হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (5641)


5641 - عن أنس بن مالك قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن المحاقلة، والمخاضرة، والملامسة، والمنابذة، والمزابنة.
صحيح: رواه البخاري في البيوع (2207) عن إسحاق بن وهب، حدثنا عمر بن يونس قال: حدثنا أبي قال: حدثني إسحاق بن أبي طلحة الأنصاري، عن أنس بن مالك أنه قال فذكره.

وفي الباب ما روي عن ابن عمر قال:"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن لبستين، ونهانا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيعتين: عن المنابذة، والملامسة. وهي بيوع كانوا يتبايعون بها في الجاهلية".

رواه النسائي (4516) -واللفظ له-، وأبو داود (4/ 143) كلاهما من حديث جعفر بن برقان قال: بلغني عن الزهري، عن سالم، عن أبيه فذكره.

جعفر بن برقان يضعف في الزهري، كما قال ابن معين وغيره. وفيه انقطاع أيضًا لقوله:"بلغني عن الزهري". ولذا قال أبو داود:"هذا الحديث لم يسمعه جعفر بن برقان من الزهري، وهو منكر".




আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মুহা-কালা, মুখা-দ্বারা, মুলা-মাসা, মুনা-বাযা এবং মুযা-বানা থেকে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5642)


5642 - عن جابر بن عبد اللَّه يقول:"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع الصبرة من التمر، لا يعلم مكيلها بالكيل المسمى من التمر".

صحيح: رواه مسلم في البيوع (1530) عن أبي الطاهر أحمد بن عمرو بن سرح، أخبرنا ابن وهب، حدثني ابن جريج، أن أبا الزبير أخبره أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يقول فذكره.

ورواه النسائي (4548) من وجه آخر عن حجاج، قال ابن جريج: أخبرني أبو الزبير أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يقول: قال النبي صلى الله عليه وسلم:"لا تباع الصبرة من الطعام بالصبرة من الطعام، ولا الصبرة من الطعام بالكيل المسمى من الطعام".

والصبرة هي الكومة، يقال: اشترى الشيء صبرة أي بلا وزن ولا كيل.




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আল্লাহ্‌র রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খেজুরের স্তূপ (সুবরা) যা (পরিমাপ) জানা নেই, তাকে নির্দিষ্ট পরিমাণের খেজুরের বিনিময়ে বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5643)


5643 - عن جابر بن عبد اللَّه أنه سمع رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول وهو بمكة عام الفتح:"إن اللَّه ورسوله حرم بيع الخمر والميتة والخنزير والأصنام". فقيل: يا رسول اللَّه، أرأيت شحوم الميتة؛ فإنها يطلى بها السفن، ويدهن بها الجلود، ويستصبح بها الناس؟ فقال:"لا، هو حرام". ثم قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عند ذلك:"قاتل اللَّه اليهود،
إن اللَّه لما حرم شحومها جملوه، ثم باعوه، فأكلوا ثمنه".

متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2236)، ومسلم في المساقاة (1581) كلاهما عن قتيبة ابن سعيد، حدثنا الليث، عن يزيد بن أبي حبيب، عن عطاء بن أبي رباح، عن جابر بن عبد اللَّه فذكره.




জাবির ইবনে আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি মক্কা বিজয়ের বছর মক্কায় অবস্থানকালে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছেন: "নিশ্চয় আল্লাহ ও তাঁর রাসূল মদ, মৃতদেহ, শূকর এবং মূর্তির বেচা-কেনা হারাম করেছেন।" তখন জিজ্ঞাসা করা হলো: "হে আল্লাহর রাসূল, মৃতদেহের চর্বি সম্পর্কে আপনার কী অভিমত? কেননা তা দিয়ে নৌকা লেপা হয়, চামড়ায় মাখা হয় এবং মানুষ বাতি জ্বালাতে ব্যবহার করে?" তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "না, এটি হারাম।" এরপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "আল্লাহ ইহুদিদের ধ্বংস করুন। আল্লাহ যখন তাদের জন্য চর্বি হারাম করলেন, তখন তারা তা গলিয়ে (দ্রবীভূত করে) বিক্রি করে দিল এবং তার মূল্য খেল।"









আল-জামি` আল-কামিল (5644)


5644 - عن ابن عباس قال: بلغ عمر أن فلانًا باع خمرا، فقال: قاتل اللَّه فلانًا، ألم يعلم أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"قاتل اللَّه اليهود، حرمت عليهم الشحوم، فجملوها، فباعوها".

متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2223)، ومسلم في المساقاة (1582) من طريق سفيان ابن عيينة، حدثنا عمرو بن دينار، أخبرني طاوس، أنه سمع ابن عباس يقول فذكره. واللفظ للبخاري، وجاء فلان مصرحا باسمه عند مسلم أنه سمرة بن جندب رضي الله عنه.

وقد اختلف أهل العلم في كيفية بيع سمرة للخمر على ثلاثة أقوال، حكاها الحافظ في الفتح (4/ 415) عن ابن الجوزي، والقرطبي، وغيرهما:

أحدها: أنه أخذها من أهل الكتاب عن قيمة الجزية، فباعها معتقدا جواز ذلك.

والثاني: يجوز أن يكون باع العصير ممن يتخذها خمرا.

والثالث: أن يكون خلّل الخمر، وباعها معتقدا جواز ذلك، وكان عمر يعتقد أن ذلك لا يحلها، كما هو قول أكثر العلماء.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট এই সংবাদ পৌঁছল যে, অমুক ব্যক্তি মদ বিক্রি করেছে। অতঃপর তিনি বললেন: আল্লাহ অমুককে লাঞ্ছিত করুন! সে কি জানে না যে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: "আল্লাহ ইহুদীদের লাঞ্ছিত করুন! তাদের জন্য চর্বি হারাম করা হয়েছিল, কিন্তু তারা তা গলিয়ে (বা প্রক্রিয়াজাত করে) বিক্রি করে দিয়েছে।"









আল-জামি` আল-কামিল (5645)


5645 - عن ابن عباس قال: رأيت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم جالسًا عند الركن، قال: فرفع بصره إلى السماء، فضحك، فقال:"لعن اللَّه اليهود ثلاثًا، إن اللَّه حرم عليهم الشحوم، فباعوها، وأكلوا أثمانها، وإن اللَّه إذا حرم على قوم أكل شيء حرم عليهم ثمنه".

صحيح: رواه أبو داود (3488)، وأحمد (2221)، وابن حبان (4938)، والبيهقي (6/ 13) كلهم من طريق خالد الحذاء، عن بركة أبي الوليد، أخبرنا ابن عباس فذكره.

وقوله:"إن اللَّه إذا حرم على قوم أكل شيء حرم عليهم ثمنه" إن هذا العموم متروك باتفاق العلماء على جواز بيع الآدمي والحمار ونحوهما، وقد كان الناس يتبايعون السرجين للزرع في سائر الأزمان. انظر للمزيد"المنة الكبرى" (5/ 228).




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে রুকনের (কাবাঘরের কোণের) কাছে বসা দেখলাম। তিনি আকাশের দিকে দৃষ্টি তুলে তাকালেন এবং হেসে উঠলেন। এরপর বললেন: আল্লাহ ইয়াহুদিদের তিনবার অভিশাপ দিন। নিশ্চয় আল্লাহ তাদের জন্য চর্বি (পশুর চর্বি) হারাম করেছিলেন। কিন্তু তারা তা বিক্রি করে দিয়েছে এবং তার মূল্য ভক্ষণ করেছে। আর নিশ্চয়ই আল্লাহ যখন কোনো জাতির ওপর কোনো বস্তুর ভক্ষণ হারাম করেন, তখন তার মূল্যও তাদের জন্য হারাম করে দেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5646)


5646 - عن ابن عباس قال: أهدى رجل لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم راوية خمر، فقال له رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"أما علمت أن اللَّه حرمها" قال: لا، فساره رجل إلى جنبه، فقال له صلى الله عليه وسلم:"بم ساررته؟" فقال: أمرته أن يبيعها. فقال له رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إنّ الذي حرم شربها حرم بيعها". ففتح الرجل المزادتين حتى ذهب ما فيهما.

صحيح: رواه مالك في الأشربة (12) عن زيد بن أسلم، عن ابن وَعْلة المصري، أنه سأل عبد اللَّه بن عباس عما يُعصر من العنب، فقال ابن عباس فذكره. ورواه مسلم في المساقاة (1579) من
طريق مالك وغيره، عن زيد بن أسلم به.

وابن وعلة اسمه عبد الرحمن بن وعلة السبئي، أصله من مصر، ثم انتقل إلى المدينة، وسكنها.

ورواه ابن حبان (4944) من وجه آخر عن أبي خيثمة قال: حدثنا ربعي بن إبراهيم أخو إسماعيل ابن علية قال: حدثنا عبد الرحمن بن إسحاق قال: حدثنا زيد بن أسلم، عن ابن وعلة، عن ابن عباس: أن رجلًا خرج والخمر حلال، فأهدى لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم راوية خمر، فأقبل بها على بعير، حتى وجد رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم جالسًا، فقال: ما هذا معك؟ قال: راوية من خمر أهديتها لك. قال:"هل علمت أن اللَّه -جل وعلا- حرمها؟" قال: لا. قال:"فإن اللَّه قد حرمها" فالتفت الرجل إلى قائد البعير، فكلمه بشيء فيما بينه وبينه، فقام، فقال صلى الله عليه وسلم:"ماذا قلت له؟" قال: أمرته ببيعها. قال:"إن الذي حرم شربها حرم بيعها". قال: فأمر بعزالي المزادة، ففتحت، فخرجت في التراب فنظرت إليها في البطحاء ما فيها شيء.

ورواه أحمد (2041)، وأبو يعلى (2468)، والدارمي (2613) من حديث ابن إسحاق، عن القعقاع بن حكيم، عن عبد الرحمن بن وعلة. وفيه أن الذي أهدى هو صديق النبي صلى الله عليه وسلم من ثقيف أو دوس، وذلك يوم الفتح، ثم ذكر الحديث. ومحمد بن إسحاق لا بأس به في المتابعات.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর জন্য এক মশক মদ উপহার হিসেবে পাঠালো। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে বললেন: "তুমি কি জানো না যে আল্লাহ তা হারাম করেছেন?" লোকটি বলল: না। তখন তার পাশে থাকা এক ব্যক্তি তাকে কানে কানে কিছু বলল। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে জিজ্ঞেস করলেন: "তুমি তাকে কানে কানে কী বললে?" সে বলল: আমি তাকে এটি বিক্রি করতে নির্দেশ দিয়েছি। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে বললেন: "নিশ্চয় যিনি তা পান করা হারাম করেছেন, তিনি তা বিক্রি করাও হারাম করেছেন।" অতঃপর লোকটি মশকের মুখ খুলে দিল, ফলে এর ভেতরে যা কিছু ছিল, সবই বের হয়ে গেল।









আল-জামি` আল-কামিল (5647)


5647 - عن ابن عباس يقول: سمعتُ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"أتاني جبريل، فقال: يا محمد، إن اللَّه عز وجل لعن الخمر، وعاصرها، ومعتصرها، وشاربها، وحاملها، والمحمولة إليه، وبائعها، ومبتاعها، وساقيها، ومستقيها".

حسن: رواه أحمد (2897)، والطبراني في الكبير (12976)، وابن حبان (5356)، والحاكم (2/ 31) كلهم من طرق عن مالك بن خير الزيادي، أن مالك بن سعد التجيبي حدثه، أنه سمع ابن عباس يقول فذكره.

وإسناده حسن من أجل مالك بن خير الزيادي، ذكره البخاري في التاريخ الكبير (7/ 312)، ولم يقل فيه شيئًا. ولكن قال أبو زرعة:"مصري لا بأس به". وذكره ابن حبان في الثقات، وقال الذهبي:"محله الصدق". فمثله بحسن حديثه، وخاصة في الشواهد، وقد صحّحه ابن حبان، وقال الحاكم:"صحيح الإسناد، وشاهده حديث عبد اللَّه بن عمر".




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "আমার কাছে জিবরীল (আঃ) এসে বললেন: হে মুহাম্মাদ, নিশ্চয়ই আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্ল মদকে লা’নত (অভিশাপ) করেছেন, এবং যে তা নিংড়ায় (তৈরি করে), যে নিংড়াতে বলে, যে তা পান করে, যে তা বহন করে, এবং যার কাছে বহন করে নিয়ে যাওয়া হয়, আর যে তা বিক্রি করে, যে তা ক্রয় করে, যে তা পরিবেশন করে (পান করায়), এবং যে পরিবেশন করতে বলে (পান করতে চায়)।”









আল-জামি` আল-কামিল (5648)


5648 - عن ابن عباس، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"إن اللَّه حرم عليكم الخمرة، والميسرة، والكوبة". وقال:"كل مسكر حرام".

صحيح: رواه الإمام أحمد (2625)، والطحاوي في شرحه (4/ 216)، والبيهقي (10/ 221) كلهم من حديث عبد اللَّه بن عمرو، عن عبد الكريم، عن قيس بن حَبْتر، عن ابن عباس فذكره.

وإسناده صحيح، وعبد الكريم هو ابن مالك الجزري. وقيس بن حَبْتر -على وزن جعفر-، وهو التميمي الكوفي من رجال"التهذيب".
"والكوبة" هي النرد. وقيل: الطبل. وقيل: البربط. كذا في النهاية.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় আল্লাহ তোমাদের জন্য মদ (খামর), জুয়া (মাইসির) এবং কুবাহকে হারাম করেছেন।" আর তিনি বলেছেন: "প্রত্যেক নেশাজাতীয় বস্তুই হারাম।"









আল-জামি` আল-কামিল (5649)


5649 - عن أبي هريرة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"قاتل اللَّه يهودا، حرمت عليهم الشحوم، فباعوها، وأكلوا أثمانها".

متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2224)، ومسلم في المساقاة (1583) من طريق يونس (هو ابن يزيد الأيلي)، عن ابن شهاب، سمعت سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة فذكره.

أي لا يذاب شحم الميتة، ولا يباع.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আল্লাহ ইয়াহুদিদের ধ্বংস করুন। তাদের উপর চর্বি হারাম করা হয়েছিল, কিন্তু তারা তা বিক্রি করে দিল এবং তার মূল্য ভক্ষণ করল।"









আল-জামি` আল-কামিল (5650)


5650 - عن أبي هريرة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"إنّ اللَّه حرم الخمر وثمنها، وحرم الميتة وثمنها، وحرم الخنزير وثمنه".

حسن: رواه أبو داود (3485) عن أحمد بن صالح، حدثنا عبد اللَّه بن وهب، حدثنا معاوية بن صالح، عن عبد الوهاب بن بخت، عن أبي الزناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة فذكره. ورواه البيهقي (6/ 12) من طريق أبي داود.

وإسناده حسن من أجل الكلام في معاوية بن صالح، وهو ابن حدير الحضرمي، غير أنه حسن الحديث.

وأما شيخه عبد الوهاب بن بخت فتكلم فيه ابن حبان بكلام شديد، فقال:"كان صدوقًا في الرواية إِلَّا أنه كان يخطئ كثيرًا، ويهم شديدًا، حتى كثر في روايته الأشياء المقلوبة، فبطل الاحتجاج به".

وكان يحيى بن معين حسن الرأي فيه، ووثّقه أبو زرعة، والنسائي، وقال أبو حاتم: لا بأس به". فأين لابن حبان يقول فيه ما قال.

ثم حديثه هذا له شواهد كثيرة، فالصحيح أنه أصاب فيه، ولم يخطئ.




আবূ হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয় আল্লাহ মদ ও তার মূল্যকে হারাম করেছেন, মৃতদেহ (মৃত প্রাণী) ও তার মূল্যকে হারাম করেছেন এবং শূকর ও তার মূল্যকে হারাম করেছেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (5651)


5651 - عن عون بن أبي جحيفة قال: رأيت أبي اشتري حجاما، فأمر بمحاجمه، فكسرت، فسألته عن ذلك، فقال: إن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى عن ثمن الدم، وثمن الكلب، وكسب الأمة. ولعن الواشمة والمستوشمة، وآكل الربا وموكله، ولعن المصور.

صحيح: رواه البخاري في البيوع (2238) عن حجاج بن منهال، حدثنا شعبة قال: أخبرني عون أبي جحيفة فذكره.




আবী জুহাইফা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর পুত্র আওন বলেন, আমি আমার পিতাকে দেখলাম, তিনি একজন রক্তমোচনকারীকে (হাজ্জাম) ক্রয় করলেন। এরপর তিনি তার রক্তমোচনের সরঞ্জামাদি ভেঙে ফেলার আদেশ দিলেন এবং তা ভেঙে ফেলা হলো। আমি তাকে এ বিষয়ে জিজ্ঞেস করলে তিনি বললেন: নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) রক্তের মূল্য, কুকুরের মূল্য এবং দাসীর উপার্জন (ব্যভিচারের মাধ্যমে অর্জিত অর্থ) নিষেধ করেছেন। আর তিনি অভিশাপ দিয়েছেন যে উল্কি করে ও যে উল্কি করায়, সুদখোর ও সুদের দাতাকে এবং তিনি অভিশাপ দিয়েছেন চিত্রকরকে।









আল-জামি` আল-কামিল (5652)


5652 - عن عائشة قالت: لما نزلت الآيات من آخر سورة البقرة في الربا قالت: خرج رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم إلى المسجد فحرم التجارة في الخمر.

متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2226)، ومسلم في المساقاة (1580) من طريق الأعمش، عن أبي الضحي مسلم (هو ابن صَبيح)، عن مسروق، عن عائشة فذكرته. واللفظ لمسلم.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, যখন সূরা বাকারার শেষাংশের সুদ (রিবা) সম্পর্কিত আয়াতগুলো নাযিল হলো, তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মসজিদের দিকে গেলেন এবং মদ (খামর)-এর ব্যবসা হারাম ঘোষণা করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5653)


5653 - عن أبي سعيد الخدري قال: سمعتُ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يخطب بالمدينة قال:"يا
أيها الناس، إن اللَّه تعالى يُعَرِّض بالخمر، ولعل اللَّه سينزل فيها أمرا، فمن كان عنده منها شيء فليبعه، ولينتفع به". قال: فما لبثنا إِلَّا يسيرا حتى قال النبي صلى الله عليه وسلم:"إن اللَّه تعالى حرم الخمر، فمن أدركته هذه الآية، وعنده منها شيء فلا يشرب ولا يبع". قال: فاستقبل الناس بما كان عندهم منها في طريق المدينة، فسفكوها.

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1578) عن عبيد اللَّه بن عمر القواريري، حدثنا عبد الأعلى بن عبد الأعلى أبو همام، حدثنا سعيد الجريري، عن أبي نضرة، عن أبي سعيد الخدري قال فذكره.

قوله:"يعرض بالخمر" أي بحرمتها، والتعريض هو خلاف التصريح من القول، وهو قوله تعالى: {يَسْأَلُونَكَ عَنِ الْخَمْرِ وَالْمَيْسِرِ قُلْ فِيهِمَا إِثْمٌ كَبِيرٌ وَمَنَافِعُ لِلنَّاسِ وَإِثْمُهُمَا أَكْبَرُ مِنْ نَفْعِهِمَا} [سورة البقرة: 219].

وقوله:"فمن أدركته هذه الآية" هي قوله تعالى: {يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِنَّمَا الْخَمْرُ وَالْمَيْسِرُ وَالْأَنْصَابُ وَالْأَزْلَامُ رِجْسٌ مِنْ عَمَلِ الشَّيْطَانِ فَاجْتَنِبُوهُ لَعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ} [سورة المائدة: 90].




আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে মদীনায় খুতবা দিতে শুনেছি। তিনি বললেন: "হে মানবজাতি, নিশ্চয় আল্লাহ তাআলা মদ সম্পর্কে ইঙ্গিত দিয়েছেন এবং সম্ভবত আল্লাহ এ বিষয়ে কোনো নির্দেশ নাযিল করবেন। সুতরাং যার কাছে এর কিছু আছে, সে যেন তা বিক্রি করে দেয় এবং তা দ্বারা উপকৃত হয়।" বর্ণনাকারী বলেন: আমরা অল্পকালই দেরি করলাম, এরপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "নিশ্চয়ই আল্লাহ তাআলা মদকে হারাম করেছেন। অতএব, যার কাছে এই আয়াত পৌঁছবে এবং তার কাছে মদের কিছু থাকবে, সে যেন তা পান না করে এবং বিক্রিও না করে।" বর্ণনাকারী বলেন: তখন লোকেরা মদীনার রাস্তায় তাদের কাছে যা মদ ছিল, তা নিয়ে এলো এবং তা ঢেলে দিলো।









আল-জামি` আল-কামিল (5654)


5654 - عن عبد الرحمن بن غنم أن الداري كان يُهدي لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم كل عام راوية خمر، فلما كان عام حرمت جاء براوية، فلما نظر إليه نبي اللَّه صلى الله عليه وسلم ضحك، قال:"هل شعرت أنها قد حرمت بعدك؟". قال: يا رسول اللَّه، أفلا أبيعها فأنتفع بثمنها؟ فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لعن اللَّه اليهود، انطلقوا إلى ما حرم عليهم من شحوم البقر والغنم، فأذابوه، فجعلوه ثمنا له، فباعوا به ما يأكلون، وإن الخمر حرام، وثمنها حرام، وإن الخمر حرام، وثمنها حرام، وإن الخمر حرام، وثمنها حرام".

حسن: رواه أحمد (17995) عن روح، حدثنا عبد الحميد بن بهرام قال: سمعت شهر بن حوشب قال: حدثني عبد الرحمن بن غَنْم فذكره.

وإسناده حسن من أجل الكلام في شهر بن حوشب، فقال الإمام أحمد:"ما أحسن حديثه". ووثّقه، وقال أيضًا:"ليس به بأس". وقال البخاري:"حسن الحديث"، وقوى أمره. وقال ابن معين:"ثقة". وقال أيضًا:"ثبت".

وضعفه شعبة وغيره، لكن قال ابن القطان:"لم أسمع لمن ضَعَّفَه حجة".

فمثله يحسن حديثه إذا لم يكن في حديثه ما ينكر عليه. ورواه عنه عبد الحميد بن بهرام، فإنه كان من أثبت أصحابه.

وحديثه هذا يشهد له ما سبق إِلَّا أن قوله:"أن الداري كان يهدي لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم كل عام راوية خمر" إنْ هو صديق رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، كما في الحديث السابق، مع أنه ليس بثقفي ولا دوسي، كان نصرانيا، فجاء إلى المدينة، فأسلم، وذكر النبي صلى الله عليه وسلم قصة الجساسة والدجال، وكل هذا يحتاج
إلى التأمل.

قال الهيثمي في"المجمع" (4/ 88):"رواه أحمد هكذا عن ابن غنم أن الداري. . . .، وفيه شهر، وحديثه حسن، وفيه كلام، ورواه الطبراني في الكبير عن عبد الرحمن بن غنم، عن تميم الداري أنه كان يهدي، فذكر نحوه باختصار، إِلَّا أنه قال:"حرام شراؤها وثمنها". وإسناده متصل حسن". انتهى.

وهذا الحديث له أسانيد أخرى غير أن الذي ذكرته هو أصحها.




তমীম আদ-দারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (দারী) প্রতি বছর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এক মশক মদ হাদিয়া দিতেন। যখন (মদ) হারাম হওয়ার বছর এলো, তখন তিনি এক মশক নিয়ে এলেন। আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেটির দিকে তাকালেন এবং হাসলেন। তিনি বললেন: "তুমি কি জানতে পেরেছ যে, তোমার (আগমন) পর এটি হারাম করে দেওয়া হয়েছে?" তিনি বললেন: "ইয়া রাসূলাল্লাহ, আমি কি এটি বিক্রি করে এর মূল্য দ্বারা উপকৃত হতে পারি না?" তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "আল্লাহ তাআলা ইয়াহুদিদের উপর লা'নত (অভিশাপ) বর্ষণ করুন। তাদের উপর গরুর ও বকরির চর্বি হারাম করা হয়েছিল, তারা সেদিকে গেল, তারপর তা গলিয়ে তার মূল্য তৈরি করল এবং তার দ্বারা তারা এমন জিনিস বিক্রি করল যা তারা খাবে। নিশ্চয় মদ হারাম, আর এর মূল্যও হারাম। নিশ্চয় মদ হারাম, আর এর মূল্যও হারাম। নিশ্চয় মদ হারাম, আর এর মূল্যও হারাম।"









আল-জামি` আল-কামিল (5655)


5655 - عن عامر بن ربيعة أن رجلًا من ثقيف يكنى أبا تمام أهدى إلى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم راوية خمر، فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إنها قد حرمت يا أبا تمام". فقال له: يا رسول اللَّه، فأستنفق ثمنها؟ فقال النبي صلى الله عليه وسلم:"إن الذي حرم شربها حرم ثمنها".

صحيح: رواه الطبراني في الأوسط (439) عن أحمد بن خليد، قال: حدثنا عبد اللَّه بن جعفر الرقي، قال: حدثنا عبيد اللَّه بن عمرو، عن زيد بن أبي أنيسة، عن أبي بكر بن حفص، عن عبد اللَّه ابن عامر بن ربيعة، عن أبيه، فذكره. وإسناده صحيح.

قال الهيثمي في"المجمع" (4/ 92):"رجاله رجال الصحيح".

تنبيه: وقع في نسخة الطبراني"عن ربيعة بن عامر، عن أبيه"، والصواب كما ذكرته: عن عبد اللَّه بن عامر بن ربيعة، عن أبيه، وكذلك في مجمع البحرين (1978) وكذلك في نسخة الطبراني الطارق عوض اللَّه (436)؛ أي: أن الحديث من مسند عامر بن ربيعة، وليس من مسند ربيعة.




আমির ইবনু রাবী'আ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, সাকীফ গোত্রের আবূ তাম্মাম কুনিয়াতধারী (উপনামধারী) এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এক মশক মদ হাদিয়া দিল। রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "হে আবূ তাম্মাম, নিশ্চয়ই এটি হারাম করা হয়েছে।" তখন সে তাঁকে বলল: "ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমি কি এর মূল্য খরচ করে ফেলব?" তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "নিশ্চয় যিনি এটি পান করা হারাম করেছেন, তিনি এর মূল্যও হারাম করেছেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (5656)


5656 - عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده قال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم عام الفتح وهو بمكة يقول:"إن اللَّه ورسوله حرم بيع الخمر والميتة والخنزير". فقيل: يا رسول اللَّه، أرأيت شحوم الميتة فإنه يدهن بها السفن، ويدهن بها الجلود، ويستصبح بها الناس؟ فقال:"لا، هي حرام". ثم قال:"قاتل اللَّه اليهود، إن اللَّه لما حرم عليهم الشحوم جملوها، ثم باعوها، وأكلوا ثمنها".

حسن: رواه أحمد (6997)، والبيهقي (9/ 355) كلاهما من حديث أسامة بن زيد، عن عمرو بن شعيب بإسناده مثله.

وإسناده حسن من أجل عمرو بن شعيب؛ فإنه حسن الحديث. وأيضًا فيه أسامة بن زيد، وهو مختلف فيه غير أنه حسن الحديث.




আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে মক্কা বিজয়ের বছর মক্কায় অবস্থানকালে বলতে শুনেছি: “নিশ্চয় আল্লাহ ও তাঁর রাসূল মদ, মৃতদেহ (মৃত জন্তু) ও শূকরের (মাংস) বিক্রয় হারাম করেছেন।” তখন বলা হলো: হে আল্লাহর রাসূল! মৃত জন্তুর চর্বি সম্পর্কে আপনার অভিমত কী? কেননা তা দিয়ে নৌকায় প্রলেপ দেওয়া হয়, চামড়ায় মালিশ করা হয় এবং লোকেরা প্রদীপ জ্বালানোর কাজে ব্যবহার করে? তিনি বললেন: “না, তা হারাম।” অতঃপর তিনি বললেন: “আল্লাহ ইয়াহুদিদের ধ্বংস করুন! আল্লাহ যখন তাদের জন্য চর্বি হারাম করলেন, তখন তারা তা গলিয়ে ফেলল, অতঃপর তা বিক্রি করল এবং তার মূল্য ভোগ করল।”









আল-জামি` আল-কামিল (5657)


5657 - عن وعن عبد الواحد البناني قال: كنت مع ابن عمر، فجاءه رجل، فقال: يا أبا عبد الرحمن، إني أشتري هذه الحيطان تكون فيها الأعناب، فلا نستطيع أن نبيعها كلها عنبا حتى نعصره. قال: فعن ثمن الخمر تسألني؟ سأحدثك حديثًا سمعته من
رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، كنا جلوسًا مع النبي صلى الله عليه وسلم إذ رفع رأسه إلى السماء، ثم أكبَّ، وَنَكَتَ في الأرض، وقال:"الويل لبني إسرائيل". فقال له عمر: يا نبي اللَّه، لقد أفزعنا قولك لبني إسرائيل، فقال:"ليس عليكم من ذلك بأس، إنهم لما حرمت عليهم الشحوم، فتواطؤوه، فيبيعونه، فيأكلون ثمنه، وكذلك ثمن الخمر عليكم حرام".

حسن: رواه أحمد (5982) عن عبد الصمد، حدثني أبي، ثنا عبد العزيز بن صهيب، عن عبد الواحد البناني قال فذكره.

وإسناده حسن من أجل عبد الواحد البناني، روى عنه عدد، وذكره ابن حبان في ثقات التابعين، وهو من رجال"التعجيل".

قال البوصيري في"إتحاف الخبرة":"رجاله ثقات".




আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, [আব্দুল ওয়াহিদ আল-বুনানি বলেন:] আমি ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সঙ্গে ছিলাম। তখন এক ব্যক্তি এসে বলল, হে আবূ আব্দুর রহমান! আমি এমন প্রাচীরবেষ্টিত বাগান কিনি যেখানে আঙ্গুর থাকে, কিন্তু আমরা তা সম্পূর্ণ আঙ্গুর হিসাবে বিক্রি করতে পারি না যতক্ষণ না আমরা তা থেকে রস বের করি। তিনি (ইবনে উমর) বললেন, তবে কি তুমি আমার কাছে মদের মূল্য সম্পর্কে জানতে চাইছো? আমি তোমাকে একটি হাদীস বলবো যা আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট শুনেছি। আমরা নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সঙ্গে বসা ছিলাম। হঠাৎ তিনি আকাশের দিকে মাথা উঠালেন, অতঃপর মাথা নত করলেন এবং মাটিতে কিছু একটা আঁকলেন (বা খুঁড়লেন), আর বললেন: "বনী ইসরাঈলের জন্য ধ্বংস (বা দুর্ভোগ)!" তখন উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁকে বললেন, হে আল্লাহর নবী! বনী ইসরাঈল সম্পর্কে আপনার এই কথা আমাদের আতঙ্কিত করে দিয়েছে। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তোমাদের জন্য এতে কোনো সমস্যা নেই। নিশ্চয় তাদের উপর যখন চর্বি হারাম করা হয়েছিল, তখন তারা একে অপরের সঙ্গে পরামর্শ করে (কৌশলে) তা বিক্রি করে দিত এবং এর মূল্য ভোগ করত। অনুরূপভাবে, মদের মূল্যও তোমাদের উপর হারাম।"









আল-জামি` আল-কামিল (5658)


5658 - عن ابن عمر قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لعنت الخمر على عشرة أوجه: بعينها، وعاصرها، ومعتصرها، وبائعها، ومبتاعها، وحاملها، والمحمولة إليه، وآكل ثمنها، وشاربها، وساقيها".

حسن: رواه أبو داود (3674)، وابن ماجه (3380)، وأحمد (4787)، وابن أبي شيبة (6/ 447)، والبيهقي (5/ 327) كلهم من طريق عبد العزيز بن عمر بن عبد العزيز، عن عبد الرحمن بن عبد اللَّه الغافقي وأبي طعمة مولاهم أنهما سمعا ابن عمر يقول فذكر الحديث.

وإسناده حسن من أجل أبي طعمة، واسمه هلال، وقد تُكلم فيه غير أنه حسن الحديث، ثم أنه توبع في الإسناد نفسه، تابعه عبد الرحمن بن عبد اللَّه الغافقي، وهو أمير الأندلس، استشهد فيها سنة 115 هـ. وللحافظ كلام جيد في الدفاع عنه، فراجعه.

وصحّحه ابن السكن، كما في"التلخيص" (4/ 136)، وللحديث إسناد آخر، وهو الآتي.




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "দশটি কারণে মদ অভিশপ্ত: স্বয়ং মদ, যে তা নিংড়ায়, যার জন্য তা নিংড়ানো হয়, যে তা বিক্রি করে, যে তা ক্রয় করে, যে তা বহন করে, যার কাছে তা বহন করে নিয়ে যাওয়া হয়, যে এর মূল্য ভক্ষণ করে, যে তা পান করে এবং যে তা পান করায়।"









আল-জামি` আল-কামিল (5659)


5659 - عن عبد الرحمن بن شريح الخولاني: أنه كان له عم يبيع الخمر، وكان يتصدق بثمنه، فنهيته عنها، فلم ينتهِ، فقدمت المدينة، فلقيت ابن عباس، فسألته عن الخمر وثمنها، فقال: هي حرام، وثمنها حرام. ثم قال: يا معشر أمة محمد صلى الله عليه وسلم، إنه لو كان كتاب بعد كتابكم، أو نبي بعد نبيكم لأنزل فيكم، كما أنزل فيمن كان قبلكم، ولكن أخر ذلك من أمركم إلى يوم القيامة، ولعمري لهو أشد عليكم.

قال: ثم لقيت عبد اللَّه بن عمر، فسألته عن ثمن الخمر، فقال: سأخبرك عن الخمر: أني كنت عند رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في المسجد، فبينما هو محتب حل حبوته، ثم قال:"من كان عنده من الخمر شيء فليؤذني به". فجعل الناس يأتونه، فيقول
أحدهم: عندي راوية خمر، ويقول الآخر: عندي راوية، ويقول الآخر عندي زق، أو ما شاء اللَّه أن يكون عنده، فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"اجمعوه ببقيع كذا وكذا ثم آذنوني"، ففعلوا، ثم آذنوه. قال: فقمت، فمشيت -وهو متكئ علي-، فلحقنا أبو بكر رضي الله عنه، فأخذني رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، فجعلني عن يساره، وجعل أبا بكر مكاني، ثم لحقنا عمر، فأخذني، وجعلني عن يساره، فمشى بينهما حتى إذا وقف على الخمر قال للناس:"أتعرفون هذه؟" قالوا: نعم يا رسول اللَّه، هذه الخمر. قال:"صدقتم". ثم قال:"إنّ اللَّه تعالى لعن الخمر، وعاصرها، ومعتصرها، وشاربها، وساقيها، وحاملها، والمحمولة إليه، وبائعها، ومشتريها، وآكل ثمنها". ثم دعا بسكين، فقال:"اشحذوها". ففعلوا، ثم أخذها رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يخرق بها الزقاق. فقال الناس: إن في هذه الزقاق لمنفعة، فقال:"أجل، ولكن إنما أفعل غضبا للَّه لما فيها من سخطه". فقال عمر: أنا أكفيك يا رسول اللَّه. قال:"لا". وبعضهم يزيد على بعض في الحديث.

صحيح: رواه الحاكم (4/ 144 - 145) عن أبي العباس محمد بن يعقوب، أبا محمد بن عبد اللَّه ابن عبد الحكم، أنبأ ابن وهب، أخبرني عبد الرحمن بن شريح الخولاني فذكره. وإسناده صحيح.

قال الحاكم:"هذا حديث صحيح الإسناد".

وفي الباب أيضًا عن ابن مسعود، ذكره ابن أبي حاتم في العلل (2/ 27)، وفي معناه أحاديث أخرى، انظر كتاب الأشربة.




আব্দুর রহমান ইবনু শুরাইহ আল-খাওলানি থেকে বর্ণিত, তাঁর এক চাচা ছিলেন যিনি মদ বিক্রি করতেন এবং সেই দাম থেকে দান করতেন। আমি তাকে মদ বিক্রি করতে নিষেধ করেছিলাম, কিন্তু তিনি বিরত হননি। এরপর আমি মদিনায় এসে ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সাথে সাক্ষাৎ করলাম এবং তাকে মদ ও এর দাম সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বললেন: মদ হারাম, আর এর দামও হারাম।

অতঃপর তিনি (ইবনু আব্বাস) বললেন: হে মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর উম্মতের দল! যদি তোমাদের কিতাবের পর অন্য কোনো কিতাব থাকত, অথবা তোমাদের নবীর পর অন্য কোনো নবী আসত, তবে তোমাদের ব্যাপারেও এমন বিধান নাযিল হতো যেমন তোমাদের পূর্ববর্তীদের ব্যাপারে নাযিল হয়েছিল। কিন্তু তোমাদের এই বিষয়টি কিয়ামত দিবস পর্যন্ত বিলম্বিত করা হয়েছে। আমার জীবনের কসম! এটি তোমাদের জন্য আরও কঠোর।

তিনি (আব্দুর রহমান) বলেন: এরপর আমি আব্দুল্লাহ ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সাথে সাক্ষাৎ করলাম এবং তাকে মদের দাম সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বললেন: আমি তোমাকে মদ সম্পর্কে জানাব। আমি মসজিদে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট উপস্থিত ছিলাম। তিনি তখন 'ইহতিবা' (কাপড় দিয়ে হাঁটু মুড়ে বসা) ভঙ্গ করে বললেন: "যার কাছে মদ রয়েছে, সে যেন আমাকে তা জানায়।" এরপর লোকেরা তাঁর কাছে আসতে লাগল। তাদের মধ্যে একজন বলল: আমার কাছে এক 'রাবিয়া' (চামড়ার থলি বোঝাই মদ) মদ আছে। অন্যজন বলল: আমার কাছেও রাবিয়া আছে। আরেকজন বলল: আমার কাছে মশকে (ছোট চামড়ার থলে) আছে, কিংবা আল্লাহ যা ইচ্ছা করেছেন তত পরিমাণ মদ আছে। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তা অমুক অমুক বাকী' (স্থান)-এ একত্রিত করো, এরপর আমাকে জানাও।" তারা তাই করল এবং তাঁকে জানাল।

তিনি (ইবনু উমার) বলেন: তখন আমি উঠলাম এবং হাঁটতে লাগলাম—আর তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার ওপর ভর দিয়েছিলেন। এরপর আবূ বাকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাদের সাথে মিলিত হলেন। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে ধরলেন এবং আমাকে তাঁর বাম পাশে রাখলেন, আর আবূ বাকর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে আমার স্থানে রাখলেন। এরপর উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাদের সাথে মিলিত হলেন। তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে ধরলেন এবং আমাকে তাঁর বাম পাশে রাখলেন। এরপর তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উভয়ের মাঝে হেঁটে চললেন। যখন তিনি মদের স্তূপের কাছে থামলেন, তখন তিনি লোকদের বললেন: "তোমরা কি এটা চেন?" তারা বলল: হ্যাঁ, ইয়া রাসূলাল্লাহ! এটি মদ। তিনি বললেন: "তোমরা সত্য বলেছ।"

এরপর তিনি বললেন: "নিশ্চয়ই আল্লাহ তাআলা মদ, মদ প্রস্তুতকারী (আসিরাহা), মদ পেষণকারী (মু'তাসিরাহা), মদ্যপায়ী, পরিবেশনকারী (সাক্বীয়া), বহনকারী, যার কাছে বহন করা হয়, বিক্রেতা (বাই'ইহা), ক্রেতা (মুশতারীহা) এবং তার মূল্য ভোগকারী—সবাইকে লানত করেছেন।" এরপর তিনি একটি ছুরি চাইলেন এবং বললেন: "তা ধারালো করো।" তারা তাই করল। এরপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তা হাতে নিলেন এবং মশকগুলো তা দিয়ে ছিদ্র করতে লাগলেন। তখন লোকেরা বলল: এই মশকগুলোতে তো উপকারিতা রয়েছে! তিনি বললেন: "ঠিক বলেছ, কিন্তু আমি আল্লাহর সন্তুষ্টির জন্য এমন করছি; কারণ এর মধ্যে আল্লাহর অসন্তুষ্টি নিহিত রয়েছে।" উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমি আপনাকে যথেষ্ট করে দেব (আমি কাজটি শেষ করে দিচ্ছি)। তিনি বললেন: "না।" আর এই হাদীসে বর্ণনাকারীদের মধ্যে কেউ কেউ অন্যের চেয়ে কিছু অংশ যোগ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5660)


5660 - عن أنس بن مالك قال: لعن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في الخمر عشرة: عاصرها، ومعتصرها، وشاربها، وحاملها، والمحمولة إليه، وساقيها وبائعها، وآكل ثمنها، والمشتري لها، والمشتراة له.

حسن: رواه الترمذي (1295)، وابن ماجه (3381) كلاهما من حديث أبي عاصم، عن شبيب ابن بشر، عن أنس بن مالك فذكره.

وقال الترمذي:"هذا حديث غريب".

قلت: إسناده حسن من أجل شبيب بن بشر البجلي الكوفي، مختلف فيه، وثّقه ابن معين، وذكره ابن حبان في الثقات، وقال الحافظ في التلخيص:"رواته ثقات".

قلت: لا يضر كلام أبي حاتم فيه أنه"لين الحديث" لما له أصول صحيحة، فهو قد حفظه وضبطه.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মদের (কারণে) দশজনের প্রতি অভিশাপ দিয়েছেন: যে এর নির্যাস বের করে, যে নির্যাস বের করায়, যে তা পান করে, যে তা বহন করে, যার কাছে তা বহন করে নিয়ে যাওয়া হয়, যে তা পরিবেশন করে, যে তা বিক্রি করে, যে এর মূল্য ভোগ করে, যে তা ক্রয় করে এবং যার জন্য তা ক্রয় করা হয়।