হাদীস বিএন


আল-জামি` আল-কামিল





আল-জামি` আল-কামিল (941)


941 - عن * *




৯৪১ - থেকে ** **









আল-জামি` আল-কামিল (942)


942 - عن أبي هريرة، قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"لا تفضّلوا بين أنبياء اللَّه، فإنّه
يُنفخ في الصُّور، فيصعق مَنْ في السّماوات وَمَنْ في الأرض إِلَّا مَنْ شاء اللَّه، ثم يُنفخ فيه أخرى، فأكون أوَّلَ من بُعث، فإذا موسى آخذ بالعرش، فلا أدري أحُوسب بصعقته يوم الطّور، أم بُعث قبلي".

متفق عليه: رواه البخاريّ في أحاديث الأنبياء (3414)، ومسلم في كتاب الفضائل (2373) كلاهما عن عبد العزيز بن عبد اللَّه بن أبي سلمة، عن عبد اللَّه بن الفضل الهاشميّ، عن عبد الرحمن الأعرج، عن أبي هريرة، فذكره.

وفي الحديث قصة وسيأتي الحديث بطوله في كتاب الفضائل. فضائل موسى عليه السلام.




আবূ হুরাইরাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "তোমরা আল্লাহর নবীদের মধ্যে কাউকে শ্রেষ্ঠত্ব দিও না। কেননা শিঙায় ফুঁক দেওয়া হবে, ফলে আল্লাহ যাঁর উপর দয়াময়, তিনি ব্যতীত আসমান ও যমিনের সবাই বেহুঁশ হয়ে যাবে (বা মারা যাবে)। এরপর আবার ফুঁক দেওয়া হবে। তখন আমিই হব প্রথম পুনরুত্থিত ব্যক্তি। তখন আমি দেখব, মূসা (আঃ) আরশ ধরে আছেন। আমি জানি না, তূর পর্বতের দিনের বেহুঁশ (মৃত্যু)-এর কারণে তাঁকে (শেষ দিবসের) বেহুঁশ হওয়ার হিসাব থেকে অব্যাহতি দেওয়া হয়েছে, নাকি তিনি আমার আগেই পুনরুত্থিত হয়েছেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (943)


943 - عن عبد اللَّه بن عمرو قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم فذكر خروج الدّجال- ثم قال:"فيبقى شرار النّاس في خفّة الطّير وأحلام السِّباع، لا يعرفون معروفًا ولا ينكرون منكرًا. فيتمثَّل لهم الشّيطان فيقول: ألا تستجيبون؟ فيقولون: فما تأمرنا؟ فيأمرهم بعبادة الأوثان، وهم في ذلك دارّةٌ أرزاقهم، وحسنٌ عيشُهم، ثم ينفخ في الصُّور، فلا يسمعه أحدٌ إِلَّا أضغى لِيتًا، ورفع لِيتًا. قال: وأوّلُ من يسمعه رجل يلوط حوض إبله، قال: فيصعق ويصعق النّاس، ثم يرسل اللَّه -أو قال: ينزل اللَّه- مطرًا كأنّه الطّلُّ أو الظّلُّ -نعمان الشّاك- فتنبتُ منه أجسادُ النّاس. ثم يُنفخ فيه أخرى فإذا هم قيام ينظرون. . .".

صحيح: رواه مسلم في الفتن وأشراط الساعة (2940) عن عبد اللَّه بن معاذ العنبريّ، حدّثنا أبي، حدّثنا شعبة، عن النعمان بن سالم، قال: سمعت يعقوب بن عاصم بن عروة بن مسعود الثّقفيّ. يقول: سمعت عبد اللَّه بن عمرو، فذكر الحديث بطوله في قصة خروج الدّجال.




আব্দুল্লাহ ইবনু আমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম দাজ্জালের আবির্ভাবের কথা উল্লেখ করে বললেন: "তখন সমাজের নিকৃষ্টতম লোকেরাই অবশিষ্ট থাকবে। তাদের মন হবে পাখির মতো হালকা এবং তাদের আকাঙ্ক্ষা হবে হিংস্র পশুর মতো। তারা ভালো কাজকে ভালো বলে জানবে না এবং খারাপ কাজকে খারাপ বলে অস্বীকারও করবে না। তাদের সামনে শয়তান মানবাকৃতিতে এসে বলবে: 'তোমরা কি সাড়া দেবে না?' তারা বলবে: 'আপনি আমাদের কী করতে আদেশ করেন?' তখন সে তাদের মূর্তিপূজা করার আদেশ দেবে। আর এই সময়ে তাদের রিযিক সচ্ছল ও জীবন সুন্দর হবে। এরপর শিঙ্গায় ফুঁক দেওয়া হবে। যে ব্যক্তিই তা শুনবে, সে অবশ্যই নিজের ঘাড় একদিকে বাঁকিয়ে দেবে এবং অন্যদিকে তুলে ধরবে। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: যে ব্যক্তি সবার আগে শিঙ্গার আওয়াজ শুনতে পাবে, সে হবে উটের হাউজ (চৌবাচ্চা) মেরামতকারী এক ব্যক্তি। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: তখন সে (ঐ ব্যক্তি) বেহুশ হয়ে যাবে এবং মানুষও বেহুশ হয়ে যাবে। এরপর আল্লাহ্‌ বৃষ্টি পাঠাবেন—কিংবা বললেন, আল্লাহ্‌ বৃষ্টি বর্ষণ করবেন—যা শিশিরবিন্দুর মতো হবে অথবা ছায়ার মতো হবে (বর্ণনাকারী নু'মান সন্দেহ প্রকাশ করেছেন)। আর সেই বৃষ্টি দ্বারা মানুষের দেহ উৎপন্ন হবে। এরপর দ্বিতীয়বার শিঙ্গায় ফুঁক দেওয়া হবে, তখন তারা সবাই দাঁড়িয়ে দেখতে থাকবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (944)


944 - عن أبي سعيد الخدريّ قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"كيف أُنعم وصاحبُ الصّور قد الْتقم، وحنا جبهته ينتظر متى يُؤمر أن ينفخ". قيل: قلنا يا رسول اللَّه، ما نقول يومئذ؟ قال:"قولوا: حسبنا اللَّه ونعم الوكيل على اللَّه توكّلنا".

صحيح: رواه أبو يعلى (1084 - تحقيق حسين أسد) عن عثمان، حدّثنا جرير، عن الأعمش، عن أبي صالح، عن أبي سعيد، فذكر الحديث. وإسناده صحيح. وصحّحه ابن حبّان (823).

وأخرجه الحاكم (4/ 559) من طريق إسماعيل بن إبراهيم أبي يحيى التّيميّ، عن الأعمش إِلَّا أنّ إسماعيل ضعيف.

وأمّا ما رواه الترمذيّ (2431)، وابن ماجه (4273)، والإمام أحمد (11039) وغيرهم من طريق عطية العوفيّ، عن أبي سعيد ففيه اضطراب فإنّ عطية العوفي ضعيف، وقد اضطرب فيه فمرة يرويه عن أبي سعيد، وأخرى عن ابن عباس، وثالثه عن زيد بن أسلم، وقد أورد هذا الحديث ابنُ
عدي في"الكامل" (3/ 891) وذكر فيه هذا الاختلاف.




আবূ সাঈদ খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "আমি কিভাবে শান্তিতে থাকব, অথচ শিঙার অধিকারী (ফেরেশতা) শিঙাটি মুখে তুলে নিয়েছেন, মাথা ঝুঁকিয়ে আছেন, অপেক্ষা করছেন কখন তাঁকে ফুঁক দেওয়ার আদেশ করা হবে?" জিজ্ঞেস করা হলো: হে আল্লাহর রাসূল! সেদিন আমরা কী বলব? তিনি বললেন: "তোমরা বলো: 'আল্লাহই আমাদের জন্য যথেষ্ট, আর তিনি কতই না উত্তম অভিভাবক। আমরা আল্লাহর ওপরই ভরসা করলাম'।"









আল-জামি` আল-কামিল (945)


945 - عن أبي هريرة قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"إن طَرْف صاحب الصّور مذ وكِّل به مستعد ينظر نحو العرش مخافة أن يؤمر قبل أن يرتدّ إليه طرْفه، كأنّ عينيه كوكبان درّيان".

حسن: رواه الحاكم (4/ 558 - 559) من طريق محمد بن هشام بن ملاس النّمريّ، عن مروان ابن معاوية الفزاريّ، عن عبد اللَّه بن عبد اللَّه بن الأصمّ، ثنا يزيد بن الأصمّ، عن أبي هريرة، فذكره.

قال الحاكم:"صحيح الإسناد".

وقال الذّهبيّ:"صحيح على شرط مسلم".

وإسناده حسن؛ فإنّ محمد بن هشام بن ملاس النّمري الدّمشقيّ ليس من رجال مسلم، بل ليس من رجال التهذيب غير أنّه صدوق كما قال ابن أبي حاتم في الجرح والتعديل (8/ 116) ولذا حسَّنه الحافظ في"الفتح" (11/ 368).

وأمّا عبيد اللَّه بن عبد اللَّه بن الأصمّ فهو من رجال مسلم وقال فيه ابن حجر:"مقبول" لأنه لم يوثقه غير ابن حبان فأورده في الثقات (7/ 142) وقال:"روى عنه مروان بن معاوية الفزاريّ". وزاد ابن أبي حاتم (5/ 321)"عبد الواحد بن زياد". وزاد الذّهبيّ في"الكاشف" ابن عيينة وغيرها. ولكن لمن يذكر أحد توثيقه من أحد الأئمة فهو في عداد المجهولين إِلَّا أن رواية مسلم له اكتسبته قوّة، ولم يأتِ في حديثه ما ينكر عليه، فلا بأس من قبول حديثه في الشّواهد.

تنبيه: إنه وقع تحريف في نسخة الحاكم فقال:"عمرو بن عبد اللَّه بن الأصمّ". والصَّحيح أنه عبد اللَّه بن عبد اللَّه بن عبد اللَّه بن الأصم؛ لأنه لا يوجد في كتب الرّجال مَنْ اسمه"عمرو بن عبد اللَّه بن الأصمّ".

وفي الباب عن أنس بن مالك قال: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"كيف أنعم وصاحب الصّور قد التقم القرن، وحنا ظهره ينظر تجاه العرش كأن عينيه كوكبان دُريَّان، لم يَطْرِفْ قطّ مخافة أن يؤمر قبل ذلك".

رواه الخطيب في"تاريخه" (5/ 153) والضياء في المختارة (2567) كلاهما من حديث إسماعيل بن علي بن إسماعيل الخطبيّ، قال: حدّثنا أحمد بن منصور بن حبيب أبو بكر المروزيّ الخطيب، قال: حدّثنا عفّان بن مسلم، قال: حدّثنا همام، عن قتادة، عن أنس بن مالك، فذكره.

أخرجه الخطيب في ترجمة أحمد بن منصور بن حبيب وقال: حدّث عن عفّان بن مسلم وعمرو ابن عبيد المكتِب. روى عنه الحسن بن محمد بن شعبة الأنصاريّ وإسماعيل الخطبيّ، ولم يذكر فيه جرحًا ولا تعديلا فهو في عداد المجهولين.



الحافظ في"فتحه" (11/ 368)، ولكن لم يرد فيه حديث صحيح بأنَّ إسرافيل هو الذي ينفخ في الصّور.

وأمّا الحديث المشهور بين النّاس الذي يسمى بحديث الصّور، وإنَّ إسرافيل قد التقم الصّور، وهو شاخص بصره إلى العرش ينتظر متى يؤمر، فهو حديث ضعيف وإن كان أورده كثير من أهل العلم في كتبهم.

وهو ما روي عن أبي هريرة، أنه قال: حدّثنا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم وهو في طائفة من أصحابه- فقال:"إنّ اللَّه تبارك وتعالى لما فرغ من خلق السماوات والأرض خلق الصّور، فأعطاه إسرافيل عليه السلام فهو واضعه على فيه شاخص بصره إلى العرش ينتظر متى يؤمر". فقال أبو هريرة رضي الله عنه: يا رسول اللَّه، وما الصُّور؟ قال:"القرن". قلت: كيف هو؟ قال:"عظيم! والذي نفسي بيده إنّ عظم دارة فيه كعرض السَّماوات -وقال غيره: إنه قال: والأرض- ينفخ فيه ثلاث نفخات: الأولى: نفخة الفزع، والثانية: نفخة الصَّعق، والثّالثة: نفخة القيام لربّ العالمين، يأمر اللَّه عز وجل إسرافيل بالنفخة الأوّلى، فيقولُ له: انفخ نفخة الفزع، فيفزع له من في السماوات والأرض إِلَّا مَنْ شاء اللَّه، ويأمره فيديمها ويطيلها ولا يفتر وهي التي يقول اللَّه تبارك وتعالى: {وَمَا يَنْظُرُ هَؤُلَاءِ إِلَّا صَيْحَةً وَاحِدَةً مَا لَهَا مِنْ فَوَاقٍ} [سورة ص: 15]، فيسير اللَّه الجبال فتمر مرّ السَّحاب ثم تكون ترابا ثم ترتج الأرض بأهلها رجًّا، وهي التي يقول اللَّه تبارك وتعالى: {يَوْمَ تَرْجُفُ الرَّاجِفَةُ (6) تَتْبَعُهَا الرَّادِفَةُ (7) قُلُوبٌ يَوْمَئِذٍ وَاجِفَةٌ (8)} [سورة النازعات: 6 - 8]، فتكون الأرض كالسّفينة المرتفعة في البحر تضربها الأمواج تكفأ بأهلها، وكالقنديل المعلّق بالعرش ترجحه الأرواح، فيبيد النّاس عن ظهرها فتذهل المراضع، وتضع الحوامل، ويشيب الولدان، وتطير الشياطين هاربة حتى تأتي الأقطار فتلقاها الملائكة فتضرب وجوهها وترجع ويولي النّاس مدبرين فبينا هم على ذلك إذ تصدَّعت الأرض فانصدعت من قطر إلى قطر فرأوا أمرًا عظيمًا، فأخذهم لذلك من الكرب ما اللَّه به عليم، ثم نظروا إلى السّماء فإذا هي كالمهل، ثم انشقَّت من قطر إلى قطر، ثم انخسفت شمسها وقمرها قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"والأموات لا يعلمون بشيء من ذلك". قال أبو هريرة رضي الله عنه: يا رسول اللَّه؟ فمن استثنى اللَّه عز وجل حين يقول: {فَفَزِعَ مَنْ فِي السَّمَاوَاتِ وَمَنْ فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَنْ شَاءَ اللَّهُ} [سورة النمل: 87]؟ قال:"أولئك الشّهداء وهم أحياء عند ربهم يرزقون، وإنما يصل الفزع إلى الأحياء فوقاهم اللَّه فزع ذلك اليوم وأمّنهم منه، وهو عذاب اللَّه يبعثه على شرار خلقه، وهو الذي يقول اللَّه عز وجل: {يَاأَيُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمْ إِنَّ زَلْزَلَةَ السَّاعَةِ شَيْءٌ عَظِيمٌ (1) يَوْمَ تَرَوْنَهَا تَذْهَلُ كُلُّ مُرْضِعَةٍ عَمَّا أَرْضَعَتْ وَتَضَعُ كُلُّ ذَاتِ حَمْلٍ حَمْلَهَا وَتَرَى النَّاسَ سُكَارَى وَمَا هُمْ بِسُكَارَى وَلَكِنَّ عَذَابَ اللَّهِ شَدِيدٌ (2)} [سورة الحج: 1 - 2]. فيمكثون في ذلك البلاء ما شاء اللَّه إِلَّا أنّه يطول، ثم يأمر اللَّه عز وجل إسرافيل بنفخة الصَّعْق فينفخ نفخة الصَّعق، فيصعق أهل السماوات والأرض إِلَّا من شاء اللَّه، فإذا هم خمدوا جاء ملك الموت عليه السلام إلى
الجبّار تبارك وتعالى، فيقول: يا ربّ، قد مات أهل السماوات والأرض إِلَّا مَنْ شئتَ، فيقول اللَّه عز وجل -وهو أعلم-: فمن بقي؟ فيقول: يا ربّ بقيتَ أنت الحي الذي لا يموت، وبقي حملة عرشك وبقي جبريل وميكائيل وأنا. فيقول اللَّه عز وجل: ليمت جبريل وميكائيل. فيتكلّم العرش فيقول: يا ربّ، تميتُ جبريل وميكائيل؟ فيقول اللَّه عز وجل: اسكت فإنِّي كتبتُ على كل مَنْ تحت عرشي الموت، فيموتان، ويأتي ملك الموت عليه السلام إلى الجبَّار تبارك وتعالى، فيقول: قد مات جبريل وميكائيل، فيقول اللَّه عز وجل -واللَّه أعلم- فمن بقي؟ فيقول: يا ربّ بقيت أنت الحي الذي لا يموت، وبقي حملةُ عرشك، وبقيتُ أنا. فيقول اللَّه عز وجل: ليمتْ حملة عرشيّ، فيموتون، ثم يأتي ملك الموت إلى الجبَّار تبارك وتعالى، فيقول: يا ربّ، قد مات حملةُ عرشك، فيقول اللَّه عز وجل -وهو أعلم-: فمن بقي؟ فيقول: يا ربّ، بقيتَ أنت الحي الذي لا يموت، وبقيتُ أنا، فيقول اللَّه عز وجل له: أنت من خلقيّ، خلقتُك لما رأيتُ، فَمُتْ فيموتُ، فإذا لم يبق إِلَّا اللَّه الواحد الأحد الصمد ليس بوالد ولا ولد، كان آخرًا كما كان أوَّلًا قال: لا موت على أهل الجنّة، ولا موت لأهل النّار، ثم يطوي اللَّه تبارك وتعالى السماوات والأرض كطيّ السّجل، ثم دحاها ثم يلففها، ثم قال: أنا الجبَّار، ثم هتف بصوته تبارك وتعالى وتقدَّس، فقال: {لِمَنِ الْمُلْكُ الْيَوْمَ} ثم قال: {لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ} [سورة غافر: 16]. . .". الحديث بطوله.

رواه أبو الشّيخ في"العظمة" (386) -واللّفظ له-، وأبو القاسم الطبرانيّ في"الأحاديث الطوال" (36)، والبيهقي في"البعث" (609) كلّهم من طريق إسماعيل بن رافع، عن محمد بن يزيد، عن محمد بن كعب، عن أبي هريرة، فذكره.

قال الحافظ ابن كثير في تفسير سورة الأنعام (آية: 73):"هذا حديث غريب جدًّا، ولبعضه شواهد في الأحاديث المتفرقة، وفي بعض ألفاظه نكارة، تفرّد به إسماعيل بن رافع قاص أهل المدينة، وقد اختلف فيه، فمنهم من وثّقه، ومنهم من ضعّفه. ونصَّ على نكارة حديثه غير واحد من الأئمة كأحمد بن حنبل، وأبي حاتم الرّازيّ، وعمرو بن علي الفلاس. ومنهم من قال فيه: هو متروك. وقال ابن عدي: أحاديثه كلّها فيها نظر، إِلَّا أنه يكتب حديثه في جملة الضعفاء".

وقال ابن كثير أيضًا:"وقد اختلف عليه في إسناد هذا الحديث على وجوه كثيرة قد أفردتها في جزء على حدة، وأمّا سياقه فغريب جدًّا، ويقال: إنه جمعه من أحاديث كثيرة وجعله سياقًا واحدًا، فأنكر عليه بسبب ذلك" انتهى.

ونقل أيضًا ابنُ عديّ عن البخاريّ أنّه قال: وروى إسماعيل بن رافع، عن محمد بن يزيد بن أبي زياد، عن رجل، عن محمد بن كعب"حديث الصُّور" مرسل لا يصح. انتهى انظر: الكامل (1/ 278).

وقال الحافظ:"اضطرب في سنده مع ضعفه، فرواه عن محمد بن كعب القرظيّ تارة بلا واسطة، وتارة بواسطة رجل مبهم ومحمد، عن أبي هريرة، تارة بلا واسطة، وتارة بواسطة رجل
من الأنصار مبهم أيضًا. وأخرجه إسماعيل بن أبي زياد الشّاميّ أحد الضّعفاء أيضًا في"تفسيره" عن محمد بن عجلان، عن محمد بن كعب القرظيّ، واعترض مغلطاي على عبد الحقّ في تضعيفه الحديث بإسماعيل بن رافع، وخفي عليه أنَّ الشّاميّ أضعف منه، ولعلّه سرقه منه، فألصقه بابن"عجلان". الفتح (11/ 368).

وكذلك ذكر أبو الشّيخ آثارًا عن التابعين وأتباعهم في كون إسرافيل هو الذي ينفخ في الصّور ومع كونها. موقوفة عليهم فإن في أسانيدهم ضعفًا شديدًا.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয়ই শিঙ্গাধারী (ফেরেশতা)-এর দৃষ্টি, যখন থেকে তাকে এই কাজের দায়িত্ব দেওয়া হয়েছে, তখন থেকেই তিনি আরশের দিকে প্রস্তুত অবস্থায় তাকিয়ে আছেন, এই আশঙ্কায় যে, দৃষ্টি ফিরিয়ে আনার আগেই যেন তাঁকে আদেশ না করা হয়। তার দু'টি চোখ যেন দু'টি উজ্জ্বল নক্ষত্র।"

আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে আরও বর্ণিত আছে, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর সাহাবীদের এক দলের মাঝে থাকা অবস্থায় আমাদের কাছে হাদিস বর্ণনা করে বললেন: "নিশ্চয়ই আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তাআলা যখন আসমান ও যমিন সৃষ্টি করা শেষ করলেন, তখন শিঙ্গা (صور) সৃষ্টি করলেন এবং তা ইসরাফীল (আঃ)-কে প্রদান করলেন। তিনি শিঙ্গাটি মুখে ধারণ করে আরশের দিকে দৃষ্টি স্থির করে আছেন এবং কখন তাঁকে আদেশ করা হবে তার অপেক্ষা করছেন।"

আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, 'ইয়া রাসূলাল্লাহ! صور (সূর) কী?' তিনি বললেন, "শিং (القرن)।" আমি (আবু হুরায়রা) বললাম, 'তা কেমন?' তিনি বললেন, "বিশাল! যাঁর হাতে আমার প্রাণ, তাঁর কসম! এর বৃত্তের বিশালতা আসমানসমূহের প্রস্থের মতো – (অন্য বর্ণনাকারী বলেন: এবং যমিনের মতো)।"

"এতে তিনবার ফুঁক দেওয়া হবে: প্রথমটি হলো 'নাফখাতুল ফাযা' (ভীতির ফুৎকার), দ্বিতীয়টি হলো 'নাফখাতুস স্বা‘ক্ব' (মূর্ছা যাওয়ার ফুৎকার) এবং তৃতীয়টি হলো 'নাফখাতুল ক্বিয়াম লিরব্বিল আলামীন' (সারা জাহানের রবের কাছে দাঁড়ানোর ফুৎকার)।

আল্লাহ আযযা ওয়া জাল ইসরাফীল (আঃ)-কে প্রথম ফুৎকারের আদেশ করবেন। তিনি তাঁকে বলবেন: 'ভীতির ফুঁক দাও।' ফলে আল্লাহ যাদেরকে ইচ্ছা করেন তারা ব্যতীত আসমান ও যমিনের সবাই ভীত-সন্ত্রস্ত হয়ে যাবে। তিনি তাঁকে আদেশ করবেন এবং তিনি ফুঁক দিতে থাকবেন, তা লম্বা করবেন এবং তা থেকে বিরত হবেন না। এটাই সেই ফুঁক, যার সম্পর্কে আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তাআলা বলেন: {এরা কেবল একটিমাত্র তীব্র আওয়াজের অপেক্ষায় রয়েছে, যাতে কোনো বিরতি থাকবে না।} [সূরা ছোয়াদ: ১৫]

আল্লাহ তাআলা পর্বতসমূহকে চালিত করবেন। ফলে তা মেঘমালার মতো দ্রুত চলবে। অতঃপর তা ধূলিকণায় পরিণত হবে। এরপর যমিন তার অধিবাসীদের নিয়ে প্রচণ্ডভাবে কাঁপতে থাকবে। এটাই সেই ঘটনা, যা সম্পর্কে আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তাআলা বলেন: {সেদিন প্রকম্পিত করার মতো কিছু প্রকম্পিত করবে। অতঃপর অনুসরণকারী কিছু তাকে অনুসরণ করবে। সেদিন অনেকের হৃদয় ভয়ে কম্পিত হবে।} [সূরা নাযিআত: ৬-৮]

তখন যমিন সাগরের মধ্যে উঁচু ঢেউ দ্বারা প্রকম্পিত জাহাজের মতো হবে, যা তার অধিবাসীদের নিয়ে এদিক-ওদিক হেলে পড়বে। আর আরশের সাথে ঝোলানো প্রদীপের মতো হবে, যাকে বাতাস দুলিয়ে থাকে। ফলে মানুষ তার উপরিভাগ থেকে বিলীন হয়ে যাবে। স্তন্যদাত্রী মা ভুলে যাবে তার দুগ্ধপোষ্য শিশুকে, গর্ভবতীরা গর্ভপাত করবে, শিশুরা বৃদ্ধ হয়ে যাবে, শয়তানরা পালাতে থাকবে, এমনকি তারা দিগন্তে পৌঁছবে। তখন ফেরেশতারা তাদের সাথে দেখা করে তাদের মুখে আঘাত করবে। তারা ফিরে আসবে। মানুষ ভীতসন্ত্রস্ত হয়ে পিছু হটতে থাকবে।

তারা যখন এই অবস্থায় থাকবে, তখন যমিন ফাটতে শুরু করবে। তা এক প্রান্ত থেকে আরেক প্রান্ত পর্যন্ত বিদীর্ণ হবে। তারা এক ভয়াবহ দৃশ্য দেখবে। ফলে আল্লাহই জানেন, তাদের কী পরিমাণ কষ্ট হবে। অতঃপর তারা আকাশের দিকে তাকাবে, তখন তা গলিত তামার মতো হবে। অতঃপর তা এক প্রান্ত থেকে আরেক প্রান্ত পর্যন্ত ফেটে যাবে। অতঃপর তার সূর্য ও চন্দ্র জ্যোতিহীন হয়ে যাবে।

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "আর মৃতরা এসবের কিছুই জানতে পারবে না।"

আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, 'ইয়া রাসূলাল্লাহ! আল্লাহ আযযা ওয়া জাল যখন বলেন: {আকাশ ও যমিনে যারা আছে, তারা সকলেই ভীত-সন্ত্রস্ত হবে, তবে আল্লাহ যাদেরকে ইচ্ছা করেন তারা ব্যতীত।} [সূরা নামল: ৮৭] তখন আল্লাহ কাদেরকে ব্যতিক্রম করবেন?'

তিনি বললেন, "তারা হলো শহীদগণ। তারা তাদের রবের নিকট জীবিত এবং তাদেরকে রিযিক দেওয়া হয়। ভয় কেবল জীবিতদের কাছেই পৌঁছবে। আল্লাহ সেদিনকার ভয় থেকে তাদের রক্ষা করবেন এবং নিরাপত্তা প্রদান করবেন। আর এটি হচ্ছে আল্লাহর আযাব, যা তিনি তাঁর নিকৃষ্টতম সৃষ্টির উপর প্রেরণ করবেন। এটাই সেই কথা, যা সম্পর্কে আল্লাহ আযযা ওয়া জাল বলেন: {হে মানুষ! তোমরা তোমাদের রবকে ভয় কর। নিশ্চয়ই কিয়ামতের প্রকম্পন এক মহা বিষয়। যেদিন তোমরা তা দেখবে, সেদিন প্রত্যেক স্তন্যদাত্রী তার দুগ্ধপোষ্য শিশুকে ভুলে যাবে এবং প্রত্যেক গর্ভবতী নারী তার গর্ভপাত করে ফেলবে। আর তুমি দেখবে, মানুষ মাতাল, যদিও তারা মাতাল নয়। বরং আল্লাহর আযাব বড়ই কঠিন।} [সূরা হজ্জ: ১-২]"

তারা আল্লাহর ইচ্ছানুযায়ী সেই বিপদে দীর্ঘকাল থাকবে। অতঃপর আল্লাহ আযযা ওয়া জাল ইসরাফীল (আঃ)-কে 'নাফখাতুস স্বা‘ক্ব' (মূর্ছা যাওয়ার ফুৎকার)-এর আদেশ করবেন। তিনি মূর্ছা যাওয়ার ফুঁক দেবেন। ফলে আল্লাহ যাদেরকে ইচ্ছা করেন তারা ব্যতীত আসমান ও যমিনের অধিবাসীরা মূর্ছা যাবে।

তারা যখন নিস্তেজ হয়ে যাবে, তখন মৃত্যুর ফেরেশতা (আঃ) মহাপরাক্রমশালী তাবারাকা ওয়া তাআলা রবের কাছে এসে বলবেন: 'হে রব! আসমান ও যমিনের সবাই মৃত্যুবরণ করেছে, তবে তুমি যাদেরকে ইচ্ছা করেছ (তারা ব্যতীত)।'

আল্লাহ আযযা ওয়া জাল – যদিও তিনি অধিক অবগত – বলবেন: 'কে বাকি আছে?' তিনি বলবেন: 'হে রব! আপনি বাকি আছেন, যিনি চিরঞ্জীব, যাঁর মৃত্যু নেই। আর বাকি আছে আপনার আরশের বাহকগণ, বাকি আছে জিবরীল, মীকাইল এবং আমি (মৃত্যুর ফেরেশতা)।'

আল্লাহ আযযা ওয়া জাল বলবেন: 'জিবরীল ও মীকাইলও যেন মৃত্যুবরণ করে।' তখন আরশ কথা বলবে এবং বলবে: 'হে রব! আপনি জিবরীল ও মীকাইলকে মৃত্যু দেবেন?' আল্লাহ আযযা ওয়া জাল বলবেন: 'চুপ থাক! আমি আমার আরশের নিচে যা আছে, তার সবার উপর মৃত্যু লিখে দিয়েছি।' ফলে তারা দু'জন মৃত্যুবরণ করবেন।

মৃত্যুর ফেরেশতা (আঃ) মহাপরাক্রমশালী তাবারাকা ওয়া তাআলা রবের কাছে এসে বলবেন: 'জিবরীল ও মীকাইল মৃত্যুবরণ করেছেন।' আল্লাহ আযযা ওয়া জাল – যদিও তিনি অধিক অবগত – বলবেন: 'কে বাকি আছে?' তিনি বলবেন: 'হে রব! আপনি বাকি আছেন, যিনি চিরঞ্জীব, যাঁর মৃত্যু নেই। আর বাকি আছে আপনার আরশের বাহকগণ এবং বাকি আছি আমি (মৃত্যুর ফেরেশতা)।' আল্লাহ আযযা ওয়া জাল বলবেন: 'আমার আরশের বাহকগণও যেন মৃত্যুবরণ করে।' ফলে তারা মৃত্যুবরণ করবেন।

অতঃপর মৃত্যুর ফেরেশতা মহাপরাক্রমশালী তাবারাকা ওয়া তাআলা রবের কাছে এসে বলবেন: 'হে রব! আপনার আরশের বাহকগণও মৃত্যুবরণ করেছেন।' আল্লাহ আযযা ওয়া জাল – যদিও তিনি অধিক অবগত – বলবেন: 'কে বাকি আছে?' তিনি বলবেন: 'হে রব! আপনি বাকি আছেন, যিনি চিরঞ্জীব, যাঁর মৃত্যু নেই। আর বাকি আছি আমি (মৃত্যুর ফেরেশতা)।' আল্লাহ আযযা ওয়া জাল তাঁকে বলবেন: 'তুমি আমারই সৃষ্টি। আমি যা দেখেছি, তার জন্য তোমাকে সৃষ্টি করেছি। সুতরাং তুমিও মৃত্যুবরণ কর।' ফলে তিনিও মৃত্যুবরণ করবেন।

যখন এক, অদ্বিতীয়, চিরন্তন (الصمد), যার কোনো জনকও নেই, সন্তানও নেই – তিনি ব্যতীত আর কেউ অবশিষ্ট থাকবে না, তখন তিনি শেষের মতোই প্রথম অবস্থায় থাকবেন। তিনি বললেন: জান্নাতবাসীদের উপর কোনো মৃত্যু নেই এবং জাহান্নামবাসীদের উপরও কোনো মৃত্যু নেই।

অতঃপর আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তাআলা আকাশ ও যমিনকে ভাঁজ করা দলিলের মতো গুটিয়ে নেবেন। এরপর তিনি তা বিছিয়ে আবার মুড়িয়ে নেবেন। অতঃপর বলবেন: 'আমিই জাব্বার (মহাপরাক্রমশালী)।' এরপর তিনি উচ্চস্বরে ঘোষণা দেবেন – তিনি তাবারাকা ওয়া তাআলা এবং সুউচ্চ ও পবিত্র – এবং বলবেন: {আজ রাজত্ব কার?} [সূরা গাফির: ১৬] অতঃপর তিনি নিজেই বলবেন: {এক, পরাক্রমশালী আল্লাহর।}।" এই দীর্ঘ হাদিস।









আল-জামি` আল-কামিল (946)


946 - عن عبد اللَّه بن عمرو بن العاص، قال: جاء أعرابيٌّ إلى النبيّ صلى الله عليه وسلم فقال: ما الصُّور؟ قال:"قرنٌ يُنفخُ فيه".

صحيح: رواه أبو داود (4742)، والترمذيّ (2430، 3244) كلاهما من طريق سليمان التيميّ، عن أسلم العجليّ، عن بشر بن شفاف، عن عبد اللَّه بن عمرو بن العاص، فذكر الحديث، واللّفظ للترمذيّ.

ولفظ أبي داود:"الصور قرنٌ ينفخ فيه".

قال الترمذيّ في الموضع الأوّل:"حسن لا نعرفه إِلَّا من حديث سليمان التيمي". وفي الموضع الثاني:"حسن صحيح، إنّما نعرفه من حديث سليمان التيمي". وفي بعض النسخ عكس ما ذكرته.

والصّواب أنه صحيح فإنّ رجاله ثقات، والتيميّ هو ابن طرخان.

وقد أخرجه ابن حبان في صحيحه (7312)، والحاكم (2/




আব্দুল্লাহ ইবনু আমর ইবনুল আস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বললেন: একজন বেদুঈন নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে জিজ্ঞাসা করল: ‘সুর’ (শিঙ্গা) কী? তিনি বললেন: "এটি একটি শিংগা, যাতে ফুঁক দেওয়া হবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (947)


947 - عن ابن عباس، عن النبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"إنّكم تحشرون حفاةً عراة غُرلًا ثم قرأ: {كَمَا بَدَأْنَا أَوَّلَ خَلْقٍ نُعِيدُهُ وَعْدًا عَلَيْنَا إِنَّا كُنَّا فَاعِلِينَ} [سورة الأنبياء: 104]، وأوَّل من يُكسى يوم القيامة إبراهيم، وإنَّ ناسًا من أصحابي يؤخذ بهم ذات الشّمال، فأقول: أصحابي أصحابي، فيقول: إنّهم لم يزالوا مرتدين على أعقابهم منذ فارقتهم، فأقول كما قال العبد الصَّالح: {مَا قُلْتُ لَهُمْ إِلَّا مَا أَمَرْتَنِي بِهِ أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمْ وَكُنْتُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا مَا دُمْتُ فِيهِمْ فَلَمَّا تَوَفَّيْتَنِي كُنْتَ أَنْتَ الرَّقِيبَ عَلَيْهِمْ وَأَنْتَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ (117) إِنْ تُعَذِّبْهُمْ فَإِنَّهُمْ عِبَادُكَ وَإِنْ تَغْفِرْ لَهُمْ فَإِنَّكَ أَنْتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ} [سورة المائدة: 117 - 118]".

متفق عليه: رواه البخاريّ في أحاديث الأنبياء (3349)، ومسلم في كتاب الجنة (2860) كلاهما من حديث المغيرة بن النّعمان، قال: حدّثني سعيد بن جبير، عن ابن عباس، فذكر
الحديث، واللّفظ للبخاريّ.

وفي بعض الرّوايات: قال:"قام فينا رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم خطيبًا بموعظة".

وأمّا رُوي عن علي بن أبي طالب:"أوّل من يُكسى إبراهيم قبطيتين، ثم يكسى النبيّ صلى الله عليه وسلم حُلّة حبرة، وهو عن يمين العرش". فهو موقوف.

وكذلك لا يصح ما رُوي عن ابن مسعود: أول ما يُكسى إبراهيم، يقول اللَّه تعالى: اكسُوا خليلي، فيؤتَى برَيْطتين بيضاوين فيلبسهما، ثم يقعد فيتقبل العرش، ثم أُوتى بكسوتي فألبسها، فأقوم عن يمينه مقامًا لا يقومُه أحدٌ غيريّ، يغبطني به الأوّلون والآخرون".

رواه الإمام أحمد (3787) حدّثنا سعيد بن زيد، حدّثنا علي بن الحكم البنانيّ، عن عثمان، عن إبراهيم، عن علقمة والأسود، عن ابن مسعود، في حديث طويل.

عثمان هو ابن عمير البجليّ أبو اليقظان الكوفي الأعميّ، قال الحافظ:"ضعيف واختلط، وكان يدلس، ويغلو في التّشيّع".

وسعيد بن زيد هو أخو حمّاد بن زيد"صدوق له أوهام" كما في التقريب. قال الهيثميّ في"المجمع" (10/ 361 - 362):"رواه أحمد والبزّار والطَّبرانيّ، وفي أسانيدهم كلّهم عثمان بن عمير وهو ضعيف".

وصحّحه الحاكم (2/ 364)، فقال الذّهبيّ:"لا واللَّه، فعثمان ضعّفه الدّارقطنيّ".




ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "নিশ্চয়ই তোমাদেরকে খালি পায়ে, উলঙ্গ এবং অ-খতনাকৃত (অ-সুন্নতকৃত) অবস্থায় একত্রিত করা হবে।"

এরপর তিনি তিলাওয়াত করলেন:
"যেভাবে আমি প্রথম সৃষ্টি শুরু করেছিলাম, সেভাবেই তার পুনরাবৃত্তি করব। এটা আমার জন্য প্রতিজ্ঞা, আমি তা কার্যকরকারী।" [সূরা আল-আম্বিয়া: ১০৪]

আর কিয়ামতের দিন সর্বপ্রথম যাকে পোশাক পরানো হবে, তিনি হলেন ইব্রাহীম (আঃ)। আর আমার সাহাবীদের মধ্য থেকে কিছু লোককে বাম দিকে ধরে নিয়ে যাওয়া হবে। তখন আমি বলব: "আমার সাহাবী! আমার সাহাবী!" (তখন আল্লাহ) বলবেন: "আপনি যখন তাদের ছেড়ে এসেছেন, তখন থেকে তারা তাদের পশ্চাতে ফিরে যাচ্ছিল (ধর্মচ্যুত হয়ে গিয়েছিল)।"

তখন আমি সেই নেক বান্দার (ঈসা (আঃ)-এর) মতোই বলব:
"আমি তো তাদের শুধু সেটাই বলেছি, যা আপনি আমাকে নির্দেশ দিয়েছেন—এই যে, তোমরা আল্লাহ্‌র ইবাদত কর, যিনি আমার প্রতিপালক এবং তোমাদেরও প্রতিপালক। যতদিন আমি তাদের মধ্যে ছিলাম, আমি ছিলাম তাদের উপর সাক্ষী। অতঃপর যখন আপনি আমাকে তুলে নিলেন, তখন আপনিই ছিলেন তাদের উপর তত্ত্বাবধায়ক। আর আপনি সবকিছুর উপর সাক্ষী। যদি আপনি তাদের শাস্তি দেন, তবে তারা আপনারই বান্দা; আর যদি আপনি তাদের ক্ষমা করে দেন, তবে নিশ্চয়ই আপনি মহাপরাক্রমশালী, প্রজ্ঞাময়।" [সূরা আল-মায়িদাহ: ১১৭-১১৮]









আল-জামি` আল-কামিল (948)


948 - عن عائشة، قالت: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"تُحشرون حُفاة عُراة غُرْلًا". قالت عائشة: فقلت: يا رسولَ اللَّه، الرّجال والنّساء ينظر بعضهم إلى بعض؟ ! فقال:"الأمر أشدّ من أن يهمّهم ذاك".

متفق عليه: رواه البخاريّ في الرقاق (6527)، ومسلم في كتاب الجنّة (2859) كلاهما من طريق حاتم بن أبي صغيرة، عن عبد اللَّه بن أبي مليكة، قال: حدّثني القاسم بن محمد بن أبي بكر، أنّ عائشة، فذكرت الحديث.




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “তোমাদেরকে খালি পায়ে, উলঙ্গ অবস্থায় এবং অ-খতনাকৃত (খতনাবিহীন) অবস্থায় একত্রিত করা হবে।” আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন, আমি বললাম, “ইয়া রাসূলাল্লাহ! পুরুষ ও নারী কি একে অপরের দিকে তাকিয়ে থাকবে?!” তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, “পরিস্থিতি এর চেয়ে অনেক বেশি কঠিন হবে, যা তাদের সেই দিকে মনোযোগ দিতে দেবে না।”









আল-জামি` আল-কামিল (949)


949 - عن وعن أبي هريرة، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"يُحشر النَّاسُ على ثلاث طرائق: راغبين راهين، واثنان على بعير، وثلاثة على بعير، وأربعة على بعير، وعشرة على بعير، ويَحْشرُ بقيتهم النّارُ، تقيل معهم حيث قالوا، وتبيت معهم حيث باتوا، وتصبح معهم حيث أصبحوا، وتُمسي معهم حيث أمسوا".

متفق عليه: رواه البخاريّ في الرّقاق (6523)، ومسلم في صفة الجنّة (2861) كلاهما من حديث وُهيب، عن ابن طاوُس، عن أبيه، عن أبي هريرة، فذكره.

قال الخطّابي:"الحشْر المذكور في هذا الحديث إنّما يكون قبل قيام السّاعة، يحشر النّاس
أحياء إلى الشّام، فأمّا الحشر الذي يكون بعد البعث من القبور، فإنّه على خلاف هذه الصُّورة من ركوب الإبل والمعاقبة عليها، إنّما هو ما ورد في الخبر أنهم يبعثون يوم القيامة حفاة عُراة بهما غرلًا، وقد قيل: إنّ هذا البعث دون الحشر، فليس بين الحديثين تدافع ولا تضاد". أعلام الحديث (3/ 2269).

وذكره البغويُّ في"شرح السنة" (15/ 125) دون أن يعزوه إليه.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "মানুষকে তিন প্রকারে একত্রিত করা হবে: (একদল হবে) উৎসুক ও ভীতসন্ত্রস্ত; আর (অন্যরা আসবে) দুজন এক উটে, তিনজন এক উটে, চারজন এক উটে, এবং দশজন এক উটে (আরোহণ করে)। আর তাদের অবশিষ্টদেরকে আগুন তাড়িয়ে নিয়ে যাবে। তারা যেখানে দুপুরের বিশ্রাম নেবে, আগুনও তাদের সাথে সেখানে বিশ্রাম নেবে; তারা যেখানে রাত্রিযাপন করবে, আগুনও তাদের সাথে সেখানে রাত্রিযাপন করবে; তারা যেখানে সকালে উপনীত হবে, আগুনও তাদের সাথে সেখানে উপনীত হবে; এবং তারা যেখানে সন্ধ্যায় উপনীত হবে, আগুনও তাদের সাথে সেখানে উপনীত হবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (950)


950 - عن عبد اللَّه بن أُنيس، قال: سمعتُ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول:"يُحشر النَّاسُ يوم القيامة -أو قال: العباد- عُراةً غرلًا بُهْمًا". قال: قلنا: وما بُهْمًا؟ قال:"ليس معهم شيء، ثم يناديهم بصوت يسمعه مَنْ بَعُد كما يسمعه مَنْ قَرُب، أنا الملك، أنا الدَّيَّان، ولا ينبغي لأحد من أهل النّار أن يدخل النّار، وله عند أحد من أهل الجنّة حقٌّ حتّى أُقِصَّهُ منه، ولا ينبغي لأحد من أهل الجنّة أن يدخل الجنّة ولأحد من أهل النّار عنده حقٌّ حتى أُقِصَّه منه حتّى اللَّطْمةَ". قال: قلنا: كيف وإنَّا إنّما نأتي اللَّه عز وجل عُراةً غرلًا بُهْمًا؟ قال:"بالحسنات والسَّيِّئات".

حسن: رواه الإمام أحمد (16402) واللّفظ له، والحارث بن أبي أسامة (45) زوائده، والبخاريّ في الأدب المفرد (970)، وخلق أفعال العباد (ص 92)، وابن أبي عاصم في السنة (514)، والحاكم (2/ 437) -وصحّحه- كلّهم من طرق عن همّام بن يحيى، عن القاسم بن عبد الواحد المكيّ، عن عبد اللَّه بن محمد بن عقيل، أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يقول: بلغني حديثٌ عن رجل سمعه من رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، فاشتريتُ بعيرًا، ثم شددتُ عليه رحليّ، فسرتُ إليه شهرًا حتى قدمتُ عليه الشام، فإذا عبد اللَّه بن أنيس، فقال للبوَّاب: قل له جابر على الباب. قال: ابن عبد اللَّه؟ قلت: نعم. فخرج يطأ ثوبه، فاعتنقني واعتنقته. فقلتُ: حديثًا بلغني عنك أنَّك سمعتَه من رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم في القصاص، فخشيتُ أن تموتَ أو أموتَ قبل أن أسمعه. قال: سمعتُ رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم يقول (فذكر الحديث).

وإسناده حسن من أجل القاسم بن عبد الواحد المكيّ، وشيخه عبد اللَّه بن محمد بن عقيل، فإنّهما لم يبلغا درجة"الثقات" وحسَّنه أيضًا المنذريّ في"الترغيب والترهيب" (4/ 202) وإن كان الهيثميّ رحمه الله ضعّفه في"المجمع" (1/ 133) من أجل عبد اللَّه بن محمد بن عقيل، ولكن الصواب أنه حسن الحديث إِلَّا إذا خالف فلا يقبل كما قال الذّهبيّ في ترجمته في"الميزان"، وقد وافق على تصحيح الحاكم له في تلخيص المستدرك.

وعلقه البخاريّ بصيغة الجزم (1/ 173) وقال:"رحل جابر بن عبد اللَّه مسيرة شهر إلى عبد اللَّه ابن أنيس في حديث واحد".

قال الحافظ في"الفتح" (1/ 174)،"وله طريق أخرى أخرجها الطّبرانيّ في مسند الشّاميين،
وتمّام في فوائده من طريق الحجاج بن دينار، عن محمد بن المنكدر، عن جابر، وذكر نحوه. وقال: وإسناده صالح، وله طريق ثالثة أخرجها الخطيب في"الرحلة" من طريق أبي الجارود العنْسيّ -وهو بالنون الساكنة- عن جابر، فذكر نحوه، وفي إسناده ضعف" انتهى.




আবদুল্লাহ ইবনু উনাইস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি: "কিয়ামতের দিন মানুষকে—কিংবা তিনি বলেছেন: বান্দাদেরকে—উন্মুক্ত, খাতনা করা হয়নি এমন এবং নিঃস্ব (বুহমান) অবস্থায় একত্রিত করা হবে।" তিনি বলেন, আমরা বললাম: ‘বুহমান’ মানে কী? তিনি (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "তাদের সাথে কিছুই থাকবে না। অতঃপর তিনি এমন এক স্বরে তাদের ডাকবেন, যা দূরবর্তী ব্যক্তিরা যেমন শুনতে পাবে, নিকটবর্তী ব্যক্তিরাও তেমনি শুনতে পাবে। (আল্লাহ বলবেন,) আমিই বাদশাহ, আমিই প্রতিফলদাতা (দাইয়্যান)। জাহান্নামের অধিবাসীদের কারো জন্য এটা উচিত হবে না যে, সে জান্নাতের অধিবাসীদের কারো কাছে কোনো প্রাপ্য রেখে জাহান্নামে প্রবেশ করবে, যতক্ষণ না আমি তার পক্ষ থেকে এর প্রতিশোধ (হক) আদায় করে দেব। আর জান্নাতের অধিবাসীদের কারো জন্যও এটা উচিত হবে না যে, সে জাহান্নামের অধিবাসীদের কারো কাছে কোনো প্রাপ্য রেখে জান্নাতে প্রবেশ করবে, যতক্ষণ না আমি তার পক্ষ থেকে এর প্রতিশোধ (হক) আদায় করে দেব—এমনকি চপেটাঘাতের জন্যও।" তিনি বলেন, আমরা বললাম: আমরা তো আল্লাহর কাছে উন্মুক্ত, খাতনাবিহীন ও নিঃস্ব (বুহমান) অবস্থায় আসব। কীভাবে (প্রতিশোধ নেওয়া হবে)? তিনি (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "নেকী ও পাপের মাধ্যমে।"









আল-জামি` আল-কামিল (951)


951 - عن أنس بن مالك، أنّ رجلًا قال: يا رسول اللَّه، كيف يُحشر الكافر على وجهه يوم القيامة؟ قال:"أليس الذي أمشاه على الرِّجْلين في الدّنيا قادرًا على أن يُمْشيه على وجهه يوم القيامة".

متفق عليه: رواه البخاريّ في التفسير (4760)، ومسلم في صفات المنافقين (2806) كلاهما من حديث يونس بن محمد البغداديّ، حدّثنا شيبان، عن قتادة، حدّثنا أنس بن مالك، فذكره. قال قتادة:"بلي وعِزَّة ربِّنا".




আনাস ইবনে মালিক (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, একজন লোক জিজ্ঞেস করলো, 'হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! কিয়ামতের দিন কিভাবে কাফেরকে তার মুখের উপর ভর দিয়ে হাশর করা হবে?' তিনি (রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, 'যিনি দুনিয়াতে তাকে দু'পায়ের উপর হাঁটিয়েছিলেন, তিনি কি কিয়ামতের দিন তাকে তার মুখের উপর হাঁটাতে সক্ষম নন?'









আল-জামি` আল-কামিল (952)


952 - عن سهل بن سعد، قال: سمعتُ النّبيَّ صلى الله عليه وسلم يقول:"يُحشر النّاس يوم القيامة على أرض بيضاء عَفْراء كقُرصة نقي".

قال سُهيل أو غيره:"ليس فيها معلم لأحد".

متفق عليه: رواه البخاريّ في الرّقاق (6521)، ومسلم في صفات المنافقين (2790) كلاهما من حديث محمد بن جعفر بن أبي كثير، حدّثني أبو حازم بن دينار، عن سهل بن سعد، فذكره.

وقوله:"قال سهيل أو غيره". هو عند البخاريّ وحده، وأمّا مسلم فساق الحديث بكامله مساقًا واحدًا.

قال الخطّابي:"العَفْرة: بياضٌ ليس بالنَّاصع، والنَّقيُّ: الحوَّار، نُقِّي من القشر والنُّخالة. وقوله:"ليس فيها معْلَم لأحد" يريد أن تلك الأرض مستوية ليس فيها حدب يرد البصر، ولا بناء يستر ما وراءه. والمعْلَم: واحدُ معالم الأرض، أي: أعلامها التي يُهتدى بها في الطُّرق". أعلام الحديث (3/ 2268).




সহল ইবনু সা'দ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, আমি নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছি: "কিয়ামতের দিন মানুষকে এমন শুভ্র, ঈষৎ লালচে জমিনের উপর একত্রিত করা হবে, যা খাঁটি আটার রুটির মতো মসৃণ।"
সুহাইল বা অন্য কেউ বলেছেন: "তাতে কারো জন্য কোনো চিহ্ন বা আলামত থাকবে না।"









আল-জামি` আল-কামিল (953)


953 - عن أبي هريرة، عن النّبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"أوّل من يُدعى يوم القيامة آدم، فتراءى ذريتُه، فيقال: هذا أبوكم آدم، فيقول: لبيك وسعديك. فيقول: أخرج بعث جهنّم من ذريَّتك. فيقول: يا ربّ، كم أُخرج؟ فيقول: أخرج من كلّ مائة تسعة وتسعين". فقالوا: يا رسول اللَّه، إذا أُخذ منا من كلِّ مائةٍ تسعةٌ وتسعون، فماذا يبقى منا؟ قال:"إنّ أمّتي في الأمم كالشّعرة البيضاء في الثور الأسود".

صحيح: رواه البخاريّ في الرّقاق (15) عن إسماعيل، حدّثني أخي، عن سليمان، عن ثور، عن أبي الغيث، عن أبي هريرة، فذكره.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: কিয়ামতের দিন সর্বপ্রথম যাকে ডাকা হবে, তিনি হলেন আদম। অতঃপর তার সন্তান-সন্ততিকে দেখানো হবে। বলা হবে: ইনি তোমাদের পিতা আদম। তখন তিনি বলবেন: লাব্বাইক ওয়া সা'দাইক (আমি উপস্থিত এবং আপনার কাছেই কল্যাণ)। অতঃপর আল্লাহ বলবেন: তোমার সন্তানদের মধ্য থেকে জাহান্নামের অংশ বের করে দাও। আদম বলবেন: হে রব, কতজন বের করব? আল্লাহ বলবেন: প্রতি একশত জনের মধ্য থেকে নিরানব্বই জনকে বের করে দাও। তখন সাহাবাগণ বললেন: হে আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! যদি আমাদের মধ্য থেকে প্রতি একশতে নিরানব্বই জনকে নেওয়া হয়, তবে আমাদের মধ্যে আর কী বাকি থাকবে? তিনি বললেন: নিশ্চয়ই অন্যান্য উম্মতের তুলনায় আমার উম্মত হলো কালো ষাঁড়ের গায়ের একটি সাদা চুলের মতো।









আল-জামি` আল-কামিল (954)


954 - عن عائشة زوج النّبيّ صلى الله عليه وسلم كانتْ لا تسمعُ شيئًا لا تعرفه راجعتْ فيه حتّى تعرفَه، وأنّ النبيَّ صلى الله عليه وسلم قال:"من حُوسب عُذِّب". قالت عائشةُ: فقلتُ: أو ليس يقول اللَّه تعالى: {فَسَوْفَ يُحَاسَبُ حِسَابًا يَسِيرًا} [سورة الانشقاق: 8]؟ قالتْ: فقال:"إنّما ذلك العرْض، ولكنْ مَنْ نُوقش الحساب يهلك".

متفق عليه: رواه البخاريّ في العلم (103) عن سعيد بن أبي مريم، قال: أخبرنا نافع بن عمر، قال: حدّثني ابن أبي مليكة، أنّ عائشة زوج النبيّ صلى الله عليه وسلم، فذكره.

ورواه مسلم في الجنّة (2876) من طريق أيوب، عن ابن أبي مليكة، نحوه.

ورواه الشّيخان - البخاريّ (4939، 6537)، ومسلم من وجه آخر عن أبي يونس القشيريّ، عن ابن أبي مليكة إِلَّا أنه أدخل بين ابن أبي مليكة وبين عائشة"القاسم بن محمد".




আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সহধর্মিণী এমন কোনো কথা শুনতেন না যা তিনি জানতেন না, বরং তিনি সেটা সম্পর্কে জিজ্ঞাসা করতেন যতক্ষণ না তিনি তা জানতে পারতেন। এবং নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যাকে (কঠোর) হিসাবের সম্মুখীন করা হবে, সে শাস্তি পাবে।" আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, আমি বললাম: আল্লাহ তাআলা কি বলেননি: {অতঃপর তার কাছ থেকে সহজ হিসাব নেওয়া হবে} [সূরা ইনশিকাক: ৮]? তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "সেটা হলো শুধু (আমলের) পেশ করা (উপস্থাপন)। কিন্তু যার হিসাবের সূক্ষ্ম বিচার করা হবে, সে ধ্বংস হবে।"









আল-জামি` আল-কামিল (955)


955 - عن عبد اللَّه بن الزبير، أنّ النبيّ صلى الله عليه وسلم قال:"مَنْ نُوقش الحساب بعمله هلك".

حسن: رواه ابن أبي عاصم في"السنة" (886) عن محمد بن مهديّ، ثنا أبو عامر عبد الملك ابن عمرو، عن محمد بن مسلم، عن عمرو بن دينار، عن ابن الزبير، فذكره.

وإسناده حسن من أجل الكلام في محمد بن مسلم وهو الطائفيّ، قال فيه الإمام أحمد: ما أضعف حديثه، ووثقه ابن معين وأبو داود والعجليّ، وذكره ابن حبان في الثقات فهو حسن الحديث، ولذا قال فيه الحافظ في التقريب:"صدوق يخطئ" والظّاهر أنه لم يخطئ في هذا؛ فإنّ له شواهد تقويّه.




আব্দুল্লাহ ইবনে যুবাইর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয়ই নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “যার হিসাব পুঙ্খানুপুঙ্খভাবে নেওয়া হবে, সে ধ্বংস হয়ে যাবে।”









আল-জামি` আল-কামিল (956)


956 - عن أبي هريرة، أنّ ناسًا قالوا لرسول اللَّه صلى الله عليه وسلم: يا رسول اللَّه، هل نرى ربَّنا
يوم القيامة؟ فقال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"هل تضارُّون في رؤية القمر ليلة البدر؟". قالوا: لا يا رسول اللَّه. قال:"هل تضارُّون في الشّمس ليس دونها سحاب؟". قالوا: لا يا رسول اللَّه. قال:"فإنّكم ترونه كذلك. يجمعُ اللُه النَّاسَ يوم القيامة، فيقول: مَنْ كان يعبد شيئًا فَلْيَتَّبِعْهُ فَيَتَّبِعُ مَنْ كان يعبد الشّمسَ الشّمسَ، ويَتَّبعُ من كان يعبد القمرَ القمرَ، ويَتَّبِعُ من كان يعبد الطَّواغيتَ الطَّواغيتَ، وتبقى هذه الأمّةُ فيها منافقوها، فيأتيهم اللَّهُ تبارك وتعالى في صورةٍ غير صورته التي يعرفونَ. فيقول: أنا ربُّكم، فيقولون: نعوذ باللَّه منك! هذا مكانُنَا حتّى يأتينا ربُّنا، فإذا جاء ربُّنا عرفناه، فيأتيهم اللَّه تعالى في صورته التي يعرفون فيقول: أنا ربُّكم. فيقولون: أنت ربُّنا، فَيَتَّبِعُونه، ويُضْرَبُ الصِّراطُ بين ظَهْرَي جَهَنَّمَ. فأكونُ أنا وأمَّتي أوَّلُ مَنْ يُجيزُ، ولا يتكلَّمُ يومئذ إِلَّا الرُّسُل، ودَعْوَى الرُّسُل يومئذٍ: اللَّهُمَّ سَلِّمْ، سَلِّم. وفي جهنّمَ كلاليبُ مثلُ شَوْك السَّعْدان، هل رأيتم السَّعْدان؟". قالوا: نعم، يا رسول اللَّه. قال:"فإنَّها مثلُ شَوْك السَّعْدان، غير أنّه لا يعلمُ ما قَدْرُ عِظَمِهَا إِلَّا اللَّه، تَخْطَفُ النّاس بأعمالهم. فمنهم المؤمن بقي بعمله، ومنهمُ المجازَى حتَّى يُنَجَّي حتَّى إذا فَرَغَ اللَّهُ من القضاء بين العبادِ، وأراد أن يخرج برحمته من أراد من أهل النّار، أمر الملائكة أن يخرجوا من النّار من كان لا يشرك باللَّه شيئًا ممن أراد اللَّه تعالى أن يرحمه ممن يقول لا إله إِلَّا اللَّه، فيعرفونَهم في النّار، يعرفونهم بأثر السُّجود تأكل النّارُ من ابن آدم إِلَّا أثر السُّجود، حرَّم اللَّهُ على النّار أن تأكل أثر السُّجود، فيُخْرجُون من النّار وقد امْتَحَشُوا، فَيُصَبُّ عليهم ماءُ الحياةِ فَيَنْبُتُون منه كما تَنْبُتُ الحبَّةُ في حَمِيل السَّيْل. ثم يفرُغُ اللَّه تعالى من القضاء بين العباد، ويبقى رَجُلٌ مقبل بوجهه على النّار -وهو آخر أهل الجنّة دخولًا الجنّة- فيقول: أي ربِّ اصْرِفْ وجهي عن النّار، فإنه قد قَشَبَنِي ريحُها وأحرقني ذَكاؤُها. فيدْعُو اللَّهَ ما شاءَ اللَّهُ أَنْ يَدْعُوهُ، ثم يقول اللَّه تبارك وتعالى: هل عسيتَ إنْ فعلتُ ذلك بك أَنْ تَسْأَلَ غَيْرَه؟ فيقول: لا أسألك غيره، ويُعطي ربَّه من عهودٍ ومواثيقَ ما شاء اللَّه، فيصرفُ اللَّهُ وَجْهَه عن النَّار، فإذا أقبل على الجنَّة ورآها سكت ما شاء اللَّه أَنْ يَسْكُتَ. ثم يقول: أيْ ربِّ قَدِّمْني إلى باب الجنّة. فيقول اللَّه له: أليسَ قد أعطيتَ عهودَك ومواثيقَك لا تسألني غير الذي أعطيتُك، ويَلْك يا ابن آدم ما أغْدَرَكَ! فيقول: أيْ ربِّ ويدعو اللَّه حتّى يقول له: فَهلْ عسيتَ إنْ أعطيتُك ذلك أن تسأل غيَرَه؟ فيقول: لا وعِزَّتِك فيعطي ربَّه ما شاء
اللَّه من عهودٍ ومواثيقَ فيقدِّمُه إلى باب الجنّة فإذا قام على باب الجنَّة انْفَهَقَتْ له الجنَّةُ فرأى ما فيها من الخير والسُّرور. فيسكتُ ما شاء اللَّهُ أن يسكتَ. ثم يقول: أَيْ ربِّ أَدْخِلني الجنَّةَ. فيقول اللَّه تبارك وتعالى له: أليس قد أعطيتَ عهودَك ومواثيقَك أن لا تسأل غير ما أعطيت؟ ! ويلك يا ابن آدم ما أغدرك! فيقول: أيْ ربّ لا أكون أشقى خَلْقِك، فلا يزال يدعو اللَّه حتّى يَضْحَكَ اللَّهُ تبارك وتعالى منه فإذا ضَحِكَ اللَّه منه. قال: أُدْخُل الجنّة، فإذا دخلها قال اللَّه له: تَمَنَّهُ فيسأل ربَّه ويتمَنَّى، حتّى إنّ اللَّه ليُذَكِّرُه من كذا وكذا، حتّى إذا انقطعت به الأمانيُّ. قال اللَّه تعالى: ذلك لك ومثلُه معه".

متفق عليه: رواه البخاريّ في التوحيد (7437)، ومسلم في الإيمان (182) كلاهما من حديث إبراهيم بن سعد، عن ابن شهاب، عن عطاء بن يزيد اللّيثيّ، أنّ أبا هريرة أخبره أنّ ناسًا قالوا (فذكر الحديث)، ولفظهما سواء.

قال عطاء بن يزيد: وأبو سعيد الخدريّ مع أبي هريرة لا يردّ عليه من حديثه شيئًا حتّى إذا حدّث أبو هريرة:"إنّ اللَّه قال لذلك الرجل: ومثلُه معه". قال أبو سعيد:"وعشرة أمثاله معه" يا أبا هريرة. قال أبو هريرة: ما حفظت إِلَّا قوله ذلك:"لك ومثله معه". قال أبو سعيد: أشهدُ أنِّي حفظتُ من رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قوله ذلك:"لك وعشرة أمثاله". قال أبو هريرة: وذلك الرَّجُل آخر أهل الجنّة دخولا الجنّة".

قوله:"وفي جهنّم كلاليب" الكلاليب جمع كلوب وهي حديدة معطوفة الرّأس يعلق فيها اللّحم وترسل في التّنور.

وقوله:"مثل شَوْك السَّعْدان" السّعدان نبت له شوكة عظيمة مثل الحسك.

وقوله:"امْتَحشُوا" أي احترقوا.

وقوله:"انفهقت" أي انفتحت واتّسعت.




আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নিশ্চয় কিছু লোক রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলল, ‘হে আল্লাহর রাসূল! ক্বিয়ামতের দিন কি আমরা আমাদের রবকে দেখতে পাব?’ রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “পূর্ণিমা রাতে চাঁদ দেখতে কি তোমাদের কোনো অসুবিধা হয়?” তারা বলল, ‘না, হে আল্লাহর রাসূল!’ তিনি বললেন: “এমন সূর্য দেখতে কি তোমাদের কোনো অসুবিধা হয়, যার নিচে কোনো মেঘ নেই?” তারা বলল, ‘না, হে আল্লাহর রাসূল!’ তিনি বললেন: “তাহলে তোমরা তাঁকে (আল্লাহকে) ঠিক সেভাবেই দেখতে পাবে। আল্লাহ ক্বিয়ামতের দিন মানুষকে একত্রিত করবেন। তিনি বলবেন: যে যা কিছুর ইবাদত করত, সে যেন তারই অনুসরণ করে। তখন যারা সূর্যের ইবাদত করত, তারা সূর্যের অনুসরণ করবে; যারা চাঁদের ইবাদত করত, তারা চাঁদের অনুসরণ করবে; এবং যারা তাগুতের ইবাদত করত, তারা তাগুতের অনুসরণ করবে। আর এই উম্মত অবশিষ্ট থাকবে, যাদের মধ্যে তাদের মুনাফিকরাও থাকবে। তখন আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তা‘আলা তাদের কাছে এমন এক আকৃতিতে আসবেন, যা তারা চিনতে পারে না। তিনি বলবেন, ‘আমি তোমাদের রব।’ তারা বলবে, ‘আমরা আপনার থেকে আল্লাহর কাছে আশ্রয় চাই। এটি আমাদের স্থান, যতক্ষণ না আমাদের রব আমাদের কাছে আসেন। যখন আমাদের রব আসবেন, তখন আমরা তাঁকে চিনতে পারব।’ অতঃপর আল্লাহ তা‘আলা তাদের কাছে সেই রূপে আসবেন, যা তারা চেনে। তিনি বলবেন, ‘আমি তোমাদের রব।’ তখন তারা বলবে, ‘আপনিই আমাদের রব।’ অতঃপর তারা তাঁর অনুসরণ করবে। আর জাহান্নামের উপর পুল (সিরাত) স্থাপন করা হবে। আমি এবং আমার উম্মত হব প্রথম অতিক্রমকারী। সেদিন রাসূলগণ ছাড়া অন্য কেউ কথা বলবে না। সেদিন রাসূলদের প্রার্থনা হবে: ‘ইয়া আল্লাহ! নিরাপত্তা দিন, নিরাপত্তা দিন।’ আর জাহান্নামে সা‘দানের কাঁটার মতো আঁকড়া (কালালিব) থাকবে। তিনি বললেন, “তোমরা কি সা‘দান দেখেছ?” তারা বলল, ‘হ্যাঁ, হে আল্লাহর রাসূল!’ তিনি বললেন, “এগুলো সা‘দানের কাঁটার মতোই, তবে সেগুলোর বিশালতা আল্লাহ ছাড়া অন্য কেউ জানে না। এগুলি মানুষকে তাদের আমল অনুযায়ী ছিনিয়ে নেবে। তাদের মধ্যে কতক মু‘মিন তাদের আমলের কারণে মুক্তি পাবে, আর কতককে শাস্তি দেওয়া হবে, অবশেষে মুক্তি দেওয়া হবে। যখন আল্লাহ তাঁর বান্দাদের মধ্যে বিচার কাজ শেষ করবেন এবং স্বীয় রহমত দ্বারা জাহান্নাম থেকে যাকে ইচ্ছা বের করার ইচ্ছা করবেন, তখন ফেরেশতাদেরকে আদেশ করবেন যেন তারা এমন সব লোককে জাহান্নাম থেকে বের করে আনে যারা আল্লাহর সাথে কাউকে শরীক করেনি, আল্লাহ যাদের প্রতি রহমত করার ইচ্ছা করবেন এবং যারা ‘লা ইলাহা ইল্লাল্লাহ’ বলত। তারা (ফেরেশতারা) তাদেরকে জাহান্নামের মধ্যে চিনে নেবে। তারা তাদেরকে সিজদার চিহ্নের দ্বারা চিনবে। সিজদার চিহ্ন ছাড়া আগুনের স্পর্শ আদম সন্তানের সব অঙ্গকেই গ্রাস করবে। আল্লাহ আগুনের জন্য সিজদার চিহ্ন খাওয়া হারাম করে দিয়েছেন। তখন তারা (ফেরেশতারা) তাদেরকে এমন অবস্থায় আগুন থেকে বের করবে যে, তারা পুড়ে কয়লা হয়ে গেছে। অতঃপর তাদের উপর ‘হায়াত’ (জীবন) নামক পানি ঢালা হবে, ফলে তারা বন্যার স্রোতে (বাহিত) শস্যের বীজের মতো তা থেকে সতেজ হয়ে উঠবে। এরপর আল্লাহ তা‘আলা বান্দাদের মধ্যে বিচারকার্য শেষ করবেন এবং একজন লোক অবশিষ্ট থাকবে, যার মুখ থাকবে আগুনের দিকে ফিরানো— আর সে হবে জান্নাতে প্রবেশকারীদের মধ্যে সর্বশেষ ব্যক্তি। সে বলবে, ‘হে আমার রব! আমার মুখমণ্ডল আগুন থেকে ফিরিয়ে দিন। কারণ এর দুর্গন্ধ আমাকে কষ্ট দিচ্ছে এবং এর তাপ আমাকে পুড়িয়ে ফেলেছে।’ অতঃপর সে আল্লাহকে ডাকতে থাকবে যতক্ষণ আল্লাহ চাইবেন। অতঃপর আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তা‘আলা বলবেন: ‘আমি যদি তোমার জন্য এমন করি, তাহলে কি তুমি আর কিছু চাইবে?’ সে বলবে, ‘আমি আপনার কাছে আর কিছু চাইব না।’ আর সে তার রবকে আল্লাহর ইচ্ছা অনুযায়ী অঙ্গীকার ও চুক্তি দেবে। অতঃপর আল্লাহ তার মুখমণ্ডল আগুন থেকে ফিরিয়ে দেবেন। যখন সে জান্নাতের দিকে মুখ ফেরাবে এবং তা দেখবে, তখন সে আল্লাহর ইচ্ছানুযায়ী চুপ করে থাকবে। অতঃপর সে বলবে, ‘হে আমার রব! আমাকে জান্নাতের দরজার কাছে এগিয়ে দিন।’ আল্লাহ তাকে বলবেন, ‘তুমি কি তোমার অঙ্গীকার ও চুক্তি দাওনি যে, যা আমি তোমাকে দিলাম, তা ছাড়া আর কিছু আমার কাছে চাইবে না? হে আদম সন্তান! তুমি কতই না অঙ্গীকার ভঙ্গকারী!’ সে বলবে, ‘হে আমার রব!’ আর সে আল্লাহকে ডাকতে থাকবে। এমনকি আল্লাহ তাকে বলবেন: ‘আমি যদি তোমাকে এটা দিই, তাহলে কি তুমি আর কিছু চাইবে?’ সে বলবে, ‘না, আপনার ইজ্জতের শপথ!’ তখন সে তার রবকে আল্লাহর ইচ্ছা অনুযায়ী অঙ্গীকার ও চুক্তি দেবে। অতঃপর তিনি তাকে জান্নাতের দরজার কাছে এগিয়ে দেবেন। যখন সে জান্নাতের দরজার কাছে দাঁড়াবে, তখন জান্নাত তার জন্য খুলে দেওয়া হবে। সে তার মধ্যকার কল্যাণ ও আনন্দ দেখতে পাবে। অতঃপর সে আল্লাহর ইচ্ছানুযায়ী চুপ করে থাকবে। তারপর সে বলবে, ‘হে আমার রব! আমাকে জান্নাতে প্রবেশ করিয়ে দিন।’ তখন আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তা‘আলা তাকে বলবেন: ‘তুমি কি তোমার অঙ্গীকার ও চুক্তি দাওনি যে, যা আমি তোমাকে দিয়েছি, তা ছাড়া আর কিছু চাইবে না? হে আদম সন্তান! তুমি কতই না অঙ্গীকার ভঙ্গকারী!’ সে বলবে, ‘হে আমার রব! আমি আপনার সৃষ্টির মধ্যে সবচেয়ে হতভাগা হতে চাই না।’ সে আল্লাহকে ডাকতে থাকবে, এমনকি আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তা‘আলা তার প্রতি হাসবেন। আল্লাহ যখন তার প্রতি হাসবেন, তখন বলবেন: ‘জান্নাতে প্রবেশ করো।’ যখন সে জান্নাতে প্রবেশ করবে, আল্লাহ তাকে বলবেন: ‘তুমি যা চাও, চাও।’ তখন সে তার রবের কাছে চাইবে এবং আশা আকাঙ্ক্ষা প্রকাশ করবে। এমনকি আল্লাহ তাকে অমুক অমুক জিনিসের কথা মনে করিয়ে দেবেন। যখন তার সব আশা আকাঙ্ক্ষা শেষ হয়ে যাবে, তখন আল্লাহ তা‘আলা বলবেন: ‘সেগুলো তোমার জন্য এবং তার সাথে আরও সমপরিমাণ।’

আতা ইবনু ইয়াযীদ বলেন: আর আবূ সা‘ঈদ আল-খুদরীও (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর সাথে ছিলেন। তিনি তাঁর হাদীসের কোনো কিছুকে প্রত্যাখ্যান করেননি, যতক্ষণ না আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এ পর্যন্ত বর্ণনা করেন যে, “আল্লাহ্ ঐ ব্যক্তিকে বলবেন: আর তার সাথে আরও সমপরিমাণ।” তখন আবূ সা‘ঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, ‘হে আবূ হুরায়রা! বরং তার সাথে আরও দশগুণ।’ আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, আমি শুধু এটুকুই স্মরণ রেখেছি যে, “তোমার জন্য তা এবং তার সাথে আরও সমপরিমাণ।” আবূ সা‘ঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন, আমি সাক্ষ্য দিচ্ছি যে, আমি রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে এই কথাটি স্মরণ রেখেছি: “তোমার জন্য তা এবং তার সাথে আরও দশগুণ।” আবূ হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বললেন: আর সেই ব্যক্তি হবে জান্নাতে প্রবেশকারী সর্বশেষ ব্যক্তি।









আল-জামি` আল-কামিল (957)


957 - عن أبي سعيد الخدريّ، أنّ ناسًا في زمن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قالوا: يا رسول اللَّه، هل نرى ربَّنا يوم القيامة؟ قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"نعم". قال:"هل تُضارُّونَ في رؤية الشّمس بالظّهيرة صَحْوًا ليس معها سحابٌ؟ وهل تُضارُّونَ في رؤية القمر ليلة البدر صَحْوًا ليس فيها سحابٌ؟". قالوا: لا يا رسول اللَّه. قال:"ما تُضَارُّون في رؤية اللَّه تبارك وتعالى يوم القيامة إِلَّا كما تُضَارُّون في رؤية أحدهما. إذا كان يوم القيامة أَذَّنَ مُؤَذِّنٌ: لِيَتَّبِعْ كلُّ أُمَّةٍ ما كانت تعبُدُ، فلا يبقى أحدٌ كان يعبد غيرَ اللَّه سبحانه من الأصنامِ والأنصاب إِلَّا يتساقطون في النّار، حتّى إذا لم يبق إِلَّا من كان يعبد اللَّه من
بِر وفاجر وغُبَّر أهل الكتاب، فيُدْعى اليهودُ فيقال لهم: ما كنتم تعبدون؟ قالوا: كنّا نعبد عزيزَ ابن اللَّه! فيقال: كذّبتم ما اتّخذ اللَّه من صاحبةٍ ولا وَلَدٍ. فماذا تَبْغُون؟ قالوا: عَطشنا يا ربَّنا فاسْقِنا. فيُشار إليهم: ألا تَرِدُون؟ ! فيحشرون إلى النّار كأنّها سرابٌ يَحْطِمُ بعضُها بعضًا، فيتساقطون في النّار، ثم يُدْعَى النَّصَارى. فيقال لهم: ما كنتم تعبدون؟ قالوا: كُنّا نعبد المسيحَ ابن اللَّه! فيقال لهم: كذبتُم ما اتّخذ اللَّهُ من صاحبة ولا ولد، فيقال لهم ماذا تَبْغُون؟ فيقولون: عَطِشْنا يا ربَّنا فاسْقِنا. قال: فيشار إليهم: ألا تَرِدُون؟ ! فيحشرون إلى جهنم كأنّها سرابٌ يحطم بعضُها بعضًا فيتساقطون في النّار. حتى إذا لم يبقَ إلَّا مَنْ كان يعبد اللَّه تعالى من برٍّ وفاجرٍ، أتاهم ربُّ العالمين سبحانه وتعالى في أدنى صورة من التي رأوه فيها. قال فما تَنْتَظِرون؟ تَتْبَعُ كلُّ أُمَّةٍ ما كانت تعبدُ. قالوا: يا ربَّنا فارقنا النّاسَ في الدُّنيا أَفْقرَ ما كُنّا إليهم ولم نُصَاحِبْهمْ. فيقول: أنا ربُّكم. فيقولون: نعوذ باللَّه منك لا نشرك باللَّه شيئًا -مرتين أو ثلاثا- حتّى إنّ بعضهم ليكاد أن ينقلبَ. فيقولُ: هل بينكم وبينه آيةٌ فتعرفونه بها؟ فيقولون: نعم. فَيُكشفُ عن ساقٍ، فلا يبقى من كان يسجدُ للَّه من تلقاء نفسِه إلا أَذِنَ اللَّه له بالسُّجود، ولا يبقى من كان يسجد اتّقاءً ورياءً إلّا جعل اللَّهُ ظهرَه طبقةً واحدةً كلّما أراد أن يسجد خَرَّ على قفاهُ، ثم يَرفَعون رؤوسهم، وقد تَحَوَّل في صورته التي رأوه فيها أَوَّل مرّة، فقال: أنا ربُّكم. فيقولون: أنت ربُّنا، ثم يُضْربُ الجسْرُ على جَهَنَّمَ وتَحِلُّ الشَّفاعةُ. ويقولون: اللهمَّ سَلِّمْ سَلِّمْ". قيل: يا رسول اللَّه، وما الجسر؟ قال:"دَحْضٌ مَزِلَّةٌ، فيه خَطَاطِيُف وكلالِيبُ وَحَسَكٌ، تكونُ بنجدٍ فيها شُوَيْكةٌ يقال: لها السَّعْدانُ، فيمر المؤمنون كطَرْف العين وكالبرق وكالريح وكالطير وكأجاويد الخيل والرِّكاب، فناجٍ مُسَلَّمٌ ومَخْدُوشٌ مُرْسَلٌ ومَكْدُوسٌ في نار جَهَنَّم. حتى إذا خَلَصَ المؤمنون من النّار، فوالذي نفسي بيده ما منكم من أحد بأشدَّ مُناشَدةً للَّه في استقصاءِ الحقِّ من المؤمنين اللَّه يوم القيامة لإخوانهم الذين في النّار. يقولون: ربَّنا كانوا يصومون معنا ويُصلُّون ويَحُجُّون! فيقال لهم: أخرجوا مَنْ عرفتم فتُحَرَّمُ صُوَرُهُمْ على النَّار. فيُخْرِجون خلقًا كثيرًا قد أخذت النَّارُ إلى نصف ساقية، وإلى ركبتيه. ثم يقولون ربَّنا ما بقي فيها أحدٌ ممن أمرتنا به. فيقول: ارْجعوا فمن وجدتُم في قلبه مثقالَ دينار من خير فأخرجوه، فيخرجون خلقًا كثيرًا، ثم يقولون: ربَّنا لم نَذَرْ فيها أحدًا ممن أمرتنا. ثم يقول:
ارْجعوا فمن وجدتُم في قلبه مثقالَ نصف دينار من خير فأخرجوه، فيخرجون خلقًا كثيرًا. ثم يقولون: ربَّنا لم نَذَرْ فيها مِمّن أمرتنا أحدًا. ثم يقول: ارجعوا فمن وجدتم في قلبه مثقالَ ذرة من خير فأخرجوه، فيخرجون خلقًا كثيرًا، ثم يقولون: ربَّنا لم نَذَرْ فيها خيرًا".

وكان أبو سعيد الخدري يقول: إِنْ لم تُصَدِّقُوني بهذا الحديث فاقرءوا إنْ شئتم: {إِنَّ اللَّهَ لَا يَظْلِمُ مِثْقَالَ ذَرَّةٍ وَإِنْ تَكُ حَسَنَةً يُضَاعِفْهَا وَيُؤْتِ مِنْ لَدُنْهُ أَجْرًا عَظِيمًا} [سورة النساء: 40]. فيقول اللَّه عز وجل:"شفعت الملائكةُ، وشفع النّبيون، وشفع المؤمنون، ولم يبق إلا أرحم الرّاحمين فيقبض قبضةً من النّار، فيُخرجُ منها قومًا لم يعملوا خيرًا قطّ قد عادوا حُمَمًا، فيُلْقيهم في نَهر في أفواه الجنّة يقال له: نهر الحياة، فيخرُجُون كما تَخْرُجُ الْحِبَّة في حَمِيل السَّيْل، ألا ترونها تكون إلى الحجر أو إلى الشجر ما يكون إلى الشّمس أُصَيْفِرُ وأُخَيْضِرُ، وما يكون منها إلى الظل يكون أبيض؟". فقالوا: يا رسول اللَّه، كأنّك كنت ترعى بالبادية! قال:"فيخرجون كاللؤلؤ في رقابهم الخواتم يعرفُهم أهلُ الجنّة هؤلاء عتقاء اللَّه الذين أدخلهم اللَّه الجنّة بغير عمل عملوه ولا خير قدّموه. ثم يقول: ادْخلُوا الجنّة فما رأيتموه فهو لكم! فيقولون: ربَّنا أعطيتنا ما لم تعطِ أحدًا من العالمين. فيقول: لكم عندي أفضل من هذا؟ فيقولون: يا ربَّنا، أيُّ شيء أفضل من هذا؟ فيقول: رِضايَ فلا أسخطُ عليكم بعده أبدًا".

متفق عليه: رواه البخاريّ في التفسير (4581)، ومسلم في الإيمان (183) كلاهما من حديث حفص بن ميسرة، عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار، عن أبي سعيد الخدريّ، فذكر الحديث، واللّفظ لمسلم.

وقال مسلم: قرأت على عيسى بن حمّاد زُغْبَة المصريّ هذا الحديث في الشَّفاعةِ وقلتُ له: أُحَدِّثُ بهذا الحديث عنك أنَّك سمعت من الليث بن سعد؟ فقال: نعم. قلت: لعيسى بن حماد أخبرَكُم اللَّيثُ بن سعد، عن خالد بن يزيد، عن سعيد بن أبي هلال، عن زيد بن أسلم، عن عطاء ابن يسار، عن أبي سعيد الخدريّ أنه قال: قلنا يا رسول اللَّه، أنري ربَّنا؟ قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"هل تضارُّون في رؤية الشّمس إذا كان يومٌ صَحْوٌ؟". قلنا: لا. وسُقْتُ الحديثَ حتّى انقضَى آخرُه، وهو نحو حديث حفص بن ميسرة. وزاد بعد قوله:"بغير عمل عملوه ولا قَدَمٍ قَدَّمُوه""فيقال لهم لكم ما رأيتم ومثله معه".

قال أبو سعيد:"بلغني أنّ الجسرَ أَدقُّ من الشَّعْرةِ وأَحَدُّ من السَّيْفِ".
وليس في حديث اللّيث:"فيقولون: ربنا أعطيتنا ما لم تعط أحدا من العالمين وما بعده". فأقر به عيسى بن حمّاد.




আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,

রাসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে কিছু লোক জিজ্ঞেস করলেন: ইয়া রাসূলুল্লাহ, কিয়ামতের দিন কি আমরা আমাদের রবকে দেখতে পাব? রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "হ্যাঁ।"

তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "দুপুর বেলায় মেঘমুক্ত পরিষ্কার আবহাওয়ায় সূর্য দেখতে তোমাদের কি কোনো অসুবিধা হয়? এবং পূর্ণিমার রাতে মেঘমুক্ত পরিষ্কার আবহাওয়ায় চাঁদ দেখতে কি তোমাদের কোনো অসুবিধা হয়?" তারা বলল: না, ইয়া রাসূলুল্লাহ। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "কিয়ামতের দিন আল্লাহ তা'আলাকে দেখতে তোমাদের কোনো অসুবিধা হবে না, ঠিক যেমন এ দুটির কোনো একটি দেখতে তোমাদের অসুবিধা হয় না।

যখন কিয়ামত সংঘটিত হবে, তখন একজন ঘোষণাকারী ঘোষণা করবেন: প্রতিটি উম্মত যেন তার উপাস্যকে অনুসরণ করে। তখন মূর্তি ও প্রতিমাসমূহসহ আল্লাহ ব্যতীত অন্য কিছুর উপাসনা করত এমন কেউই অবশিষ্ট থাকবে না, বরং তারা সকলেই জাহান্নামে নিক্ষিপ্ত হবে। অবশেষে শুধু তারাই অবশিষ্ট থাকবে যারা আল্লাহ সুবহানাহু ওয়া তা'আলার ইবাদত করত—তা নেককার হোক বা ফাসেক (পাপী) হোক এবং আহলে কিতাবের (খ্রিস্টান ও ইহুদিদের) কিছু অবশিষ্ট লোক।

অতঃপর ইহুদিদের ডাকা হবে এবং জিজ্ঞেস করা হবে: তোমরা কার ইবাদত করতে? তারা বলবে: আমরা আল্লাহর পুত্র উযাইরের ইবাদত করতাম! বলা হবে: তোমরা মিথ্যা বলেছ। আল্লাহ কোনো স্ত্রী বা সন্তান গ্রহণ করেননি। এখন তোমরা কী চাও? তারা বলবে: হে আমাদের রব, আমরা পিপাসিত। আমাদের পান করাও। তখন তাদের প্রতি ইঙ্গিত করে বলা হবে: তোমরা কি এখানে (পান করতে) যাবে না?! অতঃপর তাদেরকে জাহান্নামের দিকে একত্রিত করা হবে, যা মরীচিকার মতো হবে এবং যা একে অপরকে গ্রাস করতে থাকবে। ফলে তারা জাহান্নামে পতিত হবে।

এরপর খ্রিস্টানদের ডাকা হবে। তাদের জিজ্ঞেস করা হবে: তোমরা কার ইবাদত করতে? তারা বলবে: আমরা আল্লাহর পুত্র মাসীহের ইবাদত করতাম! তাদের বলা হবে: তোমরা মিথ্যা বলেছ। আল্লাহ কোনো স্ত্রী বা সন্তান গ্রহণ করেননি। তাদের জিজ্ঞেস করা হবে: তোমরা কী চাও? তারা বলবে: হে আমাদের রব, আমরা পিপাসিত। আমাদের পান করাও। তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: অতঃপর তাদের প্রতি ইঙ্গিত করে বলা হবে: তোমরা কি এখানে (পান করতে) যাবে না?! অতঃপর তাদের জাহান্নামের দিকে একত্রিত করা হবে, যা মরীচিকার মতো হবে এবং যা একে অপরকে গ্রাস করতে থাকবে। ফলে তারা জাহান্নামে পতিত হবে।

অবশেষে যখন শুধু নেককার ও পাপী—আল্লাহর ইবাদতকারীরাই অবশিষ্ট থাকবে, তখন তাদের কাছে রাব্বুল আলামীন সুবহানাহু ওয়া তা'আলা তাদের দেখা প্রথম আকৃতির চেয়ে নিম্নতম এক আকৃতিতে এসে বলবেন: তোমরা কিসের অপেক্ষা করছ? প্রতিটি উম্মত তো তার উপাস্যকে অনুসরণ করে চলে গেছে। তারা বলবে: হে আমাদের রব, দুনিয়ায় যখন আমাদের তাদের (মুশরিকদের) সবচেয়ে বেশি প্রয়োজন ছিল, তখন আমরা তাদের ত্যাগ করেছিলাম এবং তাদের সাথী হইনি। তখন তিনি বলবেন: আমিই তোমাদের রব। তারা বলবে: আমরা আপনার নিকট থেকে আল্লাহর আশ্রয় চাই। আমরা আল্লাহর সাথে কোনো কিছুকে শরীক করি না—এ কথা দুই বা তিনবার বলবে। এমন কী তাদের কেউ কেউ প্রায় ফিরে যেতে চাইবে। তখন তিনি বলবেন: তোমাদের ও তাঁর মাঝে কি কোনো চিহ্ন রয়েছে, যার মাধ্যমে তোমরা তাঁকে চিনতে পারো? তারা বলবে: হ্যাঁ। অতঃপর (আল্লাহ) স্বীয় পায়ের গোছা (সাক) উন্মোচন করবেন। তখন যারা স্বেচ্ছায় আল্লাহকে সিজদা করত, আল্লাহ তাদের সিজদার অনুমতি দেবেন। কিন্তু যারা ভয়ে এবং লোক দেখানোর জন্য সিজদা করত, তাদের পিঠকে আল্লাহ একটি তক্তার মতো করে দেবেন। যখনই তারা সিজদা করতে চাইবে, তখনই তারা চিত হয়ে পড়ে যাবে। এরপর তারা মাথা ওঠাবে, আর তিনি (আল্লাহ) তখন সেই আকৃতিতে রূপান্তরিত হবেন, যে আকৃতিতে তারা তাঁকে প্রথমবার দেখেছিল। অতঃপর তিনি বলবেন: আমিই তোমাদের রব। তারা বলবে: আপনিই আমাদের রব।

এরপর জাহান্নামের উপর পুল (পুলসিরাত) স্থাপন করা হবে এবং শাফাআত (সুপারিশ) শুরু হবে। আর তারা বলবে: আল্লাহুম্মা সাল্লিম, সাল্লিম (হে আল্লাহ, নিরাপদ রাখো, নিরাপদ রাখো)।

জিজ্ঞেস করা হলো: ইয়া রাসূলুল্লাহ, পুলসিরাত কী? তিনি বললেন: "এটি একটি পিচ্ছিল স্থান, যেখানে আংটা, কাঁটা ও কন্টক রয়েছে। নজদের সা'দান নামক কাঁটার মতো কাঁটা সেখানে থাকবে। অতঃপর মুমিনগণ চোখের পলকের মতো, বিদ্যুতের মতো, বাতাসের মতো, পাখির মতো এবং দ্রুতগামী ঘোড়া ও উটের মতো দ্রুত গতিতে পার হবে। তাদের কেউ কেউ নিরাপদে মুক্তি পাবে, কেউ কেউ আঘাতপ্রাপ্ত হয়ে মুক্তি পাবে এবং কেউ কেউ জাহান্নামের আগুনে নিক্ষিপ্ত হবে।

যখন মুমিনগণ জাহান্নাম থেকে মুক্তি পাবে, তখন সেই সত্তার কসম, যার হাতে আমার জীবন, তোমাদের মধ্যে কেউ পৃথিবীতে তার ন্যায্য হক আদায়ের জন্য আল্লাহকে যতটুকু মিনতি করে, কিয়ামতের দিন জাহান্নামে অবস্থানকারী তাদের ভাইদের জন্য মুমিনগণ আল্লাহর নিকট তার চেয়েও বেশি মিনতি করবে। তারা বলবে: হে আমাদের রব, তারা আমাদের সাথে রোজা রাখত, সালাত আদায় করত এবং হজ করত! তখন তাদের বলা হবে: তোমরা যাদেরকে চেনো, তাদের বের করে নিয়ে আসো। ফলে তাদের আকৃতিকে জাহান্নামের জন্য হারাম করে দেওয়া হবে। অতঃপর তারা অসংখ্য মানুষকে বের করে আনবে, যাদের কারো কারো পাছার অর্ধাংশ পর্যন্ত এবং কারো কারো হাঁটু পর্যন্ত আগুন গ্রাস করে ফেলেছিল। এরপর তারা বলবে: হে আমাদের রব, যাদেরকে বের করে আনতে আপনি আদেশ করেছেন, তাদের আর কেউ সেখানে অবশিষ্ট নেই। তিনি (আল্লাহ) বলবেন: ফিরে যাও। যার অন্তরে তোমরা এক দীনার পরিমাণও কল্যাণ (ঈমান) পাবে, তাকে বের করে নিয়ে আসো। ফলে তারা অসংখ্য মানুষকে বের করে আনবে। এরপর তারা বলবে: হে আমাদের রব, আপনি যাদের ব্যাপারে আদেশ করেছেন, তাদের আর কাউকে আমরা সেখানে ছেড়ে আসিনি। এরপর তিনি বলবেন: ফিরে যাও। যার অন্তরে তোমরা অর্ধ দীনার পরিমাণ কল্যাণ পাবে, তাকে বের করে নিয়ে আসো। ফলে তারা অসংখ্য মানুষকে বের করে আনবে। এরপর তারা বলবে: হে আমাদের রব, যাদের ব্যাপারে আপনি আদেশ করেছেন, তাদের কাউকেই আমরা সেখানে ছেড়ে আসিনি। এরপর তিনি বলবেন: ফিরে যাও। যার অন্তরে তোমরা এক অণু পরিমাণও কল্যাণ পাবে, তাকে বের করে নিয়ে আসো। ফলে তারা অসংখ্য মানুষকে বের করে আনবে। এরপর তারা বলবে: হে আমাদের রব, আমরা সেখানে কোনো কল্যাণের অস্তিত্ব আর রাখিনি।"

আবূ সাঈদ আল-খুদরী (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলতেন: যদি তোমরা আমার এই হাদীস বিশ্বাস না করো, তাহলে তোমরা চাইলে এই আয়াতটি পাঠ করো: {নিশ্চয় আল্লাহ অণু পরিমাণও জুলুম করেন না। আর যদি কোনো নেক কাজ হয়, তবে তিনি তা দ্বিগুণ করে দেন এবং তাঁর পক্ষ থেকে মহাপুরস্কার দান করেন।} [সূরা আন-নিসা: ৪০]।

তখন আল্লাহ আয্যা ওয়া জাল্ল বলবেন: "ফেরেশতারা সুপারিশ করেছে, নবীগণ সুপারিশ করেছে, মুমিনগণ সুপারিশ করেছে। এখন শুধু আরহামুর রাহিমীন (দয়ালুদের মধ্যে শ্রেষ্ঠ দয়ালু)-ই বাকি আছেন।" অতঃপর তিনি জাহান্নাম থেকে এক মুষ্টি পরিমাণ লোক বের করে আনবেন, যারা কখনো কোনো নেক কাজ করেনি এবং তারা কয়লার মতো পুড়ে গেছে। তিনি তাদেরকে জান্নাতের ফটকের নিকটবর্তী একটি নদীতে নিক্ষেপ করবেন, যার নাম 'নহরে হায়াত' (জীবনের নদী)। অতঃপর তারা সয়লাবের স্রোতে ভেসে আসা বীজের মতো গজিয়ে উঠবে। তোমরা কি দেখো না, সেই বীজগুলো পাথর বা গাছের পাশে সূর্যের আলোয় পড়লে সামান্য হলুদ ও সবুজ হয়, আর যা ছায়ায় থাকে তা সাদা হয়?"

তারা (সাহাবীরা) বলল: ইয়া রাসূলুল্লাহ, মনে হয় আপনি যেন পল্লী অঞ্চলে (পশু) চরাতেন! তিনি বললেন: "তারা মুক্তোর মতো বেরিয়ে আসবে, তাদের গর্দানে মোহর থাকবে। জান্নাতবাসীরা তাদের চিনতে পারবে। এরাই আল্লাহর মুক্তিকৃত বান্দা, যাদেরকে আল্লাহ তাদের কৃত আমল বা অগ্রিম পাঠানো নেক কাজ ছাড়াই জান্নাতে প্রবেশ করিয়েছেন। এরপর তিনি বলবেন: তোমরা জান্নাতে প্রবেশ করো। তোমরা যা কিছু দেখবে, তাই তোমাদের জন্য! তারা বলবে: হে আমাদের রব, আপনি তো আমাদের এমন জিনিস দিয়েছেন, যা আপনি সৃষ্টিকুলের আর কাউকেই দেননি। তিনি বলবেন: তোমাদের জন্য এর চেয়েও উত্তম কিছু কি আমার কাছে আছে? তারা বলবে: হে আমাদের রব, এর চেয়ে উত্তম কী হতে পারে? তিনি বলবেন: তোমাদের প্রতি আমার সন্তুষ্টি (রিদওয়ান)। এরপর আমি তোমাদের প্রতি আর কখনো অসন্তুষ্ট হব না।"

আবূ সাঈদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেন: আমার নিকট পৌঁছেছে যে, পুলসিরাত চুলের চেয়েও চিকন এবং তরবারির চেয়েও ধারালো।









আল-জামি` আল-কামিল (958)


958 - عن ابن مسعود أن رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم قال:"آخرُ من يدخل الجنّة رجلٌ، فهو يمشي مرّة ويكبو مرّة، وتَسْفَعُه النّار مرّة، فإذا ما جاوزها التفت إليها، فقال: تبارك الذي نجّاني منكِ، لقد أعطاني اللَّه شيئًا ما أعطاهُ أحدًا من الأوّلين والآخرين. فَتُرْفَعُ له شَجَرةٌ، فيقول: أيْ ربِّ أَدْنِني من هذه الشّجرة فلأستظل بظلِّها، وأشرب من مائها. فيقول اللَّه عز وجل: يا ابن آدم لعلِّي إنْ أُعطيتُكَها سألتني غيرَها؟ فيقول: لا يا ربّ. ويعاهده أن لا يسأله غيرَها، وربُّه يُعذِرُه لأنه يرى ما لا صبر له عليه، فيدنيه منها فيستظل بظلِّها ويشرب من مائها، ثم ترفع له شجرة هي أحسن من الأولى، فيقولُ: أيْ ربِّ أدْنِني من هذه لأشرب من مائها وأستظلّ بظلِّها لا أسألك غيرها. فيقول: يا ابنَ آدم ألم تعاهدني أن لا تسألني غيرها؟ فيقولُ: لعلّي إن أدنيتُك منها تسألني غيرها؟ فيعاهده أن لا يسأله غيرها، وربُّه يَعْذِره لأنّه يرى ما لا صبرَ له عليه، فيدنيه منها فيستظل بظلها ويشرب من مائها، ثم ترفع له شجرة هي عند باب الجنّة هي أحسن من الأولَيَيْن. فيقول: أيْ ربِّ، أدنني من هذه لأستظل بظلها وأشرب من مائها، لا أسألك غيرها. فيقول: يا ابن آدم ألم تعاهدني أن لا تسألني غيرها؟ قال: بلى يا ربّ، هذه لا أسألك غيرها وربُّه يَعْذِره لأنّه يرى ما لا صبرَ له عليه. فيدنيه منها، فإذا أدناه منها فيسمع أصواتَ أهل الجنّة، فيقول: أيْ ربِّ أدخلنيها. فيقول: يا ابن آدم ما يَصْرِيني منك؟ أيُرْضِيكَ أن أعطيك الدُّنيا ومثْلَها معها؟ قال: يا رب أتستهزئ مني وأنتَ ربُّ العالمين".

فضحك ابنُ مسعود فقال: ألا تسألوني مم أضحك؟ فقالوا: مِمّ تضحك؟ قال: هكذا ضحك رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم، فقالوا: مِمّ تضحك يا رسول اللَّه؟ قال:"من ضحك ربّ العالمين حين قال: أتستهزئ مني وأنت ربُّ العالمين. فيقول: إنّي لا أستهزئُ منك، ولكنّي على ما أشاء قدير، فيدخله الجنّة".

صحيح: رواه مسلم في الإيمان (187) عن أبي بكر بن أبي شيبة، حدّثنا عفّان بن مسلم، حدّثنا حمّاد بن سلمة، حدّثنا ثابت، عن أنس بن مالك، عن ابن مسعود، فذكره. إلّا أنّ مسلمًا لم يذكر لفظ"الصّراط" وهو ثابت عند غيره، وإنّما اكتفى بقوله:"يمشي مرة، ويكبو مرة، وتسعفه النّار مرة".




ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "সর্বশেষ যে ব্যক্তি জান্নাতে প্রবেশ করবে, সে হলো একজন পুরুষ। সে একবার হাঁটে, আবার একবার মুখ থুবড়ে পড়ে, আবার কখনো আগুন তাকে ঝলসে দেয়। অতঃপর যখন সে জাহান্নাম পার হয়ে যাবে, তখন তার দিকে ফিরে তাকিয়ে বলবে: কতই না বরকতময় সেই সত্তা, যিনি আমাকে তোমার থেকে মুক্তি দিয়েছেন! আল্লাহ আমাকে এমন জিনিস দান করেছেন, যা প্রথম ও শেষের কাউকে দান করেননি।"

"অতঃপর তার সামনে একটি গাছকে তুলে ধরা হবে। সে বলবে: হে আমার প্রতিপালক! আমাকে এই গাছটির কাছে নিন, যাতে আমি তার ছায়ায় আশ্রয় নিতে পারি এবং তার পানি পান করতে পারি। আল্লাহ তা‘আলা বলবেন: হে আদম সন্তান! আমি যদি তোমাকে এটা দিই, তবে সম্ভবতঃ তুমি এর চেয়ে আরও কিছু চাইবে? সে বলবে: না, হে আমার প্রতিপালক! সে আল্লাহর কাছে শপথ করবে যে, সে আর কিছু চাইবে না। তার প্রতিপালক তাকে ক্ষমা করবেন, কারণ সে এমন কিছু দেখছে যার উপর ধৈর্য ধারণ করার ক্ষমতা তার নেই। অতঃপর আল্লাহ তাকে তার নিকটবর্তী করে দেবেন। ফলে সে তার ছায়ায় আশ্রয় নেবে এবং তার পানি পান করবে। এরপর তার সামনে প্রথমটির চেয়েও সুন্দর আরেকটি গাছকে তুলে ধরা হবে। সে বলবে: হে আমার প্রতিপালক! আমাকে এইটির কাছে নিন, যাতে আমি তার পানি পান করতে পারি এবং তার ছায়ায় আশ্রয় নিতে পারি। আমি আপনার কাছে আর কিছু চাইব না। আল্লাহ বলবেন: হে আদম সন্তান! তুমি কি আমার সাথে অঙ্গীকার করোনি যে, তুমি আর কিছু চাইবে না? সে বলবে: সম্ভবতঃ আমি যদি তোমাকে তার কাছে আনি, তবে তুমি অন্য কিছু চাইবে? এরপর সে আবার শপথ করবে যে, সে অন্য কিছু চাইবে না। তার প্রতিপালক তাকে ক্ষমা করবেন, কারণ সে এমন কিছু দেখছে যার উপর ধৈর্য ধারণ করার ক্ষমতা তার নেই। এরপর আল্লাহ তাকে তার নিকটবর্তী করে দেবেন। ফলে সে তার ছায়ায় আশ্রয় নেবে এবং তার পানি পান করবে। অতঃপর তার সামনে জান্নাতের দরজার কাছে এমন একটি গাছকে তুলে ধরা হবে, যা প্রথম দুটির চেয়েও সুন্দর। সে বলবে: হে আমার প্রতিপালক! আমাকে এইটির কাছে নিন, যাতে আমি তার ছায়ায় আশ্রয় নিতে পারি এবং তার পানি পান করতে পারি। আমি আপনার কাছে আর কিছু চাইব না। আল্লাহ বলবেন: হে আদম সন্তান! তুমি কি আমার সাথে অঙ্গীকার করোনি যে, তুমি আর কিছু চাইবে না? সে বলবে: অবশ্যই, হে আমার প্রতিপালক! এটিই, এর চেয়ে আর কিছু আমি আপনার কাছে চাইব না। তার প্রতিপালক তাকে ক্ষমা করবেন, কারণ সে এমন কিছু দেখছে যার উপর ধৈর্য ধারণ করার ক্ষমতা তার নেই। অতঃপর আল্লাহ তাকে তার নিকটবর্তী করে দেবেন। যখনই তাকে তার নিকটবর্তী করে দেওয়া হবে, সে জান্নাতবাসীদের শব্দ শুনতে পাবে। তখন সে বলবে: হে আমার প্রতিপালক! আমাকে জান্নাতে প্রবেশ করিয়ে দিন। আল্লাহ বলবেন: হে আদম সন্তান! কীসে তোমাকে আমার থেকে সন্তুষ্ট করবে? তুমি কি এতে সন্তুষ্ট হবে যে, আমি তোমাকে পৃথিবী ও তার সাথে আরও অনুরূপ পরিমাণ দান করব? সে বলবে: হে আমার প্রতিপালক! আপনি কি আমার সাথে উপহাস করছেন? অথচ আপনি তো জগৎসমূহের প্রতিপালক।"

বর্ণনাকারী ইবনু মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) হেসে ফেললেন এবং বললেন: তোমরা কি আমাকে জিজ্ঞাসা করবে না, আমি কেন হাসছি? তারা বললেন: আপনি কেন হাসছেন? তিনি বললেন: আমিও এমনভাবে হেসেছিলাম, যেমন আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হেসেছিলেন। তারা বললেন: হে আল্লাহর রাসূল! আপনি কেন হাসছেন? তিনি (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: "আমি জগৎসমূহের প্রতিপালকের হাসির কারণে হেসেছি। যখন সে বলবে: আপনি কি আমার সাথে উপহাস করছেন? অথচ আপনি তো জগৎসমূহের প্রতিপালক। তখন আল্লাহ বলবেন: আমি তোমার সাথে উপহাস করছি না, তবে আমি যা ইচ্ছা করি তার উপর ক্ষমতাবান। এরপর তিনি তাকে জান্নাতে প্রবেশ করাবেন।"









আল-জামি` আল-কামিল (959)


959 - عن أبي هريرة وحذيفة قالا: قال رسول اللَّه صلى الله عليه وسلم:"يجمعُ اللَّه تبارك وتعالى النّاسَ، فيقوم المؤمنون حتّى تُزْلَفُ لهم الجنّة، فيأتون آدم فيقولون: يا أبانا، استفتح لنا الجنّة فيقول: وهل أَخْرجَكُم من الجنّة إلّا خطيئة أبيكم آدم؟ ! لستُ بصاحب ذلك، اذهبوا إلى ابني إبراهيم خليل اللَّه، قال: فيقول إبراهيم: لستُ بصاحب ذلك، إنما كنت خليلا من وراء وراء، اعْمِدُوا إلى موسى صلى الله عليه وسلم الذي كلّمه اللَّه تكليمًا، فيأتون موسى صلى الله عليه وسلم فيقول: لستُ بصاحب ذلك، اذهبوا إلى عيسى كَلِمةِ اللَّه وروحه، فيقول عيسى صلى الله عليه وسلم: لستُ بصاحب ذلك. فيأتون محمّدًا صلى الله عليه وسلم فيقوم فيؤذن له، وترسل الأمانةُ والرَّحم، فتقومان جَنَبَتَيْ الصِّراط يمينًا وشمالًا فيمرُّ أوّلكم كالبرق". قال: قلتُ: بأبي أنت وأمي أي شيء كمر البرق؟ قال:"ألم تروا إلى البرق كيف يمر ويرجع في طرفة عين؟ ثم كمرّ الرّيح، ثم كمرّ الطّير وشدّ الرّجال، تجري بهم أعمالهم، ونبيُّكم قائمٌ على الصِّراط يقول: ربِّ سَلِّم سَلِّم، حتّى تَعْجِز أعمالُ العباد حتى يجيء الرَّجُل فلا يستطيعُ السَّيْر إلّا زَحْفًا. قال: وفي حافتي الصِّراط كلاليب مُعَلَّقة مأمورةٌ بأخذ مَنْ أُمِرتْ به، فمخدوشٌ ناجٍ، ومكدوسٌ في النّار". والذي نفس أبي هريرة بيده إن قعر جهنّم لسبعون خريفًا.

صحيح: رواه مسلم في الإيمان (195) عن محمد بن خليفة البجليّ، حدّثنا محمد بن فضيل، حدّثنا أبو مالك الأشجعيّ، عن أبي حازم، عن أبي هريرة.

وأبو مالك، عن ربعيّ، عن حذيفة، قالا (فذكرا الحديث).




আবূ হুরায়রা ও হুযায়ফা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তাঁরা উভয়ে বললেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আল্লাহ তাবারাকা ওয়া তাআলা মানুষকে একত্র করবেন। অতঃপর মুমিনগণ দাঁড়িয়ে যাবে। এমনকি জান্নাতকে তাদের নিকটবর্তী করা হবে। তারা আদম (আঃ)-এর নিকট এসে বলবে: হে আমাদের পিতা! আমাদের জন্য জান্নাত খোলার ব্যবস্থা করুন। তিনি বলবেন: তোমাদের পিতা আদমের একটি ভুল ছাড়া আর কি কিছু তোমাদেরকে জান্নাত থেকে বের করেছে?! আমি এর যোগ্য নই। তোমরা আমার পুত্র ইবরাহীম খলীলুল্লাহ (আঃ)-এর নিকট যাও। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন: ইবরাহীম (আঃ) বলবেন: আমি এর যোগ্য নই। আমি ছিলাম কেবল দূর থেকে খলীল। তোমরা মূসা (আঃ)-এর নিকট যাও, যাঁর সাথে আল্লাহ সরাসরি কথা বলেছিলেন। তারা মূসা (আঃ)-এর নিকট আসবে। তিনি বলবেন: আমি এর যোগ্য নই। তোমরা আল্লাহর কালীমাহ (বাণী) এবং তাঁর রূহ ঈসা (আঃ)-এর নিকট যাও। অতঃপর ঈসা (আঃ) বলবেন: আমি এর যোগ্য নই। অতঃপর তারা মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট আসবে। তিনি দাঁড়িয়ে যাবেন এবং তাকে (সুপারিশের) অনুমতি দেওয়া হবে। আমানত ও আত্মীয়তার সম্পর্ককে পাঠানো হবে। তারা সিরাতের (পুলসিরাতের) ডান ও বাম পাশে অবস্থান করবে। অতঃপর তোমাদের প্রথম ব্যক্তি বিদ্যুতের মতো দ্রুত গতিতে পার হবে।”

(বর্ণনাকারী বলেন:) আমি বললাম: আমার পিতা-মাতা আপনার উপর কুরবান হোক, বিদ্যুতের দ্রুত গতি বলতে কী বোঝানো হয়েছে? তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন: “তোমরা কি দেখো না বিদ্যুৎ কীভাবে এক নিমিষেই চলে যায় এবং ফিরে আসে? এরপর বাতাস পার হওয়ার মতো, এরপর পাখির মতো এবং পুরুষদের তীব্র গতির মতো দ্রুত গতিতে তারা পার হবে। তাদের আমলই তাদের চালিত করবে। আর তোমাদের নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সিরাতের উপর দাঁড়িয়ে বলবেন: হে রব! শান্তি দাও, শান্তি দাও। এমনকি বান্দাদের আমল তাদের চালাতে ব্যর্থ হবে। ফলে একজন ব্যক্তি হামাগুড়ি দিয়ে ছাড়া চলতে সক্ষম হবে না। তিনি (নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন: সিরাতের দুই পাশে ঝুলন্ত কাঁটা থাকবে, যা যাকে ধরার আদেশ দেওয়া হয়েছে তাকে ধরবে। অতঃপর আঁচড় খাওয়া ব্যক্তি মুক্তি পাবে আর কেউ কেউ জাহান্নামে নিক্ষেপিত হবে।

যার হাতে আবূ হুরায়রার জীবন, তার শপথ! জাহান্নামের গভীরতা সত্তর বছরের পথ।









আল-জামি` আল-কামিল (960)


960 - عن جابر بن عبد اللَّه، أنّه سئلُ عن الورود، فقال:"نحن يوم القيامة على كذا وكذا -انظر، أي: ذلك فوق النّاس- قال: فتُدعى الأمم بأوثانها وما كانت تعبد، الأوّل فالأوّل، ثم يأتينا ربُّنا بعد ذلك، فيقول: من تنتظرون؟ فيقولون: ننتظر ربَّنا. فيقول: أنا ربّكم، فيقولون: حتى ننظر إليك، فيتجلّى لهم يَضْحَك".

قال: سمعتُ النبيَّ صلى الله عليه وسلم قال:"فينطلقُ بهم ويتَّبعونه، ويُعطى كلُّ إنسان منافق أو مؤمن نورًا، ثم يتّبعونه، وعلى جسر جهنّم كلاليب وحَسَك تأخذ من شاء اللَّه، ثم يُطْفأ نورُ المنافق، ينجو المؤمنون، فتنجو أوّل زمرة، وجوههم كالقمر ليلة البدْر سبعون ألفًا لا يُحاسبون، ثم الذين يلونهم كأضوإ نجم في السماء، ثم كذلك، ثم تَحِلُّ الشَّفاعةُ حتى يخرج من النّار مَنَ قال: لا إله إلّا اللَّه، وكان في قلبه من الخير ما يزنُ شعيرةً، فيجعلون بفناء أهل الجنّة، ويجعلُ أهل الجنّة يرُشّون عليهم الماء، حتّى ينْبُتُوا
نباتَ الشَّيء في السَّيل، ثم يسألُ حتّى يُجعلَ له الدّنيا وعشرةُ أمثالها معها".

صحيح: رواه مسلم في الإيمان (191) من طرق عن روح بن عبادة، حدّثنا ابن جريج، قال: أخبرني أبو الزبير، أنه سمع جابر بن عبد اللَّه يسأل عن الورود، فذكره.

ومن هذا الوجه رواه الإمام أحمد (15115) واللّفظ له.

قوله:"كذا وكذا - انظر" هكذا في جميع نسخ مسلم، وهو محرّف يقينًا.

قال النووي رحمه الله في شرح مسلم:"هكذا وقع هذا اللّفظ في جميع الأصول من صحيح مسلم. واتفق المتقدمون والمتأخرون على أنّه تصحيف وتغيير واختلاط في اللفظ. قال الحافظ عبد الحق في كتابه"الجمع بين الصحيحين" هذا الذي وقع في كتاب مسلم تخليط من أحد النّاسخين أو كيف كان. وقال القاضي عياض: هذه صورة الحديث. وفي كتاب ابن أبي خيثمة من طريق كعب بن مالك:"يحشر النّاس يوم القيامة على تل، وأمتي على تل". وذكر الطبريّ في التفسير من حديث ابن عمر:"فيرقي هو -يعني محمدًا- وأمته على كوم فوق النّاس". وذكر من حديث كعب بن مالك:"يحشر النّاس يوم القيامة فأكون أنا وأمتي على تل". قال القاضيّ: فهذا كلّه يبين ما تغيّر من الحديث، وأنّه كان أظلم هذا الحرف على الرّاوي، أو امّحي فعبّر عنه:"بكذا وكذا"، وفسّره بقوله: أي"فوق النّاس"، وكتب عليه:"انظر" تنبيهًا، فجمع النقلةُ الكلَّ ونسقوه على أنّه من متن الحديث كما تراه". انتهى.




জাবির ইবনে আবদুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি (পুলসিরাত অতিক্রম করে জান্নাতে) প্রবেশ করা সম্পর্কে জিজ্ঞাসিত হলেন। তখন তিনি বললেন: "কিয়ামতের দিন আমরা এমন এক স্থানে থাকব—দেখুন, অর্থাৎ তা হবে মানুষের উপরে।" তিনি বললেন: অতঃপর জাতিদেরকে তাদের মূর্তি ও উপাস্য বস্তুসমূহ দিয়ে ডাকা হবে, প্রথমটির পর প্রথমটি (আসবে)। এরপর আমাদের রব আমাদের কাছে আসবেন এবং বলবেন: তোমরা কার অপেক্ষা করছ? তারা বলবে: আমরা আমাদের রবের অপেক্ষা করছি। তখন তিনি বলবেন: আমিই তোমাদের রব। তারা বলবে: যতক্ষণ না আমরা আপনাকে দেখতে পাই (আমরা বিশ্বাস করব না)। তখন তিনি হাসিমুখে তাদের সামনে প্রকাশিত হবেন।

(জাবির) বললেন: আমি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লামকে বলতে শুনেছি: "অতঃপর তিনি তাদের নিয়ে চলবেন এবং তারা তাঁর অনুসরণ করবে। মু'মিন বা মুনাফিক প্রত্যেক ব্যক্তিকে আলো দেওয়া হবে। এরপর তারা তাঁর অনুসরণ করবে। জাহান্নামের সেতুর ওপর থাকবে কাঁটাযুক্ত আঁকড়া ও হুক যা আল্লাহ্ যাকে ইচ্ছা তাকে ধরবে। এরপর মুনাফিকের আলো নিভে যাবে। মু'মিনগণ মুক্তি লাভ করবে। প্রথম দলটি মুক্তি পাবে, তাদের মুখমণ্ডল হবে পূর্ণিমার চাঁদের মতো। তারা সত্তর হাজার লোক, যাদের কোনো হিসাব নেওয়া হবে না। এরপর যারা তাদের অনুগামী হবে, তারা হবে আকাশের উজ্জ্বল নক্ষত্রের মতো। এরপর অনুরূপভাবে (পর্যায়ক্রমে)। অতঃপর শাফাআত (সুপারিশ) শুরু হবে, এমনকি যারা 'লা ইলাহা ইল্লাল্লাহ' বলেছে এবং যার অন্তরে সামান্যতম জব পরিমাণ কল্যাণ (ঈমান) ছিল, সেও জাহান্নাম থেকে বেরিয়ে আসবে। তাদের জান্নাতবাসীদের প্রাঙ্গণে রাখা হবে, আর জান্নাতবাসীরা তাদের উপর পানি ছিটাতে থাকবে, ফলে তারা বন্যার স্রোতে কোনো বস্তুর অঙ্কুরোদগমের মতো সতেজ হয়ে উঠবে। এরপর সে প্রার্থনা করবে (বা তাকে জিজ্ঞেস করা হবে), অবশেষে তাকে পৃথিবী এবং তার সাথে তার দশগুণ বেশি পরিমাণ প্রদান করা হবে।"