হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (11408)


11408 - عن أبي هريرة قال: قال رسول الله:"لا عَدْوى، ولا طيرة ولا هامةَ، ولا صفر، وفر من المجذوم كما تفرُّ من الأسد".

صحيح: رواه البخاري في الطب (5707) قال: وقال عفان، حدثنا سليم بن حيان، حدثنا سعيد بن ميناء، قال: سمعت أبا هريرة يقول فذكره.

وعفان هو ابن مسلم الصفار من شيوخ البخاري وقوله:"قال عفان" محمول على الاتصال كما بينتُ، وهو مذهب ابن الصلاح بخلاف رأي ابن حجر فإنه يراه معلقا.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "রোগের কোনো সংক্রমণ (স্বয়ংক্রিয়ভাবে) নেই, কোনো কুলক্ষণ নেই, কোনো হামাহ (অশুভ ধারণা) নেই এবং সফর (মাসের অশুভ ধারণা) নেই। আর কুষ্ঠরোগী থেকে তুমি এমনভাবে দূরে থাকো যেমনভাবে তুমি সিংহ থেকে দূরে থাকো।"









আল-জামি` আল-কামিল (11409)


11409 - عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا عَدْوى، ولا هامةَ، ولا طِيَرَةَ، وأُحِبُّ الفألَ الصالحَ".

صحيح: رواه مسلم في السلام (2223: 114) عن زهير بن حرب، حدثنا يزيد بن هارون، أخبرنا هشام بن حسان، عن محمد بن سيرين، عن أبي هريرة فذكره.

ورواه (2233: 113) عن حجاج بن الشاعر، حدثني معلى بن أسد، حدثنا عبد العزيز بن مختار، حدثنا يحيى بن عتيق، حدثنا محمد بن سيرين، عن أبي هريرة فذكره إلا أنه ليس فيه:"ولا هامة".




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "স্বয়ংক্রিয়ভাবে কোনো রোগ সংক্রমণ হয় না, (অশুভ) পেঁচার (কুলক্ষণে বিশ্বাস) নেই, এবং কোনো কুলক্ষণ নেই। তবে আমি শুভ লক্ষণকে ভালোবাসি।"









আল-জামি` আল-কামিল (11410)


11410 - عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"لا عَدْوى، ولا هامةَ، ولا نوءَ، ولا صفرَ" صحيح: رواه مسلم في السلام (2320) من طرق عن إسماعيل بن جعفر، عن العلاء، عن
أبيه، عن أبي هريرة فذكره.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "কোনো সংক্রামক রোগ নেই, কোনো কুলক্ষণ নেই, কোনো নক্ষত্রের প্রভাব নেই এবং সফরের (মাস/সময়) কোনো অশুভত্ব নেই।"









আল-জামি` আল-কামিল (11411)


11411 - عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"لا عَدْوَى، ولا هامةَ، ولا غولَ، ولا صفرَ".

قال أبو صالح (راوى الحديث عن أبي هريرة): فسافرتُ إلى الكوفة، ثم رجعت، فإذا هو ينتقص الرابعة لا يذكرها، فقلتُ له: لا عدوى قال: أبيتُ، فقلت: لا عدوى قال: أبيتُ.

حسن: رواه أبو داود (3913)، والبزّار (8899، 8948)، والطبري في مسند علي من تهذيب الآثار (9)، والطحاوي فى شرح المعاني (4/ 308 - 309) كلّهم من طريق يحيى بن أيوب قال: حَدَّثَنِي ابن عجلان قال: حدثني القعقاع بن حكيم، وعبيد الله بن مقسم، وزيد بن أسلم، عن أبي صالح، عن أبى هريرة فذكره.

واقتصر أبو داود على ذكر الغول، ولم يذكر هو والبزار قصة إباء أبي هريرة عن قوله:"ولا عدوى".

وإسناده حسن من أجل يحيى بن أيوب الغافقي وابن عجلان فإنهما حسنا الحديث.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “কোনো ছোঁয়াচে রোগ নেই, কোনো কুলক্ষণ নেই, কোনো রাক্ষস নেই এবং কোনো সফরের মাসে অশুভত্ব নেই।”

আবূ সালেহ (যিনি আবূ হুরায়রাহ্ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে হাদীসটি বর্ণনা করেছেন) বলেন: আমি কূফায় সফর করলাম, অতঃপর ফিরে আসলাম। তখন দেখলাম তিনি (আবূ হুরায়রাহ্) চতুর্থ বাক্যটি (صفر) বাদ দিচ্ছেন, সেটি উল্লেখ করছেন না। আমি তাঁকে বললাম: (রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কি বলেননি) 'লা আদওয়া' (কোনো ছোঁয়াচে রোগ নেই)? তিনি বললেন: আমি (তা বলতে) অস্বীকার করি। আমি আবার বললাম: 'লা আদওয়া'? তিনি বললেন: আমি (তা বলতে) অস্বীকার করি।









আল-জামি` আল-কামিল (11412)


11412 - عن أبى هريرة، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا يعدى شيء شيئًا، لا يعدي شيء شيئًا"، ثلاثًا، قال: فقام أعرابيّ، فقال: يا رسول الله، إن النقبة تكون بمشفر البعير، أو بعجبه، فتشتمل الإبل جربا، قال: فسكت ساعة، ثمّ قال:"ما أعدى الأوّل، لا عدوى، ولا صفر، ولا هامة، خلق الله كل نفس، فكتب حياتها وموتها ومصيباتها ورزقها".

صحيح: رواه أحمد (8343) عن هاشم، حَدَّثَنَا محمد بن طلحة، عن عبد الله بن شبرمة، عن أبي زرعة بن عمرو بن جرير، عن أبي هريرة فذكره.

ورواه أبو يعلى (6112)، والفريابي في القدر (214)، وصحّحه ابن حبَّان (61191) كلّهم من طريق عبد الله بن شبرمة بإسناده نحوه.

قوله:"النُقبة": هي أول شيء يظهر من الجرب.

وقوله:"والمِشفر": هو للبعير كالشقة للإنسان.

وقوله:"والعَجْب": أصل الذنب.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "কোনো কিছু অন্য কোনো কিছুকে সংক্রমণ করে না, কোনো কিছু অন্য কোনো কিছুকে সংক্রমণ করে না।" এই কথা তিনি তিনবার বললেন। বর্ণনাকারী বলেন: তখন একজন বেদুঈন দাঁড়িয়ে বলল: হে আল্লাহর রাসূল, উটের ঠোঁটে অথবা তার লেজের গোড়ায় খোসপাঁচড়ার প্রথম চিহ্ন দেখা যায়, অতঃপর এর কারণে সমস্ত উট খোসপাঁচড়ায় আক্রান্ত হয়ে যায়। বর্ণনাকারী বলেন: তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কিছুক্ষণ নীরব থাকলেন, অতঃপর বললেন: প্রথমটিকে কিসে সংক্রমিত করেছিল? (বস্তুত) কোনো সংক্রমণ নেই, কোনো সফর মাসের কুলক্ষণ নেই, আর কোনো হ্যামাহ (অশুভ পাখির ধারণা) নেই। আল্লাহ তা'আলা প্রতিটি প্রাণ সৃষ্টি করেছেন এবং তার হায়াত, তার মওত, তার বিপদাপদ এবং তার রিযিক লিপিবদ্ধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (11413)


11413 - عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"أربع فى أمتي من أَمر الجاهلية، لن يدَعَهن الناس: النياحة، والطعن في الأحساب، والعدوّى (أجرب بعير فأجرب مائة بعير. من أجرب البعير الأوّل؟ )، والأنواء (مُطرنا بنوء كذا وكذا").

حسن: رواه الترمذيّ (1001) عن محمود بن غيلان، حَدَّثَنَا أبو داود، أنبانا شعبة، والمسعوديّ، عن علقمة بن مرثَد، عن أبي الربيع، عن أبي هريرة فذكره.

قال الترمذيّ: حديث حسن.
قلت: وهو كما قال فإن أبا الربيع حسن الحديث قال فيه أبو حاتم:"صالح الحديث"، والمسعوديّ وإنْ كان مختلطًا إِلَّا أنه تابعه شعبة، وقد رواه أحمد (9872) من طريق شعبة وحجاج، كلاهما عن علقمة بن مرثَد به نحوه.

والكلام عليه مبسوط في كتاب الجنائز.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমার উম্মতের মধ্যে জাহেলিয়াতের চারটি বিষয় রয়েছে, যা মানুষ ত্যাগ করবে না: উচ্চস্বরে বিলাপ করা (শোক প্রকাশে), বংশের প্রতি নিন্দা বা দোষারোপ করা, সংক্রামক ব্যাধি (যেমন: যদি একটি উট অসুস্থ হয়ে একশত উটকে অসুস্থ করে, তবে প্রথম উটটিকে কে অসুস্থ করেছিল?) এবং নক্ষত্রের প্রভাবে বৃষ্টি হয়েছে বলে বিশ্বাস করা (যেমন: অমুক অমুক নক্ষত্রের প্রভাবে আমাদের ওপর বৃষ্টি বর্ষিত হয়েছে)।"









আল-জামি` আল-কামিল (11414)


11414 - عن أبي سلمة بن عبد الرحمن بن عوف حدَّثه: أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"لا عدوى"، ويحدث أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"لا يورد ممرض على مُصِحٍّ".

قال أبو سلمة: كان أبو هريرة يحدثهما كلتيهما عن رسول الله صلى الله عليه وسلم ثمّ صمت أبو هريرة بعد ذلك عن قوله: لا عدوى، وأقام على أن لا يورد ممرض على مصح. قال: فقال الحارث بن أبي ذباب (وهو ابن عم أبي هريرة) قد كنت أسمعك يا أبا هريرة تحدثنا مع هذا الحديث حديثًا آخر قد سكتَّ عنه، كنت تقول: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا عدوى" فأبى أبو هريرة أن يعرف ذلك، وقال:"لا يورد ممرض على مصح" فما رآه الحارث في ذلك حتّى غضب أبو هريرة، فرطن بالحبشية، فقال للحارث: أتدري ماذا قلت؟ قال: لا قال أبو هريرة: قلت: أبيت. قال أبو سلمة: ولعمري لقد كان أبو هريرة يحدثنا أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"لا عدوى" فلا أدري أنسي أبو هريرة أو نسخ أحد القولين الآخر؟

وفي رواية: قال أبو سلمة: فما رأيته نسي حديثًا غيره.

متفق عليه: رواه مسلم في السّلام (2221) من طريق ابن وهب، أخبرني يونس، عن ابن شهاب، أن أبا سلمة بن عبد الرحمن بن عوف فذكره.

ورواه البخاريّ في الطب (5771، 5773، 5774) من وجوه أخرى عن الزهري به نحوه مختصرًا، والرّواية الأخرى له.

والجمع بين الحديثين أن ما ثبت عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم أنه قال:"لا عدوى" فهو محمول على ما كان يعتقده أهل الجاهليّة بأن المرض يُعدي بنفسه بدون مشيئة الله.

وقوله:"لا يورد ممرض على مصح" محمول على أن لا يعتقد الانسان بأن ما أصابه كان سببه اختلاطه بالمريض، ولذا أُمرنا أن نفرَّ من المجذوم فرارَ الأسد.

ثمّ إن قوله:"لا عدوى" له شواهد كثيرة صحيحة فلعل أبا هريرة تراجع عن رواية"لا عدوى" ظنا منه أنه مضاد لقوله صلى الله عليه وسلم:"لا يورد ممرض على مصح".




আবু সালমা ইবনু আবদির রাহমান ইবনু আওফ থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "কোনো ছোঁয়াচে রোগ নেই।" এবং তিনি (আবু সালমা) আরও বর্ণনা করেছেন যে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "অসুস্থ উটকে সুস্থ উটের পাশে নিয়ে আসা যাবে না।"

আবু সালমা বলেন: আবু হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এই দুটি (হাদীসই) রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম থেকে বর্ণনা করতেন। এরপর আবু হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) 'লা আদওয়া' (কোনো ছোঁয়াচে রোগ নেই) এই উক্তিটি বলা থেকে বিরত থাকলেন এবং শুধু "অসুস্থ উটকে সুস্থ উটের পাশে নিয়ে আসা যাবে না" - এই কথার উপর অটল থাকলেন।

তিনি বলেন: তখন হারিস ইবনু আবী যুবাব (যিনি আবু হুরাইরার চাচাতো ভাই) বললেন: হে আবু হুরাইরা! আমি আপনাকে এই হাদীসের সাথে আরেকটি হাদীস বর্ণনা করতে শুনতাম, যা এখন আপনি চুপ করে গেছেন। আপনি বলতেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "কোনো ছোঁয়াচে রোগ নেই।" কিন্তু আবু হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তা স্বীকার করতে অস্বীকৃতি জানালেন এবং বললেন: "অসুস্থ উটকে সুস্থ উটের পাশে নিয়ে আসা যাবে না।" হারিস এই বিষয়ে তাকে (আবু হুরাইরাকে) বারবার চাপ দিতে থাকলেন, ফলে আবু হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাগান্বিত হলেন এবং হাবশি (আবিসিনীয়) ভাষায় কথা বলতে শুরু করলেন। এরপর তিনি হারিসকে বললেন: তুমি কি জানো আমি কী বলেছি? হারিস বললেন: না। আবু হুরাইরা বললেন: আমি বলেছি, "আমি অস্বীকার করছি (অস্বীকার করলাম)।"

আবু সালমা বলেন: আমার জীবনের শপথ! আবু হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) অবশ্যই আমাদের কাছে এই হাদীস বর্ণনা করতেন যে রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "কোনো ছোঁয়াচে রোগ নেই।" সুতরাং আমি জানি না, আবু হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) ভুলে গেছেন, নাকি দুটি উক্তির মধ্যে একটি অন্যটিকে রহিত করে দিয়েছে?

অন্য এক বর্ণনায় আছে: আবু সালমা বলেন: আমি এই হাদীস ছাড়া তাকে অন্য কোনো হাদীস ভুলতে দেখিনি।









আল-জামি` আল-কামিল (11415)


11415 - عن أنس بن مالك، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"لا عدوى ولا طيرة ويعجبني الفأل" قال: قيل: وما الفأل؟ قال:"الكلمة الطيبة".
متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5776)، ومسلم في السّلام (2224: 112) كلاهما من حديث محمد بن جعفر، حَدَّثَنَا شعبة، سمعت قتادة، يحدث عن أنس فذكره.




আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "কোনো ছোঁয়াচে রোগ নেই এবং কুলক্ষণও (অশুভ ইঙ্গিত) নেই। তবে আমার কাছে ফাল (শুভ লক্ষণ) পছন্দনীয়।" বলা হলো, ফাল কী? তিনি বললেন: "উত্তম বাক্য।"









আল-জামি` আল-কামিল (11416)


11416 - عن أنس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"لا عدوى ولا هامة فمن أعدى الأوّل"

حسن: رواه البزّار (7088) عن عليّ بن الحسين الدرهميّ، حَدَّثَنَا عبد الأعلى، حَدَّثَنَا سعيد، عن قتادة، ولا أعلمه إِلَّا عن أنس فذكره.

وإسناده حسن من أجل الدرهمي فإنه صدوق كما قال أبو حاتم والنسائي.

وسعيد هو ابن أبي عروبة قد اختلط لكن روى عنه عبد الأعلى بن عبد الأعلى قبل الاختلاط كما قال ابن معين.

وقال الهيثميّ في"المجمع" (5/ 102):"رواه البزّار، ورجاله رجال الصَّحيح خلا علي بن الحسين الدرهمي وهو ثقة".

وفي الصَّحيح بعضه.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কোনো ছোঁয়াচে রোগ (স্বয়ংক্রিয়ভাবে) নেই এবং কোনো কুলক্ষণ (হাওয়ামা) নেই। তাহলে প্রথম রোগীকে কে সংক্রমিত করেছিল?"









আল-জামি` আল-কামিল (11417)


11417 - عن عمرو بن دينار قال: كان ها هنا رجل اسمه نواس، وكانت عنده إبل هيم فذهب ابن عمر، فاشترى تلك الإبل من شريك له، فجاء إليه شريكه، فقال: بعنا تلك الإبل، فقال: ممن بعتها؟ قال: من شيخ كذا وكذا فقال: ويحك ذاك -والله- ابن عمر فجاءه فقال: إن شريكي باعك إبلا هِيْما ولم يعرفك قال: فاستقْها. قال: فلمّا ذهب يستاقها فقال: دَعْها، رضينا بقضاء رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا عدوى".

صحيح: رواه البخاريّ في البيوع (2099) عن عليّ (هو ابن المديني)، عن سفيان (هو ابن عيينة)، عن عمرو بن دينار فذكره.

وقوله:"الهيم" قال الطبريّ في تفسير قوله تعالى: {فَشَارِبُونَ شُرْبَ الْهِيمِ} [الواقعة: 55] الهيم جمع أهيم، ومن العرب من يقول: هائم، ثمّ يجمعونه على هيم كما قالوا غائط وغيط قال: والإبل الهيم التي أصابها الهيام بضم الهاء وبكسرها داء تصير منه عطشى تشرب فلا تروي، وقيل: الإبل الهيم المطلية بالقطران من الجرب فتصير عطشى من حرارة الجرب، وقيل: هو داء ينشأ عنه الجرب.

وفي معناه ما رُوي عن ابن عمر، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: لا عدوى، ولا طيرة، ولا هامة، فقام إليه رجل أعرابي، فقال: يا رسول الله، أرأيت البعير يكون به الجرب، فيجرب الإبل كلها؟ قال:"ذلكم القدر، فمن أجرب الأوّل؟".

رواه ابن ماجه (86، 3540)، وأحمد (4775) كلاهما من طريق وكيع، حَدَّثَنَا أبو جناب، عن أبيه، عن ابن عمر فذكره.

وأبو جناب هو: يحيى بن أبي حيّة الكلبي ضعّفوه لكثرة تدليسه، قال ابن حبَّان:"كان يدلس
عن الثقات ما سمع من الضعفاء، فألزقت به تلك المناكير التي يرويها عن المشاهير" وبه أعلّه البوصيري في زوائد ابن ماجه.




ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত: এখানে নাওয়াস নামে একজন লোক ছিল, যার কাছে রোগাক্রান্ত (হীম) উট ছিল। তখন ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) গেলেন এবং তার (নাওয়াসের) এক শরীকের কাছ থেকে সেই উটগুলো কিনে নিলেন। এরপর নাওয়াসের শরীক তার কাছে আসল এবং বলল: আমরা সেই উটগুলো বিক্রি করেছি। নাওয়াস জিজ্ঞেস করল: কার কাছে বিক্রি করেছো? সে বলল: অমুক অমুক শায়খের কাছে। নাওয়াস বলল: তোমার ধ্বংস হোক! আল্লাহর কসম! তিনি তো ইবনে উমর!

তারপর সে (নাওয়াস) ইবনে উমরের কাছে আসলেন এবং বললেন: আমার শরীক আপনাকে রোগাক্রান্ত (হীম) উটগুলো বিক্রি করে দিয়েছে এবং আপনাকে চিনতে পারেনি। তিনি (ইবনে উমর) বললেন: তাহলে এগুলো তাড়িয়ে নিয়ে যাও (ফিরিয়ে নাও)। যখন সে উটগুলো তাড়িয়ে নিয়ে যেতে গেল, তখন (ইবনে উমর) বললেন: এগুলো ছেড়ে দাও। আমরা রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের ফয়সালায় সন্তুষ্ট: "কোনো রোগ সংক্রামক নয় (সংক্রমণ নেই)।"









আল-জামি` আল-কামিল (11418)


11418 - عن جابر بن عبد الله قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا عدوى ولا طيرة ولا غول"

وفي لفظ:"لا عدوى ولا غول ولا صفر"

صحيح: رواه مسلم في السّلام (2222: 107) من طرق، عن زهير، عن أبي الزُّبير، عن جابر فذكره باللفظ الأوّل.

ورواه (2222: 109) من طريق ابن جريج، أخبرني أبو الزُّبير، أنه سمع جابر بن عبد الله يقول فذكره باللفظ الثاني.

قال ابن جريج: وسمعت أبا الزُّبير يذكر أن جابرا فسّر لهم قوله:"ولا صفر" فقال أبو الزُّبير: الصفر: البطن، فقيل لجابر: كيف؟ قال: كان يقال: دواب البطن قال: ولم يفسّر الغول. قال أبو الزُّبير: هذه الغول التي تغول.




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "রোগের (স্বয়ংক্রিয়) সংক্রমণ নেই, কোনো কুলক্ষণ (অশুভ ইঙ্গিত) নেই, এবং কোনো ভৌতিক অস্তিত্ব (غول) নেই।"

অন্য এক বর্ণনায় আছে: "রোগের (স্বয়ংক্রিয়) সংক্রমণ নেই, কোনো ভৌতিক অস্তিত্ব (غول) নেই, এবং সফর (মাস বা রোগ সংক্রান্ত কুসংস্কার) নেই।"

ইবনু জুরাইজ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, আমি আবূ আয-যুবাইর (রাহিমাহুল্লাহ)-কে বলতে শুনেছি যে, জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাদের জন্য রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর বাণী: "ولا صفر" (সফর নেই)-এর ব্যাখ্যা করেছেন। আবূ আয-যুবাইর (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: ‘সফর’ অর্থ পেট। জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞেস করা হলো: (এর দ্বারা) কী বুঝানো হয়েছে? তিনি বললেন: বলা হতো—‘পেটের কীটসমূহ’। (অর্থাৎ পেটের কীটসমূহ নিয়ে প্রচলিত কুসংস্কার)। রাবী বলেন: আর তিনি (জাবির) ‘غول’-এর ব্যাখ্যা দেননি। আবূ আয-যুবাইর (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: এই ‘غول’ হলো তাই যা ধ্বংস করে/বিপথগামী করে।









আল-জামি` আল-কামিল (11419)


11419 - عن السائب بن يزيد ابن أخت نمر أن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"لا عدوى ولا صفر ولا هامة"

صحيح: رواه مسلم في السّلام (2220: 103) عن عبد الله بن عبد الرحمن الدارميّ، عن أبي اليمان، عن شعيب، عن الزهري قال: حَدَّثَنِي السائب بن يزيد ابن أخت نمر فذكره.




সা'ইব ইবনু ইয়াযীদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কোনো সংক্রমণ (স্বতঃস্ফূর্তভাবে) নেই, কোনো সফর (মাস নিয়ে কুসংস্কার) নেই এবং কোনো হামাহ (অশুভ লক্ষণ) নেই।"









আল-জামি` আল-কামিল (11420)


11420 - عن ابن عباس، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا طيرة ولا هامة ولا عدوى ولا صفر" فقال رجل: يا رسول الله، إنا لنأخذ الشاة الجرباء فنطرحها في الغنم، فتجرب الغنم، فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"فمن أعدى الأوّل؟".

حسن: رواه ابن ماجه (3539)، وأحمد (3031، 2425)، وصحّحه ابن حبَّان (6117) كلّهم من طرق، عن سماك، عن عكرمة، عن ابن عباس فذكره.

والسياق لابن حبَّان، واقتصر ابن ماجه على الشطر الأوّل.

ورواية سماك عن عكرمة مضطربة إِلَّا أنه توبع.

رواه الطبريّ في مسند عليّ من تهذيب الآثار (31) عن أبي كريب، قال: حَدَّثَنَا حسين بن عيسى الحنفيّ، حَدَّثَنَا الحكم بن أبان، عن عكرمة، عن ابن عباس نحوه.

والحكم بن أبان وثّقه ابن معين والنسائي وغيرهما إِلَّا أن الراوي عنه حسين بن عيسى الحنفي ضعيف. ورواه الطبريّ أيضًا (32) عن ابن وكيع، حَدَّثَنَا جرير، عن يزيد بن أبي زياد، عن عكرمة، عن ابن عباس نحوه.

ويزيد بن أبي زياد ضعيف أيضًا، وابن وكيع وهو سفيان كان صدوقًا إِلَّا أنه ابتلي بوراقه فأدخل عليه ما ليس من حديثه، فنُصِحَ فلم يقبل فسقط حديثه.
فدل هذان المتابعان -مع ضعفهما- على أن سماكا لم يضطرب في هذا الحديث.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “কোনো অশুভ লক্ষণ (বা কুসংস্কার), কোনো হামাহ (কুলক্ষণ), কোনো সংক্রামক রোগ (যা আল্লাহর হুকুম ছাড়া স্বতঃস্ফূর্ত) এবং কোনো সফর মাসের কুলক্ষণ নেই।” তখন এক ব্যক্তি বলল, ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমরা তো খোসপাঁচড়াগ্রস্ত বকরীকে অন্য বকরীর পালে মিশিয়ে দেই, ফলে পুরো পালটি খোসপাঁচড়াগ্রস্ত হয়ে যায়। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, “তাহলে প্রথমটিকে কে সংক্রমিত করেছিল?”









আল-জামি` আল-কামিল (11421)


11421 - عن أبي أمامة، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"لا صفر ولا هامة ولا عدوى".

حسن: رواه ابن أبي عاصم في السنة (290)، والطَّبرانيّ في الكبير (8/ 216) كلاهما من طرق، عن عمرو بن هاشم البيروتيّ، حَدَّثَنَا الهيثم بن حميد، عن أبي مُعيد حفص بن غيلان، عن القاسم أبي عبد الرحمن، عن أبي أمامة فذكره.

وإسناده حسن فإن كلا من القاسم أبي عبد الرحمن، والهيثم بن حميد، وعمرو بن هاشم البيروتي حسن الحديث.

وله طرق أخرى منها: ما روإه أبو بكر ابن أبي شيبة في مسنده كما في المطالب العالية (2488)، والطبري في مسند علي من تهذيب الآثار (24) كلاهما من طريق أبي أسامة، عن عبد الرحمن بن يزيد بن جابر قال: حَدَّثَنَا القاسم، عن أبي أمامة قال: فذكره.

ورجال الإسناد كلّهم ثقات لكن أبو أسامة كان يهمُ في اسم شيخه، قال موسى بن هارون: روى أبو أسامة عن عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، وكان ذلك وهما منه، هو لم يلقَ ابن جابر، وإنما لقي ابن تميم، فظن أنه ابن جابر، وابن جابر ثقة، وابن تميم ضعيف. اهـ.




আবু উমামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "সফর মাসের কোনো (অশুভ প্রভাবের ধারণা) নেই, হাবাহ (পেঁচার অলক্ষুণে বিশ্বাস) নেই এবং (স্বয়ংক্রিয়) কোনো সংক্রমণও নেই।"









আল-জামি` আল-কামিল (11422)


11422 - عن عليّ بن أبي طالب قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا صفر ولا هامة ولا يُعدي صحيح سقيمٌ".

حسن: رواه أبو يعلى (430، 431)، وابن جرير في مسند عليّ من تهذيب الآثار (1) كلاهما من طرق، عن حبيب بن أبي ثابت، عن ثعلبة بن يزيد الحماني قال: سمعت عليا فذكره.

وإسناده حسن من أجل ثعلبة بن يزيد الحماني؛ فإنه حسن الحديث إذا لم يروِ ما يُشيد بدعته.

وقال الهيثميّ في"المجمع" (5/ 101):"رواه أبو يعلى وفيه ثعلبة بن يزيد الحماني، وثّقه النسائيّ وفيه ضعف، وبقية رجاله ثقات" اهـ.

وفي معناه ما رُوي عن عبد الله بن عمرو بن العاص، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا عدوى، ولا طيرة، ولا هامة، ولا حسد، والعين حق".

رواه أحمد (7070) عن قُتَيبة، حَدَّثَنَا رشدين بن سعد، عن الحسن بن ثوبان، عن هشام بن أبي رقية، عن عبد الله بن عمرو بن العاص فذكره.

ورشدين بن سعد بن مفلح المهري. قال ابن يونس: كان صالحًا في دينه فأدركتْه غفلةُ الصالحين، فخلط في الحديث، وقال النسائيّ:"متروك"، وضعّفه الأئمة الآخرون، وزاد في الحديث" ولا حسد" وباقي الفقرات لها شواهد كما مضى.

شرح غريب أحاديث الباب

قوله صلى الله عليه وسلم: (ولا صفر) فيه تأويلان: أحدهما: المراد تأخيرهم تحريم المحرم إلى صفر وهو
النسيء الذى كانوا يفعلونه. وبهذا قال مالك وأبو عبيدة. والثاني: أن الصفر دواب في البطن وهي دود، وكانوا يعتقدون أن في البطن دابة تهيج عند الجوع. وربما قتلت صاحبها. وكانت العرب تراها أعدى من الجرب. وهذا التفسير هو الصَّحيح. وبه قال مطرف وابن وهب وابن حبيب وأبو عبيد وخلائق من العلماء. وقد ذكره مسلم عن جابر بن عبد الله راوي الحديث فيتعين اعتماده، ويجوز أن يكون المراد هذا. والأوّل جميعًا، وأن الصفرين جميعًا باطلان لا أصل لهما.

قوله صلى الله عليه وسلم (ولاهامة) فيه تأويلان: أحدهما: أن العرب كانت تتشاءم بالهامة وهي الطائر المعروف من طير الليل، وقيل: هي البومة قالوا: كانت إذا سقطت على دار أحدهم رآها ناعية له نفسه أو بعض أهله وهذا تفسير مالك بن أنس. والثاني: أن العرب كانت تعتقد أن عظام الميت - وقيل: روحه- تنقلب هامة تطير، وهذا تفسير أكثر العلماء، وهو المشهور، ويجوز أن يكون المراد النوعين، فإنهما جميعًا باطلان فبين النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم إبطال ذلك وضلالة الجاهليّة فيما تعتقده من ذلك. والهامة بتخفيف الميم على المشهور.

قوله صلى الله عليه وسلم (ولانوء) أي لا تقولوا:"مطرنا بنوء كذا" ولا تعتقدوه.

قوله صلى الله عليه وسلم (ولاغول) قال جمهور العلماء: كانت العرب تزعم أن الغيلان في الفلوات، وهي جنس من الشياطين، فتتراءى للناس، وتتغول تغولا أي تتلون تلونا، فتضلهم عن الطريق، فتهلكهم، فأبطل النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم.

وقال آخرون: ليس المراد بالحديث نفي وجود الغول، وإنما معناه إبطال ما تزعمه العرب من تلون الغول بالصور المختلفة واغتيالها. قالوا: ومعنى الا غول) أى لا تستطيع أن تضل أحدًا.

ويشهد له حديث آخر:"لا غول، ولكن السعالى" قال العلماء: السعالى بالسين المفتوحة والعين المهملتين وهم سحرة الجن أي ولكن في الجن سحرة لهم تلبيس وتخيل. وفي الحديث الآخر:"إذا تغولت الغيلان فنادوا بالأذان" أي ارفعوا شرها بذكر الله تعالى، وهذا دليل على أنه ليس المراد نفي أصل وجودها. اهـ (انظر: شرح النوويّ على صحيح مسلم).




আলী ইবনু আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কোনো সাফার (মাসের অশুভ) নেই, কোনো হামার (অশুভ পাখির) ধারণা নেই এবং সুস্থ ব্যক্তিকে অসুস্থতা সংক্রমিত করে না।"









আল-জামি` আল-কামিল (11423)


11423 - عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا يورد ممرض على مُصِحٍّ"

متفق عليه: رواه البخاريّ في الطب (5771، 5774)، ومسلم في السّلام (2221) كلاهما من طرق عن الزّهريّ، عن أبي سلمة بن عبد الرحمن بن عوف، عن أبي هريرة فذكره.

وعند مسلم قصة طويلة في سكوت أبي هريرة عن حديث"لا عدوى"، وتقدمت عند حديث"لا عدوى"، وعند البخاريّ باختصار.

قال النوويّ في شرح صحيح مسلم:"قوله:"لا يورد ممرض على مصح" قوله"يورد" بكسر الراء و"الممرض والمصح" بكسر الراء والصاد، ومفعول يورد محذوف، أي لا يورد إبله
المراض. قال العلماء: الممرض صاحب الإبل المراض. والمصح صاحب الإبل الصحاح، فمعنى الحديث: لا يورد صاحب الإبل المراض إبله على إبل صاحب الإبل الصحاح؛ لأنه ربما أصابها المرض بفعل الله تعالى وقدره الذي أجرى به العادة لا بطبعها، فيحصل لصاحبها ضرر بمرضها، وربما حصل له ضرر أعظم من ذلك باعتقاد العدوى بطبعها، فيكفر. والله أعلم" اهـ.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: রোগাক্রান্তকে সুস্থের নিকট আনা যাবে না।









আল-জামি` আল-কামিল (11424)


11424 - عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا عدوى ولا طيرة ولا هامة ولا صفر وفرَّ من المجذوم كما تفر من الأسد".

صحيح: رواه البخاريّ في الطب (5707) قال: وقال عفّان، حَدَّثَنَا سليم بن حيان، حَدَّثَنَا سعيد بن ميناء، قال: سمعت أبا هريرة يقول فذكره.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "রোগের (স্বয়ংক্রিয়) সংক্রমণ নেই, কোনো কুলক্ষণ নেই, অশুভ পেঁচার ধারণা নেই এবং সফর মাসে অশুভ কিছু নেই। আর তুমি কুষ্ঠ রোগী থেকে এমনভাবে পালাও, যেমন তুমি বাঘ থেকে পালাও।"









আল-জামি` আল-কামিল (11425)


11425 - عن الشريد قال: كان في وفد ثقيف رجل مجذوم فأرسل إليه رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إنا قد بايعناك فارجع".

صحيح: رواه مسلم في السّلام (2231) من طرق، عن يعلى بن عطاء، عن عمرو بن الشريد، عن أبيه فذكره.

وأمّا ما رُوي عن ابن عباس أن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"لا تديموا النظر إلى المجذومين" فلا يصح.

رواه ابن ماجه (3543)، وأحمد (2075)، والبيهقي (7/ 219) كلّهم من طريق محمد بن عبد الله ابن عمرو بن عثمان، عن أمه فاطمة بنت الحسين، عن ابن عباس فذكره.

ومحمد بن عبد الله بن عمرو بن عثمان الأموي المعروف بالديباج لحسنه، قال البخاريّ في ضعفائه:"عنده عجائب"، وقال في الأوسط:"لا يكاد يتابع في حديثه" وكذا قال ابن الجارود، وقال النسائيّ مرة:"ثقة" وقال مرة:"ليس بالقوي".

ثمّ هو اضطرب في إسناده فمرةً رواه هكذا، ومرة رواه عن أمه فاطمة بنت الحسين، عن أبيها، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم قال:"لا تديموا النظرَ إلى المُجَذمين، وإذا كلمتموهم فليكن بينكم وبينهم قيدُ رمحٍ".

رواه عبد الله بن أحمد في زوائد المسند (581) عن أبي إبراهيم الترجمانيّ، حَدَّثَنَا الفرج بن فضالة، عن عبد الله بن عامر، عن محمد بن عبد الله بن عمرو بن عثمان، عن أمه فاطمة بنت الحسين فذكرته.

وقد وقع تحريف في الإسناد، وأثبتناه من حاشية محققي المسند.

وفرج بن فضالة ضعيف عند جمهور أهل العلم، وشيخه عبد الله بن عامر الأسلمي ضعيف، وقال أبو حاتم: متروك.

وقد قيل: عن مسند فاطمة بنت النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم.
وله طريق آخر عن ابن عباس رواه الطبراني (11/ 106 - 107) عن يحيى بن عثمان بن صالح، حَدَّثَنَا أبي، حَدَّثَنَا ابن لهيعة، عن عمرو بن دينار، عن ابن عباس نحوه.

وعبد الله بن لهيعة فيه كلام معروف، والراوي عنه عثمان بن صالح ليس بذاك، قال البرذعي: قلت: (أي لأبي زرعة) رأيت بمصر نحوا من مائة حديث، عن عثمان بن صالح، عن ابن لهيعة، عن عمرو بن دينار وعطاء، عن ابن عباس، عن النَّبِيّ صلى الله عليه وسلم منها:"لا تكرم أخاك بما يشق عليه".

فقال: لم يكن عندي عثمان ممن يكذب، ولكنه كان يكتب الحديث مع خالد بن نجيح، وكان خالد -إذا سمعوا من الشيخ- أملى عليهم ما لم يسمعوا قبلوا به" اهـ. أسئلة البرذعي (ص 418)

قلت: خالد بن نجيح هذا كان يفتعل الأحاديث ويضعها في كتب الناس.

وكذلك لا يصح ما روي عن معاذ بن جبل مرفوعا:"لا تديموا النظر إلى المجذومين" رواه الطبرانيّ في الأوسط (9259)، والكبير (20/ 112) عن الوليد بن حمّاد الرمليّ، حَدَّثَنَا سليمان بن عبد الرحمن الدمشقيّ، حدثتا سعدان بن يحيى، عن عبد الحميد بن جعفر، عن صالح بن أبي غريب، عن كثير بن مرة، عن معاذ بن جبل فذكره.

وقال:"لا يروى هذا الحديث عن معاذ إِلَّا بهذا الإسناد، تفرّد به سليمان بن عبد الرحمن" اهـ وقال الهيثميّ في"المجمع" (5/ 101):"رواه الطبرانيّ … عن شيخه الوليد بن حمّاد الرمليّ، ولم أعرفه، وبقية رجاله ثقات" اهـ.

قلت: ترجم له ابن حجر في"اللسان"، ولم يذكر فيه جرحا أو تعديلًا.

وفي سنده صالح بن أبي عريب -واسمه قليب- الحضرمي، روى عنه غير واحد، ولم يوثقه أحد إِلَّا أن ابن حبَّان ذكره في الثقات، ولذا قال الحافظ في التقريب:"مقبول" إي عند المتابعة، وإلَّا فلين الحديث، ولم أجد له متابعا.

وأمّا ما رُوي عن جابر أن رسول الله صلى الله عليه وسلم أخذ بيد مجذوم، فأدخله معه في القصعة ثمّ قال:"كلْ باسم الله، ثقةً بالله، وتوكلا عليه" فضعيف.

رواه أبو داود (3925)، والترمذي (1817)، وابن ماجه (3542)، وصحّحه ابن حبَّان (6120)، والحاكم (4/ 136 - 137) كلّهم من طرق، عن يونس بن محمد، حَدَّثَنَا المفضل بن فضالة، عن حبيب بن الشهيد، عن محمد بن المنكدر، عن جابر بن عبد الله فذكره.

وإسناده ضعيف من أجل المفضل بن فضالة، قال ابن عدي بعد ما أخرج هذا الحديث في ترجمته من الكامل (6/ 2404):"لم أرَ في حديثه أنكر من هذا الحديث" اهـ

وقال الترمذي:"هذا حديث غريب لا نعرفه إِلَّا من حديث يونس بن محمد، عن المفضل بن فضالة، والمفضل بن فضالة هذا شيخ بصري … وقد روى شعبة هذا الحديث عن حبيب بن الشهيد، عن ابن بريدة أن عمر أخذ بيد مجذوم، وحديث شعبة أشبه عندي وأصح" اهـ.
وذكر في العلل الكبير (2/ 770) عن البخاريّ نحوه.

قلت: وقول الترمذيّ:"أصح" يعني أن رواية شعبة أصح من رواية المفضل وإلَّا فرواية شعبة فيها انقطاع بين عبد الله بن بريدة وبين عمر. قال أبو زرعة: عبد الله بن بريدة عن عمر مرسل.

المراسيل لابن أبي حاتم (111).




শরীদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: সাকীফ গোত্রের প্রতিনিধিদলে একজন কুষ্ঠরোগী লোক ছিল। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার নিকট বার্তা পাঠালেন: “আমরা আপনার বাইআত গ্রহণ করেছি, আপনি ফিরে যান।”









আল-জামি` আল-কামিল (11426)


11426 - عن رُبيّع بنت معوّذ ابن عفراء قالت: كنا نغزو مع رسول الله صلى الله عليه وسلم نسقي القوم ونخدمهم، ونرُدّ القتلى والجرحى إلى المدينة.

صحيح: رواه البخاريّ في الطب (5679) عن قُتَيبة بن سعيد، ثنا بشر بن المفضل، عن خالد ابن ذكوان، عن ربيع بنت معوِّذ ابن عفراء فذكرته.




রুবাইয়্যি বিনত মুআওবিয ইবনু আফরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে যুদ্ধে যেতাম। (সেখানে) আমরা সৈন্যদের পানি পান করাতাম, তাদের সেবা করতাম এবং নিহত ও আহতদের মদিনায় ফিরিয়ে আনতাম।









আল-জামি` আল-কামিল (11427)


11427 - عن أنس بن مالك قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يغزو بأم سليم ونسوةٌ من الأنصار معه إذا غزا، فيسقين الماء ويداوين الجرحى.

صحيح: رواه مسلم في الجهاد والسير (1810) يحيى بن يحيى، أخبرنا جعفر بن سليمان، عن ثابت، عن أنس فذكره.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন যুদ্ধে যেতেন, তখন তিনি উম্মে সুলাইম এবং তাঁর সাথে আনসারী মহিলাদেরকে নিয়ে যেতেন। তাঁরা (যোদ্ধাদের) পানি পান করাতেন এবং আহতদের চিকিৎসা করতেন।