হাদীস বিএন


আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী





আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21413)


21413 - أَخْبَرَنَا أَبُو الْقَاسِمِ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عُبَيْدِ اللهِ الْحُرْفِيُّ، بِبَغْدَادَ، أنبأ حَمْزَةُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ الْعَبَّاسِ، ثنا الْحَارِثُ بْنُ مُحَمَّدٍ، ثنا أَبُو النَّضْرِ، ثنا اللَّيْثُ، ثنا عَبْدُ اللهِ بْنُ عُبَيْدِ اللهِ - يَعْنِي: ابْنَ أَبِي مُلَيْكَةَ، عَنِ الْمِسْوَرِ بْنِ مَخْرَمَةَ، قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ وَهُوَ عَلَى الْمِنْبَرِ: " إِنَّ بَنِي هِشَامِ بْنِ الْمُغِيرَةِ اسْتَأْذَنُونِي فِي أَنْ يُنْكِحُوا ابْنَتَهُمْ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ، فَلَا آذَنُ، ثُمَّ لَا آذَنُ، وَإِنَّمَا ابْنَتِي بَضْعَةٌ مِنِّي، يَرِيبُنِي مَا رَابَهَا، وَيُؤْذِينِي مَا آذَاهَا. أَخْرَجَاهُ فِي الصَّحِيحِ، عَنْ قُتَيْبَةَ، عَنِ اللَّيْثِ. فَأَخْبَرَ أَنَّ وَلَدَهُ بَعْضٌ مِنْهُ، وَالْعَبْدُ إِذَا مَلَكَ نَفْسَهُ بِأَدَاءِ مَالِ الْكِتَابَةِ أَوْ بِابْتِيَاعِ نَفْسِهِ عَتَقَ، فَكَذَلِكَ الْحُرُّ إِذَا مَلَكَ وَلَدَهُ فَقَدْ مَلَكَ بَعْضَهُ، وَإِذَا مَلَكَ وَالِدَهُ فَقَدْ مَلَكَ مَنْ هُوَ بَعْضٌ مِنْهُ، فَوَجَبَ أَنْ يَعْتِقَ.




মিসওয়ার ইবনে মাখরামা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: আমি রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লামকে মিম্বারে দাঁড়িয়ে বলতে শুনেছি:

“নিশ্চয়ই হিশাম ইবনুল মুগীরাহ-এর বংশধররা তাদের কন্যাকে আলী ইবনে আবী তালিবের সাথে বিবাহ দেওয়ার জন্য আমার কাছে অনুমতি চেয়েছে। আমি অনুমতি দেব না, আমি আবারও অনুমতি দেব না! আমার কন্যা তো আমারই দেহের অংশ। যা তাকে সন্দেহে ফেলে, তা আমাকেও সন্দেহে ফেলে; আর যা তাকে কষ্ট দেয়, তা আমাকেও কষ্ট দেয়।”

(এই হাদীসটি সহীহ গ্রন্থে কুতাইবা, লাইস থেকে বর্ণনা করেছেন।)

(এই হাদীস দ্বারা) জানানো হলো যে, সন্তান পিতামাতারই অংশ। আর কোনো ক্রীতদাস যখন কিতাবাতের (মুক্তির বিনিময়ে নির্ধারিত অর্থের) অর্থ পরিশোধের মাধ্যমে অথবা নিজেকে ক্রয় করার মাধ্যমে নিজের মালিক হয়, তখন সে মুক্ত হয়ে যায়। অনুরূপভাবে, একজন স্বাধীন ব্যক্তি যখন তার সন্তানের মালিক হয়, তখন সে তার অংশেরই মালিক হয়। আর যখন সে তার পিতামাতার মালিক হয়, তখন সে তারই এমন অংশের মালিক হয় যারা তার অংশ। সুতরাং (এইসব ক্ষেত্রে) তাদের মুক্ত হয়ে যাওয়া আবশ্যক।




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21413] صحيح









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21414)


21414 - أَخْبَرَنَا أَبُو طَاهِرٍ الْفَقِيهُ، أنبأ حَاجِبُ بْنُ أَحْمَدَ الطُّوسِيُّ، ثنا عَبْدُ الرَّحِيمِ بْنُ مُنِيبٍ، ثنا جَرِيرُ بْنُ عَبْدِ الْحَمِيدِ، أنبأ سُهَيْلُ بْنُ أَبِي صَالِحٍ ح وَأَخْبَرَنَا ⦗ص: 488⦘ أَبُو طَاهِرٍ الْفَقِيهُ، أنبأ أَبُو بَكْرٍ مُحَمَّدُ بْنُ الْحُسَيْنِ، ثنا أَحْمَدُ بْنُ يُوسُفَ السُّلَمِيُّ، أنبأ مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ: ذَكَرَ سُفْيَانُ، عَنْ سُهَيْلِ بْنِ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم: " لَا يَجْزِي وَلَدٌ وَالِدَهُ إِلَّا أَنْ يَجِدَهُ مَمْلُوكًا فَيَشْتَرِيَهُ فَيُعْتِقَهُ " رَوَاهُ مُسْلِمٌ فِي الصَّحِيحِ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَبِي شَيْبَةَ وَغَيْرِهِ، عَنْ جَرِيرٍ، وَأَخْرَجَهُ مِنْ أَوْجُهٍ، عَنْ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ. وَقَوْلُهُ: " فَيَشْتَرِيَهُ فَيُعْتِقَهُ "، يُحْتَمَلُ أَنْ يُرِيدَ بِهِ فَيُعْتِقَهُ بِالشِّرَاءِ، وَاللهُ أَعْلَمُ.




আবু হুরায়রা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত। রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ইরশাদ করেছেন: "কোনো সন্তান তার পিতা-মাতার (উপকারের) প্রতিদান পুরোপুরি দিতে পারে না, তবে যদি সে তাকে ক্রীতদাস হিসেবে পায়, অতঃপর তাকে ক্রয় করে স্বাধীন করে দেয়।"




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21414] صحيح









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21415)


21415 - أَخْبَرَنَا أَبُو حَازِمٍ الْحَافِظُ، أنبأ أَبُو إِسْحَاقَ إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى، ثنا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، ثنا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، أنبأ مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ الْبُرْسَانِيُّ، ثنا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ عَاصِمٍ الْأَحْوَلِ، وَقَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ: " مَنْ مَلَكَ ذَا مَحْرَمٍ مِنْ ذِي رَحِمٍ فَهُوَ حُرٌّ ".




সামুরাহ ইবনু জুনদুব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: "যে ব্যক্তি তার এমন কোনো নিকটাত্মীয়ের (রক্তের সম্পর্কের) মালিক হয়, যে তার মাহরামও বটে (যাকে বিবাহ করা হারাম), তবে সে (ক্রীতদাস) মুক্ত হয়ে যাবে।"




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21415] ضعيف









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21416)


21416 - أَخْبَرَنَا أَبُو عَلِيٍّ الْحُسَيْنُ بْنُ مُحَمَّدٍ الرُّوذْبَارِيُّ، أنبأ أَبُو بَكْرٍ مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ، ثنا أَبُو دَاوُدَ، ثنا مُسْلِمُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَمُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ قَالَا: ثنا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ سَمُرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم: قَالَ مُوسَى فِي مَوْضِعٍ آخَرَ: عَنْ سَمُرَةَ فِيمَا يَحْسِبُ حَمَّادٌ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم: " مَنْ مَلَكَ ذَا رَحِمٍ مَحْرَمٍ فَهُوَ حُرٌّ ". قَالَ أَبُو دَاوُدَ: لَمْ يُحَدِّثْ هَذَا الْحَدِيثَ إِلَّا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، وَقَدْ شَكَّ فِيهِ، قَالَ أَحْمَدُ: وَقَالَ أَبُو عِيسَى التِّرْمِذِيُّ فِيمَا بَلَغَنِي عَنْهُ: سَأَلْتُ الْبُخَارِيَّ عَنْ هَذَا الْحَدِيثِ فَلَمْ يَعْرِفْهُ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ سَمُرَةَ إِلَّا مِنْ حَدِيثِ حَمَّادِ بْنِ سَلَمَةَ. قَالَ الشَّيْخُ رحمه الله: وَحَمَّادٌ يَشُكُّ فِي ذِكْرِ سَمُرَةَ فِي إِسْنَادِهِ كَمَا قَدَّمْنَا ذِكْرَهُ، عَنْ ⦗ص: 489⦘ مُوسَى بْنِ إِسْمَاعِيلَ، وَغَيْرُ حَمَّادٍ يَرْوِيهِ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِ رضي الله عنه، وَعَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ مِنْ قَوْلِهِ.




সামুরা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম বলেছেন:

"যে ব্যক্তি কোনো মাহরাম (যার সাথে বিবাহ নিষিদ্ধ এমন) আত্মীয়ের মালিক হয়, তবে সে স্বাধীন (মুক্ত) হয়ে যায়।"




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21416] ضعيف









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21417)


21417 - أَخْبَرَنَا أَبُو عَلِيٍّ الرُّوذْبَارِيُّ، أنبأ مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ، ثنا أَبُو دَاوُدَ، ثنا مُحَمَّدُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْأَنْبَارِيُّ، ثنا عَبْدُ الْوَهَّابِ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، أَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، رضي الله عنه قَالَ: " مَنْ مَلَكَ ذَا رَحِمٍ مَحْرَمٍ فَهُوَ حُرٌّ ".




উমর ইবনুল খাত্তাব (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন: "যে ব্যক্তি কোনো মাহরাম (যার সাথে রক্তের সম্পর্কের কারণে বিবাহ হারাম) আত্মীয়ের মালিক হয়, তবে সে (আত্মীয়) স্বাধীন হয়ে যাবে।"




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21417] ضعيف









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21418)


21418 - أَخْبَرَنَا أَبُو عَلِيٍّ، أنبأ مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ، ثنا أَبُو دَاوُدَ، ثنا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، ثنا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ جَابِرِ بْنِ زَيْدٍ، وَالْحَسَنِ مِثْلَهُ. قَالَ أَبُو دَاوُدَ: وَسَعِيدٌ أَحْفَظُ مِنْ حَمَّادٍ. قَالَ أَحْمَدُ: وَرُوِيَ بِإِسْنَادٍ آخَرَ وَهِمَ فِيهِ رَاوِيهِ




জাবির ইবনু যায়িদ এবং আল-হাসান (রাহিমাহুল্লাহ) থেকে [তাঁরা পূর্বের বর্ণনার] অনুরূপ বর্ণনা করেছেন।
আবূ দাঊদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: সাঈদ (বর্ণনাকারী) হাম্মাদের চেয়ে অধিক নির্ভরযোগ্য হাফিয (স্মরণশক্তিসম্পন্ন)।
আহমাদ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন: এটি (হাদীসটি) অন্য একটি সনদসূত্রেও বর্ণিত হয়েছে, তবে এর বর্ণনাকারী তাতে ভুল করেছেন।




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21418] صحيح









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21419)


21419 - أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ أَحْمَدَ بْنِ عَبْدَانَ، أنبأ سُلَيْمَانُ بْنُ أَحْمَدَ اللَّخْمِيُّ، ثنا عَبْدَانُ بْنُ أَحْمَدَ، وَالْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْمَعْمَرِيُّ قَالَا: ثنا أَبُو عُمَيْرِ بْنُ النَّحَّاسِ، ثنا ضَمْرَةُ بْنُ رَبِيعَةَ، عَنِ الثَّوْرِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ: " مَنْ مَلَكَ ذَا رَحِمٍ مَحْرَمٍ فَهُوَ عَتِيقٌ ". قَالَ سُلَيْمَانُ: لَمْ يَرْوِ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ سُفْيَانَ إِلَّا ضَمْرَةُ. قَالَ الشَّيْخُ رحمه الله: " الْمَحْفُوظُ بِهَذَا الْإِسْنَادِ حَدِيثُ نَهْيٍ عَنْ بَيْعِ الْوَلَاءِ وَعَنْ هِبَتِهِ. وَقَدْ رَوَاهُ أَبُو عُمَيْرٍ، عَنْ ضَمُرَةَ، عَنِ الثَّوْرِيِّ مَعَ الْحَدِيثِ الْأَوَّلِ ". ⦗ص: 490⦘




ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন:

“যে ব্যক্তি এমন কোনো মাহরাম আত্মীয়ের (দাসের) মালিক হয়, (যার সাথে বিবাহ করা চিরস্থায়ীভাবে হারাম), তবে সে (মাহরাম আত্মীয়) মুক্ত হয়ে যায়।”




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21419] منكر









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21420)


21420 - أَخْبَرَنَا بِالْحَدِيثَيْنِ جَمِيعًا أَبُو نَصْرِ بْنُ قَتَادَةَ، أَنْبَأَ أَبُو عَمْرِو بْنُ مَطَرٍ، ثنا إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ يُونُسَ أَبُو إِسْحَاقَ، ثنا أَبُو عُمَيْرٍ عِيسَى بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ النَّحَّاسِ، فَذَكَرَهُمَا جَمِيعًا، فَاللهُ أَعْلَمُ.




২১৪২০ - আবূ নাসর ইবনু কাতাদাহ আমাদের উভয় হাদীস সম্পর্কেই অবহিত করেছেন। তিনি বলেন, আবূ আমর ইবনু মাত্বার আমাদের খবর দিয়েছেন। তিনি বলেন, ইব্‌রাহীম ইবনু মুহাম্মাদ ইবনু ইউনুস আবূ ইসহাক আমাদের কাছে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেন, আবূ উমায়র ঈসা ইবনু মুহাম্মাদ ইবনু নুহ্হাস আমাদের কাছে বর্ণনা করেছেন। অতঃপর তিনি (বর্ণনাকারী) উভয় হাদীস একত্রে উল্লেখ করেছেন। আর আল্লাহই সর্বজ্ঞ।




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21420] منكر









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21421)


21421 - أَخْبَرَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ الْحَارِثِ الْفَقِيهُ، أنبأ عَلِيُّ بْنُ عُمَرَ الْحَافِظُ، ثنا مُحَمَّدُ بْنُ نُوحٍ الْجُنْدِيسَابُورِيُّ، ثنا عَلِيُّ بْنُ حَرْبٍ الْجُنْدِيسَابُورِيُّ، ثنا أَشْعَثُ بْنُ عَطَّافٍ، ثنا الْعَرْزَمِيُّ، عَنْ أَبِي النَّضْرِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ: جَاءَ رَجُلٌ يُقَالُ لَهُ: صَالِحٌ بِأَخِيهِ، فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، إِنِّي أُرِيدُ أَنْ أُعْتِقَ أَخِي هَذَا، فَقَالَ: " إِنَّ اللهَ أَعْتَقَهُ حِينَ مَلَكْتَهُ ". قَالَ عَلِيٌّ الدَّارَقُطْنِيُّ رحمه الله: الْعَرْزَمِيُّ تَرَكَهُ ابْنُ الْمُبَارَكِ، وَيَحْيَى الْقَطَّانُ، وَابْنُ مَهْدِيٍّ. قَالَ: وَأَبُو النَّضْرِ هُوَ مُحَمَّدُ بْنُ السَّائِبِ الْكَلْبِيُّ مَتْرُوكٌ، وَأَيْضًا هُوَ الْقَائِلُ: كُلُّ مَا حَدَّثْتُ عَنْ أَبِي صَالِحٍ كَذِبٌ. قَالَ الشَّيْخُ: وَرُوِيَ عَنْ حَفْصِ بْنِ أَبِي دَاوُدَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ عَطَاءٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ بِنَحْوِهِ، وَهَذَا إِسْنَادٌ ضَعِيفٌ، وَحَفْصٌ هُوَ ابْنُ سُلَيْمَانَ الْقَارِيُّ، ضَعَّفَهُ شُعْبَةُ وَأَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ، وَيَحْيَى بْنُ مَعِينٍ وَغَيْرُهُمْ.




আবদুল্লাহ ইবনে আব্বাস (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: সালেহ নামক এক ব্যক্তি তার ভাইকে নিয়ে এলেন এবং বললেন, "ইয়া রাসূলুল্লাহ! আমি আমার এই ভাইকে দাসত্বমুক্ত (স্বাধীন) করতে চাই।" তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, "যখন তুমি তার মালিক হলে, তখনই আল্লাহ তাকে মুক্ত করে দিয়েছেন।"




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21421] ضعيف









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21422)


21422 - أَخْبَرَنَا أَبُو نَصْرِ بْنُ قَتَادَةَ، أنبأ أَبُو عَمْرٍو إِسْمَاعِيلُ بْنُ نُجَيْدٍ، أنبأ أَبُو مُسْلِمٍ الْكَجِّيُّ، ثنا أَبُو عَاصِمٍ، أنبأ أَبُو عَوَانَةَ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الْأَسْوَدِ، قَالَ: قَالَ عُمَرُ رضي الله عنه: " مَنْ مَلَكَ ذَا رَحِمٍ مَحْرَمٍ فَهُوَ حُرٌّ "




উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন: “যে ব্যক্তি এমন কোনো মাহরাম আত্মীয়কে (ক্রীতদাস হিসেবে) মালিকানাভুক্ত করবে, সে (স্বয়ংক্রিয়ভাবে) মুক্ত হয়ে যাবে।”




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21422] صحيح









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21423)


21423 - وَأَخْبَرَنَا أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيُّ، أنبأ أَبُو الْحَسَنِ مُحَمَّدُ بْنُ مَحْمُودٍ الْفَقِيهُ، ثنا أَبُو عَبْدِ اللهِ مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيٍّ الْحَافِظُ، ثنا أَبُو مُوسَى مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، ثنا الضَّحَّاكُ، عَنْ أَبِي عَوَانَةَ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الْأَسْوَدِ، عَنْ عُمَرَ، رضي الله عنه قَالَ: " مَنْ مَلَكَ ذَا رَحِمٍ مَحْرَمٍ فَهُوَ حُرٌّ "، أَوْ: " ذَا مَحْرَمٍ "، شَكَّ الضَّحَّاكُ.
قَالَ أَبُو مُوسَى: وَسَمِعْتُ أَبَا الْوَلِيدِ يَقُولُ: قَرَأْتُ فِي كِتَابِ أَبِي عَوَانَةَ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الْأَسْوَدِ، عَنْ عُمَرَ رضي الله عنه قَالَ: " لَا يَسْتَرِقُّ ذُو رَحِمٍ "




উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: "যে ব্যক্তি তার এমন কোনো আত্মীয়কে মালিকানায় আনে যার সাথে (বিবাহের কারণে) মাহরাম সম্পর্ক রয়েছে, তবে সে (দাস/দাসী) স্বাধীন হয়ে যায়।" অথবা (বর্ণনাকারী সন্দেহ করে বলেছেন): "এমন কোনো মাহরাম আত্মীয়কে (মালিকানায় আনলে স্বাধীন হয়ে যায়)।"

আবু মূসা (রাহিমাহুল্লাহ) বলেন, আমি আবুল ওয়ালিদ (রাহিমাহুল্লাহ)-কে বলতে শুনেছি যে, আমি আবু আওয়ানা (রাহিমাহুল্লাহ)-এর কিতাবে পড়েছি, উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) বলেছেন: "কোনো রক্তসম্পর্কীয় আত্মীয়কে দাস বানানো যায় না।"




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21423] صحيح









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21424)


21424 - أَخْبَرَنَا أَبُو عَبْدِ اللهِ الْحَافِظُ، أنبأ أَبُو بَكْرٍ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللهِ الْجَرَّاحِيُّ بِمَرْوَ، أنبأ مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيٍّ، ثنا خَلَفُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ جَدِّي، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ، وَغَيْلَانَ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ، عَنِ الْمُسْتَوْرِدِ، أَنَّ رَجُلًا أَتَى ابْنَ مَسْعُودٍ، فَقَالَ: إِنَّ عَمِّي زَوَّجَنِي جَارِيَةً لَهُ، وَإِنَّهُ يُرِيدُ أَنْ يَسْتَرِقَّ وَلَدِي، فَقَالَ عَبْدُ اللهِ: " لَيْسَ ذَاكَ لَهُ " وَرُوِيَ عَنْ رَوْحٍ، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ سَلَمَةَ، وَرَوَاهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، عَنْ سُفْيَانَ، فَهُوَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَسْعُودٍ رضي الله عنهما حَسَنٌ. وَقَدْ ذَهَبَ إِلَيْهِ بَعْضُ أَصْحَابِنَا.




আব্দুল্লাহ ইবনে মাসউদ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, এক ব্যক্তি তাঁর নিকট এসে বললেন: আমার চাচা তাঁর মালিকানাধীন এক দাসীর সাথে আমার বিবাহ দিয়েছেন, কিন্তু তিনি (এখন) আমার সন্তানকে দাস বানাতে (দাস হিসেবে গণ্য করতে) চান। তখন আব্দুল্লাহ (ইবনে মাসউদ) বললেন: ’এটা করার অধিকার তাঁর নেই।’




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21424] صحيح









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21425)


21425 - أَخْبَرَنَا أَبُو الْحَسَنِ الرَّفَّاءُ، أنبأ عُثْمَانُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ بِشْرٍ، ثنا إِسْمَاعِيلُ الْقَاضِي، ثنا ابْنُ أَبِي أُوَيْسٍ، ثنا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي الزِّنَادِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الْفُقَهَاءِ الَّذِينَ يُنْتَهَى إِلَى قَوْلِهِمْ مِنْ أَهْلِ الْمَدِينَةِ، كَانُوا يَقُولُونَ: " إِذَا مَلَكَ الْوَلَدُ الْوَالِدَ عَتَقَ الْوَالِدُ، وَإِنْ مَلَكَ الْوَالِدُ الْوَلَدَ عَتَقَ الْوَلَدُ ". وَأَمَّا مَا سِوَى ذَلِكَ مِنَ الْقَرَابَةِ فَيَخْتَلِفُونَ فِيهِ. قَالَ الْقَاضِي: وَقَالَ عِيسَى بْنُ مِينَاءٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي الزِّنَادِ، فَاخْتَلَفَ فِيهِ النَّاسُ قَالَ ابْنُ أَبِي أُوَيْسٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي الزِّنَادِ، عَنْ أَبِيهِ عَنْهُمْ، وَكَانُوا يَقُولُونَ: " إِذَا ابْتَاعَ الرَّجُلُ شِقْصًا مِنْ أَبِيهِ، أَوْ أُمِّهِ عَتَقَ ذَلِكَ الشِّقْصُ، وَقُوِّمَ عَلَيْهِ مَا بَقِيَ، فَيُعْتَقُ كُلُّهُ عَلَيْهِ، وَإِنْ كَانَ وَرِثَ مِنْهُ شِقْصًا وَلَمْ يَشْتَرِهِ عَتَقَ الشِّقْصُ، وَلَمْ يُقَوَّمْ عَلَيْهِ الْبَاقِي "
‌؟
قَالَ الشَّافِعِيُّ رحمه الله: لَزِمَهُ ذَلِكَ، وَكَانَ دَيْنًا عَلَيْهِ.




আল-মদিনার প্রখ্যাত ফুকাহায়ে কিরাম, যাদের মতামতের উপর নির্ভর করা হতো, তাঁরা বলতেন:

যখন সন্তান তার পিতাকে (ক্রীতদাস হিসেবে) মালিক হবে, তখন পিতা আযাদ হয়ে যাবে (মুক্ত হয়ে যাবে)। আর যদি পিতা তার সন্তানের (ক্রীতদাস) মালিক হয়, তবে সন্তান আযাদ হয়ে যাবে (মুক্ত হয়ে যাবে)। কিন্তু নিকটাত্মীয়দের মধ্যে এর ব্যতিক্রম ঘটলে, সে বিষয়ে তাঁদের মধ্যে মতভেদ রয়েছে।

(আল-কাজী/বিচারক) বললেন, ঈসা ইবনু মীনা, ইবনু আবী যিনাদ থেকে বর্ণনা করেন যে, এ বিষয়ে মানুষেরা মতভেদ করেছেন।

ইবনু আবী উওয়াইস, ইবনু আবী যিনাদ থেকে, তিনি তার পিতা থেকে এবং তিনি ওই ফুকাহাদের পক্ষ থেকে বর্ণনা করেন, তাঁরা বলতেন: যদি কোনো ব্যক্তি তার পিতা অথবা মাতার (ক্রীতদাস হিসেবে) আংশিক মালিকানা ক্রয় করে, তবে সেই অংশটি (স্বয়ংক্রিয়ভাবে) মুক্ত হয়ে যাবে। আর অবশিষ্ট অংশের মূল্য তার উপর ধার্য করা হবে, ফলে সম্পূর্ণ দাসটিকেই তার জন্য মুক্ত হিসেবে গণ্য করা হবে। কিন্তু যদি সে উত্তরাধিকার সূত্রে (ক্রয় না করে) আংশিক মালিকানা লাভ করে, তবে শুধু সেই অংশটিই মুক্ত হবে, আর অবশিষ্ট অংশের মূল্য তার উপর ধার্য করা হবে না।

ইমাম শাফিঈ (রাহিমাহুল্লাহ) বলেছেন: তা (অবশিষ্ট অংশের মূল্য পরিশোধ করা) তার উপর আবশ্যক হবে এবং এটি তার জন্য ঋণ হিসেবে গণ্য হবে।




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21425] ضعيف









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21426)


21426 - أَخْبَرَنَا أَبُو عَبْدِ اللهِ الْحَافِظُ، أنبأ أَبُو أَحْمَدَ بَكْرُ بْنُ مُحَمَّدٍ الصَّيْرَفِيُّ بِمَرْوَ، ثنا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عِيسَى، ثنا أَبُو مَعْمَرٍ، ثنا عَبْدُ الْوَارِثِ بْنُ سَعِيدٍ، ثنا سَعِيدُ بْنُ جُمْهَانَ، حَدَّثَنِي سَفِينَةُ، قَالَ: قَالَتْ لِي أُمُّ سَلَمَةَ: أُعْتِقُكَ وَأَشْتَرِطُ عَلَيْكَ أَنْ تَخْدُمَ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم مَا عِشْتَ، قَالَ: قُلْتُ: " لَوْ أَنَّكِ لَمْ تَشْتَرِطِي عَلَيَّ مَا فَارَقْتُ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم مَا عِشْتُ "، قَالَ: " فَأَعْتَقَتْنِي، وَاشْتَرَطَتْ عَلَيَّ أَنْ أَخْدُمَ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم مَا عِشْتُ " ⦗ص: 492⦘ رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ فِي كِتَابِ السُّنَنِ، عَنْ مُسَدَّدٍ، عَنْ عَبْدِ الْوَارِثِ.




সফীনা (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, উম্মু সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাকে বললেন: "আমি তোমাকে মুক্ত করে দিলাম, তবে আমি তোমার উপর এই শর্তারোপ করছি যে তুমি যতদিন জীবিত থাকবে ততদিন আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খেদমত করবে।" তিনি বলেন, আমি বললাম: "যদি আপনি আমার উপর এই শর্তারোপ নাও করতেন, তবুও আমি যতদিন জীবিত থাকতাম, ততদিন আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে ছেড়ে যেতাম না।" তিনি [সফীনা] বলেন: "অতএব তিনি আমাকে মুক্ত করে দিলেন, আর আমার উপর এই শর্তারোপ করলেন যে আমি যতদিন জীবিত থাকি ততদিন যেন আল্লাহর রাসূল (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খেদমত করি।"




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21426] حسن









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21427)


21427 - وَرَوَاهُ حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ سَعِيدٍ، كَمَا أَخْبَرَنَا أَبُو مَنْصُورٍ الظَّفَرُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ أَحْمَدَ الْعَلَوِيُّ، رحمه الله، أنبأ أَبُو جَعْفَرٍ مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ دُحَيْمٍ، ثنا أَحْمَدُ بْنُ حَازِمٍ، ثنا عُبَيْدُ اللهِ بْنُ مُوسَى، أنبأ حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ ح وَأَخْبَرَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ فُورَكٍ، أنبأ عَبْدُ اللهِ بْنُ جَعْفَرٍ، ثنا يُونُسُ بْنُ حَبِيبٍ، ثنا أَبُو دَاوُدَ، ثنا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُمْهَانَ، أَخْبَرَنِي سَفِينَةُ، مَوْلَى أُمِّ سَلَمَةَ قَالَ: أَعْتَقَتْنِي أُمُّ سَلَمَةَ رضي الله عنها وَاشْتَرَطَتْ عَلَيَّ أَنْ أَخْدُمَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم مَا عَاشَ. لَفْظُ حَدِيثِ أَبِي دَاوُدَ




সাফিনাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা), যিনি উম্মে সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা)-এর মাওলা (মুক্ত গোলাম) ছিলেন, তিনি বলেন: উম্মে সালামাহ (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাকে আযাদ (মুক্ত) করে দিলেন এবং আমার উপর এই শর্তারোপ করলেন যে, যতক্ষণ পর্যন্ত নবী করীম সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়া সাল্লাম জীবিত থাকবেন, আমি তাঁর খেদমত করব।




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21427] حسن









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21428)


21428 - أَخْبَرَنَا أَبُو زَكَرِيَّا بْنُ أَبِي إِسْحَاقَ الْمُزَكِّي، وَأَبُو بَكْرٍ أَحْمَدُ بْنُ الْحَسَنِ الْقَاضِي قَالَا: ثنا أَبُو الْعَبَّاسِ مُحَمَّدُ بْنُ يَعْقُوبَ، أنبأ مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللهِ بْنِ عَبْدِ الْحَكَمِ، أنبأ ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يَعْقُوبُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، وَحَفْصُ بْنُ مَيْسَرَةَ، عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ عَبْدَ اللهِ بْنَ عُمَرَ، أَعْتَقَ غُلَامًا لَهُ، ثُمَّ اشْتَرَطَ عَلَيْهِ أَنَّ لَهُ عَمَلَهُ سِنِينَ، فَرَعَى لَهُ بَعْضَ سِنِيِّهِ. وَفِي رِوَايَةِ الْقَاضِي: بَعْضَ سَنَةٍ، ثُمَّ قَدِمَ عَلَيْهِ، إِمَّا فِي حَجٍّ، وَإِمَّا فِي عُمْرَةٍ، فَقَالَ لَهُ عَبْدُ اللهِ: " قَدْ تَرَكْتُ الَّذِي اشْتَرَطْتُ عَلَيْكَ، وَأَنْتَ حُرٌّ، وَلَيْسَ عَلَيْكَ عَمَلٌ. كَذَا وَجَدْتُهُ: " ثُمَّ اشْتَرَطَ عَلَيْهِ "، وَإِنَّمَا هُوَ: " وَاشْتَرَطَ عَلَيْهِ ".




আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত,

তিনি তাঁর এক গোলামকে আযাদ করে দিলেন। এরপর তিনি তার উপর শর্তারোপ করলেন যে, সে কয়েক বছর তাঁর জন্য কাজ করবে। অতঃপর সেই দাসটি কয়েক বছর তাঁর (ইবনে উমরের) জন্য কাজ করে গেল। (ক্বাযীর এক বর্ণনায় রয়েছে: সে তার জন্য এক বছর কাজ করেছিল।) এরপর সে (মুক্ত দাসটি) হজ্জ অথবা উমরাহ পালনের উদ্দেশ্যে তাঁর কাছে ফিরে এলো। তখন আব্দুল্লাহ ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) তাকে বললেন: "আমি তোমার ওপর যে শর্তারোপ করেছিলাম, তা তুলে নিলাম। তুমি এখন সম্পূর্ণ স্বাধীন এবং তোমার উপর (আমার জন্য) কোনো কাজ করা আবশ্যক নয়।"




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21428] صحيح









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21429)


21429 - أَخْبَرَنَا أَبُو عَبْدِ اللهِ الْحَافِظُ، ثنا أَبُو الْعَبَّاسِ مُحَمَّدُ بْنُ يَعْقُوبَ، ثنا يَحْيَى بْنُ أَبِي طَالِبٍ، ثنا حَمَّادُ بْنُ مَسْعَدَةَ، ثنا ابْنُ عَوْنٍ، قَالَ: قَالَ نَافِعٌ: بَعَثَنِي ابْنُ عُمَرَ فِي حَاجَةٍ، قَالَ: فَجِئْتُ مِنْهَا، قَالَ: فَقَالَ لِي: " أَنْتَ حُرٌّ أَنْ تُقِيمَ عِنْدَنَا، وَنَحْنُ مَنْ تَعْرِفُ، قَالَ: قُلْتُ: أَيْنَ أَذْهَبُ؟ أَوْ إِلَى مَنْ أَذْهَبُ؟.


قَالَ الشَّافِعِيُّ رحمه الله: ثَبَتَ وَلَاؤُهُ عَلَيْهِ، فَلَمْ يَكُنْ لَهُ أَنْ يَرُدَّ وَلَاءَهُ، فَيَرُدَّهُ رَقِيقًا وَيَهَبَهُ وَلَا يَبِيعَهُ




নাফি’ (রহিমাহুল্লাহ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাকে একটি প্রয়োজনে (কোথাও) পাঠালেন। নাফি’ বলেন, এরপর আমি সেখান থেকে ফিরে এলাম। তখন ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) আমাকে বললেন: "তুমি স্বাধীন (মুক্ত)। তবে তুমি চাইলে আমাদের কাছেই থাকতে পারো, আর আমরা কেমন তা তো তুমি জানোই।" নাফি’ বলেন, আমি জিজ্ঞেস করলাম: "আমি কোথায় যাব? অথবা কার কাছেই বা যাব?"

ইমাম শাফেঈ (রহিমাহুল্লাহ) বলেন: তার (মুক্ত ব্যক্তির) ’ওয়ালা’ (মুক্তিজনিত আনুগত্যের অধিকার) তাঁর (মুক্তকারী মনিবের) ওপর প্রতিষ্ঠিত হয়ে গেছে। সুতরাং ইবনে উমরের জন্য এই ’ওয়ালা’ প্রত্যাখ্যান করা বৈধ ছিল না, যার ফলে তিনি (মুক্ত ব্যক্তি) পুনরায় ক্রীতদাসে পরিণত হতে পারতেন। অনুরূপভাবে তাঁকে (অন্য কাউকে) দান করা কিংবা বিক্রি করাও বৈধ ছিল না।




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21429] حسن









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21430)


21430 - أَخْبَرَنَا أَبُو نَصْرٍ مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ مُحَمَّدٍ الْفَقِيهُ الشِّيرَازِيُّ، وَأَبُو زَكَرِيَّا بْنُ أَبِي إِسْحَاقَ الْمُزَكِّي قَالَا: ثنا أَبُو عَبْدِ اللهِ مُحَمَّدُ بْنُ يَعْقُوبَ الشَّيْبَانِيُّ الْأَخْرَمُ، ثنا السَّرِيُّ بْنُ خُزَيْمَةَ، ثنا أَبُو نُعَيْمٍ، ثنا سُفْيَانُ هُوَ الثَّوْرِيُّ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ بَيْعِ الْوَلَاءِ وَهِبَتِهِ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ فِي الصَّحِيحِ عَنْ أَبِي نُعَيْمٍ، وَأَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ مِنْ وَجْهٍ آخَرَ عَنْ سُفْيَانَ الثَّوْرِيِّ




ইবনে উমর (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ’আল-ওয়ালা’ (মুক্তির অধিকার) বিক্রি করতে এবং তা কাউকে হেবা (দান) করতে নিষেধ করেছেন।




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21430] صحيح









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21431)


21431 - أَخْبَرَنَا أَبُو طَاهِرٍ الْفَقِيهُ، أنبأ أَبُو حَامِدٍ أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ بِلَالٍ، ثنا يَحْيَى بْنُ الرَّبِيعِ الْمَكِّيُّ، ثنا سُفْيَانُ هُوَ ابْنُ عُيَيْنَةَ ح وَأَخْبَرَنَا أَبُو بَكْرٍ أَحْمَدُ بْنُ الْحَسَنِ الْقَاضِي وَغَيْرُهُ، قَالُوا: ثنا أَبُو الْعَبَّاسِ الْأَصَمُّ، أنبأ الرَّبِيعُ بْنُ سُلَيْمَانَ، أنبأ الشَّافِعِيُّ، أنبأ مَالِكٌ، وَابْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ دِينَارٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنْ بَيْعِ الْوَلَاءِ وَعَنْ هِبَتِهِ. . لَفْظُ حَدِيثِهِمَا سَوَاءٌ. رَوَاهُ مُسْلِمٌ فِي الصَّحِيحِ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ أَبِي شَيْبَةَ وَغَيْرِهِ، عَنْ سُفْيَانَ بْنِ عُيَيْنَةَ




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, আল্লাহর রাসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ’আল-ওয়ালা’ (মুক্তিদানের অধিকার বা পৃষ্ঠপোষকতা) বিক্রি করতে এবং তা হেবা বা দান করতে নিষেধ করেছেন।




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21431] صحيح









আল-সুনান আল-কুবরা লিল-বায়হাক্বী (21432)


21432 - أَخْبَرَنَا أَبُو عَبْدِ اللهِ الْحَافِظُ، أنبأ أَبُو بَكْرِ بْنُ إِسْحَاقَ، أنبأ عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ، ثنا أَبُو الْوَلِيدِ، ثنا شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ دِينَارٍ، قَالَ: سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ قَالَ: نَهَى رَسُولُ اللهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ بَيْعِ الْوَلَاءِ وَعَنْ هِبَتِهِ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ فِي الصَّحِيحِ، عَنْ أَبِي الْوَلِيدِ، وَأَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ مِنْ وَجْهٍ آخَرَ، عَنْ شُعْبَةَ، ⦗ص: 494⦘ وَكَذَلِكَ رَوَاهُ عُبَيْدُ اللهِ بْنُ عَمْرٍو، وَإِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، وَسُلَيْمَانُ بْنُ بِلَالٍ، وَالضَّحَّاكُ بْنُ عُثْمَانَ وَغَيْرُهُمْ، عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ دِينَارٍ.




ইবনু উমার (রাদ্বিয়াল্লাহু আনহুমা) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন: রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ‘ওয়ালা’ (মুক্তিদানজনিত অভিভাবকত্বের অধিকার) বিক্রয় করতে এবং তা কাউকে উপহার দিতে (বা দান করতে) নিষেধ করেছেন।




تحقيق الشيخ إسلام منصور عبد الحميد:
[21432] صحيح