হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (7421)


7421 - عن جابر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"الزبيب والتمر هو الخمر".

وزاد في رواية:"يعني إذا انتبذ جميعا".

صحيح: رواه النسائي (5546)، والحاكم (4/ 141) كلاهما من طريق عبيد الله بن موسى، عن شيبان، عن الأعمش، عن محارب بن دثار، عن جابر قال .. فذكره. والزيادة للحاكم، وقال:"صحيح على شرط الشيخين".

وهو كما قال. شيبان هو: ابن عبد الرحمن النحوي.

وصحّح إسناده أيضا الحافظ ابن حجر في الفتح (10/ 36)، ولا يضره من أوقفه؛ لأن الزيادة من الثقة الحافظ مقبولة كما هو مقرر في علوم الحديث.

فقد رواه النسائي (5544) من طريق شعبة، و (5545) من طريق الثوري، وابن أبي شيبة (7/ 549) عن عبد الرحمن بن سليمان - ثلاثتُهم عن محارب بن دثار، عن جابر موقوفا بلفظ:"البسر والتمر خمر" فيكون جابر رضي الله عنه أحيانا يرفعه، وأحيانا يفتي به من قوله.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কিশমিশ এবং খেজুর হলো নেশাদ্রব্য (বা মদ)।" (অন্য এক বর্ণনায় অতিরিক্ত বলা হয়েছে: "অর্থাৎ, যখন সেগুলিকে একসাথে ভিজিয়ে রাখা হয়।")









আল-জামি` আল-কামিল (7422)


7422 - عن أبي أُسيد الأنصاري قال: نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يُجمع بين التمر والزبيب.

صحيح: رواه الطبراني في الكبير (19/ 268) عن عبيد العجلي، ثنا محمد بن حاتم المؤدب، ثنا علي بن ثابت الجزري، ثنا عبد الحميد بن جعفر (هو الأنصاري)، حدثني يزيد بن أبي حبيب المصري، عن عراك بن مالك، عن أبي أُسيد الأنصاري قال .. فذكره.

وإسناده صحيح، وعبيد العجلي شيخ الطبراني اسمه الحسين بن محمد بن حاتم أحد الحفاظ المتقنين.

وعزاه الهيثمي (5/ 55) للطبراني وقال:"رجاله ثقات".

ورواه أبو يعلى - كما في المطالب العالية (1819) - عن محمد بن حاتم به بلفظ:"أن يجمع بين الرطب والزبيب".




আবু উসাইদ আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম খেজুর ও কিশমিশ একত্রে মিশাতে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7423)


7423 - عن معبد بن كعب بن مالك، عن أمه - وكانت قد صلّت القبلتين مع رسول الله صلى الله عليه وسلم قالت: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم ينهى أن ينتبذ التمر والزبيب جميعا، وقال:"انتبذ كل واحد منها وحده".

حسن: رواه أحمد (23932)، والحميدي (356)، والطبراني في الكبير (25/ 147) كلهم من طريق محمد بن إسحاق، أخبرنا معبد بن كعب به .. فذكره.

وإسناده حسن من أجل ابن إسحاق وإن كان مدلسا فقد صرَّح بالإخبار عند الحميدي.




মা'বাদ ইবনু কা'ব ইবনু মালিকের মা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত—যিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে দুই কিবলার দিকে মুখ করে সালাত আদায় করেছিলেন—তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে খেজুর ও কিশমিশ একত্রে ভিজিয়ে রাখতে (নবীয তৈরি করতে) নিষেধ করতে শুনেছি। তিনি বলেছেন: "এগুলোর প্রতিটি আলাদাভাবে ভিজাও।"









আল-জামি` আল-কামিল (7424)


7424 - عن أبي طلحة الأنصاري: أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن الخليطين.

حسن: رواه الطبراني في الكبير (5/ 102) عن زكريا بن يحيى الساجي، ثنا محمد بن عبد الملك بن أبي الشوارب، ثنا عمر بن رديح، عن عطاء بن أبي ميمونة، عن أنس، عن أبي طلحة قال .. فذكره.

وإسناده حسن من أجل الخلاف في عمر بن رديح.

قال ابن أبي حاتم: أخبرنا أبو بكر بن أبي خيثمة فيما كتب إلي قال: حدّثنا أحمد بن محمد الصفار، ثنا أبو حفص عمر بن رديح كان يوثق.

قال: وسألت أبي عنه فقال:"شيخ" قيل له: قال ابن معين:"هو صالح الحديث" فقال:"بل هو ضعيف الحديث".

وقال العجلي:"بصري ثقة"، وذكره ابن حبان في الثقات وقال: شيخ يروي عن عطاء بن أبي ميمونة، روى عنه محمد بن أبي بكر المقدمي مستقيم الحديث وذكره أيضًا ابن شاهين في الثقات.

وذكره ابن عدي في الكامل وقال:"يخالفه الثقات في بعض ما يرويه".
فالخلاصة أنه حسن الحديث ما لم يخالف. وليس في من هذا الحديث مخالفة، بل تشهد له الأحاديث الصحيحة لكن روي ابن عدي في الكامل (5/ 24) عن بكر بن عبد الوهاب، ثنا محمد بن عبد الملك بن أبي الشوارب، ثنا عمر بن رديح، عن أنس بن مالك، عن أم سليم وأبي طلحة أنهما كانا يشربان نبيذ الزبيب والبُسر يخلطانه قال: فقيل له: يا أبا طلحة، إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قد نهى عن هذا قال:"إنما نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم عنه عند العَوز في ذلك الزمان كما نهى عن الإقران".

قلت: وهذا إن كان محفوظا عن أبي طلحة فيكون قاله عن اجتهاد، والعبرة بروايته لا برأيه.




আবূ তালহা আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) দুই প্রকারের মিশ্রণ (পানীয়) ব্যবহার করতে নিষেধ করেছেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7425)


7425 - عن أبي الوداك قال: لا أشرب نبيذًا بعد ما سمعت أبا سعيد يقول: أتي رسول الله صلى الله عليه وسلم برجل نشوان فقال: إني لم أشرب خمرًا، إنما شربت زبيبا وتمرًا في دباءة قال: فأمر به فنُهز بالأيدي، وخُفق بالنعال، ونهى عن الدياء، ونهى عن الزبيب والتمر يعني: أن يُخلطا.

حسن: رواه أحمد (11279)، والنسائي في الكبرى (5292)، وصحّحه الحاكم (4/ 374) كلهم من طرق عن شعبة، عن أبي التياح، عن أبي الوداك، عن أبي سعيد الخدري قال فذكره.

وإسناده حسن من أجل أبي الوداك، واسمه جبير بن نفير البكالي فإنه حسن الحديث.

وأبو التياح اسمه: يزيد بن حمد الضبعي.




আবু সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট একজন মাতাল ব্যক্তিকে আনা হলো। সে বললো: আমি মদ পান করিনি, বরং আমি লাউয়ের পাত্রে কিসমিস ও খেজুর পান করেছিলাম। তিনি তার ব্যাপারে নির্দেশ দিলেন, অতঃপর তাকে হাত দ্বারা আঘাত করা হলো এবং জুতো দ্বারা প্রহার করা হলো। আর তিনি লাউয়ের পাত্র ব্যবহার করতে নিষেধ করলেন এবং কিসমিস ও খেজুর একসাথে মিশ্রিত করে পান করতে নিষেধ করলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (7426)


7426 - عن امرأة أنها سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"لا تَنتبذوا التمر والزبيب جميعا، انبذوا كل واحد منهما وحده".

حسن: رواه البيهقي (8/ 307) من طريق ابن وهب، أخبرني عبد الرحمن بن سلمان، عن عُقيل بن خالد، عن معبد بن كعب بن مالك، عن أخيه عبد الله بن كعب بن مالك، عن امرأة قالت .. فذكرته.

وهذا إسناد حسن من أجل عبد الرحمن بن سلمان وهو الحَجْري المصري، قال البخاري:"فيه نظر".

وقال أبو حاتم:"مضطرب الحديث، يروي عن عُقيل أحاديث عن مشيخة لُعقيل يدخل بينهم الزّهريّ في شيء سمعه عقيل من أولئك المشيخة، ما رأيت في حديثه منكرًا، وهو صالح الحديث أدخله البخاري في كتاب الضعفاء يُحول من هناك".

وقال أبو سعيد بن يونس: وهو قريب السن من ابن وهب، يروي عن عقيل غرائب انفرد بها، وكان ثقة.

والحاصل أنه حسن الحديث، وقد ردَّ أبو حاتم على تضعيف البخاري إياه، وأنه لم ير في حديثه ما ينكر عليه، بل له ما يشهد، ولذا قال الحافظ:"لا بأس به".
وأما ما روي عن كبشة بنت أبي مريم قالت: سألت أم سلمة رضي الله عنها ما كان النبي صلى الله عليه وسلم ينهى عنه؟ قالت:"كان ينهانا أن نعجم النوي طبخا، أو نخلط الزبيب والتمر". فهو ضعيف.

رواه أبو داود (3706)، وأحمد (26505) كلاهما من طريق يحيى القطان، عن ثابت بن عمارة، حدثتني ريطة، عن كبشة بنت أبي مريم قالت .. فذكرته.

وإسناده ضعيف لجهالة حال ربطة وكبشة بنت أبي مريم.

وكذلك لا يصح ما روي عن أنس بن مالك قال:"نهى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن نجمع شيئين نبيذا يبغي أحدهما على صاحبه، قال: وسألته عن الفضيخ فنهاني عنه، قال: كان يكره المذنّب من البُسر مخافة أن يكونا شيئين فكنا نقطعه".

رواه النسائي (5513) عن سويد بن نصر، أنبأنا عبد الله (هو ابن المبارك)، عن وقاء بن إياس، عن المختار بن فلفل، عن أنس بن مالك قال .. فذكره.

ووقاء بن إياس هو أبو يزيد الكوفي، مختلف فيه وهو إلى الضعف أقرب فقال النسائي: ليس بالقوي. وقال أبو أحمد الحاكم: ليس بالمتين. ومشاه أبو حاتم وابن عدي وقال الحافظ: لين الحديث.

وقوله:"يبغي أحدهما على صاحبه" من البغي أي يشتد.

قال الخطابي:"قد ذهب غير واحد من أهل العلم إلى تحريم الخليطين، وإن لم يكن الشراب المتخذ منهما مسكرًا قولا بظاهر الحديث، ولم يجعلوه معلولا بالإسكار، وإليه ذهب عطاء وطاوس. وبه قال مالك، وأحمد بن حنبل، وإسحاق وعامة أهل الحديث، وهو غالب مذهب الشافعي.

وقالوا من شرب الخليطين قبل حدوث الثدة فهو آثم من جهة واحدة، وإذا شرب بعد حدوث الشدة كان آثمًا من جهتين: أحدهما: شرب الخليطين والآخر: شرب المسكر، ورخص فيه سفيان الثوري، وأبو حنيفة، وأصحابه". معالم السنن (5/ 276).

قلت: والذين قالوا بالجواز قالوا: لأن كلا منهما يحل منفردا فلا يكره مجتمعا، والمنع يحمل على حال الإسكار لأنه يؤثر كل واحد منهما في الآخر إسراع الشدة إذا خلطا.




এক মহিলা থেকে বর্ণিত, তিনি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছেন: ‘তোমরা খেজুর ও কিসমিস একসাথে ভিজিয়ে (নাবীয তৈরি) করবে না। বরং এর প্রত্যেকটিকে আলাদা আলাদা করে ভিজাও।’









আল-জামি` আল-কামিল (7427)


7427 - عن أنس: أن النبي صلى الله عليه وسلم سئل عن الخمر تتخذ خلا؟ فقال:"لا".

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (1983) من طريق سفيان (هو الثوري)، عن السدي، عن يحيى بن عباد، عن أنس قال .. فذكره.

ورواه أبو داود (3675) من وجه آخر عن سفيان بإسناده: أن أبا طلحة سأل النبي صلى الله عليه وسلم عن أيتام
وُرّثوا خمرا قال:"أهريقوها" قال: أفلا أجعلها خلا؟ قال:"لا".




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল যে, মদকে সিরকায় (ভিনিগারে) রূপান্তরিত করা যায় কিনা? তিনি বললেন: "না।"









আল-জামি` আল-কামিল (7428)


7428 - عن أنس قال: لقد سقيتُ رسول الله صلى الله عليه وسلم بقدحي هذا الشراب كله: العسل، والنبيذ، والماء، واللبن.

صحيح: رواه مسلم في الأشربة (2008) من طريق عفان، ثنا حماد بن سلمة، عن ثابت، عن أنس قال .. فذكره.




আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি অবশ্যই আমার এই পেয়ালা দ্বারা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে সব ধরনের পানীয় পান করিয়েছি: মধু, নাবীয, পানি এবং দুধ।









আল-জামি` আল-কামিল (7429)


7429 - عن ابن عمر قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم"لعنت الخمر على عشرة أوجه: بعينها، وعاصرها، ومعتصرها، وبائعها، ومبتاعها، وحاملها، والمحمولة إليه، وآكل ثمنها، وشاربها، وساقيها".

حسن: رواه أبو داود (3674)، وابن ماجه (3380)، وأحمد (4787)، وابن أبي شيبة (6/ 447)، والبيهقي (5/ 327) كلهم من طريق عبد العزيز بن عمر بن عبد العزيز، عن عبد الرحمن بن عبد الله الغافقي وأبي طعمة مولاهم أنهما سمعا ابن عمر يقول .. فذكره.

وإسناده حسن من أجل أبي طعمة واسمه هلال، وقد تكلم فيه غير أنه حسن الحديث، ثم إنه توبع في الإسناد نفسه، تابعه عبد الرحمن بن عبد الله الغافقي، وهو أمير الأندلس، استشهد فيها سنة (115 هـ)، وللحافظ كلام جيد في الدفاع عنه، فراجعه.

وصحّحه ابن السكن كما في تلخيص الحبير (4/ 136).




ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: মদ দশটি কারণে অভিশপ্ত হয়েছে: স্বয়ং মদের কারণে, যে তা নিংড়ায়, যার জন্য তা নিংড়ানো হয়, যে তা বিক্রি করে, যে তা ক্রয় করে, যে তা বহন করে, যার কাছে তা বহন করে নিয়ে যাওয়া হয়, যে তার মূল্য ভক্ষণ করে, যে তা পান করে এবং যে তা পান করায়।









আল-জামি` আল-কামিল (7430)


7430 - عن أنس بن مالك قال: لعن رسول الله صلى الله عليه وسلم في الخمر عشرة: عاصرها، ومعتصرها، وشاربها، وحاملها، والمحمولة إليه، وساقيها، وبائعها، وآكل ثمنها، والمشتري لها، والمشتراة لها.

حسن: رواه الترمذي (1295)، وابن ماجه (3381) كلاهما من حديث أبي عاصم، عن شبيب بن بشر، عن أنس بن مالك قال .. فذكره.

وقال الترمذي:"حسن غريب".

قلت: إسناده حسن من أجل شبيب بن بشر البجلي الكوفي، مختلف فيه، وثقه ابن معين، وذكره ابن حبان في الثقات، وقال أبو حاتم: لين الحديث. والخلاصة أنه حسن الحديث وخاصة في الشواهد.

وأما قول الحافظ في التلخيص"رواته ثقات" فهو ليس كما قال، بل فيه شبيب بن بشر متكلم
فيه، غير أنه لا بأس به في الشواهد.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মদ সংশ্লিষ্ট দশ ব্যক্তিকে অভিশাপ (লা'নত) দিয়েছেন: যে তা প্রস্তুত করে (আঙ্গুর বা খেজুর ইত্যাদি নিংড়ায়), যে তা প্রস্তুত করায় (যাকে নিংড়ানো হয়), এর পানকারী, এর বহনকারী, যার কাছে তা বহন করে নিয়ে যাওয়া হয়, এর পরিবেশনকারী (যে পান করায়), এর বিক্রেতা, এর মূল্য ভোগকারী, এর ক্রেতা এবং যার জন্য তা ক্রয় করা হয়।









আল-জামি` আল-কামিল (7431)


7431 - عن عبد الله بن عباس قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"أتاني جبريل فقال: يا محمد، إن الله عز وجل قد لعن الخمر، وعاصرها، ومعتصرها، وشاربها، وحاملها، والمحمولة إليه، وبائعها، ومبتاعها، وساقيها، ومستقيها".

حسن: رواه أحمد (2897)، والبيهقي في الشعب (5196)، وصححه ابن حبان (5356)، والحاكم (4/ 145) كلهم من طريق مالك بن خير الزبادي، أن مالك بن سعد التُّجيبي حدّثه، أنه سمع ابن عباس .. فذكره.

قال الحاكم:"هذا حديث صحيح الإسناد".

وإسناده حسن من أجل مالك بن خير الزبادي المصري روى عنه جمعٌ، وذكره ابن حبان في الثقات، وقال الذهبي في الميزان:"محله الصدق، وكذلك من أجل شيخه مالك بن سعد التجيبي قال أبو زرعة:"لا بأس به"، وذكره ابن حبان في الثقات.




আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "আমার নিকট জিবরীল (আঃ) এসে বললেন: হে মুহাম্মাদ! নিশ্চয় আল্লাহ তাআলা মদকে, এবং যে তা (আঙুর ইত্যাদি) নিংড়ায়, এবং যে নিংড়াতে বলে, এবং যে তা পান করে, এবং যে তা বহন করে, এবং যার কাছে তা বহন করা হয়, এবং যে তা বিক্রি করে, এবং যে তা ক্রয় করে, এবং যে তা পরিবেশন করে, এবং যে পরিবেশন করতে বলে— তাদের সকলকে অভিশাপ দিয়েছেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (7432)


7432 - عن عبد الله بن عمرو قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن المقسطين عند الله على منابر من نور عن يمين الرحمن عز وجل، وكلتا يديه يمين، الذين يعدلون في حكمهم وأهليهم وما ولوا".

صحيح: رواه مسلم في الإمارة (1827: 18) من طريق سفيان بن عيينة، عن عمرو بن دينار، عن عمرو بن أوس، عن عبد الله بن عمرو .. فذكره.




আব্দুল্লাহ ইবনে আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: নিশ্চয় ইনসাফকারীগণ আল্লাহর নিকট নূরের মিম্বরসমূহের উপর মহামহিম দয়াময় (আল্লাহর) ডান পাশে থাকবে। আর তাঁর (আল্লাহর) উভয় হাতই ডান। (তারা হলো) যারা তাদের বিচার-আচার, তাদের পরিবার-পরিজন এবং যে সব কিছুর কর্তৃত্ব লাভ করেছে, সে সব ব্যাপারেও ইনসাফ (ন্যায়বিচার) করে।









আল-জামি` আল-কামিল (7433)


7433 - عن أبي هريرة أنّ رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"سبعةٌ يظلّهم الله في ظلّه يوم لا ظلَّ إلا ظله: إمام عادل، وشاب نشأ في عبادة الله، ورجل قلبه متعلّق بالمساجد إذا خرج منه حتى يعود إليه، ورجلان تحابّا في الله واجتمعا على ذلك وتفرّقا عليه، ورجل تصدّق بصدقة فأخفاها حتى لا تعلم شمالُه ما تنفقُ يمينُه".

متفق عليه: رواه مالك في الشعر (14) عن خبيب بن عبد الرحمن الأنصاريّ، عن حفص بن عاصم، عن أبي سعيد أو عن أبي هريرة، فذكره. ومن هذا الطريق رواه مسلم في الزكاة (1031).

ورواه البخاريّ في الأذان (660)، ومسلم في الزكاة كلاهما من حديث يحيى بن سعيد، عن عبيد الله، قال: حدثني خُبيب بن عبد الرحمن، عن حفص بن عاصم، عن أبي هريرة، بدون شك.

وفي الباب عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"ما من أمير عشرة إلا يؤتى به يوم القيامة مغلولا، لا يفكه إلا العدل، أو يوبقه الجور".

رواه أحمد (9573)، والبزار (8492)، وأبو يعلى (6614) كلهم من حديث يحيى بن سعيد وهو القطان)، عن محمد بن عجلان قال: سمعت أبي وسعيدًا (وهو المقبري) يحدثان عن أبي هريرة .. فذكره.

وقال البزار:"وهذا الحديث لا نعلم أحدًا جمع ابن عجلان، عن سعيد. وابن عجلان، عن أبيه، عن أبي هريرة إلا يحيى بن سعيد". اهـ

وإسناده قوي وقد حسنه بعض أهل العلم لكن في متنه غرابة، وقد جاء في الصحيح:"سبعة يظلهم الله في ظله يوم لا ظل إلا ظله" فذكر منهم الامام العادل. ومن حاول الجمع فقد تكلف.
وأما ما روي عن أبي أمامة عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه قال:"ما من رجل يلي أمر عشرة فما فوق ذلك إلا أتى الله مغلولا يوم القيامة يده إلى عنقه، فكهـ بره أو أوبقه إثمه. أولها ملامة، وأوسطها ندامة، وآخرها خزي يوم القيامة" فلا يصح.

رواه أحمد (22300) عن أبي اليمان، حدثنا إسماعيل بن عياش، عن يزيد بن أبي مالك، عن لقمان بن عامر، عن أبي أمامة .. فذكره.

واختلف في إسناده على إسماعيل بن عياش اختلافا كثيرًا وهذا مما يوهن الحديث مع غرابة في متنه، كما تقدم.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “সাত প্রকারের লোককে আল্লাহ্ তাঁর (আরশের) ছায়ায় স্থান দেবেন, যেদিন তাঁর ছায়া ছাড়া অন্য কোনো ছায়া থাকবে না: ন্যায়পরায়ণ শাসক; আর সেই যুবক, যে আল্লাহর ইবাদতে লিপ্ত হয়ে বড় হয়েছে; আর সেই ব্যক্তি, যার অন্তর মসজিদের সাথে লেগে থাকে—যখন সে সেখান থেকে বের হয়, তখন পুনরায় ফিরে আসা পর্যন্ত; আর সেই দুজন ব্যক্তি, যারা আল্লাহর জন্য একে অপরকে ভালোবাসে, এই ভালোবাসার উপর তারা একত্রিত হয় এবং এরই উপর তারা বিচ্ছিন্ন হয়; এবং সেই ব্যক্তি, যে এমন গোপনে সাদকা করে যে তার ডান হাত কী দান করে, তা তার বাম হাতও জানতে পারে না।”









আল-জামি` আল-কামিল (7434)


7434 - عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"إنما الإمام جنة يقاتل من ورائه ويتقى به، فإن أمر بتقوى الله عز وجل وعدل، كان له بذلك أجر، وإن يأمر بغيره كان عليه منه".

متفق عليه: رواه البخاري في الجهاد والسير (2957)، ومسلم في الإمارة (1841) كلاهما من حديث أبي الزناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة .. فذكره. والسياق لمسلم.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয়ই ইমাম (রাষ্ট্রীয় নেতা/শাসক) ঢালস্বরূপ। তার পিছনে থেকে (শত্রুর বিরুদ্ধে) যুদ্ধ করা হয় এবং তার দ্বারা আত্মরক্ষা করা হয়। অতএব, যদি সে আল্লাহ আযযা ওয়া জাল্লার তাকওয়ার (ভীতির) নির্দেশ দেয় এবং ন্যায়বিচার করে, তবে এর বিনিময়ে তার জন্য রয়েছে প্রতিদান (সাওয়াব)। আর যদি সে অন্য কিছুর নির্দেশ দেয় (অর্থাৎ অন্যায়ের নির্দেশ দেয়), তবে তার উপর তার পাপ বর্তাবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (7435)


7435 - عن سعد بن تميم الأشعري قال: قيل: يا رسول الله، ما للخليفة من بعدك؟

قال:"مثل الذي لي ما عدل في الحكم، وأقسط في القسط، ورحم ذا الرحم، فمن فعل غير ذلك فليس مني، ولست منه".

حسن: رواه الطبراني في الكبير (6/ 55)، والبخاري في التاريخ الكبير (4/ 46)، وابن زنجويه في الأموال (39) كلهم من طريق أبي أيوب سليمان بن عبد الرحمن الدمشقي، حدثنا الوليد بن مسلم، حدثنا عبد الله بن العلاء وغيره أنهما سمعا بلال بن سعد يحدث عن أبيه سعد … فذكره.

والسياق لابن زنجويه.

وإسناده حسن من أجل سليمان بن عبد الرحمن الدمشقي فإنه حسن الحديث.

وقال الهيثمي في المجمع (5/ 231):"رجاله ثقات".




সা'দ ইবনু তামিম আল-আশআরী থেকে বর্ণিত, বলা হলো, 'হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম), আপনার পরে খলিফার জন্য কী (মর্যাদা ও প্রতিদান) রয়েছে?' তিনি বললেন: "আমার জন্য যা রয়েছে, তার অনুরূপ (মর্যাদা ও প্রতিদান)। যতক্ষণ সে শাসনে ইনসাফ করে, ন্যায্য বণ্টনে সুবিচার করে এবং আত্মীয়-স্বজনের প্রতি দয়া দেখায়। কিন্তু যে এর ব্যতিক্রম করে, সে আমার দলভুক্ত নয় এবং আমি তার দলভুক্ত নই।"









আল-জামি` আল-কামিল (7436)


7436 - عن عبد الرحمن بن شماسة، قال: أتيت عائشة أسألها عن شيء فقالت: ممن أنت؟ فقلت: رجل من أهل مصر. فقالت: كيف كان صاحبكم لكم في غزاتكم هذه؟ فقال: ما نقمنا منه شيئا إن كان ليموت للرجل منا البعير فيعطيه البعير، والعبد فيعطيه العبد، ويحتاج إلى النفقة فيعطيه النفقة، فقالت: أما إنه لا يمنعني الذي فعل في محمد بن أبي بكر أخي أن أُخبرك ما سمعت من رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول في بيتي هذا:"اللهم من ولي من أمر أمتي شيئا فشق عليهم فاشقُق عليه، ومن ولي من أمر أمتي شيئا فرفق بهم فارفقْ به".
صحيح: رواه مسلم في الإمارة (1828) عن هارون بن سعيد الأيلي، حدثنا ابن وهب، حدثني حرملة، عن عبد الرحمن بن شمامة قال .. فذكره.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আবদুর রহমান ইবনু শুমাশা (রহ.) বলেন, আমি আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে কোনো কিছু জিজ্ঞাসা করার জন্য গেলাম। তিনি জিজ্ঞাসা করলেন, তুমি কোন্ অঞ্চলের লোক? আমি বললাম, মিসরবাসীদের একজন লোক। তখন তিনি বললেন, তোমাদের এই যুদ্ধে তোমাদের নেতা তোমাদের প্রতি কেমন ব্যবহার করেছেন? সে বলল, আমরা তাঁর মধ্যে কোনো ত্রুটি দেখিনি। যদি আমাদের কারো উট মারা যেত, তবে তিনি তাকে উট দিতেন, যদি গোলাম মারা যেত তবে তিনি গোলাম দিতেন, আর যদি কারো খরচের প্রয়োজন হত, তবে তিনি তাকে খরচ দিতেন। তখন তিনি (আয়িশা) বললেন, আমার ভাই মুহাম্মাদ ইবনু আবী বাকরের (ব্যাপারে) যা করা হয়েছে, তা সত্ত্বেও আমি তোমাকে সেই কথা জানাতে বিরত থাকব না, যা আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে আমার এই ঘরে বলতে শুনেছি: “হে আল্লাহ! যে ব্যক্তি আমার উম্মতের কোনো কাজের দায়িত্ব গ্রহণ করে অতঃপর তাদের জন্য কষ্টকর করে তোলে, আপনিও তার জন্য কঠিন করে দিন। আর যে ব্যক্তি আমার উম্মতের কোনো কাজের দায়িত্ব গ্রহণ করে এবং তাদের সাথে নম্র ব্যবহার করে, আপনি তার প্রতি নম্র হোন।”









আল-জামি` আল-কামিল (7437)


7437 - عن أبي موسى قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا بعث أحدًا من أصحابه في بعض أمره قال:"بشّروا ولا تنفّروا، ويسّروا ولا تعسّروا".

صحيح: رواه مسلم في الجهاد (1732) من طرق عن أبي أسامة، عن زيد بن عبد الله، عن أبي بُردة، عن أبي موسى … فذكره.




আবূ মূসা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন তাঁর কোনো সাহাবীকে কোনো কাজে পাঠাতেন, তখন বলতেন: "তোমরা সুসংবাদ দাও, আর ঘৃণা সৃষ্টি করো না। তোমরা সহজ করো, আর কঠিন করো না।"









আল-জামি` আল-কামিল (7438)


7438 - عن سعيد بن أبي بردة، عن أبيه، عن جده أن النبي صلى الله عليه وسلم بعث معاذًا وأبا موسى إلى اليمن قال:"يسّرا ولا تعسّرا، وبشّرا ولا تنفّرا، وتطاوعا ولا تختلفا".

متفق عليه: رواه البخاري في الجهاد والسير (3038)، ومسلم في الجهاد (1733) كلاهما من طريق وكيع، عن شعبة، عن سعيد بن أبي بردة، عن أبيه، عن جده (وهو أبو موسى الأشعري) فذكره.




আবূ মূসা আল-আশ'আরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যখন মু'আয (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এবং আবূ মূসাকে ইয়ামেনে প্রেরণ করলেন, তখন তিনি বললেন: "তোমরা সহজ করবে, কঠিন করবে না। সুসংবাদ দেবে, বিতৃষ্ণ করবে না। আর তোমরা পরস্পর সহযোগিতা বজায় রাখবে, মতভেদ করবে না।"









আল-জামি` আল-কামিল (7439)


7439 - عن أنس بن مالك قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"يسّروا ولا تعسّروا، وسكنوا ولا تنفروا".

متفق عليه: رواه البخاري في العلم (69)، ومسلم في الجهاد (1734) كلاهما من طرق عن شعبة، عن أبي التياح قال: سمعت أنس بن مالك يقول .. فذكره.




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা সহজ করো, কঠিন করো না। শান্ত রাখো (বা শান্তি দাও) এবং বিতৃষ্ণা সৃষ্টি করো না (বা দূরে ঠেলে দিও না)।"









আল-জামি` আল-কামিল (7440)


7440 - عن عبد الله بن عمر أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"ألا كلكم راعٍ، وكلكم مسؤول عن رعيته، فالإمام الذي على الناس راعٍ، وهو مسؤول عن رعيته، والرجل راعٍ على أهل بيته، وهو مسؤول عن رعيته، والمرأة راعية على أهل بيت زوجها وولده، وهي مسؤولة عنهم، وعبد الرجل راعٍ على مال سيده وهو مسؤول عنه، ألا فكلكم راعٍ، وكلكم مسؤول عن رعيته".

متفق عليه: رواه البخاري في الأحكام (7138) من طريق مالك، عن عبد الله بن دينار، عن عبد الله بن عمر .. فذكره. وليس الحديث في الموطأ برواية الليثي.

ورواه مسلم في الإمارة (1829: 20) من طريق الليث، عن نافع، عن ابن عمر بمثله.

وأما ما روي عن أبي لبابة بن عبد المنذر أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن قتل الحيات التي في البيوت وقال:"كلكم راع، وكلكم مسؤول عن رعيته، فالأمير الذي على الناس راع، وهو مسؤول عن
رعيته، والرجل راع على أهله، وهو مسؤول عنهم، وامرأة الرجل راعية على بيت زوجها، وهي مسؤولة عنهم، وعبد الرجل راع على مال سيده، وهو مسؤول عنه، ألا كلكم راع، وكلكم مسؤول عن رعيته". فقد وقع فيه وهم.

رواه الطبراني في الأوسط (2595 - مجمع البحرين) عن علي بن سعيد الرازي، حدثنا أبو مصعب، ثنا محمد بن إبراهيم بن دينار، عن عبيد الله بن عمر عن نافع، عن ابن عمر، عن أبي لبابة بن عبد المنذر .. فذكره.

وقال الطبراني:"لم يقل في هذا الحديث أحد ممن رواه عن عبيد الله بن عمر، عن نافع، عن ابن عمر، عن أبي لبابة إلا محمد بن إبراهيم بن دينار، تفرد به أبو مصعب".

قلت: حديث النهي عن قتل الحيات رواه ابن عمر عن أبي لبابة، أخرجه البخاري في بدء الخلق (3297 - 3298)، ومسلم في السلام (2233: 133).

وأما حديث:"كلكم راع" فقد رواه يحيى بن سعيد القطان - كما عند البخاري (2554)، ومسلم في الإمارة (1829: 20) - وعبد الله بن نمير، ومحمد بن بشر العبدي، وخالد بن الحارث الهجيمي - كما عند مسلم (1829: 20) كلهم عن عبيد الله، عن نافع، عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم.

وقد صرح ابن عمر بسماعه عن النبي صلى الله عليه وسلم كما في رواية ابنه سالم عنه. أخرجه البخاري في الجمعة (893) ومسلم في الإمارة (1829: 20).

وبهذا كله يتبين أن ذكر أبي لبابة في حديث:"كلكم راع" وهم. والله أعلم.




আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "সাবধান! তোমাদের প্রত্যেকেই রাখাল (অভিভাবক), এবং তোমাদের প্রত্যেকেই তার অধীনস্থদের সম্পর্কে জিজ্ঞাসিত হবে। জনগণের উপর যে নেতা কর্তৃত্বশীল, সে একজন রাখাল, এবং তাকে তার অধীনস্থদের সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হবে। পুরুষ তার পরিবারের উপর রাখাল, এবং তাকে তার অধীনস্থদের সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হবে। নারী তার স্বামীর ঘর ও সন্তানের উপর রাখাল, এবং তাকে তাদের সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হবে। পুরুষের দাস তার মনিবের সম্পদের উপর রাখাল, এবং তাকে সে সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করা হবে। সাবধান! তোমরা প্রত্যেকেই রাখাল, এবং তোমাদের প্রত্যেকেই তার অধীনস্থদের সম্পর্কে জিজ্ঞাসিত হবে।"