আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী
13713 - أَخْبَرَنَا أَبُو الْحُسَيْنِ مُحَمَّدُ بْنُ الْحُسَيْنِ بْنِ الْفَضْلِ الْقَطَّانُ بِبَغْدَادَ، أنبأ أَبُو سَهْلٍ أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللهِ بْنِ زِيَادٍ الْقَطَّانُ، ثنا مُعَاذُ بْنُ الْمُثَنَّى، ثنا عُبَيْدُ اللهِ بْنُ عُمَرَ الْقَوَارِيرِيُّ، ثنا عَبْدُ اللهِ بْنُ دَاوُدَ، سَمِعَهُ مِنْ سُفْيَانَ ذَكَرَهُ، عَنِ ابْنِ خُثَيْمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما، قَالَ عُبَيْدُ اللهِ: وَثَنَا بِشْرُ بْنُ مَنْصُورٍ، وَعَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ جَمِيعًا قَالَا: ثنا سُفْيَانُ، عَنِ ابْنِ خُثَيْمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم إِنْ شَاءَ اللهُ قَالَ: " لَا نِكَاحَ إِلَّا بِإِذْنِ وَلِيٍّ مُرْشِدٍ أَوْ سُلْطَانٍ " كَذَا قَالَ أَبُو الْمُثَنَّى مُعَاذُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَرَوَاهُ غَيْرُهُ عَنْ عُبَيْدِ اللهِ الْقَوَارِيرِيِّ فَقَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ غَيْرِ اسْتِثْنَاءٍ، تَفَرَّدَ بِهِ الْقَوَارِيرِيُّ مَرْفُوعًا وَالْقَوَارِيرِيُّ ثِقَةٌ، إِلَّا أَنَّ الْمَشْهُورَ بِهَذَا الْإِسْنَادِ مَوْقُوفٌ عَلَى ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:
"সঠিক দিক-নির্দেশনাকারী অভিভাবক (ওয়ালী) অথবা শাসকের অনুমতি ব্যতীত কোনো বিবাহ (নিকাহ) নেই।"
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13713] ضعيف
13714 - أَخْبَرَنَاهُ عَلِيُّ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ عَبْدَانَ، أنبأ أَبُو الْقَاسِمِ الطَّبَرَانِيُّ، ثنا إِسْحَاقُ الدَّبَرِيُّ، عَنْ عَبْدِ الرَّزَّاقِ، عَنِ الثَّوْرِيِّ، عَنِ ابْنِ خُثَيْمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنه مِثْلَهُ وَلَمْ يَرْفَعْهُ
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে অনুরূপ একটি বর্ণনা এসেছে, তবে তিনি এটিকে মারফূ’ (রাসূলের বাণী হিসেবে) উল্লেখ করেননি।
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13714] صحيح
13715 - وَأَخْبَرَنَا أَبُو حَازِمٍ الْحَافِظُ، أنبأ أَبُو الْحَسَنِ مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ حَمْزَةَ الْهَرَوِيُّ، ثنا أَحْمَدُ بْنُ نَجْدَةَ، ثنا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، ثنا إِسْمَاعِيلُ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عُثْمَانَ بْنِ خُثَيْمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما قَالَ: " لَا نِكَاحَ إِلَّا بِوَلِيٍّ أَوْ سُلْطَانٍ، فَإِنْ أَنْكَحَهَا سَفِيهٌ أَوْ مَسْخُوطٌ عَلَيْهِ، فَلَا نِكَاحَ لَهُ "
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: অভিভাবক (ওয়ালী) অথবা শাসক (সুলতান) ছাড়া কোনো বিবাহ (নিকাহ) নেই। যদি কোনো নির্বোধ ব্যক্তি (সাফীহ) অথবা যার প্রতি অসন্তোষ প্রকাশ করা হয়েছে এমন কেউ তাকে বিবাহ দেয়, তবে তার সেই বিবাহ বৈধ হবে না।
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13715] صحيح
13716 - أَخْبَرَنَا أَبُو عَبْدِ اللهِ الْحَافِظُ، أنبأ مُكْرَمُ بْنُ أَحْمَدَ الْقَاضِي، ثنا أَحْمَدُ بْنُ زِيَادِ بْنِ مِهْرَانَ، ثنا سَعِيدُ بْنُ سُلَيْمَانَ، ثنا عَدِيُّ بْنُ الْفَضْلِ، أنبأ عَبْدُ اللهِ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ خُثَيْمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم: " لَا نِكَاحَ إِلَّا بِوَلِيٍّ وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ، فَإِنْ أَنْكَحَهَا وَلِيٌّ مَسْخُوطٌ عَلَيْهِ فَنِكَاحُهَا بَاطِلٌ "، ⦗ص: 202⦘ كَذَا رَوَاهُ عَدِيُّ بْنُ الْفَضْلِ وَهُوَ ضَعِيفٌ، وَالصَّحِيحُ مَوْقُوفٌ، وَاللهُ أَعْلَمُ
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: “অভিভাবক (ওয়ালী) এবং দুইজন ন্যায়পরায়ণ সাক্ষী ছাড়া কোনো বিবাহ (নিকাহ) নেই। যদি এমন কোনো অভিভাবক তাকে বিবাহ দেয় যার প্রতি (আল্লাহর) অসন্তুষ্টি রয়েছে, তবে তার সেই বিবাহ বাতিল।”
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13716] ضعيف
13717 - حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ اللهِ الْحَافِظُ، حَدَّثَنِي أَبُو عَلِيٍّ الْحَافِظُ، ثنا إِسْحَاقُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ إِسْحَاقَ الرَّقِّيُّ، ثنا أَبُو يُوسُفَ مُحَمَّدُ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ الْحَجَّاجِ الرَّقِّيُّ، ثنا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، ثنا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ مُوسَى، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ رضي الله عنها قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم: " أَيُّمَا امْرَأَةٍ نُكِحَتْ بِغَيْرِ إِذِنْ وَلِيِّهَا، وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ، فَنِكَاحُهَا بَاطِلٌ، فَإِنْ دَخَلَ بِهَا، فَلَهَا الْمَهْرُ، وَإِنِ اشْتَجَرُوا، فَالسُّلْطَانُ وَلِيُّ مَنْ لَا وَلِيَّ لَهُ " قَالَ أَبُو عَلِيٍّ الْحَافِظُ وَهُوَ النَّيْسَابُورِيُّ أَبُو يُوسُفَ الرَّقِّيُّ، هَذَا مِنْ حُفَّاظِ أَهْلِ الْجَزِيرَةِ وَمُتْقِنِيهِمْ
আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যে কোনো নারী তার অভিভাবকের (ওয়ালী) অনুমতি ব্যতিরেকে এবং দুজন ন্যায়পরায়ণ সাক্ষীর উপস্থিতি ছাড়া বিবাহ বন্ধনে আবদ্ধ হয়, তবে তার বিবাহ বাতিল (অবৈধ)। কিন্তু যদি সে তার সাথে সহবাস করে ফেলে, তবে সে মোহর পাওয়ার হকদার হবে। আর যদি তাদের মাঝে ঝগড়া বা মতবিরোধ দেখা দেয়, তবে যার কোনো অভিভাবক নেই, শাসক (বা বিচারক) তার অভিভাবক।
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13717] حسن دون قوله : {وشاهدي عدل}
13718 - أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ أَحْمَدَ بْنِ الْحَارِثِ الْأَصْبَهَانِيُّ، أنبأ عَلِيُّ بْنُ عُمَرَ الْحَافِظُ، ثنا أَبُو حَامِدٍ مُحَمَّدُ بْنُ هَارُونَ الْحَضْرَمِيُّ، ثنا سُلَيْمَانُ بْنُ عُمَرَ بْنِ خَالِدٍ الرَّقِّيُّ، ثنا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ مُوسَى، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ رضي الله عنها قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم: " لَا نِكَاحَ إِلَّا بِوَلِيٍّ وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ، فَإِنْ تَشَاجَرُوا فَالسُّلْطَانُ وَلِيُّ مَنْ لَا وَلِيَّ لَهُ " قَالَ عَلِيٌّ رحمه الله: تَابَعَهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ يُونُسَ، عَنْ عِيسَى بْنِ يُونُسَ مِثْلَهُ، قَالَ: وَكَذَلِكَ رَوَاهُ سَعِيدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ عَبْدِ اللهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ عُثْمَانَ، وَيَزِيدُ بْنُ سِنَانٍ، وَنُوحُ بْنُ دَرَّاجٍ، وَعَبْدُ اللهِ بْنُ حَكِيمٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ قَالُوا فِيهِ: " وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ "
আয়িশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:
অভিভাবক (ওলী) এবং দুজন ন্যায়পরায়ণ সাক্ষী ছাড়া কোনো বিবাহ (নিকাহ) নেই। যদি তাদের মধ্যে (অভিভাবকত্ব নিয়ে) কোনো মতবিরোধ হয়, তবে যার কোনো অভিভাবক নেই, শাসক (সুলতান) তার অভিভাবক।
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13718] حسن دون قوله : {وشاهدي عدل}
13719 - وَأَخْبَرَنَا أَبُو عَبْدِ اللهِ الْحَافِظُ، حَدَّثَنِي أَبُو الْعَبَّاسِ عَصَمُ بْنُ الْعَبَّاسِ الضَّبِّيُّ، ثنا مُحَمَّدُ بْنُ هَارُونَ الْحَضْرَمِيُّ، ثنا سُلَيْمَانُ بْنُ عُمَرَ الرَّقِّيُّ، ثنا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْأُمَوِيُّ، ثنا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ مُوسَى، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ رضي الله عنها قَالَتْ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم: " لَا نِكَاحَ إِلَّا بِوَلِيٍّ وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ "، ⦗ص: 203⦘ قَالَ الشَّافِعِيُّ رحمه الله، وَرُوِيَ عَنِ الْحَسَنِ بْنِ أَبِي الْحَسَنِ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ: " لَا نِكَاحَ إِلَّا بِوَلِيٍّ وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ "
আয়েশা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ইরশাদ করেছেন: "অভিভাবক (ওয়ালী) এবং দুজন ন্যায়পরায়ণ সাক্ষী ছাড়া কোনো বিবাহ (নিকাহ) নেই।"
ইমাম শাফেঈ (রহিমাহুল্লাহ) বলেছেন, এবং হাসান ইবনু আবিল হাসান থেকেও বর্ণিত আছে যে, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "অভিভাবক (ওয়ালী) এবং দুজন ন্যায়পরায়ণ সাক্ষী ছাড়া কোনো বিবাহ (নিকাহ) নেই।"
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13719] حسن دون قوله : {وشاهدي عدل}
13720 - أَخْبَرَنَا أَبُو زَكَرِيَّا بْنُ أَبِي إِسْحَاقَ الْمُزَكِّي، وَأَبُو بَكْرٍ أَحْمَدُ بْنُ الْحَسَنِ الْقَاضِي قَالَا: ثنا أَبُو الْعَبَّاسِ مُحَمَّدُ بْنُ يَعْقُوبَ، أنبأ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللهِ بْنِ عَبْدِ الْحَكَمِ، ثنا ابْنُ وَهْبٍ، أنبأ الضَّحَّاكُ بْنُ عُثْمَانَ، عَنْ عَبْدِ الْجَبَّارِ، عَنِ الْحَسَنِ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ: " لَا يَحِلُّ نِكَاحٌ إِلَّا بِوَلِيٍّ وَصَدَاقٍ وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ "، قَالَ الشَّافِعِيُّ رحمه الله: " وَهَذَا وَإِنْ كَانَ مُنْقَطِعًا دُونَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَإِنَّ أَكْثَرَ أَهْلِ الْعِلْمِ يَقُولُ بِهِ، وَيَقُولُ: الْفَرْقُ بَيْنَ النِّكَاحِ وَالسِّفَاحِ الشُّهُودُ " قَالَ الْمُزَنِيُّ وَرَوَاهُ غَيْرُ الشَّافِعِيِّ رحمه الله عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত...
রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “অভিভাবক (ওয়ালী), মোহর (সাদাক্ব) এবং দুইজন ন্যায়পরায়ণ সাক্ষী ব্যতীত কোনো বিবাহ (নিকাহ) হালাল (বৈধ) নয়।”
ইমাম শাফিঈ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, “যদিও এই হাদিসটি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম পর্যন্ত বিচ্ছিন্ন (মুনক্বাতি‘), তবুও অধিকাংশ জ্ঞানীরা এর উপর আমল করেন এবং বলেন: বিবাহ (নিকাহ) ও অবৈধ ব্যভিচারের (সিফাহ) মধ্যে পার্থক্য হলো সাক্ষীগণ।” মুযানী (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, শাফিঈ (রাহিমাহুল্লাহ) ছাড়া অন্যরাও আল-হাসান থেকে, তিনি ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম থেকে হাদিসটি বর্ণনা করেছেন।
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13720] ضعيف
13721 - قَالَ الشَّيْخُ: إِنَّمَا رَوَاهُ هَكَذَا عَبْدَ اللهِ بْنُ مُحَرَّرٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ رضي الله عنه قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم: " لَا يَجُوزُ نِكَاحٌ إِلَّا بِوَلِيٍّ وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ "، أَخْبَرَنَاهُ أَبُو الْحُسَيْنِ بْنُ بِشْرَانَ الْعَدْلُ بِبَغْدَادَ، أنبأ أَبُو بَكْرٍ أَحْمَدُ بْنُ سَلْمَانَ الْفَقِيهُ، ثنا أَبُو الْفَضْلِ أَحْمَدُ بْنُ مُلَاعِبٍ، ثنا الْفَضْلُ بْنُ دُكَيْنٍ أَبُو نُعَيْمٍ، ثنا عَبْدُ اللهِ بْنُ مُحَرَّرٍ فَذَكَرَهُ مَوْصُولًا عَبْدُ اللهِ بْنُ مُحَرَّرٍ مَتْرُوكٌ لَا يُحْتَجُّ بِهِ، وَقَدْ قِيلَ: عَنْهُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عِمْرَانَ، عَنِ ابْنِ مَسْعُودٍ رضي الله عنه عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَلَيْسَ بِشَيْءٍ، وَرُوِيَ مِنْ وَجْهٍ آخَرَ مَوْصُولًا مَرْفُوعًا
ইমরান ইবনে হুসাইন (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “অভিভাবক (ওয়ালী) এবং দুজন ন্যায়পরায়ণ সাক্ষী ছাড়া কোনো বিবাহ বৈধ হবে না।”
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13721] ضعيف جدًا
13722 - أَخْبَرَنَاهُ أَبُو سَعْدٍ الْمَالِينِيُّ، أنبأ أَبُو أَحْمَدَ بْنُ عَدِيٍّ الْحَافِظُ، ثنا مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ شُعَيْبٍ أَبُو الْحَسَنِ الْغَازِيُّ، ثنا يَعْقُوبُ بْنُ الْجَرَّاحِ، ثنا الْمُغِيرَةُ بْنُ مُوسَى الْمُزَنِيُّ الْبَصْرِيُّ، عَنْ هِشَامٍ، عَنِ ابْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رضي الله عنه، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ: " لَا نِكَاحَ إِلَّا بِوَلِيٍّ وَخَاطِبٍ وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ " ⦗ص: 204⦘ قَالَ أَبُو أَحْمَدَ: ثنا الْجُنَيْدِيُّ، ثنا الْبُخَارِيُّ قَالَ: مُغِيرَةُ بْنُ مُوسَى بَصْرِيٌّ مُنْكَرُ الْحَدِيثِ قَالَ أَبُو أَحْمَدَ: الْمُغِيرَةُ بْنُ مُوسَى فِي نَفْسِهِ ثِقَةٌ
আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: "ওয়ালী (অভিভাবক), প্রস্তাবক এবং দুইজন ন্যায়পরায়ণ সাক্ষী ছাড়া কোনো বিবাহ (নিকাহ) নেই।"
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13722] ضعيف جدًا
13723 - أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ عَبْدَانَ، أنبأ أَحْمَدُ بْنُ عُبَيْدٍ الصَّفَّارُ، ثنا أَحْمَدُ بْنُ عَلِيٍّ الْخَزَّازُ، ثنا يُوسُفُ بْنُ حَمَّادٍ، ثنا عَبْدُ الْأَعْلَى، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ جَابِرِ بْنِ زَيْدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رضي الله عنهما عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ: " الْبَغَايَا اللَّاتِي يُنْكِحْنَ أَنْفُسَهُنَّ بِغَيْرِ بَيِّنَةٍ "، رَفَعَهُ عَبْدُ الْأَعْلَى فِي التَّفْسِيرِ وَوَقَفَهُ فِي الطَّلَاقِ.
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “ব্যভিচারিণী (বা অবৈধ সম্পর্ক স্থাপনকারী) হলো সেই নারীরা, যারা সাক্ষী-প্রমাণ ব্যতীত নিজেদের বিবাহ সম্পন্ন করে।”
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13723] منكر
13724 - أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ عَبْدَانَ، أنبأ أَحْمَدُ بْنُ عُبَيْدٍ الصَّفَّارُ، حَدَّثَنِي مَخْلَدُ بْنُ أَبِي عَاصِمٍ النَّبِيلِ، ثنا يُوسُفُ بْنُ حَمَّادٍ، فَذَكَرَهُ بِنَحْوِهِ مَرْفُوعًا، وَالصَّوَابُ مَوْقُوفٌ وَاللهُ أَعْلَمُ، قَالَ الشَّافِعِيُّ رحمه الله: وَهُوَ ثَابِتٌ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، وَغَيْرِهِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত...
(দীর্ঘ সনদের মাধ্যমে) ইউসুফ ইবনু হাম্মাদ প্রায় একই ধরনের একটি বর্ণনা মারফূ’ (রাসূলের প্রতি আরোপিত) হিসেবে উল্লেখ করেছেন। তবে বিশুদ্ধ মত হলো তা মাওকূফ (সাহাবীর উক্তি), আর আল্লাহই সর্বজ্ঞ। ইমাম শাফিঈ (রহিমাহুল্লাহ) বলেছেন: এটি ইবনু আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) এবং নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম-এর অন্যান্য সাহাবীগণের (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) সূত্রে সুপ্রতিষ্ঠিত।
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13724] منكر
13725 - أَخْبَرَنَا أَبُو زَكَرِيَّا يَحْيَى بْنُ إِبْرَاهِيمَ، ثنا أَبُو الْعَبَّاسِ مُحَمَّدُ بْنُ يَعْقُوبَ، أنبأ الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ، أنبأ الشَّافِعِيُّ، أنبأ مُسْلِمُ بْنُ خَالِدٍ، وَسَعِيدُ بْنُ سَالِمٍ الْقَدَّاحُ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عُثْمَانَ بْنِ خُثَيْمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ: " لَا نِكَاحَ إِلَّا بِشَاهِدَيْ عَدْلٍ وَوَلِيٍّ مُرْشِدٍ "، قَالَ الشَّافِعِيُّ رحمه الله: وَأَحْسَبُ مُسْلِمًا سَمِعَهُ مِنِ ابْنِ خُثَيْمٍ
ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: “সৎ দুজন সাক্ষী এবং একজন উপযুক্ত অভিভাবক (ওয়ালী) ব্যতীত কোনো বিবাহ (নিকাহ) নেই।”
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13725] حسن
13726 - وَأَخْبَرَنَا أَبُو زَكَرِيَّا بْنُ أَبِي إِسْحَاقَ، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ الْحَسَنِ قَالَا: ثنا أَبُو الْعَبَّاسِ مُحَمَّدُ بْنُ يَعْقُوبَ، أنبأ الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ، أنبأ الشَّافِعِيُّ، أنبأ مَالِكٌ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ قَالَ: أُتِيَ عُمَرُ رضي الله عنه بِنِكَاحٍ لَمْ يَشْهَدْ عَلَيْهِ إِلَّا رَجُلٌ وَامْرَأَةٌ، فَقَالَ: " هَذَا نِكَاحُ السِّرِّ، وَلَا أُجِيزُهُ وَلَوْ كُنْتُ تَقَدَّمْتُ فِيهِ لَرَجَمْتُ "
আবুয যুবাইর (রাহিমাহুল্লাহ) থেকে বর্ণিত: উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর কাছে এমন একটি বিবাহের মোকদ্দমা আনা হলো, যেখানে মাত্র একজন পুরুষ এবং একজন নারী সাক্ষী ছিল। তখন তিনি বললেন: "এটা গোপনীয় বিবাহ (নিকাহুস সির্র)। আমি এটিকে অনুমোদন করি না। যদি আমি এর পূর্বে এ বিষয়ে কোনো নির্দেশ জারি করে রাখতাম, তবে আমি অবশ্যই রজম (পাথর নিক্ষেপ করে মৃত্যুদণ্ড) দিতাম।"
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13726] ضعيف
13727 - أَخْبَرَنَا أَبُو حَامِدٍ أَحْمَدُ بْنُ عَلِيٍّ الْحَافِظُ، أنبأ زَاهِرُ بْنُ أَحْمَدَ، أنبأ أَبُو بَكْرِ بْنُ زِيَادٍ النَّيْسَابُورِيُّ، ثنا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْحَاقَ، ثنا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَطَاءٍ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، وَسَعِيدِ بْنِ الْمُسَيِّبِ، أَنَّ عُمَرَ رضي الله عنه قَالَ: " لَا نِكَاحَ إِلَّا بِوَلِيٍّ وَشَاهِدَيْ عَدْلٍ " ⦗ص: 205⦘ هَذَا إِسْنَادٌ صَحِيحٌ وَابْنُ الْمُسَيِّبِ كَانَ يُقَالُ لَهُ رَاوِيَةُ عُمَرَ وَكَانَ ابْنُ عُمَرَ يُرْسِلُ إِلَيْهِ يَسْأَلُهُ عَنْ بَعْضِ شَأْنِ عُمَرَ وَأَمْرِهِ
উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: অভিভাবক (ওয়ালী) এবং দুজন ন্যায়পরায়ণ সাক্ষী ছাড়া কোনো বিবাহ (নিকাহ) নেই।
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13727] ضعيف
13728 - وَأَمَّا الَّذِي أَخْبَرَنَا أَبُو حَازِمٍ الْحَافِظُ، أنبأ أَبُو الْفَضْلِ بْنُ خُمَيْرَوَيْهِ، ثنا أَحْمَدُ بْنُ نَجْدَةَ، ثنا سَعِيدُ بْنُ مَنْصُورٍ، ثنا هُشَيْمٌ، أنبأ حَجَّاجٌ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رضي الله عنه أَنَّهُ " أَجَازَ شَهَادَةَ النِّسَاءِ مَعَ الرَّجُلِ فِي النِّكَاحِ "، فَهَذَا مُنْقَطِعٌ وَالْحَجَّاجُ بْنُ أَرْطَاةَ لَا يُحْتَجُّ بِهِ، وَرُوِّينَا فِي اشْتِرَاطِ الشُّهُودِ عَنْ عَطَاءِ بْنِ أَبِي رَبَاحٍ، وَالْحَسَنِ، وَالزُّهْرِيِّ
উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
তিনি বিবাহের ক্ষেত্রে একজন পুরুষের সাথে নারীদের সাক্ষ্যকে অনুমোদন করেছিলেন।
(এই বর্ণনাটির বিষয়ে মন্তব্য করা হয়েছে): এই বর্ণনাটি ‘মুনকাতি’ (বিচ্ছিন্ন বা অসম্পূর্ণ সনদযুক্ত), এবং হাজ্জাজ ইবনু আরতাতের বর্ণনা নির্ভরতার জন্য গ্রহণযোগ্য নয়। আর সাক্ষীর শর্তারোপ সম্পর্কে আমরা আতা ইবনু আবি রাবাহ, আল-হাসান এবং যুহরী (রাহিমাহুল্লাহ) থেকেও বর্ণনা করেছি।
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13728] ضعيف
13729 - أَخْبَرَنَا أَبُو الْحَسَنِ عَلِيُّ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ عَبْدَانَ، أنبأ أَحْمَدُ بْنُ عُبَيْدٍ الصَّفَّارُ، ثنا هِشَامُ بْنُ عَلِيٍّ، ثنا ابْنُ رَجَاءٍ، ثنا الْحَسَنُ يَعْنِي ابْنَ صَالِحِ بْنِ حَيٍّ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ قَالَ: سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللهِ رضي الله عنهما يَقُولُ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم: " أَيُّمَا مَمْلُوكٍ تَزَوَّجَ بِغَيْرِ إِذْنِ سَيِّدِهِ فَهُوَ عَاهِرٌ "
জাবির ইবনু আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:
“যে কোনো ক্রীতদাস তার মনিবের অনুমতি ছাড়া বিবাহ করে, সে ব্যভিচারী (বা অবৈধ কাজকারী)।”
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13729] ضعيف
13730 - وَأَخْبَرَنَا أَبُو الْحُسَيْنِ بْنُ بِشْرَانَ، أنبأ أَبُو الْحَسَنِ عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ الْمِصْرِيُّ، ثنا مَالِكُ بْنُ يَحْيَى، ثنا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، أنبأ هَمَّامُ بْنُ يَحْيَى، عَنِ ابْنِ عَبْدِ الْوَاحِدِ الْمَكِّيِّ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ عَقِيلٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللهِ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم: " أَيُّمَا عَبْدٍ تَزَوَّجَ بِغَيْرِ إِذْنِ مَوَالِيهِ فَهُوَ عَاهِرٌ "، ⦗ص: 206⦘ هُوَ الْقَاسِمُ بْنُ عَبْدِ الْوَاحِدِ
জাবির ইবনে আব্দুল্লাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ইরশাদ করেছেন: "যে কোনো দাস তার মনিবদের অনুমতি ব্যতীত বিবাহ করবে, তবে সে ব্যভিচারী হিসেবে গণ্য হবে।"
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13730] ضعيف
13731 - أَخْبَرَنَا أَبُو عَلِيٍّ الرُّوذْبَارِيُّ، أنبأ أَبُو بَكْرِ بْنُ دَاسَةَ، ثنا أَبُو دَاوُدَ، ثنا عُقْبَةُ بْنُ مُكْرَمٍ، ثنا أَبُو قُتَيْبَةَ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ رضي الله عنهما عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ: " إِذَا نَكَحَ الْعَبْدُ بِغَيْرِ إِذْنِ مَوْلَاهُ فَنِكَاحُهُ بَاطِلٌ "
ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন: “যখন কোনো দাস তার মনিবের অনুমতি ব্যতিরেকে বিবাহ করে, তখন তার সেই বিবাহ বাতিল।”
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13731] ضعيف
13732 - أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ اللهِ بْنِ بِشْرَانَ، أنبأ إِسْمَاعِيلُ بْنُ مُحَمَّدٍ الصَّفَّارُ، ثنا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ عَفَّانَ، ثنا عَبْدُ اللهِ بْنُ نُمَيْرٍ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّهُ كَانَ يَرَى " أَنَّ نِكَاحَ الْعَبْدِ بِغَيْرِ إِذْنِ سَيِّدِهِ زِنًا وَيُعَاقَبُ مَنْ زَوَّجَهُ "
ইবনু উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,
তিনি মনে করতেন যে, মনিবের অনুমতি ছাড়া গোলামের বিবাহ হলো ব্যভিচার (অবৈধ), এবং যে ব্যক্তি তাকে বিবাহ করাবে, তাকে শাস্তি প্রদান করা হবে।
تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[13732] حسن
