আল-জামি` আল-কামিল
9368 - عن أنس قال: رأيت النبي صلى الله عليه وسلم أتي بمرقة فيها دباء وقديد، فرأيته يتتبع الدباء يأكلها.
متفق عليه: رواه البخاري في الأطعمة (5437) ومسلم في الأشربة (144: 2041) كلاهما من حديث مالك بن أنس، عن إسحاق بن عبد الله بن أبي طلحة، أنه سمع أنس بن مالك فذكره.
والسياق للبخاري، وهو عند مسلم في سياق أطول.
والحديث في الموطأ في النكاح (51) بنحو حديث مسلم، لكن ليس فيه ذكر"القديد". والقديد: هو اللحم يقطع طولًا ويملّح ويجفّف في الهواء والشمس.
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বললেন: আমি নাবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে দেখলাম যে তাঁর কাছে এক ধরনের ঝোল আনা হলো, যাতে লাউ (দুব্বা) এবং শুকনা মাংস (কাদীদ) ছিল। আমি তাঁকে দেখলাম যে তিনি লাউ খুঁজে খুঁজে খাচ্ছেন।
9369 - عن أنس بن مالك قال: كان النبي صلى الله عليه وسلم يحب الدباء قال: فأتي بطعام أو دعي له قال أنس: فجعلت أتتبعه فأضعه بين يديه لما أعلم أنه يحبه.
صحيح: رواه أحمد (13894) عن محمد بن جعفر، ثنا شعبة وحجاج، عن قتادة، قال: سمعت أنس بن مالك يقول: فذكره. وإسناده صحيح.
ورواه النسائي في الكبرى (6630) من طريق محمد بن جعفر، ثنا شعبة وحده بإسناده مختصرًا. ورواه ابن ماجه (3302) من وجه آخر عن أنس بلفظ:"كان النبي صلى الله عليه وسلم يحب القرع".
আনাস ইবনু মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) লাউ (বা কদু) পছন্দ করতেন। তিনি বলেন, অতঃপর তাঁর সামনে খাবার আনা হলো অথবা তাঁকে খাবারের জন্য ডাকা হলো। আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, তখন আমি সেগুলো (লাউয়ের টুকরোগুলো) খুঁজে খুঁজে তাঁর সামনে রাখছিলাম, কারণ আমি জানতাম যে তিনি তা পছন্দ করেন।
9370 - عن حكيم بن جابر عن أبيه قال: دخلت على النبي صلى الله عليه وسلم في بيته وعنده هذه الدباء، فقلت: أي شيء هذا؟ قال:"هذا القرع هو الدباء، نكثر به طعامنا".
صحيح: رواه ابن ماجه (3304) والإمام أحمد (19101) والترمذي في الشمائل (163) والنسائي في الكبرى (6631) من طريق إسماعيل بن أبي خالد، عن حكيم بن جابر، عن أبيه، فذكره.
وإسناده صحيح وجابر هو ابن طارق الأحمسي صحابي مقل.
وأما ما روي عن أبي طالوت قال: دخلت على أنس بن مالك وهو يأكل القرع وهو يقول: يا لك شجرة ما أحبك إلا لحب رسول الله صلى الله عليه وسلم إياك، فهو ضعيف.
رواه الترمذي (1849) عن قتيبة بن سعيد، ثنا الليث، عن معاوية بن صالح، عن أبي طالوت قال فذكره.
قال الترمذي: هذا حديث غريب من هذا الوجه.
قلت: إسناده ضعيف من أجل جهالة أبي طالوت.
জাবির (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর ঘরে প্রবেশ করলাম, তখন তাঁর কাছে এই লাউ (দুব্বা) ছিল। তখন আমি জিজ্ঞেস করলাম, এটা কী জিনিস? তিনি বললেন, "এটা হলো লাউ (ক্বরা'), এটাই দুব্বা। আমরা এর মাধ্যমে আমাদের খাদ্য বৃদ্ধি করি।"
9371 - عن أنس قال: بعثت معي أم سليم بمكتل فيه رطب إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، فلم أجده وخرج قريبًا إلى مولى له دعاه فصنع له طعامًا، فأتيته وهو يأكل، قال: فدعاني لآكل معه، قال: وصنع ثريدة بلحم وقرع، قال: فإذا هو يعجبه القرع، قال: فجعلت أجمعه فأدنيه منه، فلما طعمنا منه رجع إلى منزله، ووضعت المكتل بين يديه، فجعل يأكل ويقسم حتى فرغ من آخره.
صحيح: رواه ابن ماجه (3303) والإمام أحمد (12052) من طريق ابن أبي عدي، عن حميد (هو الطويل) عن أنس، فذكره. وإسناده صحيح.
ورواه ابن حبان (6380) من وجه آخر عن حميد بإسناده، مثله إلا أنه قال:"فيه لحم ودباء".
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, উম্মে সুলাইম (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমার সাথে করে খেজুর ভর্তি একটি পাত্র রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট পাঠালেন। আমি তাঁকে পেলাম না। তিনি তখন তাঁর এক গোলামের কাছে গিয়েছিলেন, যে তাঁকে ডেকেছিল এবং তার জন্য খাবার তৈরি করেছিল। আমি তাঁর কাছে এলাম যখন তিনি খাচ্ছিলেন। আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: অতঃপর তিনি আমাকে তাঁর সাথে খেতে ডাকলেন। তিনি বললেন: সেখানে গোশত ও লাউ (বা কদু) দিয়ে সারীদ (মাংসের ঝোলে ভেজানো রুটি) তৈরি করা হয়েছিল। তিনি বললেন: হঠাৎ দেখলাম তিনি লাউ খুব পছন্দ করছেন। তখন আমি লাউগুলো একত্রিত করে তাঁর কাছে এগিয়ে দিচ্ছিলাম। যখন আমরা তা খেলাম, তিনি তাঁর বাড়িতে ফিরে এলেন, আর আমি খেজুরের পাত্রটি তাঁর সামনে রাখলাম। তিনি সেগুলো খেতে লাগলেন এবং ভাগ করে দিতে লাগলেন, যতক্ষণ না তা শেষ হয়ে গেল।
9372 - عن عائشة قالت: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يحب الحلواء والعسل.
متفق عليه: رواه البخاري في الأطعمة (5431) وفي الطب (5682) ومسلم في الطلاق (21: 1474) كلاهما من طريق هشام، قال: أخبرني أبي، عن عائشة، فذكرته. واللفظ للبخاري وهو عند مسلم في حديث طويل.
قوله: الحلواء بالمد وفي لغة بالقصر (حلوى) وتطلق على كل حلو يؤكل. وقال الخطابي: اسم الحلوى لا يقع إلى على ما دخلته الصنعة.
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হালুয়া (মিষ্টান্ন) ও মধু পছন্দ করতেন।
9373 - عن أبي هريرة قال: كنا مع النبي صلى الله عليه وسلم في دعوة، فرفع إليه الذراع وكانت تعجبه فنهس منها نهسة .. الحديث بطوله في الشفاعة.
متفق عليه: رواه البخاري في الأنبياء (3340) ومسلم في الإيمان (327: 194) كلاهما من طريق أبي حيان، عن أبي زرعة، عن أبي هريرة قال: فذكره.
أبو حيان اسمه يحيى بن سعيد بن حيان التميمي.
أبو زرعة اسمه هرم بن عمرو بن جرير.
قوله:"نهس منها نهسة" أي أخذ بأطراف أسنانه.
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমরা নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে এক দাওয়াতে ছিলাম। তখন তাঁর সামনে (রান্না করা পশুর) সামনের পা (কাঁধের অংশ) পেশ করা হলো। এটি তাঁর নিকট পছন্দনীয় ছিল। অতঃপর তিনি তা থেকে এক কামড় নিলেন...। এই হাদীসটি শাফাআত (সুপারিশ) সংক্রান্ত দীর্ঘ হাদীসের অংশ।
9374 - عن عبد الله بن مسعود قال: كان أحب العراق إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم الذراع، ذراع الشاة، وكان قد سم في الذراع، وكان يرى أن اليهود هم سموه.
حسن: رواه أبو داود (3781، 3780) والترمذي في الشمائل (161) وأحمد (3777، 3733) واللفظ له - كلهم من طريق زهير بن معاوية، عن أبي إسحاق، عن سعد بن عياض، عن ابن مسعود قال: فذكره.
وإسناده حسن من أجل سعد بن عياض الثمالي فإنه حسن الحديث.
وزهير بن معاوية سمع من أبي إسحاق بعد تغيره لكنه توبع تابعه إسرائيل بن يونس عند أحمد (3778).
قوله: والعراق: جمع عرق بمعنى العظم الذي عليه بقية لحم.
وأما ما روي عن عائشة قالت: ما كان الذراع أحب اللحم إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، ولكنه لا يجد اللحم إلا غثًا، فكان يعجل إليه لأنه أعجلها نضجًا. فهو ضعيف.
رواه الترمذي في جامعه (1838) وفي الشمائل (172) من طريق فليح بن سليمان، عن عبد الوهاب بن يحيى، عن عبد الله بن الزبير، عن عائشة فذكرته.
فيه عبد الوهاب بن يحيى بن عباد بن عبد الله بن الزبير قال عنه الحافظ في التقريب:"مقبول" يعني حيث يتابع وإلا فليّن الحديث، ولم أجد له متابعًا.
ومتن الحديث مخالف لما في الصحيح:"كان أحب اللحم إليه الذراع".
وكذلك لا يصح ما رُوي عن سلمى أم رافع: أن الحسن بن علي، وابن عباس، وابن جعفر أتوها فقالوا لها: اصنعي لنا طعامًا مما كان يعجب رسول الله صلى الله عليه وسلم ويحسن أكله، فقالت: يا بني، لا تشتهيه اليوم، قال: بلى اصنعيه لنا، قال: فقامت فأخذت شيئًا من الشعير فطحنته، ثم جعلته في قدر وصبت عليه شيئًا من زيت، ودقت الفلفل والتوابل فقربته إليهم فقالت: هذا مما كان يعجب رسول الله صلى الله عليه وسلم ويحسن أكله.
رواه الترمذي في الشمائل (180) والطبراني في الكبير (24/ 299) كلاهما من طريق الفضيل ابن سليمان، حدثنا فائد مولى عبيد الله بن علي بن رافع، قال: حدثني عبيد الله بن علي عن جدته سلمى قالت: فذكرته.
وإسناده ضعيف من أجل الفضيل بن سليمان.
وكذلك عبيد الله بن علي قال فيه الحافظ: لين الحديث.
تنبيه: سقط من مطبوعة الطبراني"حدثني عبيد الله بن علي" وسلمى أم رافع صحابية وهي حاضنة إبراهيم بن النبي صلى الله عليه وسلم وزوجة أبي رافع، وخادمة النبي صلى الله عليه وسلم وطباخته.
وكذلك لا يصح ما جاء عن ابن عباس أنه قال: كان أحب الطعام إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم الثريد من الخبز والثريد من الحيس.
رواه أبو داود (3783) عن محمد بن حسان السمتي، وابن سعد (1/ 393) عن سعيد بن سليمان كلاهما عن المبارك بن سعيد، أخبرنا عمر بن سعيد أخوه، عن رجل من أهل البصرة، عن عكرمة، عن ابن عباس قال: فذكره.
وإسناده ضعيف لجهالة الرجل البصري، وبه أعله أبو داود فلذا قال عقب إخراج الحديث: وهو ضعيف.
تنبيه: رواه الحاكم (4/ 116) من طريق محمد بن شجاع الحضرمي أنبانا المبارك بن سعيد، عن عمر بن سعيد، عن عكرمة عن ابن عباس به، فأسقط الرجل البصري من الإسناد. فبناءً على ظاهره صحّحه الحاكم.
ورواه ابن عساكر في تاريخه (4/ 241) من طريق الحسن بن عرفة عن المبارك به عن عمر بن سعيد عن عكرمة - وأعله فقال: كذا قال: عن عكرمة لم يذكر بينهما أحدًا. ورواه غيره عن المبارك فأدخل فيه رجلًا من أهل البصرة.
وكذلك لا يصح ما رُوي عن أنس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان يعجبه الثفل.
رواه الترمذي في الشمائل (177) وابن سعد (1/ 393) وأحمد (13300) والبيهقي في الشعب (5924) والحاكم (4/ 115 - 116) كلهم من طريق عباد بن العوام، عن حميد الطويل، عن أنس قال: فذكره.
سكت عليه الحاكم، وفيه علة بينها البيهقي وهي مخالفة عباد في رفع هذا الحديث. فقد خالفه حماد بن سلمة ووهيب بن خالد قالا: أخبرنا حميد، عن أنس قال: كان أحب الطعام إلى عمر الثفل، وأحب الشراب إليه النبيذ" فجعلاه موقوفًا.
رواه ابن سعد (3/ 318) والبيهقي في الشعب (5925).
قال البيهقي:"وهذا أصح من الذي قبله" أي من المرفوع.
والثفل: قيل: هو الثريد، وقيل: هو ما بقي من الطعام.
আব্দুল্লাহ ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের নিকট (হাড়ের সাথে লেগে থাকা) গোশতের মধ্যে পশুর বাহুর গোশত সবচেয়ে প্রিয় ছিল, অর্থাৎ বকরীর বাহুর গোশত। আর এই বাহুর গোশতেই বিষ মিশ্রিত করা হয়েছিল। তিনি (রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মনে করতেন যে, ইয়াহুদিরাই তাতে বিষ দিয়েছে।
9375 - عن عبد الله بن جعفر بن أبي طالب قال: رأيت النبي صلى الله عليه وسلم يأكل الرطب بالقثاء.
متفق عليه: رواه البخاري في الأطعمة (5440) ومسلم في الأشربة (2043) كلاهما من طريق إبراهيم بن سعد، عن أبيه، عن عبد الله بن جعفر، فذكره.
والقثاء نوع من البطيخ يشبه الخيار لكنه أطول.
আব্দুল্লাহ ইবনে জাফর ইবনে আবী তালিব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি নাবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে দেখেছি যে তিনি রুতাব (তাজা খেজুর) দিয়ে কিসসা’ খাচ্ছিলেন।
9376 - عن عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم كان يأكل البطيخ بالرطب.
وزاد في رواية: فيقول:"نكسر حر هذا ببرد هذا، وبرد هذا بحر هذا".
صحيح: رواه أبو داود (3836) والترمذي (1843) والنسائي في الكبرى (6687) وابن حبان (5247، 5246) كلهم من طرق عن هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة، فذكرته وإسناده صحيح.
وقال الترمذي: حسن غريب.
والزيادة تفرد بها أبو داود من طريق أبي أسامة، حدثنا هشام بن عروة بإسناده.
قال ابن القيم في"الزاد" (4/ 287): وفي البطيخ عدة أحاديث لا يصح منها شيء غير هذا الحديث الواحد.
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তরমুজ তাজা খেজুরের (রুতাব) সাথে খেতেন।
আরেক বর্ণনায় অতিরিক্ত এসেছে যে তিনি বলতেন, "আমরা এর (খেজুরের) উষ্ণতাকে এর (তরমুজের) শীতলতা দ্বারা এবং এর (তরমুজের) শীতলতাকে এর (খেজুরের) উষ্ণতা দ্বারা প্রশমিত করি।"
9377 - عن أنس قال: رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم يجمع بين الرطب والخربز.
صحيح: رواه الإمام أحمد (12449) والترمذي في الشمائل (201) والنسائي في الكبرى (6692) من طريق وهب بن جرير، ثنا أبي قال: سمعت حميدًا الطويل يحدث عن أنس فذكره. وإسناده صحيح.
وصحّح إسناده أيضا الحافظ في الفتح
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে দেখেছি যে, তিনি তাজা খেজুর এবং তরমুজ (বা খুরবুজ) একত্রে খেতেন।
9378 - عن جابر بن عبد الله قال: إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال:"من أكل ثومًا أو بصلًا فليعتزلنا -أو ليعتزل مسجدنا- وليقعد في بيته" وأنه أتي بقدر فيه خضرات من بقول، فوجد لها ريحًا، فسأل فأخبر بما فيها من البقول، فقال:"قربوها" إلى بعض أصحابه، فلما رآه كره أكلها قال:"كل، فإني أناجي من لا تناجي".
متفق عليه: رواه البخاري (855) ومسلم (73: 564) والسياق له - من طريق ابن وهب،
أخبرني يونس، عن ابن شهاب، حدثني عطاء بن أبي رباح، أن جابر بن عبد الله قال: فذكره.
জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "যে ব্যক্তি রসুন অথবা পেঁয়াজ খায়, সে যেন আমাদের থেকে দূরে থাকে—অথবা বলেছেন, আমাদের মসজিদ থেকে দূরে থাকে—এবং সে যেন তার বাড়িতে বসে থাকে।" আর তাঁর কাছে একবার একটি পাত্র আনা হলো যাতে কিছু সবজি (শাক জাতীয়) ছিল। তিনি সেটির গন্ধ পেলেন এবং জিজ্ঞাসা করলেন। তখন তাঁকে পাত্রে কী কী সবজি আছে তা জানানো হলো। তিনি বললেন: "তোমাদের কিছু সাহাবীর কাছে এটি নিয়ে যাও।" যখন তিনি দেখলেন যে সাহাবী (গন্ধের কারণে) তা খেতে অপছন্দ করছেন, তখন তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তুমি খাও, কারণ আমি তাঁর সাথে নীরবে কথোপকথন করি, যাঁর সাথে তুমি কথোপকথন করো না।"
9379 - عن أبي أيوب الأنصاري قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا أتي بطعام أكل منه وبعث بفضله إلي، وإنه بعث إليّ يومًا بفضلة لم يأكل منها، لأنه فيها ثومًا، فسألته: أحرام هو؟ قال:"لا، ولكني أكرهه من أجل ريحه" قال: فإني أكره ما كرهت.
صحيح: رواه مسلم في الأشربة (170: 2053) من طريق محمد بن جعفر، ثنا شعبة، عن سماك بن حرب، عن جابر بن سمرة، عن أبي أيوب الأنصاري، فذكره.
আবু আইয়ুব আল-আনসারী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট যখন কোনো খাবার আনা হতো, তিনি তা থেকে খেতেন এবং তার উদ্বৃত্ত অংশ আমার কাছে পাঠিয়ে দিতেন। একদিন তিনি আমার কাছে এমন উদ্বৃত্ত খাবার পাঠালেন যা থেকে তিনি খাননি, কারণ তাতে রসুন ছিল। আমি তাঁকে জিজ্ঞাসা করলাম: এটা কি হারাম? তিনি বললেন: "না, তবে আমি এর গন্ধের কারণে এটি অপছন্দ করি।" তিনি (আবু আইয়ুব) বললেন, আপনি যা অপছন্দ করেন, আমিও তা অপছন্দ করি।
9380 - عن جابر بن سمرة قال: نزل رسول الله صلى الله عليه وسلم على أبي أيوب، وكان إذا أكل طعامًا بعث إليه بفضله، فبعث إليه يومًا بطعام ولم يأكل منه النبي صلى الله عليه وسلم، فلما أتى أبو أيوب النبي صلى الله عليه وسلم فذكر ذلك له، فقال:"فيه ثوم" فقال: يا رسول الله، أحرام هو؟ قال:"لا، ولكني أكرهه من أجل ريحه".
حسن: رواه الترمذي (1807) وعبد الله بن الإمام أحمد (20897) وابن حبان (5110) من طرق عن شعبة، عن سماك بن حرب، سمع جابر بن سمرة فذكره. وقال الترمذي: حسن صحيح.
ورواه الإمام أحمد (20990) (21023) وابنه عبد الله (20898) وابن حبان (2094) من طرق عن حماد بن سلمة، عن سماك بن حرب به بنحوه، وزاد في آخره:"إنه يأتيني الملك".
ورواه الحاكم (3/ 460) من طريق أبي داود (هو الطيالسي) عن شعبة وحماد بن سلمة -جميعها- عن سماك به.
وقال الحاكم: صحيح على شرط مسلم.
قلت: وإسناده حسن من أجل سماك بن حرب فإنه صدوق حسن الحديث، ولا يضره الاختلاف فيه عن شعبة عن سماك في جعله تارة عن جابر بن سمرة عن أبي أيوب -كما في رواية مسلم السابقة- وتارة عن جابر فإن ذلك كله محفوظ.
وذلك أن جابر بن سمرة أخذه عن أبي أيوب الأنصاري وهو صاحب القصة، فكان جابر يسنده عنه، وتارة يرسله ولا يذكر أبا أيوب.
জাবির ইবনে সামুরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম আবূ আইয়্যুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর বাড়িতে অবস্থান করেছিলেন। আর আবূ আইয়্যুব যখন খাবার খেতেন, তখন তিনি তাঁর উদ্বৃত্ত অংশ তাঁর (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-এর) কাছে পাঠিয়ে দিতেন। একদিন তিনি তাঁর কাছে খাবার পাঠালেন, কিন্তু নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তা থেকে কিছু খেলেন না। যখন আবূ আইয়্যুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামের কাছে এলেন এবং বিষয়টি উল্লেখ করলেন, তখন তিনি বললেন: "এতে রসুন আছে।" তিনি (আবূ আইয়্যুব) বললেন: "হে আল্লাহর রাসূল! এটি কি হারাম?" তিনি বললেন: "না, তবে আমি এর গন্ধের কারণে এটিকে অপছন্দ করি।"
9381 - عن أم أيوب أخبرته أن النبي صلى الله عليه وسلم نزل عليهم، فتكلفوا له طعامًا فيه من بعض هذه البقول فكره أكله، فقال لأصحابه:"كلوه، فإني لست كأحدكم إني أخاف أن أوذي صاحبي".
حسن: رواه الترمذي (1810) وابن ماجه (3364) والإمام أحمد (27422) وابن خزيمة (1671) وابن حبان (2093) كلهم من طريق سفيان بن عيينة، ثنا عبيد الله بن أبي يزيد، عن أبيه، عن أم أيوب، فذكرته.
وزاد أحمد:"يعني الملك" أي جبريل عليه السلام.
وقال الترمذي: حسن صحيح غريب.
قلت: إسناده حسن من أجل أبي يزيد والد عبيد الله بن أبي يزيد مولى آل قارظ تفرد بالرواية عنه ابنه، ووثقه ابن حبان والعجلي، والقصة وقعت في بيت أبي أيوب، ففي هذه الحال لا بأس في قبول أبي يزيد لموافقته للقصة.
উম্মু আইয়ুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি তাঁকে জানিয়েছেন যে নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাদের বাড়িতে অবস্থান করছিলেন। তখন তারা তাঁর জন্য এমন খাবার তৈরি করলেন, যাতে এই জাতীয় কতিপয় সবজি ছিল। তিনি তা খেতে অপছন্দ করলেন। অতঃপর তিনি তাঁর সাহাবীদের বললেন: "তোমরা খাও। কারণ, আমি তোমাদের কারো মতো নই। আমি ভয় করি যে, আমি আমার সঙ্গীকে কষ্ট দেব।"
9382 - عن ابن عباس أن خالد بن الوليد، الذي يقال له سيف الله، أخبره: أنه دخل مع رسول الله صلى الله عليه وسلم على ميمونة، وهي خالته وخالة ابن عباس، فوجد عندها ضبا محنوذا، قدمت به أختها حفيدة بنت الحارث من نجد، فقدمت الضب لرسول الله صلى الله عليه وسلم، وكان قلما يقدم يده لطعام حتى يحدث به ويسمى له، فأهوى رسول الله صلى الله عليه وسلم يده إلى الضب، فقالت امرأة من النسوة الحضور: أخبرن رسول الله صلى الله عليه وسلم ما قدمتن له، هو الضب يا رسول الله، فرفع رسول الله صلى الله عليه وسلم يده عن الضب، فقال خالد بن الوليد: أحرام الضب يا رسول الله؟ قال:"لا، ولكن لم يكن بأرض قومي، فأجدني أعافه". قال خالد: فاجتررته فأكلته، ورسول الله صلى الله عليه وسلم ينظر إلي.
متفق عليه: رواه البخاري في الأطعمة (5391) ومسلم في الصيد والذبائح (44: 1946) كلاهما من طريق ابن وهب، أخبرني يونس، عن ابن شهاب الزهري، قال: أخبرني أبو أمامة بن سهل بن حنيف الأنصاري، أن ابن عباس أخبره به فذكره.
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর তরবারি উপাধিপ্রাপ্ত খালিদ ইবনুল ওয়ালীদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাঁকে জানিয়েছেন যে, তিনি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সাথে মায়মূনাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর বাড়িতে প্রবেশ করলেন। মায়মূনাহ ছিলেন তাঁর এবং ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর খালা। সেখানে তিনি একটি ভুনা গোসাপ (Dabb) দেখতে পেলেন, যা তাঁর বোন হাফীদা বিনত আল-হারিথ নাজদ থেকে এনেছিলেন। তিনি গোসাপটি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সামনে পরিবেশন করলেন। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সাধারণত কোনো খাবারের প্রতি হাত বাড়াতেন না, যতক্ষণ না তাঁর কাছে তা সম্পর্কে বলা হতো এবং তার নাম উল্লেখ করা হতো। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তখন গোসাপটির দিকে তাঁর হাত বাড়ালেন। উপস্থিত নারীদের মধ্য থেকে একজন বললেন: রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জানিয়ে দিন আপনারা তাঁকে কী পরিবেশন করেছেন। ইয়া রাসূলাল্লাহ! এটি গোসাপ। অতঃপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) গোসাপটি থেকে তাঁর হাত তুলে নিলেন। তখন খালিদ ইবনুল ওয়ালীদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) জিজ্ঞাসা করলেন: ইয়া রাসূলাল্লাহ! গোসাপ কি হারাম? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "না, তবে এটি আমার এলাকার জমিনে পাওয়া যায় না। তাই আমি এটি থেকে বিতৃষ্ণা অনুভব করি।" খালিদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: তখন আমি সেটি টেনে নিয়ে খেলাম, আর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার দিকে তাকিয়ে ছিলেন।
9383 - عن ابن عباس، أن النبي صلى الله عليه وسلم سئل أي الشراب أطيب؟ قال:"الحلو البارد".
حسن: رواه أحمد (3129) عن حجاج، عن ابن جريج، قال: أخبرني إسماعيل بن أمية، عن رجل، عن ابن عباس قال: فذكره.
وإسناده ضعيف من أجل الراوي المبهم، وقد يكون هو: أبو إسماعيل، أمية بن سعيد الأشدق. كما رواه مسدد في مسنده (إتحاف المهرة (8/ 181 رقم 9168) عن محمد بن جابر، عن إسماعيل بن أمية، عن أبيه، عن ابن عباس بلفظ"أي الشراب أحب إليك … ؟".
وأمية بن سعيد الأشدق لا بأس به، لكن محمد بن جابر بن سيار الحنفي تكلّم الناس فيه، إلا أن هذا الحديث يقوّيه ما رُويَ عن عائشة قالت: كان أحب الشراب إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم الحلو البارد.
رواه الترمذي في السنن (1895) وفي الشمائل (206) والنسائي في الكبرى (6815) وأحمد (24100)
وصحّحه الحاكم (4/ 137) كلهم من طريق سفيان بن عيينة، عن معمر، عن الزهري، عن عروة، عن عائشة قالت: فذكرته.
واختلف على معمر في وصل هذا الحديث وإرساله فوصله ابن عيينة، وأرسله عبد الرزاق (19583) وابن المبارك عند الترمذي (1896) كلاهما عن معمر، عن الزهري، عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسلًا.
وتوبع معمر على إرساله فتابعه يونس بن يزيد الأيلي عند ابن أبي شيبة (24676) والترمذي (1896) عن الزهري، عن النبي صلى الله عليه وسلم مرسلا.
ولذا رجّح الأئمةُ المرسلَ على الموصول كالترمذي، وأبي زرعة، والدارقطني.
وقال الذهبي عن الموصول:"لم يروه معمر باليمن".
وهذا المرسل يقّوي حديث ابن عباس.
وقد روي موصولًا أيضا من طريق هشام بن عروة، عن أبيه، عن عائشة، رواه الحاكم (4/ 137) إلا أن في إسناده عبد الله بن محمد بن يحيى بن عروة وهو متروك.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল যে, কোন পানীয়টি সবচেয়ে উত্তম বা সুস্বাদু? তিনি বললেন: ‘মিষ্টি ও ঠান্ডা পানীয়’।"
9384 - عن أنس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان يتنفس في الإناء ثلاثًا.
وفي رواية: ويقول: إنه أروى وأبرأ وأمرأ.
متفق عليه: رواه البخاري في الأشربة (5631) ومسلم في الأشربة (122: 2028) كلاهما من طريق عزرة بن ثابت، عن ثمامة بن عبد الله بن أنس، عن أنس قال: فذكره. والزيادة رواها مسلم في الأشربة (123: 2028) من طريق أبي عصام عن أنس به.
وجاء عند البخاري:"كان أنس يتنفس في الإناء مرتين أو ثلاثا".
فهذا يحمل على أنه فعل ذلك أحيانًا لبعض الأحوال الطارئة، وأن الشرب بثلاثة أنفاس هو الصحيح.
قوله:"أروى" أي أكثر ريًا.
وقوله:"أمرأ" أي أسرع وأهضم.
وقوله:"أبرأ" أي أكثر برءا أي صحة للبدن.
وأما ما روي عن ابن عباس أن النبي صلى الله عليه وسلم كان إذا شرب تنفس مرتين، فهو ضعيف. رواه الترمذي في السنن (1886) وفي الشمائل (213) وابن ماجه (3417) وأحمد (2578) كلهم من طريق رشدين بن كريب، عن أبيه، عن ابن عباس قال: فذكره.
قال الترمذي: هذا حديث غريب لا نعرفه إلا من حديث رشدين بن كريب. أي ضعيف، لأن رشدين بن كريب ضعيف باتفاق أهل العلم.
আনাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) পাত্রে (পান করার সময়) তিনবার শ্বাস নিতেন।
আরেক বর্ণনায় এসেছে, তিনি বলতেন: এটা অধিক তৃষ্ণা নিবারক, অধিক আরোগ্যদায়ক এবং অধিক হজমকারক।
9385 - عن ابن عباس قال: سقيت رسول الله صلى الله عليه وسلم من زمزم، فشرب وهو قائم.
متفق عليه: رواه البخاري في الحج (1637) وفي الأشربة (5617) ومسلم في الأشربة (118، 117: 2027) كلاهما من طرق عن عاصم الأحول، عن الشعبي، عن ابن عباس قال: فذكره.
وأما ما جاء النهي عن الشرب قائما فهو محمول على التنزيه.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে যমযমের পানি পান করালাম, তখন তিনি দাঁড়িয়ে পান করলেন।
9386 - عن علي أنه صلى الظهر ثم قعد في حوائج الناس في رحبة الكوفة حتى حضرت صلاة العصر، ثم أتي بماء فشرب وغسل وجهه ويديه -وذكر رأسه ورجليه- ثم قام فشرب فضله وهو قائم، ثم قال: إن ناسًا يكرهون الشرب قائمًا، وإن النبي صلى الله عليه وسلم صنع مثل ما صنعت.
صحيح: رواه البخاري في الأشربة (5615، 5616) من طرق عن عبد الملك بن ميسرة: سمعت النزال بن سبرة، يحدث عن علي أنه صلى الظهر .. فذكر الحديث.
আলী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি যুহরের সালাত আদায় করলেন, অতঃপর কুফার চত্বরে (রাহবাতে) লোকজনের প্রয়োজন পূরণে বসলেন, যতক্ষণ না আসরের সালাতের সময় হলো। অতঃপর তাঁর কাছে পানি আনা হলো। তিনি পান করলেন এবং তাঁর মুখমণ্ডল ও হাত ধুলেন—আর মাথা ও পা ধোয়ার কথাও উল্লেখ করলেন—অতঃপর তিনি দাঁড়িয়ে গেলেন এবং অবশিষ্ট পানি পান করলেন। এরপর তিনি বললেন: নিশ্চয় কিছু লোক দাঁড়িয়ে পান করা অপছন্দ করে, অথচ নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ঠিক আমি যা করলাম, তেমনই করেছেন।
9387 - عن كبشة الأنصارية قالت: دخل علي رسول الله صلى الله عليه وسلم فشرب من قربة معلقة قائمًا، فقمت إلى فيها فقطعته.
صحيح: رواه الترمذي في السنن (1892) وفي الشمائل (214) وأحمد (27448) وصححه ابن حبان (5318) كلهم من طرق عن سفيان بن عيينة، عن يزيد بن يزيد بن جابر، عن عبد الرحمن ابن أبي عمرة، عن جدته كبشة قالت فذكرته.
ورواه ابن ماجه (3423) من طريق محمد بن الصباح الجرجرائي -والطبراني في الكبير (25/ 15) من طريق محمد بن عيسى الطباع- كلاهما عن سفيان بن عيينة، عن يزيد بن يزيد بن جابر وزاد فيه:"تبتغي بركة موضع في رسول الله صلى الله عليه وسلم".
وإسناده صحيح، قال الترمذي: حسن صحيح غريب.
قال النووي في شرح مسلم:"قطعها لفم القربة فعلته لوجهين:
أحدهما: أن تصون موضعًا أصابه فم رسول الله صلى الله عليه وسلم عن أن يبتذل ويمسه كل واحد.
والثاني: أن تحفظه للتبرك به والاستشفاء. والله أعلم.
والصحابية كبشة الأنصارية هي أخت حسان بن ثابت رضي الله عنهما.
ক্বাবশা আল-আনসারিয়্যা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (ক্বাবশা) বলেন, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার কাছে এলেন এবং তিনি ঝুলন্ত মশক থেকে দাঁড়িয়ে পানি পান করলেন। অতঃপর আমি মশকের মুখে গেলাম এবং তা কেটে নিলাম।