হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (701)


701 - عن حذيفة بن أَسيد في حديث طويل وفيه:"إذا أصبحوا فيصبحون ومعهم عيسى ابن مريم، فيقتل الدّجال، ويهزم أصحابه حتّى إنّ الشّجر والحجر والمدر يقول: يا مؤمن هذا يهودي عندي فاقتله. . .".

صحيح: رواه الحاكم (4/ 529 - 530) من حديث مسدّد، ثنا معاذ بن هشام، حدثني أبي، عن قتادة، عن أبي الطفيل، قال:"كنتُ بالكوفة، فقيل: خرج الدّجال. قال: فأتينا حذيفة بن أسيد، فذكر مثله.

وهو موقوف عليه، ولكن حكمه الرّفع؛ لأنه لا يعلم ما فيه إلّا بالوحي.

قال الحاكم:"صحيح الإسناد". وجعله الذهبي على شرط الشيخين.




হুযাইফাহ ইবনে উসাইদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে একটি দীর্ঘ হাদীসে বর্ণিত, তাতে আছে: যখন তারা সকালে উপনীত হবে, তখন তাদের সাথে ঈসা ইবনে মারইয়াম থাকবেন। অতঃপর তিনি দাজ্জালকে হত্যা করবেন এবং তার সাথীদের পরাজিত করবেন। এমনকি বৃক্ষ, পাথর ও মাটির ডেলা পর্যন্ত বলবে, হে মুমিন! আমার কাছে একজন ইহুদী লুকিয়ে আছে, তুমি তাকে হত্যা করো।









আল-জামি` আল-কামিল (702)


702 - عن ثوبان مولى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"عصابتان من أمّتي أحرزهما اللَّه من النّار: عصابة تغزو الهند، وعصابة تكون مع عيسى ابن مريم".

حسن: رواه النسائيّ (3175) عن محمد بن عبد اللَّه بن عبد الرحيم: حدثنا أسد بن موسى، قال: حدثنا بقية، قال: حدثني أبو بكر الزّبيدي، عن أخيه محمد بن الوليد، عن لقمان بن عامر، عن عبد الأعلى بن عدي البهرانيّ، عن ثوبان، فذكره.

وفي الإسناد بقية -وهو ابن الوليد- مدلس، ولكنّه صرّح كما أنه لم ينفرد به، وشيخه أبو بكر - وهو ابن الوليد الزبيدي مجهول، ولكنه لم ينفرد به أيضًا.

فرواه الإمام أحمد (22396) من طريق بقية قال: حدّثنا عبد اللَّه بن سالم، وأبو بكر بن الوليد الزّبيديّ.

ورواه الطبرانيّ في الأوسط (6737)، وفي الشاميين (1851) من طريق آخر عن الجراح بن مليح البهرانيّ، عن محمد بن الوليد الزبيدي، بإسناده، وبهذه المتابعات صار الإسناد حسنًا.

تنبيه: وقع في نسخة مطبوعة للطبرانيّ خلط في الإسناد فتنبّه.

قال الطّبرانيّ:"لا يُروى هذا الحديث عن ثوبان إلّا بهذا الإسناد، تفرّد به الزبيدي". أي محمد ابن الوليد.

قلت: وهو ليس كما قال، فقد رُوي أيضًا من غير طريق محمد بن الوليد الزبيدي كما رأيت.




সাওবান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমার উম্মতের দুটি দলকে আল্লাহ তাআলা জাহান্নাম থেকে রক্ষা করেছেন: একটি দল যারা ভারত আক্রমণ করবে, এবং অপর দলটি যারা ঈসা ইবনু মারইয়ামের সাথে থাকবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (703)


703 - عن جابر بن عبد اللَّه، قال: سمعت النبيَّ صلى الله عليه وسلم يقول:"لا تزال طائفةٌ من أمّتي
يقاتلون على الحقّ ظاهرين إلى يوم القيامة. قال: فينزل عيسى ابن مريم عليه السلام، فيقول أميرهم: تعال صلِّ لنا. فيقول: لا، إنّ بعضكم على بعض أمراء تكرمةَ اللَّه هذه الأمّة".

صحيح: رواه مسلم في الإيمان (156) من طرق عن حجاج (وهو ابن محمد)، عن ابن جريج، قال: أخبرني أبو الزبير، أن جابر بن عبد اللَّه يقول (فذكره).




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে বলতে শুনেছি: "আমার উম্মতের মধ্যে একটি দল সর্বদা হকের (সত্যের) উপর বিজয়ী থেকে কিয়ামত পর্যন্ত লড়াই করতে থাকবে।" তিনি বলেন: এরপর ঈসা ইবনে মারইয়াম (আঃ) অবতীর্ণ হবেন। তখন তাদের (ঐ দলের) নেতা বলবেন: আসুন, আমাদেরকে নিয়ে সালাত (নামায) আদায় করুন। তিনি বলবেন: না, (আমি ইমামতি করব না)। বরং তোমাদের কেউ কেউ অন্যদের উপর নেতা (আমীর)। আল্লাহ তাআলা এই উম্মতকে সম্মানিত করার জন্য (এরূপ করেছেন)।









আল-জামি` আল-কামিল (704)


704 - عن جابر بن عبد اللَّه أنه قال:"إنّ امرأةً من اليهود بالمدينة ولدتْ غلامًا ممسوحةً عينُه طالعةً ناتئةً، فأشفق رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم أن يكون الدّجال. . . فقال له رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"يا ابن صائد، إنّا قد خبأنا لك خبيئا فما هو؟". قال: الدُّخ الدُّخ. فقال له رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"اخسأ اخسأ". فقال عمر بن الخطاب: ائذنْ لي فأقتله يا رسول اللَّه، فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إنْ يكن هو فلستَ صاحبَه، إنّما صاحبهُ عيسى ابن مريم صلى الله عليه وسلم، وإن لا يكن هو فليس لك أن تقتل رجلًا من أهل العهد". قال فلم يزل رسولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم مشفقًا أنه الدّجال".

صحيح: رواه الإمام أحمد (14955) عن محمد بن سابق: حدثنا إبراهيم طهمان، عن أبي الزبير، عن جابر، فذكره في حديث طويل.

أورده الهيثمي في"المجمع" (8/ 3) وقال:"رواه أحمد ورجاله رجال الصحيح".

قلت: وهو كما قال لولا عنعنة أبي الزبير فإنه مدلس، وقد ذكره الحافظ ابن حجر في"الفتح" (6/ 173) مستشهدًا به، وسكت عنه، ومن شرطه الصحة أو الحسن، كما ذكره في هدي الساري.

وفي رواية عند احمد (14954)"فيفرُّ المسلمونَ إلى جبل الدُّخان بالشّام، فيأتيهم فيُحاصِرُهُم، فيشتدُّ حِصارُهم، ويُجهدهم جُهدًا شديدًا، ثم ينزلُ عيسى ابن مريم فيُنادِي من السَّحر، فيقول: يا أيُّها النّاسُ ما يمنعُكم أن تَخْرجُوا إلى الكذَّاب الخبيث؟ فيقولون: هذا رجلٌ جنيٌّ، فينطلقون، فإذا هم بعيسى ابن مريم، فتُقام الصّلاةُ فيقال له: تقدّم يا روح اللَّه، فيقول: ليتقدّم إمامكم فليصل بكم، فإذا صلّى صلاة الصُّبح خرجوا إليه". قال:"فحين يرى الكذّاب ينماتُ كما ينمات الملح في الماء، فيمشي إليه فيقتله حتى إنّ الشّجرة والحجر ينادي: يا روحُ اللَّه، هذا يهوديٌّ. فلا يترك ممَّنْ كان يتبعه أحدًا إلّا قتله".

وأورده الهيثمي في"المجمع" (7/ 344) وقال:"رواه أحمد بإسنادين رجال أحدهما رجال الصحيح".

وصحّحه ابن خزيمة في كتاب التوحيد (55)، والحاكم (4/ 530) كلاهما من طريق إبراهيم بن طهمان مختصرًا.
قال الحاكم:"صحيح الإسناد". وجزم الذهبي أنه على شرط مسلم.

وهو كذلك إلّا أنّ أبا الزّبير مدلس وقد عنعن، ولكن يستشهد به لما سبق من طرق أخرى عن جابر.

وأصل حديث جابر في صحيح مسلم (2926) مختصر، عن أبي نضرة، عن جابر بن عبد اللَّه، ولم يذكر لفظه، وإنّما أحال على لفظ حديث الجريريّ، عن أبي نضرة، عن أبي سعيد، قال:"لقيه رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم وأبو بكر في بعض طرق المدينة. فقال له رسول اللَّه:"أتشهد أني رسول اللَّه؟". فقال هو: أتشهد أني رسول اللَّه؟ فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"آمنتُ باللَّه وملائكته وكتبه، ما ترى؟". قال: أرى عرشًا على الماء. فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ترى عرش إبليس على البحر وما ترى؟". قال: أرى صادقًا وكاذبًا أو كاذبين وصادقًا. فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لُبِّس عليه، دعوه". انتهى ما في صحيح مسلم.




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: মদিনার জনৈক ইহুদি মহিলার একটি ছেলে জন্ম হয়েছিল, যার একটি চোখ ছিলো বিলীন, উদগত ও স্ফীত। ফলে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আশঙ্কা করলেন যে সে দাজ্জাল হতে পারে।

অতঃপর আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে বললেন: "হে ইবনু সায়্যিদ! আমরা তোমার জন্য একটি জিনিস লুকিয়ে রেখেছি, তা কী?" সে বলল: "দুখ! দুখ!" (ধোঁয়া/ধোঁয়ার কুণ্ডলি)। তখন আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে বললেন: "দূর হ! দূর হ!"

উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: হে আল্লাহর রাসূল! আমাকে অনুমতি দিন, আমি তাকে হত্যা করি। আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "যদি সে দাজ্জাল হয়, তবে তুমি তার হত্যাকারী নও। তার হত্যাকারী হলেন ঈসা ইবনু মারিয়াম (আঃ)। আর যদি সে দাজ্জাল না হয়, তবে চুক্তিবদ্ধ কোনো ব্যক্তিকে হত্যা করার অধিকার তোমার নেই।" বর্ণনাকারী বলেন: অতঃপর আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সব সময় আশঙ্কা করতেন যে সে-ই দাজ্জাল।

আহমদের অন্য এক বর্ণনায় আছে: "তখন মুসলিমরা শামের দুখান নামক পাহাড়ে পলায়ন করবে। সে (দাজ্জাল) সেখানে তাদের কাছে এসে অবরোধ করবে। তাদের অবরোধ কঠিন হবে এবং তাদের উপর চরম কষ্ট নেমে আসবে। অতঃপর ঈসা ইবনু মারিয়াম (আঃ) অবতরণ করবেন এবং সুবহে সাদিকের সময় আওয়াজ দেবেন। তিনি বলবেন: হে লোক সকল! এই নিকৃষ্ট মিথ্যাবাদীর বিরুদ্ধে বের হতে তোমাদের কিসে বাধা দিচ্ছে? তারা বলবে: এ তো জিনগ্রস্ত (পাগল) লোক। এরপর তারা বের হবে এবং দেখবে যে তিনি ঈসা ইবনু মারিয়াম (আঃ)। তখন সালাতের জন্য ইকামত দেওয়া হবে এবং তাকে বলা হবে: হে রূহুল্লাহ! আপনি এগিয়ে আসুন। তিনি বলবেন: তোমাদের ইমাম যেন এগিয়ে আসেন এবং তোমাদের নিয়ে সালাত আদায় করেন। যখন তিনি ফজরের সালাত আদায় করবেন, তখন তারা তার (দাজ্জালের) উদ্দেশ্যে বের হবেন।"

বর্ণনাকারী বলেন: "যখন মিথ্যাবাদী (দাজ্জাল) তাকে দেখবে, তখন সে পানিতে লবণ গলে যাওয়ার মতো গলে যেতে থাকবে। তিনি (ঈসা আঃ) তার দিকে হেঁটে গিয়ে তাকে হত্যা করবেন। এমনকি গাছ ও পাথর পর্যন্ত আওয়াজ দিয়ে বলবে: হে রূহুল্লাহ! এখানে একজন ইহুদি লুকিয়ে আছে। ফলে দাজ্জালের অনুসারীদের কাউকেই তিনি হত্যা না করে ছাড়বেন না।"









আল-জামি` আল-কামিল (705)


705 - عن عائشة قالت: دخل عليَّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم وأنا أبكي فقال لي:"ما يبكيك؟". قلت: يا رسول اللَّه، ذكرت الدّجال فبكيت. فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إن يخرج الدّجال، وأنا حي كفيتكموه، وإن يخرج بعدي، وإنّ ربّكم لي بأعور، إنّه يخرج في يهودية أصبهان، حتى يأتي المدينة، فينزل ناصيتها، ولها يومئذ سبعة أبواب، على كلّ نقب منها ملكان، فيخرج إليه شرار أهلها حتّى الشّام مدينة بفلسطين بباب لُدّ".

وقال أبو داود مرة:"حتى يأتي فلسطين باب لُدَّ، فينزل عيسى عليه السلام فيقتله، ثم يمكث عيسى عليه السلام في الأرض أربعين سنة إمامًا عدْلًا وحكمًا مقْسطًا".

حسن: رواه الإمام أحمد (24467) عن سليمان بن داود، قال: حدّثنا حرب بن شدّاد، عن يحيى بن أبي كثير، حدّثني الحضْرميّ بن لاحق، أنّ ذكوان أبا صالح أخبره، أنّ عائشة أخبرته، فذكرتْه.

وصحّحه ابن حبان (6822)، ورواه من طريق الحضرميّ بن لاحق بإسناده مثله، وفيه:"أربعين سنة أو قريبًا من أربعين سنة".

وإسناده حسن من أجل الحضرمي بن لاحق فإنه حسن الحديث.

وأورده الهيثميّ في"المجمع" (7/ 338) ونسبه إلى أحمد وقال:"رجاله رجال الصّحيح غير الحضرميّ بن لاحق وهو ثقة".

وقوله:"قال أبو داود": أبو داود هو سليمان بن داود بن الجارود الطيالسيّ صاحب المسند، شيخ الإمام أحمد المتوفى سنة (204 هـ).

وهذا الحديث لا يوجد في مسنده المطبوع.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার কাছে প্রবেশ করলেন যখন আমি কাঁদছিলাম। তিনি আমাকে জিজ্ঞেস করলেন: "তুমি কাঁদছ কেন?" আমি বললাম: ইয়া রাসূলাল্লাহ, আমি দাজ্জালের কথা স্মরণ করে কাঁদছি। তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "যদি দাজ্জাল এমন সময় বের হয় যখন আমি জীবিত থাকি, তবে আমি তোমাদের পক্ষ থেকে তাকে প্রতিহত করার জন্য যথেষ্ট। আর যদি সে আমার পরে বের হয় (তবে জেনে রাখো), তোমাদের রব তো অন্ধ নন। সে (দাজ্জাল) ইস্পাহানের ইহুদিদের মধ্য থেকে বের হবে, অবশেষে মদিনায় আসবে এবং এর এক প্রান্তরে অবতরণ করবে। সেই দিন মদিনার সাতটি দরজা থাকবে এবং প্রত্যেক প্রবেশপথে দু’জন করে ফেরেশতা নিয়োজিত থাকবে। এরপর তার (দাজ্জালের) কাছে মদিনার নিকৃষ্ট লোকেরা বেরিয়ে যাবে, যতক্ষণ না সে ফিলিস্তিনের একটি শহর শাম (সিরিয়া)-এর লুদ গেটের কাছে পৌঁছায়।"

আবু দাউদ একবার বলেন (বর্ণনাক্রমে): "হত্তয়া পর্যন্ত সে ফিলিস্তিনের লুদ নামক দরজার কাছে পৌঁছাবে। অতঃপর সেখানে ঈসা (আলাইহিস সালাম) অবতরণ করে তাকে হত্যা করবেন। এরপর ঈসা (আলাইহিস সালাম) পৃথিবীতে চল্লিশ বছর অবস্থান করবেন, ন্যায়পরায়ণ ইমাম ও সুবিচারক শাসক হিসেবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (706)


706 - عن عبد اللَّه بن مغفّل قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ما أهبط اللَّه تعالى إلى الأرض
منذ خلق آدم إلى أن تقوم السّاعة فتنةً أعظم من فتنةِ الدّجال، وقد قلتُ فيه قولًا لم يقلْه أحدٌ قبلي؛ إنّه جعد ممسوح عين اليسار، على عينه ظفرة غليظة، وإنّه يبرئُ الأكْمه والأبرص، ويقول: أنا ربُّكم. فمن قال: ربي اللَّه فلا فتنة عليه، ومن قال: أنت ربي فقد افتتن، يلبث فيكم ما شاء اللَّه، ثم ينزل عيسى ابن مريم مصدِّقًا بمحمد صلى الله عليه وسلم على ملّته إمامًا مهديًا، وحكما عدلًا، فيقتل الدّجّال".

فكان الحسن يقول:"ونرى أن ذلك عند السّاعة".

حسن: رواه الطبرانيّ في الأوسط (4577) عن عبدان بن أحمد، قال: حدثنا عمرو بن العباس الأرزيّ، قال حدثنا محمد بن مروان، قال: حدثنا يونس بن عبيد، عن الحسن، عن عبد اللَّه بن مغفل، فذكر الحديث.

قال الطبرانيّ:"لم يرو هذا الحديث عن يونس بن عبيد إلّا محمد بن مروان، تفرّد به عمرو بن العباس".

وقال الهيثميّ في"المجمع" (7/ 336):"رواه الطبرانيّ في الكبير والأوسط، ورجاله ثقات، وفي بعضهم ضعف لا يضرّ".

واستشهد به الحافظ ابن حجر في"الفتح" (13/ 97) ومن المعروف أنه اشترط أن لا يورد في شرحه إلّا صحيحًا أو حسنًا فقال في"هدي الساري" (ص 4):

"فأسوق إن شاء اللَّه الباب وحديثه أولًا، ثم أذكر وجه المناسبة بينهما إن كانت خفية، ثم أستخرج ثانيًا ما يتعلّق به غرض صحيح في ذلك الحديث من الفوائد المتنية والإسنادية من تتمات وزيادات، وكشف غامض، وتصريح مدلّس بسماع، ومتابعة سامع شيخ اختلط قبل ذلك، منتزعًا كلَّ ذلك من أمّهات المسانيد والجوامع والمستخرجات والأجزاء والفوائد بشرط الصّحة أو الحسن فيما أورده من ذلك" انتهى.

وعلى هذا فهو لا ينْزل عن درجة الحسن عنده، وهو كذلك فإن في إسناده محمد بن مروان، وهو ابن قدامة العقيلي، وثقه أبو داود، وذكره ابن حبان في الثقات، وتكلم فيه أبو زرعة فقال: ليس عندي بذاك. والخلاصة: أنه حسن الحديث لا سيما في الشّواهد.

والحسن هو البصريّ، وقد جزم الإمام أحمد بأنّه سمع من عبد اللَّه بن مغفّل.




আব্দুল্লাহ ইবনে মুগাফ্ফাল (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আদম (আঃ)-কে সৃষ্টি করার পর থেকে কিয়ামত সংঘটিত হওয়া পর্যন্ত আল্লাহ তাআলা দাজ্জালের ফিতনার চেয়ে বড় কোনো ফিতনা পৃথিবীতে অবতীর্ণ করেননি। আমি তার (দাজ্জালের) সম্পর্কে এমন কথা বলেছি যা আমার পূর্বে আর কেউ বলেনি; নিশ্চয় সে হবে কোঁকড়া চুল বিশিষ্ট, তার বাম চোখ থাকবে বিকৃত (বা মুছে ফেলা), আর সেই চোখের উপর থাকবে মোটা মাংসপিণ্ড। আর সে জন্মগত অন্ধ ও কুষ্ঠরোগীকে আরোগ্য দান করবে এবং বলবে: আমিই তোমাদের রব। অতএব, যে ব্যক্তি বলবে: আল্লাহই আমার রব, তার ওপর কোনো ফিতনা (পরীক্ষা) থাকবে না। আর যে বলবে: তুমিই আমার রব, সে ফিতনায় নিপতিত হবে। সে তোমাদের মধ্যে ততদিন অবস্থান করবে যতদিন আল্লাহ চাইবেন। তারপর ঈসা ইবনে মারিয়াম (আঃ) মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর দীনকে সত্য প্রতিপন্নকারী হিসেবে, হিদায়েতপ্রাপ্ত ইমাম ও ন্যায়বিচারক শাসক হিসেবে অবতরণ করবেন। অতঃপর তিনি দাজ্জালকে হত্যা করবেন।

হাসান (বাসরী) বলতেন: আমরা মনে করি, তা কিয়ামতের নিকটবর্তী সময়ে ঘটবে।









আল-জামি` আল-কামিল (707)


707 - عن أوس بن أوس الثقفيّ، عن النبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"ينزل عيسى ابن مريم عليه السلام عند المنارة البيضاء شرقي دمشق".

حسن: رواه الطبرانيّ في الكبير (1/ 186)، وتمّام في فوائده (1732)، والرّبعي في فضائل الشّام (106) كلّهم من طرق عن محمد بن شعيب: نا يزيد بن عبيدة: حدثني أبو الأشعث، عن أوس بن أوس الثقفيّ، فذكره.
ذكره الهيثمي في"المجمع" (8/ 205) وقال:"رواه الطبرانيّ ورجاله ثقات".

قلت: وهو كما قال، إلّا أن إسناده حسن من أجل يزيد بن عبيدة وهو السكوني الدمشقيّ قال فيه ابنُ معين: ما كان به بأس، وذكره ابن حبان في"الثقات" (7/ 617) والخلاصة فيه أنه"صدوق" كما قال الحافظ في"التقريب".

ومحمد بن شعيب هو ابن شابور.

وأبو الأشعث هو شرحبيل بن آدة الصنعانيّ.

ولكن رجّح أبو حاتم قول من قال: إنّما هو عن أوس بن أوس، عن كعب قوله. قال: كذا يرويه الثقات. وقال: يزيد بن عبيدة لا بأس به. ذكره ابن أبي حاتم في"العلل" (2/ 422).




আওস ইবনে আওস আস-সাকাফী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "ঈসা ইবনে মারইয়াম (আঃ) দামেস্কের পূর্বে সাদা মিনারের কাছে অবতরণ করবেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (708)


708 - عن عمران بن حصين، أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"لا تزال طائفةٌ من أمّتي على الحقّ ظاهرين على من ناوأهم حتّى يأتي أمرُ اللَّه، وينزل عيسى ابنُ مريم".

صحيح: رواه الإمام أحمد (19851) عن بهز: حدّثنا حمّاد بن سلمة: حدّثنا قتادة، عن مطرّف، عن عمران بن حصين، فذكره. وإسناده صحيح.

ورواه أبو داود (2484)، والإمام أحمد (19920)، وصحّحه الحاكم (2/ 71، 4/ 450) كلّهم من وجه آخر عن حماد بن سلمة بإسناده وقالوا فيه بدل قوله:"حتّى يأتي أمر اللَّه وينزل عيسى ابن مريم":"حتّى يقاتل آخرهم المسيح الدّجال". هو عيسى ابن مريم؛ لأنّه ينزل في آخر الزّمان، ويكون مقرّرًا لشريعة محمد، ومجدّدًا لها، لأنه لا نبي بعد رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، لأنّه خاتم النبيين، فيكون عيسى ابن مريم من أمّته، هو الذي يقاتل الدّجال ويهلكهـ.




ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "আমার উম্মতের মধ্যে সর্বদা একটি দল হকের (সত্যের) ওপর প্রতিষ্ঠিত থাকবে এবং এবং যারা তাদের বিরোধিতা করবে তাদের উপর বিজয়ী থাকবে, যতক্ষণ না আল্লাহর নির্দেশ আসে এবং ঈসা ইবনে মারইয়াম অবতরণ করেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (709)


709 - عن سفينة مولى رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"خطبنا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فقال:"ألا إنّه لم يكن نبيٌّ قبلي إلّا قد حذَّر الدَّجال أمَّتَه، وهو أعوَرُ عينه اليسرى، بعينه اليُمْنى ظَفَرَةٌ غَلِيظَةٌ، مكتوبٌ بين عينيه كافرٌ، يخرج معه واديان: أحدهما جَنّة، والآخرُ نارٌ، فناره جَنّة وجنَّتُه نار، معه ملكان من الملائكة يُشبهان نبيَّين من الأنبياء، لو شئتُ سمّيتُهما بأسمائهما وأسماء آبائهما، واحدٌ منهما عن يمينه والآخر عن شماله وذلك فتنةٌ، فيقول الدّجالُ: ألستُ بربِّكم؟ ألستُ أُحيي وأميت؟ فيقول له أحد الملكين: كذبتَ، ما يسمعه أحدٌ من النّاس إلّا صاحبُه فيقول له: صدقتَ فيسمعه النّاس فيظنّون إنما يصدِّق الدجال وذلك فتنة، ثم يسير حتى يأتي المدينة فلا يؤذن له فيها فيقول: هذه قريةُ ذلك الرّجل، ثم يسير حتى يأتي الشّام فيهلكه اللَّه عز وجل عند عَقَبة أَفِيقٍ".

حسن: رواه الإمام أحمد (21929)، والطبرانيّ في الكبير (7/ 98).
كما رواه أيضًا كلٌّ من ابن أبي شيبة (15/ 137 - 138)، وأبو داود الطّيالسيّ في"مسنده" (1202)، وابن عدي في"الكامل" (2/ 846) كلّهم من حديث حشرج بن نُباتة، عن سعيد بن جمهان، عن سفينة، فذكره.

وزاد بعضُ أهل العلم بعد قوله:"حتى يأتي الشّام":"فينزل عيسى عليه السلام، فيقتله عند عقبة أَفيق". وعزوه إلى ابن أبي شيبة، وعندي نسختان مطوعتان، مطبوعة الدار السلفية في الهند، ومطبوعة دار الفكر بتحقيق الأستاذ سعيد اللّحام، ولم أجد فيهما هذه الزّيادة، فلعلّها في نسخ خطية أخرى، واللَّه أعلم.

وأما الإسناد ففيه حشرج بن نُباتة، وقد أشار بعض أهل العلم إلى أن في روايته عن سعيد بن جمهان تقع فيه الغرائب والمناكير.

قال البخاريّ:"حشرج بن نُباتة، عن سعيد بن جمهان، عن سفينة، أنّ النبيّ صلى الله عليه وسلم قال لأبي بكر وعمر وعثمان: هؤلاء الخلفاء من بعدي. وهذا لم يتابع عليه، لأنّ عمر وعليًّا قالا: لم يستخلف النبيّ صلى الله عليه وسلم".

قال ابن عدي: وهذا الذي أنكره البخاريّ على حشرج هذا الحديث قد روي بغير هذا الإسناد. ثم نقل عن ابن معين وأحمد وغيرهما توثيق حشرج، وذكر حديث الباب وقال:"وهذه الأحاديث لحشرج عن سعيد بن جمهان، عن سفينة قد قمت بعذره في الحديث الذي أنكره البخاري عليه، وأوردت بابًا آخر لذلك الحديث ولذلك المتن، وغير ذلك الحديث لا بأس به فيه".

ثم قال أيضًا:"ولحشرج غير ما ذكرت من الحديث، وأحاديثه حسان، وإفرادات وغرائب، وقد قمتُ بعذره فيما أنكروه عليه، وهو عندي لا بأس به، وبرواياته على أنّ أحمد ويحيى قد وثّقاه"."الكامل" (2/ 846 - 847).

والحديث مع حسن إسناده وقع فيه بعض الكلمات الغريبة والمنكرة، ولعلّ حشرج بن نُباتة أخطأ فيها.

منها قوله:"معه ملكان من الملائكة" لم يرد هذا في حديث صحيح آخر.

ومنها قوله:"عند عقبة أفيق". وهي عقبة معروفة بحوران في طريق نحو الأردن، وهي عقبة طويلة نحو ميلين. والصّحيح أنّه يقتله عيسى ابن مريم بباب لُدٍّ كما في حديث النّواس بن سمعان وغيره.

ولذا قال الحافظ ابن كثير في"النهاية في الفتن والملاحم" (19/ 164):

"إسناده لا بأس به، ولكن في متنه غرابة ونكارة".

وقال الهيثمي في"المجمع" (7/ 340):"رواه أحمد والطبرانيّ، ورجاله ثقات، وفي بعضهم كلام لا يضر".




সফীনা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের উদ্দেশ্যে খুতবা দিলেন এবং বললেন: “শোনো! আমার পূর্বে এমন কোনো নবী আসেননি, যিনি তাঁর উম্মতকে দাজ্জাল সম্পর্কে সতর্ক করেননি। সে বাম চোখে কানা হবে, আর তার ডান চোখে একটি মোটা মাংসপিণ্ড থাকবে। তার দুই চোখের মাঝখানে ‘কাফির’ (অবিশ্বাস্য) শব্দটি লেখা থাকবে। তার সাথে দুটি উপত্যকা বের হবে: একটি জান্নাত এবং অন্যটি জাহান্নাম। কিন্তু তার জাহান্নাম হবে জান্নাত এবং তার জান্নাত হবে জাহান্নাম। তার সাথে দুজন ফেরেশতা থাকবে, যারা দুজন নবীর মতো দেখতে হবে। আমি চাইলে তাদের নাম ও তাদের পিতাদের নাম উল্লেখ করতে পারতাম। তাদের একজন তার ডান দিকে এবং অন্যজন তার বাম দিকে থাকবে। আর এটিই হলো ফিতনা। দাজ্জাল তখন বলবে: ‘আমি কি তোমাদের রব নই? আমি কি জীবন দেই না এবং মৃত্যু ঘটাই না?’ তখন ফেরেশতাদ্বয়ের একজন তাকে বলবে: ‘তুমি মিথ্যা বলছো।’ এই কথাটি তার সঙ্গী ছাড়া অন্য কোনো মানুষ শুনতে পাবে না। (তখন দাজ্জালের সঙ্গী ফেরেশতা তাকে) বলবে: ‘তুমি সত্য বলেছ।’ তখন লোকেরা এই কথাটি শুনতে পাবে এবং তারা মনে করবে যে সে দাজ্জালকেই সত্যায়ন করছে। আর এটিই হলো ফিতনা। অতঃপর সে (দাজ্জাল) চলতে থাকবে এবং মদিনায় আসবে, কিন্তু সেখানে তাকে প্রবেশ করতে দেওয়া হবে না। তখন সে বলবে: ‘এই হলো সেই ব্যক্তির (মুহাম্মাদ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-এর) শহর।’ এরপর সে চলতে চলতে শামের (সিরিয়ার) দিকে আসবে, অতঃপর আল্লাহ্ তা'আলা তাকে আফীক্ব উপত্যকার গিরিপথে ধ্বংস করবেন।”









আল-জামি` আল-কামিল (710)


710 - عن عبد اللَّه بن عمر، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"أُريتُ عند الكعبة مما يلي المقام رجلًا آدم، سبط الرّأس، واضعًا يديه على رجلين يسكب رأسه أو يقطر ماءً، فسألتُ: من هذا؟ قالوا: عيسى ابن مريم أو المسيح ابن مريم".

صحيح: رواه نُعيم بن حمّاد في"كتاب الفتن" (1336) عن الوليد بن مسلم، عن حنظلة، سمع سالمًا، سمع ابن عمر يقول: فذكره.

وحنظلة هو ابن أبي سفيان بن عبد الرحمن بن صفوان بن أمية الجمحيّ المكيّ من رجال الجماعة.

إلّا أنّ الوليد بن مسلم وهو القرشيّ وصف بالتدليس والتسوية إلّا أنّ الشّيخين مشّاه.




আবদুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমি কাবা শরীফের নিকট মাকামের কাছাকাছি একজন শ্যামলা বর্ণের ব্যক্তিকে দেখতে পেলাম, তাঁর মাথার চুল ছিল সোজা ও ঝোলানো। তিনি তাঁর দু'হাত দু'জন পুরুষের কাঁধে রেখেছিলেন। তাঁর মাথা থেকে পানি ঝরছিল বা টপকে পড়ছিল। তখন আমি জিজ্ঞাসা করলাম: ইনি কে? তারা বলল: ইনি ঈসা ইবনে মারইয়াম অথবা মাসীহ ইবনে মারইয়াম।"









আল-জামি` আল-কামিল (711)


711 - عن أبي أُمامة الباهليّ، قال:"خطبنا رسولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم فكان أكثر خطبته حديثًا حدّثناهُ عن الدّجال وحذرناه. . . فقالت أمُّ شريك بنت أبي العَكَر: يا رسولُ اللَّه فأين العرب يومئذ؟ قال:"هم يومئذ قليل وجلّهم بيت المقدس، وإمامهم رجل صالح فبينما إمامهم قد تقدَّم يصلي بهم الصُّبح إذْ نزل عليهم عيسى ابن مريم الصُّبح، فرجع ذلك الإمام يَنْكُص يَمشي القهقرى ليتقدَّم عيسى يُصلي بالنّاس، فيضع عيسى بده بين كتفيه ثم يقول له: تقدّم فصلِّ فإنّها لك أقيمت، فيصلي بهم إمامهم، فإذا انصرف قال عيسى عليه السلام: افتحوا الباب فيفتح ووراءه الدجال معه سبعون ألف يهودي كلّهم ذو سيف محلى وساج، فإذا نظر إليه الدّجال ذاب كما يذوب الملح في الماء وينطلق هاربًا ويقول عيسى عليه السلام: إنّ لي فيك ضربةً لن تسبقني بها فيدركهـ عند باب اللُّدِّ الشّرقي فيقتله، فيهزم اللَّه اليهود فلا يبقى شيء مما خلق اللَّه يتوارى به يهودي إلا أنطق اللَّه ذلك الشيء لا حجر ولا شجر ولا حائط ولا دابة -إلّا الغَرْقَدَة فإنّها من شجرهم لا تنطق- إلّا قال: يا عبد اللَّه المسلم هذا يهودي فتعال اقتله".

حسن: رواه ابن ماجه (4077) عن علي بن محمد، قال: حدّثنا عبد الرحمن المحاربيّ، عن إسماعيل بن رافع، عن أبي زرعة السيبانيّ يحيى بن أبي عمرو، عن أبي أمامة الباهليّ، فذكر الحديث بطوله - وهو مذكور في موضعه.

هكذا في نسخة ابن ماجه:"يحيى بن أبي عمرو، عن أبي أمامة". وقد سقط بينهما عمرو بن عبد اللَّه الحضرميّ" كما بيّن ذلك المزّي وغيره.

وكذلك رواه نعيم بن حمّاد في كتاب"الفتن" (1330) إلّا أنه اختصره.

وفيه إسماعيل بن رافع الأنصاريّ المدنيّ أبو رافع أهل العلم مطبقون على تضعيفه حتى قال ابن
حبان:"كان رجلًا صالحًا إلّا أنّه يقلّب الأخبار حتّى صار الغالب على حديثه المناكير التي يسبق إلى القلب أنه كان المتعمّد لها"."المجروحين" (42).

ولكن تابعه ضمرة بن ربيعة، عن السّيبانيّ، ومن طريقه رواه تمام في فوائده (1731)، وأبو داود (4322) ولم يسق لفظ الحديث، وإنّما أحال على حديث النّواس بن سمعان.

وكما تابعه أيضًا عطاء الخراسانيّ عن السيبانيّ. ومن طريقه رواه الحاكم (4/ 536 - 537) وقال:"هذا حديث صحيح على شرط مسلم، ولم يخرجاه بهذه السياقة".

قلت: وهو ليس على شرط مسلم، فإنّ عمرو بن عبد اللَّه الحضرميّ الحمصي لم يُخرج له مسلمٌ شيئًا، وإنّما أخرج له أبو داود، وابن ماجه فقط.

وعمرو بن عبد اللَّه الحضرميّ هذا وثّقه العجليّ، فقال:"شاميٌّ تابعيٌّ ثقة". وذكره ابن حبان في"الثقات" (5/ 179) وقال يعقوب بن سفيان في"المعرفة" (2/ 437):"شاميٌّ ثقة".

وفي الباب ما رُوي عن عثمان بن أبي العاص في حديث طويل وفيه:

"وينزل عيسى ابن مريم عند صلاة الفجر، فيقول له أميرهم: يا روحَ اللَّه تقدّم صلِّ. فيقول: هذه الأمة أمراء بعضهم على بعض، فيتقدّم أميرهم فيصلي، فإذا قضى صلاته أخذ عيسى حريته فيذهب نحو الدجال. . .".

رواه الإمام أحمد (17900)، والطبراني في"الكبير" (8392)، وابن أبي شيبة (15/ 136) كلّهم من حديث حماد بن سلمة، عن علي بن زيد، عن أبي نضرة، قال:"أتينا عثمان بن أبي العاص في يوم الجمعة لنعرض عليه مصحفًا لنا على مصحفه، فلما حضرت الجمعة أمرنا فاغتسلنا، ثم أُتينا بطب فتطيبنا، ثم جئنا المسجد، فجلسنا إلى رجل فحدّثنا عن الدّجال، ثم جاء عثمان بن أبي العاص، فقمنا إليه فجلسنا، فقال: سمعت رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول: فذكر الحديث بطوله.

ورواه الحاكم (4/ 478) من وجه آخر عن سعيد بن هبيرة، ثنا حماد بن زيد، عن أيوب السّختيانيّ وعلي بن زيد بن جدعان، عن أبي نضرة، بإسناده وقال:

"صحيح الإسناد على شرط مسلم بذكر أيوب السختيانيّ ولم يخرجاه".

وقال الذهبيّ: ابن هبيرة واهٍ.

قلت: وفي الإسناد علي بن زيد بن جدعان وهو ضعيف، ولا تنفع متابعة أيوب؛ لأنّ في طريقه إليه سعيد بن هبيرة وهو واهٍ كما قال الذهبيّ.

وفي الباب عن ابن مسعود مرفوعًا قال:"لقيتُ ليلة أُسري بي إبراهيم وموسى وعيسى. . ." إلى أن قال:"فردوا الأمر إلى عيسى، فقال: أما وَجْبَتُها فلا يعلمها أحدٌ إلّا اللَّه، وذلك فيما عهد إليَّ ربّي عز وجل أنّ الدجّال خارجٌ، ومعي قضيبان، فإذا رآني ذاب كما يذوب الرّصاص". فذكر الحديث بطوله.
رواه الإمام أحمد (3556) عن هُشيم، أخبرنا العوّام عن جبلة بن سُحيم، عن مؤثر بن عفازة، عن ابن مسعود، فذكر الحديث.

ورواه ابن ماجه (4081)، وصحّحه الحاكم (4/ 488 - 489) كلاهما من حديث يزيد بن هارون، أنبأ العوّام بن حوشب، بإسناده موقوفًا على ابن مسعود.

قال الحاكم:"صحيح الإسناد".

قلت: مع اختلافه في الرفع والوقف، فيه مؤثر بن عفازة لم أقف على من وثّقه غير أنّ ابن حبان ذكره في"الثقات" (5/ 463) ولم يذكر من روى عنه سوى جبلة بن سحيم، فهو في عداد المجهولين، ولذا قال الحافظ في التقريب:"مقبول". أي إذا توبع وإلّا فليّن الحديث.

وأورده في"الفتح" (13/ 89) مستشهدًا به وسكت عنه، فلعله اعتمد على تصحيح الحاكم له، أو رأى أن الحديث له شواهد، واللَّه تعالى أعلم.

وفي الباب أيضًا عن عبد الرحمن بن جبير بن نُفير، عن أبيه، قال:"لما اشتد جزع أصحاب رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم على من قُتل يوم مؤتة. قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:

"ليدركنّ الدّجّالُ قومًا مثلكم أو خيرًا منكم". ثلاث مرّات. وقال:"ولن يُخزي اللَّه أمّةً أنا أولُها، وعيسى ابن مريم آخرها".

رواه الحاكم (3/ 41) وقال:"صحيح على شرط الشّيخين". وتعقبه الذهبي فقال:"ذا مرسل، سمعه عيسى بن يونس عن صفوان، وهو خبر منكر".

وفي الباب أيضًا ما روي عن أنس بن مالك مرفوعًا:"أنا أولُ من يدخل الجنة يوم القيامة، وأشفع، وسيدرك رجالٌ من أمّتي عيسى ابن مريم، ويشهدون قتال الدّجّال".

رواه الحاكم في المستدرك (4/ 544 - 545) وسكت عليه، وتعقبه الذهبي فقال:"منكر، وعبّاد ضعيف".

وفي الباب أيضًا عن واثلة بن الأسقع قال: سمعتُ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"لا تقومُ السّاعةُ حتى تكون عشر آيات: خسف بالمشرق، وخسف بالمغرب، وخسف في جزيرة العرب، والدّجال، والدّخان، ونزول عيسى ابن مريم، ويأجوج ومأجوج، والدّابة، وطلوع الشّمس من مغربها، ونارٌ تخرج من قعر عدن تسوق النّاسَ إلى المحشر تحشرُ الذَّرَّ والنّمل".

رواه الطبرانيّ في"الكبير" (22/ 79 - 80) عن مطلب بن شعيب الأزديّ، ثنا عمران بن هارون الرّمليّ، ثنا صدقة بن المنتصر، حدّثني يحيى بن أبي عمرو السّيبانيّ، قال: حدثني عمرو بن عبد اللَّه الحضرميّ، قال: حدثني واثلة بن الأسقع، قال: سمعت رسول اللَّه يقول (فذكره).

قال الهيثمي في"المجمع" (7/ 328) بعد أن عزاه للطبرانيّ:"وفيه عمران بن هارون وهو ضعيف".

ولكن رواه الحاكم في المستدرك (4/ 428) من وجه آخر عن عمران بن أبي عمران الصوفيّ،
ثنا صدقة بن المنتصر، بإسناده، مثله.

قال:"هذا حديث صحيح الإسناد".

قلت: عمران بن أبي عمران الصوفي هل هو الرّملي أو غيره، لم يتبيّن لي: فإن كان الرملي فهو ضعيف جدًّا، ترجمه الذهبي في"الميزان" فقال:"عمران بن أبي عمران الرملي، عن بقية بن الوليد، أتي بخبر كذب وهو آفته".

وفي الباب عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لم يُسَلَّطْ على قتل الدّجال إلّا عيسى ابن مريم عليه السلام".

رواه أبو داود الطّيالسيّ في"مسنده" (2626) عن موسى بن مُطير، عن أبيه، عن أبي هريرة، فذكره.

وموسى بن مُطير، وأبوه مُطير ضعيفان.

قال ابن حبان في"المجروحين" (914):"من أهل الكوفة، يروي عن أبيه، روى عنه أبو يوسف، والوليد بن قاسم، كان صاحب عجائب ومناكير، لا يشك المستمع لها أنها موضوعة، إذا كان هذا الشأن صناعته".

وفي الباب أيضًا ما رُوي عن نافع بن كيسان مرفوعًا:"ينزل عيسى ابن مريم عليه السلام عند باب دمشق الشّرقي في ثوبين دمشقيين، كأنّما ينحدر من رأسه حَبُّ الجُمان".

رواه عبد الملك بن حبيب في أشراط الساعة (31) عن إبراهيم بن المنذر الحزاميّ، عن الوليد ابن مسلم، عن عبد الرحمن بن أيوب بن نافع بن كيسان، عن جدّه، فذكر الحديث.

وقال الحافظ في"الإصابة" (3/ 547):"وأخرج ابن عائذ، عن الوليد بن مسلم، عمّن سمع عبد الرحمن بن ربيعة، عن عبد الرحمن بن أيوب بن نافع، عن كيسان، عن أبيه، عن جدّه نافع بن كيسان صاحب النبيّ صلى الله عليه وسلم رفعه:"ينزل عيسى ابن مريم عند باب دمشق الشرقيّ".

وقال: أخرجه تمام في"فوائده" من طريق ابن عائذ، وتابعه محمد بن وهب بن عطية، عن عبد الرحمن بن زمعة، مثله. أخرجه ابن شاهين من طريقه.

وذكر له طرقًا أخرى، ولم أقف على الحديث في"فوائد تمام" وفي الإسناد من لم أقف على تراجمهم، والطرق الأخرى التي ذكرها الحافظ فيها مجاهيل ومستورون.

وفي الباب ما رُوي عن ثعلبة بن عِبَاد العبدي من أهل البصرة قال:"شهدتُ يومًا خُطبةً لسمرة ابن جندب فذكر في خطبته حديثًا عن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم. . . فذكر الخطبة بطولها، ومما جاء فيها:"وأيمُ اللَّه لقد رأيتُ منذ قمت أصلي ما أنتم لاقون في أمر دنياكم وأَخَرتكم، وإنه واللَّه لا تقوم الساعة حتى يخرج ثلاثون كذّابًا آخرهم الأعورُ الدّجّال، ممسوح العين اليسرى كأنها عين أبي تِحيى -لشيخ حينئذ من الأنصار بينه وبين حجرة عائشة- وإنّه متى يخرج -أو قال: متى ما يخرج- فإنّه سوف يزعم أنّه اللَّه، فمن آمن به وصدّقه واتّبعه لم ينفعه صالِحٌ من عمله سلَفَ، ومن كفر به
وكذّبه لم يعاقب بشيء من عمله -وقال حسن الأشيب: بسَيِّئ من عمله- سَلَفَ، وإنّه سيظهر -أو قال سوف يظهر- على الأرض كلّها إلّا الحرمَ وبيتَ المقدس، وإنّه يحْصُر المؤمنين في بيت المقدس، فيُزَلْزلون زلزالًا شديدًا، ثم يهلكه اللَّهُ وجنودَه، حتى إنّ جِذْمَ الحائط -أو قال أصل الحائط، وقال حسن الأشيب: وأصلَ الشّجرة- لينادي أو قال يقول: يا مؤمن أو قال: يا مسلم هذا يهودي أو قال: هذا كافر تعالَ فاقتله. قال: ولن يكون ذلك كذلك حتى تروا أمورًا يتفاقم شأنها في أنفسكم، وتَسَّاءَلُون بينكم: هل كان نبيُّكم ذكر لكم منها ذكرًا؟ وحتّى تزولَ جبالٌ على مراتبها، ثم على أَثَرِ ذلك القَبْض".

قال: ثم شهدتُ خطبةً لسَمرة ذكر فيها هذا الحديثَ، فما قدَّم كلمةً ولا أخَّرها عن موضعها.

رواه الإمام أحمد (20178) واللّفظ له، كما رواه أيضًا كل من أبي داود (1184)، والترمذيّ (562)، والنسائيّ (1484)، وابن ماجه (1264) مطوّلًا ومختصرًا، وصحّحه ابن خزيمة (1397)، وابن حبان (2852)، والحاكم (1/ 329 - 331)، والحافظ ابن حجر في ترجمة أبي تِحيى في الإصابة (4/ 26) كلّهم من طريق الأسود بن قيس، قال: حدثني ثعلبة بن عبّاد العبديّ، فذكره.

قال الترمذيّ:"حسن صحيح".

وقال الحاكم:"صحيح على شرط الشيخين".

قلت: هذا وهم منه، فإنه ليس على شرط أحدهما لأنّ فيه ثعلبة بن عبّاد من رجال السنن فقط. ثم هو لم يوثقه أحد، وإنما ذكره ابن حبان في"ثقاته" (4/ 9). ولم يذكر من روى عنه سوى الأسود بن قيس فهو"مجهول" فلعل من صحّحه نظر إلى شواهده، واللَّه تعالى أعلم.

وقوله:"ثم يهلكه اللَّه وجنوده" أي يهلكهـ عيسى ابن مريم، ونسب الفعل إلى اللَّه مثل قوله تعالى: {وَمَا رَمَيْتَ إِذْ رَمَيْتَ وَلَكِنَّ اللَّهَ رَمَى} [سورة الأنفال:




আবূ উমামা আল-বাহিলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাদের উদ্দেশ্যে ভাষণ দিলেন। তাঁর ভাষণের অধিকাংশই ছিল দাজ্জাল সম্পর্কে যা তিনি আমাদের কাছে বর্ণনা করেন এবং দাজ্জাল সম্পর্কে তিনি সতর্ক করেন। ... তখন উম্মু শারীক বিনত আবিল আকর জিজ্ঞেস করলেন: "হে আল্লাহর রাসূল! সেই দিন আরবেরা কোথায় থাকবে?" তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "সেদিন তাদের সংখ্যা হবে কম এবং তাদের অধিকাংশই থাকবে বাইতুল মাকদিসে। তাদের ইমাম হবেন একজন নেককার লোক। তাদের ইমাম যখন ফজরের সালাতে ইমামতি করার জন্য এগিয়ে যাবেন, ঠিক সেই মুহূর্তে তাদের সামনে ঈসা ইবনু মারইয়াম (আঃ) অবতরণ করবেন। তখন সেই ইমাম পেছনে সরে আসতে থাকবেন, যেন ঈসা (আঃ) মানুষের ইমামতি করেন। তখন ঈসা (আঃ) তার (ইমামের) দুই কাঁধের মাঝখানে হাত রাখবেন এবং বলবেন: 'আপনি এগিয়ে যান এবং সালাত আদায় করুন, কারণ এটি (সালাত) আপনার জন্যই দাঁড় করানো হয়েছে।' ফলে তাদের ইমাম তাদের নিয়ে সালাত আদায় করবেন। সালাত শেষে যখন তিনি ফিরবেন, তখন ঈসা (আঃ) বলবেন: 'দরজা খোলো।' তখন দরজা খুলে দেওয়া হবে। দরজার পেছনেই থাকবে দাজ্জাল, তার সাথে থাকবে সত্তর হাজার ইহুদি, যাদের সকলের হাতে থাকবে খচিত তরবারি এবং (মাথায়) চাদর। দাজ্জাল যখন তাঁকে (ঈসা আঃ-কে) দেখবে, তখন সে পানিতে লবণ গলে যাওয়ার মতো গলে যাবে এবং পালাতে শুরু করবে। তখন ঈসা (আঃ) বলবেন: 'তোমার উপর আমার এমন একটি আঘাত রয়েছে যা থেকে তুমি কখনোই পালাতে পারবে না।' অতঃপর তিনি তাকে (দাজ্জালকে) লূদ-এর পূর্ব ফটকে ধরে ফেলবেন এবং হত্যা করবেন। এরপর আল্লাহ তা'আলা ইহুদিদের পরাজিত করবেন। তখন আল্লাহর সৃষ্ট কোনো জিনিসই বাকি থাকবে না, যার পেছনে কোনো ইহুদি আত্মগোপন করবে আর আল্লাহ সেটিকে কথা বলার ক্ষমতা দেবেন না—পাথর, গাছ, দেয়াল বা কোনো প্রাণী কেউই নয়—তবে গারকাদ গাছ ছাড়া। কারণ এটি তাদের (ইহুদিদের) গাছ, এটি কথা বলবে না—(অন্য সবকিছুই) বলবে: 'হে আল্লাহর মুসলিম বান্দা! এই যে একজন ইহুদি, এসো এবং তাকে হত্যা করো।'"









আল-জামি` আল-কামিল (712)


712 - عن النّواس بن سمعان، قال: ذكر رسولُ اللَّه صلى الله عليه وسلم الدّجّال ذات غداة، فخفَّض فيه ورفَّع حتّى ظننّاه في طائفة النّخل. فما ذكر فيه:"إنّ عيسى عليه السلام يدركهـ باب لدٍّ فيقتله".

صحيح: رواه مسلم في الفتن (2937) في حديث طويل سبق ذكره في أوّل الباب.

ولُدّ: مدينة تقع غرب القدس تبعد عنها 26 ميلًا تقريبًا.

وفي الباب ما يستشهد به، وهو ما رواه مجمع بن جارية يقول: سمعتُ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"يقتل ابن مريم الدّجال بباب لُدّ".
رواه الترمذيّ (2244) عن قتيبة حدّثنا اللّيث، عن ابن شهاب، أنّه سمع عبد اللَّه بن عبد اللَّه بن ثعلبة الأنصاريّ يحدّث عن عبد الرحمن بن يزيد الأنصاريّ -من بني عمرو بن عوف- قال: سمعت عمّي مجمع بن جارية الأنصاريّ، فذكره.

ورواه الإمام أحمد (3/ 420)، وصحّحه ابن حبان (6811) كلاهما من طريق اللّيث بن سعد، بإسناده، مثله.

قال الترمذيّ:"صحيح". وفي نسخة:"حسن صحيح".

قلت: بل فيه عبيد اللَّه بن عبد اللَّه بن ثعلبة الأنصاريّ المدنيّ، وقيل: عبد اللَّه بن عبد اللَّه لا يعرف من هو؟ .

قال المزيّ في"تهذيبه":"اختلف فيه على الزّهريّ، وعلى أصحابه اختلافًا كثيرًا".

وقال الذهبيّ في"الميزان":"لا ذكر له في تاريخ البخاريّ، ولا ابن أبي حاتم، ولا روي عنه سوى الزّهريّ، وفي علّة الحديث أقوال عدّة". انتهى.

وقال الحافظ:"شيخ الزهريّ لا يعرف، واختلف في إسناد حديثه".

قلت: ولكن لا بأس بالاستشهاد به لما ثبت في حديث النواس بن سمعان بأن المسيح ابن مريم يقتل الدّجال في باب لُدّ؛ ولعلّ الترمذيّ لذلك صحّحه أو حسّنه.




আন-নাওয়াস ইবনু সামআন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: এক সকালে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দাজ্জালের আলোচনা করলেন। তিনি (তার ভয়াবহতার বিষয়টি) কখনো কমিয়ে এবং কখনো বাড়িয়ে এমনভাবে আলোচনা করলেন যে আমরা মনে করলাম, সে বুঝি খেজুর গাছের সারির মধ্যেই কোথাও আছে। অতঃপর তিনি এই কথা উল্লেখ করলেন: "নিশ্চয় ঈসা (আঃ) তাকে লূদ নামক ফটকের কাছে পাবেন এবং তাকে হত্যা করবেন।"

(অন্য একটি সাক্ষ্য হিসেবে) মুজামা‘ ইবনু জারিয়াহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "মারইয়াম পুত্র [ঈসা (আঃ)] দাজ্জালকে লূদের ফটকে হত্যা করবেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (713)


713 - عن أبي هريرة، عن النبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"إنّي لأرجو إن طال بي عمر أن ألقى عيسى ابن مريم، فإن عجل بي موت، فمن لقيه منكم فليقرئه مني السّلام".

صحيح: رواه الإمام أحمد (7970) عن محمد بن جعفر: حدّثنا شعبة، عن محمد بن زياد، عن أبي هريرة، فذكر مثله.

وإسناده صحيح، ولكن اختلف فيه على شعبة، فرفعه محمد بن جعفر في هذه الرواية، ووقفه يزيد ابن هارون في الرواية التي عقبها (7971) عن شعبة على أبي هريرة. والحكم للمرفوع لما فيه من الزيادة، وشعبة كثير التّردّد في الرّفع والوقف، فإن رفع فلم يرفعه إلا ليقين، وأما وقفه نهر للاحتياط.

قال الهيثميّ في"المجمع" (8/ 205):"رواه أحمد مرفوعًا وموقوفًا، ورجالهما رجال الصحيح".




আবূ হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমি অবশ্যই আশা করি যে যদি আমার জীবন দীর্ঘ হয়, তবে আমি ঈসা ইবনে মারইয়ামের সাথে সাক্ষাৎ করব। কিন্তু যদি আমার আগেই মৃত্যু এসে যায়, তবে তোমাদের মধ্যে যে তাঁর সাথে সাক্ষাৎ করবে, সে যেন আমার পক্ষ থেকে তাঁকে সালাম পৌঁছে দেয়।"









আল-জামি` আল-কামিল (714)


714 - عن أنس، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"من أدرك منكم عيسى ابن مريم فليقرأه مني السّلام".

حسن: رواه الحاكم (4/ 545) عن محمد بن المظفّر الحافظ: ثنا عبد اللَّه بن سليمان: ثنا محمد بن مصفى الحمصيّ: ثنا إسماعيل، عن أيوب، عن أبي قلابة، عن أنس، فذكره.

قال الحاكم:"إسماعيل هذا أظنّه ابن عياش ولم يحتجا به". وجزم الذّهبي أنّه ابنُ عياش.
والذي يظهر أنه إسماعيل بن إبراهيم بن مِقْسم الأسديّ المعروف بابن علية، فقد ذكر المزيُّ في"تهذيبه" من شيوخه أيوبَ السَّختِيانيّ.

وإسناده حسن من أجل الكلام في محمد بن مُصَفَّى غير أنّه حسن الحديث.

تنبيه: تحرّف في أصل المستدرك إلى"محمود".

وأمّا ما رواه الطبرانيّ في"الأوسط" (4898)، وفي الصغير (1/ 256 ، 257) عن أبي هريرة مرفوعًا:"ألا إن عيسى ابن مريم ليس بيني وبينه نبيٌّ ولا رسولٌ، ألا إنّه خليفتي في أمّتي من بعدي، ألا إنّه يقتل الدّجال ويكسر الصليب، ويضع الجزية، وتضع الحربُ أوزارها، ألا من أدركهـ منكم فليقرأ عليه السلام". فهو ضعيف. فيه محمد بن عقبة السّدوسيّ.

قال عبد الرحمن بن أبي حاتم:"سألت أبي عنه فقال: ضعيف الحديث، كتبتُ عنه، ثم تركت حديثه، فليس أحدِّثُ عنه. وترك أبو زرعة حديثه ولم يقرأه علينا، وقال: لا أحدِّث عنه".

ومع هذا كلّه أدخله ابن حبان في ثقاته (9/ 100) واللَّه المستعان.

قلت: إلّا أنّ مضمون الحديث تشهد له الأحاديث الصّحيحة.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমাদের মধ্যে যারা ঈসা ইবনে মারইয়ামকে পাবে, সে যেন আমার পক্ষ থেকে তাঁকে সালাম পৌঁছে দেয়।"









আল-জামি` আল-কামিল (715)


715 - عن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"أنا أولى النّاس بعيسى ابن مريم في الدّنيا والآخرة، والأنبياء إخوة لعِلَّاتٍ، أمّهاتهم شتّى ودينهم واحد".

متفق عليه: رواه البخاريّ في أحاديث الأنبياء (3443) عن محمد بن سنان، حدّثنا فليح بن سليمان، حدثنا هلال بن علي، عن عبد الرحمن بن أبي عمرة، عن أبي هريرة، فذكر مثله.

ورواه مسلم في الفضائل (2365) من وجه آخر عن همّام بن منبه، عن أبي هريرة وزاد في آخره:"فليس بيننا نبيٌّ".

ورواه الشّيخان البخاريّ (3443)، ومسلم كلاهما من حديث الزّهريّ، قال: أخبرني أبو سلمة ابن عبد الرحمن، أنّ أبا هريرة، قال (فذكر الحديث).




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "দুনিয়া ও আখিরাতে আমিই ঈসা ইবন মারইয়ামের সবচেয়ে নিকটবর্তী (বা অধিক হকদার) মানুষ। আর নবীগণ হলেন বৈমাত্রেয় ভাইয়ের মতো, তাদের মায়েরা ভিন্ন, কিন্তু তাদের দীন (ধর্ম) এক।"









আল-জামি` আল-কামিল (716)


716 - عن أبي هريرة، عن النبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"والذي نفسي بيده ليُهلنَّ ابنُ مريم بفَجِّ الرّوحاء، حاجًّا أو معتمرًا أو ليثنينهما".

صحيح: رواه مسلم في الحجّ (1252) من حديث سفيان بن عيينة، حدثني الزهريّ، عن حنظلة الأسلميّ، قال: سمعتُ أبا هريرة يحدّث، فذكره.

وفجُّ الرّوحاء: كان في كان في طريق النبيّ صلى الله عليه وسلم من المدينة إلى بدر.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "যার হাতে আমার জীবন, সেই সত্তার শপথ! মারইয়ামের পুত্র (ঈসা) অবশ্যই ফাজ্জুর-রাওহা নামক স্থানে হজ্জকারী হিসেবে অথবা উমরাহকারী হিসেবে ইহরাম বাঁধবেন, অথবা তিনি দুটোই পালন করবেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (717)


717 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"ينزل عيسى ابن مريم، فيقتل الخنزير، ويمحي الصّليب، وتجمع له الصّلاة، ويُعطى المال حتى لا يُقبل، ويضع الجزية، وينزل الرّوحاء فيحجُّ منها أو يعتمر أو يجمعهما".

صحيح: رواه الإمام أحمد (7903) عن يزيد: أخبرنا سفيان، عن الزهريّ، عن حنظلة، عن أبي هريرة، فذكر الحديث مثله.

قال: وتلا أبو هريرة: {وَإِنْ مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلَّا لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا} [سورة النساء: 159]، فزعم حنظلة أنّ أبا هريرة قال:"يؤمن به قبل موته: عيسى" فلا أدري هذا كله حديث النبيّ صلى الله عليه وسلم أو شيءٌ قاله أبو هريرة؟". انتهى.

قلت: الضّمير في قوله تعالى: {قَبْلَ مَوْتِهِ} يعود على عيسى عليه السلام وهو الذي قال به محقّقو الصّحابة مثل ابن عباس وغيرهم، وهو الذي ذهب إليه أبو هريرة. أما هل هو مرفوع أم موقوف عليه، فالظّاهر من الرّوايات أنه موقوف عليه، ولم يثبت أنه مرفوع إلى النبيّ صلى الله عليه وسلم.

وقد رُوي عن كثير بن عبد اللَّه بن عوف، عن أبيه، عن جدّه، أنه سمع رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"يمرُّ عيسى ابن مريم حاجًّا أو معتمرًا أو يجمع اللَّه له ذلك".

رواه عبد الملك بن حبيب الأندلسي في"أشراط السّاعة" (38) عن ابن أبي أويس، عن كثير، بإسناده مثله. ومن هذا الوجه رواه أيضّا الطبرانيّ في"الكبير" (17/ 16 - 17) في سياق أطول منه، كما رواه أيضًا من وجه آخر عن كثير، به.

وإسناده ضعيف جدًّا، فإنّ كثير بن عبد اللَّه بن عمرو بن عوف المزنيّ المدني، أهل العلم مطبقون على تضعيفه حتى قال ابن حبان:"روى عن أبيه عن جدّه نسخة موضوعة لا يحل ذكرها في الكتب، ولا الرواية عنه إلّا على جهة التّعجّب". وبه ضعّفه الهيثميّ في"المجمع" (6/ 86).




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “ঈসা ইবনে মারইয়াম (আঃ) অবতরণ করবেন। তিনি শূকর হত্যা করবেন, ক্রুশ নিশ্চিহ্ন করবেন, তাঁর জন্য সালাত একত্রিত করা হবে (বা সালাতের জামাআত অনুষ্ঠিত হবে), এবং (প্রচুর) সম্পদ দেওয়া হবে যা কেউ গ্রহণ করবে না। তিনি জিযইয়া (কর) উঠিয়ে দেবেন। তিনি রূহায় অবতরণ করবেন এবং সেখান থেকে হজ্জ অথবা উমরাহ অথবা উভয়টিই পালন করবেন।”

(আবূ হুরায়রা) বললেন: তিনি এই আয়াতটি তিলাওয়াত করলেন: “আর আহলে কিতাবদের মধ্যে এমন কেউই নেই, যে তার মৃত্যুর আগে তার প্রতি ঈমান আনবে না। আর কিয়ামতের দিন তিনি (ঈসা) তাদের ওপর সাক্ষী হবেন।” [সূরা আন-নিসা: ১৫৯] হানযালা (বর্ণনাকারী) মনে করেন যে আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেছেন: “তাঁর মৃত্যুর আগে তাঁর প্রতি ঈমান আনবে” অর্থাৎ ঈসা (আঃ)-এর প্রতি। (হানযালা বললেন,) আমি জানি না— এই সবটুকু নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর হাদীস, নাকি আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর নিজের কোনো কথা।









আল-জামি` আল-কামিল (718)


718 - عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"ليهبطنّ عيسى ابنُ مريم حكمًا عدلًا، وإمامًا مُقسطًا، وليسلكنّ فجًّا حاجًّا أو معتمرًا أو بِنِيَّتِهما، وليأتينّ قبري حتى يسلّم عليَّ ولأردنَّ عليه". يقول أبو هريرة: أي بني أخي إن رأيتموه فقولوا: أبو هريرة يقرئك السّلام.

حسن: رواه الحاكم (2/ 595) عن أبي الطيب محمد بن أحمد الحيريّ، ثنا محمد بن عبد الوهّاب، ثنا يعلى بن عبيد، ثنا محمد بن إسحاق، عن سعيد بن أبي سعيد المقبريّ، عن عطاء مولى أمّ صبية -وتحرّف فيه إلى أمّ حبيبة- قال: سمعت أبا هريرة، فذكر الحديث.

قال الحاكم:"صحيح الإسناد، ولم يخرجاه بهذه السّياقة".

قلت: ليس كما قال، فإن فيه عطاء مولى أمّ حبيبة مجهول.
قال الذهبي في"الميزان":"لا يعرف تفرد عنه المقبريّ".

وأما ابن حبان فذكره في"الثقات" (5/ 202).

وفي الإسناد أيضًا علّة أخرى وهي عنعنة محمّد بن إسحاق، وهو مدلس.

وقد رواه أيضًا عبد الملك بن حبيب الأندلسيّ في"أشراط السّاعة" (39) عن ابن الماجشون وغيره، عن الدّراورديّ، عن المغيرة، عن أبي هريرة، مرفوعًا:"ليمرنّ عيسى ابن مريم حاجًّا أو معتمرًا بالمدينة، وليقفَنَّ على قبري، وليقولنَّ: يا محمّد! فأجيبه، وليسلِّمنَّ عليَّ فأردُّ عليه".

وفيه الدّراورديّ وهو عبد العزيز بن محمد بن عبيد، وهو مختلف فيه غير أنه حسن الحديث إذا لم يخالف ولم يأت في حديثه ما ينكر عليه.

وأمّا المغيرة فالظّاهر أنه ابن عبد الرحمن بن الحارث بن عبد اللَّه بن عياش القرشيّ المخزوميّ، إلّا أنه لم يلقَ أبا هريرة؛ لأنّه وُلد سنة أربع أو خمس وعشرين ومائة، ومات سنة ست وثمانين ومائة، كما قال ابنه عياش.

ورواه أيضًا عن عبد الملك بن حبيب الأندلسيّ في"أشراط السّاعة" فقال: وحدثنيه أصبغ بن الفرج، عن ابن وهب، عن أبي صخر، عن المقبريّ، عن أبي هريرة، فذكر نحوه.

قلت: أبو صخر هو حُميد بن زياد المدني صاحب العباء، سكن مصر مختلف فيه، فقال النسائيّ: ضعيف، وابن معين له قولان: مرة ضعيف، وأخرى: ليس به بأس.

والحديث بهذه الطرق ولما له من الشواهد يرتقي إلى درجة الحسن إلا قوله:"ليأتين قبري. . ." فإنه لم يرد من طرق صحيحة حسب علمي.




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "ঈসা ইবনু মারইয়াম অবশ্যই ন্যায়পরায়ণ শাসক ও ইনসাফ প্রতিষ্ঠাকারী নেতা হিসেবে নাযিল হবেন। তিনি অবশ্যই হাজ্জ অথবা উমরাহ অথবা উভয়ের নিয়ত করে কোনো গিরিপথ ধরে চলবেন। আর তিনি অবশ্যই আমার কবরের কাছে আসবেন এবং আমাকে সালাম করবেন, আর আমি অবশ্যই তার জবাব দেব।" আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: হে আমার ভাইয়ের ছেলেরা, যদি তোমরা তাঁকে দেখতে পাও, তবে তোমরা বলো: আবূ হুরাইরাহ আপনাকে সালাম জানাচ্ছে।









আল-জামি` আল-কামিল (719)


719 - عن جابر بن عبد اللَّه قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"أُعطيت خمسًا لم يُعطهنّ أحدٌ من الأنبياء قبلي: نُصرتُ بالرُّعب مسيرة شهر، وجعلتْ لي الأرض مسجدًا وطهورًا، وأيما رجل من أمّتي أدركتْه الصّلاة فليصلِّ، وأحلّت لي الغنائم، وكان النبيُّ يبعث إلى قومه خاصة، وبُعثت إلى الناس كافة، وأُعطيت الشّفاعة".

متفق عليه: رواه البخاريّ في الصلاة (438)، ومسلم في المساجد (521) كلاهما من حديث هُشيم، قال: حدّثنا سيَّار -وهو أبو الحكم- قال: حدّثنا يزيد الفقير، قال: حدّثنا جابر بن عبد اللَّه، فذكره.




জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমাকে পাঁচটি জিনিস দেওয়া হয়েছে, যা আমার পূর্বে অন্য কোনো নবীকে দেওয়া হয়নি: (১) এক মাসের দূরত্ব পর্যন্ত (শত্রুদের অন্তরে) ভীতির মাধ্যমে আমাকে সাহায্য করা হয়েছে। (২) আমার জন্য যমীনকে সিজদার স্থান ও পবিত্রকারী (পাক) বানানো হয়েছে। সুতরাং আমার উম্মতের যেই পুরুষের যখনই সালাতের সময় হবে, সে যেন সালাত আদায় করে নেয়। (৩) আমার জন্য গনীমতের সম্পদ হালাল করা হয়েছে। (৪) পূর্বের নবীকে বিশেষ করে তাঁর নিজ জাতির নিকট পাঠানো হতো, আর আমাকে সমগ্র মানবজাতির জন্য পাঠানো হয়েছে। (৫) এবং আমাকে শাফা'আত (সুপারিশ করার অধিকার) দেওয়া হয়েছে।"









আল-জামি` আল-কামিল (720)


720 - عن وعن أبي هريرة، أنّ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"فُضِّلْتُ على الأنبياء بست: أُعطيت جوامع الكلم، ونُصرت بالرُّعب، وأحلت لي الغنائم، وجُعلت لي الأرض طهورًا ومسجدًا، وأُرسلتُ إلى الخلق كافة، وخُتم بي النبيّون".

صحيح: رواه مسلم في المساجد (523) من طرق عن إسماعيل بن جعفر، عن العلاء، عن أبيه، عن أبي هريرة، فذكر مثله.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমাকে ছয়টি বিষয়ের মাধ্যমে অন্যান্য নবীদের উপর শ্রেষ্ঠত্ব দান করা হয়েছে: আমাকে 'জাওয়ামি'উল কালিম' (সংক্ষিপ্ত অথচ ব্যাপক অর্থবোধক কথা) দেওয়া হয়েছে; আমাকে সাহায্য করা হয়েছে ভীতি বা ত্রাস দ্বারা; আমার জন্য গনিমত (যুদ্ধলব্ধ সম্পদ) হালাল করা হয়েছে; আমার জন্য জমিনকে পবিত্রতা অর্জনকারী ও সিজদার স্থান (মসজিদ) বানানো হয়েছে; আমাকে সমগ্র সৃষ্টির কাছে পাঠানো হয়েছে; এবং আমার দ্বারাই নবীদের পরিসমাপ্তি ঘটানো হয়েছে।"