হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (8261)


8261 - عن عبد الله بن جعفر قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول:"ما ينبغي لنبي أن يقول: إني خير من يونس بن متى".

حسن: رواه أبو داود (4670)، وأحمد (1757) وأبو يعلى (6793) كلهم من طرق عن محمد بن إسحاق عن إسماعيل بن أبي حكيم، عن القاسم عن عبد الله بن جعفر .. فذكره. وإسناده حسن من أجل محمد بن إسحاق وقد صرّح بالتحديث عند الخطيب في تاريخه (10/ 138).

قلت: يُحمل قول النبي صلى الله عليه وسلم على تواضع منه وإلا فقد قال الله تعالى: {تِلْكَ الرُّسُلُ فَضَّلْنَا بَعْضَهُمْ عَلَى بَعْضٍ مِنْهُمْ مَنْ كَلَّمَ اللَّهُ وَرَفَعَ بَعْضَهُمْ دَرَجَاتٍ} [البقرة: 253].

وقال النبي صلى الله عليه وسلم:"أنا سيد ولد آدم ولا فخر". مسلم (2278).




আবদুল্লাহ ইবনে জাফর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলতেন: "কোনো নবীর জন্য এটা সমীচীন নয় যে, তিনি বলবেন, আমি ইউনুস ইবনে মাত্তা’র চেয়ে উত্তম।"









আল-জামি` আল-কামিল (8262)


8262 - عن ابن عباس: أن رسول الله صلى الله عليه وسلم مر بوادي الأزرق .. وفيه: ثم أتى على ثنية
هرشى فقال:"أي ثنية هذه؟" قالوا: ثنية هرشى قال:"كأني أنظر إلى يونس بن متى عليه السلام على ناقة حمراء، جعدة عليه جبة من صوف خطام ناقته خلبة وهو يلبي".

قال هشيم: يعني: لِيفا.

وفي لفظ:"هرشى أو لِفَتٌ""خطام ناقته لِيفٌ خُلبةٌ، مارًّا بهذا الوادي ملبّيًا".

صحيح: رواه مسلم في الإيمان (166: 268، 269) من طرق عن داود بن أبي هند، عن أبي العالية، عن ابن عباس .. فذكره.

قوله:"هرشى" جبل قريب من الجحفة.

وقوله:"جعدة" أي مكتنزة اللحم.

وقوله:"خُلبة" بضم الخاء وإسكان اللام وهو الليف.

وقوله: هرشى أو لِفْت"لفت - بكسر اللام، أو الفتح، وبفتح اللام والفاء وهي ثنية بين مكة والمدينة.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ওয়া-দিউল আযরাক (আযরাক উপত্যকা) অতিক্রম করছিলেন। এরপর তিনি হারশা গিরিপথের কাছে আসলেন এবং জিজ্ঞাসা করলেন: "এটি কোন্ গিরিপথ?" তারা বলল: হারশার গিরিপথ। তিনি বললেন: "আমার যেন মনে হচ্ছে, আমি ইউনুস ইবনে মাত্তা (আলাইহিস সালাম)-কে দেখছি, তিনি একটি লাল রঙের, স্থূলকায় উষ্ট্রীর উপর আরোহণ করে আছেন। তাঁর পরিধানে আছে পশমের তৈরি জুব্বা এবং তাঁর উষ্ট্রীর লাগাম হলো খেজুরের ছালের আঁশের (খুলবাহ্), আর তিনি তালবিয়াহ পাঠ করছেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (8263)


8263 - عن * *




৮২৬৩ - ... থেকে বর্ণিত।









আল-জামি` আল-কামিল (8264)


8264 - عن أبي هريرة قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم:"حين أسري بي لقيت موسى عليه السلام" فنعته النبي صلى الله عليه وسلم:"فإذا رجل - حسبته قال: - مضطربٌ رَجِلُ الرأس كأنه من رجال شنوءة …" الحديث.

متفق عليه: رواه البخاري في أحاديث الأنبياء (3437)، ومسلم في الإيمان (168: 272) - واللفظ له - كلاهما من حديث معمر بن راشد عن الزهري قال: أخبرني سعيد بن المسيب عن أبي هريرة .. فذكره.

وفي لفظ البخاري:"رأيت موسى وإذا رجل ضربٌ رَجِلٌ كأنه من رجال شنوءة …" رواه في أحاديث الأنبياء (3394) عن إبراهيم بن موسى، أخبرنا هشام بن يوسف، أخبرنا معمر، عن الزهري، عن سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة .. فذكره.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "যখন আমাকে মি'রাজে নিয়ে যাওয়া হয়েছিল, তখন আমি মূসা (আঃ)-এর সাথে সাক্ষাৎ করেছিলাম।" অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর বর্ণনা দিতে গিয়ে বলেন: "তখন সেখানে এমন একজন পুরুষ—আমার ধারণা (বর্ণনাকারী) বলেছেন— যাঁর চুল এলোমেলো এবং কোঁকড়ানো, যেন তিনি শানুআ গোত্রের পুরুষদের একজন ছিলেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (8265)


8265 - عن ابن عباس قال: ذكر النبي صلى الله عليه وسلم ليلة أسري به فقال:"موسى آدم طوال كأنه
من رجال شنوءة .....".

متفق عليه: رواه البخاري في أحاديث الأنبياء (3396)، ومسلم في الإيمان (165: 266) كلاهما من حديث غندر، حدثنا شعبة عن قتادة قال: سمعت أبا العالية يقول: حدثني ابن عم نبيكم صلى الله عليه وسلم يعني ابن عباس قال .. فذكره.

وفي لفظ مسلم:"مررتُ ليلة أسري بي على موسى بن عمران عليه السلام رجل آدم طُوال جعد كأنه من رجال شنوءة …".

قوله:"من رجال شنوءة" بفتح المعجمة وضم النون وسكون الواو وهي حي من اليمن ينسبون إلى شنوءة وهو: عبد الله بن كعب بن عبد الله بن مالك بن نصر بن الأزد، ولقب شنوءة لشنان كان بينه وبين أهله والنسبة إليه شنوئي.

قال ابن قتيبة: سُمّي بذلك من قولك: رجل فيه شنوءة أي تقزز. والتقزز التباعد من الأدناس.

قال الداودي: رجال الأزد معروفون بالطول.

انظر: الفتح (6/ 429).




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম মি’রাজের রাতে যখন তাঁকে ভ্রমণ করানো হয়েছিল, তখন তিনি [মুসা (আঃ)-এর] কথা উল্লেখ করে বললেন: “মূসা (আঃ) শ্যামলা বর্ণের, লম্বা, যেন তিনি শানুআ গোত্রের পুরুষদের একজন।”









আল-জামি` আল-কামিল (8266)


8266 - عن عبد الله بن عباس قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:" … وأما موسى فرجل آدم جعد على جمل أحمر مخطوم بخلبة كأني أنظر إليه إذا أنحدر في الوادي يلبي".

متفق عليه: رواه البخاري في الحج (1555)، ومسلم في الإيمان (166: 270) كلاهما عن محمد بن المثنى، حدثنا ابن أبي عدي، عن ابن عون، عن مجاهد، قال كنا عند ابن عباس .. فذكره.




আব্দুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আর মূসা, তিনি ছিলেন ঘন শ্যামলা বর্ণের, কোঁকড়ানো চুলের অধিকারী লোক। তিনি একটি লাল উটের উপর সাওয়ার ছিলেন, যার লাগাম ছিল খেজুর গাছের ছাল বা আঁশের তৈরি। যেন আমি তাকে দেখতে পাচ্ছি, যখন তিনি উপত্যকায় নেমে যাচ্ছিলেন আর তালবিয়া পাঠ করছিলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (8267)


8267 - عن ابن عباس قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم:"رأيت عيسى وموسى وإبراهيم فأما عيسى فأحمر جعد عريض الصدر، وأما موسى فآدم جسيم سبط كأنه من رجال الزُّط".

صحيح: رواه البخاري في أحاديث الأنبياء (3438) عن محمد بن كثير، أخبرنا إسرائيل أخبرنا عثمان بن المغيرة عن مجاهد عن ابن عباس قال .. فذكره.

وهذا هو الصحيح أنه من مسند ابن عباس وأخطأ رواة البخاري فجعلوه من مسند ابن عمر.

قال الحافظ ابن حجر: كذا وقع في جميع الروايات التي وقعت لنا من نسخ البخاري (أي من مسند ابن عمر) وقد تعقبه أبو ذر في روايته فقال: كذا وقع في جميع الروايات المسموعة عن الفربري: مجاهد عن ابن عمر قال: ولا أدري أهكذا حدث به البخاري أو غلط فيه الفربري لأني رأيته في جميع الطرق: عن محمد بن كثير وغيره عن مجاهد عن ابن عباس.

قلت: رواه غير واحد عن محمد بن كثير من مسند ابن عباس، وكذا رواه أصحاب إسرائيل الآخرون منهم: يحيى بن أبي زائدة، وإسحاق بن منصور، والنضر بن شميل، وآدم بن أبي إياس وغيرهم كلهم عن إسرئيل بذكر ابن عباس.
ومما يدل على أن الخطأ من غير البخاري أن الإسماعيلي أخرجه من طريق نصر بن علي عن أبي أحمد الزبيري، عن إسرائيل، وقال فيه: ابن عباس، ولم ينبه على أن البخاري قال فيه: ابن عمر، فلو كان وقع له كذلك لنبّه عليه كعادته.

ويؤيده إخراج البخاري رواية ابن عون، عن مجاهد، عن ابن عباس في الحج (1555) ومما يرجح أن الحديث لابن عباس لا لابن عمر أن ابن عمر كان ينكر على من قال: إن عيسى أحمر، وحلفه على ذلك، وفي رواية مجاهد هذه:"فأما عيسى فأحمر جعد".

فهذا يؤيد أن الحديث لمجاهد عن ابن عباس، لا عن ابن عمر والله أعلم. انظر بعضه في الفتح (6/ 484 - 485)، وتحفة الأشراف (5/ 222).

قوله:"جسيم" أي قوي البدن ليس بالجسيم ولا بالنحيف البائن، وإنما هو ضرب من الرجال وسط بينهما.

قوله:"الزُّط" طوال غير غلاظ، فليس هو بالنحيف الهزيل، ولا الطويل الفاحش المفرط في الطول. وقيل: غير ذلك وهذا أولى ما قيل في وصفه.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, নাবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "আমি ঈসা, মূসা ও ইব্রাহীম (আঃ)-কে দেখেছি। ঈসার কথা বলতে গেলে, তিনি ছিলেন লালচে বর্ণের, কোঁকড়ানো চুলের অধিকারী, প্রশস্ত বুক বিশিষ্ট। আর মূসা (আঃ)-এর কথা বলতে গেলে, তিনি ছিলেন শ্যামলা বর্ণের, মজবুত দেহের অধিকারী, সোজা চুলের অধিকারী, তাঁকে যেন 'জুত' (Zutt) গোত্রের পুরুষদের একজন মনে হচ্ছিল।"









আল-জামি` আল-কামিল (8268)


8268 - عن ابن عباس قال: سرنا مع رسول الله صلى الله عليه وسلم بين مكة والمدينة، فمررنا بواد فقال:"أي واد هذا؟" فقالوا: وادي الأزرق. فقال:"كأني أنظر إلى موسى صلى الله عليه وسلم .. فذكر من لونه وشعره شيئا - لم يحفظه داود - واضعا إصبعيه في أذنيه له جؤار إلى الله بالتلبية، مارًّا بهذا الوادي …".

وفي لفظ:"كأني أنظر إلى موسى عليه السلام هابطا من الثنية وله جؤار إلى الله بالتلبية".

صحيح: رواه مسلم في الإيمان (166: 268، 269) من طرق عن داود بن أبي هند، عن أبي العالية، عن ابن عباس .. فذكره.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমরা রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে মক্কা ও মদীনার মধ্যবর্তী স্থানে পথ চলছিলাম। আমরা একটি উপত্যকার পাশ দিয়ে অতিক্রম করলাম। তিনি জিজ্ঞেস করলেন: “এটি কোন্ উপত্যকা?” লোকেরা বলল: ওয়া-দি আল-আযরাক (নীল উপত্যকা)। তিনি বললেন: “আমি যেন মূসা (আলাইহিস সালাম)-কে দেখতে পাচ্ছি...।” (বর্ণনাকারী দাউদ তাঁর) শরীরের রং ও চুল সম্পর্কে কিছু উল্লেখ করেছিলেন, যা তিনি (দাউদ) স্মৃতিতে রাখতে পারেননি – তিনি কান দু’টিতে তাঁর দু’টি আঙুল ঢুকিয়ে উচ্চস্বরে আল্লাহর কাছে তালবিয়া পাঠ করছেন, আর এই উপত্যকা অতিক্রম করছেন।

অন্য এক বর্ণনায় আছে: “আমি যেন মূসা (আলাইহিস সালাম)-কে এই উঁচু স্থান (গিরিসংকট) থেকে নামতে দেখতে পাচ্ছি, আর তিনি উচ্চস্বরে আল্লাহর কাছে তালবিয়া পাঠ করছেন।”









আল-জামি` আল-কামিল (8269)


8269 - عن جابر أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"عُرِضَ عليّ الأنبياء فإذا موسى ضرْبٌ من الرجال كأنه من رجال شنوءة …".

صحيح: رواه مسلم في الإيمان (167: 271) من طرق عن الليث، عن أبي الزبير، عن جابر .. فذكره.




জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "আমার সামনে নবীগণকে পেশ করা হলো। তখন মূসা (আঃ)-কে দেখা গেল, তিনি হলেন মজবুত গড়নের পুরুষ, যেন তিনি শানুআ গোত্রের পুরুষদের একজন..."









আল-জামি` আল-কামিল (8270)


8270 - عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"كانت بنو إسرائيل يغتسلون عراة ينظر بعضهم إلى سوأة بعض، وكان موسى عليه السلام يغتسل وحده فقالوا: والله ما يمنع موسى أن يغتسل معنا إلا أنه آدر قال: فذهب مرة يغتسل فوضع ثوبه على حجر ففر الحجر بثوبه قال: فجمح موسى بإثره يقول: ثوبي حجر، ثوبي حجر حتى نظرت بنو
إسرائيل إلى سوأة موسى قالوا: والله ما بموسى من بأس، فقام الحجر حتى نُظِر إليه، قال: فأخذ ثوبه، فطفق بالحجر ضربًا". قال أبو هريرة: والله إنه بالحجر ندب ستة أو سبعة ضرب موسى بالحجر.

متفق عليه: رواه البخاري في الوضوء (278)، ومسلم في الفضائل (339: 155) كلاهما من رواية عبد الرزاق، حدثنا معمر عن همام بن منبه قال هذا ما حدثنا أبو هريرة عن محمد رسول الله صلى الله عليه وسلم .. فذكره.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: বনী ইসরাঈলের লোকেরা উলঙ্গ অবস্থায় গোসল করত, আর একে অপরের লজ্জাস্থানের দিকে তাকাত। কিন্তু মূসা (আঃ) একাকী গোসল করতেন। তখন তারা বলাবলি করল: আল্লাহর কসম! মূসা আমাদের সাথে গোসল করা থেকে বিরত থাকেন কেবল এই কারণে যে তিনি অণ্ডকোষের রোগে (আদর) আক্রান্ত।

(নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন:) একবার মূসা (আঃ) গোসল করতে গিয়ে একটি পাথরের উপর তার কাপড় রাখলেন। তখন পাথরটি তার কাপড় নিয়ে দৌড়ে পালালো। তিনি দ্রুত তার পিছু পিছু ছুটলেন এবং বলতে লাগলেন, "আমার কাপড়, হে পাথর! আমার কাপড়, হে পাথর!" অবশেষে বনী ইসরাঈলেরা মূসা (আঃ)-এর লজ্জাস্থানের দিকে তাকালো এবং বলল: আল্লাহর কসম! মূসা (আঃ)-এর মধ্যে কোনো ত্রুটি নেই। এরপর পাথরটি স্থির হয়ে গেল এবং তারা তাকে দেখতে পেল। (নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন:) অতঃপর মূসা (আঃ) তার কাপড় নিলেন এবং পাথরটিকে সজোরে মারতে লাগলেন।

আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: আল্লাহর কসম! পাথরটির উপর মূসা (আঃ)-এর আঘাতের ছয় বা সাতটি চিহ্ন এখনও বিদ্যমান রয়েছে।









আল-জামি` আল-কামিল (8271)


8271 - عن أبي هريرة قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن موسى كان رجلًا حييًا ستيرًا، لا يرى من جلده شيء استحياء منه، فآذاه من آذاه من بني إسرائيل فقالوا: ما يستتر هذا التستر إلا من عيب بجلده إما برص وإما أدرة، وإما آفة، وإن الله أراد أن يبرئه مما قالوا لموسى، فخلا يوما وحده فوضع ثيابه على الحجر، ثم اغتسل فلما فرغ أقبل إلى ثيابه ليأخذها وإن الحجر عدا بثوبه، فأخذ موسى عصاه، وطلب الحجر، فجعل يقول: ثوبي حجر، ثوبي حجر، حتى انتهى إلى ملإ من بني إسرائيل فرأوه عريانا أحسن ما خلق الله، وأبرأه مما يقولون، وقام الحجر، فأخذ ثوبه فلبسه، وطفق بالحجر ضربا بعصاه، فوالله إن بالحجر لندبا من أثر ضربه ثلاثا أو أربعا أو خمسا فذلك قوله: {يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ آذَوْا مُوسَى فَبَرَّأَهُ اللَّهُ مِمَّا قَالُوا وَكَانَ عِنْدَ اللَّهِ وَجِيهًا} [الأحزاب: 69].

صحيح: رواه البخاري في أحاديث الأنبياء (3404) عن إسحاق بن إبراهيم: حدثنا روح بن عبادة: حدثنا عوف عن الحسن ومحمد وخلاس عن أبي هريرة .. فذكره.

وقوله:"لندبًا" أي أثرًا.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: নিশ্চয়ই মূসা (আঃ) ছিলেন অত্যন্ত লাজুক ও পর্দাপ্রিয় মানুষ। লজ্জার কারণে তাঁর শরীরের কিছুই দেখা যেত না। ফলে বনী ইসরাঈলের কিছু লোক তাঁকে কষ্ট দিত এবং বলত: সে যে এত বেশি পর্দা করে, তা শুধুমাত্র তার চামড়ার কোনো দোষের কারণে—হয় কুষ্ঠ রোগ, অথবা অণ্ডকোষ স্ফীতি, অথবা অন্য কোনো ব্যাধি। আল্লাহ তা’আলা মূসা (আঃ)-কে তারা যা বলত তা থেকে মুক্ত করার ইচ্ছা করলেন। একদিন তিনি একাকী নির্জনে গেলেন এবং তাঁর কাপড় একটি পাথরের ওপর রাখলেন, অতঃপর গোসল করলেন। গোসল শেষে তিনি তাঁর কাপড় নেওয়ার জন্য এগিয়ে গেলেন, তখন পাথরটি তাঁর কাপড় নিয়ে দ্রুত পালিয়ে গেল। মূসা (আঃ) তাঁর লাঠি নিলেন এবং পাথরটির পেছনে ছুটলেন। তিনি বলতে লাগলেন: ‘আমার কাপড়, হে পাথর! আমার কাপড়, হে পাথর!’ এভাবে তিনি বনী ইসরাঈলের একটি জনসমাবেশের কাছে পৌঁছলেন। তারা তাঁকে উলঙ্গ অবস্থায় দেখতে পেল। আল্লাহ তাঁকে যেমন সুন্দর সৃষ্টি করেছেন (তা দেখল)। ফলে আল্লাহ তাঁকে তাদের অপবাদ থেকে মুক্ত করে দিলেন। এরপর পাথরটি থেমে গেল। তিনি তাঁর কাপড় নিলেন এবং পরিধান করলেন। আর তিনি তাঁর লাঠি দ্বারা পাথরটিকে আঘাত করতে লাগলেন। আল্লাহর কসম! সেই পাথরে এখনও তাঁর সেই আঘাতের চিহ্ন তিন, চার বা পাঁচটি রয়েছে। আর এটাই হলো সেই বাণীর তাৎপর্য যেখানে আল্লাহ বলেন: "হে মুমিনগণ! তোমরা তাদের মতো হয়ো না, যারা মূসা (আঃ)-কে কষ্ট দিয়েছিল। অতঃপর আল্লাহ তাকে তাদের অপবাদ থেকে মুক্ত করেন। আর তিনি ছিলেন আল্লাহর কাছে সম্মানিত।" (সূরা আল-আহযাব: ৬৯)।









আল-জামি` আল-কামিল (8272)


8272 - عن أبي هريرة قال: كان موسى عليه السلام رجلا حييًّا قال: فكان لا يرى متجردًا قال: فقال بنو إسرائيل: إنه آدر قال: فاغتسل عند مشربة، فوضع ثوبه على حجر فانطلق الحجر يسعى واتبعه بعصاه يضربه ثوبي حجر ثوبي حجر حتى وقف على ملإ من بني إسرائيل ونزلت: {يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ آذَوْا مُوسَى فَبَرَّأَهُ اللَّهُ مِمَّا قَالُوا وَكَانَ عِنْدَ اللَّهِ وَجِيهًا} [الأحزاب: 69].

صحيح. رواه مسلم في الفضائل (339: 156) عن يحيى بن حبيب الحارثي حدثنا يزيد بن زريع: حدثنا خالد الحذاء عن عبد الله بن شقيق قال: أنبأنا أبو هريرة .. فذكره. هكذا ذكره موقوفا وهو مرفوع كما سبق.
وقوله"آدر" أي عظيم الخصيتين.

وأما ما روي عن أنس بن مالك قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم:"إن موسى بن عمران كان إذا أراد أن يدخل الماء لم يلق ثوبه حتى يواري عورته في الماء" فهو ضعيف.

رواه أحمد (13764) عن عبيد الله بن محمد التيمي، حدثنا حماد بن سلمة، عن علي بن زيد، عن أنس بن مالك .. فذكره.

وفي إسناده علي بن زيد بن جُدعان وهو ضعيف باتفاق أهل العلم.

ليس في الحديث ما يخالف عصمة الأنبياء فإن موسى عليه السلام لما خرج من الحمام ليلبس ثيابه لم يكن هناك من ينظر إلى عورته، ولكن الله تبارك وتعالى أراد أن يُبرّئه مما قال به بعض بني إسرائيل، فذهب الحجر بثوبه، وهو يجري وراءه ليأخذ ثوبه ويلبسه حتى وصل إلى ملأ من بني إسرائيل فرأوه أنه أجمل ما يكون وأحسنه.

فأين فيه مخالفة لعصمة الأنبياء؟ لأن موسى عليه السلام لم يقصد أن يخرج أمام الناس عريانا.

ثم قول من يدعي لعل بعض الرواة أخطأوا في ذكر هذه القصة، فإنْ كان مقصودهم أن بعضهم كذبوا على النبي صلى الله عليه وسلم فهذا أمر خطير، فإن راويه أبو هريرة رضي الله عنه راوية الإسلام، وأحد أركان الدين، ونسبة الكذب إليه يشكّكُ في جميع مروياته، وإن قلنا بل كذب تلاميذه عليه، فإن هولاء التلاميذ من الثقات المعروفين هم الذين نقلوا لنا كتاب ربنا وسنة نبينا، ونسبة الكذب إليهم يشكك في القرآن والسنة أيضا، فإن قيل: إن بعضهم قد وقع منه الوهم، فيطلب من قائله الدليل على ذلك لأن الوهم لا يثبت بالظن، فإن فتح هذا الباب لم يسلم منه أحدٌ.



الأجلين؟ قال: أبرهما وأوفاهما، فلما أراد فراق شعيب أمر امرأته أن تسأل أباها أن يعطيها من غنمه ما يعيشون به، فأعطاها ما ولدت من غنمه من قالب لون من ولد ذلك العام، وكانت غنمه سوداء حسناء، فانطلق موسى إلى عصاه فتسلمها من طرفها، ثم وضعها في أدنى الحوض، ثم أوردها فسقاها ووقف موسى بإزاء الحوض فلم يصدر منها شاة إلا ضرب جنبها شاة شاة قال: فانمت واثلثت ووضعت كلها قوالب ألوان إلا شاة أو شاتين، ليس فيها قشوش قال يحيى: ولا ضنوب، وقال صفوان: ولا ضنوب، قال أبو زرعة الصواب: طنوب، ولا عزوز ولا ثعول، ولا كمشة، تفوت الكف، قال النبي صلى الله عليه وسلم:"ولو افتحتم الشام وجدتم تلك الغنم وهي السامرية". وهو ضعيف أيضا.

رواه ابن أبي عاصم في الآحاد والمثاني (1378)، وابن أبي حاتم في تفسيره (9/ 2970) - والسياق له - والطبراني في الكبير (17/ 134) كلهم من طرق عن ابن لهيعة، عن الحارث بن يزيد الحضرمي، عن علي بن رباح اللخمي قال: سمعت عتبة بن الندر السلمي .. فذكره.

وابن لهيعة ضعيف، والرواة عنه ليسوا من العبادلة الذين تحمل أهل العلم روايتهم عنه.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: মূসা (আঃ) ছিলেন অত্যন্ত লাজুক স্বভাবের পুরুষ। তিনি কখনোই নিজেকে বিবস্ত্র অবস্থায় প্রকাশ করতেন না। তখন বনী ইসরাঈলরা বলতে শুরু করল যে, নিশ্চয়ই তিনি 'আ-দার' (অর্থাৎ তার অণ্ডকোষ অস্বাভাবিকভাবে বড়)। (একদিন) তিনি একটি ঝরনার কাছে গোসল করতে গেলেন এবং তার কাপড় একটি পাথরের ওপর রাখলেন। অতঃপর পাথরটি দৌড়ে চলতে শুরু করল। মূসা (আঃ) লাঠি দিয়ে পাথরটিকে আঘাত করতে করতে এর পিছু নিলেন, (বলতে লাগলেন,) "আমার কাপড়, হে পাথর! আমার কাপড়! আমার কাপড়, হে পাথর!" অবশেষে পাথরটি বনী ইসরাঈলের এক দল লোকের সামনে গিয়ে থেমে গেল (এবং তারা তাঁকে দেখল)। তখন আল্লাহ্‌র পক্ষ থেকে এই আয়াতটি নাযিল হয়: "হে ঈমানদারগণ! তোমরা তাদের মতো হয়ো না, যারা মূসাকে কষ্ট দিয়েছিল। অতঃপর আল্লাহ্‌ তাকে তাদের অপবাদ থেকে মুক্ত করে দেন। আর তিনি আল্লাহ্‌র কাছে অত্যন্ত সম্মানিত ছিলেন।" (সূরা আহযাব: ৬৯)









আল-জামি` আল-কামিল (8273)


8273 - عن سعيد بن جبير قال: سألني يهودي من أهل الحيرة أي الأجلين قضى موسى؟ قلت: لا أدري حتى أقدم على حبر العرب، فأسأله فقدمت، فسألت ابن عباس فقال: قضى أكثرهما وأطيبهما، إن رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا قال فعل.

صحيح: رواه البخاري في الشهادات (2684) عن محمد بن عبد الرحيم، أخبرنا سعيد بن سليمان، حدثنا مروان بن شجاع، عن سالم الأفطس، عن سعيد بن جبير .. فذكره.




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, সাঈদ ইবন জুবাইর বলেন: হীরা এলাকার একজন ইহুদি আমাকে জিজ্ঞেস করেছিল যে মূসা (আঃ) (চুক্তির) দুটি মেয়াদের মধ্যে কোনটি পূর্ণ করেছিলেন? আমি বললাম, আমি জানি না, যতক্ষণ না আমি আরবের মহাজ্ঞানী পন্ডিতজনের কাছে এসে তাকে জিজ্ঞেস করতে পারি। এরপর আমি এসে ইবন আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-কে জিজ্ঞেস করলাম। তিনি বললেন: তিনি (মূসা আঃ) দুটির মধ্যে যেটি দীর্ঘ ও সর্বোত্তম ছিল, সেটিই পূর্ণ করেছিলেন। নিশ্চয় আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন কোনো কথা বলতেন, তা তিনি করতেন।









আল-জামি` আল-কামিল (8274)


8274 - عن ابن عباس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم سئل: أي الأجلين قضى موسى؟ قال:"أتمهما وأكملهما".

حسن: رواه البزار (كشف الأستار - 2245) عن أحمد بن أبان القرشي، ثنا سفيان - يعني ابن عيينة - ثنا إبراهيم بن أعين، عن الحكم بن أبان، عن عكرمة، عن ابن عباس .. فذكره. قال البزار: لا نعلمه عن ابن عباس مرفوعا إلا من هذا الوجه.
قلت: إسناده حسن من أجل الحكم بن أبان فإنه مختلف فيه، غير أنه حسن الحديث.

وروي أيضا عن ابن عباس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: سألت جبريل أي الأجلين قضى موسى؟ قال:"أتمهما وأكملهما".

أخرجه الحميدي في مسنده (535)، ومن طريقه: الطبري في تفسيره (18/ 236)، وابن أبي حاتم في تفسيره (9/ 2970) عن سفيان بن عيينة قال: ثني إبراهيم بن يحيى بن أبي يعقوب، عن الحكم بن أبان، عن عكرمة، عن ابن عباس .. فذكره.

وفيه إبراهيم بن يحيى ذكره ابن حبان في الثقات وقال الأزدي: لا يتابع في حديثه، وقال الذهبي:"بخبر منكر والرجل نكرة" ثم ذكر هذا الحديث. انظر: الميزان (1/ 74).

وقال ابن كثير: إبراهيم هذا غير معروف إلا بهذا الحديث. البداية والنهاية (2/ 50 - 51). وفي الباب أحاديث أخرى لا تصح.




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল, মূসা (আঃ) দুই মেয়াদের মধ্যে কোনটি পূর্ণ করেছিলেন? তিনি বললেন: "দুটির মধ্যে যা ছিল সম্পূর্ণতম ও পূর্ণাঙ্গতম।"









আল-জামি` আল-কামিল (8275)


8275 - عن عائشة قالت: كان أول ما بدئ به رسول الله صلى الله عليه وسلم من الوحي الرؤيا الصادقة في النوم وفيه:

فرجع النبي صلى الله عليه وسلم إلى خديجة يرجف فؤاده فانطلقت به إلى ورقة بن نوفل وكان رجلا تنصر يقرأ الإنجيل بالعربية، فقال ورقة: ماذا ترى؟ فأخبره فقال ورقة: هذا الناموس الذي أنزل الله على موسى، وإن أدركني يومك أنصرك نصرًا مؤزرًا.

متفق عليه: رواه البخاري في أحاديث الأنبياء (3392)، ومسلم في الإيمان (160: 252) كلاهما من طريق الزهري قال: حدثني عروة بن الزبير، عن عائشة .. فذكرته.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর প্রতি প্রথম যে ওহী আসা শুরু হয়েছিল, তা ছিল ঘুমের মধ্যে সত্য স্বপ্ন। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ভীত-কম্পিত হৃদয়ে খাদীজা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে ফিরে আসলেন। অতঃপর তিনি (খাদীজা) তাঁকে নিয়ে ওয়ারাকাহ ইবনে নওফলের কাছে গেলেন। ওয়ারাকাহ এমন একজন লোক ছিলেন যিনি খ্রিস্টধর্ম গ্রহণ করেছিলেন এবং আরবিতে ইনজীল (বাইবেল) পড়তেন। তখন ওয়ারাকাহ জিজ্ঞাসা করলেন: আপনি কী দেখেছেন? রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁকে জানালেন। ওয়ারাকাহ বললেন: ইনি সেই নামূস (ওহীবাহী ফেরেশতা) যিনি আল্লাহ তাআলা মূসা (আঃ)-এর প্রতি নাযিল করেছিলেন। যদি আমি আপনার নবুওয়াতের সময় পাই, তবে আমি আপনাকে জোরালোভাবে সাহায্য করব।









আল-জামি` আল-কামিল (8276)


8276 - عن ابن عباس أن النبي صلى الله عليه وسلم لما قدم المدينة وجدهم يصومون يوما يعني عاشوراء فقالوا: هذا يوم عظيم، وهو يوم نجّى الله فيه موسى، وأغرق آل فرعون، فصام موسى شكرًا لله، فقال:"أنا أولى بموسى منهم فصامه وأمر بصيامه".

متفق عليه: رواه البخاري في أحاديث الأنبياء (3397)، ومسلم في الصيام (1130: 127) كلاهما من طريق سعيد بن جبير، عن ابن عباس .. فذكره.
وهذا لفظ البخاري. وفي لفظ مسلم: هذا اليوم الذي أظهر الله فيه موسى وبني إسرائيل على فرعون فنحن نصومه تعظيما له، فقال النبي صلى الله عليه وسلم:"نحن أحق بموسى منكم، فأمر بصومه".




ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যখন মদীনায় আগমন করলেন, তখন তিনি তাদেরকে একটি দিন রোযা রাখতে দেখলেন—অর্থাৎ আশুরার দিন। তারা বলল: "এটি একটি মহান দিন। এই দিন আল্লাহ মূসা (আঃ)-কে মুক্তি দেন এবং ফিরআউনের পরিবারবর্গকে ডুবিয়ে দেন। মূসা (আঃ) আল্লাহর শুকরিয়া আদায়স্বরূপ রোযা রেখেছিলেন।" তখন তিনি বললেন: "আমি তাদের চেয়ে মূসার অধিক নিকটবর্তী।" অতঃপর তিনি নিজে রোযা রাখলেন এবং রোযা রাখার নির্দেশ দিলেন।









আল-জামি` আল-কামিল (8277)


8277 - عن أبي سعيد عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"الناس يُصعقون يوم القيامة فأكون أول من يفيق، فإذا أنا بموسى آخذ بقائمة من قوائم العرش، فلا أدري أفاق قبلي أم جوزي بصعقة الطور".

متفق عليه: رواه البخاري في أحاديث الأنبياء (3398)، ومسلم في الفضائل (2374: 162)

كلاهما من حديث سفيان، عن عمرو بن يحيى، عن أبيه، عن أبي سعيد الخدري .. فذكره.




আবু সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "কিয়ামতের দিন মানুষ বেহুঁশ (সংজ্ঞা) হবে। অতঃপর আমিই সর্বপ্রথম হুঁশ ফিরে পাওয়া ব্যক্তি হব। তখন আমি দেখব যে মূসা (আঃ) আরশের স্তম্ভসমূহের মধ্যে একটি স্তম্ভ ধরে আছেন। আমি জানি না, তিনি কি আমার পূর্বে হুঁশ ফিরে পেয়েছেন, নাকি তূর পাহাড়ে যে বেহুঁশ হয়েছিলেন, তার বিনিময়ে তাকে এই বেহুঁশ হওয়া থেকে অব্যাহতি দেওয়া হয়েছে।"









আল-জামি` আল-কামিল (8278)


8278 - عن أبي هريرة عن النبي صلى الله عليه وسلم قال:"لا تخيروني على موسى، فإن الناس يصعقون يوم القيامة، فأصعق معهم فأكون أول من يفيق، فإذا موسى باطش جانب العرش، فلا أدري أكان فيمن صعق فأفاق قبلي أو كان ممن استثنى الله". والحديث فيه قصة.

متفق عليه: رواه البخاري في أحاديث الأنبياء (2411)، ومسلم في الفضائل (2373: 159) كلاهما من طريق عبد الرحمن الأعرج، عن أبي هريرة .. فذكره. إلا أن البخاري قرن أبا سلمة بن عبد الرحمن بعبد الرحمن الأعرج.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "তোমরা আমাকে মূসার উপর শ্রেষ্ঠত্ব দিও না। কেননা, কিয়ামতের দিন মানুষ বেহুঁশ হয়ে যাবে, তখন আমিও তাদের সঙ্গে বেহুঁশ হয়ে যাব। আর আমিই সর্বপ্রথম জ্ঞান ফিরে পাব। তখন দেখব, মূসা (আঃ) আরশের পাশ ধরে আছেন। সুতরাং আমি জানি না, তিনি কি তাদের মধ্যে ছিলেন, যারা বেহুঁশ হওয়ার পর আমার আগেই জ্ঞান ফিরে পেয়েছেন, নাকি তিনি তাদের মধ্যে ছিলেন, যাদেরকে আল্লাহ তাআলা (বেহুঁশ হওয়া থেকে) অব্যাহতি দিয়েছেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (8279)


8279 - عن أنس بن مالك، أن النبي صلى الله عليه وسلم قرأ هذه الآية: {فَلَمَّا تَجَلَّى رَبُّهُ لِلْجَبَلِ جَعَلَهُ دَكًّا} قال حماد: هكذا، وأمسك سليمان بطرف إبهامه على أنملة أصبعه اليمنى، قال: فساخ الجبل {وَخَرَّ مُوسَى صَعِقًا}.

صحيح: رواه الترمذي (3074)، وأحمد (12260)، وابن أبي عاصم في السنة (480، 481)، والحاكم (2/ 320) كلهم من طرق عن حماد بن سلمة، عن ثابت، عن أنس .. فذكره.

قال الترمذي:"حسن غريب صحيح لا نعرفه إلا من حديث حماد بن سلمة".

وقال الحاكم:"هذا حديث صحيح على شرط مسلم".

وقوله:"وأمسك سليمان" هو ابن حرب الراوي عن حماد بن سلمة.




আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এই আয়াতটি পাঠ করেন: "অতঃপর যখন তাঁর প্রতিপালক পর্বতের উপর আপন জ্যোতি প্রকাশ করলেন, তখন তা (পর্বতকে) চূর্ণ-বিচূর্ণ করে দিল।" (সূরা আল-আ'রাফ ৭:১৪৩)। (বর্ণনাকারী) হাম্মাদ বলেন: এভাবে (ঘটেছিল)। আর সুলায়মান (ইবনু হারব) তাঁর ডান আঙ্গুলের গাঁটের উপর বুড়ো আঙ্গুলের অগ্রভাগ দিয়ে ধরলেন (ইশারা করে দেখালেন)। তিনি বলেন: ফলে পর্বতটি বসে গেল এবং "মূসা সংজ্ঞাহীন হয়ে পড়ে গেলেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (8280)


8280 - عن عبد الله بن مسعود قال: لما كان يوم حنين آثر رسول الله صلى الله عليه وسلم ناسا في القسمة، فأعطى الأقرع بن حابس مائة من الإبل، وأعطى عيينة مثل ذلك، وأعطى أناسا من أشراف العرب، وآثرهم يومئذ في القسمة فقال رجل: والله إن هذه لقسمة ما عدل فيها، وما أريد فيها وجه الله قال: فقلت: والله لأخبرن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: فأتيته فأخبرته بما
قال. قال: فتغير وجهه حتى كان كالصرف ثم قال:"فمن يعدل إن لم يعدل الله ورسوله! ؟" قال: ثم قال:"يرحم الله موسى قد أوذي بأكثر من هذا فصبر".

متفق عليه: رواه البخاري في فرض الخمس (3150)، ومسلم في الزكاة (1062: 140) كلاهما من طرق عن جرير عن منصور عن أبي وائل، عن عبد الله قال .. فذكره.

وفي لفظ: قال عبد الله: فأتيتُ النبي صلى الله عليه وسلم فساررته فغضب من ذلك غضبا، واحمرَّ وجهه حتى تمنيتُ أني لم أذكره ثم قال:"قد أوذي موسى …".

رواه البخاري في أحاديث الأنبياء (3405)، ومسلم في الزكاة (1062: 141) كلاهما من رواية الأعمش قال: سمعت أبا وائل قال: سمعت عبد الله .. فذكره.




আবদুল্লাহ ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: যখন হুনাইনের যুদ্ধ হলো, তখন রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বন্টনের সময় কিছু মানুষকে প্রাধান্য দিলেন। তিনি আকরা ইবনু হাবিসকে একশ' উট দিলেন, উয়াইনাকে দিলেন এর সমপরিমাণ, এবং তিনি আরবের গণ্যমান্য অন্যান্য কিছু লোককেও দিলেন, সেদিন বন্টনের সময় তিনি তাদের প্রতি বিশেষ অনুগ্রহ দেখালেন। তখন এক ব্যক্তি বললো: আল্লাহর কসম, এই বন্টনে ন্যায় করা হয়নি এবং এতে আল্লাহর সন্তুষ্টির উদ্দেশ্যও ছিল না। আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: আমি বললাম: আল্লাহর কসম, আমি অবশ্যই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এ কথা জানাবো। তিনি (আবদুল্লাহ) বললেন: অতঃপর আমি তাঁর কাছে এলাম এবং লোকটি যা বলেছে তা তাঁকে জানালাম। তিনি (আবদুল্লাহ) বলেন: এতে তাঁর চেহারা এমনভাবে পরিবর্তিত হলো যেন তা তীব্র রক্তিম বর্ণ ধারণ করেছে। অতঃপর তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "আল্লাহ ও তাঁর রাসূল যদি ন্যায়বিচার না করেন, তবে আর কে ন্যায়বিচার করবে?!" আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: অতঃপর তিনি বললেন: "আল্লাহ মূসার প্রতি রহম করুন, তাঁকে এর চেয়েও বেশি কষ্ট দেওয়া হয়েছিল, কিন্তু তিনি ধৈর্য ধারণ করেছিলেন।"