হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (14488)


14488 - عن أبي الطفيل قال: رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم قلت: كيف رأيته؟ قال: كان أبيض مليحا، إذا مشى كأنما يهوي في صبوب.

صحيح: رواه أبو داود (4864)، وابن قانع في معجم الصحابة (2/ 242) كلاهما من طريق عبد الأعلى، حدثنا سعيد الجريري، عن أبي الطفيل قال: فذكره.

وإسناده صحيح، وسعيد الجريري هو سعيد بن إياس ثقة اختلط لكنْ رواية عبد الأعلى بن عبد الأعلى السامي كان عنه قبل اختلاطه.

ورواه مسلم (2340: 99) من طريق عبد الأعلى، ولكنه اختصر على قوله:"كان أبيض مليحا".

قوله:"كأنما يهوي في صبوب" وورد عند ابن قانع"في صبب" وهو المكان المنحدر، ومعناه كأنه ينزل في موضع منحدر.




আবুত তুফাইল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে দেখেছি। (তাঁকে) জিজ্ঞাসা করা হলো: আপনি তাঁকে কেমন দেখেছেন? তিনি বললেন: তিনি ছিলেন ফর্সা ও সুদর্শন। যখন তিনি হাঁটতেন, তখন মনে হতো যেন তিনি কোনো ঢালু স্থানে দ্রুত নিচে নামছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (14489)


14489 - عن عقبة بن الحارث قال: صلى النبي صلى الله عليه وسلم العصر فأسرع، ثم دخل البيت.

صحيح: رواه البخاري في الاستئذان (6275) عن أبي عاصم، عن عمر بن سعيد، عن ابن أبي مليكة أن عقبة بن الحارث حدثه، فذكره.




উকবাহ ইবনুল হারিস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আসরের সালাত আদায় করলেন এবং দ্রুত (চলে গেলেন), অতঃপর ঘরে প্রবেশ করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (14490)


14490 - عن ابن عمر قال: لما مر النبي صلى الله عليه وسلم بالحجر قال:"لا تدخلوا مساكن الذين
ظلموا أنفسهم، أن يصيبكم ما أصابهم، إلا أن تكونوا باكين، ثم قنع رأسه وأسرع السير حتى أجاز الوادي".

متفق عليه: رواه البخاري في المغازي (4419)، ومسلم في الزهد (2980: 39) كلاهما من طريق الزهري، عن سالم بن عبد الله، عن عبد الله بن عمر، فذكره. واللفظ للبخاري.

قوله:"بالحجر": هو مساكن ثمود.




ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, যখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম হিজর (সামুদ জাতির এলাকা) অতিক্রম করছিলেন, তখন তিনি বললেন: "তোমরা তাদের বসতবাড়িতে প্রবেশ করবে না যারা নিজেদের প্রতি জুলুম করেছে, যাতে তোমাদের উপর এমন কিছু আপতিত না হয় যা তাদের উপর আপতিত হয়েছিল, তবে কান্নারত অবস্থায় প্রবেশ করতে পারো।" এরপর তিনি তাঁর মাথা ঢেকে দিলেন এবং দ্রুত পথ চলতে লাগলেন, যতক্ষণ না তিনি উপত্যকা পার হলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (14491)


14491 - عن عبد الله بن عمر، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال لأصحاب الحجر:"لا تدخلوا على هؤلاء القوم المعذبين إلا أن تكونوا باكين، فإن لم تكونوا باكين فلا تدخلوا عليهم، أن يصيبكم مثل ما أصابهم".

متفق عليه: رواه البخاري في التفسير (4702)، ومسلم في الزهد والرقائق (2980: 38) كلاهما من طريق عبد الله بن دينار أنه سمع عبد الله بن عمر، فذكره.

قوله:"لأصحاب الحجر" في شأن أصحاب الحجر.




আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হাজর (আল-হিজর)-এর অধিবাসীদের উদ্দেশ্যে বললেন: "তোমরা এই শাস্তিপ্রাপ্ত লোকদের কাছে প্রবেশ করবে না, তবে যদি তোমরা ক্রন্দনরত থাকো। আর যদি তোমরা ক্রন্দনরত না থাকো, তবে তাদের কাছে প্রবেশ করো না। (কেননা আমি আশঙ্কা করি) তাদের উপর যা আপতিত হয়েছিল, তোমাদের উপরও যেন অনুরূপ কিছু আপতিত না হয়।"









আল-জামি` আল-কামিল (14492)


14492 - عن عبد الله بن عمر أن الناس نزلوا مع رسول الله صلى الله عليه وسلم على الحجر - أرض ثمود - فاستقوا من آبارها، وعجنوا به العجين، فأمرهم رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يهريقوا ما استقوا، ويعلفوا الإبل العجين، وأمرهم أن يستقوا من البئر التي كانت تردها الناقة.

زاد في رواية: فاستقوا من بئارها واعتجنوا به.

متفق عليه: رواه البخاري في الأنبياء (3379)، ومسلم في الزهد والرقائق (2981) كلاهما من طريق عبيد الله، عن نافع، عن ابن عمر، فذكره.

واللفظ لمسلم، والزيادة المذكورة له في رواية أخرى.




আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যে লোকেরা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে হাজর নামক স্থানে (যা ছিল সামুদ জাতির ভূমি) অবতরণ করলো। অতঃপর তারা সেখানকার কূপগুলো থেকে পানি তুললো এবং তা দ্বারা আটা মাখলো। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদের নির্দেশ দিলেন যে, তারা যেন সেই পানি ফেলে দেয় যা তারা তুলেছিল, এবং আটা মাখা খামির উটকে খাইয়ে দেয়। আর তিনি তাদেরকে নির্দেশ দিলেন, তারা যেন শুধু সেই কূপ থেকে পানি তোলে যেখান থেকে (সালেহ নবীর) উটনি পানি পান করত।

অন্য এক বর্ণনায় অতিরিক্ত এসেছে: তারা তাদের কূপগুলো থেকে পানি তুলেছিল এবং তা দ্বারা আটা মেখেছিল।









আল-জামি` আল-কামিল (14493)


14493 - عن أبي هريرة، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إذا سافرتم في الخصب، فأعطوا الإبل حظها من الأرض، وإذا سافرتم في السنة، فأسرعوا عليها السير، وإذا عرستم بالليل، فاجتنبوا الطريق، فإنها مأوى الهوام بالليل".

وفي لفظ:"فإنها طرق الدواب، ومأوى الهوام بالليل".

صحيح: رواه مسلم في الإمارة (1926) عن زهير بن حرب، حدثنا جرير، عن سهيل، عن أبيه، عن أبي هريرة، فذكره.

ورواه أيضا من طريق عبد العزيز بن محمد، عن سهيل به نحوه وباللفظ الثاني.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যখন তোমরা উর্বর (সবুজ) স্থানে সফর করো, তখন উটকে মাটি থেকে তার প্রাপ্য অংশ (আহার ও বিশ্রাম) দাও। আর যখন তোমরা দুর্ভিক্ষপূর্ণ (অনুর্বর) স্থানে সফর করো, তখন দ্রুতগতিতে তার উপর দিয়ে পথ অতিক্রম করো। আর যখন তোমরা রাতে বিশ্রাম গ্রহণ করো, তখন রাস্তা পরিহার করো, কারণ রাতে তা চতুষ্পদ জন্তুর পথ এবং পোকামাকড় ও হিংস্র প্রাণীর আশ্রয়স্থল।"









আল-জামি` আল-কামিল (14494)


14494 - عن أنس بن مالك أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إذا أخصبت الأرض فأعطوا الظهر
حظه من الكلأ، وإذا أجدبت فانجوا عليها بنقيها بالدلجة، وعليكم بالدلجة فإن الأرض تطوى بالليل".

صحيح: رواه الترمذي في العلل الكبير (2/ 874)، واللفظ له، وابن خزيمة (2555)، والحاكم (1/ 445) من طريق رويم بن يزيد اللخمي - وابن خزيمة (2555)، والحاكم (1/ 245) من طريق قبيصة بن عقبة، كلاهما عن الليث بن سعد، عن عقيل، عن الزهري، عن أنس، فذكره. وإسناده صحيح.

وقال الحاكم:"صحيح على شرط الشيخين".

ورواه أيضا أبو داود (2571) من وجه آخر عن أبي جعفر الرازي، عن الربيع بن أنس، عن أنس مختصرا بقوله:"عليكم بالدلجة، فإن الأرض تطوى بالليل".

وأبو جعفر الرازي التميمي مولاهم مشهور بكنيته مختلف فيه، فقال ابن معين:"ثقة"، وقال ابن سعد:"كان ثقة" وقال أبو حاتم:"ثقة". وقال ابن عدي:"له أحاديث صالحة".

وتكلم فيه أحمد وأبو زرعة والنسائي والخلاصة فيه أنه لا بأس به في المتابعات وهذا منها.

ولكن رواه قتيبة بن سعيد كما في علل ابن أبي حاتم (2256)، وعبد الله بن صالح كاتب الليث كما في شرح المشكل للطحاوي (114) كلاما عن عقيل، عن الزهري مرسلا.

قال مسلم بن الحجاج:"أخرج إلي عبد الملك بن شعيب بن الليث كتاب جده، فرأيت في كتاب الليث ما رواه قتيبة" انتهى.

وقد رجّح البخاري فيما نقل عنه الترمذي في العلل الكبير، والدارقطني في العلل (12/ 192) المرسل.

قلت: الصنعة الحديثية ترجح المرسل، ولكن لا يمنع أن يكون الزهري نفسه رواه على وجهين: موصولا ومرسلا.

وتابعه في وصله الربيع بن أنس البكري أو الحنفي وهو لا بأس به في المتابعات.

وإسناده إليه حسن وهو يقوي الإسناد الأول. والأصل فيه الوصل لأنه كما يقال: مثل هذا لا يقال بالرأي ولكن الراوي رواه مرة مرسلا وأخرى موصولا.

وفي معناه ما روي عن جابر بن عبد الله قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إذا سرتم في الخصب فأمكنوا الركاب أسنانها، ولا تجاوزوا المنازل، هاذا سرتم في الجدب فاستجدوا، وعليكم بالدلج فإن الأرض تطوى بالليل، وإذا تغولت لكم الغيلان فنادوا بالأذان، وإياكم والصلاة على جواد الطريق والنزول عليها فإنها مأوى الحيات والسباع وقضاء الحاجة فإنها الملاعن".

رواه أحمد (14277، 15091)، وأبو داود (2570) من طرق عن هشام بن حسان، عن الحسن، عن جابر بن عبد الله، فذكره.
واللفظ لأحمد ولم يذكر أبو داود لفظه.

والحسن لم يسمع من جابر بن عبد الله كما قال ابن معين، وابن المديني، وأبو زرعة وغيرهم.

وأما ما رواه ابن ماجه (329) من طريق محمد بن يحيى، حدثنا عمرو بن أبي سلمة، عن زهير قال: قال سالم: سمعت الحسن يقول: حدثنا جابر بن عبد الله فذكر جزء منه.

فالظاهر أنه خطأ فإن سالما هذا هو الخياط وكان يخطئ لا سيما في صيغ الأداء كما بين ذلك أبو حاتم الرازي وابن حبان، والراوي عنه زهير بن محمد التميمي روى عنه أهل الشام مناكير حتى قال أحمد: كأن زهيرا الذي يروي عنه الشاميون آخر، وقد روى عنه هذا الحديث عمرو بن أبي سلمة، وهو دمشقي شامي.




আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "যখন যমীন উর্বর ও শস্যশ্যামল হয়, তখন তোমরা বাহনকে তার প্রাপ্য ঘাস খেতে দাও। আর যখন জমিতে দুর্ভিক্ষ দেখা দেয় (শুষ্ক হয়ে যায়), তখন তার ওপর আরোহণ করে রাতের বেলা তার (বাহনের) অবশিষ্ট শক্তি কাজে লাগিয়ে দ্রুত পথ অতিক্রম করো। আর তোমাদের জন্য রাতের ভ্রমণ জরুরি। কেননা রাতে যমীন সংকুচিত হয়ে যায় (দূরত্ব কমে আসে)।"









আল-জামি` আল-কামিল (14495)


14495 - عن جابر بن عبد الله: شكا ناس إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم المشي، فدعاهم وقال:"عليكم بالنسلان" فنسلنا، فوجدناه أخف علينا.

صحيح: رواه إسحاق بن راهويه - المطالب (2010)، وصحّحه ابن خزيمة (2537)، والحاكم (1/ 443) كلهم من طريق روح بن عبادة، حدثنا ابن جريج، حدثني جعفر بن محمد، عن أبيه، عن جابر بن عبد الله، فذكره. وإسناده صحيح.

وقال الحاكم:"هذا حديث صحيح على شرط مسلم".

قوله:"النسلان" مصدر نسل، وهو الإسراع في المشي دون السعي.




জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, কিছু লোক রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের নিকট (দীর্ঘ) পথ হাঁটার কষ্ট সম্পর্কে অভিযোগ করল। তখন তিনি তাদের ডাকলেন এবং বললেন, "তোমরা অবশ্যই 'নাসলান' (দ্রুতগতিতে চলা) অবলম্বন করো।" অতঃপর আমরা সেইভাবে হাঁটলাম এবং দেখলাম যে এটা আমাদের জন্য আরও সহজ ছিল।









আল-জামি` আল-কামিল (14496)


14496 - عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"السفر قطعة من العذاب، يمنع أحدكم نومه وطعامه وشرابه، فإذا قضى أحدكم نهمته من وجهه، فليعجل إلى أهله".

متفق عليه: رواه مالك في الاستئذان (39) عن سُمي مولى أبي بكر، عن أبي صالح، عن أبي هريرة، فذكره. ورواه البخاري في العمرة (1804)، ومسلم في الإمارة (1927) كلاهما من طريق مالك به مثله.

قوله:"نهمته" أي حاجته.

قوله:"من وجهه" أي من مقصده.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "সফর (ভ্রমণ) হলো আযাবের (কষ্টের) একটি অংশ; এটি তোমাদের কারো ঘুম, খাদ্য ও পানীয়কে ব্যাহত করে। সুতরাং, যখন তোমাদের কেউ তার গন্তব্যস্থলের প্রয়োজন (বা লক্ষ্য) পূরণ করে নেয়, তখন সে যেন দ্রুত তার পরিবারের কাছে ফিরে যায়।"









আল-জামি` আল-কামিল (14497)


14497 - عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"لو يعلم الناس ما في الوحدة ما أعلم ما سار راكب بليل وحده".
صحيح: رواه البخاري في الجهاد والسير (2998) من طرق عن عاصم بن محمد بن زيد بن عبد الله بن عمر، عن أبيه، عن ابن عمر، قال: فذكره.




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "মানুষ যদি জানত একাকীত্বের মধ্যে কী (খারাপ দিক) রয়েছে, যা আমি জানি, তাহলে কোনো আরোহী রাতে একা ভ্রমণ করত না।"









আল-জামি` আল-কামিল (14498)


14498 - عن ابن عمر أن النبي صلى الله عليه وسلم نهى عن الوحدة: أن يبيت الرجل وحده، أو يسافر وحده.

صحيح: رواه أحمد (5650) عن أبي عبيدة الحداد، عن عاصم بن محمد، عن أبيه، عن ابن عمر، فذكره. وإسناده صحيح.

وأبو عبيدة الحداد هو عبد الواحد بن واصل السدوسي مولاهم البصري نزيل بغداد، ثقة وهو من رجال البخاري.

ولابن عمر حديثان أحدهما: النهي عن السفر وحده، والثاني: النهي عن المبيت والسفر وحده. فذكر جماعة من أصحاب عاصم بن محمد وهو ابن زيد بن عبد الله بن عمر بن الخطاب - وهو من رجال الجماعة - النهي عن السفر وحده، وذكر الثاني أبو عبيدة.

والحكمة في النهي عن المبيت وحده أن الشيطان يوسوس في قلبه.




ইবন উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একাকীত্ব (একা থাকা) থেকে নিষেধ করেছেন—যেন কোনো ব্যক্তি একা রাত্রিযাপন না করে অথবা একা ভ্রমণ না করে।









আল-জামি` আল-কামিল (14499)


14499 - عن ابن عباس أن رجلا خرج، فتبعه رجلان، ورجل يتلوهما يقول: ارجعا قال: فرجعا قال: فقال له: إن هذين شيطانان، وإني لم أزل بهما حتى رددتهما، فإذا أتيت النبي صلى الله عليه وسلم فأقرئه السلام، وأعلمه أنا في جمع صدقاتنا، ولو كانت تصلح له لأرسلنا بها إليه قال: فنهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عند ذلك عن الخلوة.

صحيح: رواه أحمد (2510، 2719)، والبزار - كشف الأستار (2022)، وأبو يعلى (2588)، والحاكم (2/ 102) كلهم من طريق عبيد الله بن عمرو الرقي، عن عبد الكريم (هو ابن مالك الجزري)، عن عكرمة، عن ابن عباس، فذكره. وإسناده صحيح.

قال الحاكم:"صحيح الإسناد على شرط البخاري".

قال الهيثمي في المجمع (8/ 104):"رواه أحمد، وأبو يعلى، ورجالهما رجال الصحيح، والبزار كذلك".




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, এক ব্যক্তি বাইরে বের হলেন। তখন দুজন লোক তাকে অনুসরণ করল। আরেকজন লোক তাদের পেছনে পেছনে গিয়ে বলল: তোমরা ফিরে যাও। তিনি (ইবনু আব্বাস) বলেন: তারা দুজন ফিরে গেল। সে (ফিরিয়ে আনা লোকটি) তাকে বলল: এই দুজন শয়তান ছিল। আমি তাদেরকে ক্রমাগতভাবে বিরত রেখেছি, যতক্ষণ না আমি তাদের ফিরিয়ে এনেছি। অতএব, আপনি যখন নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট যাবেন, তখন তাঁকে আমার পক্ষ থেকে সালাম জানাবেন এবং তাঁকে জানিয়ে দেবেন যে, আমরা আমাদের যাকাত (সদকা) সংগ্রহে ব্যস্ত আছি। যদি তা তাঁর জন্য (ব্যবহারের) উপযুক্ত হত, তবে আমরা অবশ্যই তা তাঁর কাছে পাঠিয়ে দিতাম। ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: এর প্রেক্ষিতে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) (কারও সাথে) নির্জনে দেখা করতে নিষেধ করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (14500)


14500 - عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"الراكب شيطان، والراكبان شيطانان، والثلاثة ركب".

حسن: رواه مالك في كتاب الاستئذان (36) عن عبد الرحمن بن حرملة، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، فذكره.

ورواه أبو داود (2607)، والترمذي (1674) من طريق مالك به.

وصحّحه الحاكم (2/ 102) من طريق محمدبت إسماعيل بن أبي فديك، عن عبد الرحمن بن حرملة به. وقال:"صحيح الإسناد". وصحّحه ابن خزيمة (2570) من طريق محمد بن عجلان،
عن عمرو بن شعيب به.

وقال الترمذي:"هذا حديث حسن". وهو كما قال، فإن عمرو بن شعيب وأباه حسنا الحديث، ولذا قال ابن حجر في الفتح (2/ 53):"حديث حسن الإسناد"، وقد صحّحه ابن خزيمة والحاكم".

قال البغوي:"معنى الحديث عندي ما روي عن سعيد بن المسيب، مرسلا، عن رسول الله صلى الله عليه وسلم:"الشيطان يهمّ بالواحد وبالاثنين، فإذا كانوا ثلاثة لم يهمم بهم".

وقال الخطابي:"معناه أن التفرد والذهاب وحده في الأرض من فعل الشيطان أو هو شيء يحمله عليه الشيطان ويدعوه إليه وكذلك الاثنان ليس معهما ثالث فإذا صاروا ثلاثة فهم ركب أي جماعة وصحب، قال: والمنفرد وحده في السفر إن مات لم يكن بحضرته من يقوم بغسله ودفنه وتجهيزه، ولا عنده من يوصي إليه في ماله ويحمل تركته إلى أهله ويرد خبره إليهم، ولا معه في سفره من يعينه على الحمولة فإذا كانوا ثلاثة تعاونوا وتناوبوا المهنة والحراسة وصلوا الجماعة وأحرزوا الحظ فيها" اهـ.

قوله:"والثلاثة رَكْبٌ" بفتح فسكون أي جماعة.




আবদুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: ‘একাকী আরোহী শয়তান, আর দুইজন আরোহী দুই শয়তান। আর তিনজন হলে তারা কাফেলা (বা দল)।’









আল-জামি` আল-কামিল (14501)


14501 - عن أبي سعيد الخدري، أو أبي هريرة أن رسوك الله صلى الله عليه وسلم قال:"إذا خرج ثلاثة في سفر فليؤمروا أحدهم".

حسن: رواه أبو داود (2608، 2609) عن علي بن بحر، حدثنا حاتم بن إسماعيل، حدثنا محمد بن عجلان، عن نافع، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، فذكره.

وإسناده حسن من أجل الكلام في محمد بن عجلان غير أنه حسن الحديث.

والتردد بين الصحابيين لا يؤثر في صحة الحديث، وكذلك لا يضر ما رواه البزار (5850) من حديث حاتم بن إسماعيل، عن محمد بن عجلان، عن نافع، عن ابن عمر، فذكر نحوه.

ويؤيد معنى الحديث ما رواه عمر بن الخطاب قال:"إذا كنتم ثلاثة في سفر، فأمروا عليكم أحدكم، ذاك أمير أمره رسول الله صلى الله عليه وسلم" فالصواب أنه موقوف.

رواه البزار (329) عن عمار بن خالد الواسطي، حدثنا القاسم بن مالك المزني، حدثنا الأعمش، عن زيد بن وهب، عن عمر بن الخطاب، فذكره.

وقال البزار عقبه:"وهذا الحديث قد رواه غير واحد عن الأعمش، عن زيد بن وهب، عن عمر موقوفا، ولا نعلم أسنده إلا القاسم بن مالك، عن الأعمش".

وصوّب الدارقطني في العلل (2/ 151) أنه من قول عمر.
وكذلك يؤيده أيضا قول ابن مسعود:"إذا كنتم ثلاثة في سفر، فأمّروا عليكم أحدكم، ولا يتناجى اثنان دون صاحبهما".

رواه الطبراني في الكبير (9/ 208)، والطحاوي في شرح المشكل (1792)، والسراج في حديثه (1250) كلهم من طريق شعبة، عن أبي إسحاق، عن أبي الأحوص، عن عبد الله بن مسعود فذكره. وإسناده صحيح.

إذا عرفت هذا فلا يضر ما أعل به حديث أبي هريرة وأبي سعيد الخدري بأنه رواه مسدد كما في إتحاف الخيرة (5724) من طريق ابن عجلان، عن نافع، عن أبي سلمة مرسلا، وصحّح إرساله أبو زرعة (225)، والدارقطني (326) فإن محمد بن عجلان فيه ضعف يسير، وهذا الاختلاف يرجع إليه فكونه رواه موصولا ومرسلا، فالحكم للوصل حسب المعنى، والحكم للمرسل حسب الصناعة الحديثية كما قال أبو حاتم والدارقطني.




আবু সাঈদ আল-খুদরী অথবা আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যখন তিনজন লোক কোনো সফরে বের হয়, তখন তারা যেন তাদের মধ্যে একজনকে নেতা (আমীর) নিযুক্ত করে।"









আল-জামি` আল-কামিল (14502)


14502 - عن جابر بن عبد الله قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يتخلف في المسير فيزجي الضعيف، ويردف، ويدعو لهم.

حسن: رواه أبو داود (2639)، والحاكم (2/ 115)، وعنه البيهقي (5/ 275) من طريق إسماعيل ابن علية، حدثنا الحجاج بن أبي عثمان، عن أبي الزبير أن جابر بن عبد الله حدثهم، فذكره. وإسناده حسن من أجل أبي الزبير.

وقال الحاكم:"صحيح على شرط مسلم".

قوله:"يزجي" أي يسوق بهم.




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সফরের সময় পেছনে থেকে যেতেন, ফলে তিনি দুর্বলদের এগিয়ে যেতে সাহায্য করতেন, (দরকার হলে কাউকে) তাঁর পেছনে আরোহী করে নিতেন এবং তাদের জন্য দু'আ করতেন।









আল-জামি` আল-কামিল (14503)


14503 - عن كعب بن مالك كان يقول: لقلما كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يخرج، إذا خرج في سفر إلا يوم الخميس.

صحيح: رواه البخاري في الجهاد والسير (2949) فقال: وعن يونس، عن الزهري، قال: أخبرني عبد الرحمن بن كعب بن مالك، أن كعب بن مالك رضي الله عنه، كان يقول: فذكره.

وهو معطوف على الإسناد الذي قبله (2948): حدثنا أحمد بن محمد، أخبرنا عبد الله، أخبرنا يونس، عن الزهري بالإسناد المذكور.




কা'ব ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলতেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যখন কোনো সফরে বের হতেন, তখন খুব কমই এমন হতো যে তিনি বৃহস্পতিবার ব্যতীত অন্য কোনো দিন বের হয়েছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (14504)


14504 - عن كعب بن مالك أن النبي صلى الله عليه وسلم خرج يوم الخميس في غزوة تبوك، وكان يحب أن يخرج يوم الخميس.

صحيح: رواه البخاري في الجهاد والسير (2950) عن عبد الله بن محمد، حدثنا هشام، أخبرنا
معمر، عن الزهري، عن عبد الرحمن بن كعب بن مالك، عن أبيه، فذكره.




কা'ব ইবনে মালেক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাবুক যুদ্ধের উদ্দেশ্যে বৃহস্পতিবার দিন বের হয়েছিলেন, আর তিনি বৃহস্পতিবার দিন (সফরের উদ্দেশ্যে) বের হওয়া পছন্দ করতেন।









আল-জামি` আল-কামিল (14505)


14505 - عن عبد الله بن عمر قال: نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يُسافر بالقرآن إلى أرض العدو. وزاد في رواية: مخافة أن يناله العدو.

متفق عليه: رواه مالك في الجهاد (7) عن نافع، عن ابن عمر، فذكره.

ورواه البخاري في الجهاد والسير (2990)، ومسلم في الإمارة (1869: 92) كلاهما من طريق مالك به مثله. والزيادة في رواية لمسلم عقبها.




আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুরআন নিয়ে শত্রুদের দেশে সফর করতে নিষেধ করেছেন। অন্য এক বর্ণনায় আরও এসেছে: এই আশঙ্কায় যে, শত্রুরা তা হস্তগত করে ফেলতে পারে।









আল-জামি` আল-কামিল (14506)


14506 - عن أنس بن مالك، قال: كان للنبي صلى الله عليه وسلم حاد يقال له أنجشة، وكان حسن الصوت، فقال له النبي صلى الله عليه وسلم:"رويدك يا أنجشة، لا تكسر القوارير" قال قتادة: يعني ضعفة النساء.

متفق عليه: رواه البخاري في الأدب (6011)، ومسلم في الفضائل (2323: 73) كلاهما من طريق همام، عن قتادة، عن أنس، فذكره.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর একজন উটচালক বা চালক ছিলেন, যার নাম ছিল আনজাশা। তিনি সুকণ্ঠের অধিকারী ছিলেন। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে বললেন: "হে আনজাশা! ধীরে চলো, কাঁচের শিশিগুলো ভেঙে ফেলো না।" কাতাদা (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: তিনি এর দ্বারা দুর্বল মহিলাদেরকে বুঝিয়েছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (14507)


14507 - عن عبد الله بن هشام قال: كنا مع النبي صلى الله عليه وسلم وهو آخذٌ بيد عمر بن الخطاب.

صحيح: رواه البخاري في الاستئذان (6264) عن يحيى بن سليمان، قال: حدثني ابن وهب، قال: أخبرني حيوة، قال: حدثني أبو عقيل زهرة بن معبد، سمع جده عبد الله بن هشام، قال: فذكره.




আব্দুল্লাহ ইবনে হিশাম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমরা নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সঙ্গে ছিলাম, আর তিনি উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর হাত ধরে রেখেছিলেন।