আল-জামি` আল-কামিল
11328 - عن ابن عباس عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"الشفاء في ثلاثة: في شرطة محجم، أو شربة عسل، أو كية بنار، وأنهى أمتي عن الكي".
صحيح: رواه البخاري في الطب (5681) عن محمد بن عبد الرحيم، أخبرنا سريج بن يونس أبو الحارث، ثنا مروان بن شجاع، عن سالم الأفطس، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس فذكره.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: আরোগ্য তিনটি জিনিসের মধ্যে রয়েছে: শিঙ্গা লাগানোয় (রক্ত বের করা), অথবা মধু পানে, অথবা আগুন দিয়ে পুড়িয়ে সেঁক দেওয়াতে। আর আমি আমার উম্মতকে আগুন দিয়ে সেঁক দেওয়া (দাগানো) থেকে নিষেধ করি।
11329 - عن عاصم بن عمر بن قتادة قال: جاءنا جابر بن عبد الله في أهلنا ورجل يشتكي خُراجًا به أو جِراحًا فقال: ما تشتكي؟ قال: خُراج بي قد شق علي فقال: يا غلام ائتني بحجام فقال له: ما تصنع بالحجام يا أبا عبد الله؟ قال: أريد أن أعلق فيه محجما قال: والله! إن الذباب ليصيبني أو يصيبني الثوب فيؤذيني ويشق علي، فلما رأى تبرمه من ذلك قال: إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"إن كان في شيء من أدويتكم خير ففي شرطة محجم أو شربة من عسل أو لذعة بار". قال رسول الله صلى الله عليه وسلم"وما أحب أن أكتوي". قال: فجاء بحجام فشرطه فذهب عنه ما يجد.
متفق عليه: رواه مسلم في السلام (2205: 71) عن نصر بن علي الجهضمي، ثني أبي، ثنا عبد الرحمن بن سليمان، عن عاصم بن عمر بن قتادة فذكره.
ورواه البخاري في الطب (5683) من طريق عبد الرحمن بن الغسيل به مقتصرا على المرفوع.
وقوله:"رجل يشتكي" هو المقنع بن سنان كما ورد في رواية أخرى.
জাবির ইবনু আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: জাবির ইবনু আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাদের পরিবারের কাছে এলেন। তখন এক ব্যক্তি তার শরীরে হওয়া ফোঁড়া বা জখমের অভিযোগ করছিল। তিনি বললেন: তুমি কিসের অভিযোগ করছো? লোকটি বলল: আমার একটি ফোঁড়া হয়েছে যা আমাকে খুব কষ্ট দিচ্ছে। তিনি বললেন: হে বালক, আমার কাছে একজন শিঙা লাগানেওয়ালাকে নিয়ে আসো। লোকটি তাকে বলল: হে আবূ আব্দুল্লাহ, আপনি শিঙা লাগানেওয়ালাকে দিয়ে কী করবেন? তিনি বললেন: আমি সেখানে শিঙার কাপ লাগাতে চাই। লোকটি বলল: আল্লাহর কসম! আমার উপর মাছি বসলেও বা কাপড় লাগলেও আমার কষ্ট হয় এবং যন্ত্রণা দেয়। যখন তিনি (জাবির) তার (লোকটির) বিতৃষ্ণা দেখতে পেলেন, তখন বললেন: আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি: "যদি তোমাদের চিকিৎসার কোনো বস্তুতে কল্যাণ থাকে, তবে তা হলো শিঙা লাগানোর কাটার মধ্যে, অথবা মধু পান করার মধ্যে, অথবা আগুন দিয়ে দাগ দেওয়ার (অগ্নিদগ্ধ করার) মধ্যে।" রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আরও বললেন: "তবে আমি আগুন দিয়ে দাগ দেওয়া পছন্দ করি না।" রাবী বলেন: অতঃপর একজন শিঙা লাগানেওয়ালা আনা হলো। সে সেখানে শিঙা লাগাল। ফলে তার সকল কষ্ট দূর হয়ে গেল।
11330 - عن معاوية بن خديج قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن كان في شيء شفاء ففي شرطة محجم، أو شربة عسل، أو كية بنار تصيب ألما، وما أحب أن أكتوي"
صحيح: رواه أحمد (27256)، والطبراني في الكبير (19/ 430)، وفي الأوسط (9333)، والنسائي في الكبرى (7603) كلهم من حديث سعيد بن أبي أيوب قال: حدثني يزيد بن أبي حبيب، عن سويد بن قيس التجيبي من كندة، عن معاوية بن خديج فذكره. وإسناده صحيح.
মু'আবিয়া ইবনে খুদাইজ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যদি কোনো কিছুতে আরোগ্য থাকে, তবে তা হলো শিঙ্গা লাগানোর মাধ্যমে রক্ত মোচনে, অথবা মধু পান করাতে, অথবা আগুন দিয়ে ব্যথাযুক্ত স্থানে সেঁক দেওয়ায়। কিন্তু আমি সেঁক নিতে পছন্দ করি না।"
11331 - عن عقبة بن عامر الجهني، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"ثلاثا إن كان في شيء شفاء: ففي شرطة محجم، أو شربة عسل، أو كية تصيب ألما، وأنا أكره الكي ولا أحبه".
حسن: رواه أحمد (17315)، وأبو يعلى في مسنده (1765)، والطبراني في الأوسط (9335)، وفي الكبير (17/ 288 - 289) كلهم من حديث عبد الله بن الوليد، عن أبي الخير، عن عقبة بن عامر الجهني قال: فذكره.
وإسناده حسن من أجل عبد الله بن الوليد التجيبي وثقه ابن حبان وضعّفه الدارقطني غير أنه يُحسّن حديثه إذا كان له أصل، ولم يأت بما ينكر عليه.
উকবাহ ইবন আমির আল-জুহানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: তিনটি বস্তুতে আরোগ্য (শেফা) রয়েছে, যদি কোনো কিছুতে আরোগ্য থাকে: শিঙ্গা লাগানো (হিজামা) দ্বারা রক্ত বের করার মধ্যে, অথবা এক চুমুক মধুর মধ্যে, অথবা এমন দাগ (অগ্নিদগ্ধ করা) লাগানো যা যন্ত্রণার জায়গায় হয়। তবে আমি দাগ (অগ্নিদগ্ধ করা) দেওয়া অপছন্দ করি এবং ভালোবাসি না।
11332 - عن حميد قال: سئل أنس بن مالك عن كسب الحجام؟ فقال: احتجم رسول الله صلى الله عليه وسلم، حجمه أبو طيبة، فأمر له بصاعين من طعام، وكلم أهله فوضعوا عنه من خراجه وقال:"إن أفضل ما تداويتم به الحجامة، أو هو من أمثل دوائكم"
متفق عليه: رواه البخاري في الطب (5696)، ومسلم في المساقاة والمزارعة (1577) كلاهما من طريق حميد فذكره. واللفظ لمسلم.
আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁকে শিঙা ব্যবহারকারীর (হাজ্জামের) উপার্জন সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল। তিনি বললেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম শিঙা লাগিয়েছিলেন। আবূ ত্বাইবাহ তাঁকে শিঙা লাগান। এরপর তিনি তাকে দুই সা‘ পরিমাণ খাদ্য দেওয়ার নির্দেশ দিলেন এবং তিনি তার (আবূ ত্বাইবাহ-এর) পরিবারের সাথে কথা বললেন, ফলে তারা তার রাজস্ব (খরাজ) কমিয়ে দিল। আর তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “তোমরা যেসব জিনিস দ্বারা চিকিৎসা করে থাক, তার মধ্যে সবচেয়ে উত্তম হলো শিঙা লাগানো, অথবা তিনি বলেন: তোমাদের চিকিৎসার মধ্যে শিঙা লাগানো অন্যতম সেরা।”
11333 - عن جابر بن عبد الله أنه عاد المقنّع ثم قال: لا أبرح حتى تحتجم فإني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"إن فيه شفاءً".
متفق عليه: رواه البخاري في الطب (5697)، ومسلم في السلام (2205) كلاهما من حديث ابن وهب قال: أخبرني عمرو وغيره أن بكيرا حدثه أن عاصم بن عمر بن قتادة حدثه أن جابر بن عبد الله عاد المقنّع فذكره.
وقوله:"المقنع" هو ابن سنان تابعي كما جاء ذكره في حديث أبي يعلى (2100) مفصلا نحو ما جاء عند مسلم (2205: 71) وهو مذكورفي باب الشفاء في ثلاث.
জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি মাকনা’কে দেখতে গেলেন। অতঃপর তিনি বললেন: আমি যাব না যতক্ষণ না তুমি রক্তমোক্ষণ (হিজামা) করাও। কারণ আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: “নিশ্চয় এর মধ্যে আরোগ্য (শেফা) রয়েছে।”
11334 - عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إن كان في شيء مما تداويتم به خير فالحجامة".
حسن: رواه أبو داود (3857)، وابن ماجه (3476)، وأحمد (8513)، وصحّحه ابن حبان (6078)، والحاكم (4/ 410) كلهم من طرق عن حماد بن سلمة، حدثنا محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة فذكره.
وإسناده حسن من أجل محمد بن عمرو وهو الليثي فإنه حسن الحديث.
وقال الحاكم:"صحيح على شرط مسلم".
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমরা যেসব জিনিস দিয়ে চিকিৎসা গ্রহণ করো, যদি সেগুলোর মধ্যে কোনো কল্যাণ থাকে, তবে তা হলো শিঙ্গা লাগানো (হিজামা)।
11335 - عن سلمى خادم رسول الله صلى الله عليه وسلم قالت: ما كان أحد يشتكي إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم وجعا في رأسه إِلَّا قال:"احتجم"، ولا وجعا في رجليه إِلَّا قال:"اخضبها".
حسن: رواه أبو داود (3858) عن محمد بن الوزير الدمشقيّ، حَدَّثَنَا يحيى بن حسان، حَدَّثَنَا عبد الرحمن بن أبي المواليّ، حَدَّثَنَا فائد مولى عبيد الله بن عليّ بن أبي رافع، عن مولاه عبيد الله ابن عليّ بن أبي رافع، عن جدته سلمى خادم رسول الله صلى الله عليه وسلم فذكرته. وإسناده حسن من أجل عبيد الله بن عليّ بن أبي رافع وعبد الرحمن بن أبي الموالي فإنهما حسنا الحديث.
وللحديث طرق وألفاظ أخرى عند الترمذيّ (2054)، وابن ماجه (3502)، وأحمد (27617 - 27618) وما ذكرته هو أسلمها سندا وأكملها لفظا.
সালমা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট কেউ যদি তাঁর মাথায় ব্যথার অভিযোগ করত, তখন তিনি বলতেন: "শিঙ্গা লাগাও (রক্তমোক্ষণ করো)।" আর যদি কেউ তাঁর পায়ে ব্যথার অভিযোগ করত, তখন তিনি বলতেন: "তাতে খেজাব (রং বা মেহেদি) লাগাও।"
11336 - عن سمرة بن جندب، قال: كنت عند رسول الله صلى الله عليه وسلم، فدعا حجاما، فأمره أن يحجمه، فأخرج مَحاجمَ له من قرون، فألزمه إياه، فشرطه بطرف شفرة، فصبَّ الدمَ في إناء عنده، فدخل عليه رجلٌ من بني فزارة، فقال: ما هذا يا رسول الله؟ علامَ تُمَكِّنُ هذا من جلدك يقطعه؟ قال: فسمعت النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم يقول:"هذا الحجم"، قال: وما الحجم؟ قال:"هو من خير ما تداوى به الناس".
صحيح: رواه أحمد (20172)، والبزّار -كشف الأستار (1216)، والطَّبرانيّ في الكبير (7/ 223)، وصحّحه الحاكم (4/ 208) كلّهم من طريق، عبد الملك بن عمير، عن حصين بن أبي الحُرّ (هو حصين بن مالك بن الخشخاش)، عن سمرة بن جندب فذكره. وإسناده صحيح.
সামুরাহ ইবনু জুনদুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের নিকট ছিলাম। তখন তিনি একজন রক্তমোক্ষণকারীকে (হাজ্জামকে) ডাকলেন এবং তাকে শিঙা লাগাতে (রক্তমোক্ষণ করতে) নির্দেশ দিলেন। সে শিঙা লাগানোর জন্য তার কিছু শিং (তৈরি পাত্র) বের করলো এবং তা তাঁর (রাসূলের) চামড়ার সাথে ভালোভাবে লাগালো। এরপর একটি ক্ষুরের ধারালো অংশ দিয়ে তা সামান্য চিরে দিলো এবং রক্তগুলো একটি পাত্রে জমা করলো যা তার কাছে ছিল। অতঃপর বনু ফাযারাহ গোত্রের এক ব্যক্তি তাঁর নিকট প্রবেশ করলো এবং জিজ্ঞেস করলো: হে আল্লাহর রাসূল! এটা কী? কেন আপনি এই ব্যক্তিকে আপনার চামড়ার উপর ক্ষমতা দিচ্ছেন যে সে তা কেটে ফেলবে? [সামুরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)] বলেন, আমি তখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনলাম: "এটা হলো রক্তমোক্ষণ (হিজামা)।" লোকটি জিজ্ঞেস করলো: হিজামা কী? তিনি বললেন: "এটা সেইসব সেরা চিকিৎসার অন্যতম, যার দ্বারা মানুষ চিকিৎসা গ্রহণ করে।"
11337 - عن جابر أن أم سلمة استأذنتْ رسولَ الله صلى الله عليه وسلم في الحجامة فأمر النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم أبا طيبة أن يحجمها.
قال: حسبتُ أنه قال: كان أخاها من الرضاعة أو غلامًا لم يحتلم.
صحيح: رواه مسلم في السّلام (2206) من طرق عن اللّيث بن سعد، عن أبي الزبير، عن جابر فذكره.
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, উম্মু সালামা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে শিঙা লাগানো (হিজামা) করার জন্য অনুমতি চাইলেন। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আবূ তাইবাকে তাঁকে শিঙা লাগানোর নির্দেশ দিলেন। [বর্ণনাকারী] বলেন: আমার মনে হয়, তিনি বলেছিলেন: সে ছিল তাঁর দুধভাই অথবা এমন একজন বালক যে বালেগ হয়নি।
11338 - عن أبي أمية الفزارى قال: رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم يحتجم.
حسن: رواه أحمد (18779) عن الفضل بن دكين، حَدَّثَنَا شريك، عن أبي جعفر الفراء قال: سمعت أبا أمية الفزاري فذكره.
هكذا ورد في مسند أحمد"أبو أمية الفزاري"، والأكثر على أنه"أبو آمنة الفزاري"
ورواه الطبرانيّ في الكبير (22/ 360) من طريق إسرائيل بن يونس بن أبي إسحاق السبيعي، عن
أبي جعفر الفراء فذكره.
وفيه متابعة لشريك وهو ابن عبد الله القاضي سيء الحفظ إِلَّا أن هذه المتابعة تدل على أنه لم يخطئ في هذا الحديث.
আবু উমাইয়া আল-ফাজারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে শিঙ্গা লাগাতে দেখেছি।
11339 - عن ابن عباس: احتجم النَّبِي صلى الله عليه وسلم في رأسه وهو محرم من وجع كان به بماء يقال له: لحي جمل.
وفي رواية: احتجم وهو محرم في رأسه من شقيقة كانت به.
متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5700) عن محمد بن بشار، ثنا ابن أبي عديّ، عن هشام (هو ابن حسان)، عن عكرمة، عن ابن عباس فذكره.
ورواه مسلم في الحج (1202: 87) من طريق طاوس وعطاء، عن ابن عباس.
واللّفظ للبخاريّ ومسلم اختصره.
والرّواية الأخرى علقها البخاري عقب الرواية السابقة عن محمد بن سواء، أخبرنا هشام، عن عكرمة به.
قال الحافظ:"وهذا المعلق وصله الإسماعيلي قال: حَدَّثَنَا محمد بن عبد الله الأزدي، ثنا محمد بن سواء فذكره سواء.
قوله:"شقيقة" نوع من صُداع يعرض في مقدم الرأس وإلى أحد جانبيه.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ইহরাম অবস্থায় তাঁর মাথায় শিঙ্গা লাগিয়েছিলেন (কাপিং করিয়েছিলেন) তাঁর একটি ব্যথার কারণে, যা তাঁকে পেয়েছিল। এটি 'লাহয়ি জামাল' নামক জলাশয়ের কাছে হয়েছিল।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: তিনি ইহরাম অবস্থায় তাঁর মাথায় শিঙ্গা লাগিয়েছিলেন তাঁর শাক্বীকাহ্ (আধা কপালে ব্যথা বা মাইগ্রেন) রোগের কারণে, যা তাঁকে পেয়েছিল।
11340 - عن عبد الله بن بحينة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم احتجم بلحي جمل من طريق مكة وهو محرم في وسط رأسه.
وفي رواية: أنه احتجم وهو محرم في رأسه لصداع كان فيه.
متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5698)، ومسلم في الحجّ (1203) كلاهما من طريق سليمان بن بلال، عن علقمة بن أبي علقمة، عن عبد الرحمن الأعرج أنه سمع عبد الله بن بحينة فذكره.
আব্দুল্লাহ ইবনু বুহায়না (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মক্কার পথে 'লাহ্য়ি জামাল' নামক স্থানে ইহরাম অবস্থায় তাঁর মাথার মাঝখানে শিঙ্গা লাগিয়েছিলেন (হিজামা করেছিলেন)।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: তিনি ইহরাম অবস্থায় তাঁর মাথায় শিঙ্গা লাগিয়েছিলেন, কারণ তাঁর মাথা ব্যথা করছিল।
11341 - عن أنس قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يحتجم في الأخدعين والكاهل، وكان يحتجم لسبع عشرة، وتسع عشرة، وإحدى وعشرين.
صحيح: رواه أبو داود (3860)، والتِّرمذيّ (2051)، وابن ماجه (3483)، وأحمد (12191)، وصحّحه ابن حبَّان (6077)، والحاكم (4/ 210) كلّهم من طرق عن قتادة، عن أنس فذكره. وإسناده صحيح.
واللّفظ للترمذي والحاكم، والباقون اقتصروا على الشرط الأول.
وقال الحاكم:"صحيح على شرط الشّيخين"
وأمّا الترمذيّ فحسّنه لأن في إسناده وإسناد الحاكم عمرو بن عاصم، وهو وإن كان من رجال الجماعة ولكن في حفظه شيء، ولذا حسّنه الترمذيّ وقال الحاكم: على شرط الشّيخين إِلَّا أنه توبع عند الآخرين.
ورواه ابن ماجه (3486) من وجه آخر عن النهاس بن قهم، عن أنس بن مالك فذكر مثله وزاد فيه: ولا يَتَبيَّغْ بأحدكم الدمُ فيقتلَه.
والنهّاس -بتشديد الهاء- بن قهم القيسي أبو الخطّاب البصري ضعيف عند جمهور أهل العلم. وقوله:"يتبيّغ" أي لا يفور الدم ومنه تبيغ الماء إذا تردّد وتحيّر في مجراها.
وفي معناه ما رُوي عن ابن عباس قال: احتجم النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم في الأخدعين بين الكتفين. رواه أحمد (2091)، والطَّبرانيّ في الكبير (12/ 95) كلاهما من طريق سفيان الثوري، عن جابر، عن عامر الشعبي، عن ابن عباس فذكره.
وجابر هو ابن يزيد الجعفي الكوفي ضعيف باتفاق أهل العلم، وقال الجوزجاني: كذاب.
والأخدعان: هما عرقان في جانبي العنق.
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আখদাইন (ঘাড়ের দুই পাশের শিরা) এবং কাহিল (কাঁধের মধ্যস্থল)-এ রক্তমোক্ষণ (হিজামা) করাতেন। আর তিনি সতেরো, ঊনিশ এবং একুশ তারিখে (চাঁদের মাস অনুযায়ী) রক্তমোক্ষণ করাতেন।
11342 - عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"من احتجم لسبع عشرة، وتسع عشرة، وإحدى وعشرين، كان شفاء من كل داء".
حسن: رواه أبو داود (3861)، وصحّحه الحاكم (4/ 210) كلاهما من حديث أبي توبة الربيع ابن نافع، حَدَّثَنَا سعيد بن عبد الرحمن الجمحي، عن سهيل بن أبي صالح، عن أبيه، عن أبي هريرة فذكره. واللّفظ لأبي داود واقتصر الحاكم على ذكر السابع عشر.
وإسناده حسن من أجل سعيد بن عبد الرحمن الجمحي فإنه حسن الحديث إِلَّا أن الساجي قال: يرُوي عن هشام وسهيل أحاديث لا يتابع عليها.
ولم أقف على من قال بذلك غير الساجي.
وقال الحاكم:"هذا حديث صحيح على شرط مسلم".
وفي معناه ما رُوي عن ابن عباس، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"خير يوم تحتجمون فيه: سبع عشرة، وتسع عشرة، وإحدى وعشرين" وقال:"وما مررت بملأ من الملائكة ليلة أسري بي إِلَّا قالوا: عليك بالحجامة يا محمد".
رواه أحمد (3316) -واللّفظ له-، والتِّرمذيّ (2053)، وابن ماجه (3477)، والحاكم (4/ 209، 409) كلّهم من طريق عباد بن منصور، عن عكرمة، عن ابن عباس فذكره.
قال الترمذيّ:"حسن غريب، لا نعرفه إِلَّا من حديث عباد بن منصور".
وقال الحاكم:"صحيح الإسناد".
قلت: وفيه عباد بن منصور ضعيف باتفاق أهل العلم، وقد دلّس في هذا الحديث مع ضعَّفه كما سبق بيانه في الإسراء.
وأمّا قول الحافظ في الفتح (10/ 150):"حديث ابن عباس عند أحمد والتِّرمذيّ ورجاله ثقات لكنه معلول" فليس كما قال؛ فإن عباد بن منصور ليس من الثقات.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি সতেরো, উনিশ এবং একুশ তারিখে শিঙ্গা লাগায় (হিজামা করে), তা সব রোগের নিরাময় হয়।”
11343 - عن أبي كبشة الأنماري أن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم كان يحتجم على هامته وبين كتفيه وهو يقول:"من أهراق من هذه الدماء فلا يضره أن لا يتداوى بشيء لشيء".
حسن: رواه أبو داود (3859)، وابن ماجه (3484) كلاهما من طريق الوليد بن مسلم قال: حَدَّثَنَا ابن ثوبان، عن أبيه، عن أبي كبشة الأنماري فذكره.
وإسناده حسن من أجل ابن ثوبان وهو عبد الرحمن بن ثابت بن ثوبان فإنه حسن الحديث.
وأمّا أبوه ثابت بن ثوبان العنسي فنصوا على أنه لم يدرك أبا هريرة ولم ينصوا على عدم سماعه من أبي كبشة ولم يبينوا سنة وفاته فالظاهر أنه سمع منه.
وأمّا ما رُوي عن كبشة بنت أبي بكرة أن أباها كان ينهى أهله عن الحجامة يوم الثلاثاء، ويزعم عن رسول الله صلى الله عليه وسلم:"أن يوم الثلاثاء يوم الدم، وفيه ساعة لا يرقأ" فإسناده ضعيف.
رواه أبو داود (3862)، والعقيلي في ترجمة بكار بن عبد العزيز من ضعفائه (1/ 150)، والبيهقي (9/ 340) كلّهم من حديث موسى بن إسماعيل، أخبرني أبو بكرة بكار بن عبد العزيز، أخبرتني عمتي كبشة بنت أبي بكرة فذكرته.
قال أبو داود: قال غير موسى: كبشة بنت أبي بكرة.
وكيشة بنت أبي بكرة لا يعرف حالها.
وبكار بن عبد العزيز مختلف فيه وإن كان حسن الحديث فإنه لا يحتمل تفرده.
وقال البيهقي:"النهي الذي فيه موقوف، وإسناده ليس بالقوي. والله أعلم".
وكذلك لا يصح ما رُوي عن ابن عمر قال: يا نافع قد تبيغ بي الدم، فالتمس لي حجاما، واجعله رفيقا، إن استطعت، ولا تجعله شيخا كبيرا، ولا صبيا صغيرا، فإني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"الحجامة على الريق أمثل، وفيه شفاء وبركة، وتزيد في العقل، وفي الحفظ، فاحتجموا على بركة الله يوم الخميس، واجتنبوا الحجامة يوم الأربعاء، والجمعة، والسبت، ويوم الأحد، تحريا، واحتجموا يوم الاثنين، والثلاثاء، فإنه اليوم الذي عافى الله فيه أيوب من البلاء، وضربه بالبلاء يوم الأربعاء، فإنه لا يبدو جذام ولا برص، إِلَّا يوم الأربعاء، أو ليلة الأربعاء".
رواه ابن ماجه (3487) عن سويد بن سعيد قال: حَدَّثَنَا عثمان بن مطر، عن الحسن بن أبي جعفر، عن محمد بن جحادة، عن نافع، عن ابن عمر فذكره.
والحسن بن أبي جعفر الجُفري البصري ضعيف باتفاق أهل العلم مع عبادته وفضله.
ورواه الحاكم (4/ 409) فقال: عن عثمان بن جعفر، ثنا محمد بن جحادة، عن نافع بإسناده مثله.
وقال الحاكم:"رواة هذا الحديث كلّهم ثقات غير عثمان بن جعفر هذا فإني لا أعرفه بعدالة ولا جرح".
والظاهر أنه خطأ من الحاكم، والصحيح أنه الحسن بن أبي جعفر، ولذا تعقبه الذّهبيّ بقوله:"مرَّ هذا وهو واه".
وروى ابن ماجه (3488) من وجه آخر فقال: حَدَّثَنَا محمد بن المصفى الحمصيّ، حَدَّثَنَا عثمان بن عبد الرحمن، حَدَّثَنَا عبد الله بن عصمة، عن سعيد بن ميمون، عن نافع، قال: قال ابن عمر: يا نافع، تبيغ بي الدم، فأتني بحجام، واجعله شابا، ولا تجعله شيخا، ولا صبيا، قال: وقال ابن عمر، سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"الحجامة على الريق أمثل، وهي تزيد في العقل، وتزيد في الحفظ، وتزيد الحافظ حفظا، فمن كان محتجما، فيوم الخميس، على اسم الله، واجتنبوا الحجامة يوم الجمعة، ويوم السبت، ويوم الأحد، واحتجموا يوم الاثنين، والثلاثاء، واجتنبوا الحجامة يوم الأربعاء، فإنه اليوم الذي أصيب فيه أيوب بالبلاء، وما يبدو جذام، ولا برص، إِلَّا في يوم الأربعاء، أو ليلة الأربعاء".
وفيه عثمان بن عبد الرحمن وشيخه عبد الله بن عصمة مجهولان.
وله طرق أخرى لا تزيده إِلَّا ضعفا، والحديث منكر كما قال الحاكم والذّهبيّ وغيرهما.
وكذلك لا يصح ما رُوي عن أبي هريرة مرفوعًا:"من احتجم يوم الأربعاء ويوم السبت فرأى وضحا فلا يلومن إِلَّا نفسه".
رواه الحاكم (4/ 409) عن أبي بكر بن إسحاق، أنبأ أبو مسلم، ثنا حجَّاج بن منهال، ثنا حمّاد ابن سلمة، عن سليمان بن أرقم، عن السديّ، عن سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة فذكره.
وفيه سليمان بن أرقم متروك.
وفي معناه أحاديث أخرى وكلها معلولة، ولكن من الأحوط أن لا يحتجم تلك الأيام.
قال الخلال: سئل أحمد عن النورة والحجامة يوم السبت ويوم الأربعاء فكرهها وقال: بلغني عن رجل أنه تنوّر، واحتجم يعني يوم الأربعاء فأصابه البرص قلت له: كأنه تهاون بالحديث؟ قال: نعم. ذكره الحافظ ابن القيم في زاده (4/ 60).
وأمّا وقت الحجامة فيجوز في كل وقت، ولذا بوّب البخاريّ بقوله: باب أي ساعة يحتجم، واحتجم أبو مولى ليلًا. قال الحافظ في الفتح (10/ 149):"وورد في الأوقات اللائقة بالحجامة أحاديث ليس فيها شيء على شرطه فكأنه أشار إلى أنها تُصنع عند الاحتياج، ولا تتقيد بوقت دون وقت".
وقال: ولكون هذه الأحاديث لم يصح منها شيء قال حنبل بن إسحاق: كان أحمد يحتجم أي
وقت هاج به الدم، وأي ساعة كانت.
والحجامة: هي استخراج الدم من نواحي الجلد، وفي البلاد الحارة الحجامة من أنفع العلاج لكثرة هياج الدم فيها، وأنها تكون في الموضع الذي يقتضيه الحال، والحجام الماهر يعرف ذلك، وللحجامة آداب وقوانين يجب مراعاتها.
আবূ কাবশাহ আল-আনমারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর মাথার উপরিভাগে এবং দুই কাঁধের মাঝখানে হিজামা (শিঙা লাগানো/রক্তমোক্ষণ) করতেন। আর তিনি বলতেন: "যে ব্যক্তি এই রক্তগুলো বের করে দেয় (হিজামার মাধ্যমে), অন্য কোনো কিছুর জন্য চিকিৎসা গ্রহণ না করা তার জন্য ক্ষতিকর হবে না।"
11344 - عن ابن عباس أن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم احتجم وأعطى الحجام أجره، واستعط.
متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5691)، ومسلم في السلام (1202: 76) كلاهما من حديث وهيب، حَدَّثَنَا عبد الله بن طاوس، عن أبيه، عن ابن عباس فذكره.
وروياه من وجه آخر وزادا فيه:"ولو علم كراهية لم يُعطه" واللّفظ للبخاريّ (2279)، ولفظ مسلم (1202: 66):"ولو كان سحتا لم يعطه النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم".
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙ্গা লাগালেন এবং শিঙ্গা লাগানোর পারিশ্রমিক তাকে দিয়ে দিলেন, এবং তিনি নাকে ঔষধ গ্রহণ করলেন (নস্যি নিলেন)। [বর্ণনাকারীগণ] অন্য একটি সূত্রে আরও বর্ণনা করেছেন: যদি তিনি তা অপছন্দনীয় জানতেন, তবে তিনি তা দিতেন না। আর বুখারীর শব্দে আছে: যদি তিনি তা অপছন্দনীয় জানতেন, তবে তিনি তা দিতেন না। আর মুসলিমের শব্দে রয়েছে: যদি এটি অবৈধ (সুত) হতো, তবে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে তা দিতেন না।
11345 - عن أنس يقول: كان النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم يحتجم، ولم يكن يظلم أحدًا أجره.
متفق عليه: رواه البخاريّ في الإجارة (2280)، ومسلم في السّلام (1577: 77) كلاهما من حديث مسعر، عن عمرو بن عامر الأنصاري قال: سمعت أنسا يقول فذكره.
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হিজামা করাতেন এবং (এর জন্য) তিনি কারো পারিশ্রমিক বা মজুরির ক্ষেত্রে জুলুম করতেন না।
11346 - عن جابر بن عبد الله قال: سمعت النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم يقول:"إن كان في شيء من أدويتكم خير، ففي شربة من عسل، أو شرطة محجم، أو لذعة بنار، وما أحب أن أكتوي".
متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5702)، ومسلم في السّلام (2205: 71) كلاهما من طريق ابن الغسيل، حدئني عاصم بن عمر، عن جابر بن عبد الله فذكره. والسياق للبخاريّ، ولمسلم في أوله قصة.
জাবির ইবনে আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি: "যদি তোমাদের কোনো ওষুধে কোনো কল্যাণ থাকে, তবে তা হচ্ছে মধুর শরবতে, অথবা শিঙ্গা লাগানোর কাটে, অথবা আগুনে সেঁকা দেওয়ায়। তবে আমি সেঁকা দেওয়া (দাগানো) পছন্দ করি না।"
11347 - عن عمران بن حصين قال: نهى النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم عن الكي، فاكتوينا فما أفلحن ولا أنجحن.
صحيح: رواه أبو داود (3865)، وأحمد (19989) كلاهما من طريق حمّاد (وهو ابن سلمة)، عن ثابت، عن مطرف (وهو ابن عبد الله بن الشخير)، عن عمران بن حصين فذكره.
ثمّ قال أبو داود عقبه:"وكان يسمع تسليم الملائكة، فلمّا اكتوى انقطع عنه فلمّا ترك رجع إليه. وإسناده صحيح.
ورواه الترمذيّ (2049)، وابن ماجه (3490)، وأحمد (19831)، وابن حبَّان (6081)، والحاكم (4/ 213) كلّهم من طرق، عن الحسن، عن عمران فذكره. وقال الترمذيّ:"هذا حديث حسن صحيح".
وقال الحاكم:"هذا حديث صحيح الإسناد".
قلت: الحسن هو البصريّ، وسماعه من عمران بن حصين محل خلاف، والجمهور على نفيه، منهم ابن المدينيّ، والبخاري ومسلم، وأبو حاتم الرازيّ، والبرديجيّ، والبيهقيّ، ثمّ هو عنعن ولم يصرح إِلَّا أنه توبع في أصل الحديث ولذا صحّحه الترمذيّ وغيره.
وقيل: استعمال الكي على وجه العلاج في أمر يحتاج إليه إنسان يجوز أن ينجح فيه، ويجوز أن لا ينجح فيه، فإذا غلب عليه النجاح جاز استعماله، وإذا غلب عليه الهلاك أو عدم النجاح كره ذلك، فكان النهي لعمران من هذا السبيل؛ لأن له علة الباسور وإن الكي يزيده خطرا على المرض، ولذا نهاه رسول الله صلى الله عليه وسلم عن الكي.
ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) লোহা পুড়িয়ে দাগ (আগুনের সেঁক/কাউটারাইজেশন) দেওয়া থেকে নিষেধ করেছেন। এরপরও আমরা লোহা পুড়িয়ে দাগ দিয়েছিলাম, কিন্তু আমরা তাতে সফল হইনি এবং তাতে কোনো কল্যাণও লাভ করিনি।