আল-জামি` আল-কামিল
7301 - عن عبد الله بن عمرو قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"من شرب الخمر وسكر لم تقبل له صلاة أربعين صباحا، وإن مات دخل النار. فإن تاب تاب الله عليه. وإن عاد فشرب فسكر لم تقبل له صلاة أربعين صباحا. فإن مات دخل النار. فإن تاب تاب الله عليه. وإن عاد فشرب فسكر لم تقبل له صلاة أربعين صباحا. فإن مات دخل النار. فإن تاب تاب الله عليه. وإن عاد كان حقا على الله أن يسقيه من ردغة الخبال يوم القيامة" قالوا: يا رسول الله، وما ردغة الخبال؟ قال:"عصارة أهل النار".
صحيح: رواه ابن ماجه (4377)، وصححه ابن حبان (5357) كلاهما من طريق الوليد بن مسلم، ثنا الأوزاعي، عن ربيعة بن يزيد، عن عبد الله بن الديلمي، عن عبد الله بن عمرو فذكره.
ورواه النسائي (5670) من طريق بقية، وأبي إسحاق الفزاري، وأحمد (1644) من طريق أبي إسحاق كلاهما عن الأوزاعي به، وفي أوله قصة وزاد أحمد في سياقه أحاديث أخرى.
وإسناده صحيح، وعبد الله بن الديلمي هو ابن فيروز من ثقات كبار التابعين.
وله طريق أخرى رواها النسائي (5664)، وأحمد (1854) وصححه ابن خزيمة (939)، والحاكم (1/ 257) من طريق عروة بن رُويم، عن ابن الديلمي الذي كان يسكن ببيت المقدس أنه مكث في طلب عبد الله بن عمرو بن العاص بالمدينة فسأل عنه. قالوا: قد سار إلى مكة فأتبعه، فوجده قد سار إلى الطائف، فأتبعه فوجده في زرعه يمشي مخاصرا رجلا من قريش، والقريشي يُزنُّ بالخمر، فلما لقيته سلّمتُ عليه وسلّم عليَّ، قال: ما عدا بك اليوم ومن أين أقبلت؟ فأخبرته، ثم سألته هل سمعت يا عبد الله بن عمرو رسول الله صلى الله عليه وسلم ذكر شراب الخمر بشيء؟ قال: نعم فانتزع القرشي يده ثم ذهب فقال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول:"لا يشرب الخمر رجل من أمتي فيقبل له صلاة أربعين صباح". وإسناده صحيح.
আব্দুল্লাহ ইবনু 'আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি মদ পান করে এবং নেশাগ্রস্ত হয়, চল্লিশ দিন সকাল পর্যন্ত তার সালাত (নামাজ) কবুল করা হয় না। আর যদি সে এ অবস্থায় মারা যায়, তবে সে জাহান্নামে প্রবেশ করবে। যদি সে তওবা করে, তবে আল্লাহ তার তওবা কবুল করেন। যদি সে আবার ফিরে আসে (পুনরায় পান করে) এবং নেশাগ্রস্ত হয়, তবে চল্লিশ দিন সকাল পর্যন্ত তার সালাত কবুল করা হয় না। যদি সে এ অবস্থায় মারা যায়, তবে সে জাহান্নামে প্রবেশ করবে। যদি সে তওবা করে, তবে আল্লাহ তার তওবা কবুল করেন। যদি সে আবার ফিরে আসে (তৃতীয়বার পান করে) এবং নেশাগ্রস্ত হয়, তবে চল্লিশ দিন সকাল পর্যন্ত তার সালাত কবুল করা হয় না। যদি সে এ অবস্থায় মারা যায়, তবে সে জাহান্নামে প্রবেশ করবে। যদি সে তওবা করে, তবে আল্লাহ তার তওবা কবুল করেন। আর যদি সে চতুর্থবার ফিরে আসে (চতুর্থবার পান করে), তবে কিয়ামতের দিন আল্লাহ তাআলার কাছে এটা ন্যায্য যে তিনি তাকে 'রাদগাতুল খাবাল' থেকে পান করাবেন।” সাহাবায়ে কিরাম জিজ্ঞেস করলেন, হে আল্লাহর রাসূল! 'রাদগাতুল খাবাল' কী? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “এটা হচ্ছে জাহান্নামীদের রক্ত-পুঁজ/নিঃসৃত রস।”
7302 - عن عبد الله بن عمرو قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"من مات من أمتي وهو يشرب الخمر، حرّمها الله عليه في الآخرة، ومن مات من أمتي وهو يلبس الحرير حرّم الله عليه لُبْسَه في الآخرة".
صحيح: رواه أبو يعلى الموصلي - كما في إتحاف الخيرة المهرة للبوصيري (5480) من طريق عبد الأعلى بن عبد الأعلى، عن سعيد الجريري، عن ميمون بن أستاذ، عن عبد الله بن عمرو فذكره.
وهذا إسناد صحيح، وسعيد الجريري وإن كان اختلط غير أن سماع عبد الأعلى منه صحيح، قال العجلي في ثقاته:"سعيد بن إياس الجريري بصري ثقة واختلط بآخره". وذكر من روى عنه بعد الاختلاط ثم قال:"إنما الصحيح عنه: حماد بن سلمة، وإسماعيل ابن علية، وعبد الأعلى من أصحهم سماعا، سمع منه قبل أن يختلط بثمان سنين، وسفيان الثوري وشعبة صحيح".
وأما شيخه ميمون بن أستاذ فثقة أيضا، فقد وثقه ابن معين - كما في الجرح والتعديل (8/ 233)، وذكره ابن حبان في الثقات (5/ 418).
وقد رواه أحمد (6948) عن يزيد بن هارون وأبو يعلى الموصلي - كما في الإتحاف (5479) - من طريق بشر بن المفضل - كلاهما عن الجريري، عن ميمون بن أستاذ، عن الصدفي، عن عبد الله بن عمرو بنحوه. فزاد في إسناده رجلا وهو خطأ.
قال عبد الله بن أحمد:"ضرب أبي على هذا الحديث، فظننتُ أنه ضرب عليه لأنه خطأ، وإنما هو ميمون بن أستاذ عن عبد الله بن عمرو"ليس فيه" عن الصدفي"ويقال: إن ميمون هذا هو الصدفي؛ لأن سماع يزيد بن هارون عن الجريري آخر عمره".
قلت: ولعل بشر بن المفضل كذلك فإني لم أجد من نصَّ على سماعه من الجريري قبل
الاختلاط. إلا أن متابعة هولاء لعبد الأعلى بن عبد الأعلى تؤكد أن سعيد الجريري لم يختلط في هذا الحديث.
আব্দুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "আমার উম্মতের মধ্য থেকে যে ব্যক্তি মদ পান করা অবস্থায় মারা যাবে, আল্লাহ্ তা‘আলা আখিরাতে তার জন্য তা হারাম করে দেবেন। আর আমার উম্মতের মধ্য থেকে যে ব্যক্তি রেশম পরিধান করা অবস্থায় মারা যাবে, আল্লাহ্ তা‘আলা আখিরাতে তার জন্য তা পরিধান করা হারাম করে দেবেন।"
7303 - عن عبد الله بن عمرو عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قال:"من ترك الصلاة سكرا مرة واحدة، فكأنما كانت له الدنيا وما عليها فسلبها، ومن ترك الصلاة سكرًا أربع مرات، كان حقا على الله عز وجل أن يسقيه من طينة الخيال"، قيل: وما طينة الخبال يا رسول الله؟ قال: عصارة أهل جهنم".
حسن: رواه أحمد (6659) والحاكم (4/ 146)، والبيهقي في السنن (1/ 389، 287)، وفي شعب الإيمان (5193) كلهم من طريق ابن وهب، حدثني عمرو بن الحارث، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن عبد الله بن عمرو فذكره.
وهذا إسناد حسن من أجل الكلام في عمرو بن شعيب غير أنه حسن الحديث.
وقال الحاكم:"صحيح الإسناد،" وتعقبه الذهبي فقال:"سمعه ابن وهب عنه وهو غريب جدًّا.
قلت: ولكن له طرق أخرى عن عمرو بن الحارث عند الطبراني في الأوسط (6371) وعند المروزي في تعظيم قدر الصلاة (922).
আব্দুল্লাহ ইবন আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যে ব্যক্তি একবারও নেশাগ্রস্ত অবস্থায় সালাত ছেড়ে দিলো, সে যেন তার সবকিছুসহ দুনিয়া পেয়েছিল, অতঃপর তা ছিনিয়ে নেওয়া হলো। আর যে ব্যক্তি চারবার নেশাগ্রস্ত অবস্থায় সালাত ছেড়ে দিলো, আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্লার জন্য এটা অপরিহার্য হয়ে যায় যে তিনি তাকে ‘ত্বীনাতুল খাবার’ পান করাবেন।” বলা হলো: হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), ‘ত্বীনাতুল খাবার’ কী? তিনি বললেন: “তা হলো জাহান্নামবাসীদের পুঁজ।”
7304 - عن طلق بن علي أنه كان عند رسول الله صلى الله عليه وسلم جالسا، فجاء صحار عبد القيس، فقال: يا رسول الله، ما ترى في شراب نصنعه بأرضنا من ثمارنا؟ فأعرض عنه نبي الله صلى الله عليه وسلم، حتى سأله ثلاث مرات، حتى قام فصلى، فلما قضى صلاته، قال النبي صلى الله عليه وسلم:"من السائل عن المسكر؟ لا تشربه، ولا تسقيه أخاك المسلم، فوالذي نفسي بيده، أو فوالذي يحلف به - لا يشربه رجلٌ ابتغاء لذة سكره، فيسقيه الله الخمر يوم القيامة".
حسن: رواه أحمد في مسنده - الملحق المستدرك - (24009: 32)، وابن أبي شيبة في المصنف (7/ 460)، والطبراني في الكبير (8259) كلهم من طريق ملازم بن عمرو، ثنا سراج بن عقبة، عن عمته خلدة بنت طلق، عن أبيها طلق بن علي فذكره.
وإسناده حسن من أجل خلدة بنت طلق، ذكرها ابن حبان، وابن خلفون في الثقات ووثقها العجلي.
وأما ابن أخيها سراج بن عقبة فوثقه ابن معين كما في الجرح والتعديل (4/ 316) ووثقه أيضا العجلي. انظر: تعجيل المنفعة (326).
তলক ইবনে আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত যে তিনি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের নিকট উপবিষ্ট ছিলেন। তখন আবদ আল-কায়েস গোত্রের সাহহার আসলেন এবং বললেন, ‘হে আল্লাহর রাসূল! আমাদের জমিতে আমাদের ফল থেকে তৈরি পানীয় সম্পর্কে আপনার কী মত?’ আল্লাহর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার থেকে মুখ ফিরিয়ে নিলেন। এমনকি তিনি (সাহহার) তিনবার জিজ্ঞেস করলেন। অতঃপর তিনি (নবী) উঠে সালাত আদায় করলেন। যখন তিনি সালাত শেষ করলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, ‘মাদকদ্রব্য (মুসকির) সম্পর্কে প্রশ্নকারী কে?’ ‘তা তুমি নিজে পান করবে না এবং তোমার মুসলিম ভাইকে পান করাবেও না। সেই সত্তার কসম, যার হাতে আমার প্রাণ, অথবা (রাবী বলেন) সেই সত্তার কসম, যার নামে কসম করা হয়— যে ব্যক্তি এর মাদকতার স্বাদ গ্রহণের উদ্দেশ্যে তা পান করবে, আল্লাহ তাকে কিয়ামতের দিন (জাহান্নামের) শরাব পান করাবেন।’
7305 - عن عبد الله بن عمر أن أبا بكر الصديق وعمر بن الخطاب وناسا من أصحاب رسول الله صلى الله عليه وسلم جلسوا بعد وفاة رسول الله صلى الله عليه وسلم، فذكروا أعظم الكبائر، فلم يكن عندهم فيها علمٌ، فأرسلوني إلى عبد الله بن عمرو بن العاص أسأله عن ذلك، فأخبرني: أن
أعظم الكبائر شرب الخمر، فأتيتُهم فأخبرتُهم، فأنكروا ذلك، ووثبوا إليه جميعا، فأخبرهم أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إن ملكا من بني إسرائيل أجبر رجلا، فخيّره بين أن يشرب الخمر، أو يقتل صبيا، أو يزني، أو يأكل لحم الخنزير، أو يقتلوه إن أبى، فاختار أنه يشرب الخمر، وأنه لما شرب لم يمتنع من شيء أرادوه منه"، وأن رسول الله قال لنا حينئذ:"ما من أحد يشربها فتقبل له صلاة أربعين ليلة ولا يموت وفي مثانته منها شيء إلا حرمت عليه الجنة، وإن مات في الأربعين مات ميتة جاهلية".
حسن: رواه الطبراني في الأوسط (363) عن أحمد بن رشدين، ثنا سعيد بن أبي مريم، أخبرنا عبد العزيز بن محمد الدراوردي، ثنا داود بن صالح، عن سالم بن عبد الله بن عمر .. فذكره.
وإسناده حسن من أجل الدراوردي، وشيخه داود بن صالح هو التمار المدني، ذكره ابن حبان في الثقات، وقال الإمام أحمد:"لا أعلم به بأسا" ولذلك قال الذهبي وابن حجر:"صدوق".
ورواه الحاكم (4/ 174) من طريق أبي مريم به مثله. وقال:"صحيح على شرط مسلم". كذا قال! وداود بن صالح ليس من رجال مسلم.
আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর ইন্তিকালের পর আবূ বকর আস-সিদ্দিক, উমর ইবনুল খাত্তাব এবং রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর একদল সাহাবী একত্রে বসেছিলেন। তারা সর্ববৃহৎ কবিরা গুনাহসমূহ (মহাপাপ) নিয়ে আলোচনা করলেন, কিন্তু এ বিষয়ে তাদের কাছে কোনো সঠিক জ্ঞান ছিল না। অতঃপর তারা আমাকে আব্দুল্লাহ ইবনে আমর ইবনুল আসের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) কাছে পাঠালেন যেন আমি তাকে এ বিষয়ে জিজ্ঞাসা করি।
তিনি আমাকে জানালেন যে, সর্ববৃহৎ কবিরা গুনাহ হলো মদ পান করা। আমি তাদের কাছে ফিরে এসে তাদের জানালাম। তারা তা অস্বীকার করলেন এবং সবাই মিলে তাঁর (আব্দুল্লাহ ইবনে আমর) কাছে গেলেন। অতঃপর তিনি তাদের জানালেন যে, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন:
"বনী ইসরাঈলের এক বাদশাহ একজন লোককে বাধ্য করে তাকে চারটি কাজের মধ্যে যেকোনো একটি বেছে নিতে বললেন—হয় সে মদ পান করবে, অথবা একটি শিশুকে হত্যা করবে, অথবা ব্যভিচার করবে, অথবা শূকরের মাংস খাবে। যদি সে এসব অস্বীকার করে, তবে তাকে হত্যা করা হবে। তখন লোকটি মদ পান করা বেছে নিল। আর সে যখন মদ পান করল, তখন তারা তার কাছ থেকে যা চাইল, তা থেকে সে বিরত থাকল না।"
এবং রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তখন আমাদের বলেছেন: "যে ব্যক্তি তা (মদ) পান করবে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। আর যদি সে এমন অবস্থায় মারা যায় যে, তার মূত্রাশয়ে এর (মদের) কিছু অংশ অবশিষ্ট থাকে, তবে তার উপর জান্নাত হারাম হয়ে যাবে। আর যদি সে ঐ চল্লিশ দিনের মধ্যে মারা যায়, তবে সে জাহেলিয়াতের মৃত্যু বরণ করবে।"
7306 - عن ابن عمر قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"من شرب الخمر لم تقبل له صلاة أربعين ليلة، فإن تاب، تاب الله عليه، وإن شربها الثانية لم تقبل له صلاة أربعين ليلة، فإن تاب، تاب الله عليه، فإن شربها الثالثة لم تقبل له صلاة أربعين ليلة، فإن تاب، تاب الله عليه، فإن شربها الرابعة لم تقبل له صلاة أربعين ليلة فإن تاب لم يتب الله عليه، وكان حقا على الله أن يسقيه من طينة الخبال". قيل: وما طينة الخبال؟ قال:"صديد أهل النار".
صحيح: رواه البيهقي في الشعب (5191) واللفظ له، والطبراني في الكبير (12/ 392) كلاهما من طريق حماد بن زيد، حدثنا عطاء بن السائب، عن عبد الله بن عبيد بن عمير، أن ابن عمر قال. فذكره.
وإسناده صحيح، عطاء بن السائب ثقة اختلط في آخر عمره، ولكن حماد بن زيد ممن سمع منه قديما قبل الاختلاط، وقد تابعه عدد من الرواة، ومن طريقهم رواه الترمذي (1862)، وعبد الرزاق (10758)، وأحمد (4917)، وأبو يعلى (5686) والطبراني (12/ 390) كلهم عن طريق عطاء بن السائب، به نحوه، وبعضهم ذكره مختصرًا، وهذا يؤكد أنه لم يخطئ في هذا الحديث:
قال الترمذي:"هذا حديث حسن".
وفي معناه ما روي عن ابن عباس عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"كل مخمِّر خمر، وكل مسكر حرام، ومن شرب مسكرا بُخستْ صلاتُه أربعين صباحا، فإن تاب تاب الله عليه، فإن عاد الرابعة كان حقا على الله أن يسقيه من طينة الخبال"، قيل: وما طينة الخبال يا رسول الله؟ قال:"صديد أهل النار، ومن
سقاء صغيرا لا يعرف حلاله من حرامه كان حقا على الله أن يسقيه من طينة الخبال".
رواه أبو داود (3680) عن محمد بن رافع النيسابوري، ثنا إبراهيم بن عمر الصنعاني، قال: سمعت النعمان بن أبي شيبة - وفي المطبوع"ابن بشير" وهو خطأ - عن طاوس، عن ابن عباس فذكره. ورواه البيهقي (8/ 288) من أبي داود به.
وفيه إبراهيم بن عمر الصنعاني لم يوثقه أحد؛ ولذا قال الحافظ:"مستور".
وسئل عنه أبو زرعة فقال:"هذا حديث منكر". علل ابن أبي حاتم (2/ 3
ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "যে ব্যক্তি মদ পান করবে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। এরপর যদি সে তাওবা করে, আল্লাহ তার তাওবা কবুল করেন। যদি সে দ্বিতীয়বার পান করে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। এরপর যদি সে তাওবা করে, আল্লাহ তার তাওবা কবুল করেন। যদি সে তৃতীয়বার পান করে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। এরপর যদি সে তাওবা করে, আল্লাহ তার তাওবা কবুল করেন। আর যদি সে চতুর্থবার পান করে, তার চল্লিশ রাতের সালাত কবুল করা হবে না। এরপর যদি সে তাওবা করে, আল্লাহ তার তাওবা কবুল করেন না, এবং আল্লাহর জন্য এটা আবশ্যক যে তিনি তাকে 'তীনাতুল খাবাল' থেকে পান করাবেন।" জিজ্ঞাসা করা হলো: 'তীনাতুল খাবাল' কী? তিনি বললেন: "জাহান্নামবাসীদের পূঁজ।"
7307 - عن أبي الدرداء عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"لا يدخل الجنة مدمن خمر".
حسن: رواه ابن ماجه (2276) عن هشام بن عمار، ثنا سليمان بن عتبة، قال: حدثني يونس بن ميسرة بن حلبس، عن أبي إدريس، عن أبي الدرداء فذكره.
ورواه أحمد (27484)، والبزار (2182 - كشف الأستار) من وجه آخر عن سليمان بن عتبة به وزادا:"عاق، ولا مكذب بالقدر".
وإسناده حسن من أجل سليمان بن عتبة الداراني الدمشقي فقد وثّقه دُحيم وقال: روي عنه المشائخ"، وقال أبو حاتم: ليس به بأس، وهو محمود عند الدمشقيين. وبقية رجاله ثقات شاميون، وأبو إدريس هو عائذ الله الخولاني.
وفي الباب عن أبي موسى الأشعري، أن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"ثلاثة لا يدخلون الجنة مدمن خمر، وقاطع رحم، ومصدق بالسحر، ومن مات مدمنا للخمر، سقاه الله عز وجل من نهر الغوطة، قيل: وما نهر الغوطة؟ قال: نهر يجري من فروج المومسات، يؤذي أهل النار ريح فروجهم".
رواه أحمد (19569)، وابن حبان (5346)، والحاكم (4/ 141) كلهم من حديث المعتمر بن سليمان قال: قرأت على الفضيل بن ميسرة، عن حديث أبي حريز، أن أبا بردة حدّثه عن حديث أبي موسى فذكره.
قال الحاكم: صحيح الإسناد.
وليس كما قال؛ لأن في إسناده أبا حريز، واسمه عبد الله بن حسين الأزدي، وهو مختلف فيه، فقال أحمد: منكر الحديث، ووثقه ابن معين في رواية، وضعفه في رواية أخرى، ووثقه أبو زرعة، وقال أبو حاتم: حسن الحديث ليس بمنكر الحديث، يكتب حديثه، وقال أبو داود: ليس حديثه بشيء، وقال النسائي: ضعيف، وقال ابن عدي: عامة ما يرويه لا يتابعه عليه أحد".
ولعل قوله:"ومن مات مدمنا للخمر … الخ" مما لم يتابعه عليه أحد، وفي متنه نكارة واضحة.
وفي الباب أيضا عن أبي سعيد الخدري قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا يدخل الجنة صاحب
خمس: مدمن خمر، ولا مؤمن بسحر، ولا قاطع رحم، ولا كاهن، ولا منان". رواه أحمد (11107) عن معاوية بن عمرو، ثنا أبو إسحاق، عن الأعمش، عن سعد الطائي، عن عطية بن سعد، عن أبي سعيد الخدري فذكره.
وإسناده ضعيف من أجل عطية بن سعد هو العوفي.
وبه أعله الهيثمي في المجمع (5/ 74).
ورواه أيضا أحمد (11222، 11389) من وجهين آخرين عن يزيد بن أبي حبيب، عن مجاهد، عن أبي سعيد الخدري، عن رسول الله صلى الله عليه وسلم، وقال مرة أخرى: أحسبه عن أبي سعيد أنه قال:"لا يدخل الجنة منان، ولا عاقّ، ولا مدمن".
وفيه يزيد بن أبي حبيب القرشي ضعيف، كما أن مجاهدا لم يسمع من أبي سعيد الخدري، والعلة الأخرى أنه وقفه على أبي سعيد.
وأما ما روي عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"من لقي الله مدمنَ خمر، لقيه كعابد وثن". فمنكر.
رواه ابن حبان (5347) عن الحسن بن سفيان، ثنا أحمد بن المقدام العجلي، ثنا عبد الله بن خراش بن حوشب، ثنا العوام بن حوشب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس فذكره.
وهذا إسناد ضعيف جدا، علنه عبد الله بن خراش، قال البخاري وأبو حاتم:"منكر الحديث" وزاد أبو حاتم:"ذاهب الحديث، ضعيف الحديث"، وقال أبو زرعة:"ليس بشيء، ضعيف الحديث".
وأورد له ابن عدي في الكامل (4/ 1525) هذا الحديث وأحاديث أخرى ثم قال في آخر الترجمة:"وعامة ما يرويه غير محفوظ".
ثم خولف في إسناده فقد رواه أحمد (2453) عن أسود بن عامر، ثنا الحسن بن صالح، عن محمد بن المنكدر، قال: حدثتُ عن ابن عباس فذكره.
ورجاله ثقات إلا أن في إسناده جهالة.
وكذلك لا يصح ما روي عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"مدمن الخمر كعابد وثن".
رواه ابن ماجه (3375) من طريق محمد بن سليمان بن الأصبهاني، عن سهيل، عن أبيه، عن أبي هريرة فذكره.
وفيه محمد بن سليمان الأصبهاني ضعفه النسائي، وقال أبو حاتم: لا بأس به يكتب حديثه ولا يحتج به"، وقال ابن عدي:"هو قليل الحديث أخطأ في غير شيء ثم قد خالف الثقة قال الدارقطني في العلل (10/ 115):"وخالفه سليمان بن بلال رواه عن سهيل، عن محمد بن عبيد الله، عن أبيه، عن النبي صلى الله عليه وسلم قاله ابن أبي مريم عنه".
ومن هذا الوجه رواه البيهقي في الشعب (5208) ثم قال:"كذا في كتابي (محمد بن عبد الله)،
وذكره البخاري في التاريخ (1/ 129) عن إسماعيل بن أبي أويس، عن أخيه، عن سهيل بن أبي صالح، عن محمد بن عبد الله، عن أبيه به فذكره.
فتبين بهذا أن محمد بن سليمان بن الأصبهاني قد سلك فيه الجادة، وأن المحفوظ رواية سليمان بن بلال التيمي وغيره. وهو من الوجه المحفوظ، فيه محمد بن عبد الله وأبوه لا يعرفان؛ لذا قال البخاري عقب الحديث:"ولا يصح حديث أبي هريرة في هذا".
আবু দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "মদপানে আসক্ত ব্যক্তি জান্নাতে প্রবেশ করবে না।"
7308 - عن أبي الدرداء قال: أوصاني خليلي:"لا تشرب الخمر، فإنها مفتاح كل شرٍّ".
حسن: رواه ابن ماجه (3371) من طريق راشد أبي محمد الحماني، عن شهر بن حوشب، عن أم الدرداء، عن أبي الدرداء قال .. فذكره.
ورواه البخاري في الأدب المفرد (18) من هذا الوجه بتمامه قال:"أوصاني رسول الله صلى الله عليه وسلم بتسع … فذكرها كلها.
رواه أيضا ابن ماجه في موضع آخر (404)، والبزار (4148) بهذا الإسناد ببعضه.
قال البزار: وهذا الحديث لا نعلمه يُروى عن رسول الله صلى الله عليه وسلم بهذا اللفظ إلا من هذا الوجه بهذا الإسناد، وراشد أبو محمد بصري ليس به بأس، قد حدث عنه غير واحد، وشهر بن حوشب قد روى عنه الناس وتكلموا فيه واحتملوا حديثه.
فالإسناد حسن من أجل الخلاف في شهر فإنه حسن الحديث ما لم يخالف، وكذا الراوي عنه.
وقد حسّن إسناده الحافظ في الأمالي المطلقة (ص 76).
আবুদ্ দারদা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমার অন্তরঙ্গ বন্ধু (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে উপদেশ দিয়েছেন: "তুমি মদ পান করো না, কারণ এটি সকল মন্দের চাবি।"
7309 - عن ابن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"اجتنبوا الخمر فإنها مفتاح كل شرٍّ".
حسن: رواه الحاكم (4/ 145) وعنه البيهقي في شعب الإيمان (5199) من طريق نعيم بن حماد، ثنا عبد العزيز بن محمد الدراوردي، عن عمرو بن أبي عمرو، عن عكرمة، عن ابن عباس قال .. فذكره.
وإسناده حسن من أجل الخلاف في نعيم بن حماد وهو حسن الحديث ما لم يخالف، وكذا شيخه الدراوردي فإنه صدوق.
وقال الحاكم:"صحيح الإسناد".
وأما ما روي عن عثمان بن عفان قال: سمعت النبي صلى الله عليه وسلم يقول:"اجتنبوا أم الخبائث؛ فإنه كان رجل ممن قبلكم يتعبد، ويعتزل الناس، فعلقته امرأة، فأرسلت إليه خادما فقالت: إنا ندعوك الشهادة، فدخل، فطفقت كلما بدخل بابا أغلقته دونه، حتى أفضى إلى امرأة وضيئة جالسة، وعندها غلامٌ وباطيةٌ فيها خمر، فقالت: إنا لم ندعك لشهادة، ولكن دعوتك لتقتل هذا الغلام، أو
تقع عليَّ، أو تشرب كأسا من هذا الخمر، فإن أبيت صحتُ بكَ وفضحتُكَ قال: فلما رأى أنه لا بد له من ذلك قال: اسقيني كأسا من هذا الخمر، فسقته كأسا من الخمر فقال: زيديني، فلم يزل حتى وقع عليها، وقتل النفس، فاجتبوا الخمر فإنه والله لا يجتمع الإيمان وإدمان الخمر في صدر رجل أبدا، ليوشكن أحدهما يخرج صاحبه". فهو ضعيف.
رواه ابن حبان (5348)، وابن أبي الدنيا في ذم المسكر (1) - ومن طريقه الضياء المقدسي في المختارة (371) - من طريق محمد بن عبد الله بن بزيع، ثنا فضيل بن سليمان النميري، ثنا عمر بن سعيد، عن الزهري، أخبرني أبو بكر بن عبد الرحمن بن الحارث بن هشام، عن أبيه عبد الرحمن بن الحارث قال: سمعت عثمان بن عفان خطيبا فقال فذكره.
وعمر بن سعيد وإن كان ثقة إلا أنه غير مستقيم في حديثه عن الزهري كما قال ابن عدي في الكامل، وكذلك ضعفه أيضا الدارقطني. انظر: اللسان (4/ 309).
ومع ضعفه في الزهري، قد خالفه جمعٌ من الثقات عن الزهري فرووه عنه موقوفا على عثمان بن عفان كما ذكره الدارقطني في العلل (3/ 41)، وهذا الموقوف رواه النسائي (5666، 5667).
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা মদ পরিহার করো, কারণ এটি সকল অনিষ্টের চাবিকাঠি।"
আর উসমান ইবনু আফফান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত হয়েছে, তিনি বলেন, আমি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "তোমরা সকল নোংরামির জননী (অর্থাৎ, মদ) পরিহার করো। কারণ তোমাদের পূর্ববর্তীদের মধ্যে একজন লোক ছিল, যে ইবাদত করত এবং মানুষের কাছ থেকে দূরে থাকত। তাকে এক নারী মোহগ্রস্ত করল। সে তার কাছে একজন সেবককে পাঠাল এবং বলল: আমরা তোমাকে সাক্ষ্য দেওয়ার জন্য ডাকছি। অতঃপর সে প্রবেশ করল। সে যখনই কোনো দরজা দিয়ে প্রবেশ করতে লাগল, মহিলাটি তার পেছনে তা বন্ধ করতে লাগল। অবশেষে সে এক সুন্দরী মহিলার কাছে পৌঁছল, যে বসে ছিল। তার কাছে একটি ছেলে এবং মদের পাত্র ছিল। মহিলাটি বলল: আমরা তোমাকে সাক্ষ্য দেওয়ার জন্য ডাকিনি, বরং তোমাকে ডেকেছি হয় এই ছেলেটিকে হত্যা করার জন্য, অথবা আমার সাথে ব্যভিচার করার জন্য, অথবা এই মদ থেকে এক পেয়ালা পান করার জন্য। তুমি যদি অস্বীকার করো, তবে আমি চিৎকার করে তোমাকে লাঞ্ছিত করব। রাবী বলেন: যখন সে দেখল যে এর থেকে তার কোনো নিস্তার নেই, তখন সে বলল: আমাকে এই মদের এক পেয়ালা পান করাও। তখন সে তাকে এক পেয়ালা মদ পান করাল। সে বলল: আমাকে আরও দাও। এরপর সে তার সাথে ব্যভিচার করল এবং ছেলেটিকেও হত্যা করল। অতএব তোমরা মদ পরিহার করো। কেননা আল্লাহর কসম! ঈমান এবং মদের প্রতি আসক্তি কোনো ব্যক্তির হৃদয়ে কখনোই একত্রে থাকতে পারে না। শীঘ্রই তাদের একজন তার সঙ্গীকে বের করে দেবে।"
7310 - عن أبي عامر - أو أبي مالك - أنه سمع النبي صلى الله عليه وسلم يقول:"ليكونن من أمتي أقوام يستحلون الحر والحرير والخمر والمعازف، ولينزلن أقوام على جنب علم يروح عليهم بسارحة لهم، يأتيهم - يعني الفقير - لحاجة فيقولوا: ارجع إلينا غدًا فيبيّتهم الله، ويضع العلم، ويمسخ آخرين قردة وخنازير إلى يوم القيامة".
صحيح: رواه البخاري في الأشربة (5590) قال: وقال هشام بن عمار، حدثنا صدقة بن خالد، حدثنا عبد الرحمن بن يزيد بن جابر، حدثنا عطية بن قيس الكلأبي، حدثنا عبد الرحمن بن غنم الأشعري قال: حدثني أبو عامر - أو أبو مالك الأشعري والله ما كذبني سمع النبي صلى الله عليه وسلم يقول فذكره.
هكذا رواه البخاري بقوله: قال: وهشام بن عمار من شيوخ البخاري، وقد احتج به البخاري في غير ما حديث كما بيّنه الحافظ ابن حجر في ترجمته في مقدمة الفتح، ولذا قال غير واحد من أهل العلم أن قول البخاري:"قال" يُحمل على"حدثني" أو"أخبرني" أو"عن" يعني به الاتصال. وهو الذي رجّحه ابن الصلاح.
ورواه ابن حبان (6754) عن الحسين بن عبد الله القطان، قال: حدثنا هشام بن عمار بإسناده.
আবূ মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছেন: "অবশ্যই আমার উম্মতের মধ্যে এমন কিছু লোক আসবে যারা অবৈধ যৌনতা, রেশম, মদ এবং বাদ্যযন্ত্রকে হালাল মনে করবে। আর অবশ্যই কিছু লোক একটি পর্বতের পাদদেশে অবস্থান করবে, তাদের চারণকারী পশু নিয়ে তারা সকালে যাবে এবং সন্ধ্যায় ফিরবে। তাদের কাছে কোনো অভাবী লোক প্রয়োজনে এলে তারা বলবে, 'আগামীকাল আমাদের কাছে ফিরে এসো।' তখন আল্লাহ তাদের রাতারাতি ধ্বংস করে দেবেন, পর্বতটি তাদের উপর চাপিয়ে দেবেন এবং অন্য কিছু লোককে কিয়ামত পর্যন্ত বানর ও শূকরে রূপান্তরিত করবেন।"
7311 - عن رجل من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"يشرب ناسٌ من أمتي الخمر يسمونها بغير اسمها".
صحيح: رواه النسائي (5158)، وأحمد (18073) من طريق شعبة، عن أبي بكر بن حفص،
قال: سمعت ابن محيريز يحدث عن رجل من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم فذكره. وإسناده صحيح، وابن محيريز هو: عبد الله بن محيريز بن جنادة.
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর একজন সাহাবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন: "আমার উম্মতের কিছু লোক মদ পান করবে, তারা এটিকে অন্য নামে আখ্যায়িত করবে।"
7312 - عن عائشة قالت: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"إن أول ما يُكفأ - يعني في الإسلام - كما يكفأ الإناء يعني الخمر، فقيل: كيف يا رسول الله وقد بيّن الله فيها ما بيّن؟ قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: يسمونها بغير اسمها فيستحلونها".
حسن: رواه الدارمي (2145) عن زيد بن يحيى، ثنا محمد بن راشد، عن أبي وهب الكلاعي، عن القاسم بن محمد، عن عائشة فذكرته.
وإسناده حسن من أجل أبي وهب الكلاعي واسمه: عبيد الله بن عبيد، فإنه حسن الحديث.
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "নিশ্চয়ই প্রথম জিনিস যা (ইসলামে) উপুড় করে ফেলা হবে—যেমন পাত্র উপুড় করে ফেলা হয়—তা হলো মদ।" তখন জিজ্ঞাসা করা হলো: হে আল্লাহর রাসূল, এটি কীভাবে হবে? অথচ আল্লাহ তো এ বিষয়ে যা বলার তা স্পষ্টভাবে বলে দিয়েছেন? রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তারা এটিকে অন্য নামে ডাকবে এবং (এভাবে) এটিকে বৈধ মনে করবে।"
7313 - عن ابن عباس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"إن أمتي يشربون الخمر في آخر الزمان يسمونها بغير اسمها".
حسن: رواه الطبراني في الكبير (11/ 118) عن الحسن بن العباس الرازي، ثنا إسماعيل بن توبة القزويني، ثنا عفان بن سيار، ثنا أبو عامر الخزّاز، عن ابن أبي مليكة، عن ابن عباس قال فذكره.
وإسناده حسن من أجل أبي عامر الخزّاز واسمه صالح بن رُستم فإنه مختلف فيه، غير أنه حسن الحديث، وقد قال ابن عدي:"عزيز الحديث، ولعل جميع ما أسنده خمسون حديثا، وقد روي عنه يحيى القطان مع شدة استقصائه. وهو عندي لا بأس به، ولم أر له حديثا منكرًا جدًّا.
وفي الباب عن عبادة بن الصامت قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: يشرب ناس من أمتي الخمر باسم يسمونها إياه".
رواه ابن ماجه (3385)، وأحمد (22709) من طريق سعد بن أوس الكاتب، عن بلال بن يحيى العبسي، عن أبي بكر بن حفص، عن ابن محيريز، عن ثابت بن السمط، عن عبادة بن الصامت .. فذكره.
وفي إسناده ثابت بن السمط مجهول تفرد عنه ابن محيريز، ولم يوثقه سوي ابن حبان، وأما قول الحافظ فيه:"صدوق" ففيه نظر، بل الأولى أن يكون على مذهبه"مقبولا" يعني حيث يتابع وهو لم يتابع على هذا الإسناد، وإن كان للحديث شواهد صحيحة. وبقية رجاله ثقات.
وفي الباب أيضا ما رواه أبو داود (3688)، وابن ماجه (4020)، وأحمد (22900)، وصحّحه ابن حبان (6758) كلهم من طريق معاوية بن صالح، حدثني حاتم بن حريث، عن مالك ابن أبي مريم قال: دخل علينا عبد الرحمن بن غنم، فتذاكرنا الطلاء فقال: حدثني أبو مالك الأشعري أنه سمع رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"ليشربنّ ناسٌ من أمتي الخمر يسمونها بغير اسمها".
واللفظ لأبي داود، وعند أحمد في أوله قصة، وزاد ابن ماجه وابن حبان:"يعزف على رؤوسهم بالمعازف والمغنيات، يخسف الله بهم الأرض، ويجعل منهم القردة والخنازير".
وفي إسناده مالك بن أبي مريم لم يوثقه غير ابن حبان، وهو معروف بتساهله في توثيق المجاهيل؛ لذا ذكره الذهبي في الميزان، وقال: لا يعرف، وقال ابن حجر في التهذيب"لا يدري من هو؟ وقال في التقريب:"مقبول" يعني حيث يتابع وإلا فلين الحديث، ولم أجد من تابعه عليه.
وبمعناه ما روي عن أبي أمامة الباهلي قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"لا تذهب الليالي والأيام حتى تشرب فيها طائفةٌ من أمتي الخمر يسمونها بغير اسمها.
رواه ابن ماجه (3384) عن العباس بن الوليد الدمشقي، ثنا عبد السلام بن عبد القدوس، ثنا ثور بن يزيد، عن خالد بن معدان، عن أبي أمامة الباهلي .. فذكره.
وفي إسناده عبد السلام بن عبد القدوس هو الكلاعي الدمشقي، ضعفه أبو حاتم وابن حبان وغيرهما. وفي الباب ما رواه الحاكم (4/ 174)، والبيهقي (8/ 194) كلاهما من طريق سعيد بن أبي هلال، عن محمد بن عبد الله أن أبا مسلم الخولاني حجّ فدخل على عائشة زوج النبي صلى الله عليه وسلم فجعلت تسأله عن الشام وعن بردها، فجعل يخبرها فقالت: كيف يصبرون على بردها؟ قال يا أم المؤمنين إنهم يشربون شرابا لهم يقال: له الطلاء، قالت: صدق الله وبلّغ حبي صلى الله عليه وسلم سمعته يقول:"إن ناسا من أمتي يشربون الخمر يسمونها بغير اسمها".
ورواه أبو يعلى (4390) من هذا الوجه بمثله وزاد قصة دخول النساء الحمامات. وصحّحه الحاكم على شرط الشيخين، فتعقبه الذهبي بقوله:"كذا قال:"محمد" فمحمد مجهول، وإن كان ابن أخي الزهري فالسند منقطع".
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: 'আমার উম্মত শেষ যুগে মদ্যপান করবে এবং তারা সেটির নাম বদলে অন্য নামে ডাকবে।'
7314 - عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"الخمر من هاتين الشجرتين: النخلة، والعنبة".
صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1985: 13) عن زهير بن حرب، ثنا إسماعيل بن إبراهيم، أخبرنا الحجاج بن أبي عثمان، حدثني يحيى بن أبي كثير، أن أبا كثير حدثه، عن أبي هريرة .. فذكره.
قال البيهقي: إنما خرج هذا مخرج التأكيد لا تخصيص كما يقال: الشبع من اللحم، والدفء من الوبر، وليس فيه نفي الشبع من غير اللحم، ولا نفي الدفء من غير الوبر، وقد ذكر النبي صلى الله عليه وسلم تحريم سائر الأشربة المسكرة في أخبار صحيحة. انظر: المنة الكبرى (7/ 348).
وقوله:"النخلة والعنبة"، فيه حجة لأهل الكوفة بأن الخمر من هاتين الشجرتين وتحليل ما سواهما ما لم يقع الإسكار.
وذهب جمهور أهل العلم إلى تحريم كل ما يسمى خمرا، سواء في ذلك الفضيخ وهو البسر، ونبيذ التمر، والرطب، والزبيب، والشعير، والذرة، والعسل، وغيرها كما سيأتي ذكر بعضها.
আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "খামর (মদ) এই দুটি গাছ থেকে হয়: খেজুর গাছ এবং আঙুর গাছ।"
7315 - عن أنس قال: كنت قائما على الحي أسقيهم - عمومتي وأنا أصغرهم الفضيخَ، فقيل: حرمت الخمر، فقالوا: أكفئْها فكفأتُها، قلت لأنس: ما شرابهم؟ قال: رُطب وبُسر.
فقال أبو بكر بن أنس: وكانت خمرهم، فلم ينكر أنس.
وحدثني بعض أصحابي: أنه سمع أنس بن مالك يقول: كانت خمرهم يومئذ".
متفق عليه: رواه البخاري في الأشربة (5583)، ومسلم في الأشربة (1980: 6) كلاهما من طريق المعتمر بن سليمان، عن أبيه، قال: سمعت أنسا قال .. فذكره.
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি গোত্রের লোকদের—আমার চাচাদের—ফাদীখ (নামক পানীয়) পান করাচ্ছিলাম, আর আমি ছিলাম তাদের মধ্যে সবচেয়ে ছোট। তখন বলা হলো: মদ হারাম করা হয়েছে। তারা (চাচারা) বললেন: এটি উপুড় করে দাও! ফলে আমি তা উপুড় করে দিলাম। (বর্ণনাকারী বলেন,) আমি আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞেস করলাম: তাদের পানীয় কী ছিল? তিনি বললেন: তাজা পাকা ও কাঁচা খেজুর। এরপর আবূ বকর ইবনু আনাস বললেন: আর এটিই ছিল তাদের মদ, কিন্তু আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তা অস্বীকার করেননি। আর আমার কিছু সঙ্গী আমার কাছে বর্ণনা করেছেন যে, তারা আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে বলতে শুনেছেন: ঐ দিন সেটিই ছিল তাদের মদ।
7316 - عن أنس قال: حرمت علينا الخمر حين حرمت، وما نجد - يعني بالمدينة - خمر الأعناب إلا قليلا، وعامة خمرنا البسر والتمر.
متفق عليه: رواه البخاري في الأشربة (5580) من طريق يونس، عن ثابت البناني، عن أنس .. فذكره.
ورواه مسلم في الأشربة (1980: 3) من طريق حماد بن زيد، أخبرنا ثابت به، وفيه قصة تحريم الخمر، لكن جاء بلفظ:"وما شرابهم إلا الفضيخ: البسر والتمر"، ولم يذكر العنب.
وفي مسند أبي يعلى (4157) من وجه آخر بسند صحيح عن أنس في قصة تحريم الخمر وقال في آخره:"وشرابهم يومئذ البسر والتمر".
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন আমাদের উপর মদ (খমর) হারাম করা হয়েছিল, তখন আমরা—অর্থাৎ মদীনায়—আঙ্গুরের মদ খুব কমই পেতাম। আর আমাদের অধিকাংশ মদ তৈরি হতো কাঁচা খেজুর (বুসর) ও (পাকা) খেজুর দিয়ে।
7317 - عن أنس بن مالك قال: لقد أنزل الله الآية التي حرم الله فيها الخمر، وما بالمدينة شراب يشرب إلا من تمر.
صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1982) عن محمد بن المثنى، ثنا أبو بكر الحنفي، ثنا عبد الحميد بن جعفر، حدثني أبي أنه سمع أنس بن مالك يقول .. فذكره.
আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আল্লাহ যখন সেই আয়াত নাযিল করলেন যাতে আল্লাহ মদকে হারাম করেছেন, তখন মদীনায় খেজুরের তৈরি পানীয় ছাড়া আর কোনো পানীয় পান করা হতো না।
7318 - عن ابن عمر قال: لقد حُرّمت الخمر وما بالمدينة منها شيء.
صحيح: رواه البخاري في الأشربة (5579) عن الحسن بن صباح، حدثنا محمد بن سابق، حدثنا مالك بن مغول، عن نافع، عن ابن عمر .. فذكره.
وقوله:"وما بالمدينة منها شيء" يعني العنب.
ورواه أيضا (4616) من وجه آخر عن عبد العزيز بن عمر بن عبد العزيز، قال: حدثني نافع، عن ابن عمر قال:"نزل تحريم الخمر، وإن في المدينة يومئذ لخمسة أشربة، ما فيها شراب العنب".
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন মদ হারাম হওয়ার নির্দেশ নাযিল হয়, তখন মদীনায় পাঁচ ধরনের পানীয় প্রচলিত ছিল, যার মধ্যে আঙ্গুরের কোনো শরবত ছিল না।
7319 - عن ابن عمر قال: خطب عمر على منبر رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال: إنه قد نزل تحريم الخمر، وهي من خمسة أشياء، العنب، والتمر، والحنطة، والشعير، والعسل، والخمر ما خامر العقل.
وثلاثٌ وددتُ أن رسول الله صلى الله عليه وسلم لم يفارقنا حتى يعهد إلينا عهدا: الجدُّ، والكلالةُ، وأبواب من أبواب الربا.
قال: قلتُ: يا أبا عمرو، فشيء يُصنع بالسّند من الأرز؟ قال: ذاك لم يكن على عهد النبي صلى الله عليه وسلم، أو قال: على عهد عمر.
وفي رواية:"الزبيب" مكان"العنب".
متفق عليه: رواه البخاري في الأشربة (5588)، ومسلم في التفسير (3032: 32) كلاهما من طريق أبي حيان التيمي، عن الشعبي، عن ابن عمر قال فذكره. والرواية الأخرى لهما أيضا.
ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর মিম্বরের উপর দাঁড়িয়ে খুতবা দিলেন এবং বললেন: নিশ্চয়ই মদের নিষেধাজ্ঞা (আয়াত) অবতীর্ণ হয়েছে। আর মদ আসে পাঁচটি বস্তু থেকে: আঙুর, খেজুর, গম, যব এবং মধু। মদ হলো তাই যা বুদ্ধিকে আচ্ছন্ন করে দেয় (বা ঢেকে ফেলে)। আর তিনটি বিষয় রয়েছে, যা সম্পর্কে আমি কামনা করেছিলাম যে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যেন আমাদের থেকে বিচ্ছিন্ন না হন যতক্ষণ না তিনি এ বিষয়ে আমাদের জন্য চূড়ান্ত বিধান দিয়ে যান: দাদা (দাদার উত্তরাধিকার), কালালাহ (পিতৃহীন ও সন্তানহীন মৃত ব্যক্তির উত্তরাধিকার), এবং সুদের কিছু অংশ (বা কিছু মাসআলা)। (বর্ণনাকারী) বলেন, আমি জিজ্ঞাসা করলাম: হে আবূ আমর, চাল থেকে সিন্ধুদেশে যা প্রস্তুত করা হয় (তা কি মদের অন্তর্ভুক্ত)? তিনি বললেন: তা নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে ছিল না, অথবা তিনি বললেন: উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর যুগেও ছিল না। অন্য বর্ণনায় ‘আঙুর’-এর স্থলে ‘কিশমিশ’ উল্লেখ আছে।
7320 - عن النعمان بن بشير قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن من العنب خمرًا، وإن من التمر خمرًا، وإن من العسل خمرًا، وإن من البر خمرًا، وإن من الشعير خمرًا".
حسن: رواه أبو داود (3676)، والترمذي (1872، 1873)، وأحمد (18350) كلهم من طرق عن إسرائيل، عن إبراهيم بن المهاجر، عن عامر الشعبي، عن النعمان بن بشير قال: فذكره.
وفيه إبراهيم بن مهاجر بن جابر البجلي مختلف فيه غير أنه حسن الحديث وقد توبع أيضا.
فرواه أبو داود (3677)، وابن حبان (5398) كلاهما من طريق أبي حريز، أن عامرًا حدثه أن النعمان بن بشير خطب الناس بالكوفة فقال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"إن الخمر من العصير، والزبيب، والتمر، والحنطة، والذرة، وإني أنهاكم عن كل مسكر".
وأبو حريز اسمه عبد الله بن الحسين الأزدي أيضا مختلف فيه، وتابعهما أيضا السري بن إسماعيل الهمداني ابن عم الشعبي روى حديثه ابن ماجه (3379)، وأحمد (18407) والحاكم (4/ 148)، ولكن السري متروك.
ولذلك لما صحّحه الحاكم تعقبه الذهبي بقوله:"السري تركوه".
والحاصل أن الحديث بمجموع هذه الطرق يكون حسنا.
ويُجمع بين حديث عمر بن الخطاب الموقوف عليه، وبين حديث النعمان بن بشير بأن الشعبي سمع هكذا عن عمر، كما سمع عن النعمان بن بشير، فروي على الوجهين، ولا يحتاج إلى تخطئة أحد الحديثين.
وأما معنى الحديث فإن الخمر لا يكون إلا من هذه الأشياء الخمسة بأعيانها فقط، وإنما جرى ذكرها خصوصا لكونها معهودة في ذلك الزمان، فكل ما كان في معناه من ذرة، وسلت، وثمرة، وعصارة فحكمه حكمها، أفاده الخطابي.
নু'মান ইবনু বাশীর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “নিশ্চয় আঙ্গুর থেকেও মদ হয়, আর নিশ্চয় খেজুর থেকেও মদ হয়, আর নিশ্চয় মধু থেকেও মদ হয়, আর নিশ্চয় গম থেকেও মদ হয়, আর নিশ্চয় যব থেকেও মদ হয়।”