আল-জামি` আল-কামিল
5701 - عن جابر أن النبي صلى الله عليه وسلم سئل عن كسب الحجام، فقال:"اعلفه ناضحك".
صحيح: رواه أحمد (14290، 15079)، وأبو يعلى (2114) كلاهما من حديث سفيان بن عيينة، عن أبي الزبير، سمع جابرا يقول: فذكره. والناضح هو البعير.
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে শিঙ্গা লাগানোর (হিজামার) উপার্জন সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল। তিনি বললেন: "তা তুমি তোমার পানি বহনকারী উটকে (বা পশুকে) খেতে দাও।"
5702 - عن أنس بن مالك أنه قال: احتجم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، حجمه أبو طيبة، فأمر له رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بصاع من تمر، وأمر أهله أن يُخَفِّفُوا عنه من خراجه.
متفق عليه: رواه مالك في الاستئذان (26) عن حميد الطويل، عن أنس بن مالك فذكره. ورواه البخاري في الطب (5696)، ومسلم في المساقاة (1577: 62) من وجه آخر عن حميد الطويل، عن أنس رضي الله عنه أنه سئل عن أجر الحجام؟ فقال: احتجم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، حجمه أبو طيبة، وأعطاه صاعين من طعام، وكلم مواليه، فخَفَّفُوا عنه، وقال:"إنّ أمثل ما تداويتم به الحجامة، والقُسْط البحري". واللفظ البخاري.
ورواه البخاري في الإجارة (2280) من طريق عمرو بن عامر (هو الأنصاري) قال: سمعت أنسًا يقول: كان النبي صلى الله عليه وسلم يحتجم، ولم يكن يظلم أحدًا أجره.
আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙ্গা লাগালেন (রক্তমোক্ষণ করালেন)। আবূ তাইবাহ তাঁকে শিঙ্গা লাগালেন। অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার জন্য এক সা‘ পরিমাণ খেজুর দেওয়ার নির্দেশ দিলেন এবং তার মালিকদেরকে নির্দেশ দিলেন যেন তার খাজনা (বা নির্ধারিত কর) হ্রাস করে দেয়।
5703 - عن ابن عباس قال: حجم النبي صلى الله عليه وسلم عبدٌ لبني بياضة، فأعطاه النبي صلى الله عليه وسلم أجره، وكلم سيده، فخَفَّف عنه من ضريبته، ولو كان سحتا لم يُعطه النبي صلى الله عليه وسلم.
متفق عليه: رواه مسلم في المساقاة (1202: 66) من طريق عبد الرزاق أخبرنا معمر، عن عاصم، عن الشعبي، عن ابن عباس فذكره.
ورواه البخاري في البيوع (2103) من طريق عكرمة، عن ابن عباس مختصرًا بلفظ: احتجم النبي صلى الله عليه وسلم، وأعطى الذي حجمه، ولو كان حراما لم يعطه.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: বনু বায়াদা গোত্রের একজন গোলাম নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে শিঙ্গা (হিজামা) লাগাল। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে তার মজুরি প্রদান করলেন এবং তিনি তার (গোলামের) মনিবের সাথে কথা বললেন, ফলে মনিব তার ধার্যকৃত খাজনা (বা নির্দিষ্ট পরিমাণ প্রদেয় অর্থ) কমিয়ে দিলেন। যদি এটি হারাম বা অবৈধ উপার্জন (সূহত) হতো, তাহলে নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে তা দিতেন না।
5704 - عن محيصة أنه سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن كسب حجام له، فنهاه عنه. فلم يزل به يكلمه حتى قال:"اعلفه ناضحك، وأطعمه رقيقك".
صحيح: رواه أحمد (23693)، والشافعي في المسند (2/ 166)، والحميدي (878)، والبيهقي (9/ 337)، كلهم من حديث سفيان، عن الزهري، عن حرام بن سعد بن محيصة، عن أبيه، عن محيصة فذكره.
وإسناده صحيح. وقد تابعه محمد بن إسحاق، عن الزهري، إلا أنه قال فيه: عن حرام بن
ساعدة بن محصة بن مسعود، عن أبيه (أي ساعدة) عن جده محيصة بن مسعود قال فذكر الحديث.
وهذا الإسناد يؤكد أن قول حرام بن سعد بن محيصة:"عن أبيه" يقصد به جده"محيصة" لأن الصحبة لجده محيصة لا لساعدة.
وهذان الإسنادان متصلان صحيحان وابن إسحاق وإن كان عنعن، فإنه توبع.
ورواه مالك في الاستئذان (28) عن ابن شهاب، عن ابن محيصة الأنصاري، أحد بني حارثة أنه استأذن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في إجارة الحجام، فنهاه عنها. فلم يزل يسأله ويستأذنه حتى قال:"اعلفه نُضَّاحك". يعني رفيقك.
هذه رواية يحيى بن يحيى الليثي، وهو غلط لا إشكال فيه؛ فإنه ليس لسعد بن محيصة صحبة، فكيف لابنه حرام، كما قال ابن عبد البر.
وقد رواه أبو داود (3422) عن عبد اللَّه بن مسلمة القعنبي، والترمذي (1277) عن قتيبة، كلاهما عن مالك، عن ابن شهاب، عن ابن محيصة، عن أبيه أنه استأذن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فذكره.
وقال الترمذي: عن ابن شهاب، عن ابن محيصة أخي بني حارثة، عن أبيه أنه استأذن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فذكره.
ورواه ابن ماجه (2166) من طريق ابن أبي ذئب، عن الزهري، عن حرام بن محيصة، عن أبيه أنه سأل رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فذكره. وقوله: عن أبيه أي محيصة.
وهذه روايات تقوي ما رواه ابن إسحاق بأن القصة وقعت لمحيصة -بضم الميم، وفتح المهملة، وتشديد التحتانية- ابن مسعود الخزرجي أبو سعيد المدني، وقيل أوسي، وأنه كان أصغر من أخيه حويصة، وأسلم قبله. ومن قال غير ذلك فقد أخطأ.
ومحيصة ليس هو الحجام، وإنما الحجام هو غلامه، كما في الحديث الثاني.
মুহায়্যিসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে তাঁর একজন শিঙ্গা লাগানো (হাজ্জাম) গোলামের উপার্জন সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলেন। তখন তিনি তাকে তা থেকে নিষেধ করলেন। তিনি (মুহায়্যিসা) ক্রমাগত তাঁর সাথে কথা বলতে থাকলে, শেষ পর্যন্ত নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তা (উপার্জন) তোমার বাহন পশুকে খেতে দাও, এবং তোমার গোলামদেরকে খাওয়াও।"
5705 - عن محيصة بن مسعود الأنصاري أنه كان له غلام حجام يقال له: نافع أبو طيبة، فانطلق إلى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يسأله عن خراجه، فقال:"لا تقربه". فردد على رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فقال:"اعلف به الناضح، واجعله في كِرَشه".
حسن: رواه الإمام أحمد (23689) والطبراني في الكبير (20/ 312) والبخاري في التاريخ الكبير (8/ 53 - 54) والبيهقي (9/ 337) كلهم من طريق الليث، قال: حدثني يزيد بن أبي حبيب، عن أبي عفير الأنصاري، عن محمد بن سهل بن أبي حثمة، عن محيصة بن مسعود فذكره. واللفظ لأحمد.
وإسناده حسن من أجل أبي عفير الأنصاري، وثّقه العجلي فقال: من بني حارثة، تابعي ثقة (2002). وهو من رجال"التعجيل" فراجعه، ففيه تفاصيل أخرى.
وأما أبو طيبة فقيل اسمه نافع كما مضى، وقيل: اسمه دينار، وقيل: اسمه ميسرة. وكل هذا لا يصح، وقد اشتهر بكنه، ولذا اكتفى الشيخان بذكر كنيته، ولم يذكرا اسمه، وأي كان اسمه فهو
أبو طيبة حجم النبي صلى الله عليه وسلم.
মুহাইয়্যিসা ইবনু মাসউদ আল-আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর নাফে’ আবূ ত্বাইবাহ নামক একজন রক্তমোক্ষণকারী (হাজ্জাম) গোলাম ছিল। সে (গোলামটি) তার উপার্জনের (মজুরি) ব্যাপারে জিজ্ঞাসা করার জন্য রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট গেল। তিনি (নাবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “তুমি এটি গ্রহণ করো না।” সে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট বারবার বলতে থাকলে তিনি বললেন: “তুমি তা দিয়ে সওয়ারীর পশুকে খাদ্য দাও এবং তা এর পেটে ঢুকিয়ে দাও।”
5706 - عن علي قال: احتجم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، وأمرني أن أعطي الحجام أجره.
حسن: رواه أبو داود الطيالسي (148) عن ورقاء، عن عبد الأعلى، عن أبي جميلة، عن علي فذكره.
ورواه ابن ماجه (2163)، وأحمد (692)، والبيهقي (9/ 338)، والترمذي في الشمائل (355)، كلهم من طريق أبي داود الطيالسي.
ورواه أيضًا ابن ماجه من طريق يزيد بن هارون، عن ورقاء به مثله.
وعبد الأعلى هو ابن عامر الثعلبي الكوفي ضُعف من قبل حفظه، ولذا قال الحافظ في التقريب:"صدوق يهم".
وقد تابعه أبو جناب، عن أبي جميلة فقال: سمعت عليا يقول:"احتجم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، ثم قال للحجام حين فرغ:"كم خراجك؟". قال: صاعان. فوضع عنه صاعا، وأمرني، فأعطيته صاعا.
رواه ابن أبي شيبة (6/ 267)، وعنه أحمد (1136) عن وكيع، عن أبي جناب فذكره.
وأبو جناب هو يحيى بن أبي حية الكلبي ضعيف، وبمجموع طريقين يكون الحديث حسنًا.
وأبو جميلة هو ميسرة بن يعقوب الطهوي الكوفي صاحب راية علي. وقد صرح بالسماع عن علي، وهو ممكن لقربه من حمل الراية له.
ولكن سأل عبد الرحمن بن أبي حاتم أباه عن حديث رواه حكيم بن زيد، عن عبد الأعلى الثعلبي. . . فقال: هذا خطأ، والصحيح هو أبو جميلة، عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسل. (العلل 2/ 321 - 322). فلعله يقصد هذا الإسناد الذي ليس فيه التصريح بالسماع، وإلا فقد روي ورقاء عن عبد الأعلى، وفي بعض طرقه التصريح بالسماع من علي.
আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙ্গা লাগালেন এবং আমাকে নির্দেশ দিলেন যে, আমি যেন শিঙ্গা প্রদানকারীকে তার পারিশ্রমিক দিয়ে দেই।
5707 - عن جابر بن عبد اللَّه قال: دعا النبي صلى الله عليه وسلم أبا طيبة فحجمه قال: فسأله"كم ضريبتك؟". قال: ثلاثة آصع. قال: فوضع عنه صاعا.
صحيح: رواه أحمد (14809)، وأبو يعلى (1777)، كلاهما من طريق أبي عوانة، حدثنا أبو بشر جعفر بن أبي وحشية، عن سليمان بن قيس، عن جابر بن عبد اللَّه فذكره.
ورواه ابن حبان في صحيحه (3536) من وجه آخر عن أبي الزبير، عن جابر بن عبد اللَّه أن النبي صلى الله عليه وسلم أمر أبا طيبة أن يأتيه مع غيبوبة الشمس، فأمره أن يضع المحاجم مع إفطار الصائم، فحجمه، ثم سأله:"كم خراجك؟" قال: صاعين فوضع النبي صلى الله عليه وسلم عنه صاعا.
وفي الباب ما روي عن ابن عمر أن النبي صلى الله عليه وسلم دعا حجاما، فحجمه، وسأله"كم خراجك؟". فقال: ثلاثة آصع. قال: فوضع عنه صاعا وأعطاه أجره.
رواه الترمذي في الشمائل (357) عن هارون بن إسحاق، حدثنا عبدة، عن ابن أبي ليلى، عن
نافع، عن ابن عمر فذكره.
وابن أبي ليلى هو محمد بن عبد الرحمن بن أبي ليلى الأنصاري الكوفي ضعيف عند جمهور أهل العلم.
فقه هذا الباب:
تدل أحاديث هذا الباب على أن أجرة الحجام ليست بحرام، وإن خبثها من قبل دناءة مخرجها، ولذا يحمل النهي عنه على التنزيه لدناءته، وفيه ترغيب في تطهير الطعام إلى ما هو أطيب وأحسن؛ لأن بعض الكسب يكون أعلى وأفضل، وبعضه يكون أدنى وأوكح.
أفاده الخطابي في"المعالم" ولكن ذكرته ملخصًا؛ لأن في بعض كلامه نظر.
وقد ذهب جمهور العلماء إلى أن النهي عن كسب الحجام منسوخ بأحاديث الباب، سواء شرط ذلك أو لم يشترط؛ فإنه يجوز للحجام أخذ الأجرة على عمله، إن كانت هذه مهنته، بخلاف من لم تكن هذه مهنته فالتنزه منه أفضل.
জাবির ইবন আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম আবূ তাইবাহকে ডাকলেন এবং তিনি তাঁকে শিঙ্গা লাগালেন (রক্তমোক্ষণ করলেন)। অতঃপর তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে জিজ্ঞাসা করলেন: "তোমার পারিশ্রমিক কত?" আবূ তাইবাহ বললেন: "তিন সা' (Saa')।" বর্ণনাকারী বলেন: তখন তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার থেকে এক সা' কমিয়ে দিলেন।
5708 - عن ابن عمر قال: نهى النبي صلى الله عليه وسلم عن عسب الفحل.
صحيح: رواه البخاري في الإجارة (2284) عن مسدد، حدثنا عبد الوارث وإسماعيل بن إبراهيم، عن علي بن الحكم، عن نافع، عن ابن عمر فذكره.
ورواه أحمد (4630) عن إسماعيل، عن علي بن الحكم. وفيه:"نهى عن ثمن عسب الفحل".
قوله:"عسب الفحل" الفحل الذكر من كل حيوان، فرسا كان، أو جملا، أو تيسا، أو غير ذلك. وعسبه ماؤه. وعسبه أيضًا ضرابه.
ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আসবুল ফাহল (পশুর প্রজনন সেবার মূল্য/উপার্জন) গ্রহণ করতে নিষেধ করেছেন।
5709 - عن جابر قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع ضراب الجمل، وعن بيع الماء والأرض لتُحرث. فعن ذلك نهى النبي صلى الله عليه وسلم.
صحيح: رواه مسلم في المساقاة (1565: 35) عن إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا روح بن عبادة، حدثنا ابن جريج، أخبرني أبو الزبير، أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يقول فذكره.
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উটের প্রজনন সেবার বিনিময় (মূল্য গ্রহণ), এবং চাষাবাদের জন্য পানি ও জমিন বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন। নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এসব বিষয়ে নিষেধ করেছেন।
5710 - عن أبي هريرة قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن كسب الحجام، وكسب البغي، وثمن الكلب، وعسب الفحل.
حسن: رواه النسائي (4673)، وأحمد (7976) كلاهما من حديث محمد بن جعفر، حدثنا شعبة، عن المغيرة (وهو ابن مقسم الضبي)، قال: سمعت عبد الرحمن بن أبي نُعم قال: سمعت أبا هريرة يقول فذكره. واللفظ لأحمد. والنسائي لم يذكر"كسب البغي".
وإسناده حسن من أجل عبد الرحمن بن أبي نُعم -بضم النون، وسكون المهملة-، ضعفه ابن معين، ووثّقه النسائي، وابن حبان، وابن سعد، وهو حسن الحديث. قال ابن حبان: كان من عباد أهل الكوفة ممن يصبر على الجوع الدائم.
وذكر أحمد في آخر الحديث قون أبي هريرة قال:"وعسب الفحل". قال: قال أبو هريرة:"هذه من كيسي". وقد استشكل قوله هذا كثير من أهل العلم مع أنه ثبت عنه مرفوعًا في رواية أخرى، فلعله كان يزيد أولا في الحديث عنده قياسا على كسب البغي، ثم وقف على روايات بعض الصحابة، فتراجع عن قوله، ورواه مرفوعًا.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শিঙাদাতার (কাপিং থেরাপিস্টের) উপার্জন, ব্যভিচারিণীর উপার্জন, কুকুরের মূল্য এবং (প্রজননের জন্য) পুরুষ পশুর ভাড়া (গ্রহণ করতে) নিষেধ করেছেন।
5711 - عن أبي هريرة قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن ثمن الكلب، وعسب الفحل.
صحيح: رواه ابن ماجه (2160)، والنسائي (4675)، والدارمي (2665) كلهم من طريق ابن فضيل، عن الأعمش، عن أبي حازم، عن أبي هريرة فذكره، إلا أنه سقط"أبو هريرة" في سنن النسائي المطبوعة، وثبت ذلك في الكبرى (6226)، وكذا ذكره أيضًا المزي في التحفة (10/ 84 ح 13407)، وهو كذلك في المصادر الأخرى. ولفظ النسائي:"عسب التيس".
وإسناده صحيح. وأبو حازم هو سلمان الأشجعي.
ولحديث أبي هريرة أسانيد أخرى، وزاد في بعضها:"وكسب المومسة". رواه أحمد (8389)، والدارمي (2624) كلاهما من حديث القاسم بن الفضل، عن أبيه، عن معاوية المهري قال: قال لي أبو هريرة فذكر الحديث.
وأبو القاسم هو الفضل بن معدان الحدانيّ، ذكره ابن حبان في الثقات (7/ 317)، وله ترجمة في التاريخ الكبير، والجرح والتعديل بدون توثيق أو تجريح، فهو في عداد المجهولين.
وكذلك شيخه معاوية المهري لم يرو عنه إلا الفضل بن معدان، وله ترجمة في التاريخ الكبير، وذكره ابن حبان في الثقات (5/ 414)، ولم يوثّقه غيره، فهو أيضًا في عداد المجهولين.
عن أبي سعيد الخدري قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن عسب الفحل.
حسن: رواه النسائي (4674)، والدارقطني (4713)، والبيهقي (5/ 339)، كلهم من طريق سفيان، عن هشام، عن ابن أبي نُعم، عن أبي سعيد الخدري فذكره.
وإسناده حسن من أجل هشام، وهو ابن عائذ الأسدي، أبو كليب الكوفي، وثّقه أحمد، وابن معين، وأبو داود، والعجلي، ولكن قال أبو حاتم: شيخ. ولذا جعله الحافظ في مرتبة"صدوق".
وظن الذهبي أنه هشام أبو كليب غير ابن عائذ، فأدخله في الميزان، وقال:"حديثه منكر، وراويه لا يعرف". مع أنه ذكر من شيوخه ابن أبي نعم، ومن الرواة عنه سفيان الثوري، وقال في الكاشف:"ثقة". وتبعه الحافظ ابن حجر، فأدخله في لسان الميزان، ولم يعقب على الذهبي، مع أنه من رجال التهذيب، وقال في التقريب:"صدوق".
وفي الباب ما روي عن علي بن أبي طالب، عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه نهى عن عسب الفحل في حديث طويل.
رواه أحمد (1254)، وأبو يعلى (357) كلاهما من حديث حسن بن ذكوان، عن حبيب بن أبي ثابت، عن عاصم بن ضمرة، عن علي فذكره.
وحسن بن ذكوان أبو سلمة البصري ضعيف، ضعفه ابن معين، وأبو حاتم، والنسائي، وغيرهم.
ثم إن حسن بن ذكوان لم يسمع هذا الحديث من حبيب بن أبي ثابت، بينهما عمرو بن خالد، وهو متروك الحديث، كما قال ابن عدي في الكامل (5/ 1776)، إلا أن الحسن بن ذكوان أسقطه من شدة ضعفه.
قوله:"عسب الفحل" هو ماؤه فرسا كان، أو بعيرا، أو تيسا. فأخذ الأجرة عليه حرام لدناءته، وبه قال جماعة من الصحابة، وأكثر الفقهاء.
وقيل: إن سبب النهي عن ثمن ماء الفحل -وهو أجرة على الجماع- فيه جهالة وغرر؛ لأن الفحل قد يضرب، وقد لا يضرب، وقد تلقح الأنثى، وقد لا تلقح.
وأما إعارة الفحل فهي مندوبة، وقد ثبت في الصحيح:"من حق الإبل إعارة فحلها". وفي لفظ:"إطراق فحلها". رواه مسلم (988).
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কুকুরের মূল্য এবং নর পশুর প্রজনন ফি (বীর্যের মূল্য) গ্রহণ করতে নিষেধ করেছেন।
5712 - عن أنس بن مالك أن رجلًا من كلاب سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن عسب الفحل، فنهاه، فقال: يا رسول اللَّه، إنا نطرق الفحل فنكرم، فرخص له في الكرامة.
صحيح: رواه الترمذي (1274)، والنسائي (4672)، والبيهقي (5/ 339) كلهم من حديث إبراهيم بن حميد الرؤاسي، حدثنا هشام بن عروة، عن محمد بن إبراهيم التيمي، عن أنس بن مالك فذكره.
قال الترمذي:"هذا حديث حسن غريب، لا نعرفه إلا من حديث إبراهيم بن حميد، عن هشام ابن عروة".
قلت: بل روى من أوجه أخرى أيضًا غير إبراهيم بن حميد إلا أن هذا الإسناد أصح ما روي به هذا الحديث. وإسناده صحيح.
আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, গোত্র ক্বিলাবের এক ব্যক্তি নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে উটের বীর্যের মূল্য (বা মেটিং ফি) সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করল। তিনি তাকে তা থেকে নিষেধ করলেন। লোকটি বলল, 'ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমরা যখন উটকে কাজে লাগাই, তখন আমরা সম্মাননা (উপহার) পাই।' অতঃপর তিনি তাকে সেই সম্মাননা বা উপহার গ্রহণের অনুমতি দিলেন।
5713 - عن عبد اللَّه بن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من ابتاع طعاما فلا يبعه حتى يستوفيه".
متفق عليه: رواه مالك في البيوع (40) عن نافع، عن عبد اللَّه بن عمر فذكره. ورواه البخاري في البيوع (2126)، ومسلم في البيوع (1526) كلاهما من طريق مالك، به مثله.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি কোনো খাদ্যদ্রব্য ক্রয় করে, সে যেন তা বিক্রি না করে যতক্ষণ না সে তা বুঝে নেয়।"
5714 - عن عبد اللَّه بن عمر أنه قال: كنا في زمان رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نبتاع الطعام، فيبعث علينا من يأمرنا بانتقاله من المكان الذي ابتعناه فيه إلى مكان سواء قبل أن نبيعه.
متفق عليه: رواه مالك في البيوع (42) عن نافع، عن عبد اللَّه بن عمر فذكره. ورواه مسلم في البيوع (1527: 33) من طريق مالك، به مثله.
ورواه البخاري في البيوع (2123) من وجه آخر عن نافع به نحوه.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের যুগে খাদ্যদ্রব্য ক্রয় করতাম, তখন তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের নিকট এমন লোক পাঠাতেন, যে আমাদেরকে তা বিক্রি করার পূর্বে যেখানে তা ক্রয় করা হয়েছিল সেখান থেকে অন্য স্থানে সরিয়ে নিতে আদেশ করত।
5715 - عن عبد اللَّه بن عمر قال: كانوا يبتاعون الطعام في أعلى السوق، فيبيعونه في مكانهم فنهاهم رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أن يبيعوه في مكانه حتى ينقلوه.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2167) عن مسدد، حدثنا يحيى (بن سعيد القطان) عن عبيد اللَّه قال: حدثني نافع، عن عبد اللَّه فذكره.
ورواه مسلم في البيوع (1526) من وجه آخر عن عبيد اللَّه به نحوه.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, তারা বাজারের উঁচু অংশে খাবার ক্রয় করত, অতঃপর তারা সেই স্থানেই তা বিক্রি করে দিত। অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদের সেই স্থানে তা বিক্রি করতে নিষেধ করেন, যতক্ষণ না তারা তা অন্য স্থানে সরিয়ে নিয়ে যায়।
5716 - عن ابن عمر أنهم كانوا يُضْربون على عهد رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم إذا اشتروا طعاما جزافا، أن يبيعوه في مكانهم حتى يؤووه إلى رحالهم.
متفق عليه: رواه البخاري في الحدود (6852) ومسلم في البيوع (1527: 37) كلاهما من حديث عبد الأعلى، حدثنا معمر، عن الزهري، عن سالم، عن ابن عمر، فذكره، واللفظ للبخاري، ولفظ مسلم نحوه.
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে যখন তারা কোনো খাদ্যদ্রব্য আন্দাজ করে (جزافা) ক্রয় করত, তখন সেটিকে নিজেদের বাসস্থানে (আস্তানায়) নিয়ে না যাওয়া পর্যন্ত সে স্থানেই বিক্রি করলে তাদেরকে প্রহার করা হতো (বা শাস্তি দেওয়া হতো)।
5717 - عن زيد بن ثابت قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أن تباع السلع حيث تبتاع، حتى يحوزها التجار إلى رحالهم.
حسن: رواه أبو داود (3499)، وأحمد (21668)، والدارقطني (2831)، والبيهقي (5/ 314) كلهم من طريق محمد بن إسحاق، حدثني أبو الزناد، عن عبيد بن حنين، عن عبد اللَّه بن عمر قال: قدم رجل من أهل الشام بزيت، فساومته فيمن ساومه من التجار، حتى ابتعته منه، فقام إليَّ رجل، فربَّحني فيه حتى أرضاني، قال: فأخذت بيده لأضرب عليها، فأخذ رجل بذراعي من خلفي، فالتفت إليه فإذا هو زيد بن ثابت فقال فذكره.
وإسناده حسن من أجل محمد بن إسحاق فإنه مدلس إلا أنه صرح بالتحديث، ومن طريقه رواه ابن حبان (4984)، والحاكم (2/ 40). وتابعه إسحاق بن حازم وجرير بن حازم كلاهما عن أبي الزناد عند الدارقطني.
وقوله:"لأضرب عليها" أي أُنهي صفقة البيع، ولعل ابن عمر نسي هذا الحكم حتى ذكَّره زيد ابن ثابت، فتذكر، وبدأ يحدث بما كان يعرفه من عهد النبي صلى الله عليه وسلم.
যায়িদ ইবনু ছাবিত (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেই স্থানে পণ্য বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন, যেখানে তা কেনা হয়েছে, যতক্ষণ না ব্যবসায়ীরা তা নিজেদের আস্তানায় (বা গুদামে) নিয়ে যায়।
5718 - عن ابن عباس أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"من ابتاع طعاما فلا يبعه حتى يستوفيه".
قال ابن عباس: وأحسب كل شيء مثله.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2135)، ومسلم في البيوع (1525: 29)، كلاهما من طريق عمرو بن دينار، سمع طاوسا يقول: سمعت ابن عباس يقول فذكره. واللفظ لمسلم.
وفي رواية"من ابتاع طعاما فلا يبعه حتى يكتاله".
فقلت لابن عباس: لم؟ فقال:"ألا تراهم يتابعون بالذهب والطعامُ مرجأ". أي مؤخر.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, "যে ব্যক্তি কোনো খাদ্যদ্রব্য ক্রয় করে, সে যেন তা সম্পূর্ণভাবে গ্রহণ করার (হস্তগত করার) আগে বিক্রি না করে।"
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমি মনে করি, অন্য সকল জিনিসও এর অনুরূপ।
অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: "যে ব্যক্তি কোনো খাদ্যদ্রব্য ক্রয় করে, সে যেন তা পরিমাপ করে নেওয়ার আগে বিক্রি না করে।"
(বর্ণনাকারী বলেন) আমি ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞেস করলাম: কেন? তিনি বললেন: "তুমি কি দেখ না, তারা স্বর্ণ (মুদ্রা) দ্বারা লেনদেন সম্পন্ন করে ফেলে, অথচ খাদ্যদ্রব্য বিলম্বে থাকে (গ্রহণ করা হয় না)?" (অর্থাৎ: বিলম্বিত/পিছিয়ে রাখা হয়েছে)।
5719 - عن جابر بن عبد اللَّه قال: كان رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"إذا ابتعت طعاما فلا تبعه حتى تستوفيه".
صحيح: رواه مسلم في البيوع (1529) عن إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا روح، حدثنا ابن جريج، حدثني أبو الزبير أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يقول فذكره.
জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলতেন: যখন তোমরা খাদ্যদ্রব্য ক্রয় করবে, তখন তা পুরোপুরি বুঝে না নেওয়া পর্যন্ত বিক্রয় করবে না।
5720 - عن أبي هريرة أنه قال لمروان: أحللتَ بيع الربا فقال مروان: ما فعلت. فقال أبو هريرة: أحللتَ بيع الصكاك، وقد نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع الطعام حتى يستوفى. قال: فخطب مروان الناس، فنهى عن بيعها. قال سليمان: فنظرت إلى حرس يأخذونها من أيدي الناس.
صحيح: رواه مسلم في البيوع (1528) عن إسحاق بن إبراهيم، أخبرنا عبد اللَّه بن الحارث المخزومي، حدثنا الضحاك بن عثمان، عن بكير بن عبد اللَّه الأشج، عن سليمان بن يسار، عن أبي هريرة فذكره.
وفي لفظ له:"من اشترى طعاما فلا يبعه حتى يكتاله".
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি মারওয়ানকে বললেন: আপনি তো সূদী লেনদেন হালাল করেছেন। মারওয়ান বললেন: আমি তা করিনি। আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: আপনি সাক্ক (ঋণপত্র/ভাউচার)-এর বিক্রি হালাল করেছেন, অথচ রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম খাদ্যশস্য হাতে বুঝে না পাওয়া পর্যন্ত বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন। রাবী বলেন: এরপর মারওয়ান লোকদের উদ্দেশ্যে ভাষণ দিলেন এবং ঐগুলোর বিক্রি নিষেধ করে দিলেন। সুলাইমান (বিন ইয়াসার) বলেন: এরপর আমি দেখলাম প্রহরীগণ লোকদের হাত থেকে ঐগুলো (সাক্ক) ছিনিয়ে নিচ্ছে।
আর তাঁর (মুসলিম-এর) অন্য একটি বর্ণনায় এসেছে: “যে ব্যক্তি কোনো খাদ্যশস্য ক্রয় করে, সে যেন তা মেপে (বা পরিমাপ করে) না নেওয়া পর্যন্ত বিক্রি না করে।”