আল-জামি` আল-কামিল
681 - عن ابن عباس، عن النبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"لا ينبغي لعبد أن يقول: أنا خيرٌ من يونس بن مَتّى".
متفق عليه: رواه البخاريّ في أحاديث الأنبياء (3395)، ومسلم في الفضائل (2377) كلاهما عن محمّد بن بشار، حدّثنا غندر محمد بن جعفر، حدّثنا شعبة، عن قتادة، قال: سمعت أبا العالية قال: حدثنا ابنُ عمِّ نبيّكم -يعني ابن عباس-، فذكره.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কোনো বান্দার জন্য এটা উচিত নয় যে, সে বলবে: আমি ইউনুস ইবনু মাত্তা-এর চেয়ে উত্তম।"
682 - عن عبد اللَّه بن مسعود، عن النبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"ما ينبغي لأحد أن يقول: أنا خير من يونس بن متَّى".
صحيح: رواه البخاريّ في التفسير (4603) عن مسعود، حدّثنا يحيى، عن سفيان، قال: حدّثني الأعمش، عن أبي وائل، عن عبد اللَّه، فذكر الحديث.
আব্দুল্লাহ ইবনে মাসঊদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কারো জন্য উচিত নয় যে, সে বলবে: আমি ইউনুস ইবনু মাত্তা (আঃ)-এর চেয়ে উত্তম।"
683 - عن أبي هريرة، عن النبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"لا تخيّروني على موسى، فإنّ النّاس يَصْعقون يوم القيامة، فأصعق معهم، فأكون أوّل من يُفيق، فإذا موسى باطش جانب العرش، فلا أدري أكان فيمن صعق فأفاق قبلي، أو كان ممن استثنى اللَّه".
متفق عليه: رواه البخاريّ في الخصومات (2411)، ومسلم في فضائل موسى (2373: 160) كلاهما من حديث إبراهيم بن سعد، عن ابن شهاب، عن أبي سلمة وعبد الرحمن الأعرج، عن أبي هريرة، فذكر الحديث.
وفي الحديث قصة بين المسلم واليهودي، وسيأتي في موضعه.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “তোমরা আমাকে মূসা (আঃ)-এর উপর শ্রেষ্ঠত্ব দিও না। কারণ, কিয়ামতের দিন লোকেরা মূর্ছিত হয়ে পড়বে। আমিও তাদের সাথে মূর্ছিত হয়ে পড়ব। অতঃপর আমিই সর্বপ্রথম জ্ঞান ফিরে পাবো। তখন দেখতে পাবো, মূসা (আঃ) আরশের পাশ ধরে আছেন। আমি জানি না, তিনি কি তাদের অন্তর্ভুক্ত ছিলেন, যারা মূর্ছিত হয়েছিল এবং আমার পূর্বে জ্ঞান ফিরে পেয়েছিলেন, নাকি তিনি তাদের অন্তর্ভুক্ত, যাদেরকে আল্লাহ্ অব্যাহতি দিয়েছিলেন।”
684 - عن أبي سعيد الخدريّ قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لا تخيّروا بين الأنبياء، فإنّ
النّاس بصعقون يوم القيامة فأكون أوَّلَ من تنشق عنه الأرض، فإذا أنا بموسى آخذ بقائمة من قوائم العرش فلا أدري أكان فيمن صعق أم حوسب بصعقة الأولى".
متفق عليه: رواه البخاريّ في الخصومات (3412) عن موسى بن إسماعيل، حدّثنا وُهيب، حدثنا عمرو بن يحيى، عن أبيه، عن أبي سعيد، فذكر مثله.
وفي الحديث قصة الخصومة بين المسلم واليهودي، وستأتي في موضعه.
ورواه الشيخان - البخاريّ (3398)، ومسلم في الفضائل (2374) كلاهما من حديث سفيان، عن عمرو بن يحيى بإسناده وليس فيه ذكر لقوائم العرش.
قال العلماء: إنّما قال النبيّ صلى الله عليه وسلم تواضعًا إن كان قاله قبل أن أعلم أنه أفضل الخلق، وإن كان قاله قبل علمه بذلك فلا إشكال. وإلّا فقد ثبت بالكتاب والسَّنة بأنّ النبيّ صلى الله عليه وسلم أفضل الخلق، وإنّ اللَّه تبارك وتعالى فضّل بعض الرسل على البعض كما قال تعالى: {تِلْكَ الرُّسُلُ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَى بَعْضٍ مِنْهُمْ مَنْ كَلَّمَ اللَّهُ وَرَفَعَ بَعْضَهُمْ دَرَجَاتٍ} [سورة البقرة: 253]".
আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা নবীদের মাঝে তারতম্য করো না। কেননা কিয়ামতের দিন লোকেরা বেহুঁশ হয়ে যাবে। তখন আমিই হব প্রথম ব্যক্তি, যার জন্য ভূমি বিদীর্ণ হবে (বা যার জ্ঞান ফিরবে)। আর (যখন আমার জ্ঞান ফিরবে) আমি হঠাৎ দেখব মূসাকে, তিনি আরশের খুঁটিগুলোর একটি ধরে আছেন। আমি জানি না, তিনি কি তাদের মধ্যে ছিলেন যারা বেহুঁশ হয়েছিল, নাকি প্রথমবার বেহুঁশ হওয়ার (মৃত্যুর) হিসাব দ্বারা (তিনি অব্যাহতি পেয়েছেন)।"
685 - عن عبد اللَّه بن مسعود أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"أشد الناس عذابا يوم القيامة رجل قتله نبي، أو قتل نبيا، وإمام ضلالة، وممثل من الممثلين".
حسن: رواه أحمد (3868)، والبزار كشف الأستار (1603) كلاهما من طريق عبد الصمد، عن أبان بن يزيد، عن عاصم، عن أبي وائل، عن عبد اللَّه (هو ابن مسعود) فذكره.
قال البزّار: لا نعلم أسنده عن أبي وائل غير أبان.
قلت: لا يضر تفرد أبان بن يزيد فإنه ثقة من رجال الصحيحين.
وإسناده حسن من أجل عاصم هو ابن أبي النجود فإنه حسن الحديث.
وذكر الدارقطني في العلل (5/ 304 - 305) هذا الحديث من طرق مدارها على أبي إسحاق السبيعي، وأعلَّها بالوقف، ولكن ليس في إسناد أحمد والبزار ذكر أبي إسحاق. واللَّه أعلم.
وقوله:"من الممثلين" أي مصور، يقال: مثّلت -بالتثقيل، والتخفيف- إذا صورت مثالا، والتمثال الاسم منه. قاله ابن الأثير في النهاية.
الأنبياء عليهم الصّلاة والسّلام معصومون فيما يخبرون عن اللَّه سبحانه وتعالى، وفي تبليغ رسالاته باتفاق الأمّة، ولهذا وجب الإيمان بكل ما أتوه.
وقال تعالى: {آمَنَ الرَّسُولُ بِمَا أُنْزِلَ إِلَيْهِ مِنْ رَبِّهِ وَالْمُؤْمِنُونَ كُلٌّ آمَنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِنْ رُسُلِهِ وَقَالُوا سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا غُفْرَانَكَ رَبَّنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ} [سورة البقرة: 285].
والأنبياء معصومون من الإقرار على المعصية، وإن وقع منهم ذلك سارعوا إلى التوبة ولا يؤخِّرونها، ولذلك لم يذكر في القرآن شيئًا من ذلك عن نبيٍّ من الأنبياء إِلَّا مقرونًا بالتوبة والاستغفار، كقول آدم وزوجته: {قَالَا رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنْفُسَنَا وَإِنْ لَمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ} [سورة الأعراف: 23]، وقول نوح: {قَالَ رَبِّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْأَلَكَ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ وَإِلَّا تَغْفِرْ لِي وَتَرْحَمْنِي أَكُنْ مِنَ الْخَاسِرِينَ} [سورة هود: 47]، وقول الخليل عليه السلام: {وَالَّذِي أَطْمَعُ أَنْ يَغْفِرَ لِي خَطِيئَتِي يَوْمَ الدِّينِ} [سورة الشعراء: 82]، وقول موسى: {قَالَ رَبِّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي فَاغْفِرْ لِي فَغَفَرَ لَهُ} [سورة القصص: 16]، وقوله: {فَلَمَّا أَفَاقَ قَالَ سُبْحَانَكَ تُبْتُ إِلَيْكَ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُؤْمِنِينَ} [سورة الأعراف: 143]، وقوله تعالى عن داود: {وَظَنَّ دَاوُودُ أَنَّمَا فَتَنَّاهُ فَاسْتَغْفَرَ رَبَّهُ وَخَرَّ رَاكِعًا وَأَنَابَ} [سورة ص: 34]، وقوله تعالى عن سليمان {قَالَ رَبِّ اغْفِرْ لِي وَهَبْ لِي مُلْكًا لَا يَنْبَغِي لِأَحَدٍ مِنْ بَعْدِي إِنَّكَ أَنْتَ الْوَهَّابُ} [سورة ص: 35].
আব্দুল্লাহ ইবনে মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কিয়ামতের দিন সবচেয়ে কঠিন শাস্তি হবে সেই ব্যক্তির, যাকে কোনো নবী হত্যা করেছেন, অথবা যে কোনো নবীকে হত্যা করেছে, এবং যে পথভ্রষ্টতার ইমাম (নেতা), আর চিত্রকরদের (বা মূর্তি নির্মাণকারীদের) মধ্যে একজন।"
686 - عن عبد اللَّه بن عمرو، قال:"كنتُ أكتبُ كلَّ شيءٍ أسمعه من رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أريدُ حفظه، فنهتني قريش، وقالوا: لا تكتبْ كلَّ شيءٍ تسمعه من رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، ورسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بشر يتكلّم في الغضب والرِّضا، فأمسكتُ عن الكتاب، فذكرتُ ذلك لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، فأومأ بإصبعه إلى فيه، فقال:"اكتبْ، فوالذي نفسي بيده ما يخرجُ منه إِلَّا حقّ".
صحيح: رواه أبو داود (3446) عن مسدّد وأبي بكر بن أبي شيبة، قالا: حدثنا يحيى، عن عبيد اللَّه بن الأخنس، عن الوليد بن عبد اللَّه بن أبي مغيث، عن يوسف بن ماهك، عن عبد اللَّه بن عمرو، قال (فذكره).
قال أبو داود: حدّثنا مؤمّل بن الفضل، حدّثنا الوليد، قال: قلت لأبي عمرو.
وإسناده صحيح، ويحيى هو ابن سعيد القطّان، وعنه رواه الإمام أحمد (6510)، والحاكم (1/ 105 - 106) وقال:"رواة هذا الحديث قد احتجّا بهم عن آخرهم غير الوليد هذا، وأظنه الوليد بن أبي الوليد الشّاميّ، فإنّه الوليد بن عبد اللَّه، وقد غلبت على أبيه الكنية، فإن كان كذلك فقد احتجّ به مسلم" انتهى.
وقال الذّهبيّ في"تلخيصه":"إنّ كان الوليد هو ابن أبي الوليد الشّامي فهو على شرط مسلم".
قلت: كذا قالا، والصّحيح أنه الوليد بن عبد اللَّه بن أبي مغيث العبدريّ مولاهم المكيّ كما ساق نسبه أبو داود، ومن روانه. ورواه ابن ماجه غير أنه ثقة، وثّقه ابنُ معين وغيره.
وأمّا الوليد بن أبي الوليد الشّاميّ فلا يوجد من يسمّي بهذا الاسم فضلا عن أن يكون من رواة مسلم، والذي روى له مسلم هو الوليد بن أبي الوليد المدني لا الشّاميّ كما قال الحاكم، إِلَّا أن يكون أحد الرواة نسبه إلى الشّام خطأ، واسم أبيه عثمان لا عبد اللَّه.
আব্দুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছ থেকে যা কিছু শুনতাম, তা মুখস্থ করার উদ্দেশ্যে লিখে রাখতাম। কিন্তু কুরাইশরা আমাকে বারণ করল এবং বলল: তুমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছ থেকে শোনা সবকিছু লিখে রাখবে না। কারণ রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একজন মানুষ, তিনি রাগ ও সন্তুষ্টি উভয় অবস্থাতেই কথা বলেন। তাই আমি লেখা বন্ধ করে দিলাম এবং এই বিষয়টি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে বললাম। তখন তিনি তাঁর আঙ্গুল দ্বারা মুখের দিকে ইশারা করে বললেন: 'লেখো, যার হাতে আমার জীবন, তাঁর শপথ! এই মুখ থেকে সত্য ছাড়া অন্য কিছু বের হয় না।'
687 - عن طلحة بن عبيد اللَّه التيميّ قال:"مررتُ مع رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم بقوم على رؤوس النَّخل، فقال:"ما يصنعُ هؤلاء؟". فقالوا: يلقِّحونه، يجعلون الذَّكرَ في الأنثى فيتلقح. فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ما أظنُّ يُغني ذلك شيئًا". قال: فأُخبروا بذلك فتركوه. فأُخبر رسولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم بذلك فقال:"إن كان ينفعهم ذلك فلْيصنعوه. فإنّي إنّما ظننتُ ظنًّا فلا تُؤاخذوني بالظّن. ولكنْ إذا حدّثْتكم عن اللَّه شيئًا، فخذوا به. فإنّي لنْ أكذبَ على اللَّه عز وجل".
صحيح: رواه مسلم في الفضائل (2361) من طرق عن أبي عوانة، عن سماك، عن موسى بن طلحة، عن أبيه، قال (فذكره).
তালহা ইবনু উবাইদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে খেজুর গাছের মাথায় থাকা একদল লোকের পাশ দিয়ে যাচ্ছিলাম। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “এরা কী করছে?” তারা বলল: তারা তাতে পরাগায়ন করছে; পুরুষ (পুষ্প) কে স্ত্রীর মধ্যে স্থাপন করছে, ফলে ফল ধরবে। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “আমার মনে হয় না এটা কোনো কাজে আসবে।” (তালহা) বলেন: অতঃপর তাদেরকে এ বিষয়ে জানানো হলো এবং তারা তা ছেড়ে দিল। এরপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এ সম্পর্কে জানানো হলে তিনি বললেন: “যদি এটি তাদের জন্য উপকারী হয়, তবে তারা যেন তা করে। কারণ আমি তো কেবল একটি ধারণা প্রকাশ করেছিলাম। তাই ধারণার জন্য তোমরা আমাকে দোষারোপ করো না। কিন্তু আমি যখন তোমাদেরকে আল্লাহ্র পক্ষ থেকে কোনো বিষয় জানাই, তখন তোমরা তা গ্রহণ করো। কেননা আমি মহান আল্লাহ্র উপর কখনোই মিথ্যা আরোপ করব না।”
688 - عن رافع بن خديج، قال:"قدم نبيُّ اللَّه صلى الله عليه وسلم المدينة. وهمْ يَأْبِرون النَّخْل. يقولون: يلقِّحون النّخل. فقال:"ما تصنعون؟". قالوا: كنّا نصنعُه. قال:"لعلّكم لو لم تفعلوا كان خيرًا". فتركوه. فنفضت أو فنقصت. قال: فذكروا ذلك له فقال:"إنّما أنا بشرٌ، إذا أمرْتكم بشيء من دينكم فخذوا به، وإذا أمرتكم بشيء من رأيٍ، فإنّما أنا بشر". قال عكرمة: أو نحو هذا. قال المَعْقِريّ: فتفضت ولم يشك.
صحيح: رواه مسلم في الفضائل (2362) من طرق عن النّضر بن محمد: حدّثنا عكرمة (وهو ابن عمّار): حدثنا أبو النجاشيّ: حدّثني رافع بن خديج، فذكره.
রাফি' বিন খাদীজ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন মদীনায় আগমন করলেন, তখন সেখানকার লোকেরা খেজুর গাছ তা'বীর (পরাগায়ন) করছিল। তারা বলছিল: আমরা খেজুর গাছের পরাগায়ন করি। তিনি জিজ্ঞেস করলেন: "তোমরা কী করছ?" তারা বলল: আমরা এটি আগে থেকেই করতাম। তিনি বললেন: "সম্ভবত, যদি তোমরা এটি না করতে, তবে তা তোমাদের জন্য উত্তম হতো।" সুতরাং তারা তা করা ছেড়ে দিল। ফলে (খেজুরের) ফলন ঝরে গেল অথবা কমে গেল। রাফি' (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: তারা বিষয়টি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে উল্লেখ করল। তখন তিনি বললেন: "আমি তো একজন মানুষ মাত্র। যখন আমি তোমাদেরকে তোমাদের দ্বীনের বিষয়ে কোনো কিছুর আদেশ করি, তখন তা তোমরা গ্রহণ করো। আর যখন আমি তোমাদেরকে কোনো ব্যক্তিগত মতের ভিত্তিতে আদেশ করি, তখন (মনে রেখো) আমি তো একজন মানুষ মাত্র।"
689 - عن عائشة، وعن أنس:"أنّ النّبيَّ صلى الله عليه وسلم مرَّ بقوم يُلقِّحون فقال:"لو لم تفعلوا لَصُلح". قال: فخرج شيصًا، فمرّ بهم، فقال:"ما لنخلكم؟". قالوا: قلت كذا وكذا. قال:"أنتم أعلم بأمر دنياكم".
صحيح: رواه مسلم في الفضائل (2362) من طرق عن الأسود بن عامر: حدّثنا حمّاد بن سلمة، عن هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة، وعن ثابت عن أنس، فذكراه.
وقوله:"فخرج شيصًا" هو البسر الرديء الذي إذا يبس صار حشفًا.
من خصائص الأنبياء والمرسلين صلوات اللَّه عليهم أجمعين أنّهم معصومون فيما يخبرون به عن اللَّه تعالى، وفيما عداه فللنّاس فيه نزاع، والذي عليه جمهور أهل العلم أنّ الأنبياء معصومون عن الكبائر دون الصغائر. قال شيخ الإسلام ابن تيمية رحمه اللَّه تعالى:"وهو قول أكثر علماء الإسلام، وجميع الطوائف، حتى إنه قول أكثر أهل الكلام كما ذكر أبو الحسن الآمديّ أنّ هذا قول أكثر الأشعريّة، وهو أيضًا قول أكثر أهل التفسير والحديث والفقه، بل لم ينقل عن السّلف والأئمة، والصّحابة والتابعين وتابعيهم إِلَّا ما يوافق هذا القول"."مجموع الفتاوى" (4/ 319).
وقال رحمه اللَّه تعالى أيضًا:"أهل السنة متفقون على أنهم لا يقرّون على خطأ في الدين أصلًا، ولا فسوق، ولا كذب. ففي الجملة: كل ما يقدح في نبوتهم وتبيلغهم عن اللَّه فهم متفقون على تنزيههم عنه. وعامة الجمهور الذين يجوزون عليهم الصّغائر يقولون إنّهم معصومون من الإقرار عليها. فلا يصدر عنهم ما يضرّهم كما جاء في الأثر:"كان داود بعد التوبة خيرًا منه قبل الخطيئة"."منهاج السنة" (1/ 472).
وخلاصة القول في عصمة الأنبياء:
1 - إنّ أهل السنة وجمهور المسلمين متفقون على أن الأنبياء عليهم السلام معصومون فيما يخبرون عن اللَّه تعالى، وفي تبليغ رسالته لأنّ العصمة هي التي يحصل بها مقصود الرسالة والنبوة.
2 - اتفق أهل السنة أيضًا على وقوع الصّغائر منهم دون الكبائر في الأفعال، بدليل ما ورد في القرآن والأخبار الصحيحة، ولكنّهم لا يصرون عليها بل يبادرون إلى التوبة والاستغفار، فيكونون في هذه الحال معصومين من الإصرار عليها، ويكون الاقتداء بهم في التوبة منها، بحيث إننا أمرنا بالتأسي بهم، وباللَّه التوفيق.
আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এবং আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এমন এক কওমের পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন যারা খেজুর গাছে পরাগায়ন (তা'বীর) করছিল। তিনি বললেন: "যদি তোমরা এটা না করতে, তবেই ভালো ফলন হতো।" বর্ণনাকারী বলেন: এরপর ফলগুলো 'শাইস' (খারাপ ফল) বের হলো। তিনি আবার তাদের পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন, তখন তিনি বললেন: "তোমাদের খেজুর গাছের কী হয়েছে?" তারা বলল: আপনি এমন এমন বলেছিলেন (তাই আমরা পরাগায়ন করিনি)। তিনি বললেন: "তোমরা তোমাদের দুনিয়াবি ব্যাপারগুলো সম্পর্কে বেশি জানো।"
690 - عن عبادة بن الصّامت، عن النبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"من شهد أن لا إله إلّا اللَّه وحده لا شريك له، وأنّ محمّدًا عبده ورسوله، وأنّ عيسى عبد اللَّه ورسولُه، وكلمته ألقاها إلى
مريم، وروح منه، والجنّة حقّ، والنّار حقّ، أدخله اللَّه الجنّة على ما كان من العمل".
متفق عليه: رواه البخاريّ في أحاديث الأنبياء (3435)، ومسلم في الإيمان (28) كلاهما من حديث الأوزاعيّ، قال: حدّثني عمير بن هانئ العنسيّ. حدّثني جُنادة بن أبي أميّة، قال: حدّثني عبادة بن الصّامت، فذكر مثله.
وفي رواية عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، عن عمير بن هانئ، عن جُنادة زاد:"من أبواب الجنّة الثمانية من أيِّها شاء".
উবাদাহ ইবনুস সামিত (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নাবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি সাক্ষ্য দেয় যে, আল্লাহ্ ছাড়া কোনো ইলাহ (উপাস্য) নেই, তিনি এক, তাঁর কোনো শরীক নেই; আর মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর বান্দা ও রাসূল; আর ঈসা (আঃ) আল্লাহ্র বান্দা ও তাঁর রাসূল এবং আল্লাহ্র সেই কালেমা যা তিনি মারইয়ামের নিকট অর্পণ করেছেন এবং তাঁর পক্ষ থেকে রূহ (আত্মা); আর জান্নাত সত্য, জাহান্নাম সত্য— তার আমল যেমনই হোক না কেন, আল্লাহ্ তাকে জান্নাতে প্রবেশ করাবেন।"
(অন্য এক বর্ণনায় অতিরিক্ত এসেছে যে,) আল্লাহ তাকে জান্নাতের আটটি দরজার যে কোনোটি দিয়ে সে ইচ্ছা করবে (প্রবেশ করাবেন)।
691 - عن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"والذي نفسي بيده ليوشكنَّ أن ينزل فيكم ابنُ مريم حكمًا عدلًا، فيكسر الصّليب، ويقتل الخنزير، ويضع الجزية، ويفيض المالُ حتى لا يقبله أحدٌ حتّى تكون السّجدة الواحدة خير من الدّنيا وما فيها". ثم يقول أبو هريرة: واقرأوا إن شئتُم: {وَإِنْ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلَّا لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا} [سورة النساء: 159].
متفق عليه: رواه البخاريّ في أحاديث الأنبياء (3448)، ومسلم في الإيمان (155) كلاهما من حديث يعقوب بن إبراهيم، عن أبيه، عن ابن شهاب أن سعيد بن المسيب سمع أبا هريرة يقول (فذكره).
وقوله تعالى: {قَبْلَ مَوْتِهِ} الضّمير يعود إلى عيسى عليه السلام هذا هو الصّحيح، وهو مروي عن ابن عباس، وأبي هريرة، وغيرهما.
ومن قال: الضّمير يعود إلى أهل الكتاب يؤول تأويلًا بعيدًا.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যাঁর হাতে আমার জীবন, তাঁর শপথ! অচিরেই তোমাদের মাঝে মারইয়ামের পুত্র (ঈসা আ.) একজন ন্যায়বিচারক শাসক হিসেবে অবতরণ করবেন। অতঃপর তিনি ক্রুশ ভেঙে দেবেন, শূকরকে হত্যা করবেন, জিযিয়া (অমুসলিমদের উপর ধার্য কর) তুলে দেবেন, আর সম্পদ এত বেশি হবে যে, তা গ্রহণ করার মত কেউ থাকবে না, এমনকি এক সিজদা দুনিয়া এবং এর মধ্যকার সবকিছুর চেয়ে উত্তম হবে।"
এরপর আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: তোমরা চাইলে এ আয়াতটি পাঠ করতে পারো: “আর আহলে কিতাবদের মধ্যে প্রত্যেকেই তার (ঈসা আলাইহিস সালামের) মৃত্যুর পূর্বে অবশ্যই তার প্রতি ঈমান আনবে এবং কিয়ামতের দিন তিনি তাদের উপর সাক্ষী থাকবেন।” (সূরা নিসা: ১৫৯)।
692 - عن أبي هريرة، أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لا تقومُ السّاعةُ حتى ينْزلَ الرُّومُ بالأعماقِ أو بدابق، فيخرج إليهم جيش من المدينة من خيار أهل الأرض يومئذ فإذا تصافُّوا، قالت الرُّوم: خلوا بيننا وبين الذين سَبَوْا مِنّا نقاتلهم. فيقول المسلمون: لا واللَّه لا نخلِّي بينكم وبين إخواننا فيقاتلونهم، فينهزمُ ثلثٌ لا يتوب اللَّه عليهم أبدًا، ويُقتل ثلثُهم أفضل الشّهداء عند اللَّه، ويفتتحُ الثُّلث لا يُفتنون أبدًا، فيفتتحون قسطنطينيّةَ، فبينما هم يَقتسمُون الغنائم قد عَلّقوا سيوفَهم بالزّيتون إذْ صاح فيهم الشّيطان إنّ المسيحَ قد خلفكم في أهليكم فيخرجون وذلك باطل فإذا جاؤوا الشّام خرج، فبينما هم يُعِدُّون للقتال يُسَوُّون الصُّفُوفَ، إذْ أُقِيمتِ الصّلاةُ. فينْزِلُ عيسى ابن مريم صلى الله عليه وسلم فأمَّهُم، فإذا رآه عدُوُّ اللَّه ذاب كما يذوبُ الملح في الماء فلو تركهـ
لانْذابَ حتى يَهْلك، ولكنْ يَقْتُلُه اللَّهُ بيده، فَيُريهمْ دَمَهُ في حَرْبَتِه".
صحيح: رواه مسلم في الفتن (2897) عن زهير بن حرب: حدّثنا معلى بن منصور: حدّثنا سليمان بن بلال، حدّثنا سُهيل، عن أبيه، عن أبي هريرة، فذكره.
قوله:"بالأعماق أو بدابق" موضعان بالشّام بقرب حلب وأنطاكيّة.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
কেয়ামত সংঘটিত হবে না, যতক্ষণ না রোমানরা (খ্রিস্টানরা) আ‘মাক্ব (আল-আমাক) অথবা দাবিক্ব (আদ-দাবিক) নামক স্থানে অবতরণ করবে। তখন মদিনা থেকে একটি সেনাবাহিনী তাদের মোকাবিলায় বের হবে—যারা সেদিনের ভূমিবাসীদের মধ্যে শ্রেষ্ঠ। যখন তারা (দুই দল) সারিবদ্ধ হয়ে দাঁড়াবে, তখন রোমানরা বলবে: "আমাদের ও তাদের মধ্যেকার পথ ছেড়ে দাও যারা আমাদের মধ্য থেকে যুদ্ধবন্দী হয়েছিল, আমরা তাদের সাথে যুদ্ধ করব।" তখন মুসলমানরা বলবে: "না, আল্লাহর কসম! আমরা তোমাদের ও আমাদের ভাইদের মধ্যেকার পথ ছেড়ে দেব না।" অতঃপর তারা যুদ্ধ করবে। তাদের এক-তৃতীয়াংশ পরাজিত হয়ে পালাবে, আল্লাহ তাদের তওবা কখনোই কবুল করবেন না। তাদের এক-তৃতীয়াংশ শহীদ হবে, যারা আল্লাহর নিকট সর্বশ্রেষ্ঠ শহীদ। আর অবশিষ্ট এক-তৃতীয়াংশ বিজয় লাভ করবে এবং তারা কখনোই ফেতনায় পড়বে না। তারা কন্সট্যান্টিনোপল (কুস্তুনতুনিয়া) বিজয় করবে। যখন তারা গনীমতের মাল ভাগাভাগি করতে থাকবে এবং তাদের তরবারিগুলো জলপাই গাছের ডালে ঝুলানো থাকবে, ঠিক তখনই শয়তান তাদের মাঝে চিৎকার করে বলবে: "নিশ্চয়ই মাসীহ (দাজ্জাল) তোমাদের পরিবার-পরিজনের মধ্যে তোমাদের অনুপস্থিতিতে চলে এসেছে।" তখন তারা (তা শুনে) বের হয়ে যাবে। কিন্তু এই সংবাদটি হবে মিথ্যা। যখন তারা শামে (সিরিয়ায়) পৌঁছাবে, তখন সে (দাজ্জাল) বের হবে। যখন তারা যুদ্ধের প্রস্তুতি নিচ্ছে এবং কাতার সোজা করছে, ঠিক তখনই সালাতের ইকামত দেওয়া হবে। তখন ঈসা ইবনু মারইয়াম (আঃ) অবতরণ করবেন এবং তিনি তাদের ইমামতি করবেন। আল্লাহর শত্রু (দাজ্জাল) যখন তাঁকে দেখবে, তখন সে গলে যাবে, যেমন লবণ পানিতে গলে যায়। যদি তিনি তাকে (ঈসা আঃ) ছেড়েও দিতেন, তবে সে গলে গিয়ে ধ্বংস হয়ে যেত। কিন্তু আল্লাহ তাকে তাঁর হাতে হত্যা করবেন এবং ঈসা (আঃ) তাদের (মুসলমানদের) তাঁর (দাজ্জালের) রক্ত তাঁর বল্লমের মাথায় দেখাবেন।
693 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"كيف أنتم إذا نزل ابنُ مريم، وإمامُكم منكم".
وفي رواية:"كيف أنتم إذا نزل ابن مريم من السّماء فيكم وإمامُكم منكم".
متفق عليه: رواه البخاريّ في أحاديث الأنبياء (3449)، ومسلم في الإيمان (155: 244) كلاهما من حديث يونس، عن ابن شهاب، عن نافع مولى أبي قتادة الأنصاريّ، قال: إنّ أبا هريرة قال (فذكر الحديث) ولفظهما سواء.
والرّواية الثانية عند البيهقيّ في"الأسماء والصفات" (2/ 166) من هذا الوجه أيضًا، وعزاه للشيخين - أي أصل الحديث لا لفظ الحديث. فإن ذكر السماء غير موجود في الصحيحين، ولكن النزول يقتضي ذلك، ولذا قال البيهقيّ:"وإنّما أراد نزوله من السماء بعد الرفع إليه".
ورواه مسلم من طريق الوليد بن مسلم: حدّثنا ابن أبي ذئب، عن ابن شهاب، بإسناده، وفيه:"كيف أنتم إذا نزل فيكم ابنُ مريم فأمَّكم منكم؟". فقل لابن أبي ذئب: إنّ الأوزاعيّ حدثنا عن الزّهريّ، عن نافع، عن أبي هريرة:"وإمامكم منكم؟". قال ابنُ أبي ذئب:"تدري ما أمّكم منكم؟". قلت: تُخبرني، قال: فأمَّكم بكتاب اللَّه تبارك وتعالى، وسنَّة نبيّكم صلى الله عليه وسلم".
والذي يظهر أنّ الرّواية التي اتفق عليها الشّيخان هي الرَّاجحة، وهي قوله:"إمامُكم منكم". لما تشهد له الرّوايات الأخرى، ولذا أوّل ابنُ حبان ما جاء في رواية أخرى:"فيؤمُّهم". بأنَّه أراد به فيأمرهم بالإمامة، إذ العرب تنسبُ الفعل إلى الآمر، كما تنسبه إلى الفاعل."صحيح ابن حبان" (15/ 224).
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “তোমাদের অবস্থা কেমন হবে, যখন মারইয়ামের পুত্র (ঈসা) অবতরণ করবেন এবং তোমাদের ইমাম তোমাদের মধ্য থেকেই হবেন?”
অন্য এক বর্ণনায় আছে: “তোমাদের অবস্থা কেমন হবে যখন মারইয়ামের পুত্র আকাশ থেকে তোমাদের মাঝে অবতরণ করবেন এবং তোমাদের ইমাম তোমাদের মধ্য থেকেই হবেন?”
মুসলিম শরীফের অন্য এক সূত্রে বর্ণিত: “তোমাদের অবস্থা কেমন হবে যখন মারইয়ামের পুত্র তোমাদের মাঝে অবতরণ করবেন এবং তোমাদের মধ্য থেকে কেউ তোমাদের ইমামতি করবেন?” (বর্ণনাকারী) ইবনু আবী যি'বকে বলা হলো: আওযা‘ঈ (রাহিমাহুল্লাহ) আমাদের কাছে যুহরী, নাফি‘, আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সূত্রে বর্ণনা করেছেন: “এবং তোমাদের ইমাম তোমাদের মধ্য থেকে?” ইবনু আবী যি'ব বললেন: তুমি কি জানো 'তোমাদের মধ্য থেকে তোমাদের ইমামতি করবেন'-এর অর্থ কী? আমি বললাম: আপনি আমাকে বলুন। তিনি বললেন: তিনি তোমাদেরকে আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তা‘আলার কিতাব এবং তোমাদের নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের সুন্নাহ অনুসারে ইমামতি করবেন।
694 - عن أبي هريرة، قال: سمعتُ أبا القاسم الصّادق المصدوق يقول:"يخرجُ أعورُ الدّجال مسيح الضّلالة قبل المشرق في زمن اختلاف من النّاس، وفرقة، فيبلغ ما شاء اللَّه أن يبلغ من الأرض في أربعين يومًا، اللَّه أعلم ما مقدارها، فيلقى المؤمنون شدّة شديدة، ثم ينزل عيسى ابن مريم صلى الله عليه وسلم من السماء، فيؤمُّ النّاس، فإذا رفع رأسه من ركعته قال: سمع اللَّه لمن حمده، قتل اللَّه المسيح الدّجال، وظهر المسلمون، فأحلفُ أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أبا القاسم الصّادق المصدوق صلى الله عليه وسلم قال: إنّه لحقّ، وأمّا أنّه قريب، فكلّ ما هو آت قريب".
حسن: رواه البزّار -كشف الأستار (3396) - عن علي بن المنذر، عن محمد بن فضيل، عن عاصم بن كليب، عن أبيه، عن أبي هريرة، فذكر الحديث.
وصحّحه ابن حبان (6812) من وجه آخر عن صالح بن عمر: حدثنا عاصم بن كليب، بإسناده، نحوه.
وأورده الهيثميّ في"المجمع" (7/ 349) وعزاه للبزّار وقال:"رجاله رجال الصّحيح، غير علي بن المنذر وهو ثقة".
قلت: وقد تُوبع في إسناد ابن حبان، ولكن فيه كليب والد عاصم وهو كليب بن شهاب مختلف فيه، فتكلّم فيه أبو داود والنسائيّ، ووثقه أبو زرعة، وابن سعد وغيرهما، وهو حسن الحديث، ولذا قال فيه الحافظ في"التقريب""صدوق".
وقوله:"فيؤمّهم". قال ابن حبان:"أراد به فيأمرهم بالإمامة، إذ العربُ تنسب الفعل إلى الآمر كما تنسبه إلى الفاعل".
وقوله:"قتل اللَّه الدّجال". أي على يد عيسى عليه السلام وهو مثل قوله تعالى: {فَلَمْ تَقْتُلُوهُمْ وَلَكِنَّ اللَّهَ قَتَلَهُمْ وَمَا رَمَيْتَ إِذْ رَمَيْتَ وَلَكِنَّ اللَّهَ رَمَى} [سورة الأنفال: 17].
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি আবুল কাসিম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), যিনি সত্যবাদী ও সত্য বলে স্বীকৃত, তাঁকে বলতে শুনেছি: "এক চক্ষুবিশিষ্ট দাজ্জাল, ভ্রষ্টতার মসীহ (মাসিহুদ দালালাহ), মানুষের মধ্যে মতানৈক্য ও বিভেদের সময়ে পূর্ব দিক থেকে আত্মপ্রকাশ করবে। অতঃপর সে চল্লিশ দিন ধরে আল্লাহর ইচ্ছানুযায়ী যমীনের যেখানে ইচ্ছা পৌঁছাবে। এর পরিমাণ আল্লাহই ভালো জানেন। তখন মু'মিনগণ কঠিন দুর্দশার সম্মুখীন হবে। অতঃপর আসমান থেকে ঈসা ইবনু মারইয়াম (আঃ) অবতরণ করবেন এবং তিনি মানুষের ইমামতি করবেন (বা তাদের নেতৃত্ব দেবেন)। অতঃপর যখন তিনি তাঁর রুকু থেকে মাথা উঠাবেন, তখন বলবেন: 'সামিআল্লাহু লিমান হামিদা' (আল্লাহ্ তার প্রশংসা শ্রবণ করেছেন), আল্লাহ্ যেন মাসীহ দাজ্জালকে হত্যা করেন এবং মুসলিমরা যেন বিজয়ী হয়। আমি শপথ করে বলছি যে, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) অর্থাৎ আবুল কাসিম, যিনি সত্যবাদী ও সত্য বলে স্বীকৃত (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), তিনি বলেছেন: 'নিশ্চয়ই এটি সত্য। আর এটি নিকটবর্তী হওয়ার বিষয়ে, যা কিছু আসবে তা সবই নিকটবর্তী।"
695 - عن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ليس بيني وبينه نبيٌّ -يعني عيسى ابن مريم- وإنّه نازلٌ، فإذا رأيتموه فاعرفوه، رجل مربوع إلى الحمرة والبياض بين ممصرَّتين، كأن رأسه يقطر وإن لم يصبه بلل، فيقاتل النّاس على الإسلام، فيدق الصّليب، ويقتل الخنْزير، ويضع الجزية، ويُهلك اللَّهُ في زمانه المللَ كلَّها إِلَّا الإسلام، ويُهلك المسيحَ الدّجال، فيمكث في الأرض أربعين سنة، ثم يتوفّى فيصلي عليه المسلمون".
حسن: رواه أبو داود (4323) وصحّحه ابنُ حبان (6821)، والحاكم (2/ 595) كلّهم من طريق همام بن يحيى، عن قتادة، عن عبد الرحمن بن آدم، عن أبي هريرة، فذكر الحديث، واللّفظ لأبي داود.
ورواه أيضًا الإمام أحمد (9270) من هذا الطّريق، وذكر هؤلاء غير الحاكم في أوّل الحديث:"الأنبياء كلّهم إخوة لعلّات، أمهاتُهم شتّى، ودينُهم واحد، وأنا أولى النّاس بعيسى ابن مريم". ثم ذكر بقية الحديث مثله.
وزاد الحاكم في آخر الحديث:"وتقع الأمنة على أهل الأرض حتى ترعى الأُسُود مع الإبل، والنّمور مع البقر، والذئاب مع الغنم، ويلعب الصبيان مع الحيّات لا تضرّهم، فيمكث في الأرض أربعين سنة، ثم يُتوفَّى ويصلي عليه المسلمون". وقال:"صحيح الإسناد".
وصحّحه أيضًا الحافظُ في"الفتح" (6/ 493).
قلت: ظاهر الإسناد فيه السّلامة، ولكن فيه قتادة وهو مدلّس وقد عنعن، ولم يسمع من عبد الرحمن بن آدم، سئل ابن معين: عن قتادة، عن عبد الرحمن بن آدم، وهو مولى أم بُرثُن -بضم الموحدة وسكون الرّاء، وبعدها مثلثة مضمومة، ثم نون-؟ فقال: لم يسمع منه.
انظر: المراسيل لابن أبي حاتم (633)، وجامع التحصيل للعلائيّ (633)، وتحفة التحصيل للعراقي (ص 264)، فلعلّ من صحّح هذا الحديث غفِل عن هذه العلّة الخفيّة، إِلا أنّ الحديث رُوي من وجه آخر، رواه الإمام أحمد (10261) عن، سريج، قال: حدثنا فُليح، عن الحارث بن فضيل الأنصاريّ، عن زياد بن سعد، عن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ينزل ابنُ مريم إمامًا عادلًا، وحكمًا مقْسطًا، فيكسرُ الصّليب، ويقتلُ الخنزير، ويُرجعُ السّلْمَ، ويتخذ السّيوفَ مناجلَ، وتذهبُ حُمةُ كلِّ ذات حُمةٍ، وتُنزل السّماءُ رزقَها، وتخرجُ الأرضُ بركتَها، حتى يلْعب الصبيُّ بالثعبان فلا يضرّه، ويُراعي الغنمُ الذئب فلا يضرُّها، ويُراعِيَ الأسدُ البقرَ فلا يضرُّها".
وفي الإسناد من لم يوثّق، وفليح هو ابن سليمان الخزاعيّ أبو يحيى المدنيّ مختلف فيه، فضعّفه ابنُ معين، وأبو حاتم، والنسائي وغيرهم، ومشّاه الآخرون، ولذا قال فيه الحافظ:"صدوق كثير الخطأ".
قلت: وهو لا بأس به في المتابعات، وهذا الإسناد والذي قبله يقوّي بعضُه بعضًا.
وقوله:"يتخذ السيوف مناجل". أي أنّ النّاس يتركون الجهاد، ويشتغلون بالحرث والزّراعة.
وقوله:"حُمة". بضم الحاء - هو السُّم، والمراد من قوله:"حتّى يلعب الصّبيُّ بالثعبان فلا يضرّه".
وروي عن أبي هريرة أيضًا قال:"لا تقوم السّاعة حتى ينزل عيسى ابن مريم إمامًا مقسطًا. . . (غير مقروء) ويقتل الخنزير، ويكسر الصّليب، وتوضع الجزية، وتكون السّجدة واحدة لربّ العالمين، وتضع الحرب أوزارها، وتملأ الأرض من الإسلام كما تملأ الآبار من الماء، وتكون الأرض كماثور الورق -يعني المائدة- وترفع الشحناءُ والعداوة، ويكون الذئبُ في الغنم كأنّها كلبها، ويكون الأسد في الإبل كأنه محلّها".
رواه عبد الرزّاق (20844) عن معمر، عن زيد بن أسلم، عن رجل، عن أبي هريرة، فذكره. وفيه رجل لم يسم، كما أنّه موقوف على أبي هريرة.
ورواه عبد الملك بن حبيب الأندلسي في أشراط السّاعة (35) عن مطرف بن مالك، عن زيد بن أسلم، بإسناده، مثله، مع زيادة بعض الفقرات منها قوله:
"وترفع العداوة والشحناء، والبغض والحسد، حتى يطأ الرّجل على رأس الحنش فلا يضرّه". ومنها قوله:"وتكون الأرض على عهد آدم عليه السلام". ومنها قوله:"ويكون الفرس بعشرين درهمًا، حتى لا يقبل الرجلُ من الرّجل شيئًا من المال".
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমার ও তাঁর (অর্থাৎ ঈসা ইবনে মারইয়ামের) মাঝে কোনো নবী নেই। আর তিনি (অবশ্যই) অবতীর্ণ হবেন। যখন তোমরা তাঁকে দেখবে, তখন তাঁকে চিনে নিও—তিনি মাঝারি গড়নের, লালচে-সাদা বর্ণের একজন পুরুষ হবেন, দুটি হালকা হলুদ রঙের কাপড়ের মাঝে থাকবেন। মনে হবে যেন তার মাথা থেকে ফোঁটা ফোঁটা পানি পড়ছে, যদিও তাতে কোনো ভিজা ভাব থাকবে না। অতঃপর তিনি ইসলামের জন্য মানুষের সাথে যুদ্ধ করবেন। তিনি ক্রুশ ভেঙে দেবেন, শূকর হত্যা করবেন, জিযিয়া (কর) তুলে দেবেন। তাঁর সময়ে আল্লাহ ইসলাম ছাড়া সকল ধর্মকে নিশ্চিহ্ন করে দেবেন। তিনি মাসীহ দাজ্জালকে ধ্বংস করবেন। অতঃপর তিনি চল্লিশ বছর পৃথিবীতে অবস্থান করবেন, এরপর তিনি মৃত্যুবরণ করবেন এবং মুসলিমগণ তাঁর জানাযার সালাত আদায় করবেন।"
696 - عن النَّوّاس بن سَمْعَان، قال:"ذكر رسولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم الدّجال ذات غداة فخفّض
فيه ورفّع حتّى ظننّاه في طائفة النّخل، فلمّا رُحنا إليه عرف ذلك فينا، فقال:"ما شأنُكم؟". قلنا: يا رسول اللَّه، ذكرتَ الدّجال غداة فخفضتَ فيه ورفعت حتى ظننّاه في طائفة النّخل، فقال:"غير الدّجال أَخْوفَني عليكم إنْ يخرج وأنا فيكم فأنا حجيجه دونكم، وإنْ يخرج ولستُ فيكم فامرؤ حجيج نفسِه، واللَّهُ خليفتي على كلِّ مسلم؛ إنّه شابٌّ قَطَطٌ، عينُه طافِئة كأنّي أشبهُهُ بعبد العُزّي بن قَطَن، فمن أدركه منكم فليقرأُ عليه فواتِحَ سُورةِ الكَهْفِ إنّه خارجٌ خلّة بين الشّام والعراق فعاث يمينًا وعاث شمالًا، يا عباد اللَّه فاثْبُتُوا". قلنا: يا رسول اللَّه وما لَبْثُه في الأرض؟ قال:"أربعون يومًا يوم كسنة، ويوم كشهر ويوم كجمعة وسائر أيامه كأيامكم". قلنا: يا رسولَ اللَّه فذلك اليوم الذي كسنة أتكفِينا فيه صلاةُ يومٍ؟ قال:"لا اقدُرُوا له قدْرَه". قلنا: يا رسول اللَّه وما إسراعه في الأرض؟ قال:"كالغيث استدبرته الرّيح، فيأتي على القوم فيدعوهم فيؤمنون به، ويستجيبون له، فيأمر السّماءً فتمطر والأرض فتنبت، فتروحُ عليهم سارحَتَهُمْ أطولَ ما كانتْ ذُرًا، وأَسْبغَهُ ضُرُوعًا، وأمدّهُ خَوَاصِرَ، ثم يأتي القومَ، فيدعوهم فيردّون عليه قولَه، فينصرف عنهم فيصبحون مُمْحِلِين ليس بأيديهم شيءٌ من أموالهم، ويَمرُّ بالخَرِبَة فيقول لها: أخْرجِي كنوزَك فتتبعه كنوزُها كيعاسِيب النّحلِ، ثم يدْعُو رَجُلًا ممتلئًا شبابًا فيضربه بالسّيف فيقطعه جَزِلَتَيْن رَمْيةَ الغَرَضِ. ثم يدعوه فيقبلُ ويتهلّلُ وجهُه يَضْحَكُ، فبينما هو كذلك إذ بعث اللَّهُ المسيحَ ابنَ مريم فينزل عند المنارة البيضاء شرقي دمشق بين مَهْرُودَتَيْنِ واضعًا كَفَّيْه على أَجنحةِ مَلَكَيْنِ إذا طأطأَ رأْسَهُ قَطَر، وإذا رفعه تحدر منه جُمانٌ كاللُّؤلُؤِ، فلا يَحل لكافرٍ يجدُ ريحَ نفسه إِلَّا مات، ونفسُه ينتهي حيث ينتهي طرْفُه، فيطلُبُه حتّى يُدْركَه بباب لُدٍّ، فَيَقْتُلَه. ثم يأتي عيسى ابنَ مريم قومٌ قد عصمهم اللَّه منه فَيَمْسحُ عن وُجُوههم ويُحدِّثهم بدرجَاتِهم في الجنّة، فبينما هو كذلك إذ أوحى اللَّه إلى عيسى: إنّي قد أخرجتُ عبادًا لي، لا يَدانِ لأحدٍ بقتالهم فحَرِّزْ عِبادي إلى الطُّور، ويبعثُ اللَّه يأجوجَ ومأجوجَ وهم من كل حدب ينسلون، فيمرُّ أَوائِلُهم على بُحيرةِ طَبَريَّةَ فيشربون ما فيها، ويمرُّ آخرهم فيقولون: لقد كان بهذه مرَّةً ماءٌ. ويُحصرُ نَبِيُّ اللَّه عيسى وأصحابُه، حتّى يكونَ رأسُ الثّور لأحدهم خيرًا من مائة دينار لأحدكم اليوم، فيرغبُ نبيُّ اللَّه عيسى وأصحابُه فيرسل اللَّه عليهمُ النَّغَفَ في رقابِهم فيصبحون فَرْسَى كموت نفسٍ واحدةٍ، ثم يهبط نبي اللَّه عيسى وأصحابُه إلى الأرض فلا يجدون في
الأرض موضع شبر إِلَّا ملأه زَهَمُهُم ونَتْنُهم فيرغبُ نبيُّ اللَّه عيسى وأصحابُه إلى اللَّه، فيرسل اللَّه طيرًا كأعناقِ البُخْت فتحملهم فتطرحهم حيثُ شاء اللَّه، ثم يرسل اللَّه مطرًا لا يَكُنّ منه بيتُ مَدر ولا وَبر فيغسلُ الأرض حتى يترُكَها كالزَّلَفَةِ ثم يقال للأرض: أنبتي ثمرتَك وردّي بركتَك، فيومئذ تَأْكُلُ العصابة من الرُّمانة، ويستظلون بقِحْفِها، ويبارك في الرّسْل حتّى إنّ اللَّقْحَةَ من الإبل لتكفي الفئام من الناس، واللِّقحة من البقر لتكفي القبيلة من الناس، واللقحة من الغنم لتكفي الفخذ من الناس، فبينما هم كذلك إذ بعث اللَّهُ ريحًا طيّبة فتأخذهم تحت آباطهم فتقبض روح كلِّ مؤمن وكلِّ مسلم، ويبقى شرارُ النّاس يتهارجون فيها تهارج الحمر فعليهم تقوم السّاعة".
صحيح: رواه مسلم في كتاب الفتن وأشراط السّاعة (2937) من طرق عن الوليد بن مسلم، حدّثني عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، حدّثني يحيى بن جابر الطّائيّ قاضي حمص، حدّثني عبد الرحمن بن جبير، عن أبيه جبير بن نُفير الحضرميّ، أنّه سمع النّواس بن سمعان الكلابيّ، فذكر الحديث.
ورواه عن علي بن حُجر السّعديّ، حدّثنا عبد اللَّه بن عبد الرحمن بن يزيد بن جابر والوليد بن مسلم. قال ابن حُجر: دخل حديثُ أحدهما في حديث الآخر، عن عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، بهذا الإسناد نحو ما ذكرنا، وزاد بعد قوله:
"لقد كان بهذه مرّة ماء":"ثم يسيرون حتى ينتهوا إلى جبل الخمر، وهو جبل بيت المقدس، فيقولون: لقد قلنا من في الأرض، هلمَّ فلنقتل من في السماء، فيرمون بنُشَّابهم إلى السّماء، فيردُّ اللَّه عليهم نُشَّابَهم مخضوبة دمًا".
ورواه الإمام أحمد (17629) عن الوليد بن مسلم، والترمذيّ (2240) عن علي بن حجر، كلاهما بالطّرق السّابقة.
ورواه أبو داود (4321) من وجه آخر مختصرًا، ورواه ابن ماجه (4075) عن هشام بن عمّار، قال: حدّثنا يحيى بن حمزة، قال: حدّثنا عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، به، مثله مطوّلًا.
قوله:"قطط" بفتحتين: شديد جعودة الشّعر بعيد عن الجعودة المحبوبة.
و"طافئة" بالهمزة لا ضوء فيها، ورويتْ بغير الهمزة ومعناها: بارزة - أي مرتفعة عن محلّها.
و"خلة" أي يخرج من خلّة بين الشّام والعراق.
و"عاث" من العيث، وهو الفساد، أو الإسراع فيه.
و"يا عباد اللَّه اثبتوا" أي على الإسلام، هذا من كلام النبيّ صلى الله عليه وسلم يحذّرهم من الفتنة، ويأمرهم
بالثَّبات على الإسلام.
و"سارحتُهم" ماشيتُهم.
و"ذُرّا" بضم الذّال، جمع ذروة، وهي أعلى سنام البعير، وهو كناية عن السّمن.
و"وأمدّه خواصر" جمع خاصرة، وهو كناية عن الشِّبع.
و"جزلتين" أي قطعتين.
و"رمية الغرض" بالفتحتين - وهو الهدف، أي أن بُعد ما بين القطعتين يكون بقدر رمية السّهم إلى الهدف.
و"بين مهرودتين" أي بين ثوبين شبيهين بالمصبوغ بالهرد، والهرد عرق معروف، وقيل: هو الثوب المصبوغ بالورس والزعفران، والمراد منه إظهار جماله في الملبس، فقوله:"إذا خفض رأسه قطر منه الماء. . .". كله كناية عن حسن سيّدنا عيسى عليه السلام، فهو جميل في خلقته، وجميل في ملبسه، لا كما يصوّره النّصارى الدروشة رديء الثياب، وأحيانًا مغطيًا السّوأتين فقط! .
روى ابن كثير في تفسيره (1/ 574) عن ابن أبي حاتم بسنده عن ابن عباس قال:"لما أراد اللَّه أن يرفع عيسى إلى السّماء خرج على أصحابه ورأسه يقطر ماءً، ثم قال: أيّكم يُلقى عليه شبهي فيقتل مكاني ويكون معي في درجتي؟ فقام شابٌّ منهم، فقال: أنا، فقال: هو أنت ذاك، فأُلقي عليه شبهُ عيسى. ورُفع عيسى من رَوْزَنةٍ -وهي الخرق في أعلى السّقف- في البيت إلى السّماء".
فيكون نزوله كالحال التي رفعه اللَّه عليها.
و"عند باب لُدٍّ" بضم اللّام، وتشديد الدال، اسم جبل أو قرية بفلسطين، والآن مدينة قريبة من بيت المقدس.
و"لا يدان" أي لا قوّة ولا قدرة.
و"نَغَفًا" بالفتحتين - دود يكون في أنوف الإبل والغنم.
و"لا يكنّ" أي لا يمنع من نزول الماء بيت المدر، والمدر هو: الطين الصلب.
و"الزّلَفَة" هي مصانع الماء، وقيل: المرآة، وروي بالقاف كناية عن النّظافة.
و"الرِّسْل" بكسر الرّاء وسكون اللام - اللَّبن.
و"اللُّقحة" بفتح اللام وكسرها - النّاقة القريبة العهد بالولادة.
و"الفئام" بالهمزة ككتاب: الجماعة الكثيرة.
و"الفخذ" هو دون البطن، والبطن دون القبيلة.
و"يتهارجون" أي يجامع الرجال النساء بحضرة الناس كما يفعل الحمير، والهرْج -بإسكان الراء-: الجماع، وفيه إشارة إلى شيوع الفساد والفواحش، وقد ثبت في الصحيح:"لا تقوم الساعة إلا على شرار الناس".
وقوله:"عند المنارة البيضاء شرقي دمشق". وفي رواية:"ينزل عيسى ببيت المقدس". وفي رواية:"بالأردن". والأول أصحّ.
قال ابن كثير:"هذا هو الأشهر في موضع نزوله أنه على المنارة البيضاء الشرقية بدمشق، وقد رأيتُ في بعض الكتب أنه ينزل على المنارة البيضاء شرقي جامع دمشق، فلعلّ هذا هو المحفوظ. . . وليس بدمشق منارة تعرف بالشرقية سوى التي إلى جانب الجامع الأموي بدمشق من شرقيه وهذا هو الأنسب والأليق لأنه ينزل وقد أقيمت الصلاة، فيقول له إمام المسلمين:"يا روح اللَّه تقدّم. فيقول: تقدّم أنت فإنّه أقيمت لك". وفي رواية:"بعضكم على بعض أمراء تكرمة اللَّه هذه الأمّة".
وذكر ابن كثير أنه في زمنه سنة إحدى وأربعين وسبعمائة جدّد المسلمون منارة من حجارة بيض وكان بناؤها من أموال النّصارى الذين حرقوا المنارة التي كانت مكانها، ولعل هذا يكون من دلائل النبوة الظاهرة، حيث قيّض اللَّه بناء هذه المنارة من أموال النصارى، لينزل عيسى ابن مريم عليها، فيقتل الخنزير، ويكسر الصليب، ولا يقبل منهم جزية، ولكن من أسلم وإلّا قُتل، وكذلك غيرهم من الكفار". انتهى"النهاية""الفتن والملاحم" (1/ 144 - 145).
وقوله:"يكون رأس الثور لأحدهم. . ." إشارة إلى فقرهم وفاقتهم لنفاد مؤنهم وهم محاصرون بياجوج ومأجوج.
আন-নাওয়াস ইবনু সাম‘আন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, একদিন সকালে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দাজ্জালের আলোচনা করলেন। তিনি কখনও তার ব্যাপারটিকে ছোট করে দেখালেন, আবার কখনও বড় করে দেখালেন, এমনকি আমরা ধারণা করলাম যে সে হয়তো খেজুরের বাগানের কোনো প্রান্তে এসে পড়েছে। যখন আমরা তাঁর নিকট গেলাম, তিনি আমাদের মনের অবস্থা বুঝতে পারলেন। তিনি জিজ্ঞাসা করলেন, "তোমাদের কী হয়েছে?"
আমরা বললাম, ইয়া রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আপনি সকালে দাজ্জালের আলোচনা এমনভাবে করলেন যে, কখনও তার ব্যাপারটিকে ছোট করে দেখালেন, আবার কখনও বড় করে দেখালেন, এমনকি আমরা ধারণা করলাম যে সে হয়তো খেজুরের বাগানের কোনো প্রান্তে এসে পড়েছে। তিনি বললেন, "দাজ্জাল ছাড়া অন্য কিছু আমার জন্য তোমাদের ব্যাপারে অধিক ভীতিকর। যদি সে তোমাদের মাঝে বের হয় আর আমি তোমাদের মধ্যে থাকি, তবে আমি তোমাদের পক্ষ থেকে তার সাথে বির্তক করব। আর যদি সে বের হয় আর আমি তোমাদের মধ্যে না থাকি, তবে প্রত্যেকে নিজের পক্ষে নিজেই বিতর্কে লিপ্ত হবে। আর আল্লাহ তাআলা প্রত্যেক মুসলমানের উপর আমার খলিফা (প্রতিনিধি/রক্ষক)।"
"সে একজন যুবক, তার চুল অত্যন্ত কোঁকড়ানো, তার চক্ষু টেরা। আমি তাকে আব্দুল উযযা ইবনু কাতান-এর সাথে সাদৃশ্য দেই। তোমাদের মধ্যে যে তাকে পাবে, সে যেন সূরা কাহফ-এর প্রথম দিককার আয়াতগুলো তার উপর পাঠ করে। সে সিরিয়া ও ইরাকের মধ্যবর্তী স্থান থেকে বের হবে এবং ডানে-বামে (সর্বত্র) দ্রুতগতিতে বিপর্যয় সৃষ্টি করবে। হে আল্লাহর বান্দাগণ! তোমরা দৃঢ় থাকবে।"
আমরা বললাম, ইয়া রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! দুনিয়াতে সে কতদিন থাকবে? তিনি বললেন, "চল্লিশ দিন। এর মধ্যে একটি দিন হবে এক বছরের সমান, একটি দিন হবে এক মাসের সমান এবং একটি দিন হবে এক সপ্তাহের সমান, আর বাকি দিনগুলো তোমাদের সাধারণ দিনের মতো হবে।" আমরা বললাম, ইয়া রাসূলুল্লাহ! যে দিনটি এক বছরের সমান হবে, সেই দিনে কি আমাদের এক দিনের সালাতই যথেষ্ট হবে? তিনি বললেন, "না, তোমরা এর সময় অনুমান করে সালাত আদায় করবে।"
আমরা বললাম, ইয়া রাসূলুল্লাহ! দুনিয়াতে তার দ্রুতগতি কেমন হবে? তিনি বললেন, "সে হবে এমন মেঘের মতো, যার পিছনে বাতাস লেগে থাকে। সে এক কওমের নিকট আসবে এবং তাদের আহ্বান জানাবে। তারা তার উপর ঈমান আনবে এবং তার আহ্বানে সাড়া দেবে। সে আকাশকে আদেশ করলে আকাশ বৃষ্টি বর্ষণ করবে এবং জমিনকে আদেশ করলে জমিন ফসল উৎপন্ন করবে। ফলে তাদের গবাদি পশুরা যখন সন্ধ্যায় তাদের নিকট ফিরে আসবে, তখন তাদের কুঁজ হবে আগের চেয়ে উঁচু, স্তন হবে পূর্ণ (দুধে) এবং তাদের পাঁজর হবে মোটা ও ভরা। এরপর সে অন্য এক কওমের নিকট আসবে এবং তাদের আহ্বান করবে। কিন্তু তারা তার কথা প্রত্যাখ্যান করবে। তখন সে তাদের থেকে ফিরে যাবে, ফলে তারা দুর্ভিক্ষকবলিত হয়ে উঠবে এবং তাদের হাতে তাদের কোনো ধন-সম্পদই অবশিষ্ট থাকবে না। সে পতিত জমিনের কাছ দিয়ে যাবে এবং তাকে বলবে: তোমার গুপ্তধন বের করে দাও। ফলে জমিনের গুপ্তধন মৌমাছির ঝাঁকের মতো তাকে অনুসরণ করবে। এরপর সে পরিপূর্ণ যুবক একজনকে ডাকবে এবং তাকে তরবারি দ্বারা আঘাত করে দু'টুকরা করে ফেলবে, যা লক্ষ্যস্থলের দূরত্ব পরিমাণ দূরে নিক্ষিপ্ত হবে। এরপর সে তাকে আবার ডাকবে। তখন সে হাসতে হাসতে উজ্জ্বল চেহারায় তার কাছে ফিরে আসবে।"
"যখন সে এই অবস্থায় থাকবে, ঠিক তখনই আল্লাহ তাআলা মাসীহ ঈসা ইবনু মারইয়ামকে (আঃ) প্রেরণ করবেন। তিনি দামেশকের পূর্বদিকে অবস্থিত সাদা মিনারের নিকট হলুদ রংয়ের দু'টি পোশাক পরিহিত অবস্থায় দু’জন ফিরিশতার ডানার উপর তাঁর দু’হাত রেখে অবতরণ করবেন। যখন তিনি মাথা নিচু করবেন, তখন তা থেকে ফোঁটায় ফোঁটায় পানি ঝরবে। আর যখন তিনি মাথা উঁচু করবেন, তখন মুক্তার মতো শুভ্র বিন্দু তার থেকে গড়িয়ে পড়বে। কোনো কাফিরের পক্ষে তার শ্বাস-প্রশ্বাস পেলে জীবিত থাকা বৈধ হবে না, বরং তার শ্বাস যত দূর পর্যন্ত যাবে, তার দৃষ্টিও তত দূর পর্যন্ত পৌঁছবে, (এবং কাফির মারা যাবে)। এরপর তিনি দাজ্জালকে খুঁজতে থাকবেন এবং লূদ নামক দরজায় তাকে ধরে ফেলবেন, অতঃপর তাকে হত্যা করবেন।"
"এরপর ঈসা ইবনু মারইয়ামের নিকট সেই কওম আসবে যাদেরকে আল্লাহ তাআলা দাজ্জাল থেকে রক্ষা করেছেন। তিনি তাদের চেহারায় হাত বুলাবেন এবং তাদেরকে জান্নাতে তাদের মর্যাদা সম্পর্কে অবহিত করবেন। তিনি যখন এই অবস্থায় থাকবেন, আল্লাহ তাআলা ঈসার নিকট ওহী পাঠাবেন: আমি আমার এমন কিছু বান্দাকে বের করেছি যাদের সাথে যুদ্ধ করার ক্ষমতা কারো নেই। সুতরাং তুমি আমার বান্দাদেরকে তুর পাহাড়ে নিয়ে আশ্রয় দাও। এরপর আল্লাহ তাআলা ইয়াজূজ ও মা'জূজকে বের করবেন। তারা প্রত্যেক উচ্চ ভূমি থেকে ছুটে আসবে। তাদের প্রথম দলটি তাবারিয়া সাগরের উপর দিয়ে অতিক্রম করার সময় এর সমস্ত পানি পান করে ফেলবে। আর শেষ দলটি যখন ঐ পথ দিয়ে অতিক্রম করবে, তখন তারা বলবে, 'এখানে এক সময় পানি ছিল।' আল্লাহর নবী ঈসা (আঃ) ও তার সাথীরা এমনভাবে অবরুদ্ধ হয়ে পড়বেন যে, আজ তোমাদের একজনের কাছে একশ' দীনারের চেয়ে তাদের একজনের কাছে একটি গরুর মাথাও বেশি মূল্যবান হবে। তখন আল্লাহর নবী ঈসা (আঃ) ও তাঁর সাথীরা আল্লাহর নিকট মিনতি জানাবেন। ফলে আল্লাহ তাদের ঘাড়ে ‘নাগাফ’ নামক এক প্রকার পোকা পাঠাবেন। তারা সকালে উঠে দেখবে, তারা সকলেই এক ব্যক্তির মৃত্যুর মতো মারা পড়ে আছে।"
"এরপর আল্লাহর নবী ঈসা (আঃ) ও তাঁর সাথীরা জমিনে অবতরণ করবেন। তারা জমিনে এক বিঘত পরিমাণ জায়গা পাবে না যা তাদের চর্বি ও দুর্গন্ধে ভরে যায়নি। তখন আল্লাহর নবী ঈসা (আঃ) ও তাঁর সাথীরা আল্লাহর নিকট মিনতি জানাবেন। ফলে আল্লাহ তাআলা উটের ঘাড়ের মতো বড় এক প্রকার পাখি পাঠাবেন। পাখিগুলো তাদের বহন করে নিয়ে গিয়ে আল্লাহ যেখানে চাইবেন সেখানে ফেলে দেবে। এরপর আল্লাহ তাআলা এমন বৃষ্টি বর্ষণ করবেন, যা দ্বারা কোনো মাটির ঘর বা পশমের তাঁবু রক্ষা পাবে না। সেই বৃষ্টি জমিনকে ধুয়ে-মুছে আয়নার মতো পরিষ্কার করে দেবে। এরপর জমিনকে বলা হবে: তুমি তোমার ফল উৎপন্ন করো এবং তোমার বরকত ফিরিয়ে দাও। ফলে সেই দিন একটি আনার দ্বারা একদল লোক পেট ভরে খাবে এবং তার খোসা দ্বারা তারা ছায়া গ্রহণ করবে। দুধে এত বরকত দেয়া হবে যে, উটের একটি সদ্য-প্রসূত দুগ্ধবতী উষ্ট্রী বহু সংখ্যক মানুষের জন্য যথেষ্ট হবে, একটি দুগ্ধবতী গাভী একটি গোত্রের জন্য যথেষ্ট হবে এবং একটি দুগ্ধবতী ছাগল একটি ছোট পরিবারের জন্য যথেষ্ট হবে। তারা যখন এই অবস্থায় থাকবে, আল্লাহ তাআলা একটি পবিত্র বাতাস পাঠাবেন, যা তাদের বগলের নিচে ধরবে এবং প্রত্যেক মু’মিন ও মুসলমানের রূহ কবজ করে নেবে। আর জমিনে অবশিষ্ট থাকবে নিকৃষ্টতম লোকেরা। তারা গাধার ন্যায় প্রকাশ্যে জিনা-ব্যভিচারে লিপ্ত হবে। আর তাদের উপরেই কিয়ামত সংঘটিত হবে।"
697 - عن عبد اللَّه بن عمرو وجاءه رجل فقال: ما هذا الحديث الذي تحدّث به؟ تقولُ: إنّ الساعة تقوم إلى كذا وكذا؟ فقال: سبحان اللَّه! أو لا إله إلّا اللَّه أو كلمة نحوهما، لقد هممتُ أن لا أحدِّثَ أحدًا شيئًا أبدًا إنّما قلت: إنّكم سترون بعد قليل أمرًا عظيمًا: يُحرق البيتُ ويكون ويكون. ثم قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"يخرج الدّجال في أمّتي فيمكث أربعين لا أدري أربعين يوما أو أربعين شهرًا أو أربعين عامًا، فيبعث اللَّه عيسى ابن مريم كأنّه عروة بن مسعود فيطلبه فيهلكه، . . .".
صحيح: رواه مسلم في الفتن (2940) عن عبيد اللَّه بن معاذ العنبريّ، حدّثنا أبي، حدثنا شعبة، عن النّعمان بن سالم، قال: سمعتُ يعقوب بن عاصم بن عروة بن مسعود الثقفي يقول: سمعت عبد اللَّه بن عمرو وجاء رجل، فذكره في حديث طويل.
وقوله:"لا أدري أربعين يومًا، أو أربعين شهرًا، أو أربعين عامًا".
هذا التّردّد من عبد اللَّه بن عمرو، لعله لم يضبط من النبيّ صلى الله عليه وسلم التّفصيلَ الذي في حديث النّواس بن سمعان كما سبق.
ويحتمل أيضًا أن النبيّ صلى الله عليه وسلم أطلق"أربعين" مرة وسكت، ومرة فصّل ذلك.
আব্দুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁর কাছে এক ব্যক্তি এসে বলল: আপনি যে হাদীসটি বর্ণনা করেন সেটি কী? আপনি বলছেন: কিয়ামত অমুক সময় হবে? তিনি বললেন: সুবহানাল্লাহ! বা লা ইলাহা ইল্লাল্লাহ – অথবা এ ধরনের কোনো বাক্য – (তিনি বললেন) আমি তো মনস্থির করে ফেলেছিলাম যে আর কখনোই কাউকে কোনো কিছু বলব না। আমি তো শুধু বলেছিলাম: তোমরা অল্প দিনের মধ্যেই একটি ভয়াবহ বিষয় দেখতে পাবে: ঘর (কাবা) জ্বালিয়ে দেওয়া হবে এবং আরও ঘটবে, আরও ঘটবে। এরপর তিনি বললেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমার উম্মতের মধ্যে দাজ্জাল বের হবে। সে চল্লিশ অবস্থান করবে। আমি জানি না চল্লিশ দিন, নাকি চল্লিশ মাস, নাকি চল্লিশ বছর। অতঃপর আল্লাহ ঈসা ইবনে মারিয়ামকে পাঠাবেন। তিনি দেখতে উরওয়াহ ইবনে মাসউদের মতো হবেন। অতঃপর তিনি দাজ্জালকে খুঁজে বের করবেন এবং তাকে ধ্বংস করবেন,..."
698 - عن سمرة بن جندب، أنّ نبيَّ اللَّه صلى الله عليه وسلم كان يقول:"إنّ الدّجال خارج وهو أعور عين الشمال، عليها ظفرة غليظة، وإنه يبرئُ الأكْمه والأبْرص، ويحيى الموتى، ويقول للناس: أنا ربّكم، فمن قال: أنت ربي فقد فُتن، ومن قال: ربّي اللَّه حتى يموت فقد عُصم من فتنته، ولا فتنة بعده عليه ولا عذاب، فيلبث في الأرض ما شاء اللَّه، ثم يجيء عيسى ابن مريم من قبل المغرب مصدّقًا بمحمّد وعلى ملّته، فيقتل الدّجال، ثم إنّما هو قيام الساعة".
حسن: رواه الإمام أحمد (20151)، والطبراني في الكبير (6918، 6918) كلاهما من حديث قتادة، عن الحسن، عن سمرة بن جندب، فذكره.
والحسن وإن كان مدلسًا فقد ثبت سماعه من سمرة بن جندب مطلقًا كما قال البخاريّ وغيره، ولذا حسّنه ابن حجر في"الفتح" (6/ 478).
ثم حديثه هذا تشهد له الأحاديث الصحيحة في الباب إِلَّا في قوله:"ثم يجيء عيسى ابن مريم من قبل المغرب". وفي الأحاديث الأخرى:"من قبل المشرق".
وأورده الحافظ الهيثمي في"مجمع الزوائد" (7/ 336) وقال:"رواه الطبراني وأحمد، ورجاله رجال الصحيح، ورواه البزّار بإسناد ضعيف".
قلت: وهو يقصد ما رواه البزّار -كشف الأستار (3397) - عن خالد بن يوسف، حدثني أبي يوسف بن خالد، ثنا جعفر بن سعد بن سمرة، ثنا خبيب بن سليمان، عن أبيه سلمان بن سمرة، عن سمرة بن جندب، فذكر أحاديث بهذا، ثم قال: وبإسناده أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"إنّ المسيح الدّجال يمكث في الأرض إذا خرج ما شاء اللَّه، ثم يجيء عيسى ابن مريم صلى الله عليه وسلم من الشّرق مصدّقًا بمحمد صلى الله عليه وسلم، وعلى ملّته، ثم يقتل المسيحُ الدّجال، ثم إنّما هو قيام السّاعة، وسوف ترون قبل قيام الساعة أشياء عظامًا، تقولون: هل كنا حُدّثنا بهذا؟ ! فإذا رأيتم ذلك فاذكروا اللَّه، واعلموا أنّها أوائل السّاعة".
وجعفر بن سعد بن سمرة"ليس بالقوي" كما في"التقريب"، وشيخه خبيب بن سلمان بن سمرة -وهو ابن عمّه- ضعيف.
قال الذّهبيّ في"الميزان" في ترجمة جعفر بن سعد بن سمرة:"له حديث في الزّكاة عن ابن عمٍّ له. ردّه ابن حزم فقال: هما مجهولان. قال الذّهبيّ: ابن عمّه هو خبيب بن سليمان بن سمرة، يُجهل حاله عن أبيه. قال ابن القطّان: ما من هؤلاء من يعرف حاله، وقد جهد المحدّثون فيهم جهدهم، وهو إسناد يُروي به جملة أحاديث، قد ذكر البزّار منها نحو المائة. وقال عبد الحق الأزديّ: خبيب ضعف، وليس جعفر ممن يعتمد عليه".
قلت: وذكر الطبرانيّ في الكبير (7/ 314 - 322) عدّة أحاديث بهذا الإسناد.
ثم ذكر الذّهبيّ عدة أحاديث وقال:"في سنن أبي داود ستة أحاديث بسند هو: حدثنا محمد بن داود: حدثنا يحيى بن حسان، عن سليمان بن موسى، عن جعفر، عن ابن عمّه خبيب، عن أبيه، عن جدّه. فسليمان هو الزّهريّ من أهل الكوفة ليس بالمشهور، وبكل حال هذا إسناد مظلم لا ينهض بحكم".
قلت: سليمان هذا هو ابن موسى الزهريّ أبو داود الكوفي خراساني الأصل نزل الكوفة، ثم دمشق. قال أبو حاتم:"أرى حديثه مستقيمًا". الجرح والتعديل (3/ 143). وفي التقريب:"فيه لين". فالضّعف ليس منه وحده، وإنّما منه ومن شيخه جعفر بن سعد بن سمرة، ومن شيخه وابن عمه خُبيب بن سليمان بن سمرة، وبهذا صحَّ قول القائل: إنّ فيه سلسلة الضعفاء والمجاهيل.
সামুরাহ ইবনে জুনদুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলতেন: নিশ্চয় দাজ্জাল আগমন করবে। তার বাম চোখ কানা হবে, যার উপরে মোটা গোশতের একটি আবরণ থাকবে। নিশ্চয় সে জন্মান্ধকে এবং কুষ্ঠ রোগীকে আরোগ্য করবে এবং মৃতকে জীবিত করবে, এবং সে মানুষকে বলবে: আমি তোমাদের রব। সুতরাং যে বলবে: তুমিই আমার রব, সে ফিতনায় পতিত হবে। আর যে বলবে: আমার রব আল্লাহ, এবং এ অবস্থায় মৃত্যুবরণ করবে, সে তার ফিতনা থেকে রক্ষা পাবে। তার (ঐ ব্যক্তির) উপর এর পরে কোনো ফিতনা বা আযাব থাকবে না। অতঃপর সে (দাজ্জাল) পৃথিবীতে আল্লাহর ইচ্ছানুযায়ী সময় অবস্থান করবে। তারপর ঈসা ইবনে মারইয়াম (আঃ) পশ্চিম দিক থেকে আগমন করবেন, মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সত্যতার সত্যায়নকারী হিসেবে এবং তাঁর মিল্লাতের উপর (প্রতিষ্ঠিত থেকে)। অতঃপর তিনি দাজ্জালকে হত্যা করবেন। এরপরেই হবে কেবল কিয়ামত।
699 - عن حذيفة بن اليمان في حديث طويل وفيه:"فلمّا قاموا يصلّون نزل عيسى ابنُ مريم إمامهم، فصلّي بهم (أي في بيت المقدس)، فلما انصرف -قال هكذا- فرجوا بيني وبين عدو اللَّه (الدّجال) قال: فيذوب يعني ذوب الملح، فيسلّط اللَّه عليهم المسلمين فيقتلونهم، حتى إنّ الحجر والشّجر لينادي: يا عبد اللَّه، يا عبد الرحمن، يا مسلم، هذا يهودي فاقتله، فيعينهم اللَّه ويظهر المسلمون، فيكسر الصّليب، ويقتل الخنزير، ويضع الجزية. . .".
صحيح: رواه ابن منده (1033)، والحاكم (4/ 491) كلاهما عن سعيد بن سليمان الواسطيّ: ثنا خلف بن خليفة، عن أبي مالك الأشجعيّ، عن ربعي بن حراش، عن حذيفة، فذكر الحديث بطوله، وهو مذكور في موضعه، واللّفظ لابن منده.
وإسناده صحيح، وخلف بن خليفة وإن كان اختلط في آخره، وكان اختلاطه شديدًا حيث إن تَكلَّم لا يُفهِم ما يقول كما قال الإمام أحمد، ولذا تركه ولم يكتب عنه. وأمّا الحديث المذكور فالظّاهر أنه حدّث به قبل اختلاطه وضبطه راويه وهو سعيد بن سليمان الواسطيّ.
وقد روى له مسلم وأصحاب السنن، وقال فيه يحيى بن معين والنسائي: ليس به بأس، وقال أبو حاتم: صدوق، ووثقه ابن سعد. وقال الحاكم:"صحيح على شرط مسلم".
হুযাইফা ইবনুল ইয়ামান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত একটি দীর্ঘ হাদীসে আছে: "...যখন তারা সালাতের জন্য দাঁড়ালো, তখন ঈসা ইবনু মারইয়াম তাদের ইমাম হিসেবে অবতরণ করবেন এবং তাদের নিয়ে সালাত আদায় করবেন (অর্থাৎ বাইতুল মুকাদ্দাসে)। যখন তিনি (সালাত শেষে) ফিরবেন – বর্ণনাকারী এভাবে ইশারা করলেন – তখন আমার ও আল্লাহর শত্রু (দাজ্জাল)-এর মাঝে পথ করে দেওয়া হবে। তিনি (দাজ্জাল) তখন লবণের মতো গলে যাবেন। এরপর আল্লাহ তাদের (দাজ্জালের অনুসারীদের) ওপর মুসলিমদেরকে ক্ষমতাবান করবেন এবং মুসলিমরা তাদের হত্যা করবে। এমনকি পাথর ও গাছপালাও চিৎকার করে ডাকতে থাকবে: ‘হে আল্লাহর বান্দা, হে আব্দুর রহমান, হে মুসলিম! এ একজন ইয়াহুদি, তাকে হত্যা করো।’ তখন আল্লাহ মুসলিমদেরকে সাহায্য করবেন এবং মুসলিমরা বিজয়ী হবে। তিনি (ঈসা আলাইহিস সালাম) ক্রুশ ভেঙ্গে ফেলবেন, শূকর হত্যা করবেন এবং জিযিয়া (কর) রহিত করবেন।..."
700 - عن حذيفة بن أسيد الغفاريّ قال:"اطّلع النّبيُّ صلى الله عليه وسلم ونحن نتذاكر، فقال:"ما تذاكرون؟". قالوا: نذكر السّاعة. قال:"إنّها لن تقوم حتى ترون قبلها عشر آيات". فذكر الدّخان، والدّجال، والدابة، وطلوع الشّمس من مغربها، ونزول عيسى ابن مريم عليه السلام، ويأجوج ومأجوج، وثلاث خسوف: خسف بالمشرق، وخسف بالمغرب، وخسف بجزيرة العرب، وآخر ذلك نار تخرج من اليمن تطرد النّاس إلى محشرهم".
وفي رواية:"ونارٌ تخرج من قُعرة عدن".
وفي رواية"وريح تُلقي النّاس في البحر".
صحيح: رواه مسلم في الفتن (2901) من طرق عن سفيان بن عيينة، عن فُراتٍ القزّاز، عن أبي الطّفيل، عن حذيفة بن أسيد الغفاريّ، فذكره.
والروايات الأخرى أيضًا عند مسلم.
হুযাইফাহ ইবনু উসাইদ আল-গিফারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের প্রতি দৃষ্টিপাত করলেন যখন আমরা আলোচনা করছিলাম। তিনি বললেন, "তোমরা কী আলোচনা করছো?" তারা বললেন, "আমরা কিয়ামত সম্পর্কে আলোচনা করছি।" তিনি বললেন, "তোমরা এর আগে দশটি নিদর্শন না দেখা পর্যন্ত কিয়ামত সংঘটিত হবে না।" অতঃপর তিনি (সেই দশটি নিদর্শনের) উল্লেখ করলেন: ধোঁয়া (আদ-দুখান), দাজ্জাল, দাব্বাহ (জমিনের প্রাণী), পশ্চিম দিক থেকে সূর্যোদয়, ঈসা ইবনু মারইয়াম (আঃ)-এর অবতরণ, ইয়াজুজ ও মাজুজ, এবং তিনটি ভূমিধ্বস—একটি প্রাচ্যে, একটি পাশ্চাত্যে, এবং একটি আরব উপদ্বীপে। আর সবশেষে একটি আগুন যা ইয়ামেন থেকে বের হয়ে লোকেদেরকে তাদের হাশরের ময়দানের দিকে তাড়িয়ে নিয়ে যাবে।
অন্য এক বর্ণনায় আছে: "এবং একটি আগুন যা আদনের গভীর স্থান থেকে বের হবে।"
অন্য এক বর্ণনায় আছে: "এবং একটি বাতাস যা লোকেদেরকে সাগরে নিক্ষেপ করবে।"