضى سواء شُفيَ منه المريض أم لم يُشفَ فلا مانع من ذلك، وقد جاء:"ادعو طبيب بني فلان" في الحديث الآتي:




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) অসুস্থ হলেন। তখন আমি তাঁর বুকে আমার হাত রাখলাম এবং বললাম: হে মানুষের রব, কষ্ট দূর করে দিন। আপনিই তো চিকিৎসক, আপনিই তো আরোগ্যদাতা। আর আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলছিলেন: "আমাকে মহান বন্ধুর (আল-রাফীক আল-আ'লা) সাথে মিলিত করে দিন, আমাকে মহান বন্ধুর (আল-রাফীক আল-আ'লা) সাথে মিলিত করে দিন।"









আল-জামি` আল-কামিল (11311)


11311 - عن رجل من الأنصار قال: عاد رسول الله صلى الله عليه وسلم رجلا به جرح، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"ادعوا له طبيب بني فلان"، قال: فدعوه فجاء، فقال: يا رسول الله، ويغني الدواء شيئا؟ فقال:"سبحان الله، وهل أنزل الله من داء في الأرض، إلا جعل له شفاء".

صحيح: رواه أحمد (23156) عن إسحاق بن يوسف، حدثنا سفيان (هو الثوري)، عن منصور (هو ابن المعتمر)، عن هلال بن يساف، عن ذكوان، عن رجل من الأنصار فذكره. وإسناده صحيح.

وقد روي من وجه آخر عن هلال بن يساف مرسلا. رواه ابن أبي شيبة (23880)، وأبو نعيم في الطب النبوي (33، 34)، والحكم للموصول.




জনৈক আনসারী সাহাবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এমন একজন ব্যক্তির সাথে সাক্ষাৎ করতে গেলেন যার আঘাত ছিল। তখন আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "অমুক গোত্রের চিকিৎসককে তার জন্য ডেকে আনো।" তিনি (রাবী) বলেন, তারা তাকে ডাকল, আর সে (চিকিৎসক) আসল। সে বলল: হে আল্লাহর রাসূল! ওষুধ কি (রোগীর) কোনো উপকার করতে পারে? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "সুবহানাল্লাহ! আল্লাহ পৃথিবীতে এমন কোনো রোগই নাযিল করেননি, যার জন্য তিনি আরোগ্য (বা নিরাময়) নির্ধারণ করেননি।"









আল-জামি` আল-কামিল (11312)


11312 - عن ابن عباس قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم: نعمتان مغبون فيهما كثير من الناس: الصحة والفراغ.

صحيح: رواه البخاري في الرقاق (6412) عن المكي بن إبراهيم، أخبرنا عبد الله بن سعيد، - وهو ابن أبي هند- عن أبيه، عن ابن عباس فذكره.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: দুটি নেয়ামত রয়েছে, যেগুলোতে বহু মানুষ ক্ষতিগ্রস্ত (অবহেলা করে) হয়: সুস্বাস্থ্য এবং অবসর সময়।









আল-জামি` আল-কামিল (11313)


11313 - عن أبي خُزامة -أحد بني الحارث بن سعد بن هُزيم- حدّثه، أنّ أباه حدّثه أنّه قال لرسول الله صلى الله عليه وسلم: يا رسول الله، أرأيتَ دواءً نتداوى به، ورُقًى نسْترقيها، وتُقىً نتّقيها هل تردُّ ذلك من قدر الله من شيء؟ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إنّه من قدر الله".

حسن: رواه عبد الله بن وهب في"الجامع" (699) قال: أخبرني يونس بن يزيد وعمرو بن الحارث وابن سمعان، أنّ ابن شهاب أخبرهم أنّ أبا خُزامة، فذكره.

وأخرجه أحمد (15474)، والحاكم (4/ 199) من طريق ابن وهب، إلّا أن أحمد رواه عنه، عن عمرو بن الحارث وحده.

وهذا إسناد حسن؛ لأنّ أبا خُزامة لم يرو عنه إلّا الزّهريّ، وهو تابعي معروف، قد عرفه الزهريّ، ووهم من جعله من الصّحابة كالحافظ في التقريب فقال:"صحابي، له حديث في الرُّقى"
وإنما الصحبة لأبيه.

وللحديث طرق أخرى عند الترمذي (3148، 2065)، وابن ماجه (3437) وغيرهما، غير أن ما ذكرته هو أصحها، وهو مخرج في كتاب الإيمان.




আবূ খুযামার পিতা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বললেন: ইয়া রাসূলাল্লাহ! আপনি কি মনে করেন যে, যে ঔষধ দ্বারা আমরা চিকিৎসা করি, যে রুক্‌ইয়া দ্বারা ঝাড়ফুঁক করাই এবং যে সকল প্রতিরোধমূলক ব্যবস্থা গ্রহণ করি—তা কি আল্লাহর তাকদীরকে সামান্যতমও রদ করতে পারে? তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "এগুলোও আল্লাহর তাকদীরের অন্তর্ভুক্ত।"









আল-জামি` আল-কামিল (11314)


11314 - عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"ما أنزل الله داء إلا أنزل له شفاء"

صحيح: رواه البخاري في الطب (5678) عن محمد بن المثنى، ثنا أبو أحمد الزبيري، ثنا عمر بن سعيد بن أبي حسين، ثنا عطاء بن أبي رباح، عن أبي هريرة فذكره.

ورواه أبو نعيم الأصبهاني في الطب النبوي (9) من وجه آخر بإسناد صحيح وزاد في أوله:"يا أيها الناس تداووا".

ورواه الحاكم (4/ 401) من طريق شبيب بن شيبة قال: حدثنا عطاء بن أبي رباح، عن أبي سعيد الخدري فذكر نحوه.

وهذا خطأ أخطأ فيه شبيب بن شيبة بيّنه البزار - كشف الأستار (3106) فقال:"الصواب رواية ابن أبي حسين، عن أبي هريرة".

قوله:"ما أنزل الله داءً" أي ما خلق الله داءً لما كان الخلق من الله تعالى وهو في السماء عبّر عنه بالإنزال لقوله تعالى: {يُدَبِّرُ الْأَمْرَ مِنَ السَّمَاءِ إِلَى الْأَرْضِ} [سورة السجدة: 5]




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আল্লাহ এমন কোনো ব্যাধি অবতীর্ণ করেননি, যার জন্য তিনি আরোগ্য অবতীর্ণ করেননি।









আল-জামি` আল-কামিল (11315)


11315 - عن جابر عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قال:"لكل داء دواء، فإذا أصيب دواء الداء برأ بإذن الله عز وجل".

صحيح: رواه مسلم في السلام (2204) من طرق، عن ابن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث، عن عبد ربه بن سعيد، عن أبي الزبير، عن جابر فذكره.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "প্রত্যেক রোগেরই ওষুধ রয়েছে। যখন রোগের সঠিক ওষুধটি পাওয়া যায়, তখন মহান আল্লাহর ইচ্ছায় সে আরোগ্য লাভ করে।"









আল-জামি` আল-কামিল (11316)


11316 - عن أنس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن الله حيث خلق الداء خلق الدواء، فتداووا"

حسن: رواه أحمد (12596)، وابن أبي شيبة (23881)، وأبو نعيم في الطب النبوي (49) كلهم من حديث يونس بن محمد (هو المؤدب)، عن حرب بن ميمون قال: سمعت عمران العمي قال: سمعت أنسا يقول فذكره.

وإسناده حسن من أجل عمران العمي وهو ابن قدامة البصري لا بأس به قليل الحديث، مترجم في الجرح والتعديل (6/ 303)، ولم يترجم في التعجيل مع أنه على شرطه، وفيه أيضا حرب بن ميمون وهو الأكبر حسن الحديث.

هذا الحديث يفسِّرُ قوله صلى الله عليه وسلم:"ما أنزل الله داءً إلا أنزل له شفاءً" أي ما خلق الله داءً إلا خلق له دواءً.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয়ই আল্লাহ্ যখন রোগ সৃষ্টি করেছেন, তখন প্রতিষেধকও সৃষ্টি করেছেন। সুতরাং তোমরা চিকিৎসা গ্রহণ করো।"









আল-জামি` আল-কামিল (11317)


11317 - عن أسامة بن شريك قال: أتيت النبي صلى الله عليه وسلم وأصحابه كأنما على رؤوسهم الطير،
فسلمت ثم قعدت، فجاء الأعراب من هاهنا وهاهنا فقالوا: يا رسول الله! أنتداوى؟ فقال:"تداووا؛ فإن الله عز وجل لم يضع داء إلا وضع له دواء غير داء واحد الهرم".

صحيح: رواه أبوداود (3855)، والترمذي (2038)، وابن ماجه (3436)، وأحمد (18454)، والبخاري في الأدب المفرد (291)، وصحّحه ابن حبان (6064)، والحاكم (4/ 399 - 400) كلهم من طرق، عن زياد بن علاقة، عن أسامة بن شريك به. واللفظ لأبي داود. وفي بعض الروايات زيادة"السام" وهو الموت. وإسناده صحيح.

وقال الترمذي:"هذا حديث حسن صحيح".

وقال الحاكم:"هذا حديث صحيح الإسناد، فقد رواه عشرة من أئمة المسلمين وثقاتهم عن زياد بن علاقة منهم: مسعر بن كدام ومالك بن مغول الجبلي" ثم بدأ يسرد روايات هؤلاء عن زياد ابن علاقة.




উসামা ইবনু শারীক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ও তাঁর সাহাবীগণের নিকট আসলাম। তারা এমনভাবে স্থির ছিলেন যেন তাদের মাথার উপর পাখি বসে আছে। আমি সালাম দিলাম এবং বসে পড়লাম। অতঃপর আরবের বেদুইনরা এদিক-সেদিক থেকে এসে বললো, "হে আল্লাহর রাসূল! আমরা কি চিকিৎসা গ্রহণ করব?" তিনি বললেন, "তোমরা চিকিৎসা গ্রহণ করো। কারণ আল্লাহ আযযা ওয়া জাল এমন কোনো রোগ দেননি, যার নিরাময়ের জন্য কোনো ঔষধ বা আরোগ্য রাখেননি, কেবল একটি রোগ ব্যতীত—তা হলো বার্ধক্য।"









আল-জামি` আল-কামিল (11318)


11318 - عن عبد الله بن مسعود عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"ما أنزل الله داء إلا أنزل له شفاء، علمه من علمه، وجهله من جهله".

صحيح: رواه ابن ماجه (3438)، وأحمد (3578)، والحاكم (4/ 399) كلهم من طريق سفيان الثوري، عن عطاء بن السائب، عن أبي عبد الرحمن السلمي قال: أخبرنا ابن مسعود فذكره.

وصحّحه ابن حبان (6062) ورواه من وجه آخر عن عطاء بن السائب.

وإسناده صحيح لأن سفيان الثوري ممن روى عن عطاء بن السائب قبل اختلاطه، وقد تابعه غيره فرووه عن عطاء بن السائب وهم سمعوا منه بعد الاختلاط، فتبين أن عطاء لم يختلط في هذا الحديث كما أن البعض رووه عن عطاء بن السائب موقوفا، والحكم لمن رفع.

قال الحاكم:"صحيح الإسناد ولم يخرجاه، والأصل في هذا الباب حديث أسامة بن شريك الذي علّله الشيخان بأنهما لم يجدا له راويا عن أسامة بن شريك غير زياد بن علاقة" اهـ

هكذا قال! ومن المعلوم أنه ليس من شرط الشيخين أن يكون لكل حديث أكثر من تابعي فإن الدارقطني أجابه على قوله هذا بأن الشيخين أو أحدهما أخرج أحاديث في صحيحهما وليس لها إلا تابعي واحد وذكر الأمثلة لذلك. انظر: المستدرك (4/ 401).

وفي معناه ما روي عن أبي الدرداء قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن الله عز وجل أنزل الداء والدواء، وجعل لكل داء دواءً، فتداوَوْا، ولا تداوَوْا بحرام".

رواه أبو داود (3875). وفي إسناده ثعلبة بن مسلم الخثعمي الشامي مجهول، لم يوثقه غير ابن حبان.

وفي معناه ما روي أيضا عن أبي سعيد الخدري أيضا أن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"إن الله لم ينزل داء أو لم يخلق داء إلا أنزل له أو خلق له دواء، علمه من علمه وجهله من جهله إلا السام". قالوا: يا رسول الله ما السام؟ قال:"الموت".
رواه البزار - كشف الأستار (3016)، والحاكم (4/ 401)، والطبراني في الأوسط (1587)

كلهم من حديث شبيب بن شيبة، ثنا عطاء بن أبي رباح، ثنا أبو سعيد فذكره. واللفظ للحاكم.

وشبيب بن شيبة ضعيف عند جمهور أهل العلم وأنه أخطأ في هذا الحديث وبه أعله البزار

فقال: فيه شبيب، عن عطاء، عن أبي سعيد، وقال عمر بن سعيد بن أبي حسين، عن عطاء، عن

أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم" انتهى.

قلت: وهو كما قال، وقد مضى حديث أبي هريرة في أول الباب.




আব্দুল্লাহ ইবনে মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "আল্লাহ এমন কোনো রোগ (ব্যাধি) অবতীর্ণ করেননি, যার জন্য তিনি আরোগ্য (নিরাময়) অবতীর্ণ করেননি। যার জানা আছে, সে তা জানে; আর যার জানা নেই, সে তা জানে না।"









আল-জামি` আল-কামিল (11319)


11319 - عن أبي هريرة قال: نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عن الدواء الخبيث

حسن: رواه أبو داود (3870)، والترمذي (2045)، وابن ماجه (3459)، وأحمد (9756)، وصحّحه الحاكم (4/ 410) كلهم من طرق، عن يونس بن أبي إسحاق، عن مجاهد، عن أبي هريرة فذكره.

وإسناده حسن من أجل يونس بن أبي إسحاق فإنه حسن الحديث.

قال الحاكم:"هذا حديث صحيح على شرط الشيخين".

تنبيه: وقع في مطبوعة المستدرك:"عن يونس، عن أبي إسحاق" وهو خطأ. انظر: إتحاف المهرة (19750).

وقوله:"الدواء الخبيث" جاء عند الترمذي وابن ماجه وأحمد يعني: السم.

وقد جاء الوعيد الشديد على شرب السم كما في الحديث الآتي:




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম অপবিত্র (বা ক্ষতিকর) ঔষধ ব্যবহার করতে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11320)


11320 - عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"من تَحَسَّى سُمًّا فقتلَ نفسَه فسُمُّه في يده، يتحسَّاه في نار جهنم خالدا فيها أبدا".

متفق عليه: رواه البخاري في الطب (5778)، ومسلم في الإيمان (109: 175) كلاهما من طريق خالد بن الحارث، حدئنا شعبة، عن سليمان قال: سمعت ذكوان يحدث عن أبي هريرة فذكره في أثناء حديث.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “যে ব্যক্তি বিষ পান করে নিজেকে হত্যা করে, তার বিষ তার হাতে থাকবে এবং সে তা জাহান্নামের আগুনে চিরস্থায়ীভাবে পান করতে থাকবে।”









আল-জামি` আল-কামিল (11321)


11321 - عن أم سلمة قالت: اشتكت ابنة لي، فنبذت لها في كوز، فدخل النبي صلى الله عليه وسلم وهو يغلي فقال:"ما هذا؟" فقلت: إن ابنتي اشتكت فنبذنا لها هذا فقال صلى الله عليه وسلم:"إن الله لم يجعل شفاءكم في حرام".

حسن: رواه أبو يعلى (6966) -وعنه ابن حبان (1391) - وأحمد في الأشربة (159) كلاهما من طريق جرير (وهو ابن عبد الحميد)، عن الشيباني (وهو أبو إسحاق سليمان)، عن حسان بن مخارق، عن أم سلمة فذكرته.

وإسناده حسن من أجل حسان بن مخارق فقد روى عنه أكثر من واحد، وذكره ابن حبان في
الثقات، وهو حسن الحديث إذا كان لحديثه أصل، ولم يأت بما ينكر عليه.




উম্মে সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমার এক কন্যা অসুস্থ হয়ে পড়লে, আমি তার জন্য একটি কলসিতে নাবীয (খেজুর বা কিশমিশ ভিজিয়ে প্রস্তুতকৃত পানীয়) তৈরি করলাম। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেখানে প্রবেশ করলেন, আর সেটি (নাবীযটি) ফেনা উঠছিল (বা ফুটছিল)। তিনি জিজ্ঞেস করলেন: "এটা কী?" আমি বললাম: আমার মেয়ে অসুস্থ, তাই আমরা তার জন্য এটি তৈরি করেছি। তখন তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "নিশ্চয়ই আল্লাহ্ তোমাদের আরোগ্য বা নিরাময় কোনো হারামের (অবৈধ বস্তুর) মধ্যে রাখেননি।"









আল-জামি` আল-কামিল (11322)


11322 - عن أبي الدرداء قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن الله عز وجل أنزل الداءَ والدواءَ، وجعل لكل داء دواءً، فتَدَاوَوْا ولا تداووا بحرام".

حسن: رواه أبو داود (3874) عن محمد بن عبادة الواسطي، حدثنا يزيد بن هارون، أخبرنا إسماعيل بن عياش، عن ثعلبة بن مسلم، عن أبي عمران، عن أم الدرداء، عن أبي الدرداء فذكره.

وإسناده حسن من أجل ثعلبة بن مسلم، فقد روى عنه جمع، وذكره ابن حبان في الثقات، فمثله يحسن حديثه إذا كان له أصل، ولم يأت بما ينكر عليه، وكذلك أبو عمران الأنصاري صدوق، وإسماعيل بن عياش حسن الحديث فيما رواه عن أهل الشام، وهذا منه، وقد اختلف عليه على وجوه أخرى إلا أن ما ذكرته هو أسلمها.




আবূ দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "নিশ্চয় আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্ল রোগ ও আরোগ্য (ওষুধ) অবতীর্ণ করেছেন এবং প্রত্যেক রোগের জন্য ওষুধ নির্ধারণ করেছেন। সুতরাং তোমরা চিকিৎসা গ্রহণ করো, কিন্তু হারাম (নিষিদ্ধ বস্তু) দ্বারা চিকিৎসা গ্রহণ করো না।"









আল-জামি` আল-কামিল (11323)


11323 - عن وائل بن حُجر الحضرمي: أن طارق بن سويد الجعفي سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن الخمر، فنهاه أو كره أن يصنعها فقال: إنما أصنعها للدواء فقال:"إنه ليس بدواءٍ، ولكنه داءٌ".

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1984: 12) من طرق، عن محمد بن جعفر، حدثنا شعبة، عن سماك بن حرب، عن علقمة بن وائل، عن أبيه وائل الحضرمي فذكره.

ورواه حماد بن سلمة عن سماك بن حرب عن طارق بن سويد فجعله من مسند طارق كما يأتي:




ওয়াইল ইবনু হুজর আল-হাদরামি (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তারিক ইবনু সুয়াইদ আল-জু'ফী রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে মদ সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলেন। তখন তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে তা তৈরি করতে নিষেধ করলেন অথবা তিনি তা অপছন্দ করলেন। তখন সে বলল, আমি তো কেবল তা ঔষধের জন্য তৈরি করি। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "নিশ্চয়ই তা ঔষধ নয়, বরং তা হলো ব্যাধি।"









আল-জামি` আল-কামিল (11324)


11324 - عن طارق بن سويد الحضرمي، قال: قلت: يا رسول الله، إن بأرضنا أعنابا نعتصرها، فنشرب منها؟ قال:"لا"، فراجعته، قلت: إنا نستشفي به للمريض، قال:"إن ذلك ليس بشفاء، ولكنه داء".

صحيح: رواه ابن ماجه (3500)، وأحمد (18787)، وصحّحه ابن حبان (1389) كلهم من حديث حماد بن سلمة، حدثنا سماك بن حرب، عن علقمة بن وائل، عن طارق بن سويد فذكره. وإسناده صحيح.

والطريقان محفوظان، فإن طارق بن سويد هو السائل فمرة رواه علقمة بن وائل عنه، ومرة عن أبيه الذي يحكي السؤال من طارق بن سويد.

وقوله:"نعتصرها فنشرب منها" أي بعد أن تصير خمرا وإلا فشراب العنب ليس بحرام.

وقوله:"ولكنه داء" أي سببا لأمراض مختلفة كما هو المحقق الآن، فلا تغترن بمن يقول: إن فيها الصحة والقوة.




তারিক ইবনু সুওয়াইদ আল-হাদরামি (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি বললাম: ইয়া রাসূলাল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আমাদের এলাকায় আঙ্গুর উৎপন্ন হয়, আমরা তা নিংড়িয়ে (শরাব বানিয়ে) পান করি? তিনি বললেন: "না।" তখন আমি তাঁকে পুনরায় জিজ্ঞেস করলাম, আমি বললাম: আমরা অসুস্থদের জন্য তা দ্বারা আরোগ্য লাভের চেষ্টা করি। তিনি বললেন: "নিশ্চয়ই তা আরোগ্য নয়, বরং তা হচ্ছে রোগ (ব্যাধি)।"









আল-জামি` আল-কামিল (11325)


11325 - عن عبد الرحمن بن عثمان أن طبيبا سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن ضفدع يجعلها في دواء، فنهاه النبي صلى الله عليه وسلم عن قتلها.
حسن: رواه أبو داود (3871)، والنسائي (4355)، وأحمد (15757)، وصحّحه الحاكم (4/ 410 - 411) كلهم من طرق، عن ابن أبي ذئب، عن سعيد بن خالد، عن سعيد بن المسيب، عن عبد الرحمن بن عثمان التيمي فذكره.

وإسناده حسن من أجل سعيد بن خالد وهو ابن عبد الله بن قارظ الكناني فإنه حسن الحديث.

وأما ما روي عن عبد الله بن عمرو قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"ما أبالي ما أتيت إن أنا شربت ترياقا أو تعلقت تميمة أو قلت شعرا من قبل نفسي". فإسناده ضعيف.

رواه أبو داود (3869)، وأحمد (7081) كلاهما من حديث عبد الله بن يزيد، حدثنا سعيد بن أبي أيوب، حدثنا شرحبيل بن شريك المعافري، عن عبد الرحمن بن رافع التنوخي قال: سمعت عبد الله بن عمرو فذكره.

إلا أنه وقع في سنن أبي داود: شرحبيل بن يزيد، وهو خطأ.

وقال أبو داود: هذا كان للنبي صلى الله عليه وسلم خاصة وقد رخص فيه قوم -يعني في الترياق.

وإسناده ضعيف من أجل عبد الرحمن بن رافع التنوخي قال فيه البخاري:"في حديثه مناكير".

وقال الذهبي في المهذب (15186):"هذا حديث منكر، تكلم في ابن رافع من أجله، أو لعله من خصائصه عليه السلام، فإنه رخص في الشعر لغيره" اهـ




আব্দুল রহমান ইবনে উসমান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, একদা একজন ডাক্তার নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে ব্যাঙ সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলেন, যা সে ওষুধে ব্যবহার করবে। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে তা (ব্যাঙ) হত্যা করতে নিষেধ করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11326)


11326 - عن أم المنذر بنت قيس الأنصارية قالت: دخل على رسول الله صلى الله عليه وسلم ومعه عليٌّ، وعليٌّ ناقِهٌ، ولنا دوالى معلقة، فقام رسول الله صلى الله عليه وسلم يأكل منها، وقام عليٌّ ليأكل فطفق رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول لعلي:"مَهْ إنك ناقِهٌ". حتى كفَّ عليٌّ قالت: وصنعت شعيرا وسلقا، فجئت به فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"يا علي أصِبْ من هذا فهو أنفع لك".

حسن: رواه أبو داود (3856)، والترمذي (2037 م)، وابن ماجه (34429)، وأحمد (27051 - 27053)، والحاكم (4/ 204) كلهم من طرق، عن فليح بن سليمان، عن أيوب بن عبد الرحمن بن صعصعة، عن يعقوب بن أبي يعقوب، عن أم المنذر بنت قيس فذكرته.

وقال الترمذي:"هذا حديث حسن غريب".

قلت: وهو كما قال؛ فإن فليح بن سليمان مختلف فيه غير أنه حسن الحديث، ويعقوب بن أبي يعقوب وأيوب بن عبد الرحمن صدوقان.

ورواه الترمذي (2037) من طريق فليح بن سليمان، عن عثمان بن عبد الرحمن التيمي، عن يعقوب بن أبي يعقوب، عن أم المنذر فذكرت نحوه.

وقال الترمذي:"هذا حديث حسن غريب لا نعرفه إلا من حديث فليح".
وقوله:"ناقه" نَقِهَ المريضُ إذا برأ وأفاق، وكان قريب العهد بالمرض لم يرجع إليه كمال صحته وقوته.




উম্মুল মুনযির বিন্ত কায়স আনসারিয়্যাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমার নিকট আসলেন, তাঁর সাথে আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-ও ছিলেন। আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তখন সবেমাত্র রোগমুক্ত হয়েছেন (অর্থাৎ, দুর্বলতা পুরোপুরি কাটেনি)। আমাদের কাছে ঝুলন্ত তাজা খেজুরের কাঁদি ছিল। অতঃপর রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দাঁড়িয়ে তা থেকে খাচ্ছিলেন। আলীও তা থেকে খেতে চাইলেন। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আলীকে (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলতে লাগলেন: "সাবধান! তুমি সবেমাত্র রোগমুক্ত হয়েছো।" ফলে আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বিরত হলেন। তিনি (উম্মুল মুনযির) বলেন, এরপর আমি যব ও পালংশাক (বা বীট পাতা) দিয়ে খাবার তৈরি করলাম এবং তা নিয়ে আসলাম। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন: "হে আলী, তুমি এটা থেকে গ্রহণ করো। কারণ, এটি তোমার জন্য অধিক উপকারী।"









আল-জামি` আল-কামিল (11327)


11327 - عن قتادة بن النعمان قال: إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إذا أحب الله عبدا حماه الدنيا كما يظل أحدكم يحمي سقيمه الماءَ".

حسن: رواه الترمذي (2036)، وأحمد في الزهد (57)، وصحّحه ابن حبان (669)، والحاكم (4/ 207) كلهم من طريق إسماعيل بن جعفر، عن عمارة بن غزية، عن عاصم بن عمر بن قتادة، عن محمود بن لبيد، عن قتادة بن النعمان ذكره.

قال الترمذي:"وهذا حديث حسن غريب، وقد روي هذا الحديث عن محمود بن لبيد، عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسلا". وسبق تخريجه مفصلا.




ক্বাতাদাহ ইবনুন নু'মান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "যখন আল্লাহ কোনো বান্দাকে ভালোবাসেন, তখন তিনি তাকে দুনিয়া (দুনিয়ার মোহ) থেকে রক্ষা করেন, ঠিক যেমন তোমাদের কেউ তার অসুস্থ রোগীকে পানি পান করা থেকে বিরত রাখে।"