হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (11388)


11388 - عن فاطمة بنت المنذر أن أسماء بنت أبي بكر إذا أُتيتْ بالمرأة وقد حمّتْ تدعو لها، أخذت الماء فصبّته بينها وبين جيبها وقالت: إن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان يأمرنا أن نُبردها بالماء.

متفق عليه: رواه مالك في العين (15) عن هشام بن عروة، عن فاطمة بنت المنذر فذكرته.

ورواه البخاريّ في الطب (5724) من طريق مالك به.

ورواه مسلم في السّلام (2211) من وجه آخر عن هشام بن عروة به.




আসমা বিনতে আবি বকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যখন কোনো নারীকে তার নিকট আনা হতো যার জ্বর এসেছে, তখন তিনি তার জন্য দু‘আ করতেন। অতঃপর তিনি পানি নিতেন এবং তা তার বুক ও জামার মাঝখানে ঢেলে দিতেন এবং বলতেন: নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদেরকে নির্দেশ দিতেন যেন আমরা পানি দ্বারা তা ঠান্ডা করি।









আল-জামি` আল-কামিল (11389)


11389 - عن عائشة عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"الحمى من فيح جهنّم فأبردوها بالماء"

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5725)، ومسلم في السلام (2210) كلاهما من طريق هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة فذكرته.




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "জ্বর হলো জাহান্নামের উত্তাপ, অতএব তোমরা তা পানি দ্বারা শীতল করো।"









আল-জামি` আল-কামিল (11390)


11390 - عن رافع بن خديج قال: سمعت النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم يقول:"الحمى من فوج جهنّم فأبردوها بالماء".

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5726)، ومسلم في السّلام (3212: 83) كلاهما من طريق أبي الأحوص، عن سعيد بن مسروق، عن عباية بن رفاعة، عن جده رافع بن خديج فذكره.

ورواه ابن ماجه (3473) من وجه آخر عن مصعب بن المقدام قال: حَدَّثَنَا إسرائيل، عن سعيد بن مسروق، بإسناده وزاد فيه: فدخل على ابن لعمار فقال: اكشف البأس، ربّ الناس، إله الناس.

ومصعب بن المقدام لا بأس به، وكان من العباد فلعله دخل عليه حديث في حديث.




রাফে' ইবন খাদীজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "জ্বর হলো জাহান্নামের তাপপ্রবাহ থেকে, সুতরাং তোমরা পানি দ্বারা তাকে ঠান্ডা করো।"









আল-জামি` আল-কামিল (11391)


11391 - عن أبي بشير الأنصاريّ، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال في الحمى:"أبردوها بالماء؛ فإنها
من فيح جهنّم".

حسن: رواه أحمد (21886) عن محمد بن جعفر، حَدَّثَنَا شعبة، عن حبيب الأنصاريّ، قال: سمعت ابن أبي بشير وابنة أبي بشير يحدثان عن أبيها، أبي بشير فذكره.

وإسناده حسن وابن أبي بشير وابنة أبي بشير مجهولان لكن يقوي أحدهما الآخر، ثمّ ليس في حديثهما ما ينكر عليه، بل له أصل ثابت.




আবূ বাশীর আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জ্বর সম্পর্কে বলেছেন: "তোমরা একে পানি দ্বারা শীতল করো; কারণ এটা জাহান্নামের উত্তাপ থেকে সৃষ্ট।"









আল-জামি` আল-কামিল (11392)


11392 - عن أنس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إذا حُمَّ أحدكم فَلْيُسَنَّ عليه الماء ثلاثَ ليال من السحر".

صحيح: رواه أبو يعلى (3794) عن هارون بن الحمال، حَدَّثَنَا روح بن عبادة، حَدَّثَنَا حمّاد بن سلمة، أخبرنا حُميد، عن أنس فذكره. وإسناده صحيح.

ورواه أيضًا النسائيّ في الكبري (7612)، وصحّحه الحاكم (4/ 200 - 201)، والضياء في المختارة (2044، 2045) كلّهم من طرق عن ابن عائشة -وهو عبيد الله بن محمد ابن عائشة، ونسب إلى عائشة بنت طلحة لأنه من ذريتها، وإلَّا فاسم جده حفص بن عمر بن موسى التيمي- وهو ثقة أيضًا.

وقوي إسناده الحافظ في الفتح (10/ 177).

إِلَّا إن أبا حاتم وأبا زرعة رجّحا عن حمّاد بن سلمة، عن حميد، عن الحسن مرسلًا. علل الحديث (2/ 337).

ولا مانع أن يكون كلا الطريقين محفوظين؛ فإن حميدا سمع من شيخه أنس كما سمع من شيخه الحسن. والله تعالى أعلم.

وأمّا ما رُوي عن ثوبان، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"إذا أصاب أحدكم الحمى -فإن الحمى قطعة من النّار- فليطفئها عنه بالماء، فليستنقع نهرا جاريا ليستقبل جرية الماء فيقول: بسم الله، اللَّهُمَّ! اشف عبدك، وصدق رسولك بعد صلاة الصبح قبل طلوع الشّمس فليغتمس فيه ثلاث غمسات ثلاثة أيام، فإن لم يبرأ في ثلاث فخمس، وإن لم يبرأ في خمس فسبع، فإن لم يبرأ في سبع فتسع، فإنها لا تكاد تجاوز تسعا بإذن الله" فهو ضعيف.

رواه الترمذيّ (2084)، وأحمد (22425) كلاهما من حديث روح بن عبادة قال: حَدَّثَنَا مرزوق أبو عبد الله الشاميّ، قال: حَدَّثَنَا رجل من أهل الشام قال: أخبرنا ثوبان فذكره.

كذا عند الترمذيّ: رجل من أهل الشام، واسمه سعيد كما في مسند أحمد وهو سعيد بن زرعة الشامي كما في الطبراني (2/ 100)، وذكره البخاري في التاريخ الكبير (3/ 466 - 468) فقال: سعيد الحمصي الشامي ثم أخرج الحديث من طريق روح بن عبادة، ثمّ قال: إن لم يكن ابن زرعة فلا أدري.
قلت: وهو مجهول فإني لم أقف على من وثّقه، ونقل المزي في تهذيبه عن أبي حاتم أنه قال: مجهول، ولكن بعد مراجعة التعليق الذي في التاريخ الكبير تبين أنه رجل آخر غير شيخ مرزوق كانا شاميين.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যে, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যখন তোমাদের কারো জ্বর হয়, তখন সাহরের (শেষ রাতের) সময় তিন রাত ধরে তার উপর পানি ঢেলে দেওয়া উচিত।"









আল-জামি` আল-কামিল (11393)


11393 - عن سهل بن سعد الساعدي قال: لما كُسِرَتْ على رأس رسول الله صلى الله عليه وسلم البيضةُ، وأُدْمِيَ وجهُه، وكُسِرَتْ رباعيتُه، وكان عليٌّ يختلف بالماء في المِجَنِّ، وجاءتْ فاطمةُ تغسِلُ عن وجهه الدمَ، فلمّا رأت فاطمةُ الدمَ يزيد على الماء كثرةً، عَمِدَتْ إلى حصيرٍ فأحرَقتْها، وألصقتْها على جُرْح رسول الله صلى الله عليه وسلم، فرقأ الدمُ.

وفي رواية: أخذتْ قطعةَ حصيرٍ فأحرقتْه حتّى صار رمادا، ثمّ ألصقتْه بالجرح، فاستمسك الدمُ.

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5722)، ومسلم في الجهاد والسير (1790: 102) كلاهما من طريق يعقوب بن عبد الرحمن القاريّ، عن أبي حازم، أنه سمع سهل بن سعد فذكره.

والرّواية الأخرى لمسلم (1790: 101) من طريق عبد العزيز بن أبي حازم، عن أبيه أنه سمع سهل بن سعد به.




সাহল ইবনু সা'দ আস-সাঈদী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের মাথায় শিরস্ত্রাণ (হেলমেট) ভেঙে গেল, তাঁর মুখমণ্ডল রক্তে রঞ্জিত হলো এবং তাঁর সামনের একটি দাঁত (রুবাইয়া) ভেঙে গেল, তখন আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) ঢালের মধ্যে করে পানি আনছিলেন, আর ফাতিমা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁর চেহারা থেকে রক্ত ধুয়ে দিচ্ছিলেন। ফাতিমা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) যখন দেখলেন যে পানির কারণে রক্ত আরো বেশি করে বেরিয়ে আসছে, তখন তিনি একটি চাটাই নিলেন এবং তা পুড়িয়ে ফেললেন। অতঃপর পুড়ে যাওয়া সেই বস্তুটি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের জখমের উপর লাগিয়ে দিলেন। ফলে রক্তপাত বন্ধ হয়ে গেল।

অন্য এক বর্ণনায় আছে: তিনি এক টুকরা চাটাই নিলেন এবং তা পুড়িয়ে ছাই করলেন। এরপর তা জখমের সাথে লাগিয়ে দিলেন, ফলে রক্তপাত থেমে গেল।









আল-জামি` আল-কামিল (11394)


11394 - عن عمر بن الخطّاب قال: دخلت على النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم، وغلام له حبشي يغمز ظَهْرَه، فقلت: ما شأنك يا رسول الله؟ قال:"إنَّ الناقة اقتحمت بي".

حسن: رواه البزّار (282) من حديث خالد بن خِداش بن عجلان، قال: حَدَّثَنَا عبد الله بن زيد ابن أسلم، عن أبيه، عن جده، عن عمر بن الخطّاب فذكره.

وكذلك رواه الطبرانيّ في الأوسط (8073) من حديث قُتَيبة بن سعيد قال: حَدَّثَنَا عبد الله بن زيد بن أسلم فذكره.

وذكره معلقًا الضياء في المختارة (1/ 184) من حديث قُتَيبة بن سعيد، ولم يذكر فيه"عن جده" فقال:"وزيد لم يسمع من عمر".

فالظاهر أن في نسخته سقط"عن جده".

وإسناده حسن من أجل عبد الله بن زيد بن أسلم فإن فيه كلامًا إِلَّا أنه لم ينفرد به، تابعه هشام ابن سعد، عن زيد بن أسلم، عن أبيه، عن عمر فذكره.

ومن هذا الطريق رواه الطبرانيّ في الصغير (1/ 83)، وأبو نعيم في الطب النبوي (419)،
والخطيب البغدادي في تاريخه (6/ 210 - 211)، والضياء في المختارة.

وهشام بن سعد حسن الحديث في المتابعة.

وقوله:"الغمز" هو الكبش باليد.

وقوله:"إنَّا الناقة اقتحمت بي" أي جعلتْني في ورطة.




উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট প্রবেশ করলাম, আর তাঁর একজন হাবশী গোলাম তাঁর পিঠ মালিশ করছিল। আমি বললাম: ইয়া রাসূলুল্লাহ! আপনার কী হয়েছে? তিনি বললেন: "নিশ্চয় উটনীটি আমাকে সংকটে ফেলে দিয়েছে।"









আল-জামি` আল-কামিল (11395)


11395 - عن عبد الله بن عباس أن عمر بن الخطّاب خرج إلى الشام، حتّى إذا كان بِسَرْغٍ لقيه أمراء الأجناد، أبو عبيدة بن الجراح وأصحابه، فأخبروه أن الوباء قد وقع بأرض الشام.

قال ابنُ عباس: فقال عمر بنُ الخطّاب: ادع لي المهاجرين الأوّلين، فدعاهم فاستشارهم، وأخبرهم أن الوبا قد وقع بالشام، فاختلفوا، فقال بعضهم: قد خرجتَ لأمرٍ، ولا نرى أن ترجع عنه، وقال بعضهم: معك بقية الناس وأصحاب رسول الله صلى الله عليه وسلم ولا نرى أن تقدمهم على هذا الوباء، فقال عمر: ارتفعوا عنيّ، ثمّ قال: ادع لي الأنصار، فدعوتهم فاستشارهم، فسلكوا سبيل المهاجرين، واختلفوا كاختلافهم، فقال: ارتفعوا عني، ثمّ قال: ادع لي من كان هاهنا من مشيخة قريش من مهاجرة الفتح، فدعوتهم، فلم يختلف عليه منهم رجلان، فقالوا: نرى أن ترجع بالناس ولا تقدمهم على هذا الوباء، فنادى عمر في الناس: إني مصبح على ظَهْرٍ فأصبحوا عليه، فقال أبو عبيدة: أَفِرَارًا من قدر الله؟ فقال عمرُ: لو غيرك قالها يا أبا عبيدة؟ نعم، نَفِرُّ من قدر الله إلى قدر الله، أرأيتَ لو كان لك إبلٌ فهبطت واديا له عُدوتان، إحداهما خصبة، والأخرى جدبة، أليس إنْ رعيتَ الخصبة رعيتَها بقدر الله، وإنْ رعيتَ الجدبة رعيتَها بقدر الله، فجاء عبدُ الرحمن بن عوف وكان غائبا في بعض حاجته، فقال: إن عندي من هذا علما سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"إذا سمعتم به بأرضٍ فلا تقدموا عليه، وإذا وقع بأرضٍ وأنتم بها فلا تخرجوا فرارًا منه".

قال: فحمد الله عمر، ثمّ انصرف.

متفق عليه: رواه مالك في الجامع (22) عن ابن شهاب، عن عبد الحميد بن عبد الرحمن بن زيد بن الخطّاب، عن عبد الله بن عبد الله بن الحارث بن نوفل، عن عبد الله بن عباس فذكره.

ورواه البخاريّ في الطب (5729)، ومسلم في السّلام (2219) من طريق مالك به.

ورواه مسلم من وجه آخر عن معمر بهذا الإسناد نحو حديث مالك، وزاد في حديث معمر قال: وقال له أيضًا: أرأيتَ أنه لو رعى الجدْبةَ وترك الخصبة، أَكنتَ مُعْجِزَه؟ قال: نعم قال: فَسِرْ
إذًا، قال: فسارَ حتّى أتى المدينةَ فقال: هذا المُحِلُّ، أو قال: هذا المنزل إن شاء الله.

قوله:"بسرغ" سرغ: قرية بتبوك قبل مدينة الشام بينها وبين المدينة ثلاثة عشر مرحلة. وهي المدوَّرة اليوم، مركز الحدود بين الأردن والسعودية.




আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সিরিয়ার (শামের) উদ্দেশ্যে বের হলেন। তিনি যখন সার্গ (Sargh)-এ পৌঁছালেন, তখন সেনাপতিরা—আবু উবাইদাহ ইবনুল জাররাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এবং তাঁর সঙ্গীরা—তাঁর সাথে সাক্ষাৎ করলেন এবং তাঁকে জানালেন যে সিরিয়ার ভূমিতে মহামারি (প্লেগ/তাউন) দেখা দিয়েছে।

ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, তখন উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, 'আমার কাছে প্রথম দিকের মুহাজিরদের ডেকে আনো।' তিনি তাঁদের ডাকালেন, তাঁদের সাথে পরামর্শ করলেন এবং তাঁদেরকে জানালেন যে সিরিয়ায় মহামারি দেখা দিয়েছে। তাঁরা ভিন্নমত পোষণ করলেন। তাঁদের কেউ কেউ বললেন, 'আপনি একটি কাজের জন্য বের হয়েছেন, তাই আমাদের মনে হয় না আপনার সেখান থেকে ফিরে যাওয়া উচিত।' আর কেউ কেউ বললেন, 'আপনার সাথে সাধারণ মানুষ এবং রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাহাবীগণ রয়েছেন। আমাদের মনে হয় না আপনি তাঁদেরকে এই মহামারির দিকে ঠেলে দেবেন।' তখন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, 'আপনারা আমার থেকে দূরে যান।' এরপর তিনি বললেন, 'আমার কাছে আনসারদের ডেকে আনো।' আমি তাঁদের ডাকলাম, তিনি তাঁদের সাথে পরামর্শ করলেন। তাঁরা মুহাজিরদের পথই অনুসরণ করলেন এবং তাঁদের মতোই ভিন্নমত পোষণ করলেন। তখন তিনি বললেন, 'আপনারা আমার থেকে দূরে যান।' এরপর তিনি বললেন, 'আমার কাছে এখানে উপস্থিত থাকা কুরাইশের প্রবীণদের—যারা মক্কা বিজয়ের পর ইসলাম গ্রহণকারী মুহাজির—তাঁদের ডেকে আনো।' আমি তাঁদের ডাকলাম। তাঁদের মধ্যে দু'জন লোকও তাঁর সাথে ভিন্নমত পোষণ করলেন না। তাঁরা বললেন, 'আমরা মনে করি, আপনি মানুষকে নিয়ে ফিরে যান এবং এই মহামারির দিকে তাঁদের ঠেলে দেবেন না।' তখন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) লোকজনের মাঝে ঘোষণা দিলেন, 'আমি আগামীকাল ভোরে মদিনার দিকে প্রত্যাবর্তন করব। আপনারাও যেন তাঁর জন্য প্রস্তুত থাকেন।'

তখন আবূ উবাইদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, 'আপনি কি আল্লাহর ফয়সালা (তকদীর) থেকে পালাচ্ছেন?' উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, 'আবু উবাইদাহ! যদি অন্য কেউ এই কথা বলত (তাহলে না হয় মেনে নিতাম)! হ্যাঁ, আমরা আল্লাহর ফয়সালা থেকে আল্লাহর ফয়সালার দিকেই পলায়ন করছি। আপনি বলুন তো, যদি আপনার কিছু উট থাকত এবং তা এমন একটি উপত্যকায় নেমে আসত যার দু'টি তীর (পার) রয়েছে—একটি সবুজ ও উর্বর, অন্যটি শুকনো ও অনূর্বর—আপনি যদি উর্বর তীরে চরান, তবে কি আপনি তা আল্লাহর ফয়সালা অনুসারেই চরালেন না? আর যদি অনূর্বর তীরে চরান, তবে কি আপনি তা আল্লাহর ফয়সালা অনুসারেই চরালেন না?'

এরপর আব্দুর রহমান ইবনে আওফ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এলেন, তিনি তাঁর কোনো প্রয়োজনে অনুপস্থিত ছিলেন। তিনি বললেন, 'আমার কাছে এ বিষয়ে জ্ঞান আছে। আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "যখন তোমরা কোনো দেশে মহামারির খবর শুনবে, তখন সেখানে প্রবেশ করো না। আর যদি তোমরা কোনো দেশে অবস্থানকালে তা দেখা দেয়, তবে সেখান থেকে পলায়নের উদ্দেশ্যে বের হয়ে যেও না।"

রাবী বলেন: তখন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আল্লাহর প্রশংসা করলেন এবং ফিরে গেলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11396)


11396 - عن عبد الله بن عامر بن ربيعة أن عمر بن الخطّاب خرج إلى الشام، فلمّا جاء سَرْغ بلغه أن الوباء قد وقع بالشام، فأخبره عبد الرحمن بن عوف أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: إذا سمعتم به بأرض فلا تقدموا عليه، وإذا وقع بأرضٍ وأنتم بها فلا تخرجوا فرارًا منه، فرجع عمر بن الخطّاب من سَرْغ.

صحيح: رواه مالك في الجامع (24) عن ابن شهاب، عن عبد الله بن عامر بن ربيعة فذكره.




আব্দুর রহমান ইবনে আওফ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সিরিয়ার (শাম) উদ্দেশ্যে বের হলেন। যখন তিনি সারগ নামক স্থানে পৌঁছলেন, তখন তাকে খবর দেওয়া হলো যে সিরিয়ায় মহামারি (প্লেগ) দেখা দিয়েছে। তখন আব্দুর রহমান ইবনে আওফ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁকে জানালেন যে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা যদি কোনো এলাকায় এর (মহামারির) সংবাদ শোনো, তবে সেখানে প্রবেশ করো না। আর যদি তোমরা এমন কোনো এলাকায় থাকো যেখানে মহামারি দেখা দিয়েছে, তবে সেখান থেকে পালিয়ে যাওয়ার উদ্দেশ্যে বের হয়ো না।" অতঃপর উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সারগ থেকেই ফিরে এলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11397)


11397 - عن أنس بن مالك أن عمر بن الخطّاب أقبل إلى الشام فاستقبله أبو طلحة، وأبو عبيدة ين الجراح، فقالا: يا أمير المؤمنين، إن معك وجوه أصحاب رسول الله صلى الله عليه وسلم وخيارهم، وإنا تركنا من بعدنا مثل حريق النّار، فارجع العام، يعني: فرجع عمر فلمّا كان العام المقبل، جاء فدخل، يعني الطاعون.

صحيح: رواه الطحاويّ في شرح المعاني (6893) عن محمد بن خزيمة، قال: ثنا حجَّاج قال: ثنا حمّاد، قال: ثنا إسحاق بن عبد الله بن أبي طلحة عن أنس بن مالك فذكره. وإسناده صحيح.

وصحَّحه أيضًا ابن حجر في بذل الماعون (ص 241).

وقصة خروج عمر إلى الشام، ثمّ عودته منها بعد إخبار عبد الرحمن بن عوف رواها غيرُهم أيضًا عن عمر مطوَّلًا ومختصرًا، ولكن أكتفي بهذا القدر.




আনাস ইবনে মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় উমার ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) শামের (সিরিয়ার) দিকে অগ্রসর হলেন। তখন আবূ তালহা এবং আবূ উবাইদাহ ইবনুল জাররাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁর সাথে সাক্ষাৎ করলেন। তাঁরা উভয়ে বললেন, হে আমীরুল মুমিনীন! আপনার সঙ্গে রয়েছেন আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাহাবীদের মধ্যে শ্রেষ্ঠ ও গণ্যমান্য ব্যক্তিবর্গ। আর আমরা আমাদের পেছনে আগুনের স্ফুলিঙ্গের মতো (ভয়াবহ বিপদ) রেখে এসেছি। অতএব, আপনি এই বছর ফিরে যান। অর্থাৎ: উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) ফিরে গেলেন। অতঃপর যখন পরবর্তী বছর আসলো, তখন তিনি আসলেন এবং প্রবেশ করলেন। অর্থাৎ (এর মধ্যে) প্লেগ (তাঊন) প্রবেশ করেছিল।









আল-জামি` আল-কামিল (11398)


11398 - عن عامر بن سعد بن أبي وقَّاص عن أبيه أنه سمعه يسألُ أسامةَ بن زيد ما سمعتَ من رسول الله صلى الله عليه وسلم في الطاعون؟ فقال أسامة: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"الطاعونُ رِجْزٌ أُرْسِلَ على طائفة من بني إسرائيل -أو على من كان قبلكم- فإذا سمعتم به بأرضٍ فلا تدخلوا عليه، وإذا وقع بأرضٍ وأنتم بها فلا تخرجوا فرارًا منه".

قال مالك: قال أبو النضر: لا يُخْرِجُكم إِلَّا فرارٌ منه،

متفق عليه: رواه مالك في الجامع (23) عن محمد بن المنكدر، وعن سالم بن أبي النضر مولى عمر بن عبيد الله، عن عامر بن سعد بن أبي وقَّاص به فذكره.

ورواه البخاريّ في الأنبياء (3473)، ومسلم في السّلام (2218: 92) من طريق مالك به مثله.

ورواه البخاريّ في الطب (5728)، ومسلم في الطب (2218: 97) من طريق شعبة، عن حبيب بن أبي ثابت قال: كنا بالمدينة فبلغني أن الطاعون قد وقع بالكوفة فقال لي عطاء بن يسار وغيره: إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إذا كنت بأرض فوقع بها فلا تخرج منها وإذا بلغك أنه وقع بأرض
فلا تدخلها".

قال: قلت عمن؟ قالوا: عن عامر بن سعد يحدث به قال: فأتيته فقالوا: غائب قال: فلقيت أخاه إبراهيم بن سعد فسألته، فقال: شهدت أسامة يحدث سعدا قال: سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"إن هذا الوجع رجز أو عذاب أو بقية عذاب، عذب به أناس من قبلكم، فإذا كان بأرض وأنتم بها فلا تخرجوا منها، وإذا بلغكم أنه بأرض فلا تدخلوها".

قال حبيب: فقلت لإبراهيم: أنت سمعت أسامة يحدث سعدا وهو لا ينكر؟ قال: نعم، والسياق لمسلم، وليس عند البخاريّ القصة.




সাদ ইবনে আবী ওয়াক্কাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আমির ইবনে সাদ ইবনে আবী ওয়াক্কাস তাঁর পিতা (সাদ ইবনে আবী ওয়াক্কাস)-এর সূত্রে বর্ণনা করেন যে, তিনি (তাঁর পিতা) উসামা ইবনে যায়েদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞাসা করতে শুনেছেন, আপনি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের নিকট থেকে প্লেগ (মহামারি) সম্পর্কে কী শুনেছেন?

উসামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "প্লেগ (মহামারি) হলো এক প্রকারের শাস্তি (রিজ্য), যা বনি ইসরাঈলের এক দলের উপর—কিংবা তোমাদের পূর্বের লোকেদের উপর—প্রেরণ করা হয়েছিল। সুতরাং, যখন তোমরা কোনো স্থানে এর প্রাদুর্ভাবের কথা শুনবে, তখন সেখানে প্রবেশ করো না। আর যদি তোমরা কোনো স্থানে থাকাকালে সেখানে এর প্রাদুর্ভাব ঘটে, তবে তা থেকে পলায়নের উদ্দেশ্যে সেখান থেকে বের হয়ো না।"

মালিক (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: আবুল নাদর (রাহিমাহুল্লাহ) বলেছেন: তোমাদেরকে যেন তা থেকে পলায়নের উদ্দেশ্য ছাড়া আর কিছুই বের না করে।

মুত্তাফাকুন আলাইহি। মালিক এটি আল-জামিতে (২৩) মুহাম্মাদ ইবনুল মুনকাদির থেকে, এবং সালিম ইবনে আবী নাদর (উমার ইবনে উবাইদুল্লাহর মুক্তদাস) থেকে, তাঁরা উভয়ে আমের ইবনে সাদ ইবনে আবী ওয়াক্কাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সূত্রে তা বর্ণনা করেছেন।

আর বুখারী (৩৪৭৩, আম্বিয়া অধ্যায়) এবং মুসলিম (২২১৮: ৯২, সালাম অধ্যায়) মালিক (রাহিমাহুল্লাহ)-এর সূত্রে অনুরূপ বর্ণনা করেছেন।

আর বুখারী (৫৭২৮, চিকিৎসা অধ্যায়) এবং মুসলিম (২২১৮: ৯৭, চিকিৎসা অধ্যায়) শু'বাহ (রাহিমাহুল্লাহ)-এর সূত্রে, তিনি হাবীব ইবনে আবী ছাবিত থেকে বর্ণনা করেন। হাবীব বলেন: আমরা মদীনায় ছিলাম। তখন আমার কাছে খবর পৌঁছাল যে, কুফায় প্লেগ দেখা দিয়েছে। তখন আতা ইবনে ইয়াসার এবং অন্যান্যরা আমাকে বললেন যে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "যখন তুমি কোনো ভূমিতে থাকবে এবং সেখানে তা দেখা দেবে, তখন সেখান থেকে বের হয়ো না। আর যখন তোমার কাছে খবর পৌঁছাবে যে, তা কোনো ভূমিতে দেখা দিয়েছে, তখন সেখানে প্রবেশ করো না।"

হাবীব বলেন: আমি জিজ্ঞাসা করলাম, কার সূত্রে? তাঁরা বললেন: আমের ইবনে সাদ (রাহিমাহুল্লাহ)-এর সূত্রে, যিনি এটি বর্ণনা করেন। তিনি বলেন: আমি তাঁর কাছে গেলাম। লোকেরা বলল: তিনি অনুপস্থিত। হাবীব বলেন: এরপর আমি তাঁর ভাই ইবরাহীম ইবনে সাদ-এর সাথে সাক্ষাৎ করে তাঁকে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বললেন: আমি উসামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে সাদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে বর্ণনা করতে দেখেছি। তিনি (উসামা) বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি: "নিশ্চয়ই এই অসুস্থতা হলো শাস্তি (রিজ্য), অথবা আযাব, অথবা আযাবের অবশিষ্ট অংশ, যা তোমাদের পূর্বের লোকেরা শাস্তি পেয়েছিল। সুতরাং, যখন তা কোনো ভূমিতে থাকবে এবং তোমরা সেখানে থাকবে, তখন সেখান থেকে বের হয়ো না। আর যখন তোমাদের কাছে খবর পৌঁছাবে যে, তা কোনো ভূমিতে আছে, তখন সেখানে প্রবেশ করো না।"

হাবীব বলেন: আমি ইবরাহীমকে বললাম: আপনি কি উসামাকে সাদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে বর্ণনা করতে শুনেছেন, আর তিনি তা অস্বীকার করেননি? তিনি বললেন: হ্যাঁ। এই বর্ণনাটির ভাষাশৈলী মুসলিমের, তবে বুখারীতে ঘটনাটি নেই।









আল-জামি` আল-কামিল (11399)


11399 - عن سعد بن أبي وقَّاص، قال: سمعتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"إذا كان الطاعون بأرض وأنتم بها، فلا تفروا منها، وإذا كان بأرض فلا تهبطوا عليها".

حسن: رواه الطحاويّ في شرح المعاني (6999) عن محمد بن خزيمة، قال: ثنا مسدد، قال: ثنا يحيى، عن هشام، عن يحيى بن أبي كثير، عن الحضرميّ، عن سعيد بن المسيب، عن سعد بن أبي وقَّاص فذكره.

وإسناده حسن من أجل الحضرمي وهو ابن لاحق فإنه حسن الحديث.

ورواه أحمد (1554) من وجه آخر عن يحيى بن أبي كثير بإسناده بزيادة"الطيرة" وهو مخرج في محله.

ومعنى الحديث: أن الأرض التي فيها الطاعون مُنِعَ من الخروج منها؛ لأنه إذا خرج منها وسلِمَ يقول: لو أقمت في تلك الأرض لأصابني ما أصاب أهلَها، وكذا مُنِعَ من الدخول في الأرض التي فيها الطاعون فأصابه فقال: لولا أني قدمتُ ما أصابني هذا الوجعُ، وهذا كله منافٍ للإيمان بالقدر ولذا جاء هذا الحكم.




সা'দ ইবনু আবি ওয়াক্কাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "যদি কোনো ভূমিতে প্লেগ (মহামারি) হয় এবং তোমরা সেখানে অবস্থান করো, তবে সেখান থেকে পালিয়ে যেও না। আর যদি তা অন্য কোনো ভূমিতে থাকে, তবে তোমরা সেখানে প্রবেশ করো না।"









আল-জামি` আল-কামিল (11400)


11400 - عن أسامة بن شريك، قال: خرجنا في اثني عشر من بني ثعلبة، فبلغنا أن أبا موسي نزل منزلا، فأتيناه فسمعناه يحدث عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قال:"اللَّهُمَّ! اجعل فناء أمتي بالطعن والطاعون" قلنا: هذا الطعن قد عرفناه، فما الطاعون؟ قال:"وخز أعدائكم من الجن، وفي كل شهداء".

حسن: رواه أحمد (19744)، والبيهقي في دلائل النبوة (6/ 384) -واللّفظ له- كلاهما من حديث يحيى بن أبي بكير (وهو الكرماني)، قال: حَدَّثَنَا أبو بكر النهشلي، قال: حَدَّثَنَا زياد بن عِلاقة، عن أسامة بن شريك فذكره.

وإسناده حسن من أجل أبي بكر النهشلي؛ فإنه حسن الحديث.

وقد اختلف في إسناده والذي ذكرته هو أمثلها. وكذا ذهب أيضًا ابن حجر في بذل الماعون
(ص 114).

وأسامة بن شريك صحابي مشهور من بني ثعلبة قومِ زياد بن علاقة.




উসামাহ ইবনু শারীক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা বনু সা‘লাবার বারো জন লোক বের হলাম। আমরা জানতে পারলাম যে আবূ মূসা (আশআরী) এক স্থানে অবস্থান করছেন। আমরা তাঁর কাছে গেলাম এবং তাঁকে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম থেকে বর্ণনা করতে শুনলাম যে তিনি (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "হে আল্লাহ! আমার উম্মতের ধ্বংস (মৃত্যু) তুমি বর্শার আঘাত এবং মহামারী (তা‘ঊন) দ্বারা দাও।" আমরা বললাম: এই বর্শার আঘাত সম্পর্কে তো আমরা জানি, কিন্তু ‘তা‘ঊন’ (মহামারী) কী? তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তা হলো তোমাদের শত্রু জ্বিনদের খোঁচা (আঘাত)। আর উভয় (প্রকার মৃত্যুতেই) রয়েছে শাহাদাতের মর্যাদা।"









আল-জামি` আল-কামিল (11401)


11401 - عن معاذة بنت عبد الله العدوية، قالت: دخلت على عائشة، فقالت: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا تفنى أمتي إِلَّا بالطعن والطاعون" قلت: يا رسول الله، هذا الطعن قد عرفناه، فما الطاعون؟ قال:"غدة كغدة البعير، المقيم بها كالشهيد، والفار منها كالفار من الزحف".

حسن: رواه أحمد (25118) من طرق، عن جعفر بن كيسان العدويّ، قال: حدثتنا معاذة بنت عبد الله العدوية فذكرته.

وإسناده حسن من أجل جعفر بن كيسان؛ فإنه صدوق وهو من رجال التعجيل.

ومنهم من سمّى شيخ جعفر بن كيسان: عمرة العدوية، وسماه أكثر الرواة: معاذة العدوية، فإن كان جعفر بن كيسان سمعه من معاذة وعمرة -كما مال إليه ابن حجر في بذل الماعون (ص 278) - فيتقوى أحدهما بالآخر وإلا قول الأكثر أشبه.




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমার উম্মত কেবল আঘাত (যুদ্ধ) ও প্লেগ (মহামারি) দ্বারাই ধ্বংস হবে।" (বর্ণনাকারী) বললেন: "হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! এই আঘাত (যুদ্ধ) সম্পর্কে তো আমরা অবগত, কিন্তু প্লেগ (মহামারি) কী?" তিনি বললেন: "এটি হলো উটের ফোড়ার মতো এক ধরনের গ্রন্থি (ব্যথা)। যে ব্যক্তি তাতে (ওই স্থানে) দৃঢ় থাকে, সে শহীদের মতো, আর যে তা থেকে পালিয়ে যায়, সে (রণক্ষেত্র থেকে) পলায়নকারীর মতো।"









আল-জামি` আল-কামিল (11402)


11402 - عن أبي بردة بن قيس، أخي أبي موسى الأشعريّ، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"اللهم! اجعل فناء أمتي في سبيلك بالطعن، والطاعون".

حسن: رواه أحمد (15608)، وابن أبي عاصم في الجهاد (189)، والحاكم (2/ 93) كلّهم من طرق، عن عبد الواحد بن زياد، حَدَّثَنَا عاصم الأحول، حَدَّثَنَا كريب بن الحارث بن أبي موسى، عن أبي بردة بن قيس -أخي أبي موسى الأشعري- فذكره.

وقال الحاكم:"هذا حديث صحيح الإسناد".

وإسناده حسن من أجل كريب بن الحارث، روى عنه جمعٌ وهو من التابعين، ووثّقه ابن حبَّان، ولم يأت في حديثه ما ينكر عليه.




আবূ বুরদাহ ইবনু ক্বাইস (আবূ মূসা আল-আশআরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর ভাই) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "হে আল্লাহ! তুমি আমার উম্মতের পরিসমাপ্তি তোমার পথে বর্শার আঘাত এবং মহামারী (প্লেগ/তাউন) দ্বারা ঘটাও।"









আল-জামি` আল-কামিল (11403)


11403 - عن يحيى بن يعمر، عن عائشة زوج النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم أنها أخبرتنا أنها سألت رسول الله صلى الله عليه وسلم عن الطاعون، فأخبرها نبي الله صلى الله عليه وسلم:"أنه كان عذابا يبعثه الله على من يشاء، فجعله الله رحمة للمؤمنين، فليس من عبد يقع الطاعون، فيمكث في بلده صابرا يعلم أنه لن يصيبه إِلَّا ما كتب الله له إِلَّا كان له مثل أجر الشهيد".

صحيح: رواه البخاريّ في الطب (5734) عن إسحاق، أخبرنا حبَّان، حَدَّثَنَا داود بن أبي الفرات، حَدَّثَنَا عبد الله بن بريدة، عن يحيى بن يعمر، عن عائشة فذكرته.

وجاء تفسير من عائشة قريبًا من هذا هو ما أخرجه ابن أبي الدنيا في كتابه"العقوبات (17)"
من طريق أنس أنه دخل على عائشة هو ورجلٌ معه فقال لها الرّجل يا أم المؤمنين، حدثينا عن الزلزلة، فقالت:"إذا استباحوا الزنا، وشربوا الخمر، وضربوا بالمغاني، وغار الله عز وجل في سمائه فقال للأرض: تزلزلي بهم. فإن تابوا ونزعوا، وإلا هدمها عليهم. قال: قلت: يا أم المؤمنين، أعذاب لهم؟ قالت: بل موعظة ورحمة وبركة للمؤمنين، ونكال وعذاب وسخط على الكافرين".

قال أنس: ما سمعت حديثًا بعد رسول الله صلى الله عليه وسلم أنا أشد فرحا مني بهذا الحديث.




আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি আমাদের জানিয়েছেন যে, তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে মহামারি (তাউন) সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করেছিলেন। তখন আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে জানান: "এটি ছিল একটি আযাব, যা আল্লাহ যার উপর ইচ্ছা পাঠান। তবে আল্লাহ এটাকে মুমিনদের জন্য রহমত স্বরূপ নির্ধারণ করেছেন। সুতরাং কোনো বান্দা যখন মহামারির শিকার হয়, আর সে ধৈর্যশীল হয়ে তার শহরে অবস্থান করে এবং বিশ্বাস রাখে যে আল্লাহ যা লিখে রেখেছেন, তা ছাড়া অন্য কোনো কিছুই তাকে স্পর্শ করবে না, তবে তাকে অবশ্যই শহীদের সমপরিমাণ সওয়াব দেওয়া হবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (11404)


11404 - عن حفصة بنت سيرين قالت: قال لي أنس بن مالك: بم مات يحيى بن أبي عمرة؟ قالت: قلت: بالطاعون، قالت: فقال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"الطاعون شهادة لكل مسلم".

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5732)، ومسلم في الإمارة (1916) كلاهما من طريق عبد الواحد بن زياد، حَدَّثَنَا عاصم، عن حفصة بنت سيرين فذكرته.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, হাফসা বিনত সীরীন বলেন, তিনি (আনাস) আমাকে জিজ্ঞাসা করলেন: ইয়াহইয়া ইবনু আবী আমরার মৃত্যু কীসে হয়েছিল? আমি বললাম: প্লেগ (তাউন)-এর কারণে। এরপর তিনি বললেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তাউন (প্লেগ) প্রতিটি মুসলিমের জন্য শাহাদাত (শহীদ মর্যাদা)।”









আল-জামি` আল-কামিল (11405)


11405 - عن أبي هريرة، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"المبطون شهيد، والمطعون شهيد"

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5733)، ومسلم في الإمارة (1915) كلاهما من طريق أبي صالح، عن أبي هريرة فذكره. واللّفظ للبخاريّ.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নাবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি পেটের রোগে মারা যায় সে শহীদ, আর যে ব্যক্তি প্লেগ রোগে মারা যায় সেও শহীদ।"









আল-জামি` আল-কামিল (11406)


11406 - عن أبي عسيب مولى رسول الله صلى الله عليه وسلم، يقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"أتاني جبريل بالحمى، والطاعون، فأمسكتُ الحمى بالمدينة، وأرسلتُ الطاعون إلى الشام، فالطاعونُ شهادةٌ لأمتي، ورحمةٌ، ورِجْسٌ على الكافر".

حسن: رواه أحمد (20767)، وابن أبي عاصم في الآحاد والمثاني (466)، والطَّبرانيّ في الكبير (22/ 391) كلّهم من طريق يزيد بن هارون، حَدَّثَنَا مسلم بن عبيد أبو نُصيرة قال: سمعت أبا عسيب مولى رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: فذكره.

وإسناده حسن من أجل مسلم بن عبيد فإنه حسن الحديث.

قال الهيثميّ في"المجمع" (2/ 310):"رواه أحمد والطَّبراني في الكبير، ورجال أحمد ثقات".

وقوله:"فأمسكتُ الحمى بالمدينة وأرسلتُ الطاعون إلى الشام" الحكمة في ذلك أنه صلى الله عليه وسلم لما دخل المدينة كان في قلة من أصحابه عددا ومددا، وكانت المدينة وبئة، فخُيِّرَ النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم بين أمرين فاختار الحمى حينئذ لقلة الموت بها غالبًا بخلاف الطاعون، ثمّ لما احتاج إلى جهاد الكفار ورأى الحمى تُضْعِفُ أجسادهم دعا بنقل الحمى من المدينة إلى الجحفة. انظر: فتح الباري لابن حجر (10/ 191).




আবু উসাইব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর আযাদকৃত গোলাম, থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমার কাছে জিবরীল (আঃ) জ্বর (আল-হুম্মা) এবং প্লেগ (আত-তাউন) নিয়ে এসেছিলেন। অতঃপর আমি জ্বরকে মদীনায় রেখে দিলাম এবং প্লেগকে সিরিয়ার (আশ-শাম) দিকে পাঠিয়ে দিলাম। সুতরাং প্লেগ হলো আমার উম্মতের জন্য শাহাদাত (শহীদ হওয়া) এবং রহমত, আর কাফিরের উপর শাস্তি।"









আল-জামি` আল-কামিল (11407)


11407 - عن أبي هريرة قال: إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"لا عدوى ولا صفر ولا هامة".

فقال أعرابي: يا رسول الله! فما بال إبلي تكون في الرمل كأنّها الظباء، فيأتي البعير الأجرب فيدخل بينها، فيجربها؟ فقال:"فمن أعدى الأوّل؟".

وفي لفظ:"لا عدوى ولا طيرة ولا هامة ولا صفر"

متفق عليه: رواه البخاري في الطب (5717، 5770)، ومسلم في السّلام (2220) كلاهما من طارق، عن ابن شهاب، أخبرني أبو سلمة بن عبد الرحمن وغيره أن أبا هريرة قال: فذكره.

ورواه البخاري (5775)، ومسلم (2220: 103) كلاهما من طريق أبي اليمان أخبرنا شعيب، عن الزهري قال: حدثني أبو سلمة بن عبد الرحمن، أن أبا هريرة قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"لا عدوى فقام أعرابي، ثم ذكر مثله.

ورواه البخاري في الطب (5757) عن محمد بن الحكم، حدثنا النضر، أخبرنا إسرائيل، أخبرنا أبو حصين، عن أبي صالح، عن أبي هريرة فذكره مقتصرا على اللفظ النبوي، ولم يذكر حوار الأعرابي.

والطيرة: بكسر الطاء وفتح الياء هي التشاؤم من تطير، وأحاديثه مخرجة في كتاب الآداب.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "কোনো রোগ সংক্রামক নয় (নিজ থেকে), 'সাফার' বলে কিছু নেই এবং 'হামাহ' বলেও কিছু নেই।"

তখন এক বেদুঈন বলল, "হে আল্লাহর রাসূল! আমার উটগুলো বালুকাময় প্রান্তরে হরিণশিশুর মতো থাকে, তারপর একটি খোসপাঁচড়যুক্ত (অসুস্থ) উট এসে সেগুলোর মাঝে ঢুকে পড়ে এবং সেগুলোকে রোগাক্রান্ত করে দেয়। এর কারণ কী?"

তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, "তাহলে প্রথম উটটিকে কে রোগাক্রান্ত করেছিল?"

অপর এক বর্ণনায় আছে: "কোনো রোগ সংক্রামক নয় (নিজ থেকে), কোনো কুলক্ষণ নেই, 'হামাহ' নেই এবং 'সাফার' নেই।"