হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (7408)


7408 - عن ابن عباس: أن وفد عبد القيس قالوا: يا رسول الله، فيم نشرب؟ قال:"لا تشربوا في الدباء ولا في المزفت ولا في النقير وانتبذوا في الأسقية". قالوا: يا رسول الله، فإن اشتد في الأسقية؟ قال:"فصبوا عليه الماء". قالوا: يا رسول الله، فقال لهم في الثالثة أو الرابعة:"أهريقوه". ثم قال: إن الله حرم - علي أو - حرم - الخمر والميسر والكوبة". قال:"وكل مسكر حرام".

قال سفيان: فسألتُ عليَّ بن بذيمة عن الكوبة، قال: الطبل.

صحيح: رواه أبو داود (3696)، وأحمد (2476)، وصححه ابن حبان (5365) كلهم من طريق أبي أحمد الزبيري، ثنا سفيان (هو الثوري)، عن علي بن بذيمة، ثني قيس بن حَبتر النهشلي، عن ابن عباس قال: فذكره. وإسناده صحيح.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আব্দুল কায়েস গোত্রের প্রতিনিধিদল বললো: ইয়া রাসূলাল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আমরা কী পাত্রে পান করব? তিনি বললেন: তোমরা দুব্বা (শুকনো লাউয়ের খোল), মুজাফফাত (আলকাতরা মাখানো পাত্র) এবং নাকীর (কাঠ খোদাই করা পাত্র)-এ পান করো না। বরং চামড়ার মশক বা পাত্রে নবীন তৈরি করো। তারা বললো: ইয়া রাসূলাল্লাহ! যদি মশক বা চামড়ার পাত্রেই তীব্রতা সৃষ্টি হয় (তাতে মাদকতা আসে)? তিনি বললেন: তবে তাতে পানি ঢেলে দাও। তারা বললো: ইয়া রাসূলাল্লাহ! (তখন) তিনি তৃতীয়বার বা চতুর্থবার তাদেরকে বললেন: তোমরা তা ফেলে দাও। অতঃপর তিনি বললেন: আল্লাহ তা'আলা আমার উপর হারাম করেছেন— অথবা বললেন— হারাম করেছেন মদ, জুয়া এবং কূবা। তিনি বললেন: আর সকল প্রকার নেশাজাতীয় জিনিসই হারাম। সুফিয়ান (রাবী) বলেন: আমি আলী ইবনে বাযীমাকে ‘কূবা’ সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করলে তিনি বললেন: এর অর্থ ঢোল বা তবলা।









আল-জামি` আল-কামিল (7409)


7409 - عن رجل من وفد عبد القيس، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"لا تشربوا في نقير ولا مزفت ولا دباء، ولا حنتم، واشربوا في الجلد الموكأ عليه، فإن اشتد فاكسروه بالماء، فإن أعياكم فأهريقوه".

حسن: رواه أبو داود (3695)، والبيهقي (8/ 302) كلاهما من طريق عوف بن أبي جميلة، عن أبي القموص زيد بن علي، قال: حدثني رجل كان من الوفد الذين وفدوا على رسول الله صلى الله عليه وسلم من عبد القيس يحسب عوف أن اسمه قيس بن النعمان قال فذكره.

وإسناده حسن من أجل أبي القموص فقد روى عنه جماعة، ووثقه العجلي، وذكره ابن حبان في الثقات إلا أن قوله:"فإن اشتد فاكسروه بالماء" شاذ فإنه تفرد، به ولذا قال البيهقي عقب الحديث:"الروايات الثابتة في قصة وفد عبد القيس خالية عن هذه اللفظة" يعني قوله:"فإن اشتد فاكسروه بالماء".




কায়েস ইবনু নু'মান (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: তোমরা নাকীর, মুজাফফাত, দুব্বা কিংবা হানতাম পাত্রে পান করবে না। বরং তোমরা মুখ বাঁধা চামড়ার পাত্রে পান করো। যদি তা (পানীয়) তীব্র হয়ে যায়, তবে পানি মিশিয়ে তার তীব্রতা কমিয়ে দাও। আর যদি তা তোমাদেরকে কাবু করে ফেলে (বা সামলানো কঠিন হয়), তবে তা ঢেলে দাও।









আল-জামি` আল-কামিল (7410)


7410 - عن المطلب بن أبي وداعة: أن رسول الله صلى الله عليه وسلم أُتي بإناء نبيذ فصب عليه الماء حتى تدفق ثم شرب منه.

حسن: رواه الطبراني في الكبير (20/ 291) عن العباس بن الفضل الأسفاطي، ثنا أحمد بن
يونس، ثنا أبو شهاب، عن الأعمش، عن أبي صالح، عن المطلب بن أبي وداعة قال .. فذكره.

وإسناده حسن من أجل أبي شهاب واسمه عبد ربه بن نافع الحناط فإنه حسن الحديث. وأبو صالح هو ذكوان السمان.

وعزاه الهيثمي للطبراني وقال:"رواه الطبراني عن شيخه العباس بن الفضل الأسفاطي ولم أعرفه، وبقية رجاله رجال الصحيح".

كذا قال! وقد قال فيه الدارقطني:"صدوق" سؤالات الحاكم (134).




মুত্তালিব ইবনে আবি ওয়াদা'আ থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এক পাত্র নাবিজ (খেজুরের পানীয়) আনা হলো। তিনি তাতে পানি ঢাললেন, ফলে তা উপচে পড়ার মতো হলো। এরপর তিনি তা থেকে পান করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7411)


7411 - عن أبي هريرة، عن رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قال لوفد عبد القيس:"لا تشربوا في نقير، ولا مقير، ولا دباء، ولا حنتم، ولا مزادة، ولكن اشربوا في سقاء أحدكم غير مسكر، فإن خشي شرته فليصب عليه الماء".

حسن: رواه البيهقي (8/ 302) من طريق أبي الأشعث أحمد بن المقدام، ثنا نوح بن قيس، عن ابن عون، عن محمد بن سيرين، عن أبي هريرة قال .. فذكره.

وإسناده حسن من أجل نوح بن قيس الأزدي أبي روح البصري فإنه حسن الحديث، وابن عون هو: عبد الله.

وهذه الأحاديث محمولة على ما قبل أن يبلغ إلى حد الإسكار فيضاف إليه الماء ويستفاد منه، لكن إذا وصل حد الإسكار، وصار خمرا، فوجب إراقته وعدم الاحتفاظ به؛ لذلك قال:"فإن أعياكم" أي فصار مسكرا"فأهريقوه".

وأما ما روي عن عبد الملك بن نافع قال: قال ابن عمر:"رأيت رجلا جاء إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم بقدح، فيه نبيذ، وهو عند الركن، ودفع إليه القدح، فرفعه إلى فيه فوجده شديدا، فرده على صاحبه، فقال له رجل من القوم: يا رسول الله أحرام هو؟ فقال:"علي بالرجل"، فأتى به، فأخذ منه القدح، ثم دعا بماء، فصبه فيه، فرفعه إلى فيه، فقطّب، ثم دعا بماء أيضًا فصبه فيه، ثم قال:"إذا اغتلمت عليكم هذه الأوعية، فاكسروا متونها بالماء". فهو ضعيف منكر.

رواه النسائي (5694، 5695)، والبيهقي (8/ 305) من طرق عن عبد الملك بن نافع به فذكره.

قال النسائي: عبد الملك بن نافع ليس بالمشهور، ولا يحتج بحديثه، والمشهور عن ابن عمر خلاف حكايته". وبه أعله أيضا البيهقي.

وعبد الملك المذكور ضعفه غير واحد وتكلموا فيه من أجل هذا الحديث، فقال ابن أبي مريم: قلت لابن معين: أرأيت حديث عبد الملك بن نافع الذي يرويه إسماعيل بن أبي خالد في النبيذ؟ قال:"هم يضعفونه". وقال مرة:"ضعيف لا شيء". وقال البخاري:"عبد الملك بن نافع روي عن ابن عمر في النبيذ لا يتابع عليه"، وكذا ترجمه العقيلي في الضعفاء وساق له هذا الحديث وقال:"ولا يتابعه إلا من هو دونه أو مثله".
وقال أبو حاتم: شيخ مجهول، لم يرو إلا حديثا واحدا، قطع الشيباني ذلك الحديث حديثين، لا يثبت حديثه، منكر الحديث".

وقوله:"قطَّب" جمع بين عينيه كما يفعله العبوس. أي عبس وجهه وجمع جلدته لما وجد مكروها.

وقوله:"إذا اغتلمت" أي إذا اشتدت واضطربت عند الغلَيان.

وكذلك لا يصح ما روي عن أبي مسعود عقبة بن عمرو قال: عطش النبي صلى الله عليه وسلم حول الكعبة، فاستسقى فأتي بنبيذ من السقاية، فشقه فقطب، فقال:"عليّ بذنوب من زمزم" فصبَّ عليه، ثم شرب، فقال رجل: أحرام يا رسول الله هو؟ قال:"لا".

رواه النسائي (5703)، والدارقطني (4695)، والبيهقي (8/ 304) كلهم من طريق يحيى بن يمان، عن سفيان (هو الثوري)، عن منصور، عن خالد بن سعد، عن أبي مسعود قال .. فذكره.

قال النسائي:"وهذا خبر ضعيف؛ لأن يحيى بن يمان انفرد به دون أصحاب سفيان، ويحيى بن يمان لا يحتج بحديثه لسوء حفظه وكثرة خطئه".

وقال الدارقطني: وهذا حديث معروف بيحيى بن يمان، ويقال: إنه انقلب عليه الإسناد، واختلط عليه بحديث الكلبي عن أبي صالح". ا.

وبذلك أعله أيضًا أبو حاتم وأبو زرعة الرازيان فقالا:"أخطأ ابن يمان في إسناد هذا الحديث، وروي هذا الحديث عن الثوري، عن الكلي، عن أبي صالح، عن المطلب بن أبي وداعة، عن النبي صلى الله عليه وسلم. انظر: العلل لابن أبي حاتم (1552).

وبنحو ذلك أعله أيضًا البخاري، وعبد الله بن نمير فيما نقله عنهما ابن عدي في الكامل (3/ 28 - 29).




আবূ হুরাইরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আব্দুল কায়স গোত্রের প্রতিনিধি দলকে বললেন: তোমরা 'নাকীর', 'মুকাইয়ার', 'দুব্বা', 'হানতাম' এবং 'মুযাদা' (বিশেষ পাত্রসমূহে) পান করো না, বরং তোমাদের কারো মশকে পান করো, যা নেশাযুক্ত নয়। যদি কেউ এর তীব্রতা/নেশা হওয়া নিয়ে আশঙ্কা করে, তবে সে যেন তাতে পানি মিশিয়ে নেয়।









আল-জামি` আল-কামিল (7412)


7412 - عن جابر بن عبد الله قال: نهى النبي صلى الله عليه وسلم عن الزبيب، والتمر، والبسر، والرطب.

وفي رواية: نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عن التمر والزبيب، ونهي عن التمر والبُسر أن يُنبذا جميعا.

متفق عليه: رواه البخاري في الأشربة (5601)، ومسلم في الأشربة (1986: 18) كلاهما من طريق ابن جريج، أخبرني عطاء، أنه سمع جابرا يقول .. فذكره.

والرواية الأخرى للنسائي (5560) من طريق عمرو بن دينار، عن جابر بإسناد صحيح.




জাবির ইবনে আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম কিশমিশ, শুকনো খেজুর, কাঁচা খেজুর (বুসর) এবং তাজা খেজুর (রুতাব) [একত্রে ব্যবহার করতে] নিষেধ করেছেন।

অপর এক বর্ণনায় এসেছে: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম শুকনো খেজুর ও কিশমিশ একত্রে [পানীয় তৈরি করতে] নিষেধ করেছেন, এবং তিনি শুকনো খেজুর ও কাঁচা খেজুর (বুসর) একত্রে ভিজিয়ে রাখতে (নাবিজ তৈরি করতে) নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7413)


7413 - عن أبي قتادة قال: نهى النبي صلى الله عليه وسلم أن يُجمع بين التمر والزهو، والتمر والزبيب، ولينبذ كل واحد منهما على حدة.

وفي لفظ:"لا تنتبذوا الزهو والرطب جميعا، ولا تنتبذوا الرطب والزبيب جميعا، ولكن انتبذوا كل
واحد على حدته".

متفق عليه: رواه البخاري في الأشربة (5602)، ومسلم في الأشربة (1988: 24) كلاهما من طريق هشام الدستوائي، أخبرنا يحيى بن أبي كثير، عن عبد الله بن أبي قتادة، عن أبيه قال .. فذكره.

واللفظ للبخاري، واللفظ الآخر لمسلم من رواية علي بن المبارك، عن يحيى (هو ابن كثير)، عن أبي سلمة، عن أبي قتادة.

ورواه النسائي (5567)، من طريق أبي إسماعيل، ثنا يحيى به وزاد:"في الأسقية التي يُلاث على أفواهها".

وهذه الزيادة تفرد بها في هذا الحديث أبو إسماعيل واسمه إبراهيم بن عبد الملك البصري القناد، وقد تكلم في حفظه، فذكره العقيلي في الضعفاء (1/ 57) وقال:"يهم في الحديث".

وذكره ابن حبان في الثقات وقال: يخطئ. ولذلك قال الحافظ:"صدوق في حفظه شيء".

فمثله لا يقبل تفرده بالزيادة، ولا سيما وقد رواه هشام الدستوائي وغيره عن يحيى بن أبي كثير بدونها، وهو أثبت الناس في يحيى.

وقوله:"يلاث على أفواهها" بالمثلية أي يُشد ويربط. والمراد بالأسقية المتخذة من الجلد.




আবু কাতাদাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খেজুরের সঙ্গে কাঁচা খেজুর (আল-জাহু) এবং খেজুরের সঙ্গে কিশমিশ একত্রে মিশিয়ে (পানীয় তৈরি করতে) নিষেধ করেছেন। তিনি নির্দেশ দিয়েছেন যেন প্রতিটি জিনিস আলাদা আলাদাভাবে ভিজানো হয়।

অন্য এক বর্ণনায় আছে: “তোমরা কাঁচা খেজুর (আল-জাহু) ও পাকা খেজুর (রুতাব) একত্রে ভিজাবে না, আর পাকা খেজুর ও কিশমিশ একত্রে ভিজাবে না, বরং প্রতিটি জিনিস আলাদা আলাদাভাবে ভিজাও।”









আল-জামি` আল-কামিল (7414)


7414 - عن أنس بن مالك قال: إن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى أن يخلط التمرُ والزهوُ ثم يُشرب، وإن ذلك كان عامة خمورهم يوم حرمت الخمر.

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1981) عن أبي الطاهر أحمد بن عمرو بن سرح، أخبرنا عبد الله بن وهب، أخبرني عمرو بن الحارث، أن قتادة بن دعامة حدثه أنه سمع أنس بن مالك قال .. فذكره.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) পাকা খেজুর ও কাঁচা-পাকা খেজুর একত্রে মিশিয়ে পান করতে নিষেধ করেছেন। আর মদ হারাম হওয়ার দিন তাদের সাধারণ নেশাজাতীয় পানীয় এটাই ছিল।









আল-জামি` আল-কামিল (7415)


7415 - عن أبي هريرة قال: نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عن الزبيب والتمر، والبُسر والتمر" وقال:"يُنبذ كل واحد منهما على حدته".

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1989) من طريق وكيع، عن عكرمة بن عمار، عن أبي كثير الحنفي، عن أبي هريرة قال .. فذكره.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কিশমিশ ও খেজুর এবং কাঁচা খেজুর ও খেজুর (একসঙ্গে ভিজিয়ে) পান করতে নিষেধ করেছেন। তিনি আরও বলেছেন: এগুলোর প্রতিটিকে পৃথকভাবে ভিজিয়ে রাখা হবে।









আল-জামি` আল-কামিল (7416)


7416 - عن أبي سعيد: أن النبي صلى الله عليه وسلم نهى عن التمر والزبيب أن يخلط بينهما، وعن التمر والبُسر أن يخلط بينهما.

وفي رواية:"من شرب النبيذ منكم فليشربه زبيبا فردا، أو تمرا فردا، أو بُسرا فردًا".

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1987) عن يحيى بن يحيى، أخبرنا يزيد بن زريع، عن التيمي، عن أبي نضرة، عن أبي سعيد، قال .. فذكره.

والرواية الأخرى من طريق أبي المتوكل الناجي، عن أبي سعيد الخدري، به.




আবু সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খেজুর ও কিশমিশ একত্রে মিশিয়ে তৈরি করতে নিষেধ করেছেন এবং খেজুর ও কাঁচা খেজুর (বুসর) একত্রে মিশিয়ে তৈরি করতে নিষেধ করেছেন।

অন্য এক বর্ণনায় এসেছে: "তোমাদের মধ্যে যে কেউ নাবীয পান করবে, সে যেন হয় শুধু কিশমিশের নাবীয পান করে, অথবা শুধু খেজুরের নাবীয পান করে, অথবা শুধু কাঁচা খেজুরের (বুসর) নাবীয পান করে।"









আল-জামি` আল-কামিল (7417)


7417 - عن ابن عباس قال: نهى النبي صلى الله عليه وسلم أنُ يخلط التمر والزبيب جميعا، وأن يخلط البسر والتمر جميعا، وكتب إلى أهل جُرَش ينهاهم عن خليط التمر والزبيب.

صحيح: رواه مسلم (1990) عن أبي بكر بن أبي شيبة، حدّثنا علي بن مسهر، عن الشيباني عن حبيب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس قال .. فذكره.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খেজুর ও কিশমিশ একত্রে মিশ্রিত করতে নিষেধ করেছেন, এবং কাঁচা খেজুর (বুসর) ও পাকা খেজুর একত্রে মিশ্রিত করতেও নিষেধ করেছেন। আর তিনি জুরশবাসীদের নিকট চিঠি লিখে খেজুর ও কিশমিশের মিশ্রণ থেকে তাদেরকে নিষেধ করেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7418)


7418 - عن ابن عباس قال: نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عن الدباء والحنتم والمزفت والنقير، وأن يخلط البلحُ بالزهو.

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1995: 41) عن أبي بكر بن أبي شيبة، حدثنا محمد بن فضيل، عن حبيب بن أبي عمرة، عن سعيد بن جبير، عن ابن عباس قال .. فذكره.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দুব্বা, হানতাম, মুজাফ্ফাত ও নাকীর (নামক পাত্র) ব্যবহার করতে নিষেধ করেছেন। আর কাঁচা খেজুর (বালাহ) এর সাথে অর্ধ-পাকা খেজুর (যাহু) মিশিয়ে (নাবীয) তৈরি করতেও নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7419)


7419 - عن ابن عمر أنه كان يقول: قد نُهي أن يُنبذ البسرُ والرطب جميعا، والتمر والزبيب جميعا.

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1991: 28) عن محمد بن رافع، حدّثنا عبد الرزاق، أخبرنا ابن جريج، أخبرني موسى بن عقبة، عن نافع، عن ابن عمر قال .. فذكره.




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলতেন: কাঁচা খেজুর (বুসর) ও তাজা পাকা খেজুর (রুতাব) একত্রে ভিজিয়ে পানীয় (নাবীয) তৈরি করতে নিষেধ করা হয়েছে, এবং শুকনো খেজুর (তামার) ও কিসমিস (যাবীব) একত্রে ভিজিয়ে পানীয় তৈরি করতেও নিষেধ করা হয়েছে।









আল-জামি` আল-কামিল (7420)


7420 - عن رجل من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: نهى عن البلح والتمر، والزبيب والتمر.

صحيح: رواه أبو داود (3705)، والنسائي (5547)، وأحمد (18820) كلهم من طريق شعبة، ثنا الحكم، قال: سمعت ابن أبي ليلى، عن رجل من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم قال .. فذكره.

وإسناده صحيح. ابن أبي ليلى هو عبد الرحمن، والحكم هو: ابن عتيبة الكوفي.




নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর জনৈক সাহাবী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বাল্হ (কাঁচা খেজুর) ও তামার (পাকা খেজুর) এবং কিসমিস ও তামার (পাকা খেজুর) একত্রীকরণ থেকে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7421)


7421 - عن جابر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"الزبيب والتمر هو الخمر".

وزاد في رواية:"يعني إذا انتبذ جميعا".

صحيح: رواه النسائي (5546)، والحاكم (4/ 141) كلاهما من طريق عبيد الله بن موسى، عن شيبان، عن الأعمش، عن محارب بن دثار، عن جابر قال .. فذكره. والزيادة للحاكم، وقال:"صحيح على شرط الشيخين".

وهو كما قال. شيبان هو: ابن عبد الرحمن النحوي.

وصحّح إسناده أيضا الحافظ ابن حجر في الفتح (10/ 36)، ولا يضره من أوقفه؛ لأن الزيادة من الثقة الحافظ مقبولة كما هو مقرر في علوم الحديث.

فقد رواه النسائي (5544) من طريق شعبة، و (5545) من طريق الثوري، وابن أبي شيبة (7/ 549) عن عبد الرحمن بن سليمان - ثلاثتُهم عن محارب بن دثار، عن جابر موقوفا بلفظ:"البسر والتمر خمر" فيكون جابر رضي الله عنه أحيانا يرفعه، وأحيانا يفتي به من قوله.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কিশমিশ এবং খেজুর হলো নেশাদ্রব্য (বা মদ)।" (অন্য এক বর্ণনায় অতিরিক্ত বলা হয়েছে: "অর্থাৎ, যখন সেগুলিকে একসাথে ভিজিয়ে রাখা হয়।")









আল-জামি` আল-কামিল (7422)


7422 - عن أبي أُسيد الأنصاري قال: نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يُجمع بين التمر والزبيب.

صحيح: رواه الطبراني في الكبير (19/ 268) عن عبيد العجلي، ثنا محمد بن حاتم المؤدب، ثنا علي بن ثابت الجزري، ثنا عبد الحميد بن جعفر (هو الأنصاري)، حدثني يزيد بن أبي حبيب المصري، عن عراك بن مالك، عن أبي أُسيد الأنصاري قال .. فذكره.

وإسناده صحيح، وعبيد العجلي شيخ الطبراني اسمه الحسين بن محمد بن حاتم أحد الحفاظ المتقنين.

وعزاه الهيثمي (5/ 55) للطبراني وقال:"رجاله ثقات".

ورواه أبو يعلى - كما في المطالب العالية (1819) - عن محمد بن حاتم به بلفظ:"أن يجمع بين الرطب والزبيب".




আবু উসাইদ আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম খেজুর ও কিশমিশ একত্রে মিশাতে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7423)


7423 - عن معبد بن كعب بن مالك، عن أمه - وكانت قد صلّت القبلتين مع رسول الله صلى الله عليه وسلم قالت: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم ينهى أن ينتبذ التمر والزبيب جميعا، وقال:"انتبذ كل واحد منها وحده".

حسن: رواه أحمد (23932)، والحميدي (356)، والطبراني في الكبير (25/ 147) كلهم من طريق محمد بن إسحاق، أخبرنا معبد بن كعب به .. فذكره.

وإسناده حسن من أجل ابن إسحاق وإن كان مدلسا فقد صرَّح بالإخبار عند الحميدي.




মা'বাদ ইবনু কা'ব ইবনু মালিকের মা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত—যিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে দুই কিবলার দিকে মুখ করে সালাত আদায় করেছিলেন—তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে খেজুর ও কিশমিশ একত্রে ভিজিয়ে রাখতে (নবীয তৈরি করতে) নিষেধ করতে শুনেছি। তিনি বলেছেন: "এগুলোর প্রতিটি আলাদাভাবে ভিজাও।"









আল-জামি` আল-কামিল (7424)


7424 - عن أبي طلحة الأنصاري: أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن الخليطين.

حسن: رواه الطبراني في الكبير (5/ 102) عن زكريا بن يحيى الساجي، ثنا محمد بن عبد الملك بن أبي الشوارب، ثنا عمر بن رديح، عن عطاء بن أبي ميمونة، عن أنس، عن أبي طلحة قال .. فذكره.

وإسناده حسن من أجل الخلاف في عمر بن رديح.

قال ابن أبي حاتم: أخبرنا أبو بكر بن أبي خيثمة فيما كتب إلي قال: حدّثنا أحمد بن محمد الصفار، ثنا أبو حفص عمر بن رديح كان يوثق.

قال: وسألت أبي عنه فقال:"شيخ" قيل له: قال ابن معين:"هو صالح الحديث" فقال:"بل هو ضعيف الحديث".

وقال العجلي:"بصري ثقة"، وذكره ابن حبان في الثقات وقال: شيخ يروي عن عطاء بن أبي ميمونة، روى عنه محمد بن أبي بكر المقدمي مستقيم الحديث وذكره أيضًا ابن شاهين في الثقات.

وذكره ابن عدي في الكامل وقال:"يخالفه الثقات في بعض ما يرويه".
فالخلاصة أنه حسن الحديث ما لم يخالف. وليس في من هذا الحديث مخالفة، بل تشهد له الأحاديث الصحيحة لكن روي ابن عدي في الكامل (5/ 24) عن بكر بن عبد الوهاب، ثنا محمد بن عبد الملك بن أبي الشوارب، ثنا عمر بن رديح، عن أنس بن مالك، عن أم سليم وأبي طلحة أنهما كانا يشربان نبيذ الزبيب والبُسر يخلطانه قال: فقيل له: يا أبا طلحة، إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قد نهى عن هذا قال:"إنما نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عنه عند العَوز في ذلك الزمان كما نهى عن الإقران".

قلت: وهذا إن كان محفوظا عن أبي طلحة فيكون قاله عن اجتهاد، والعبرة بروايته لا برأيه.




আবূ তালহা আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দুই প্রকারের মিশ্রণ (পানীয়) ব্যবহার করতে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7425)


7425 - عن أبي الوداك قال: لا أشرب نبيذًا بعد ما سمعت أبا سعيد يقول: أتي رسول الله صلى الله عليه وسلم برجل نشوان فقال: إني لم أشرب خمرًا، إنما شربت زبيبا وتمرًا في دباءة قال: فأمر به فنُهز بالأيدي، وخُفق بالنعال، ونهى عن الدياء، ونهى عن الزبيب والتمر يعني: أن يُخلطا.

حسن: رواه أحمد (11279)، والنسائي في الكبرى (5292)، وصحّحه الحاكم (4/ 374) كلهم من طرق عن شعبة، عن أبي التياح، عن أبي الوداك، عن أبي سعيد الخدري قال فذكره.

وإسناده حسن من أجل أبي الوداك، واسمه جبير بن نفير البكالي فإنه حسن الحديث.

وأبو التياح اسمه: يزيد بن حمد الضبعي.




আবু সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট একজন মাতাল ব্যক্তিকে আনা হলো। সে বললো: আমি মদ পান করিনি, বরং আমি লাউয়ের পাত্রে কিসমিস ও খেজুর পান করেছিলাম। তিনি তার ব্যাপারে নির্দেশ দিলেন, অতঃপর তাকে হাত দ্বারা আঘাত করা হলো এবং জুতো দ্বারা প্রহার করা হলো। আর তিনি লাউয়ের পাত্র ব্যবহার করতে নিষেধ করলেন এবং কিসমিস ও খেজুর একসাথে মিশ্রিত করে পান করতে নিষেধ করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7426)


7426 - عن امرأة أنها سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"لا تَنتبذوا التمر والزبيب جميعا، انبذوا كل واحد منهما وحده".

حسن: رواه البيهقي (8/ 307) من طريق ابن وهب، أخبرني عبد الرحمن بن سلمان، عن عُقيل بن خالد، عن معبد بن كعب بن مالك، عن أخيه عبد الله بن كعب بن مالك، عن امرأة قالت .. فذكرته.

وهذا إسناد حسن من أجل عبد الرحمن بن سلمان وهو الحَجْري المصري، قال البخاري:"فيه نظر".

وقال أبو حاتم:"مضطرب الحديث، يروي عن عُقيل أحاديث عن مشيخة لُعقيل يدخل بينهم الزّهريّ في شيء سمعه عقيل من أولئك المشيخة، ما رأيت في حديثه منكرًا، وهو صالح الحديث أدخله البخاري في كتاب الضعفاء يُحول من هناك".

وقال أبو سعيد بن يونس: وهو قريب السن من ابن وهب، يروي عن عقيل غرائب انفرد بها، وكان ثقة.

والحاصل أنه حسن الحديث، وقد ردَّ أبو حاتم على تضعيف البخاري إياه، وأنه لم ير في حديثه ما ينكر عليه، بل له ما يشهد، ولذا قال الحافظ:"لا بأس به".
وأما ما روي عن كبشة بنت أبي مريم قالت: سألت أم سلمة رضي الله عنها ما كان النبي صلى الله عليه وسلم ينهى عنه؟ قالت:"كان ينهانا أن نعجم النوي طبخا، أو نخلط الزبيب والتمر". فهو ضعيف.

رواه أبو داود (3706)، وأحمد (26505) كلاهما من طريق يحيى القطان، عن ثابت بن عمارة، حدثتني ريطة، عن كبشة بنت أبي مريم قالت .. فذكرته.

وإسناده ضعيف لجهالة حال ربطة وكبشة بنت أبي مريم.

وكذلك لا يصح ما روي عن أنس بن مالك قال:"نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن نجمع شيئين نبيذا يبغي أحدهما على صاحبه، قال: وسألته عن الفضيخ فنهاني عنه، قال: كان يكره المذنّب من البُسر مخافة أن يكونا شيئين فكنا نقطعه".

رواه النسائي (5513) عن سويد بن نصر، أنبأنا عبد الله (هو ابن المبارك)، عن وقاء بن إياس، عن المختار بن فلفل، عن أنس بن مالك قال .. فذكره.

ووقاء بن إياس هو أبو يزيد الكوفي، مختلف فيه وهو إلى الضعف أقرب فقال النسائي: ليس بالقوي. وقال أبو أحمد الحاكم: ليس بالمتين. ومشاه أبو حاتم وابن عدي وقال الحافظ: لين الحديث.

وقوله:"يبغي أحدهما على صاحبه" من البغي أي يشتد.

قال الخطابي:"قد ذهب غير واحد من أهل العلم إلى تحريم الخليطين، وإن لم يكن الشراب المتخذ منهما مسكرًا قولا بظاهر الحديث، ولم يجعلوه معلولا بالإسكار، وإليه ذهب عطاء وطاوس. وبه قال مالك، وأحمد بن حنبل، وإسحاق وعامة أهل الحديث، وهو غالب مذهب الشافعي.

وقالوا من شرب الخليطين قبل حدوث الثدة فهو آثم من جهة واحدة، وإذا شرب بعد حدوث الشدة كان آثمًا من جهتين: أحدهما: شرب الخليطين والآخر: شرب المسكر، ورخص فيه سفيان الثوري، وأبو حنيفة، وأصحابه". معالم السنن (5/ 276).

قلت: والذين قالوا بالجواز قالوا: لأن كلا منهما يحل منفردا فلا يكره مجتمعا، والمنع يحمل على حال الإسكار لأنه يؤثر كل واحد منهما في الآخر إسراع الشدة إذا خلطا.




এক মহিলা থেকে বর্ণিত, তিনি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছেন: ‘তোমরা খেজুর ও কিসমিস একসাথে ভিজিয়ে (নাবীয তৈরি) করবে না। বরং এর প্রত্যেকটিকে আলাদা আলাদা করে ভিজাও।’









আল-জামি` আল-কামিল (7427)


7427 - عن أنس: أن النبي صلى الله عليه وسلم سئل عن الخمر تتخذ خلا؟ فقال:"لا".

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1983) من طريق سفيان (هو الثوري)، عن السدي، عن يحيى بن عباد، عن أنس قال .. فذكره.

ورواه أبو داود (3675) من وجه آخر عن سفيان بإسناده: أن أبا طلحة سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن أيتام
وُرّثوا خمرا قال:"أهريقوها" قال: أفلا أجعلها خلا؟ قال:"لا".




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল যে, মদকে সিরকায় (ভিনিগারে) রূপান্তরিত করা যায় কিনা? তিনি বললেন: "না।"