হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (5661)


5661 - عن أنس قال: لما حرمت الخمر قال: إني يومئذ لأسقيهم، لأسقي أحد عشر رجلًا، فأمروني، فكفأتها وكفأ الناس آنيتهم بما فيها حتى كادت السكك أن تمتنع من ريحها.

قال أنس: وما خمرهم يومئذ إِلَّا البسر والتمر مخلوطين.

قال: فجاء رجل إلى النبي صلى الله عليه وسلم، فقال: إنه كان عندي مال يتيم فاشتريت به خمرا، أفتأذن لي أن أبيعه، فأرد على اليتيم ماله، فقال النبي صلى الله عليه وسلم:"قاتل اللَّه اليهود، حرمت عليهم الثروب، فباعوها، وأكلوا أثمانها". ولم يأذن لهم النبي صلى الله عليه وسلم في بيع الخمر.

صحيح: رواه أحمد (13275) عن عبد الرزاق -وهو في مصنفه (16970) - قال: أخبرنا معمر، عن ثابت وقتادة، عن أنس فذكره. ومن هذا الطريق رواه أيضًا ابن حبان (4945)، وإسناده صحيح. و"الثروب" جمع ثرب، وهو شحم رقيق.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন মদ (খামর) হারাম করা হলো, তখন তিনি বললেন: সেই দিন আমি তাদের পান করাচ্ছিলাম—আমি এগারো জন লোককে পান করাচ্ছিলাম। তখন তারা আমাকে নির্দেশ দিল, ফলে আমি (পাত্র উল্টিয়ে) ফেলে দিলাম। লোকেরাও তাদের পাত্রে যা ছিল, সব উল্টিয়ে ফেলে দিল, এমনকি (মদের) গন্ধে রাস্তাগুলো প্রায় রুদ্ধ হয়ে যাওয়ার উপক্রম হয়েছিল।

আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: সেই দিন তাদের মদ ছিল শুধু কাঁচা ও পাকা খেজুর মিশ্রিত।

তিনি বলেন: এরপর একজন লোক নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে বললো: আমার কাছে এক ইয়াতীমের মাল ছিল, তা দিয়ে আমি মদ কিনেছিলাম। আপনি কি আমাকে তা বিক্রি করার অনুমতি দেবেন, যাতে আমি ইয়াতীমের মাল তাকে ফিরিয়ে দিতে পারি? তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “আল্লাহ ইয়াহুদিদেরকে ধ্বংস করুন! তাদের জন্য চর্বি (থুরুব) হারাম করা হয়েছিল, কিন্তু তারা তা বিক্রি করে সেগুলোর মূল্য ভোগ করেছে।” নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে মদ বিক্রি করার অনুমতি দেননি।









আল-জামি` আল-কামিল (5662)


5662 - عن أنس بن مالك أن أبا طلحة سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن أيتام ورثوا خمرا، فقال:"أهريقوه". قال: أفلا نجعلها خلا؟ قال:"لا".

حسن: رواه أبو داود (3675)، والترمذي (1293) معلقًا، وأحمد (12189)، والطحاوي في مشكله (3337)، والبيهقي (6/ 37) كلهم من حديث سفيان الثوري، عن السدي، عن أبي هبيرة، عن أنس بن مالك فذكره.

ورواه الترمذي أيضًا من وجه آخر عن ليث، عن يحيى بن عباد، عن أنس، عن أبي طلحة أنه قال: يا نبي اللَّه، إني اشتريت خمرا لأيتام في حجري. قال:"أهرق الخمر، واكسر الدنان".

قال الترمذي:"وحديث الثوري أصح من حديث الليث".

قال أبو داود:"أبو هبيرة هو يحيى بن عباد الأنصاري".

وإسناده حسن من أجل السدي، وهو إسماعيل بن عبد الرحمن، حسن الحديث.

وفي صحيح مسلم (1983)، والترمذي (1294) عن سفيان بإسناده: سئل النبي صلى الله عليه وسلم عن الخمر تتخذ خلا؟ فقال:"لا".




আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবূ তালহা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে সেই সকল ইয়াতীম সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলেন যারা মদ্য (খামর) উত্তরাধিকারসূত্রে পেয়েছিল। তখন তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তোমরা তা ঢেলে দাও।" তিনি (আবূ তালহা) বললেন: আমরা কি এটিকে সিরকায় (ভিনেগার) রূপান্তরিত করব না? তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "না।"









আল-জামি` আল-কামিল (5663)


5663 - عن أسامة بن زيد قال: دخلنا على رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نعوده، وهو مريض، فوجدناه نائما، قد غطى وجهه ببرد عدني، فكشف عن وجهه، ثم قال:"لعن اللَّه اليهود، يحرمون شحوم الغنم، ويأكلون أثمانها".

صحيح: رواه الحارث بن أبي أسامة -بغية الباحث (433) -، وأبو نعيم في معرفة الصحابة (2/ 183 - 184)،
والحاكم (4/ 194) كلهم من حديث الأعمش، عن جامع بن شداد، عن كلثوم الخزاعي، عن أسامة فذكره.

قال الحاكم:"صحيح الإسناد، ولم يخرجاه".

قلت: وهو كما قال؛ فإن رجاله ثقات. وكلثوم هو ابن علقمة الخزاعي، مخلف في صحبته، والصواب أنه تابعي، وروايته عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسلة، ولذا ذكره ابن حبان في ثقات التابعين، وقال الحافظ:"ثقة".

وفي الباب ما روي عن أبي سعيد قال: كان عندنا خمر ليتيم، فلما نزلت المائدة سألت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عنه، وقلت: إنه ليتيم. فقال"أهريقوه".

رواه الترمذي (1263)، وأحمد (11205)، والطحاوي في مشكله (3340) كلهم من طريق مجالد، عن أبي الوداك، عن أبي سعيد فذكره.

ومجالد هو ابن سعيد بن عمير الهمداني، ضعيف باتفاق أهل العلم، ولكن قال الترمذي: حديث أبي سعيد حديث حسن صحيح. وقال: وقد روي من غير وجه عن النبي صلى الله عليه وسلم نحو هذا، يعني به الشاهد.

ثم قال الترمذي:"وقال بهذا بعض أهل العلم، وكرهوا أن تتخذ الخمر خلا، وإنما كره من ذلك -واللَّه أعلم- أن يكون المسلم في بيته خمر حتى يصير خلا، ورخص بعضهم في خل الخمر إذا وجد قد صار خلا".

وفي الباب أيضًا ما روي عن عبد اللَّه بن أبي بكر أنه قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم"قاتل اللَّه اليهود، نهوا عن أكل الشحم، فباعوه، فأكلوا ثمنه". رواه مالك في صفة النبي صلى الله عليه وسلم (26) عنه مرسلًا.

وفي الباب ما روي عن المغيرة بن شعبة، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من باع الخمر فليشقص الخنازير". رواه أبو داود (3489)، وأحمد (18214)، والدارمي (2147)، والبيهقي (6/ 12) كلهم من حديث طعمة بن عمرو الجعفري، عن عمر بن بيان التغلبي، عن عروة بن المغيرة الثقفي، عن أبيه فذكر الحديث.

وفيه عمر بن بيان التغلبي الكوفي يقول أحمد: لم أعرفه. ولم يوثّقه غير ابن حبان، ولذا قال الحافظ في التقريب:"مقبول". أي عند المتابعة. ولم أجد له متابعة.

وأما قوله"فليشقص" أي فليستحل أكلها، والتشقيص يكون من وجهين: أحدهما أن يذبحها بالمشقص، وهو نصل عريض. والوجه الآخر أن يجعلها أشقاصا وأعضاء بعد ذبحها كما يفصل أجزاء الشاة بعد الذبح. ومعنى الكلام إنما هو توكيد التحريم والتغليظ فيه، يقول: من استحل بيع الخمر فليستحل أكل الخنزير؛ فإنهما في الحرمة والإثم سواء. أفاده الخطابي.

وفي الباب عن عبد اللَّه بن عمرو مرفوعًا:"أن نبي اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى عن الخمر، والميسرة،
والكوبة، والغبيراء". وقال:"كل مسكر حرام".

رواه أبو داود (3685) عن موسى بن إسماعيل قال: حدثنا حماد، عن محمد بن إسحاق، عن يزيد بن أبي حبيب، عن الوليد بن عبدة، عن عبد اللَّه بن عمرو فذكره.

ورواه أحمد (6591)، والبيهقي (10/ 221 - 222) كلاهما من وجه آخر عن عبد الحميد بن جعفر، حدثنا يزيد بن حبيب بإسناده إِلَّا أنه قال فيه:"عمرو بن الوليد".

قلت: وقد اختلف في اسم الوليد بن عبدة، فقيل هكذا، وقيل: عمرو بن الوليد. ولم يرو عنه غير يزيد بن أبي حبيب، ولم يوثّقه أحد فهو في عداد المجهولين، وقد جهله أيضًا أبو حاتم، وكذا الذهبي في الميزان (4/ 341)، وقال:"روى عن ابن عبدة يزيد بن أبي حبيب، والخبر معلول في الكوبة والغبيراء".

قال أبو داود: قال ابن سلام أبو عبيد:"الغبيراء السكركة تعمل من الذرة، شراب يعمله الحبشة". وفي الموطأ، كتاب الأشربة (10) عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم سئل عن الغبيراء، فقال:"لا خير فيها"، ونهى عنها. إِلَّا أنه مرسل.

قال مالك: فسألت زيد بن أسلم: ما الغبيراء؟ فقال: هي الأسكركة.

وقد روي موقوفًا بإسناد منقطع عن ابن عباس قال:"السحت: الرشوة في الحكم، ومهر البغي، وثمن الكلب، وثمن الفرد، وثمن الخنزير، وثمن الخمر، وثمن الميتة، وثمن الدم، وعسب الفحل، وأجر النائحة، وأجر المغنية، وأجر الكاهن، وأجر الساحر، وأجر القائف، وثمن جلود السباع، وثمن جلود الميتة فإذا دبغت فلا بأس بها، وأجر صور التماثيل، وهدية الشّفاعة، وجعيلة الغزو".

رواه البيهقي (6/ 12 - 13) من طريق إسماعيل بن عياش، عن حبيب بن صالح، عن ابن عباس، وقال: هذا منقطع بين حبيب بن صالح وابن عباس، وهو موقوف.

المحرمات الواردة في أحاديث الباب هي:

الخمر، والخنزير، والميتة، والأصنام، والدم.

ولكل هذه المحرمات تفاصيل في الأكل والشرب، والبيع، والانتفاع، ذكرت ذلك بالتفصيل في"المنة الكبرى" (5/




উসামা ইবনু যায়দ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা অসুস্থ অবস্থায় রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর শুশ্রূষা করার জন্য তাঁর নিকট প্রবেশ করলাম, তখন আমরা তাঁকে নিদ্রিত অবস্থায় পেলাম। তিনি তাঁর মুখমণ্ডল আদনী (ইয়েমেনের আদন শহরের তৈরি) চাদর দ্বারা আবৃত করে রেখেছিলেন। তিনি তাঁর মুখমণ্ডল থেকে তা সরিয়ে দিলেন, অতঃপর বললেন: "আল্লাহ তাআলা ইহুদিদের অভিশাপ দিন! তারা মেষের চর্বি হারাম ঘোষণা করে এবং তার মূল্য ভক্ষণ করে।"









আল-জামি` আল-কামিল (5664)


5664 - عن أبي مسعود الأنصاري أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى عن ثمن الكلب، ومهر البغي، وحلوان الكاهن.

متفق عليه: رواه مالك في البيوع (68) عن ابن شهاب، عن أبي بكر بن عبد الرحمن بن
الحارث بن هشام، عن أبي مسعود الأنصاري فذكره.

ورواه البخاري في البيوع (2237)، ومسلم في المساقاة (1567: 39) كلاهما من طريق مالك به.

وقوله:"حلوان الكاهن" هو ما يأخذه المتكهن على كهانته. وهو محرم، وفعله باطل.




আবূ মাসঊদ আল-আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য, ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক এবং ভবিষ্যদ্বক্তা (কাহিন)-এর মজুরি থেকে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5665)


5665 - عن رافع بن خديج قال: سمعت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"شر الكسب مهر البغي، وثمن الكلب، وكسب الحجام".

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1568) عن محمد بن حاتم، حدثنا يحيى بن سعيد القطان، عن محمد بن يوسف قال: سمعت السائب بن يزيد يحدث عن رافع بن خديج فذكره.

وفي رواية:"ثمن الكلب خبيث، ومهر البغي خبيث، وكسب الحجام خبيث".

وأما ما روي عن رافع بن خديج قال:"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن كسب الأمة حتى يعلم من أين هو؟" فهو ضعيف.

رواه أبو داود (3427)، والحاكم (2/ 42)، والبيهقي (6/ 127) كلهم من حديث ابن أبي فديك، عن عبيد اللَّه -يعني ابن هُرير-، عن أبيه، عن جده رافع بن خديج فذكر الحديث.

وعبد اللَّه هو ابن هُرير بن عبد الرحمن بن رافع بن خديج مستور، وأبو هرير"مجهول".

ولم يحكم عليه الحاكم بالصحة، بل جعله شاهدا لحديث رافع بن رفاعة بن رافع، وجاء فيه:"نهانا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن كسب الأمة إِلَّا ما عملت بيدها". وقال هكذا بأصابعه نحو الخبز والغزل والنفش.

رواه أحمد (18998)، والحاكم، والبيهقي (6/ 126) كلهم من حديث هاشم بن القاسم، ثنا عكرمة بن عمار، ثنا طارق بن عبد الرحمن القرشي قال: جاء رافع بن رفاعة إلى مجلس الأنصار، فقال، فذكر الحديث، وذكر فيه الأشياء الأخرى.

ورافع بن رفاعة بن رافع بن مالك بن العجلان لم تثبت له الصحبة، كما قال ابن عبد البر.

وطارق بن عبد الرحمن القرشي لم يرو عنه سوى عكرمة بن عمار، ولم يوثّقه أحد غير ابن حبان والعجلي، وكلاهما يوثقان المجاهيل، ولذا قال الذهبي في الميزان:"لا يكاد يعرف".

وكذلك لا يصح ما روي عن أبي أمامة، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لا تبيعوا القينات، ولا تشتروهن، ولا تعلموهن، ولا خير في تجارة فيهن، وثمنهن حرام". في مثل هذا أنزلت هذه الآية {وَمِنَ النَّاسِ مَنْ يَشْتَرِي لَهْوَ الْحَدِيثِ لِيُضِلَّ عَنْ سَبِيلِ اللَّهِ} [سورة لقمان: 6].

رواه الترمذي (1282)، وابن ماجه (2168)، وأحمد (22169)، وعنه البيهقي (6/ 14 - 15)، والحميدي (910) كلهم من طريق عبيد اللَّه بن زحر، عن علي بن يزيد، عن القاسم بن عبد الرحمن، عن أبي أمامة فذكره.

وعبيد اللَّه بن زحر وشيخه علي بن يزيد -وهو ابن أبي زياد الألهاني- ضعيفان.
قال الترمذي: سألت محمدًا عن إسناد هذا الحديث، فقال:"عبيد اللَّه بن زحر ثقة، وعلي بن يزيد ذاهب الحديث، والقاسم أبو عبد الرحمن ثقة".

كذا قال البخاري في عبيد اللَّه بن زحر، وجمهور أهل العلم على أنه ضعيف.

تنبيه: وقع سقط في إسناد ابن ماجه بن علي بن يزيد وبين أبي أمامة، سقط فيه القاسم.




রাফে' ইবনে খাদীজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "নিকৃষ্টতম উপার্জন হলো ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক, কুকুরের মূল্য এবং শিঙ্গা লাগানো (কাপিং)-কারীর উপার্জন।"

অন্য এক বর্ণনায় আছে: "কুকুরের মূল্য নিকৃষ্ট, ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক নিকৃষ্ট এবং শিঙ্গা লাগানো (কাপিং)-কারীর উপার্জন নিকৃষ্ট।"









আল-জামি` আল-কামিল (5666)


5666 - عن عبد اللَّه بن عباس قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الكلب وإن جاء يطلب ثمن الكلب فاملأ كفه ترابا.

صحيح: رواه أبو داود (3482) عن الربيع بن نافع أبي توبة، حدثنا عبيد اللَّه -يعني ابن عمرو-، عن عبد الكريم، عن قيس بن حَبْتَر، عن عبد اللَّه بن عباس فذكره.

ورواه الإمام أحمد (2512، 2626)، والبيهقي (6/ 6) كلاهما من حديث عبيد اللَّه بن عمرو بإسناده بلفظ:"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الخمر، ومهر البغي، وثمن الكلب". وقال:"إذا جاء صاحبه يطلب ثمنه فاملأ كفه ترابا".

قال البيهقي:"رواه أبو داود في السنن عن أبي توبة، عن عبيد اللَّه بن عمرو مختصرًا".

ومعنى التراب: الحرمان والخيبة كما قال الخطابي في"المعالم".




আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য গ্রহণ করতে নিষেধ করেছেন। আর যদি কেউ (বিক্রি করা) কুকুরের মূল্য চাইতে আসে, তবে তার হাত ভর্তি করে মাটি দিয়ে দাও।









আল-জামি` আল-কামিল (5667)


5667 - عن أبي هريرة قال: نهى النبي صلى الله عليه وسلم عن كسب الإماء.

صحيح: رواه البخاري في الإجارة (2283) عن مسلم بن إبراهيم، حدثنا شعبة، عن محمد بن جحادة، عن أبي حازم، عن أبي هريرة فذكره. ورواه أيضًا ابن حبان في صحيحه (5159) من حديث شعبة بإسناده وزاد في آخره:"مخافة أن يبغين".

فإن كانت هذه الزيادة محفوظة فالمراد بالكسب هنا الزنا، لا مطلق العمل.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দাসীদের উপার্জন থেকে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5668)


5668 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لا يحل ثمن الكلب، ولا حلوان الكاهن، ولا مهر البغي".

صحيح: رواه أبو داود (3484)، والنسائي (4293)، والبيهقي (6/ 6) كلهم من حديث ابن وهب قال: أنبأنا معروف بن سويد الجذامي أن علي بن رباح اللخمي حدثه، أنه سمع أبا هريرة يقول فذكره.

وصحّحه الحاكم (2/ 33) على شرط مسلم إِلَّا أنه رواه من وجه آخر عن أبي هريرة.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কুকুরের মূল্য, গণকের পারিশ্রমিক এবং ব্যভিচারিণীর উপার্জন হালাল নয়।"









আল-জামি` আল-কামিল (5669)


5669 - عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه نهى عن ثمن الكلب، ومهر البغي، وعسب الفحل.

صحيح: رواه أحمد (10489، 10490)، وابن حبان (4941) كلاهما من طرق عن عطاء بن أبي رباح، عن أبي هريرة فذكره.

وفي رواية زيادة"ثمن السنور". وفي رواية أخرى زيادة"كسب الحجام".
وإسناده صحيح، وبعض الرواة عن عطاء فيهم كلام إِلَّا أنه يجبره الآخرون.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য, ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক এবং পুরুষ পশুর প্রজনন ভাড়াকে (গ্রহণ করতে) নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5670)


5670 - عن وعن أبي هريرة قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الكلب، وعسب الفحل.

صحيح: رواه ابن ماجه (2160)، والنسائي (4675) كلاهما من حديث محمد بن فضيل، حدثنا الأعمش، عن أبي حازم، عن أبي هريرة فذكره.

وقد سقط ذكر أبي هريرة في نسخة النسائي، ونبه عليه المزي في التحفة.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য এবং (পশুদের) পাঁঠার (বা পুরুষ পশুর প্রজনন সেবার জন্য নেওয়া) পারিশ্রমিক নিতে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5671)


5671 - عن أبي هريرة أن النبي صلى الله عليه وسلم نهى عن ثمن الكلب، وكسب الزمَّارة.

صحيح: رواه البغوي في شرح السنة (2038)، والبيهقي (6/ 126) كلاهما من حديث هشام ابن حسان، عن ابن سيرين، عن أبي هريرة فذكره.

وقوله:"نهى عن كسب الزمارة" هو مهر البغي، وهي المرأة الزانية، وقيل معناه المغنية بالمزمار.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য এবং 'আল-যাম্মারা'র (অর্থাৎ ব্যভিচারিণীর) উপার্জন থেকে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5672)


5672 - عن أبي هريرة قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن كسب الأمة إِلَّا أن يكون لها عمل حسن، أو كسب يعرف.

حسن: رواه الطحاوي في شرحه (1/ 256)، والبيهقي (8/ 8) كلاهما من حديث ابن وهب، أخبرني مسلم بن خالد، عن العلاء بن عبد الرحمن، عن أبيه، عن أبي هريرة فذكره.

وإسناده حسن من أجل الكلام في مسلم بن خالد، وهو الزنجي، غير أنه حسن الحديث. وقد يشهد له الأحاديث التالية.

ويفهم من هذا الحديث أن المراد بكسب الأمة المنهي عنه هو الاتجار بالفرج فقط، وأما إن كانت تشتغل بالعمل المباح مثل الغزل والخياطة وغيرها فلا حرج في كسبها.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ক্রীতদাসীর উপার্জন নিষিদ্ধ করেছেন, তবে যদি তার কোনো ভালো কাজ বা পরিচিত উপার্জন থাকে (তবে তা বৈধ)।









আল-জামি` আল-কামিল (5673)


5673 - عن عبد اللَّه بن عمرو قال: نهى عن ثمن الكلب، ومهر البغي، وأجر الكاهن، وكسب الحجام.

صحيح: رواه الحاكم (2/ 33)، وعنه البيهقي (6/ 6) من حديث هشيم، ثنا حصين، عن مجاهد، عن عبد اللَّه بن عمرو فذكره.

وقد تكلم في سماع مجاهد عن عبد اللَّه بن عمرو، فأثبته البخاري، ورواه في صحيحه، وكذلك قال علي بن المديني في العلل: إنه سمع عبد اللَّه بن عمرو وعددا من الصحابة الآخرين.

وكسب الحجام ليس بحرام، وإنما يحمل على كراهة التنزيه، لما سيأتي.




আব্দুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য, ব্যভিচারিণীর মোহর, ভবিষ্যদ্বক্তার মজুরি এবং রক্তমোক্ষণকারীর (হাজ্জামের) উপার্জন নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5674)


5674 - عن ابن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"خمس من الدواب ليس على المحرم في قتلهن جناح: الغراب، والحِدأة، والعقرب، والفأرة، والكلب العقور".
متفق عليه: رواه مالك في الحج (88) عن نافع، عن ابن عمر فذكره.

ورواه البخاري في جزاء الصيد (1826)، ومسلم في الحج (1199: 76) كلاهما من طريق مالك، به مثله.




ইবনে উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “পাঁচটি প্রাণী এমন, যা ইহরামকারীর জন্য হত্যা করা দূষণীয় নয়: কাক, চিল, বিচ্ছু, ইঁদুর এবং হিংস্র কুকুর।” (মুত্তাফাকুন আলাইহি)









আল-জামি` আল-কামিল (5675)


5675 - عن عبد اللَّه بن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أمر بقتل الكلاب.

متفق عليه: رواه مالك في الاستئذان (14) عن نافع، عن ابن عمر فذكره.

ورواه البخاري في بدء الخلق (3323)، ومسلم في المساقاة (1570: 43) كلاهما من طريق مالك، به مثله.

ورواه مسلم من وجه آخر عن نافع به قال:"كان رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يأمر بقتل الكلاب، فتنبعث في المدينة وأطرافها، فلا ندع كلبا إِلَّا قتلناه، حتى إنا لنقتل كلب المرية من أهل البادية يتبعها".

والمرية: تصغير المرأة.




আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিয়েছেন।

অন্য এক বর্ণনায় এসেছে, তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিতেন। ফলে মদীনা ও তার আশেপাশে (হত্যার জন্য) তৎপরতা শুরু হতো। আমরা এমন কোনো কুকুর ছাড়তাম না যাকে হত্যা করিনি, এমনকি আমরা রাখাল নারীর (অর্থাৎ রাখালের) কুকুরকেও হত্যা করতাম যা তার পিছনে পিছনে চলত।









আল-জামি` আল-কামিল (5676)


5676 - عن ابن عمر قال: مر رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بقتل الكلاب، فأرسل في أقطار المدينة أن تُقتل.

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1570: 44) عن أبي بكر بن أبي شيبة، حدثنا أبو أسامة، عن عبيد اللَّه، عن نافع، عن ابن عمر فذكره.




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিলেন। অতঃপর তিনি মদীনার চর্তুদিকে (বিভিন্ন অঞ্চলে) লোক পাঠালেন এই মর্মে যে, সেগুলোকে যেন হত্যা করা হয়।









আল-জামি` আল-কামিল (5677)


5677 - عن ابن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أمر بقتل الكلاب إِلَّا كلب صيد، أو كلب غنم، أو ماشية.

فقيل لابن عمر: إن أبا هريرة يقول:"أو كلب زرع".

فقال ابن عمر:"إن لأبي هريرة زرعا".

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1571) عن يحيى بن يحيى (هو النيسابوري)، أخبرنا حماد ابن زيد، عن عمرو بن دينار، عن ابن عمر فذكره.




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিয়েছেন, তবে শিকারের কুকুর, অথবা ছাগল বা গবাদি পশুর রক্ষণাবেক্ষণের জন্য রাখা কুকুর ছাড়া।

(একবার) ইবনু উমারকে (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলা হলো: আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, 'অথবা শস্যক্ষেতের কুকুরও (হত্যা থেকে বাদ যাবে)।'
তখন ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, 'নিশ্চয়ই আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর ক্ষেত রয়েছে।'









আল-জামি` আল-কামিল (5678)


5678 - عن جابر قال: أمرنا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بقتل الكلاب، حتى إن المرأة تقدم من البادية بكلبها، فنقتله، ثم نهى النبي صلى الله عليه وسلم عن قتلها، وقال:"عليكم بالأسود البهيم ذي النقطتين؛ فإنه شيطان".

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1572) من طريق روح بن عبادة، حدثنا ابن جريج، أخبرني أبو الزبير، أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يقول فذكره.

قوله:"ذي النقطتين" وفي نسخة الجمع بين الصحيحين (1644) للحميدي بلفظ:"ذي الطفيتين". والطفيتان الخطان على ظهره.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম আমাদেরকে কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিয়েছিলেন। এমনকি কোনো মহিলা তার কুকুর নিয়ে গ্রাম থেকে (শহরে) এলে আমরা তা হত্যা করতাম। এরপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেগুলোকে হত্যা করতে নিষেধ করলেন এবং বললেন: "তোমরা অবশ্যই সম্পূর্ণ কালো, দুটি বিন্দুযুক্ত কুকুরগুলো (হত্যা করা) আবশ্যক মনে করবে; কেননা তা শয়তান।"









আল-জামি` আল-কামিল (5679)


5679 - عن ابن المغفل قال: أمر رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بقتل الكلاب، ثم قال:"ما بالهم،
وبال الكلاب؟". ثم رخص في كلب الصيد والغنم.

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1573) عن عبيد اللَّه بن معاذ، حدثنا أبي، حدثنا شعبة، عن أبي التياح، سمع مطرف بن عبد اللَّه، عن ابن المغفل فذكره.




ইবনে মুগাফ্ফাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুর হত্যা করার নির্দেশ দিয়েছিলেন। এরপর তিনি বললেন: "তাদের (মানুষের) এবং কুকুরদের কী হয়েছে?" অতঃপর তিনি শিকারী কুকুর ও পশুপালের রক্ষক কুকুরের ক্ষেত্রে অনুমতি দেন।









আল-জামি` আল-কামিল (5680)


5680 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"من اتخذ كلبا إلا كلب ماشية، أو صيد، أو زرع، انتقص من أجره كل يوم قيراط".

صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1575: 58) عن عبد بن حميد، حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن الزهري، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة فذكره.

قال الزهري: فذكر لابن عمر قول أبي هريرة، فقال:"يرحم اللَّه أبا هريرة، كان صاحب زرع".

ومعناه أنه اعتنى بهذا الحديث، وحفظه، وإتقانه؛ لأنه صاحب الشأن.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "যে ব্যক্তি পশুপালনের কুকুর, শিকারের কুকুর অথবা শস্যক্ষেত্রের পাহারাদার কুকুর ছাড়া অন্য কোনো কুকুর পালন করে, তার নেকি থেকে প্রতিদিন এক ক্বীরাত পরিমাণ কমিয়ে দেওয়া হয়।"

সহীহ: এটি মুসলিম মাসাক্বাত অধ্যায়ে (১৫৭৫: ৫৮) আব্দুল ইবনু হুমাইদ হতে, তিনি আব্দুর রাজ্জাক হতে, তিনি মা'মার হতে, তিনি যুহরী হতে, তিনি আবূ সালামা হতে, তিনি আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হতে বর্ণনা করেছেন।

যুহরী (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর এই কথাটি ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে উল্লেখ করা হলে তিনি বললেন: "আল্লাহ আবূ হুরায়রাকে রহম করুন, তিনি ছিলেন কৃষিভূমির মালিক (সাহিবু যার')।" এর অর্থ হলো, যেহেতু তিনি এই বিষয়ের সঙ্গে সংশ্লিষ্ট (সাহিবুশ শান) ছিলেন, তাই তিনি এই হাদীসের প্রতি বিশেষ যত্নবান ছিলেন, তা মুখস্থ করেছেন এবং এর বিশুদ্ধতা নিশ্চিত করেছেন।