আল-জামি` আল-কামিল
5721 - عن أبي هريرة قال: نهى النبي صلى الله عليه وسلم عن بيع الطعام حتى يجري فيه الصاعان، فيكون للبائع الزيادة، وعليه النقصان.
حسن: رواه البزار -كشف الأستار (1265) -، والبيهقي (5/ 316) كلاهما من حديث مسلم بن أبي مسلم الجرمي، حدثنا مخلد بن حسين، عن هشام، عن محمد بن سيرين، عن أبي هريرة فذكره.
قال البزار:"لا نعلمه عن أبي هريرة إلا من هذا الوجه، تفرد به مخلد، عن هشام".
قال الهيثمي في"المجمع" (4/ 98):"فيه مسلم بن أبي مسلم الجرمي لم أجد من ترجمه، وبقية رجاله رجال الصحيح".
كذا قال: مع أن ابن حبان ذكره في"الثقات" (9/ 158) وقال:"ربما أخطأ". وترجمه الخطيب في تاريخ بغداد (13/ 100) ووثّقه. وحسَّن إسناده الحافظ ابن حجر في"الفتح" (4/ 351).
وأما ما روي عن جابر قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم عن بيع الطعام حتى يجري فيه الصاعان: صاع البائع، وصاع المشتري. ففيه ضعف.
رواه ابن ماجه (2228)، والدارقطني (2819)، وعنه البيهقي (5/ 316)، وعبد بن حميد (1059) كلهم من حديث ابن أبي ليلى، عن أبي الزبير، عن جابر فذكره.
وابن أبي ليلى هو محمد بن عبد الرحمن بن أبي ليلى ضُعِّف من قبل حفظه، وبه أعله البوصيري.
وعزاه الحافظ في الفتح (4/ 351) إلى الدارقطني، وسكت عليه، ولعله لوجود شاهد له، وهو حديث أبي هريرة.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খাদ্যদ্রব্য বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন, যতক্ষণ না তাতে দু'টি সা' (পরিমাপ) ব্যবহার করা হয়। ফলে অতিরিক্তটুকু বিক্রেতার হবে এবং ঘাটতিও তার (বিক্রেতার) উপর বর্তাবে।
5722 - عن حكيم بن حزام قال: قلت: يا رسول اللَّه، إني رجل أشتري بيوعا، فما يحل منها وما يحرم؟ قال:"يا ابن أخي، إذا اشتريت بيعا فلا تبعه حتى تقبضه".
حسن: رواه ابن الجارود في المنتقى (602)، وابن حبان (4983)، والدارقطني (2822)، كلهم من طرق عن همام بن يحيى قال: حدثنا يحيى بن أبي كثير، حدثنا يعلى بن حكيم قال: ثنا يوسف بن ماهك، عن عبد اللَّه بن عصمة، عن حكيم بن حزام فذكره. واللفظ لابن الجارود، ولفظهما نحوه. وإسناده حسن من أجل عبد اللَّه بن عصمة، وهو حسن الحديث.
وتابع هشام الدستوائي همامَ بن يحيى فرواه عن يحيى بن أبي كثير بإسناده. ومن طريقه رواه ابن الجارود، والبيهقي (5/ 313) إلا أن الأخير لم يذكر بين يحيى بن أبي كثير وبين يوسف بن ماهك (يعلى بن حكيم)، ولذا تعقبه بقوله: لم يسمعه يحيى بن أبي كثير من يوسف، إنما سمعه من يعلى ابن حكيم عن يوسف.
وكذلك تابعه شيبان، فرواه عن يحيى بن أبي كثير، عن يعلى بن حكيم بإسناده. ومن طريقه رواه ابن الجارود، والبيهقي.
قال البيهقي:"هذا إسناد حسن متصل". وقال:"وكذلك رواه همام بن يحيى وأبان بن عطار، عن يحيى بن أبي كثير".
قلت: حديث أبان العطار رواه الدارقطني (2820).
إذا عرفت هذا فاعلم أنه جاء في السنن والمسانيد: أبي داود (3503)، والترمذي (1232)، والنسائي (4613)، وابن ماجه (2187)، وأحمد (15312) وغيرهم عن يوسف بن ماهك، عن حكيم بن حزام فذكره.
وهذا إسناد منقطع فان يوسف بن ماهك لم يسمع من حكيم بن حزام، وما جاء في بعض الرواية التصريح بالسماع منه فإنه لا شيء، وقد جزم البخاري وغيره أن يوسف بن ماهك لم يسمع من حكيم بن حزام. فقول الترمذي:"هذا حديث حسن" ليس بحسن؛ فإن الإسناد المقطع لا يكون حسنا، إلا أن يحمل قوله على أنه حسن من طرق أخرى؛ لأنه حكم على الحديث، لا الإسناد.
হাকীম ইবনু হিযাম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি বললাম, হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আমি এমন একজন ব্যক্তি যে অনেক প্রকার পণ্যদ্রব্য ক্রয় করে থাকি। সেগুলোর মধ্যে আমার জন্য কোনটি হালাল এবং কোনটি হারাম? তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "হে আমার ভ্রাতুষ্পুত্র, তুমি যদি কোনো পণ্য ক্রয় করো, তবে সেটি দখল করার (নিজ অধিকারে নেওয়ার) আগে তা বিক্রি করবে না।"
5723 - عن عبد اللَّه بن عمرو قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لا يحل سلف وبيع، ولا شرطان في بيع، ولا ربح ما لم يضمن، ولا بيع ما ليس عندك".
حسن: رواه أبو داود (3504)، والترمذي (1234)، والنسائي (4611)، وابن ماجه (2188)، وصحّحه الحاكم (3/ 17) كلهم من حديث عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده فذكره. ومنهم من اختصره.
وإسناده حسن من أجل عمرو بن شعيب فإنه حسن الحديث.
وقال الترمذي:"حسن صحيح".
وقال الحاكم:"حديث صحيح على شرط جملة من أئمة المسلمين".
ورُوي عن عبد اللَّه بن عمرو بن العاص، ويعلى بن أمية، وابن عباس وغيرهم"أن النبي صلى الله عليه وسلم استعمل عتاب بن أَسِيد على مكة، وقال له:"انههم عن بيع ما لم يقبضوا، أو ربح ما لم يضمنوا، وعن قرض وبيع، وعن شرطين في بيع، وعن بيع وسلف".
وفي كله مقال. أخرج حديثهم ابن أبي شيبة، وابن ماجه، والبيهقي، وابن عدي، والطبراني، وغيرهم.
وأما ما روي عنه أن النبي صلى الله عليه وسلم"نهى عن بيع وشرط". فليس بصحيح.
رواه الطبراني في معجمه الأوسط (4361 بتحقيق: طارق بن عوض اللَّه) عن عبد اللَّه بن أيوب القربي، ثنا محمد بن سليمان الذهلي، ثنا عبد الوارث بن سعيد قال: قدمت مكة، فوجدت بها أبا حنيفة، وابن أبي ليلى، وابن شبرمة، فسألت أبا حنيفة، قلت: ما تقول في رجل باع بيعا، وشرط شرطا، فقال: البيع باطل، والشرط باطل. ثم أتيت ابن أبي ليلى فسألته، فقال: البيع جائز، والشرط باطل. ثم أتيت ابن شبرمة فسألته، فقال: البيع جائز، والشرط جائز. فقلت: يا سبحان اللَّه! ثلاثة من فقهاء العراق اختلفوا في مسألة واحدة، فأتيت أبا حنيفة، فأخبرته، فقال: ما أدري ما قالا. حدثني عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، عن النبي صلى الله عليه وسلم"أنه نهى عن بيع وشرط". البيع باطل، والشرط باطل. ثم أتيت ابن أبي ليلى، فأخبرته، فقال: ما أدري ما قالا: حدثني هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة قالت:"أمرني النبي صلى الله عليه وسلم أن أشتري بريرة فأعتقها". البيع جائز والشرط باطل. ثم أتيت ابن شبرمة، فأخبرته، فقال: ما أدري ما قالا، حدثني مسعر بن كدام، عن محارب بن دثار، عن جابر قال:"بعتُ النبي صلى الله عليه وسلم ناقةً وشرط لي حملانها إلى المدينة". البيع جائز، والشرط جائز". انتهى.
ورواه الحاكم أبو عبد اللَّه في كتاب علوم الحديث في باب الأحاديث المتعارضة، عن أبي بكر ابن إسحاق، ثنا عبد اللَّه بن أيوب بن زاذان الضرير، ثنا محمد بن سليمان الذهلي بإسناده.
وفي الإسناد عبد اللَّه بن أيوب بن زاذان الضرير يعرف بالقربي أو بالقرني الخراز، سئل عنه الدارقطني فقال:"متروك". سؤالات الحاكم للدارقطني (125).
وقوله:"نهى عن بيع وشرط" لم يرد من وجه صحيح عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده
والصحيح عنه"نهى عن شرطين في بيع". كما مضى، ففي متنه نكارة؛ لأنه صح عن جابر وغيره جواز بيع وشرط، كما في الباب الآتي.
أحاديث هذا الباب ذات دلالات كثيرة في مسائل البيوع:
منها: أن الربح بمقابل الضمان، فأمر الشارع أن يقبض السلعة أولا؛ لتكون في ضمانه، ثم يبيعها.
ومنها: أنه يشمل بيع ما لا يملك على تسليمه مثل العبد الآبق، أو الجمل الشارد.
ومنها: أن البيع قبل القبض يؤدي إلى الخصام والتنازع؛ لأن القبض قد يتأخر، ويهلك المبيع.
ومنها: أنه يؤدي إلى القمر والميسر؛ لأن البائع قد يستفيد من رأس المال، والمشتري لم يستلم السلعة بعد، لأن البائع لم يقبضها حتى يسلمها إلى المشتري.
ويستثنى من هذا البيع، السلمُ الموصوف في الذمة، سواء كان مؤجلا أو حالا، وذلك لحاجة الناس إلى رأس المال لإنتاج السلعة الموصوفة، فأجاز الشارع بيع السلم؛ لئلا تعطل مصالح البائع والمشتري. وغالب التجارات اليوم قائمة على هذا الأساس وهو السلم.
وقد أشار الخطابي إلى هذا بقوله:"وقوله:"لا نبع ما ليس عندك" يريد بيع العين دون بيع الصفة، ألا ترى أنه أجاز السلم إلى الآجال، وهو بيع ما ليس عند البائع في الحال، وإنما نهى عن بيع ما ليس عند البائع من قبل الغرر. وذلك مثل أن يبيع عبده الآبق أو جمله الشارد، ويدخل في ذلك كل شيء ليس بمضمون عليه، مثل أن يشتري سلعة، فيبيعها قبل أن يقبضها، ويدخل في ذلك بيع الرجل مال غيره موقوفًا على إجازة المالك، لأنه يبيع ما ليس عنده. ولا في ملكه، وهو غرر، لأنه لا يدري هل يجيز صاحبه أم لا؟ . انتهى.
আবদুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: একসাথে ঋণ (সালাফ) ও বিক্রি, একটি বিক্রয়ে দুই শর্ত আরোপ করা, যে জিনিসের দায়িত্ব (ঝুঁকি) তুমি নাওনি তার লাভ গ্রহণ করা এবং যা তোমার কাছে নেই তা বিক্রি করা বৈধ নয়।
5724 - عن جابر بن عبد اللَّه أنه كان يسير على جمل له قد أعيا، فأراد أن يسيبه. قال: فلحقني النبي صلى الله عليه وسلم، فدعا لي، وضربه، فسار سيرا لم يسر مثله. قال:"بعنيه بِوَقِيَّة". قلت: لا. ثم قال"بعنيه". فبعته بِوَقِيَّة، واستثنيت عليه حملانه إلى أهلي. فلما بلغت أتيته بالجمل، فنقدني ثمنه، ثم رجعت. فأرسل في إثري، فقال:"أتراني ماكستك لآخذ جملك، خذ جملك ودراهمك فهو لك".
متفق عليه: رواه البخاري في الشروط (2718)، ومسلم في المساقاة (715: 109) من طريق زكريا قال: سمعت عامرًا (هو الشعبي)، يقول: حدثني جابر بن عبد اللَّه فذكره. واللفظ لمسلم.
وزاد البخاري: قال شعبة، عن مغيرة، عن عامر، عن جابر:"أفقرني رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم ظهره إلى المدينة".
وقال إسحاق، عن جرير، عن مغيرة:"فبعته على أن لي فقار ظهره حتى أبلغ المدينة".
وقال عطاء، وغيره:"ولك ظهره إلى المدينة".
وقال محمد بن المنكدر، عن جابر:"شرط ظهره إلى المدينة".
وقال زيد بن أسلم، عن جابر:"ولك ظهره حتى ترجع".
وقال أبو الزبير، عن جابر:"أفقرناك ظهره إلى المدينة".
وقال الأعمش، عن سالم، عن جابر:"تبلغ عليه إلى أهلك".
قال أبو عبد اللَّه:"الاشتراط أكثر، وأصح عندي.
وقال عبيد اللَّه، وابن إسحاق، عن وهب عن جابر:"اشتراه النبي صلى الله عليه وسلم بأوقية". وتابعه زيد بن أسلم، عن جابر.
وقال ابن جريج، عن عطاء وغيره، عن جابر:"أخذته بأربعة دنانير". وهذا يكون أوقية على حساب الدينار بعشرة دراهم، ولم يبين الثمن مغيرة، عن الشعبي، عن جابر، وابن المنكدر، وأبو الزبير، عن جابر.
وقال الأعمش، عن سالم، عن جابر:"أوقية ذهب".
وقال أبو إسحاق، عن سالم، عن جابر:"بمائتي درهم".
وقال داود بن قيس، عن عبيد اللَّه بن مقسم، عن جابر:"اشتراه بطريق تبوك -أحسبه قال- بأربع أواق".
وقال أبو نضرة، عن جابر:"اشتراه بعشرين دينارا".
وقول الشعبي:"بوقية" أكثر. الاشتراط أكثر، وأصح عندي. قاله أبو عبد اللَّه. وهذه المعلقات وصلها الحافظ ابن حجر في"الفتح".
وليس الاختلاف في ثمن الظهر بأنه وقية، وإنما الخلاف في تقديرها بالدينار والدراهم، ومن اختلف في قدر الوقية فأمره راجع إلى الشك، واللَّه أعلم.
জাবির ইবন আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি একটি উটের পিঠে যাচ্ছিলেন, যেটি দুর্বল হয়ে পড়েছিল। তিনি সেটিকে ছেড়ে দিতে চেয়েছিলেন। তিনি (জাবির) বলেন, তখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমার সাথে মিলিত হলেন। তিনি আমার জন্য দুআ করলেন এবং সেটিকে (উটটিকে) আঘাত করলেন। ফলে উটটি এমন দ্রুত চলতে শুরু করল, যেমনটি এর আগে আর চলেনি। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "এক উকিয়ার বিনিময়ে এটিকে আমার কাছে বিক্রি করো।" আমি বললাম: "না।" এরপর তিনি বললেন: "এটিকে আমার কাছে বিক্রি করো।" অতঃপর আমি এক উকিয়ার বিনিময়ে সেটি তাঁর কাছে বিক্রি করে দিলাম, তবে শর্ত রাখলাম যে, আমার পরিবার পর্যন্ত (পৌঁছানো পর্যন্ত) সেটির পিঠে সওয়ার হওয়ার অধিকার আমার থাকবে। যখন আমি (আমার বাড়িতে) পৌঁছলাম, আমি উটটি নিয়ে তাঁর কাছে আসলাম। তিনি আমাকে এর মূল্য পরিশোধ করলেন। এরপর আমি ফিরে গেলাম। এরপর তিনি আমার সন্ধানে (লোক) পাঠালেন এবং বললেন: "তুমি কি মনে করেছো যে, তোমার উটটি ছিনিয়ে নেওয়ার জন্য আমি তোমার সাথে দর কষাকষি করছিলাম? তোমার উট এবং তোমার দিরহাম—দুটোই নাও, কারণ এগুলো তোমার।"
5725 - عن عائشة قالت: جاءتني بريرة، فقالت: كاتبت أهلي على تسع أواق، في كل عام أوقية، فأعينيني. فقلت: إن أحب أهلك أن أَعُدَّها لهم، ويكون ولاؤكِ لي فعل. فذهبت بريرة إلى أهلها، فقالت لهم، فأبوا ذلك عليها، فجاءت من عندهم -ورسول اللَّه صلى الله عليه وسلم جالس-، فقالت: إني قد عرضت ذلك عليهم، فأبوا إلا أن يكون الولاء لهم. فسمع النبي صلى الله عليه وسلم، فأخبرت عائشة النبي صلى الله عليه وسلم، فقال:"خذيها، اشترطي لهم الولاء، فإنما الولاء لمن أعتق". ففعلت عائشة، ثم قام رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في الناس، فحمد اللَّه، وأثنى عليه، ثم قال:"أما بعد: ما بال رجال يشترطون شروطا ليست في كتاب اللَّه، ما كان من شرط ليس في كتاب اللَّه فهو باطل وإن كان مائة
شرط، قضاء اللَّه أحق، وشرط اللَّه أوثق، وإنما الولاء لمن أعتق".
متفق عليه: رواه مالك في العتق والولاء (17) عن هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة فذكرته. ورواه البخاري في البيوع (2168) من طريق مالك، به. ورواه مسلم في العتق (1504) من وجه آخر عن هشام، به، ومن طرق أخرى عن عائشة.
وبهذا الحديث استدل ابن الجوزي في التحقيق (4/ 38): إذا باعه بشرط العتق فالشرطه والبيع صحيحان.
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমার কাছে বারীরা (নামের দাসী) এলো এবং বলল, আমি আমার মালিকদের সাথে নয় উকিয়ার (রৌপ্য/স্বর্ণের পরিমাপ) বিনিময়ে প্রতি বছর এক উকিয়া দেওয়ার শর্তে চুক্তিবদ্ধ হয়েছি। অতএব, আপনারা আমাকে সাহায্য করুন। আমি বললাম, যদি তোমার মালিকরা চায় যে আমি তাদের জন্য (একবারে) তা গণনা করে দিয়ে দেই, এবং তোমার আনুগত্য (ওয়ালা/উত্তরাধিকারের অধিকার) আমার জন্য নির্দিষ্ট হয়, তবে আমি তা করতে পারি।
এরপর বারীরা তার মালিকদের কাছে গেল এবং তাদের কাছে প্রস্তাবটি পেশ করল। কিন্তু তারা তা প্রত্যাখ্যান করল। অতঃপর বারীরা তাদের কাছ থেকে ফিরে এলো—তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উপবিষ্ট ছিলেন— সে (আয়িশাকে) বলল, আমি তাদের কাছে সেই প্রস্তাব পেশ করেছি, কিন্তু তারা প্রত্যাখ্যান করেছে, তবে তারা চায় যেন ওয়ালা (আনুগত্য/উত্তরাধিকার) তাদেরই থাকে।
নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তা শুনতে পেলেন। তখন আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বিষয়টি জানালেন। তিনি (নবী) বললেন: "তুমি তাকে নিয়ে নাও। তাদের জন্য ওয়ালার শর্ত রেখো। কেননা, ওয়ালা সেই ব্যক্তির জন্যই, যে আজাদ করে।"
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাই করলেন। এরপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) লোকদের মাঝে দাঁড়ালেন, আল্লাহর প্রশংসা ও স্তুতি জ্ঞাপন করলেন, অতঃপর বললেন: "অতঃপর শোনো: লোকদের কী হলো যে তারা এমন সব শর্ত আরোপ করে যা আল্লাহর কিতাবে (শরীয়তের বিধানে) নেই? আল্লাহর কিতাবে নেই এমন সকল শর্তই বাতিল, যদিও তা শত শর্ত হয়। আল্লাহর বিধানই অধিক সত্য ও গ্রহণযোগ্য এবং আল্লাহর শর্তই অধিক নির্ভরযোগ্য। আর ওয়ালা (উত্তরাধিকার) তো সেই ব্যক্তিরই, যে আজাদ করে।"
5726 - عن أبي هريرة قال: أرادت عائشة أن تشتري جارية تعتقها، فأبي أهلها إلا أن يكون لهم الولاء، فذكرت ذلك لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فقال:"لا يمنعك ذلك، فإنما الولاء لمن أعتق".
صحيح: رواه مسلم في العتق (1505) عن أبي بكر بن أبي شيبة، حدثنا خالد بن مخلد، عن سليمان بن بلال، حدثني سهيل بن أبي صالح، عن أبيه، عن أبي هريرة فذكره.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) একটি দাসী ক্রয় করে তাকে মুক্ত করতে চাইলেন। কিন্তু দাসীর মালিকরা (বিক্রেতারা) এ শর্ত ছাড়া বিক্রি করতে অস্বীকার করল যে (মুক্ত করার পর) দাসীর 'আল-ওয়ালা' (উত্তরাধিকার সম্পর্ক) তাদেরই থাকবে। অতঃপর তিনি বিষয়টি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট উল্লেখ করলেন। তিনি বললেন: "এটা যেন তোমাকে বাধা না দেয়। কারণ, 'আল-ওয়ালা' (মুক্তির অধিকার) কেবল তারই, যে মুক্ত করে।"
5727 - عن عبد اللَّه بن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لا يبع بعضكم على بيع بعض".
متفق عليه: رواه مالك في البيوع (95) عن نافع، عن عبد اللَّه بن عمر.
ورواه البخاري في البيوع (2139)، ومسلم في البيوع (1412) من طريق مالك، به، مثله.
وزاد أبو داود:"إلا بإذنه". ولفظ النسائي:". . . حتى يبتاع أو يذر".
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমাদের কেউ যেন অন্যের বিক্রির ওপর বিক্রি না করে।"
5728 - عن أبي هريرة قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أن يبيع حاضر لباد، ولا تناجشوا، ولا يبيع الرجل على بيع أخيه، ولا يخطب على خطبة أخيه، ولا تسأل المرأة طلاق أختها لتكفأ ما في إنائها.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2140)، ومسلم في البيوع (1413) كلاهما من حديث سفيان بن عيينة، عن الزهري، عن سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة. ولفظهما سواء.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিষেধ করেছেন যে, কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামীণ (মরুবাসী) লোকের পক্ষে মধ্যস্থতা করে পণ্য বিক্রি না করে, আর তোমরা কৃত্রিম দর বৃদ্ধি (নাজাশ) করো না, কোনো ব্যক্তি যেন তার ভাইয়ের বিক্রয়ের উপর বিক্রয় না করে, এবং তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের উপর যেন প্রস্তাব না দেয়, আর কোনো নারী যেন তার (মুসলিম) বোনের তালাক না চায়—যাতে সে তার পাত্রে যা আছে তা উপুড় করে ফেলে (অর্থাৎ তার অবস্থান বা স্বামীকে দখল করে নিতে পারে)।
5729 - عن أبي هريرة أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لا يَسُم المسلم على سوم أخيه".
صحيح: رواه مسلم في البيوع (1515: 9) من طريق إسماعيل بن جعفر، عن العلاء، عن أبيه، عن أبي هريرة.
ومعنى الحديث هو أن يكون يتفق مالك السلعة ومشتريها على البيع، ولم يعقداه، فيقول الآخر للبائع: أشتريها بكذا. فهذا هو السوم الذي لا يجوز.
وأما السوم في السلعة التي تباع فيمن يزيد فهذا ليس بحرام.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, “কোনো মুসলিম যেন তার (মুসলিম) ভাইয়ের দামের ওপর দাম না বাড়ায়।”
5730 - عن عبد الرحمن بن شُماسة أنه سمع عقبة بن عامر على المنبر يقول: إن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"المؤمن أخو المؤمن؛ فلا يحل للمؤمن أن يبتاع على بيع أخيه، ولا يخطب على خطبة أخيه حتى يذر".
صحيح: رواه مسلم في النكاح (1414: 56) عن أبي الطاهر، أخبرنا عبد اللَّه بن وهب، عن الليث وغيره، عن يزيد بن أبي حبيب، عن عبد الرحمن بن شماسة فذكره.
উকবাহ ইবন আমের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "মুমিন মুমিনের ভাই; সুতরাং কোনো মুমিনের জন্য তার ভাইয়ের বিক্রয়ের উপর ক্রয় করা (দাম বলা) হালাল নয়, আর না তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের উপর প্রস্তাব দেওয়া হালাল, যতক্ষণ না সে (ভাই) তা ছেড়ে দেয়।"
5731 - عن سمرة بن جندب أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى أن يخطب الرجل على خطبة أخيه، أو يبتاع على بيعه.
حسن: رواه أحمد (20115) عن سليمان بن داود الطيالسي، حدثني عمران، عن قتادة، عن الحسن، عن سمرة بن جندب فذكره.
وإسناده حسن من أجل عمران، وهو ابن داود البصري، مختلف فيه غير أنه حسن الحديث، والحسن سمع من سمرة بالجملة، كما تقدم.
সামুরাহ ইবনু জুনদুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিষেধ করেছেন যেন কোনো ব্যক্তি তার ভাইয়ের বিবাহের প্রস্তাবের ওপর প্রস্তাব না দেয়, অথবা তার বেচা-কেনার ওপর নতুন কেনা-বেচা না করে।
5732 - عن وعن أبي هريرة يبلغ به النبي صلى الله عليه وسلم قال:"لا يبع حاضر لباد".
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2140)، ومسلم في البيوع (1530) كلاهما من طريق سفيان، عن الزهري، عن سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة فذكره.
واللفظ لمسلم، وساقه البخاري في سياق أتم ذكره في موضعه.
আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামবাসীর পক্ষে (পণ্য) বিক্রি না করে।"
5733 - عن طاوس، عن ابن عباس قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أن تتلقى الركبان، وأن يبيع حاضر لباد. قال: فقلت لابن عباس: ما قوله"حاضر لباد"؟ قال: لا يكن له سمسارا.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2158)، ومسلم في البيوع (1521) كلاهما من طريق معمر، عن عبد اللَّه بن طاوس، عن أبيه، عن ابن عباس فذكره.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম পথিমধ্যে আগত কাফেলার সাথে সাক্ষাত করতে এবং কোনো শহুরে লোক কোনো গ্রাম্য লোকের (পণ্য) বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন। (বর্ণনাকারী তাউস) বলেন, আমি ইবনে আব্বাসকে জিজ্ঞেস করলাম, তাঁর বাণী "শহুরে লোক গ্রাম্য লোকের (পণ্য বিক্রি) করা" এর অর্থ কী? তিনি বললেন: সে যেন তার (গ্রাম্য বিক্রেতার) জন্য দালালি না করে।
5734 - عن أنس بن مالك قال: نُهينا أن يبيع حاضر لباد.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2161)، ومسلم في البيوع (1523: 22) كلاهما عن محمد بن المثنى، حدثنا معاذ، حدثنا ابن عون، عن محمد قال: قال أنس بن مالك فذكره.
ورواه مسلم من وجه آخر عن يونس، عن ابن سيرين، وزاد فيه:"وإن كان أخاه أو أباه".
আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। তিনি বলেন, কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামবাসীর পক্ষে (পণ্য) বিক্রি না করে—এ থেকে আমাদের নিষেধ করা হয়েছিল।
মুসলিমের অন্য এক বর্ণনায় অতিরিক্ত এসেছে: "এমনকি যদি সে তার ভাই বা পিতাও হয় (তবুও তা নিষিদ্ধ)।"
5735 - عن ابن عمر قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أن يبيع حاضر لباد.
صحيح: رواه البخاري في البيوع (2159) عن عبد اللَّه بن صبَّاح، حدثنا أبو علي الحنفي، عن عبد الرحمن بن عبد اللَّه بن دينار قال: حدثني أبي، عن عبد اللَّه بن عمر فذكره.
ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কোনো শহরবাসীকে কোনো গ্রামীণ বা যাযাবর লোকের পক্ষে বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন।
5736 - عن جابر قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لا يَبعْ حاضر لباد، دعوا الناس يرزق اللَّه بعضهم من بعض".
صحيح: رواه مسلم في البيوع (1522) من طريقين، عن أبي الزبير، عن جابر فذكره.
জাবের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কোনো শহরবাসী যেন কোনো গ্রামবাসীর পক্ষে (পণ্য) বিক্রি না করে। মানুষকে তাদের হালে ছেড়ে দাও, আল্লাহ তাদের একজনকে আরেকজনের মাধ্যমে জীবিকা প্রদান করেন।"
5737 - عن طلحة بن عبيد اللَّه قال: إن النبي صلى الله عليه وسلم نهى أن يبيع حاضر لباد.
حسن: رواه أبو داود (3441) عن موسى بن إسماعيل، حدثنا حماد، عن محمد بن إسحاق، عن سالم المكي، أن أعرابيا حدّثه أنه قدم بحلوبة له على عهد رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، فنزل على طلحة بن عبيد اللَّه، فقال: إن النبي صلى الله عليه وسلم نهى أن يبيع حاضر لباد، ولكن اذهب إلى السوق، فانظر من يبايعك؟ فشاورني حتى آمرك أو أنهاك.
وإسناده حسن من أجل محمد بن إسحاق، وهو مدلس، وقد صرح بالتحديث عند الإمام أحمد (1404) في سياق أطول من هذا، وسبق تخريجه في كتاب الزكاة، في عدم التعدي على الصدقات.
وسالم المكي هو سالم بن أبي أمية أبو النضر، كما جاء التصريح به في مسند أحمد.
وفي الباب ما روي عن ابن أبي يزيد أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"دعوا الناس يُصيب بعضهم من بعض، فإذا استنصح أحدكم أخاه فلينصحه".
رواه أحمد (15455)، والطبراني في الكبير (22/ 354)، وعبد بن حميد (438) كلهم من طرق عن عطاء بن السائب، عن حكيم بن أبي يزيد، عن أبيه قال: حدثني أبي أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال فذكر الحديث.
وحكيم بن أبي يزيد لم يوثّقه غير ابن حبان، ثم اختلف هل هو حكيم بن أبي يزيد، عن أبيه، عن جده، كما عند أحمد، أو حكيم بن أبي يزيد، عن أبيه، كما عند غيره، دون ذكر جده؟ وقد أشار إلى هذا الاختلاف ابن حجر في"الإصابة" في ترجمة أبي يزيد.
والراوي عنه عطاء بن السائب مختلط، وجميع من روى عنه هذا الحديث رواه بعد الاختلاط، وبه أعله الهيثمي في"المجمع" (4/ 83).
وقد كره أكثر أهل العلم بيع الحاضر للبادي حملا على أن النهي للتحريم؛ لأن بيع الحاضر للبادي يفوت مصلحة البيع والشراء، وهي أن اللَّه يرزق بعضهم من بعض.
وذهب بعضهم إلى أن النهي للإرشاد دون التحريم.
তালহা ইবনে উবাইদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শহরবাসীকে (স্থায়ী ব্যবসায়ীকে) গ্রামবাসীর (বহিরাগত বিক্রেতার) কাছে বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন।
[অন্য বর্ণনায় এসেছে]: এক বেদুঈন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যমানায় তার দুগ্ধবতী পশু নিয়ে এসে তালহা ইবনে উবাইদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে আশ্রয় নিলো। তালহা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাকে বললেন: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) শহরবাসীকে গ্রামবাসীর কাছে বিক্রি করতে নিষেধ করেছেন। বরং তুমি বাজারে যাও, দেখ কে তোমার সাথে বেচাকেনা করে? তারপর আমার সাথে পরামর্শ করো, যেন আমি তোমাকে (সে অনুযায়ী) আদেশ করতে বা নিষেধ করতে পারি।
5738 - عن ابن مسعود، عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه نهى عن تلقي البيوع.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2164)، ومسلم في البيوع (1518) كلاهما من طريق التيمي، عن أبي عثمان، عن ابن مسعود به. واللفظ لمسلم.
والتيمي هو: سليمان بن طرخان أبو المعتمر، نزل في التيم، فنسب إليهم.
ইবনে মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) 'তালাক্কী আল-বুয়ূ' (পণ্য বাজারে আসার আগেই পথিমধ্যে গিয়ে বিক্রেতাদের সাথে সাক্ষাৎ করে ক্রয়-বিক্রয় সম্পন্ন করা) থেকে নিষেধ করেছেন।
5739 - عن عبد اللَّه بن عمر أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لا يبيع بعضكم على بيع بعض، ولا تلقوا السلع حتى يُهبط بها إلى السوق".
متفق عليه: رواه البخاري (2165) عن عبد اللَّه بن يوسف، أخبرنا مالك، عن نافع، عن عبد اللَّه بن عمر فذكره.
ورواه مسلم في البيوع (1517) من طريق عبيد اللَّه، عن نافع به بلفظ: أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم نهى أن تُتَلَقَّى السِّلَعُ حتى تبلغ الأسواق".
تنبيه: الحديث في موطأ مالك برواية يحيى الليثي، كما سبق في باب النهي عن بيع الرجل على بيع أخيه بلفظ الشطر الأول، وليس فيه قوله:"ولا تلقوا السلع. . . ." إلخ.
وإنما وقع ذلك في بعض الروايات عن مالك، كما في رواية عبد اللَّه بن يوسف هذه التي عند البخاري.
قال الحافظ ابن عبد البر في التمهيد (13/ 316):"وهذه الزيادة صحيحة لابن وهب، والقعنبي، وعبد اللَّه بن يوسف، وسليمان بن برد، عن مالك، وليست لغيرهم، وهي صحيحة". اهـ.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমাদের কেউ যেন অন্যের বিক্রয়ের ওপর নিজের পণ্য বিক্রি না করে, আর তোমরা পণ্যবাহী কাফেলার সাথে সাক্ষাৎ করো না, যতক্ষণ না তা বাজারে নামানো হয়।
5740 - عن وعن أبي هريرة قال: نهى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أن يُتَلَقَّى الجَلَبُ.
متفق عليه: رواه البخاري في البيوع (2162) من طريق سعيد بن أبي سعيد، ومسلم في البيوع (1519: 16) من طريق ابن سيرين، كلاهما عن أبي هريرة. واللفظ لمسلم.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আমদানি করা পণ্যসামগ্রী বাজারে আসার পূর্বে বাইরে গিয়ে সাক্ষাৎ (এবং ক্রয়-বিক্রয়) করতে নিষেধ করেছেন।