হাদীস বিএন


বুলূগুল মারাম





বুলূগুল মারাম (909)


وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا-; أَنَّهُ قَالَ: احْتَجَمَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - وَأَعْطَى الَّذِي حَجَمَهُ أَجْرَهُ، وَلَوْ كَانَ حَرَامًا لَمْ يُعْطِهِ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (2103)




৯০৯। ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) হতে বৰ্ণিত। তিনি বলেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম শিঙ্গা লাগালেন এবং যে তাঁকে শিঙ্গা লাগিয়েছে, তাকে তিনি মজুরী দিলেন। যদি তা হারাম হতো। তবে তিনি তা দিতেন না।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ১৮৩৫, ১৯৩৮, ১৯৩৯, ২১০৩, মুসলিম ১২০২, তিরমিযী ৭৭৫, ৭৭৬, ৭৭৭, নাসায়ী ২৮৪৫, ২৮৪৬, আবূ দাউদ ১৮৩৫, ১৮৩৬, ২৩৭২, ইবনু মাজাহ। ১৬৮২, ৩০৮:১, ১৮৫২, ১৯২২, দারেমী ১৮১৯, ১৮২১।









বুলূগুল মারাম (910)


وَعَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «كَسْبُ الْحَجَّامِ خَبِيثٌ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه مسلم (1568) (41) وهو بتمامه: ثمن الكلب خبيث، ومهر البَغِيّ خبيث، وكسْب الحَجَّام خبيث




৯১০। রাফি বিন খাদীজ (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, শিঙ্গা লাগানোর উপার্জন নোংরা বস্তু।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] মুসলিম ১৫৬৮, তিরমিযী ১২৭৫, নাসায়ী ৪২৯৪, আবূ দাউদ ৩৪২১, আহমাদ ১৫৩৮৫, ১৫৪০০, দারেমী ২৬২১৷ মুসলিমের বর্ণনায় সম্পূর্ণ হাদীসটি হচ্ছেঃ কুকুরের মূল্য, ব্যভিচারীর মাহরানা এবং শিঙ্গা লাগানোর উপার্জন নোংরা বস্তু।









বুলূগুল মারাম (911)


وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «قَالَ اللَّهُ - عز وجل: ثَلَاثَةٌ أَنَا خَصْمُهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ: رَجُلٌ أَعْطَى بِي ثُمَّ غَدَرَ, وَرَجُلٌ بَاعَ حُرًّا, فَأَكَلَ ثَمَنَهُ، وَرَجُلٌ اسْتَأْجَرَ أَجِيرًا, فَاسْتَوْفَى مِنْهُ, وَلَمْ يُعْطِهِ أَجْرَهُ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
حسن. رواه البخاري (2227)، وأما قول الحافظ: رواه مسلم فهو سهو منه -رحمه الله-. تنبيه: جاء في هامش «أ» ما يلي تعليقًا على قوله: «رواه مسلم». «كذا وقع في «الأصل»، وإنما هو في البخاري في البيوع، وفي ابن ماجه في الإجارة. قال سبط مؤلفه. من هامش الأصل




৯১১। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, আল্লাহ তাআলা ঘোষণা করেছেন যে, কিয়ামতের দিবসে আমি নিজে তিন ব্যক্তির বিরুদ্ধে বাদী হবো। এক ব্যক্তি, যে আমার নামে ওয়াদা করে তা ভঙ্গ করল। আরেক ব্যক্তি, যে কোন আযাদ মানুষকে বিক্রি করে তার মূল্য ভোগ করল। আর এক ব্যক্তি, যে কোন মজুর নিয়োগ করে পুরো কাজ আদায় করে আর তার পারিশ্রমিক দেয় না।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ২২২৭, ২২৭০, ইবনু মাজাহ ২৪৪২, আহমাদ ৮৪৭৭।









বুলূগুল মারাম (912)


وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «إِنَّ أَحَقَّ مَا أَخَذْتُمْ عَلَيْهِ حَقًّا كِتَابُ اللَّهِ». أَخْرَجَهُ الْبُخَارِيُّ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (5737) من طريق ابن أبي ملكية، عن ابن عباس النبي أن نفرًا من أصحاب النبي -صلى الله عليه وسلم- مرُّوا بماء فيهم لديغ - أو سليم - فعرض لهم رجل من أهل الماء. فقال: هل فيكم من راق؟ إن في الماء رجلًا لديغًا أو سليمًا. فانطلق رجل منهم، فقرأ بفاتحة الكتاب على شاء، فَبَرَأَ، فجاء بالشاء إلى أصحابه، فكرهوا ذلك، وقالوا: أخذت على كتاب الله أجرًا، حتى قدموا المدينة فقالوا: يا رسول الله! أخذ على كتاب الله أجرًا؟ فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «إن أحق» الحديث




৯১২। ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, তোমরা মজুরী গ্ৰহণ কর এমন সব বস্তুর মধ্যে কুরআনের বিনিময়ে পারিশ্রমিক গ্রহণ করা সর্বাপেক্ষা বেশী হকদার।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, শ্রমিককে তার ঘাম শুকানোর পূর্বেই মজুরী দিয়ে দাও।[1]

বুখারী ৫৭৩৭, বুখারীর বর্ণনায় রয়েছে,

عن ابن عباس النبي أن نفرًا من أصحاب النبي -صلى الله عليه وسلم- مرُّوا بماء فيهم لديغ - أو سليم - فعرض لهم رجل من أهل الماء. فقال: هل فيكم من راق؟ إن في الماء رجلًا لديغًا أو سليمًا. فانطلق رجل منهم، فقرأ بفاتحة الكتاب على شاء، فَبَرَأَ، فجاء بالشاء إلى أصحابه، فكرهوا ذلك، وقالوا: أخذت على كتاب الله أجرًا، حتى قدموا المدينة فقالوا: يا رسول الله! أخذ على كتاب الله أجرًا؟ فقال رسول الله -صلى الله عليه وسلم-: «إن أحق» الحديث

ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর সাহাবীগণের একটি দল একটি কুয়ার পার্শ্ববর্তী বাসিন্দাদের নিকট দিয়ে যাচ্ছিলেন। কুপের পাশে অবস্থানকারীদের মধ্যে ছিল সাপে কাটা এক ব্যক্তি কিংবা তিনি বলেছেন, দংশিত এক ব্যক্তি। তখন কূপের কাছে বসবাসকারীদের একজন এসে তাদের বলল: আপনাদের মধ্যে কি কোন ঝাড়-ফুঁককারী আছেন? কূপ এলাকায় একজন সাপ বা বিছু দংশিত লোক আছে। তখন সাহাবীদের মধ্যে একজন সেখানে গেলেন। এরপর কিছু বকরী দানের বিনিময়ে তিনি সূরা ফাতিহা পড়লেন। ফলে লোকটির রোগ সেরে গেল। এরপর তিনি ছাগলগুলো নিয়ে তাঁর সাথীদের নিকট আসলেন, কিন্তু তাঁরা কাজটি পছন্দ করলেন না। তারা বললেন, আপনি আল্লাহর কিতাবের উপর পারিশ্রমিক নিয়েছেন। অবশেষে তাঁরা মাদীনায় পৌছে বলল, হে আল্লাহর রসূল! তিনি আল্লাহর কিতাবের উপর পারিশ্রমিক গ্রহণ করেছেন। তখন রাসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম উপরোক্ত হাদীসটি উল্লেখ করলেন।









বুলূগুল মারাম (913)


وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أُعْطُوا الْأَجِيرَ أَجْرَهُ قَبْلَ أَنْ يَجِفَّ عَرَقُهُ». رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
حديث صحيح بشواهده. رواه ابن ماجه (2443) بسند ضعيف جدًا. قلت: وله شواهد من حديث أبي هريرة، وجابر بن عبد الله، وعطاء بن يَسَار. فأما حديث أبي هريرة: فرواه الطحاوي في «المشكل» (4/ 142)، والبيهقي (6/ 121) بسند حسن على أقل أحواله، وله طريق أخرى عند أبي يعلى (6682) وأما حديث جابر: فرواه الطبراني في «الصغير» (34) وسنده ضعيف. وأما مرسل عطاء: فرواه ابن زَنْجَوَيْه في «الأموال (2091) بسند حسن. تنبيه: جاء عقب هذا الحديث في «الأصل» قول الحافظ: «وفي الباب: عن أبي هريرة -رضي الله عنه- عند [أبي] يعلى والبيهقي. وجابر عند الطبراني، وكلها ضعاف». ثم ضرب عليه الناسخ. ولم يرد هذا الكلام في «أ» ولذلك حذفته




৯১৩. ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, শ্রমিককে তার ঘাম শুকানোর পূর্বৈই মজুরী দিয়ে দাও।[1]



আবূ ইয়ালা ও বাইহাকীতে আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে আর ত্বাবারানীতে জাবির (রাঃ) থেকে এ ব্যাপারে আরো হাদীস বর্ণিত হয়েছে, কিন্তু তার সবগুলোই যঈফ হাদীস।[2]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] ইবনু মাজাহ ২৪৪৩। ইমাম হাইসামী মাজমাউয যাওয়ায়েদ ৪/১০১ গ্রন্থে বলেন, এর সানাদে শারকি বিন কাত্তামী রয়েছে, সে দুর্বল। ইমাম সুয়ূত্বী আল জামেউস সগীর ১১৬৪ গ্রন্থে একে দুর্বল বলেছেন। ইমাম সনআনী সুবুলুস সালাম এর সানাদে দুজন দুর্বল বর্ণনাকারী পেয়েছে- শারকি বিন কাত্তামী ও মুহাম্মাদ বিন যিয়াদকে। কিন্তু শাইখ আলবানী তাখরীজ মিশকাতুল মাসাবীহ ২৯১৮ নং গ্রন্থে একে সহীহ লিগাইরিহী বলেছেন, ইরওয়াউল গালীল ১৪৯৮ গ্রন্থে সহীহ ও সহীহুল জামে ১০৫৫ গ্রন্থে একে হাসান বলেছেন।

[2] বাইহাকী (৬/১২১) হাসান সানাদে, আবূ ইয়ালা (৬৬৮২), ত্বাবারানী সগীর (৩৪)।









বুলূগুল মারাম (914)


وَعَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ -صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «مَنِ اسْتَأْجَرَ أَجِيرًا, فَلْيُسَمِّ لَهُ أُجْرَتَهُ». رَوَاهُ عَبْدُ الرَّزَّاقِ وَفِيهِ انْقِطَاعٌ, وَوَصَلَهُ الْبَيْهَقِيُّ مِنْ طَرِيقِ أَبِي حَنِيفَةَ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
ضعيف. رواه عبد الرازق في «المصنف» (8/ 235 / رقم 15023) قال: أخبرنا معمر والثوري، عن حماد، عن إبراهيم، عن أبي هريرة، وأبي سعيد الخدري - أو أحدهما - أن النبي -صلى الله عليه وسلم-، قال: فذكره. وهو منقطع كما قال الحافظ، فإبراهيم لم يسمع من أحد من الصحابة. ورواه أحمد (3/ 59 و 68 و 71) من طريق حماد، ولكن عن أبي سعيد وحده بلفظ: «نهى عن استئجار الأجير حتى يبين له أجره «وهو منقطع كسابقه. وأما البيهقي فرواه (6/ 120) من طريق ابن المبارك، عن أبي حنيفة، عن حماد، عن إبراهيم، عن الأسود، عن أبي هريرة، وأبو حنيفة ضعيف عند أئمة الجرح والتعديل، ولذلك قال البيهقي: «كذا رواه أبو حنيفة. وكذا في كتابي عن أبي هريرة». قلت: وخالف الإمام الجبل شعبة. فرواه النسائي (7/ 31) من طريق ابن المبارك، عن شعبة، عن حماد، عن إبراهيم، عن أبي سعيد، قال: إذا استأجرت أجيرًا، فأعلمه أجره وتابع شعبة على ذلك الثوري، فقال عبد الرازق في «المصنف» (15024) «قلت للثوري: أسمعت حمادًا يحدث عن إبراهيم، عن أبي سعيد؛ أن النبي -صلى الله عليه وسلم- قال: من استأجر أجيرًا، فليُسَمِّ له إجارته؟ قال: نعم. وحدث به مرة أخرى، فلم يبلغ به النبي -صلى الله عليه وسلم». وأبو حنيفة -رحمه الله- لا يوازن بواحد منهما -رحمهما الله-، فكيف بهما وقد اجتمعا. ثم رأيت ابن أبي حاتم نقل عن أبي زُرعة في «العلل» (1/ 376 / رقم 1118) قوله: «الصحيح موقوف على أبي سعيد «فالحمد لله على توفيقه. قلت: ولا يفهم من قوله: «الصحيح» «أن الإسناد صحيح كما ذهب إلى ذلك الشيخ شُعَيْب الأرناؤوط في تعليقه على «المراسيل» ص (168)، إذ كيف يفهم ذلك، بينما الإنقطاع لم ينتف من السند؟، وإنما المراد أن راوية من رواه موقوفًا - بغضّ النظر عن صحة السند أو ضعفه - أصح من رواية من رفعه، وفي بقية كلام أبي زُرعة ما يوضح ذلك، إذ علّل رأيه السابق بقوله: لأن الثوري أحفظ




৯১৪। আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেনঃ যে ব্যক্তি কোন শ্রমিককে কাজে লাগাবে সে যেন তার পারিশ্রমিক নির্ধারণ করে কাজে লাগায়। ‘আবদুর রাযযাক (রহ.) এর সানাদ মুনকাতে, আর বাইহাকী আবূ হানীফাহ (রহঃ)-এর মাওসূল বা অবিচ্ছিন্ন সূত্রে বর্ণনা করেছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] ইবনু হাজার আসকালানী তাঁর আত-তালখীসুল হাবীর (৩/১০৩৩) গ্রন্থেও এটিকে মুনকাতি হিসেবে উল্লেখ করেছেন। মুসান্নাফ আবদুর রাযযাক (৮/২৩৫) হাদীস নং ১৫০২৩। এর সমর্থনে মামার থেকে হাম্মাদ সূত্রে মুরসাল সূত্রেও একটি হাদীস বর্ণিত হয়েছে।









বুলূগুল মারাম (915)


عَنْ عُرْوَةَ, عَنْ عَائِشَةَ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا-; أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ عَمَّرَ أَرْضًا لَيْسَتْ لِأَحَدٍ, فَهُوَ أَحَقُّ بِهَا». قَالَ عُرْوَةُ: وَقَضَى بِهِ عُمَرُ فِي خِلَافَتِهِ. رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (2335) وليس عند البخاري لفظ: بها




৯১৫। উরওয়াহ হতে বর্ণিত, তিনি ‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি পরিত্যক্ত মালিকহীন জমি আবাদ করবে। ঐ জমির হকদার সে ব্যক্তিই হবে। উরওয়াহ বলেছেন, এরূপ ফয়সালাহ ‘উমার (রাঃ) তাঁর খিলাফত আমলে করেছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ২৩৩৫, আহমাদ ২৪৩৬২।









বুলূগুল মারাম (916)


وَعَنْ سَعِيدِ بْنِ زَيْدٍ - رضي الله عنه - عَنِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ أَحْيَا أَرْضًا مَيْتَةً فَهِيَ لَهُ». رَوَاهُ الثَّلَاثَةُ, وَحَسَّنَهُ التِّرْمِذِيُّ
وَقَالَ: رُوِيَ مُرْسَلًا. وَهُوَ كَمَا قَالَ, وَاخْتُلِفَ فِي صَحَابِيِّهِ, فَقِيلَ: جَابِرٌ, وَقِيلَ: عَائِشَةُ, وَقِيلَ: عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرٍو, وَالرَّاجِحُ الْأَوَّلُ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
حديث صحيح




৯১৬। সাঈদ ইবনু যায়দ থেকে বর্ণিত, তিনি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম হতে বর্ণনা করেন, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে কোন ব্যক্তি অনাবাদী মৃত জমিকে আবাদ করবে ঐ জমি তারই হবে। -তিরমিযী একে হাসান বলেছেন, আর তিনি বলেছেন, এটা মুরসালরূপে বৰ্ণিত হয়েছে।



বর্ণনাকারী ‘সাহাবী নির্ণয়ের ব্যাপারে মতভেদ আছে- কেউ বলেছেন জাবির (রাঃ), কেউ বলেছেন ‘আয়িশা (রাঃ), কেউ বলেছেন ‘আবদুল্লাহ বিন ‘উমার (রাঃ), তবে প্রথম মত জাবির (রাঃ) অধিক অগ্রগণ্য।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] তিরমিযী ১৩৭৮, ১৩৭৯, আবূ দাউদ ৩০৭৩।









বুলূগুল মারাম (917)


وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ; أَنَّ الصَّعْبَ بْنَ جَثَّامَةَ - رضي الله عنه - أَخْبَرَهُ أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «لَا حِمَى إِلَّا لِلَّهِ وَلِرَسُولِهِ». رَوَاهُ الْبُخَارِيُّ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (2370)




৯১৭। ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, সাব বিন জাসসামাহ আল-লাইসী (রাঃ) তাঁকে জানিয়েছিলেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, চারণভূমি সংরক্ষিত করা আল্লাহ ও তাঁর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ছাড়া আর কারো অধিকারে নেই।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ২৩৭০, মুসলিম ১৭৪৫, তিরমিযী ১৫৭০, আবূ দাউদ ২৬৭২, ৩০৮৩, ৩০৮৪, ইবনু মাজাহ ২৮৩৯, আহমাদ ২৭৯০২, ২৭৮০৯, ১৬২৪৩।









বুলূগুল মারাম (918)


وَعَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ -رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا- قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «لَا ضَرَرَ وَلَا ضِرَارَ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَابْنُ مَاجَهْ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
حديث صحيح بطرقه وشواهده؛ إذ قد روي عن عدد كبير من الصحابة، وبطرق عدة، كما صححه جماعة من الحُفّاظ. وتفصيل ذلك بالأصل




৯১৮। ইবনু আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, উদ্দেশ্য প্রণোদিতভাবে বা উদ্দেশ্যহীনভাবে কাকেও কোন রকম কষ্ট দেয়া বৈধ নয়।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] ইবনু মাজাহ ২৩৪১, আহমাদ ২৮৬২।









বুলূগুল মারাম (919)


وَلَهُ مِنْ حَدِيثِ أَبِي سَعِيدٍ مِثْلُهُ, وَهُوَ فِي الْمُوَطَّإِ مُرْسَلٌ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
الموطأ (2/ 745 / رقم 31)، وانظر ما قبله




৯১৯। ইবনু মাজাহয় আবূ সাঈদ (রাঃ) কর্তৃকও অনুরূপ হাদীস বর্ণিত রয়েছে। আর হাদীসটি মুওয়াত্তায় রয়েছে মুরসালরূপে।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বাইহাকী, সুনান আল কুবরা (৬/৬৯), ইমাম নববী আল আরবাউনা (৩২) গ্রন্থে একে হাসান বলেছেন। ইমাম যাহাবী মীযানুল ইতিদাল (২/৬৬৫) গ্রন্থে বলেন, এর সানাদে আবদুল মালিক বিন মু’আয আন নুসাইবী রয়েছে। আমি তাকে চিনি না। অনুরূপ হাদীস উম্মুল মু'মিনীন আয়েশা (রা.) থেকে, জাবির ইবনু আবদুল্লাহ থেকেও বর্ণিত হয়েছে।









বুলূগুল মারাম (920)


وَعَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ - رضي الله عنه - قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «مَنْ أَحَاطَ حَائِطًا عَلَى أَرْضٍ فَهِيَ لَهُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ الْجَارُودِ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
حديث صحيح. بما له من شواهد كما تقد م رقم (897 و 898)، وإن رواه أبو داود (3077)، وابن الجارود (1015) بسند ضعيف




৯২০। সামুরাহ বিন জুনদুব (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি কোন অনাবাদী জমিকে প্রাচীরবেষ্টিত করে নিবে ঐ স্থান তারই হবে। -ইবনু জারূদ হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবু দাউদ ৩০৭৭, আহমাদ ২৭৭০৬, ১৯৭২৬









বুলূগুল মারাম (921)


وَعَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُغَفَّلٍ - رضي الله عنه - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «مَنْ حَفَرَ بِئْرًا فَلَهُ أَرْبَعُونَ ذِرَاعًا عَطَنًا لِمَاشِيَتِهِ». رَوَاهُ ابْنُ مَاجَهْ بِإِسْنَادٍ ضَعِيفٍ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
حسن. رواه ابن ماجه (2486) وسنده ضعيف كما قال الحافظ، لكن يشهد له حديث أبي هريرة عند أحمد (2/ 494)، وله شاهد آخر مرسل في «مراسيل» أبي داود




৯২১। ‘আবদুল্লাহ ইবনু মুগাফফাল (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, যে ব্যক্তি কোন কূপ খনন করবে। তার জন্য ঐ কূপের সংলগ্ন চল্লিশ হাত স্থান তার গৃহ পালিত পশুর অবস্থান ক্ষেত্ররূপে তার অধিকারভুক্ত হবে। mdash;ইবনু মাজাহ দুর্বল সানাদে।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] ইবনু মাজাহ ২৪৮৬









বুলূগুল মারাম (922)


وَعَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ وَائِلٍ, عَنْ أَبِيهِ; - أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أَقْطَعَهُ أَرْضًا بِحَضْرَمَوْتَ. رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ, وَالتِّرْمِذِيُّ, وَصَحَّحَهُ ابْنُ حِبَّانَ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه أبو داود (3058 و 3059)، والترمذي (1381) وقال الترمذي: «هذا حديث حسن». قلت: لعله قال ذلك لوجود سماك بن حرب في إسناده، ولكنه تُوبِعَ عليه كما عند أبي داود وغيره




৯২২. ‘আলাকামাহ বিন ওয়ায়িল (রাঃ) হতে বর্ণিত, তিনি পিতা (ওয়ায়েল) থেকে বর্ণনা করেন যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে হাযরামাওত নামক স্থানে কিছু জমি জায়গীরস্বরূপ দিয়েছিলেন। -ইবনু হিব্বান একে সহীহ বলেছেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ ৩০৫৮, ৩০৫৯, তিরমিযী ১৩৮১, আহমাদ ২৬৬৯, দারেমী ২৬০৯।









বুলূগুল মারাম (923)


وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا -، أَنَّ النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - أَقْطَعَ الزُّبَيْرَ حُضْرَ فَرَسِهِ, فَأَجْرَى الْفَرَسَ حَتَّى قَامَ, ثُمَّ رَمَى سَوْطَهُ. فَقَالَ: «أَعْطُوهُ حَيْثُ بَلَغَ السَّوْطُ». رَوَاهُ أَبُو دَاوُدَ وَفِيهِ ضَعْفٌ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
ضعيف. رواه أبو داود (3072)




৯২৩। ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম যুবায়ের (রাঃ)-এর জন্য তার ঘোড়ার দৌড়ানোর শেষ সীমা পর্যন্ত জমি দেয়ার জন্য বরাদ্দ করলেন। অতঃপর তিনি ঘোড়া দৌড়ালেন ও তা একস্থানে গিয়ে দাঁড়াল, তারপর তিনি তার চাবুকখানি নিক্ষেপ করলেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এবার বললেন, তাকে তার চাবুক নিক্ষিপ্ত হবার স্থান পর্যন্ত দিয়ে দাও।-এর সানাদে দুর্বলতা আছে।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ ৩০৭২। ইমাম সনআনী সুবুলুস সালাম ৩/১৩৫ গ্রন্থে বলেন, এর সানাদে আবদুল্লাহ বিন আমরা বিন খাফস নামক বিতর্কিত বর্ণনাকারী রয়েছে। ইবনু উসাইমীন তাঁর বুলুগুল মারাম ৪/২৭০ গ্রন্থেও এর সানাদে দুর্বলতার কথা বলেছেন। শাইখ আলবানী যঈফ আবূ দাউদ ৩০৭২, আত তালীকাত আর রযীয়্যাহ ২/৪৫৯ গ্রন্থে একে দুর্বল বলেছেন। ইমাম শাওকানী আদ দুরারী আল মায়ীয়্যাহ ২৮০ ও নাইলুল আওত্বার ৬/৫৬ গ্রন্থদ্বয়ে উক্ত আবদুল্লাহ বিন আমার বিন খাফিস নামক বর্ণনাকারীকে বিতর্কিত বলেছেন।









বুলূগুল মারাম (924)


وَعَنْ رَجُلٍ مِنْ الصَّحَابَةِ - رضي الله عنه - قَالَ: غَزَوْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَسَمِعْتُهُ يَقُولُ: «النَّاسُ (1) شُرَكَاءُ فِي ثَلَاثٍ: فِي الْكَلَأِ، وَالْمَاءِ، وَالنَّارِ». رَوَاهُ أَحْمَدُ, وَأَبُو دَاوُدَ, وَرِجَالُهُ ثِقَاتٌ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
كذا في «الأصلين» وهو وهم من الحافظ -رحمه الله- فهذا اللفظ ليس عند أحمد، ولا عند أبي داود، وإنما عندهما بلفظ: «المسلمون»، ثم رأيته -رحمه الله- ساقه في «التلخيص» (3/ 65) بلفظ: «المسلمون» بعد أن عزاه لأحمد وأبي داود
(2) - صحيح. رواه أحمد (5/ 364)، وأبو داود (3477)




৯২৪। একজন সাহাবী থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, আমি নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর সঙ্গী হয়ে যুদ্ধ করেছিলাম। তখন তাঁকে বলতে শুনেছি, সমস্ত মানুষ তিনটি বস্তুতে সমভাবে অংশীদার-ঘাস, পানি ও আগুন।-এর রাবীগণ নির্ভরযোগ্য।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] আবূ দাউদ ৩৪৭৭. আহমাদ ২২৫৭০।









বুলূগুল মারাম (925)


عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - قَالَ: «إِذَا مَاتَ الْإِنْسَانُ انْقَطَعَ عَنْهُ عَمَلُهُ إِلَّا مِنْ ثَلَاثٍ: صَدَقَةٍ جَارِيَةٍ، أَوْ عِلْمٍ يُنْتَفَعُ بِهِ، أَوْ وَلَدٍ صَالَحٍ يَدْعُو لَهُ». رَوَاهُ مُسْلِمٌ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه مسلم (1631) «تنبيه»: وقع في النسخ المطبوعة من البلوغ: «إذا مات ابن آدم» ولم أجده بهذا اللفظ في أيّ كتاب من كتب السنة، وهو في «الأصلين» على الصواب




৯২৫। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত যে, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বলেছেন, মৃত্যুর পর মানুষের তিনটি ‘আমল ব্যতীত সকল ‘আমল বন্ধ হয়ে যায়। সাদাকাতুল জারিয়াহ, উপকারী ‘ইলম বা বিদ্যা, সৎ সন্তান যে (পিতা-মাতার জন্য) দুআ করে।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ২১০৭, ২১০৯, ২১১১, মুসলিম ১৫৩১, তিরমিযী ১২৪৬, নাসায়ী ৪৪৬৫, ৪৪৬৬, ৪৪৬৮, আবূ দাউদ ৩৪৫৪, ইবনু মাজাহ ২১৮১, ২৮৩৬, আহমাদ ৩৬৯, ৪৪৭০ মালেক ১৩৭৪, দারেমী ২৪৫১।









বুলূগুল মারাম (926)


وَعَنِ ابْنِ عُمَرَ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - قَالَ: أَصَابَ عُمَرُ أَرْضًا بِخَيْبَرَ, فَأَتَى النَّبِيَّ - صلى الله عليه وسلم - يَسْتَأْمِرُهُ فِيهَا, فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللَّهِ! إِنِّي أَصَبْتُ أَرْضًا بِخَيْبَرَ لَمْ أُصِبْ مَالًا قَطُّ هُوَ أَنْفَسُ عِنْدِي مِنْهُ قَالَ: «إِنْ شِئْتَ حَبَسْتَ أَصْلَهَا, وَتَصَدَّقْتَ بِهَا». قَالَ: فَتَصَدَّقَ بِهَا عُمَرُ, [غَيْرَ] أَنَّهُ لَا يُبَاعُ أَصْلُهَا, وَلَا يُورَثُ, وَلَا يُوهَبُ, فَتَصَدَّقَ بِهَا فِي الْفُقَرَاءِ, وَفِي الْقُرْبَى, وَفِي الرِّقَابِ, وَفِي سَبِيلِ اللَّهِ, وَابْنِ السَّبِيلِ, وَالضَّيْفِ, لَا جُنَاحَ عَلَى مَنْ وَلِيَهَا أَنْ يَأْكُلَ مِنْهَا بِالْمَعْرُوفِ, وَيُطْعِمَ صَدِيقًا - غَيْرَ مُتَمَوِّلٍ مَالًا. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ, وَاللَّفْظُ لِمُسْلِمٍ
وَفِي رِوَايَةٍ لِلْبُخَارِيِّ: تَصَدَّقْ بِأَصْلِهِ, لَا يُبَاعُ وَلَا يُوهَبُ, وَلَكِنْ يُنْفَقُ ثَمَرُهُ

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. رواه البخاري (2737)، ومسلم (1632) ولا أجد كبير فائدة لقول الحافظ: «واللفظ لمسلم». والله أعلم
(5) - البخاري برقم (2764)




৯২৬। ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেছেন, ‘উমার ইবনু খাত্তাব (রাঃ) খায়বারে কিছু জমি লাভ করেন। তিনি এ জমির ব্যাপারে পরামর্শের জন্য আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট এলেন এবং বললেন, ‘হে আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম! আমি খায়বারে এমন উৎকৃষ্ট কিছু জমি লাভ করেছি যা ইতোপূর্বে আর কখনো পাইনি। (আপনি আমাকে এ ব্যাপারে কী আদেশ দেন?) আল্লাহর রসূল সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, ‘তুমি ইচ্ছা করলে জমির মূলস্বত্ত ওয়াকফে রাখতে এবং উৎপন্ন বস্তু সদাকাহ করতে পার। ইবনু ‘উমার তিনি বলেন, ‘উমার (রাঃ) এ শর্তে তা সদাকাহ (ওয়াকফ) করেন যে, তা বিক্রি করা যাবে না, তা দান করা যাবে না এবং কেউ এর উত্তরাধিকারী হবে না। তিনি সদাকাহ করে দেন এর উৎপন্ন বস্তু অভাবগ্ৰস্ত, আত্মীয়-স্বজন, দাসমুক্তি, আল্লাহর রাস্তায়, মুসাফির ও মেহমানদের জন্য। (রাবী আরও বললেন) তার দায়িত্বশীল তা ন্যায়সঙ্গতভাবে খেলে দোষ নেই। বন্ধুকে খাওয়াতে পারবে[1] যদি সে নিজস্ব স্বার্থে মাল বৃদ্ধিকারী না হয়। -শব্দ বিন্যাস মুসলিমের।



বুখারীর অন্য বর্ণনায় আছে, তার মূল বস্তুকে ওয়াকফ করে রাখ, বিক্রয় করা, হেবা করা চলবে না। বরং তার ফল খরচ করে দিতে হবে।[2]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারীর বর্ণনায় আছে, কিংবা বন্ধু-বান্ধবকে খাওয়ালে কোন দোষ নেই। তবে তা সঞ্চয় করা যাবে না।

[2] বুখারী ২৭৩৭, ২৭৬৪, ২৭৭২, ২৭৭৩, মুসলিম ১৬৩৩, তিরমিযী ১২৭৫, নাসায়ী ৩৬০৩, ৩৬০৪, আবূ দাউদ ২৮৭৮, ইবনু মাজাহ ২৩৮৬, ২৩৯৭, আহমাদ ৪৫৯৪, ৫১৫৭।









বুলূগুল মারাম (927)


وَعَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ - رضي الله عنه - قَالَ: بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - عُمَرَ عَلَى الصَّدَقَةِ ... الْحَدِيثَ, وَفِيهِ
وَأَمَّا خَالِدٌ فَقَدِ احْتَبَسَ أَدْرَاعَهُ وَأَعْتَادَهُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ




৯২৭। আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্ণিত, তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম ‘উমার (রাঃ)-কে যাকাত ওসুল করার জন্য পাঠিয়েছিলেন। (এটা দীর্ঘ হাদীসের অংশবিশেষ) (তাতে আছে) কিন্তু খালেদ বিন ওয়ালিদ স্বীয় বর্মগুলো ও অস্ত্ৰসমূহকে আল্লাহর পথে ব্যবহারের জন্য (জিহাদের জন্য) ওয়াকফ করে রেখেছিলেন।[1]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ১৪৬৮, মুসলিম ৯৮৩, তিরমিযী ৩৭৬১, ২৪৬৪।









বুলূগুল মারাম (928)


عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ - رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا - أَنَّ أَبَاهُ أَتَى بِهِ رَسُولَ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم - فَقَالَ: إِنِّي نَحَلْتُ ابْنِي هَذَا غُلَامًا كَانَ لِي، فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: «أَكُلُّ وَلَدِكَ نَحَلْتَهُ مِثْلَ هَذَا؟». فَقَالَ: لَا. فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ - صلى الله عليه وسلم: فَارْجِعْهُ

وَفِي لَفْظٍ: فَانْطَلَقَ أَبِي إِلَى النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم - لِيُشْهِدَهُ عَلَى صَدَقَتِي. فَقَالَ: «أَفَعَلْتَ هَذَا بِوَلَدِكَ كُلِّهِمْ؟». قَالَ: لَا. قَالَ: «اتَّقُوا اللَّهَ, وَاعْدِلُوا بَيْنَ أَوْلَادِكُمْ». فَرَجَعَ أَبِي, فَرَدَّ تِلْكَ الصَّدَقَةَ. مُتَّفَقٌ عَلَيْهِ

وَفِي رِوَايَةٍ لِمُسْلِمٍ قَالَ: «فَأَشْهِدْ عَلَى هَذَا غَيْرِي» ثُمَّ قَالَ: «أَيَسُرُّكَ أَنْ يَكُونُوا لَكَ فِي الْبِرِّ سَوَاءً؟» قَالَ: بَلَى. قَالَ: فَلَا إِذًا

تحقيق وتخريج وتعليق: سمير بن أمين الزهيري
صحيح. وهذه الرواية للبخاري (2586)، ومسلم (1623) (9)

هذه الرواية للبخاري (2587)، ومسلم (1623) (13) والسياق لمسلم

مسلم برقم (1623) (17)




৯২৮। নুমান ইবনু বাশীর (রাঃ) হতে বর্ণিত যে, তার পিতা তাকে নিয়ে রসূলুল্লাহ সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট এলেন এবং বললেন, আমি আমার এই পুত্রকে একটি গোলাম দান করেছি। তখন তিনি জিজ্ঞেস করলেন, তোমার সব পুত্রকেই কি তুমি এরূপ দান করেছ। তিনি বললেন, না; তিনি বললেন, তবে তুমি তা ফিরিয়ে নাও।[1]



অন্য শব্দে এরূপ আছে- আমার পিতা নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম এর দরবারে হাজির হলেন যাতে করে তাঁকে এ ব্যাপারে সাক্ষী করে নিতে পারেন। নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তাঁকে বললেন, তোমার প্রত্যেক ছেলের জন্য কি এরূপ দান করেছ? সাহাবী বললেন, না, নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, আল্লাহকে ভয় কর, তোমার সন্তানদের মধ্যে সমভাবে বণ্টন কর। ফলে আমার পিতা [বাশীর রাঃ] বাড়ি ফিরে এলেন ও ঐ দান ফেরত নিলেন।[2]



মুসলিমের অন্য একটি বর্ণনায় আছে- নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম অসন্তুষ্ট হয়ে বললেন, তবে তুমি এর জন্য আমাকে ব্যতীত অন্যকে সাক্ষী করে রাখ। তারপর বললেন, তুমি কি পছন্দ কর যে, তোমার প্রতি তারা (পুত্ৰগণ) সমভাবে সদ্ব্যবহার করুক। সাহাবী বললেন, হাঁ, তখন নবী সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, তাহলে তুমি এরূপ করো না।[3]




তাহক্বীক ও তাখরীজঃ শায়খ সামীর বিন আমীন আয যুহায়রী
[1] বুখারী ২৫৮৬, মুসলিম ২৫০০।

[2] বুখারী ২৫৮৭, তিরমিযী ১৩৬৭, নাসায়ী ৩৬৭২-৩৬৮৫, আবূ দাউদ ৩৫৪২, ইবনু মাজাহ ২৩৭৫, ২৩৭৬, আহমাদ ১৭৮৯০, ১৭৯০২, মালিক ১৪৭৩।

[3] মুসলিম ১৬২৩।