আল-জামি` আল-কামিল
5681 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"من أمسك كلبا فإنه ينقص كل يوم من عمله قيراط إِلَّا كلب حرث أو ماشية".
قال ابن سيرين وأبو صالح، عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم:"إِلا كلب غنم، أو حرث، أو صيد".
وقال أبو حازم، عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم:"كلب صيد أو ماشية".
متفق عليه: رواه البخاري في الحرث والمزارعة (2322)، ومسلم في المساقاة (1575: 59) كلاهما من حديث هشام الدستوائي، حدثنا يحيى بن أبي كثير، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة فذكره. واللفظ للبخاري.
والمتابعات التي ذكرها البخاري لم يذكرها مسلم إلا أنه ذكر متابعات أخرى.
منها ما رواه عن أبي الطاهر وحرملة قالا: أخبرنا ابن وهب، أخبرني يونس، عن ابن شهاب، عن سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من اقتنى كلبا ليس بكلب صيد، ولا ماشية، ولا أرض، فإنه ينقص من أجره قيراطان كل يوم".
قال مسلم: وليس في حديث أبي الطاهر:"ولا أرض".
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি কুকুর রাখে, তার আমল থেকে প্রতিদিন এক কীরাত পরিমাণ নেকী হ্রাস পেতে থাকে। তবে চাষাবাদের জন্য রাখা কুকুর অথবা গৃহপালিত পশুর পাহারার জন্য রাখা কুকুরের ক্ষেত্রে এই বিধান প্রযোজ্য নয়।"
5682 - عن ابن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من اقتنى كلبا إلا كلبا ضاريا، أو كلب ماشية، نقص من عمله كل يوم قيراطان".
متفق عليه: رواه مالك في الاستئذان (13) عن نافع، عن عبد اللَّه بن عمر فذكره. ورواه البخاري في الذبائح (5482)، ومسلم في المساقاة (1574) كلاهما من طريق مالك به مثله.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি শিকারী কুকুর অথবা পশুপালের পাহারাদার কুকুর ছাড়া অন্য কোনো কুকুর পালন করে, তার আমল থেকে প্রতিদিন দুই ক্বীরাত পরিমাণ নেকি কমে যায়।”
5683 - عن ابن عمر، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من اقتنى كلبا إلا كلب ضار، أو ماشية، نقص من عمله كل يوم قيراطان".
صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1574: 24) عن إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا وكيع، حدثنا حنظلة بن أبي سفيان، عن سالم، عن أبيه فذكره.
ورواه أيضًا من وجه آخر عن ابن أبي حرملة، عن أبيه فذكر الحديث.
وقال فيه: قال عبد اللَّه: وقال أبو هريرة:"أو كلب حرث".
"والكلب الضاري" هو الكلب المعلم للصيد.
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: ‘যে ব্যক্তি শিকারী কুকুর অথবা (পশু) পালের রক্ষণাবেক্ষণের কুকুর ছাড়া অন্য কোনো কুকুর পুষবে, প্রতিদিন তার আমল থেকে দুই কীরাত পরিমাণ নেকী হ্রাস করা হবে।’
5684 - عن وعن ابن عمر يحدث عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"من اتخذ كلبا إلا كلب زرع، أو غنم، أو صيد ينتقص من أجره كل يوم قيراط".
صحيح: رواه مسلم في المستقاة (1574: 56) من طرق عن محمد بن جعفر، حدثنا شعبة، عن قتادة، عن أبي الحكم قال: سمعت ابن عمر يحدث فذكره.
وفيه أنه زاد بعد ذلك:"إلا كلب زرع" بعد ما سمع ذلك من أبي هريرة.
ودليل على صحة حفظ أبي هريرة الأحاديث الآتية:
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি কোনো কুকুর পালন করে—কৃষি কাজের, বা ছাগল-ভেড়া (পাহারা), অথবা শিকারের জন্য ব্যবহৃত কুকুর ছাড়া—তার নেক আমল থেকে প্রতিদিন এক কিরাত পরিমাণ হ্রাস করা হয়।”
5685 - عن سفيان بن أبي زهير -وهو رجل من أزد شنوءة من أصحاب رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم وهو يحدث ناسا معه عند باب المسجد، فقال: سمعت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"من اقتنى كلبا لا يغني عنه زرعا، ولا ضرعا، نقص من عمله كل يوم قيراط".
قال: أنت سمعت هذا من رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم؟ فقال: إي ورب هذا المسجد.
متفق عليه: رواه مالك في الاستئذان (12) عن يزيد بن خصيفة، أن السائب بن يزيد أخبره، أنه سمع سفيان بن أبي زهير فذكره.
ورواه البخاري في المزارعة (2323)، ومسلم في المساقاة (1576) كلاهما من حديث مالك به مثله.
সুফিয়ান ইবনে আবি যুহায়র (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। তিনি (যিনি আযদ শানুআহ গোত্রের এবং রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাহাবীদের একজন) মসজিদের দরজার কাছে কিছু লোকের সাথে কথা বলছিলেন। তখন তিনি বললেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "যে ব্যক্তি এমন কোনো কুকুর লালন-পালন করে যা তার ক্ষেত-খামারের (শস্যের) বা পশুপালের (দুগ্ধজাতীয় গৃহপালিত পশুর) কোনো উপকারে আসে না, তার আমল থেকে প্রতিদিন এক কিরাত পরিমাণ হ্রাস করা হয়।" (উপস্থিত লোকেরা) জিজ্ঞাসা করল: আপনি কি সত্যিই এটি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছ থেকে শুনেছেন? তিনি বললেন: হ্যাঁ, এই মসজিদের রবের কসম! (অর্থাৎ, আল্লাহর কসম!)
5686 - عن عبد اللَّه بن مغفل قال: إني لممن يرفع أغصان الشجرة عن وجه رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم وهو يخطب، فقال:"لولا أن الكلاب أمة من الأمم لأمرت بقتلها، فاقتلوا منها كل أسود بهيم، وما من أهل بيت يرتبطون كلبا إلا نقص من عملهم كل يوم قيراط، إلا كلب صيد أو كلب حرث أو كلب غنم".
صحيح: رواه أبو داود (2845)، والترمذي (1486)، والنسائي (4280)، وابن ماجه (3205)، وصححه ابن حبان (5657) كلهم من حديث يونس بن عبيد، عن الحسن، عن عبد اللَّه
ابن المغفل قال فذكر الحديث، إلا أن البعض اختصره.
وإسناده صحيح، وقد صرح الحسن بأنه سمع هذا الحديث من عبد اللَّه بن المغفل، لما رواه الإمام أحمد (20548) عن وكيع، عن أبي سفيان بن العلاء قال: سمعت الحسن يحدث أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لولا أن الكلاب أمة من الأمم لأمرت بقتلها فاقتلوا منها كل أسود بهيم". قال: فقال له رجل: يا أبا سعيد، ممن سمعت هذا؟ قال: فقال: حدثنيه -وحلف- عبد اللَّه بن مغفل عن النبي صلى الله عليه وسلم منذ كذا وكذا، ولقد حدثنا في ذلك المجلس". انتهى.
ونحوه ذكره أيضًا ابن حبان (5656)، وكذلك عند الإمام أحمد (20564) عن عبد الصمد: سألت الحسن عن الرجل يتخذ الكلب في داره قال: حدثني عبد اللَّه بن مغفل أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من اتخذ كلبا نقص من أجره كل يوم قيراط".
وأما زعم ابن حبان:"ليس لأبي سفيان بن العلاء في الدنيا حديث مسند غير هذا" فليس كما قال: فإن له حديثًا آخر، وهو:"إذا حضرت الصلاة وأنتم في مرابض الغنم فصلوا، وإذا حضرت وأنتم في أعطان الأبل فلا تصلوا؛ فإنها خلقت من الشياطين". رواه الإمام أحمد (20541) عن وكيع، عن أبي سفيان بن العلاء، عن الحسن، عن ابن المغفل فذكره.
والحسن مدلس، ولم يصرح بالسماع، وإن كان صرح بالسماع عنه في حديث قتل الكلاب، ولكن لا يلزم من هذا سماع جميع ما روى عنه.
فقه هذا الباب:
يستفاد من أحاديث هذا الباب أن بيع الكلب وثمنه حرام، وبه قال جمهور أهل العلم، منهم الشافعي، وأحمد، والأوزاعي، وإسحاق، وغيرهم، سواء كان معلَّمًا أو غير معلَّم، ولا قيمة على متلفه.
ورواية عن مالك: لا يجوز بيعه، وعلى متلفه القيمة، كأم الولد، لا يجوز بيعها، وتجب القيمة على متلفها.
وذهب جماعة من أهل العلم إلى أن ما أبيح اقتناؤه جاز بيعه، وما يحرم اقتناؤه يحرم بيعه.
وهو مذهب وسط، ولا بأس بالعمل على هذا لشدة الحاجة إليه، ولا سيما في بعض القطاعات كالجمارك والمطارات والشرطة وغيرها.
وقد ذهب أبو حنيفة وأصحابه إلى جواز بيع الكلاب التي فيها نفع، كما في العمدة (11/ 203) بلفظ:"وأما بيع ذي ناب من السباع سوى الخنزير كالكلب والفهد والأسد والنمر والذب والدب والهر ونحوها فجائز عند أصحابنا".
وقد جعل الطحاوي أن الأمر بقتل الكلاب ثم نسخَه، هو العامل في اختلاف الحكم. فلما أمر بقتل الكلاب حرم ثمنها، ثم أبيح الانتفاع للاصطياد وغيره، ونهي عن قتله، فنسخ ما كان من النهي عن بيعها، وتناول ثمنها.
انظر للمزيد"المنة الكبرى" (5/ 215 - 219)، فإني فصلت فيه قول أهل العلم، وذكرت أدلتهم. وباللَّه التوفيق.
আব্দুল্লাহ ইবনে মুগাফফাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি সেই ব্যক্তিদের মধ্যে ছিলাম যারা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খুতবা দেওয়ার সময় তাঁর মুখ থেকে গাছের ডালপালা সরিয়ে দিচ্ছিল। অতঃপর তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "যদি কুকুররা অন্যান্য জাতিসমূহের মধ্যে একটি জাতি না হতো, তবে আমি তাদের হত্যার নির্দেশ দিতাম। অতএব, তোমরা তাদের মধ্যে প্রতিটি কালো কুচকুচে কুকুরকে হত্যা করো। আর এমন কোনো পরিবার নেই যারা কুকুর রাখে, অথচ প্রতিদিন তাদের আমল থেকে এক কীরাত পরিমাণ নেকি হ্রাস না হয়—শিকারের কুকুর, শস্যক্ষেতের কুকুর অথবা পশুপালের কুকুর ছাড়া।"
5687 - عن أبي الزبير قال: سألت جابرا عن ثمن الكلب والسنور قال: زجر النبي صلى الله عليه وسلم عن ذلك.
صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1569) عن سلمة بن شبيب، حدثنا الحسن بن أعين، حدثنا معقل، عن أبي الزبير فذكره.
وروي بمعناه أيضًا عن جابر، عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه نهى عن ثمن الكلب، وقال:"طعمة جاهلية".
رواه أحمد (14802) عن حسين بن محمد، حدثنا أبو أويس، حدثنا شرحبيل، عن جابر، فذكره.
وأبو أويس هو عبد اللَّه بن عبد اللَّه بن أوس الأصبحي المدني، قريب مالك وصهره، مختلف فيه غير أنه حسن الحديث إذا لم يخالف، ولم يأت ما ينكر عليه.
وكذلك فيه أيضًا شرحبيل وهو ابن سعد أبو سعيد المدني مولى الأنصار، وهو أيضًا مختلف فيه غير أنه حسن الحديث إذا لم يخالف.
وقد زادا في الحديث:"طعمة جاهلية". وهو شاذ، والمحفوظ هو النهي عن ثمن الكلب كما في رواية مسلم.
وأما ما روي عنه"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الكلب والهر إلا الكلب المعلم أو كلب صيد" فهو ضعيف.
رواه أحمد (14411)، وأبو يعلى (1919)، والدارقطني (3/ 73) كلهم من حديث عباد بن العوام، عن الحسن بن أبي جعفر، عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد اللَّه فذكره.
قال الدارقطني:"الحسن بن أبي جعفر ضعيف".
ورواه النسائي (4169) من طريق حجاج بن محمد، عن حماد بن سلمة، عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد اللَّه فذكره. قال النسائي:"هذا منكر".
وقال في موضع آخر (4295):"حديث حجاج، عن حماد بن سلمة ليس هو بصحيح".
وقال البيهقي (6/ 7):"والأحاديث الصحاح عن النبي صلى الله عليه وسلم في النهي عن ثمن الكلب خالية عن هذا الاستثناء، وإنما الاستثناء في الأحاديث الصحاح في النهي عن الاقتناء، ولعله شبه على من ذكر في حديث النهي عن ثمنه من هؤلاء الرواة الذين هم دون الصحابة والتابعين".
وقد كره من الصحابة جابر ومن التابعين طاوس ومجاهد بيع السنور، ولكن ذهب جمهور أهل
العلم -منهم مالك والشافعي وأحمد وغيرهم- إلى جواز بيعها، وحملوا النهي على إن كانت وحشية يتعذر تسليمها، كما أن في بعض طرقها كلام من أهل العلم، كما قال الترمذي (1279) بعد أن رواه من طريق عيسى بن يونس، عن الأعمش، عن أبي سفيان، عن جابر"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الكلب والسنور". وهو عند أبي داود (3479) من طريق إبراهيم، عن الأعمش.
قال الترمذي:"هذا حديث في إسناده اضطراب، ولا يصح في ثمن السنور. وقد روي هذا الحديث عن الأعمش، عن بعض أصحابه، عن جابر، واضطربوا على الأعمش في رواية هذا الحديث".
"وقد كره قوم من أهل العلم ثمن الهر، ورخص فيه بعضهم، وهو قول أحمد وإسحاق. وروى ابن فضيل، عن الأعمش، عن أبي حازم، عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم من غير هذا الوجه". انتهى.
قلت: أعل كثير من أهل العلم حديث جابر هذا الاختلاف الرواة على الأعمش، ولزيادة بعض الرواة في بعض طرقه:"إلا كلب صيد"، كما رواه النسائي (4295، 4668) من طريق حجاج بن محمد، عن حماد بن سلمة، عن أبي الزبير، عن جابر فذكره.
قال النسائي:"حديث حجاج عن حماد بن سلمة ليس هو بصحيح". وقال مرة:"منكر".
إلا أن الطريق الذي ساقه مسلم طريق سليم لا مطعن فيه، أخرجه البيهقي (6/ 10) من طريق سلمة بن شبيب، ولم يتكلم فيه بشيء، إنما تكلم على الطرق التي رويت عن الأعمش، وبعد أن نقل قول عطاء:"لا بأس بثمن الهرة" قال:"إذا ثبت الحديث، ولم يثبت نسخه لم يدخل عليه قول عطاء".
وقال أيضًا:"وقد حمله بعض أهل العلم على الهر إذا توحش، فلم يقدر على تسليمه. ومنهم من زعم أن ذلك كان في ابتداء الإسلام حين كان محكوما بنجاسته، ثم حين صار محكوما بطهارة سؤره حل ثمنه، وليس على واحد من هذين القولين دلالة بينة". انتهى.
وقال في السنن الصغرى (5/ 214) بتحقيقي باسم"المنة الكبرى":"ولو سمع الشافعي بالخبر الوارد فيه لقال به إن شاء اللَّه، وإنما لا يقول به من توقف في تثبيت روايات أبي الزبير، وقد تابعه أبو سفيان، عن جابر على هذه الرواية من جهة عيسى بن يونس وحفص بن غياث، عن الأعمش، عن أبي سفيان". انتهى.
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবূ যুবাইর বলেন: আমি তাঁকে কুকুর ও বিড়ালের মূল্য সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলাম। তিনি বললেন: নাবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তা কঠোরভাবে নিষেধ করেছেন।
5688 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"والذي نفسي بيده ليوشكن أن ينزل فيكم ابن مريم حكما مقسطا، فيكسر الصليب، ويقتل الخنزير، ويضع الجزية، ويفيض المال حتى لا يقبله أحد".
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2222)، ومسلم في الإيمان (155) كلاهما عن قتيبة بن
سعيد، حدثنا الليث، عن ابن شهاب، عن ابن المسيب، أنه سمع أبا هريرة يقول فذكره.
فائدة: الحديث ترجم له البخاري بقوله:"باب قتل الخنزير". قال الحافظ في الفتح (4/ 414):"ووجه دخوله في أبواب البيع الإشارة إلى أن ما أمر بقتله لا يجوز بيعه".
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যাঁর হাতে আমার প্রাণ, তাঁর কসম! মারইয়াম তনয় (ঈসা) (আঃ) ন্যায়পরায়ণ বিচারক হিসেবে শীঘ্রই তোমাদের মাঝে অবতরণ করবেন। অতঃপর তিনি ক্রুশ ভেঙে দেবেন, শূকর হত্যা করবেন, জিযিয়া (কর) তুলে নেবেন, আর ধন-সম্পদ এত পরিমাণে উপচে পড়বে যে তা গ্রহণ করার মতো কেউ থাকবে না।"
5689 - عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"قال اللَّه: ثلاثة أنا خَصْمُهم يوم القيامة: رجل أعطى بي ثم غدر، ورجل باع حرًا فأكل ثمنه، ورجل استأجر أجيرا فاستوفى منه ولم يُعط أجره".
صحيح: رواه البخاري في البيوع (2227) عن بشر بن مرحوم، حدثنا يحيى بن سليم، عن إسماعيل بن أمية، عن سعيد بن أبي سعيد، عن أبي هريرة فذكره.
وزاد البعض بعد قوله:"أنا خَصْمُهم يوم القيامة""ومن كنت خصمه خصمته". ذكره البيهقي (6/ 14)، وعزاه للبخاري، وهو ليس بجيد؛ فإنه لم يذكر هذه الزيادة، وإنما ذكره ابن الجارود في المنتقى (579) بعد أن رواه عن محمود بن آدم قال: حدثنا يحيى بن سليم بإسناده.
وقد تكلم بعض أهل العلم على هذا الحديث؛ لأن مداره على يحيى بن سليم، وهو القرشي الطائفي. وقد اختلف أهل العلم في توثيقه وتجريحه، فوثّقه ابن معين، وابن سعد، والعجلي. وقال النسائي:"ليس به بأس، وهو منكر الحديث عن عبيد اللَّه بن عمر". وقال الساجي:"صدوق يهم في الحديث، وأخطأ في أحاديث رواها عن عبيد اللَّه بن عمر العمري".
وفيه كلام غير هذا، وخلاصته أنه يخطئ في أحاديث يرويها عن عبيد اللَّه بن عمر العمري، والبخاري إنما تجنب من روايته عن عبيد اللَّه بن عمر، بل ليس في صحيحه غير هذا الحديث.
ثم كان الرجل عنده كتاب. قال يعقوب بن سفيان: كان رجلًا صالحًا، وكتابه لا بأس به، فإذا حدَّث من كتابه فحديثه حسن، وإذا حدَّث حفظًا فتعرف وتنكر.
فلا يبعد أن يكون حدَّث من هذا الكتاب، فسمع منه بشر بن مرحوم.
فإن النفيلي روى عنه، وزاد في الإسناد بعد قوله"سعيد":"عن أبيه".
ورواه الجماعة منهم بشر بن مرحوم، وابن الطباع، ونعيم، وإبراهيم بن حمزة، ومحمود بن إبراهيم، كلهم عن يحيى بن سليم، ولم يذكروا فيه:"عن أبيه". ذكره ابن الجارود.
ورواية الجماعة أولى، وهو اعتماد البخاري، فلا ينبغي التجرؤ على فتح الباب في تضعيف أحاديث الصحيح لوجود اختلاف أهل العلم في راو من رواة الحديث، إن لم يكن متهما، وهيهات أن تأتي براو منهم في الصحيح. وأما اختلاف أهل العلم فلم يسلم منه إلا قليلًا.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আল্লাহ তাআলা বলেছেন: কিয়ামতের দিন আমি তিন শ্রেণির লোকের প্রতিপক্ষ হব: (১) যে ব্যক্তি আমার (আল্লাহর) নামে অঙ্গীকার করে তা ভঙ্গ করে; (২) যে ব্যক্তি কোনো স্বাধীন মানুষকে (ক্রীতদাস হিসেবে) বিক্রি করে তার মূল্য ভক্ষণ করে; এবং (৩) যে ব্যক্তি কোনো শ্রমিককে কাজে নিয়োগ করে তার থেকে কাজ পুরোপুরি আদায় করে নেয় কিন্তু তার মজুরি/পারিশ্রমিক দেয় না।"
5690 - عن سعيد بن أبي الحسن قال: كنت عند ابن عباس رضي الله عنهما إذ أتاه رجل، فقال: يا ابن عباس، إني إنسان إنما معيشتي من صنعة يدي، وإني أصنع هذه التصاوير. فقال ابن عباس: لا أحدثك إلا ما سمعت من رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"من صور صورة فإن اللَّه معذبه حتى ينفخ فيها الروح، وليس بنافخ فيها أبدًا". فربا الرجل ربوة شديدة، واصفر وجهه، فقال: ويحك! إن أبيت إلا أن تصنع فعليك بهذا الشجر، كل شيء ليس فيه روح.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2225)، ومسلم في اللباس والزينة (2110: 99) من طريق سعيد بن أبي الحسن به. واللفظ للبخاري.
ولفظ المرفوع عند مسلم:"كل مصور في النار يجعل له بكل صورة صورها نفسا، فتعذبه في جهنم".
ورواه مسلم من طريق آخر عن سعيد بن أبي عروبة، عن النضر بن أنس بن مالك قال: كنت جالسا عند ابن عباس، فذكره بنحو لفظ البخاري.
قوله:"فربا الرجل" أي انتفخ. وقيل: ذعر وامتلأ خوفا.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, সাঈদ ইবনু আবিল হাসান বলেন: আমি ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট ছিলাম, এমন সময় তাঁর কাছে এক ব্যক্তি এসে বলল, ‘হে ইবনু আব্বাস, আমি এমন এক ব্যক্তি, যার জীবিকা আসে হাতের কারুকাজ থেকে, আর আমি এই ছবিগুলি তৈরি করি।’ ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, ‘আমি তোমাকে এমন কথা ছাড়া কিছুই শোনাব না, যা আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি।’ (তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন,) 'যে ব্যক্তি কোনো ছবি তৈরি করে, আল্লাহ তা'আলা তাকে শাস্তি দিতে থাকবেন, যতক্ষণ না সে তার মধ্যে রূহ (প্রাণ) ফুঁকে দেয়। আর সে কখনোই তাতে রূহ ফুঁকতে পারবে না।' এতে লোকটি ভীষণভাবে ভয় পেল এবং তার মুখমণ্ডল ফ্যাকাশে হয়ে গেল। তখন (ইবনু আব্বাস) তাকে বললেন, 'ধিক তোমার! তুমি যদি ছবি বানানো বাদ দিতে না চাও, তবে তুমি গাছগাছালি বা এমন জিনিসের ছবি আঁকো যার মধ্যে প্রাণ নেই।'
5691 - عن أبي هريرة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لا يمنع فضل الماء ليمنع به الكلأ".
متفق عليه: رواه مالك في الأقضية (25) عن أبي الزناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة فذكره. ورواه البخاري في المساقاة (2353)، ومسلم في المساقاة (1566: 36) كلاهما من طريق مالك به مثله.
ورواه مسلم (38) من طريق أبي سلمة بن عبد الرحمن (هو ابن عوف)، عن أبي هريرة مرفوعًا بلفظ:"لا يباع فضل الماء ليباع به الكلأ".
"والكلأ" هو النبات سواء كان رطبا أو يابسا.
وفي معناه ما روي عنه مرفوعًا:"لا تمنعوا فضل الماء، ولا تمنعوا الكلأ فيهزل المال ويجوع العيال".
رواه أحمد (9458) وابن حبان (4956) كلاهما من حديث ابن وهب، قال: سمعت حيوة، يقول: حدثني حميد بن هانئ الخولاني، عن أبي سعيد مولى غفار، قال: سمعت أبا هريرة، قال: فذكره.
وأبو سعيد مولى غفار لم يوثّقه غير ابن حبان (5/ 573) فهو يحتاج إلى متابعة، ولم أجدها.
فقوله:"يهزل المال ويجوع العيال" فيه شذوذ.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "অতিরিক্ত পানি আটকে রাখা যাবে না, যেন এর মাধ্যমে তৃণভূমিও (মানুষের ব্যবহার থেকে) আটকে রাখা যায়।"
5692 - عن جابر بن عبد اللَّه قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع فضل الماء.
صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1565) من طريق وكيع ويحيى بن سعيد، كلاهما عن ابن جريج، عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد اللَّه فذكره.
ورواه أيضًا من طريق روح بن عبادة، حدثنا ابن جريج، أخبرني أبو الزبير، أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يقول:"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع ضراب الجمل، فعن بيع الماء والأرض لتحرث. فعن ذلك نهى النبي صلى الله عليه وسلم".
وقوله:"عن بيع الماء والأرض" أي نهي عن إجارتها للزرع.
জাবির ইবনে আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম উটের বীজদানের (প্রজনন সেবা) মূল্য নিতে নিষেধ করেছেন, আর চাষাবাদের জন্য পানি ও জমি বিক্রি করতেও নিষেধ করেছেন। নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এইগুলো থেকে নিষেধ করেছেন।
5693 - عن إياس بن عبد المزني -وكان من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع فضل الماء.
صحيح: رواه أبو داود (3478)، والترمذي (1271)، والنسائي (4662)، وابن ماجه (2471)، والدارمي (26574)، وصحّحه ابن حبان (4952)، والحاكم (2/ 61)، وابن الجارود (594) كلهم من حديث عمرو بن دينار، عن أبي المنهال قال: سمعت إياس بن عبدٍ المزني فذكره. وإسناده صحيح.
وقال الترمذي:"حسن صحيح".
وزاد البعض، فقال: وقال عمرو بن دينار: لا ندري أي ماء قال. يقول: لا أدري ماءً جاريا، أو الماء المستقى.
قلت: ورود القيد بـ"فضل الماء" يزيل هذا الإشكال.
وأبو المنهال: هو عبد الرحمن بن مطعم البناني.
ইয়াস ইবনে আব্দুল মুযানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উদ্বৃত্ত পানি বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন।
5694 - عن عائشة قالت: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أن يمنع نقع البئر، يعني فضل الماء.
حسن: رواه أحمد (26311)، وابن حبان (4955) كلاهما من حديث محمد بن إسحاق قال: حدثني أبو الرجال محمد بن عبد الرحمن بن حارثة الأنصاري، عن أمه عمرة بنت عبد الرحمن، عن عائشة فذكرته.
ومحمد بن إسحاق مدلس إلا أنه صرح بالتحديث في رواية أحمد، كما أنه لم ينفرد به، فقد تابعه كل من:
- أبو أويس: وهو عبد اللَّه بن عبد اللَّه بن أويس الأصبحي، فرواه عن أبي الرجال بإسناده مثله، ومن طريقه رواه أحمد (24811).
- وعبد الرحمن بن أبي الرجال قال: سمعت أبي يحدث عن أمه عمرة، عن عائشة فذكرته. ومن طريقه رواه الحاكم (2/ 61)، وقال: صحيح الإسناد.
- وعبدة بن سليمان، عن حارثة، عن عمرة بإسناده مثله. رواه ابن ماجه (2479). وحارثة هو ابن أبي الرجال، وهو ضعيف عند جمهور أهل العلم.
- وسفيان الثوري، عن أبي الرجال، عن عمرة بإسناده مثله. رواه البيهقي (6/ 152)، وقال:"هكذا أتى به موصولًا، وإنما يعرف موصولًا من حديث عبد الرحمن بن أبي الرجال، عن أبيه".
ثم رواه من طريق عبد الرحمن بن أبي الرجال، وقال: وكذلك رواه محمد بن إسحاق بن يسار، عن أبي الرجال موصولًا.
ورواه أيضًا حارثة بن محمد عن عمرة موصولًا، إلا أن حارثة ضعيف.
والخلاصة أن الحديث صحيح أو حسن موصولًا، ولكن رواه مالك في الأقضية (32) عن أبي الرجال محمد بن عبد الرحمن، عن أمه عمرة بنت عبد الرحمن، أنها أخبرته أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"ولا يمنع نقع بئر". هكذا رواه مرسلًا.
قال ابن عبد البر في التمهيد (13/ 123):"ولا أعلم أحدًا من رواة الموطأ عن مالك أسند عنه هذا الحديث، وهو مرسل عند جميعهم فيما علمت هكذا".
وقال:"وذكره الدارقطني عن أبي صاعد، عن أبي علي الجرمي، عن أبي صالح كاتب الليث، عن الليث بن سعد، عن سعيد بن عبد الرحمن الجمحي، عن مالك بن أنس، عن أبي الرجال محمد بن عبد الرحمن بن حارثة، عن أمه عمرة بنت عبد الرحمن، عن عائشة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى أن يمنع نقع بئر. وهذا الإسناد -وإن كان غريبًا عن مالك- فقد رواه أبو قرة موسى بن طارق، عن مالك أيضًا". انتهى.
ثم ذهب يُسند الحديث من الطرق التي سبق ذكر بعضها.
وقوله:"لا يمنع نقع البئر" يعني فضل مائها، وهو تفسير لم يختلف في جملته، بل قد جاء هكذا في نسق الحديث مسندا، وتقع بئر هو ما بقي فيها من الماء بعد منفعة صاحبها.
وأما قوله:"لا يمنع فضل الماء ليمنع به الكلأ" فمعناه أن يكون حول البئر كلأ ليس عنده ماء غيره، ولا يمكن أصحاب المواشي رعيه إلا إذا تمكنوا من سقي بهائمهم من تلك البئر؛ لئلا يتضرروا بالعطش بعد الرعيّ، فيستلزم منعهم من الماء منعهم من الرعي. هذا هو تفسير الجمهور، كما قال ابن حجر في"الفتح" (5/
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম কূপের নক্ব (উদ্বৃত্ত পানি) আটকে রাখতে নিষেধ করেছেন। অর্থাৎ (তিনি) পানির অতিরিক্ত অংশকে (ব্যবহার করতে বাধা দিতে) নিষেধ করেছেন।
5695 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ثلاث لا يكلمهم اللَّه يوم القيامة،
ولا ينظر إليهم، ولا يزكيهم، ولهم عذاب أليم: رجل على فضل ماء بالفلاة يمنعه من ابن السبيل، ورجل بايع رجلًا بسلعة بعد العصر فحلف له باللَّه لأخذها بكذا وكذا فصدقه وهو على غير ذلك، ورجل بايع إماما لا يبايعه إلا لدنيا، فإن أعطاه منها وفى، وإن لم يعطه منها لم يفِ".
متفق عليه: رواه البخاري في المساقاة (2358)، ومسلم في الإيمان (108) كلاهما من حديث الأعمش، عن أبي صالح، عن أبي هريرة فذكر الحديث. واللفظ لمسلم. ولفظ البخاري نحوه، وزاد فيه: ثم قرأ هذه الآية {إِنَّ الَّذِينَ يَشْتَرُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ وَأَيْمَانِهِمْ ثَمَنًا قَلِيلًا} [سورة آل عمران: 77].
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তিন শ্রেণির লোক এমন আছে, যাদের সাথে আল্লাহ কিয়ামতের দিন কথা বলবেন না, তাদের দিকে তাকাবেন না এবং তাদেরকে পবিত্র করবেন না। আর তাদের জন্য রয়েছে যন্ত্রণাদায়ক শাস্তি। (তারা হলো:) ১. এমন ব্যক্তি, যার কাছে মরুভূমিতে অতিরিক্ত পানি থাকে এবং সে মুসাফিরকে তা দিতে অস্বীকার করে; ২. এমন ব্যক্তি, যে আসরের পরে কোনো পণ্য বিক্রি করার জন্য অন্য ব্যক্তির কাছে আল্লাহর নামে শপথ করে যে, সে এটা এত এত দামে কিনেছিল, ফলে ক্রেতা তাকে বিশ্বাস করে নিল, অথচ সে (বিক্রেতা) মিথ্যাবাদী; ৩. এবং এমন ব্যক্তি, যে কোনো শাসকের হাতে কেবল দুনিয়াবী স্বার্থের জন্য বাইআত (আনুগত্যের শপথ) গ্রহণ করে। যদি শাসক তাকে কিছু দেয়, তবে সে আনুগত্য পূরণ করে। আর যদি তাকে কিছু না দেয়, তবে সে আনুগত্য পূরণ করে না।"
5696 - عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"ثلاثة لا يكلمهم اللَّه يوم القيامة، ولا ينظر إليهم: رجل حلف على سلعة لقد أعطى بها أكثر مما أعطى وهو كاذب، ورجل حلف على يمين كاذبة بعد العصر ليقتطع بها مال رجل مسلم، ورجل منع فضل ماء، فيقول اللَّه: اليوم أمنعك فضلي، كما منعت فضل ما لم تعمل يداك".
صحيح: رواه البخاري في المساقاة (2369)، وفي التوحيد (7446) عن عبد اللَّه بن محمد، حدثنا سفيان، عن عمرو، عن أبي صالح السمان، عن أبي هريرة فذكر الحديث.
وروي أيضًا عن عبد اللَّه بن عمرو، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"من منع فضل مائه، أو فضل كلأه، منعه اللَّه فضله يوم القيامة".
رواه أحمد (6673)، عن إسماعيل، عن ليث، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده فذكره. وليث هو ابن سليم، وفيه كلام معروف.
ورواه أيضًا (6722) بإسناد آخر عن محمد بن راشد، عن سليمان بن موسى، أن عبد اللَّه بن عمرو كتب إلى عامل له على أرض له: أن لا تمنع فضل مائك؛ فإني سمعت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"من منع فضل الماء ليمنع به فضل الكلأ، منعه اللَّه يوم القيامة فضله".
ومحمد بن راشد هو الخزاعي الدمشقي، نزيل البصرة، مختلف فيه، فوثّقه أحمد، وابن معين، والنسائي، وغيرهم. وتكلم فيه ابن حبان، فقال:"كان من أهل الورع والنسك، ولم يكن الحديث من صنعته، وكثر المناكير في روايته؛ فاستحق الترك". وبه أعله الهيثمي في"المجمع" (4/ 124).
وسليمان بن موسى هو الأشدق، لم يدرك عبد اللَّه بن عمرو؛ فروايته عنه منقطعة.
وللحديث أسانيد أخرى، هذه أصلحها.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তিন শ্রেণির লোক, যাদের সাথে আল্লাহ কিয়ামতের দিন কথা বলবেন না এবং তাদের দিকে (রহমতের দৃষ্টিতে) তাকাবেনও না: (প্রথমত) এমন ব্যক্তি যে কোনো পণ্যের উপর শপথ করে যে তাকে এর বিনিময়ে যা দেওয়া হয়েছে, তার থেকেও বেশি দেওয়া হয়েছিল, অথচ সে মিথ্যাবাদী; (দ্বিতীয়ত) এমন ব্যক্তি যে আসরের পর মিথ্যা কসম করে কোনো মুসলিম ব্যক্তির সম্পদ অন্যায়ভাবে গ্রাস করার জন্য; এবং (তৃতীয়ত) এমন ব্যক্তি যে অতিরিক্ত পানি আটকে রাখে (অন্যকে ব্যবহার করতে দেয় না)। তখন আল্লাহ বলবেন: আজ আমি আমার অনুগ্রহ থেকে তোমাকে বঞ্চিত করব, যেমন তুমি এমন অতিরিক্ত (বস্তু) আটকে রেখেছিলে যা তোমার হাত দ্বারা তৈরি হয়নি।"
5697 - عن أبي خداش حبان بن زيد الشرعبي، عن رجل من قرن، -وفي رواية: عن رجل من المهاجرين من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم قال: غزوت مع النبي صلى الله عليه وسلم ثلاثًا
أسمعه يقول:"المسلمون شركاء في ثلاث: في الكلأ، والماء، والنار".
صحيح: رواه أبو داود (3477) من وجهين: عن علي بن الجعد اللؤلؤي، حدثنا حريز بن عثمان، عن حبان بن زيد الشُّرعبي، عن رجل من قرن.
ح وحدثنا مسدد، حدثنا عيسى بن يونس، حدثنا حريز بن عثمان، حدثنا أبو خداش، عن رجل من المهاجرين من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم قال فذكره.
وإسناده صحيح. وأبو خداش هو حبان بن زيد الشرعبي.
والحديث أخرجه أيضًا الإمام أحمد (23082)، والبيهقي (6/ 150) كلاهما من طريق ثور بن يزيد الشامي، عن حريز بإسناده مثله.
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর একজন মুহাজির সাহাবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে তিনটি যুদ্ধে অংশগ্রহণ করেছিলাম। আমি তাকে বলতে শুনেছি: "মুসলমানগণ তিনটি বিষয়ে একে অপরের অংশীদার (সমান অংশীদার): ঘাস (চরাভূমি), পানি এবং আগুন।"
5698 - عن أبي هريرة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"ثلاث لا يُمْنَعَنَّ: الماء، والكلأ، والنار".
صحيح: رواه ابن ماجه (2473) عن محمد بن عبد اللَّه بن يزيد قال: حدثنا سفيان، عن أبي الزناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة فذكره.
وإسناده صحيح. وكذا صحّحه أيضًا البوصيري في زوائد ابن ماجه.
وأما ما روي عن ابن عباس مرفوعًا:"المسلمون شركاء في ثلاث: في الماء، والكلأ، والنار. وثمنه حرام" فهو ضعيف.
رواه ابن ماجه (2472) عن عبد اللَّه بن سعيد قال: حدثنا عبد اللَّه بن خراش بن حوشب الشيباني، عن العوَّام بن حوشب، عن مجاهد، عن ابن عباس فذكره.
وإسناده ضعيف من أجل عبد اللَّه بن خراش، وهو الشيباني، أبو جعفر الكوفي، وهو مجمع على ضعفه، وقد أطلق عليه ابن عمار الكذاب. ومع ذلك ذكره ابن حبان في الثقات (8/ 340)، وهو دليل على تساهله، وبه أعله البوصيري في زوائد ابن ماجه.
قلت: وفي قوله:"وثمنه حرام" نكارة.
وفي الباب ما روي عن بهيسة، عن أبيها قالت: استأذن أبي النبي صلى الله عليه وسلم، فدخل بينه وبين قميصه، فجعل يقبل ويلتزم، ثم قال: يا نبي اللَّه، ما الشيء الذي لا يحل منعه؟ قال:"الماء". قال: يا نبي اللَّه، ما الشيء الذي لا يحل منعه؟ قال:"الملح". قال: يا نبي اللَّه، ما الشيء الذي لا يحل منعه؟ قال:"أن تفعل الخير خير لك".
رواه أبو داود (3476)، والدارمي (2655)، وأحمد (15945، 15946، 15947) كلهم من طريق كهمس بن الحسن، عن سيار بن منظور -رجل من بني فزارة-، عن أبيه، عن امرأة يقال لها بهيسة، عن أبيها فذكره. وإسناده ضعيف من أجل ثلاثة مجاهيل في الإسناد:
الأول: بهيسة، لم تعرف، ولم يرو عنها غير منظور.
والثاني: منظور، لم يرو عنه غير ابنه سيار.
والثالث: سيار، لم يرو عنه غير كهمس بن الحسن.
فالإسناد مسلسل بالمجاهيل.
وفي التلخيص (3/ 65):"وأعله عبد الحق، وابن القطان بأن بهيسة لا تعرف، ولكن ذكرها ابن حبان وغيره في الصحابة".
ولكن الحافظ نفسه رد على قول ابن حبان في التهذيب بقول عبد الحق وابن القطان بأنها مجهولة، وقال: وهي كذلك. فتنبه.
وكذلك لا يصح ما روي عن عائشة قالت: يا رسول اللَّه، ما الشيء الذي لا يحل منعه؟ قال:"الماء، والملح، والنار". قالت: قلت: يا رسول اللَّه، هذا الماء قد عرفناه، فما بال الملح والنار؟ قال:"يا حميراء، من أعطى نارًا فكأنما تصدق بجميع ما أنضجت تلك النّار، ومن أعطى ملحا فكأنما تصدق بجميع ما طيب ذلك الملح، ومن سقى مسلما شربة من ماء حيث يوجد الماء فكأنما أعتق رقبة، ومن سقى مسلما شربة من ماء حيث لا يوجد الماء فكأنما أحياها".
رواه ابن ماجه (2474) عن عمار بن خالد الواسطي قال: حدثنا علي بن غراب، عن زهير بن مرزوق، عن علي بن زيد بن جُدعان، عن سعيد بن المسيب، عن عائشة فذكرته.
وفيه سلسلة من الضعفاء:
علي بن غراب -وهو الفزاري مولاهم الكوفي- مختلف فيه، فضعفه أبو داود، والجوزجاني، وبالغ في تضعيفه ابن حبان، فقال:"حدث بالأشياء الموضوعة؛ فبطل الاحتجاج به". ومشَّاه الإمام أحمد، وأبو حاتم، والنسائي، وغيرهم إلا أنه مدلس، وقد عنعن. وشيخه زهير بن مرزوق مجهول.
وشيخه علي بن زيد بن جدعان التيمي البصري مجمع على ضعفه.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তিনটি জিনিস (অন্যকে দিতে) বারণ করা উচিত নয়: পানি, চারণভূমি (বা তৃণ) এবং আগুন (বা অগ্নিশক্তি)।
5699 - عن رافع بن خديج قال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول:"شر الكسب مهر البغي، وثمن الكلب، وكسب الحجام".
صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1568: 40) عن محمد بن حاتم، حدثنا يحيى بن سعيد القطان، عن محمد بن يوسف قال: سمعت السائب بن يزيد يحدث عن رافع بن خديج فذكره.
ورواه (41) من وجه آخر عن السائب بن يزيد به بلفظ:"ثمن الكلب خيث، ومهر البغي خبيث، وكسب الحجام خبيث".
রাফে' ইবনে খাদীজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "সবচেয়ে নিকৃষ্ট উপার্জন হলো ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক, কুকুরের মূল্য এবং শিঙ্গা লাগানোর (হিজামা) উপার্জন।"
5700 - عن أبي مسعود عقبة بن عمرو قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن كسب الحجام.
حسن: رواه ابن ماجه (2165) عن هشام بن عمار قال: حدثنا يحيى بن حمزة قال: حدثني
الأوزاعي، عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن بن الحارث بن هشام، عن أبي مسعود عقبة ابن عمرو فذكره.
وإسناده حسن من أجل هشام بن عمار؛ فإنه حين الحديث، وقد صحّحه البوصيري في زوائده.
আবু মাসঊদ উকবাহ ইবনু আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙ্গা লাগানোর (কাপিংয়ের) উপার্জন থেকে নিষেধ করেছেন।