আল-জামি` আল-কামিল
5688 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"والذي نفسي بيده ليوشكن أن ينزل فيكم ابن مريم حكما مقسطا، فيكسر الصليب، ويقتل الخنزير، ويضع الجزية، ويفيض المال حتى لا يقبله أحد".
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2222)، ومسلم في الإيمان (155) كلاهما عن قتيبة بن
سعيد، حدثنا الليث، عن ابن شهاب، عن ابن المسيب، أنه سمع أبا هريرة يقول فذكره.
فائدة: الحديث ترجم له البخاري بقوله:"باب قتل الخنزير". قال الحافظ في الفتح (4/ 414):"ووجه دخوله في أبواب البيع الإشارة إلى أن ما أمر بقتله لا يجوز بيعه".
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যাঁর হাতে আমার প্রাণ, তাঁর কসম! মারইয়াম তনয় (ঈসা) (আঃ) ন্যায়পরায়ণ বিচারক হিসেবে শীঘ্রই তোমাদের মাঝে অবতরণ করবেন। অতঃপর তিনি ক্রুশ ভেঙে দেবেন, শূকর হত্যা করবেন, জিযিয়া (কর) তুলে নেবেন, আর ধন-সম্পদ এত পরিমাণে উপচে পড়বে যে তা গ্রহণ করার মতো কেউ থাকবে না।"
5689 - عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"قال اللَّه: ثلاثة أنا خَصْمُهم يوم القيامة: رجل أعطى بي ثم غدر، ورجل باع حرًا فأكل ثمنه، ورجل استأجر أجيرا فاستوفى منه ولم يُعط أجره".
صحيح: رواه البخاري في البيوع (2227) عن بشر بن مرحوم، حدثنا يحيى بن سليم، عن إسماعيل بن أمية، عن سعيد بن أبي سعيد، عن أبي هريرة فذكره.
وزاد البعض بعد قوله:"أنا خَصْمُهم يوم القيامة""ومن كنت خصمه خصمته". ذكره البيهقي (6/ 14)، وعزاه للبخاري، وهو ليس بجيد؛ فإنه لم يذكر هذه الزيادة، وإنما ذكره ابن الجارود في المنتقى (579) بعد أن رواه عن محمود بن آدم قال: حدثنا يحيى بن سليم بإسناده.
وقد تكلم بعض أهل العلم على هذا الحديث؛ لأن مداره على يحيى بن سليم، وهو القرشي الطائفي. وقد اختلف أهل العلم في توثيقه وتجريحه، فوثّقه ابن معين، وابن سعد، والعجلي. وقال النسائي:"ليس به بأس، وهو منكر الحديث عن عبيد اللَّه بن عمر". وقال الساجي:"صدوق يهم في الحديث، وأخطأ في أحاديث رواها عن عبيد اللَّه بن عمر العمري".
وفيه كلام غير هذا، وخلاصته أنه يخطئ في أحاديث يرويها عن عبيد اللَّه بن عمر العمري، والبخاري إنما تجنب من روايته عن عبيد اللَّه بن عمر، بل ليس في صحيحه غير هذا الحديث.
ثم كان الرجل عنده كتاب. قال يعقوب بن سفيان: كان رجلًا صالحًا، وكتابه لا بأس به، فإذا حدَّث من كتابه فحديثه حسن، وإذا حدَّث حفظًا فتعرف وتنكر.
فلا يبعد أن يكون حدَّث من هذا الكتاب، فسمع منه بشر بن مرحوم.
فإن النفيلي روى عنه، وزاد في الإسناد بعد قوله"سعيد":"عن أبيه".
ورواه الجماعة منهم بشر بن مرحوم، وابن الطباع، ونعيم، وإبراهيم بن حمزة، ومحمود بن إبراهيم، كلهم عن يحيى بن سليم، ولم يذكروا فيه:"عن أبيه". ذكره ابن الجارود.
ورواية الجماعة أولى، وهو اعتماد البخاري، فلا ينبغي التجرؤ على فتح الباب في تضعيف أحاديث الصحيح لوجود اختلاف أهل العلم في راو من رواة الحديث، إن لم يكن متهما، وهيهات أن تأتي براو منهم في الصحيح. وأما اختلاف أهل العلم فلم يسلم منه إلا قليلًا.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আল্লাহ তাআলা বলেছেন: কিয়ামতের দিন আমি তিন শ্রেণির লোকের প্রতিপক্ষ হব: (১) যে ব্যক্তি আমার (আল্লাহর) নামে অঙ্গীকার করে তা ভঙ্গ করে; (২) যে ব্যক্তি কোনো স্বাধীন মানুষকে (ক্রীতদাস হিসেবে) বিক্রি করে তার মূল্য ভক্ষণ করে; এবং (৩) যে ব্যক্তি কোনো শ্রমিককে কাজে নিয়োগ করে তার থেকে কাজ পুরোপুরি আদায় করে নেয় কিন্তু তার মজুরি/পারিশ্রমিক দেয় না।"
5690 - عن سعيد بن أبي الحسن قال: كنت عند ابن عباس رضي الله عنهما إذ أتاه رجل، فقال: يا ابن عباس، إني إنسان إنما معيشتي من صنعة يدي، وإني أصنع هذه التصاوير. فقال ابن عباس: لا أحدثك إلا ما سمعت من رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"من صور صورة فإن اللَّه معذبه حتى ينفخ فيها الروح، وليس بنافخ فيها أبدًا". فربا الرجل ربوة شديدة، واصفر وجهه، فقال: ويحك! إن أبيت إلا أن تصنع فعليك بهذا الشجر، كل شيء ليس فيه روح.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2225)، ومسلم في اللباس والزينة (2110: 99) من طريق سعيد بن أبي الحسن به. واللفظ للبخاري.
ولفظ المرفوع عند مسلم:"كل مصور في النار يجعل له بكل صورة صورها نفسا، فتعذبه في جهنم".
ورواه مسلم من طريق آخر عن سعيد بن أبي عروبة، عن النضر بن أنس بن مالك قال: كنت جالسا عند ابن عباس، فذكره بنحو لفظ البخاري.
قوله:"فربا الرجل" أي انتفخ. وقيل: ذعر وامتلأ خوفا.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, সাঈদ ইবনু আবিল হাসান বলেন: আমি ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিকট ছিলাম, এমন সময় তাঁর কাছে এক ব্যক্তি এসে বলল, ‘হে ইবনু আব্বাস, আমি এমন এক ব্যক্তি, যার জীবিকা আসে হাতের কারুকাজ থেকে, আর আমি এই ছবিগুলি তৈরি করি।’ ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, ‘আমি তোমাকে এমন কথা ছাড়া কিছুই শোনাব না, যা আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি।’ (তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন,) 'যে ব্যক্তি কোনো ছবি তৈরি করে, আল্লাহ তা'আলা তাকে শাস্তি দিতে থাকবেন, যতক্ষণ না সে তার মধ্যে রূহ (প্রাণ) ফুঁকে দেয়। আর সে কখনোই তাতে রূহ ফুঁকতে পারবে না।' এতে লোকটি ভীষণভাবে ভয় পেল এবং তার মুখমণ্ডল ফ্যাকাশে হয়ে গেল। তখন (ইবনু আব্বাস) তাকে বললেন, 'ধিক তোমার! তুমি যদি ছবি বানানো বাদ দিতে না চাও, তবে তুমি গাছগাছালি বা এমন জিনিসের ছবি আঁকো যার মধ্যে প্রাণ নেই।'
5691 - عن أبي هريرة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لا يمنع فضل الماء ليمنع به الكلأ".
متفق عليه: رواه مالك في الأقضية (25) عن أبي الزناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة فذكره. ورواه البخاري في المساقاة (2353)، ومسلم في المساقاة (1566: 36) كلاهما من طريق مالك به مثله.
ورواه مسلم (38) من طريق أبي سلمة بن عبد الرحمن (هو ابن عوف)، عن أبي هريرة مرفوعًا بلفظ:"لا يباع فضل الماء ليباع به الكلأ".
"والكلأ" هو النبات سواء كان رطبا أو يابسا.
وفي معناه ما روي عنه مرفوعًا:"لا تمنعوا فضل الماء، ولا تمنعوا الكلأ فيهزل المال ويجوع العيال".
رواه أحمد (9458) وابن حبان (4956) كلاهما من حديث ابن وهب، قال: سمعت حيوة، يقول: حدثني حميد بن هانئ الخولاني، عن أبي سعيد مولى غفار، قال: سمعت أبا هريرة، قال: فذكره.
وأبو سعيد مولى غفار لم يوثّقه غير ابن حبان (5/ 573) فهو يحتاج إلى متابعة، ولم أجدها.
فقوله:"يهزل المال ويجوع العيال" فيه شذوذ.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "অতিরিক্ত পানি আটকে রাখা যাবে না, যেন এর মাধ্যমে তৃণভূমিও (মানুষের ব্যবহার থেকে) আটকে রাখা যায়।"
5692 - عن جابر بن عبد اللَّه قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع فضل الماء.
صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1565) من طريق وكيع ويحيى بن سعيد، كلاهما عن ابن جريج، عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد اللَّه فذكره.
ورواه أيضًا من طريق روح بن عبادة، حدثنا ابن جريج، أخبرني أبو الزبير، أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يقول:"نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع ضراب الجمل، فعن بيع الماء والأرض لتحرث. فعن ذلك نهى النبي صلى الله عليه وسلم".
وقوله:"عن بيع الماء والأرض" أي نهي عن إجارتها للزرع.
জাবির ইবনে আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম উটের বীজদানের (প্রজনন সেবা) মূল্য নিতে নিষেধ করেছেন, আর চাষাবাদের জন্য পানি ও জমি বিক্রি করতেও নিষেধ করেছেন। নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এইগুলো থেকে নিষেধ করেছেন।
5693 - عن إياس بن عبد المزني -وكان من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع فضل الماء.
صحيح: رواه أبو داود (3478)، والترمذي (1271)، والنسائي (4662)، وابن ماجه (2471)، والدارمي (26574)، وصحّحه ابن حبان (4952)، والحاكم (2/ 61)، وابن الجارود (594) كلهم من حديث عمرو بن دينار، عن أبي المنهال قال: سمعت إياس بن عبدٍ المزني فذكره. وإسناده صحيح.
وقال الترمذي:"حسن صحيح".
وزاد البعض، فقال: وقال عمرو بن دينار: لا ندري أي ماء قال. يقول: لا أدري ماءً جاريا، أو الماء المستقى.
قلت: ورود القيد بـ"فضل الماء" يزيل هذا الإشكال.
وأبو المنهال: هو عبد الرحمن بن مطعم البناني.
ইয়াস ইবনে আব্দুল মুযানী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উদ্বৃত্ত পানি বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন।
5694 - عن عائشة قالت: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أن يمنع نقع البئر، يعني فضل الماء.
حسن: رواه أحمد (26311)، وابن حبان (4955) كلاهما من حديث محمد بن إسحاق قال: حدثني أبو الرجال محمد بن عبد الرحمن بن حارثة الأنصاري، عن أمه عمرة بنت عبد الرحمن، عن عائشة فذكرته.
ومحمد بن إسحاق مدلس إلا أنه صرح بالتحديث في رواية أحمد، كما أنه لم ينفرد به، فقد تابعه كل من:
- أبو أويس: وهو عبد اللَّه بن عبد اللَّه بن أويس الأصبحي، فرواه عن أبي الرجال بإسناده مثله، ومن طريقه رواه أحمد (24811).
- وعبد الرحمن بن أبي الرجال قال: سمعت أبي يحدث عن أمه عمرة، عن عائشة فذكرته. ومن طريقه رواه الحاكم (2/ 61)، وقال: صحيح الإسناد.
- وعبدة بن سليمان، عن حارثة، عن عمرة بإسناده مثله. رواه ابن ماجه (2479). وحارثة هو ابن أبي الرجال، وهو ضعيف عند جمهور أهل العلم.
- وسفيان الثوري، عن أبي الرجال، عن عمرة بإسناده مثله. رواه البيهقي (6/ 152)، وقال:"هكذا أتى به موصولًا، وإنما يعرف موصولًا من حديث عبد الرحمن بن أبي الرجال، عن أبيه".
ثم رواه من طريق عبد الرحمن بن أبي الرجال، وقال: وكذلك رواه محمد بن إسحاق بن يسار، عن أبي الرجال موصولًا.
ورواه أيضًا حارثة بن محمد عن عمرة موصولًا، إلا أن حارثة ضعيف.
والخلاصة أن الحديث صحيح أو حسن موصولًا، ولكن رواه مالك في الأقضية (32) عن أبي الرجال محمد بن عبد الرحمن، عن أمه عمرة بنت عبد الرحمن، أنها أخبرته أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"ولا يمنع نقع بئر". هكذا رواه مرسلًا.
قال ابن عبد البر في التمهيد (13/ 123):"ولا أعلم أحدًا من رواة الموطأ عن مالك أسند عنه هذا الحديث، وهو مرسل عند جميعهم فيما علمت هكذا".
وقال:"وذكره الدارقطني عن أبي صاعد، عن أبي علي الجرمي، عن أبي صالح كاتب الليث، عن الليث بن سعد، عن سعيد بن عبد الرحمن الجمحي، عن مالك بن أنس، عن أبي الرجال محمد بن عبد الرحمن بن حارثة، عن أمه عمرة بنت عبد الرحمن، عن عائشة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى أن يمنع نقع بئر. وهذا الإسناد -وإن كان غريبًا عن مالك- فقد رواه أبو قرة موسى بن طارق، عن مالك أيضًا". انتهى.
ثم ذهب يُسند الحديث من الطرق التي سبق ذكر بعضها.
وقوله:"لا يمنع نقع البئر" يعني فضل مائها، وهو تفسير لم يختلف في جملته، بل قد جاء هكذا في نسق الحديث مسندا، وتقع بئر هو ما بقي فيها من الماء بعد منفعة صاحبها.
وأما قوله:"لا يمنع فضل الماء ليمنع به الكلأ" فمعناه أن يكون حول البئر كلأ ليس عنده ماء غيره، ولا يمكن أصحاب المواشي رعيه إلا إذا تمكنوا من سقي بهائمهم من تلك البئر؛ لئلا يتضرروا بالعطش بعد الرعيّ، فيستلزم منعهم من الماء منعهم من الرعي. هذا هو تفسير الجمهور، كما قال ابن حجر في"الفتح" (5/
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম কূপের নক্ব (উদ্বৃত্ত পানি) আটকে রাখতে নিষেধ করেছেন। অর্থাৎ (তিনি) পানির অতিরিক্ত অংশকে (ব্যবহার করতে বাধা দিতে) নিষেধ করেছেন।
5695 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ثلاث لا يكلمهم اللَّه يوم القيامة،
ولا ينظر إليهم، ولا يزكيهم، ولهم عذاب أليم: رجل على فضل ماء بالفلاة يمنعه من ابن السبيل، ورجل بايع رجلًا بسلعة بعد العصر فحلف له باللَّه لأخذها بكذا وكذا فصدقه وهو على غير ذلك، ورجل بايع إماما لا يبايعه إلا لدنيا، فإن أعطاه منها وفى، وإن لم يعطه منها لم يفِ".
متفق عليه: رواه البخاري في المساقاة (2358)، ومسلم في الإيمان (108) كلاهما من حديث الأعمش، عن أبي صالح، عن أبي هريرة فذكر الحديث. واللفظ لمسلم. ولفظ البخاري نحوه، وزاد فيه: ثم قرأ هذه الآية {إِنَّ الَّذِينَ يَشْتَرُونَ بِعَهْدِ اللَّهِ وَأَيْمَانِهِمْ ثَمَنًا قَلِيلًا} [سورة آل عمران: 77].
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তিন শ্রেণির লোক এমন আছে, যাদের সাথে আল্লাহ কিয়ামতের দিন কথা বলবেন না, তাদের দিকে তাকাবেন না এবং তাদেরকে পবিত্র করবেন না। আর তাদের জন্য রয়েছে যন্ত্রণাদায়ক শাস্তি। (তারা হলো:) ১. এমন ব্যক্তি, যার কাছে মরুভূমিতে অতিরিক্ত পানি থাকে এবং সে মুসাফিরকে তা দিতে অস্বীকার করে; ২. এমন ব্যক্তি, যে আসরের পরে কোনো পণ্য বিক্রি করার জন্য অন্য ব্যক্তির কাছে আল্লাহর নামে শপথ করে যে, সে এটা এত এত দামে কিনেছিল, ফলে ক্রেতা তাকে বিশ্বাস করে নিল, অথচ সে (বিক্রেতা) মিথ্যাবাদী; ৩. এবং এমন ব্যক্তি, যে কোনো শাসকের হাতে কেবল দুনিয়াবী স্বার্থের জন্য বাইআত (আনুগত্যের শপথ) গ্রহণ করে। যদি শাসক তাকে কিছু দেয়, তবে সে আনুগত্য পূরণ করে। আর যদি তাকে কিছু না দেয়, তবে সে আনুগত্য পূরণ করে না।"
5696 - عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"ثلاثة لا يكلمهم اللَّه يوم القيامة، ولا ينظر إليهم: رجل حلف على سلعة لقد أعطى بها أكثر مما أعطى وهو كاذب، ورجل حلف على يمين كاذبة بعد العصر ليقتطع بها مال رجل مسلم، ورجل منع فضل ماء، فيقول اللَّه: اليوم أمنعك فضلي، كما منعت فضل ما لم تعمل يداك".
صحيح: رواه البخاري في المساقاة (2369)، وفي التوحيد (7446) عن عبد اللَّه بن محمد، حدثنا سفيان، عن عمرو، عن أبي صالح السمان، عن أبي هريرة فذكر الحديث.
وروي أيضًا عن عبد اللَّه بن عمرو، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"من منع فضل مائه، أو فضل كلأه، منعه اللَّه فضله يوم القيامة".
رواه أحمد (6673)، عن إسماعيل، عن ليث، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده فذكره. وليث هو ابن سليم، وفيه كلام معروف.
ورواه أيضًا (6722) بإسناد آخر عن محمد بن راشد، عن سليمان بن موسى، أن عبد اللَّه بن عمرو كتب إلى عامل له على أرض له: أن لا تمنع فضل مائك؛ فإني سمعت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"من منع فضل الماء ليمنع به فضل الكلأ، منعه اللَّه يوم القيامة فضله".
ومحمد بن راشد هو الخزاعي الدمشقي، نزيل البصرة، مختلف فيه، فوثّقه أحمد، وابن معين، والنسائي، وغيرهم. وتكلم فيه ابن حبان، فقال:"كان من أهل الورع والنسك، ولم يكن الحديث من صنعته، وكثر المناكير في روايته؛ فاستحق الترك". وبه أعله الهيثمي في"المجمع" (4/ 124).
وسليمان بن موسى هو الأشدق، لم يدرك عبد اللَّه بن عمرو؛ فروايته عنه منقطعة.
وللحديث أسانيد أخرى، هذه أصلحها.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তিন শ্রেণির লোক, যাদের সাথে আল্লাহ কিয়ামতের দিন কথা বলবেন না এবং তাদের দিকে (রহমতের দৃষ্টিতে) তাকাবেনও না: (প্রথমত) এমন ব্যক্তি যে কোনো পণ্যের উপর শপথ করে যে তাকে এর বিনিময়ে যা দেওয়া হয়েছে, তার থেকেও বেশি দেওয়া হয়েছিল, অথচ সে মিথ্যাবাদী; (দ্বিতীয়ত) এমন ব্যক্তি যে আসরের পর মিথ্যা কসম করে কোনো মুসলিম ব্যক্তির সম্পদ অন্যায়ভাবে গ্রাস করার জন্য; এবং (তৃতীয়ত) এমন ব্যক্তি যে অতিরিক্ত পানি আটকে রাখে (অন্যকে ব্যবহার করতে দেয় না)। তখন আল্লাহ বলবেন: আজ আমি আমার অনুগ্রহ থেকে তোমাকে বঞ্চিত করব, যেমন তুমি এমন অতিরিক্ত (বস্তু) আটকে রেখেছিলে যা তোমার হাত দ্বারা তৈরি হয়নি।"
5697 - عن أبي خداش حبان بن زيد الشرعبي، عن رجل من قرن، -وفي رواية: عن رجل من المهاجرين من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم قال: غزوت مع النبي صلى الله عليه وسلم ثلاثًا
أسمعه يقول:"المسلمون شركاء في ثلاث: في الكلأ، والماء، والنار".
صحيح: رواه أبو داود (3477) من وجهين: عن علي بن الجعد اللؤلؤي، حدثنا حريز بن عثمان، عن حبان بن زيد الشُّرعبي، عن رجل من قرن.
ح وحدثنا مسدد، حدثنا عيسى بن يونس، حدثنا حريز بن عثمان، حدثنا أبو خداش، عن رجل من المهاجرين من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم قال فذكره.
وإسناده صحيح. وأبو خداش هو حبان بن زيد الشرعبي.
والحديث أخرجه أيضًا الإمام أحمد (23082)، والبيهقي (6/ 150) كلاهما من طريق ثور بن يزيد الشامي، عن حريز بإسناده مثله.
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর একজন মুহাজির সাহাবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে তিনটি যুদ্ধে অংশগ্রহণ করেছিলাম। আমি তাকে বলতে শুনেছি: "মুসলমানগণ তিনটি বিষয়ে একে অপরের অংশীদার (সমান অংশীদার): ঘাস (চরাভূমি), পানি এবং আগুন।"
5698 - عن أبي هريرة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"ثلاث لا يُمْنَعَنَّ: الماء، والكلأ، والنار".
صحيح: رواه ابن ماجه (2473) عن محمد بن عبد اللَّه بن يزيد قال: حدثنا سفيان، عن أبي الزناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة فذكره.
وإسناده صحيح. وكذا صحّحه أيضًا البوصيري في زوائد ابن ماجه.
وأما ما روي عن ابن عباس مرفوعًا:"المسلمون شركاء في ثلاث: في الماء، والكلأ، والنار. وثمنه حرام" فهو ضعيف.
رواه ابن ماجه (2472) عن عبد اللَّه بن سعيد قال: حدثنا عبد اللَّه بن خراش بن حوشب الشيباني، عن العوَّام بن حوشب، عن مجاهد، عن ابن عباس فذكره.
وإسناده ضعيف من أجل عبد اللَّه بن خراش، وهو الشيباني، أبو جعفر الكوفي، وهو مجمع على ضعفه، وقد أطلق عليه ابن عمار الكذاب. ومع ذلك ذكره ابن حبان في الثقات (8/ 340)، وهو دليل على تساهله، وبه أعله البوصيري في زوائد ابن ماجه.
قلت: وفي قوله:"وثمنه حرام" نكارة.
وفي الباب ما روي عن بهيسة، عن أبيها قالت: استأذن أبي النبي صلى الله عليه وسلم، فدخل بينه وبين قميصه، فجعل يقبل ويلتزم، ثم قال: يا نبي اللَّه، ما الشيء الذي لا يحل منعه؟ قال:"الماء". قال: يا نبي اللَّه، ما الشيء الذي لا يحل منعه؟ قال:"الملح". قال: يا نبي اللَّه، ما الشيء الذي لا يحل منعه؟ قال:"أن تفعل الخير خير لك".
رواه أبو داود (3476)، والدارمي (2655)، وأحمد (15945، 15946، 15947) كلهم من طريق كهمس بن الحسن، عن سيار بن منظور -رجل من بني فزارة-، عن أبيه، عن امرأة يقال لها بهيسة، عن أبيها فذكره. وإسناده ضعيف من أجل ثلاثة مجاهيل في الإسناد:
الأول: بهيسة، لم تعرف، ولم يرو عنها غير منظور.
والثاني: منظور، لم يرو عنه غير ابنه سيار.
والثالث: سيار، لم يرو عنه غير كهمس بن الحسن.
فالإسناد مسلسل بالمجاهيل.
وفي التلخيص (3/ 65):"وأعله عبد الحق، وابن القطان بأن بهيسة لا تعرف، ولكن ذكرها ابن حبان وغيره في الصحابة".
ولكن الحافظ نفسه رد على قول ابن حبان في التهذيب بقول عبد الحق وابن القطان بأنها مجهولة، وقال: وهي كذلك. فتنبه.
وكذلك لا يصح ما روي عن عائشة قالت: يا رسول اللَّه، ما الشيء الذي لا يحل منعه؟ قال:"الماء، والملح، والنار". قالت: قلت: يا رسول اللَّه، هذا الماء قد عرفناه، فما بال الملح والنار؟ قال:"يا حميراء، من أعطى نارًا فكأنما تصدق بجميع ما أنضجت تلك النّار، ومن أعطى ملحا فكأنما تصدق بجميع ما طيب ذلك الملح، ومن سقى مسلما شربة من ماء حيث يوجد الماء فكأنما أعتق رقبة، ومن سقى مسلما شربة من ماء حيث لا يوجد الماء فكأنما أحياها".
رواه ابن ماجه (2474) عن عمار بن خالد الواسطي قال: حدثنا علي بن غراب، عن زهير بن مرزوق، عن علي بن زيد بن جُدعان، عن سعيد بن المسيب، عن عائشة فذكرته.
وفيه سلسلة من الضعفاء:
علي بن غراب -وهو الفزاري مولاهم الكوفي- مختلف فيه، فضعفه أبو داود، والجوزجاني، وبالغ في تضعيفه ابن حبان، فقال:"حدث بالأشياء الموضوعة؛ فبطل الاحتجاج به". ومشَّاه الإمام أحمد، وأبو حاتم، والنسائي، وغيرهم إلا أنه مدلس، وقد عنعن. وشيخه زهير بن مرزوق مجهول.
وشيخه علي بن زيد بن جدعان التيمي البصري مجمع على ضعفه.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তিনটি জিনিস (অন্যকে দিতে) বারণ করা উচিত নয়: পানি, চারণভূমি (বা তৃণ) এবং আগুন (বা অগ্নিশক্তি)।
5699 - عن رافع بن خديج قال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول:"شر الكسب مهر البغي، وثمن الكلب، وكسب الحجام".
صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1568: 40) عن محمد بن حاتم، حدثنا يحيى بن سعيد القطان، عن محمد بن يوسف قال: سمعت السائب بن يزيد يحدث عن رافع بن خديج فذكره.
ورواه (41) من وجه آخر عن السائب بن يزيد به بلفظ:"ثمن الكلب خيث، ومهر البغي خبيث، وكسب الحجام خبيث".
রাফে' ইবনে খাদীজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "সবচেয়ে নিকৃষ্ট উপার্জন হলো ব্যভিচারিণীর পারিশ্রমিক, কুকুরের মূল্য এবং শিঙ্গা লাগানোর (হিজামা) উপার্জন।"
5700 - عن أبي مسعود عقبة بن عمرو قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن كسب الحجام.
حسن: رواه ابن ماجه (2165) عن هشام بن عمار قال: حدثنا يحيى بن حمزة قال: حدثني
الأوزاعي، عن الزهري، عن أبي بكر بن عبد الرحمن بن الحارث بن هشام، عن أبي مسعود عقبة ابن عمرو فذكره.
وإسناده حسن من أجل هشام بن عمار؛ فإنه حين الحديث، وقد صحّحه البوصيري في زوائده.
আবু মাসঊদ উকবাহ ইবনু আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙ্গা লাগানোর (কাপিংয়ের) উপার্জন থেকে নিষেধ করেছেন।
5701 - عن جابر أن النبي صلى الله عليه وسلم سئل عن كسب الحجام، فقال:"اعلفه ناضحك".
صحيح: رواه أحمد (14290، 15079)، وأبو يعلى (2114) كلاهما من حديث سفيان بن عيينة، عن أبي الزبير، سمع جابرا يقول: فذكره. والناضح هو البعير.
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে শিঙ্গা লাগানোর (হিজামার) উপার্জন সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল। তিনি বললেন: "তা তুমি তোমার পানি বহনকারী উটকে (বা পশুকে) খেতে দাও।"
5702 - عن أنس بن مالك أنه قال: احتجم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، حجمه أبو طيبة، فأمر له رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بصاع من تمر، وأمر أهله أن يُخَفِّفُوا عنه من خراجه.
متفق عليه: رواه مالك في الاستئذان (26) عن حميد الطويل، عن أنس بن مالك فذكره. ورواه البخاري في الطب (5696)، ومسلم في المساقاة (1577: 62) من وجه آخر عن حميد الطويل، عن أنس رضي الله عنه أنه سئل عن أجر الحجام؟ فقال: احتجم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، حجمه أبو طيبة، وأعطاه صاعين من طعام، وكلم مواليه، فخَفَّفُوا عنه، وقال:"إنّ أمثل ما تداويتم به الحجامة، والقُسْط البحري". واللفظ البخاري.
ورواه البخاري في الإجارة (2280) من طريق عمرو بن عامر (هو الأنصاري) قال: سمعت أنسًا يقول: كان النبي صلى الله عليه وسلم يحتجم، ولم يكن يظلم أحدًا أجره.
আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙ্গা লাগালেন (রক্তমোক্ষণ করালেন)। আবূ তাইবাহ তাঁকে শিঙ্গা লাগালেন। অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার জন্য এক সা‘ পরিমাণ খেজুর দেওয়ার নির্দেশ দিলেন এবং তার মালিকদেরকে নির্দেশ দিলেন যেন তার খাজনা (বা নির্ধারিত কর) হ্রাস করে দেয়।
5703 - عن ابن عباس قال: حجم النبي صلى الله عليه وسلم عبدٌ لبني بياضة، فأعطاه النبي صلى الله عليه وسلم أجره، وكلم سيده، فخَفَّف عنه من ضريبته، ولو كان سحتا لم يُعطه النبي صلى الله عليه وسلم.
متفق عليه: رواه مسلم في المساقاة (1202: 66) من طريق عبد الرزاق أخبرنا معمر، عن عاصم، عن الشعبي، عن ابن عباس فذكره.
ورواه البخاري في البيوع (2103) من طريق عكرمة، عن ابن عباس مختصرًا بلفظ: احتجم النبي صلى الله عليه وسلم، وأعطى الذي حجمه، ولو كان حراما لم يعطه.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: বনু বায়াদা গোত্রের একজন গোলাম নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে শিঙ্গা (হিজামা) লাগাল। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে তার মজুরি প্রদান করলেন এবং তিনি তার (গোলামের) মনিবের সাথে কথা বললেন, ফলে মনিব তার ধার্যকৃত খাজনা (বা নির্দিষ্ট পরিমাণ প্রদেয় অর্থ) কমিয়ে দিলেন। যদি এটি হারাম বা অবৈধ উপার্জন (সূহত) হতো, তাহলে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে তা দিতেন না।
5704 - عن محيصة أنه سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن كسب حجام له، فنهاه عنه. فلم يزل به يكلمه حتى قال:"اعلفه ناضحك، وأطعمه رقيقك".
صحيح: رواه أحمد (23693)، والشافعي في المسند (2/ 166)، والحميدي (878)، والبيهقي (9/ 337)، كلهم من حديث سفيان، عن الزهري، عن حرام بن سعد بن محيصة، عن أبيه، عن محيصة فذكره.
وإسناده صحيح. وقد تابعه محمد بن إسحاق، عن الزهري، إلا أنه قال فيه: عن حرام بن
ساعدة بن محصة بن مسعود، عن أبيه (أي ساعدة) عن جده محيصة بن مسعود قال فذكر الحديث.
وهذا الإسناد يؤكد أن قول حرام بن سعد بن محيصة:"عن أبيه" يقصد به جده"محيصة" لأن الصحبة لجده محيصة لا لساعدة.
وهذان الإسنادان متصلان صحيحان وابن إسحاق وإن كان عنعن، فإنه توبع.
ورواه مالك في الاستئذان (28) عن ابن شهاب، عن ابن محيصة الأنصاري، أحد بني حارثة أنه استأذن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في إجارة الحجام، فنهاه عنها. فلم يزل يسأله ويستأذنه حتى قال:"اعلفه نُضَّاحك". يعني رفيقك.
هذه رواية يحيى بن يحيى الليثي، وهو غلط لا إشكال فيه؛ فإنه ليس لسعد بن محيصة صحبة، فكيف لابنه حرام، كما قال ابن عبد البر.
وقد رواه أبو داود (3422) عن عبد اللَّه بن مسلمة القعنبي، والترمذي (1277) عن قتيبة، كلاهما عن مالك، عن ابن شهاب، عن ابن محيصة، عن أبيه أنه استأذن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فذكره.
وقال الترمذي: عن ابن شهاب، عن ابن محيصة أخي بني حارثة، عن أبيه أنه استأذن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فذكره.
ورواه ابن ماجه (2166) من طريق ابن أبي ذئب، عن الزهري، عن حرام بن محيصة، عن أبيه أنه سأل رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فذكره. وقوله: عن أبيه أي محيصة.
وهذه روايات تقوي ما رواه ابن إسحاق بأن القصة وقعت لمحيصة -بضم الميم، وفتح المهملة، وتشديد التحتانية- ابن مسعود الخزرجي أبو سعيد المدني، وقيل أوسي، وأنه كان أصغر من أخيه حويصة، وأسلم قبله. ومن قال غير ذلك فقد أخطأ.
ومحيصة ليس هو الحجام، وإنما الحجام هو غلامه، كما في الحديث الثاني.
মুহায়্যিসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে তাঁর একজন শিঙ্গা লাগানো (হাজ্জাম) গোলামের উপার্জন সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলেন। তখন তিনি তাকে তা থেকে নিষেধ করলেন। তিনি (মুহায়্যিসা) ক্রমাগত তাঁর সাথে কথা বলতে থাকলে, শেষ পর্যন্ত নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তা (উপার্জন) তোমার বাহন পশুকে খেতে দাও, এবং তোমার গোলামদেরকে খাওয়াও।"
5705 - عن محيصة بن مسعود الأنصاري أنه كان له غلام حجام يقال له: نافع أبو طيبة، فانطلق إلى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يسأله عن خراجه، فقال:"لا تقربه". فردد على رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فقال:"اعلف به الناضح، واجعله في كِرَشه".
حسن: رواه الإمام أحمد (23689) والطبراني في الكبير (20/ 312) والبخاري في التاريخ الكبير (8/ 53 - 54) والبيهقي (9/ 337) كلهم من طريق الليث، قال: حدثني يزيد بن أبي حبيب، عن أبي عفير الأنصاري، عن محمد بن سهل بن أبي حثمة، عن محيصة بن مسعود فذكره. واللفظ لأحمد.
وإسناده حسن من أجل أبي عفير الأنصاري، وثّقه العجلي فقال: من بني حارثة، تابعي ثقة (2002). وهو من رجال"التعجيل" فراجعه، ففيه تفاصيل أخرى.
وأما أبو طيبة فقيل اسمه نافع كما مضى، وقيل: اسمه دينار، وقيل: اسمه ميسرة. وكل هذا لا يصح، وقد اشتهر بكنه، ولذا اكتفى الشيخان بذكر كنيته، ولم يذكرا اسمه، وأي كان اسمه فهو
أبو طيبة حجم النبي صلى الله عليه وسلم.
মুহাইয়্যিসা ইবনু মাসউদ আল-আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর নাফে’ আবূ ত্বাইবাহ নামক একজন রক্তমোক্ষণকারী (হাজ্জাম) গোলাম ছিল। সে (গোলামটি) তার উপার্জনের (মজুরি) ব্যাপারে জিজ্ঞাসা করার জন্য রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট গেল। তিনি (নাবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “তুমি এটি গ্রহণ করো না।” সে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট বারবার বলতে থাকলে তিনি বললেন: “তুমি তা দিয়ে সওয়ারীর পশুকে খাদ্য দাও এবং তা এর পেটে ঢুকিয়ে দাও।”
5706 - عن علي قال: احتجم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، وأمرني أن أعطي الحجام أجره.
حسن: رواه أبو داود الطيالسي (148) عن ورقاء، عن عبد الأعلى، عن أبي جميلة، عن علي فذكره.
ورواه ابن ماجه (2163)، وأحمد (692)، والبيهقي (9/ 338)، والترمذي في الشمائل (355)، كلهم من طريق أبي داود الطيالسي.
ورواه أيضًا ابن ماجه من طريق يزيد بن هارون، عن ورقاء به مثله.
وعبد الأعلى هو ابن عامر الثعلبي الكوفي ضُعف من قبل حفظه، ولذا قال الحافظ في التقريب:"صدوق يهم".
وقد تابعه أبو جناب، عن أبي جميلة فقال: سمعت عليا يقول:"احتجم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، ثم قال للحجام حين فرغ:"كم خراجك؟". قال: صاعان. فوضع عنه صاعا، وأمرني، فأعطيته صاعا.
رواه ابن أبي شيبة (6/ 267)، وعنه أحمد (1136) عن وكيع، عن أبي جناب فذكره.
وأبو جناب هو يحيى بن أبي حية الكلبي ضعيف، وبمجموع طريقين يكون الحديث حسنًا.
وأبو جميلة هو ميسرة بن يعقوب الطهوي الكوفي صاحب راية علي. وقد صرح بالسماع عن علي، وهو ممكن لقربه من حمل الراية له.
ولكن سأل عبد الرحمن بن أبي حاتم أباه عن حديث رواه حكيم بن زيد، عن عبد الأعلى الثعلبي. . . فقال: هذا خطأ، والصحيح هو أبو جميلة، عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسل. (العلل 2/ 321 - 322). فلعله يقصد هذا الإسناد الذي ليس فيه التصريح بالسماع، وإلا فقد روي ورقاء عن عبد الأعلى، وفي بعض طرقه التصريح بالسماع من علي.
আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙ্গা লাগালেন এবং আমাকে নির্দেশ দিলেন যে, আমি যেন শিঙ্গা প্রদানকারীকে তার পারিশ্রমিক দিয়ে দেই।
5707 - عن جابر بن عبد اللَّه قال: دعا النبي صلى الله عليه وسلم أبا طيبة فحجمه قال: فسأله"كم ضريبتك؟". قال: ثلاثة آصع. قال: فوضع عنه صاعا.
صحيح: رواه أحمد (14809)، وأبو يعلى (1777)، كلاهما من طريق أبي عوانة، حدثنا أبو بشر جعفر بن أبي وحشية، عن سليمان بن قيس، عن جابر بن عبد اللَّه فذكره.
ورواه ابن حبان في صحيحه (3536) من وجه آخر عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد اللَّه أن النبي صلى الله عليه وسلم أمر أبا طيبة أن يأتيه مع غيبوبة الشمس، فأمره أن يضع المحاجم مع إفطار الصائم، فحجمه، ثم سأله:"كم خراجك؟" قال: صاعين فوضع النبي صلى الله عليه وسلم عنه صاعا.
وفي الباب ما روي عن ابن عمر أن النبي صلى الله عليه وسلم دعا حجاما، فحجمه، وسأله"كم خراجك؟". فقال: ثلاثة آصع. قال: فوضع عنه صاعا وأعطاه أجره.
رواه الترمذي في الشمائل (357) عن هارون بن إسحاق، حدثنا عبدة، عن ابن أبي ليلى، عن
نافع، عن ابن عمر فذكره.
وابن أبي ليلى هو محمد بن عبد الرحمن بن أبي ليلى الأنصاري الكوفي ضعيف عند جمهور أهل العلم.
فقه هذا الباب:
تدل أحاديث هذا الباب على أن أجرة الحجام ليست بحرام، وإن خبثها من قبل دناءة مخرجها، ولذا يحمل النهي عنه على التنزيه لدناءته، وفيه ترغيب في تطهير الطعام إلى ما هو أطيب وأحسن؛ لأن بعض الكسب يكون أعلى وأفضل، وبعضه يكون أدنى وأوكح.
أفاده الخطابي في"المعالم" ولكن ذكرته ملخصًا؛ لأن في بعض كلامه نظر.
وقد ذهب جمهور العلماء إلى أن النهي عن كسب الحجام منسوخ بأحاديث الباب، سواء شرط ذلك أو لم يشترط؛ فإنه يجوز للحجام أخذ الأجرة على عمله، إن كانت هذه مهنته، بخلاف من لم تكن هذه مهنته فالتنزه منه أفضل.
জাবির ইবন আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম আবূ তাইবাহকে ডাকলেন এবং তিনি তাঁকে শিঙ্গা লাগালেন (রক্তমোক্ষণ করলেন)। অতঃপর তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে জিজ্ঞাসা করলেন: "তোমার পারিশ্রমিক কত?" আবূ তাইবাহ বললেন: "তিন সা' (Saa')।" বর্ণনাকারী বলেন: তখন তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার থেকে এক সা' কমিয়ে দিলেন।
