হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (11348)


11348 - عن عبد الله بن مسعود قال: جاء ناس فسألوا رسول الله صلى الله عليه وسلم عن صاحب لهم أن يكووه فسكت، ثمّ سألوه ثلاثًا فسكت، وكره ذلك.

صحيح: رواه ابن حبَّان (6082)، والطحاوي في شرحه (6998) كلاهما عن شعبة، قال: أنبأنا أبو إسحاق قال: سمعت أبا الأحوص يحدث عن عبد الله بن مسعود قال: فذكره.

وإسناده في غاية من الصحة لأن شعبة كان من قدماء أصحاب أبي إسحاق.

والحديث رواه أيضًا عبد الرزّاق (19517)، وأحمد (3701)، والطحاوي في شرحه (6999)، والحاكم (4/ 416) كلّهم من طرق أخرى عن أبي إسحاق فذكر نحوه.

ولفظ أحمد وغيره:"اكووه وارضفوه رضفا" أي اجعلوه على حجارة محماة كأنه قال ذلك وهو غضبان.




আবদুল্লাহ ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, কিছু লোক আসল এবং তারা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে তাদের এক সঙ্গী সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করল যে তারা কি তাকে দাওয়া দিতে (দাগাতে) পারে? তিনি নীরব রইলেন। এরপর তারা তাঁকে তিনবার জিজ্ঞাসা করল, তবুও তিনি চুপ থাকলেন এবং তিনি তা অপছন্দ করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11349)


11349 - عن جابر قال: بعث رسول الله صلى الله عليه وسلم إلى أبي بن كعب طبيبا، فقطع منه عرقا، ثمّ كواه عليه.

صحيح: رواه مسلم في السّلام (2207) من طريق أبي معاوية (هو محمد بن خازم)، عن الأعمش، عن أبي سفيان، عن جابر فذكره.

وأبي بن كعب رُمِيَ يوم الأحزاب على أكحله فكواه رسول الله صلى الله عليه وسلم كما رواه مسلم من طريق شعبة عن الأعمش.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উবাই ইবনু কা'ব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে একজন ডাক্তার পাঠালেন। ডাক্তার তাঁর একটি শিরা কেটে দিলেন এবং তারপর সেখানে সেঁক (কাই) দিলেন। উবাই ইবনু কা'ব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) খন্দকের যুদ্ধের দিন তাঁর বাহুর শিরায় আঘাত পেয়েছিলেন, আর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে সেঁক দিয়েছিলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11350)


11350 - عن جابر قال: رُمِيَ سعد بن معاذ في أكحله قال: فحسَمه النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم بيده بمِشْقَصٍ ثمّ وَرِمَتْ، فحسمه الثانيةَ.

صحيح: رواه مسلم في السّلام (2208) من طريق أبي خيثمة (زهير بن معاوية)، عن أبي الزُّبير، عن جابر فذكره.

قوله:"أكحله" هو عرق في الذراع، منه يسحب الدم.
وقوله:"فحسمه" أي كواه.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: সা'দ ইবনু মু'আযের 'আকহাল' (শিরা)-তে আঘাত করা হয়েছিল। তিনি বলেন: অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একটি তীরের ফলা (মিশকাশ) দ্বারা নিজ হাতে তা দগ্ধ করে দিলেন (রক্তপাত বন্ধ করার জন্য)। এরপর সেটি ফুলে গেল, তাই তিনি দ্বিতীয়বার তা দগ্ধ করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11351)


11351 - عن أنس أن أبا طلحة وأنس بن النضر كوياه، وكواه أبو طلحة بيده.

صحيح: رواه البخاريّ في الطب (5719، 5720، 5721) عن عارم، حَدَّثَنَا حمّاد، قال: قُرِئ على أيوب من كتب أبي قلابة، منه ما حدّث به، ومنه ما قُرئ عليه، وكان في هذا الكتاب عن أنس فذكره.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যে আবু তালহা এবং আনাস ইবনু নাদর তাকে কাই (দাগানো) করেছিলেন, আর আবু তালহা নিজ হাতে তাকে কাই করেছিলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11352)


11352 - عن أنس قال: كواني أبو طلحة، ورسولُ الله صلى الله عليه وسلم بين أظهرنا فما نُهيتُ عنه.

حسن: رواه أحمد (12416)، والحاكم (4/ 417) كلاهما من حديث عمران، عن قتادة، عن أنس فذكره.

وإسناده حسن من أجل عمران وهو ابن دَاوَر القطان فإنه حسن الحديث.

وفي معناه ما رُوي عن أنس بن مالك قال: أذن رسول الله لأهل البيت من الأنصار أن يُرقُوا من الحمة، وأذِنَ برقية العين والنَّفْس.

وقال أنس كويت من ذات الجنب، ورسول الله صلى الله عليه وسلم حي، وشهدني أبو طلحة وأنس بن النضر وزيد بن ثابت وأبو طلحة كواني.

رواه أبو يعلى (2819)، والبيهقي (9/ 342) كلاهما من طريق ريحان بن سعيد، ثنا عباد بن منصور، عن أيوب، عن أبي قلابة، عن أنس بن مالك فذكره.

وعباد بن منصور ضعيف عند جمهور أهل العلم.

وعلقه البخاريّ في الطب (5720، 5721) فقال: وقال عباد بن منصور، عن أيوب، عن أبي قلابة، عن أنس بن مالك قال: أذن رسول الله صلى الله عليه وسلم لأهل البيت أن يرقوا من الحمة والأذن. ولم يذكر فيه الكي.

ثمّ قال: قال أنس: كويت من ذات الجنب، ورسول الله صلى الله عليه وسلم حي، وشهدني أبو طلحة وأنس بن النضر وزيد بن ثابت، وأبو طلحة كواني". انتهى.

قلت: وقول أنس بدون ذكر الرقية في الحمة والأذن ثابت في الصَّحيح كما مضى.

والحُمَة: هو السم. والأُذن: أراد به وجع الأذن.

يستفاد من تعليق البخاريّ قول عباد بن منصور بأن المرض الذي كان عند أنس هو ذات الجنب كما يستفاد منه أيضًا ذكر الرقية في الحمة والأذن إِلَّا أن عباد بن منصور ضعيف عند جمهور أهل العلم كما سبق.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আবূ তালহা আমাকে লোহা পুড়িয়ে সেঁক দিয়েছিলেন (ক্যাওটাইজ করেছিলেন)। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম আমাদের মাঝে উপস্থিত ছিলেন, কিন্তু তিনি আমাকে তা থেকে নিষেধ করেননি।

আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আরও বলেছেন: আমার ذات الجنب (যাতুল জানব—বক্ষব্যাধি) হলে আমাকে সেঁক দেওয়া হয়েছিল, যখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম জীবিত ছিলেন। আবূ তালহা, আনাস ইবনুন নযর ও যায়িদ ইবনু সাবিত (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-গণ আমার সেঁক দেওয়ার সময় উপস্থিত ছিলেন এবং আবূ তালহা-ই আমাকে সেঁক দিয়েছিলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11353)


11353 - عن عائشة أن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم أمر بابن زرارة أن يُكوى.

صحيح: رواه أبو يعلى (4825)، وابن حبَّان (6079) كلاهما من طريق محمد بن عباد المكي
قال: حَدَّثَنَا ابن أبي فديك، عن ابن أبي ذئب، عن الزّهري، عن عروة، عن عائشة فذكرته.

وإسناده صحيح.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ইবনু যুরারাহকে লোহা পুড়িয়ে সেঁক দিতে নির্দেশ দিয়েছিলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11354)


11354 - عن أبي أمامة بن سهل بن حنيف قال: دخل رسول الله صلى الله عليه وسلم على أسعد بن زرارة، وبه وجع يقال له: الشوكة، فكواه حوران على عنقه، فمات فقال النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم:"بئس الميتُ لليهود يقولون: قد داواه صاحبه أفلا نفعه".

صحيح: رواه عبد الرزّاق (19515) عن معمر، عن الزّهريّ، عن أبي أمامة فذكره. وهو مرسل.

ورواه أحمد (17238) من وجه آخر عن ابن شهاب الزّهريّ، يحدث أن أبا أمامة بن سهل بن حنيف أخبره، عن أبي أمامة أسعد بن زرارة، وكان أحدَ النقباء يوم العقبة أنه أخذتْه الشوكة، فجاء رسول الله صلى الله عليه وسلم يعوده فقال:"بئس الميت ليهود" مرتين."سيقولون: لولا دفع عن صاحبه، ولا أملك له ضرا ولا نفعا ولأَتَمَحَّلنَّ له"، فأمر به وكُوِيَ بخطين فوق رأسه فمات.

وفي إسناده زمعة بن صالح قال: سمعت ابن شهاب فذكره. وزمعة ضعيف.

وأبو أمامة هو أسعد بن سهل بن حنيف له رؤية، ولم يسمع من النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم فيكون مرسل الصحابي وهو حجّة عند جمهور أهل العلم، ويقوي هذا المرسل حديث عائشة.

وأمّا ما رواه الترمذيّ (2050)، وابن حبَّان (6080)، والحاكم (3/ 187) كلّهم من حديث يزيد بن زُريع قال: حَدَّثَنَا معمر، عن الزّهريّ، عن أنس: أن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم كوى أسعد بن زرارة من الشوكة. فهو خطأ. أخطأ فيه معمر كما نبه عليه أبو حاتم في العلل (2277):"وإنما هو عن الزّهريّ، عن أبي أمامة بن سهل أن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم كوى أسعد مرسل".

وهو كما قال وقد سبق، وتفصيل ذلك كما ذكره ابن عساكر في تاريخ دمشق (59/ 392) من طريق العباس بن يزيد البحرانيّ، عن يزيد بن زريع، عن معمر، عن الزّهريّ، عن أنس.

قال العباس: وهذا مما غلط فيه معمر بالبصرة، وذلك لم يكن معه كتاب فغلط في هذا.

قال عبد الرزّاق: فلمّا قدم علينا قال: إني قد غلطت بالبصرة حديثين حدثتهم عن الزّهريّ، عن أنس أن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم كوى أسعد بن زرارة، وإنما حَدَّثَنَا الزّهريّ، عن أبي أمامة بن سهل مرسل.




আবূ উমামাহ ইবনে সাহল ইবনে হুনাইফ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আস‘আদ ইবনে যুরারাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে প্রবেশ করলেন, যখন তিনি ‘আশ-শাওকাহ’ নামক এক ব্যথায় ভুগছিলেন। এরপর তাঁর (আস‘আদের) গর্দানে দুটি স্থানে গরম লোহা দ্বারা দাগ দেওয়া হলো (দাহন করা হলো), অতঃপর তিনি মারা গেলেন। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “ইহুদিদের জন্য এই মৃত্যুটি কতই না খারাপ! তারা বলবে: তার সঙ্গী তাকে চিকিৎসা করাল, তবুও কি তার কোনো উপকার হলো না?”









আল-জামি` আল-কামিল (11355)


11355 - عن بعض أصحاب النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال: كوى رسول الله صلى الله عليه وسلم سعدا أو أسعد بن زرارة في حلقه من الذُّبحة وقال:"لا أدع في نفسي حرجا من سعد، أو أسعد بن زرارة".

حسن: رواه أحمد (23207) عن حسن (وهو ابن موسى)، حَدَّثَنَا زهير، عن أبي الزُّبير، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن بعض أصحاب النَّبِي صلى الله عليه وسلم فذكره.

وإسناده حسن من أجل عمرو بن شعيب فإنه حسن الحديث.

وأمّا ما رواه محمد بن عبد الرحمن بن سعد بن زرارة الأنصاري قال: سمعت عمي يحيى، وما
أدركت رجلًا منا به شبيها، يحدث الناس أن سعد بن زرارة، وهو جد محمد من قبل أمه، أنه أخذه وجع في حلقه، يقال له: الذبحة، فقال النَّبي صلى الله عليه وسلم:"لأبلغن أو لأبلين في أبي أمامة عذرا" فكواه بيده فمات، فقال النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم:"ميتة سوء لليهود، يقولون: أفلا دفع عن صاحبه؟ وما أملك له، ولا لنفسي شيئًا". فهو ضعيف.

رواه ابن ماجه (3492)، والحاكم (4/ 214 - 215)، وأبو نعيم الأصبهاني في الطب النبوي (353) كلّهم من حديث شعبة قال: حَدَّثَنَا محمد بن عبد الرحمن بن سعد بن زرارة فذكره. واللّفظ لابن ماجه، ولفظ الحاكم مختصر وقال:"صحيح على شرط الشّيخين ولم يخرجاه".

قلت: ليس على شرط الشّيخين فإن عمّ محمد بن عبد الرحمن وهو يحيى مختلف فيه، هل هو ابن أسعد بن زرارة، أو نسب إلى جده أو جد أبيه.

فمنهم من قال: هو يحيى بن أسعد بن زرارة فيكون صحابيا باليقين لأن أسعد بن سعد توفي السنة الأوّلى من الهجرة عند بناء النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم مسجده.

ومنهم من قال: هو يحيى بن سعد بن زرارة.

ومنهم من قال: هو يحيى بن عبد الله بن عبد الرحمن بن أسعد بن زرارة.

ومنهم من قال: هو يحيى بن عبد الله بن عبد الرحمن بن سعد بن زرارة.

وبعد النظر في أقوال أهل العلم تبين من قول محمد بن عبد الرحمن بن سعد بن زرارة -عمّ يحيى- أنه يحيى بن عبد الله بن عبد الرحمن بن سعد بن زرارة فيكون غير صحابي.

وقد جاء التصريح باسمه كاملًا عند الطبريّ في تاريخه (2/ 9) فقال: عن يحيى بن عبد الله بن عبد الرحمن بن أسعد بن زرارة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"بئس الميت أبو أمامة ليهود ومنافقي العرب يقولون: لو كان نبيا لم يمت صاحبه ولا أملك لنفسي ولا لصاحبي من الله شيئًا".

وحديثه مرسل لأنه لم يدرك قصة جده مع النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم.

وقوله:"الذبحة" بضم الذال وفتح الباء كهُمزة وهي وجع في الحلق، وإذا اشتدّ ينقطع النفس فتقتل المريضَ.




কতিপয় সাহাবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সা’দ অথবা আস‘আদ ইবনু যুরারাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর গলদেশের রোগ ‘যুবিহা’র (গলক্ষত) কারণে তাঁকে দাগ দিলেন (দগ্ধ করে চিকিৎসা করলেন)। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “সা‘দ অথবা আস‘আদ ইবনু যুরারার বিষয়ে আমার মনে কোনো দ্বিধা (বা সংকোচ) রাখব না।”









আল-জামি` আল-কামিল (11356)


11356 - عن ابن عباس، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم احتجم وأعطى الحجام أجره واستعط.

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5691)، ومسلم في المساقاة والمزارعة (1202: 65) كلاهما من طريق وهيب، ثنا ابن طاوس، عن أبيه، عن ابن عباس فذكره.

قوله:"واستعط" أي استعمل السعوط وهو دواء يصب في الأنف.

وأمّا ما رُوي عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن خير ما تداويتم به السعوط،
واللدود، والحجامة، والمَشِيُّ" فلما اشتكى رسول الله صلى الله عليه وسلم لده أصحابه فلمّا فرغوا قال:"لدوهم" قال: فلدُّوا كلّهم غير العباس. فهو ضعيف.

رواه الترمذيّ (2047)، والحاكم (4/ 209) وفيه عباد بن منصور ضعيف جدًّا، وقد مضى تخريجه مفصلا في الشمائل، باب ما جاء في كحل رسول الله صلى الله عليه وسلم.

وأمّا قصة لد النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم فقد ثبت في الحديث الآتي.

وقوله:"اللدود" هو الدواء الذي يعطاه المريض عن طريق الفم.

وقوله:"السعوط" وهو الذي يعطاه المريض عن طريق الأنف كما مضى.

وقوله:"والمشي" وهو الدواء المُسْهل.




ইবন আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙ্গা করিয়েছিলেন (হিজামা করিয়েছিলেন), হাজ্জামকে (শিঙ্গা স্থাপনকারীকে) তার পারিশ্রমিক দিয়েছিলেন এবং ‘সা‘ঊত’ (নাকে দেওয়ার ঔষধ) ব্যবহার করেছিলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11357)


11357 - عن عائشة قالت: لَدَدْنا رسولَ الله صلى الله عليه وسلم في مرضه فأشار أن لا تلدُّوني فقلنا: كراهيةُ المريض للدواء فلمّا أفاق قال:"لا يبقى أحد منكم إِلَّا لُدَّ غيرُ العباس فإنه لم يشهدكم".

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5712)، ومسلم في السّلام (2213) كلاهما من طريق يحيى بن سعيد (هو القطان)، ثنا سفيان (هو الثوري)، حَدَّثَنِي موسى بن أبي عائشة، عن عبيد الله ابن عبد الله، عن عائشة قالت: فذكرته.

قوله:"لا تلدُّني" اللدود: الدواء الذي يُصب من أحد جانبي فم المريض بغير اختياره، فأما ما يصب في الحلق فيقال له: الوجور.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে তাঁর অসুস্থতার সময় 'লাদূদ' (জোর করে মুখে ঢেলে) ওষুধ পান করিয়েছিলাম। অতঃপর তিনি ইশারা করলেন যে, তোমরা আমাকে (জোর করে) ওষুধ পান করাবে না। আমরা (পরস্পর) বললাম: রোগীর ওষুধ অপছন্দ হওয়ার কারণেই তিনি এমনটি বলছেন। যখন তিনি সুস্থ হলেন, তখন বললেন: “তোমাদের মধ্যে আব্বাস ব্যতীত আর কেউই যেন অবশিষ্ট না থাকে, যাকে 'লাদূদ' দেওয়া না হয়। কেননা, আব্বাস তোমাদের সাথে উপস্থিত ছিল না।”









আল-জামি` আল-কামিল (11358)


11358 - عن أبي سعيد الخدريّ قال: جاء رجلٌ إلى النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم فقال: إن أخي استطلق بطنه فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"اسقِه عسلا" فسقاه ثمّ جاءه فقال: إني سقيته عسلا فلم يزده إِلَّا استطلاقا فقال له ثلاث مرات، ثمّ جاء الرابعة فقال:"اسقِه عسلا" فقال: لقد سقيته فلم يزده إِلَّا استطلاقا، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"صدق اللهُ وكذب بطنُ أخيك". فسقاه فبرأ.

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5684)، ومسلم في السّلام (2217) كلاهما من حديث قتادة، عن أبي المتوكل، عن أبي سعيد الخدريّ فذكره.

واللّفظ لمسلم، ولفظ البخاريّ مختصر.
وقوله:"استطلق" من الاستطلاق وهو الإسهال، والاسهال لا يكون إِلَّا إذا اجتمع في البطن المادة الفاسدة، فيجب استخراجها، والعسل أنفع وأسرع ما يُخرج هذه المادة الفاسدة.




আবু সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, একজন লোক নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে বলল, "আমার ভাইয়ের পেট খারাপ (ডায়রিয়া) হয়েছে।" তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "তাকে মধু পান করাও।" লোকটি তাকে মধু পান করাল। এরপর সে আবার এসে বলল, "আমি তাকে মধু পান করিয়েছি, কিন্তু তাতে তার রোগ বৃদ্ধি ছাড়া আর কিছুই হয়নি।" তিনি (নবী) তাকে তিনবার একই কথা বললেন। চতুর্থবার লোকটি এসে বলল, "আমি তাকে মধু পান করিয়েছি, কিন্তু তাতে তার রোগ বৃদ্ধি ছাড়া আর কিছুই হয়নি।" তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "আল্লাহ সত্য বলেছেন, আর তোমার ভাইয়ের পেট মিথ্যা বলেছে।" এরপর সে তাকে (মধু) পান করাল এবং সে সুস্থ হয়ে গেল।









আল-জামি` আল-কামিল (11359)


11359 - عن أبي هريرة، أنه سمع رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"في الحبة السوداء شفاء من كل داء إِلَّا السام".

قال ابن شهاب: والسام: الموت، والحبة السوداء: الشُّونيز.

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5688)، ومسلم في السّلام (2215) كلاهما من طريق اللّيث، عن عُقيل، عن ابن شهاب، أخبرني أبو سلمة بن عبد الرحمن وسعيد بن المسيب، أن أبا هريرة أخبرهما فذكره.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছেন: "কালো দানার (কালিজিরা) মধ্যে মৃত্যু ব্যতীত সকল রোগের নিরাময় রয়েছে।"
ইবনু শিহাব বলেন: ‘আস-সাম’ অর্থ মৃত্যু এবং ‘আল-হাব্বাতুস সাওদা’ অর্থ কালিজিরা।









আল-জামি` আল-কামিল (11360)


11360 - عن خالد بن سعد قال: خرجنا ومعنا غالب بن أبجر فمرض في الطريق، فقدمنا
المدينة وهو مريض، فعاده ابن أبي عتيق فقال لنا: عليكم بهذه الحبيبة السوداء، فخذوا منها خمسًا أو سبعا فاسحقوها، ثمّ اقطروها في أنفه بقطرات زيت في هذا الجانب، وفي هذا الجانب فإن عائشة حدثتني أنها سمعت النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم يقول:"إنَّ هذه الحبة السوداء شفاء من كل داء إِلَّا من السام". قلت: وما السام؟ قال: الموت.

صحيح: رواه البخاريّ في الطب (5687) عن عبد الله بن أبي شيبة، ثنا عبيد الله، ثنا إسرائيل، عن منصور، عن خالد بن سعد فذكره.




খালিদ ইবনে সা'দ থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা বের হলাম এবং আমাদের সাথে গালিব ইবনে আবজার ছিলেন। তিনি রাস্তায় অসুস্থ হয়ে পড়লেন। আমরা যখন মদীনায় পৌঁছলাম, তখনও তিনি অসুস্থ ছিলেন। তখন ইবনে আবী আতীক তাঁকে দেখতে আসলেন এবং তিনি আমাদেরকে বললেন: তোমরা এই কালো দানা (কালিজিরা) ব্যবহার করো। তোমরা এর মধ্য থেকে পাঁচ বা সাতটি দানা নিয়ে পিষে ফেলো। অতঃপর কিছু ফোঁটা তেলের সাথে মিশ্রিত করে এক ফোঁটা এই নাকে এবং এক ফোঁটা ওই নাকে দাও। কেননা আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাকে বলেছেন যে, তিনি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছেন: "নিশ্চয়ই এই কালো দানা (কালিজিরা) 'সাম' ব্যতীত সকল রোগের নিরাময়।" আমি (খালিদ) বললাম: 'সাম' কী? তিনি (ইবনে আবী আতীক) বললেন: মৃত্যু।









আল-জামি` আল-কামিল (11361)


11361 - عن ابن عمر أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"عليكم بهذه الحبة السوداء؟ فإن فيها شفاءً من كل داء إلا السام".

حسن: رواه ابن ماجه (3448) عن أبي سلمة -يحيى بن خلف- قال: حَدَّثَنَا أبو عاصم، عن عثمان بن عبد الملك قال: سمعت سالم بن عبد الله، يحدث عن أبيه فذكره.

وإسناده حسن من أجل عثمان بن عبد الملك وهو المكي المؤذن مختلف فيه، ولكنه لا بأس به في الحديث الذي له أصل ثابت، وقد قال ابن معين: ليس به بأس.




ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা এই কালো জিরা ব্যবহার করো। কারণ এতে সাম (মৃত্যু) ব্যতীত অন্য সকল রোগের নিরাময় রয়েছে।"









আল-জামি` আল-কামিল (11362)


11362 - عن بريدة، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"الكمأة دواء للعين، وإن العجوة من فاكهة الجنّة، وإن هذه الحبة السوداء" -قال ابن بريدة: يعني الشونيز الذي يكون في الملح-، دواء من كل داء إِلَّا الموت".

حسن: رواه أحمد (22938) عن أسود بن عامر، حَدَّثَنَا زهير، عن واصل بن حيان البجليّ، حَدَّثَنَا عبد الله بن بريدة، عن أبيه فذكره.

وقوله:"واصل بن حيان" خطأ غلط فيه زهير بن معاوية. قال أحمد بن حنبل: انقلب على زهير اسمه، وقال أبو داود: وغلط فيه زهير.

والصواب أنه صالح بن حيان القرشي ويقال له: القراشي الكوفي ضعيف، تكلم فيه البخاريّ وأبو حاتم وأبو داود وغيرهم.

وجاء التصريح باسمه عند أحمد (22972) في حديث طويل عن محمد بن عبيد قال: حَدَّثَنَا صالح -يعني ابن حيان- عن ابن بريدة، عن أبيه أنه كان مع رسول الله صلى الله عليه وسلم في اثنين وأربعين من أصحابه، والنبي صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي في المقام، وهم خلفه جلوس ينتظرونه، فلمّا صلى أهوى فيما بينه وبين الكعبة كأنه يريد أن يأخذ شيئًا، ثمّ انصرف إلى أصحابه، فثاروا وأشار إليهم بيده أن اجلسوا فجلسوا. فقال:"رأيتموني حين فرغت من صلاتي أهويت فيما بيني وبين الكعبة كأني أريد أن آخذ شيئًا". قالوا: نعم يا رسول الله. قال:"إنَّ الجنّة عرضت عليّ، فلم أر مثل ما فيها، وإنها مرت بي خصلة من عنب فأعجبتني، فأهويت إليها لآخذها فسبقتني، ولو أخذتها لغرستها بين ظهرانيكم
حتّى تأكلوا من فاكهة الجنّة، واعلموا أن الكمأة دواء العين، وأن العجوة من فاكهة الجنّة، وأن هذه الحبة السوداء -التي تكون في الملح-، اعلموا أنها دواء من كل داء إِلَّا الموت".

ولكن روي الحديثُ من وجه آخر، رواه ابن أبي شيبة (23906) عن عبد الرحيم بن سليمان، عن إسماعيل بن مسلم، عن قتادة، ومطر بن عبد الرحمن، عن عبد الله بن بريدة، عن أبيه، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم، قال:"الشونيز فيه شفاء من كل داء إِلَّا السام"، قالوا: يا رسول الله، ما السام؟ قال:"الموت".

وإسماعيل بن مسلم هو المكي أبو إسحاق ضعيف، ضعّفه ابن معين وابن المديني وأبو حاتم وغيرهم.

ولكن الحديث بهذين الإسنادين يتقوى إذْ ليس فيهم من اتهم، ولفقراته شواهد صحيحة.

وقوله:"الشونيز" هو الحبة السوداء.




বুরায়দা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আল-কামআহ (এক প্রকার মাশরুম/ট্রাফল) হল চোখের জন্য ঔষধ, আর নিশ্চয় আজওয়া (খেজুর) হল জান্নাতের ফলসমূহের অন্তর্ভুক্ত, আর নিশ্চয় এই কালো বীজ— (ইবনু বুরায়দা বলেছেন: অর্থাৎ শৌনীয, যা লবণে ব্যবহৃত হয়)— মৃত্যু ছাড়া সকল রোগের নিরাময়।"









আল-জামি` আল-কামিল (11363)


11363 - عن أم قيس بنت محصن قالت: دخلتُ بابن لي على رسول الله صلى الله عليه وسلم وقد أعلقت عليه من العذرة، فقال:"على ما تَدْغَرْنَ أولادكن بهذا العلاق؟ عليكن بهذا العود الهندي؛ فإن فيه سبعة أشفية، منها: ذات الجنب يُسعَطُ من العذرة، ويُلَدُّ من ذات الجنب".

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5713)، ومسلم في السّلام (2214) كلاهما من طريق سفيان بن عيينة، عن الزّهريّ، عن عبيد الله بن عبد الله، عن أم قيس بنت محصن فذكرته.

زاد البخاريّ: دال الزهري: بيّن لنا اثنين، ولم يبين لنا خمسة.

وروياه من طريق آخر وزادا:"دخلت بابن لي على رسول الله صلى الله عليه وسلم لم يأكل الطعام، فبال عليه فدعا بماء فرشَّه".

وقولها:"أعلقت عليه" أي عالجت عذرة الصبي بأن غمزتها بأصبعي.

وقولها:" تدغرن" الدغر غمز الحلق.




উম্মে কাইস বিনত মিহসান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আমি আমার এক পুত্র সন্তানকে নিয়ে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের নিকট প্রবেশ করলাম, যখন তার গলার ব্যথার (আযরাহ্) কারণে আমি তাকে গলায় চেপে দিয়েছিলাম (চিকিৎসা করছিলাম)। তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: তোমরা কেন তোমাদের সন্তানদের এই চাপ দিয়ে (গলা টিপে) চিকিৎসা করছো? তোমরা অবশ্যই এই ভারতীয় উদ (আগর/কাঠ) ব্যবহার করবে। কারণ এর মধ্যে সাতটি রোগের আরোগ্য রয়েছে। তার মধ্যে একটি হলো যাতুল জাম্ব (ফুসফুসের প্রদাহ)। গলার ব্যথার (আযরাহ্) জন্য তা নাকে টানা হয় এবং যাতুল জাম্বের জন্য তা পার্শ্বদেশ দিয়ে মুখে সেবন করানো হয়।

অন্য এক বর্ণনায় আরও এসেছে: আমি আমার এমন এক পুত্র সন্তানকে নিয়ে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের নিকট প্রবেশ করলাম যে তখনও খাদ্য গ্রহণ শুরু করেনি। সে তাঁর (কাপড়ে) প্রস্রাব করে দিল। অতঃপর তিনি পানি চেয়ে তা ছিটিয়ে দিলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11364)


11364 - عن أنس أنه سئل عن أجر الحجام فقال: احتجم رسول الله صلى الله عليه وسلم حجمه أبو طيبة، وأعطاه صاعين من طعام، وكلم مواليه، فخفّفوا عنه وقال:"إنَّ أمثل ما تداويتم به الحجامةَ والقُسْط البحري" وقال:"لا تُعَذِّبوا صبيانَكم بالغمز من العُذْرة، وعليكم بالقُسْط"

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5696) -واللّفظ له-، ومسلم في المساقاة (1577: 63) كلاهما من حديث حميد الطّويل، عن أنس فذكره.

والقسط البحري: هو العود الهندي.

وقوله:"لا تعذبوا صبيانكم بالغمز من العُذرة" والعذرة هي وجع أو ورم يُهيج في الحلق من الدم أيام الحر، فكانوا يغمزون موضعه بالأصابع ليخرج منه دم أسود، فأرشدهم إلى أن القسط
يغني عنه.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁকে শিঙ্গা লাগানো ব্যক্তির (হাজ্জামের) পারিশ্রমিক সম্পর্কে জিজ্ঞেস করা হলে তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙ্গা লাগিয়েছিলেন। আবূ তাইবাহ তাঁকে শিঙ্গা লাগিয়েছিল। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে দুই সা' খাদ্য প্রদান করেন এবং তার মনিবদের সাথে কথা বললেন, ফলে তারা তার উপর থেকে (দায়িত্ব) হালকা করে দিল। আর তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "নিশ্চয়ই তোমরা যা দ্বারা চিকিৎসা করো, তার মধ্যে সর্বোত্তম হলো শিঙ্গা লাগানো এবং ক্বুস্তুল বাহরি (সামুদ্রিক চন্দন কাঠ)।" তিনি আরও বললেন: "তোমরা তোমাদের শিশুদের আল-উযরা (গলার রোগ)-এর কারণে চেপে ধরে কষ্ট দিও না, বরং তোমরা ক্বুস্ত ব্যবহার করো।"









আল-জামি` আল-কামিল (11365)


11365 - عن جابر، قال: دخل رسول الله صلى الله عليه وسلم على أم سلمة -قال ابن أبي غنية: دخل على عائشة بصبي يسيل منخراه دما- قال أبو معاوية في حديثه، وعندها صبي يَثْعَبُ منخراه دما، قال: فقال:"ما لهذا؟" قال: فقالوا: به العذرة، قال: فقال:"علامَ تُعَذِّبْن أولادَكن، إنّما يكفي إحداكن أن تأخذ قُسْطا هنديا فتحكّه بماءٍ سبع مرات، ثمّ تُوجره إياه" -قال ابن أبي غنية: ثمّ تُسْعِطه إياه-، ففعلوا فبرأ.

صحيح: رواه أحمد (14385) عن أبي معاوية، وابن أبي غنية المعنى، قالا: حَدَّثَنَا الأعمش، عن أبي سفيان، عن جابر فذكره.

وإسناده صحيح، وأبو غنية هو: يحيى بن عبد الملك بن حميد بن أبي غنية - بفتح الغين وكسر النون وتشديد الياء - الخزاعي ثقة، وثَّقه أحمد، وابن معين، والعجليّ، وأبو داود، والدارقطني وغيرهم.

ولكن قال الحافظ في التقريب"صدوق له أفراد من كبار التاسعة" وإنه اعتمد على ذلك قول ابن عدي: بعض حديثه لا يتابع عليه، وهو ممن يكتب حديثه.

وهذا الحديث رواه أيضًا البزّار - كشف الأستار (3024) من طريق أبي معاوية وحده، والحاكم (4/ 205) من وجه آخر عن الأعمش بإسناده نحوه.

قال الحاكم:"صحيح على شرط مسلم".

وقوله:"يثعب منخراه" أي يسيل.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উম্মে সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট প্রবেশ করলেন। ইবনু আবি গানিয়্যা বলেছেন: তিনি আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট এমন এক শিশুর কাছে প্রবেশ করলেন যার নাক থেকে রক্ত ঝরছিল। আবু মু'আবিয়া তাঁর হাদীসে বলেন, সেখানে একটি শিশু ছিল যার নাক থেকে রক্তপাত হচ্ছিল। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "এর কী হয়েছে?" তারা বলল, তার আল-আযরাহ (টনসিলের রোগ) হয়েছে। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "তোমরা তোমাদের সন্তানদের কেন কষ্ট দাও? তোমাদের কারো জন্য এটাই যথেষ্ট যে সে যেন কুস্তুল হিন্দি (ভারতীয় চন্দন কাঠ) নেয় এবং তা সাতবার পানি দিয়ে ঘষে। এরপর তাকে তা পান করায়।" ইবনু আবি গানিয়্যা বলেন: অতঃপর তা তার নাকে প্রয়োগ করে। তারা তা করল এবং শিশুটি সুস্থ হয়ে গেল।









আল-জামি` আল-কামিল (11366)


11366 - عن أنس أن ناسا اجتووا في المدينة، فأمرهم النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم أن يلحقوا براعيه يعني الإبل، فيشربوا من ألبانها وأبوالها، فلحقوا براعيه، فشربوا من ألبانها وأبوالها حتّى صلحت أبدانهم، فقتلوا الراعيّ، وساقوا الإبل، فبلغ النبيَّ صلى الله عليه وسلم فبعث في طلبهم، فجيء بهم، فقطع أيديهم وأرجُلَهم، وسمر أعينَهم.

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5686)، ومسلم في القسامة (1671: … ) كلاهما من طريق همام، عن قتادة، عن أنس فذكره. والسياق للبخاريّ، ولم يسق مسلم لفظه، وإنما أحال على لفظ رواية قبلها.

وفي معناه ما رُوي عن ابن عباس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إن في أبوال الإبل وألبانها شفاء للذّربة بُطونهم".

رواه أحمد (2677)، والطَّبراني في الكبير (12/ 238) كلاهما من حديث ابن لهيعة، حَدَّثَنَا
عبد الله بن هُبَيْرة، عن حنش بن عبد الله أن ابن عباس قال: فذكره.

وابن لهيعة معروف، ولم يتابع على هذا.

و"الذربة": بفتح الراء - الداء الذي يعرض للمعدة فلا تهضم الطعام، ويفسد فيها فلا تمسكه. كذا في"النهاية".




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, কিছু লোক মদীনায় এসে অসুস্থ হয়ে পড়লে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদেরকে আদেশ করলেন যে তারা যেন তাঁর রাখালের (অর্থাৎ উটের) কাছে চলে যায় এবং তারা যেন উটের দুধ ও মূত্র পান করে। তারা রাখালের কাছে গেল এবং উটের দুধ ও মূত্র পান করল, ফলে তাদের শরীর সুস্থ হলো। কিন্তু এরপর তারা রাখালকে হত্যা করল এবং উটগুলো তাড়িয়ে নিয়ে গেল। এই খবর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে পৌঁছলে তিনি তাদের খোঁজে লোক পাঠালেন। এরপর যখন তাদেরকে ধরে আনা হলো, তখন তিনি তাদের হাত-পা কেটে দিলেন এবং তাদের চোখে গরম শলাকা ঢুকিয়ে দিলেন (বা: চোখ উপড়ে ফেললেন)।









আল-জামি` আল-কামিল (11367)


11367 - عن ابن مسعود قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"ما أنزل الله داء إِلَّا أنزل له دواء، فعليكم بألبان البقر، فإنها تَرُمُّ من كل الشجر".

صحيح: رواه ابن حبَّان (6075)، والطيالسي (366)، والحاكم (4/ 196)، والبيهقي (9/ 345) كلّهم من طرق عن قيس بن مسلم، عن طارق بن شهاب، عن ابن مسعود فذكره. وإسناده صحيح.

وصحّحه الحاكم على شرط مسلم.

وفي الإسناد اختلاف في الرفع والوقف والوصل والإرسال غير أن ما ذكرته هو أصحها.

ورواه البزّار (2999) من طريق محمد بن جابر، عن قيس بن مسلم، عن طارق بن شهاب، عن أبي موسى، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم مثله.

فجعله من مسند أبي موسى الأشعري.

ومحمد بن جابر هو: ابن سيار بن طارق الحنفيّ، قال أبو زرعة:"ساقط الحديث"، وقال البخاريّ:"ليس بالقويّ، يتكلمون فيه، روى مناكير"، وقال أبو داود:"ليس بشيء"، وقال ابن حبَّان:"كان أعمى يلحق في كتبه ما ليس من حديثه، ويسرق ما ذُوكِرَ به، فيحدّث به".

وقوله:"ترمُّ" بضم الراء، وتشديد الميم أي تأكل، أي فربما تأكل من شجر يكون دواء، ويبقى أثرها في اللبن.

وأمّا ما رُوي عن لحومها بأنها داء فلم يثبت، وهو ما رواه الطبرانيّ في الكبير (25/ 42) عن عليّ بن عبد العزيز، ثنا أحمد بن يونس، ثنا زهير، حدثتْني امرأة من أهليّ، عن مُليكة بنت عمرو الزيدية من ولد زيد بن سعد قالت: اشتكيتُ وجعا في حلقيّ، فأتيتُها فوضعتْ لي سمنَ بقرة قالت: إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"ألبانها شفاء، وسمنها دواء، ولحومها داء".

ورواه أبو داود في المراسيل (444) عن ابن نفيل، حَدَّثَنَا زهير، بإسناده ظنا منه أن مليكة بنت عمرو غير صحابية، وجزم بصحتها جماعة من أهل العلم.

وفي الإسناد المرأة لم تُسم، وبه أعلّه أيضًا الهيثميّ في"المجمع" (5/ 90).

ورواه محمد بن جرير الطبريّ -ومن طريقه أبو نعيم في الطب (325) - عن أحمد بن الحسن الترمذيّ، حَدَّثَنَا محمد بن موسى النسائيّ، حَدَّثَنَا دفّاع بن دَغْفل السدوسيّ، عن عبد الحميد بن
صيفي بن صُهَيب، عن أبيه، عن جده يرفعه:"عليكم بألبان البقر؛ فإنها شفاء، وسمنُها دواء، ولحومُها داء".

أورده ابن القيم في زاده (4/ 324 - 325) وقال:"ولا يثبت ما في هذا الإسناد".

قلت: فيه دفّاع -بفتح الدال ثمّ فاء مشددة- ابن دَغْفل القيسي أو السدوسي قال أبو حاتم: ضعيف.

وعبد الحميد بن صيفي بن صُهَيب"لين الحديث" كما في التقريب.

وفي معناه ما روي أيضًا عن عبد الرحمن بن عبد الله بن مسعود، عن أبيه، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم نحوه.

رواه أبو نعيم في الطب (858)، والحاكم (4/ 404) وقال:"هذا حديث صحيح الإسناد".

وتعقبه الذّهبيّ فقال:"فيه سيف بن مسكين وهّاه ابن حبَّان" انتهى.

قلت: قال ابن حبَّان:"شيخ من أهل البصرة، يأتي بالمقلوبات والأشياء الموضوعات، لا يحل الاحتجاج به لمخالفته الأثبات في الروايات على قلتها" - المجروحين (440).

والخلاصة فيه: أن هذا الحديث لا يصح بوجه من الوجوه بل هو مخالف لقوله تعالى: {لِيَشْهَدُوا مَنَافِعَ لَهُمْ وَيَذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ فِي أَيَّامٍ مَعْلُومَاتٍ عَلَى مَا رَزَقَهُمْ مِنْ بَهِيمَةِ الْأَنْعَامِ فَكُلُوا مِنْهَا وَأَطْعِمُوا الْبَائِسَ الْفَقِيرَ} [الحج: 28].

ومن بهيمة الأنعام البقر لقوله تعالى: {وَمِنَ الْأَنْعَامِ حَمُولَةً وَفَرْشًا كُلُوا مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ وَلَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُبِينٌ (142) ثَمَانِيَةَ أَزْوَاجٍ مِنَ الضَّأْنِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْمَعْزِ اثْنَيْنِ قُلْ آلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ أَمِ الْأُنْثَيَيْنِ أَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ أَرْحَامُ الْأُنْثَيَيْنِ نَبِّئُونِي بِعِلْمٍ إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ (143) وَمِنَ الْإِبِلِ اثْنَيْنِ وَمِنَ الْبَقَرِ اثْنَيْنِ قُلْ آلذَّكَرَيْنِ حَرَّمَ أَمِ الْأُنْثَيَيْنِ أَمَّا اشْتَمَلَتْ عَلَيْهِ أَرْحَامُ الْأُنْثَيَيْنِ أَمْ كُنْتُمْ شُهَدَاءَ إِذْ وَصَّاكُمُ اللَّهُ بِهَذَا فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَى عَلَى اللَّهِ كَذِبًا لِيُضِلَّ النَّاسَ بِغَيْرِ عِلْمٍ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ} [سورة الأنعام: 142 - 144].

والله تعالى لا يأمر بأكل شيء فيه ضررٌ محضٌ، أو ضررُه أكثرُ كما ثبت أيضًا عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم أنه ضحّى عن نسائه بقرة، وأمر أصحابه بأكلها، وهو لا يأمر أصحابه بأكل شيء فيه داء، كما أنه لا يتقرب إلى الله بشيء فيه ضررٌ. والله تعالى أعلم.




ইবনে মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আল্লাহ এমন কোনো রোগ পাঠাননি, যার জন্য তিনি আরোগ্য পাঠাননি। সুতরাং তোমরা গরুর দুধ গ্রহণ করো, কেননা এটি সকল প্রকার গাছপালা থেকে ভক্ষণ করে।